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AIIMS,Patna के अधिवक्ता ने पटना हाइकोर्ट को बताया कि नेत्र रोग से पीड़ित लड़की के ईलाज के लिए धनराशि को एम्स,दिल्ली को स्थानांतरित कर दिया गया है

पटना हाइकोर्ट ने सीतामढी ज़िला के आर्थिक रूप से कमज़ोर और शारीरिक अपंग लड़कियों की जांच और ईलाज के सम्बन्ध में सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ को एम्स,पटना के अधिवक्ता ने बताया कि नेत्र रोग से पीड़ित लड़की के ईलाज के लिए धनराशि को एम्स,दिल्ली को स्थानांतरित कर दिया गया है।

कल इस मामलें पर सुनवाई करते हुए एम्स,पटना के अधिवक्ता को नेत्रहीन लड़की के ईलाज के लिए एम्स,दिल्ली में राज्य सरकार द्वारा दी गई धनराशि स्थानांतरित करने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया।पूर्व में एम्स,पटना के अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय ने बताया कि तीन लड़कियों में से दो लड़कियों को हड्डी सम्बन्धी रोग है।

उनका ईलाज पटना के एम्स हॉस्पिटल में शुरू हो गया है। इन दोनों लड़कियों के ईलाज हेतु राज्य सरकार धनराशि दे चुकी है।उन्होंने बताया था कि एक नेत्र सम्बन्धी बीमारी से ग्रस्त है।इसके ईलाज के लिए इसे दिल्ली,एम्स भेजा जाना है।

इसके प्रारंभिक ईलाज के मद में राज्य सरकार ने बीस हज़ार रुपये एम्स,पटना के खाते में स्थानांतरित कर दिया।ये धनराशि एम्स,दिल्ली के खाते में एम्स,पटना को स्थानांतरित करना है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इसी सम्बन्ध में कोर्ट ने एम्स,पटना को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।उल्लेखनीय है कि सीतामढी के ज़िला व सत्र न्यायाधीश ने इनके सम्बन्ध में पटना हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखा था।

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#PatnaHighCourt

इसमें ये बताया गया कि दो लड़कियों को हड्डी रोग की समस्या है,जबकि एक लड़की नेत्र की समस्या से ग्रस्त है।इनके आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण इनके माता पिता इनका ईलाज नही करवा पा रहे थे।

इनके ईलाज में अस्पताल और ईलाज का खर्च काफी होता है, जो कि इनके वश में नहीं था।कोर्ट ने इनके ईलाज के क्रम में जांच के लिए पटना के एम्स अस्पताल भेजा था।

एम्स के अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय ने कोर्ट को बताया था कि एम्स अस्पताल में जांच का कार्य पूरा हो कर ईलाज की कार्रवाई जारी है।

इस मामलें में कोर्ट के समक्ष एमिकस क्यूरी अधिवक्ता मयूरी,एम्स,पटना की ओर से अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय व राज्य सरकार की ओर से विकास कुमार ने पक्षों को रखा।इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामलें को निष्पादित कर दिया।

PatnaHighCourt News: पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई 13 मार्च,2023 तक टली

पटना हाईकोर्ट में पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई 13 मार्च,2023 तक टली। जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई कर रही है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने जांच की प्रगति पर असंतोष जाहिर किया था।

पहले की सुनवाई में PatnaHighCourt में एस एस पी, पटना और एस आई टी जांच टीम का नेतृत्व करने वाली सचिवालय एएसपी काम्या मिश्रा भी कोर्ट में उपस्थित रही थी।

PatnaHighCourt ने कहा था कि इस मामलें की समग्रता में जांच नहीं की जा रही हैं।पुलिस अधिकारियों को विस्तार और गहराई से जांच पड़ताल करने की आवश्यकता है।

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अधिवक्ता मीनू कुमारी ने बताया कि कोर्ट अब तक एस आई टी द्वारा किये गए जांच और कार्रवाई के सम्बन्ध में सम्बंधित अधिकारी से जानकारी प्राप्त करना चाहता था।उन्होंने बताया था कि आफ्टर केअर होम में रहने वाली महिलाओं की स्थिति काफी खराब हैं।

PatnaHighCourt ने इस याचिका को पटना हाई कोर्ट जुवेनाइल जस्टिस मोनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रजिस्टर्ड किया था। कमेटी में जस्टिस आशुतोष कुमार चेयरमैन थे, जबकि जस्टिस अंजनी कुमार शरण और जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय इसके सदस्य के रूप में थे।

इस मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च,2023 को की जाएगी।

पटना हाइकोर्ट के 7 जजों के GPF अकाउंट बंद होने के मामलें को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई 24 फरवरी, 2023 को होगा

पटना हाइकोर्ट के सात जजों के जीपीएफ अकाउंट बंद होने के मामलें को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष 24 फरवरी,2023 को सुनवाई होना तय हुआ है। इस मामलें को चीफ जस्टिस डी बाई चन्द्रचूड़ के मामला जब आया, तो उन्होंने पूछा कि मामला क्या है। जजों के जीपीएफ अकाउंट बंद कर दिया गया है।

कोर्ट ने जानना चाहा कि ये याचिका किसके द्वारा दायर की गई, तो याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने चीफ जस्टिस चन्द्रचूड को बताया कि पटना हाइकोर्ट के सात जजों ने याचिका दायर की है।

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कोर्ट ने आश्चर्य जाहिर करते हुए इस मामलें की सुनवाई की सुनवाई 24फरवरी,2023 को निर्धारित की है।

हिम्मत है तो नीतीश खुद नेतृत्व संबंधी बयान का खंडन करें: सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार जब जदयू विधायक दल की बैठक में और तीन अन्य अवसरों पर सार्वजनिक रूप से तेजस्वी यादव को उत्तराधिकारी घोषित कर चुके हैं, तब इस मुद्दे पर ललन सिंह या किसी और के गोलमोल बयान का कोई मतलब नहीं।

  • ललन सिंह का गोलमोल बयान बेमतलब, विद्रोह दबाने की कोशिश
  • नीतीश पलट सकते हैं, लालू अपना एजेंडा लागू करने के लिए जदयू को तोड़ सकते हैं

श्री मोदी ने कहा कि अगर हिम्मत है तो नीतीश कुमार 2025 में भी स्वयं महागठबंधन का नेतृत्व करते रहने और फिर सीएम बनने की घोषणा करें।

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उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने एक बार भी तेजस्वी यादव को नेतृत्व सौंपने संबंधी अपने बयान का खंडन नहीं किया , लेकिन जब उपेंद्र कुशवाहा ने नई पार्टी का एलान कर दिया , तब विद्रोह पर पानी डालने वाले बयान दिये जा रहे हैं।

श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार अपने बयान से पलट सकते हैं, लेकिन लालू प्रसाद उन्हें डील से पीछे नहीं हटने देंगे। वे जदयू को तोड़ कर तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनवाने का सपना पूरा कर सकते हैं।

पटना हाईकोर्ट ने बिहार के नेत्रहीन बच्चों के लिए बने विशेष विद्यालयों के बदहाल स्थिति पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इससे “सरकार की असंवेदनशीलता दिखती है”

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के नेत्रहीन बच्चों के लिए बने विशेष विद्यालयों के बदहाल स्थिति पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इससे सरकार की असंवेदनशीलता दिखती है । एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य के मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में विस्तृत और सही स्थिति बताते हुए हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने मुख्य सचिव को नेत्रहीन बच्चों के लिए स्कूलों की स्थिति, योग्य शिक्षकों की बहाली,छात्रों के पढ़ाई के सम्बन्ध पूरी और यथार्थ जानकारी देने का निर्देश दिया।कोर्ट ने इस बात को काफी गम्भीरता से लिया कि इन स्कूलों में नेत्रहीन छात्र आठवीं कक्षा के बाद बड़ी संख्या में पढ़ाई नहीं कर पाते हैं।

कोर्ट ने राज्य सरकार को ये बताने को कहा कि ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हुई।कोर्ट ने कहा कि ये बहुत ही चिंतनीय विषय है कि जहां आठवीं क्लास में लगभग सत्ताईस हज़ार छात्र पढ़ते है,वहीं नवीं से वारहवीं कक्षा में दो हज़ार छात्र ही पढ़ाई कर रहे हैं।

कल कोर्ट ने पटना हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पटना के कदमकुआं स्थित नेत्रहीन स्कूल का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।उन्होंने कोर्ट को कदमकुआं स्थित नेत्रहीन स्कूल की रिपोर्ट प्रस्तुत किया।

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उन्होंने बताया कि इस स्कूल को शिक्षकों का स्वीकृत पद ग्यारह है,लेकिन वहां फिलहाल 15 शिक्षक कार्य कर रहे है।इनमेंं एक शिक्षक हाल में ही सेवानिवृत हुए है।इनमें सिर्फ दो शिक्षक ही नेत्रहीन बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित है।

भागलपुर स्थित नेत्रहीन आवासीय विद्यालय में मात्र तीन ही शिक्षक है।इससे नेत्रहीन बच्चों की शिक्षा के बारे में राज्य सरकार की गम्भीरता समझी जा सकती है।

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि इन दिव्यांग स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति हेतु अनुशंसा करने हेतु बिहार कर्मचारी चयन आयोग को प्रस्ताव 2014 भेजा गया था,लेकिन उनका चयन कर आयोग ने नहीं भेजा।कोर्ट ने जानना चाहा कि सरकार ने अबतक क्या किया।

इससे पहले इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्टाफ सेलेक्शन कमीशन को पार्टी बनाने का निर्देश दिया था ।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वृषकेतु शरण पांडेय ने कोर्ट को बताया कि 2014 में विज्ञापित पदों पर अब तक नहीं भरा जा सका है। यह अपने आप में राज्य का उदासीन रवैया दर्शाता है।

इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी।

पटना हाइकोर्ट ने आर्थिक रूप से कमज़ोर और शारीरिक अपंग लड़कियों की जांच और ईलाज के सम्बन्ध में सुनवाई करते हुए एम्स,पटना के अधिवक्ता को नेत्रहीन लड़की के ईलाज के लिए एम्स, दिल्ली में राज्य सरकार द्वारा दी गई धनराशि स्थानांतरित करने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया

पटना हाइकोर्ट ने सीतामढी ज़िला के आर्थिक रूप से कमज़ोर और शारीरिक अपंग लड़कियों की जांच और ईलाज के सम्बन्ध में सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए एम्स,पटना के अधिवक्ता को नेत्रहीन लड़की के ईलाज के लिए एम्स, दिल्ली में राज्य सरकार द्वारा दी गई धनराशि स्थानांतरित करने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

पूर्व में एम्स,पटना के अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय ने बताया कि तीन लड़कियों में से दो लड़कियों को हड्डी सम्बन्धी रोग है।उनका ईलाज पटना के एम्स हॉस्पिटल में शुरू हो गया है। इन दोनों लड़कियों के ईलाज हेतु राज्य सरकार धनराशि दे चुकी है।

उन्होंने बताया था कि एक नेत्र सम्बन्धी बीमारी से ग्रस्त है।इसके ईलाज के लिए इसे दिल्ली,एम्स भेजा जाना है।इसके प्रारंभिक ईलाज के मद में राज्य सरकार ने बीस हज़ार रुपये एम्स,पटना के खाते में स्थानांतरित कर दिया।

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ये धनराशि एम्स,दिल्ली के खाते में एम्स,पटना को स्थानांतरित करना है।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इसी सम्बन्ध में कोर्ट ने एम्स,पटना को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

उल्लेखनीय है कि सीतामढी के ज़िला व सत्र न्यायाधीश ने इनके सम्बन्ध में पटना हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखा था।इसमें ये बताया गया कि दो लड़कियों को हड्डी रोग की समस्या है,जबकि एक लड़की नेत्र की समस्या से ग्रस्त है।

इनके आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण इनके माता पिता इनका ईलाज नही करवा पा रहे थे।इनके ईलाज में अस्पताल और ईलाज का खर्च काफी होता है, जो कि इनके वश में नहीं था।

कोर्ट ने इनके ईलाज के क्रम में जांच के लिए पटना के एम्स अस्पताल भेजा था।एम्स के अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय ने कोर्ट को बताया था कि एम्स अस्पताल में जांच का कार्य पूरा हो कर ईलाज की कार्रवाई जारी है।

इस मामलें पर 22 फरवरी,2023 को फिर सुनवाई होगी।

पटना हाइकोर्ट ने सीतामढी ज़िला के आर्थिक रूप से कमज़ोर और शारीरिक अपंग लड़कियों की जांच और ईलाज के सम्बन्ध में सुनवाई करते हुए AIIMS पटना के अधिवक्ता को कल तक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया

पटना हाइकोर्ट ने सीतामढी ज़िला के आर्थिक रूप से कमज़ोर और शारीरिक अपंग लड़कियों की जांच और ईलाज के सम्बन्ध में सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए एम्स,पटना के अधिवक्ता को कल तक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

एम्स,पटना के अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय ने बताया कि तीन लड़कियों में से दो लड़कियों को हड्डी सम्बन्धी रोग है।उनका ईलाज पटना के एम्स हॉस्पिटल में शुरू हो गया है। इन दोनों लड़कियों के ईलाज पर तीन लाख साठ हज़ार रुपया खर्च हो रहा है।ये धनराशि बिहार सरकार ने दे दिया।

उन्होंने बताया था कि एक नेत्र सम्बन्धी बीमारी से ग्रस्त है।इसके ईलाज के लिए इसे दिल्ली,एम्स भेजा जाना है।इसके प्रारंभिक ईलाज के मद में राज्य सरकार ने बीस हज़ार रुपये एम्स,पटना के खाते में स्थानांतरित कर दिया।

ये धनराशि एम्स,दिल्ली के खाते में एम्स,पटना को स्थानांतरित करना है।इसी सम्बन्ध में कोर्ट ने एम्स,पटना को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

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उल्लेखनीय है कि सीतामढी के ज़िला व सत्र न्यायाधीश ने इनके सम्बन्ध में पटना हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखा था।इसमें ये बताया गया कि दो लड़कियों को हड्डी रोग की समस्या है,जबकि एक लड़की नेत्र की समस्या से ग्रस्त है।

इनके आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण इनके माता पिता इनका ईलाज नही करवा पा रहे थे।इनके ईलाज में अस्पताल और ईलाज का खर्च काफी होता है, जो कि इनके वश में नहीं था।

कोर्ट ने इनके ईलाज के क्रम में जांच के लिए पटना के एम्स अस्पताल भेजा था।एम्स के अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय ने कोर्ट को बताया था कि एम्स अस्पताल में जांच का कार्य हो गया।इस मामलें की सुनवाई के क्रम में कोर्ट ने एम्स अस्पताल, पटना व राज्य सरकार समाज कल्याण विभाग को पार्टी बनाने का आदेश दिया गया था।

इस मामलें पर 21 फरवरी,2023 को फिर सुनवाई होगी।

पटना हाइकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को पटना के कदमकुआं स्थित नेत्रहीन स्कूल का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के निःशक्त बच्चों के लिए बने विशेष विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के मामलें पर सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने मामलें पर सुनवाई की। कोर्ट ने पटना हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पटना के कदमकुआं स्थित नेत्रहीन स्कूल का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

पूर्व में कोर्ट को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि इस स्कूल में एडहॉक आधार पर बारह शिक्षकों की बहाली की गई।कोर्ट ने जानना चाहा था कि इन शिक्षकों की बहाली की क्या प्रक्रिया थी।

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि इन दिव्यांग स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति हेतु अनुशंसा करने हेतु बिहार कर्मचारी चयन आयोग को प्रस्ताव भेजा गया था।

लेकिन आयोग के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 2018 के बाद कोई प्रस्ताव सरकार की ओर से नहीं आया है।कोर्ट ने इस बात को बहुत को बहुत गम्भीरता से लिया कि पटना के कदमकुआं स्थित दिव्यांग( नेत्रहीन) स्कूल में मात्र एक शिक्षक है।वह भी संगीत शिक्षक हैं।जबकि वहां स्कूल में शिक्षकों के स्वीकृत पद ग्यारह है।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि इस मामलें दिन प्रतिदिन सुनवाई होगी।इससे पहले इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्टाफ सेलेक्शन कमीशन को पार्टी बनाने का निर्देश दिया था ।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वृषकेतु शरण पांडेय ने कोर्ट को बताया कि 2014 में विज्ञापित पदों पर अब तक नहीं भरा जा सका है। यह अपने आप में राज्य का उदासीन रवैया दर्शाता है।

गौरतलब है कि इस मामले में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने हलफनामा दायर कर बताया था कि निःशक्त बच्चों से जुड़ी सभी परियोजनाएं तीन महीनों के भीतर कार्यरत हो जाएंगे ।

इस पर हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को हलफनामा दायर कर अपनी कार्य परियोजना बताने के लिए कहा था। इस मामले की अगली सुनवाई 21 फरवरी,2023 को होगी।

पटना हाइकोर्ट में पटना-गया-डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के मामलें पर केंद्र, राज्य सरकार, NHAI और अन्य सम्बंधित पक्षों को हलफनामा दायर करने के लिए 24 फरवरी, 2023 तक का मोहलत दिया

पटना हाइकोर्ट में पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के मामलें पर सुनवाई की गई। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र,राज्य सरकार,एनएचएआई और अन्य सम्बंधित पक्षों को हलफनामा दायर करने के लिए 24फरवरी,2023 तक का मोहलत दिया।

इससे पहले अधिवक्ताओं की टीम ने खंडपीठ के समक्ष पटना गया डोभी एनएच का निरीक्षण कर कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत किया था।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने वकीलों की टीम को इस राजमार्ग के निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।

वकीलों की टीम राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य के निरीक्षण पिछले सप्ताह के अंत में किया। कोर्ट ने निर्माण कार्य में लगायी गई मशीन और मानव संसाधन के सम्बन्ध में भी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने फेज 2 के निर्माण में उत्पन्न कर रही बाधाओं और अतिक्रमण को राज्य सरकार शीघ्र हटाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।कोर्ट ने इसके लिए आवश्यक पुलिस बल और व्यवस्था मुहैया कराने का निर्देश सबंधित ज़िला प्रशासन को दिया है।

इससे पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने वाली कंपनी ने इसका निर्माण कार्य 30 जून,2023 तक पूरा करने का अश्वासन कोर्ट को दिया था।साथ ही कोर्ट ने इस फेज के निर्माण में बाधा उत्पन्न होने वाले सभी अवरोधों को तत्काल हटाने का निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को दिया था।

कोर्ट ने फेज दो के 39 किलोमीटर से 83 किलोमीटर के बीच सभी प्रकार के अतिक्रमण को तेजी से हटाने का आदेश दिया।वही फेज तीन के 83 किलोमीटर से 127 किलोमीटर के बीच के अतिक्रमण को भी हटाने का आदेश दिया।

पिछली सुनवाई कोर्ट ने पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के फेज दो व तीन के निर्माण में लगी निर्माण कंपनी ने कोर्ट को बताया था कि पटना गया डोभी एनएच के निर्माण में कई जगह बाधा उत्पन्न किया जा रहा है।

इस मामलें पर 24फरवरी,2023 को फिर सुनवाई की जाएगी।

देश को देवगौड़ा जैसी कमजोर सरकार देना चाहते हैं नीतीश कुमार: सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जनाधार विहीन नीतीश कुमार परस्पर-विरोधी ताकतों का कुनबा जोड़ कर देश को कमजोर सरकारों के दौर में लौटाना चाहते हैं, जबकि आज केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही दे सकते हैं चीन-पाकिस्तान को करारा जवाब देने वाली सरकार।

  • विपक्षी एकता सत्ता के प्यासे छोटे-बड़े दलों की मृग-मरीचिका मात्र
  • कमजोर कांग्रेस न एकता की धुरी बन सकती है, न राहुल का नेतृत्व सर्वमान्य
  • 1977 के अलावा कभी एक नहीं हुआ विपक्ष, वह भी जेपी की बदौलत
  • केवल पीएम मोदी ही दे सकते हैं चीन-पाक को जवाब देने वाली सरकार

उन्होंने कहा कि देश अब देवगौड़ा और चंद्रशेखर के उस दौर में नहीं लौटना चाहता, जब रिजर्व बैंक को सोना गिरवी रखना पड़ा था।

श्री मोदी ने कहा कि विपक्षी एकता केवल मृग-मरीचिका है। यह एक झूठे-नकरात्मक लक्ष्य के लिए सत्ता के प्यासे हिरणों की दौड़ के सिवा कुछ नहीं है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष दिल्ली में सरकार चाहता है, जिसे हर छोटी-बड़ी पार्टी ब्लैकमेल कर सके और जो सरकार जीएसटी या सर्जिकल स्ट्राइक जैसे बड़े फैसले न कर सके।

sushil modi vs nitish kumar

श्री मोदी ने कहा कि 1977 को छोड़ कर कभी पूरा विपक्ष एकजुट नहीं हुआ और वह भी तब सम्भव हुआ, जब उसका नेतृत्व जेपी जैसे महान राजनेता के हाथ में था। आज विपक्ष का हर नेता खुद को पीएम-इन-वेटिंग मानता है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नीतीश कुमार को पूछती नहीं। वे सीधे राहुल गांधी या खड़गे से बात करने के बजाय सलमान खुर्शीद जैसे व्यक्ति के जरिये संदेश दे रहे हैं, जिसकी कांग्रेस में कोई हैसियत नहीं।

श्री मोदी ने कहा कि महज तीन राज्यों तक सिमटी कांग्रेस काफी कमजोर हो चुकी है। वह न विपक्षी एकता की धुरी बन सकती है, न कोई राहुल गांधी का नेतृव स्वीकार करेगा।

उन्होंने कहा कि केरल में एक-दूसरे के विरुद्ध लड़ने वाली कांग्रेस और माकपा एकसाथ नहीं आ सकते। पंजाब-दिल्ली- हरियाणा में कांग्रेस और केजरीवाल साथ नहीं आ सके। ममता बनर्जी और केसीआर में कोई किसी को नेता नहीं मानता।

श्री मोदी ने कहा कि केवल प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा ही ऐसी मजबूत सरकार दे सकती है, जो सबका विकास करते वाली अर्थव्यवथा की तेजी बरकरार रख सके।

सुधाकर के जरिये नीतीश पर कुर्सी छोड़ने का दबाव बना रहे लालू: सुशील मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सुधाकर सिंह और प्रोसेसर चंद्रशेखर के जरिये नीतीश कुमार पर कुर्सी छोडने का दबाव बनाया जा रहा है, इसलिए इनके आपत्तिजनक बयानों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।

  • बयानबाजी के बावजूद सुधाकर, चंद्रशेखर पर कार्रवाई नहीं
  • नीतीश अब केयर टेकर सीएम, फैसले लेने की ताकत नहीं रही

श्री मोदी ने कहा कि तीन महीने से सुधाकर सिंह की बयानबाजी जारी है, लेकिन उन्हें सिर्फ नोटिस दिया गया। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए तेजस्वी यादव अधिकृत हैं। इसमें लालू प्रसाद की जरूरत नहीं। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव को उत्तराधिकारी घोषित करने के बाद नीतीश कुमार सिर्फ केयर टेकर मुख्यमंत्री रह गए हैं। वे राजद की कृपा पर इतने निर्भर हैं कि कोई फैसला नहीं कर सकते।

SushilModi

श्री मोदी ने कहा कि कैबिनेट विस्तार मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है, लेकिन नीतीश कुमार अब इसे भी तेजस्वी यादव के लिए छोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि श्रीरामचरित मानस की निंदा करने वाले शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने न अपना दुराग्रही बयान वापस लिया, न मुख्यमंत्री उनके खिलाफ कोई कार्रवाई कर पाये।

श्री मोदी ने कहा कि सुधाकर सिंह ने नीतीश कुमार की निंदा में जिन शब्दों का प्रयोग किया, वैसे शब्द विपक्ष भी इस्तेमाल नहीं करता।

पटना हाइकोर्ट ने बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम के कर्मचारियों को पांचवां और छठे वेतन आयोग की अनुशंसा के अनुसार वेतनमान देने का निर्देश दिया है

पटना हाइकोर्ट ने बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम के कर्मचारियों को पांचवां और छठे वेतन आयोग की अनुशंसा के अनुसार वेतनमान देने का निर्देश दिया है। जस्टिस पी वी बजंत्री की खंडपीठ ने बलिराम सिंह की अपील पर सुनवाई कर ये आदेश दिया।

कोर्ट ने पांचवां और छठे वेतन आयोग की अनुशंसा के आलोक में 1जनवरी,1996 से पांचवां वेतन आयोग और छठा वेतन आयोग का लाभ 1जनवरी,2006 से अब तक का बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम के कर्माचारियों को लाभ देने का निर्देश दिया।अपीलकर्ता ने 21अगस्त,2017 को पटना हाइकोर्ट द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध अपील दायर की थी।

कोर्ट को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि 22 दिसंबर,1961 को बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम ने संकल्प लिया था कि इनके कर्माचारियों को राज्य सरकार के कर्मचारियों के समान वेतन व अन्य सुविधाएँ उपलब्ध कराया जाएगा।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

कोर्ट ने ये भी पाया कि बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम ने इस सम्बन्ध में कोई नियम नहीं बनाया है।इसीलिए कोर्ट ने आदेश दिया कि इस निगम के कर्मचारियों को दोनों वेतन आयोग के अनुशंसा का लाभ चार माह के भीतर देना होगा।

अगर इन्हें अगर चार माह के भीतर इन्हें धनराशि नहीं दी गई,तो निगम को इन्हें 8 फी सदी ब्याज के साथ ये धनराशि देनी होगी।इसके साथ ही कोर्ट ने मामलें को निष्पादित कर दिया।

अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार व रितिका रानी और बिहार राज्य वित्त निगम की ओर से डा. आनंद ने कोर्ट के समक्ष पक्षों को रखा।

JDU अब इमरजेंसी और प्रेस सेंसरशिप थोपने वाली कांग्रेस के साथ: सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जिस कांग्रेस ने देश पर आपातकाल थोपा, सेंसरशिप लागू किया और सैंकड़ों पत्रकारों को जेल में डाल दिया, उसकी गोद में बैठकर जदयू BBC के बहाने प्रेस की आजादी पर छाती पीट रहा है।

  • BBC की निष्पक्षता 40 साल पहले जैसी नहीं
  • आयकर सर्वे से प्रधानमंत्री पर बनी डॉक्युमेंटरी का कोई संबंध नहीं
  • BBC की कंपनी चीनी एजेंसियों के लिए बनाती प्रोपगंडा कंटेंट

श्री मोदी ने कहा कि आज बीबीसी की निष्पक्षता 40 साल पहले जैसी नहीं रही, जिसकी प्रशंसा जेपी आंदोलन के दौर में अनेक राजनेता कर चुके हैं।

उन्होंने कहा कि यद्यपि इस सदी की शुरुआत से ही बीबीसी भारत-विरोधी रवैया अपना रहा है, फिर भी प्रधानमंत्री मोदी पर उसकी विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री और उसके कार्यालयों पर आयकर टीम के सर्वे के बीच कोई संबंध नहीं है।

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को गुजरात दंगों से जुडे सभी मामलों में क्लीनचिट मिलने के बाद भी उनकी छवि खराब करने के लिए फिल्म बनाना कोई निष्पक्षता नहीं।

श्री मोदी ने कहा कि बीबीसी ने जब आयकर के दर्जनों नोटिस का जवाब नहीं दिया, तब अफसरों की टीम सर्वे करने गई। इसे छापा (रेड) या सर्च नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने कहा कि आज बीबीसी अपनी स्टोरी वर्क जैसी एजेंसी के जरिये प्रचार सामग्री तैयार कर चीन सहित कई देशों में लाभ कमा रही है। स्वयं बीबीसी के पत्रकार इसके विरुद्ध आवाज उठा चुके हैं।

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श्री मोदी ने कहा कि आज BBC भारत-विरोधी चीन का प्रोपेगंडा टूल बन गया है, इसलिए पूरा टुकड़े-टुकड़े गैंग कोर्ट से कैम्पस तक बीबीसी-प्रेमी बन गया है।


बिहार में जुनियर इंजीनियर के 6379 पदों पर बहाली के लिए राज्य सरकार द्वारा नए सिरे से विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा

पटना । बिहार सरकार के विभिन्न विभागों के अंतर्गत जुनियर इंजीनियर के 6379 पदों पर बहाली के लिए राज्य सरकार द्वारा नए सिरे से विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा। पटना हाईकोर्ट में अजय कुमार भारती की याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जानकारी दी गई।

इस मामलें की सुनवाई जस्टिस पी वी बजंत्री की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने आदेश दिया कि जुनियर अभियंताओं की बहाली नियमों में परिवर्तन और नए सिरे से बहाली का विज्ञापन चार माह में निकालने का निर्देश दिया।

साथ ही इस प्रक्रिया में जिन उम्मीद्वारों की उम्र सीमा खत्म हो जायेगी,उन्हें उम्र सीमा में ढील दी जाएगी।जूनियर इंजीनियर की बहाली के लिए जो 2015और 2017 अर्हताएं रखी गई थी,उन्हें इस याचिका में चुनौती दिया था।

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25 जनवरी,2023 को राज्य सरकार ने एक बैठक की।इसमें ये निर्णय हुआ कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में जुनियर इंजीनियर की बहाली सम्बन्धी विज्ञापन को वापस लिया जाएगा।साथ ही इनकी बहाली के लिए बिहार तकनीकी सेवा आयोग को भेजे गए प्रस्ताव वापस लिए जाएँगे।

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को ये जानकारी दी गई कि इन पदों पर नए नियम बनाने के बाद से फिर से बहाली हेतु विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार व रितिका रानी ने पक्ष प्रस्तुत किया, जबकि राज्य सरकार का पक्ष अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार ने प्रस्तुत किया।

कोर्ट ने उपरोक्त आदेश के साथ याचिका को निष्पादित कर दिया।

पटना हाईकोर्ट ने सहायक प्राध्यापक के परीक्षा परिणाम पर रोक लगा दिया

पटना हाईकोर्ट ने सहायक प्राध्यापक के परीक्षा परिणाम पर रोक लगा दिया है। जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने वसुन्धरा राज व संगीता कुमारी की ओर से अधिवक्ता चंद्रशेखर सिंह के जरिये दायर रिट याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए मनोविज्ञान विषय के सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति के लिए घोषित होने वाले परिणाम पर रोक लगा दिया है। उल्लेखनीय है कि विभिन्न विषयों के सहायक प्राध्यापक के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए बिहार राज्य विश्विद्यालय सेवा आयोग द्वारा रिक्तियां प्रकाशित की गई थी।

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इसके बाद, मनोविज्ञान विषय का इंटरव्यू भी हो चुका है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि आरक्षण के मामले में कथित रूप से गड़बड़ी की गई है।

कोर्ट को बताया गया कि मनमाने ढंग से पिछड़े वर्ग के याचिकाकर्ता को अनारक्षित कोटि में डाल दिया गया। इस मामले में आगे भी सुनवाई की जाएगी।

PatnaHighCourt News: बिहार के पुलिस स्टेशनो की दयनीय अवस्था और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई हुई

पटना हाइकोर्ट में राज्य की पुलिस स्टेशनो की दयनीय अवस्था और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ के समक्ष राज्य के एडीजी कमल किशोर सिंह ने पुलिस स्टेशन की स्थितियों के सम्बन्ध रिपोर्ट प्रस्तुत किया।

PatnaHighCourt ने उन्हें नए बने पुलिस स्टेशन को आधुनिक बनाने के सन्दर्भ में पूरा रिपोर्ट कोर्ट में अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने उन्हें ये देखने को कहा कि थानो को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या कार्रवाई आवश्यक है।

साथ ही PatnaHighCourt ने राज्य के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव और डीजीपी को निर्देश दिया कि थाने में बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए क्या क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।पुलिस थाना सही और ढंग से कार्य करें,इसके उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने ए डी जी कमल किशोर सिंह को कोर्ट और राज्य कार्डिनेटर के रूप में कार्य का जिम्मा सौंपा था।

पूर्व की सुनवाई में PatnaHighCourt ने राज्य सरकार को कॉर्डिनेटर के रूप में कार्य करने के वरीय पुलिस अधिकारी का नाम का सुझाव देने को कहा था।राज्य में 1263 थाना है,जिनमें 471 पुलिस स्टेशन के अपने भवन नहीं है।

इन्हें किराये के भवन में काम करना पड़ता है।कोर्ट ने बिहार स्टेट पुलिस बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कार्पोरेशन को पार्टी बनाने का निर्देश दिया था।

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जब तक दूसरे भवन में पुलिस स्टेशन के लिए सरकारी भवन नहीं बन जाते,तब तक पुलिस अधिकारी एडीजी कमल किशोर सिंह कॉर्डिनेटर के रूप में कॉर्डिनेट करेंगे।

इससे पहले भी पुलिस स्टेशन की दयनीय स्थिति और बुनियादी सुविधाओं का मामला कोर्ट में उठाया गया था।राज्य सरकार ने इन्हें सुधार लाने का वादा किया था,लेकिन ठोस परिणाम नहीं दिखा।

इसी तरह का एक मामलें पर जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने सुनवाई करते हुए पुलिस स्टेशनों की दयनीय अवस्था को गम्भीरता से लिया।उन्होंने इस मामलें को जनहित याचिका मानते हुए आगे की सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच में भेज दिया।

PatnaHighCourt में सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी अधिवक्ता सोनी श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि जो थाने सरकारी भवन में चल रहे हैं, उनकी भी हालत अच्छी नहीं है।उनमें भी बुनियादी सुविधाओं की काफी कमी है।उन्होंने बताया कि बढ़ते अपराध को देखते हुए ये आवश्यक है कि थाना और पुलिसकर्मियों को आधुनिक बनाया जाए।

उन्होंने बताया कि पुलिस स्टेशन में बिजली,पेय जल,शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं है। लगभग आठ सौ थाने ऐसे है, सरकारी भवन में चल रहे है,लेकिन उनकी भी दयनीय अवस्था है।

उन्होंने PatnaHighCourt को बताया कि जो थाना सरकारी भवन में है,उनमें भी निर्माण और मरम्मती की आवश्यकता है।उन्होंने बताया कि कई पुलिस स्टेशन के भवन की स्थिति खराब है।

पुलिसकर्मियों को काफी कठिन परिस्थितियों में और कई सुविधाओं के अभाव में कार्य करना पड़ता है।इस मामलें पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

सीतामढी ज़िला के आर्थिक रूप से कमज़ोर और शारीरिक अपंग लड़कियों की जांच और ईलाज के सम्बन्ध में सुनवाई करते हुए पटना हाइकोर्ट ने AIIMS पटना के अधिवक्ता को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया

पटना हाइकोर्ट ने सीतामढी ज़िला के आर्थिक रूप से कमज़ोर और शारीरिक अपंग लड़कियों की जांच और ईलाज के सम्बन्ध में सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए एम्स,पटना के अधिवक्ता को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

एम्स,पटना के अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय ने बताया कि तीन लड़कियों में से दो लड़कियों को हड्डी सम्बन्धी रोग है।उनका ईलाज पटना के एम्स हॉस्पिटल में शुरू हो गया है। इन दोनों लड़कियों के ईलाज पर तीन लाख साठ हज़ार रुपया खर्च हो रहा है।ये धनराशि बिहार सरकार ने दे दिया।

उन्होंने बताया कि एक नेत्र सम्बन्धी बीमारी से ग्रस्त है।इसके ईलाज के लिए इसे दिल्ली,एम्स भेजा जाना है।इसके प्रारंभिक ईलाज के मद में राज्य सरकार ने बीस हज़ार रुपये एम्स,पटना के खाते में स्थानांतरित कर दिया।ये धनराशि एम्स,दिल्ली के खाते में एम्स,पटना को स्थानांतरित करना है।इसी सम्बन्ध में कोर्ट ने एम्स,पटना को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

गौरतलब है कि सीतामढी के ज़िला व सत्र न्यायाधीश ने इनके सम्बन्ध में पटना हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखा था।इसमें ये बताया गया कि दो लड़कियों को हड्डी रोग की समस्या है,जबकि एक लड़की नेत्र की समस्या से ग्रस्त है।

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इनके आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण इनके माता पिता इनका ईलाज नही करवा पा रहे थे।इनके ईलाज में अस्पताल और ईलाज का खर्च काफी होता है, जो कि इनके वश में नहीं था।

कोर्ट ने इनके ईलाज के क्रम में जांच के लिए पटना के एम्स अस्पताल भेजा था।एम्स के अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय ने कोर्ट को बताया था कि एम्स अस्पताल में जांच का कार्य हो गया।इस मामलें की सुनवाई के क्रम में कोर्ट ने एम्स अस्पताल, पटना व राज्य सरकार समाज कल्याण विभाग को पार्टी बनाने का आदेश दिया गया था।

इस मामलें पर 20 फरवरी,2023 को फिर सुनवाई होगी।

बिहार सरकार का बड़ा फैसला: सभी फर्जी शिक्षकों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए

पटना । बिहार सरकार ने फर्जी शिक्षक मामले में बड़ी कार्रवाई की है, सभी नकली टीचर को गिरफ्तार करने का आदेश जारी किया है । हर जिले के जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र लिखकर आदेश दिया गया है कि जिन-जिन नियोजित शिक्षकों पर FIR दर्ज है उन पर त्वरित कार्रवाई की जाए।

बिहार पुलिस के DG ने बताया कि इस महीने के अंत तक बैठक का आयोजन होने वाला है जिसमें इस विषय पर चर्चा विमर्श किया जाएगा । कुल मिलाकर इतना कहा जा सकता है कि ऐसा कोई जिला नहीं है जहां फर्जी शिक्षकों की पहचान ना की गई हो।

निगरानी ब्यूरो इस मामले की जांच 2015-16 से ही कर रहा है। इससे पहले भी कुछ फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई हुई थी, लेकिन इसकी जानकारी जिलास्तर पर ही है। वहां से मुख्यालय को इसकी जानकारी नहीं दी गई है।

निगरानी ब्यूरो की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक:

  • सबसे ज्यादा गया जिला में 71 एफआईआर दर्ज की गयी है, जिसमें 218 आरोपी हैं
  • सारण में 42 एफआईआर और 170 आरोपी
  • मुंगेर में 44 एफआईआर में 142 आरोपी
  • जहानाबाद में 46 एफआईआर और 124 आरोपी
  • बेगूसराय में 46 में 136 आरोपी
  • भागलपुर में 17 में 113 आरोपी
  • सुपौल में 12 में 104 आरोपी
  • बांका में 39 में 101 आरोपी
  • अरवल में 43 में 87 आरोपी
  • नालंदा में 79 में 81
  • समस्तीपुर में 33 में 89 आरोपी
  • जमुई में 54 में 81 आरोपी
  • पटना में 36 में 67 आरोपी
  • पूर्णिया में 69 में 70
  • रोहतास में 36 में 74 आरोपी
  • खगड़िया में 31 में 72 आरोपी और
  • गोपालगंज में 59 एफआईआर में 76 आरोपी बनाए गये हैं।

पटना हाइकोर्ट ने पटना-गया-डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के सन्दर्भ में केंद्र, राज्य सरकार, NHAI और निर्माण कार्य करने वाली कम्पनियों को कार्य के सम्बन्ध में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया

पटना हाइकोर्ट में पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के मामलें पर सुनवाई की गई। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ के समक्ष वकीलों की टीम ने निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत किया।

कोर्ट ने वकीलों की टीम के रिपोर्ट के सन्दर्भ में केंद्र,राज्य सरकार,एनएचएआई और निर्माण कार्य करने वाली कम्पनियों को कार्य के सम्बन्ध में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने वकीलों की टीम को इस राजमार्ग के निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। वकीलों की टीम राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य के निरीक्षण पिछले सप्ताह के अंत में किया। कोर्ट ने निर्माण कार्य में लगायी गई मशीन और मानव संसाधन के सम्बन्ध में भी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने फेज 2 के निर्माण में उत्पन्न कर रही बाधाओं और अतिक्रमण को राज्य सरकार शीघ्र हटाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।कोर्ट ने इसके लिए आवश्यक पुलिस बल और व्यवस्था मुहैया कराने का निर्देश सबंधित ज़िला प्रशासन को दिया है।

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इससे पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने वाली कंपनी ने इसका निर्माण कार्य 30 जून,2023 तक पूरा करने का अश्वासन कोर्ट को दिया था।साथ ही कोर्ट ने इस फेज के निर्माण में बाधा उत्पन्न होने वाले सभी अवरोधों को तत्काल हटाने का निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को दिया था।

कोर्ट ने फेज दो के 39 किलोमीटर से 83 किलोमीटर के बीच सभी प्रकार के अतिक्रमण को तेजी से हटाने का आदेश दिया।वही फेज तीन के 83 किलोमीटर से 127 किलोमीटर के बीच के अतिक्रमण को भी हटाने का आदेश दिया।

पिछली सुनवाई कोर्ट ने पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के फेज दो व तीन के निर्माण में लगी निर्माण कंपनी ने कोर्ट को बताया था कि पटना गया डोभी एनएच के निर्माण में कई जगह बाधा उत्पन्न किया जा रहा है।

इस मामलें पर 20 फरवरी,2023 को फिर सुनवाई की जाएगी।

बिहार के अनुदानित 2459 मदरसों की जांच किये जाने से सबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाइकोर्ट ने CID को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 4 माह की मोहलत दी

पटना हाइकोर्ट ने राज्य के अनुदानित 2459 मदरसों की जांच किये जाने से सबंधित याचिका पर सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने सीतामढी जिले के मदरसों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए सीआईडी को चार माह की मोहलत दी।

इससे पूर्व कोर्ट ने राज्य के अनुदानित 2459 मदरसों की जांच का आदेश राज्य के शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को दिया था।कोर्ट ने अल्लाउद्दीन बिस्मिल की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इनकी जांच चार महीने में पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव को शीघ्र राज्य के सभी डी एम के साथ बैठक कर उनके संसाधनों के बारे में जांच करने का आदेश दिया।वही जांच पूरी होने तक 609 मदरसों को अनुदान राशि नहीं देने का आदेश दिया था।

कोर्ट ने जाली कागजात पर मदरसों को दी गई मान्यता पर दर्ज प्राथमिकी पर राज्य के डीजीपी को अनुसंधान के बारे में पूरी जानकारी कोर्ट को देने का निर्देश दिया था।कोर्ट को इस सम्बन्ध में बताया गया कि राज्य की ओर से सीतामढी जिले के 88 मदरसों की जांच सीआईडी कर रही है।

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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राशिद इजहार ने कोर्ट को बताया कि माध्यमिक शिक्षा के विशेष निदेशक मो तस्नीमुर रहमान ने सीतामढ़ी जिला के सरकारी अनुदान लेने वाले मदरसों की जांच रिपोर्ट दी थी।इसमें कहा गया था कि सीतामढ़ी जिला में फर्जी कागजात पर करीब 88 मदरसों ने सरकारी अनुदान ली है।

कोर्ट ने इन सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई करने की बात कही थी।उनका कहना था कि शिक्षा विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने हाई कोर्ट में जबाबी हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया कि राज्य के अन्य जिलों के 609 मदरसों जो सरकारी अनुदान प्राप्त किये हैं,उन सभी के जांच के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था।

कोर्ट मामले पर चार माह के बाद फिर सुनवाई करेगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के निःशक्त बच्चों के लिए बने विशेष विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के मामलें पर सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के निःशक्त बच्चों के लिए बने विशेष विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के मामलें पर सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने मामलें पर सुनवाई करते हुए पटना के कदमकुआं स्थित नेत्रहीन स्कूल के शिक्षकों का ब्यौरा तलब किया।

कोर्ट को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि इस स्कूल में एडहॉक आधार पर बारह शिक्षकों की बहाली की गई। कोर्ट ने जानना चाहा कि इन शिक्षकों की बहाली की क्या प्रक्रिया थी।

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि इन दिव्यांग स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति हेतु अनुशंसा करने हेतु बिहार कर्मचारी चयन आयोग को प्रस्ताव भेजा गया था।लेकिन आयोग के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 2018 के बाद कोई प्रस्ताव सरकार की ओर से नहीं आया है।

कोर्ट ने इस बात को बहुत को बहुत गम्भीरता से लिया कि पटना के कदमकुआं स्थित दिव्यांग( नेत्रहीन) स्कूल में मात्र एक शिक्षक है।वह भी संगीत शिक्षक हैं।जबकि वहां स्कूल में शिक्षकों के स्वीकृत पद ग्यारह है।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि इस मामलें दिन प्रतिदिन सुनवाई होगी।इससे पहले इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्टाफ सेलेक्शन कमीशन को पार्टी बनाने का निर्देश दिया था ।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वृषकेतु शरण पांडेय ने कोर्ट को बताया कि 2014 में विज्ञापित पदों पर अब तक नहीं भरा जा सका है। यह अपने आप में राज्य का उदासीन रवैया दर्शाता है।

गौरतलब है कि इस मामले में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने हलफनामा दायर कर बताया था कि निःशक्त बच्चों से जुड़ी सभी परियोजनाएं तीन महीनों के भीतर कार्यरत हो जाएंगे ।

इस पर हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को हलफनामा दायर कर अपनी कार्य परियोजना बताने के लिए कहा था। इस मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी,2023 को होगी।

पटना के विक्रम ब्लॉक में प्रस्तावित ट्रामा सेंटर के निर्माण मामलें पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की

पटना जिले की विक्रम ब्लॉक में प्रस्तावित ट्रामा सेंटर के निर्माण के मामलें पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने रजनीश कुमार तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट में राज्य स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव और पटना के डी एम उपस्थित हुए। उन्होंने को कोर्ट को बताया कि विक्रम स्थित ट्रामा सेंटर बन गया है। इसमें कुछ काम और चिकित्सकों को पदस्थापित करने का कार्य शीघ्र पूरा हो जाएगा।

कल कोर्ट ने इस मामलें पर सख्त रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव और पटना के डी एम को 14 फरवरी,2023 को कोर्ट में उपस्थित हो कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था।

पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हैरानी जताया कि 2016 से लंबित या मामला अभी तक अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सका। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया की सरकार द्वारा प्रस्तावित सुपर स्पेशलिटी ट्रामा सेंटर सह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना के लिए अक्टूबर 2016 से ही यह प्रस्तावित

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पिछली सुनवाई 9 जनवरी,2023 को हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि जमीन चिन्हित होते के 3 दिनों के अंदर ट्रामा सेंटर को स्थापित करने की कार्रवाई शुरू कर देनी होगी।

कोर्ट ने आज स्वास्थ्य विभाग अपर मुख्य सचिव के स्थिति बताने के कोर्ट ने उन्हें जिम्मेदारी दी कि ये ट्रामा सेंटर पूर्ण रूप से कार्यशील हो जाए।इसके साथ ही कोर्ट ने मामलें को निष्पादित कर दिया।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के निःशक्त बच्चों के लिए बने विशेष विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के मामले पर सख्त नाराजगी जाहिर की

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के निःशक्त बच्चों के लिए बने विशेष विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के मामले पर सुनवाई करते हुए स्थिति पर सख्त नाराजगी जाहिर की। एक्टिंग चीफ जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने कहा कि इनके शिक्षा की उपेक्षा करना संवेदनहीनता प्रदर्शित करता है।

कोर्ट ने इस बात को बहुत को बहुत गम्भीरता से लिया कि पटना के कदमकुआं स्थित दिव्यांग( नेत्रहीन) स्कूल में मात्र एक शिक्षक है।वह भी संगीत शिक्षक हैं।जबकि वहां स्कूल में शिक्षकों के स्वीकृत पद ग्यारह है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामलें दिन प्रतिदिन सुनवाई होगी।इससे पहले इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्टाफ सेलेक्शन कमीशन को पार्टी बनाने का निर्देश दिया था ।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वृषकेतु शरण पांडेय ने कोर्ट को बताया कि 2014 में विज्ञापित पदों पर अब तक नहीं भरा जा सका है। यह अपने आप में राज्य का उदासीन रवैया दर्शाता है।

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गौरतलब है कि इस मामले में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने हलफनामा दायर कर बताया था कि निःशक्त बच्चों से जुड़ी सभी परियोजनाएं तीन महीनों के भीतर कार्यरत हो जाएंगे ।

इस पर हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को हलफनामा दायर कर अपनी कार्य परियोजना बताने के लिए कहा था। इस मामले की अगली सुनवाई 15फरवरी,2023 को होगी।

JDU नेता गुलाम रसूल बलियावी के पहले ‘हर शहर को कर्बला में बदल देंगे’ और अब ‘सेना में मुस्लिमों के 30% आरक्षण’ जैसे बयानों के लिए उन पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए: सुशील मोदी

पटना। राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सम्प्रति राज्य सभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी ने एक बयान में जदयू नेता गुलाम रसूल बलियावी के पहले ‘हर शहर को कर्बला में बदल देंगे’ और अब सेना में मुस्लिमों के 30% आरक्षण जैसे बयानों के लिए उन पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।

• बलियावी पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज हो
• बलियावी को पार्टी से निष्कासित करें
• जदयू को सेना के शौर्यपर भरोसा नहीं

उन्होंने आरोप लगाया कि श्री नीतीश कुमार समाज में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण तथा अल्पसंख्यकों का वोट लेने के लिए बलियावी से ऐसे बयान दिलवा रहे हैं। जदयू में हिम्मत है तो बलियावी जैसे नेताओं को पार्टी के बाहर का रास्ता दिखला देना चाहिए।

sushil-modi

श्री मोदी ने कहा कि इन्हें सेना के शौर्य पर भरोसा नहीं है। इन्हें पुलवामा की चौथी वर्षगांठ पर सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत की आवश्यकता है।

भारतीय सेना में धर्म के आधार पर नियुक्ति नहीं होती है। सेना ने हमेशा पाक सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब दिया है। परंतु इन्हें सेना पर भरोसा नहीं है। ये सेना का भी सांप्रदायिककरण चाहते हैं।

श्री मोदी ने अविलंब बलियावी पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर पार्टी से निकालने की मांग की है।

PatnaHighCourtNews: बिहार सरकार के वकीलों की फीस में पिछले 14 सालों से कोई बढ़ोतरी नहीं होने के मामलें पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए टली

पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार के वकीलों की फीस में पिछले 14 सालों से कोई बढ़ोतरी नहीं होने के मामलें पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए टली। एक्टिंग चीफ जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने अधिवक्ता सत्यम शिवम सुंदरम की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि सरकारी वकीलों की फीस बढोतरी के सम्बन्ध में कार्रवाई चल रही है।इसी सम्बन्ध में 17 फरवरी,2023 इस मामलें पर विचार करने के लिए बैठक आयोजित की गई है।

पूर्व की सुनवाई में PatnaHighCourt ने सुनवाई करते हुए वरीय अधिवक्ता पी के शाही समेत पाँच वरीय अधिवक्ताओं को राज्य के मुख्य कार्यपालक ( मुख्य मंत्री) से मिल कर इस सम्बन्ध में विचार करने का निर्देश दिया था।

उन्होंने कोर्ट को बताया था कि 29 दिसम्बर,2022 को अधिवक्ताओं की टीम ने मुख्यमंत्री से भेंट कर सरकारी वकीलों के फीस बढोतरी के सम्बन्ध में चर्चा की।उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया था।

पहले की सुनवाइयों में PatnaHighCourt को बताया गया था कि केंद्र सरकार सहित अन्य राज्य राज्य सरकार के वकीलों की तुलना में यहाँ के सरकारी वकीलों को काफी कम फीस का भुगतान किया जाता है।

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कोर्ट को ये भी जानकारी दी गई थी कि PatnaHighCourt में ही केंद्र सरकार के वकीलों की जहाँ रोजाना फीस न्यूनतम 9 हज़ार रुपये है, वहाँ बिहार सरकार के वकीलों को इसी हाई कोर्ट में रोजाना अधिकतम फीस रू 2750 से 3750 तक ही है।

कोर्ट को जानकारी दी गई थी कि पंजाब व हरियाणा, दिल्ली सहित पड़ोसी राज्य झारखंड और बंगाल में भी वहाँ के सरकारी वकीलों का फीस बिहार के सरकारी वकीलों से ज्यादा है।

सबसे दयनीय स्थिति राज्य के सहायक सरकारी वकीलों की है, जिन्हे रोजाना मात्र 1250 रुपये फीसही काम करना पड़ता है। बिहार में राज्य सरकारों के वकीलों के फीस में वृद्धि 14 साल पहले हुई थी।

इस मामले पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी।

पटना में प्रस्तावित ट्रामा सेंटर को सरकारी मंजूरी मिलने के 5 वर्ष बाद भी शुरू नहीं किए जाने के मामले पर पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव और पटना के डीएम को 14 फरवरी,2023 को कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया

पटना जिले की विक्रम ब्लॉक में प्रस्तावित ट्रामा सेंटर को सरकारी मंजूरी मिलने के 5 वर्ष बाद भी शुरू नहीं किए जाने के मामले पर पटना हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की।

कोर्ट ने इस मामलें पर सख्त रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव और पटना के डी एम को 14 फरवरी,2023 को कोर्ट में उपस्थित हो कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया।

ए सी जे चक्रधारी शरण सिंह और जस्टिस मधुरेश प्रसाद की खंडपीठ ने रजनीश कुमार तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हैरानी जताया कि 2016 से लंबित या मामला अभी तक अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सका। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया की सरकार द्वारा प्रस्तावित सुपर स्पेशलिटी ट्रामा सेंटर सह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना के लिए अक्टूबर 2016 से ही यह प्रस्तावित है।

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केंद्र का निर्माण लंबित है। पिछली सुनवाई 9 जनवरी को हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि जमीन चिन्हित होते के 3 दिनों के अंदर ट्रामा सेंटर को स्थापित करने की कार्रवाई शुरू कर देनी होगी।

आज सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता एसडी यादव ने कोर्ट को बताया कि जमीन चिन्हित कर लिया गया है।कोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट कहा था कि 3 दिन के अंदर सेंटर शुरू किया जाए, इस पर सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 14फरवरी,2023 को की जाएगी।

आनंद मोहन की रिहाई के लिए पहल करे नीतीश सरकार: सुशील मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जब राजीव गाँधी की हत्या में दोषी पाए गए लोगों को रिहा किया जा सकता है, तब पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई भी संभव है और इसके लिए राज्य सरकार को कानून का पालन करते हुए गंभीरता से पहल करनी चाहिए।

  • राजीव हत्याकांड के दोषी बरी हो सकते हैं, तो आनंद मोहन क्यों नहीं?
  • कृष्णैया हत्याकांड में सीधे उनकी कोई भूमिका नहीं थी

श्री मोदी ने कहा कि यद्यपि कृष्णैया हत्याकांड में भीड़ को उकसाने या हत्या के अपराध में आनंद मोहन सीधे तौर पर दोषी नहीं थे, फिर भी उन्हें उम्र कैद की सजा हुई। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा को बरकरार रखा।

उन्होंने कहा कि आनंद मोहन जब 14 साल से अधिक की सजा काट चुके हैं और बंदी के रूप में उनका आचरण भी अच्छा रहा है, तब उन्हें रियायत देकर रिहा करने के कानूनी विकल्पों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाना चाहिए।

श्री मोदी ने कहा कि आनंद मोहन एनडीए के पुराने साथी रहे। उन्होंने नीतीश कुमार के साथ मिल कर चुनाव लड़ा था।

उन्होंने कहा कि एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना आनंद मोहन जी के जीवन और परिवार पर बहुत भारी पड़ी। उन्हें मुक्ति मिलनी चाहिए ताकि वे सार्वजनिक जीवन में योगदान कर सकें।

बिहार में एयरपोर्ट के स्थापित करने, विकास, विस्तार और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सुनवाई पटना हाइकोर्ट ने की

पटना हाइकोर्ट ने राज्य में एयरपोर्ट के स्थापित करने,विकास,विस्तार और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने इन मामलों पर सुनवाई की।

कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से ये बताने को कहा कि राज्य में नए एयरपोर्ट बनाए जाने के मामलें क्या कार्रवाई की गई। दोनों सरकारों को बताने को कहा गया कि वे बताए कि इनके सम्बन्ध में क्या प्रस्ताव बना रहे है।

कोर्ट ने उन्हें ये भी बताने को कहा कि क्या वे नए एयरपोर्ट के निर्माण के लिए उन्हें चिन्हित करने की कार्रवाई की है।कोर्ट ने ये जानना चाहा कि इन नए एयरपोर्ट के निर्माण के लिए उनकी क्या योजना है।

साथ ही कार्यरत एयरपोर्ट पटना,गया,बिहटा और दरभंगा के एयरपोर्ट के विकास,विस्तार और सुरक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की क्या योजना है।बहुत सारी सुविधाओं की कमी है।इन्हें बेहतर बनाने के क्या कार्रवाई की जा रही है।

इससे पूर्व में हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए केंद्र और राज्य सरकार को पटना और बिहटा में एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर विचार करने को कहा था। तत्कालीन चीफ संजय करोल की खंडपीठ ने इस सम्बन्ध में अभिजीत कुमार पाण्डेय की जनहित याचिका पर फैसला सुनाया था।

Patnahighcourt

ये राज्य में पहला मामला है, जिसमें कोर्ट ने राज्य में एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर विचार करने का निर्देश दिया था।

इस मामलें पर पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा था कि कई अन्य राज्यों में कई ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है, लेकिन बिहार में एक भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नहीं है।जबकि ये बहुत ही आवश्यक और उपयोगी है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस दलील को अस्वीकार दिया था कि राज्य में एयरपोर्ट के निर्माण का मामला जनहित के अंतर्गत नहीं है।कोर्ट ने कहा कि छोटे एयरपोर्ट पर बड़े हवाई जहाज कैसे आ सकते है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राज्य की जनता को विकसित और सुरक्षित हवाई यात्रा की सुविधा दिया जाना मौलिक अधिकारों के अंतर्गत आता है।केंद्र और राज्य सरकार इन्हें विकसित और सुरक्षित हवाई यात्रा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी।

RJD बताये झारखंड में पिछड़ों को आरक्षण दिये बिना क्यों हुए पंचायत चुनाव: सुशील कुमार मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि झारखंड में राजद के समर्थन से चलने वाली झामुमो सरकार जब पंचायत-निकाय चुनावों में पिछड़ों को आरक्षण देने और जातीय जनगणना कराने से कतरा रही है, तब तेजस्वी प्रसाद यादव बताएँ कि उनकी पार्टी सरकार के साथ क्यों है?

  • राजद समर्थित सोरेन सरकार ने क्यों नहीं करायी जातीय जनगणना?
  • लालू प्रसाद झारखंड के विरोधी रहे, चारा घोटाला कर आदिवासियों को लूटा

श्री मोदी ने कहा कि झारखंड में पिछड़ी जातियों को बिना आरक्षण दिये पंचायत चुनाव कराये गए और इसी तरह नगर निकाय चुनाव कराने की तैयारी है।

श्री मोदी ने कहा कि जब देश के सभी राज्यों ने पिछड़ों को आरक्षण देकर निकाय चुनाव कराये, तब झारखंड के साथ अन्याय क्यों किया जा रहा है?

Sushil Modi

उन्होंने कहा कि बिहार में भाजपा के समर्थन से जातीय जनगणना कराने का निर्णय हुआ और यह काम शुरू भी हुआ, लेकिन झारखंड में जातीय जनगणना क्यों नहीं करायी जा रही है?

श्री मोदी ने कहा कि जब झामुमो जातीय जनगणना के पक्ष में है और उसके प्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से भेंट करने वाले सर्वदलीय शिष्टमंडल में शामिल थे, तब सोरेन सरकार जातीय जनगणना से क्यों भाग रही है?

उन्होंने कहा कि राजद अलग झारखंड राज्य के गठन का प्रबल विरोधी था और लालू प्रसाद ने धमकी दी थी कि बिहार का बंटवारा उनकी लाश पर होगा। आज वे किस मुँह से झारखंड के हितैषी बन रहे हैं?

श्री मोदी ने कहा कि लालू प्रसाद ने बिहार में झामुमो की मदद से अपनी सरकार बचाने की मजबूरी में अलग झारखंड की मांग का समर्थन किया था।

उन्होंने कहा कि लालू राज में गरीब आदिवासियों को लूटने के लिए चारा घोटाला हुआ था। इसके सभी पांच मामलों में लालू प्रसाद को सजा हुई।

बिहार बोर्ड (BSEB) की 10 वीं की परीक्षा 14 फरवरी से शुरू, परीक्षा से पहले जानें नए नियम

पटना । बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना की मैट्रिक की परीक्षा 14 फरवरी से शुरू होने वाली है। मैट्रिक (10 वीं) की परीक्षा 14 फरवरी से शुरू होकार 22 फरवरी तक चलेगी ।

नए नियमों के अनुसार अब मैट्रिक की परीक्षा देने जा रहे परीक्षार्थियों को केंद्र पर आधे घंटे पहले पहुंचना होगा। अगर छात्र दिए गए समय पर परीक्षा केंद्र पर नहीं पहुंचते है तो उन्हें एंट्री नहीं मिलेगी ।

नए नियमों के मुताबिक मैट्रिक का एग्जाम सुबह की शिफ्ट 9.30 बजे से शुरू होगी। पहले शिफ्ट के परीक्षा के लिये केंद्र पर एंट्री का समय 9:00 बजे किया गया है। निर्धारित समय के बाद परीक्षा केंद्र पर कोई एंट्री नहीं होगी।

BSEB-10th-Exam

वही दोपहर की शिफ्ट यानि दूसरी शिफ्ट की परीक्षा 1.45 बजे से शुरू होगी। दुसरे शिफ्ट के परीक्षा के एंट्री का समय 1.15 बजे है। इस समय के बाद आने वाले परीक्षार्थियों को एंट्री नहीं मिलेगी।

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB), पटना ने इसकी जानकरी ट्विट करके दी है…