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बिहार सरकार ने 2030 तक 13 नए हवाई अड्डे बनाने का योजना सार्वजनिक रूप से घोषित की है

बिहार सरकार ने 2030 तक राज्य में कुल तेरह नए हवाई अड्डे विकसित करने की विस्तृत योजना का सार्वजनिक घोषणा किया, जिससे राज्य की हवाई परिवहन नेटवर्क में ऐतिहासिक परिवर्तन की आशा की जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों को मुख्य शहरी केंद्रों से जोड़ना और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा को सहज बनाना है। योजना के तहत नेपाल और चीन की सीमा के निकट स्थित क्षेत्रों में भी फाइटर प्लेन तथा नागरिक विमानों की नियमित उड़ानें संचालित की जाएँगी, जिससे सुरक्षा और आर्थिक विकास दोनों को बल मिलेगा।बिहार में हवाई अवसंरचना का विकास पिछले दो दशकों में धीमी गति से हुआ था; प्रमुख हवाई अड्डे केवल पटना और भागलपुर तक सीमित थे। 2014 में राष्ट्रीय हवाई अड्डा योजना (NHAI) के तहत कुछ छोटे हवाई पट्टे स्थापित किए गए, परन्तु इनकी क्षमता सीमित रही। राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण 2022 ने बताया कि 70 % ग्रामीण आबादी को हवाई यात्रा के लिए लगभग 300 किमी दूर के शहरी हब तक पहुंचना पड़ता है, जिससे समय और लागत दोनों में वृद्धि होती है। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए नई योजना को तेज़ी से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

योजना की रूपरेखा के अनुसार, पहले चरण में सात हवाई अड्डे बनेंगे: दरभंगा, मुजफरपुर, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, गयाबारी और भागलपुर के अतिरिक्त दो लाइट एयरपोर्ट। इन सभी को सड़क एवं रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए विशेष कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स शुरू किए जाएंगे। केंद्र सरकार की ‘उड़ान योजना’ और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की तकनीकी सहायता इस परियोजना में प्रमुख भूमिका निभाएगी। वित्तीय पहलू में केंद्र‑राज्य सहयोग के तहत लगभग 12,500 करोड़ रुपये का निवेश तय किया गया है।

दूसरे चरण में शेष छह हवाई अड्डे, जिनमें सहरसा‑जैसन, बक्सर, और चम्पारण के निकट स्थित सुविधाएँ शामिल हैं, 2027 तक कार्यान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन परियोजनाओं में टर्मिनल निर्माण, रनवे विस्तार, तथा एअर ट्रैफ़िक कंट्रोल (ATC) सिस्टम की आधुनिकता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन हवाई अड्डों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए विदेशी तकनीकी साझेदारियों की संभावनाओं की भी जांच चल रही है।

इस योजना के प्रमुख घटकों में से एक हवाई सुरक्षा के लिए फाइटर प्लेन की तैनाती है। नेपाल और चीन की सीमा के निकट स्थित बक्सर एवं सहरसा में स्थित हवाई अड्डे रणनीतिक महत्व के रूप में चिन्हित किए गए हैं। सरकार ने इन क्षेत्रों में रक्षात्मक हवाई संचालन को सुदृढ़ करने के लिए भारत वायु सेना के साथ समन्वय किया है। इस कदम से न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को बल मिलेगा, बल्कि इन क्षेत्रों में निवेश को भी आकर्षित करने की संभावना बढ़ेगी।

परियोजना के कार्यान्वयन में स्थानीय प्रशासन, रेलवे बोर्ड और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के साथ समन्वय आवश्यक रहेगा। वर्तमान में पटना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तार कार्य जारी हैं, जिसमें दो अतिरिक्त टर्मिनल और लंबी रनवे का निर्माण हो रहा है। इस विस्तार के साथ ही नए हवाई अड्डों के लिए लैंडिंग और टेकऑफ़ (LTO) सुविधाओं को मानकीकृत करने का भी प्रावधान है।

बिहार के प्रमुख राजनेताओं ने इस योजना को आर्थिक विकास का नया मोर्चा बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हवाई कनेक्टिविटी से न केवल व्यापारियों को लाभ होगा, बल्कि पर्यटन के अवसर भी बढ़ेंगे। केंद्रीय परिवहन मंत्री ने योजना को राष्ट्रीय कनेक्टिविटी के बड़े चित्र का हिस्सा बताते हुए, राज्य के विकास में इस पहल का योगदान अविस्मरणीय रहेगा कहा।

राज्य के उद्योग संघों ने भी इस योजना को स्वागत किया। बिहार औद्योगिक संघ के अध्यक्ष ने कहा कि हवाई अड्डे बनने से लॉजिस्टिक लागत में 15‑20 % की कमी आएगी और छोटे व मध्यम उद्यमों को विश्व बाजार तक पहुंच आसान होगी। इसी तरह, बिहार पर्यटन विकास निगम ने बताया कि नई हवाई सुविधाएं बिहार के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए अधिक आकर्षक बनाएंगी।

विपक्षी दलों ने योजना की वित्तीय स्थिरता पर सवाल उठाया। एक प्रमुख विपक्षी नेता ने कहा कि राज्य की वर्तमान वित्तीय स्थिति को देखते हुए, 12,500 करोड़ रुपये का खर्च अत्यधिक है और इससे स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसे मूलभूत क्षेत्रों में निवेश पर असर पड़ सकता है। इन आरोपों पर सरकार ने बताया कि परियोजना का अधिकांश वित्त पोषण केंद्र से आएगा और निजी निवेशकों को भी आकर्षित किया जाएगा।

स्थानीय आबादी के बीच भी इस परियोजना को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी नई हवाई सुविधा को रोजगार के नए अवसर, बेहतर कनेक्टिविटी और स्थानीय आर्थिक विकास का संभावित माध्यम मान रहे हैं। वहीं, कुछ प्रभावित समुदायों ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता और उचित मुआवजे की मांग उठाई है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि विकास परियोजना को आगे बढ़ाते समय प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, आजीविका और अधिकारों का पर्याप्त ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि स्थानीय लोगों की चिंताओं का समाधान संवाद और निष्पक्ष प्रक्रिया के जरिए किया जाना जरूरी है।

Updated: August 22, 2026

Bihar’s plan to build 13 new airports by 2030 will expand regional air connectivity and reduce travel time for rural populations. The project aims to support economic growth and enhance security through integrated infrastructure and defense coordination.

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