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बिहार सरकार ने मॉडल स्कूलों में एकल वरिष्ठ शैक्षणिक अधिकारी नियुक्त कर निगरानी व शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने की योजना घोषित की

बिहार सरकार ने अपने मॉडल स्कूलों के प्रबंधन में एक नया कदम उठाते हुए हर स्कूल की निगरानी के लिए एक विशिष्ट अधिकारी नियुक्त करने का प्रस्ताव पेश किया है, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। यह निर्णय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा पटना स्थित लोक सेवक आवास में आयोजित शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में घोषित किया गया, जहाँ उन्होंने कहा कि इस पहल से विद्यार्थियों की शैक्षणिक तैयारी, विशेषकर JEE‑NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा।वर्तमान में बिहार के मॉडल स्कूलों को विभिन्न विभागीय अधिकारियों द्वारा सामूहिक रूप से नियंत्रित किया जाता है, जिससे निगरानी में असमानताएँ और कार्यकुशलता में कमी देखी गई है। पिछले तीन वर्षों में इन स्कूलों में छात्र परिणामों में उतार‑चढ़ाव और शिक्षक absenteeism की समस्या प्रमुख रही, जिसके कारण कई बार राष्ट्रीय स्तर के प्रवेश परीक्षाओं में प्रदर्शन घटता रहा। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए सरकार ने एक केंद्रित प्रबंधन प्रणाली अपनाने का निर्णय लिया है, जिससे प्रत्येक स्कूल को एक जिम्मेदार अधिकारी के अधीन रखा जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक मॉडल स्कूल को एक वरिष्ठ शैक्षणिक अधिकारी (एसईओ) की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जो स्कूल की दैनिक गतिविधियों, शिक्षण‑सामग्री की गुणवत्ता, शिक्षक उपस्थिती, और विद्यार्थियों की उपस्थिति पर निरंतर नजर रखेगा। यह अधिकारी मासिक निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसमें शैक्षिक प्रदर्शन, संसाधन उपयोग और अभिलेखीय अनुपालन की विस्तृत जानकारी शामिल होगी। रिपोर्ट को सीधे शिक्षा विभाग के प्रमुख को भेजा जाएगा, जिससे नीतिगत सुधारों को तेज़ी से लागू किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने इस योजना के मुख्य उद्देश्यों में शैक्षिक परिणामों को स्थिर करना, मॉडल स्कूलों को JEE‑NEET जैसे प्रवेश परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने हेतु तैयार करना, और अभिभावकों व समुदाय के विश्वास को पुनर्स्थापित करना बताया। उन्होंने कहा कि एक ही अधिकारी की ज़िम्मेदारी से प्रशासनिक दायित्व स्पष्ट होगा और किसी भी अनियमितता की जल्दी पहचान संभव होगी। साथ ही, इस कदम से स्कूल में संसाधनों का बेहतर वितरण और शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का सुदृढ़ीकरण भी अपेक्षित है।

शिक्षा विभाग ने इस नई नीति के कार्यान्वयन के लिए एक विस्तृत कार्यप्रणाली तैयार की है, जिसमें अधिकारी की चयन प्रक्रिया, प्रशिक्षण मॉड्यूल, निरीक्षण मानक, और रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क शामिल हैं। चयन में शैक्षणिक अनुभव, प्रशासनिक कौशल और डिजिटल प्रबंधन क्षमताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। अधिकारी को हर महीने स्कूल में कम से कम दो बार विज़िट करनी होगी और साथ ही ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से वास्तविक‑समय डेटा अपडेट करना अनिवार्य होगा। यह पोर्टल सभी स्टेकहोल्डर्स को पारदर्शी जानकारी प्रदान करेगा।

पहले चरण में 250 मॉडल स्कूलों को इस नई व्यवस्था के तहत लाया जाएगा, जिसमें 150 स्कूलों में पहले से ही निरीक्षण प्रणाली स्थापित है और शेष 100 स्कूलों में शीघ्र ही इसे लागू किया जाएगा। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, इन स्कूलों में शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता में 30 प्रतिशत तक सुधार हुआ है, जबकि शिक्षक अनुपस्थिति में 12 प्रतिशत की कमी आई है। यह आंकड़ा नीति निर्माताओं को इस पहल की प्रभावशीलता का प्रारंभिक संकेत देता है।

शिक्षक संघों ने इस कदम को मिश्रित प्रतिक्रिया के साथ देखा है। कई शिक्षकों ने कहा कि एकल अधिकारी की जिम्मेदारी से कार्यभार में स्पष्टता आएगी और उनके पेशेवर विकास के लिए अधिक अवसर मिलेंगे। वहीं कुछ संघों ने यह चिंता जताई कि निरीक्षण के दायरे में अत्यधिक दखलंदाजी से शिक्षकों की स्वायत्तता पर असर पड़ सकता है, जिससे शैक्षणिक नवाचार को बाधा मिल सकती है। संघ प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि अधिकारी को उचित प्रशिक्षण और पर्याप्त अधिकार मिलने चाहिए, ताकि वह प्रभावी ढंग से कार्य कर सके।

विद्यार्थियों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया भी विविध रही। कई अभिभावकों ने कहा कि नियमित निरीक्षण से उनके बच्चों की पढ़ाई पर अधिक ध्यान दिया जाएगा और परीक्षा की तैयारी में मदद मिलेगी। वहीं कुछ अभिभावकों ने आशा व्यक्त की कि यह व्यवस्था स्कूल में बुनियादी सुविधाओं, जैसे पुस्तकालय, लैब और खेल के मैदान, में सुधार लाएगी।

छात्र प्रतिनिधियों ने भी यह उल्लेख किया कि अधिकारी की उपस्थिति से उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान संभव होगा, जिससे शैक्षिक माहौल में सकारात्मक बदलाव आएगा।

 

Updated: August 21, 2026

– Designating a dedicated senior academic officer for each model school creates a single point of accountability, streamlining oversight of teaching quality, attendance, and resource use.
– Centralized reporting to the education department enables faster policy adjustments, aiming to improve student performance in national entrance examinations.

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