साथ ही, सरकार ने ‘सम्राट चौधरी’ नामक एक नई पहल शुरू की, जिसके अंतर्गत महिलाओं को तीन प्रमुख तोहफे प्रदान किए जाएंगे। पहला तोहफा है मुफ्त बीमा योजना, जिसमें हर महिला को जीवन बीमा के साथ-साथ दुर्घटना बीमा कवरेज मिलेगा। दूसरा तोहफा है स्वरोजगार सहायता, जिसमें महिलाओं को छोटे व्यापार शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण दिया जाएगा। तीसरा तोहफा है डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम, जिसमें महिलाओं को स्मार्टफोन और इंटरनेट का सही उपयोग सीखाया जाएगा। इन तीनों तोहफों का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।
राखी बंधने के दिन कई शहरों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। पटना में राजभवन के बगिचे में एक बड़े मंच पर संगीत, नृत्य और कवि सम्मेलन का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने भाई-बहन के अटूट प्रेम को समर्पित प्रस्तुतियां दीं। गयासुंद्र में ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के समूह ने पारम्परिक हस्तशिल्प प्रदर्शित किया, जिससे स्थानीय कारीगरों को नई बाजार संभावनाएं मिलीं। इस प्रकार, रक्षाबंधन ने सामाजिक और आर्थिक दोनों ही क्षेत्रों में सक्रिय सहभागिता को प्रोत्साहित किया।
रक्षाबंधन के मौके पर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक समूहों ने भी अपने-अपने कार्यक्रम चलाए। स्थानीय मंदिरों में भाई-बहन के बीच रक्षाबंधन की पूजा आयोजित की गई, जिसमें भजनों और कथा सुनाने के माध्यम से इस परम्परा को नई पीढ़ी तक पहुंचाया गया। सामाजिक संस्थानों ने महिला सशक्तिकरण के संदेश को प्रमुखता दी, जिसमें महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता की ओर प्रोत्साहित करने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। इन सभी गतिविधियों ने इस त्यौहार को केवल पारिवारिक उत्सव से आगे बढ़कर सामाजिक परिवर्तन का मंच बना दिया।
भाइयों और बहनों की प्रतिक्रिया इस वर्ष विशेष रूप से उत्साहपूर्ण रही। पटना के एक मध्यम वर्गीय परिवार में, बहन ने राखी बंधते समय अपने भाई को एक विशेष संदेश दिया कि वह उसके साथ हमेशा खड़ी रहेगी। भाई ने भी अपने भाई-बहन के बीच के बंधन को और मजबूत करने के लिए एक पारिवारिक यात्रा की योजना बनाई। इसी तरह, ग्रामीण इलाकों में बहनों ने अपने भाईयों को स्थानीय कारीगरों से बनी हस्तनिर्मित वस्तुएँ उपहार में दीं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी समर्थन मिला। यह भावनात्मक और आर्थिक दोहरी प्रतिक्रिया इस त्यौहार की समग्र महत्ता को दर्शाती है।
Updated: August 27, 2026
Rakhi will be celebrated on 28 August 2026, with Bihar’s government unveiling health camps, scholarships, free insurance, entrepreneurship aid and digital literacy programmes aimed at women’s empowerment. The festival’s cultural events and community initiatives are also being used to boost local crafts, strengthen sibling bonds and promote socioeconomic change.
Insight: This development could shape future developments as the situation continues to evolve.
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