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बिहार बाढ़: चिराग पासवान ने शुरू किया ‘भरोसा’ अभियान, हजारों को राहत सामग्री वितरित

बिहार के हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र में जल स्तर में अचानक वृद्धि के कारण व्यापक बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई, जिससे सैकड़ों परिवार बुनियादी सुविधाओं से वंचित हो गए। इस आपदा के मद्देनज़र, केंद्र सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री एवं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने आपातकालीन राहत कार्य के लिए ‘चिराग के भरोसा’ अभियान शुरू किया। इस अभियान के तहत बिहार सरकार के सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियंत्रण (PHED) मंत्री संजय सिंह ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और पीड़ित परिवारों के बीच तत्काल राहत सामग्री वितरित की, जिससे प्रभावित लोगों को अत्यावश्यक सहायता मिली।

बाढ़ की शुरुआत मई के मध्य में हुई, जब गंगा नदी के साथ-साथ कई सहायक नदियों का जलस्तर अपने औसत स्तर से 30 प्रतिशत अधिक हो गया। पूर्वी और दक्षिणी बिहार के कई जिलों में बाढ़ के कारण सड़कें, पुल और बिजली के कनेक्शन क्षतिग्रस्त हो गए। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने इस स्थिति को ‘विसंगत आपदा’ घोषित किया और तत्काल राहत एवं पुनर्वास के लिए विशेष योजना तैयार करने का आदेश दिया।

स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ नियंत्रण के लिए कई नदियों पर जल निकासी के प्रयास किए, लेकिन तेज़ी से बढ़ते जल की मात्रा को नियंत्रित करना कठिन साबित हुआ। इस बीच, बिहार राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों में अस्थायी आश्रय शिविर स्थापित किए और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की। राज्य के गृह विभाग ने बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त घरों की सूची तैयार कर, पुनर्निर्माण के लिए बजट आवंटित करने की घोषणा भी की।

संजय सिंह ने महनार प्रखंड की हसनपुर दक्षिणी पंचायत के वार्ड संख्या 3 में स्थित दो आश्रय शिविरों का निरीक्षण किया। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर बाढ़ प्रभावित 1,200 परिवारों के बीच राशन, शुद्ध जल और स्वच्छता किट वितरित करने का आदेश दिया। इस दौरान, उन्होंने स्वयं भी राहत सामग्री के पैकेज को हाथ में लेकर परिवारों को व्यक्तिगत रूप से सौंपा, जिससे जनता के बीच आश्वासन की भावना उत्पन्न हुई।

उसी समय, लोक जनशक्ति पार्टी के कार्यकारिणी सदस्य राजेश कुमार ने बताया कि ‘चिराग के भरोसा’ अभियान के तहत 5,000 किलो चावल, 2,500 लीटर तेल और 1,200 किलोग्राम दालें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में वितरित की गईं। साथ ही, 3,000 किट में स्वच्छता सामग्री, जैसे कि साबुन, शैम्पू और टॉयलेट पेपर शामिल थे। इस वितरण प्रक्रिया को स्थानीय स्वयंसेवकों के सहयोग से सुगमता से पूरा किया गया, जिससे राहत कार्य में पारदर्शिता बनी रही।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कई स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों को भी क्षति पहुँची, जिससे बच्चों की शिक्षा और रोगियों की देखभाल में बाधा उत्पन्न हुई। शिक्षा विभाग ने अस्थायी कक्षाओं की व्यवस्था की और स्वास्थ्य विभाग ने मोबाइल मेडिकल यूनिट भेजी, जिससे प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। इन उपायों के साथ ही, जल-जनित रोगों के प्रकोप को रोकने के लिए जल शोधन इकाइयों को तैनात किया गया।

स्थानीय राजनैतिक दलों ने इस संकट के प्रति अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। बिहार के मुख्य विपक्षी दल ने सरकार पर बाढ़ नियंत्रण में लापरवाहियों का आरोप लगाया, जबकि केंद्र सरकार ने आपातकालीन सहायता के लिए फेडरल फंड्स जारी करने की घोषणा की। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भी बाढ़ पीड़ितों के लिए अतिरिक्त संसाधन प्रदान करने का वचन दिया, जिससे राहत कार्य में तेजी आई।

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर राहत वितरण का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान न केवल तत्काल आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि दीर्घकालिक पुनर्वास के लिए आधारशिला भी रखेगा। पासवान ने यह भी बताया कि आगे आने वाले हफ्तों में अतिरिक्त खाद्य सामग्री और स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति की जाएगी।

बिहार सरकार ने भी बाढ़ के आर्थिक प्रभाव को लेकर चिंतित स्वर अपनाया। राज्य के वित्तीय प्रबंधन विभाग के आंकड़े दर्शाते हैं कि बाढ़ के कारण कृषि उत्पादन में लगभग 12 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे किसान आय में कमी की संभावना है। साथ ही, स्थानीय व्यवसायों को भी नुकसान हुआ, क्योंकि बाजारों तक पहुँच में बाधा उत्पन्न हुई और वस्तुओं की आपूर्ति में देरी हुई।

आर्थिक विश्लेषकों ने इस बाढ़ के व्यापक आर्थिक प्रभाव को उजागर किया। राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान के प्रमुख अर्थशास्त्री डॉ. रवीश कुमार ने बताया कि बाढ़ के कारण कृषि क्षेत्र में उत्पादन हानि के साथ-साथ ग्रामीण उपभोक्ता खर्च में कमी आएगी, जिससे राज्य की जीडीपी वृद्धि पर दबाव पड़ेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि पुनर्स्थापना में देरी हुई तो अगले दो वित्तीय वर्षों में आर्थिक पुनरुद्धार में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

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Updated: September 9, 2026

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