आंध्र प्रदेश में स्वर्ण के अलावा भी कई मूल्यवान खनिज जैसे बॉक्साइट, लिथियम और दुर्लभ पृथ्वी धातुएँ पाई जाती हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और新能源 उद्योगों में प्रमुख भूमिका निभाती हैं। सरकार ने इन क्षेत्रों की भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण को तेज़ी से पूरा करने की योजना बनाई है, जिससे संभावित खनन साइटों की पहचान हो सके। इस प्रक्रिया में केंद्रीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (सीजीएस) के साथ सहयोग किया जाएगा, जिससे डेटा की सटीकता और मानकीकरण सुनिश्चित हो सके। इस चरण में लगभग 30 नई संभावित खनन साइटों की सूची तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना के कार्यान्वयन चरण में, राज्य ने निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी मॉडल अपनाया है, जिससे पूंजी एवं तकनीकी ज्ञान दोनों का लाभ मिल सके। हाल ही में दो बड़े बहुराष्ट्रीय खनन कंपनियों ने इस योजना में निवेश करने की इच्छा व्यक्त की है, और उन्होंने 5 बिलियन रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है। इन निवेशों में मुख्यतः खनन उपकरण, जल प्रबंधन प्रणाली और सुरक्षा उपायों को अपडेट करने की आवश्यकता होगी। साथ ही, स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने के लिए कौशल विकास संस्थानों के साथ समझौते किए जा रहे हैं, जिससे श्रमिकों की दक्षता बढ़ेगी।
इन प्रमुख घटनाक्रमों पर राज्य के उद्योग मंत्री ने कहा कि स्वर्णागिरी परियोजना ने सिद्ध किया है कि सही नीति, निवेश और तकनीकी समर्थन से खनिज संसाधनों को मूल्यवर्धित उत्पादों में परिवर्तित किया जा सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगले दो वर्षों में राज्य में कम से कम पाँच नई खनिज‑आधारित औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित होंगी, जो विभिन्न चरणों में उत्पादन शुरू कर सकेंगी। इसके अलावा, सरकार ने पर्यावरणीय मानकों को कड़ाई से लागू करने की प्रतिबद्धता जताई, ताकि सतत विकास को सुनिश्चित किया जा सके।
खानाबदोश समुदायों और स्थानीय नागरिक संगठनों ने भी इस पहल को सकारात्मक रूप से देखा है, क्योंकि इससे उनके पारंपरिक जीवनशैली पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा और नई आय के स्रोत खुलेंगे। कुछ सामाजिक समूहों ने कहा कि अगर सरकार रोजगार के साथ साथ स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी निवेश करती है, तो विकास का लाभ सभी वर्गों तक पहुंचेगा। वहीं, पर्यावरण संरक्षण एजेंसियों ने सतत खनन के लिए कठोर पर्यावरणीय आकलन की माँग की है, जिससे जल प्रदूषण और जैव विविधता पर संभावित प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके।
राज्य के मुख्य वित्तीय अधिकारी ने कहा कि इस योजना के माध्यम से अगले पाँच वर्षों में राज्य की निर्यात आय में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे वित्तीय घाटा घटेगा और निवेश आकर्षण बढ़ेगा। आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े दिखाते हैं कि यदि खनन‑आधारित औद्योगिक इकाइयों का उत्पादन लक्ष्य प्राप्त हो जाता है, तो राज्य की कुल उद्योग उत्पादन में 12 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि होगी। इस दिशा में नई नीति फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है, जिसमें कर प्रोत्साहन, भूमि उपलब्धता और अनुदान शामिल हैं। यह सभी कदम आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
केंद्रीय सरकार ने भी इस पहल को स्वागत किया है, और कहा कि आंध्र प्रदेश का खनिज‑उत्पादन मॉडल अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन सकता है। वित्त मंत्रालय ने योजना के लिए विशेष बजट आवंटन की संभावना जताई, जिससे बुनियादी ढांचे के विकास और तकनीकी अपग्रेड को गति मिलेगी। इसके अलावा, राष्ट्रीय खनिज नीति में प्रस्तावित बदलावों के साथ इस योजना को समायोजित किया जा रहा है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिये आसान प्रवेश संभव हो सके।
Updated: August 29, 2026
By turning raw mineral veins into high‑value industries, Andhra Pradesh is scripting a classic “resource‑to‑wealth” narrative that could flip the state’s export basket and job market—if the policy’s green‑tech safeguards hold up, the gains could ripple across the national economy.
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