Press "Enter" to skip to content

पटना में STF ने 2026 के पहले दस महीनों में 19 एनकाउंटर किए, तीन मौतें, कई घायल; भरत तिवारी केस को सामान्य अपराध मानकर सूची से

पटना के मुख्यालय में सुबह के समय आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के उप निदेशालय (DIG) ने 2026 के पहले दस महीनों में STF द्वारा किए गए कुल उन्नीस एनकाउंटर की विस्तृत जानकारी दी। इन एनकाउंटरों में तीन लोगों की मौत हुई, कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए, और शेष मामलों में अभियुक्तों को हिरासत में लेकर आगे की जांच जारी है। इस बयान के दौरान पत्रकारों ने विशेष रूप से भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी मामले की स्थिति को लेकर सवाल उठाए, क्योंकि इस केस को STF ने अपनी उपलब्धियों की सूची से बाहर रखा है।STF ने पिछले साल से अपने संचालन को तेज़ करने की घोषणा की थी, जिसमें अवैध गैंगा, आतंकवादी नेटवर्क और गंभीर अपराधियों को निशाना बनाना शामिल था। 2025 में STF ने 12 एनकाउंटर किए थे, जिनमें दो मौतें और चार गंभीर चोटें दर्ज थीं। 2026 में इस संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, क्योंकि राज्य सरकार ने STF को अतिरिक्त संसाधन और विस्तारित अधिकार प्रदान किए। इस वर्ष के एनकाउंटर मुख्यतः झारखंड और बिहार की सीमाई इलाकों में हुए, जहाँ अपराधियों के समूह अक्सर सीमाओं के पार गतिविधियाँ संचालित करते हैं।

भरत भूषण तिवारी, जो 2024 में एक बड़ी डकैती के आरोप में गिरफ्तार हुए थे, को 2025 में जेल से रिहा कर दिया गया था, जब न्यायालय ने सबूतों में खामियों को उजागर किया। उनका रिहाई निर्णय कई बार न्यायिक प्रक्रिया में देरी और अपीलों के कारण लंबित रहा, पर अंततः उच्च न्यायालय ने उन्हें रिहा कर दिया। इस रिहाई के बाद तिवारी के परिवार ने सार्वजनिक रूप से उनके अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया, जबकि स्थानीय पुलिस ने कहा कि मामले में नई साक्ष्य अभी तक उपलब्ध नहीं हुए हैं।

जब प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस मुद्दे पर सवाल उठाया गया, तो DIG ने बताया कि भरत तिवारी का केस STF की कार्रवाई से अलग था, क्योंकि यह एक सामान्य आपराधिक मामला था, न कि आतंकवाद या संगठित अपराध से जुड़ा हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि STF की प्राथमिकता उन मामलों पर है जो सीधे राज्य की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं, जबकि सामान्य अपराधियों के मामलों को स्थानीय पुलिस के अधीन रखा जाता है।

DIG ने यह स्पष्ट किया कि 2026 में किए गए एनकाउंटरों में सभी के पीछे व्यापक इंटेलिजेंस समर्थन था, और प्रत्येक ऑपरेशन को कानूनी प्रोटोकॉल के अनुसार चलाया गया। उन्होंने कहा कि इन एनकाउंटरों में शत्रु समूहों की हथियारों और धन की बरामदगी हुई, जिससे राज्य की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार आया। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि कई बार एनकाउंटर से पहले वार्ता की कोशिशें की गईं, परन्तु सामने वाले पक्ष ने सहयोग नहीं किया।

भोजपुर में भरत तिवारी के परिवार के प्रतिनिधियों ने इस अवसर पर कहा कि उनका मामला STF की “उपलब्धियों की सूची” में न आना एक बड़ी अनदेखी है, क्योंकि उन्होंने कई बार STF को सहयोग करने की कोशिश की थी। उन्होंने यह भी उजागर किया कि तिवारी पर लगाए गए आरोपों में कई प्रमाणिक असंगतियां हैं, और उन्होंने STF के साथ संवाद स्थापित करने की इच्छा जताई थी।

दूसरी ओर, स्थानीय पुलिस प्रमुख ने कहा कि तिवारी के खिलाफ चल रही जांच में अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं, और इसलिए उन्होंने इस मामले को न्यायालय के आदेश अनुसार आगे बढ़ाया है। उन्होंने यह भी बताया कि तिवारी के परिवार के द्वारा दायर कई याचिकाओं को न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया है, क्योंकि उन्होंने पर्याप्त प्रमाण पेश नहीं किए।

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार STF के कार्यों को पूर्ण समर्थन देती है, और वह इस बात को लेकर स्पष्ट है कि STF का मिशन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं पर केन्द्रित है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में न्यायिक प्रक्रिया को बाधित नहीं किया जा रहा है, और सभी मामलों को पारदर्शी रूप से सुलझाने के लिए उचित कदम उठाए जा रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों ने इस विकास को राज्य की सुरक्षा नीति में एक मोड़ के रूप में देखा है। उन्होंने कहा कि STF के बढ़ते एनकाउंटर संख्या से यह संकेत मिलता है कि राज्य में संगठित अपराध और उग्रवादी गतिविधियों में गिरावट आ रही है, परन्तु सामान्य अपराधों पर ध्यान कम हो सकता है। कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि भरत तिवारी जैसे मामलों को अलग रखना STF की छवि को सुरक्षित रखने के लिए एक रणनीति हो सकती है।

Updated: August 22, 2026

The surge in STF encounters hints that expanded powers are curbing cross‑border militancy, yet the deliberate exclusion of ordinary crimes like the Tiwari case reveals a tactical focus on preserving the unit’s “elite‑force” image.
If the agency continues to prioritize high‑profile security ops over routine offenses,

BiharNewsPost
The BiharNews Post

बिहार न्यूज़ पोस्ट - बिहार का नं. 1 न्यूज़ पोर्टल !

More from खबर बिहार कीMore posts in खबर बिहार की »
More from बिहार ब्रेकिंग न्यूज़More posts in बिहार ब्रेकिंग न्यूज़ »