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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक, कुल 26 महत्वपूर्ण एजेंडों पर मोहर लगी है

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कुल 26 महत्वपूर्ण एजेंडों पर मोहर लगी है।

सम्राट अशोक जयंती को राजकीय समारोह का दर्जा।

चैत शुक्ल पक्ष अष्टमी के दिन मनेगी जयंती।

सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर में मनेगी राजकीय समारोह।

बिहार नगरपालिका निर्वाचन संसोधन 2022 की स्वीकृति।

मेयर और डिप्टी मेयर की सीधे निर्वाचन होंगे।

जमुई के तत्कालीन सिकंदरा CO धर्मेंद्र कुमार भारती बर्खास्त।

राजस्व सेवा के अधिकारी मनोज झा को जबरन सेवानिवृति।

बांका में तैनात है मनोज झा।

ITI में 118 पदों का सृजन।

अनुदेशक का पद सृजित।

बाबा केवल स्थान मेला समस्तीपुर को राजकीय मेला का दर्जा।

समस्तीपुर अमर सिंह हजरत शिउरा को राजकीय दर्जा।

CM Nitish Kumar
CM Nitish Kumar

बिहार सरकार कैबिनेट के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार ने बताया कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पदाधिकारी मनोज कुमार झा जो बांका में पदस्थापित हैं उन्हें 3 महीने पूर्व ही सेवानिवृत्ति करने पर स्वीकृति मिली है। प्रभारी अंचल अधिकारी धर्मेंद्र कुमार जो जमुई में पदस्थापित हैं उन्हें बर्खास्त किया गया है।

बिहार के 18 वर्ष से 59 वर्ष तक के सभी लोगों को कोविड-19 का निशुल्क प्रिकॉशन डोज दिया जाएगा जिसके लिए 1314.15 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है। राज्य के 2 जिलों में राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल का निर्माण होगा जिसके लिए 12073600000 रुपए की स्वीकृति हुई है।

जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में क्या रहा खास

जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री, 127 लोगों की सुनी समस्यायें, अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा निर्देश

पटना, 18 अप्रैल 2022 मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार आज 4 देशरत्न मार्ग स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय परिसर में आयोजित ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में शामिल हुए। जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे 127 लोगों की समस्याओं को सुना और संबंधित विभागों के अधिकारियों को समाधान के लिए समुचित कार्रवाई के निर्देश दिए।

आज जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में सामान्य प्रशासन विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, पंचायती राज विभाग, ऊर्जा विभाग, पथ निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, कृषि विभाग, सहकारिता विभाग, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, जल संसाधन विभाग, उद्योग विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, परिवहन विभाग, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, लघु संसाधन विभाग, योजना एवं विकास विभाग, पर्यटन विभाग, भवन निर्माण विभाग, वाणिज्य कर विभाग, सूचना एवं जन संपर्क विभाग, गन्ना (उद्योग) विभाग, विधि विभाग तथा जीविका से संबंधित मामलों पर सुनवाई हुयी।

‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में रोहतास से आये एक व्यक्ति ने मनरेगा में अनियमितता की शिकायत की। वहीं वैशाली जिले के पातेपुर के एक व्यक्ति ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास मिलनेवाली सूची में नाम होने के बावजूद उसे आवास नहीं मिला। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को जांचकर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

शिवहर से पहुंचे एक फरियादी ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके महादलित टोला का

सड़क, मुख्य सड़क से नहीं जोड़ा गया है, इसके कारण मुख्य सड़क तक जाने में काफी कठिनाई होती है। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। बांका जिले के बेलहर से आए एक बुजुर्ग जे०पी० सेनानी ने कहा कि बिना अनुमति के उनकी जमीन के बीच में तीन बिजली का पोल लगा दिया गया है। थाना में भी कई बार आवेदन देने के बाद भी मामले में कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को इस मामले की जांचकर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

• शिवहर जिले के विश्वम्भरपुर के एक व्यक्ति ने विश्वम्भरपुर पंचायत के वार्ड नंबर-7 के

महादलित टोला में रास्ता निर्माण को लेकर अपनी मांग मुख्यमंत्री के समक्ष रखी। वहीं भोजपुर

जिले के गड़हनी के एक व्यक्ति ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण को लेकर

अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को इस पर समुचित कार्रवाई करने का निर्देश

दिया। ●भागलपुर जिले के बिहपुर के एक व्यक्ति ने प्राकृतिक आपदा के कारण अपनी फसल नष्ट होने की शिकायत की और मुआवजे की मांग को लेकर अपनी बात मुख्यमंत्री के समक्ष रखी। वहीं

बेगूसराय के मसदपुर के एक व्यक्ति ने फैक्ट्री से उत्पन्न प्रदूषण के कारण ग्रामीणों को होने वाली परेशानी के संबंध में शिकायत की मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को जांचकर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। फतुहा के एक व्यक्ति ने नगर परिषद् के वार्ड-16 में गंगा घाट निर्माण कार्य कराने के

संबंध में मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रखी। वहीं दानापुर से आयी एक महिला ने शिकायत करते हुए कहा कि बरसात के दिनों में जलजमाव की समस्या होने के कारण उन्हें पलायन करना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, उद्योग मंत्री श्री शाहनवाज हुसैन, जल संसाधन मंत्री श्री संजय कुमार झा, भवन निर्माण मंत्री श्री अशोक चौधरी, ग्रामीण विकास मंत्री श्री श्रवण कुमार, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री श्री रामप्रीत पासवान, पथ निर्माण मंत्री श्री नितिन नवीन, पंचायती राज मंत्री श्री सम्राट चौधरी, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्रीमती लेशी सिंह, सहकारिता मंत्री श्री सुबाष सिंह, परिवहन मंत्री श्रीमती शीला कुमारी, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री नीरज कुमार सिंह, लघु जल संसाधन मंत्री श्री संतोष कुमार सुमन, ग्रामीण कार्य मंत्री श्री जयंत राज, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, मुख्य सचिव श्री आमिर सुबहानी, पुलिस महानिदेशक श्री एस0के0 सिंघल, संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव / प्रधान सचिव / सचिव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ० एस० सिद्धार्थ, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह, पटना के जिलाधिकारी श्री चंद्रशेखर सिंह तथा वरीय पुलिस अधीक्षक श्री मानवजीत सिंह ढिल्लो उपस्थित थे।

‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम की समाप्ति के पश्चात् मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत की। देश में कोरोना के मामले में हो रही वृद्धि के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कहीं-कहीं से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने की खबर आ रही है। दिल्ली में भी कोरोना के मामले में वृद्धि की खबर आयी है। बिहार में अभी कोरोना के काफी कम मामले हैं लेकिन बाहर में कोरोना के मामले बढ़ने का असर यहां भी पड़ता है क्योंकि लोग एक-दूसरे जगह आते जाते रहते हैं।

राज्य में लगातार कोरोना की जांच कराई जा रही है। यहां इसको लेकर पूरी तरह सतर्कता है और लोगों को भी सतर्क किया जा रहा है ताकि बाहर से आनेवालों की जांच होती रहे। सब लोगों से आग्रह है कि कोरोना की जांच करायें, इसको लेकर सरकार की ओर से पूरी व्यवस्था है। बिहार में कोरोना जांच की दर सर्वाधिक है। देश में दस लाख की आबादी पर जितनी औसत जांच हो रही है उससे ज्यादा जांच बिहार में हो रही है।

कोरोना दूसरे देशों में भी बढ़ा है। बिहार में कोरोना संक्रमण की दर काफी नीचे गया है लेकिन अगर फिर कहीं बढ़ रहा है तो उसके लिए अलर्ट रहने की जरूरत है। हमलोगों के यहां अलर्टनेस है, उसके लिए जो भी जरूरी है किया जाएगा। सिर्फ कोरोना ही नहीं बल्कि भीषण गर्मी के चलते अन्य प्रकार की बीमारियों का भी खतरा है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के द्वारा इस पर नजर रखी जा रही है। हमलोग निरंतर जरूरी जानकारी लेते रहते हैं कि कहां पर किस जगह पर क्या स्थिति है ? सब ध्यान दे रहे हैं। बिहार में कुछ जगहों पर तापमान 44 डिग्री तक पहुंच गया है। पिछले अनेक वर्षों से इस वर्ष तापमान में ज्यादा वृद्धि हुई है इसलिए लोगों को तो सतर्क रखना ही पड़ेगा। हमलोग इसको लेकर पूरे तौर पर अलर्ट है। स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ प्रशासन की तरफ से

भी अलर्ट किया गया है। ए०ई०एस० से बचाव के लिए काम किया जा रहा है। लाऊडस्पीकर पर नमाज को लेकर देश के कुछ हिस्सों में जारी विवाद के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब से हमें काम करने का मौका मिला है तब से ही आपस में किसी तरह का विवाद न हो, झंझट न हो इसको लेकर हमलोग काम करते रहे हैं। पहले बिहार में कितना विवाद होता था लेकिन हमलोगों ने लोगों में अवेयरनेस लाकर इसको बिल्कुल समाप्त करने की लगातार कोशिश की है जब किसी समुदाय, धर्म के त्योहार का अवसर आता है तो प्रशासन पूरी
तौर पर अलर्ट रहता है ताकि कोई गड़बड़ी न कर सके। एक-एक चीज पर कॉन्सेसनेस है। जिसके मन में जो आता है, बोलते रहता है। हमलोग चाहते हैं कि सभी लोगों में आपस में प्रेम और भाईचारे का भाव रहना चाहिए। कोई भी किसी धर्म को मजहब को माननेवाला है, उसका अपना-अपना तरीका है।

सब लोग अपने-अपने ढंग से अपना त्योहार मनायें लेकिन इसको लेकर के आपस में विवाद नहीं करना चाहिए। ये बहुत जरूरी चीज है। सब अपने-अपने धर्म का मजहब का पालन कीजिए। इसको लेकर कहीं कोई रोक नहीं है। अगर आप सचमुच पूजा में विश्वास करते हैं तो ठीक से पूजा कीजिये। एक-दूसरे से झगड़ा करने का, पूजा करने से कोई संबंध नहीं है। अगर कोई भी किसी कम्युनिटी का है आपस में इस तरह का विवाद करता है तो मान लीजिए उसको धर्म से कोई मतलब नहीं है। इसका मतलब है कि वो सही आदमी नहीं है। यहां पर ऐसा कुछ नहीं है लेकिन कुछ-न-कुछ तो इधर-उधर होता ही रहता है। यहां पर अलर्टनेस है। उसके लिए ज्यादा चिंता मत करिए। हमलोग सबकी इज्जत करते हैं, हमलोग किसी को अपमानित नहीं करते हैं।

कुछ मंत्रियों द्वारा की जा रही बयानबाजी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें इसकी जानकारी नहीं है। अगर आप लोग जानकारी दीजिएगा तो हम उनसे तुरंत पूछ लेंगे। हमारे पास कहीं से कोई जानकारी मिलती है तो तत्काल पूछ लेते हैं। ऐसा कुछ नहीं है, कोई भूल से कुछ बोल दिया हो तो उसकी बात अलग है।

श्री प्रशांत किशोर द्वारा कांग्रेस की जिम्मेदारी संभालने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पर मेरी कोई प्रतिक्रिया नहीं है। सबको अपना अधिकार है, राजनैतिक रूप से कोई क्या करना चाहता है, ये उसका अपना अधिकार है। हमसे उनका व्यक्तिगत संबंध रहा है और है भी। वे सबसे पहले भाजपा के साथ थे। फिर हमलोगों के साथ काम किये। अब कहीं और कर रहे हैं यह उनकी अपनी इच्छा है। ऐसे हमारा कोई इंटरफेयरेंस नहीं है और न ही इसमें हमारी कोई प्रतिक्रिया है।

उपचुनाव के नतीजे के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जगह बाइइलेक्शन में हमलोगों की हार हो गई तो ये कोई खास बात नहीं है। इससे पहले दो बाइइलेक्शन हमलोग भी जीते हैं। यह कोई जेनरल इलेक्शन नहीं था। हमलोग तो एन०डी०ए० के उम्मीदवार के प्रचार के लिये गये ही थे, सब लोग प्रचार किये ही थे। वहां क्या हुआ इसकी अभी पूरे तौर पर जानकारी नहीं है कि हार क्यों हुई। आपस में बातचीत करने से इसकी पूरी जानकारी मिलेगी कि मामला क्या था। जनता मालिक है, उसको जो मन करे, उसे वोट दे। इस पर हम कभी कमेंट नहीं करते हैं।

श्री शत्रुघ्न सिंहा के बंगाली बाबू के रूप में लोकसभा उपचुनाव में मिली सफलता के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहारी बाबू और बंगाली बाबू क्या है, सब हिंदूस्तानी बाबू हो जाइये। ये सबसे अच्छा है। इसमें क्या दिक्कत है।

स्पेशल स्टेट्स के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोग काम भी करते हैं और बिहार को जो जरूरत रहती है उसके लिये बात भी करते रहते हैं। कौन क्या कॉमेंट देता उससे क्या मतलब। हमलोग जितना बिहार के लिये करते हैं वो आपलोगों को पता है। हमलोग मांग भी करते हैं और बिहार के लिए काम भी करते हैं। इन सब पर ज्यादा चिंता करने की जरुरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मौसम को देखते हुए अभी एक- दो महीने लोगों को अलर्ट रहने की जरुरत है। राजनीतिक बातें तो होती ही रहती है, उसका उतना महत्व नहीं है लेकिन लोगों की सर्वोपरि है। सभी लोग स्वस्थ रहें किसी को कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़े इसको लेकर हम सभी लोग लगे हुए हैं। मीडियाकर्मी भी लोगों को सचेत करते रहें, यह बहुत जरुरी है। अभी सभी लोगों को सचेत रहने की जरुरत है।

विश्व विरासत दिवस पर बिहार के पारंपरिक कलाओं के प्रशिक्षण के लिए बिहार संग्रहालय में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया

यह कार्यशाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पटना मंडल, बिहार पुराविद परिषद्, फेसेस पटना और बिहार म्यूजियम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यशाला में पटना विमेंस कॉलेज, नोट्रे डेम अकैडमी, इंटरनेशनल स्कूल, रेडियंट इंटरनेशनल स्कूल, केंद्रीय विद्यालय नंबर-2, आर्मी पब्लिक स्कूल दानापुर और उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसन्धान संस्थान से कुल 70 छात्रों ने मधुबनी पेंटिंग, मृण्मूर्ति कला, पटना कलम, मञ्जूषा कला और टिकुली कला का प्रशिक्षण प्राप्त किया। युवा कलाकार एवं प्रशिक्षकों ने छात्रों को उनके पसंद की कलाओं का प्रशिक्षण दिया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद बिहार संग्रहालय के महानिदेशक एवं मुख्यमंत्री के सलाहकार अंजनीकुमार सिंह ने अपने उद्घाटन भाषण में आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि बिहार की पारंपरिक कला को सीखने और समझने के लिए इतनी संख्या में छात्रों के उत्साहपूर्ण भागीदारी से मैं अभिभूत हूँ। यह इस बात का प्रमाण है कि दुनिया चाहे जितनी बदल गई हो, बिहार के युवाओं की कला-प्रियता कम नहीं हुई है। हमारे युवाओं के हाथों में हमारी कलात्मक विरासत सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि बिहार की पारंपरिक कलाएं केवल शौकिया ही नहीं बल्कि रोजगार का भी बहुत बड़ा साधन है। हमने सरकार की ओर से एक प्रशिक्षण संस्थान भी खोला है, जिसमें प्रशिक्षण देने के लिए प्रोफेसर की नियुक्त डिग्री के आधार पर नहीं बल्कि काम के आधार पर किया गया है।

विशिष्ट अतिथि के तौर पर बिहार के मूर्धन्य कलाकार और रेलवे स्टेशनों को मधुबनी कला से सजाने वाले भारत के प्रथम कलाकार राजेन्द्र प्रसाद मंजुल ने कहा कि बिहार की धरती परंपरागत कलाओं की विविध रंगों से सजी एक बड़े कैनवास की तरह है, जिसे समय का धूल कभी धूमिल नहीं कर सकता। युवा पीढ़ी में इन कलाओं के प्रति अनुराग पैदा करने के इस पावन कार्य की मैं भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूँ।

विश्व विरासत दिवस

कार्यशाला को संबोधित करते हुए बिहार पुराविद परिषद् के महासचिव डॉ. उमेश चन्द्र द्विवेदी ने कहा कि कि बिहार की भूमि कला-प्रसूता है। मानव सभ्यता के विकास की उषा काल में ही यहाँ कलाओं का उदय हुआ, जिसके पुरातात्विक प्रमाण शैल और गुफा चित्रों के रूप में आज भी हमारे सामने हैं। बिहार की कलाएं मानव जीवन की गहराइयों से उद्भूत हैं, अतः शाश्वत हैं। इन कलाओं के प्रति हमारा प्रेम ही इनके संरक्षण और विकास की गारंटी है। अतः आवश्यक है कि हम इन्हें अपनी नयी पीढ़ी को सौंपने का अथक प्रयास करें।

इस अवसर पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पटना मंडल के सहायक अधीक्षक पुरातत्वविद डॉ. प्रसन्ना दीक्षित, फेसेस की महासचिव सुनिता भारती, फेसेस के संस्कृति सचिव शुभम सिंह, बिहार संग्रहालय के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सुनील कुमार झा सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।

उधर इस अवसर पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण,पटना सर्किल द्वारा नालंदा महाविहार पुरातात्विक स्थल (प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय) में भी छात्रों के बीच चित्रकला व भाषण प्रतियोगिता, विश्व धरोहर स्थलों की फोटो प्रदर्शनी और वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

प्रति वर्ष 18 अप्रैल को विश्व विरासत दिवस मनाया जाता है । संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था यूनेस्को द्वारा घोषित इस दिवस को मनाये जाने का उद्देश्य अपनी विरासत के प्रति जन जागरूकता पैदा करना है । इस समय 1150 के करीब विश्व विरासत स्थल हैं इनमें से 40 भारत में स्थित हैं । विश्व विरासत स्थल वे स्थल या विरासत हैं, जिनके बारे में यह स्वीकार किया जाता है कि इनका निर्माण किसी देश, जाति या पंथ का न होकर संपूर्ण मानव जाति की उपलब्धि है और इस प्रकार उनका सार्वभौमिक मूल्य है और इसलिए उनके अस्तित्व को संरक्षित एवं सुरक्षित रखना संपूर्ण मानव जाति का कर्तव्य है ।

पटना हाईकोर्ट ने राजीव रंजन सिंह की राष्ट्रीय राजमार्ग से सम्बंधित याचिका पर सुनवाई गंडक नदी पर पुल निर्माण में हो रहे बिलम्ब को गम्भीरता से लिया

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पुल निर्माण करने वाली कंपनी के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक को 20 अप्रैल,2022 को तलब किया है।

कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जाहिर किया कि हाजीपुर में आर ओ बी का निर्माण एक दशक बाद भी पूरा नहीं हुआ।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने गंडक नदी पर पुल निर्माण कार्य पूरा करने के लिए पुल निर्माण कंपनी को छह से सात माह का समय दिया।साथ ही कहा था कि निर्माण कार्य दोनों ओर हाजीपुर और छपरा से शुरू होना चाहिए।

निर्माण कंपनी द्वारा इस पुल के निर्माण के लिए दस महीने की मोहलत मांगी गई,जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया था। आज कोर्ट ने कहा कि कोर्ट अगली सुनवाई में एन एच ए आई के अध्यक्ष को तलब किया जा सकता है।

पिछली सुनवाई में याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वैशाली के डी एम से पूछा कि प्रशासन इस मामलें में क्या कर रहा था।कोर्ट ने उनसे जानना चाहा कि जनता की मुश्किलों को दूर करने के लिए उन्होंने क्या कार्रवाई की।

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वैशाली के जिलाधिकारी ने बताया था कि हाजीपुर के रामाशीष चौक से बस स्टैंड नेटवर्क से हटा दिया गया है। साथ ही ये भी बताया कि रामाशीष चौक पर जाम का मुख्य कारण अंजानपीर चौक से आर ओ बी का नहीं बनना और दोनों साइड
सड़कों का खस्ताहाल होना।साथ ही जगह जगह मनमाने तरीके से स्पीड ब्रेकर का निर्माण किया जाना।

कंपनी के अधिवक्ता सिद्धार्थ प्रसाद ने बताया था कि अजानपीर दोनों ओर की सड़कों को एक माह में मरम्मत और निर्माण कार्य पूरा कर सड़क को ठीक कर दिया जाएगा। साथ ही अजानपीर के आसपास अनावश्यक स्पीड ब्रेकर को भी हटा दिया जाएगा।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 20 अप्रैल,2022 को होगी।

केन्द्रीय करों में हिस्से के रूप में बिहार को अभी तक की सर्वाधिक राशि प्राप्त

पटना । राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सम्प्रति राज्य सभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी ने आज एक वक्तव्य में कहा कि कोविड के बाद अर्थव्यवस्था में सुधार का परिणाम है कि केन्द्रीय करों में हिस्से के रूप में बिहार को 2020-21 की तुलना में 2021-22 में 34 प्रतिशत ज्यादा राशि केंद्र से प्राप्त हुई है। जहां 2020-21 में मात्र 59 हजार 861 करोड़ प्राप्त हुआ था वहीं 2021-22 में 31,491 करोड़ ज्यादा प्राप्त हुआ यानि 91 हजार 352 करोड़ प्राप्त हुए हैं।

केन्द्रीय करों में हिस्से के रूप में बिहार को अभी तक की सर्वाधिक राशि प्राप्त
• 2021-21 में 91,352.62 करोड़ प्राप्त
• 2020-21 की तुलना में 31,491 करोड़ ज्यादा प्राप्त – सुशील कुमार मोदी

ज्ञातव्य है कि केंद्र सरकार को आय-कर, कॉरपोरेट कर, एक्साइज, कस्टम्स ड्यूटी, जीएसटी से प्राप्त टैक्स वित्त आयोग की अनुशंसा पर राज्यों को डीवोल्युसन (Devolution) के रूप में प्राप्त होता है। इस राशि को राज्य सरकार किसी भी कार्य पर व्यय कर सकती है। 15वें वित्त आयोग ने केन्द्रीय करों में राज्यों को 41 प्रतिशत और उसमें बिहार को 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी निर्धारित की है ।

पंचायती राज संस्थाओं को 3709 करोड़ रुपये अनुदान के रूप में प्राप्त हुआ परंतु शहरी निकायों के लिए 1827 करोड़ के विरुद्ध 836.25 करोड़ ही प्राप्त हो सका ।

राष्ट्रीय आपदा राहत कोष से बिहार को 2021-21 में 1038.96 करोड़ की सहायता मिली है। 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा के रूप में राज्य आपदा राहत कोष में केंद्र की हिस्सेदारी के रूप में 1416 करोड़ प्राप्त हुए हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन एवं कोविड से मुकाबला हेतु बिहार को 2348.96 करोड़ प्राप्त हुए। इसके अतिरिक्त पंचायत एवं नगर निकायों के माध्यम से स्वास्थ्य संरचनाओं के लिए अतिरिक्त 1116.31 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है।

Patna High Court: मगध विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर (वीसी) राजेन्द्र प्रसाद उर्फ डॉ राजेन्द्र प्रसाद की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है

पटना हाईकोर्ट ने मगध विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर (वीसी) राजेन्द्र प्रसाद उर्फ डॉ राजेन्द्र प्रसाद की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा कर राहत दी है। जस्टिस आशुतोष कुमार ने इस अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य निगरानी विभाग से जवाबतलब किया हैं।

इससे पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट को तीन सप्ताह के भीतर सुनवाई करने का आग्रह किया था।साथ उनकी गिरफ्तारी पर तत्काल रोक लगा दिया था।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता डा रणजीत कुमार ने बताया कि साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राजेन्द्र प्रसाद द्वारा पटना हाई कोर्ट में दायर अग्रिम जमानत व कार्यवाही को रद्द करने हेतु दायर अर्जियों पर सुनवाई की थी।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस बीच याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी पर रोक रहेगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को निष्पादित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश को पारित किया था।

राजेन्द्र प्रसाद के विरुद्ध आई पी सी की धारा 120 बी (अपराध करने के लिए रची गई आपराधिक साजिश) / 420(जालसाजी) व भ्रष्टाचार निवारण एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया था।

इसके पूर्व याचिकाकर्ता ने पटना हाई कोर्ट के समक्ष अग्रिम जमानत हेतु याचिका भी दायर किया है। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिए अर्जी भी दायर किया है।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता की दलील थी कि उनकी अर्जियों पर सुनवाई बड़े पैमाने पर मुकदमों के लंबित रहने की वजह से नहीं सुना जा रहा है।

इस मामलें पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई 25 अप्रैल,2022 को होगी।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उपचुनाव के रिजल्ट, विशेष राज्य का दर्जा, कोरोना संक्रमण पर अपनी बात कही

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उपचुनाव के रिजल्ट पर कहा कि अभी पूरे मामले पर क्या हुआ इसकी जानकारी हमें नहीं है भारतीय जनता पार्टी से इस मामले पर भी बातचीत नहीं हुई है जनता मालिक है जनता जिस को वोट दें।

शत्रुघ्न सिन्हा के उपचुनाव में जीत पर उन्होंने कहा कि बिहारी बाबू और बंगाली बाबू में फर्क क्या है सभी लोगों को हिंदुस्तान में बाबू हो जाना चाहिए

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि विशेष राज्य का दर्जा को लेकर कहा कि यह सब चीज तो लगातार कई सालों से है और जब भी जरूरत पड़ती है हम बताते रहते हैं

संक्रमण के चौथे लहर पर उन्होंने कहा कि हम मीडिया से भी अपील करते हैं कि लोगों को इलाज कराइए और अभी मौसम भी काफी खराब चल रहा है।

नीतीश कुमार ने कहा कि प्रशांत किशोर से हमारा तो संबंध है ही पहले भाजपा के साथ थे बाद में हमारे साथ है वह जहां भी जा रहे हैं वह उनका व्यक्तिगत फैसला है हम से उनका संबंध दूसरा है।

संक्रमण को लेकर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट है और लगातार जांच चल रही है जो भी जरूरत होगा जो भी कार्रवाई होगा की जाएगी भीषण गर्मी को देखते हुए भी विभाग को अलर्ट पर रखा गया है

Patna High Court: दनियावां थाना के पुलिसकर्मी संतोष कुमार व अनूप कुमार द्वारा अधिवक्ता विनोद कुमार के साथ किये गए मारपीट के मामलें पर सुनवाई हुई

पटना हाईकोर्ट ने दनियावां थाना के पुलिसकर्मी संतोष कुमार व अनूप कुमार द्वारा अधिवक्ता विनोद कुमार के साथ किये गए मारपीट के मामलें पर सुनवाई की चीफ जस्टिस संजय करोल की डिवीजन बेंच इस मामलें सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने की गई कार्रवाई का ब्यौरा प्रस्तुत किया।

राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कोर्ट को बताया कि इस मामलें सम्बंधित पुलिस अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है।साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई हैं।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि पीड़ित अधिवक्ता विनोद कुमार की ईलाज की पूरी व्यवस्था की गई।उनका मेडिकल जांच किया गया।साथ ही उन्हें दवा भी दी गई।

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एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश चंद्र वर्मा ने कोर्ट को बताया की इस तरह की घटनाएं अक्सर होते रहती हैं।ऐसी घटनाओं को सख्त तरीके से रोकने की जरूरत हैं।कोर्ट में आज पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक को पटना हाई कोर्ट के समक्ष उपस्थित थे। उन्होंने भी अपनी बात कोर्ट के समक्ष रखा।

कोर्ट के समक्ष पिछली सुनवाई में इस घटना के सम्बन्ध में सीनियर एडवोकेट पी के शाही ने पूरी घटना को रखा था। श्री शाही ने यह भी बताया कि उस रास्ते से राज्य के मुख्यमंत्री को जाना था।

उसके बाद कोर्ट ने इस मामले में दिए गए पत्र को आधार बनाते हुए जनहित याचिका के रूप में रजिस्टर्ड करने का आदेश दिया था।

कोर्ट को राज्य सरकार के महाधिवक्ता ललित किशोर ने पीड़ित अधिवक्ता की समुचित इलाज करवाने के लिए आश्वस्त किया था। सुनवाई के दौरान राज्य

इस घटना के बारे में पत्र में कहा गया है कि जब पीड़ित अधिवक्ता नालंदा जिला अंतर्गत अपने गांव चुलिहारी से पटना आ रहे थे ,तो दनियावां पुलिस द्वारा मारपीट की गई।

इसकी वजह से अधिवक्ता के दोनों कान बुरी तरह से घायल हो गए।पत्र में कहा गया है कि जब अधिवक्ता ने पटना के एसएसपी व दनियावां थाना के एसएचओ के समक्ष शिकायत करना चाहा,तो उन्होंने शिकायत लेने से इंकार कर दिया था।

इस मामलें पर कोर्ट आदेश पारित करेगा।

Patna High Court: राज्य के पटना स्थित जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट,पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के मामले पर सुनवाई हुई

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के पटना स्थित जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट,पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के मामले पर सुनवाई की।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने गौरव कुमार सिंह व अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को विभिन्न एयरपोर्ट के विस्तार,विकास व भूमि अधिग्रहण के सम्बन्ध में की जा रही कार्रवाई का ब्यौरा देने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी राज्य में एयरपोर्ट के लिए किये जा रहे सर्वे का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
इससे पहले की सुनवाई में पटना के जयप्रकाश नारायण एयरपोर्ट के निर्देशक कोर्ट में उपस्थित हो कर पटना और राज्य के अन्य एयरपोर्ट की स्थिति के सम्बन्ध में ब्यौरा पेश किया था।

उन्होंने पटना एयरपोर्ट की समस्याओं को बताते हुए कहा कि हवाई जहाज लैंडिंग की काफी समस्या है।सामान्य रूप से रनवे की लम्बाई नौ हज़ार फीट होती हैं, जो कि पूर्णिया व दरभंगा में उपलब्ध है,जबकि पटना में रनवे की लम्बाई 68 सौ फीट हैं।

उन्होंने बताया कि एक ओर रेलवे लाइन है और दूसरी ओर सचिवालय हैं।उन्होंने कोर्ट को बताया था कि रन वे की लम्बाई बढ़ाने के लिए सर्वे शुरू होगा।कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को यह जानकारी देने को कहा है कि बिहार के सटे राज्य झारखंड,बंगाल,उत्तर प्रदेश,ओडिशा,उत्तर पूर्व के राज्यों में कितने एयरपोर्ट हैं।

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कोर्ट को राज्य के गया,पूर्णियां और अन्य एयरपोर्ट के विस्तार,विकास और भूमि अधिग्रहण से सम्बंधित समस्यायों के बारे में बताया गया

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य के एडवोकेट जनरल से कहा था कि गया एयरपोर्ट के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए 268 करोड़ रुपए कोर्ट में जमा करा दे।सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद उसका निबटारा होगा।

एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि इसके लिए राज्य सरकार से निर्देश की आवश्यकता होगी।अधिवक्ता अर्चना शाही ने कोर्ट को बताया था कि सम्बंधित केंद्रीय मंत्री ने राज्य सभा में बताया कि पटना एयरपोर्ट के विस्तार और विकास के 1260 करोड़ रुपए की राशि निर्गत किया गया।

लेकिन अर्चना शाही ने बताया कि अब तक इस धनराशि का 32% खर्च किया गया है।

राज्य में पटना के जयप्रकाश नारायण अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के अलावा गया, मुजफ्फरपुर,दरभंगा,भागलपुर,फारबिसगंज , मुंगेर और रक्सौल एयरपोर्ट हैं।लेकिन इन एयरपोर्ट पर बहुत सारी आधुनिक सुविधाओं के अभाव व सुरक्षा की भी समस्या हैं।

इस मामलें पर कोर्ट में अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद की जाएगी।

संजय गाँधी जैविक उद्यान (पटना चिड़ियाघर) रहेगा बंद

दिनांक 19 और 20 अप्रैल 2022 को संजय गाँधी जैविक उद्यान (पटना चिड़ियाघर) रहेगा बंद|

सर्वसूचित किया जाता है कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार अंतर्गत संचालित “संजय गाँधी जैविक उद्यान” में दिनांक 19 और 20 अप्रैल 2022 (मंगलवार और बुधवार) को आयोजित वनपाल एवं वनरक्षी के चयन हेतु शारीरिक क्षमता जाँच/माप परीक्षण के कारण, पटना चिड़ियाघर को सभी दर्शकों/ मॉर्निंग वाकर्स (सुबह भ्रमण करने वाले) के लिये पूर्णत: बंद रहेगा|

पटना चिड़ियाघर
पटना चिड़ियाघर

उक्त दोनों दिवसों में आमजनों से संबधित कोई भी गतिविधि को भी पूर्णत: स्थगित किया गया है|

पुन: दिनांक 21 अप्रैल 2022 (गुरुवार) से पटना चिड़ियाघर अपने नियत समय से पूर्व की भांति सभी दर्शकों और मॉर्निंग वाकर्स के लिए खुला रहेगा|

पटना हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस जे एन भट्ट का आज निधन हो गया हैं, वे 76 वर्ष के थे

जस्टिस भट्ट का जन्म गुजरात के जामनगर में 16 अक्टूबर,1945 को हुआ था। उन्होंने एम.कॉम,एल एल एम और लॉ में पी एच डी की डिग्री ली।

1968 में जस्टिस भट्ट ला की प्रैक्टिस शुरू की। उन्होंने गुजरात की न्यायिक सेवा में सीधे ज़िला जज के रूप में योगदान दिया।

1990 में जस्टिस भट्ट गुजरात हाईकोर्ट के पर्मानेंट जज बने।उसके बाद गुजरात हाईकोर्ट का कार्यवाहक चीफ जस्टिस बने।

Justice Dr. J.N. Bhatt

18 जुलाई,2005 को वे पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने। अक्टूबर,2007 जस्टिस भट्ट पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप सेवानिवृत हुए। उसके बाद गुजरात लॉ कमीशन के अध्यक्ष बने। उसके बाद वे गुजरात मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के पद पर कार्य किया।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा महाबोधि मंदिर के परिसर में 250 व्यक्तियों के क्षमता वाले पुलिस बैरक का हुआ उद्घाटन

गया, बोधगया 16 अप्रैल 2022, महाबोधि मंदिर के परिसर में 250 सुरक्षाकर्मियों के रहने के लिए पुलिस बैरक का निर्माण भवन निर्माण विभाग द्वारा 611 लाख रुपए की लागत से दो वर्ष में निर्माण किया गया है। जिसका उद्घाटन आज माननीय मुख्यमंत्री बिहार द्वारा किया गया। पुलिस बैरक निर्माण होने से महाबोधि मंदिर की सुरक्षा में और मुस्तैदी से कार्य किया जाएगा।

इसके उपरांत महाबोधि मंदिर परिसर में पश्चिमी चहारदीवारी पर लगाए गए जातक कथा पैनल का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकापर्ण किया। जातक कथा का 38 पैनल में भगवान बुद्ध के उपदेशों को अंकित किया गया है। इसे रेड स्टोन से 98 लाख रुपये की लागत से 6 माह में पूर्ण किया गया है। जातक भगवान बुद्ध के पूर्व जन्मों की कहानी है, जब वे बोधिसत्व थे। 500 से अधिक जातक कहानी है। मंदिर के बाहरी परिसर में भी दीवारों पर 23 जातक पैनल पहले से लगे हैं।

इसके उपरांत लगभग 13 करोड़ रुपए की लागत से डेढ़ वर्ष में पूर्ण होने वाले बीटीएमसी के नए भवन का शिलान्यास एवं कार्यों का जायजा लिया। बीटीएमसी के नए निर्माणाधीन भवन बुद्धिस्ट कल्चर को दर्शाता है।

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने महाबोधि मंदिर में प्रवेश के लिए लाल बलुआ पत्थर से निर्मित चार प्रवेश द्वारों का भी उद्घाटन किया।

इसके उपरांत माननीय मुख्यमंत्री द्वारा बीटीएमसी कार्यालय के समीप जीविका द्वारा लगाए गए नीरा काउंटर का फीता काटकर उद्घाटन किया माननीय मुख्यमंत्री ने खुशी जाहिर करते हुए नीरा के उत्पादन एवं बिक्री पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ताजपुर बख्तियारपुर महासेतु के पुनर्निर्माण कार्यक्रम में शामिल होकर आधारशिला रखी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज समस्तीपुर पहुंचे जहां रामापुर महेशपट्टी में ताजपुर बख्तियारपुर महासेतु के पुनर्निर्माण कार्यक्रम में शामिल होकर आधारशिला रखी और फोरलेन निर्माण में गति लाने को लेकर संबंधित विभिन्न विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर फीडबैक लिया ।

2011 में नीतीश कुमार ने बख्तियारपुर ताजपुर महासेतु फोरलेन का शिलान्यास किया था । उस समय निर्माण एजेंसी के द्वारा 5 वर्षों में कार्य पूरा करने की बात कही गई थी । लेकिन शिलान्यास के एक दशक बाद भी फोरलेन निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका । बख्तियारपुर ताजपुर महासेतु योजना का लगभग 90 फ़ीसदी से अधिक भूभाग मोरवा ,मोहनपुर एवं शाहपुर पटोरी प्रखंड में पड़ता है ।

भीषण गर्मी से निपटने के लिए स्वास्थ्य महकमा अलर्ट मोड परः मंगल पांडेय

पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य में बढ़ते भीषण गर्मी को देखते पूरे राज्य में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। इस गर्मी से आमजनों को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसे देखते हुए राज्य के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकीय इलाज के लिए अस्पतालों में डेडिकेटेड वार्ड की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही झुलसाती गर्मी व लू से होने वाली बीमारियों जैसे डायरिया एवं अतिसार से संबंधित ओआरएस पाउडर समेत सभी प्रकार की आवश्यक दवाओं की उपलब्धता अस्पतालों में सुनिश्चित की जा रही है।

श्री पांडेय ने कहा कि राज्य के सभी सदर अस्पताल के अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, रेफरल अस्पताल और अनुमंडलीय अस्पताल में मौजूद एंबुलेंसों में लगे एसी, आक्सीजन एवं अन्य उपकरण दुरुस्त स्थिति में है, ताकि संबंधित मरीजों का अविलंब उपचार हो सके। सभी सिविल सर्जनों को सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल तथा जिला के प्रभावित क्षेत्रों के निकटतम सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में रोस्टर संधारित कर अतिरिक्त चिकित्सकों एवं पारा चिकित्साकर्मियों की 24 घंटे तैनाती तथा आवश्यक चिकित्सा उपकरण एवं मेडिकल डिवाइस उपलब्धता सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है।

श्री पांडेय ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों एवं चिकित्सा महाविद्यालयों में अतिरिक्त विशेषज्ञ चिकित्सक आनकाल ड्यूटी पर 24 घंटे मौजूद रहेंगे, ताकि आपातकालीन स्थिति में सूचित किए जाने पर वे शीघ्र संबंधित अस्पताल में उपस्थित हो सकें। भीषण गर्मी के मद्देनजर सभी सरकारी अस्पतालों के सामान्य वार्ड में एसी, कूलर और पंखा समेत अन्य जरूरी सुविधाओं को भी दुरूस्त करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही गर्म हवा और लू से बचाव की जानकारी आम जनमानस को उपलब्ध कराने हेतु जिलास्तरीय आपदा प्रबंधन शाखा से समन्वय बना प्रचार-प्रसार कराने पर विशेष जोर देने को कहा गया है।

बोचहा उपचुनाव में मिला जनादेश स्वीकार, हार की समीक्षा होगी – डॉ संजय जायसवाल

पटना, 16 अप्रैल, 2022 । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने कहा कि बोचहा में मिला जनादेश स्वीकार है। उन्होंने बोचहा से विजयी प्रत्याशी अमर पासवान को बधाई और शुभकामना भी दी।

डॉ जायसवाल ने कहा पार्टी किसी भी जनादेश को सहर्ष स्वीकार करती है। बोचहा में मिला लोगों का आदेश स्वीकार है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने एनडीए के प्रत्याशी को समर्थन दिया उनका आभार।

उन्होंने कहा कि इस परिणाम से पार्टी परेशान नहीं है, बोचहा परिणाम की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद फिर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

भाजपा अध्यक्ष ने माना कि हम अपनी बातों को बोचहा के मतदाताओं को सही ढंग से समझा नहीं पाए, इस कारण यह परिणाम आया।

डॉ संजय जायसवाल
डॉ संजय जायसवाल

उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार संघर्ष के बाद यहां पहुंची है, इसलिए संघर्ष से हम पीछे नहीं हटते। उन्होंने कहा कि इस परिणाम से सरकार पर कोई असर नही पड़ने वाला है। बहरहाल चुनाव समाप्त हो चुका है और अब जरूरत उसके आगे देखने की है।

वक्त अब जनता से किए वादे को पूरा करने का है। समय अब राजनीतिक प्रतिद्वंदिता से ऊपर उठ कर बोचहां को विकास पथ पर आगे बढ़ाने का है। विजयी प्रत्याशी अमर पासवान जी को भारतीय जनता पार्टी परिवार की तरफ से हार्दिक शुभकामनायें हैं और हमें पूरी उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में केंद्र व राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे ऐतिहासिक कार्य बोचहां में सफलतापूर्वक जमीन पर उतरेंगे।

बोचहां विधानसभा उपचुनाव, राजद उम्मीदवार अमर पासवान भारी मतो से जीते

बोचहां विधानसभा उपचुनाव मतगणना समाप्त । राजद उम्मीदवार अमर पासवान बड़े अंतर से बीजेपी की बेबी देवी को हराया।

राजद उम्मीदवार अमर पासवान 36653 वोट से जीते ।
राजद के अमर पासवान को 82562 वोट।
बीजेपी की बेबी कुमारी को 45909 वोट।
वीआईपी की गीता कुमारी को 29279 वोट ।

बोचहां विधानसभा उपचुनाव मतगणना खत्म राजद भारी मतो से चुनाव जीता

तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर बोचहा की जनता को हार्दिक धन्यवाद दिया है

राजद प्रत्याशी के जीत पर राजद प्रत्याशी अमर पासवान की पत्नी ने क्या बोली जरा आप भी सुनिए

बीजेपी की करारी हार पर मुकेश सहनी हुए खुश, मिठाई खिलाकर एक दूसरे को दे रहे है बधाई
कार्यकर्ताओ द्वारा राजद की जीत पर जश्न के माहौल
वीआईपी प्रमुख मुकेश साहनी लडू खिलाकर कर रहे है ख़ुशी व्यक्त

बिहार के सुपौल में बर्ड फ्लू की दस्तक

बिहार में बर्ड फ्लू ने दस्तक दे दी है। सुपौल में इसके मामले पाये गये हैं। सदर थाने के छपकाही गांव के कुछ वार्डों से लिये गये सैंपलों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। जिसके बाद गांव में पशुपालन विभाग की टीम तैनात कर दी गयी है। इस टीम ने अब एक किलोमीटर की परिधि के मुर्गे-मुर्गियों को मारने का काम शुरू कर दिया गया है।

बिहार में बर्ड फ्लू ने दस्तक दी

Patna High Court: पटना में महिलाओं के लिए पब्लिक टॉयलेट की कमी और पहले से बने टॉयलेटों के रखरखाव की कमी से बेकार हो जाने पर दायर हुई जनहित याचिका पर सुनवाई हुई

पटना हाईकोर्ट ने पटना में महिलाओं के लिए पब्लिक टॉयलेट की कमी और पहले से बने टॉयलेटों के रखरखाव की कमी से बेकार हो जाने पर दायर हुई जनहित याचिका पर सुनवाई की।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने संजीव कुमार मिश्रा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना नगर निगम व जिला प्रशासन से जवाब तलब किया है।

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कोर्ट को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने खुद बहस करते हुए कोर्ट को बताया कि पटना जंक्शन , राजेन्द्र नगर स्टेशन , गोलंबर , मीठापुर- डाक बंगला , गांधी मैदान , कारगिल चौक के जगहों पर पब्लिक टॉयलेट की कमी है। साथ ही पुराने टॉयलेट के रखरखाव नही होने के कारण ठप्प पड़ चुके हैं ।

दो साल पहले 20 करोड़ रुपये सरकारी राशि से बने इन सभी जगहों के पब्लिक यूरिनल व टॉयलेट बेकार हो चुके हैं । महिलाओं को बहुत मुश्किलें होती है ।

इस मामले की अगली सुनवाई 13 मई, 2022 को होगी ।

2,500 साल पुरानी सायक्लोपियन वाॅल को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल करने की कवायद

पटना । सरकार ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को राजगीर में 2,500 साल से अधिक पुरानी साइक्लोपियन दीवार को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में सूचीबद्ध करने के लिए एक नया प्रस्ताव भेजा है। नीतीश सरकार ने भेजा प्रस्ताव।

राजगीर की साइक्लोपियन दीवार पत्थर की 40 किमी लंबी दीवार है, जिसे तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से पहले बनाया गया था। बाहरी दुश्मनों और आक्रमणकारियों से बचाने के लिए इस दीवार को बनाया गया था।

बिहार के दांडी गढ़पूरा के ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह की 92 वर्षगांठ

बिहार के दांडी’ गढ़पूरा के ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह की 92 वर्षगांठ पर इस वर्ष भी मुंगेर से वाया श्रीकृष्ण सेतु- बलिया-बेगूसराय- मंझौल होते हुए ऐतिहासिक व गौरवशाली नमक सत्याग्रह स्थल तक एक भव्य पदयात्रा आयोजित की जायेगी। वर्ष 2012 से प्रतिवर्ष आयोजित इस पदयात्रा के 12वें वर्ष पर आज पंचवीर में एक तैयारी बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता पंचवीर पंचायत की पूर्व सरपंच व कांग्रेस नेत्री रेणु देवी ने किया। कार्यक्रम का संचालन गढ़पुरा नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा समिति के सक्रिय सदस्य व भगत सिंह यूथ फाउंडेशन के पदाधिकारी राम प्रवेश चौरसिया ने किया।

अपने संबोधन में रेणु देवी ने कहा की बापू ने एक चुटकी भर नमक से कभी नहीं अस्त होने वाली ब्रिटिश सत्ता को सदा के लिए सूर्यास्त का रास्ता दिखा दिया था. देश के प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर “आजादी का अमृत उत्सव” पर्व मनाने की शुरुआत की, यह प्रशंसनीय है. आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष के अवसर पर आयोजित इस वर्ष की पदयात्रा ऐतिहासिक होगी। उन्होने कहा की गढपुरा का ऐतिहासिक व गौरवशाली नमक सत्याग्रह स्थल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक अनमोल विरासत है और “बिहार केसरी” श्रीबाबू की कर्मभूमि है। वर्तमान व आनेवाली पीढियों के हित में ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह व स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों की स्मृतियों को संजोने व संवारने की सख्त जरूरत है। उन्होंने साहबपूर कमाल विधानसभा क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ बेगूसराय जिला व राज्य के लोगों से इस पदयात्रा में शामिल होने का आग्रह किया।

समाजसेवी राम आशीष पाठक ने कहा कि इस बार की पदयात्रा में लोग बढ़-चढकर भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। श्री पाठक ने बताया कि इस वर्ष की पदयात्रा कोविड नियमों के अनुपालन करते हुये भव्यता के साथ आयोजित की जायेगी।

संचालक कर रहे राम प्रवेश चौरसिया ने कहा कि समाज के सभी वर्ग के लोगों को अपने नौनिहालों व आनेवाली पीढियों के हित में अपनी विरासतों का संरक्षण व संवर्द्धन करना चाहिए। नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम की अनमोल विरासत को वर्तमान व आनेवाली पीढियों के हित में सुरक्षित, संरक्षित व संवर्द्धित करना है,जिससे की वह एक बेहतर नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें. उन्होंने बताया की नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा रुट पर जनसंपर्क और बैठक आयोजित कर समाज के सभी वर्ग के लोगों के बीच जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इस ऐतिहासिक व गौरवशाली कार्यक्रम का हिस्सा बन सकें।

अपने संबोधन में ग्रामीण व प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष संजीव झा ने कहा की वह खुद तो निश्चित तौर पर पदयात्रा में शामिल होंगे ही, साथ ही साथ जिलेवासियों से भी यह आग्रह करते हैं की वह इस ऐतिहासिक व गौरवशाली पदयात्रा में अवश्य शामिल हों।

जेडीयू प्रखंड अध्यक्ष शंभू कर्मशील ने साहेबपुर कमाल वासियों से पदयात्रा को सफल बनाने में सहयोग का निवेदन किया । तथा जिलेवासियों को देश की इस ऐतिहासिक, गौरवशाली,अनूठी व अपने-आप में ईकलौती पदयात्रा में शामिल होने का आग्रह किया।

इस बैठक में विद्यानंद सिंह शिक्षक नेता, अनिल पाठक, विनोबा पाठक, सुधाकर सिंह, रंजीत झा, निपुण झा, अमन झा, धर्मेंद्र पाठक, हीरा सिंह, सुनील जसवाल, भूषण पाठक भूषण पाठक, नारायण झा, सुबोध पाठक इत्यादि उपस्थित थे ।

Patna High Court: राज्य के नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे पर पर्याप्त संख्या में पेट्रोल पंप नहीं होने के मामले में सुनवाई हुई

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के नेशनल हाई वे और स्टेट हाईवे पर पर्याप्त संख्या में पेट्रोल पंप नहीं होने के मामले सुनवाई की।चीफ जस्टिस संजय करोल की डिवीजन बेंच इस मामलें पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को इस मामलें में विस्तृत जानकारी अगली सुनवाई में देने का निर्देश दिया।

राज्य के नेशनल व स्टेट हाईवे पर जनसंख्या और।वाहनों की संख्या के अनुपात में पेट्रोल पम्प की संख्या काफी कम हैं।

कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए पूछा कि राज्य नेशनल हाइवे पर कितने पेट्रोल पम्प खोलने की अनुमति दी गई है।

कोर्ट ने इस बात को गम्भीरता से लिया कि 2018 से पेट्रोल पंप स्थापित करने के लिए लगभग एक हज़ार आवेदन के कार्रवाई हेतु लंबित पड़ा हुआ हैं। इन मामलों में ज़िला के डी एम की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिलने के कारण मामला अटका हुआ हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने जानना चाहा था कि अबतक नेशनल और स्टेट हाईवे में कितने पेट्रोल पम्प चालू अवस्था में हैं।साथ ही राज्य के विस्तार,जनसंख्या और वाहनों की संख्या के मद्देनजर और कितने पेट्रोल पम्प खोलने की आवश्यकता है।इस बारे में हाल में सर्वे किये गए हैं या नहीं।

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कोर्ट ने इस बात पर भी टिप्पणी की कि राज्य के इन पेट्रोल पंप पर आम लोगों के लिए बुनियादी सुविधाओं की भी काफी कमी हैं।पेय जल,मेडिकल किट,शौचालय आदि बुनियादी सुविधाओं की काफी कमी हैं।

इन सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर जानकारी उपलब्ध कराने का कोर्ट ने आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि प्रदेश के राष्ट्रीय राज मार्ग तथा स्टेट हाईवे पर पेट्रोल पंप सहित अन्य नागरिक सुविधाओं की काफी कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए सरकारों ने अब तक कोई विचार क्यों नहीं किया है।

कोर्ट ने कहा कि इन मार्गो से गुजरने वाले लोगों को होने वाली परेशानियों से सरकारे चिंतित नहीं है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन भारत पेट्रोलियम सहित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को पार्टी बनाते पूरी जानकारी उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।

इस मामलें पर पुनः 18 अप्रैल,2022 को सुनवाई की जाएगी।

भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था का सच आईएस अधिकारी की जुवानी

बिहारी को बिहार के बाहर गाली क्यों पड़ता है? कभी सोचा है, सोचिए हम बिहारी बिहार से बाहर जाते हैं तो करते क्या है, सवाल का जबाव उसी में छुपा है । जो काम बिहारी बिहार से बाहर करता है आज कल भारतीय भी भारत से बाहर ऐसा ही कुछ करने लगा है, परिणाम क्या हो रहा है जो हाल बिहार से बाहर बिहारी का है वही हाल आज कल भारतीय का भारत से बाहर होता जा रहा है ।

अमेरिका की पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी की एक प्राध्यापिका ने हाल ही में एक टीवी इंटरव्यू में भारत के बारे में कुछ टिप्पणियाँ की हैं जिसे लेकर हंगामा मचा है–

प्रोफेसर एमी वैक्स ने कहा है कि भारतीय डांक्टर अमेरिका के स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल खड़ा किया है बताईए उन्हें यहां बेहतरीन शिक्षा और शानदार अवसर मिलता है लेकिन इसके बदले में वे अमेरिका की आलोचना करते हैं।प्रोफेसर एमी वैक्स ने कहा, “ये अजीब सी बात है कि एशियाई, दक्षिण एशियाई और भारतीय डॉक्टर पेन्सिल्वेनिया की चिकित्सा सेवा में काम करते हैं और उसी की आलोचना करते हैं. मैं वहां लोगों को जानती हूं और मुझे पता है कि वहां क्या हो रहा है. वे नस्लवाद के ख़िलाफ़ जारी मुहिम को लेकर मोर्चा संभाले हुए हैं. वे अमेरिका को दोष देते रहते हैं जैसे कि अमेरिका एक दुष्ट नस्लवादी जगह है.”।

मतलब जिस जगह ने मुझे आगे बढ़ने का मौका दिया अब वहां बैठ कर प्रवचन दे रहे हैं जैसे हम बिहारी बिहार से बाहर देते हैं गुस्सा स्वाभिवक है क्यों कि हमारे यहां कोई व्यवस्था नहीं है और चलते हैं दूसरे को आईना दिखाने ।

बिहार के एक सीनियर ब्यूरोक्रेट ने पारस अस्पताल के बारे में जो लिखा है वह अमेरिका में सम्भव है क्या, स्वास्थ्य के मामले मेंं कहां खड़ा है भारत है अस्पताल और डांक्टर किस तरह से लोगो को लूट रहा है इस पर कभी किसी डाँक्टर को चर्चा करते हुए सूना है नहीं ना तो फिर दूसरे देश को आईना दिखाना कहा तक सही है, ऐसे में दुनिया अगर यह बैनर टांगना शुरु कर दिया है कि हेट इंडियन ,नो बेलकम इंडियन तो इसमें गुनाह क्या है ।

आईएस अधिकारी विजय प्रकाश को मैं व्यक्तिगत रुप से जानता हूं इन्होंने अपने फेसबुक वाल पर जो लिखा है वह भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था का सच है गांव से लेकर शहर के बड़े अस्पतालों में यही चल रहा है विजय प्रकाश जी का पोस्ट आये दो दिन हो गया है लेकिन अभी तक किसी डाँक्टर की कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है ।

विजय प्रकाश जी का पोस्ट लम्बा है लेकिन पढ़िए और विचार करिए हालांकि इसमें राम कही नहींं है मंदिर भी कही नही है।हिन्दू भी कही नहीं है मुसलमान भी कहीं नहीं है पाकिस्तान भी कही नहींं है हो सकता है इस वजह से आपको उपयोगी नहीं लगे लेकिन दिन चर्या यही है जिससे आज ना कल हम सब को इस लूट से गुजरना है कभी इसके लिए जुलुस हो जाये मजा आ जायेगा ।

आपके साथ भी ऐसा हो सकता है
आज मैं पारस एचएमआरआई अस्पताल, पटना में इलाज कराने का एक भयानक अनुभव साझा करने जा रहा हूं ताकि हम इलाज करते समय सावधान हो जाएँ क्योंकि इस प्रकार की घटना किसी के साथ भी हो सकती है।

मैं मार्च’22 के प्रथम सप्ताह में तीव्र दस्त और ज्वर के रोग से काफी पीड़ित हो गया था। तीन दिनों तक परेशानी बनी रही। घर पर रहकर ही इलाज करा रहा था।

चौथे दिन 11.3.’22 को बुखार तो ख़त्म हो गया पर दस्त कम नहीं हो रहा था। सुबह अचानक मुझे चक्कर भी आ गया। चूंकि कुछ वर्षों से मैं एट्रियल फिब्रिलिएशन (ए एफ) का रोगी रहा हूँ अतः सदा एक कार्डिया मोबाइल 6L साथ रखता हूँ। अपने कार्डिया मोबाइल 6L पर जांच किया तो पता चला कि पल्स रेट काफी बढ़ा हुआ था और इ0 के0 जी0 रिपोर्ट एट्रियल फिब्रिलिएशन (ए0 एफ0) का संकेत दे रहा था। अतः तुरत अस्पताल चलने का निर्णय हुआ। पारस एच एम आर आई अस्पताल घर के करीब ही है। अतः सीधे हम उसके इमरजेंसी में ही चले गये। इमरजेंसी में डॉक्टर चन्दन के नेतृत्व में व्यवस्था अच्छी थी। तुरत इ0 सी0 जी0 लिया गया। उसमें भी ए0 एफ0 का ही रिपोर्ट आया। पर करीब आधे घंटे के बाद पुनः इ0 सी0 जी0 लिया गया। उसमें इ0 सी0 जी0 सामान्य हो गया था। साइनस रिदम बहाल हो गया था।

आपात स्थिति में प्रारंभिक देखभाल के बाद, मुझे डॉ. फहद अंसारी डीसीएमआर 3817 की देखरेख में एमआईसीयू में स्थानांतरित कर दिया गया। जब मुझे एमआईसीयू में ले जाया गया, तो मुझ पर दवाओं और परीक्षणों की बमबारी शुरू हो गई। कई तरह के टेस्ट प्रारम्भ हो गये और कई प्रकार की दवाइयाँ लिखी गईं ।

12 मार्च 2022 को सुबह दस्त नियंत्रण में आ गया था। पर मुझे बताया गया कि हीमोग्लोबिन का स्तर नीचे हो गया है और प्लेटलेट की संख्या भी काफी कम हो गई है। अतः डॉक्टर रोग के निदान के संबंध में स्पष्ट नहीं थे। उन्हें लग रहा था कि कोई गंभीर इन्फेक्शन है। मैंने बताया भी कि मैं थाइलेसेमिया माइनर की प्रकृति का हूँ अतः मेरा हीमोग्लोबिन का स्तर नीचे ही रहता है और प्लेटलेट की संख्या भी कम ही रहती है। खून जांच में अन्य आंकड़े भी सामान्य से भिन्न रहते हैं । इसे ध्यान में रखकर ही निर्णय लेना बेहतर होगा। डॉक्टर ने खून चढ़ाने का निर्णय लिया और दोपहर में खून की एक बोतल चढ़ा दी गई।

दोपहर में ही मेरे अटेंडेंट को कॉम्बीथेर और डोक्सी नमक दवा को बाजार से लाने के लिए कहा गया क्योंकि वे अस्पताल की दुकान में उपलब्ध नहीं थे। जब मुझे दवा खाने के लिए कहा गया तो मैंने दवा के बारे में पूछा। उपस्थित नर्स ने कॉम्बिथेर नाम का उल्लेख किया। इंटरनेट के माध्यम से मुझे यह पता चला कि यह एक मलेरिया रोधी दवा है। अस्पताल आने के बाद से ही मुझे बुखार नहीं था। मेरा दस्त भी नियंत्रण में था। फिर मलेरिया-रोधी दवा क्यों? क्या मलेरिया परजीवी मेरे रक्त में पाये गये हैं? इस सम्बन्ध में मैंने नर्स से पूछताछ की। उनका कहना था कि चूँकि डॉक्टर ने यह दवा लिखा है इसलिए वे यह दवा खिला रही हैं। यदि मैं दवा नहीं खाऊंगा तो वे लिख देंगी कि मरीज ने दवा लेने से मना किया। इसपर मैंने कहा कि एक तरफ मुझे खून चढ़ाया जा रहा है क्योंकि हीमोग्लोबिन और प्लेटलेट कम बताये जा रहे हैं और मुझे ए0 एफ0 भी है दूसरी ओर अनावश्यक दवा दिया जा रहा है जबकि मेरा बुखार और दस्त दोनों नियंत्रण में है, जिसका काफी अधिक ख़राब असर मेरे स्वास्थ्य पर हो सकता है जिससे बचा जाना चाहिए । अतः मैंने डॉक्टर से पुनः पूछकर ही दवा खाने की बात कहीं। मेरे बार-बार अनुरोध करने पर नर्स ने आई0 सी0 यू0 के प्रभारी डॉक्टर प्रशांत को बुलाया। मैंने उनसे भी यही अनुरोध किया कि रक्त परीक्षण में मलेरिया परजीवी की स्थिति देखने पर ही ये दवा दी जाय। इस सम्बन्ध में वे प्रभारी डॉक्टर से संतुष्ट हो लें। डॉक्टर प्रशांत ने सम्बंधित डॉक्टर से बाते की और इस दवा को बंद करा दिया क्योंकि मलेरिया परजीवी हेतु रक्त परीक्षण में परिणाम नकारात्मक था। इस प्रकार मैं एक अनावश्यक दवा के कुप्रभाव से बच गया।

यहाँ मैं यह उल्लेख करना आवश्यक समझता हूँ कि हॉस्पिटल में दवाएं नर्स हीं देती हैं इसके पैकेट को भी मरीज को देखने नहीं दिया जाता और डॉक्टर का पूर्जा भी मरीज को नहीं दिखाया जाता है। सामान्यतया दवा देते समय मरीज को यह बताया भी नहीं जाता कि कौन सी दवा दी जा रही है। अतः दवा देने की पूरी जिम्मेदारी डॉक्टर और नर्स पर ही रहती है।
यह संयोग ही था कि कॉम्बिथेर को बाजार से मंगवाया गया था। इसलिए मुझे इस दवा के बारे में जानकारी मिली और मैं इस दवा को लेने से पहले रक्त परीक्षण का रिपोर्ट देख लेने का अनुरोध कर पाया।

13 मार्च 2022 को मेरी स्थिति में काफी सुधार था। सभी लक्षण सामान्य हो गये थे। दोपहर में मुझे सिंगल रूम नं. 265 में भेज दिया गया। आई सी यू से निकलने का ही मरीज के मनः स्थिति पर बहुत सकारात्मक असर पड़ता है। मैं बिल्कुल सामान्य सा महसूस करने लगा। रात में मैंने सामान्य रुप से भोजन किया। नींद भी अच्छी आयी।

14 मार्च 2022 की सुबह मैं बिल्कुल सामान्य महसूस कर रहा था। मैंने सामान्य रुप से शौच किया। अपने दाँत ब्रश किए। अपनी दाढ़ी बनाई और ड्यूटी बॉय की मदद से स्पंज स्नान किया। सब कुछ सामान्य था। फल का रस भी पिया।
सुबह करीब 6.45 बजे मैं अपने लड़के से मोबाइल पर बात कर रहा था। उस समय ड्यूटी पर तैनात नर्स दवा खिलाने आई। उसने मुझे थायरोक्सिन की गोलियों की एक बोतल दिया और मुझे इसे खोलकर एक टैबलेट लेने को कहा। चूंकि मेरे दाहिने हाथ में कैनुला लगा था, मैंने उससे ही इसे खोलने का अनुरोध किया। पर उसने कहा कि उसे इस तरह के बोतल को खोलने में दिक्कत होती है। कोई विकल्प न होने के कारण और हाथ मे कैनुला लगे होने के बावजूद, मैंने खुद ढक्कन खोल दिया और उसे देकर मुझे एक टैबलेट देने के लिए कहा। उसने एक गोली निकालकर दिया और मैंने दवा ले ली। उसने मुझे दो और दवाएं दी, उसे भी मैंने खा लिया ।

इसी बीच उसने दराज से एक शीशी निकाली। मैंने इस दवा के बारे में पूछताछ की क्योंकि यह मेरे अस्पताल में रहने के दौरान पहले कभी नहीं दी गई थी। उसने कहा कि यह एक एंटीबायोटिक है। मैंने एंटीबायोटिक के नाम के बारे में पूछताछ की क्योंकि यह एक नई दवा थी जो मुझे दी जा रही थी और मुझे यह एहसास था कि मैं ठीक हो रहा हूँ। मेरे प्रश्न का उत्तर दिए बिना, उसने आई0 वी0 कैनुला के माध्यम से दवा देना शुरू कर दिया। पूरी बातचीत के दौरान मैं अपने बिस्तर पर बैठा रहा और मोबाइल पर अपने लड़के से बात करता रहा।

जैसे ही यह नई दवा मेरे शरीर में आई, मेरी रीढ़ में जलन शुरू हो गया। मेरा शरीर गर्म होता जा रहा था। मेरा शरीर कांप रहा था। मुझे चक्कर जैसी अनुभूति भी होने लगी। मैंने फिर नर्स से पूछा कि उसने कौन सी दवा दी है। पर वह चुप रही। मैंने पुनः उस दवा की जानकारी मांगी जो उसने मुझे दी थी। वह चुप रही और दराज में लगी रही। मेरी ऊर्जा कम होती जा रही थी। मैंने फिर पूछा, ‘मैं बिल्कुल भी अच्छा महसूस नहीं कर रहा हूँ। कौन सी दवा दी हो।’ इस नई दवा की प्रतिक्रिया बढ़ती जा रही थी। मुझे मस्तिष्क में अजीब सा स्पंदन हो रहा था। लग रहा था गिर जाऊंगा। मुझे लग रहा था कि ब्रेन हेमरेज तो नहीं हो रहा है। मेरे बार-बार बोलने पर भी वह नर्स लगातार मौन बनी रही। फिर मैं सारी ऊर्जा इकठ्ठा कर जोर से चिल्लाया, ‘तबीयत बहुत ख़राब हो रही है। दवा बंद करो’। फिर भी उसके हाव-भाव में कोई तेजी नहीं दिखी और वह बहुत धीरे-धीरे दवा बंद करने आई। खैर, दवा बंद हो गयी।

मैंने तुरंत एक डॉक्टर बुलाने का अनुरोध किया। पर कोई नहीं आया। नर्स ने आकर मेरा बीपी लिया। कुछ देर बाद ड्यूटी पर डॉक्टर होने का दावा करने वाला एक व्यक्ति आया। उसे भी मैंने सारी बातें बताई। वह भी मेरी हालत के बारे में कम चिंतित लग रहा था। उसने दराज खोली और कोई दवा ली और बाहर चला गया। मैंने उसे तुरंत ई0 सी0 जी0 करने के लिए कहा ताकि मैं अपने दिल की स्थिति के बारे में सुनिश्चित हो सकूं। जिस फ्लोर पर वार्ड था उस फ्लोर पर कोई ई0 सी0 जी0 मशीन नहीं था । वे एमआईसीयू विंग से एक मशीन लाए लेकिन वह ठीक से काम नहीं कर रहा था। फिर वे एक अन्य ई0 सी0 जी0 मशीन लाए। मुझे बड़ी राहत मिली जब मैंने पाया कि ई0 सी0 जी0 में कोई अनियमितता नहीं थी और ह्रदय की धड़कन साइनस रिद्म में होना बता रहा था। इस प्रक्रिया में करीब एक घंटा व्यतीत हो गया पर मेरी बेचैनी जारी रही। यद्यपि शरीर में हो रहे बदलाव में धीरे-धीरे सुधार हो रहा था पर रीढ़ में असामान्य स्पंदन जारी रहा। यह कई दिनों तक चलता रहा।

मेरी पत्नी डॉ मृदुला प्रकाश, जो मेरे साथ मेरे वार्ड में थीं, मेरी स्थिति ख़राब होते देख चिंतित हो गयी । उन्होंने नर्स से दवा का नाम पूछा। नर्स ने इंजेक्शन की एक दूसरी शीशी जो ड्रावर में रखा था उसे दिखाया और कहा कि यही सुई दी गयी है। उन्होंने इसका एक फोटो ले लिया। यह एपिनेफ था। उसी समय मेरी लड़की नूपुर निशीथ का फोन आ गया। उसे जब मेरी स्थिति बताई गई तो उसने पूछा कि पापा को कौन सी दवा दी गई है। दवा का नाम एपिनेफ बताने पर उसने कहा कि यह तो अंटी आजमटिक रोग की दवा है जो इमेर्जेंसी में दिया जाता है और इसका हृदय पर काफी साइड इफेक्ट होता है। इसे क्यों दिया जा रहा है?

तब घबड़ाकर डॉ प्रकाश नर्सों की डेस्क पर गईं और मेडिसिन लिस्ट मांगा तथा डॉक्टर का प्रेसक्रिप्शन भी मांगा। उन्हें न तो दवा का लिस्ट दिया गया और न डॉक्टर का प्रेसक्रिप्शन ही दिखाया गया। सभी नर्स वहाँ से हटकर दूसरी ओर चली गई ताकि उनसे ये सूचना नहीं ली जा सके ।

वह इस्तेमाल की हुई शीशी भी चाहती थी जिसे उन्हें दिखाया तो गया। पर जब उन्होंने इसे मांगा, तो उन्हें यह नहीं दिया गया क्योंकि उन्हें कहा गया कि इसका इस्तेमाल स्थानीय जांच में किया जाएगा। जब उन्होंने पूछा कि दवा क्यों दी गई है तो उन्हें बताया गया कि एपिनेफ को एसओएस के रूप में लिखा गया है । प्रभारी नर्स ने कहा कि उपस्थित नर्स ने शारीरिक परीक्षण के माध्यम से नाड़ी की दर 63 पाये जाने के कारण उक्त दवा दिया था । इसपर उन्होंने कहा कि नर्स ने दवा देने से पहले कभी नब्ज को छुआ तक नहीं था। नाड़ी की दर, रक्त चाप और तापमान तो दवा देने के बाद जब स्थिति खरब हो गई थी तब ली गई थी तो किस प्रकार नाड़ी के दर को आधार बनाकर यह दवा दिये जाने की बात कही जा रही है । उसके बाद नर्स निरुत्तर हो गयीं और कोई जवाब नहीं दिया।

वार्ड में मरीज के चिकित्सा से सम्बंधित फ़ाइल नहीं रखी गयी थी। अतः किसी चीज के बारे में कोई जानकारी मरीज या उसके अटेंडेंट को उपलब्ध नहीं था। चूँकि सारी जानकारी नहीं दी जा रही थी और गलत सूचना दी जा रही थी, अतः मामला काफी संदेहास्पद बनता जा रहा था। सूचनाओं मे अपारदर्शिता मामले को काफी गंभीर बना रहा था ।

घटना के लगभग 4.45 घंटे बाद उपस्थित चिकित्सक डॉ. फहद अंसारी ने लगभग 11.30 बजे वार्ड का दौरा किया। पहले तो उन्होंने अपने प्रोफाइल के बारे में बात की और कहा कि यह उनके लिए काला दिन है। उन्होंने घटना पर खेद जताया। उसने मेरी छाती की जांच की, मेरे मल के बारे में पूछा और कहा कि वे मुझे तुरंत छुट्टी दे देंगे । कुछ जांच रिपोर्ट लंबित हैं, जो कुछ दिनों में आ जाएंगी। उन रिपोर्ट के बारे में वह ओपीडी पर अपनी राय देंगे।

वह यह नहीं बता सके कि एपीनेफ सुई क्यों लिखी गई थी या क्यों दी गयी । यह आश्चर्यजनक है कि एपिनेफ्रीन जैसी दवा जिसे इंट्रामस्क्यूलर या सब क्यूटेनस दिया जाता है, उसे किन परिस्थितियों में नसों के माध्यम से दिया गया। यह भी स्पष्ट नहीं है कि ऐसी दवा जो हमेशा एक विशेषज्ञ डॉक्टर की उपस्थिति में या आईसीयू में दी जाती है, उसे अर्ध या गैर-प्रशिक्षित वार्ड नर्स द्वारा देने के लिए कैसे छोड़ दिया गया। यहाँ तक कि प्रभारी नर्स भी उपस्थित नहीं थी। मुझे यह भी आश्चर्य होता है कि जब स्पष्ट रूप से एसओएस का कोई मामला नहीं था तो एसओएस दवा का प्रबंध ही क्यों किया गया। अगर मैंने समय पर विरोध नहीं किया होता और दवा बंद न करा दिया होता, तो शायद मैं कहानी सुनाने के लिए यहां नहीं होता। मैं इस बात से भी हैरान हूं कि इस तरह के ड्रग रिएक्शन केस के बाद भी मेरी सेहत की पूरी जांच किए बिना मुझे कैसे छुट्टी दे दी गई।

जब लगभग 2.30 बजे अपराह्न में मुझे छुट्टी दी गई, तो मुझे डिस्चार्ज सारांश सौंपा गया। मैंने पाया कि इसमे मेरे लिए लिखे गये पूर्जे और दी गयी दवाओं के विवरण पूरी तरह से गायब थे। चिकित्सा विवरण देने के बजाय, डिस्चार्ज सारांश में गोलमटोल वाक्य लिखे थे ।

यहां तक ​​कि इसमें खून चढ़ाने की जानकारी भी गायब थी। मैंने यह भी पाया कि भर्ती के समय मेरे दिल की स्थिति का विवरण भी रिपोर्ट में लिखा नहीं था। मेरे एमआईसीयू में रहने का भी कोई जिक्र नहीं था। एपिनेफ दिये जाने और इसका मेरे ऊपर हुए रियक्सन का भी कोई वर्णन नहीं था। ऐसा प्रतीत होता है कि जानबूझकर महत्वपूर्ण तथ्यों और विवरणों को रिपोर्ट से छिपाया गया है।

मैंने जब अस्पताल प्रशासन को इस सम्बन्ध में पूर्ण जानकारी देने के लिए एवं विस्तृत जांच कराने के लिए पत्र लिखा तो मुझे डिस्चार्ज समरी को पुनरीक्षित कर भेजा गया पर उसमें भी एपीनेफ के न तो डॉक्टर द्वारा लिखने का जिक्र था और न उसे मुझे सुई के रूप में देने का। अस्पताल प्रशासन ने इस सम्बन्ध में आतंरिक जांच कराकर उसका प्रतिवेदन साझा करने की बात कही।

अस्पताल के डॉक्टर ने इस प्रकरण पर मौखिक रुप से क्षमा जरूर मांगी पर अभी तक अस्पताल प्रशासन ने आंतरिक जांच का कोई प्रतिवेदन मेरे साथ साझा नहीं किया तथा मुझे यह भी नहीं बताया कि व्यवस्था में क्या सुधार की गई है जिससे यह पता चले कि भविष्य में किसी मरीज के साथ इस प्रकार की घटना नहीं होगी ।

मैं अभी तक सदमे में हूँ कि यदि एपीनेफ को चिल्लाकर समय से बंद न कराया होता तो क्या हुआ होता। हम अस्पताल में डॉक्टर या नर्स को भगवान का प्रतिरूप मानकर उसकी सभी आज्ञा का पालन करते हैं। यदि कभी शरीर में उसकी प्रतिक्रिया भी हो तो उसे एक अलग घटना माना जाता है दवा देने या दवा देने के तरीके के कारण हुई प्रतिक्रिया नहीं मानी जाती।जब एपीनेफ के बाद शरीर में प्रतिक्रिया हुई तो मैंने भी शुरू में इसे दवा के कारण हुआ नहीं माना था । मुझे लगा कि शायद शरीर में कोई नयी समस्या हो गयी है – ब्रेन हेमरेज या ह्रदयघात हो गया है इसलिए मैंने सोचा पहले इस नयी समस्या से निबट लें तब दवा ले लेंगे। यही सोचकर मैंने दवा बंद कराया था। मेरा चिकित्सा व्यवस्था पर हमारे मन में एक विश्वास या यूँ कहूँ कि एक अंधविश्वास जाम गया है वह मानने के लिए तैयार नहीं था कि कोई डॉक्टर या नर्स कभी ऐसी दवा देंगे जो मेरे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा।

जब घटना हो भी गयी तो अस्पताल प्रशासन मेरे स्वास्थ्य की चिंता न कर इस बात में व्यस्त रहे कि कैसे यह बात रिकॉर्ड में न आये। मुझे स्वयं अपने इलाज के लिए ब्लड प्रेशर लेना या इ0 सी0 जी0 लेने का आदेश देना पड़ा। अस्पताल के अधिकारी अस्पताल के दस्तावेजों के प्रबंधन में ही लगे रहे ताकि सच्चाई सामने न आए। नर्स को हटा दिया गया। मेरी फाइल में दवा की विवरणी दर्ज नहीं की गयी । दवा वाली शीशी को दराज से निकाल कर छिपा लिया गया।

वास्तव में, वे इस बारे में अधिक चिंतित थे कि रोगी को प्रबंधित करने के बजाय दस्तावेज़ में घटना की रिपोर्टिंग को कैसे प्रबंधित किया जाए। मेरे बार-बार अस्पताल से सच्चाई को रिपोर्ट में अंकित करने का अनुरोध करने के बावजूद, इसे कभी रिकॉर्ड में नहीं किया गया।

मैं अस्पताल का नाम या डॉक्टर का नाम नहीं देना चाहता था, पर उनका व्यवहार जिस प्रकार रहा उससे मुझे अतिशय पीड़ा हुई है। उन्होंने गलत दवा देने के प्रकरण को रिकॉर्ड करने की परवाह तक नहीं की जो मेरे लिए प्राणघातक हो सकती थी। उन्होंने यह जानते हुए कि मैं एट्रियल फीब्रिलेशन का रोगी हूं और एपिनेफ्रीन जैसी आपातकालीन दवा के अंतःशिरा इंजेक्शन से पल्स रेट अप्रत्याशित रुप से बढ़ सकती थी जिससे शरीर को अपूरणीय क्षति हो सकती थी, दवा की प्रतिक्रिया की दूरगामी प्रभाव की जाँच के लिए भी कोई कदम नहीं उठाया। ऐसी आपात स्थिति से निपटने में अस्पताल की व्यवस्था में गंभीरता का भाव नहीं था। प्रभारी चिकित्सक चार घंटे से अधिक समय के बाद मुझे देखने आए। मैं इससे काफी आहत हूँ।

मेरा मन अभी भी इस बात को मानने को तैयार नहीं है कि अस्पताल में कोई दवा खिलाई जाएगी या इंजेक्शन दिया जाएगा और मेडिसिन लिस्ट में उसे शामिल तक नहीं किया जाएगा। क्या यह जहर था कि इसे लिखने से बचा जा रहा है? या किसी साजिश के तहत इसे दिया गया था तथा इसका जिक्र सभी जगह से हटा दिया जाय। अस्पताल के सिस्टम का पूरी तरह फेल हो जाने का इससे बड़ा और क्या प्रमाण हो सकता है ।

प्रश्न यह भी है कि जो दवा लिखी ही नहीं है, वह दवा वार्ड के दराज में कैसे आ गई? डॉक्टर ने कहा कि घटना इसलिए हुई क्योंकि यह दवा अन्य इंजेक्शन के समान है जो मुझे लिखा गया था। पर डॉक्टर के द्वारा जो प्रेसक्रिप्शन मुझे दिया गया उसमें यह कहीं नहीं लिखा था। यह बात इसलिए भी गंभीर है क्योंकि दवाएं अस्पताल के दूकान से ही आती हैं और कई नर्स उसे चेक करते हैं। मैं एम0 आई0 सी0 यू0 से आया था वहाँ सभी दवाओं को कई नर्स चेक करते थे।

यह प्रश्न भी विचारणीय है कि कैसे ओवर मेडिकेशन से बचा जाय। एक साथ कई एंटीबायोटिक शरीर में दे दिए जाने की अवस्था में मरीज के शरीर पर क्या दुष्प्रभाव पड़ेगा, यह गंभीरता से विचार करने की जरूरत है । दूसरे कई देशों में मैंने देखा है कि बिना डॉक्टर के पूर्जा के कोई एंटिबायोटिक खरीद नहीं सकता । डॉक्टर भी अनावश्यक रूप से एंटिबायोटिक नहीं लिखते हैं । देश के स्वास्थ्य के दूरगामी प्रसंग में यह आवश्यक है कि एंटिबायोटिक का व्यवहार उचित ढंग से किया जाय।

मैंने पाया है कि बड़े कॉर्पोरेट अस्पतालों में सभी मरीज का अधिक- से-अधिक शल्य चिकित्सा करने, अधिक-से-अधिक टेस्ट करने, अधिक-से-अधिक दवा लिखने का प्रयास रहता है ताकि अधिक राशि का बिल बन सके और अधिक मुनाफा हो। इसमें मरीज के स्वास्थ्य से ज्यादा महत्वपूर्ण लाभ में वृद्धि करना रहता है। इस पूरी प्रक्रिया में शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव की कोई चिंता नहीं रहती। यदि कोई दुष्प्रभाव हो तो वह भी मुनाफे का एक नया अवसर बन जाता है।

ये प्रश्न एक अस्पताल या एक डॉक्टर का नहीं वरन पूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था के हैं । आइये हम सब मिलकर सोचें कि इन समस्याओं से कैसे निजात पाया जाय ताकि किसी अन्य व्यक्ति को इस तरह की समस्या का सामना न करना पड़े।
विजय प्रकाश
भा0 प्र0 से0 (से0 नि0)
पटना

आंध्र प्रदेश के केमिकल फैक्ट्री में लगी आग, नालंदा के चार मजदूरों की हुई मौत

आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के मुसनुरू गांव के केमिकल फैक्ट्री में अचानक आग लग जाने के कारण 6 मजदूर की मौत हो गई । मृतक में चार नालंदा जिला का रहने बाला है, मरने बालो में कारू रविदास , मनोज कुमार रामसन और सुभाष रविदास नरसंडा गॉव का रहने बाला है और हवदास रविदास बसनिमा गांव के रहने वाला है ।

मौत की खबर मिलते ही गांव में मातम छा गया है परिवार वाला का रो रो कर बुरा हाल है परिवार के सदस्यों ने बताया ये लोग पिछले 15 वर्षों से आंध्र प्रदेश के केमिकल फैक्ट्री में काम कर रहे थे जिससे पूरा परिवार का भरण पोषण हो रहा था ।देर रात सूचना आई कि फैक्ट्री में आग लग गई है जिसमे इन लोगों की मौत हो गई है मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया है और परिवार के लोगों को रो रो कर बुरा हाल है ।

उजड़ता बिहार : बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था अंतिम सांसे ले रही है

काफी लम्बे अंतराल के बाद हाल में ही 20 दिनों से अधिक समय तक गांव और गांव के लोगों के बीच रहने का मौका मिला वैसे गांव में अब पहले वाली बात नहीं रही युवा तो दिखता ही नहीं है कुछ बच्चे दिखते हैं उन्हें भी खेलकुद से ज्यादा वास्ता नहीं है। फिर भी गांव मुझे बहुत आकर्षित करता है वजह गांव के लोगों में एक अलग तरह का विश्वास और समझदारी आज भी देखने को मिलता है ।

दरभंगा बाजार समिति से कोई दस किलोमीटर पर एक गांव है गांव के मुखिया जी रिश्तेदारी में आते हैं उनसे मिलने उसके घर गये थे ,पूरानी हवेली कब गिर जाए कहना मुश्किल है ,दरवाजे पर दो दो ट्रैक्टर देखने से लगता था कि वर्षो से बंद पड़ा है,दरवाजे के ठीक सामने लम्बा सा घर जिसमें सौ से अधिक मवेशी को बांधने वाला खूंटा औरमवेशी के खाना खाने वाला नाद बना है लेकिन बहुत दूर एक गाय बंधी हुई दिखायी दी ।ठीक उसके सामने बहुत बड़ा खलिहान था जिसके बीचो बीच अभी भी एक बांस गड़ा हुआ दिख रहा था जहां कभी दर्जनों बैल धान का दौनी करता होगा ऐसा एहसास आज भी हो रहा था।

खलिहान के ठीक बाजू में अनाज रखने के लिए बड़ा बड़ा घर बना हुआ था मिथिलांचल में इसे बखाड़ी कहते हैं बखाड़ी का हाल यह था कि ऊपर का छज्जा कब उड़ गया अनुमान लगाना मुश्किल है एक आकृति बची हुई है जो एहसास दिलाती है कि किसी जमाने में हजार क्विंटल अनाज रहता होगा।दरवाजे पर जो कुर्सी लगी हुई थी ऐसा लग रहा था वर्षो से उसका रंग रोगन नहीं हुआ है शीशम और सखुआ जैसे लकड़ी का बना हुआ है इसलिए अभी टूटा नहीं है ।यह सब मैं देख ही रहा था कि भूंजा आ गया लगा चलो बहुत दिनों बाद गाँव के कनसार(जहाँ भुजा बनाता था) का भूंजा खाने का मौका मिला लेकिन देख कर बड़ी निराशा हुई वही शहर वाला भूंजा चूड़ा और चना अलग से नमक ,प्याज और मिर्च।

भूंजा खत्म होते होते चाय आ गया वैसे मैं चाय पीता नहीं हूं फिर भी दो घुट ले लिए चाय के स्वाद से लग गया कि इस घर का हाल क्या है मुखिया बनते आ रहे हैं क्यों कि इसके दादा जी भी मुखिया थे और गांव के लोगों में आज भी धारणा है कि मालिक का परिवार है इनके बच्चों में वो ईमान धर्म बचा हुआ है और परिवार वाले उसी ईमान धर्म को बनाये रखने में इस बार भी मुखिया बनने में दो बीघा जमीन बेचना पड़ा है। यह हाल किसी एक गांव के किसानों का नहीं है यह हाल बिहार के हर गांव का है जिनके पास जमीन है वो आज सबसे अधिक गरीब है उनके पास जरूरतें पूरी करने लाइक भी पैसे घर में नहीं है शादी हो या फिर कोई बीमार पड़ गया तो जमीन बेचने के अलावे उसके पास कोई चारा नहीं रह गया है यही हाल छोटे किसान और खेतिहर मजदूर का है यू कहे तो पूरी कृषि व्यवस्था अंतिम सांसे ले रही है मुफ्त में अनाज योजना का कितना बड़ा असर कृषि पर पड़ा है जरा गांव में जाकर देखिए ।

इतना ही नहीं पहले हर गांव में आपको सौ दो सौ भैंस गाय मिल जाता था आज गरीब के घर भी एक दो मवेशी मिल जाये तो बड़ी बात है हालांकि अभी भी गांव का यह कृषक समाज हार नहीं माना है संघर्ष कर रहा है अभी मुर्गी पालन और मछली पालन के सहारे किसानी को किसी तरह खींच रहा है ,लेकिन अब यह साफ दिखने लगा है कि गांव का कृषि व्यवस्था अंतिम सांसे ले रही है ।इस हालात को समझने के लिए मैं छोटे और बड़े किसानों से जहां गया जिस गांव में गया काफी बातचीत किया जो स्थिति बनती जा रही है उसमें यह कह सकते हैं कि भारत भी श्रीलंका की और बढ़ चला है ।

किसानों से खेती ना करने कि वजह जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि खेती में पांच वर्ष पहले जहां पांच हजार रुपया बीघा खर्च होता था आज वो खर्च 25 हजार रुपया बीघा हो गया है लागत मूल्य पांच गुना बढ़ गया है लेकिन अनाज का दाम में मामूली वृद्धि हुई है, पांच वर्ष पहले खेत के जोत में नौ फाड़ा ,कल्टी और रोटावेटर का रेट था 25–35–50 रुपये प्रति कट्टा था वो आज बढ़कर नौ फाड़ा 50 रुपया ,कल्टी 70 रुपया और रोटावेटर 100 रुपया कट्टा हो गया है ।

लेकिन अभी हाल यह है कि दूध का उत्पादन घट कर रोजाना दो लाख से ढाई लाख प्रति लीटर हो गया है ,दूध का पाउडर बनाने वाली मशीन महीनों से बंद है,दूध उत्पादन में कमी को लेकर जब किसान से बात किये तो पता चला कि जर्सी और फ्रीजियन गाय के पालने में उसके खाना और दवा में इतना खर्च बढ़ गया कि अब किसान को गाय पालना घाटे का सौदा हो गया है। समस्तीपुर के किसी भी गांव में चले जाये जहां कभी हर किसान के दरवाजे पर दस से बीस गाय रहता था आज घटकर दो चार बच गया है छोटे किसान भी गाय पालना लगभग छोड़ दिया है ।

यह उजड़ा बिहार की वो तस्वीर है जिसके सहारे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि पुचका बेचने बिहारी कश्मीर क्यों जा रहा है , पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था बर्बाद हो चुका है एक और बदलाव आया है पहले बिहारी जो बिहार से बाहर काम करता था गांव में जमीन और घर बनाने में निवेश करता था लेकिन यह प्रवृति भी काफी तेजी से घट रहा है इसका असर भी ग्रामीण अर्थ व्यवस्था पर बहुत ही गहरा पड़ा है ।

इतना ही नहीं बहेरी ,बिरौल और कुशेश्वर स्थान जैसे छोटे छोटे बाजार में भी माँल खुल गया है इसका असर यह देखने को मिल रहा है कि छोटे छोटे दुकान के सहारे वर्षो से रोजगार करने वाले दुकानदारों का दुकान बंद होने के कगार परआ गया है यू कहे तो पूरी ग्रामीण अर्थ व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है फिर भी लोग खामोश है । ऐसे तमाम उजड़े हुए चमन के घर पर आपको मोदी और भगवा झंडा जरुर मिल जायेंगा जिसके पास अपनी बदहाली पर बात करने कि फुर्सत तक नहीं है।

अब देखना यह है कि हिन्दू मुसलमान ,जय श्री राम और पांच किलो अनाज के सहारे कितने दिनों तक सरकार इस बवंडर को रोक पाती है वैसे अंदर अंदर आग तो सुलगनी शुरु हो गयी है बस एक माचिस की जरूरत है।

बिहार विधान परिषद में राबड़ी देवी नेता प्रतिपक्ष होगी

बिहार विधान परिषद में राबड़ी देवी नेता प्रतिपक्ष होगी, इस संबंध में बिहार विधान परिषद सचिवालय ने आदेश जारी कर दिया है ।

राष्ट्रीय जनता दल ने बिहार विधान परिषद के चुनाव के बाद नेता प्रतिपक्ष के तौर पर राबड़ी देवी का नाम विधान परिषद के कार्यकारी सभापति को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता देने के लिए भेजा था जिसे स्वीकार कर लिया गया है और विधान परिषद सचिवालय ने आदेश जारी कर दिया है।

Patna High Court : पटना के चर्चित जिम ट्रेनर गोलीकांड में अभियुक्त खुशबू सिंह को नियमित जमानत देने से इंकार कर दिया

पटना हाई कोर्ट ने पटना के चर्चित जिम ट्रेनर गोलीकांड में अभियुक्त खुशबू सिंह को नियमित जमानत देने से इंकार कर दिया। जस्टिस ए एम बदर ने इस मामलें पर सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद यह आदेश दिया।

कोर्ट ने खुशबू सिंह की नियमित जमानत याचिका को खारिज करते हुए संबंधित ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह इस मामले का ट्रायल नौ महीने में पूरा कर ले। खुशबू सिंह जिम ट्रेनर विक्रम सिंह गोली कांड में फिलहाल पटना के बेउर जेल में बंद है।

अभियुक्त खुशबू की ओर से उसके अधिवक्ता सुरेन्द्र कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को इस मामले में एक साजिश के तहत फंसाया गया है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि खुशबू के पति डॉ राजीव सिंह को निचली अदालत से ही नियमित जमानत मिल चुकी है।

जिम ट्रेनर गोलीकांड

सरकारी वकील (एपीपी ) मुस्ताक आलम और जे एन ठाकुर और जिम ट्रेनर की ओर से अधिवक्ता द्विवेदी सुरेन्द्र ने जमानत याचिका का विरोध किया।उन्होंने बहस करते हुए कोर्ट को बताया कि यह मामला पटना ही नही, बल्कि बिहार का चर्चित मामला रहा है। पुलिस ने इस मामले में अनुसंधान पूरा कर खुशुब और उसके पति डॉ राजीव समेत छह अभियुक्तों के खिलाफ कोर्ट में आरोपपत्र समर्पित कर दिया है।

अन्य अभियुक्तों के खिलाफ अनुसंधान अभी भी जारी रखा है।कोर्ट को बताया गया कि कांड दैनिकी में जो साक्ष्य आया है, उससे स्पष्ट होता है कि याचिकाकर्ता इस मामले की मुख्य अभियुक्त है।इस घटना में शामिल दो अन्य अपराधियों ने भी पुलिस को दिये अपने बयान में खुशबू सिंह और उसके पति की संलिप्तता की बात कही है।इन लोगों ने जिम ट्रेनर की हत्या के लिए तीन लाख रुपया अपराधियों को दिया भी है।

इस मामले में खुशबू उसके पति डॉ राजीव और खुशबू के पिता ने कॉन्ट्रैक्ट किलर को जिमट्रेनेर की हत्या करने के लिये बैंक से पैसा निकाल कर दिया है।

इसके पहले भी खुशबू के नियमित जमानत पर 31 जनवरी को सुनवाई हुई थी।उस दिन कोर्ट ने इस मामले में संबंधित पुलिस अधिकारी से शपथ पत्र के माध्यम से अभियुक्त के खिलाफ आये साक्ष्यों को देने को कहा था।

कोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले के अनुसंधानकर्ता ने कोर्ट में दो शपथ पत्र दायर कर पूरे घटना और उसके अनुसंधान में आये साक्ष्यों को दिया था।गौरतलब है कि 18 सितंबर 2021 को राजधानी के कदमकुआं इलाके में जिम ट्रेनर विक्रम सिंह को हत्या करने की नियत से गोली मारी गई थी।

हालांकि, इस वारदात में उनकी जान बच गई।इस वारदात में शामिल खुशबू सिंह, उसके पति राजीव कुमार सिंह और दोनों कॉन्ट्रैक्ट किलर समेत कई अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार जेल भेज दिया था। इनमें फिजियोथेरेपिस्ट राजीव कुमार सिंह को जमानत मिल चुकी है।

Patna High Court : दनियावां थाना के पुलिसकर्मी संतोष कुमार व अनूप कुमार द्वारा अधिवक्ता विनोद कुमार के साथ किये गए मारपीट के मामले पर सुनवाई

पटना । हाईकोर्ट में दनियावां थाना के पुलिसकर्मी संतोष कुमार व अनूप कुमार द्वारा अधिवक्ता विनोद कुमार के साथ किये गए मारपीट के मामले पर सुनवाई 18 अप्रैल,2022 को होगी। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई कर रही हैं।

आज कोर्ट में पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक को पटना हाई कोर्ट के समक्ष उपस्थित थे।

पिछली सुनवाई में कोर्ट को इस घटना के सम्बन्ध में वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने पूरी घटना को रखा था। श्री शाही ने यह भी बताया कि उस रास्ते से राज्य के मुख्यमंत्री को जाना था।

उसके बाद कोर्ट ने इस मामले में दिए गए पत्र को आधार बनाते हुए जनहित याचिका के रूप में रजिस्टर्ड करने का आदेश दिया था।

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कोर्ट को राज्य सरकार के महाधिवक्ता ललित किशोर ने पीड़ित अधिवक्ता की समुचित इलाज करवाने के लिए आश्वस्त किया था। सुनवाई के दौरान राज्य एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बराबर घटती है, जो अच्छी बात नहीं है।

इस घटना के बारे में पत्र में कहा गया है कि जब पीड़ित अधिवक्ता नालंदा जिला अंतर्गत अपने गांव चुलिहारी से पटना आ रहे थे ,तो दनियावां पुलिस द्वारा मारपीट की गई।

इसकी वजह से अधिवक्ता के दोनों कान बुरी तरह से घायल हो गए।पत्र में कहा गया है कि जब अधिवक्ता ने पटना के एसएसपी व दनियावां थाना के एसएचओ के समक्ष शिकायत करना चाहा,तो उन्होंने शिकायत लेने से इंकार कर दिया था।

बीजेपी जदयू के गठबंधन तोड़ने का वक्त आ गया है – पूर्व विधान पार्षद रजनीश कुमार

पटना । बेगूसराय खगड़िया विधान परिषद चुनाव में हार का सामना करने वाले एनडीए के भाजपा उम्मीदवार रजनीश कुमार ने भाजपा जदयू के गठबंधन पर सवाल खड़ा करते हुए भाजपा को जदयू से अलग होने का आग्रह किया है।

रजनीश कुमार ने कहा कि गठबंधन का समय चला गया है, भाजपा के शीर्ष नेताओं से आग्रह करते हुए कहा कि जिस तरह से भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी में आत्मनिर्भर बना है उसी तरह बिहार में भी भाजपा आत्मनिर्भर बनने के लिए अकेले चलने का काम करें। रजनीश कुमार ने कहा कि बिहार में गठबंधन की सरकार है लेकिन निचले स्तर पर गठबंधन का कोई औचित्य नहीं रह गया है।

बेगूसराय विधान परिषद चुनाव में जदयू की इकाई और विधायक ने खुलेआम एनडीए उम्मीदवार के विरोध में प्रचार किया। भाजपा और जदयू नेतृत्व को सूचना देने के बावजूद जदयू ने साथ नहीं दिया और धोखा देने का काम किया। बिहार में उपचुनाव में भाजपा हमेशा जदयू के साथ रही है लेकिन जदयू हमेशा चुनाव में गठबंधन धर्म का पालन नहीं करती है।

अब समय आ गया है कि गठबंधन को साथ नहीं चल सकते हैं ऐसे में भाजपा नेतृत्व से आग्रह है कि भाजपा को बिहार में मजबूत बनाने के लिए अकेले चलने का समय आ गया है।

बिहार की राजनीति में अभी भी नीतीश फैक्टर प्रभावी है

कल दोपहर टीवी देख रहे थे चैनल पर जगदानंद सिंह के पुत्र के जदयू में शामिल होने कि खबर लाइव चल रही थी और ललन सिंह जगता भाई को नसीहत दे रहे थे ठीक उसी समय टीवी स्क्रीन पर बिग ब्रेकिंग फुल प्लेट खबर ब्रेक होता है नालंदा में नीतीश कुमार के कार्यक्रम में धमाका खबर जैसे ही खत्म हुआ एंगर सीधे बोचहा उप चुनाव में मौजूद अपने रिपोर्टर के पास जाता है, और मतदान का हाल जानना चाहता है रिपोर्टर मुजफ्फरपुर से सटे भूमिहार के सबसे बड़ा गाँव खबरा में मौजूद था रिपोर्टर वोटर से सवाल कर रहे हैं विकास के मुद्दे पर वोट दे रहे हैं या बदलाव के मुद्दे पर वोटर अपना नाम और जाति बोलते हुए कहां कि मैं भूमिहार हूं और राजद को वोट देकर आया हूं बहुत हो गया अपमान अब नहीं चलेगा ।        

ठीक उसी समय दूसरे चैनल पर अखाड़ाघाट से रिपोर्टर लाइव पर था जहां राजपूत मतदाता वोट देकर बाहर निकलता है और कहता है कि मैं राजद को वोट दिया हूं बहुत हो गया हम लोग एनडीए का बंधुवा वोटर नहीं है ।                 

ये सब चल ही रहा था कि मैं मुजफ्फरपुर के बीजेपी के एक बड़े यूथ लीडर को फोन लगा दिया और जैसे ही वो फोन उठाया मेरा सीधा सवाल था क्या देख रहे हैं टीवी पर ,भैया सही देख रहे हैं पता नहीं क्यों यूथ में गजब का गुस्सा है हाल यह है कि तमाम भूमिहार बस्ती में यूथ अभिभावक को घर से निकलने ही नहीं दे रहा है कह रहा है लोकसभा में मोदी को वोट देंगे लेकिन आज आप लोग वोट देने मत जाइए ।

रिजल्ट क्या होगा ,भैया नीतीश के वोटर पर हम लोग लड़ाई में बने हैं बात जीत की तो बहुत मुश्किल है हजार दो हजार से जीत जाये तो बहुत बड़ी बात होगी वैसे हारे तो 15 हजार से ऊपर से हारेंगे ।              

भैया ये लोग मुकेश सहनी को सहनी का नेता बना दिया 75 प्रतिशत सहनी रमई राम के साथ चला गया जो बचा वो राजद और भाजपा में गया है पासवान वोट भी राजद के साथ खड़ा रहा है पचपनिया(अति पिछड़ा) वोटर में भी बिखराव दिख रहा है, बात आगे बढ़ी तो मैंने भी कहां विधान पार्षद के वोट में भी अति पिछड़ा वोटर वर्षो बाद राजद की और जाते हुए मैंने भी देखा।

 तभी ख्याल आया कि अति पिछड़ा वोटर का यह ट्रेड सिर्फ तिरहुत और मिथिलाचंल में ही है या फिर अन्य जगह भी है ,फोन काटा और सीधे औरंगाबाद में उसके पास फोन लगा दिया जो विधान परिषद के चुनाव में छह माह से डटा हुआ था उनसे भी मेरा सवाल यही था कि चुनाव तो जीत गये, पैसा भी बेहिसाब खर्च किये लेकिन जरा ये बताये अति पिछड़ा वोटर का क्या हाल था संतोष भाई पैसा लेने के बाद भी यह वोटर राजद को वोट किया है, मैंने पूछा क्या आपको लगता है कि नीतीश का अति पिछड़ा वोटर भाजपा के साथ सहज नहीं है संतोष भाई सौ फिसड्डी जो भी साथ छोड़ा है वो राजद के साथ गया है और ये साफ दिख रहा कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री तेजस्वी ही बनेगा संतोष भाई भाजपा का कार्यकर्ता इतना करप्ट हो गया है कि आप सोच नहीं सकते हैं साला एक दर्जन संगठन गांव गांव में खड़ा कर दिया है और सबको पैसा चाहिए गजब हाल है इन लोगों का राजद का कार्यकर्ता अभी भी सतुआ खाकर काम करता है लेकिन हमारे यहां पगला गये इन लोगों को सम्भालते सम्भालते।

 बात चल ही रही थी कि देखते हैं मेरे नालंदा रिपोर्टर का लगातार फोन आ रहा है इनसे विदा लेते हुए नालंदा रिपोर्टर का फोन रिसीभ किये कैसे हुआ क्या हुआ कौन है वो सब बात होने के बाद मैं धीरे से पुछा पटाखा छोड़ने वाला कौन जाति का है सर बनिया है हद है बाढ़ में भी बनिया और यहां भी बनिया ये बनिया सब को क्या हो गया है सर उसके परिवार का किसी भी राजनीतिक दल से उस तरह का जुड़ाव नहीं है लेकिन प्रतिबद्धता बीजेपी के साथ जरुर है , उस लड़के से बात हुई है क्या जी सर कह रहा है कि नीतीश शासन सही तरीके से नहीं चला रहा है इसको मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ देना चाहिए वैसे ये भी मानसिक रूप से कमजोर ही लगता है।

वैसे जगतानंद सिंह के बेटे का जदयू में शामिल होना,नीतीश कुमार की सभा में पटाखा छोड़ देना और बोचहा चुनाव में एनडीए के परम्परागत वोटर का गुस्सा होना ये सारी बाते भले ही तात्कालिक लग रहा है लेकिन बिहार की राजनीति फिजा बदल रही है ये भी साफ दिख रहा है ।

Patna High Court : पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ रीता कुमारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नही करने का निर्देश दिया

पटना हाई कोर्ट ने पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ रीता कुमारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नही करने का निर्देश पटना पुलिस को दिया है।साथ ही कोर्ट ने सेकंडरी एडुकेशन के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को भी नोटिस जारी किया है।

जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने डॉ रीता कुमारी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह निर्देश दिया।
कोर्ट को बताया गया कि वर्ष 2020 के इंटरमीडिएट परीक्षा के मूल्यांकन में भाग नहीं लेने पर याचिकाकर्ता के खिलाफ कदमकुआं थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

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कोर्ट को बताया गया कि यूनिवर्सिटी प्रोफेसर को इंटरमीडिएट परीक्षा के मूल्यांकन में लगाना विश्वविद्यालय कानून के खिलाफ है।कोर्ट ने फिलहाल नोटिस जारी कर प्रोफेसर के खिलाफ किसी प्रकार का दण्डात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है।