लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा पेश किए गए संकल्प पर बहस के दौरान एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के बीच तीखी नोकझोंक हुई। ओवैसी ने सदन में पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल के पीठासीन होने पर सवाल उठाए, जिसके बाद निशिकांत दुबे ने उनको करारा जवाब दिया।
ओवैसी ने लोकसभा की कार्य प्रक्रिया के नियम 376 और संविधान के अनुच्छेद 96 का हवाला देते हुए कहा कि ओम बिरला द्वारा जगदंबिका पाल की नियुक्ति के बाद वे पीठासीन सभापति की भूमिका का निर्वहन नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि सदन को एक व्यक्ति का चयन करना चाहिए जो कार्रवाई का संचालन करे। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने ओवैसी की बात का समर्थन किया।
निशिकांत दुबे ने ओवैसी को करारा जवाब देते हुए कहा कि लगता है बैरिस्टर साहब ने संविधान के अनुच्छेद 95 (2) को पूरा पढ़ा ही नहीं है। दुबे ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जो भी आसन पर होगा उसे अध्यक्ष की तरह अधिकार होगा। बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सदन के नियम के तहत जिन्हें पीठासीन सभापति नियुक्त किया गया है उसे सदन संचालन का पूरा अधिकार है।
जगदंबिका पाल ने कहा कि अध्यक्ष का पद रिक्त नहीं है और ऐसे में व्यवस्था का प्रश्न नहीं उठाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे और सदन की कार्रवाई का संचालन करेंगे। इस बहस के दौरान सदन में कुछ देर हंगामा भी हुआ, लेकिन बाद में शांति बहाल हो गई।
इस बहस से यह स्पष्ट हो गया है कि विपक्ष स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए दृढ़ है, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर अपना रुख मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रही है। आगे क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट हो गया है कि लोकसभा में स्पीकर के पद से हटाने की बहस पर ओवैसी और निशिकांत के बीच तीखी नोकझोंक हुई है।