बिहार क्रिकेट एसोसिएशन में सही तौर से काम- काज किये जाने को लेकर तदर्थ कमेटी बनाने हेतु एक जनहित याचिका पर पटना हाई कोर्ट में एक सप्ताह सुनवाई की जाएगी। याचिकाकर्ता अजय नारायण शर्मा की जनहित याचिका दायर पर चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
इस जनहित याचिका में चयनकर्ताओं/ सपोर्ट स्टाफ व बी सी सी आई द्वारा संचालित घरेलू टूर्नामेंट में विभिन्न उम्र के राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाडियों को सही तौर से चयन करने को लेकर आदेश देने की माँग की गई है। इसमें में यह आरोप लगाया गया है कि प्रबंधन कमेटी में अवैध रूप से कुर्सी पर काबिज लोगों द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा है।
यह भी आरोप लगाया गया है कि कुर्सी पर कथित रूप से अवैध तौर पर बैठे लोग प्रतिभावान क्रिकेट खिलाड़ियों के दावों को हतोत्साहित कर रहे हैं। खिलाड़ियों के मनमाने औऱ अनुचित तौर से चयन कर क्रिकेट को बेचने पर उतारू हैं।
इसलिए राज्य में खिलाड़ियों की स्थिति और भी खराब होते जा रही है। साथ ही इस से खिलाड़ी घरेलू टूर्नामेंट में भी कामयाब नहीं हो रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा बोर्ड ऑफ कंट्रोल फोर क्रिकेट इन इंडिया एंड अदर्स बनाम क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार व अन्य के मामले में सिविल अपील संख्या – 4235 में 9 अगस्त, 2018 को दिये गए फैसले दिया गया था।
इसके अनुसार जस्टिस आर एम लोढ़ा कमेटी द्वारा की गई अनुशंसा के आलोक में खिलाड़ियों का सही तौर से चयन करने हेतु क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी के गठन करने को लेकर आदेश देने का अनुरोध किया गया है।
इस मामलें पर अब अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद की जाएगी।
पटना हाईकोर्ट में बिहार के सहरसा में स्थापित किये जाने वाले एम्स अस्पताल स्थापित किये जाने के मामलें पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई 20 अप्रैल, 2023 को की जाएगी। चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने कोशी विकास संघर्ष मोर्चा की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार को जवाब देने के लिए 17अप्रैल,2023 तक मोहलत दी थी।याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया था कि विभिन्न राज्यों में एम्स के स्तर के अस्पताल स्थापित करने की योजना तैयार की गई।
बिहार के सहरसा में एम्स के तर्ज पर अस्पताल बनाए जाने का प्रस्ताव था।कोर्ट को बताया गया था कि इस अस्पताल के निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि सहरसा में उपलब्ध है।2017 में सहरसा के जिलाधिकारी ने इस अस्पताल के लिए आवश्यक 217.74 एकड़ भूमि की उपलब्धता की जानकारी विभाग को दी थी।
कोर्ट को ये बताया था कि इस क्षेत्र में एम्स स्तर का अस्पताल नहीं है।गंभीर बीमारियों के ईलाज के लिए इस क्षेत्र के लोगों को या तो पटना जाना पड़ता है या सिलिगुडी जाना पड़ता है।इसमें न सिर्फ लोगों को आने जाने में कठिनाई होती है,बल्कि आर्थिक बोझ भी पड़ता है।
कोर्ट को एम्स अस्पताल के निर्माण के मानकों पर सहरसा ज्यादा खरा था,लेकिन राज्य सरकार ने 2020 में दरभंगा में एम्स अस्पताल स्थापित किये जाने की अनुशंसा कर दी थी।यह इस क्षेत्र लोगों के साथ अन्याय किया गया।
कोर्ट को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि सहरसा,पूर्णियां,कटिहार, किशनगंज और अररिया जिले इस क्षेत्र में आते है।इस क्षेत्र की जनसंख्या के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एम्स अस्पताल स्थापित की जानी चाहिए।
कोर्ट को बताया गया कि इस क्षेत्र के बहुत सारे लोग कैंसर समेत कई अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।आमलोग को बेहतर ईलाज के लिए इस क्षेत्र में एम्स स्तर के अस्पताल की सख्त आवश्यकता है।
इस मामलें पर अगली सुनवाई 20अप्रैल,2023 के बाद की जाएगी।
पटना हाइकोर्ट में राज्य में एयरपोर्ट के स्थापित करने,विकास,विस्तार और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के तीन एयरपोर्ट और पूर्णियां एयरपोर्ट के सम्बन्ध में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।
पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से ये बताने को कहा था कि राज्य में नए एयरपोर्ट बनाए जाने के मामलें क्या कार्रवाई की गई है।दोनों सरकारों को बताने को कहा गया था कि वे बताए कि इनके सम्बन्ध में क्या योजनाएं बना रहे है।
कोर्ट ने उन्हें ये भी बताने को कहा था कि क्या वे नए एयरपोर्ट के निर्माण के लिए उन्हें चिन्हित करने की कार्रवाई की है।कोर्ट ने ये जानना चाहा कि इन नए एयरपोर्ट के निर्माण के लिए उनकी क्या योजना है।
पूर्व की सुनवाई में कार्यरत एयरपोर्ट पटना,गया,बिहटा और दरभंगा के एयरपोर्ट के विकास,विस्तार और सुरक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं के बारे में बताने को कहा था।
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कोर्ट को बताया गया कि राज्य के अधिकतर हवाई अड्डों पर सुविधाओं की काफी कमी है।इन्हें बेहतर बनाने के क्या कार्रवाई की जा रही है।
इससे पूर्व कोर्ट ने राज्य में एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर विचार करने का निर्देश दिया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा था कि कई अन्य राज्यों में कई ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है, लेकिन बिहार में एक भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नहीं है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राज्य की जनता को विकसित और सुरक्षित हवाई यात्रा की सुविधा दिया जाना मौलिक अधिकारों के अंतर्गत आता है।केंद्र और राज्य सरकार इन्हें विकसित और सुरक्षित हवाई यात्रा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
पटना हाइकोर्ट ने राज्य में पुलिस स्टेशनो की दयनीय अवस्था और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ को बताया गया कि पुलिस विभाग स्टेशन भवनों के निर्माण व सुधार के लिए उपलब्ध फंड के सम्बन्ध में पंद्रह दिनों में डीजीपी, बिहार के समक्ष विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत कर देगा।
पिछली सुनवाई में Patna High Court ने राज्य सरकार को मॉडल पुलिस थाने के निर्माण पर विचार करने के लिए राज्य के विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमिटी गठित करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार की ओर से बिहार व अन्य राज्यों के मॉडल पुलिस थाने के सम्बन्ध में जानकारी दी गई।
कोर्ट ने जानना चाहा कि पुलिस स्टेशनों के निर्माण व सुधार के लिए उपलब्ध फंड के सम्बन्ध में कितने दिनों में जानकारी दी जा सकती है। पुलिस विभाग ने Patna High Court को बताया कि पंद्रह दिनों में इस सम्बन्ध में पूरा ब्यौरा डीजीपी, बिहार के समक्ष प्रस्तुत कर दिया जाएगा।
Patna High Court द्वारा सहायता करने के लिए नियुक्त एमिकस क्यूरी सोनी श्रीवास्तव ने बताया कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने फंड की उपलब्धता के सम्बन्ध में ब्यौरा देने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक ये ब्यौरा कोर्ट में प्रस्तुत नहीं हुआ।
Patna High Court ने बिहार राज्य पुलिस भवन निर्माण निगम में काफी पद के रिक्त होने को काफी गम्भीरता से लिया।उन्होंने राज्य सरकार को इन रिक्त पदों को शीघ्र भरने को कहा,ताकि पुलिस थाना भवनों का निर्माण कार्य तेजी से हो सके।
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पिछली सुनवाई में पुलिस थाना भवनों के निर्माण के लिए उपलब्ध फंड के उपयोग और वितरण पर भी कोर्ट में चर्चा हुई।कोर्ट ने अगली सुनवाई में इस बारे में जानकारी देने का निर्देश राज्य सरकार को दिया था।
पूर्व की सुनवाई में Patna High Court ने राज्य सरकार को कॉर्डिनेटर के रूप में कार्य करने के वरीय पुलिस अधिकारी का नाम का सुझाव देने को कहा था। राज्य सरकार ने एडीजी कमल किशोर सिंह का नाम कॉर्डिनेटर के रूप में दिया था।
एमिकस क्यूरी सोनी श्रीवास्तव ने Patna High Court को बताया था कि राज्य में 1263 थाना है,जिनमें 471 पुलिस स्टेशन के अपने भवन नहीं है।इन्हें किराये के भवन में काम करना पड़ता है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य में पुलिस स्टेशन भवनों का निर्माण और पुनर्निर्माण का कार्य समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए।
जब तक दूसरे भवन में चल रहे पुलिस स्टेशन के लिए सरकारी भवन नहीं बन जाते,तब तक पुलिस अधिकारी कमल किशोर सिंह कॉर्डिनेटर के रूप में कॉर्डिनेट करेंगे।
इससे पहले भी पुलिस स्टेशन की दयनीय स्थिति और बुनियादी सुविधाओं का मामला Patna High Court में उठाया गया था।राज्य सरकार ने इन्हें सुधार लाने का वादा किया था,लेकिन ठोस परिणाम नहीं दिया था।
Patna High Court में सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी अधिवक्ता सोनी श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि जो थाने सरकारी भवन में चल रहे हैं, उनकी भी हालत अच्छी नहीं है।उनमें भी बुनियादी सुविधाओं की काफी कमी है।
उन्होंने बताया कि पुलिस स्टेशन में बिजली,पेय जल,शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं है। लगभग आठ सौ थाने ऐसे है, सरकारी भवनों में चल रहे है,लेकिन उनकी भी स्थिति अच्छी नहीं है।
उन्होंने Patna High Court को बताया कि जो थाना सरकारी भवन में है,उनमें भी निर्माण और मरम्मती की आवश्यकता है।उन्होंने बताया कि कई पुलिस स्टेशन के भवन की स्थिति खराब है।
पुलिसकर्मियों को काफी कठिन परिस्थितियों में और कई सुविधाओं के अभाव में कार्य करना पड़ता है।इस मामलें पर अगली सुनवाई एक माह बाद होगी।
पटना हाइकोर्ट में सासाराम के ऐतिहासिक महत्व के धरोहर शेरशाह के मकबरे के आसपास बड़े तालाब में स्वच्छ और ताज़ा पानी आने के लिए बनाया गए नाले बंद होने के मामलें पर सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने अधिवक्ता कन्हैया लाल भास्कर की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के अधिवक्ता को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों से विचार विमर्श करने का निर्देश दिया था।
इससे पूर्व कोर्ट ने रोहतास के डी एम, डीसीएलआर,सासाराम नगर निकाय के अधिकारियो समेत केंद्र सरकार के अधिकारी और एएसआई की बैठक कर विस्तृत कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने प्राची पल्लवी को इस जनहित की सुनवाई में कोर्ट की मदद करने के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था।कोर्ट ने कहा कि ये ऐतिहासिक धरोहर है,जिसकी सुरक्षा और देखभाल करना आवश्यक हैं।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कन्हैया लाल भास्कर ने कोर्ट को बताया था कि सासाराम स्थित शेरशाह का मकबरा राष्ट्रीय धरोहर हैं।इसके तालाब में साफ और ताज़ा के लिए वहां तक नाले का निर्माण किया गया था।
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उन्होंने कोर्ट को बताया था कि 2018 से 2020 तक सिर्फ पचास फी सदी नाले का काम हुआ।इसे बाद में खराब माना गया।इसमें लगभग आठ करोड़ रुपए खर्च हुए थे।
उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी थी कि इसमें काफी अनियमितताएं बरती गई, जिसकी जांच स्वतन्त्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए।उन्होंने बताया था कि ये नाला कूड़ा से भरा पड़ा है,जिस कारण शेरशाह के मकबरे के तालाब में साफ पानी नहीं पहुँच पाता है।
उन्होंने कोर्ट को बताया था कि वह तालाब गंदा और कचडे से भरा हुआ है।वहां जो पर्यटक आते है,उन्हें ऐसी हालत देख कर निराशा होती है।
पिछले एक मार्च,2023 से लापता एनएमसीएच के डॉक्टर संजय कुमार की बरामदगी को लेकर पटना हाई कोर्ट में एक आपराधिक रिट याचिका दायर की गई हैं। गायब डॉक्टर की पत्नी की ओर से अधिवक्ता हर्ष सिंह ने दायर की है।
दायर याचिका में डॉक्टर की सकुशल बरामदगी की गुहार कोर्ट से लगाई गई हैं।याचिका में ये कहा गया है कि 1 मार्च,2023 से लापता डॉक्टर का मोबाईल फोन 2 मार्च,2023 को इस्तेमाल किया गया है।लेकिन पुलिस इसको नजरअंदाज कर रही हैं।
उनका कहना है कि पुलिस सही तरीके से खोजने का काम नहीं कर रही हैं। लापता होने के बाद सुराग पाने के लिए खोजी कुत्ता को नहीं लगाया गया।यहाँ तक कि गांधी सेतु सीसीटीवी फुटेज की फोरेंसिक जांच अब तक नहीं कराई गई हैं।
पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया हैं कि राज्य के सभी स्कूलों में छात्राओं की संख्या के समुचित अनुपात में शौचालय एवं सैनिटरी नैपकिन को नष्ट करने वाली मशीनों की व्यवस्था हेतु एक जरूरी दिशानिर्देश तैयार करें।
चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने इस मामलें पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इस जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को यह भी निर्देश दिया इस सम्बन्ध में एक कमिटी गठित करने का निर्देश दिया।
पटना जिले में राजकीय एवं राजकीयकृत बालिका विद्यालयों ( प्राथमिक मध्य एवं उच्च विद्यालय) में शौचालयों की दयनीय अवस्था पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान ले कर सुनवाई कर रही है।
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पूर्व की सुनवाई में पटना हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का दायरा पटना जिला से बढ़ाकर पूरे राज्य के लिए कर दिया था।साथ ही कोर्ट ने सरकार से सभी स्कूलों के अंदर छात्राओं के लिए समुचित और स्वच्छ शौचालय सहित सैनिटरी नैपकिन को नष्ट करने वाली मशीनों के बारे में जानकारी मांगी थी ।
राज्य सरकार की तरफ से दायर हुए जवाबी हलफनामा पर असंतोष जाहिर करते हुए कहा कि पटना हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले में एक निश्चित दिशा निर्देश बनाए।और
पटना हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी, जो बैंक के पैसे के संरक्षक हैं, उनसे निवेशकों / जमाकर्ताओं के पैसे से इस तरह की अनियमितता की उम्मीद नहीं की जा सकती है। ये अनियमितताएं कर्तव्य में चूक नहीं , बल्कि जानबूझकर किए गए कार्य हैं, जिनसे बैंक को गंभीर नुकसान हुआ है और अपीलकर्ता को व्यक्तिगत लाभ हुआ है।
जस्टिस आशुतोष कुमार एवं जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ ने अशोक कुमार सिन्हा की अपील याचिका को खारिज करते हुए उक्त टिप्पणी की । अपीलकर्ता भारतीय स्टेट बैंक की एक शाखा में प्रोबेशनरी अधिकारी के रूप में नियुक्ति की गई थी।
सीबीआई द्वारा उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 420, 409, 467, 468 और 471 और पीसी अधिनियम, 1988 की धारा 13 (2) ,13 (1) (सी) (डी) के तहत आपराधिक मामला भी दर्ज किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने निवास पर कई ऋण दस्तावेज रखे थे और कर्ज लेने वालों की व्यक्तिगत ऋणों को मंजूरी देने हेतु उनके वेतन पर्ची में हेरफेर किया था।
उनके खिलाफ अन्य आरोप यह थे कि उन्होंने कई व्यक्तिगत ऋण खाते कम सीमा के साथ खोले गए थे। केवल कुछ महीनों के बाद, उच्च सीमा के लिए ऋण मंजूर किए गए थे ।
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जांच रिपोर्ट के आधार पर, अपीलकर्ता को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया और उसकी पूरी ग्रेच्युटी राशि बैंक को हुई वास्तविक हानि को ध्यान में रखते हुए साढ़े तीन लाख रुपये जब्त कर लिए गए।
अपीलकर्ता के वकील अरविंद कुमार तिवारी ने एकलपीठ के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि बैंक के नियमों के नियम 68(6) के अनुसार, एक संयुक्त जांच की जानी चाहिए थी,क्योंकि दो अन्य अधिकारियों पर विभागीय कार्यवाही में समान आरोप लगे थे।लेकिन अलग-अलग पूछताछ की गई और उन्हें बिना किसी औचित्य के कम सजा दी गई।
एसबीआई की ओर से वरीय अधिवक्ता चितरंजन सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि अपीलकर्ता एक उच्च पद पर था और उसके कब्जे से बरामद ऋण दस्तावेजों के साथ वह वित्तीय कदाचार में फंसा हुआ था।उन्होंने कहा कि अपीलकर्ता को अनुशासनात्मक कार्यवाही में अपना बचाव करने का उचित अवसर दिया गया था।
मामले का अवलोकन कर खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को यह कहते हुए सही करार दिया कि ये अनियमितताएं केवल कर्तव्य में चूक नहीं हैं, बल्कि जानबूझकर किए गए कार्य हैं ,जिसके परिणामस्वरूप बैंक को भारी नुकसान हुआ है।सार्वजनिक धन का लूट किया गया है।
पटना हाइकोर्ट ने राज्य में अभियोजन के निदेशक और उप निदेशक की नियुक्ति में महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि इन पदों पर वे ही नियुक्त हो सकते है, जिन्होंने दस या उससे अधिक वर्षों तक कानूनी प्रैक्टिस की हो। सुशील कुमार चौधरी की याचिका पर जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने 2003 के बिहार अभियोजन मेनुएल के रूल 5 में 2016 में लाए गए राज्य सरकार के संशोधन को रद्द कर दिया।
कोर्ट ने संघीय कानून अनुरूप रूल बनाने का निर्देश राज्य सरकार को दिया।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने कानून में संशोधन किया, उसके अनुसार अभियोजन कैडर के अधिकारी अभियोजन के निदेशक और उप निदेशक के पदों पर नियुक्त होंगे।
उन्होंने बताया कि संसद द्वारा पारित कानून सीआरपीसी के 25 ए के तहत अभियोजन निदेशक और उप निदेशक के पदों पर उन्हें ही नियुक्त किया जा सकता है, जिन्होंने 10वर्षों या उससे अधिक वर्षों तक कानूनी प्रैक्टिस की हो।
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उन्होंने बताया कि बिहार सरकार ने जो 2016 में जो नियमों में संशोधन किया, उसके तहत अभियोजन कैडर के अधिकारी इन पदों पर नियुक्त किये जा सकते है।ये संसद द्वारा पारित कानून के विपरीत है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार और अधिवक्ता रितिका रानी व राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल पी के शाही कोर्ट के समक्ष पक्षों को प्रस्तुत किया।
पटना हाइकोर्ट में राज्य के पश्चिम चम्पारण स्थित हारनाटांड में अनुसूचित जनजाति बालिकाओं के एकमात्र स्कूल की दयनीय हालत पर सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने बिहार आदिवासी अधिकार फोरम की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य में बड़ी संख्या में अनुसूचित जनजाति के छात्रों द्वारा स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ दिए जाने के मामले को गम्भीरता से लिया था।।कोर्ट ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बिहार लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी (बालसा) से रिपोर्ट तलब किया था।
कोर्ट ने बालसा को ये बताने को कहा था कि कितने बच्चों ने स्कूलों की पढ़ाई छोड़ दी है और कितने बच्चों ने दोबारा इन स्कूलों में जाना शुरू किया है ? बिहार आदिवासी अधिकार फोरम की लोकहित याचिका दायर की थी।
कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए चिंता जताते हुए ये जानना चाहा था कि इन बच्चों की पढ़ाई के लिए राज्य सरकार द्वारा क्या कार्रवाई की गई है।
इसके साथ साथ कोर्ट ने बालसा के एक सदस्य को लिए पश्चिम चम्पारण के हारनाटांड में स्थित स्कूल एवं कस्तूरबा गांधी विद्यालयों के विकास से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। गौरतलब है कि हाईकोर्ट इस मामले में लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है ।
इस मामले में पहले भी हाईकोर्ट ने वकीलों की एक टीम गठित कर निरीक्षण करने का निर्देश दिया था । इस टीम में अधिवक्ता सूर्या नीलांबरी, अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय , अधिवक्ता आयुष अभिषेक एवं अन्य अधिवक्ता शामिल थे ।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया था कि बिहार में अनुसूचित जनजाति के बालिकाओं के लिए पश्चिम चम्पारण के हारनाटांड एकमात्र स्कूल है।पहले यहाँ पर कक्षा एक से लेकर कक्षा दस तक की पढ़ाई होती थी।
लेकिन जबसे इस स्कूल का प्रबंधन राज्य सरकार के हाथ में आया तबसे इस स्कूल की स्थिति बदतर होती गई।कक्षा सात और आठ में छात्राओं का एडमिशन बन्द कर दिया गया।
साथ ही कक्षा नौ और दस में छात्राओं का एडमिशन पचास फीसदी ही रह गया।इस स्कूल में पर्याप्त संख्या में शिक्षक भी नहीं है।इस कारण छात्राओं की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है।
Patna High Court ने राज्य के सरकारी और निजी लॉ कालेजों के स्थिति के सम्बन्ध दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ कुणाल कौशल की जनहित याचिका पर सुनवाई की।
Patna High Court ने राज्य के अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। राज्य के सरकारी व निजी लॉ कॉलेजों की स्थिति व किये गए सुधार का ब्यौरा देने का निर्देश दिया है।
पूर्व की सुनवाई में चान्सलर कार्यालय के हलफनामा में बताया गया था कि लॉ कालेजों में नेट/ पीएचडी डिग्रीधारी शिक्षक होने चाहिए।
पूर्व की सुनवाई में Patna High Court ने चान्सलर कार्यालय को हलफनामा दायर कर ये बताने को कहा था कि राज्य में लॉ की पढ़ाई के लिए क्या क्या सुधारात्मक कार्रवाई की गई।साथ ही ये भी बताने को कहा गया था कि इन लॉ कालेजों में छात्रों को पढ़ाने के लिए यूजीसी मानक के तहत नेट/पीएचडी डिग्री वाले शिक्षकों की नियुक्ति की जा सकती है या नहीं।
चान्सलर ने राज्य के विश्वविद्यालयों के वाईस चान्सलर की बैठक 3अप्रैल,2023 को तय किया था।इस बैठक में असिस्टेंट प्रोफेसर, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्माचारियों की संख्या, बुनियादी सुविधाएँ, सम्बद्धता दिए जाने के सम्बन्ध विचार विमर्श किया जाना था।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया था कि इन लॉ कालेजों में जो प्रिंसिपल और शिक्षक कार्य कर रहे है, वे यूजीसी के मानदंडों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता नहीं रखते है।
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उन्होंने बताया कि ये शिक्षक यूजीसी द्वारा नेट की परीक्षा बिना पास किये पद पर बने हुए।इन लॉ कालेजों के प्रिंसिपल भी पीएचडी की डिग्री प्राप्त नहीं किया है।
पिछली सुनवाई में Patna High Court ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को यह बताने को कहा था कि राज्य में स्थित लॉ कॉलेजों में नेट की परीक्षा पास किए शिक्षकों को क्यों नियुक्त नहीं किया जा सकता है।
राज्य में स्थित लॉ कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव के मामलें पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की जा रही है।
Patna High Court ने बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया से ये जानना चाहा था कि राज्य के लॉ कॉलेज में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लॉ कालेजों में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति होना आवश्यक है।
कोर्ट को अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि राज्य के सरकारी और निजी लॉ कालेजों की स्थिति बहुत दयनीय है।वहां बुनियादी सुविधाओं का काफी अभाव है।
बीसीआई के निर्देश और जारी किए गए गाइड लाइन के बाद भी बहुत सुधार नहीं हुआ है।बीसीआई के निरीक्षण के बाद भी बहुत सारे कालेज निर्धारित मानकों को नहीं पूरा कर रहे है।
इससे पूर्व Patna High Court ने बीसीआई के अनुमति/ अनापत्ति प्रमाण मिलने के बाद ही सत्र 2021- 22 के लिए राज्य के 17 लॉ कालेजों को अपने यहां दाखिला लेने के लिए अनुमति दी थी।
सुनवाई के समय याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार एवं रितिका रानी, बीसीआई की ओर से अधिवक्ता विश्वजीत कुमार मिश्रा ने Patna High Court में अपने अपने पक्षों को प्रस्तुत किया।
इस मामलें पर अगली सुनवाई 25अप्रैल,2023 को की जाएगी।
पटना हाइकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष के पद पर अधिवक्ता शैलेन्द्र कुमार सिंह चुनाव जीत गए है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी राजेंद्र नारायण को हराया।
महासचिव पद पर अधिवक्ता जय शंकर चुनाव जीत गए है। अधिवक्ता पुष्पा सिन्हा कोषाध्यक्ष के पद के लिए चुनाव जीत गई है।लेकिन इनके जीत की औपचरिक घोषणा होना बाकी है।
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उपाध्यक्ष के तीन पदों के लिए मतगणना चल रही है। अन्य पदों के लिए भी मतगणना जारी है।देर रात तक परिणाम प्राप्त होने की संभावना है।
पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता संघों में सबसे बड़े अधिवक्ता संघ एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष,उपाध्यक्ष, महासचिव व कोषाध्यक्ष समेत विभिन्न पदों पर पदाधिकारियों के निर्वाचन के लिए मतदान शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हो गया।
मतदान पूर्वाह्न 10 बजे से अपराह्न 5 बजे तक हुआ। पटना हाई कोर्ट परिसर के ही दक्षिणी पार्किंग स्थल में मतदान केंद्र बनाए गए थे।
अधिवक्ताओं की सुविधा के लिए कई मतदान केंद्र बनाए गए थे। खास बात यह थी कि मतपत्र में उम्मीदवारों के नाम के साथ ही साथ फ़ोटो भी छापे गए थे।
कल मतगणना का कार्य सुबह साढ़े नौ बजे से किया जाएगा। देर रात तक परिणाम प्राप्त होने की संभावना है।
अपने पसंदीदा उम्मीदवार के नाम के सामने क्रॉस का चिन्ह लगाकर मतदाता को अपना मत देने का निर्देश रिटर्निंग अधिकारी द्वारा दिया गया था। मतदान देने के लिए मतदाताओं को एसोसिएशन द्वारा जारी पहचान पत्र के साथ ही साथ अन्य विकल्प के तौर पर लाइब्रेरी कार्ड, बार काउंसिल द्वारा जारी पहचान पत्र, आधार कार्ड/ पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस लाने को कहा गया था।
पटना । बिहार सरकार द्वारा राज्य में जातियों एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर पटना हाइकोर्ट में 18अप्रैल,2023 को सुनवाई की जाएगी। अखिलेश कुमार की याचिका पर चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ सुनवाई करेगी।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने जातियों और आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।उन्होंने कहा कि ये सर्वेक्षण कराने का अधिकार राज्य सरकार को नही है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जातियों के आधार पर व आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि ये राज्य सरकार के क्षेत्रधिकार में नहीं आता है।
उन्होंने कहा कि प्रावधानों के तहत इस तरह का सर्वेक्षण केंद्र सरकार करा सकती है।ये केंद्र सरकार की शक्ति के अंतर्गत आता है।
उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण के लिए राज्य सरकार पाँच सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है।राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल ने इसकी सुनवाई की योग्यता पर बुनियादी आपत्ति की।उन्होंने कहा कि ये याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।कोर्ट ने इस अमान्य करते हुए कहा कि ये प्रावधानों के उल्लंघन और पाँच सौ करोड़ रुपए से सम्बंधित मामला है।
कोर्ट ने इस मामलें पर 18अप्रैल,2023 को सुनवाई की तिथि निर्धारित की है।इस याचिकाकर्ता की ओर से दीनू कुमार व ऋतु राज और राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल पी के शाही ने कोर्ट के समक्ष पक्षों को प्रस्तुत किया।
आज पटना हाइकोर्ट के सबसे बड़े अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष,उपाध्यक्ष,महासचिव व अन्य पदों पर अधिकारियों के चुनाव के लिए मतदान होगा। मतदान आज सुबह दस बजे से शाम पाँच बजे तक होगा।
इस चुनाव के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई।बड़ी तादाद में मतदान केंद्र बनाए गए,ताकि सभी अधिवक्तागण अपना मतदान का सुविधा से कर सके।
ये अधिवक्ता संघ काफी बड़ा है और इसके सदस्य भी लगभग तीन हज़ार है।इस मतदान को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा बल के जवान रहेंगे।
#PatnaHighCourt
एक बूथ पर लगभग दो सौ वकीलों के मतदान करने की व्यवस्था की गई है।सभी मतदाताओं को दस दस मतपत्र दिए जाएँगे,जो अलग अलग रंगों के होंगे।
कल 8 अप्रैल ,2023 को मतगणना की जाएगी।मतगणना का कार्य सुबह साढ़े नौ बजे प्रारम्भ होगा।देर रात तक परिणाम प्राप्त होने की संभावना है।
पटना हाइकोर्ट ने भाजपा सांसद के अंगरक्षक,उनके भाई एवं उनकी पत्नी को घर में घुसने नहीं दिये जाने के मामले में सीआरपीएफ के डीजी सहित राज्य के डीजीपी एवं सांसद से जबाब तलब किया है।
कोर्ट ने सभी को एक सप्ताह के भीतर जबाबी हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया है।जस्टिस डॉ अंशुमान ने भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी के भाई सेवानिवृत्त एयर कमांडर रणधीर प्रताप की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई की।
आवेदक की ओर से कोर्ट को बताया गया कि आवेदक भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त है।इनकी बेहतर सेवा पर केंद्र सरकार ने विशिष्ट सेवा मेडल दिया।
लेकिन उनके माँ का देहांत होने के बाद भाईयो में सम्पति को लेकर विवाद होने लगा।आवेदक ने छपरा सिविल कोर्ट में बटवारा केस भी दायर किया है।
उनका कहना था कि सांसद के इशारे पर उनके सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ के जवान उन्हें एवं उनकी पत्नी को पुस्तैनी घर में प्रवेश करने से रोक दिये।यही नहीं जवान उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किये।
इसकी शिकायत सीआरपीएफ के डीजी सहित राज्य के डीजीपी सारण के एसपी से जवाबतलब किया।
लेकिन कही से कोई कार्रवाई नहीं हुई।उनका कहना था कि आपसी विवाद की जानकारी होने के बाद भी सीआरपीएफ के आला अधिकारी कुछ नहीं किये।जबकि घटना की सूचना एवं शिकायत किये जाने के बाद भी कोई कार्रवाई की गई।
उन्होंने अपने पुस्तैनी घर में प्रवेश करने एवं शांतिपूर्ण तरीके से घर में रहने की गुहार कोर्ट से लगाई।कोर्ट ने सभी अधिकारियों सहित सांसद को जबाबी हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया।इस मामलें पर आगे भी सुनवाई की जाएगी।
पटना हाईकोर्ट ने बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह सहित बीस प्रोफेसरों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया। जस्टिस संदीप कुमार ने आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई के बाद दायर प्राथमिकी को रद्द कर दिया।
याचिकाकर्ताओं के वकील नवीन प्रसाद सिंह ने कोर्ट को बताया कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने वर्ष 2019 के इंटर परीक्षा की कॉपी जांचने के लिए मगध विश्वविद्यालय के शिक्षकों का लिस्ट तैयार कर भेज दिया।लेकिन विश्वविद्यालय में स्नातक की परीक्षा होने के कारण शिक्षक इंटर की कॉपी जाचने नहीं गये।
इंटर कॉपी नहीं जांचने के कारण को लेकर एक सूचना एएन कॉलेज के प्रिंसिपल ने उच्च माध्यमिक के परीक्षा नियंत्रक सह संयुक्त सचिव को पत्र भेज दिया।लेकिन इंटर कॉपी जांचने नहीं आने वाले शिक्षकों के खिलाफ पटना जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बहादुरपुर थाना को 72 शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
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डीईओ के चिठ्ठी पर बहादुरपुर थाना प्रभारी ने प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।उनका कहना था कि जिस समय इंटर की कॉपी जांचने के लिए शिक्षकों को लगाया गया था उस समय विश्वविद्यालय स्नातक सहित स्नातकोत्तर एवं अन्य कई विषयों का परीक्षा कार्यक्रम जारी किया था।
यही नहीं कॉलेज के प्रिंसिपल ने शिक्षा विभाग के संयुक सचिव को पत्र भेज पूरी जानकारी भी दे दी।इसके बावजूद विभाग प्राथमिकी दर्ज करा दी।कोर्ट ने दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया।
पहली बार पटना हाई कोर्ट में अधिवक्ता संघ के चुनाव में मतपत्रों पर उम्मीदवारों के नाम के साथ उनका फोटो भी रहेगा। इसकी जानकारी चुनाव के निर्वाची पदाधिकारी वरीय अधिवक्ता अंजनी कुमार ने दी।
उनका कहना था कि एडवोकेट एसोसिएशन के चुनाव में मतदाता को अपने मनपसंद उम्मीदवार के नाम के सामने क्रॉस का निशान लगाना होगा।क्रॉस निशान के बजाये कोई अन्य निशान लगाये जाने पर उस मतपत्र को रद्द कर दिया जायेगा।
उनका बताया कि पद से ज्यादा उम्मीदवारों को वोट दिए के स्थिति में भी मतपत्र को रद्द कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 7 अप्रैल,2023 को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा।मतदान के बाद सभी पदों के उम्मीदवारों के मौजूदगी में मत पेटी को सील कर सुरक्षित स्थान पर रखा जायेगा।
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उन्होंने बताया कि कहना 8 अप्रैल को सुबह साढ़े नौ बजे से मतों की गिनती का काम शुरू किया जायेगा।चुनाव के लिए बीस बूथ बनाये गए है।
सभी बूथों पर चार चार वकील को पीठासीन अधिकारी बनाया गया है ।एक बूथ पर करीब दो सौ वकीलों को वोट देने की व्यवस्था की गई है।
सभी मतदाता को दस दस मतपत्र दिया जायेगा सभी मतपत्रों को अलग अलग रंग में रहेगा। शांतिपूर्ण मतदान के लिए पुलिस बल तैनात करने के लिए पटना डीएम को चिट्ठी भेजी गई है।
पटना हाइकोर्ट ने स्वीकृत नक्शे के बगैर हुए निर्माण को अवैध घोषित करने के बाद अपार्टमेंट के लोगों को जबरन निकालने हेतु उनका बिजली कनेक्शन काटे जाने पर नाराजगी जताई।कोर्ट ने पूर्णिया के डीएम, एसडीओ और नगर आयुक्त सहित वहां के उत्तर बिहार विद्युतआपूर्ति कंपनी के पूर्वी पश्चिमी प्रमंडल के कार्यपालक विद्युत अभियंता को अगली सुनवाई में कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है।
जस्टिस सत्यव्रत वर्मा ने डॉक्टर संजीव कुमार की रिट याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बिहार पावर होल्डिंग कंपनी के सीनियर एडवोकेट विनायक कीर्ति सिंह को कहा कि उनके मुवक्किल यह सुनिश्चित करें कि आज ही एक घंटे के अंदर पूर्णिया के इस अपार्टमेंट की विद्युत आपूर्ति को तुरंत चालू किया जाए ।
कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया,तो सम्बंधित विद्युत कार्यपालक अभियंता हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना के लिए जिम्मेदार होंगे।
याचिकाकर्ता के वकील पुरुषोत्तम झा ने कोर्ट को बताया कि एक निगरानी जांच के मामले में नगर आयुक्त ने उस अपार्टमेंट के चौथे तल्ले का पूरा निर्माण को अवैध करार देते हुए वहां के निवासियों को भवन खाली कर आदेश दिया था । उस आदेश के को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता बिहार भवन निर्माण ट्रिब्यूनल में अपील दायर किया, लेकिन ट्रिब्यूनल में सदस्यों की संख्या पर्याप्त नहीं होने के कारण वहां सुनवाई नहीं हो पा रही है।
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अंततः कोई कानूनी निदान नहीं देखते हुए याचिकाकर्ता ने आनन-फानन में हाईकोर्ट का याचिका दायर की। हाई कोर्ट में रिट याचिका के दायर होने की जानकारी के बावजूद पूर्णिया के नगर आयुक्त ने वहां के अनुमंडल अधिकारी को नगर आयुक्त के कार्यालय से निगरानी वाद में पारित आदेश के अनुपालन करने का निर्देश दिया। अनुमंडल अधिकारी ने आनन-फानन में बिना मकान खाली करने का नोटिस और मौका दिए ही 1 दिन के अंदर ही अपार्टमेंट के चौथा तल्ला को खाली कर सील करने की कार्रवाई कर दी।
यही नहीं,जिला प्रशासन और नगर आयुक्त के इशारे पर ही बगैर किसी कानूनी सकती हो कहीं अनाधिकृत रूप से विद्युत कार्यपालक अभियंता ने पूरे चौथे तल्ले का विद्युत आपूर्ति भी काट दिया।
हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा अधिकारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग खुलेआम करेंगे, तो कानून का राज कैसे स्थापित हो सकेगा?
कोर्ट ने इन चारों अधिकारियों को अगली सुनवाई में उपस्थित होने का निर्देश दिया। इस मामलें पर आगे भी सुनवाई की जाएगी।
पटना हाईकोर्ट में एडवोकेट एसोसिएशन के 30 पदों के लिए 7 अप्रैल,2023 को होने वाले चुनाव में कुल 144 प्रत्याशियों ने अपनी पूरी शक्ति जीत के लिए लगा दी है। एडवोकेट एसोसिएशन के होने वाले इस चुनाव में अध्यक्ष के 1 पद के लिए 15 उम्मीदवार , उपाध्यक्ष के तीन पद के लिए 28 उम्मीदवार, महासचिव के 1 पद के लिए 13 उम्मीदवार, संयुक्त सचिव के 3 पद के लिए 25 उम्मीदवार है।
सहायक सचिव के 3 पद के लिए 16 उम्मीदवार , कोषाध्यक्ष के 1 पद के लिए 6 उम्मीदवार, ऑडिटर के 2 पद के लिए 2 दो उम्मीदवार, सीनियर एग्जीक्यूटिव के 5 पद के लिए 8 उम्मीदवार, एग्जीक्यूटिव के 7 पद के लिए 21 उम्मीदवार, निगरानी के 3 पद के लिए 7 उम्मीदवार और लाइब्रेरी कमेटी के 1 पद के लिए तीन उम्मीदवार हैं।
इस बार के चुनाव में सभी उम्मीदवार अपने अपने तरीके से मतदाताओं को रिझाने और अपने पक्ष में वोट देने के लिए लुभाने में लगे हैं।
इस बार के चुनाव मे चारों तरफ होर्डिंग, फलैक्स से पूरा हाई कोर्ट परिसर के साथ साथ बार कॉउंसिल भवन भी पट गया है।
अध्यक्ष पद के लिए वरीय अधिवक्ता राजेन्द्र नारायण , राजीव कु० वर्मा,विंध्यकेशरी कुमार, शैलेन्द्र कुमार सिंह,प्रेम कुमार झा, और अरुण कुशवाहा में मुकाबला है। उपाध्यक्ष पद के लिए प्रबल दावेदारों में द्विवेदी सुरेन्द्र,राम जीवन प्रसाद,शंभु शरण शर्मा,मनोज कुमार सिंह के बीच सीधी टक्कर है। इन्हीं में से कोई भी तीन व्यक्ति उपाध्यक्ष बन सकता है। वैसे द्विवेदी सुरेंद्र को सभी अधिवक्ताओं का समर्थन मिल रहा है ।
सेक्रेटरी जेनरल पद के लिए शारदानंद मिश्र,राम संदेश राय,पुनम कुमारी सिंह,पांडेय, और राकेश कुमार सिन्हा के बीच टक्कर है।
सहायक सचिव के लिए राजेश कुमार,चौबे, राकेश रंजन,राजनीश चंद्रा,नलिन कुमार,श्यामेशवर कुमार सिंह, और महिला उम्मीदवार श्वेता सिंह के बीच ही टक्कर है।
पटना हाईकोर्ट के दूसरे बड़े वकील संघ लायर्स एसोसिएशन का चुनाव 19 अप्रैल,2023 को होगा। शांतिपूर्ण चुनाव के लिए सारी तैयारी की जा रही हैं। मतदान के लिए नये मतपेटी बनाई गई हैं।
निर्वाची पदाधिकारी वरीय अधिवक्ता अशोक कुमार सिंह ने बताया कि मतपेटी ऐसा बनाया गया है, कि किसी भी हाल में मतपेटी से मतपत्र निकलना संभव नहीं है।मतदान के लिए सभी मतदाताओं को एसोसिएशन का पहचान पत्र साथ लाना अनिवार्य किया गया है।चुनाव के निर्वाची पदाधिकारी वरीय अधिवक्ता अशोक कुमार सिंह ने बताया कि सभी उम्मीदवारों से शांतिपूर्ण चुनाव सहयोग करने की अपील की है।
उन्होंने बताया कि चुनाव के पूर्व सभी उम्मीदवारों के साथ एक अहम बैठक की जायेगी।आरओ ने वरीय कार्यकरणी सदस्य के पांच पद,कार्यकरणी सदस्य के 7 पद,ऑडिटर के तीन पद, निगरानी सदस्य के तीन पद सहित लाइब्रेरी कमेटी के तीन पद पर उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किये।
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इन सभी पदों पर जितना सीट था, उतने ही उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किये।अब अध्यक्ष पद के एक सीट के लिए चार उम्मीदवार चुनावी मैदान में है।वही उपाध्यक्ष पद के तीन सीट के लिए दस उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं।जबकि महासचिव के एक सीट के लिए पांच उम्मीदवार अपना किस्मत आजमा रहे हैं।
वही संयुक्त सचिव और सहायक सचिव के तीन तीन पद के लिए सात व छह उम्मीदवार तथा कोषध्यक्ष के एक पद के लिए तीन उम्मीदवार के बीच काटे का टक्कर हैं।19 अप्रैल,2023 को होने वाले चुनाव में सभी उम्मीदवारों जोर शौर से चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं।
पटना हाईकोर्ट में पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई दो सप्ताह तक टली। जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई की जा रही है।
पूर्व की सुनवाई में कोर्ट में एस एस पी, पटना और एस आई टी जांच टीम का नेतृत्व करने वाली सचिवालय एएसपी काम्या मिश्रा भी कोर्ट में उपस्थित रही थी।
अधिवक्ता मीनू कुमारी ने बताया था कि कोर्ट अब तक एस आई टी द्वारा किये गए जांच और कार्रवाई के सम्बन्ध में सम्बंधित अधिकारी से जानकारी प्राप्त करना चाहता था।उन्होंने बताया कि आफ्टर केअर होम में रहने वाली महिलाओं की स्थिति काफी खराब है।
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पहले की सुनवाई में कोर्ट ने अनुसंधान को डी एस पी रैंक की महिला पुलिस अधिकारी से कराने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने जांच रिपोर्ट भी तलब किया था।
हाई कोर्ट ने इस याचिका को पटना हाई कोर्ट जुवेनाइल जस्टिस मोनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रजिस्टर्ड किया था। कमेटी में जस्टिस आशुतोष कुमार चेयरमैन थे, जबकि जस्टिस अंजनी कुमार शरण और जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय इसके सदस्य के रूप में थे।
पटना हाइकोर्ट ने राज्य में निबंधित और योग्य फार्मासिस्ट के पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर होने वाले असर के मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जवाब देने के पुनः तीन सप्ताह का समय दिया है।चीफ जस्टिस के वी चंद्रन खंडपीठ ने मुकेश कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई की।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा दिए गए जवाब पर असंतोष जाहिर किया था।कोर्ट ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में राज्य सरकार को पुनः जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रशान्त सिन्हा ने कोर्ट को बताया था कि डॉक्टरों द्वारा लिखें गए पर्ची पर निबंधित फार्मासिस्टों द्वारा दवा नहीं दी जाती है।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि बहुत सारे सरकारी अस्पतालों में अनिबंधित नर्स,एएनएम,क्लर्क ही फार्मासिस्ट का कार्य करते है।वे बिना जानकारी और योग्यता के ही मरीजों को दवा बांटते है।जबकि ये कार्य निबंधित फार्मासिस्टों द्वारा किया जाना है।
उन्होंने कोर्ट को बताया था कि इस तरह से अधिकारियों द्वारा अनिबंधित नर्स,एएनएम,क्लर्क से काम लेना न केवल सम्बंधित कानून का उल्लंघन है,बल्कि आम आदमी के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
पिछली सुनवाई में उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी थी कि फार्मेसी एक्ट,1948 के तहत फार्मेसी से सम्बंधित विभिन्न प्रकार के कार्यों के अलग अलग पदों का सृजन किया जाना चाहिए।लेकिन बिहार सरकार ने इस सम्बन्ध में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।इस आम लोगों का स्वास्थ्य और जीवन पर खतरा उत्पन्न हो रहा है।
उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया था कि फार्मेसी एक्ट,1948 के अंतर्गत बिहार राज्य फार्मेसी कॉउन्सिल के क्रियाकलापों और भूमिका की जांच के लिए एक कमिटी गठित की जाए।ये कमिटी कॉउन्सिल की क्रियाकलापों की जांच करें,क्योंकि ये गलत तरीके से जाली डिग्री देती है।
उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी थी कि बिहार राज्य फार्मेसी कॉउन्सिल द्वारा बड़े पैमाने पर फर्जी पंजीकरण किया गया है।राज्य में बड़ी संख्या मे फर्जी फार्मासिस्ट कार्य कर रहे है।इस मामलें पर अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद की जाएगी।
पटना हाईकोर्ट ने बिहार के सहरसा में स्थापित किये जाने वाले एम्स अस्पताल को दरभंगा स्थानांतरित किये जाने के मामलें पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने कोशी विकास संघर्ष मोर्चा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र व राज्य सरकार को जवाब देने के लिए 17अप्रैल,2023 तक मोहलत दी है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया था कि विभिन्न राज्यों में एम्स के स्तर के अस्पताल स्थापित करने की योजना तैयार की गई।बिहार के सहरसा में एम्स के तर्ज पर अस्पताल बनाए जाने का प्रस्ताव था।
कोर्ट को बताया गया था कि इस अस्पताल के निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि सहरसा में उपलब्ध है।2017 में सहरसा के जिलाधिकारी ने इस अस्पताल के लिए आवश्यक 217.74 एकड़ भूमि की उपलब्धता की जानकारी विभाग को दी थी।
कोर्ट को ये बताया था कि इस क्षेत्र में एम्स स्तर का अस्पताल नहीं है।गंभीर बीमारियों के ईलाज के लिए इस क्षेत्र के लोगों को या तो पटना जाना पड़ता है या सिलिगुडी जाना पड़ता है।इसमें न सिर्फ लोगों को आने जाने में कठिनाई होती है,बल्कि आर्थिक बोझ भी पड़ता है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सहरसा में एम्स अस्पताल के निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है,जबकि दरभंगा में एम्स अस्पताल के लिए पर्याप्त भूमि की उपलब्ध नहीं है।
#PatnaHighCourt
कोर्ट को एम्स अस्पताल के निर्माण के मानकों पर सहरसा ज्यादा खरा था,लेकिन राज्य सरकार ने 2020 में दरभंगा में एम्स अस्पताल स्थापित किये जाने की अनुशंसा कर दी थी।यह इस क्षेत्र लोगों के साथ अन्याय किया गया।
कोर्ट को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि सहरसा,पूर्णियां,कटिहार, किशनगंज और अररिया जिले इस क्षेत्र में आते है।इस क्षेत्र की जनसंख्या के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एम्स अस्पताल स्थापित की जानी चाहिए।
कोर्ट को बताया गया कि इस क्षेत्र के बहुत सारे लोग कैंसर समेत कई अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।आमलोग को बेहतर ईलाज के लिए इस क्षेत्र में एम्स स्तर के अस्पताल की सख्त आवश्यकता है।
इस मामलें पर अगली सुनवाई 17अप्रैल,2023 के बाद की जाएगी।
पटना हाइकोर्ट ने पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के मामलें पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए एन एच ए आई के क्षेत्रीय अधिकारी को हलफनामा दायर कर प्रगति रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने निर्माण कम्पनियों को बताने को कहा था कि निर्माण कार्य कब तक पूरा हो जाएगा। पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र,राज्य सरकार,एनएचएआई और अन्य सम्बंधित पक्षों को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।
पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य कर रही कम्पनियों ने कोर्ट को बताया था कि 31मार्च,2023 तक फेज एक का अधिकांश कार्य पूरा कर लिया जाएगा।साथ ही इस राजमार्ग के निर्माण कार्य को लगभग 30 जून, 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनीष कुमार ने कोर्ट को बताया था कि जिस गति से काम किया जा रहा है, ऐसे में तय समय सीमा में निर्माण कार्य पूरा होना कठिन है।उन्होंने कहा कि तय समय सीमा में कार्य पूरा करने के लिए संसाधनों और कार्य करने वाले लोगों की संख्या बढ़ाने की जरूरत हैं।
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इससे पूर्व अधिवक्ताओं की टीम ने खंडपीठ के समक्ष पटना गया डोभी एनएच का निरीक्षण कर कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत किया था।पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने वकीलों की टीम को इस राजमार्ग के निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।
पूर्व में भी राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने वाली कंपनी ने इसका निर्माण कार्य 30 जून,2023 तक पूरा करने का अश्वासन कोर्ट को दिया था।साथ ही कोर्ट ने इस फेज के निर्माण में बाधा उत्पन्न होने वाले सभी अवरोधों को तत्काल हटाने का निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को दिया था।
कोर्ट को पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के फेज दो व तीन के निर्माण में लगी निर्माण कंपनी ने बताया था कि पटना गया डोभी एनएच के निर्माण में कई जगह बाधा उत्पन्न किया जा रहा है।
पटना हाईकोर्ट के नवनियुक्त चीफ जस्टिस कृष्णन विनोद चंद्रन कल सुबह 9:30 बजे राजभवन में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। बिहार के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर नवनियुक्त चीफ जस्टिस कृष्णन विनोद चन्द्रन को शपथ दिलायेंगे ।
इस अवसर पर पटना हाईकोर्ट के जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह एवं पटना हाई कोर्ट के अन्य जज भी शपथ समारोह में उपस्थित रहेंगे
शपथ समारोह के बाद पटना हाईकोर्ट के मुख्य चीफ जस्टिस कोर्ट में सुबह 11 बजे स्वागत समारोह का आयोजन किया जाएगा। उसके बाद हाईकोर्ट को सामान्य न्यायिक कार्य प्रारंभ हो जाएगा।
पटना हाइकोर्ट ने राज्य में एयरपोर्ट के स्थापित करने,विकास,विस्तार और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के तीन एयरपोर्ट और पूर्णियां एयरपोर्ट के सम्बन्ध में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से ये बताने को कहा कि राज्य में नए एयरपोर्ट बनाए जाने के मामलें क्या कार्रवाई की गई है। दोनों सरकारों को बताने को कहा गया था कि वे बताए कि इनके सम्बन्ध में क्या योजनाएं बना रहे है।
कोर्ट ने उन्हें ये भी बताने को कहा था कि क्या वे नए एयरपोर्ट के निर्माण के लिए उन्हें चिन्हित करने की कार्रवाई की है।कोर्ट ने ये जानना चाहा कि इन नए एयरपोर्ट के निर्माण के लिए उनकी क्या योजना है।
पूर्व की सुनवाई में कार्यरत एयरपोर्ट पटना,गया,बिहटा और दरभंगा के एयरपोर्ट के विकास,विस्तार और सुरक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं के बारे में बताने को कहा था। बहुत सारी सुविधाओं की कमी है।इन्हें बेहतर बनाने के क्या कार्रवाई की जा रही है।
इससे पूर्व में हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए केंद्र और राज्य सरकार को पटना और बिहटा में एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर विचार करने को कहा था। तत्कालीन चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस सम्बन्ध में अभिजीत कुमार पाण्डेय की जनहित याचिका पर फैसला सुनाया था।
ये राज्य में पहला मामला है, जिसमें कोर्ट ने राज्य में एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर विचार करने का निर्देश दिया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा था कि कई अन्य राज्यों में कई ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है, लेकिन बिहार में एक भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नहीं है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राज्य की जनता को विकसित और सुरक्षित हवाई यात्रा की सुविधा दिया जाना मौलिक अधिकारों के अंतर्गत आता है।केंद्र और राज्य सरकार इन्हें विकसित और सुरक्षित हवाई यात्रा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी और निजी लॉ कालेजों के स्थिति के सम्बन्ध दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ कुणाल कौशल की जनहित याचिका पर सुनवाई की।
कोर्ट में राज्य सरकार विश्वविद्यालयों के चान्सलर के हलफनामा दायर किया।इस हलफनामा में बताया गया है कि लॉ कालेजों में नेट/ पीएचडी डिग्रीधारी शिक्षक होने चाहिए।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने चन्सलर कार्यालय को हलफनामा दायर कर ये बताने को कहा कि राज्य में लॉ की पढ़ाई के लिए क्या क्या सुधारात्मक कार्रवाई की गई।साथ ही ये भी बताने को कहा गया कि इन लॉ कालेजों में छात्रों को पढ़ाने के लिए यूजीसी मानक के तहत नेट/पीएचडी डिग्री वाले शिक्षकों की नियुक्ति की जा सकती है या नहीं।
चान्सलर ने राज्य के विश्वविद्यालयों के वाईस चान्सलर की बैठक 3अप्रैल,2023 को तय किया है।इस बैठक में असिस्टेंट प्रोफेसर, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्माचारियों की संख्या, बुनियादी सुविधाएँ, सम्बद्धता दिए जाने के सम्बन्ध विचार विमर्श किया जाएगा। इसके बाद चान्सलर कार्यालय को अगली सुनवाई में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया गया है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि इन लॉ कालेजों में जो प्रिंसिपल और शिक्षक कार्य कर रहे है, वे यूजीसी के मानदंडों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता नहीं रखते है।
उन्होंने बताया कि ये शिक्षक यूजीसी द्वारा नेट की परीक्षा बिना पास किये पद पर बने हुए।इन लॉ कालेजों के प्रिंसिपल भी पीएचडी की डिग्री प्राप्त नहीं किया है।
#PatnaHighCourt
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को यह बताने को कहा था कि राज्य में स्थित लॉ कॉलेजों में नेट की परीक्षा पास किए शिक्षकों को क्यों नियुक्त नहीं किया जा सकता है।
राज्य में स्थित लॉ कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव के मामलें पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की जा रही है।
कोर्ट ने बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया से ये जानना चाहा था कि राज्य के लॉ कॉलेज में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लॉ कालेजों में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति होना आवश्यक है।
कोर्ट को अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि राज्य के सरकारी और निजी लॉ कालेजों की स्थिति बहुत दयनीय है।वहां बुनियादी सुविधाओं का काफी अभाव है।
बीसीआई के निर्देश और जारी किए गए गाइड लाइन के बाद भी बहुत सुधार नहीं हुआ है।बीसीआई के निरीक्षण के बाद भी बहुत सारे कालेज निर्धारित मानकों को नहीं पूरा कर रहे है।
इससे पूर्व कोर्ट ने बीसीआई के अनुमति/ अनापत्ति प्रमाण मिलने के बाद ही सत्र 2021- 22 के लिए राज्य के 17 लॉ कालेजों को अपने यहां दाखिला लेने के लिए अनुमति दी थी।
पूर्व में हाई कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए बिहार के सभी 27 सरकारी व निजी लॉ कॉलेजों में नए दाखिले पर रोक लगा दी थी। बाद मे इस आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए 17 कॉलेजों में सशर्त दाखिले की मंजूरी दे दी गई।
सुनवाई के समय समय याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार एवं रितिका रानी, बीसीआई की ओर से अधिवक्ता विश्वजीत कुमार मिश्रा ने कोर्ट में अपने अपने पक्षों को प्रस्तुत किया।
इस मामलें पर अगली सुनवाई 10अप्रैल,2023 कर बाद फिर की जाएगी।
पटना हाईकोर्ट ने वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा के अंतर्गत विभिन्न कालेजों में कार्यरत तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों के सामंजन से संबंधित मामले पर सुनवाई की। जस्टिस पी बी बजनथ्री की खंडपीठ ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को सभी रिकॉर्ड के साथ अगली सुनवाई में तलब किया है।
कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए दायर किए गए एलपीए पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
राज्य सरकार और विश्वविद्यालय द्वारा अलग-अलग एलपीए दायर कर हाईकोर्ट के एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी गई है। अपील में एकल पीठ द्वारा वर्ष 1978 से 1982 के बीच कार्यरत तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों को नियमित करने संबंधी आदेश को गैरकानूनी और गलत बताते हुए उसे निरस्त करने का अनुरोध किया गया है।
#PatnaHighCourt
तृतीय एवं चतुर्थ पद वर्ग के पद पर नियुक्त हुए कर्मचारियों की ओर से अधिवक्ता अशोक कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति नियमों के अनुसार वर्ष 1978 से 1982 के बीच की अवधि में की गई थी।
जिनका सामंजन वर्ष 2011 से 2013 के बीच की अवधि में किया गया।लगभग पांच वर्षों के बाद वर्ष 2017 में इनसे सेवा नही लेने और उन्हें वेतन का भुगतान नहीं करने का आदेश राज्य सरकार द्वारा दिया गया।
राज्य सरकार और विश्वविद्यालय के इसी आदेश के खिलाफ एक सौ उन्तीस कर्मचारियों ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने इन कर्मचारियों की नियुक्ति और सामंजन को सही मानते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को उन्हें उनके पद पर बहाल करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन कर्मचारियों को उनके पद पर योगदान नहीं कराया और हाई कोर्ट के एकलपीठ के आदेश के खिलाफ अपील दायर कर दिया।
इसी मामले में हाईकोर्ट ने इन दोनों अधिकारियों को अगली सुनवाई पर तलब किया है।इस मामले पर 3 सप्ताह बाद सुनवाई की जाएगी।
पटना हाईकोर्ट ने नेत्र सहायक की नियुक्ति के मामले में स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निर्देशक को 6 अप्रैल,2023 को कोर्ट में तलब किया है।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने रंजीत कुमार द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अशोक कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि बिहार तकनीकी सेवा आयोग ने नेत्र सहायक के पद पर नियुक्ति करने के लिए वर्ष 2021 में एक विज्ञापन निकाला था।
इस विज्ञापन के अनुसार इस पद पर नियुक्ति के लिए भौतिक विज्ञान, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान और अंग्रेजी के साथ उत्तीर्ण और मान्यता प्राप्त संस्थान से नेत्र सहायक के डिप्लोमा कोर्स किए उम्मीदवार को ही योग्य माना था। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया है कि विज्ञापन को हाईकोर्ट में चुनौती दिया गया, जिसके बाद कई रिट याचिकाएं अन्य अभ्यर्थियों के द्वारा भी हाईकोर्ट में दायर किया गया।
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हाईकोर्ट ने कुछ रिट याचिकाकर्ताओं के पक्ष में अपना आदेश सुनाया। कोर्ट को बताया गया कि सरकार द्वारा इस मामले में जो शपथ पत्र दायर किया गया है, वह हाईकोर्ट के खंडपीठ के आदेश के विपरीत है।
इसी मामले पर नाराजगी व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट में स्वास्थ्य विभाग के अपर निर्देशक को अगली सुनवाई पर तलब किया है।