इस दौरान यात्रियों की सुगमता सुनिश्चित करने हेतु गंगा नदी में नाव और स्टीमर सेवा प्रदान की जाएगी, जिसके लिए इच्छुक व्यक्तियों और कंपनियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। प्रशासन ने इस कदम को स्थानीय जनजीवन और पर्यटन पर संभावित प्रभाव को घटाने की दिशा में आवश्यक माना है।
विक्रमशिला सेतु का इतिहास और महत्व
प्रदेश के सांस्कृतिक धरोहर में गहराई से जुड़ा हुआ है। 1975 में निर्मित यह पुल मुख्यतः राजमार्ग-एआरडीआर के हिस्से के रूप में कार्य करता है, जो भागलपुर को बिहार के अन्य प्रमुख जिलों से जोड़ता है। बेली ब्रिज, जो 1998 में स्थापित किया गया, सेतु के दोनों किनारों को जोड़ने के साथ-साथ भारी ट्रैफ़िक के लिए एक
अतिरिक्त मार्ग प्रदान करता था। वर्षों में इस संरचना में कई बार रखरखाव कार्य किया गया, परन्तु अब इसे पूरी तरह से हटाकर नई तकनीकी आधारभूत सुविधाओं से बदलने का निर्णय लिया गया है।
पिछले दो दशकों में बेली ब्रिज पर लगातार ट्रैफ़िक जाम और सुरक्षा संबंधी समस्याएं दर्ज की गई थीं। 2021 में हुए एक
गंभीर दुर्घटना में कई वाहन और यात्रियों को नुकसान पहुँचा, जिससे इस संरचना की सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक बहस छिड़ गई। राज्य सरकार ने कई बार मरम्मत के प्रस्ताव रखे, परंतु लागत और तकनीकी बाधाओं के कारण स्थायी समाधान नहीं मिल सका। इस कारण से 2025 में एक विशेषज्ञ समिति ने बेली ब्रिज को हटाकर नई पुल
निर्माण की सलाह दी, जिसे अब प्रशासन ने कार्यान्वित करने का कदम उठाया है।
बेली ब्रिज हटाने का कार्य 28 अगस्त की रात को शुरू किया जाएगा, जब ट्रैफ़िक का प्रवाह अपेक्षाकृत कम रहेगा। प्रशासन ने कहा कि हटाने की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा, जिससे पुल पर चल रहे वाहनों को न्यूनतम बाधा
पहुंचे। कार्य के दौरान बेली ब्रिज के धातु भागों को विशेष यंत्रों से उठाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाएगा, जबकि सेतु की मूल संरचना को क्षति से बचाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे। कार्यकाल के दौरान सेतु के दोनों किनारे पर संकेतक और रूटिंग बोर्ड लगाए जाएंगे, जिससे यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग की
जानकारी मिलेगी।
हटाने के काम के साथ-साथ गंगा नदी में नाव और स्टीमर चलाने की व्यवस्था को भी तुरंत लागू किया जाएगा। प्रशासन ने कहा कि यह सेवा केवल स्थानीय यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यटन उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि नदी के किनारे कई धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल स्थित हैं। इच्छुक कंपनियों
को आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 अगस्त तय की गई है, और चयन प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों, जहाज़ की क्षमता और पर्यावरणीय प्रभाव को प्राथमिकता दी जाएगी। चयनित ऑपरेटरों को स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोगी समझौते पर हस्ताक्षर करने होंगे।
नाव और स्टीमर संचालित करने के लिए कुछ आवश्यक नियम निर्धारित किए गए हैं। पहली
शर्त यह है कि सभी नौकाएँ भारतीय नौवहन प्राधिकरण (IMO) के मानकों के अनुरूप हों और उनका वार्षिक निरीक्षण हो। दूसरी शर्त के तहत यात्रियों की अधिकतम संख्या निर्धारित की जाएगी, जिससे ओवरलोडिंग को रोका जा सके। इसके अलावा, नावों को गंगा नदी के मौसमी जलस्तर और प्रवाह गति के अनुसार चलाने की अनुमति होगी, तथा हर
यात्रा के बाद सुरक्षा जांच अनिवार्य होगी। प्रशासन ने यह भी बताया कि जलवायु परिवर्तन और बाढ़ की संभावना को देखते हुए, आपातकालीन निकास बिंदु और बचाव उपकरण हर जहाज़ में मौजूद होने चाहिए।
सेतु पर बेली ब्रिज हटाने के निर्णय पर स्थानीय व्यापारियों और यात्रियों ने मिश्रित प्रतिक्रियाएँ दीं। कई व्यापारियों ने कहा कि बेली
ब्रिज के बिना भारी वाहनों का आवागमन कठिन हो जाएगा, जिससे उनके व्यापार पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, कुछ स्थानीय नागरिकों ने बताया कि नई मरम्मत कार्य से पुल की दीर्घकालिक सुरक्षा बढ़ेगी और भविष्य में ट्रैफ़िक जाम कम होगा। कई यात्रियों ने नाव सेवा के प्रस्ताव की सराहना की, क्योंकि इससे यात्रा का समय
कम होगा और गंगा के दृश्यों का आनंद भी मिलेगा। विभिन्न सामाजिक समूहों ने प्रशासन से आशा जताई कि हटाने के दौरान उचित संकेत और वैकल्पिक मार्ग प्रदान किए जाएँ।
राजनीतिक वर्ग ने भी इस कदम को विभिन्न दृष्टिकोणों से देखा है। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि बेली ब्रिज हटाना और पुल की पूरी
मरम्मत करना राज्य की बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। विपक्षी दलों ने इस निर्णय को कुछ क्षेत्रों में असमानता उत्पन्न करने का आरोप लगाते हुए, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाए। कुछ सांसदों ने कार्यकाल में संभाव
Updated: August 22, 2026
Removing the bele bridge signals a shift from patch‑work fixes to a long‑term infrastructure vision, prioritizing safety over short‑term convenience. The temporary river shuttle not only keeps traffic flowing but also offers a chance to rebrand the area as a tourism hub, potentially offsetting commercial losses during construction.