गौरतलब है कि नई किताब में चुनाव आयोग की भूमिका और फैसलों को शामिल किया गया है। इसका विरोध कई विपक्षी दल कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि इससे चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।
इमरान मसूद ने कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका को विद्यार्थियों को समझाने के लिए इस किताब में शामिल करना बहुत ही जरूरी था। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, चुनाव आयोग द्वारा लिए गए फैसलों को भी इसमें शामिल करना चाहिए।
चुनाव आयोग के इतिहास का ‘सबसे काला दौर’
सांसद इमरान मसूद ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल को चुनाव आयोग का सबसे काला दौर माना जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान चुनाव आयोग ने कई फैसले लिए जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक थे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका को समझाने के लिए इस किताब में शामिल करना बहुत ही जरूरी था।
कांग्रेस ने बीजेपी पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी को चुनाव आयोग के फैसलों के पीछे अपने हाथ होंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका को विद्यार्थियों को समझाने के लिए इस किताब में शामिल करना बहुत ही जरूरी था।
कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी की सरकार ने चुनाव आयोग को दबाव में क्यों लाए? उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका को विद्यार्थियों को समझाने के लिए इस किताब में शामिल करना बहुत ही जरूरी था।
लोकतंत्र के लिए खतरा: किसी भी भी सरकार के पास चुनाव आयोग के निर्णयों की ज्यादातर शक्तियां होती हैं। चुनाव आयोग की भूमिका को समझाने के लिए इस किताब में शामिल करना बहुत ही जरूरी था।
देश की लोकतांत्रिक संरचना को खतरा: इमरान मसूद ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा लिए गए फैसलों ने देश के लोकतंत्र को खतरे में डाला है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका को विद्यार्थियों को समझाने के लिए इस किताब में शामिल करना बहुत ही जरूरी था।
संस्थानों के स्वायत्तता के लिए खतरा: इमरान मसूद ने कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका को विद्यार्थियों को समझाने के लिए इस किताब में शामिल करना बहुत ही जरूरी था। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा लिए गए फैसलों ने देश के लोकतंत्र को खतरे में डाला है।