वर्षीय पति‑पत्नी के शव बिस्तर पर जलते हुए मिले। दोनों की जिंदा जलकर मौत की पुष्टि पुलिस ने की, जबकि उनके 27 वर्षीय पुत्र, जो उसी शाम एक निकटवर्ती शादी में उपस्थित था, इस हादसे से बच गया। यह घटना स्थानीय सामाजिक ताने‑बाने को हिला कर रख देती है।
हाथरस में इस प्रकार की बड़े पैमाने की आग लगने
की घटनाएँ अतीत में बहुत कम दर्ज हुई हैं। पिछले पाँच वर्षों में इस कस्बे में कुल केवल पाँच ही गंभीर आग घटनाओं की रिपोर्ट मिली, जिनमें से अधिकांश छोटे‑मोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के शॉर्ट सर्किट से उत्पन्न हुई थीं। इस बार की आग के स्रोत का प्रारम्भिक सर्वेक्षण दर्शाता है कि घर के अंदर प्रयुक्त पुराने प्रकार के
सर्किट बोर्ड में शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे तुरंत बड़े पैमाने पर विद्युत् धारा प्रवाहित हो गई। स्थानीय विद्युत विभाग ने बताया कि क्षेत्र में कई पुराने घरों में अभी भी पुरानी वायरिंग और असुरक्षित विद्युत् उपकरणों का प्रयोग जारी है, जो इस तरह की घटनाओं की संभावना को बढ़ा सकता है।
घटना के समय, परिवार की दो सदस्य, पति
और पत्नी, छोटे से कमरा में ही सो रहे थे। पड़ोसियों के बयान के अनुसार, लपटें पहली बार लगभग दो मिनट में ही छत तक पहुँच गईं और धुएँ ने घर की सभी खिड़कियों को ढँक दिया। आग के तेज़ी से फैलने के कारण, दोनों को बाहर निकलने का कोई अवसर नहीं मिला। पुलिस ने बताया कि बिस्तर
पर पाई गई दोनों की लाशें इतनी जल गई थीं कि पहचान करना कठिन हो गया, परन्तु डीएनए परीक्षण के बाद ही उनका संबंध पुष्टि हो पाया। मृतकों का नाम स्थानीय समाचार स्रोतों के अनुसार राकेश सिंह (55) और सतीश्री देवी (52) है, जो दोनों सिलाई का काम करते थे।
घर के अंदर मिले अन्य सामानों की जाँच से
पता चला कि कई सिलाई मशीनें, कपड़े और घरेलू उपयोगी वस्तुएँ भी जलकर राख में बदल गई थीं। पड़ोसियों ने कहा कि मृतकों ने अपने परिवार को आर्थिक रूप से सहारा देने के लिये सिलाई का कार्य किया था, जिससे उनकी आय का मुख्य स्रोत वही था। इस कारण से पूरे परिवार पर आर्थिक दबाव बढ़ा हुआ था।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि इस तरह के छोटे‑व्यापारियों की आय अस्थिर होती है और उन्हें अक्सर उचित सुरक्षा उपायों के लिए पर्याप्त धन नहीं मिलता।
पड़ोसियों ने आग की शुरुआत के बाद तुरंत ही अपने मोबाइल फोन से पुलिस को सूचना दी, परन्तु आग की तीव्रता और घर की संकीर्ण संरचना के कारण आग बुझाने में कठिनाई
हुई। अग्निशामकों ने बताया कि प्रारम्भिक चरण में ही लपटें छत की ओर तेजी से बढ़ गईं, जिससे जलने वाले कमरे में प्रवेश करना लगभग असंभव हो गया। उन्होंने यह भी बताया कि अगर लाइटिंग या फायर अलार्म की उचित व्यवस्था होती तो इस त्रासदी से बचा जा सकता था। स्थानीय प्रशासन ने इस घटना के बाद क्षेत्र
में फायर सुरक्षा के बारे में जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने की बात कही।
पुलिस ने घटना स्थल पर फायर एक्सपर्ट की टीम को भेजा, जिसने आग के मूल कारण को शॉर्ट सर्किट बताया। उन्होंने कहा कि घर में प्रयुक्त पुरानी विद्युत् वायरिंग और अपर्याप्त ग्राउंडिंग की वजह से इस तरह की दुर्घटना संभव हुई। पुलिस ने यह भी कहा
कि शहरी क्षेत्रों में इस प्रकार की असुरक्षित विद्युत् प्रणाली को रोकने के लिये समय‑समय पर निरीक्षण आवश्यक है, परन्तु इस दिशा में अभी तक पर्याप्त कदम नहीं उठाए गये। जांच के तहत स्थानीय विद्युत वितरण कंपनी को भी बुलाया गया, जिससे यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि बिजली आपूर्ति में कोई लापरवाही या त्रुटि तो
नहीं हुई।
परिवार के रिश्तेदारों ने घटना के बाद गहरी शोक व्यक्त किया। मृतकों की बहन ने बताया कि दोनों का परिवार बहुत ही साधारण जीवन जीता था, और उनका मुख्य आय स्रोत सिलाई के काम से आया करता था। उन्होंने कहा कि अब उनके बेटे को भी आर्थिक रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि वह अभी-अभी
शादी में गया था और घर के खर्चों का भार वह नहीं उठा पा रहा है। स्थानीय सामाजिक संस्थाओं ने तुरंत मदद का प्रस्ताव रखा, जिसमें वित्तीय सहायता और पुनर्वास के लिये अस्थायी आवास शामिल है।
जिले के राजस्व विभाग ने बताया कि इस तरह की आग दुर्घटनाओं से उत्पन्न आर्थिक क्षति का अनुमान लगाना कठिन है, परन्तु स्थानीय
स्तर पर इससे जुड़े कई छोटे‑व्यापारियों को गंभीर नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये घरों में फायर एलेर्ट सिस्टम और सुरक्षित विद्युत् वायरिंग की अनिवार्यता पर बल दिया जाएगा। इस दिशा में सरकार ने पहले ही कुछ पहल की हैं, परन्तु ग्रामीण क्षेत्रों में उनका कार्यान्वयन अभी तक
Updated: November 5, 2026
Insight: The incident highlights the risk posed by outdated electrical wiring in residential structures, underscoring the need for regular safety inspections. It also illustrates the economic impact of fire losses on low‑income households reliant on home‑based livelihoods.