भारतीय उर्वरक संघ ने दावा किया है कि खाड़ी फसल के लिए यूरिया और फॉस्फेटिक उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त है। यह बयान उन चिंताओं के बीच आया है जिसमें उर्वरकों की कमी के कारण फसलों की उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। भारतीय उर्वरक संघ के अनुसार, यूरिया और फॉस्फेटिक उर्वरकों की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
भारतीय उर्वरक संघ के अध्यक्ष ने कहा कि उर्वरकों की कमी के कारण फसलों की उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन हमने इसके लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। हमने उर्वरकों की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक व्यवस्था की है। हमें विश्वास है कि खाड़ी फसल के लिए यूरिया और फॉस्फेटिक उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त होगी।
उर्वरकों के उत्पादन में प्राकृतिक गैस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भारत में उर्वरकों के उत्पादन के लिए आवश्यक प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए पश्चिम एशिया से तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात किया जाता है। यह तरल प्राकृतिक गैस पुनर्गैसीकृत तरल प्राकृतिक गैस (आरएलएनजी) में परिवर्तित की जाती है, जिसका उपयोग यूरिया के उत्पादन में किया जाता है।
भारतीय उर्वरक संघ के अनुसार, पश्चिम एशिया से तरल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति स्थिर है और यह यूरिया के उत्पादन के लिए आवश्यक प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को सुनिश्चित करती है। संघ के अध्यक्ष ने कहा कि हमने तरल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं और हमें विश्वास है कि यह आपूर्ति स्थिर रहेगी।
भारतीय उर्वरक संघ के दावे के अनुसार, खाड़ी फसल के लिए यूरिया और फॉस्फेटिक उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त है। यह बयान उन किसानों के लिए राहत की खबर है जो खाड़ी फसल के लिए उर्वरकों की आपूर्ति को लेकर चिंतित थे। भारतीय उर्वरक संघ के अध्यक्ष ने कहा कि हम किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें आवश्यक उर्वरकों की आपूर्ति मिलती रहे।
इस बयान के बाद, किसानों और उर्वरकों के विक्रेताओं ने राहत की सांस ली है। उन्हें उम्मीद है कि यूरिया और फॉस्फेटिक उर्वरकों की आपूर्ति स्थिर रहेगी और वे अपनी फसलों की उत्पादकता को बढ़ाने में सक्षम होंगे। भारतीय उर्वरक संघ के दावे के अनुसार, खाड़ी फसल के लिए यूरिया और फॉस्फेटिक उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त है, और यह किसानों के लिए एक अच्छा संकेत है।