की अपील की। इस बयान के बाद तुरंत ही राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी, जिससे इस मुद्दे पर चर्चा का दायरा व्यापक हो गया।
धीरेंद्र शास्त्री मध्य प्रदेश के एक प्रमुख धार्मिक व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते हैं और पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने कई सामाजिक अभियानों में सक्रिय भूमिका
निभाई है। बागेश्वर बाबा नाम से उन्हें लोकप्रियता प्राप्त हुई, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ उनके धर्मोपदेश और सामाजिक कार्यों को सराहा जाता है। उनका राजनीतिक जुड़ाव पहले भी विभिन्न दलों के साथ रहा है, परन्तु हाल के वर्षों में उन्होंने किसी भी पार्टी से औपचारिक रूप से दूरी बनाए रखी थी। इस संदर्भ में, उनके पश्चिम बंगाल के मंत्री
वर्ग के साथ भोजन करते हुए देखे जाना, उनकी सामाजिक पहुँच को दर्शाता है।
बांग्लादेशी राजनयिक और स्थानीय प्रशासनिक स्रोतों ने बताया कि शास्त्री ने कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को धन्यवाद दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि उनका भाषण केवल धार्मिक नहीं बल्कि राजनैतिक पहलू भी रखता था। इस प्रकार के सार्वजनिक मंच पर उनके
बयान ने कई विचारधाराओं को एक साथ लाया, जिससे स्थिति जटिल हो गई। विशेषकर पश्चिम बंगाल में शाकाहारी आंदोलन के साथ-साथ मांस उद्योग के प्रतिनिधियों ने इस बयान को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया तैयार करनी शुरू कर दी।
भाजपा ने तुरंत एक आधिकारिक बयान जारी करके शास्त्री के इस बयान से अपना संबंध तोड़ने की घोषणा की। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा
कि “हमारी पार्टी का शास्त्री के व्यक्तिगत विचारों से कोई संबंध नहीं है और हम किसी भी प्रकार के धर्म या व्यक्तिगत मान्यताओं पर आधारित बयान से दूर रहेंगे।” यह स्पष्ट करने के बाद भाजपा ने यह भी बताया कि शास्त्री को पार्टी के किसी भी आधिकारिक मंच पर नहीं लाया गया था और उनके कार्यों को व्यक्तिगत रूप से
देखा जाना चाहिए। इस कदम से भाजपा के भीतर कई वरिष्ठ नेता भी आश्चर्यचकित हुए, जिन्होंने इस पर विभिन्न स्तरों पर चर्चा शुरू कर दी।
कांग्रेस ने शास्त्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की घोषणा की और तुरंत कोलकाता पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि “हिंसा और सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देने वाले बयान का
कोई भी समर्थन नहीं किया जा सकता, और हम इस बात को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि शास्त्री के बयान से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है, खासकर पश्चिम बंगाल जैसे विविध सांस्कृतिक प्रदेश में। इस शिकायत के साथ ही, कांग्रेस ने शास्त्री के बयान को “धार्मिक उग्रवाद” के रूप में वर्गीकृत किया और यह
अनुरोध किया कि पुलिस इस मामले की सख्ती से जाँच करे।
पश्चिम बंगाल की राज्य पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और शास्त्री के बयान को संभावित ‘सामुदायिक विवाद’ के रूप में दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि उन्होंने पहले ही शास्त्री को पूछताछ के लिए बुलाया है और उनके बयान की सच्चाई एवं प्रभाव का
मूल्यांकन किया जा रहा है। इस बीच, पश्चिम बंगाल के मांस उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि शास्त्री का बयान “व्यावसायिक नुकसान” का कारण बन सकता है और उन्होंने भी उचित कानूनी कदम उठाने की बात कही है। इस प्रकार, विभिन्न हितधारकों के बीच तनाव बढ़ रहा है, जिससे इस मुद्दे का सामाजिक एवं आर्थिक पहलू स्पष्ट हो रहा है।
देशी और
विदेशी मीडिया ने इस घटना को व्यापक रूप से कवरेज दिया है। कई राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने बताया कि शास्त्री का बयान केवल धार्मिक नहीं बल्कि आर्थिक भी हो सकता है, क्योंकि पश्चिम बंगाल में मांस उत्पादन और व्यापार का बड़ा योगदान है। विदेशी विश्लेषकों ने यह संकेत किया कि इस प्रकार के सार्वजनिक बयान से भारत के खाद्य निर्यात
पर भी असर पड़ सकता है, विशेषकर जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय मांस उत्पादों को उच्च मानकों के तहत देखा जाता है। इस संदर्भ में, कई आर्थिक विशेषज्ञों ने कहा कि राजनीतिक एवं धार्मिक बयान अक्सर बाजार में अस्थिरता लाते हैं।
शास्त्री के समर्थन समूह ने कहा कि उनका बयान “धार्मिक स्वतंत्रता” और “स्वस्थ जीवनशैली” को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से
था। उन्होंने यह भी कहा कि उनका मकसद किसी विशेष वर्ग को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सभी को शाकाहार के लाभों के बारे में जागरूक करना है। इस समूह के प्रमुख ने कहा कि शास्त्री ने हमेशा सामाजिक सुधार की दिशा में कार्य किया है और इस बार भी उनका उद्देश्य सामाजिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। उन्होंने यह भी
कहा कि यदि कोई कानूनी कार्रवाई की जाएगी, तो वे शास्त्री की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले पर अपना विचार व्यक्त किया। कई धार्मिक संगठनों ने शास्त्री के बयान को “धार्मिक भावनाओं का उल्लंघन” कहा, जबकि स्वास्थ्य एवं पोषण संगठनों ने
Updated: September 9, 2026
बागेश्वर बाबा के मांसाहार विरोधी बयान से राजनीतिक और सामाजिक तनाव में उछال आया, जिसमें भाजपा ने दूरी बनाई और कांग्रेस ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पश्चिम बंगाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जबकि मांस उद्योग और विपक्षी दल इसकी गंभीरता पर अपनी प्रतिक्रिया जता रहे हैं।
This development could shape future developments as the situation continues to evolve.