बिहार सरकार ने इस निकासी के बाद बैराज के निकटवर्ती जिलों में सतर्कता का आदेश दिया है। जल निकासी की गति और मात्रा को देखते हुए, गंडक नदी के किनारों पर स्थित कई शहरों में जल स्तर बढ़ने की संभावना को लेकर आपातकालीन तैयारी की गई है। स्थानीय प्रशासन ने विशेष रूप से पटना, गोधरा और सहरसा जिलों में जल निकासी के संभावित प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए रेत बंधी बुनियादी ढांचा तैयार किया है।
पिछले महीने नेपाल में तेज़ बाढ़ के कारण लाखों लोगों को विस्थापित किया गया, जिससे भारतीय सीमा के निकट स्थित बक्सर, भागलपुर और मधुबनी जैसे जिलों में बाढ़‑प्रवणता का स्तर बढ़ गया। बाढ़‑प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य के दौरान बुनियादी सुविधाओं की कमी, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम और खाद्य सामग्री की कमी प्रमुख समस्याएँ बनकर उभरी हैं। इन परिस्थितियों में गंडक बैराज से निकाली जा रही बड़ी मात्रा में जल का प्रबंधन दोनों देशों के जल‑संपदा सहयोग को और जटिल बना रहा है।
गंडक बैराज के संचालन में प्रमुख भूमिका निभाने वाली जल संसाधन विभाग ने बताया कि बैराज से निकाली गई जल की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए कई तकनीकी उपाय अपनाए जा रहे हैं। बैराज के सभी 36 गेटों को समन्वित रूप से खोलना, जल स्तर की निरंतर निगरानी और संभावित बाढ़‑क्षेत्रों में जल‑निकासी की गति को समायोजित करना प्रमुख कदम हैं। विभाग ने यह भी कहा कि निकासी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की असमानता या देरी न हो, इसके लिए विशेष कमान स्थापित की गई है।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट ने इस जल निकासी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जल प्रबंधन में पारदर्शिता और समयबद्धता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “हम जल निकासी की प्रक्रिया को पूरी तरह से निगरानी में रखेंगे और सभी प्रभावित जिलों में आपातकालीन उपायों को तेज़ी से लागू करेंगे। जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए हम सभी आवश्यक कदम उठाएंगे।” उन्होंने साथ ही नेपाल के साथ सहयोग को भी सुदृढ़ करने का आश्वासन दिया, जिससे दोनों देशों के बीच जल‑संसाधन संबंधों में संतुलन बना रहे।
बिहार के प्रमुख राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर अपने-अपने बयानों में कहा कि जल निकासी की प्रक्रिया में किसी भी त्रुटि से बाढ़‑पीड़ित क्षेत्रों में स्थिति और बिगड़ सकती है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने जल निकासी में पारदर्शिता की माँग की और कहा कि जनता को सटीक जानकारी प्रदान की जानी चाहिए। वहीं बिहार राष्ट्रवादी पार्टी ने सरकार के जल‑प्रबंधन उपायों को सराहा, लेकिन कहा कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए अधिक सुदृढ़ बुनियादी ढाँचा तैयार किया जाना चाहिए।
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