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बिहार में 1200 अमीन अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, जमीन मापी से लेकर जमाबंदी तक के काम प्रभावित

Bihar Amin Strike 2026: बिहार में करीब 1,200 नियमित सरकारी अमीन 6 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। अमीनों के काम बंद करने से जमीन की मापी, न्यायालय से जुड़े मापी के मामले और जमाबंदी पुनरीक्षण जैसे राजस्व कार्य प्रभावित होने लगे हैं। बिहार राजस्व अमीन संघ ने अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर 9 अक्टूबर से पटना के गर्दनीबाग में धरना-प्रदर्शन शुरू करने का ऐलान किया है।

मुख्य बातें

  • बिहार के करीब 1,200 नियमित अमीन 6 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
  • जमीन की मापी और कोर्ट से संबंधित मापी के काम प्रभावित होने का दावा।
  • जमाबंदी शुद्धिकरण और उत्तराधिकार नामांतरण अभियान पर भी असर पड़ने की आशंका।
  • अमीनों की प्रमुख मांगों में पे लेवल-6, स्थानांतरण, यात्रा/पेट्रोल भत्ता और प्रमोशन शामिल हैं।
  • 9 अक्टूबर से पटना के गर्दनीबाग में धरना शुरू करने की तैयारी।
  • जमाबंदी सुधार का विशेष अभियान 31 अक्टूबर 2026 तक चल रहा है।

क्यों हड़ताल पर गए अमीन?

बिहार राजस्व अमीन संघ के अनुसार, अमीन लंबे समय से अपनी सेवा संबंधी मांगों को लेकर सरकार से बातचीत कर रहे हैं। संघ का दावा है कि मार्च 2026 में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव के साथ हुई बातचीत में कुछ मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन उसके बाद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

अमीनों की प्रमुख मांगों में वेतनमान को पे लेवल-6 किए जाने, लंबित स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी करने, यात्रा एवं पेट्रोल भत्ता देने, खाली पदों पर नियुक्ति, पदनाम में बदलाव और प्रमोशन की व्यवस्था शामिल है।

ट्रांसफर और प्रमोशन भी बड़ी मांग

अमीन संघ का कहना है कि विभाग की ओर से स्थानांतरण के लिए कई बार पोर्टल खोला गया, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। संघ के मुताबिक कुछ कर्मचारी अपने गृह जिले से काफी दूर पदस्थापित हैं और लंबे समय से तबादले की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

प्रमोशन को लेकर भी अमीनों की नाराजगी है। उनका कहना है कि अमीन के पद पर नियुक्त होने के बाद लंबे समय तक सेवा करने के बावजूद पदोन्नति के अवसर सीमित हैं। वे अन्य सरकारी सेवाओं की तरह अपने कैडर में भी स्पष्ट प्रमोशन व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

जमीन की मापी और राजस्व कार्यों पर असर

अमीनों का काम जमीन की मापी और विभिन्न राजस्व प्रक्रियाओं से सीधे जुड़ा है। ऐसे में हड़ताल का असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जो जमीन की मापी, सीमा निर्धारण या न्यायालय से संबंधित मापी के लिए सरकारी अमीन पर निर्भर हैं।

अमीन संघ का दावा है कि हड़ताल के कारण राज्य के कई हिस्सों में जमीन मापी से जुड़े काम रुक गए हैं। हालांकि, अलग-अलग जिलों में इसका वास्तविक प्रभाव स्थानीय स्तर पर अलग हो सकता है।

जमाबंदी शुद्धिकरण अभियान के बीच बढ़ी चुनौती

हड़ताल ऐसे समय में हुई है जब बिहार में जमाबंदी अद्यतीकरण, शुद्धिकरण और उत्तराधिकार नामांतरण को लेकर विशेष अभियान चल रहा है। इस अभियान का उद्देश्य राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज गलतियों को ठीक करना और संबंधित रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित करना है।

सरकार के अनुसार विशेष अभियान 15 सितंबर से शुरू हुआ है और 31 अक्टूबर 2026 तक चलना है। अभियान के दौरान जरूरत पड़ने पर जमीन की मापी भी नि:शुल्क कराने की व्यवस्था बताई गई है।

ऐसे में बड़ी संख्या में नियमित अमीनों के हड़ताल पर जाने से अभियान की गति प्रभावित होने की आशंका है, खासकर उन मामलों में जहां स्थल निरीक्षण या मापी की आवश्यकता है।

9 अक्टूबर से पटना में बड़ा धरना

जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन के बाद अब बिहार राजस्व अमीन संघ ने आंदोलन को राजधानी पटना तक ले जाने का फैसला किया है। 9 अक्टूबर से गर्दनीबाग में धरना-प्रदर्शन प्रस्तावित है।

संघ ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं हुई तो आंदोलन को आगे और तेज किया जा सकता है।

यात्रा भत्ता भी अहम मुद्दा

अमीनों का कहना है कि उनका काम मुख्य रूप से फील्ड आधारित है। जमीन की मापी और अन्य राजस्व कार्यों के लिए उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में जाना पड़ता है। संघ के अनुसार कई बार निजी वाहन से लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, लेकिन यात्रा या पेट्रोल खर्च के लिए पर्याप्त सरकारी भत्ता नहीं मिलता।

आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है?

यदि हड़ताल लंबी चलती है तो जमीन से जुड़े कई मामलों के निपटारे में देरी हो सकती है। खास तौर पर जमीन की मापी, सीमा विवाद, न्यायालय से संबंधित मापी और जमाबंदी रिकॉर्ड के सुधार जैसे मामलों में अतिरिक्त समय लगने की संभावना है।

यह प्रभाव ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब राज्य में राजस्व रिकॉर्ड को अपडेट करने और जमाबंदी में त्रुटियों को दूर करने का विशेष अभियान भी चल रहा है।

Insights

बिहार में अमीनों की हड़ताल केवल कर्मचारियों की सेवा शर्तों से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध भूमि रिकॉर्ड और आम नागरिकों की रोजमर्रा की राजस्व सेवाओं से है। जमीन की मापी और रिकॉर्ड सुधार में देरी का असर खरीद-बिक्री, पारिवारिक बंटवारे, सीमांकन और न्यायालय से जुड़े मामलों तक पहुंच सकता है।

दूसरी ओर, सरकार के सामने चुनौती यह है कि कर्मचारियों की मांगों और चल रहे भूमि रिकॉर्ड सुधार अभियान के बीच प्रशासनिक व्यवस्था को कैसे बनाए रखा जाए। खासकर 31 अक्टूबर की समयसीमा वाले विशेष अभियान के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था या अतिरिक्त मानवबल की जरूरत पड़ सकती है।

बिहार में करीब 1,200 अमीनों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने जमीन और राजस्व से जुड़े कामकाज को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब 9 अक्टूबर से पटना में प्रस्तावित धरने के बाद सरकार और अमीन संघ के बीच बातचीत और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। यदि गतिरोध जल्द नहीं सुलझा, तो जमीन मापी और जमाबंदी से जुड़े लंबित मामलों का दबाव बढ़ सकता है।

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