केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में विपक्ष पर तीखा हमला बोला, राहुल गांधी के संसद में अनुपस्थिति और विदेश दौरों पर। उन्होंने कहा कि जब संसद में चर्चा होती है, तो विपक्षी नेता विदेशों में घूमते हुए दिखाई देते हैं। अमित शाह ने यह भी कहा कि विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला की निष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं, जो बहुत अफसोसजनक है।
शाह ने कहा कि स्पीकर का फैसला अंतिम होता है और यदि कोई सदस्य सदन के नियमों का उल्लंघन करता है, तो स्पीकर के पास उसे रोकने, टोकने और बाहर निकालने का अधिकार है। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे संसद में अपनी बात रखने के लिए नियमों का पालन नहीं करते हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री ने यह भी कहा कि 18वीं लोकसभा में सदस्यों को कुल 71 घंटे का समय दिया गया, लेकिन उन्होंने कितना बोले? उन्होंने पूछा कि विपक्ष के नेता की पार्टी ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया, फिर भी विपक्ष के नेता उस पर क्यों नहीं बोलते। अमित शाह ने कहा कि यह ठीक नहीं है… या तो वे बोलना नहीं चाहते, या बोलना चाहते हैं तो नियमों के अनुसार बोलना नहीं जानते।
शाह ने राहुल गांधी पर भी हमला बोला, जिन्होंने विदेश दौरों के दौरान संसद सत्रों का समय बेहद संयोगपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र 2025 में राहुल गांधी जर्मनी, बजट सत्र 2025 में वियतनाम, बजट सत्र 2023 में इंग्लैंड, बजट सत्र 2018 में सिंगापुर और मलेशिया, मॉनसून सत्र 2020 में विदेश यात्रा पर थे, वहीं बजट सत्र 2015 में भी वे विदेश में थे। शाह ने सवाल किया कि जब सांसद विदेश में होते हैं तो संसद में कैसे बोल सकते हैं?
केंद्रीय गृह मंत्री ने यह भी कहा कि विपक्षी दलों ने तीन बार लोकसभा स्पीकर पर अविश्वास प्रस्ताव लाया है, लेकिन हमने कभी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया। उन्होंने कहा कि स्पीकर का प्रथम कर्तव्य व्यवस्था और शिष्टाचार को बनाए रखना होता है और यदि कोई सदस्य सदन के नियमों का उल्लंघन करता है, तो स्पीकर को उसे बैठाना पड़ेगा। अमित शाह ने तंज कसते हुए कहा कि शशि थरूर, बालू साहब जैसे वरिष्ठ सदस्य हैं वहां, मुझे समझ नहीं आता कि वे क्यों नहीं सिखाते इन्हें। इतना सिखा दें तो समस्या का वहीं समाधान हो जाए।
अमित शाह ने कहा कि स्पीकर सभी के होते हैं और स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव अफसोसजनक है। उन्होंने कहा कि संसद आपसी विश्वास और नियमों से चलती है, इसलिए स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाना सही नहीं है।