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विजयावड़ा में 13 अक्टूबर से दो हफ़्ते तक राष्ट्रीय सरस आजीविका मेला, 500 से अधिक बूथ, कृषि‑उद्यमी

विवि‍याडा में राष्ट्रीय सरस आजीविका मेला 13 अक्टूबर से दो हफ़्ते तक आयोजित होगा, इस बात की पुष्टि नत्र जिला कलेक्टर लक्ष्मिशा ने आज सुबह की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में की। मेला के साथ दशहरा उत्सव, विजयावड़ा उत्सव और सरस मेला के विस्तृत कार्यक्रमों की योजना तैयार है। आयोजन में स्थानीय उद्योग, कृषि और पर्यटन क्षेत्रों को प्रमुख भूमिका देने का इरादा है, ताकि प्रदेशीय आर्थिक विकास को गति मिल सके। इस पहल के तहत विभिन्न सरकारी विभागों और निजी संस्थाओं के बीच सहयोगात्मक मंच स्थापित किया गया है।

विजयावड़ा में राष्ट्रीय सरस मेला का विचार पिछले साल के सफल सरस उत्सव के बाद आया, जब राज्य सरकार ने सरस नदी के पुनरुद्धार पर विशेष जोर दिया था। इस वर्ष मेला का मुख्य उद्देश्य स्थानीय कारीगरों, कृषकों और उद्यमियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करना है। इसके लिए 500 से अधिक बूथ लगाए जाएंगे, जिनमें कृषि उपकरण, हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद और पर्यटन सेवा शामिल होंगी।

सरस नदी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए, मेला के कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रदर्शन, संगीत एवं नृत्य प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाएँगी। राज्य सांस्कृतिक विभाग ने इस पर विशेष ध्यान दिया है, जिससे स्थानीय कलाकारों को मंच मिल सके। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण के संदेश को भी प्रमुखता दी जाएगी, जिसमें जल संरक्षण और सतत कृषि के विषय पर कार्यशालाएँ आयोजित होंगी।

13 अक्टूबर को उद्घाटन समारोह में राज्य के प्रमुख अतिथि उपस्थित रहेंगे, जिनमें पर्यटन मंत्री और कृषि विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। उद्घाटन में पारंपरिक सरस पूजा, झांकियों का प्रदर्शन और स्थानीय व्यंजनों का स्टॉल भी स्थापित किया जाएगा। इसके बाद विभिन्न सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधियों द्वारा सुरक्षा और प्रबंधन के उपायों की समीक्षा की जाएगी।

उद्घाटन के बाद, मेला में विभिन्न कार्यशालाओं और सेमिनारों की श्रृंखला शुरू होगी। इन कार्यक्रमों में कृषि तकनीक, जल प्रबंधन, डिजिटल मार्केटिंग और छोटे उद्यमियों के लिए वित्तीय सहायता के बारे में जानकारी दी जाएगी। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया गया है, जो अपने अनुभव साझा करेंगे।

मेला के दौरान, स्थानीय व्यवसायियों को अपने उत्पादों को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। विशेष रूप से, कृषि आधारित उद्यम, जैविक खाद्य पदार्थ और हस्तशिल्प को प्राथमिकता दी जाएगी। इस पहल से न केवल आर्थिक लाभ होगा, बल्कि ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए avenues भी मिलेंगे।

राज्य सरकार की ओर से मेला में भाग लेने वाले किसानों और उद्यमियों को विभिन्न प्रकार की सब्सिडी और अनुदान की घोषणा की गई है। कृषि विभाग ने कहा कि जल-संचयन, बीज वितरण और आधुनिक कृषि उपकरणों की उपलब्धता को बढ़ावा दिया जाएगा। इसी के साथ, MSME मंत्रालय ने छोटे उद्यमियों को ऋण सुविधा प्रदान करने का वादा किया है।

विजयावड़ा शहर के व्यापार संघ ने भी मेला के समर्थन में आवाज़ उठाई। उन्होंने कहा कि यह मेला स्थानीय उद्योग को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में सहायक होगा। इसके साथ ही, उन्होंने सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन और साफ-सफ़ाई के उपायों को सुदृढ़ करने की मांग भी की।

स्थानीय नागरिकों ने भी इस कार्यक्रम को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। कई व्यापारी और किसान ने बताया कि इस मेले से उन्हें अपने उत्पादों का बाजार विस्तार करने का मौका मिलेगा। सामाजिक समूहों ने भी पर्यावरण जागरूकता के संदेश को सराहा और इस बात पर ज़ोर दिया कि सरस नदी का संरक्षण भविष्य की जरूरत है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से, इस मेले को प्रदेश में विकास की नई दिशा के रूप में देखा जा रहा है। मुख्य विपक्षी दल ने कहा कि सरकार को जल संरक्षण और ग्रामीण विकास के लिए और अधिक ठोस कदम उठाने चाहिए। वहीं, गठबंधन सरकार ने कहा कि यह मेला उनके विकास एजेंडा का हिस्सा है और इसे सफलता की कहानी बनाना उनका लक्ष्य है।

आर्थिक प्रभाव की बात करें तो, मेले से स्थानीय व्यापार में लगभग 15% की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। होटल, भोजनालय और परिवहन सेवाओं को इस अवधि में अधिक आय की आशा है। साथ ही, मेले में भाग लेने वाले उद्यमियों को नई बाजार संभावनाओं और निवेशकों से मिलने का अवसर मिलेगा, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक लाभ की संभावना बढ़ेगी।

सामाजिक प्रभाव के रूप में, मेले से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन की संभावनाएँ बढ़ेंगी। विशेष रूप से महिलाओं के लिए कारीगर और हस्तशिल्प की बिक्री में वृद्धि की उम्मीद है। साथ

Updated: October 8, 2026


The National Saras Livelihood Fair will launch in Vijayawada on Oct 13, running for two weeks with over 500 stalls showcasing agriculture, crafts and tourism alongside cultural performances and workshops on water conservation and digital marketing. Organisers aim to boost regional trade, create jobs—especially for women and rural youth—and attract investment through government subsidies, MSME loans and a collaborative platform of public and private partners.

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