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पत्तीना पक्कम में सचिवालय कॉम्प्लेक्स के अधिग्रहण को लेकर मत्स्यकिरण समुदाय ने सरकार से आदेश वापस करने की याचिका दायर की।

तमिलनाडु के पत्तीना पक्कम में प्रस्तावित सचिवालय कॉम्प्लेक्स को लेकर मायलई एरिया ऑल फ़िशिंग विलेज पंचायत सभा ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को लिखित याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने सरकारी आदेश को वापस लेने और उस भूमि को दीर्घकालिक मत्स्यकिरण आवास के रूप में आवंटित करने की मांग की है। याचिका में बताया गया है

कि यह परियोजना न केवल मत्स्यकिरण समुदाय के पारंपरिक निवास स्थान को खतरे में डाल रही है, बल्कि क्षेत्र की पर्यावरणीय स्थिरता को भी प्रभावित कर रही है। इस मुद्दे ने स्थानीय नागरिक संगठनों, पर्यावरण विशेषज्ञों और राजनैतिक दलों के बीच तीव्र बहस को जन्म दिया है।

पत्तीना पक्कम, जो कोल्लम जिले के तटवर्ती क्षेत्र में स्थित

है, दशकों से मत्स्यकिरणों की सांस्कृतिक और आर्थिक आधारशिला रहा है। इस क्षेत्र में लगभग पाँच हज़ार परिवार मुख्यतः जालबंदी, समुद्री कृषि और छोटे‑छोटे नाविक कार्यों पर निर्भर हैं। 1970 के दशक में स्थापित इस गाँव की जमीन अधिकांशतः समुद्री जल के निकट स्थित है, जहाँ बाढ़ और लवणीयता के कारण भूमि का उपयोग सीमित है।

पिछले कुछ दशकों में सरकारी योजनाओं के तहत कुछ हिस्से को बुनियादी ढाँके के लिए अधिग्रहित किया गया, लेकिन अधिकांश भूमि को सामुदायिक रूप से उपयोग किया गया है।

सुरक्षा मंत्रालय की ओर से जारी सरकारी आदेश (GO) के अनुसार, इस भूमि पर एक नया सचिवालय कॉम्प्लेक्स निर्माण हेतु 15 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया है।

योजना के तहत 10‑स्तरीय प्रशासनिक भवन, शासकीय कार्यालय और सार्वजनिक सुविधाओं को स्थापित करने की सोच थी, जिससे क्षेत्र के प्रशासनिक कार्यों को एक ही स्थान पर संगठित किया जा सके। प्रस्तावित कॉम्प्लेक्स की लागत को 1,200 करोड़ रुपये अनुमानित किया गया था, और इसे 2025 के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया था। इस

परियोजना को राज्य सरकार की आर्थिक विकास योजना में प्रमुख स्थान दिया गया था।

पिछले दो महीनों में, पंचायत सभा ने कई बार स्थानीय प्रशासन को इस आदेश की पुनरावृति और पारदर्शिता की मांग की। याचिका में यह उल्लेख है कि योजना की तैयारी के दौरान मत्स्यकिरण समुदाय को पर्याप्त सूचना नहीं दी गई, न ही उन्हें

पुनर्वास या मुआवजा पैकेज के बारे में स्पष्ट प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। पंचायत ने यह भी कहा कि प्रस्तावित सचिवालय के निर्माण से समुद्री तट रेखा में कटौती होगी, जिससे जालबंदी के लिए उपलब्ध जल क्षेत्र घटेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। इन बिंदुओं को लेकर उन्होंने तुरंत कार्यवाही की मांग की है।

पंचायत के

प्रतिनिधि ने बताया कि उन्होंने कई सार्वजनिक सुनवाईयों का आयोजन किया, जहाँ स्थानीय लोग अपने विरोध को व्यक्त करने के लिए उपस्थित हुए। इन सुनवाईयों में अधिकांश मत्स्यकिरणों ने कहा कि उनका मुख्य जीवनधारा जालबंदी और समुद्री कृषि है, और किसी भी बड़े निर्माण कार्य से उनकी आजीविका बाधित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा

कि यदि इस परियोजना को आगे बढ़ाया गया तो उन्हें अपने घरों को त्यागना पड़ेगा, जिससे सामाजिक अस्थिरता और आर्थिक संकट उत्पन्न होगा। इन कारणों से उन्होंने सरकार से तत्काल आदेश वापस लेने और वैकल्पिक स्थल की खोज का अनुरोध किया।

मुख्य विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को उठाया है। राज्य के प्रमुख विपक्षी पार्टी के

नेता ने इस योजना को भ्रष्टाचार और जनसंख्या को अनदेखा करने वाली कहा और कहा कि सरकार को स्थानीय लोगों की सहमति के बिना ऐसी बड़े पैमाने की परियोजना नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा, कई सामाजिक संगठनों ने इस योजना के पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समुद्री जल की खारीयता में वृद्धि,

जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और तटीय क्षरण को देखते हुए, इस प्रकार की बुनियादी ढाँचे की योजना अस्थिर है। इन संगठनों ने सरकारी आदेश को रद्द करने की मांग के साथ-साथ एक पर्यावरणीय मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करने की भी माँग की।

राज्य सरकार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सचिवालय कॉम्प्लेक्स राज्य की प्रशासनिक कार्यक्षमता

को बढ़ाने के लिए आवश्यक है और यह आर्थिक विकास में योगदान देगा। सरकार ने बताया कि योजना में स्थानीय रोजगार के अवसर भी शामिल हैं, जिससे कई लोगों को नौकरी मिलने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण के लिए वैध कानूनी प्रक्रियाएँ अपनाई गई हैं और पुनर्वास के लिए उचित मुआवजा

पैकेज तैयार किया जा रहा है। लेकिन इस बात को स्वीकार किया गया कि अभी तक सभी हितधारकों को पूरी जानकारी नहीं दी गई थी।

केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने भी इस मुद्दे को लेकर टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने कहा कि तटीय क्षेत्रों में बड़े निर्माण कार्यों के लिए पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन (EIA) अनिवार्य है। उन्होंने

संकेत दिया कि यदि वर्तमान योजना में ऐसी अध्ययन नहीं की गई है, तो इसे रोकना आवश्यक हो सकता है। इस संदर्भ में राज्य के पर्यावरणीय विभाग ने बताया कि वह अभी तक इस परियोजना के लिए कोई विस्तृत रिपोर्ट नहीं प्राप्त कर पाया

Updated: November 5, 2026


Summary: A petition by the Mayilai Area All Fishing Village Panchayat seeks to overturn the government order to acquire 15 acres in Pattina Pakkam for a ₹1,200 crore secretariat complex, arguing it threatens the traditional livelihoods of the coastal fishing community and the region’s ecological balance. The move has sparked sharp criticism from locals, opposition parties and environmental groups, while the state defends the project as essential for administrative efficiency and economic growth.

The push for a new secretariat in Pattina Pakkam feels like a political gamble that risks alienating a community already squeezed by climate change and limited resources. If the state ignores the villagers’ plight, it could spark broader resistance to development projects that ignore local livelihoods and environmental safeguards

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