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मुजफ्फरपुर कैंसर अस्पताल का निर्माण 2023 में प्रारंभ होगा: सुशील मोदी

पटना । The BiharNews Post : December 15, 2022
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सम्प्रति राज्यसभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी के एक प्रश्न के उत्तर में राज्यसभा में राज्यमंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, डॉ जितेंद्र सिंह ने बताया कि मुजफ्फरपुर में टाटा कैंसर अस्पताल के सहयोग से बनने वाले कैंसर अस्पताल हेतु भारत सरकार द्वारा 198.15 करोड़ की योजना स्वीकृत की गई है।

अस्पताल निर्माण हेतु निविदा निकालकर सफल बोलीकर्ता का चयन कर लिया गया है। जनवरी, 2023 में कार्य प्रारंभ हो जाएगा। अभी तक निर्माण कार्य, उपकरण आदि पर 6.25 करोड़ रुपया व्यय हो चुके हैं।

• मुजफ्फरपुर कैंसर अस्पताल का निर्माण 2023 में प्रारंभ होगा
• 183 करोड़ स्वीकृत कैंसर अस्पताल हेतु

Sushil Modi in sansad

मंत्री ने बताया कि वर्तमान में सी.एस.आर एवं समाज-सेवियों के सहयोग से मॉड्यूलर अस्पताल चल रहा है जहां प्रतिदिन 200 मरीज आ रहे हैं।

मंत्री ने बताया कि पिछले 2 वर्षों से शल्य, चिकित्सा, निवारक, प्रशामक कैंसर और प्रयोगशाला सेवाएं दी जा रही है।

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मंत्री ने बताया कि प्रस्तावित अस्पताल में सर्जिकल, मेडिकल, रेडिएशन, प्रीवेंटिव एवं पेलिएटिव एवं अन्य सब प्रकार की कैंसर चिकित्सा की व्यवस्था रहेगी।

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पटना हाईकोर्ट ने बिहार राजकीकृत प्रारम्भिक स्कूल हेड मास्टर की ( नियुक्ति , स्थानांतरण अनुशासनात्मक कार्यवाही व अन्य सेवा शर्तें) नियमावली को निष्प्रभावी करार देते हुए उसे नियमावली प्रारूप माना

पटना हाईकोर्ट ने एक फैसले में राज्य के प्रारंभिक राजकीयकृत स्कूलों के हेड मास्टरों की नियुक्ति एवं अन्य सेवा शर्तों को निर्धारित करने वाली नई नियमावली को निष्प्रभावी करार देते हुए उसे नियमावली प्रारूप माना है।

जस्टिस पी वी वैजंत्री की खंडपीठ ने अब्दुल बाकी अंसारी की रिट याचिका को निष्पादित कर दिया।

साथ ही शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि 18 अगस्त, 2021 को जारी की गयी बिहार राजकीकृत प्रारम्भिक स्कूल हेड मास्टर उसकी ( नियुक्ति , स्थानांतरण अनुशासनात्मक कार्यवाही व अन्य सेवा शर्तें) नियमावली को प्रारूप के तौर परकमी उस प्रकाशित करें।

साथ ही उस पर अगले दो महीने में सार्वजनिक टिप्पणी और सलाह आमन्त्रित कर उस पर पूरे विचार विमर्श कर उस कानून या अंतिम नियमावली तैयार कर अधिसूचित करें।

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याचिकाकर्तागण उर्दू टीईटी परीक्षा में उत्तीर्ण हुए थे और 2021 में जारी की गई इस नियमावली में अनुभव की न्यूनतम 8 वर्ष की अवधि को मनमाना पूर्ण कहते हुए इस हेड मास्टर नियुक्ति नियमावली की संवैधानिकता को चुनौती दिया था।

कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव से पूछा था कि 18 अगस्त 2021 को जारी की गई उक्त नियमावली को कानून का दर्जा देने से पहले क्या इसके प्रारूप को प्रकाशित कर सार्वजनिक सलाह आमंत्रित किया गया था या नहीं?

राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा कि ऐसी कोई प्रक्रिया नही पूरी की गयी थी।

कोर्ट ने कहा कि ऐसी नियमावली एक बड़े और व्यापक पैमाने के शिक्षक और उनके वर्ग को प्रभावित करेगी। इस तरह के नियम को जारी करने से पहले या उसे कानूनी जामा पहनाने से पहले सरकार को खुले आम लोगों के बीच में उनसे सलाह मशविरा करना चाहिए था ।

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इसीलिए हाई कोर्ट ने 18 अगस्त, 2021 को जारी इस नियमावली को बेअसर करार देते हुए इसे ड्राफ्ट रूल का दर्जा दिया है। कानून बनने से पहले कानून का मसविदा जो तैयार होता है, वही दर्जा अब इस नियमावली को तत्काल 2 महीने तक रहेगा।

इस दौरान राज्य के 10 हज़ार से भी अधिक प्रारंभिक स्कूलों जो राजकीयकृत होने के बाद पंचायत एवं प्रखंड स्तर पर चल रहे हैं ,वहां के हेड मास्टर नियुक्ति प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ेगा।

भाजपा को धमकी देने वाले खुद बर्बाद हो गए, कोई नामलेवा न रहा: सुशील कुमार मोदी

पटना/दिल्ली। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जहरीली शराब से मौत का मामला उठाने से तिलमिलाए नीतीश कुमार भाजपा को बर्बाद करने की धमकी दे रहे हैं, जबकि ऐसी सोच रखने वाले कई लोग खुद ही बर्बाद हो गए और उन्हें कोई पूछने वाला नहीं रहा।

  • जहरीली शराब से मरने वालों और उनके आश्रितों को ‘ महापापी ‘ कहना संवेदनहीनता की हद
  • लालू प्रसाद की संगत का असर है नीतीश कुमार की बदजुबानी
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श्री मोदी ने कहा कि जहरीली शराब पीने से मरने वालों और उनके गरीब आश्रितों को ” महापापी” कहना मुख्यमंत्री की संवेदनहीनता, राजहठ और सत्ता के अहंकार का सूचक है।

उन्होंने कहा कि यह लालू प्रसाद की संगत का असर है कि वे माननीय विधायकों के लिए “तुम- तुमको” जैसे संबोधन और “बर्बाद कर देंगे” जैसी सड़क-छाप धमकी पर उतर आये हैं।

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श्री मोदी ने कहा कि भाजपा शराबबंदी के पक्ष में है, लेकिन इस नीति के कठोर क्रियान्वयन की समीक्षा भी चाहती है।

उन्होंने बिहार में जहरीली शराब से 40 लोगों की मौत का मामला राज्यसभा में भी उठाया। अनेक सदस्यों ने इस मुद्दे पर एकजुटता दिखायी।

पटना हाइकोर्ट ने पटना-गया-डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में हो रहे विलम्ब पर गहरी नाराजगी जाहिर की

पटना हाइकोर्ट ने पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में हो रहे विलम्ब पर गहरी नाराजगी जाहिर की है।प्रतिज्ञा नामक संस्था द्वारा दायर जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

कोर्ट ने मामलें को गम्भीरता से लेते हुए निर्माण कार्य का जायजा लेने के लिए वकीलों की तीन टीम गठित की हैं।अधिवक्ता मनीष कुमार इन टीमों के साथ पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य का निरीक्षण करेंगे।

इस टीम सदस्य अलग अलग निर्माण कार्यों का निरीक्षण करेंगे।कोर्ट ने निरीक्षण के दौरान वकीलों की सहायता के लिए सम्बंधित जिले के अधिकारीगण मौजूद रहेंगे। ये टीम निरीक्षण करने के बाद अगली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट पेश करेगी।

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कोर्ट ने कार्य की धीमी गति पर कॉन्ट्रेक्टर को फटकार लगायी।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह से तय समय सीमा के तहत सड़क निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो पायेगा।

गौरतलब है कि इस सड़क निर्माण के तय समय सीमा 31मार्च ,2023 हैं।एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी भी कोर्ट में उपस्थित थे।उन्होंने आश्वास्त किया कि सड़क निर्माण का कार्य में दो तीन माह का विलम्ब हो सकेगा,लेकिन जल्दी पूरा करने का पूरा कोशिश किया जाएगा।

कोर्ट ने कहा कि जितने भी आदमी और मशीनों की जरूरत हो,उन्हें इस सड़क निर्माण के कार्य में लगा कर समय पर कार्य पूरा किया जाए।इस मामलें पर अगली सुनवाई 19 दिसम्बर,2022 को की जाएगी।

छह साल में जहरीली शराब पीने से 1000 लोग मरे; पूर्ण शराबबंदी विफल और जानलेवा हुई, समीक्षा करे सरकार – सुशील मोदी

  • पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार विधानसभा में भाजपा सदस्यों के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने के कारण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को माफी मांगनी चाहिए। जहरीली शराब से फिर 20 लोगों की मौत पर दुखी होने और शराबबंदी की समीक्षा करने के बजाय इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री का आवेश में आना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। वे बात-बात पर आपा खो रहे हैं।
  • – छह साल में जहरीली शराब पीने से 1000 लोग मरे
  • – पूर्ण शराबबंदी विफल और जानलेवा हुई, समीक्षा करे सरकार

श्री मोदी ने कहा कि भाजपा पूर्ण मद्यनिषेध के पक्ष में है। इसकी समीक्षा होनी चाहिए और समीक्षा का मतलब शराबबंदी समाप्त करना नहीं है।

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार शराबबंदी लागू करने में पूरी तरह विफल हैं, जबकि यह गुजरात में बेहतर तरीके से लागू है।

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श्री मोदी ने कहा कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद 6 साल में 1000 से ज्यादा लोग जहरीली शराब पीने से मरे, 6 लाख लोग जेल भेजे गए और केवल शराब से जुड़े मामलों में हर माह 45 हजार से ज्यादा लोग गिरफ्तार किये जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बिहार में रोजाना 10 हजार लीटर और महीने में 3 लाख लीटर शराब जब्त की गई। जब इतनी बड़ी मात्रा में शराब आ रही है, तब सरकार शराबबंदी लागू करने में अपनी विफलता स्वीकार करे।

पटना हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस ने किया बेयर एक्ट किताबों का विमोचन

कानून का विशेषज्ञ ही बेहतर कानून पर किताब लिख सकता है। बेहतर शिक्षा प्रदान कर सकता है। इस कार्य को बेहतरी से आलोक कुमार रंजन कर भी रहे हैं।

एंबीशन लॉ इंस्टीट्यूट, दिल्ली के डायरेक्टर आलोक कुमार रंजन के द्वारा लिखे गए बेयर एक्ट किताबों को पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल के साथ न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार,न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद,न्यायमूर्ति मधुरेश प्रसाद,न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह,न्यायमूर्ति पार्थ सार्थी,न्यायमूर्ति सत्यव्रत वर्मा, न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा ने एक साथ लोकार्पण किया। सभी ने किताबों को भविष्य के लिए बेहतर बताया।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल ने आलोक कुमार रंजन को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि तीन साल पहले जब बिहार आया तो पता किया कि कौटिल्य अर्थशास्त्र का अनुवाद मैसूर में हुआ। बिहार के न्यायप्रणाली के लिए कौटिल्य के अर्थशास्त्र, शेरशाह सूरी के विचारों को न्याय के क्षेत्र में बेहतर मार्गदर्शक बताया। बिहार के युवा को आगे बढ़ाने के लिए आलोक रंजन द्वारा किए जा रहे प्रयास की भी सराहना की। इस तरह के प्रयास से बिहार से हो रहे बौद्धिक पलायन पर निश्चित ही रोक लगेगा।

आलोक रंजन को सभी न्यायमूर्तियों ने कहा कि गरीब बच्चों के लिए बिहार में एंबीशन जैसी कोचिंग की व्यवस्था हो जिनके पास रुपया नहीं है पर वो आपका गाइडेंस प्राप्त कर सके। इस मौके पर नव नियुक्त जुडिशियल अधिकारियों को आईपीएस विकास वैभव ने सम्मानित भी किया। मौके पर राहुल कुमार सिंह ने कहा कि आलोक कुमार रंजन जी की कानून की किताबें बिहार ही नहीं अपितु सम्पूर्ण भारत के युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

एंबिशन इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर आलोक कुमार रंजन ने बिहार के विद्यार्थी होने के नाते अपने संबोधन में बिहार के कानून के विद्यार्थियों के लिए बेहतर विधि विश्वविद्यालय एवम उच्च शैक्षणिक स्तर वाला संस्थान बिहार में बनाने के अलावा हिंदीभाषी विधि छात्रों को नो कॉस्ट और लो कॉस्ट एजुकेशन देने की बात पर बल दिया। इसी संदर्भ में उन्होंने हिन्दी में न्यूनतम कीमत पर विधि बेयर एक्ट एवम पुस्तकें के प्रकाशित करने की बात की।

आलोक कुमार रंजन जी का प्रयास निश्चित ही बिहार के छात्रों के लिए वरदान साबित होगा। वरिष्ठ एडिशनल एडवोकेट जनरल झारखंड हाईकोर्ट सचिन कुमार ने भी नवनियुक्त न्यायाधीशों को सम्मानित किया । नीरज कुमार उद्यमी, सोनू कुमार सामाजिक कार्यकर्ता, राहुल कुमार सामाजिक कार्यकर्ता, आनंद कुमार सिंह , प्रियदर्शी रजनीश कुमार, रत्नेश पांडे,विहान सिंह राजपूत ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

पटना हाइकोर्ट ने नाबालिग का नाम उजागर करने के मामले में राज्य के डीजीपी को तीन सप्ताह के भीतर पुलिस अधिकारियों को दिशानिर्देश जारी करने का आदेश दिया है

कोर्ट ने बच्चों और उसके परिवार की पहचान को सार्वजनिक नहीं करने का निर्देश दिया।साथ ही पुलिस अधिकारी या कोई अन्य जो क़ानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने में शामिल पाया जाता है, उसके खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई की जाए।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने नाबालिग के माँ की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया।

आवेदिका की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पूर्वी चम्पारण के पुलिस ने नाबालिग एंव उसके परिजनों का नाम उजागर कर दिया। एक सोशल मीडिया हाउस ने उसे पूरी खबर बना कर चला दी,जबकि पॉक्सो कानून के तहत किसी का निजता और गोपनीयता बनाए रखने का नियम है ।

इन नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन सभी को करना अनिवार्य है, लेकिन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जा रहा हैं।प्रक्रियाओं का पालन नहीं किये जाने के परिणामस्वरूप, अपराध के शिकार नाबालिग का नाम उजागर किया जा रहा है।

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उनका कहना था कि पॉक्सो कानून की धारा 23 का उल्लंघन किया जा रहा हैं। मीडिया पीड़िता का पहचान का खुलासा कर समाचार प्रकाशित करने में संयम नहीं दिखा रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ मीडिया भी पोक्सो के प्रावधानों और उसके तहत नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

इस मामलें पर तीन सप्ताह बाद सुनवाई की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के निर्माण,विकास व सुरक्षा के मामले की सुनवाई 15 दिसंबर,2022 को होगी

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के निर्माण,विकास व सुरक्षा के मामले सुनवाई 15 दिसंबर,2022 को होगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ द्वारा अभिजीत कुमार पाण्डेय की जनहित याचिका पर सुनवाई की जा रही है।

पिछली सुनवाई में पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कोर्ट में अपना पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि बिहार जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य में न तो एक अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट है और ना ही ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है।उन्होंने बताया कि देश के कई बड़े शहरों में अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट है,बल्कि छोटे छोटे शहरों में भी अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट है।

साथ कई शहरों में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की सुबिधा उपलब्ध है। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि पटना का एयरपोर्ट सुरक्षा के लिहाज से बहुत सही नहीं है।राजगीर,बिहटा और पुनपुन में एयरपोर्ट के विकल्प के रूप में विचार तो हुआ,लेकिन अंततः अंतिम रूप से कोई परिणाम नहीं आया।

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राज्य सरकार की ओर से पक्ष प्रस्तुत करते हुए एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कहा कि याचिकाकर्ता की ये माँग सही नहीं है कि खास जगह ही एयरपोर्ट बने या यात्रा के साधन का कैसे विकास हो।ये नीतिगत विषय होते है,जिस पर सरकार ही विचार कर कार्रवाई कर सकती है।केंद्र सरकार के अधिवक्ता के एन सिंह ने कोर्ट को बताया कि राज्य में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट हो कि नहीं, ये विचार का मुद्दा हो सकता है,लेकिन यात्रा किसी विशेष रूप हो,ये विचार के योग्य नहीं है।

पिछली सुनवाई में रूडी ने कहा था कि गया अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी आज तक कोई अंतर्राष्ट्रीय विमान का परिचालन नहीं हुआ है।अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट होने के बावजूद यहां अंतर्राष्ट्रीय विमान नहीं चलते हैं ।

उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर अपना स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही है । पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने सभी पक्षों से जानना चाहा था कि ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट एवं अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट स्थापित करने के लिए क्या क्या अनिवार्यता हैं ?

इस मामलें पर अगली सुनवाई 15 दिसंबर,2022 को होगी।

बिहार के छपरा में मौत का आंकड़ा पहुंचा 11, परिजनों के अनुसार जहरीली शराब पीने से हो रही मौत

शराब से मौत मामले में 11 ज्ञात लोगो की मौत हुई है जिनके नाम निम्नांकित है :
नाम -उम्र -पिता -पता

  1. मुकेश शर्मा – 30 वर्ष -बच्चा शर्मा – हनुमानगंज थाना , मसरख, जिला- सारण
  2. अमित रंजन-38 वर्ष – द्विजेंद्र कुमार सिन्हा – डोईला थाना, इसुआपुर सारण
  3. संजय सिंह 45 वर्ष – वकील सिंह- डोइला ,इसुआपुर सारण
  4. विजेन्द्र यादव – 46 वर्ष – स्व. नरसिंह राय- डोईला थाना इसुआपुर,
  5. रामजी साह 55 वर्ष – गोपाल साह -शास्त्री टोला, थाना मसरक, सारण
  6. कुणाल कुमार सिंह- 38 वर्ष -भदु सिंह- मसरख यदु मोड़,थाना मसरख, सारण
  7. नासिर हुसैन- 42 वर्ष -समसुद्दीन-मसरख तख्त थाना मसरख सारण
  8. जयदेव सिंह-43 वर्ष -बिंदा सिंह -गांव बेंग छपरा थाना मसरक
  9. रमेश राम- 42 वर्ष-कन्होया राम -गांव बेंग छपरा थाना मसरक सारण
  10. चंद्रमा राम-48 वर्ष हेमराज जी- स्व. जीताराम- मसरख ,थाना मसरक,सारण
  11. विक्की महतो- 16वर्ष- महतो-सुरेश महतो-मढ़ौरा
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पटना हाइकोर्ट ने वैध प्रमाण पत्र नहीं होने के बावजूद बिहार स्टेट फार्मेसी कॉउन्सिल के सदस्य के लिए चुनाव हेतु वोटर लिस्ट में नाम शामिल किए जाने के मामलें पर सुनवाई की

पटना हाइकोर्ट ने वैध प्रमाण पत्र नहीं होने के बावजूद बिहार स्टेट फार्मेसी कॉउन्सिल के सदस्य के लिए चुनाव हेतु वोटर लिस्ट में नाम शामिल किए जाने के मामलें पर सुनवाई की। इसकी जांच करवाने को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट ने राज्य सरकार व फार्मेसी कॉउंसिल से जवाब तलब किया है।

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुबोध कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुरेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि कुछ मामले में तो फार्मासिस्ट के तौर पर निबंधन भी रद्द होता है।

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इसकी वजह से फार्मेसी के हजारों विद्यार्थी वोट के अधिकार से वंचित रह जाते हैं।इस मामलें पर चार सप्ताह बाद सुनवाई की जाएगी।

पटना हाइकोर्ट में राज्य के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गो के निर्माण,विकास और मरम्मती से सम्बंधित मामलों पर सुनवाई हुई

पटना हाइकोर्ट में राज्य के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गो के निर्माण,विकास और मरम्मती से सम्बंधित मामलों पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इन मामलों पर सुनवाई की।

कोर्ट ने मुजफ्फरपुर बरौनी राष्ट्रीय राजमार्ग का डीपीआर अब तक नहीं तैयार किये जाने पर राज्य के विकास आयुक्त और एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी को कल तलब किया है।

कोर्ट को जानकारी दी गई कि छपरा सिवान गोपालगंज रोड के निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है।इस राजमार्ग का उदघाटन होना बाकी है।जोगबनी फारबिसगंज एन एच बन चुका है और इस पर वाहनों का आना जाना शुरू हो चुका है।

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पटना बख्तियारपुर एन एच का कार्य पूरा होने की जानकारी दी गई,लेकिन ये कार्य पूरा नहीं हुआ है।साथ मुंगेर के पास गंगा नदी पर बने पुल के पहुँच पथ के पास तीन हाई पावर ट्रांसमिशन री- लोकेट का मामला है।

इन मामलों पर 20दिसंबर,2022 को सुनवाई की जाएगी।

भारत सरकार द्वारा बिहार में 8388 करोड़ की लागत से बरौनी यूरिया खाद कारखाना बनकर तैयार – भगवंत खुबा

राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सम्प्रति राज्यसभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी के एक प्रश्न के उत्तर में राज्यसभा में रसायन और उर्वरक मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री भगवंत खुबा ने बताया कि बताया कि भारत सरकार द्वारा 8388 करोड़ की लागत से खाद कारखाना बनकर तैयार हो गया है, जिससे 18 अक्टूबर, 2022 को यूरिया का उत्पादन प्रारंभ हो गया है। बरौनी प्लांट की यूरिया उत्पादन क्षमता 12.70 लाख मैट्रिक टन प्रतिवर्ष है।

• 242 रुपया यूरिया की बोरी पर 1800 रुपया पर सब्सिडी
• बरौनी यूरिया खाद कारखाना 8388 करोड़ की लागत से बनकर तैयार
• 18 अक्टूबर, 2022 से उत्पादन प्रारंभ
• बरौनी कारखाना की क्षमता 12.70 लाख मैट्रिक टन है

मंत्री ने बताया कि पूरे देश में यूरिया उत्पादन की कुल मिलाकर 6 इकाई स्थापित की गई है जिसमें 4 सरकारी क्षेत्र तथा दो प्राइवेट सेक्टर में स्थापित की गई है। इन छह इकाई की यूरिया उत्पादन की स्थापित क्षमता 283.74 लाख मैट्रिक टन प्रतिवर्ष होगी।

मोदी ने बताया कि पूरे देश में 341.73 लाख मैट्रिक टन यूरिया की खपत है जबकि उत्पादन मात्र 250.72 लाख मैट्रिक टन है। शेष 91.36 लाख मैट्रिक टन यूरिया विदेशों से आयात करना पड़ रहा है ।

मंत्री ने बताया कि एक बोरा 45 किलो ग्राम यूरिया का अधिकतम मूल्य 242 रुपया है जबकि 1800 रुपया सरकार सब्सिडी प्रदान करती है।

सुप्रीम कोर्ट के कालेजियम ने आज अपने बैठक में सुप्रीम कोर्ट में पाँच जजों की बहाली की अनुशंसा की है

सुप्रीम कोर्ट के कालेजियम ने आज अपने बैठक में सुप्रीम कोर्ट में पाँच जजों की बहाली की अनुशंसा की है।

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राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पंकज मित्तल,पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल, मणिपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पी वी संजय कुमार,पटना हाईकोर्ट के जज जस्टिस अहसानउद्दीन अमानुल्लाह और इलाहाबाद के जज जस्टिस मनोज मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट के जज बनाए जाने की अनुशंसा की है।

स्थानीय निकाय/ नगरपालिका में वार्ड सदस्यों समेत अन्य पदों के लिए राज्य में होने जा रहे चुनाव में आचार संहिता लागू करने के लिए एक जनहित याचिका पटना हाई कोर्ट में दायर की गई है

स्थानीय निकाय/ नगरपालिका में वार्ड सदस्यों समेत अन्य पदों के लिए राज्य में होने जा रहे चुनाव में आचार संहिता लागू करने के लिए एक जनहित याचिका पटना हाई कोर्ट में दायर की गई है। ये जनहित याचिका शम्भू सिद्धार्थ ने दायर किया है।

इस जनहित याचिका में सरकार, मंत्रियों, विधानसभा व विधान परिषद के सदस्यों समेत अधिकारियों द्वारा सत्ताधारी महागठबंधन से जुड़े उमीदवारों को फायदा पहुंचाने हेतु सत्ता का दुरुपयोग किये जाने की अनुमति नहीं देने की माँग की गई है।

याचिकाकर्ता के वरीय अधिवक्ता एस डी संजय ने बताया कि जनहित याचिका में ये आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार द्वारा सत्ता का दुरुपयोग करते हुए विभिन्न प्रकार के योजनाओं का उदघाटन किया जा रहा है।साथ ही स्थानीय निकाय के चुनाव की घोषणा के बाद भी आचार संहिता का उल्लंघन कर खास वर्ग के लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए योजनाओं की घोषणा और प्रचार – प्रसार किया जा रहा है।

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राजगीर में 27 नवंबर, 2022 को गंगा वाटर सप्लाई स्कीम योजना का उदघाटन,राजकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पताल का नालंदा जिला में 12 दिसंबर, 2022 को उदघाटन किया गया।साथ ही, 13 दिसंबर, 2022 को मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्ति पत्र वितरण सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम कथित रूप से आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए आयोजित किया गया।

इस मामलें में राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आदेश देने का अनुरोध किया गया है।

याचिकाकर्ता के वरीय अधिवक्ता एस डी संजय का यह भी कहना है कि एक ओर आदर्श अचार सहिंता का पालन करवाने के लिए टीम का गठन किया गया है, वही दूसरी ओर मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री द्वारा इसका उल्लंघन किया जा रहा है।राज्य चुनाव आयोग आंख बंद करके बैठा हुआ है और आयोग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं कि जा रही है।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य की निचली अदालतों में वकीलों के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट ने राज्य की निचली अदालतों में वकीलों के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें सुनवाई की। वरीय अधिवक्ता रमाकांत शर्मा की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य के विधि सचिव को विभिन्न जिलों के ज़िला जजों,डी एम व बार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने उन्हें इस बैठक के सम्बन्ध में भूमि उपलब्धता के सन्दर्भ में अगली सुनवाई में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता बिहार राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष रमाकांत शर्मा ने कोर्ट को बताया कि राज्य के अदालतों की स्थिति अच्छी नहीं है।

वरीय अधिवक्ता शर्मा ने कोर्ट को बताया कि राज्य में लगभग एक लाख से भी अधिवक्ता अदालतों में कार्य करते है।लेकिन उनके लिए न तो बैठने की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही कार्य करने की सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।भवन की भी काफी कमी है। बुनियादी सुविधाओं का काफी अभाव है।

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उन्होंने कोर्ट को बताया गया कि वकीलों को बुनियादी सुविधाओं का काफी अभाव है। शुद्ध पेय जल,शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं होती हैं।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि अदालतों के भवन के लिए जहां भूमि उपलब्ध भी है,वहां भूमि को स्थानांतरित नहीं किया गया है। जहां भूमि उपलब्ध करा दिया गया है, वहां कार्य नहीं प्रारम्भ नहीं हो पाया हैं।

कोर्ट ने इस मुद्दे पर गंभीर रुख अपनाते हुए राज्य के विधि सचिव को तलब किया।उन्होंंने कोर्ट को बताया कि इस सम्बन्ध में कार्रवाई की जा रही है।

कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा धनराशि उपलब्ध कराई गई है, किंतु अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।कोर्ट ने भूमि उपलब्धता के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देने का निर्देश राज्य सरकार को दिया।

कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध धनराशि का उपयोग नहीं होगा,तो अगले वित्तीय वर्ष में ये धनराशि उपलब्ध नहीं हो पाएगी।इस मामलें पर अगली सुनवाई 15दिसंबर,2022 को की जाएगी।

बिहार के सरकारी विद्यालयों में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नियोजित शिक्षकों पर बर्खास्तगी के साथ-साथ प्राथमिकी भी दर्ज होगी

बिहार के सरकारी विद्यालयों में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नियोजित 77 हजार 57 शिक्षकों पर बर्खास्तगी के साथ-साथ प्राथमिकी भी दर्ज होगी।

पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर विजिलेंस ब्यूरो ने प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति मांगी है क्योंकि शिक्षकों से कई बार प्रमाण पत्र मांगे जाने पर भी उसे उपलब्ध नहीं करा रहे हैं।

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जांच के लिए निगरानी विभाग को 77 हजार 57 शिक्षकों के सर्टिफिकेट के फोल्डर नहीं मिले है। न्यायालय के आदेश के आलोक में शिक्षा विभाग ने प्रमाण पत्र के फोल्डर नहीं देने वाली नियोजन इकाइयों पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दे रखा है।

पटना हाइकोर्ट में हर्ष फायरिंग को रोकने हेतु दायर जनहित याचिका की सुनवाई हुई

पटना हाइकोर्ट में हर्ष फायरिंग को रोकने हेतु दायर जनहित याचिका की सुनवाई हुई। इस सम्बन्ध में हाईकोर्ट ने राज्य के 11 जिलों के डिस्ट्रिक्ट व सेशन जजों से उनके जिलों में हुए हर्ष फायरिंग की घटनाओं के सिलसिले में दर्ज प्राथमिकी के अनुसंधान और ट्रायल का रिपोर्ट तलब किया है।

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राजीव रंजन सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए पटना सहित बिहार के 11 जिले के डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज को आदेश दिया था कि वह अपने-अपने जिला में हुए हर्ष फायरिंग की घटनाओं पर दायर मामले की त्वरित अनुसंधान और उस मामले में मुकदमे की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।साथ ही एक समय सीमा के अंदर कार्य योजना तैयार कर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई में भी पटना, वैशाली ,सुपौल ,पूर्वी और पश्चिम चंपारण, मधेपुरा पूर्णिया ,जमुई ,लखीसराय सहित अन्य जिलों के डिस्ट्रिक्ट व सेशन जज को निर्देश दिया था कि वे अपने-अपने जिलों के डीएम और एसपी के साथ एक बैठक कर यह समयसीमा को सुनिश्चित करें।

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उनके जिलों में हर्ष फायरिंग पर हुए एफ आई आर के अनुसंधान को एक समय सीमा के भीतर पूरा कर आरोपियों को ट्रायल हेतु भेजा जाए।

वही पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के साथ सुनवाई करते हुए जिला अधिकारी को यह निर्देश दिया गया कि वे सुनिश्चित करें कि हर्ष फायरिंग के आरोपियों के खिलाफ चल रहे ट्रायल की हो सके ,तो रोज़ाना सुनवाई हो और गवाही में विलम्ब नही हो।

हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के तहत में इन सभी जिलों के डिस्ट्रिक्ट व सेशन जज ने बैठक में क्या क्या निर्णय लिए और इस बैठक कहां तक प्रभावकारी रहा, इस पर भी रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।

इस मामलें पर अगली सुनवाई,13फरवरी,2023 को होगी।

पटना हाइकोर्ट ने लखीसराय के बालिका विद्यापीठ के पूर्व सचिव स्व. कुमार शरद चन्द्र के चर्चित हत्याकांड की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया

पटना हाइकोर्ट ने लखीसराय के बालिका विद्यापीठ के पूर्व सचिव स्व. कुमार शरद चन्द्र के चर्चित हत्याकांड की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया है।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने उषा शर्मा की याचिका पर सुनवाई करने के बाद आदेश दिया।

कोर्ट ने इससे पूर्व जांच कर रही जांच एजेंसी सीआईडी को आदेश के दो सप्ताह में सारे रिकॉर्ड और कागजात सीबीआई को उपलब्ध कराने का आदेश दिया।

कोर्ट ने सीबीआई के निर्देशक को ये निर्देश दिया कि वे शीघ्र एक योग्य अधिकारी के नेतृत्व में टीम गठित कर इस मामलें की निष्पक्ष और त्वरित जांच कराए।इसकी रिपोर्ट सम्बंधित निचली अदालत को सौंपने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा कि इस हत्याकांड की जांच में पहले आठ साल का विलम्ब हो गया है।इसलिए इस मामलें की जांच त्वरित गति से किये जाने की जरूरत है।

ये घटना 2अगस्त,2014 को घटी थी, जब दो लोग कुमार शरद चन्द्र के घर में घुस कर गोली मार कर हत्या कर दी थी।उनकी पत्नी उषा शर्मा घटना के समय घर में थी।उन्होंने गोली मारने वाले को पहचान भी लिया था।

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इस सम्बन्ध में लखीसराय पुलिस थाने में कांड संख्या 443/ 2014/ दर्ज कराई गई।उनकी हत्या के पीछे बालिका विद्यापीठ के संपत्ति और भूमि का विवाद था।

इस मामलें शम्भू शरण सिंह, श्याम सुंदर प्रसाद और राजेंद्र सिंघानिया को निजी प्रतिवादी बनाया गया।कुछ दिनों की जांच के बाद इस मामलें की जांच का जिम्मा सीआईडी को 2014 में सौंप दिया गया।

लेकिन सीआईडी द्वारा मामलें की जांच में कोई तत्परता नहीं दिखाई गई।2016 से 2019 तक तो केस डायरी भी नहीं लिखी गई।2014 में ये हत्या हुई थी,लेकिन दिसंबर,2022 तक इस मामलें में कोई प्रगति नहीं हुई।चूंकि इस मामलें प्रभावशाली लोग शामिल थे,इसलिए जांच में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पायी।आठ सालों में इस हत्याकांड की जांच नहीं पूरी हुई।

हाईकोर्ट ने इस मामलें को गंभीरता से लेते हुए जांच का सीबीआई को सौंपते हुए सीआईडी को दो सप्ताह के भीतर सारे रिकॉर्ड और कागजात सीबीआई को उपलब्ध कराने को कहा।इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामलें को निष्पादित कर दिया।

पटना हाईकोर्ट में पटना मुख्य नहर के बांध व चार्ट भूमि पर अतिक्रमणकारियों द्वारा किये गए अतिक्रमण के मामले पर सुनवाई 13 दिसंबर,2022 को की जाएगी

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राज किशोर श्रीवास्तव की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

कोर्ट ने इससे पूर्व की सुनवाई में स्पष्ट किया किया था कि अतिक्रमणकारियों को पूरा अतिक्रमित भूमि खाली करनी होगी।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया था कि कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमणकारियों को ये पूरी जमीन को हर हाल में खाली करना होगा।

कोर्ट को भी सहानुभूति है, लेकिन इस सरकारी जमीन को खाली करना होगा। इस मामले में कोर्ट ने पूर्व में ही कोर्ट ने दानापुर के अंचलाधिकारी को अतिक्रमण हटाकर अनुपालन के संबंध में हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया था।

इस नहर बांध व चार्ट भूमि पर अतिक्रमण की स्थिति को दानापुर के अंचलाधिकारी ने भी स्वीकार किया है। सम्बंधित अंचलाधिकारी ने 5 मई, 2022 को ही कोर्ट को स्वयं बताया था कि अगले चार सप्ताह में कम से कम 70 फीसदी अतिक्रमण को हटा दिया जाएगा।

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सोन नहर प्रमंडल, खगौल, पटना द्वारा अतिक्रमण वाद दायर करने के लिए दानापुर के अंचलाधिकारी को लिखा गया था, लेकिन अभी तक इसे नहीं हटाया गया।

सोन नहर प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता द्वारा दानापुर के अंचलाधिकारी को अतिक्रमणकारियों की सूची भी अंचलाधिकारी को दी गई है।

कार्यपालक अभियंता ने अपने पत्र में विभागीय मुख्य नहर के बांध व चार्ट भूमि पर किये गए अतिक्रमण को अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध अतिक्रमण वाद दायर कर ठोस अग्रेतर कार्रवाई करने हेतु अनुरोध किया था, ताकि विभागीय भूमि अतिक्रमणकारियों से मुक्त हो सके।

इस मामलें पर 13 दिसंबर,2022 को सुनवाई की जाएगी।

पटना हाइकोर्ट में बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई 14 दिसंबर,2022 को की जाएगी

पटना हाइकोर्ट में बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई 14 दिसंबर,2022 को की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ द्वारा आकांक्षा मालवीय की जनहित याचिका पर सुनवाई की जा रही है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा की गई कार्रवाई पर गहरा असंतोष जाहिर किया था। कोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को अबतक की गई कार्रवाई का ब्यौरा देने का निर्देश दिया था।

याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट ने जो भी आदेश दिया,उस पर राज्य सरकार के द्वारा कोई प्रभावी और ठोस कदम नहीं उठाए गए है।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को पूरी जानकारी देने को कहा था। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवा में क्या क्या कमियों के सम्बन्ध में ब्यौरा देने को कहा था।

साथ ही कोर्ट ने इसमें सुधारने के उपाय पर सलाह देने को कहा था।याचिकाकर्ता की अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने बताया कि नेशनल मेन्टल हेल्थ प्रोग्राम ही के अंतर्गत राज्य के 38 जिलों में डिस्ट्रिक्ट मेन्टल हेल्थ प्रोग्राम चल रहा हैं।लेकिन इसमें स्टाफ की संख्या नाकाफी ही है। हर जिले में सात सात स्टाफ होने चाहिए।

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उन्होंने बताया था कि राज्य सरकार का दायित्व है कि वह मेन्टल हेल्थ केयर एक्ट के तहत कानून बनाए।साथ ही इसके लिए मूलभूत सुविधाएं और फंड उपलब्ध कराए।लेकिन अबतक कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।

कोर्ट को ये भी बताया गया था कि सेन्टर ऑफ एक्सलेंस के तहत हर राज्य में मानसिक रोग के अध्ययन और ईलाज के लिए कॉलेज है।लेकिन बिहार ही एक ऐसा राज्य हैं,जहां मानसिक रोग के अध्ययन और ईलाज के लिए कोई कालेज नहीं है।

जबकि प्रावधानों के तहत राज्य सरकार का ये दायित्व हैं।पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि केंद्र सरकार की ओर से दिए जाने वाले फंड में कमी आयी है,क्योंकि फंड का राज्य द्वारा पूरा उपयोग नहीं हो रहा था।

पहले की सुनवाई में याचिकाकर्ता की अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने कोर्ट को बताया कि बिहार की आबादी लगभग बारह करोड़ हैं।उसकी तुलना में राज्य में मानसिक स्वास्थ्य के लिए बुनियादी सुविधाएँ नहीं के बराबर है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 14 दिसंबर,2022 को होगी।

नीतीश कुमार अब तेजस्वी को सत्ता सौंप कर शिवानंद के आश्रम जाएँ – सुशील मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू अध्यक्ष ललन सिंह, दोनों को कुढनी में हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्हें तेजस्वी यादव को सत्ता सौंप कर शिवानंद के आश्रम चले जाना चाहिए।

  • मुख्यमंत्री और ललन सिंह लें कुढनी में हार की जिम्मेदारी
  • सात दलों का चक्रव्यूह तोड़कर भाजपा बनी अभिमन्यु

श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार का जनाधार खत्म हो चुका है। उन्हें अब जदयू का राजद में विलय भी जल्द ही कर देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ललन सिंह कुढनी में अपनी जाति का वोट भी पार्टी को नहीं दिलवा सके। मुख्यमंत्री की सभाएँ बेअसर रहीं।

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श्री मोदी ने कहा कि कुढनी और गोपालगंज, दोनों चुनाव क्षेत्रों में भाजपा ने सात दलों का चक्रव्यूह तोड़कर कर स्वयं को आधुनिक अभिमन्यु सिद्ध किया। यह बिहार में बड़े बदलाव का साफ संकेत है।

पटना हाइकोर्ट ने मोतिहारी शहर मे अवस्थित मोतीझील के दयनीय रखरखाव और प्रशासनिक उपेक्षा पर गहरा असंतोष जाहिर किया

पटना हाइकोर्ट ने मोतिहारी शहर मे अवस्थित मोतीझील के दयनीय रखरखाव और प्रशासनिक उपेक्षा पर गहरा असंतोष जाहिर किया।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने अधिवक्ता कुमार अमित की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि प्रधान सचिव नगर विकास विभाग, पर्यटन,जल संसाधन, वन विभाग इत्यादि के साथ बैठक कर इस झील को अतिक्रमणमुक्त करने और जीर्णोद्धार कराने की कार्रवाई करें।

अगली सुनवाई में की गई कार्रवाई का रिपोर्ट करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया गया है।अधिवक्ता कुमार अमित ने कोर्ट को बताया कि मोतिहारी शहर में एक रमणीय और प्राकृतिक झील है,जिसे मोतीझील के नाम से जाना जाता है।प्रशासनिक उपेक्षा और लगातार रखरखाव नहीं होने के कारण ये झील अपना अस्तित्व खोता जा रहा है।

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उन्होंने बताया कि न सिर्फ इस झील क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण हुआ है,बल्कि शहर की गंदगी और अस्पतालों का कचरा झील में ही गिराया जाता है।जंगल झाड,लगातार बढ़ते प्रदूषण और कीचड के कारण इसके अस्तित्व पर ही संकट आ गया है।

अधिवक्ता कुमार अमित ने कोर्ट को जानकारी दी कि यहाँ का नगर निगम भी इसकी देख भाल नहीं करता है।प्रशासनिक उपेक्षा के शिकार इस सुंदर झील का अस्तित्व कर सकता है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 23 दिसंबर ,2022 को होगा।

पटना हाईकोर्ट ने पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई करते हुए जांच की प्रगति पर असंतोष जाहिर किया

The BiharNews Post : December 8, 2022
पटना हाईकोर्ट ने पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई करते हुए जांच की प्रगति पर असंतोष जाहिर किया। जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई की।

आज की सुनवाई में कोर्ट में एस एस पी, पटना और एस आई टी जांच टीम का नेतृत्व करने वाली सचिवालय एएसपी काम्या मिश्रा भी कोर्ट में उपस्थित रही।

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कोर्ट ने कहा कि इस मामलें की समग्रता में जांच नहीं किया गया हैं।पुलिस अधिकारियों को विस्तार और गहराई से जांच पड़ताल करने की आवश्यकता है।

अधिवक्ता मीनू कुमारी ने बताया कि कोर्ट अब तक एस आई टी द्वारा किये गए जांच और कार्रवाई के सम्बन्ध में सम्बंधित अधिकारी से जानकारी प्राप्त करना चाहता था।उन्होंने बताया कि आफ्टर केअर होम में रहने वाली महिलाओं की स्थिति काफी खराब हैं।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एस आई टी टीम का नेतृत्व करने वाली पुलिस अधिकारी को कोर्ट ने अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा देने को कहा था।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने अनुसंधान को डी एस पी रैंक की महिला पुलिस अधिकारी से कराने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने जांच रिपोर्ट भी तलब किया था।

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हाई कोर्ट ने इस याचिका को पटना हाई कोर्ट जुवेनाइल जस्टिस मोनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रजिस्टर्ड किया था। कमेटी में जस्टिस आशुतोष कुमार चेयरमैन थे, जबकि जस्टिस अंजनी कुमार शरण और जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय इसके सदस्य के रूप में थे।

इस मामले की अगली सुनवाई में 12,जनवरी,2022 को की जाएगी।

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कुढनी में भाजपा जीत के बाद इस्तीफा दें नीतीश कुमार – सुशील कुमार मोदी

The BiharNews Post : December 8, 2022
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि
भाजपा को धोखा देकर जदयू के राजद से हाथ मिलाने को जनता ने नकार दिया है, इसलिए गोपालगंज और कुढनी में हार के बाद नीतीश कुमार को इस्तीफा दे देना चाहिए।

  • जदयू का अतिपिछड़ा वोट खिसका, मुख्यमंत्री की लोकप्रियता खत्म
  • लालू प्रसाद के इलाज पर इमोशनल कार्ड खेलना काम नहीं आया
  • कुढनी की जनता का आभार, केदार गुप्ता को बधाई

श्री मोदी ने कहा कि तीन में दो उपचुनावों में भाजपा की जीत से साफ है कि अतिपिछड़ा वोट पूरी तरह भाजपा के साथ आ गया है।

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उन्होंने कहा कि 2014 के संसदीय चुनाव में जदयू के सिर्फ दो सीट जीतने पर नीतीश कुमार ने हार की जिम्मेदारी लेकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था, वैसे ही कुढनी में हार के बाद उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।

श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार ने कुढनी में कई सभाएँ की थीं। करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाये गए थे और लालू प्रसाद के किडनी ट्रांसप्लांट के बहाने इमोशनल कार्ड भी खेला गया था।

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उन्होंने कहा कि कुढनी में मुकेश सहनी के जरिये भाजपा के वोट में सेंधमारी की चाल भी बेकार गई।

श्री मोदी ने कुढनी की जीत के लिए क्षेत्र की जनता को धन्यवाद दिया, कार्यकर्ताओं के प्रति आभार प्रकट किया और विजयी प्रत्याशी केदार गुप्ता को बधाई दी।

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पुलिस के भू-माफिया के साथ कथित रूप से मिलीभगत और अवैध रूप से मकान ध्वस्त करने के मामलें पर सुनवाई पटना हाइकोर्ट में हुई

The BiharNews Post : December 8, 2022
पटना हाइकोर्ट ने पुलिस के भू माफिया के साथ कथित रूप से मिलीभगत और अवैध रूप से मकान ध्वस्त करने के मामलें पर सुनवाई की। जस्टिस संदीप कुमार ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को घटना की वीडिओ को पेनड्राइव में राज्य सरकार के अधिवक्ता और प्रतिवादियों को देने का निर्देश दिया।

इस मामलें याचिकाकर्ता सजोगा देवी है। इस मामलें पर अगली सुनवाई 20दिसम्बर, 2022 को की जाएगी।

आज कोर्ट में पूर्वी पटना के एस पी, पटना सिटी के सी ओ और अगमकुआं थाना के एस एच ओ के साथ इस घटना में गए पुलिस अधिकारियों कोर्ट में उपस्थित हो कर अपनी स्थिति स्पष्ट की।

कोर्ट ने कहा कि बिना किसी न्यायिक या अर्ध न्यायिक आदेश के मकान तोड़ा जाना अवैध है।उन्होंने कहा कि अगर इसी तरह पुलिस कार्रवाई करेगी,तो अराजकता फैलेगी।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने अवैध रूप से मकान ध्वस्त करने पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब ऐसे ही पुलिस काम करेगी,तो सिविल कोर्ट बंद कर दिया जाए।

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आज कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से इस बात से इंकार किया कि इस घटना में बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया।उन्होंने कोर्ट को घटना की तस्वीरें भी दिखाई गई।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पुलिस के मनमाने रवैए पर सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि क्या यहाँ भी बुलडोजर चलेगा।पुलिस थाने मे पैसा दे कर मनमाने काम करवाए जा सकते है।क्या सारी ताकत पुलिस को मिल गई है क्या।

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पूर्व की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि भू माफिया के शह पर याचिकाकर्ता व उसके परिवार वालो के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज किया गया है। कोर्ट ने इस प्राथमिकी पर कोई कार्रवाई नहीं करने का आदेश देते हुए उन्हें गिरफ्तार नहीं करने का आदेश दिया।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 20 दिसंबर,2022 को फिर होगी।

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Bihar By-Election Kurhani Result: भाजपा ने कुढ़नी सीट पर किया कब्जा

BJP उम्मीदवार केदार गुप्ता ने JDU उम्मीदवार मनोज कुशवाहा को 3649 वोट से दी शिकस्त। कांटे के टक्कर में लगातर उतार-चढ़ाव रहा। 9वें से लेकर 18वें राउंड की मतगणना में जदयू उम्मीदवार ने बढ़त कायम रखी। अंतिम समय में भाजपा ने बढ़त बनानी शुरू की और यह अंत तक कायम रहा।

#JDU और #BJP में रही कांटे की टक्कर। इस जीत से भाजपा समर्थकों में उत्साह है, वहीं महागठबंधन के नेताओं में मायूसी छायी है।

केदार प्रसाद गुप्ता 76722 वोट
मनोज कुशवाहा 73073 वोट

तीसरे स्थान पर VIP उम्मीदवार नीलाभ कुमार रहे। उन्हें 10000 वोट मिले। एआईएमआइएम उम्मीदवार मो. गुलाम मुर्तुजा को 3206 वोट मिले।

कुढ़नी सीट परिणाम पार्टी वार वोट शेयर (%)

Party Wise Vote Share

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कुढ़नी सीट परिणाम पार्टी वार वोट

Kurhani Result Party wise
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वैशाली में बेखौफ अपराधियों ने स्वर्ण व्यवसाई को गोली मार 20 लाख रुपए के जेवरात लूटकर फरार हो गए

The BiharNews Post : December 7, 2022
वैशाली में सहदेई ओपी क्षेत्र के अंधरावर चौक के पास बेखौफ अपराधियों ने स्वर्ण व्यवसाई को गोली मार दी। उनकी हालत गंभीर है।

बताया गया है कि स्वर्ण व्यवसाई बुधवार की देर शाम अपने दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। इसी बीच अपराधियों हथियार के बल पर लूटपाट करने लगे। व्यवसायी ने विरोध किया तो अपराधी ने गोली मार दी। और 20 लाख रुपए के जेवरात लूटकर फरार हो गए।

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घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। आसपास के लोगों की भीड़ लग गई। लोगों ने घायल को अस्पताल में भर्ती करवाया। सूचना मिले ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और छानबीन में जुट गई। घायल की पहचान परवानंदपुर गांव निवासी सुरेश साह के पुत्र राहुल कुमार के रूप में हुई है।

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पटना हाइकोर्ट ने पटना समाहरणालय बार एसोसिएशन भवन को बिना वैकल्पिक व्यवस्था किये तोड़े जाने के मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को वकीलों के बैठने और कार्य करने की वैकल्पिक व्यवस्था किये जाने का निर्देश दिया

The BiharNews Post : December 7, 2022
पटना हाइकोर्ट ने पटना समाहरणालय बार एसोसिएशन भवन को बिना वैकल्पिक व्यवस्था किये तोड़े जाने के मामलें पर सुनवाई की। उपेंद्र नारायण सिंह की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राज्य सरकार को वकीलों के बैठने और कार्य करने की वैकल्पिक व्यवस्था किये जाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने इस मामलें पर विशेष रूप से सुनवाई की।

याचिकाकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने कोर्ट को बताया कि समाहरणालय बार एसोसिएशन भवन को बिना कोई वैकल्पिक व्यवस्था किये तोड़े जाना सही नहीं है।

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कोर्ट ने प्रशासन और एसोसिएशन के आपसी सहमति के वकीलों के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था की जाए।वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने जानकारी दी कि तत्काल विकास भवन में लगभग दो सौ वकीलों के बैठने की व्यवस्था हो रही है।

उन्होंने कहा कि वकीलों के स्टाफ,टाईपिस्ट आदि के लिए भी बैठने और कार्य करने की व्यवस्था किये जाने की आवश्यकता है।वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाएँ और आधुनिक डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराया जाना चाहिए,ताकि वकील अपना पेशागत कार्य सही तरीके से कर पाये।

रिपोर्ट के मुताबिक महिलायें ऑपरेशन के समय दर्द से कराहती रहीं, लेकिन उसके बाबजूद भी डॉक्टर ने बिना बेहोश किए ही ऑपरेशन कर दिया । इस तरह की लापरवाही से पूरा सिस्टम कटघरे में आ गया है ।

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कोर्ट ने प्रशासन और एसोसिएशन को आपसी सहमति से इन मुद्दों को सुलझा कर वकीलों की समस्यायों का निदान निकालने का निर्देश दिया।इसके साथ ही कोर्ट ने इस जनहित याचिका को निष्पादित कर दिया।

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नसबंदी कराने पहुंची महिलाओं को बिना बेहोशी का इंजेक्शन दिए ऑपरेशन करने के मामले पर पटना हाइकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया

The BiharNews Post : December 7, 2022
खगड़िया । खगड़िया के एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी के लिए पहुंची महिलाओं को बिना बेहोशी का इंजेक्शन दिए ही ऑपरेशन करने के मामले पर पटना हाइकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया ।

चीफ जस्टिस संजय क़रोल एवं जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने अखबारों में छपी रिपोर्ट को आधार बनाने हुए इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है ।

रिपोर्ट के मुताबिक महिलायें ऑपरेशन के समय दर्द से कराहती रहीं, लेकिन उसके बाबजूद भी डॉक्टर ने बिना बेहोश किए ही ऑपरेशन कर दिया । इस तरह की लापरवाही से पूरा सिस्टम कटघरे में आ गया है ।

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मानवता को ताक पर रखकर महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ हुए इस खिलवाड़ पर हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए केंद्र ऐवं राज्य सरकार को जवाव तलब किया है । इस मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद की जाएगी ।

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गरीबों को निशाना बना रही शराबबंदी, समीक्षा करें नीतीश – सुशील कुमार मोदी

The BiharNews Post : December 7, 2022
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि शराब से जुड़े मामलों में एक माह के दौरान 45 हजार से ज्यादा गरीब-जनजातीय लोगों की गिरफ्तारी और तीन लाख लीटर शराब बरामद होना साबित करता है कि पूर्ण शराबबंदी लागू करने में नीतीश सरकार पूरी तरह विफल रही है।

श्री मोदी ने कहा कि भाजपा मद्यनिषेध के विरुद्ध नहीं, लेकिन इसे लागू करने में सरकार विफल है। इसकी समीक्षा क्यों नहीं होनी चाहिए ?

उन्होंने कहा कि नवम्बर में वीआइपी और सरकारी कर्मचारी तो केवल 739 पकड़े गए, जबकि गरीब और पिछड़ी जातियों के 6 लाख लोग हर साल जेल भेजे जा रहे हैं। शराबबंदी गरीबों पर भारी पड़ रही है।

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उन्होंने कहा कि केवल शराब पकड़ने के लिए पुलिस-प्रशासन ने जब एक माह (नवम्बर- 2022) में 1 लाख 28 हजार से ज्यादा छापामारी की, तब जाहिर है कि कानून-व्यवस्था के दूसरे मामलों के लिए उनके पास समय नहीं है।

श्री मोदी ने कहा कि शराब की होम डेलिवरी में हजारों लोग लगे हैं और सैकड़ों वाहनों का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन होम डेलीवरी करने वाले मात्र 952 लोग पकड़े गए और सिर्फ 1469 वाहन जब्त हुए।

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उन्होंने कहा कि ये आंकड़े खुद सरकार के हैं और इससे पता चलता है कि पुलिस शराब माफिया के लोगों पर नरम और आम लोगों के प्रति सख्त होकर दोनों तरफ से वसूली में लगी है।

श्री मोदी ने कहा कि यदि रोजाना 10 हजार लीटर और महीने में 3 लाख लीटर शराब जब्त की गई, तो इतनी शराब आ कहाँ से रही है? सरकार इसकी तस्करी रोक नहीं पा रही है।

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को 2016 की पूर्ण शराबबंदी नीति पर हठ छोड़कर तुरंत समीक्षा करनी चाहिए।

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बिहार के समस्तीपुर में बाइक सवार बदमाशों ने महिला से 1 लाख रुपए से भरा पर्स छीन लिया

The BiharNews Post : December 7, 2022
समस्तीपुर । नगर थाना क्षेत्र के आर्य समाज रोड में बुधवार को बाइक सवार बदमाशों ने दुकानदार को पैसा देने जा रही एक महिला का एक लाख रुपए से भरा पर्स छीन लिया। महिला शहर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के कृष्णापुरी मुहल्ला की नूतन तिवारी बताई गई है।

घटना की जानकारी थाना को दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर महिला एसपी के पास पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है।

बताया जा रहा है कि महिला पुरानी पोस्ट ऑफिस रोड स्थित ICICI बैंक से 1 लाख रुपए की निकासी कर पैदल ही आर्य समाज रोड स्थित दुकान पर जा रही थी। इसी दौरान एक बाइक पर सवार दो बदमाशों ने उनका पर्स और शॉल छीन लिया, जिसमें 1 लाख रुपए था । 

इस घटना के दौरान महिला सड़क पर गिरकर जख्मी भी हो गई घटना को अंजाम देने के बाद बाइक सवार बदमाश मगरदही पुल की ओर फरार हो गया। 

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घटना की जानकारी थाना को दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर महिला एसपी के पास पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है।

पटना हाईकोर्ट में पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के निर्माण, विकास व सुरक्षा के मामले पर सुनवाई अधूरी रही

The BiharNews Post : December 7, 2022
पटना हाईकोर्ट ने राज्य के पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के निर्माण,विकास व सुरक्षा के मामले सुनवाई अधूरी रही।। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राजीव रंजन सिंह व अन्य की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की जा रही है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कोर्ट में अपना पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि बिहार जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य में न तो एक अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट है और ना ही ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है।उन्होंने बताया कि देश के कई बड़े शहरों में अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट है,बल्कि छोटे छोटे शहरों में भी अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट है।

साथ कई शहरों में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की सुबिधा उपलब्ध है। पूर्व की सुनवाई में उन्होंने कोर्ट को बताया कि पटना का एयरपोर्ट सुरक्षा के लिहाज से बहुत सही नहीं है।राजगीर,बिहटा और पुनपुन में एयरपोर्ट के विकल्प के रूप में विचार तो हुआ,लेकिन अंततः अंतिम रूप से कोई परिणाम नहीं आया।

राज्य सरकार की ओर से पक्ष प्रस्तुत करते हुए एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कहा कि याचिकाकर्ता की ये माँग सही नहीं है कि खास जगह ही एयरपोर्ट बने या यात्रा के साधन का कैसे विकास हो। ये नीतिगत विषय होते है,जिस पर सरकार ही विचार कर कार्रवाई कर सकती है।

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केंद्र सरकार के अधिवक्ता के एन सिंह ने कोर्ट को बताया कि राज्य में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट हो कि नहीं, ये विचार का मुद्दा हो सकता है,लेकिन यात्रा किसी विशेष रूप हो,ये विचार के योग्य नहीं है।

पिछली सुनवाई में रूडी ने कहा था कि गया अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी आज तक कोई अंतर्राष्ट्रीय विमान का परिचालन नहीं हुआ है।अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट होने के बावजूद यहां अंतर्राष्ट्रीय विमान नहीं चलते हैं । राज्य सरकार भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर अपना स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही है ।

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पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने सभी पक्षों से जानना चाहा था कि ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट एवं अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट स्थापित करने के लिए क्या क्या अनिवार्यता हैं ?

इस मामलें पर अगली सुनवाई 12 दिसंबर,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने पटना के फ्रेजर रोड स्थित तंदूर हट को अवैध रूप से खाली कराने व तोड़े जाने के मामलें में राज्य सरकार व बिहार राज्य वित्त निगम को क्षतिपूर्ति के मामलें पर हलफनामा अगली सुनवाई में दायर करने का निर्देश दिया

The BiharNews Post : December 7, 2022
पटना हाईकोर्ट ने पटना के फ्रेजर रोड स्थित तंदूर हट को अवैध रूप से खाली कराने व तोड़े जाने के मामलें पर सुनवाई की।जस्टिस ए अमानुल्लाह की खंडपीठ ने राज्य सरकार व बिहार राज्य वित्त निगम को क्षतिपूर्ति के मामलें पर हलफनामा अगली सुनवाई में दायर करने का निर्देश दिया।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए बिहार राज्य वित्त आयोग को एम डी से बताने को कहा कि इस तरह की कार्रवाई किस अधिकार के तहत किया।कोर्ट ने प्रशासन द्वारा इस तरह की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की।

राज्य सरकार की ओर से तंदूर हट को क्षतिपूर्ति देने की बात कही गई।कोर्ट ने इस सम्बन्ध में अपनी कार्य योजना अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए पटना के जिलाधिकारी और एसएसपी व बिहार स्टेट फाइनेंसियल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक को तलब किया था।

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वरीय अधिवक्ता एस डी संजय ने कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि कानून के विरुद्ध जाकर अवैध ढंग से इस कार्य को अंजाम दिया गया है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 4 सितम्बर,2022 को रविवार को छुट्टी के दिन प्रशासन ने तंदूर हट को तोड़ने की कार्रवाई की।

उन्होने कहा कि पटना के जिलाधिकारी व बिहार स्टेट फाइनेंसियल कॉर्पोरेशन द्वारा किसी कानून का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि कॉर्पोरेशन को सिविल कोर्ट के समक्ष रेस्टोरेंट को खाली करवाने के लिए जाना चाहिए था।

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उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री सेक्रेटरी के इशारे पर प्रबंध निदेशक द्वारा पटना के जिलाधिकारी को रेस्टोरेंट को खाली करवाने के लिए पुलिस बल उपलब्ध करवाया गया था।

वरीय अधिवक्ता एस डी संजय का कहना था कि न सिर्फ रेस्टोरेंट को खाली करवाया गया, बल्कि रेस्टोरेंट को भी तोड़ दिया गया।

इस मामले पर अगली सुनवाई आगामी 15 दिसंबर,2022 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के निर्माण, विकास, सुरक्षा व नवीनीकरण के मामले पर सुनवाई कल भी जारी रहेगी

The BiharNews Post : December 6, 2022
पटना हाईकोर्ट ने राज्य के पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के निर्माण, विकास, सुरक्षा व नवीनीकरण के मामले पर सुनवाई कल भी जारी रहेगी। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राजीव रंजन सिंह व अन्य की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की।

पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कोर्ट में अपना पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि बिहार जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य में न तो एक अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट है और ना ही ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है। उन्होंने बताया कि देश के कई बड़े शहरों में अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट है, बल्कि छोटे छोटे शहरों में भी अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट है। साथ कई शहरों में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की सुबिधा उपलब्ध है।

उन्होंने बताया कि पटना का एयरपोर्ट सुरक्षा के लिहाज से बहुत सही नहीं है। राजगीर,बिहटा और पुनपुन में एयरपोर्ट के विकल्प के रूप में विचार तो हुआ,लेकिन अंततः अंतिम रूप से कोई नतीजा नहीं निकला।

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राज्य सरकार की ओर से पक्ष प्रस्तुत करते हुए एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कहा कि याचिकाकर्ता की ये माँग सही नहीं है कि खास जगह ही एयरपोर्ट बने या यात्रा के साधन का कैसे विकास किया जाए।ये नीतिगत विषय होते है,जिस पर सरकार विचार कर कार्रवाई करती है।

केंद्र सरकार के अधिवक्ता के एन सिंह ने कोर्ट को बताया कि राज्य में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट हो कि नहीं, ये विचार का मुद्दा हो सकता है,लेकिन यात्रा किसी विशेष रूप हो,ये विचारणीय नहीं है।

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पिछली सुनवाई में रूडी ने कहा था कि गया अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी आज तक कोई अंतर्राष्ट्रीय विमान का परिचालन नहीं हुआ है।अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट होने के बावजूद यहां अंतर्राष्ट्रीय विमान नहीं चलते हैं । राज्य सरकार भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर अपना स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही है ।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने सभी पक्षों से जानना चाहा था कि ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट एवं अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट स्थापित करने के लिए क्या क्या अनिवार्यता हैं ?

इस मामलें पर अगली सुनवाई 7 दिसंबर,2022 को होगी।

दो बार धोखा देने वाले नीतीश कुमार में पीएम मोदी के सामने पड़ने की हिम्मत नहीं – सुशील मोदी

The BiharNews Post : December 6, 2022
पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दो बार धोखा दिया। उनमें पीएम के सामने पड़ने की हिम्मत नहीं इसलिए जी-20 मुद्दे पर बुलायी गई सर्वदलीय बैठक में न मुख्यमंत्री गए, न जदयू अध्यक्ष ललन सिंह शामिल हुए। राजद ने भी इस बैठक में भाग नहीं लिया।

  • दो बार धोखा देने वाले नीतीश कुमार में पीएम मोदी के सामने पड़ने की हिम्मत नहीं
  • PR – जी-20 मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक में जदयू-राजद के नेता शामिल नहीं हुए
SushilModi

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार प्रधानमंत्री मोदी से नजर चुरा रहे हैं। अब उनके बिहार आने पर क्या मुख्यमंत्री प्रोटोकॉल के अनुसार पीएम का स्वागत करने भी नहीं जाएँगे? क्या वे केंद्र सरकार की उन बैठकों में नहीं सम्मिलित होंगे, जिसमें प्रधानमंत्री उपस्थित रहेंगे?

श्री मोदी ने कहा ऐसे रवैये से राज्य का नुकसान होगा और बिहार की छवि खराब होगी, किंतु नीतीश कुमार को इसकी चिंता नहीं है। ऐसा अहंकारपूर्ण व्यवहार राजनीतिक जीवन में उचित नहीं है।

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उन्होंने कहा कि भारत को जी-20 का नेतृत्व मिलने के उपलक्ष्य में बिहार सहित देश भर में 200 से ज्यादा कार्यक्रम होने वाले हैं। क्या नीतीश कुमार इन कार्यक्रमों में भी असहयोग करेंगे? यदि ऐसा हुआ, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होगा।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा परीक्षा समय पर नहीं लेने और छात्रों को डिग्री निर्गत करने में हो रहे विलम्ब पर कड़ी नाराजगी जाहिर की

The BiharNews Post : December 6, 2022
पटना हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा परीक्षा समय पर नहीं लेने और छात्रों को डिग्री निर्गत करने में हो रहे विलम्ब पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने विवेक राज की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि छात्रों का भविष्य इस तरह से खराब नहीं होना चाहिए।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य के सभी सम्बंधित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने कहा कि तीन -चार सालों से कई पाठ्यक्रमों की परीक्षा नहीं लेना गंभीर मामला है।परीक्षा लेने के बाद भी रिजल्ट प्रकाशित नहीं किया जाना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड होगा।कोर्ट ने सभी विश्वविद्यालयों के प्रशासन को निर्धारित समय में परीक्षा ले कर रिजल्ट प्रकाशित करने का निर्देश दिया।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जो कुलपति हलफनामा दायर नहीं करेंगे,उन पर पाँच हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।ये धनराशि उनके व्यक्तिगत वेतन से काटा जाएगा।

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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शाश्वत ने बताया कि राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा छात्रों की परीक्षा ली जाती है।एक तो इन विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक सत्र ऐसे भी विलम्ब से चल रहे है।परीक्षाएं भी निर्धारित समय पर नहीं ली जा रही है।

उन्होंने के कोर्ट को बताया कि परीक्षाएं लेने और रिजल्ट देने के बाद भी ये विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों को डिग्रियां देने में विलम्ब करते हैं।इससे जहां छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है,वहीं इन छात्रों के भविष्य पर भी बुरा असर पड़ता हैं।

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विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश या नौकरियों में डिग्री मांगी जाती हैं।लेकिन डिग्री नहीं होने के कारण उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश या नौकरियों से वंचित रह जाना पड़ता हैं।

इसलिए ये आवश्यक है कि छात्रों को सम्बंधित विश्वविद्यालय प्रशासन समय पर डिग्री उपलब्ध कराएं।इस मामलें पर अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद की जाएगी।

बिहार के समस्तीपुर में जवैलरी दुकान में भीषण डकैती; हथियारबंद डकैतों ने 1 करोड़ के स्वर्ण आभूषण की लूट के वारदात को दिया अंजाम

The BiharNews Post : December 6, 2022
समस्तीपुर। जवैलरी दुकान में भीषण डकैती । 10 की संख्या में हथियारबंद डकैतों ने स्वर्ण आभूषण की लूट । हीरा ज्वेलर्स में बदमाशों ने लगभग एक करोड़ के स्वर्ण आभूषण की लूट के वारदात को दिया अंजाम ।

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विरोध करने पर दुकान के कर्मी को पिस्टल के बट से मारकर किया जख्मी । घटना की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस । मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मोहनपुर की घटना ।

बिहार के कुढ़नी विधानसभा उपचुनाव में 57.9 फीसदी हुआ मतदान; 8 दिसंबर को आएंगे नतीजे

The BiharNews Post : December 6, 2022
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी विधानसभा उपचुनाव में सोमवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान हुआ। JDU प्रत्याशी व पूर्व मंत्री मनोज कुमार सिंह उर्फ मनोज कुशवाहा व BJP प्रत्याशी व पूर्व विधायक केदार प्रसाद गुप्ता समेत 13 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम मशीन में कैद हो गई।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (बिहार) एच आर श्रीनिवास ने निर्वाचन विभाग में मतदान समाप्त होने के बाद प्रेस कांफ्रेंस में इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 2020 में इस क्षेत्र के चुनाव में 64.19 फीसदी मतदान हुआ था. उन्होंने बताया कि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुआ. इस बार उपचुनाव में 57.9 फीसदी मतदान हुआ.

मतादाताओं के अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए 320 मतदान केंद्र बनाए गए ।

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मतदाता सुबह 7 बजे से लेकर शाम के 6 बजे तक अपने मताधिकार का प्रयोग किया। ठंड के बावजूद कई मतदान केंद्रों पर सुबह ही मतदाता पहुंच गए, इस कारण मतदाताओं की लंबी कतार मतदान केंद्रों पर देखी गई। 

 इस उपचुनाव में मुकेश सहनी की वीआईपी और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के उम्मीदवार भी मैदान में हैं। लेकिन महागठबंधन की ओर से चुनावी मैदान में उतरे मनोज कुशवाहा और भाजपा के प्रत्याशी केदार प्रसाद गुप्ता के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है।

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Bihar By Election: बिहार के कुढ़नी में कड़ी सुरक्षा के बीच वोटिंग जारी; 1 बजे तक 37% मतदान

The BiharNews Post : December 5, 2022
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी विधानसभा उपचुनाव में सोमवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान जारी है। दोपहर 1 बजे तक 37% मतदान की खबर है।

मतादाताओं के अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए 320 मतदान केंद्र बनाए गए ।

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मतदाता सुबह 7 बजे से लेकर शाम के 6 बजे तक अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। ठंड के बावजूद कई मतदान केंद्रों पर सुबह ही मतदाता पहुंच गए, इस कारण मतदाताओं की लंबी कतार मतदान केंद्रों पर देखी जा रही है। 

इस उपचुनाव में मुकेश सहनी की वीआईपी और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के उम्मीदवार भी मैदान में हैं। लेकिन महागठबंधन की ओर से चुनावी मैदान में उतरे मनोज कुशवाहा और भाजपा के प्रत्याशी केदार प्रसाद गुप्ता के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है।

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Patna High Court News: भागलपुर के चर्चित सैनडिश कमपॉउन्ड क्षेत्र में अनधिकृत रूप से बनाए गए निर्माण के मामलें में नगर निगम के आयुक्त को अगली सुनवाई में कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया

The BiharNews Post : December 5, 2022
पटना हाईकोर्ट ने भागलपुर के चर्चित सैनडिश कमपॉउन्ड क्षेत्र में अनधिकृत रूप से बनाए गए निर्माण के मामलें पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने जनहित याचिकाकर्ता गोयनका की याचिका पर सुनवाई करते भागलपुर नगर निगम के आयुक्त को की जा रही कार्रवाई का ब्यौरा पेश करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने भागलपुर नगर निगम के आयुक्त को अगली सुनवाई में कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इस मामलें पर सुनवाई करते हुए हुए अनधिकृत निर्माणों पर रोक लगा दिया था।याचिकाकर्ता की अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने बताया कि भागलपुर में ये एक सार्वजानिक पार्क हैं,जहां यहाँ के नागरिक टहलने,खेलने और मनोरंजन के लिए आते है।

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उन्होंने कहा कि वे पार्क के सौंदर्यीकरण का समर्थन करती है,लेकिन पार्क के मूल उद्देश्य में परिवर्तन नहीं हो। अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने बताया कि कोर्ट ने इस मामलें पर 2004 में भी सुनवाई की थी।कोर्ट ने पार्क के क्षेत्र के भीतर किसी तरह के निर्माण पर रोक लगा दिया था।

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कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि पार्क का जिस उद्देश्य के बनाया गया है, उसी के लिए उपयोग हो।उन्होंने कोर्ट को बताया कि बाद में प्रशासन ने जन उपयोगी निर्माण के नाम पर कुछ निर्माण कार्य करने की अनुमति कोर्ट से ले ली।

लेकिन बाद में अन्धाधुंध और मनमाने तरीके से निर्माण होने लगे,जिससे इस पार्क का उद्देश्य ही खत्म हो गया।उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया था कि भागलपुर नगर निगम को 29 सितम्बर,2021 को कोर्ट के आदेश को पालन करने के सम्बन्ध में निर्देश दिया जाए।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 15 दिसंबर,2022 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने मुज़फ़्फ़रपुर के राजन साह की 6 वर्षीय पुत्री खुशी कुमारी के चर्चित अपहरण के मामलें के जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा

The BiharNews Post : December 5, 2022
पटना हाईकोर्ट ने मुज़फ़्फ़रपुर जिला के अंतर्गत राजन साह की 6 वर्षीय पुत्री खुशी कुमारी के चर्चित अपहरण के मामलें के जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया है।

जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों विरुद्ध विभागीय कार्यवाही के लिए एस एस पी, मुजफ्फरपुर को निर्देश दिया है।

कोर्ट ने सीबीआई को इस मामलें मे यथाशीघ्र कार्रवाई कर अपहृत बालिका को ढूंढने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने एस एस पी, मुजफ्फरपुर को इस मामलें से सभी रिकॉर्ड सीबीआई को सौपने का निर्देश दिया है।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सीबीआई और निर्देशक,सी एफ एस एल,नई दिल्ली को पार्टी बनाने का निर्देश दिया था।

पूर्व की इस मामलें की सुनवाई के दौरान एसएसपी मुज़फ़्फ़रपुर जयंतकांत ऑनलाइन उपस्थित रहे थे। अपहृता के वकील ओम प्रकाश कुमार ने कोर्ट को बताया कि एसएसपी,मुजफ्फरपुर द्वारा आज़तक सिर्फ कागजी कार्रवाई किया गया है।

उन्होंने बताया कि लगभग 3 महीना से सिर्फ पॉलीग्राफी टेस्ट का बहाना बना कर कोर्ट का समय बर्बाद किया गया।

पिछली सुनवाई मे अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया था कि एक ऑडियो रेकॉर्डिंग है ,जिसमे संदिग्ध राहुल कुमार की आवाज है।वह अपहृत खुशी के बारे में जानता है।इस पर कोर्ट ने आदेश दिया था कि वह ऑडियो क्लिप एस एस पी को दिया जाए। एसएसपी ऑडियो की पुष्टि करके करवाई करें।

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लेकिन जो शपथ पत्र एसएसपी के द्वारा हाई कोर्ट में फ़ाइल किया गया था ,उसमे ऑडियो क्लिप का कोई जिक्र नही किया गया।

कोर्ट ने पाया कि इस कांड का उद्भेदन अब एस एस पी, मुज़फ़्फ़रपुर द्वारा नही हो सकता है।कोर्ट ने पिछली सुनवाई में यह भी आदेश दिया था कि 14.10.2022 तक सभी कागजात सीबीआई को मुहैया करवाई जाए।कोर्ट ने सीबीआई के वकील को भी कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया था।

यह मामला 16 फरवरी 2021 को 5 साल की खुशी का अपहरण से जुड़ा है। इसका सुराग आज तक नहीं मिला है। खुशी के पिता मुज़फ़्फ़रपुर पुलिस के कार्यशैली से संतुष्ट नही थे, जिसके कारण खुशी के पिता राजन साह ने पटना हाइकोर्ट में याचिका दायर किया था।ये याचिका अधिवक्ता ओमप्रकाश कुमार ने याचिकाकर्ता की ओर से दायर किया था।

इसमे याचिकाकर्ता ने मुज़फ़्फ़रपुर पुलिस के कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए बच्ची को जल्द से जल्द ढूंढ़वाने का आग्रह किया था।

Bihar By Election: बिहार के कुढ़नी में कड़ी सुरक्षा के बीच वोटिंग जारी; 11 बजे तक 24% मतदान

The BiharNews Post : December 5, 2022
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी विधानसभा उपचुनाव में सोमवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान जारी है। मतादाताओं के अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए 320 मतदान केंद्र बनाए गए ।

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मतदाता सुबह 7 बजे से लेकर शाम के 6 बजे तक अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। ठंड के बावजूद कई मतदान केंद्रों पर सुबह ही मतदाता पहुंच गए, इस कारण मतदाताओं की लंबी कतार मतदान केंद्रों पर देखी जा रही है। 

 इस उपचुनाव में मुकेश सहनी की वीआईपी और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के उम्मीदवार भी मैदान में हैं। लेकिन महागठबंधन की ओर से चुनावी मैदान में उतरे मनोज कुशवाहा और भाजपा के प्रत्याशी केदार प्रसाद गुप्ता के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है।

अब बस करिए नीतीश जी

कुढ़नी विधानसभा उप चुनाव को कवर करने के दौरान पटना मुजफ्फरपुर मुख्य मार्ग स्थिति तुर्की फ्लाई ओभर के नीचे से बाये एक रास्ता जाती है जो आगे पताही वाली सड़क में मिल जाती है रास्ते में बीजेपी नेता सुरेश शर्मा का मेडिकल कॉलेज भी है सड़क के किनारे दोनों तरफ कई किलोमीटर में दलित जाति के लोग झोपड़ी बनाकर रहता है संयोग ऐसा रहा है जहां कहीं भी मतदाताओं का नब्ज़ टटोलने रुकते थे थोड़ी देर में जदयू के नेता महेश्वर हजारी भी पहुंच जाते थे शायद उन्हें इन इलाकों की जिम्मेदारी दी गयी थी महेश्वर हजारी को कोई जगह मतदाताओं के गुस्से का भी शिकार होना पड़ा वो सब देखते लोगों से बात करते आगे बढ़ रहे थे ।   

इसी दौरान एक दरवाजे पर कुछ अलग तरह की भीड़ दिखाई दी गाड़ी रोका और कुछ समझने कि कोशिश कर ही रहा था कि मेरी नजर एक महिला के ऊपर पड़ जो किसी से लिपट कर जोड़ जोड़ से रो रही थी गाड़ी से उतरे और आगे बढ़ लोगों से पूछा क्या हुआ पता चला उस महिला का बेटा शराब मामले में तीन माह से जेल में बंद था और आज ही जेल से बाहर निकला है ।

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उत्सुकता बस मैं उस महिला के पास चला गया और पूछा क्या हुआ फिर उस महिला ने जो बताया सच कहिए तो मुझे नीतीश कुमार के जिद्द से नफरत हो गया उसका एक बेटा है जो दिल्ली में कमाता था दुर्गा पूजा में घर आया था ,मित्र के साथ शराब पीते पकड़ा गया पुलिस घर पर आयी सर्च के दौरान जो भी 15 से 20 हजार रुपया कमा कर लाया था वो राशी भी पुलिस वाले साथ लेकर चले गये ।                             

घर में अकेली एक माँ बेटे को जेल से बाहर निकालने में उसके पास ससुर का दिया एक कट्ठा जमीन बेचना पड़ा और 18 हजार रुपया बेल कराने में खर्च हुआ जिसमे उक्त महिला की माने तो 10 हजार रुपया जज साहब भी लिए और 8 हजार रुपया वकील इसमें कितनी सच्चाई है कहना मुश्किल है लेकिन कोर्ट कचहरी देखने वाले इसके एक दूर के रिश्तेदार ने इसी नाम पर पैसा लिया जमीन बेचने और और पैसा के व्यवस्था में करीब तीन माह लग गया तब तक उसका बेटा जेल में ही रहा ।   

जैसे जैसे उसे भरोसा हो रहा था कि सामने वाला पत्रकार मेरी बात को लोगों तक पहुंचाएगा वैसे वैसे वो खुल रही थी सर नीतीशवा मिल जाए तो झाड़ू से मरवाई ,भूमिहरवा सब शराब बेच भी रहा है और पी भी रहा है उसको पुलिस कुछ नहीं करता गरीब सब को पकड़ पकड़ कर जेल भेज रहा है नीतीशवा देखते देखते 25 से 30 महिला पहुंच गई और फिर क्या था सर शराबबंदी कानून के लिए लड़े हम लोग और उलटे हम्ही लोगों का बेटा भतार जेल जा रहा है और शराब का काम करने वाला मस्त है सर सामने में जो घर देख रहे हैं शराब बेच कर बनाया है, तीन ट्रक चल रहा है इसका और जेल जा रहे हैं हम लोग ई बार नीतीशवा के बता देवई गरीब के मार देलक ई शराबबंदी ।            

जहां भी गये जिस गांव में गये बस एक ही चर्चा शराबबंदी शराबबंदी बातचीत से तो ऐसा ही लगा भ्रष्टाचार और अफरशाही से जितना लोग परेशान नहीं हुआ उससे कहीं अधिक शराबबंदी कानून से आम लोग परेशान है जो हाल देखने को मिला है वो अगर वोट में परिणत हो गया तो नीतीश कुमार की सबसे बड़ी हार कुढ़नी में होगी ।

पटना हाइकोर्ट ने राज्य सरकार के वकीलों की फीस में पिछले 14 सालों से कोई बढ़ोतरी नहीं होने के मामलें पर चीफ सेक्रेट्री को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया

दिसम्बर 2, 2022 । पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार के वकीलों की फीस में पिछले 14 सालों से कोई बढ़ोतरी नहीं होने के मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य के चीफ सेक्रेट्री को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने अधिवक्ता एस एस सुंदरम की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट को बताया गया कि केंद्र सरकार सहित अन्य राज्य राज्य सरकार के वकीलों की तुलना में यहाँ के सरकारी वकीलों को काफी कम फीस का भुगतान किया जाता है।
कोर्ट ने इस जनहित याचिका पर ऑनलाइन सुनवाई करते हुए राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि 2 हफ्ते के अंदर इस जनहित याचिका पर विस्तृत जवाब दे।

याचिककर्ता की ओर से पूर्व महाधिवक्ता एवं सीनियर एडवोकेट पी के शाही ने बहस करते हुए कहा कि पटना हाई कोर्ट में ही केंद्र सरकार के वकीलों की जहाँ रोजाना फीस न्यूनतम 9 हज़ार रुपये है, वहाँ बिहार सरकार के वकीलों को इसी हाई कोर्ट में रोजाना अधिकतम फीस रू 2750 से 3750 तक ही है।

वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने कोर्ट को जानकारी दी कि पंजाब व हरियाणा, दिल्ली सहित पड़ोसी राज्य झारखंड और बंगाल में भी वहाँ के सरकारी वकीलों का फीस बिहार के सरकारी वकीलों से ज्यादा है।

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एडवोकेट विकास कुमार ने कोर्ट को बताया कि केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ( कैट) पटना बेंच में तो मूल वाद पत्र दायर कर उसपे बहस करने वाले केंद्र सरकार के वकीलों को रोजाना हर मामले पर 9 हज़ार रुपये फीस मिलता है।

सबसे दयनीय स्थिति राज्य के सहायक सरकारी वकीलों की है, जिन्हे रोजाना मात्र 1250 रुपये फीस पर ही काम करना पड़ता है।

कोर्ट ने इस मामले को एक गंभीर जनहित याचिका करार देते हुए मुख्य सचिव को शीघ्र प्रभावी कदम उठाने को आदेश दिया है।कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को भी कहा कि हाईकोर्ट के आज के आदेश को फौरन मुख्य सचिव तक प्रेषित करें ।
बिहार में राज्य सरकारों के वकीलों के फीस में वृद्धि 14 साल पहले बिहार के महाधिवक्ता पी के शाही के ही कार्यकाल में ही हुई थी।

इस मामले की अगली सुनवाई 20 दिसंबर,2022 को की जाएगी।।

नीतीश का साख दाव पर

Bihar By Election: कुढ़नी विधानसभा चुनाव निलाभ और ओवैसी के बीच फंसा गया है । वैसे नीतीश कुमार की अलोकप्रियता और राजद के वोटर का आक्रामक ना होना बीजेपी को रेस में बनाये हुए हैं। वैसे तेजस्वी के सभा के बाद बदलाव जरूर हुआ है लेकिन स्थिति ऐसी नहीं है कि महागठबंधन की जीत तय हो।

कुढ़नी विधानसभा उपचुनाव के बहाने काफी लम्बे अरसे बाद गांव के लोगों के बीच घंटों रहने का मौका मिला इस दौरान सभी वर्ग जाति और समुदाय से जुड़े लोगों से हर मुद्दे पर खुलकर चर्चा हुई, हैरान करने वाली बात यह रही कि चुनाव जदयू लड़ रही है लेकिन नीतीश कुमार कहीं चर्चा में नहीं है,नीतीश को लेकर एक अजीब तरह की बेरुखी देखने का मिला ,नीतीश पर चर्चा करने को तैयार नहीं है।

महिला वोटर नीतीश का नाम सुनते ही उसके चेहरे का भाव बदल जाता था और उनमें नीतीश के नाम के साथ एक अलग तरह का विश्वास झलकता था लेकिन उसके चेहरे से वो विश्वास और भरोसा खत्म हो गया है एक अजीब तरह का निराशा देखने को मिला ।

कुढ़नी के दलित बस्ती में लोगों से बात करने के बाद समझ में आया कि मांझी शराबबंदी को लेकर बार बार क्यों बयान दे रहे हैं भ्रष्टाचार और अफरशाही से कहीं अधिक लोग शराबबंदी के नाम पर उत्पाद विभाग और पुलिस के जुल्म से परेशान है जो शराब नहीं भी पीता है वह भी गुस्से में है गांव शराब माफिया के हवाले हो गया है और सब कुछ वही तय कर रहा है नीतीश की अलोकप्रियता के पीछे शराबबंदी एक बड़ी वजह है।

हालांकि कुढ़नी विधानसभा मुजफ्फरपुर शहर और पटना समस्तीपुर फोरलेन पर होने के कारण शहरीकरण काफी तेजी से हुआ है और उसका असर यहां रहने वाले लोगों के मानसिकता पर साफ दिखता है और इसका लाभ स्वाभाविक तौर पर बीजेपी को है लेकिन निलाफ अभी भी मैदान में बहुत ही मजबूती से डटा हुआ है और उसके साथ का भूमिहार का युवक अभी भी डटा हुआ और उसी अंदाज में साहनी वोटर भी निलाफ के साथ खड़ा है इस वजह से बहुत कुछ अभी भी स्पष्ट नहीं है।

वही मुसलमान का युवक ओवैसी के साथ है लेकिन इन सबके बीच नीतीश की अलोकप्रियता महागठबंधन के लिए भारी पड़ रहा है क्यों कि अति पिछड़ा वोटर भी नीतीश के साथ उस मजबूती के साथ खड़ा नहीं है महंगाई को लेकर जनता त्रस्त है और वो बोल भी रहा है कि मुफ्त में चावल गेहूं देकर दाल और खाने वाले तेल का दाम बढ़ा दिया है।

महंगाई बड़ा मुद्दा है और 2024 का चुनाव कुछ अलग होगा ऐसा महसूस हो रहा है लेकिन नीतीश महागठबंधन के लिए लायबिलिटी ना बन जाए इसका खतरा साफ दिख रहा है वैसे नीतीश इस तरह की स्थिति से बाहर निकलने के माहिर खिलाड़ी रहे हैं ।

पटना हाईकोर्ट ने पटना समाहरणालय बार एसोसिएशन भवन को तोड़े जाने के मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इस सम्बन्ध में की जा रही कार्रवाई का ब्यौरा देने का निर्देश दिया

पटना हाईकोर्ट ने पटना समाहरणालय बार एसोसिएशन भवन को तोड़े जाने के मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इस सम्बन्ध में की जा रही कार्रवाई का ब्यौरा देने का निर्देश दिया। उपेंद्र नारायण सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

कोर्ट ने राज्य सरकार को बताने को बताने को कहा कि वकीलों और उनके स्टाफ के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था की जानकारी तलब की।साथ ये भी बताने को कहा कि वकीलों के लिए बन रहे भवन का निर्माण कार्य कब तक पूरा होगा।

वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने बताया कि पटना के जिलाधिकारी ने ये कहा कि वकीलों के बैठने की व्यवस्था विकास भवन में की जा सकती है।इसके लिए कार्रवाई की जा रही है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से वकीलों के लिए आधुनिक और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराने को कहा था।वरीय अधिवक्ता योगेश चन्द्र वर्मा ने कोर्ट को बताया कि पटना समाहरणालय बार एसोसिएशन के भवन को तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि वकीलों के बैठने और काम करने की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।राज्य के विभिन्न बार एसोसिएशन के भवन या तो है ही नहीं या काफी बुरी स्थिति में है।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट में उपस्थित पटना के प्रमंडलीय आयुक्त ने बताया कि पटना के जिलाधिकारी ने इस सम्बन्ध में बैठक किया।

उस बैठक की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत किया गया था।इसमें कहा गया कि वकीलों के बैठने के लिए भवन निर्माण किया जाएगा।जबतक वकीलों को बैठने के लिए विकास भवन में बैठने की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।

कोर्ट ने बिहार राज्य बार कॉउन्सिल और याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को राज्य के विभिन्न बार एसोसिएशनों के भवनों की हालत के सम्बन्ध में जानकारी देने को कहा। वरीय अधिवक्ता योगेश चन्द्र वर्मा ने कोर्ट को बताया कि राज्य में वकीलों को बैठने और कार्य करने के लिए न तो उचित व्यवस्था है और न ही भवन हैं।

ऐसे में वकीलों के पेशागत कार्य करने में बहुत कठिनाई होती हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 6 दिसम्बर,2022 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने पटना के फ्रेजर रोड स्थित तंदूर हट को अवैध रूप से खाली कराने व तोड़े जाने के मामलें पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की

पटना हाईकोर्ट ने पटना के फ्रेजर रोड स्थित तंदूर हट को अवैध रूप से खाली कराने व तोड़े जाने के मामलें पर सुनवाई की।जस्टिस ए अमानुल्लाह की खंडपीठ ने इस मामलें पर नाराजगी जाहिर करते हुए बिहार राज्य वित्त आयोग को एम डी से बताने को कहा कि इस तरह की कार्रवाई किस अधिकार के तहत किया। कोर्ट ने प्रशासन द्वारा इस तरह की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की।

कोर्ट ने राज्य सरकार को इस सम्बन्ध में अपनी कार्य योजना अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए पटना के जिलाधिकारी और एसएसपी व बिहार स्टेट फाइनेंसियल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक को तलब किया था।

वरीय अधिवक्ता एस डी संजय ने कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि कानून के विरुद्ध जाकर अवैध ढंग से इस कार्य को अंजाम दिया गया है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 4 सितम्बर,2022 को रविवार को छुट्टी के दिन प्रशासन ने तंदूर हट को तोड़ने की कार्रवाई की।

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उन्होने कहा कि पटना के जिलाधिकारी व बिहार स्टेट फाइनेंसियल कॉर्पोरेशन द्वारा किसी कानून का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि कॉर्पोरेशन को सिविल कोर्ट के समक्ष रेस्टोरेंट को खाली करवाने के लिए जाना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री सेक्रेटरी के इशारे पर प्रबंध निदेशक द्वारा पटना के जिलाधिकारी को रेस्टोरेंट को खाली करवाने के लिए पुलिस बल उपलब्ध करवाया गया था।

वरीय अधिवक्ता का कहना था कि न सिर्फ रेस्टोरेंट को खाली करवाया गया, बल्कि रेस्टोरेंट को भी तोड़ दिया गया।

राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता शिव शंकर प्रसाद व उनके सहायक अधिवक्ता संजय कुमार कोर्ट के समक्ष सरकार का पक्ष रखा।इस मामले पर अगली सुनवाई आगामी 7 दिसंबर,2022 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में नगर निकाय के विघटन की अवधि 6 माह से ज्यादा होने के बाद एडमिनिस्ट्रेटर द्वारा निकायों में कार्य संभाले जाने के मामलें पर सुनवाई 19 दिसंबर,2022 तक टल गयी

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में नगर निकाय के विघटन की अवधि 6 माह से ज्यादा होने के बाद एडमिनिस्ट्रेटर द्वारा निकायों में कार्य संभाले जाने के मामलें पर सुनवाई 19 दिसंबर,2022 तक टल गयी।जस्टिस ए अमानुल्लाह की खंडपीठ ने अंजू कुमारी व अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई की।

एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कोर्ट को बताया कि चुनाव आयोग ने राज्य में नगर निकायों के चुनाव तिथियों की घोषणा कर दी है।दो चरण में ये चुनाव होंगे 18 दिसंबर और 28 दिसंबर,2022 चुनाव होंगे।31दिसम्बर,2022 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

पिछली कोर्ट ने उनसे जानना चाहा है कि क्यों नहीं प्रावधानों और कानूनों के उल्लंघन को मानते हुए एडमिनिस्ट्रेटर द्वारा किए जा रहे कार्यों पर कोर्ट द्वारा रोक लगा दिया जाए।

कोर्ट को राज्य सरकार के अधिवक्ता किंकर कुमार ने बताया था कि डेडीकेटेड कमीशन का गठन हाई कोर्ट के निर्देशानुसार कर दिया गया है।उसका रिपोर्ट आते ही राज्य में नगर निकाय का चुनाव करा लिया जाएगा।

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याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एसबीके मंगलम ने कोर्ट को बताया कि संविधान के प्रावधानों के अनुसार 5 वर्ष की अवधि समाप्त होने के पहले नगर निकाय का चुनाव हर हाल में करा लेना है। लेकिन बिहार में बहुत ऐसे नगर निकाय हैं, जिनको विघटित हुए एक बरस से ज्यादा की अवधि हो गई है ।इसके बावजूद इसके अभी भी उन नगर निकायों में एडमिनिस्ट्रेटर के द्वारा कार्य कराया जा रहा है, जो कानूनी रूप से सही नहीं है।

कोर्ट को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस तरह के कार्यों को गैरकानूनी माना है।याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जिस प्रकार पंचायत में परामर्श दात्री समिति का गठन किया गया है ,उसी प्रकार नगर निकाय में भी परामर्श दात्री समिति का गठन किया जाए।

उन्होंने बताया कि इससे नगर निकाय का कार्य सुचारू रूप से चुनाव संपन्न होने तक हो सकेगा।चुनाव आयोग की ओर से अधिवक्ता संजीव निकेश ने कोर्ट को बताया था कि कोर्ट के निर्देशानुसार डेडिकेटेड कमीशन की रिपोर्ट आ जाने के बाद नगर निकाय का चुनाव सम्पन्न करा लिया जाएगा।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 19दिसंबर, 2022 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने बियाड़ा की आवंटित भूमि को अस्पताल और निजी मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवंटित करने और राज्य सरकार व बियाड़ा को अपनी औद्योगिक नीति में परिवर्तन लाने के सम्बन्ध में जवाबतलब किया

पटना हाईकोर्ट ने बियाड़ा की आवंटित भूमि को अस्पताल और निजी मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवंटित करने और राज्य सरकार व बियाड़ा को अपनी औद्योगिक नीति में परिवर्तन लाने के सम्बन्ध में जवाबतलब किया है।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने एक कंपनी की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य के औद्योगिक विभाग के प्रधान सचिव संदीप पॉन्ड्रिक से स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

इस दौरान महाधिवक्ता ललित किशोर भी मौजूद थे। महाधिवक्ता व प्रधान सचिव पॉन्ड्रिक दोनों ने कोर्ट को धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि पटना हाईकोर्ट के हाल के आदेशों के आलोक में ही बियाडा अपनी भूमि आवंटन नीति को और भी लचीला कर दिया है।

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चूंकि बिहार में जमीन के उपजाऊ होने के कारण, उनके दाम बहुत ज्यादा हैं, इसीलिए बियाडा ने बिहार के बाहर से आने वाले उद्यमियों को आकर्षित करने के लिए भूमि के वर्तमान बाजार मूल्य में 20 से 80 फ़ीसदी तक की रियायत दे रही है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 14दिसम्बर,2022 को होगी।

बिहार में नगर निकाय चुनाव की तारीखों का ऐलान; 18 दिसंबर और 28 दिसंबर को वोटिंग

नगर निकाय चुनाव की हुई घोषणा । 18-12-2022 को प्रथम चरण का और 28-12-2022 को दूसरे चरण का चुनाव होगा।

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प्रथम चरण का चुनाव –18-12-2022 को और मतगणना 20–12–2022 ।

दूसरे चरण का चुनाव –28–12-2022 को और मतगनना 30-12–2022 ।

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