मानसून एक व्यापक भौगोलिक प्रक्रिया है जो भारत के उत्तर में शुरू होकर दक्षिण में खत्म होती है। यह प्रक्रिया साल में दो बार होती है – एक बार जून में और दूसरी बार अक्टूबर में। मानसून के आगमन के साथ-साथ भारत के कई हिस्सों में वर्षा होती है, जो सिंचाई, बिजली और जल आपूर्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
दिल्ली और एनसीआर में मानसून के आगमन के बारे में बताने वाली पहली खबरें जून की शुरुआत में आ गई थीं। तब से यह सवाल लोगों के मन में चल रहा है कि कब तक मानसून दिल्ली और एनसीआर में पहुंचेगा। इस सवाल का जवाब देने के लिए हमें मानसून के आगमन के पूरे इतिहास पर विचार करना होगा।
भारत में मानसून के आगमन के बारे में कितने जानकार हैं और क्या उन्हें मानसून के आगमन के बारे में कोई सटीक अनुमान लगाने के लिए कोई तरीका है? यह सवाल लोगों के मन में बहुत पहले ही आया था जब मानसून के आगमन के बारे में पहली खबरें आ गई थीं। तब से लोग इस सवाल का जवाब ढूंढते आ रहे हैं।
एक अनुमान के अनुसार, दिल्ली में मानसून आमतौर पर जून या जुलाई के अन्त में पहुंचता है। लेकिन यह सिर्फ एक अनुमान था, और यह अनुमान बहुत कम समय के लिए ही सही साबित होता था। वास्तव में मानसून के आगमन के बारे में कई अनुमान लगाए जाते हैं, लेकिन केवल समय ही बताता है कि उनमें से कौन सही है।
भारत के वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के आगमन के लिए भारी संख्या में मौसम विभाग के मौसम विशेषज्ञों को लगाया जाता है, जो मानसून के आगमन के बारे में नियमित स्टेटस रिपोर्ट देते हैं। ये विशेषज्ञ मानसून के आगमन के बारे में अनुमान लगाने के लिए न तो किसी सटीक तरीके से काम करते हैं और न ही कोई अनुमान लगाते हैं।
आजकल भारत में मौसम पूर्वानुमान की भी विशेषता बढ़ गई है। अब सरकारी एजेंसियों और निजी कंपनियों के बीच मौसम पूर्वानुमान की प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। जिससे कि सरकारी एजेंसियों और निजी कंपनियों के बीच मौसम पूर्वानुमान के दावों की लड़ाई होती है।
भारत सरकार के मeteorological Department (IMD) ने बताया है कि दिल्ली के लिए मानसून का आगमन जून या जुलाई के अन्त में होने की उम्मीद है। जिस पर आधारित दिल्ली एनसीआर में भी मानसून के आगमन की जानकारी मिलने की उम्मीद है। इससे दिल्ली एनसीआर में भी मानसून के आगमन के पूर्व विश्लेषण और मौसम की गणना में मदद मिल सकती है।