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बिहार: मध्याह्न भोजन में कीड़े मिलने पर स्कूल बंद, शिक्षा विभाग ने की जांच का आदेश

बिहार के दरभंगा जिले के अर्वल के एक प्राथमिक विद्यालय में मध्याह्न भोजन में कीड़े मिलने की खबर ने राज्य भर में हलचल मचा दी, जहां शिक्षा विभाग ने तत्काल जांच का आदेश दिया है। स्थानीय समाचार माध्यमों के अनुसार, छात्रों को परोसे गए भोजन में कई बड़े आकार के कीड़े दिखे, जिससे माता‑पिता एवं शैक्षिक कार्यकर्ताओं का गुस्सा बढ़ गया। इस घटना के बाद स्कूल को बंद कर दिया गया और भोजन विभाग को भोजन की गुणवत्ता पर पुनरावलोकन करने का निर्देश दिया गया।अर्वल के इस स्कूल में मध्याह्न भोजन योजना 2004 से लागू है, जिसका उद्देश्य गरीबी‑ग्रस्त बच्चों को पोषक‑तत्व युक्त भोजन प्रदान करना है। राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना को मिड‑डे मील स्कीम कहा जाता है, जो हर साल लाखों स्कूलों को लाभान्वित करती है। बिहार सरकार ने 2021‑22 वित्तीय वर्ष में इस योजना के तहत लगभग 1.8 करोड़ छात्रों को भोजन उपलब्ध कराकर 1,500 करोड़ रुपये का खर्च किया था।

हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भोजन में पाए गए कीड़े कच्ची सब्जियों की गंदगी या अनुचित भंडारण के कारण हो सकते हैं। राज्य के खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कहा कि यदि भोजन में जीवाणु या परजीवी पदार्थ पाए जाएँ तो यह नियमों के विरुद्ध है और दंडनीय है। इस प्रकार की घटनाएं पिछले वर्षों में भी हुई हैं, जैसे 2017 में झारखंड के एक स्कूल में कीटाणु‑ग्रस्त भोजन पाया गया था, जिसके परिणामस्वरूप योजना को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा था।

शिक्षा मंत्री ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि जांच के तहत स्कूल की रसोई, भोजन वितरण प्रणाली और आपूर्ति चैनल की पूरी जाँच की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि दोषी व्यक्तियों को कड़ी सजा दी जाएगी और भविष्य में ऐसी त्रुटियों को रोकने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग लागू की जाएगी। साथ ही, उन्होंने कहा कि इस घटना पर शून्य सहनशीलता नीति लागू रहेगी।

विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को राजनीतिक मंच पर उठाया, कई विधायक और कांग्रेस के नेता ने सरकार की बारीकी से नजर रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि मध्याह्न भोजन योजना के तहत अभावित बच्चों को सुरक्षित भोजन नहीं मिलने की स्थिति में, सरकार को अपने दायित्वों का पुनः मूल्यांकन करना चाहिए। विपक्षी नेता ने कहा कि यह शिक्षा के अधिकार के खिलाफ एक गंभीर उल्लंघन है और इस पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

बिहार के कई सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी। राष्ट्रीय बाल अधिकार संघ (UNICEF) के स्थानीय प्रतिनिधि ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बच्चों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरे में डाल देती हैं और सरकार को तत्काल सुधारात्मक उपाय अपनाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिये स्वतंत्र निगरानी समिति बनानी चाहिए।

कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने से बचाने के लिये विद्यालय में भोजन की जांच का अनुरोध किया। कई अभिभावक समूहों ने सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया, जहाँ वे बच्चों को सुरक्षित भोजन की माँग कर रहे हैं। कुछ अभिभावकों ने कहा कि वे भविष्य में अपने बच्चों को इस स्कूल में भेजने से हिचकिचाते हैं और वैकल्पिक विकल्प तलाश रहे हैं।

राज्य के खाद्य एवं पोषण विभाग के प्रमुख ने कहा कि कीटाणु‑ग्रस्त भोजन मिलने के मामले में तत्काल रिट्रैक्शन (वापसी) प्रक्रिया शुरू की जाएगी और प्रभावित स्कूलों को नई रसोई व्यवस्था दी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि स्कूलों को अब दैनिक रूटीन में भोजन की स्वच्छता परीक्षण रिपोर्ट जमा करनी होगी, जिससे किसी भी अनियमितता पर समय पर कार्रवाई हो सके।

बिहार के अर्थमंत्री ने कहा कि मध्याह्न भोजन योजना का बजट इस वर्ष 2,000 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, लेकिन इस तरह की घटनाओं से निवेशकों तथा नागरिकों का भरोसा घट रहा है। उन्होंने कहा कि योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिये अतिरिक्त वित्तीय नियंत्रण और निगरानी प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की खामियों को रोका जा सके।

वित्तीय विश्लेषकों ने इस घटना को आर्थिक दृष्टिकोण से देखते हुए कहा कि सार्वजनिक खाद्य वितरण कार्यक्रमों में गिरावट निवेशकों के विश्वास को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने बताया कि यदि ऐसी समस्याएँ बार-बार दोहराई जाती हैं तो केंद्र एवं राज्य सरकार को अतिरिक्त बजट आवंटन पर पुनर्विचार करना पड़ेगा। इससे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर दबाव बढ़ेगा और विकासात्मक लक्ष्य अधूरे रह सकते हैं।

 

Updated: August 22, 2026

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