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बांका में बीडीओ अमित प्रताप सिंह और मामा बच्चन कुमार को 75 हज़ार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार, भ्रष्टाचार विरोधी निग

बांका जिले में निगरानी विभाग की छठी कार्रवाई ने स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मचा दिया; फुल्लीडुमर प्रखंड के बीडीओ अमित प्रताप सिंह को 75 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया, और साथ ही उनका मामा बच्चन कुमार भी पकड़ा गया। यह घटना जिले के भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों की निरंतरता को दर्शाती

है, जहाँ पटना स्थित निगरानी टीम ने तेज़ी से जांच कर इस बड़े घोटाले को उजागर किया। गिरफ्तारी के बाद अधिकारी ने कहा, यह कार्रवाई निवारक चेतावनी के तौर पर की गई है, जिससे भविष्य में अनियमित लेन‑देनों को रोका जा सके।

बांका में निगरानी विभाग की सक्रियता पिछले पाँच वर्षों में कई बार दिखी है।

2019 में इस विभाग ने पहले तीन कार्रवाईयों में दो बड़े स्कीम में अनधिकृत निधियों की बरबादी को रोकने में सफलता पाई थी। 2021 में जल आपूर्ति योजनाओं के तहत नकली बिलों का पर्दाफाश हुआ, जबकि 2023 में सड़क निर्माण के अनुबंधों में घोटाले का पता चलकर कई ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया गया। इन घटनाओं

के बाद विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली को सुदृढ़ किया, तकनीकी सहायता और स्थानीय सूचना नेटवर्क को बढ़ाया, जिससे भ्रष्टाचार के संकेत मिलते ही त्वरित कार्रवाई संभव हो पायी।

अभियुक्त बीडीओ अमित प्रताप सिंह ने पिछले दो वर्षों में कई सरकारी योजनाओं के तहत धन का दुरुपयोग किया था। जांच के अनुसार, वह 33 विभिन्न विकास योजनाओं

में अनुचित लाभ के लिए रिश्वत की माँग करता था। इस दौरान वह स्थानीय ठेकेदारों और व्यापारियों से रिश्वत लेता, जिससे योजनाओं की गुणवत्ता और समयसीमा पर नकारात्मक असर पड़ता। विभाग की रिपोर्ट में बताया गया कि इस तरह की वित्तीय अनियमितताएँ परियोजनाओं की लागत में 15‑20 प्रतिशत तक वृद्धि का कारण बनती हैं, जिससे लाभार्थियों

को सीधे नुकसान होता है।

जांच में पता चला कि बच्चन कुमार, अमित प्रताप सिंह के मामा, रिश्वत की राशि को सुरक्षित रखने और वितरित करने के लिए मध्यस्थ का काम कर रहे थे। उन्होंने कई बार नकली दस्तावेज तैयार किए और वित्तीय लेन‑देन को छुपाने के लिए विभिन्न गुप्त खातों का उपयोग किया। विभाग ने

कहा कि इस प्रकार के मध्यस्थों की भागीदारी भ्रष्टाचार को और जटिल बनाती है, क्योंकि वे पैसे की गमन‑पथ को ट्रेस करना मुश्किल बना देते हैं। इस कारण से निगरानी टीम ने मामा को भी गिरफ्तार कर लिया, ताकि सम्पूर्ण नेटवर्क का विघटन हो सके।

गिरफ्तारी के बाद, स्थानीय पुलिस ने बीडीओ के घर से अतिरिक्त

1.2 लाख रुपये की नकद राशि और कई सट्टा नोटबुक्स बरामद कीं। साथ ही, उन्होंने कई अनुबंध दस्तावेज और झूठे रिपोर्टों को भी जब्त किया, जो योजनाओं के वित्तीय रिकॉर्ड को गड़बड़ करने के इरादे से तैयार किए गए थे। पुलिस ने कहा, यह सभी साक्ष्य न्यायिक प्रक्रिया में प्रस्तुत किए जाएंगे, और आरोपितों को गंभीर

अपराधी ठहराया जाएगा। इस कार्रवाई के बाद विभाग ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए सख्त निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी।

निगरानी विभाग के प्रमुख अधिकारी ने बताया कि इस मामले की सूचना एक स्थानीय नागरिक ने दी थी, जिसने भ्रष्टाचार की संभावना को नोटिस किया और तुरंत विभाग को

सूचित किया। सूचना मिलने के बाद टीम ने तुरंत एक वैरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू की, जिससे शंकास्पद लेन‑देन की पुष्टि हुई। इस प्रकार की सार्वजनिक सहयोगी सूचना निगरानी विभाग की कार्यक्षमता को बढ़ाती है, क्योंकि यह स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार की पहचान और रोकथाम में मदद करती है। अधिकारियों ने नागरिकों से आगे भी ऐसे मामलों

की रिपोर्ट करने की अपील की।

गिरफ्तारी के बाद, जिला प्रशासन ने इस घटना पर तत्काल प्रतिक्रिया दी। जिला आयुक्त ने कहा कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त नीति का प्रत्यक्ष प्रमाण है और सभी सार्वजनिक अधिकारी इससे सीख लेकर अपने कार्य में पारदर्शिता लाएँ। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में किसी

भी प्रकार की अनियमितता को लेकर शून्य सहिष्णुता नीति लागू रहेगी। इस बीच, बंधुश्री सिंह के सहयोगियों ने यह दावा किया कि आरोपों में कुछ गलतफहमी हो सकती है, और वे कानूनी प्रक्रिया के तहत अपने बिंदु स्पष्ट करेंगे।

राज्य सरकार ने इस कार्रवाई को लेकर सार्वजनिक बयान जारी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बंजर जिले

में विकास कार्यों को भ्रष्टाचार के बिना आगे बढ़ाने के लिए सरकार सभी आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि निगरानी विभाग को और अधिक अधिकार और संसाधन प्रदान किए जाएंगे, ताकि वे समय पर कार्रवाई कर सकें। आर्थिक विभाग ने बताया कि इस प्रकार के मामलों से राज्य के निवेश माहौल पर

नकारात्मक असर पड़ता है, इसलिए रोकथाम को प्राथमिकता दी जाएगी।

स्थानीय व्यापारियों और नागरिक संगठनों ने भी इस खबर पर प्रतिक्रिया दी। कई व्यापारी ने कहा कि बीडीओ के भ्रष्टाचार के कारण उनके व्यवसायों पर असमान प्रतिस्पर्धा और आर्थिक दबाव बना रहता था। कुछ

Updated: September 1, 2026

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