इसी दौरान, भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपातकाल की प्रवृत्ति पर कुछ टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा, आपातकाल एक ऐसी घटना थी जिसने लोकतंत्र की भावना को कठिनाई से गुजरना पड़ा था। उस समय संविधान पर हमला किया गया था।
भारत के संविधान के शाब्दिक अर्थ हैं लोगों का नियमन। यह भारत के शासन को निर्दिष्ट करने वाला दस्तावेज है। भारत के दो संविधान संस्करण हैं – 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ पहला संविधान संस्करण और 24 जनवरी 1977 को लागू हुआ दूसरा।
भारत में आपातकाल का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि यह है कि 1975 में कांग्रेस सरकार के शासनकाल में जारी आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता के कारण कांग्रेस सरकार के दायरे के भीतर एक बड़ा विरोध शुरू हुआ था।
विशेषज्ञों के अनुसार, आपातकाल के दौरान मुख्य रूप से नागरिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ था। जाति और धर्म पर आधारित प्रत्यय के प्रचार और प्रसार की दिशा में चलने वाली प्रक्रिया शुरू की गई थी। लोगों को भटकाने और उन्हें अलग-थलग करने के लिए सोशल मीडिया और मीडिया का पूरा उपयोग किया गया था।
भारत के इतिहास में आपातकाल एक ऐसी घटना थी जिसने लोकतंत्र की भावना को कठिनाई से गुजरना पड़ा था। उस समय संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ था।
नरेंद्र मोदी ने कहा, आपातकाल एक लोकतांत्रिक देश की सबसे विषाक्त घटनाओं में से एक था। यह न केवल भारत के इतिहास में वर्ष 1975 की सबसे विषाक्त घटनाओं में से एक है, बल्कि मानवता के इतिहास में सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है।
उनका मानना है कि भारत के इतिहास में आपातकाल एक ऐसी घटना थी जिसने लोकतंत्र की भावना को कठिनाई से गुजरना पड़ा। उस समय संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ था।
संसद के मॉनसून सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने आपातकाल की प्रवृत्ति पर कुछ टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा, आपातकाल एक देश के इतिहास में सबसे काला पन्ना है। इसने न केवल भारतीय लोकतंत्र को कमजोर कर दिया, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि भारत में कभी भी एक तानाशाही सरकार न हो।
भारत के इतिहास में आपातकाल के परिणामस्वरूप लोकतंत्र की भावना को कठिनाई से गुजरना पड़ा। भारत के संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाएं और नागरिक अधिकारों के उल्लंघन के कारण इसका महत्व बढ़ गया है।