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मुंबई पुलिस ने ₹25.45 करोड़ के “म्यूल” खाता रैकेट को ध्वस्त किया, जिसमें तीन मध्यप्रदेश एजेंट गिरफ्तार किये गये।

मुंबई पुलिस ने पिछले दो हफ्तों में एक बड़े अंतरराज्यीय सायबर धोखाधड़ी रैकेट को ध्वस्त किया, जिसमें ₹२५.४५ करोड़ मूल्य के “म्यूल” खाते तैयार किए जा रहे थे। यह ऑपरेशन कई राज्यों में फैले कई झाँसीखोरों के बीच समन्वय का परिणाम था, और आज तक की सबसे

बड़ी वित्तीय घोटाले की रूपरेखा को उजागर करता है। इस कार्रवाई में तीन मध्य प्रदेश के एजेंटों को मुख्य रूप से “अकाउंट किट” तैयार करने के लिये पकड़ा गया, जो विभिन्न ठगों को साइबर धोखाधड़ी में सहयोग प्रदान करता था।

रिपोर्ट के अनुसार, इस रैकेट ने

डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर विभिन्न वित्तीय धोखाधड़ी स्कीमों को चलाने के लिये “म्यूल” खातों का नेटवर्क स्थापित किया था। इन खातों का उपयोग पीड़ितों की निधियों को एकत्र करने, फिर उसे कई छोटे-छोटे खातों में बाँटने के लिये किया जाता था, जिससे ट्रैकिंग कठिन हो जाती। इस प्रक्रिया

में धोखेबाजों ने अक्सर एटीएम कार्ड, मोबाइल वॉलेट और ऑनलाइन बैंकिंग सुविधाओं का दुरुपयोग किया, और इस प्रकार बड़ी रकम को धुंधले रास्तों से निकाल दिया।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस रैकेट की शुरुआत दो वर्ष पूर्व हुई थी, जब इसे पहली

बार एक छोटे स्तर पर पकड़ा गया था। तब से इस समूह ने तकनीकी विशेषज्ञों और वित्तीय ठगी में माहिर लोगों को जोड़कर अपनी कार्यप्रणाली को परिपक्व बनाया। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के तीन एजेंटों ने “खाता किट” तैयार करने के लिये विभिन्न सरकारी दस्तावेज़ों, पहचान

प्रमाणों और नकली पते का प्रयोग किया, जिससे ये खाते आसानी से खुल सके।

रिपोर्ट के अनुसार, इस रैकेट के प्रमुख कार्यकारी ने देश के विभिन्न शहरों में “म्यूल” खातों को सक्रिय करने के लिये स्थानीय नेटवर्क का उपयोग किया। मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता और बंगलुरु

जैसे प्रमुख शहरी केंद्रों में इन खातों को स्थापित करने के लिये स्थानीय धुंधले व्यापारियों और छोटे-छोटे एजेंटों को नियुक्त किया गया। इस नेटवर्क ने डिजिटल लेनदेन को छिपाने के लिये कई लेयर बनाये, जिससे धन का प्रवाह कई बार जटिल हो जाता।

जांच के दौरान

पुलिस को ४५ सक्रिय “म्यूल” खाते मिले, जिनमें से कई का उपयोग पहले ही कई धोखाधड़ी मामलों में किया जा चुका था। इन खातों से कुल मिलाकर ₹२५.४५ करोड़ की धनराशि निकाली गई थी, जो विभिन्न ऑनलाइन शॉपिंग, पेमेन्ट गेटवे और मोबाइल रिचार्ज प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से

ट्रांसफर की गई थी। खाते खोलने की प्रक्रिया में कई बार नकली पहचान दस्तावेज़, फर्जी पते और फर्जी मोबाइल नंबरों का उपयोग किया गया, जिससे पहचान की पुष्टि करना मुश्किल हो गया।

पुलिस ने इन खातों को फ्रीज करने के लिये सभी प्रमुख बैंकों और डिजिटल

वॉलेट प्रदाताओं को सूचना दी, और साथ ही इन प्लेटफ़ॉर्म के साथ मिलकर एक विशेष टास्क फोर्स बनायी गयी। इस टास्क फोर्स ने तुरंत खातों को बंद कर दिया और शेष धन को सुरक्षित किया। इसके अलावा, पुलिस ने इस रैकेट से जुड़े १०० से अधिक व्यक्तियों

के खिलाफ FIR दर्ज की, और कई को गिरफ्तार कर लिया।

रिपोर्ट के अनुसार, इस ऑपरेशन में तीन मध्य प्रदेश के एजेंटों को विशेष रूप से “अकाउंट किट” तैयार करने के लिये पहचाना गया। इन एजेंटों ने विभिन्न सरकारी विभागों से डेटा लीकेज करके खातों को

वैध बनाने में मदद की। इस प्रक्रिया में उन्होंने कई सरकारी वेबसाइटों से डेटा निकालकर, उसे संशोधित करके और फिर फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर, खातों को खुलवाया। इस प्रकार, इस रैकेट की तकनीकी क्षमता और वित्तीय संसाधन दोनों ही अत्यधिक विकसित थे।

जांच में मिली जानकारी

से पता चलता है कि इस रैकेट ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और मैसेंजर एप्लिकेशन का भी बड़े पैमाने पर उपयोग किया। उन्होंने फ़िशिंग लिंक, नकली विज्ञापन और धोखाधड़ी वाले लॉटरी स्कीम के माध्यम से लोगों को आकर्षित किया। इन अभियानों के माध्यम से उन्होंने लाखों नागरिकों को

फँसाया और उनकी जमा राशि को “म्यूल” खातों में जमा कर दिया।

पुलिस ने कहा कि इस रैकेट की मुख्य चालें दो भागों में विभाजित थीं: एक था “खाता निर्माण” और दूसरा था “धोखाधड़ी संचालन”। “खाता निर्माण” में एजेंटों ने फर्जी दस्ताव

Updated: August 21, 2026


Mumbai police busted a pan‑India cyber‑fraud ring that had set up 45 fake “Mula” accounts to siphon ₹25.45 crore, arresting over 100 suspects including three Madhya Pradesh agents who supplied the fraudulent account kits. The operation, coordinated across major cities, led to the freezing of the accounts, recovery of the funds and the filing of FIRs against the network’s members.

Insight: The bust exposes a coordinated, multi‑state cyber‑fraud network that had created dozens of fake “Mule” accounts to launder ₹25.45 crore, highlighting vulnerabilities in digital payment systems.

It prompted authorities to freeze the accounts, secure the funds and launch a joint task force with banks and e‑wallet providers.

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