नया नियम BERC के अधिनियम‑38(1) के तहत तैयार किया गया, जिसमें बकाया राशि को तीन से छह महीने की किस्तों में विभाजित करने की अनुमति दी गई है। किस्त की अवधि उपभोक्ता के बकाया की कुल राशि, उपभोग वर्ग और भुगतान क्षमता के आधार पर निर्धारित की जाएगी। उपयोगकर्ता को पहले एक छोटा अग्रिम भुगतान करना होगा, जिसके बाद शेष राशि को समान अंतराल पर मासिक या द्वि‑मासिक किस्तों में जमा किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और स्थानीय विद्युत उपभोक्ता सहायता केंद्रों के माध्यम से सुगम बनाया गया है।
नई व्यवस्था के तहत, उपभोक्ता को पहले अपने बकाया बिल का विस्तृत विवरण प्राप्त होगा, जिसमें बकाया राशि, नियत तिथियां और किस्त‑परिचालन के विकल्प स्पष्ट रूप से दर्शाए जाएंगे। ग्राहक यदि सहमत हो तो वह अपने बैंक खाते, मोबाइल वॉलेट या नकद माध्यम से तय समय पर किस्त जमा कर सकते हैं। किस्तों का भुगतान न करने पर पहले की तरह कड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी; बल्कि BERC ने एक ग्रेस‑पिरियड निर्धारित किया है, जिसके बाद पुनः पुनर्समायोजन किया जा सकेगा।
BERC ने यह भी स्पष्ट किया कि इस नई योजना का लाभ केवल उन उपयोगकर्ताओं को मिलेगा जो पोस्टपेड से प्रीपेड मीटर में परिवर्तन कर चुके हैं और जिनके बकाया बिल की सीमा 5,000 रुपये से 25,000 रुपये के बीच है। इस सीमा से अधिक बकाया वाले ग्राहकों को व्यक्तिगत मूल्यांकन के आधार पर अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान की जा सकती हैं। इस नीति को लागू करने के लिए BERC ने 15 जुलाई को एक विशेष कार्यशाला आयोजित की, जिसमें विभिन्न विद्युत वितरण कंपनियों, उपभोक्ता संघों और वित्तीय संस्थानों को आमंत्रित किया गया।
प्रीपेड मीटर में बदलाव के बाद, कई उपयोगकर्ता ने अपने बिजली खर्च में पारदर्शिता और नियंत्रण की प्रशंसा की है। परन्तु, कुछ उपयोगकर्ताओं ने यह चिंता जताई कि किस्त‑आधारित भुगतान के कारण कुल भुगतान की अवधि बढ़ सकती है, जिससे ब्याज या अतिरिक्त शुल्क लग सकता है। इस संदर्भ में BERC ने स्पष्ट किया कि किस्तों पर कोई अतिरिक्त ब्याज नहीं लगेगा; केवल नियत तिथियों पर देर से भुगतान करने पर मामूली जुर्माना लागू होगा।
वित्तीय मामलों के विशेषज्ञों ने इस कदम को सकारात्मक माना है, क्योंकि यह उपभोक्ताओं के नकदी प्रवाह को सुगम बनाते हुए ऊर्जा क्षेत्र में डिफ़ॉल्ट रिस्क को कम करने की संभावना रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि किस्त‑आधारित मॉडल अन्य राज्यों में लागू हो सकता है, जहाँ समान आर्थिक दबाव देखा गया है। कुछ उपभोक्ता संगठनों ने इस नीति की सराहना करते हुए कहा कि यह ऊर्जा नियामक के उपभोक्ता‑हित में निर्णयों का एक उदाहरण है।
बीजली वितरण कंपनियों ने बताया कि इस नई व्यवस्था से उनके संग्रहण में सुधार की अपेक्षा है। पूर्व में कई केसों में बकाया बिल के कारण डिमांड कटौती या कनेक्शन बंद करने की स्थिति उत्पन्न होती थी, जिससे कंपनी को आर्थिक नुकसान और सामाजिक असंतोष का सामना करना पड़ता था। अब किस्त‑आधारित भुगतान से संग्रहण दर में वृद्धि की संभावना है, जिससे राजस्व स्थिरता में योगदान मिलेगा।
राज्य सरकार ने भी इस कदम की कूटनीतिक सराहना की है, क्योंकि यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में ऊर्जा पहुँच को स्थिर बनाए रखेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रीपेड मीटर की ओर संक्रमण को तेज़ करने के साथ साथ, उपभोक्ता को वित्तीय राहत प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में अन्य उपभोक्ता‑सहज योजनाओं, जैसे कि ऊर्जा‑बचत प्रोत्साहन, को भी इसी तरह लागू किया जा सकता है
Updated: August 22, 2026
Insight: Bihar’s installment‑based clearance for prepaid‑meter arrears could turn a cash‑strapped habit into a steady revenue stream, nudging both households and utilities toward healthier financial cycles.
If the model proves frictionless, it may become the template for other Indian states seeking to pair consumer‑friendly credit
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