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लालू प्रसाद को बंधक बनाने का आरोप गंभीर, सीबीआई संज्ञान ले – सुशील कुमार मोदी

लालू प्रसाद चारा घोटाला मामले में जमानत पर हैं, इसलिए उन्हें बंधक बनाये जाने के परिवार के बड़े बेटे के आरोप को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

लालू प्रसाद को बंधक बनाने का आरोप गंभीर, सीबीआई संज्ञान ले – सुशील कुमार मोदी

लालू को बंधक बनाये जाने वाले बयान को लेकर बिहार की राजनीति गरमाई

लालू के लाल तेज प्रताप द्वारा लालू के बंधक वाला दिए गए बयान के बाद बिहार के राजनितिक गलियारों में भूचाल आ गया है । इस बयान के बाद एनडीए को एक नया मुद्दा मिल गया है । तेज प्रताप के बयान देने के बाद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष् डॉ संजय जायसवाल ने एक बड़ा बयान दिया है ।

संजय जायसवाल ने कहा कि राजद अब औरंगजेब कि पार्टी बन गई है । क्योकि तेजस्वी यादव अपने पुरे परिवार को समाप्त कर राजद का मालिक बनना चाहते हैं । और आने वाले वक्त में दूसरा कोई नहीं बल्कि तेजस्वी के शादी के बाद उनका जो पुत्र जन्म लेगा वही राजद का राष्ट्रीय अध्यक्ष् बनेगा ।

क्या कहा संजय जयसवाल ने जरा सुनीय …..

लालू के लाल तेज प्रताप द्वारा लालू के बंधक बनाये जाने के बयान को लेकर बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया है।तेज प्रताप कल छात्र संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहा कि कुछ लोग राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना चाहते हैं और इसके लिए मेरे पिता लालू जी को बंधक बनाये हुए हैं ।

जरा आप भी लालू प्रसाद को लेकर क्या कहा रहा है तेज प्रताप…

हलाकि तेज प्रताप का बयान सीधे तौर पर तेजस्वी पर हमला माना जा रहा है दिल्ली रवाना होने से पहले मीडिया से बात करते हुए तेजस्वी ने कहा कि लालू को बंधक बनाये जाने पर कहा कि
लालू प्रसाद यादव को बंधक बनाने की बात उनके व्यक्तित्व से नहीं मिलता है। लालू प्रसाद यादव ने कई ऐसे कार्य किए हैं जिससे देश और बिहार के लोगों ने पहचानते हैं, लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे, रेल मंत्री रहे दो प्रधानमंत्री बनाया आडवानी को जेल भेजा है ऐसे विराट व्यक्तित्व को कौन बंधक बना कर रख सकता है

आप भी सुनिए लालू प्रसाद को बंधक बनाये जाने पर क्या कहां तेजस्वी…

बिहार में बाढ़ ने फिर दी दस्तक

मुख्यमंत्री ने चक्रवाती तूफान के कारण बाढ़ जैसे हालात को देखते हुये पटना, नालंदा एवं नवादा जिले के प्रभावित कई इलाकों का सड़क मार्ग से जायजा लिया, राहत कार्य को लेकर अधिकारियों को दिये आवश्यक निर्देश ।

पटना 02 अक्टूबर 2021 :- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने चक्रवाती तूफान के कारण बाढ़ जैसे हालात को देखते हुये पटना, नालंदा एवं नवादा जिले के प्रभावित कई इलाकों का सड़क मार्ग से जायजा लिया। लगभग छह घंटे तक मुख्यमंत्री ने प्रभावित इलाकों दौरा किया और ग्रामीणों से स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने नालंदा जिले के बेलछी प्रखण्ड के भीखोचक दरियापुर गांव में पैदल जाकर बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों से बात कर उनके सुझाव भी लिये और अधिकारियों को गांव के पास जलजमाव की स्थिति का स्थायी समाधान हेतु आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने बिंद के पास जिराइन और कुम्हरी नदी में आई उफान के कारण टूटे हुए तटबंध का स्थल पर पैदल जाकर निरीक्षण किया। वहां के ग्रामीणों की समस्याओं को भी मुख्यमंत्री ने गौर से सुना और इसके तत्काल समाधान के लिए अधिकारियों को निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कतरीसराय में सकरी नदी के कारण आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति का जायजा लिया और ग्रामीणों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान हेतु समुचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने नवादा जिले के नारदीगंज प्रखंड के अंतर्गत पंचाने / धनार्जय नदी के बढ़े ।

हुये जलस्तर का भी जायजा लिया। पटना लौटने के क्रम में मुख्यमंत्री ने रहुई प्रखण्ड अन्तर्गत डिहरा पुल से पंचाने नदी के बढ़ते जलस्तर को देखा और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से बातचीत की। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि यहाँ चार-पाँच गाँव नदी के बढ़े जलस्तर के ।

कारण पूरी तरह प्रभावित हुये हैं। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी नालंदा को अविलम्ब सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे नालंदा एवं नवादा के बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने आये हैं। इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की मदद के लिए जो भी जरुरी इंतजाम हैं, वे सभी किये जायेंगे।

निरीक्षण के दौरान जल संसाधन मंत्री श्री संजय कुमार झा, सांसद श्री कौशलेन्द्र कुमार, विधायक श्री जीतेन्द्र कुमार सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री संजीव हंस, पटना प्रमंडल आयुक्त श्री संजय कुमार अग्रवाल, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह, नालंदा के जिलाधिकारी श्री योगेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री हरि प्रसाथ एस० सहित अन्य वरीय पदाधिकारीगण एवं अभियंतागण उपस्थित थे।

तीनकठिया आन्दोलन से जुड़े लोकगीत

तीनकठिया स दियेलहुं मुक्ति आबि अहां यउ गाँधी जी

कहिया धरि हम गहुंम उगेबै आब अहां आउ गाँधी जी

आरि कटैये, धुरि कटैये, कटैये पूरजी गांधी जी
हडपि खेत सरकार कहैये, चलयनै मरजी गांधी जी
कोना हम अपन खेत लुटेबै, आब अहां आउ गांधी जी
तीनकठिया स दियेलहुं मुक्ति आबि अहां यउ गांधी जी

कहिया धरि हम गहुंम उगेबै आब अहां आउ गाँधी जी

माछ ये उपटल, पान ये उपटल, उपटल मखान ये गाँधी
पोखरिक ठेकेदार कहैये, चुका लगान ये गाँधी जी
कथी स अपन खेत पटेबै, आब अहां आउ गाँधी जी
तीनकठिया स दियेलहुं मुक्ति आबि अहां यउ गाँधी जी

कहिया धरि हम गहुंम उगेबै आब अहां आउ गाँधी जी

कार्ड ये भेटल, वार्ड ये भेटल, भेटल आधार ये गाँधी जी
देशक सब अखबार कहैये, छै रोजगार ये गाँधी छी
कतए हम अपन पेट नुकेबै, आब अहां आउ गाँधी जी
तीनकठिया स दियेलहुं मुक्ति आबि अहां यउ गाँधी जी
कहिया धरि हम गहुंम उगेबै आब अहां आउ गाँधी जी

कवि : भवेशनाथ

प्रजातंत्र क़ा आधार है मतदाता सूची की शुद्वाता

वर्ष 2005 में, बिहार में दो बार विधानसभा के चुनाव हुए। एक फरवरी और दूसरा अक्टूबर में। बीच में राष्ट्रपति शासन का दौर रहा। केंद्रीय चुनाव आयोग ने बिहार के दुसरे चुनाव को बहुत गंभीरता से लिया था। पिछले करीब एक दशक से बिहार के चुनावी परिणामों पर आम आदमी का भरोसा उठ सा गया था जिस वजह से हर चुनाव के समाप्त होते ही आरोप-प्रत्यारोप के दौर शुरू हो जाते थे। किसी भी प्रजातंत्रीय व्यवस्था की सेहत के लिए यह स्थिति अनुकूल नहीं होती है।

तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त अत्यंत गंभीर स्वभाव के व्यक्ति थे। यद्यपि कि मैं मात्र IG रैंक का पदाधिकारी था और उनसे मेरा कोई व्यक्तिगत सम्बन्ध भी नहीं था, तथापि उन्होंने मुझे अलग से अपने कार्यालय में तलब किया यह समझने के लिए कि बिहार में स्वच्छ चुनाव कैसे कराया जा सकता है? उनके समक्ष बैठते ही उनका यह सीधा और स्पष्ट प्रश्न मेरे कानों में पड़ा। मैंने उत्तर दिया , “श्रीमान, कोई भी चुनाव उतना ही स्वच्छ होगा जितना कि उसका वोटर लिस्ट। अगर वोटर लिस्ट भ्रष्ट हुआ तो चुनाव स्वच्छ हो ही नहीं सकता।”

अक्टूबर 2005 के बिहार चुनाव का मूल मन्त्र मानो वोटर लिस्ट की शुद्धता बन गया था। एक विधानसभा क्षेत्र में जहाँ गंगा नदी के कटाव के कारण कई पंचायत लाचीरगी हो गए थे, वहाँ के लोगों का नाम विस्थापित होने के बाद भी वोटर लिस्ट में रखा जा रहा था। इसका चुनाव परिणाम पर अस्वस्थ प्रभाव पड़ता था। उस चुनाव में वोटर लिस्ट को “साफ़” करने के अभियान में बड़ी संख्या में बोगस वोटर्स को लिस्ट से निकाला गया।

चुनाव के परिणाम चौंकाने वाले आए। जो पार्टी हारी वह भी अपनी हार स्वीकार कर रही थी।

लम्बे समय तक किसी एक राजनीतिक व्यवस्था का रहना चुनावी प्रक्रिया को “सब्वर्ट” अर्थात विकृत कर देता है। “सबवर्ज़न” की शुरुआत होती है वोटर लिस्ट को भ्रष्ट कर देने से और फ़िर हर कदम पर भ्रष्ट तरीका अपनाया जाता है। इस चुनाव ने दिखा दिया था कि सिर्फ़ एक वोटर लिस्ट को ठीक करने से ही सबवर्ज़न का प्रायः पूरा विष निष्क्रीय हो जाता है।

वोटर लिस्ट की व्यापकता और शुद्धता, दोनों ही महत्वपूर्ण होते हैं।

लेखक — अभयानंद पूर्व आईपीएस अधिकारी

शुभ हो यह दिवस

2अक्तूबर, 2021.
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अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस की बधाइयाँ!
गांधी जयंती के दिन सत्यानुसरण का संकल्प !

शुभ हो यह दिवस !
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मैं स्वीकार करता हूँ ,
गांधी अतीत नहीं, भविष्य हो हमारा!
क्यों कि,
जहर घोलते उद्योग,
विषैली हो चुकी मिट्टी,
विषाक्त वायुमंडल का समाधान है गाँधी !

दूषित राजनीति,
आसुरी तंत्र,
काटने-बाँटने के,
लूटने-कूटने के कारोबार से,
हृदय हीन व्यवसाय से,
निर्मम आचरण और
तद्जन्य घृणा,कटुता,विभेद
भय,संत्रास,कुण्ठा, अवसाद से
मुक्ति का मार्ग है, गाँधी!

सियासत में मनुष्यता,
कारोबार में शुचिता,
समाज में समंजन,
व्यवहार में शील, संयम, परोपकार,
कामना में शांति सद्भाव, समरसता की राह है, गाँधी!

तनाव-दुराव की महामारी,
कट्टरता की व्याधि,
कुटिल, दुष्ट, आसुरी दुष्चक्र से
परित्राण का पथ है, गाँधी !
राजनीति का,
और धर्म का,
और, धर्म-निष्ठ राजनीति का
मंत्र है, गांधी!

सोचो ना,
और कौन कर सकता था, कीर्त्तन-
“अल्लाह-ईश्वर तेरो नाम”
तब,
शैतानी सेकुलर और सिरफिरे कम्यूनल की
औषधि है, गाँधी !
भारत देश की सूरत से एकाकार होता
एक आकार है, गाँधी!
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जब,
अनेक राष्ट्रों की गुंथी एक माला है भारत,
सुमनोहर सुमनों का
एक हार भारत,
रंग-बिरंगे सुवास की
क्यारियाँ है, भारत
तब , इसका
निर्माता-पिता-जनक हो नहीं सकता कोई एक-

युक्तिसंगत नहीं कदाचित,
मानना किसी एक को “राष्ट्र-पिता”!

वाल्मीकि और कृष्ण द्वैपायन वेद-व्यास के,
महावीर और बुद्ध के,
पतंजलि और शंकराचार्य के,
आचार्य शुक्र और अशोक के,
राजेन्द्र चोल और कृष्ण देव राय के,
अथवा,
नानक, कबीर, कम्बन के,
कृत्तिवास, रामानुज , रैदास के,
तुलसी, जायसी रस-खान के
निर्मित-पोषित-विकसित
राष्ट्र का पिता
नहीं है, गांधी !

किंतु,
अवश्य ही
उन अनेक आदर्शो का
वाहक,दण्डधर,ध्वजाधारी है, गाँधी !

शतशः प्रणाम उस गांधी को!
विषाक्त इस संसार के
“वांछित भविष्य” को
सादर नमन !

लेखक –नेतरहाट स्कूल के छात्र

गाँधी और चंपारण

आज महात्मा गाँधी की जयंती पर मैं थोड़ी-सी चर्चा उस एक शख्स की करना चाहता हूं जो अगर न होता तो न गाँधी नहीं होते और न हमारे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास वैसा होता जैसा आज हम जानते हैं। वे एक शख्स थे चंपारण के बतख मियां। बात 1917 की है जब दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद चंपारण के किसान और स्वतंत्रता सेनानी राजकुमार शुक्ल के आमंत्रण पर गाँधी डॉ राजेन्द्र प्रसाद तथा अन्य लोगों के साथ अंग्रेजों के हाथों नीलहे किसानों की दुर्दशा का ज़ायज़ा लेने चंपारण आए थे। चंपारण प्रवास के दौरान उन्हें जनता का अपार समर्थन मिला था।

लोगों के आंदोलित होने से जिले में विद्रोह और विधि-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने की प्रबल आशंका थी। वार्ता के उद्देश्य से नील के खेतों के तत्कालीन अंग्रेज मैनेजर इरविन ने मोतिहारी में गांधी जी को रात्रिभोज पर आमंत्रित किया। बतख मियां इरविन के ख़ास रसोईया हुआ करते थे।

इरविन ने गाँधी की हत्या के के उद्देश्य से बतख मियां को जहर मिला दूध का गिलास देने का आदेश दिया। निलहे किसानों की दुर्दशा से व्यथित बतख मियां को गांधी में उम्मीद की किरण नज़र आई थी। उनकी अंतरात्मा को इरविन का यह आदेश कबूल नहीं हुआ। उन्होंने गांधी जी को दूध का ग्लास देते हुए वहां उपस्थित राजेन्द्र प्रसाद के कानों में यह बात डाल दी।

उस दिन गाँधी की जान तो बच गई लेकिन बतख मियां और उनके परिवार को बाद में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी। अंग्रेजों ने उन्हें बेरहमी से पीटा, सलाखों के पीछे डाला और उनके छोटे-से घर को ध्वस्त कर कब्रिस्तान बना दिया। देश की आज़ादी के बाद 1950 में मोतिहारी यात्रा के क्रम में देश के पहले राष्ट्रपति बने डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने बतख मियां की खोज खबर ली और प्रशासन को उन्हें कुछ एकड़ जमीन आबंटित करने का आदेश दिया।

बतख मियां की लाख भागदौड़ के बावजूद प्रशासनिक सुस्ती के कारण वह जमीन उन्हें नहीं मिल सकी। निर्धनता की हालत में ही 1957 में बतख मियां ने दम तोड़ दिया।चंपारण में उनकी स्मृति अब मोतिहारी रेल स्टेशन पर बतख मियां द्वार के रूप में ही सुरक्षित हैं !

आज गाँधी जयंती पर बापू के साथ बतख मियां की स्मृतियों को भी सलाम !

लेखक –ध्रुव गुप्ता पूर्व आईपीएस अधिकारी

गाँधी को कोई मार नहीं सकता है

मैं इतिहास का छात्र रहा हूँ और साहित्य में मेरी स्वाभाविक रूचि रही है। इस नाते इतिहास ने वस्तुनिष्ठता दी, तो साहित्य ने विषयनिष्ठ बनाया। इन सबके बीच मेरी संवेदनशील आलोचना-दृष्टि आकार ग्रहण करती चली गयी, और व्यावहारिक तक़ाज़ों के दबावों के बावजूद आज यही ‘संवेदनशील आलोचना-दृष्टि’ मेरे व्यक्तित्व की पहचान बन चुकी है।

मुझे लगता है कि इस ‘संवेदनशील आलोचना-दृष्टि’ के बिना गाँधी को जानना और समझना मुश्किल है। जब में इतिहास ऑनर्स का छात्र था, तो ग्रेजुएशन के उन दिनों गाँधी और गाँधीवाद की समझ न होने के कारण उसकी नकारात्मक आलोचना ऊर्जा और उत्साह का संचार करती रही, पर जैसे-जैसे गाँधी को जाना-समझा, उनसे प्यार होता चला गया। और अब तो इस प्यार का यह आलम है कि मेरी नज़रों में गाँधी और गाँधीवाद भारतीयता का पर्याय है।

गाँधी होने के मायने:
गाँधी से प्रेम का मतलब है भारत से प्रेम करना, भारतीयता से प्रेम करना। गाँधी से प्रेम किए बिना भारत से प्रेम नहीं किया जा सकता है और गाँधीवाद की समझ के बिना भारतीयता की समझ मुश्किल है। और, गाँधी से नफ़रत करके तो भारत से प्रेम किया ही नहीं जा सकता है। ऐसा कोई भी दावा ढ़कोसला है और ऐसा दावा करने वाले देश को खोखला कर रहे हैं।

इसलिए गोडसेवादियों को मेरा दो-टूक सन्देश है: “गाँधी को तुम मार न सकोगे, और गोडसे को तुम जिला न सकोगे। मारा व्यक्ति को जा सकता है, विचार को नहीं; और तुमने ‘गाँधी’ नाम के व्यक्ति को मारकर यह सुनिश्चित कर दिया कि विचार के रूप में गाँधी मरेगा नहीं, मर ही नहीं सकता, क्योंकि यह रामत्व और रावणत्व के प्रश्न से जाकर सम्बद्ध हो गया।

तुमने रावणत्व का पक्ष लेकर गाँधी को मजबूती से राम के पाले में ले जाकर खड़ा कर दिया। अगर गाँधी को मारना सम्भव होता, तो 30 जनवरी,1948 को गाँधी की हत्या के बावजूद गाँधी का भूत तुम्हें इस कदर डरा नहीं रहा होता और गाँधी तुम्हारी छाती पर चढ़कर मूँग नहीं दल रहे होते।”  

गाँधी भारतीयता के पर्याय:
गाँधी और गाँधीवाद को लेकर मेरी इस समझ को विकसित करने में इतिहास की भूमिका नहीं रही, ऐसा तो मैं नहीं कहूँगा क्योंकि गाँधी को समझने की यात्रा ही इतिहास से शुरू हुई; पर यह ज़रूर कहूँगा कि इस समझ को विकसित करने में साहित्य ने कहीं अधिक एवं निर्णायक भूमिका निभायी। मैंने गौतम बुद्ध, कबीर और तुलसी से लेकर मैथिली शरण गुप्त, प्रेमचन्द, प्रसाद, निराला, दिनकर, नागार्जुन और रेणु के साहित्य के ज़रिए भारतीय परम्परा, भारतीय समाज और भारतीय संस्कृति को भी समझने की कोशिश की तथा इसके सापेक्ष गाँधी और गाँधीवाद को रखकर देखा।

मुझे इनके बीच का फर्क मिटता हुआ दिखा, और फिर मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि इन सारे चिन्तकों ने युगीन चुनौतियों के परिप्रेक्ष्य में भारतीय सांस्कृतिक चिंतन परम्परा की पुनर्व्याख्या की। बुद्ध ने ‘मध्यमा प्रतिपदा’ के ज़रिये अपनी युगीन चिंताओं का समाधान प्रस्तुत करने का प्रयास किया, तो तुलसी ने समन्वयवादी चेतना के धरातल पर।

गाँधी ने यही काम सर्वधर्मसमभाव और अहिंसक सत्याग्रह के ज़रिये किया। इसने मुझे इस निष्कर्ष पर पहुँचाया कि भारत की सामासिक संस्कृति के केन्द्र में वैष्णव धर्म और वैष्णव संस्कार मौजूद है, सहिष्णुता एवं समन्वय जिसके प्राण-तत्व हैं, लेकिन इसका दायरा यहीं तक सीमित नहीं है। इसीलिए न तो वैष्णव धर्म और वैष्णव संस्कारों तक सीमित रहकर भारत और भारतीयता को समझा जा सकता है और न ही इसको नकार कर।

द्वंद्व और तनाव:
न तो भारतीय समाज कोई समरूप समाज रहा हो और न ही भारतीय संस्कृति समरूप संस्कृति। विविधता से भरे समाज और संस्कृति में में समरूपता सम्भव भी नहीं है। स्वाभाविक है कि यह विविधता विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक समूहों के बीच हितों के टकराव को जन्म दे।

निश्चय ही यह स्थिति भारतीय समाज और संस्कृति में द्वंद्व एवं तनाव को जन्म देती है, और इस द्वंद्व एवं तनाव का लम्बा इतिहास रहा है। लेकिन, यह द्वंद्व और तनाव भारतीय समाज और संस्कृति का अंतिम सत्य कभी नहीं रहा।


द्वंद्व और तनाव: अंतिम सत्य नहीं:

कबीर ने इस बात को समझा, इसीलिए वे असहमति एवं विरोध तक ही सीमित नहीं रहे, वरन् उन्होंने अपने असहमति एवं विरोध को एक न्यायपूर्ण मानवीय समाज के निर्माण के साधन में तब्दील कर दिया। इसीलिए वे घृणा और विध्वंस तक नहीं रुके, वरन् प्रेम की बात करते हुए समन्वय के ज़रिये सृजन की प्रस्तावना की और इसी के कारण दुनिया ने उन्हें युगान्तर की क्षमता से लैस युग-प्रवर्तक एवं क्रान्तिकारी के रूप में सैल्यूट किया।

तुलसी ने तो उनकी इसी समन्वयवादी चेतना को अपनी रचना-दृष्टि के केन्द्र में रखा। इस बात को गाँधी ने भी समझा, और उनके युग के साहित्यकारों ने भी। इसी समझ ने उन्हें तुलसी के करीब लाने का काम किया, और इसी समझ के कारण रूसी क्रान्ति, मार्क्स और मार्क्सवाद के प्रति तमाम आकर्षण के बावजूद प्रेमचन्द गाँधी और गाँधीवाद के प्रति अपने मोह को अन्त-अन्त तक छोड़ नहीं पाए।

इसी मोह ने साम्यवाद के प्रति आकर्षण के बावजूद प्रसाद को भारतीय परम्परा एवं संस्कृति से दृढ़तापूर्वक जोड़े रखा। इसी मोह के कारण रेणु को भी समाजवाद और साम्यवाद भारतीय मसलों का हल दे पाने में असमर्थ लगा और इसकी क्रान्तिधर्मी चेतना के प्रति तमाम आकर्षण के बावजूद इसके लिए उन्हें गाँधी और गाँधीवाद की शरण लेनी पड़ी। और, इसी मोह के कारण राष्ट्रकवि दिनकर को यह कहना पड़ा:

अच्छे लगते हैं मार्क्स, किन्तु प्रेम अधिक है गाँधी से!
दरअसल गाँधी को कहावतों में तब्दील करते हुए भले ही हम कहते रहे हों कि ‘मजबूरी का नाम महात्मा गाँधी’, पर वास्तविकता यह है कि गाँधी हमारी मजबूरी भी हैं और मजबूती भी।

यह गाँधी और गाँधीवाद की मजबूती है जो उन्हें हमारी मजबूरी में तब्दील कर देती है और इसी मजबूती के कारण दक्षिणपंथियों के खिलाफ अपनी लड़ाई में वामपंथ भी गाँधी की शरण में जाने के लिए विवश होता है, और दक्षिणपंथियों को भी भारत के भीतर से लेकर भारत के बाहर तक अपनी स्वीकार्यता सुनिश्चित करने के लिए गाँधी के दरवाज़े पर मत्थे टेकने होते हैं। पर, गाँधी और गाँधीवाद की विडंबना यह है कि उनके समर्थकों से लेकर उनके विरोधियों तक में उन्हें भुनाने और बेचने की होड़ लगी हुई है, और यही उसकी त्रासदी है।


गाँधीवाद: अपार धैर्य की माँग:
दरअसल गाँधी में कुछ ऐसा है जो हमें गाँधी से पूरी तरह से जुड़ने नहीं देता है। मार्क्स और मार्क्सवाद में जो क्षणिक आकर्षण है, उस क्षणिक आकर्षण का गाँधी और गाँधीवाद में अभाव है। कारण यह कि गाँधीवाद बदलाव की जिस प्रक्रिया की प्रस्तावना करता है, बदलाव की वह प्रक्रिया अत्यन्त धीमी एवं क्रमिक है, और इसीलिए थकाऊ एवं उबाऊ भी। और, उसकी यह कमी कई बार हमें विचलित करती है क्योंकि हममें इतना धैर्य नहीं होता है, बदलाव के लिए जितने धैर्य की अपेक्षा गाँधी और गाँधीवाद हमसे करता है।

यह स्थिति हमें मोहभंग की ओर ले जाती है और यह मोहभंग वैकल्पिक संभावनाओं की तलाश की ओर। इसके विपरीत, मार्क्सवाद में गजब का आकर्षण है। यह क्रान्ति के ज़रिये त्वरित बदलाव की बात करता है जिसकी परिकल्पना मात्र हमें रोमांचित करती है। इसीलिए गाँधी एवं गाँधीवाद से मोहभंग ने अक्सर भारतीय साहित्यकारों एवं चिन्तकों को मार्क्सवाद की ओर धकेलने का काम किया।

मार्क्सवाद की खामियाँ:
तमाम खूबियों के बावजूद मार्क्सवाद के प्रति आकर्षण टिक नहीं पाया। दरअसल, मार्क्स से भारतीय समाज एवं संस्कृति, या फिर भारतीय की सोच एवं मानसिकता को समझने की अपेक्षा नहीं की जा सकती है। तब तो और भी नहीं, जब एशियाई समाज को लेकर मार्क्स के अपने पूर्वाग्रह हैं, और अधिकांश भारतीय वामपन्थी तक इसे समझ पाने में असफल रहे।

राम विलास शर्मा, नामवर सिंह से लेकर मुक्तिबोध और बाबा नागार्जुन तक जिन वामपंथियों ने इसे समझने की कोशिश की, उन्हें ‘अपनों’ के बीच ही उपेक्षा एवं तिरस्कार का सामना करना पड़ा। कभी उन्हें समग्रता में नहीं अपनाया गया, अपनी सुविधा के हिसाब से उन्हें टुकड़ों में लेने और समझने की कोशिश की गयी।

इसीलिये मार्क्सवाद का भारतीय परम्परा और संस्कृति से मेल नहीं है। इसके विपरीत, गाँधी का शनै:-शनै बदलाव परम्परा और संस्कृति की अवहेलना नहीं करता, वरन् उसके दायरे में रहते हुए ही बदलाव की प्रस्तावना करता है और व्यवस्था को मानवीय रूप प्रदान करता हुआ उन तमाम मसलों का हल सुझाता है जिनसे हमारा युग, समय, समाज और परिवेश जूझ रहा है।

इसके विपरीत, मार्क्स और मार्क्सवाद आमूलचूल बदलाव की बात करता है और बदलाव की इस प्रक्रिया में समाज एवं संस्कृति की अवहेलना छुपी हुई है। साथ ही, गाँधी और गाँधीवाद समझने की ज़रूरत पर बल देता है, जबकि मार्क्स एवं मार्क्सवाद समझाने की ज़रूरत पर बल। एक स्वत:स्फूर्त चेतना की परिस्थितियों को निर्मित करने में विश्वास करता है, तो दूसरा उस चेतना को आरोपित करने में।

यही वह पृष्ठभूमि है जिसमें इसीलिये मैं यह महसूस करता हूँ कि गाँधी को तुम मार नहीं सकोगे:

लेखक– सर्वेश कुमार

सारे जहां के गाँधी

सारे जहां के गाँधी –ओम थानवी

आज की राजनीति में अमेरिका गोया भगवान बन गया है। वाइट हाउस में पाँव धरना, आने-जाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति से झूठे-सच्चे संबंधों पर इतराना, बार-बार उस दूरी को नापना।

गाँधीजी कभी अमेरिका नहीं गए। लेकिन अमेरिका में छाए रहे। कई सुविख्यात पत्रिकाओं में गाँधीजी छवि को आवरण पर दिया गया। बारम्बार।

अपनी अटलांटा यात्रा में मैंने मार्टिन लूथर किंग जू. गाँधी स्मृति घर में गाँधीजी की अनेक तसवीरें और किताबें देखीं, जो किंग ने ख़ुद जमा की थीं। बाद में तो ख़ुद किंग “अमेरिकी गाँधी” कहलाए।

उनकी हत्या भी किसी सिरफिरे ने उसी घृणा के चलते की, जो हमारे यहाँ गोडसे और उसके आराध्य संगठनों में गहरे पैठी हुई थी।

गाँधी जयंती पर खास रिपोर्ट

गाँधी जी ने कहा था निकम्मे अख़बार फेंक दो
“मैं कहूँगा कि ऐसे निकम्मे अख़बारों को आप फेंक दें। कुछ ख़बर सुननी हो तो दूसरों से जान-पूछ लें। अख़बार न पढ़ेंगे तो आपका कोई नुक़सान होनेवाला नहीं है। अगर पढ़ना ही चाहें तो सोच-समझकर ऐसे अख़बार चुन लें जो हिन्दुस्तान की सेवा के लिए चलाए जा रहे हों, जो हिन्दू-मुसलमानों को मिल-जुलकर रहना सिखाते हों। फिर ऐसे अख़बारवालों को भी इतनी धांधली में पड़ने की ज़रूरत नहीं रहेगी कि उन्हें रातभर जागते रहना पड़े और दिन में भी चैन न ले सकें। और ऐसी बेबुनियाद ख़बरें छापने की दौड़ भी नहीं लगानी पड़ेगी। “

महात्मा गाँधी, 12 अप्रैल 1947, ( प्रार्थना-प्रवचन, राजकुल प्रकाशन)
मैं हमेशा मानता हूँ कि आज न कल, भारत की जनता को ग़ुलाम मीडिया के ख़िलाफ़ उठना ही होगा। संघर्ष का रास्ता गांधी का ही होगा। राजनीतिक दल संघर्ष करने का जितना भी अभ्यास कर लें, सारे अभ्यास आभासी साबित होंगे। लोकतंत्र के पुनर्जीवन की सच्ची लड़ाई गोदी मीडिया के ख़िलाफ़ होने वाली लड़ाई से ही शुरू होगी।

गाँधी जयंती पर खास रिपोर्ट

महात्मा गाँधी अमेरिका कभी नहीं गए लेकिन भारत के बाद उनकी सबसे ज्यादा मूर्तियां, स्मारक और संस्थायें अमेरिका में ही हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अमेरिका में गांधी जी की दो दर्जन से ज्यादा से प्रतिमाएं और एक दर्जन से ज्यादा सोसाइटी और संगठन हैं।

महात्मा गाँधी भारत के अकेले ऐसे नेता रहे हैं, जिनकी भारत सहित 84 देशों में मूर्तियां लगी हैं। पाकिस्तान, कम्युनिस्ट देश चीन से लेकर छोटे-मोटे और बड़े-बड़े देशों तक में बापू की मूर्तियां स्थापित हैं।

उनके जन्मदिवस पर पूरी दुनिया अहिंसा दिवस मनाती है।

महात्मा गाँधी की हत्या के 21 साल बाद ब्रिटेन ने उनके नाम से डाक टिकट जारी किया। इसी ब्रिटेन से भारत ने गाँधी की अगुआई में आज़ादी हासिल की थी।

अलग-अलग देशों में कुल 48 सड़कों के नाम महात्मा गाँधी के नाम पर हैं। भारत में 53 मुख्य मार्ग गाँधी जी के नाम पर हैं।

गाँधी जी द्वारा शुरु किया गया सिविल राइट्स आंदोलन कुल 4 महाद्वीपों और 12 देशों तक पहुंचा था।

अपने वक़्त के महान वैज्ञानिक आइंस्टीन ने कहा था कि “कुछ सालों बाद लोग इस बात पर यकीन नहीं करेंगे कि महात्मा गाँधी जैसे सख्श कभी भी इस धरती पर हाड़ मांस का शरीर लेकर चलता था।”

अपने पूरे जीवन में महात्मा गाँधी ने कोई राजनीति पद नहीं लिया। इसीलिए आज़ादी की लड़ाई में उनके नेतृत्व पर कभी कोई सवाल नहीं उठा पाया, क्योंकि उनको न 8000 करोड़ का विमान चाहिए था, न ही 20000 करोड़ का बंगला।

नेल्सन मंडेला से लेकर मार्टिन लूथर किंग तक गाँधी के मुरीद थे, बराक ओबामा जैसे तमाम वर्ल्ड लीडर आज भी गाँधी के मुरीद हैं।

अफ्रीका जैसे कई देशों ने गांधी के आदर्शों और रास्तों से आंदोलन चलाया और आज़ादी हासिल की।

यहां तक कि दुनिया के कई हरामी देश भी गाँधी की इज्जत करते हैं। कई निकृष्ट नेता भी गाँधी का अपमान करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।

इस पूरे ब्रम्हांड में एक भक्ताणु ही ऐसे वायरस हैं जिनको गाँधी से बड़ी समस्या है। समस्या भी ऐसी-ऐसी कि आप हैरान रह जाएंगे। भक्त की समस्या ये भी है कि अगर वह गांधी को महान मान ले तो।उसके लात खाने की संभावनाएं खत्म हो जाती हैं जो उसे बर्दाश्त नहीं है।

संघियों और संघ के समर्थक चमनबहारों की कुंठा क्या है, ये समझ से परे है। जिस दिन मनुष्य के अंदर नफरत का इलाज हो जाएगा, उस दिन संघियों की कुंठा का भी इलाज संभव हो सकेगा। तब तक ये मनुष्यरूपी ये नफरती जंतु गांधी के प्रति नफरत लिए जीते रहेंगे।

गाँधी जयंती पर खास रिपोर्ट

2 अक्तूबर 1947 को गाँधी ने अपने जन्मदिन पर कहा था-
“आज तो मेरी जन्मतिथि है। मैं तो कोई अपनी जन्मतिथि इस तरह से मनाता नहीं हूँ। मैं तो कहता हूँ कि फाका करो, चरख़ा चलाओ, ईश्वर का भजन करो, यही जन्मतिथि मनाने का मेरे ख़्याल में सच्चा तरीक़ा है। मेरे लिए तो आज यह मातम मनाने का दिन है। मैं आजतक ज़िंदा पड़ा हूँ। इस पर मुझकों ख़ुद आश्चर्य होता है, शर्म लगती है, मैं वही शख़्स हूँ कि जिसकी ज़बान से एक चीज़ निकलती थी कि ऐसा करो तो करोड़ों उसको मानते थे। पर आज तो मेरी कोई सुनता ही नहीं है। मैं कहूँ कि तुम ऐसा करो ” नहीं, ऐसा नहीं करेंगे”- ऐसा कहते हैं। ” हम तो बस हिन्दुस्तान में हिन्दू ही रहने देंगे और बाक़ी किसी को पीछे रहने की ज़रूरत नहीं है।” आज तो ठीक है कि मुसलमानों को मार डालेंगे, कल पीछे क्या करोगे? पारसी का क्या होगा और क्रिस्टी का क्या होगा और पीछे कहो अंग्रेज़ों का क्या होगा? क्योंकि वह भी तो क्रिस्टी है? आख़िर वह भी क्राइस्ट को मानते हैं, वह हिन्दू थोड़े हैं? आज तो हमारे पास ऐसे मुसलमान पड़े हैं जो हमारे ही हैं, आज उनको भी मारने के लिए हम तैयार हो जाते हैं तो मैं यह कहूँगा कि मैं तो ऐसे बना नहीं हूँ। जबसे हिन्दुस्तान आया हूँ मैंने तो वही पेशा किया कि जिससे हिन्दू, मुसलमान सब एक बन जाएँ। धर्म से एक नहीं लेकिन सब मिलकर भाई-भाई होकर रहने लगें। लेकिन आज तो हम एक-दूसरे को दुश्मन की नज़र से देखते हैं। कोई मुसलमान कैसा भी शरीफ़ हो तो हम ऐसा समझते हैं कि कोई मुसलमान शरीफ़ हो ही नहीं सकता। वह तो हमेशा नालायक ही रहता है। ऐसी हालत में हिन्दुस्तान में मेरे लिए जगह कहां है और मैं उसमें ज़िंदा रहकर क्या करूँगा? आज मेरे से 125 वर्ष की बात छूट गई है। 100 वर्ष की भी छूट गई है और 90 वर्ष की भीख, आज मैं 79 वर्ष में तो पहुँच जाता हूँ लेकिन वह भी मुझको चुभता है। मैं तो आप लोगों को जो मुझको समझते हैं और मुझको समझनेवाले काफ़ी पड़े है, कहूँगा कि हम यह हैवानियत छोड़ दें। “

पुण्यतिथि पर याद किए गए दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह

आज कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० शशिनाथ झा जी की अध्यक्षता में उनके द्वारा प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। उन्हें याद करते हुए शशिनाथ झा ने कहा कि लक्ष्मीश्वर विलास पैलेस वह पुण्य स्थान है जहां महाराज ने जन्म लिया। शिक्षा ग्रहण किया,यज्ञोपवीत का संस्कार से लेकर विवाह संस्कार तक इसी भवन में हुआ। यह मनोरम स्थल बहुत ही महत्वपूर्ण है ।

1952 में जमींदारी प्रथा खत्म होने के बाद भी दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह द्वारा लोगों की भलाई के लिए यह भवन शैक्षणिक कार्यों के लिए आमजनमानस को दिया गया। इसी परिप्रेक्ष्य में 1960 संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप में यह भवन महाराज के द्वारा स्थापित किया गया। संस्कृत शिक्षा के सर्वांगीण विकास हेतु उनके द्वारा यह कदम उठाया गया था।

संस्कृत के प्रति उनका समपर्ण इस बात का गवाह है कि लक्ष्मीश्वर विलास पैलेस जैसे भवन में आज संस्कृत विश्वविद्यालय संचालित है।ऐसे दानवीर, दूरगामी, सामाजिक अध्येयता, समाज के हितैषी जनमानस में इन्ही कारणों से सर्वदा लोकप्रिय थे और आज भी उनके विचार और कार्य लोगों के लिए कल्याणकारी और प्रेणादायक है।

सर कामेश्वर सिंह को याद करते हुए इसमाद के राहुल कुमार ने कहा कि कामेश्वर सिंह ने हमेशा लोगों के जीवनयापन को सुलभ बनाने के लिए समर्पित रहते थे।और यही वजह के इनके जीवन काल में मिथिला एक सम्पन्न क्षेत्र हुआ करता था।

इसमाद के न्यासी संतोष कुमार ने कहा सर कामेश्वर सिंह ने दरभंगा समेत मिथिला को विकसित करने के लिए सभी आधुनिक सुविधाओं से तराशा,जिसका सुख आज आमजनमानस को प्राप्त हो रहा है। लेकिन उनकी असमय मृत्यु से उनके कई कार्य निर्माणधीन ही रह गए जिसे पूरा करने में मिथिला के लोगों को मशक्कत करनी पड़ी।

इस अवसर पर उनसे स्नेह रखने वाले ने संतोष चौधरी, अभिनव सिन्हा, रवि प्रकाश,राजीव कुमार झा, सौरभ आदि ने भी अपने विचार रखे। और आज उनकी पुण्यतिथि पर सबने उन्हें याद कर नमन किया।

कन्हैया को लेकर राजद असहज कहां कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दे कन्हैया को

कन्हैया को लेकर असहज राजद की और से शिवानंद तिवारी ने आखिरकार मौर्चा खोल ही दिया ,कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने पर शिवानंद तिवारी ने कहा है कि कन्हैया कुमार भाषण देने की कला में माहिर है उनके जैसा भाषण कोई नहीं दे सकता।

कांग्रेस जॉइन करते समय कन्हैया कुमार ने कहा था कि कांग्रेस एक डूबता हुआ जहाज है, जिसे बचाना है। अगर बड़ा जहाज नहीं बचेगा तो छोटी-छोटी कश्तियों का क्या होगा? इस बयान को उन्होंने ऐतिहासिक करार दिया है।

शिवानंद तिवारी ने कहा कि एक समय वामपंथी कन्हैया कुमार में अपना भविष्य देख रहे थे। अब कांग्रेस उनमें अपना भविष्य देख रही है। कन्हैया कुमार को ही कांग्रेस अपना अध्यक्ष बना दे। पिछले दो साल से ऐसे भी वहां कोई स्थायी अध्यक्ष नहीं है।

शिवानंद तिवारी यही नहीं रुके कांग्रेस पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के साथ मेरी पूरी सहानुभूति है। उन्होंने पंजाब का जिक्र करते हुए सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह की लड़ाई की बात कही शिवानंद तिवारी के इस बयान के बाद कांग्रेस भी शिवानंद तिवारी के सहारे राजद पर सीधे सीधे हमला शुरु कर दिया

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा राष्ट्रीय जनता दल का भविष्य ही इस बात पर निर्भर करता है कि कांग्रेस सहित तमाम सेकुलर पार्टियां कितना अधिक से अधिक कमजोर रहती हैं और खास तौर से कांग्रेस जैसी धर्मनिरपेक्ष प्रतिबद्ध पार्टी की मजबूती से राष्ट्रीय जनता दल ज्यादा भयभीत रहती है।

कन्हैया कुमार एक राजनीतिक रूप से समझदार नौजवान हैं और उसके कांग्रेस में आने से बिहार कांग्रेस और मजबूत हुआ है,कांग्रेस नेता आनंद माधव ने शिवानंद तिवारी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि शिवानंद जी सठिया गए हैं। कन्हैया के बारे में निर्णय कांग्रेस को लेना है, वे अपना खून क्यों जला रहे हैं।

हलाकि इस तरह का बयावबाजी आने वाले समय में और तेज होगी क्यों कि कन्हैया को लेकर राजद का जो कोर ग्रुप है वो सहज नहीं है और उस ग्रुप का मानना है कि कन्हैया के मजबूत होने से राजद और तेजस्वी के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है ।

केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री भारत व पाकिस्तान सीमा के लाइन ऑफ कंट्रोल का किया दौरा

देश के जवानों का साहस और मनोबल काफी ऊँचा है – नित्यानंद राय

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय जम्मू और कश्मीर के तीन दिवसीय प्रवास के क्रम में भारत-पाकिस्तान सीमा अर्थात लाइन ऑफ कंट्रोल का दौरा किया ।

एलओसी पर स्थित भारतीय सेना एवं सीमा सुरक्षा बल की फारकियन टॉप , पात्रा बेस कैंप , गुर्जरडोर एवं सुंदरमाली स्थित अलग-अलग चौकियों का दौरा कर केंद्रीय मंत्री श्री राय ने अधिकारियों और सैनिकों से संवाद किया तथा उनका मनोबल बढ़ाया ।

मंत्री श्री नित्यानंद राय ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश की सीमा और संप्रभुता पूरी तरह सुरक्षित है । देश के जवानों का साहस और मनोबल काफी ऊँचा है ।

उन्होंने कहा कि सीमा पर -30 से -35 डिग्री तापमान तक से लेकर किसी भी परिस्थिति से विजय पाने में देश के जवान सबल और सक्षम है । मंत्री श्री राय ने कठिन इलाकों में भी उच्च मनोबल और प्रेरणा बनाए रखने के लिए सैनिकों की सराहना किया ।

एलओसी के दौरा में मंत्री श्री नित्यानंद राय के साथ बीएसएफ के आईजी डॉ राजेश मिश्रा , डीआईजी एक के विद्यार्थी तथा कमांडेंट श्री संजय शर्मा सहित अन्य अधिकारी गण शामिल रहे ।

छपरा नगर निगम द्वारा आवंटित दुकानों को खाली करने के आदेश पर हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस

पटना हाई कोर्ट ने छपरा नगर निगम द्वारा आवंटित दुकानों के एग्रीमेंट को रद्द करने व दुकानों को खाली करने के निगम आयुक्त के आदेश को रद्द करने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा ने छपरा के डी एम व निगम आयुक्त को नोटिस जारी किया। जिलाधिकारी और निगम के कमिश्नर को नोटिस जारी किया है।

साथ ही कोर्ट ने यथास्थिति बनाये रखने का आदेश देते हुए राज्य सरकार, निगम और जिलाधिकारी से जवाब तलब किया है। छपरा निगम क्षेत्र स्थित खनुआ ड्रेनेज को स्थानीय लोगों द्वारा ढकने का अनुरोध किया गया था।

उसके बाद ढके गए ड्रेनेज पर वर्ष 1997 में दुकान का निर्माण प्रारंभ किया गया, जो वर्ष 2000 में पूरा हुआ। याचिकाकर्ताओं को दुकान आवंटित किया गया और उनके साथ करार भी हुआ।

छपरा के नगरपालिका द्वारा द्वारा वर्ष 2011 में अखबार में यह समाचार प्रकाशित करवाया गया कि ड्रेनेज पर किये गए अवैध अतिक्रमण को हटाया जाएगा। इसके बाद वर्ष 2011 में ही पटना हाई कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया। याचिका के निष्पादित होने की तिथि पांच दिन के भीतर दुकानदारों के अभ्यावेदन को निष्पादित करने का आदेश दिया।

वर्ष 2017 में फिर से दुकानों को खाली करने को लेकर समाचार प्रकाशित किया गया।
वर्ष 2017 में कुछ याचिकाकर्ताओं समेत अन्य लोगों ने पटना हाई कोर्ट के समक्ष रिट याचिका दायर किया, जोकि अभी भी लंबित है। याचिका के लंबित रहने के दौरान याचिकाकर्ताओं को परेशान नहीं किया गया।

वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने कोर्ट को बताया कि निगम आयुक्त के हस्ताक्षर से 25 अगस्त, 2021 को आवंटित किये गए दुकानों का करार को रद्द करते हुए नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर दुकानों खाली करने का आदेश दिया गया।
इसी मामले में कोर्ट ने आदेश पारित करते हुए अधिकारियों को नोटिस जारी जवाब माँगा गया। इस मामले पर अब तीन सप्ताह बाद सुनवाई की जाएगी।

15 वर्षो के सुशासन में बिहर का स्वास्थ्य व्यवस्था देश में सबसे फिसड्डी– नीति आयोग

कोरोना काल के दौरान एक एक बेड और एक एक बूंद आक्सीजन के लिए जिस तरीके से तरप तरप कर लोगों की मौत हुई थी सारी दुनिया ने देखा ।लेकिन बाद में इसको लेकर सरकार के अलग अलग राय आने लगे और जिस मौत को नंगी आंखों पूरी दुनिया ने देखा उस सवाल खड़े होने लगे लेकिन नीति आयोग की रिपोर्ट ने देश की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल करके रख दिया है ।

देश में एक लाख की आबादी में सबसे अधिक 20 बेड मध्यप्रदेश में है और सबसे कम बिहार में एक लाख आबादी में मात्र 06 है मतलब अस्पताल में बेड के मामले में बिहार देश का सबसे फिसड्डी राज्य है जब बेड नहीं है तो आप डाँ और अन्य संशाधनों के बारे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है हलाकि नीति आयोग के रिपोर्ट को लेकर जब स्वास्थ्यमंत्री से सवाल किया गया तो जबाव देना तो दूर मीडिया से बचते बचाते भागते दिखे।

हलाकि इसको लेकर नेता प्रतिपंक्ष तेजस्वी ने ट्वीट करते हुए लिखा, 16 वर्षों के थकाऊ परिश्रम के बूते बिहार को नीचे से नंबर-1 बनाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी को बधाई. 40 में से 39 लोकसभा MP और डबल इंजन सरकार का बिहार को अद्भुत फ़ायदा मिल रहा है. नीति आयोग की रिपोर्ट अनुसार देश के जिला अस्पतालों में सबसे कम बेड बिहार में हैं, 1 लाख की आबादी पर मात्र 6 बेड।

हलाकि नीति आयोग के रिपोर्ट को लेकर सरकार रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से पहले से ही सवाल खड़े कर रहे थे राज्य के योजना एंव विकास मंत्री विजेन्द्र यादव चार दिन पहले पीसी करके नीति आयोग के कार्यशैली पर जमकर भड़ास निकाला था ।

नीति आयोग देश के स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर जो रिपोर्ट जारी किया है उसके अनुसार नीति देश के जिला अस्पतालों में सबसे कम बेड बिहार में हैं, 1 लाख की आबादी पर मात्र 6 बेड.” जिला स्तर पर प्रति लाख आबादी अस्पतालों में बेड की उपलब्धता के मामले में सभी राज्यों से बिहार के सबसे खराब प्रदर्शन गुरुवार को जारी नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार जिला अस्पतालों में प्रति लाख आबादी बेड की संख्या के मामले में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सबसे ऊपर है. यहां प्रति लाख आबादी 20 बेड हैं. जबकि पश्चिम बंगाल, राजस्थान और गुजरात में 19, पंजाब, आंध्रप्रदेश और असम में 18, जम्मू कश्मीर में 17, महाराष्ट्र में 14, हरयाणा और उत्तरप्रदेश में 13, तेलंगाना में 10, झारखंड में नौ और बिहार में केवल छह बेड प्रति लाख आबादी उपलब्ध हैं.

भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक (आईपीएचएस) 2012 के दिशानिर्देश के अनुसार जिला अस्पतालों को प्रति 1 लाख आबादी (2001 की जनगणना के जिला जनसंख्या औसत के आधार पर) कम से कम 22 बिस्तर बनाए रखने की सलाह दिया गया है. लेकिन गुरुवार नीति आयोग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार कई राज्य ऐसे हैं जहां मानकों का पालन नहीं किया जा रहा. खासकर बिहार की स्थित बदतर है।
हलाकि यह रिपोर्ट काफी कुछ हकीकत बया कर रहा है बिहार के जिला अस्पताल का हाल सच में काफी बूरा है ।

लगातार चौथे दिन सेंसेक्स और निफ्टी आधा फीसदी से ज्यादा टूटकर लाल निशान में बंद हुए; एचडीएफसी, आईसीआईसीआई बैंक टॉप लूसर

कमजोर ग्लोबल संकेतों के बीच हफ्ते के आखिरी दिन शुक्रवार को लगातार चौथे दिन भारतीय बाजार में भी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 360.78 अंक नीचे 58,765.58 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 86.10 अंक नीचे 17,532.05 पर बंद हुए। पूरे हफ्ते की बात करें तो इस पूरे हफ्ते में सेंसेक्स 1282 पॉइंट और निफ्टी 321 पॉइंट टूटा है।

आज दिन के सबसे निचले स्तर पर सेंसेक्स 575 अंक तक गिरकर 58,551 के इंट्रा डे लो और निफ्टी 50 इंडेक्स अपने महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर 17,500 से नीचे गिर गया।

सेंसेक्स चार्ट (01.10.21) एक नजर में

मिड और स्मॉल-कैप शेयर बड़े पैमाने पर फ्लैट नोट पर समाप्त हुए । बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स आज 0.48% चढ़ा, जबकि बीएसई मिडकैप इंडेक्स 0.11% नीचे बंद हुआ। फार्मा, मीडिया और मेटल हरे निशान में बंद हुए। बैंक, वित्तीय और आईटी शीर्ष ड्रैग थे।

सेक्टोरल मोर्चे पर, निफ्टी रियल्टी इंडेक्स करीब 2 फीसदी गिर गया और बैंक निफ्टी आधा फीसदी से अधिक नीचे था। जबकि निफ्टी फार्मा करीब एक फीसदी ऊपर था।

बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी), एनटीपीसी, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) शीर्ष इंडेक्स ड्रैगर्स थे। दूसरी तरफ, एमएंडएम, डॉ रेड्डीज लैबोरेट्रीज, अल्ट्राटेक सीमेंट, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल), बजाज-ऑटो सेंसेक्स के शीर्ष लाभार्थियों में से थे।

सेंसेक्स के शेयर एक नजर में

सेंसेक्स के 30 शेयर्स में से 19 शेयर्स कमजोरी के साथ और 11 शेयर्स बढ़त के साथ बंद हुए। बीएसई पर कारोबार के दौरान 226 शेयर्स 52 हफ्ते के ऊपरी स्तर पर और 25 शेयर्स 52 हफ्ते के निचले स्तर पर कारोबार करते दिखे।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

पूर्णिया में खुलेगा बल्ड बैंक, चार जिलों के बल्ड बैंक के लाइसेंस का नवीनीकरणः मंगल पांडेय

पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि पूर्णिया में सरकारी ब्लड बैंक खोलने के लिये लाइसेंस जारी कर दिया है। साथ ही मुंगेर, मधेपुरा, श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज और दरभंगा मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक के लाइसेंस का नवीनीकरण किया गया है। पूर्णिया और मुंगेर के लिए बल्ड कंपोनेंट सेपरेशन का भी लाइसेंस निर्गत किया गया है। शेष बचे जिलों में भी स्वास्थ्य विभाग बल्ड बैंक खोलने की दिशा में प्रयासरत है।

श्री पांडेय ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग जरूरतमंदों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने को लेकर निरंतर प्रयास कर रहा है। राज्य के सभी मरीजों को बल्ड की उपलब्घता सुनिश्चित कराने को लेकर हर जिला में सरकारी ब्लड बैंक खोलने की प्रक्रिया चल रही है। पूर्णिया में बल्ड बैंक खुलने के बाद अब प्रदेश में सरकारी ब्लड बैंक की संख्या 41 हो जायेगी, वहीं मुंगेर 12वां बल्ड कंपानेंट सेपरेशन यूनिट होगा। उन्होंने कहा कि हर साल समय पर रक्त नहीं मिलने के कारण जरूरतमंद लोगों की असमय मौत हो जाती है। कोई भी स्वस्थ पुरुष तीन माह के बाद यानी साल में चार बार और कोई भी स्वस्थ महिला चार माह के बाद यानी साल में तीन बार रक्तदान कर सकती हैं।

बिहार के स्कूलों में शुरु होगा विशेष स्वच्छता अभियान यूनिसेफ से हुआ करार।

“हम सब जानते हैं कि स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता है। इसके लिए स्कूलों में एक स्वस्थ वातावरण बनाने और उचित स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवहार विकसित करने की नितांत आवश्यक है ताकि हमारे बच्चे स्वस्थ रहकर पढ़ाई-लिखाई कर सकें। लड़कियों की ड्राप आउट रेट कम करने हेतु यह अत्यंत आवश्यक है। विद्यालयों में जल, सफ़ाई एवं स्वच्छता (WASH) मानकों को बेहतर करने में विद्यालय स्वच्छता पुरस्कार मील का पत्थर साबित होगा। ग्रामीण क्षेत्रों और दुर्गम स्थानों में स्थित स्कूलों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर हमें विशेष ध्यान देना होगा। इसके ज़रिए कोविड महामारी के संदर्भ में स्कूलों में स्वच्छता मानकों को सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी। सरकार इसके सफल क्रियान्वयन हेतु हर संभव मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है.” ये बातें शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने नया सचिवालय परिसर में आयोजित राज्य स्तरीय बिहार स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार एवं स्कूलों में राज्य विशिष्ट WASH (Wins) बेंचमार्किंग सिस्टम के लॉन्चिंग समारोह के दौरान कहीं।

यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से शुरू किए जा रहे इस अनूठी पहल को संजय कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग, श्रीकांत शास्त्री, बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक, यासुमासा किमुरा, यूनिसेफ इंडिया के उप प्रतिनिधि, नफ़ीसा बिंते शफ़ीक़, यूनिसेफ बिहार प्रमुख, यूनिसेफ बिहार के WASH विशेषज्ञ डॉ. प्रभाकर सिन्हा, शिक्षा विभाग एवं यूनिसेफ़ के अन्य अधिकारीगण और मीडियाकर्मियों की उपस्थिति में लॉन्च किया गया।

शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय कुमार ने कहा कि बिहार में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु मुख्य रूप से निमोनिया और डायरिया के कारण होती है जो सीधे तौर पर WASH के प्रावधान की कमी से संबंधित है। हमारे बच्चों के लिए सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करके इन बीमारियों, विशेष रूप से डायरिया को रोका जा सकता है. इसी तरह, स्कूलों में स्वच्छ पेयजल की सतत उपलब्धता और रखरखाव बहुत ज़रूरी है। इस संदर्भ में राज्य सरकार के प्रमुख कार्यक्रम “हर घर, नल का जल” योजना की विशेष भूमिका है. स्कूलों में शौचालयों का रखरखाव और नियमित सफाई भी हमारी प्राथमिकता है। इस पुरस्कार के माध्यम से प्रत्येक स्कूल में इन सभी मुद्दों का निदान किया जाएगा. इसी वर्ष से हम पुरस्कार के लिए स्कूलों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने जा रहे हैं।

पुरस्कार की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए बिहार शिक्षा परियोजना परिषद् के स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर श्रीकांत शास्त्री ने कहा कि बिहार की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर 2016 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के अनुरूप इस पुरस्कार से संबंधित दिशानिर्देश विकसित किए गए हैं. इस संदर्भ में, स्कूलों में WASH के लिए राज्य विशिष्ट बेंचमार्किंग प्रणाली सभी संबंधित हितधारकों को स्कूल में WASH को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके अलावा, इससे स्कूल प्रशासन को WASH के बुनियादी ढांचे में सुधार करने और इसे बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसके लिए एक परामर्शी प्रक्रिया के ज़रिए सात थीम और पचास संकेतकों की पहचान की गई है. राज्य सरकार की देखरेख मे स्कूलों के चयन से लेकर पुरस्कार वितरण प्रक्रिया संपन्न होगी. स्कूलों द्वारा स्व-नामांकन के लिए एक मोबाइल आधारित एप्लिकेशन विकसित किया जा रहा है। एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा सभी नामांकनों के सत्यापन की भी व्यवस्था है। 5 स्टार रेटिंग के तहत स्कूलों की रैंकिंग की जाएगी। इसके अलावा, सरकार राष्ट्रीय एसवीपी के विपरीत आवधिक मूल्यांकन प्रक्रिया को संस्थागत रूप दे सकती है।

लड़कियों की विशेष ज़रूरतों को रेखांकित करते हुए यूनिसेफ़ बिहार की राज्य प्रमुख नफ़ीसा बिन्ते शफ़ीक़ ने कहा कि लड़कियों के लिए पृथक शौचालयों के अलावा मासिक धर्म प्रबंधन हेतु स्कूलों में पर्याप्त और सुचारू स्वच्छता सुविधाओं का प्रावधान काफी अहम है. संवेदनशील स्वास्थ्य प्रोत्साहन लड़कियों को स्कूल में रहने और अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए एक ज़रूरी शर्त है. आरटीई अधिनियम 2009 के तहत सभी बच्चों को स्कूलों में सुरक्षित जल, शौचालय और स्वच्छता की सुविधा का सामान लाभ लेने का अधिकार है।

एक प्रभावी WASH कार्यक्रम के तहत बाल-अनुकूल सुविधाओं से लैस समावेशी डिजाइन के माध्यम से बाधाओं को दूर किया जा सकता है, जो किशोरियों, छोटे बच्चों और बीमार या दिव्यांग बच्चों के लिए लाभकारी है. इसके ज़रिए बच्चे अपने परिवार और समुदाय में WASH प्रथाओं में सुधार के लिए चेंज एजेंट के तौर पर विकसित हो सकते हैं. बिहार सरकार ने इस दिशा में यह महत्वपूर्ण क़दम उठायाहै और इसकी सफलता हेतु यूनिसेफ़ अपना हर संभव सहयोग देने के लिए तत्पर है।

विषयगत प्रावधानों की व्याख्या करते हुए, यूनिसेफ बिहार के WASH विशेषज्ञ डॉ. प्रभाकर सिन्हा ने कहा कि ‘स्कूलों में जल, सफ़ाई और स्वच्छता’ के संदर्भ में तकनीकी और मानव विकास घटक दोनों का महत्व है. जहां तकनीकी घटकों में पीने योग्य पानी, साबुन से हाथ धोना, लड़के-लड़कियों और शिक्षकों के लिए पृथक शौचालयों की सुविधा शामिल हैं, वहीं मानव विकास घटक के तहत स्कूल के भीतर अनुकूल स्थितियों और बच्चों के अंदर व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने वाली गतिविधियाँ आती हैं जो कई बीमारियों से बचाव में मदद करती हैं. उपरोक्त बिन्दुओं के अलावा स्कूलों में स्थायी WASH संरचना व मानकों के रखरखाव व संचालन, क्षमता निर्माण और सुदृढ़ करने हेतु समर्थन तंत्र विकसित करना एवं सामुदायिक स्वामित्व सुनिश्चित करना निर्धारित ‘सात थीम’ का हिस्सा हैं।

बिहार के स्कूलों में WASH सुविधाओं की स्थिति
यू-डाइस 2019-20 के मुताबिक़ बिहार के 72,517 स्कूलों में से 99.8 फ़ीसदी में पेयजल की सुविधा उपलब्ध है. इसी प्रकार, लगभग 98 प्रतिशत स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था है. अगर सभी WASH सुविधाओं (पृथक चलायमान शौचालय, पेयजल, हैण्ड वाशिंग) की बात करें, तो राज्य के कुल 17,329 प्राथमिक, 13,174 मिडिल, 2,055 हायर सेकण्ड्री और 1,210 सेकण्ड्री स्कूलों में ये उपलब्ध हैं।

प्रमुख मुद्दे/चुनौतियाँ
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में स्कूलों में पेयजल और शौचालय की सुविधा का प्रावधान लगातार बढ़ा है, लेकिन बुनियादी गुणवत्ता और पर्याप्तता संबंधी मानदंडों, संचालन और रखरखाव को पूरा करने और समान पहुंच में सुधार के लिए काफ़ी कुछ किए जाने की आवश्यकता है. सबसे बढ़कर, पानी और स्वच्छता सुविधाओं का हर दिन उपयोग किया जाना चाहिए और ऐसा होने के लिए ये सुविधाएं सुचारू होनी चाहिए. इसमें साबुन से हाथ धोने का प्रावधान और रखरखाव भी शामिल हैं. कई स्कूलों में WASH से जुड़ी बुनियादी ढांचागत कमियों के चलते स्वच्छता प्रथाओं का यथोचित प्रबंधन नहीं हो पाता है, जिससे कई ऐसी बीमारियां फैलती हैं जो बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। प्राथमिकता के आधार पर कोविड-19 महामारी के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए स्कूल परिसर में स्वच्छता प्रथाओं का समुचित पालन एक बड़ी चुनौती है।

अपर मुख्य सचिव के विशेष कार्य पदाधिकारी, शिक्षा विभाग विनोदानंद झा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया. कार्यक्रम के दौरान माध्यमिक शिक्षा निदेशक मनोज कुमार और प्राथमिक शिक्षा निदेशक अमरेंद्र सिंह, यूनिसेफ बिहार के कार्यक्रम प्रबंधक शिवेंद्र पांडेय और WASH अधिकारी सुधाकर रेड्डी मौजूद रहे।

मुंगेर गोली कांड मामले की जांच एडीजी लां एंड आँर्डर विनय कुमार ही करेंगे।

पटना हाईकोर्ट ने मुंगेर में दुर्गा विसर्जन दौरान हुए गोलीकांड की सीआईडी जांच की मॉनिटरिंग कर रहे एडीजी के हुए स्थानांतरण को सशर्त मंजूरी दी है। जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने अमरनाथ पोद्दार की आपराधिक रिट याचिका में राज्य सरकार की तरफ से दायर अर्ज़ी को मंज़ूर करते हुए यह आदेश दिया ।

कोर्ट ने यह अनुमति राज्य सरकार के इस आश्वासन पर दिया है कि एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के पद पर रहते हुए भी , एडीजी विनय कुमार इस स्थिति में रहेंगे कि वह इस गोलीकांड के जांच की निगरानी को देखते रहें । इस बारे में वे सीआईडी के नए एडीजी से आवश्यक सलाह मशविरा कर सकते हैं ।

गौरतलब है कि 7 अप्रैल 2021 को राज्य सरकार की तरफ से एड्वोकेट जनरल ललित किशोर ने कोर्ट को यह आश्वासन दिया था कि बगैर हाई कोर्ट की अनुमति के विनय कुमार का बतौर एडीजी , सीआईडी के पद से कहीं भी स्थानांतरित नही किया जाएगा। चूंकि एडीजी विधि व्यवस्था केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए हैं और उस महत्वपूर्ण पद पर विनय कुमार का स्थानांतरण प्रशासनिक तौर पर आवश्यक था, इसलिए राज्य सरकार की तरफ से याचिका दायर की गई थी ।

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के आश्वासन पर बाद इस स्थानांतरण की मंजूरी दी हैं।

बिहार सरकार न्यूनतम मजदूरी दर में की वृद्धि

बिहार राज्य में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के अंतर्गत सभी 88 अधिसूचित नियोजनों में दिनांक 01.10.2021 से प्रभावी न्यूनतम मजदूरी की दरों हेतु अतिरिक्त परिवर्तनशील महंगाई भत्ता निर्धारित की गयी है|

प्रत्येक वर्ष अनुसूचित नियोजनों में नियोजित विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए निर्धारित / पुनरीक्षित न्यूनतम मजदूरी के दरों पर परिवर्तनशील महंगाई भत्ता लागू करने हेतु श्रम संसाधन विभाग द्वारा वर्ष में 02 बार अर्थात 01अप्रैल एवं 01अक्टूबर से न्यूनतम मजदूरी के दरों को पुनरीक्षण किया जाता है|

न्यूनतम मजदूरी की दरों के निर्धारण/ पुनरीक्षण हेतु न्यूनतन मजदूरी अधिनियम, 1948 के अंतर्गत अधिसूचित बिहार न्यूनतम मजदूरी परामर्शदात्रि पर्षद की बैठक में अनुशंसित किया गया है|

उक्त अनुशंसाओं के आलोक में सामान्य नियोजनों में कार्यरत अकुशल, अर्धकुशल, कुशल, अतिकुशल एवं पर्यवेक्षीय एवं लिपिकीय कामगारों को लाभ होगा एवं उन्हें देय मजदूरी क्रमश: 02 रूपया, 02 रूपया, 03 रूपया, 04 रुपया एवं 68 रूपया की बढ़ोतरी होगी| उक्त निर्णय से घरेलु कामगार नियोजन, कृषि नियोजन के कामगारों को भी लाभ होगा|

हाईकोर्ट के जज जस्टिस राजेन्द्र कुमार मिश्रा के सेवा काल का कल होगा आखरी दिन

पटना हाईकोर्ट के जज जस्टिस राजेंद्र कुमार मिश्रा सेवानिवृत हो रहे हैं।इनके सेवानिवृत होने पर पटना हाईकोर्ट में विदाई समारोह आयोजित किया गया।इस अवसर पर चीफ जस्टिस व अन्य जज उपस्थित रहे।

इनके सेवानिवृत होने की बाद पटना हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस समेत कुल जजों की अठारह रह जाएगी।पटना हाईकोर्ट में जजों के स्वीकृत पदों की संख्या 53 है,लेकिन अब तक इस संख्या तक जजों के पद नहीं भरे जा सके है।

बिहार के जनसंख्या के अनुपात में जजों की वर्तमान जजों की स्वीकृत संख्या 53 की जगह कम से कम 75 जज होने चाहिए थे,परंतु अभी वर्तमान स्वीकृत जजों की संख्या के एक तिहाई जज ही कार्यरत हैं।

सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने अभी हाल में पटना हाईकोर्ट के जज जस्टिस ए अमानुल्लाह को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की अनुशंसा की हैं।दूसरी ओर दूसरे हाईकोर्ट से चार जजों के पटना हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की भी अनुशंसा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कर दी है।

इनमें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस राजन गुप्ता,कर्नाटक हाईकोर्ट से जस्टिस पी बी बजनथ्री,राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और केरल हाईकोर्ट से जस्टिस ए एम बदर के नाम शामिल हैं।

इनके अतिरिक्त पटना हाईकोर्ट के वकील कोटा से 6 वकीलों के नाम और बिहार न्यायिक सेवा से दो लोगों के नाम जज की बहाली के सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम अनुशंसित किया है।

वकील कोटा से पटना हाईकोर्ट के जज नियुक्त करने के लिए जिनकी अनुशंसा की गई है,उनके नाम खातीम रजा, संदीप कुमार,अंशुमान पांडे,पूर्णेंदु कुमार सिंह,सत्यव्रत वर्मा और राजेश कुमार वर्मा है।न्यायिक सेवा से पटना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल नवनीत कुमार पांडे और सुनील कुमार पंवार के नाम की अनुशंसा की गई है।

अगर ये सभी जज के रूप में अपना योगदान दे देते हैं, तो जजों की संख्या निश्चित रूप से बढ़ेगी,लेकिन फिर भी जजों के स्वीकृत पदों की संख्या के लगभग आधे पद रिक्त पड़े रहेंगे।

प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में जम्मू और कश्मीर विकास पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है – नित्यानन्द राय

माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में जम्मू और कश्मीर विकास पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है – नित्यानन्द राय

केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री श्री नित्यानन्द राय तीन दिवसीय दौरा पर 29 सितंबर को जम्मू और कश्मीर पहुँचे । कुपवाड़ा जिले में में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए मंत्री श्री राय ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जम्मू और कश्मीर विकास पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है ।

श्री राय ने कहा कि
कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अनेक क्षेत्रों में आधारभूत संरचना के विकास का काम भी गतिशील है। कुपवाड़ा जिले के खहिपोरा जाचलदरा में गृह राज्यमंत्री श्री राय ने मॉडल एग्रीकल्चर फार्म का शिलान्यास किया एवं फार्म में मटर के बीज बोए ।

इस क्रम में केन्द्रीय मंत्री श्री राय DDC/BDC/PRI प्रतिनिधिमंडल, पहाड़ी स्पीकिंग लोगों के एडवाइजरी बोर्ड के प्रतिनिधियों, स्वंय सहायता समूह के इंजीनियर्स से मुलाकात की एवं सभी से सरकार द्वारा चलाये जा रहे विकास की नई पहलों का लाभ उठाने को कहा ।

इस अवसर पर मंत्री श्री राय कुपवाड़ा के सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा पार्टी कार्यसमिति के कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात किये एवं विभिन्न विषयों पर उनसे बातचीत की ।

पटना में कोरोना की फर्जी जांच में लगे एक बड़े रेकेट का हुआ खुलासा एक दर्जन से अधिक डायग्रोस्टिक सेंटर जांच के दायरे

ये बिहार है भाई यहां सब कुछ चलता है नया मामला कोरोना टेस्ट के फर्जी रिपोर्ट से जुड़ा हुआ है यह खुलासा तब हुआ जब पटना एयरपोर्ट पर एक ही लैब से रोजाना कोरोना से जुड़ी रिपोर्ट आने लगा जांच हुई तो पता चला सारे रिपोर्ट फर्जी तरीके से बनाया जा रहा है।

राजा बाजार स्थित प्लाज्मा डायग्नोस्टिक को लेकर यह सूचना मिली कि मात्र 1200 रुपया लेकर कोरोना पॉजिटिव को निगेटिव की RT-PCR रिपोर्ट बनाकर देती थी। यह लैब संक्रमित लोगों को भी कोरोना की निगेटिव RT-PCR जांच रिपोर्ट देता था, जिसे दिखाकर लोगों ने हवाई यात्रा भी की।

पटना की एयरलाइंस कंपनियों ने बड़े पैमाने पर चल रहे इस खेल को पकड़ा और फिर निदेशक को सूचना दी। उन्ही के सूचना के आधार पर कल देर शाम शास्त्रीनगर थाने कि पुलिस ने छापा मारा जिस दौरान फर्जीवाड़े से जुड़े कई साक्ष्य बरामद हुए है ।पुलिस लैब के कर्मचारी और मालिक पर FIR दर्ज किया है।

राजा बाजार के प्लाज्मा डायग्नोस्टिक में खेल
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि राजा बाजार स्थित प्लाज्मा डायग्नोस्टिक में फर्जी जांच रिपोर्ट का बड़ा खेल चल रहा था और इसका नेटवर्क एयरपोर्ट से लेकर कई इलाकों में फैला था। पटना एयरपोर्ट पर एयरलाइंस कंपनियों ने इस खेल को पकड़ा और गोपनीय तरीके से इसकी लिखित जानकारी एयरपोर्ट डायरेक्टर को दी।

डायरेक्टर ने डीएम को पत्र लिखकर कोरोना फैलाने के इस खतरे को तत्काल बंद कराने की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने जांच टीम का गठन किया था जिसमें खुलासा हुआ।

ऐसे हुआ खुलासा
डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने पटना एयरपोर्ट पर फर्जी RTPCR परीक्षण रिपोर्ट रैकेट की जांच के लिए टीम का गठन किया था। इसमें नगर दंडाधिकारी जिला नियंत्रण कक्ष, नयाचार पदाधिकारी पटना, जिला कार्यक्रम प्रबंधक डीएचएस, डॉ प्रशांत और थानाध्यक्ष पटना एयरपोर्ट को लगाया गया था।

विभिन्न सूत्रों से जानकारी के आधार पर जांच टीम ने राजाबाजार के प्लाज्मा डायग्नोस्टिक में छापेमारी कराई। जांच में पाया गया कि फर्जी जांच रिपोर्ट की जड़ प्लाज्मा डायग्नोस्टिक से जुड़ी है।

बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहा था लैब, जांच में पाया गया कि प्लाज्मा डायग्नोस्टिक क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत नहीं है। डायग्नोस्टिक सेंटर की जांच में चार लैब का रिपोर्ट एवं पैसे का रसीद पाया गया।

यह पुष्टि हुई कि सेंटर द्वारा अवैध टेस्ट किए जाते थे तथा फर्जी रिपोर्ट जारी किया जाता था। साथ ही कोरोना के मानक का पालन नहीं किया जाता था। जांच में चार विभिन्न लैब का रिपोर्ट एवं पैसे का रसीद बरामद किया गया।
सवालों के घेरे में कई लैब, छापेमारी में पटना के चार लैब सवालों के घेरे में हैं।

इसमें सरल पैथ लैब, जेनरल डायग्नोस्टिक इंटरनेशनल, हिंद लैब्स डायग्नोस्टिक सेंटर शामिल हैं। छापेमारी के बाद अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अविनाश कुमार सिंह के आवेदन के आधार पर शास्त्री नगर थाने में प्लाज्मा डायग्नोस्टिक पिलर नंबर 83 के सामने राजा बाजार पटना के संबंधित मालिक और कर्मियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है।

गंगा नदी के कारण विस्थापित महादलित परिवारों के पुनर्वास को लेकर हाईकोर्ट ने दिया आदेश

पटना हाईकोर्ट ने पटना के पानापुर दियारा की ज़मीन गंगा के बढ़े जलस्तर कारण बेघर हुए महादलित परिवारों का जल्द पुनर्वास कराने का राज्य सरकार को प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दिया । रंजीत राम की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

कोर्ट ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते से हुए आपदा प्रबंधन के विशेष सचिव व पटना के जिलाधिकारी को संयुक्त बैठक करने का निर्देश दिया।

गंगा नदी के बाढ़ से विस्थापित हुए 159 महादलित परिवारों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर उन्हें प्रति परिवार चार डिसमल भूमि पुनर्वास हेतु मुहैय्या कराने का निर्देश दिया है ।

याचिकाकर्ता के वकील डॉ रंजीत कुमार ने कोर्ट को बताया कि प्राकृतिक आपदा से विस्थापित या बेघर हुए महादलितों के पुनर्वास हेतु राज्य सरकार खुद की बनाई नीति पर अमल नही कर रही है । राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को आश्वास्त किया गया कि इस मामले पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।

बिहार विधानसभा उपचुनाव में कुशेश्वरस्थान से कांग्रेस की ओर से अशोक राम का लड़ना तय

बिहार विधानसभा उपचुनाव में कुशेश्वरस्थान से कांग्रेस पार्टी का चुनाव लड़ना तय हो गया है हलाकि पार्टी की ओर से अशोक राम का टिकट तय माना जा रहा है फिर भी कांग्रेस आलाकमान ने पार्टी प्रत्याशी के चयन के लिए कांग्रेस(Congress) ने पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।

कमेटी से चयनित उम्मीदवार के नामों की सूची दो अक्टूबर तक मांगी गई है। कांग्रेस के बिहार प्रभारी भक्तचरण दास ने इस विधानसभा क्षेत्र की अद्यतन स्थिति की जानकारी देने और उम्मीदवारों के चयन के लिए जो कमेटी बनाई है उसमें आनंद माधव, कपिल देव प्रसाद यादव, कैसर खान, आइपी गुप्ता और अजय पासवान को शामिल किया है।पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष समीर कुमार सिंह द्वारा जारी आदेश के मुताबिक कमेटी को अगले दो दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट सौपनी होगी।

2020 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट से डा. अशोक कुमार को अपना प्रत्याशी बनाया था। यहां से जदयू ने शशिभूषण हजारी को सिंबल दिया था।

शशिभूषण हजारी ने मुकाबले में उतरे कांग्रेस उम्मीदवार डा. अशोक कुमार को 7222 वोट से पराजित किया। शशिभूषण का इस वर्ष जुलाई महीने में निधन हो गया। जिसके बाद से कुशेश्वरस्थान की यह सीट खाली है।

देश में बिहार महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित राज्य अश्लील हड़कत में बिहार एक नम्बर पर।

बिहार में महिला सशक्तिकरण को लेकर भले ही बड़ी बड़ी बाते हो रही है लेकिन एनसीआरबी का आकड़ा कह रहा है कि महिलाये देश में सबसे अधिक असुरक्षित बिहार में है । वर्ष 2020 की एनसीआरबी (National Crime Record Bureau) की रिपोर्ट के अनुसार बिहार अश्‍लीलता संबंधी अपराध में देश में नंबर वन पर है।

वहीं दहेज प्रताड़ना और जबरन शादी के मामले भी बढ़े हैं। साथ ही छोटी उम्र की बच्चियों के साथ हिंसा के मामले में भी इजाफा हुआ है।

अश्‍लीलता संबंधी अपराध में एक वर्ष में दौरान पूरे देश में 553 मामले दर्ज हुआ जिनमें केवल बिहार में 106 घटनाएं हुईं। जबकि, 83 मामलों के साथ केरल दूसरे नंबर पर रहा। तीसरे स्थान पर बिहार का ही पड़ोसी राज्‍य झारखंड रहा, जहां 71 मामले दर्ज हुए।

चौथे नंबर पर कनार्टक और तमिलनाडु रहा। वहां क्रमश: 54 और 53 मामने दर्ज किए गए।हलाकि इस तरह के मामलो में महिलाएं या लड़कियां अभी भी शिकायत करने से बचती है लेकिन जिस तरीके के आकड़े सामने आये हैं वो चौकाने वाला है ।

महिलाओं के प्रति हिंसा के आंकड़े, एक नजर
व‍र्ष 2018 2019 2020
कुल 16920 185687 15359
वर्ष 2020 में महिलाओं के साथ हुए अपराध
दुष्कर्म के बाद हत्या : 03
दहेज के लिए हत्या : 1046
आत्महत्या का प्रयास : 21
एसिड अटैक : 01
पति से प्रताड़‍ित : 1935
अपहरण : 6671
शादी के लिए अपहरण : 5308
अपहरण के बाद हत्या : 11
जबरन शादी : 2688
मानव तस्करी : 24
दुष्कर्म : 806
दहेज हत्या : 24
पति से प्रताड़ना : 101
महिलाओं का अपहरण : 187
18 साल की कम उम्र की लड़की का अपहरण : 61
18 साल से अधिक लड़की से दुष्कर्म का प्रयास : 8
दहेज प्रताड़ना : 105
यौन उत्पीड़न : 3

परीक्षा में केवल कड़ाई ही या सरकारी स्कूल-कॉलेजों में पढ़ाई भी अभयानंद

परीक्षा में केवल कड़ाई ही या सरकारी स्कूल-कॉलेजों में पढ़ाई भी —अभयानंद
वर्ष 1989 की बात है। मैं नालंदा का पुलिस अधीक्षक हुआ करता था। बोर्ड की परीक्षा होने वाली थी। जिले के जिला पदाधिकारी बहुत ही गंभीर और संजीदा व्यक्ति हुआ करते थे। उन्होंने मेरे समक्ष प्रस्ताव रखा कि इस वर्ष परीक्षा में नकल नहीं होने देना है। चूंकि नीयत नेक थी इसलिए मैंने पुलिस विभाग की पूरी शक्ति को इस दिशा में लगा देने का आश्वासन दे डाला।
उस वर्ष परीक्षाओं में नकल बिलकुल नहीं हुई। चारों ओर प्रशंसा हुई।

कॉलेजों में नामांकरण हुआ। एक दिन, हम दोनों पदाधिकारी कार्यालय में एक साथ बैठ कर मंथन कर रहे थे। अचानक विद्यार्थियों का एक बड़ा समूह सामने आ गया। शांत भाव से उन्होंने प्रश्न किया, “केवल कड़ाई ही या पढ़ाई भी?” प्रश्न वाजिब था। हम दोनों ने कार्यवाई करने का आश्वासन दिया और बच्चे चले गए।

हमने निर्णय लिया कि हम स्वयं कॉलेज में जा कर देखेंगे। अगले ही दिन हम जिला मुख्यालय के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में पहुँचे, बिना किसी पूर्व सूचना के। फ़िज़िक्स के प्रैक्टिकल का क्लास था। हम सीधे प्रयोगशाला में पहुँचे। सभी विद्यार्थी आए हुए थे। वर्नियर कैलिपर से लम्बाई निकालने की क्लास थी। सब उपलब्ध थे केवल शिक्षक नहीं थे।

सूचना मिलते ही, प्रधानाचार्य आ गए। उन्होंने बताया कि शिक्षक बिना सूचना के अनुपस्थित हैं। तब तक पुलिस इंस्पेक्टर साहब को भी सूचना मिल गई थी। वे भी थाने की जीप पर सवार होकर कॉलेज आ गए थे। इंस्पेक्टर साहब से मैंने अनुरोध किया कि वे शिक्षक मोहदय के आवास पर जा कर उनको स्मरण कराएँ कि बच्चे आ गए हैं और उनका इंतज़ार कर रहे हैं।

उतनी देर में, हम दोनों पदाधिकारियों ने बच्चों की वर्नियर कैलिपर की क्लास लेनी शुरू कर दी। मनोरम दृश्य था। पूरा कॉलेज इस दृश्य को रुचि से देख रहा था। आधे घंटे के बाद पुलिस जीप पर शिक्षक महोदय पधारे। हम दोनों ने उनका दायित्व उनको सौंपा और अपना दायित्व निभाने निकल पड़े।

चलते समय शिक्षक महोदय ने धीरे से मेरे बगल में आ कर कहा कि आपको पुलिस की गाड़ी घर पर नहीं भेजनी चाहिए थी, बेइज़्ज़ती हुई है। मैंने मात्र मुस्करा कर प्रणाम करते हुए अलविदा कहा।
पढ़ाई की स्थिति में गिरावट उसके 30 वर्षों के बाद आज कहाँ तक पहुँच चुकी है, इसका अंदाजा अब मैं लगाने में सक्षम नहीं हूँ।

लगातार तीसरे दिन सेंसेक्स, निफ्टी गिरा; भारत वीआईएक्स 2.3% नीचे लेकिन 18 के स्तर से ऊपर बना हुआ है।

मासिक वायदा और विकल्प समाप्ति सत्र में इक्विटी सूचकांक घाटे के साथ बंद हुए, जो लगातार तीसरे दिन नुकसान का प्रतीक है। सेंसेक्स 287 अंक गिरकर 59,126 पर और निफ्टी 50 इंडेक्स 93 अंक गिरकर 17,618 पर बंद हुआ। आज दिन के सबसे निचले स्तर पर सेंसेक्स 394 अंक की गिरावट के साथ 59,019.28 के इंट्रा डे लो और निफ्टी 50 इंडेक्स 17,590.95 के इंट्रा डे लो को छू गया।

सेंसेक्स चार्ट (30.09.21) एक नजर में

रियल्टी, फार्मा, पावर और पीएसयू बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के साथ सेक्टोरल मोर्चे पर मिलाजुला रुख देखा गया, जबकि ऑटो, बैंक, आईटी, मेटल नामों में बिकवाली देखी गई। निफ्टी बैंक इंडेक्स में करीब 1 फीसदी की गिरावट, निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 1.47% बढ़ा । निफ्टी मेटल, आईटी, मीडिया, प्राइवेट बैंक, ऑटो और फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स भी 0.4-1 फीसदी के बीच गिरे, दूसरी ओर, रियल्टी, पीएसयू बैंक, फार्मा, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और हेल्थकेयर इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए।

बैंक निफ्टी 0.84% ​​कम जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप इक्विटी इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। बजाज फिनसर्व 2.19% उछलकर सेंसेक्स में शीर्ष पर रहा, इसके बाद बजाज फाइनेंस, एनटीपीसी और सन फार्मा का स्थान रहा। पावरग्रिड सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेंसेक्स घटक था, जो बंद होने पर 3% गिर गया। एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक ने पीछा किया।

सेंसेक्स के शेयर एक नजर में

सेंसेक्स के 30 शेयर्स में से 21 शेयर्स कमजोरी के साथ और 9 शेयर्स बढ़त के साथ बंद हुए। बीएसई पर कारोबार के दौरान 220 शेयर्स 52 हफ्ते के ऊपरी स्तर पर और 24 शेयर्स 52 हफ्ते के निचले स्तर पर कारोबार करते दिखे।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

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