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लोकसभा में विपक्ष की अवनति: ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव को ध्वनिमत से खारिज करने का महत्व

लोकसभा में विपक्ष को एक重大 झटका लगा है, जब ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव को ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा पेश किया गया था, जिस पर 12 घंटे से अधिक समय की चर्चा हुई। गृह मंत्री अमित शाह ने इस प्रस्ताव का जवाब दिया और विपक्ष पर जोरदार हमला बोला।

अमित शाह ने कहा कि विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की निष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं, जो बहुत अफसोसजनक है। उन्होंने कहा कि किसी को भी नियम के विपरीत बोलने का अधिकार नहीं है और लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर असहमति हो सकती है, लेकिन उनका निर्णय अंतिम होता है।

गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी पर भी हमला बोला और कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी दावा करते हैं कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जाता, जबकि वह खुद बोलना नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने विधेयकों पर चर्चा में भाग नहीं लिया और पिछले साल शीतकालीन सत्र के दौरान जर्मनी की यात्रा पर थे।

विपक्ष ने ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव लाने का आरोप लगाया था कि वे लोकसभा का काम खुलेआम एकतरफा तरीके से करते हैं और कई मौकों पर विपक्षी पार्टियों के नेताओं को बोलने नहीं दिया गया। लेकिन गृह मंत्री अमित शाह ने इन आरोपों का जवाब दिया और कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है और विपक्ष को इसे स्वीकार करना चाहिए।

इस प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान के दौरान ओम बिरला सदन में उपस्थित नहीं थे, लेकिन विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया और प्रस्ताव को ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया। यह एक महत्वपूर्ण घटना है और लोकसभा में विपक्ष की अवनति को दर्शाती है। यह दिखाता है कि विपक्ष अभी भी मजबूत और एकजुट नहीं है और लोकसभा में अपनी बात रखने में असमर्थ है।

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