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जन्माष्टमी पर रेलवे की बड़ी तैयारी, देवघर रूट पर 27 अगस्त से 3 सितंबर तक चलेंगी 4 स्पेशल ट्रेनें

जन्माष्टमी‑भाद्र पूर्णिमा के अवसर पर पूर्वी रेलवे ने देवघर मार्ग पर विशेष ट्रेनों का परिचालन किया, जिससे तीव्र भीड़ वाले इस अवधि में यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा मिल रही है। जमालपुर‑देवघर, सुल्तानगंज‑देवघर और गोड्डा‑देवघर के बीच चलने वाली इन चार स्पेशल ट्रेनों से लगभग दो लाख यात्रियों को प्रतिदिन अतिरिक्त स्थान मिलेगा, जिससे मौजूदा नियमित सेवाओं पर दबाव कम होगा।

पूर्वी रेलवे के अनुसार, यह विशेष संचालन 27 अगस्त से 3 सितंबर तक चलेगा, जब दोनों त्यौहारों के कारण श्रद्धालुओं की यात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। इस अवधि में देवघर की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या पिछले वर्ष के समान अवधि की तुलना में 45 प्रतिशत अधिक थी, जिससे अतिरिक्त ट्रेनें चलाना आवश्यक हो गया।

जन्माष्टमी और भाद्र पूर्णिमा दोनों ही हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण पर्व हैं, जिनमें विशेष रूप से देवघर के बालाजी मंदिर की ओर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। पिछले वर्षों में इस भीड़ को संभालने में रेलवे को कई बार कठिनाई का सामना करना पड़ा था, जिससे टिकट उपलब्धता और सीटिंग में कमी आई। इसलिए इस बार विशेष ट्रेनों का परिचालन एक रणनीतिक उपाय के रूप में अपनाया गया।

जमालपुर‑देवघर मार्ग पर दो नई ट्रेनों की व्यवस्था की गई है, जिनमें से एक सुबह 6 बजे और दूसरी दोपहर 2 बजे प्रस्थान करेगी। प्रत्येक ट्रेन में 20 कोचा रॉकेट और 5 कोचा एसी का समन्वय है, जिससे विभिन्न वर्गों के यात्रियों को विकल्प मिल सके। इस व्यवस्था से कुल मिलाकर 1,200 सीटों का अतिरिक्त आवंटन हुआ है।

सुल्तानगंज‑देवघर के बीच भी दो विशेष ट्रेनों को चलाने का निर्णय लिया गया है। इन ट्रेनों में मुख्यतः स्लीपर क्लास कोच होंगे, जिससे आर्थिक वर्ग के यात्रियों को भी सुविधा मिलेगी। गोड्डा‑देवघर मार्ग पर एक ही ट्रेन को दो बार चलाने का प्रावधान किया गया है, जिससे इस हिस्से में भी भीड़ में कमी आएगी।

रेलवे ने इन ट्रेनों के लिए अतिरिक्त स्टाफ, एटीएम और रेस्ट रूम की व्यवस्था भी की है। यात्रियों को टिकट बुकिंग के लिए ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म और रेलवे स्टेशन के काउंटर दोनों पर सुविधा उपलब्ध कराई गई है। विशेष ट्रेन के लिए आरक्षण खुलते ही तुरंत भर जाने की संभावना को देखते हुए, रेलवे ने अग्रिम बुकिंग को प्रोत्साहित किया है।

जमालपुर स्टेशन के क्षेत्रीय मैनेजर ने बताया कि विशेष ट्रेनों के परिचालन से यात्रियों को लंबी प्रतीक्षा समय और भीड़भाड़ से बचने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, “हमने स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ समन्वय किया है, ताकि स्टेशन पर व्यवस्था सुगम रहे और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।”

सुल्तानगंज में रेलवे प्रतिनिधि ने बताया कि विशेष ट्रेनें चलाने से न केवल यात्रियों को लाभ मिलेगा, बल्कि स्थानीय व्यापारियों को भी आर्थिक लाभ होगा, क्योंकि अधिक लोग मंदिर दर्शन के साथ साथ क्षेत्रीय बाजारों में खरीदारी करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रेनें समय पर चलने के लिए तकनीकी टीम ने पूरी तैयारी कर ली है।

राज्य सरकार ने भी इस कदम का स्वागत किया। पर्यटन विभाग के अधिकारी ने कहा कि विशेष ट्रेनों के कारण देवघर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि से स्थानीय पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे होटल और परिवहन सेवाओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा, “हम इस पहल को भविष्य में भी दोहराने की योजना बना रहे हैं।”

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विशेष संचालन से रेलमार्ग पर आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। रेलवे के वित्तीय डेटा के अनुसार, विशेष ट्रेनों के टिकट मूल्य सामान्य टिकटों से 15‑20 प्रतिशत अधिक होने की संभावना है, जिससे राजस्व में अतिरिक्त आय होगी। साथ ही, इस अवधि में मालभाड़ा भी बढ़ने की अपेक्षा है, क्योंकि अधिक यात्रियों के साथ-साथ स्थानीय वस्तुओं की मांग भी बढ़ेगी।

सामाजिक प्रभाव की दृष्टि से, इस पहल से यात्रियों को सुरक्षा और सुविधा दोनों का लाभ मिलेगा। विशेष ट्रेनें कम भीड़भाड़ वाली होंगी, जिससे कोविड‑19 जैसी स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं में भी कमी आएगी। इसके अलावा, यात्रियों को समय पर गंतव्य तक पहुंचने से धार्मिक कार्यक्रमों में भागीदारी सुनिश्चित होगी, जिससे सामाजिक संतुष्टि बढ़ेगी।

राजनीतिक दृष्टिकोण से यह देखना रोचक है कि इस कदम को विभिन्न पक्षों द्वारा किस तरह मूल्यांकित किया जा रहा है। विपक्षी दल के कुछ प्रतिनिधियों ने कहा कि रेल विभाग ने समय पर उपाय नहीं किए, जबकि सरकार के पक्ष ने इसे ‘जनहित में’ कदम कहा। इस बीच, स्थानीय विधायक ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे विशेष संचालन को नियमित रूप से लागू किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह के विशेष ट्रेन संचालन को डेटा‑ड्रिवेन योजना के तहत ही लागू किया जाना चाहिए। एक रेल नीति विश्लेषक ने कहा, “यदि यात्रियों की संख्या और यात्रा पैटर्न का सही विश्लेषण किया जाए, तो विशेष ट्रेनों की योजना और संस

Updated: September 2, 2026

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