Press "Enter" to skip to content

Posts tagged as “#PatnaHighCourt”

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना हाईकोर्ट में आज इन मामलों की होगी सुनवाई :-

1. पटना हाईकोर्ट में राज्य के सरकारी मेडिकल कालेजों में एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन एक लंबे अरसे के बाद भी नहीं लगाए जाने के मामलें पर सुनवाई की जाएगी।जस्टिस अश्विनि कुमार सिंह की खंडपीठ ने नागरिक अधिकार मंच की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को बताने को कहा था कि ये मशीन कब तक लग कर चालू होगा।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि कोर्ट के बार बार आदेश करने के बाद भी सीटी स्कैन और एम आर आई मशीन इन अस्पतालों में अब तक नही लगाया गया है।इससे आमलोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता हैं।


2. पटना हाईकोर्ट ने बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ द्वारा आकांक्षा मालवीय की जनहित याचिका पर सुनवाई की जा रही है।

कोर्ट ने इससे पूर्व याचिकाकर्ता को राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवा में क्या क्या कमियों के सम्बन्ध में ब्यौरा देने को कहा था। साथ ही इसमें सुधारने के उपाय पर सुझाव देने को कहा था।


3. पटना हाई कोर्ट ने पटना -गया -डोभी एनएच 83 फोर लेन के मामले में सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ समक्ष अधिवक्ताओं की कमिटी ने अपनी रिपोर्ट पेश किया।इस मामलें पर अगली सुनवाई 7 जुलाई,2022 को होगी।

कोर्ट ने इस निर्माणधीन एन एच के स्थल निरीक्षण करने के लिए तीन अधिवक्ताओं की टीम का गठन किया गया था। अधिवक्ता प्रिय रंजन,आलोक कुमार राही और याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मनीष गुप्ता इसमें शामिल थे।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

4. पटना हाईकोर्ट ने देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के स्मारकों की दयनीय हालत से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने समक्ष विकास कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही हैं।कोर्ट ने इससे पहले की सुनवाई में राज्य सरकार से बिहार विद्यापीठ के प्रबंधन अपने हाथ में लेने हेतु कानून बनाने को कहा था।


5. पटना हाई कोर्ट में नारायणपुर – मनहारी- पूर्णिया हाईवे के निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई को रोकने के लिये दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई करेगी। पिछली सुनवाई में एन एच ए आई को बताने को कहा गया था कि नए वृक्षारोपण के लिए क्या कार्रवाई की जा रही हैं।साथ ही वृक्षारोपण के मामलें मे ग्राम पंचायत की अधिकार और भूमिका के सम्बन्ध में भी जानकारी तलब किया गया।

पटना हाईकोर्ट ने एक 26 वर्षीय कनाडा की महिला नागरिक के ग़लत तरीक़े से भारत की सीमा में प्रवेश कर जाने के मामले में उसे राहत देते हुए उसके ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर, संज्ञान लेने के आदेश और आरोप तय करने का आदेश रद्द कर दिया

जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने कनाडा की महिला विलियम्स रेबेका की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया ।

कनाडाई महिला पर आरोप लगाया गया था कि वह बग़ैर वीज़ा के नेपाल से लगी भारतीय सीमा में 31.03.2021 में प्रवेश कर गई थी। अप्रवास अधिकारी ने इस बात की सूचना रामगढ़वा पुलिस थाने को दी और महिला को गिरफ़्तार किया गया ।

उससे पूछ ताछ के क्रम में सामने आया कि उसके पास भारतीय वीज़ा नहीं है । उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 447, विदेशी अधिनियम की धारा 14 बी, और आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 52 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। उसे उसी दिन हिरासत में लिया गया था और हिरासत में 6 महीने बिताने के बाद उसे पटना हाईकोर्ट द्वारा 03.09.2021 जमानत पर रिहा कर दिया गया था।

याचिकाकर्ता द्वारा इस मामले में क्रिमिनल रिट याचिका दायर की गई थी ।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

याचिकाकर्ता की अधिवक्ता सृष्टि सिंह ऐवं प्रणव कुमार ने कोर्ट को बताया कि जांच एजेंसी द्वारा दायर प्राथमिकी के साथ-साथ निचली अदालत के संज्ञान लेने का आदेश एवं आरोप पत्र में त्रुटि है। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता कई गम्भीर मानसिक स्वास्थ्य समस्यायों के साथ साथ खाने के विकारों से पीड़ित है ।

इस पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के विरुद्ध कोई आपत्तिजनक साक्ष्य नहीं पाते हुए मामले में दर्ज एफआईआर, संज्ञान लेने के आदेश और आरोप तय करने का आदेश भी रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार को कनाडा के दूतावास के परामर्श से याचिकाकर्ता को उसके अपने देश भेजने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया है।

पटना हाईकोर्ट ने मुज़फ़्फ़रपुर के ब्रह्मपुरा अंतर्गत राजन साह की 5 वर्षीय पुत्री खुशी के अपहरण के मामले पर सुनवाई की

जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद के समक्ष सुनवाई के दौरान मुज़फ़्फ़रपुर के एसएसपी कोर्ट में उपस्थित थे ।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस केस में संलिप्त संदिग्ध का पॉलीग्राफी टेस्ट करवाया जाएगा। एक बार पुनः इस केस को नए सिरे से अनुसंधान किया जाएगा ।

उन्होंने कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह इस मामले में कोई सकारात्मक परिणाम निकाल कर देंगे । इस पर कोर्ट ने कहा मुज़फ़्फ़रपुर के एसएसपी से कहा कि इस केस को चैलेंज के रूप में ले और सकारात्मक जांच रिपोर्ट 4 सप्ताह में दायर करें।
गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में एकलपीठ ने अनुसंधान पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि पूर्व के अनुसंधानकर्ताओं ने अनुसंधान के नाम केवल काग़ज़ी कार्यवाही की है । कोर्ट ने केस डायरी का अवलोकन कर यह पाया कि पुलिस ने संदिग्धों पर उचित ढंग से कार्यवाही नहीं करते हुए अनुसंधान में उदासीन रवैय्या अपनाया ।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

कोर्ट ने इस मामले पहले से गठित एसआईटी को समाप्त कर मुज़फ़्फ़रपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में नए एसआईटी को गठित करके जांच करने का आदेश दिया था । हाईकोर्ट ने मामले के अवलोकन पर पाया कि अनुसंधान में पाए गए संदिग्ध व्यक्ति आकाश कुमार के बयान को भी पुलिस द्वारा नज़रअंदाज़ किया गया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ओमप्रकाश ने कोर्ट को बताया कि 16 फरवरी 2021 को बच्ची का अपहरण कर लिया गया था लेकिन 1 साल 4 महीने बीत जाने के बाद भी आज तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 अगस्त को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन में कई व्यक्तियों के आंख की रौशनी खो जाने के मामले पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने करते हुए राज्य के अपर मुख्य सचिव को पुनः विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई में

मुजफ्फरपुर के एस एस पी को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कोर्ट ने निर्देश दिया है।मुकेश कुमार ने ये जनहित याचिका दायर की है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वी के सिंह ने कोर्ट को बताया था कि इस मामलें में दर्ज प्राथमिकी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने इस मामलें में गठित डॉक्टरों की कमिटी को चार सप्ताह मे अपना रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

पहले की सुनवाई में कोर्ट ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि वे इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए पी एम सी एच या एम्स ,पटना के डॉक्टरों की कमिटी गठित करें।इनमें आँख रोग विशेषज्ञ भी शामिल हो।

इसमें कोर्ट को बताया गया था कि आँखों की रोशनी गवांने वाले पीडितों को बतौर क्षतिपूर्ति एक एक लाख रुपए दिए गए हैं।साथ ही मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल को बंद करके एफ आई आर दर्ज कराया गया था,लेकिन अब तक दर्ज प्राथमिकी पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई ।

इस याचिका में हाई लेवल कमेटी से जांच करवाने को लेकर आदेश देने अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विजय कुमार सिंह ने आरोप लगाया गया है कि कथित तौर पर आई हॉस्पिटल के प्रबंधन व राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा बरती गई अनियमितता और गैर कानूनी कार्यों की वजह से कई व्यक्तियों को अपनी आँखें की रोशनी खोनी पड़ी।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार के अधिकारियों को भी एक नियमित अंतराल पर अस्पताल का निरीक्षण करना चाहिए था।

याचिका में आगे यह भी कहा गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों व अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज करनी चाहिए, क्योंकि इन्हीं की लापरवाही की वजह से सैकड़ों लोगों को अपनी ऑंखें गंवानी पड़ी।

मुजफ्फरपुर आई अस्पताल प्रबंधन व जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही की वजह से आंख खोए व्यक्तियों को मुआवजा देने का भी आग्रह किया गया था। पीड़ितों को सरकारी अस्पताल में उचित इलाज करवाने को लेकर आदेश देने का भी अनुरोध किया गया था।

इस मामले पर अगली सुनवाई 18 जुलाई, 2022 को की जाएगी।

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना हाईकोर्ट में आज इन मामलों की होगी सुनवाई :-

1.नगर निगमों की वित्तीय स्वायत्तता के मामलें पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई की जाएगी। आशीष कुमार सिन्हा की याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करेगी।
इस मामलें में कोर्ट ने सरकार को स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का मोहलत दिया था।

याचिका में यह कहा गया है कि अन्य राज्यों में नगर निगम को आवंटित धनराशि का उपयोग करने का अधिकार नगर निगम को ही हैं।साथ किस मद में पैसा कैसे खर्च करना हैं,इसका निर्णय भी नगर निगम ही लेता है।लेकिन बिहार में नगर निगमों को ऐसी स्वायतता नहीं है।

2.राज्य के शिक्षण संस्थानों में छात्रों को शुद्ध और साफ पेय जल उपलब्ध कराने के मामलें पर दायर जनहित याचिका पर पटना हाईकोर्ट सुनवाई करेगी। जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह की खंडपीठ आल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन की जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

पटना हाईकोर्ट ने पटना के लोगों द्वारा सामना किये जा रहे स्ट्रीट वेंडिंग, ड्रेनेज, जल जमाव, सीवरेज, भूमि विकास, अतिक्रमण व सड़क निर्माण समेत अन्य समस्यायों पर सुनवाई की

जस्टिस अश्विनि कुमार सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य के राजस्व व भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, पटना के एसएसपी व पटना के जिलाधिकारी समेत अन्य आलाधिकारियों को नोटिस जारी कर कार्रवाई रिपोर्ट माँगा है। विकास चंद्र उर्फ गुड्डू बाबा समेत अन्य की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की गई।

याचिकाकर्ता ने पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली खंडपीठ द्वारा 27 जुलाई, 2019 को पारित किए गए आदेश को कोर्ट के समक्ष रखा। इसमें उम्मीद जताई गई थी कि इन मामलों को लेकर ईमानदार प्रयास किया जाएगा।

अतिक्रमण को हटाया जाएगा और ट्रैफिक जाम के मुद्दे का हल दक्षतापूर्वक किया जाएगा। कोर्ट द्वारा इस बात को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त किया गया था कि उक्त बुनियादी आवश्यकताओं को लेकर राज्य सरकार को एक सिस्टम बनाना चाहिए, ताकि सभी विभागों के बीच एक समन्वय स्थापित किया जा सके।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

क्योंकि जो बुनियादी मुद्दे हैं वो एक दूसरे विभाग से जुड़े हुए हैं और वो एक विभाग के लिए चिंता का विषय नहीं है।

कोर्ट ने एक ऐसा समन्वय स्थापित करने वाली बॉडी बनाने की बात कही थी, जिसमें सिर्फ नौकरशाह ही नहीं ,तकनिकी/ एक्सपर्ट टाउन प्लानर भी शामिल हो।

इस मामलें पर फिर 4 सप्ताह बाद सुनवाई की जाएगी।

अदालत से तथ्यात्मक मामलों को छिपा कर कोर्ट को गुमराह करने के मामले पर पटना हाईकोर्ट ने रिट याचिकाकर्ता पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया है

जस्टिस संदीप कुमार ने संतोष कुमार द्वारा दायर रिट आवेदन को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर पच्चीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया।

यह राशि कानूनी सहायता सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में जमा की जानी है। पटना के दनियावां गांव में 0.255 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के मुआवजे के भुगतान के लिए ये रिट याचिका दायर की गई थी, जो वास्तव में एक विधवा को जमीन स्वामित्व के बारे में पूछताछ करने के बाद भुगतान किया गया था।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

याचिकाकर्ता ने इस तथ्य को दबा कर कहा था कि उसका विधवा के परिवार से कोई संबंध नहीं था।साथ ही भूमि पर उसके दावों को भी उसके द्वारा दायर एक मालिकाना मुकदमे में दीवानी अदालतों द्वारा सुना गया था।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी मेडिकल कालेजों में एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन एक लंबे अरसे के बाद भी नहीं लगाए जाने को काफी गम्भीरता से लिया

जस्टिस अश्विनि कुमार सिंह की खंडपीठ ने नागरिक अधिकार मंच की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को बताने को कहा कि ये मशीन कब तक लग कर चालू होगा।

कोर्ट ने राज्य सरकार से जानना चाहा कि आम जनता को सरकारी अस्पताल में इस तरह की जांच कम पैसे में होती है,जबकि निजी अस्पतालों में काफी पैसा खर्च करना होता हैं, तो अब तक सरकार ने इन्हें क्यों नहीं लगाया।

ये जनहित याचिका 2015 में दायर की गई थी।इन वर्षो में कोर्ट ने राज्य सरकार को सरकारी मेडिकल कालेजों में इन मशीनों को लगाने व चालू करने के कई आदेश दिया।लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।इसका नतीजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा हैं।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के बार बार आदेश करने के बाद भी सीटी स्कैन और एम आर आई मशीन इन अस्पतालों में अब तक नही लगाया गया है।इससे आमलोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड रहा है।

उन्होंने बताया कि जहाँ सरकारी अस्पताल में इन जांचो में काफी कम खर्च होता हैं,वहीं निजी अस्पतालों में आमलोगों को काफी खर्च करना पडता हैं।इससे काफी आर्थिक बोझ उन पर पड़ता हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 18 जुलाई,2022 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने बिहार के गर्भाशय घोटाले के मामलें पर सुनवाई करते हुए सीबीआई को चार सप्ताह मे जवाब देने को कहा कि इस मामलें को जांच के लिए क्यों नहीं CBI को सौंपा जाए

जस्टिस अश्विनि कुमार सिंह और डा अंशुमान की खंडपीठ ने वेटरन फोरम द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सीबीआई को पार्टी बनाने का निर्देश दिया था।

राज्य सरकार की ओर से अपार महाधिवक्ता एस पी यादव ने कोर्ट ने एक सप्ताह समय देने का अनुरोध किया,ताकि इस मामलें की सुनवाई में एडवोकेट जनरल राज्य सरकार का पक्ष सके।

कोर्ट ने जानना चाहा कि इस तरह की अमानवीय घटना के मामलें में राज्य सरकार ने क्या किया।राज्य सरकार को इस मामलें ज्यादा संवेदनशीलता दिखाना चाहिए था।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि सबसे पहले ये मामला मानवाधिकार आयोग के समक्ष 2012 में लाया गया था।2017 में पटना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका वेटरन फोरम ने दायर किया गया था।

इसमें ये आरोप लगाया गया था कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का गलत लाभ उठाने के लिए बिहार के विभिन्न अस्पतालों/डॉक्टरों द्वारा बड़ी तादाद में बगैर महिलाओं की सहमति के ऑपरेशन कर गर्भाशय निकाल लिए गए।

अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि पीड़ित महिलाओं की संख्या लगभग 46 हज़ार होने की सम्भावना है। बीमा राशि लेने के चक्कर में 82 पुरुषों का भी आपरेशन कर दिया गया।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

इस मामला के खुलासा होने के बाद मानवाधिकार आयोग ने 30 अगस्त,2012 को स्वयं संज्ञान लिया था आयोग ने 2015 में राज्य सरकार व अनुसन्धान एजेंसी को विस्तृत जानकारी देने को कहा था।

इसमें कितने आपरेशन किये गए और कितनी महिलाओं के उनकी सहमति के बगैर उनके गर्भाशय निकाले गए और उनकी उम्र कितनी थी।पीड़ितों को दिए गए मुआवजे का भी ब्यौरा माँगा गया था।

लेकिन इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।मानवाधिकार आयोग और पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी क्षतिपूर्ति नहीं दिया गया है।साथ ही सार्वजनिक।धन के वापसी के लिए भी अबतक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद की जाएगी।

राज्य में किसानों और कृषि कार्य में सहायता के लिए लगाए गए राजकीय नलकूपों के बेकार पड़े होने के मामलें पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की

जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह की खंडपीठ ने गुड्डू बाबा ऊर्फ विकास चन्द्र की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के चीफ सेक्रेटरी को विस्तृत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राज्य में सिंचाई कार्य के लिए दस हजार से अधिक राजकीय नलकूपों को राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में लगाया गया।इनमें से लगभग एक तिहाई नलकूप ही चालू हालत में रहे।बाकी 6636 नलकूप बेकार पड़े रहे।इस कारण राज्य में कृषि कार्य बुरी तरह प्रभावित हुए।

कोर्ट को बताया गया कि पिछली कुछ वर्षो में मरम्मती और नलकूपों को चालू करने के बड़े पैमाने पर धन आवंटित किया गया।लेकिन आज भी 161 नलकूप ही चालू हालत में हैं,जबकि 6500 नलकूप अभी चालू हालत में नहीं हैं।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राजकीय नलकूपों के रख रखाव और मरम्मत का जिम्मा ग्राम पंचायत को देने का प्रस्ताव दिया गया था।अब तक इन्हें राज्य लघु सिंचाई विभाग के द्वारा रखरखाव और देखभाल किया जाता रहा हैं।
इस मामलें पर अगली सुनवाई 3 सप्ताह बाद की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट में राज्य के पटना स्थित जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के मामले पर सुनवाई 20 जुलाई,2022 को होगी

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ द्वारा गौरव कुमार सिंह व अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की जा रही हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के नोडल अधिकारी क तलब किया था।साथ ही पटना एयरपोर्ट के पूर्व और वर्तमान निर्देशक को भी पिछली सुनवाई में तलब किया था।

इससे पूर्व में कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को भी नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार को गया एयरपोर्ट के विकास के सन्दर्भ में बताने को कहा था कि 268 करोड़ रुपए की धनराशि कब तक दिया जाएगा।एडवोकेट जनरल ने इस सम्बन्ध में जवाब देने के लिए एक सप्ताह का मोहलत लिया था।

इससे पहले की सुनवाई में पटना के जयप्रकाश नारायण एयरपोर्ट के निर्देशक कोर्ट में उपस्थित हो कर पटना और राज्य के अन्य एयरपोर्ट की स्थिति के सम्बन्ध में ब्यौरा पेश किया था।

उन्होंने पटना एयरपोर्ट की समस्याओं को बताते हुए कहा कि हवाई जहाज लैंडिंग की काफी समस्या है।सामान्य रूप से रनवे की लम्बाई नौ हज़ार फीट होती हैं, जो कि पूर्णिया व दरभंगा में उपलब्ध है,जबकि पटना में रनवे की लम्बाई 68 सौ फीट हैं।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

कोर्ट को राज्य के गया,पूर्णियां और अन्य एयरपोर्ट के विस्तार,विकास और भूमि अधिग्रहण से सम्बंधित समस्यायों के बारे में बताया गया।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य के एडवोकेट जनरल से कहा था कि गया एयरपोर्ट के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए 268 करोड़ रुपए कोर्ट में जमा करा दे।सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद उसका निबटारा होगा।

राज्य में पटना के जयप्रकाश नारायण अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के अलावा गया, मुजफ्फरपुर,दरभंगा,भागलपुर,फारबिसगंज , मुंगेर और रक्सौल एयरपोर्ट हैं।लेकिन इन एयरपोर्ट पर बहुत सारी आधुनिक सुविधाओं के अभाव व सुरक्षा की भी समस्या हैं।

इस मामलें पर कोर्ट में अगली सुनवाई 20 जुलाई ,2022 को की जाएगी।

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास

पटना हाईकोर्ट में आज इन मामलों की होगी सुनवाई :-

1.पटना हाईकोर्ट में राज्य के पटना स्थित जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के मामले पर सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने गौरव कुमार सिंह व अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

इस मामलें पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को बताने को कहा है कि गया एयरपोर्ट को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने के लिए 268 करोड़ रुपये कब तक देगी।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

2. नगर निगमों की वित्तीय स्वायत्तता के मामलें पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई की जाएगी। आशीष कुमार सिन्हा की याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करेगी।
इस मामलें में कोर्ट ने सरकार को स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का मोहलत दिया था।

याचिका में यह कहा गया है कि अन्य राज्यों में नगर निगम को आवंटित धनराशि का उपयोग करने का अधिकार नगर निगम को ही हैं।साथ किस मद में पैसा कैसे खर्च करना हैं,इसका निर्णय भी नगर निगम ही लेता है।लेकिन बिहार में नगर निगमों को ऐसी स्वायतता नहीं है।

नगर निगमों को जो भी फंड मुहैया कराया जाता हैं,जो कि एक विशेष कार्य के लिए होता है।उन्हें कोई अधिकार नहीं होता कि वे यह तय कर सके कि आवंटित धनराशि को किस तरह व्यय करें।

पटना हाईकोर्ट ने पटना नगर निगम के एमपॉवर्ड स्टैंडिंग कमिटी के बिना सहमति ए एन कालेज,पटना के पीछे नगर विकास भवन के टेंडर को रद्द कर दिया

जस्टिस अश्विनि कुमार सिंह की खंडपीठ ने राज्य के नगर विकास और आवास विभाग को नगर आयुक्त द्वारा नगर विकास भवन निर्माण हेतु अनुमति के लिए दिये पत्र निरस्त कर दिया।

अधिवक्ता मयूरी ने बताया कि पटना नगर निगम के एम पॉवर्ड स्टैंडिंग कमिटी के बिना सहमति के नगर आयुक्त ने नगर विकास भवन के निर्माण स्थानीय ए एन कालेज के पीछे 1.5 एकड़ भूमि पर करने के लिए पत्र जारी किया गया।साथ ही भवन निर्माण विभाग ने निर्माण के टेंडर जारी कर दिया था, जिसे कोर्ट ने रद्द कर दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बगैर एमपॉवर्ड स्टैंडिंग कमिटी की अनुमति के नगर आयुक्त किसी संपत्ति को स्थानांतरित करने का पत्र नहीं जारी कर सकते है।वे निगम के कार्यपालक प्रधान होते हैं।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

कोर्ट ने अधिवक्ता मयूरी के इस तर्क को भी मना कि बिहार municipal एक्ट,2007 में कोई ऐसा प्रावधान नहीं है,जिसके तहत बाद में अनुमति ली जाए।नगर आयुक्त को ऐसी कोई कानूनी अधिकार नहीं है, जिसके तहत वे अधिकार का इस प्रकार उपयोग कर सके।इसलिए ये नगर आयुक्त का पत्र और भवन निर्माण के लिए जारी टेंडर को रद्द कर दिया गया।

राज्य में पड़ने वाले नेशनल हाईवे के किनारे पेड़ लगाने को लेकर एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एस ओ पी ) अपनाने हेतु दायर जनहित याचिका पर पटना हाई कोर्ट ने सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए नेशनल हाइवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के समक्ष अभ्यावेदन दाखिल करने को कहा है।

ये जनहित याचिका राजीव रंजन सिंह द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि ग्रीन हाइवेज (प्लांटेशन, ट्रांसप्लांटेशन, बीयूटीफिकेशन व मेंटेनेन्स) पॉलिसी- 2015 को लागू करने से इस नीति को व्यवस्थित किया जा सकेगा। इससे वातावरण के अनुकूल नेशनल हाईवे का निर्माण किया जा सकेगा और नेशनल हाईवे से होकर गुजरने वाले लोगों को प्राकृतिक छाया और प्रदूषण रहित वातावरण मिलेगा।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

इस मामले में याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर करने के पूर्व सड़क, परिवहन व हाईवे मंत्रालय के सचिव व राज्य के मुख्य सचिव समेत अन्य आला अधिकारियों को अभ्यावेदन भी भेजा था, लेकिन अभी तक संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया था।

इसके साथ ही कोर्ट ने इस याचिका को निष्पादित कर दिया।

बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा आयोजित 67वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के पेपर लीक मामलें की जांच सीबीआई से कराने की जनहित याचिका को पटना हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया

संजीव कुमार मिश्रा की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ ने सुनवाई। जनहित याचिका में ये कहा गया कि 67 वीं संयुक्त परीक्षा में पेपर लीक हुआ,इस पूरे मामलें की जांच सीबीआई कराई जानी चाहिए।ज़िला प्रशासन के सम्बंधित अधिकारियों के साथ बी पी एस सी के अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

8 मई, 2022 को ये परीक्षा आयोजित की गई।इन उम्मीद्वारों को विभिन्न ज़िला केंद्रों पर सेन्टर आवंटित किया गया।ये उम्मीदवार दूर दूर से आ कर इस परीक्षा में शामिल हुए।

9मई, 2022 को पेपर लीक होने के आधार इस परीक्षा को रद्द कर दिया गया।इन उम्मीद्वारों के बिना किसी गलती के मानसिक,आर्थिक और शारीरिक परेशानी झेलना पड़ा।इसके लिए इस याचिका में मुआवजा की माँग भी की गई।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

लेकिन कोर्ट ने इनकी दलीलों को नहीं माना।राज्य सरकार के महाधिवक्ता ललित किशोर ने कोर्ट को बताया कि इस मामलें में राज्य सरकार और बी पी एस सी ने त्वरित और सख्त कदम उठाया।इस घटना की जांच और इसके लिए जिम्मेवार लोगों विरुद्ध कार्रवाई प्रारम्भ की गई।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस मामलें की जांच अंतिम चरण में हैं।इसके जिम्मेवार पंद्रह लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया साथ इस कांड मुख्य आरोपी पर कार्रवाई की जा रही है।

महाधिवक्ता ललित किशोर की इन दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने इस जनहित याचिका को खारिज करते हुए इस मामलें की जांच सीबीआई से कराने की माँग को ठुकरा दिया।

पटना हाईकोर्ट केंद्र सरकार की अग्निवीर की योजना का विरोध करने के क्रम में हुए उत्पात,राष्ट्रीय सम्पत्ति को हानि पहुचाने और अराजकता फैलाने वाले तत्वों को सहयोग करने वाले लोगों की जांच कराने के लिए दायर जनहित याचिका को रद्द कर दिया

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की। इस जनहित याचिका में ये माँग की गई कि सम्बंधित अधिकारीगण इस उग्र आंदोलन के कारण नष्ट और क्षतिग्रस्त सम्पत्ति का आकलन करें।साथ ही इस आंदोलन में भाग लेने वाली राजनीतिक दलों पर जुर्माना लगाए।

साथ ही इस घटना को नहीं रोक पाने के राज्य सरकार पर भी जुर्माना लगाया जाए।इस उग्र और हिंसक आंदोलन के कारण न सिर्फ रेल को काफी नुकसान हुआ,बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई थी।दानापुर रेलवे स्टेशन को ही अकेले 260 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ललित किशोर ने राज्य सरकार का पक्ष प्रस्तुत करते हुए कोर्ट को बताया कि इस आंदोलन से निपटने के लिए राज्य सरकार पूरा व सख्त इंतजाम किया था। उन्होंने कहा कि गलत जनहित याचिका है।राज्य सरकार ने अराजक तत्वों पर सख्त तरीके से कार्रवाई की।सरकारी सम्पत्ति की रक्षा के लिए राज्य सरकार ने मुकम्मल इंतजाम किया था।

महाधिवक्ता ललित किशोर द्वारा कोर्ट को कार्रवाई के सम्बन्ध में पूरी जानकारी देने के इस जनहित याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया।

पटना हाईकोर्ट ने पीएमसीएच में बंद पड़े आधुनिक मेडिकल उपकरण को चालू करने के मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार एवं पीएमसीएच को 19 जुलाई,2022 तक जवाब देने का निर्देश दिया

पटना हाईकोर्ट ने पीएमसीएच में बंद पड़े आधुनिक मेडिकल उपकरण को चालू करने के मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार एवं पीएमसीएच को 19 जुलाई,2022 तक जवाब देने का निर्देश दिया है।चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ ने विकास चंद्र की लोकहित याचिका पर सुनवाई किया।

जनहित याचिका द्वारा याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि पीएमसीएच में मरीज़ों के काम आने वाले 3 वेंटिलेटर, कई सारे मेडिकल उपकरण चालू हालत में नहीं है ।अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण मरीज़ों के उपयोग के लिए नहीं लाए जा रहे हैं ।

याचिकाकर्ता ने इससे पहले 2013 में हाईकोर्ट के समक्ष रिट याचिका दायर की थी, जिसके तहत उन्होंने कोर्ट से माँग की थी कि पीएमसीएच प्रशासन द्वारा घोर लापरवाही बरतते हुए भारी संख्या में मेडिकल उपकरण मौजूद होने के बाद भी मरीज़ों को इसका लाभ नहीं पा रहा है ।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

इस पर हाईकोर्ट ने 2015 में आदेश पारित कर पीएमसीएच प्रशासन को निर्देश दिया था कि वह जल्द इन मेडिकल उपकरण को सुचारु रूप से काम में लाकर मरीज़ों को इसका लाभ दे ।

याचिकाकर्ता ने याचिका द्वारा कोर्ट को यह भी बताया कि उक्त अस्पताल में 2012-13 में ख़रीदे गए तीन वेंटिलेटर अभी तक बक्से में बंद हैं और अस्पताल प्रशासन द्वारा मरीज़ों से यह कहा जा रहा है कि अस्पताल ने वेंटिलेटर एवं अन्य मेडिकल उपकरणों की भारी कमी है । इस मामले की अगली सुनवाई 19 जुलाई को होगी ।

व्यक्तिगत संबंध की सामाजिक स्वीकृति उसे कानून की नजर में मान्यता देने का आधार नहीं है – पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि व्यक्तिगत संबंध की सामाजिक स्वीकृति उसे कानून की नजर में मान्यता देने का आधार नहीं है। जस्टिस ए अमानुल्लाह एवं जस्टिस पूर्णेंदु सिंह की खंडपीठ ने अमित राज की क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया ।

याचिकाकर्ता द्वारा आरोप लगाया गया था कि उसकी पत्नी को उसके मायके वालों ने जबरन अपनी कस्टडी में रखा हुआ है । याचिकाकर्ता पति एवं प्रतिवादी पत्नी के बीच विवाह हो चुका है और वे अपनी शादी को जारी रखना चाहते हैं। लड़की के पिता को एकमात्र चिंता यह थी कि उसकी बेटी सुरक्षित रहे।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

कोर्ट के आदेश के बाद याचिकाकर्ता की पत्नी को जब अदालत में पेश किया गया, तब लड़की ने कहा कि उसने स्वेच्छा से याचिकाकर्ता से शादी की है और वह याचिकाकर्ता के साथ रहना चाहती है।

अदालत ने अपने फैसले में उल्लेख किया कि लड़की बालिग है और शादी करने या अपनी पसंद के किसी व्यक्ति के साथ रहने के लिए स्वतंत्र है।कोर्ट ने तथ्यों के मद्देनजर याचिकाकर्ता के साथ उसे अपने ससुराल जाने की अनुमति दे दी।

पटना हाईकोर्ट ने देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के स्मारकों की दयनीय हालत से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने समक्ष विकास कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से बिहार विद्यापीठ के प्रबंधन अपने हाथ में लेने हेतु कानून बनाने को कहा।

कोर्ट ने कहा कि अगर विधान सभा यदि सत्र में नहीं हो,तो इसके लिए अध्यादेश लाया जा सकता है, जिसे बाद में कानून का रूप दिया जा सकता है।कोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार को पटना स्थित बिहार विद्यापीठ का प्रबंधन अपने हाथ में लेने के लिए विशेष प्रस्ताव राज्य सरकार को पारित करने को कहा था।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने बिहार विद्यापीठ सोसाईटी व इसके सदस्यों के क्रियाकलापों की जांच करने के लिए राज्य निगरानी को निर्देश दिया था।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने अर्कीलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से जानना चाहा था कि डा राजेंद्र प्रसाद से सम्बंधित स्मारकों को देख रेख कर सकता है या नहीं।इस पर अर्कीलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से बताया गया था कि जो सौ वर्ष से पुराने स्मारक हैं,ये उनकी ही देख रेख कर सकते हैं।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

कोर्ट ने उनसे कहा कि वे विशेष परिस्थिति में क्या वे इसके देख रेख का जिम्मा ले सकते हैं।पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि बिहार विद्यापीठ परिसर में सभी गैर कानूनी अतिक्रमण को हटा दिया गया।

साथ ही बिहार विद्यापीठ के प्रबंधन का जिम्मा पटना के प्रमंडलीय आयुक्त को सौंप दिया गया।इस मामलें पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने राजधानी पटन में हर वर्ष होने वाले जलजमाव की भयंकर समस्या को काफी गम्भीरता से लेते हुए पटना नगर निगम के आयुक्त को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने नवीन कुमार व अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं सुनवाई करते हुए जलजमाव की समस्या से निपटने के लिए की जा रही कार्रवाई का ब्यौरा तलब किया है।

कोर्ट ने जलजमाव की समस्या से निपटने के लिए की गई कार्रवाई,काम कर रहे सम्प हाउस की स्थिति और विभिन्न क्षेत्रों में जलजमाव का पूरा ब्यौरा देने का निर्देश दिया।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को जानकारी दी कि प्रशासन द्वारा हर वर्ष जलजमाव से निपटने के लिए दावा करने के बाद भी हर वर्ष पटना के विभिन्न क्षेत्रों के नागरिकों को जलजमाव की विभिषिका झेलनी पड़ती है।

उन्होंने बताया कि पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता श्याम किशोर शर्मा 1997 में पटना के जलजमाव के सम्बन्ध में एक जनहित दायर की थी।तब से पटना हाईकोर्ट ने जलजमाव की समस्या को सुलझाने के कई सख्त आदेश दिया,लेकिन 25 वर्षों बाद भी जलजमाव के हालत सुधरने के बजाय और बदतर हो गया।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

हर साल नालों की उड़ाही करने का काम होता हैं,जिसमें बड़े पैमाने पर फंड खर्च होता हैं,जब एक दिन के बरसात में इनकी पोल खुल जाती हैं।

कल एक दिन की ही बारिश में पटना के विभिन्न क्षेत्रों में बाढ़ का दृश्य नज़र आने लगा था।कोर्ट ने मामलें को गम्भीरता से लेते हुए पटना नगर निगम के आयुक्त को अगली सुनवाई पूरा ब्यौरा देते हुए हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया।इन मामलों पर फिर एक सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

पटना हाईकोर्ट ने झंझारपुर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशंस जज अविनाश कुमार – I पर किये गए कथित हमले और मारपीट के मामले में अभियुक्त घोराडीह के एसएचओ गोपाल कृष्णा ऐवं एएसआई अभिमन्यु शर्मा को ज़मानत दे दी

जस्टिस चंद्रशेखर झा ने अभियुक्तों की ज़मानत याचिका पर सुनवाई की।

गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने बिहार पुलिस के रवैये को निराशाजनक बताते हुए मामले की जाँच का ज़िम्मा सीआईडी को सौंपा था।कोर्ट ने कहा कि इस मामले की जांच एसपी स्तर के अधिकारी करेंगे। साथ ही इस मामले की निगरानी सीआईडी के एडीजी खुद करेंगे।

झंझारपुर के एडीजे ने अभियुक्तों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई थी कि दिनांक 18.11.2021 को दोपहर के क़रीब 2 बजे उक्त दोनों पुलिस वाले उनके चेम्बर में ज़बरदस्ती घुस आए। उनके साथ मारपीट और बदसलूकी की और एएसआई अभिमन्यु शर्मा ने उन्हें लोडेड रिवॉल्वर दिखा कर जान से मारने की धमकी दी।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

याचिकाकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता वसंत कुमार चौधरी ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ताओं के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 341,323,506/34 ऐवं अर्म्स ऐक्ट की धारा 30 के तहत चार्जशीट दायर की गई है। इनमे सारी धाराएँ ज़मानती हैं और याचिकाकर्ता 10.12.2021 से हिरासत में हैं ।

उन्होंने कोर्ट को दर्शाया कि याचिकाकर्ताओं को जेल में बंद रखना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन होगा । इस पर कोर्ट ने सीआईडी द्वारा दायर हलफनामे के आधार पर याचिकाकर्ताओं की ज़मानत याचिका को स्वीकृति दे दी।

पटना हाईकोर्ट के समक्ष राज्य के पूर्व मंत्री सह विधायक तेजप्रताप यादव की पत्नी ऐश्वर्या राय की अपील पर सुनवाई की

जस्टिस आशुतोष कुमार सिंह और जस्टिस जीतेन्द्र कुमार की खंडपीठ ने इस अपील पर सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों को सुलह का प्रयास करने को कहा।

इसके लिए दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को इनके बीच बैठक कर सुलह के मुद्दे पर संभावना तलाशने को कहा।आज तेजप्रताप और ऐश्वर्या न्याय कक्ष में उपस्थित थे।इनके साथ तेजप्रताप की माँ पूर्व सी एम रावडी देवी और ऐश्वर्या के पिता न्याय कक्ष में उपस्थित रहे।सारी सुनवाई बंद कक्ष में हुआ।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं से यह बताने को कहा कि क्या दोनों पक्षों में सुलह की संभावना है। कोर्ट ने इस मुद्दे पर दोनों पक्षों से जवाब देने को कहा था।ऐश्वर्या की ओर से वरीय अधिवक्ता पी एन शाही ने कोर्ट के पक्ष रखा।तेज प्रताप के अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने बताया कि घरेलू हिंसा को लेकर ऐश्वर्या राय के विरुद्ध पारित आदेश व भरणपोषण(मेंटेनेन्स) से जुड़े मामले में राशि को बढ़ाने को लेकर हाई कोर्ट में अपील दायर किया गया है।

इस मामलें की सुनवाई अब अगली सुनवाई 19 जुलाई, 2022 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने मुज़फ़्फ़रपुर के ब्रह्मपुरा अंतर्गत सब्जी विक्रेता राजन साह की 5 वर्षीय बेटी खुशी के अपहरण से संबंधित मामले पर सुनवाई की

जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की कोर्ट में मुज़फ़्फ़रपुर के टाउन डीएसपी उपस्थित थे । कोर्ट ने अनुसंधान पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पूर्व के अनुसंधानकर्ताओं ने अनुसंधान के नाम केवल काग़ज़ी कार्यवाही की है । कोर्ट ने केस डायरी का अवलोकन कर यह पाया कि पुलिस ने संदिग्धों पर उचित ढंग से कार्यवाही नहीं करते हुए अनुसंधान में उदासीन रवैय्या अपनाया है।

कोर्ट ने इस मामले पहले से गठित एसआईटी को समाप्त कर मुज़फ़्फ़रपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में नए एसआईटी को गठित करके जांच करने का आदेश दिया । कोर्ट ने यह भी पाया कि अनुसंधान में पाए गए संदिग्ध व्यक्ति आकाश कुमार के बयान को भी पुलिस द्वारा नज़रअंदाज़ किया गया।

पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने पुलिस की जाँच पर नाराज़गी जताते हुए वर्तमान अनुसंधानकर्ता को जाँच करने से रोक दिया था । साथ ही आगे की जांच डीएसपी ऐवं एसएसपी के अगुआई में करवाने का आदेश दिया था।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ओम प्रकाश ने कोर्ट को बताया कि 16 फरवरी 2021 को बच्ची का अपहरण कर लिया गया था लेकिन 1 साल 4 महीने बीत जाने के बाद भी आज तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है।

कोर्ट ने अगली सुनवाई में जाँच रिपोर्ट के साथ मुज़फ़्फ़रपुर के टाउन एसएसपी एवं डीएसपी को कोर्ट में उपस्थित रहने का आदेश दिया है।
इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी।

चर्चित सिने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के संदेहास्पद मौत की जांच सही ढंग से कराने की याचिका पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई टल गई

मुंबई के अंतिम वर्ष के लॉ के छात्र देविंदर देवतादीन देबे की याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।

इस याचिका में कोर्ट को बताया गया था कि सीबीआई सुशांत के उनके मुंबई के बांद्रा स्थित फ्लैट में संदेहास्पद मौत की जांच कर रही थी।

इसमें यह अनुरोध किया गया था कि कोर्ट जांच कर रही सीबीआई के अधिकारियों को बदल कर वरीय अधिकारियों की नई सीबीआई की टीम को इस मामले की जांच का जिम्मा दिया जाए।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

इस याचिका में मांग की गई कि हाईकोर्ट इस मामले की स्वयं निगरानी करते हुए सीबीआई को समय समय पर कोर्ट में प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया जाए,ताकि जांच जल्द पूरा हो और दोषियों को सजा मिल सके।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 27 जून,2022 को होगी।

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के संदेहास्पद मौत की जांच सही ढंग से कराने की याचिका पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई की जाएगी

चर्चित सिने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के संदेहास्पद मौत की जांच सही ढंग से कराने की याचिका पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई की जाएगी। मुंबई के अंतिम वर्ष के लॉ के छात्र देविंदर देवतादीन दुबे की याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ सुनवाई करेगी।

इस याचिका में कोर्ट को बताया गया था कि सीबीआई सुशांत के उनके मुंबई के बांद्रा स्थित फ्लैट में संदेहास्पद मौत की जांच कर रही थी।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

इसमें यह अनुरोध किया गया था कि कोर्ट जांच कर रही सीबीआई के अधिकारियों को बदल कर वरीय अधिकारियों की नई सीबीआई की टीम को इस मामले की जांच का जिम्मा दिया जाए।

इस याचिका में मांग की गई कि हाईकोर्ट इस मामले की स्वयं निगरानी करते हुए सीबीआई को समय समय पर कोर्ट में प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया जाए,ताकि जांच जल्द पूरा हो और दोषियों को सजा मिल सके।

पटना हाईकोर्ट ने शादी समेत अन्य समारोहों में राज्य भर में किये जाने वाले हर्ष फायरिंग के मामले में सुनवाई करते हुए राज्य के डीजीपी को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है

चीफ जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने राजीव कुमार सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश को पारित किया है।

याचिकाकर्ता का कहना था कि हर्ष फायरिंग में कई निर्दोष लोगों घायल हो जाते हैं और कितने की तो जान भी चली जाती है, इसलिए इस मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

याचिकाकर्ता का कहना है कि इस मामले में एक सख्त गाइडलाइंस जारी की जानी चाहिए। जनहित याचिका में राज्य के चीफ सेक्रेटरी व डी जी पी समेत अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है। इस मामले में आगे की सुनवाई अब आगामी 4अगस्त को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट के समक्ष राज्य के पूर्व मंत्री सह विधायक तेजप्रताप यादव की पत्नी ऐश्वर्या राय की अपील पर सुनवाई की

जस्टिस आशुतोष कुमार सिंह और जस्टिस जीतेन्द्र कुमार की खंडपीठ ने इस अपील पर सुनवाई की।

कोर्ट ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं से यह बताने को कहा कि क्या दोनों पक्षों में सुलह की संभावना है। कोर्ट ने इस मुद्दे पर दोनों पक्षों से जवाब देने को कहा है।

पिछली सुनवाई में इस मामले में तेजप्रताप यादव के अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए और नोटिस को स्वीकार किया था। तेजप्रताप यादव की ओर से जवाब दायर किया जाना था।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

श्री सिंह ने बताया कि घरेलू हिंसा को लेकर ऐश्वर्या राय के विरुद्ध पारित आदेश व भरणपोषण(मेंटेनेन्स) से जुड़े मामले में राशि को बढ़ाने को लेकर हाई कोर्ट में अपील दायर किया गया है।

इस मामलें की सुनवाई 28 जून,2022 को भोजनावकाश के बाद किया जाएगा।तेज प्रताप के अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने बताया कि सुनवाई के दौरान ऐश्वर्या और तेज प्रताप के साथ दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के उपस्थिति में सुनवाई होगी।

पटना हाईकोर्ट ने बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने आकांक्षा मालवीय की जनहित याचिका पर सुनवाई की।कोर्ट ने केंद्र सरकार को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े स्कीम और फंड के सम्बन्ध में जानकारी देने को कहा।

पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकार का गठन कर दिया गया है। चीफ सेक्रेटरी ने हलफनामा दायर कर जानकारी दी कि राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकार का गठन कर दिया गया है।

आज याचिकाकर्ता की अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने कोर्ट को बताया कि बिहार की आबादी लगभग बारह करोड़ हैं।उसकी तुलना में राज्य में मानसिक स्वास्थ्य के लिए बुनियादी सुविधाएँ नहीं के बराबर हैं।कुछ अस्पताल,मनोचिकित्सक और नर्स पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने कहा कि आम लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और उसके समाधान के लिए राज्य में कोई व्यवस्था नहीं है।जो केंद्र सरकार के स्कीम और फंड है,उसका भी राज्य में सही ढंग से उपयोग नहीं हो रहा है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

पिछली सुनवाई में अपर महाधिवक्ता एस डी यादव ने कोर्ट को जानकारी दी कि कोइलवर स्थित मानसिक आरोग्यशाला में 272 बेड का अस्पताल बनाया जाना हैं।इसकी लागत 129 करोड़ रुपए होगी और 3 माह में निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।

सुनवाई के दौरान कोर्ट को अपर महाधिवक्ता एस डी यादव ने बताया था कि राज्य के इकतीस जिलों मे ज़िला मानसिक स्वास्थ्य प्रोग्राम प्रारम्भ हो गया हैं।साथ ही शेष आठ जिलों में इसे स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार की सहमति मिल गई है।


उन्होंने कोर्ट को बताया था कि मानसिक रोगियों के ईलाज के लिए 61 डॉक्टरों व 47 नर्सों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 27 जुलाई,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट में राज्य के पटना स्थित जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के मामले पर सुनवाई की जाएगी

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने गौरव कुमार सिंह व अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

इस मामलें पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को बताने को कहा है कि गया एयरपोर्ट को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने के लिए 268 करोड़ रुपये कब तक देगी।

पटना हाईकोर्ट में पटना-गया-डोभी एनएच 83 फोर लेन के मामले में सुनवाई की जाएगी

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई करेगी।

गया के पास दो आर ओ बी के निर्माण के सम्बन्ध में रेलवे के जनरल मैनेजर और डी आर एम,ईस्ट सेंट्रल रेलवे को तलब किया हैं। ये जनहित याचिका प्रतिज्ञा नामक संस्था ने दायर किया हैं।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

Patna HighCourt News: मुज़फ़्फ़रपुर के ब्रह्मपुरा थाना अंतर्गत राजन साह की 5 वर्षीय बेटी खुशी के अपहरण के मामलें पर सुनवाई हुई

पटना हाईकोर्ट ने मुज़फ़्फ़रपुर जिला के ब्रह्मपुरा थाना अंतर्गत राजन साह की 5 वर्षीय बेटी खुशी के अपहरण के मामलें पर सुनवाई की।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने इस मामलें की जांच पर गहरा असंतोष जाहिर करते हुए वर्तमान जांच अधिकारी को जांच करने से रोक दिया।

कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए एस एस पी, मुजफ्फरपुर और सिटी डी एस पी को जांच का जिम्मा सौंपा हैं। कोर्ट ने सिटी डी एस पी, मुजफ्फरपुर को 27 जून,2022 कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश भी दिया है।

ये मामला 16 फरवरी 2021 को 5 साल की खुशी का अपहरण किये जाने से सम्बंधित हैं। मुजफ्फरपुर पुलिस को इस मामलें सुराग अब तक नहीं मिला है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

ख़ुशी के पिता राजन साह ब्रह्मपुरा थाना अंतर्गत पमरिया टोला के रहने वाले है। वे सब्जी विक्रेता हैं।उन्होंने मुजफ्फरपुर पुलिस के रवैए से असंतुष्ट हो कर पटना हाईकोर्ट में अपनी बेटी ख़ुशी की बरामदगी के लिए याचिका दायर की।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ओम प्रकाश ने कोर्ट को बताया कि लड़की के अपहरण हुए सवा साल का समय बीत चुका है,लेकिन पुलिस अब तक उसका सुराग तक नहीं पा सकी हैं।

इस मामले में मानवाधिकार आयोग ने एसएसपी जयंतकांत से रिपोर्ट भी तलब की थी। बिहार विधान सभा मे भी मामले को संज्ञान में दिया गया था।

काफी दबाव के बाद पुलिस ने एक युवक को जेल भेजकर चार्जशीट दायर की, लेकिन खुशी के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी। बच्ची का सुराग नहीं मिलने से परिजन चिंतित है।इस मामलें पर अगली सुनवाई 27 जून,2022 को की जाएगी।

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के स्थानांतरित जज जस्टिस अहसाउद्दीन अमानुल्लाह पटना हाईकोर्ट के जज के रूप में शपथ ली

आज 20 जून,2022 को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के स्थानांतरित जज जस्टिस अहसाउद्दीन अमानुल्लाह पटना हाईकोर्ट के जज के रूप में शपथ ली।उन्हें चीफ जस्टिस संजय करोल पद और गोपनीयता की शपथ शताब्दी भवन के लॉबी में साढ़े नौ बजे दिलाई।

इस अवसर पर जज,अधिवक्ता,अधिवक्ता संघो के पदाधिकारीगण व अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

उनके पटना हाईकोर्ट में योगदान देने के बाद चीफ जस्टिस समेत जजों की संख्या 37 हो जाएगी।जस्टिस अमानुल्लाह इससे पूर्व भी पटना हाईकोर्ट के जज के रूप में कार्य करते रहे थे।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

उनका जन्म 11 मई, 1963 को हुआ था।उनके पिता का नाम नेहालुद्दीन अमानुल्लाह था।
उन्होंने स्नातक की डिग्री रसायन शास्त्र में आनर्स के साथ ली।पटना लॉ कालेज,पटना से उन्होंने लॉ की डिग्री ली।
27 सितम्बर,1991 में कानून की प्रैक्टिस के लिए बिहार राज्य बार कॉउन्सिल में इनरोल हुए।
उन्होंने पटना हाईकोर्ट में मुख्य रूप से प्रैक्टिस की।इसके अलावा दिल्ली हाईकोर्ट, झारखंड हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी प्रैक्टिस की।

उन्होंने संवैधानिक,सिविल,क्रिमिनल,टैक्स,लेबर व अन्य कई मामलों में वकालत की।उन्होंने स्टैंडिंग कोंसिल के रूप बिहार सरकार का पक्ष पटना हाईकोर्ट में रखा।
पटना हाईकोर्ट के जज के रूप में उन्होंने जून, 2011में शपथ ग्रहण किया।उसके बाद वे आंध्र प्रदेश में जज के रूप स्थानांतरित होने तक पटना हाईकोर्ट में जज के पद पर कार्य किया।

October, 2021, वे आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के जज के रूप में पटना हाईकोर्ट से स्थानांतरित हुए थे।

राज्य में पड़ने वाले नेशनल हाईवे के किनारे पेड़ लगाने को लेकर एक SOP अपनाने हेतु निर्देश देने के लिए एक जनहित याचिका पटना हाई कोर्ट में दायर की गई

राज्य में पड़ने वाले नेशनल हाईवे के किनारे पेड़ लगाने को लेकर एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एस ओ पी ) अपनाने हेतु निर्देश देने के लिए एक जनहित याचिका पटना हाई कोर्ट में दायर की गई है। ये जनहित याचिका आज दायर की गई दो।

याचिकाकर्ता राजीव रंजन सिंह द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है ग्रीन हाइवेज (प्लांटेशन, ट्रांसप्लांटेशन, बीयूटीफिकेशन व मेंटेनेन्स) पॉलिसी- 2015 को लागू करने से इस नीति को व्यवस्थित किया जा सकेगा।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

इससे वातावरण के अनुकूल नेशनल हाईवे का निर्माण किया जा सकेगा और नेशनल हाईवे से होकर गुजरने वाले लोगों को प्राकृतिक छाया और प्रदूषण रहित वातावरण मिलेगा।

इस मामले में याचिकाकर्ता ने सड़क, परिवहन व हाईवे मंत्रालय के सचिव व राज्य के मुख्य सचिव समेत अन्य आला अधिकारियों को अभ्यावेदन भी भेजा है, लेकिन अभी तक संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया है।

पटना हाईकोर्ट से मगध विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर (वीसी) राजेन्द्र प्रसाद उर्फ डॉ राजेन्द्र प्रसाद को कोई राहत नहीं मिल सकी

जस्टिस आशुतोष कुमार ने प्राथमिकी रद्द करने और और अग्रिम जमानत देने हेतु याचिकाकर्ता द्वारा दायर याचिकाओं को निष्पादित करते हुए दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया।

हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत हेतु याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि यदि याचिकाकर्ता विशेष कोर्ट के समक्ष सरेंडर करता है और जमानत का आग्रह करता है, तो अर्जी पर इस आदेश में की गई किसी भी टिप्पणी से बगैर पूर्वाग्रह के अपने योग्यता पर विचार किया जाएगा।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

याचिकाकर्ता ने स्पेशल विजिलेंस यूनिट पी एस केस नंबर – 02/ 2021 में दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए आपराधिक रिट याचिका और अग्रिम जमानत के लिए अलग से अर्जी दाखिल किया था।

इन पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए एक ही कॉमन आर्डर से आदेश पारित किया। राजेन्द्र प्रसाद के विरुद्ध आई पी सी की धारा 120 बी (अपराध करने के लिए रची गई आपराधिक साजिश) / 420(जालसाजी) व भ्रष्टाचार निवारण एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया था।

पूर्व सांसद विजय कृष्ण और उनके बेटे चाणक्य को पटना हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा से मुक्त किया

ट्रांसपोर्टर सत्येंद्र सिंह हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास सजायाफ्ता पूर्व सांसद विजय कृष्ण और उनके बेटे चाणक्य को पटना हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए उन्हें आजीवन सजा से मुक्त किया।जस्टिस ए एम बदर और जस्टिस सुनील कुमार पवांर की खंडपीठ ने विजय कृष्ण और चाणक्य द्वारा अपील पर सुनवाई पूरी कर 9 मई, 2022 अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

23 मई, 2009 को ट्रांसपोर्टर सत्येंद्र सिंह की हत्या कृष्णापुरी थाना क्षेत्र में हुई थी।इस मामलें में पूर्व सांसद विजय कृष्ण,उनके बेटे चाणक्य व अन्य दो को आरोपी बनाया गया।

ट्रांसपोर्टर सत्येंद्र सिंह हत्या के मामले में पटना सिविल कोर्ट ने वर्ष 2013 में इन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

पटना निचली अदालत के फैसला को हाई कोर्ट में आपराधिक अपील दायर कर चुनौती दी गई।कई दिनों तक चली बहस के बाद हाई कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित कर लिया।आज हाईकोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय को पलटते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा से बरी किया।

कोर्ट में अपीलार्थियों की ओर से दलील रखी गई थी कि हत्या का कोई प्रयोजन नहीं था।साथ ही इस घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था।

पटना हाईकोर्ट ने नाबालिग के साथ किये गये रेप मामलें में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व विधायक राजबल्लभ यादव की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया

जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह तथा जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद ये आदेश को पारित किया।

पूर्व विधायक की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वकील संजीव सहगल ने बहस करते हुए कोर्ट को बताया था कि रेप की घटना के कई दिन बाद प्राथमिकी दर्ज की गई। उनका कहना था कि एक साजिश के तहत विधायक को इस केस में अभियुक्त बनाया गया।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

वही जमानत अर्जी का विरोध करते हुए स्पेशल पीपी श्यामेश्वर दयाल ने कोर्ट को बताया था कि निचली अदालत ने सभी पहलू पर विचार कर अभियुक्त को दोषी करार दिया। उनका कहना था कि मेडिकल में रेप की पुष्टि हुई है। कई गवाह ने घटना के पक्ष में गवाही दी है।

पटना हाई कोर्ट ने राजधानी पटना में मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत पहाड़ी और रानीपुर मौजा में 76.96 जमीन रेल डिपो कॉर्पोरेशन के निर्माण के लिये अधिग्रहित किये जाने संबंधी पटना के भूमि अधिग्रहण अधिकारी के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की

कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।

जस्टिस संजीव कुमार शर्मा ने ललिता देवी एवं अन्य द्वारा दायर किये गए लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।कोर्ट को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुमित सिंह ने बताया कि संबंधित पक्षों को बिना सुने ही उनकी जमीन को अधिग्रहण करने की कार्रवाई की गई है। ये गैर कानूनी है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

याचिकाकर्ता ने भूमि अधिग्रहण अधिकारी द्वारा भूमि अधिग्रहण किये जाने संबंधी अधिसूचना को गैरकानूनी बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग कोर्ट से की है।

पटना हाईकोर्ट ने मगध विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार पुष्पेन्द्र कुमार वर्मा समेत हिंदी विभाग के प्रोफेसर सह लाइब्रेरी इंचार्ज विनोद कुमार सिंह और सहायक सह कुलपति के निजी सचिव सुबोध कुमार को नियमित जमानत दे दिया

जस्टिस ए एम बदर की ने इन तीनों द्वारा दायर नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।

हाई कोर्ट ने निगरानी कोर्ट को निर्देश दिया कि इन्हें कोर्ट द्वारा निर्धारित किये गए मुचलका लेने के बाद जेल से रिहा किया जाय।कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि इन लोगों पर लगे आरोप को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि ये लोग केवल इस अपराध की साजिश में शामिल है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

लेकिन पैसे का जो भी लेनदेन हुआ है, वह कुलपति के निर्देश पर ही हुआ है .
गौरतलब है कि राज्य की निगरानी ब्यूरो ने कुलपतिऔर रजिस्ट्रार समेत अन्य के विरुद्ध आई पी सी की धारा 120 बी (अपराध करने के लिए रची गई आपराधिक साजिश) / 420(जालसाजी) व भ्रष्टाचार निवारण एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।इसमे इन लोगों का भी नाम शामिल है ।

पटना हाईकोर्ट ने फिटनेस सर्टिफिकेट जमा करने में देरी होने पर प्रत्येक दिन पचास रुपया दंड देने की अधिसूचना पर फिलहाल कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है

बिहार ट्रक ऑनर एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई की।

अधिवक्ता बद्री नारायण सिंह ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने मोटर वाहन कानून में बदलाव कर फिटनेस सर्टिफिकेट देर से देने पर प्रत्येक दिन पचास रुपये का दंड लगाने का प्रावधान किया है। फिटनेस सर्टिफिकेट खत्म होने के बाद गाड़ी को हर तरह से दुरुस्त करने में समय लगता है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

इतना ही नहीं, गाड़ी मालिकों के पास समुचित पैसा नहीं रहने पर भी गाड़ी को दुरुस्त करने में समय लगता है। ऐसे में प्रत्येक दिन पचास रुपये का दंड लेना न्यायोचित नहीं है।

कोर्ट ने फिलहाल इस प्रावधान को अमल में लाने से मना किया है। अब, उक्त मामले पर अगली सुनवाई आगामी 11 अगस्त को की जाएगी।

Patna High Court News : पटना हाई कोर्ट ने विभागीय कार्यवाही के संचालन में सरकार के गैर जिम्मेदाराना रवैए पर नाराजगी जाहिर करते हुए राज्य के स्वास्थ्य पर 25 हजार रुपए बतौर हर्जाना लगाया

जस्टिस पी बी बजन्थरी ने डा. अरुण कुमार तिवारी की रिट याचिका को मंजूर करते हुए स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया इस हरजाने की राशि एक महीने में बिहार विधिक सेवा प्राधिकार में जमा करें ।

हाई कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताया कि जुलाई, 2002 में जिस विभागीय कार्यवाही को शुरु किया , उसमे आरोपी कर्मी को विभागीय आरोप पत्र ( चार्ज मेमो ) एवं विभागीय साक्ष्य की सूची तक नहीं सौंपी गई थी ।

याचिकाकर्ता इस बात को लेकर कल भी हाई कोर्ट आया था और कोर्ट ने याचिकाकर्ता को बर्खास्तगी को निरस्त करते हुए स्वास्थ्य विभाग को फिर से कार्यवाही संचालन करने का आदेश 2011 में दिया था ।

हाई कोर्ट आदेश के आलोक में जो कार्यवाही शुरू हुई, उसमे भी याचिकाकर्ता को आरोप पत्र और साक्ष्यों की सूची से वंचित रखा गया था।साथ ही अनुशासनात्मक अधिकारी ने विभागीय जांच रिपोर्ट तक याचिकाकर्ता को नहीं दिया था,ताकि वो अपना बचाव प्रस्तुत कर सके।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

हाई कोर्ट के आदेश होने के बाद भी अपीलीय प्राधिकार ने कोई निर्णय नहीं लिया, तब याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में अवमानना का मामला दायर किया। अवमानना के डर से अपीलीय प्राधिकार ने आनन फानन में अपील को 2018 में खारिज कर दिया।

तब याचिकाकर्ता को चौथी बार हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा । हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के पिछले आदेश में सरकार से जिन जरूरी तथ्यों के बारे में पूछा, उसका कोई सटीक जवाब नही मिला। तब स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव तलब हुए ।
आज स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी प्रधान सचिव कोर्ट में हाजिर हुए । हाई कोर्ट ने लंबे आदेश में उपरोक्त तथ्यों को उजागर करते हुए सरकार की गैर जिम्मेदाराना हरकत पर ही 25 हजार का हर्जाना लगाया ।

साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता की बर्खास्तगी को निरस्त करते हुए उसके वेतन भत्ते बकाए सहित सभी सेवा लाभ देने का भी निर्देश दिया है ।

पटना हाईकोर्ट में सहारा इंडिया के विभिन्न स्कीमों में उपभोक्ताओं द्वारा जमा किये गए पैसे का भुगतान को लेकर दायर की गई दो हजार से ज्यादा हस्तक्षेप याचिकाओं पर अब पटना हाई कोर्ट में 22 जून को सुनवाई होगी

यह याचिका जस्टिस संदीप कुमार की एकलपीठ में आज सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था।

सहारा प्रमुख सुब्रतो रॉय को हाई कोर्ट के आदेश के आलोक में आज उपस्थित होना था।सुब्रतो रॉय द्वारा पटना हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट के आदेश पर 19 मई तक अंतरिम रोक लगा दिया है।
इसी आदेश के आलोक में सुनवाई 22 जून के लिये टाल दी गई।

पिछली सुनवाई में पटना हाई कोर्ट ने बिहार और उत्तर प्रदेश के डीजीपी समेत दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि हर हाल में सहारा प्रमुख सुब्रतो राय को 16 मई को साढ़े दस बजे हाई कोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने इसके लिए दिल्लीके पुलिस कमिश्नर और उत्तर प्रदेश के डीजीपी को कहा था कि इस कार्य मे वे लोग बिहार पुलिस को हर संभव मदद करें।लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दिया है।

पटना हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सहारा के संस्थापक सुब्रतो रॉय हाज़िर नहीं हुए, कोर्ट ने कड़ी नाराज़गी व्यक्त करते हुए पुलिस को 16 मई को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया

कोर्ट के आदेश के बावजूद सहारा के संस्थापक सुब्रतो रॉय के कोर्ट में हाज़िर नहीं होने पर पटना हाईकोर्ट ने कड़ी नाराज़गी व्यक्त की। कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश के डीजीपी समेत दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को हर हाल में सहारा प्रमुख सुब्रतो राय को 16 मई को साढ़े दस सुबह में कोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है ।

जस्टिस संदीप कुमार ने सहारा इंडिया के विभिन्न स्कीमों में उपभोक्ताओं द्वारा जमा किये गए पैसे का भुगतान को लेकर दायर चार हजार से ज्यादा हस्तक्षेप याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया ।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

कोर्ट ने कहा कि न्यायालय के आदेश के बावजूद सुब्रतों रॉय का कोर्ट में उपस्थित नही होना यह प्रमाणित करता है कि कोर्ट के आदेश का वे सम्मान नही करते है ।

कोर्ट ने कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नही है । 12 मई , 2022 को हुई सुनवाई में कोर्ट ने सुब्रतो रॉय को हर हाल में 13 मई को 10:30 बजे कोर्ट में उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया था कि बिहार की गरीब जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा ,जो निवेशकों द्वारा सहारा के विभिन्न कंपनियों में जमा किये गए हैं ,उसका भुगतान इन कंपनियों द्वारा कैसे और कब तक किया जाएगा।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 16 मई, 2022 को की जाएगी।

Patna High Court News : पटना हाई कोर्ट ने पटना-गया-डोभी एनएच 83 फोर लेन के मामले में सुनवाई की

पटना हाई कोर्ट ने पटना -गया -डोभी एनएच 83 फोर लेन के मामले में सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए डी एम, गया व अन्य सबंधित अधिकारियों को एन एच पर से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया।

साथ ही जिनका भूमि अधिग्रहण किया गया है, उन्हें मुआबजा देने की कार्रवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया।आज कोर्ट में गया के डी एम,एन एच ए आई के क्षेत्रीय पदाधिकारी और निर्माण कंपनी के अधिकारी उपस्थित थे।

कोर्ट ने निर्माण कंपनी से कहा कि बहुत धीमे गति से हो रहा है।इसमें काम काफी कम हुआ हैं।कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया कि वे निर्माण के लिए की जा रही कार्रवाई का ब्यौरा अगली सुनवाई में कोर्ट में प्रस्तुत करें।

कोर्ट का कहना था कि जमीन मालिकों को मुआवजा का भुगतान अब तक क्यों नहीं किया गया।इस काम में ढिलाइ नहीं बरतनी चाहिए।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार ने कोर्ट को बताया कि इस राष्टीय राजमार्ग का निर्माण तीन चरणों में होना है।पटना से जहानाबाद, जगनाबाद से गया तथा गया से डोभी तक होने वाली निर्माण कार्य धीमी प्रगति से चल रही है। एनएच की ओर से कोर्ट को बताया गया कि निर्माण कार्य चल रहा है।

कोर्ट का कहना था कि भूमि मुआवजा को लेकर कई शिकायतें मिली है। सड़क निर्माण कार्य के लिए किसानों का जमीन अधिग्रहण किया गया, लेकिन उन्हें मुआवजा का भुगतान नहीं किया गया है।

16 मई, 2022 को इस मामलें पर फिर सुनवाई की जाएगी।

Patna High Court News : पटना हाईकोर्ट ने सहारा ग्रुप ऑफ़ कंपनीज के संस्थापक सुब्रतो रॉय को कल 13 मई,2022 को कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया

पटना हाईकोर्ट ने सहारा इंडिया के विभिन्न स्कीमों में उपभोक्ताओं द्वारा जमा किये गए पैसे का भुगतान को लेकर दायर की हस्तक्षेप याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सहारा ग्रुप ऑफ़ कंपनीज के संस्थापक सुब्रतो रॉय को कल 13 मई,2022 को कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। जस्टिस संदीप कुमार इस मामलें की सुनवाई कर रहे हैं।

सहारा ग्रुप ऑफ़ कंपनीज के संस्थापक सुब्रत राय ने पटना हाईकोर्ट के 27अप्रैल,2022 के उनके कोर्ट में उपस्थित होने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर challenge किया गया था।
कोर्ट ने आज स्पष्ट किया कि कल उन्हें साढ़े दस बजे सुबह कोर्ट में उपस्थित होना है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सहारा कंपनी को यह बताने का निर्देश दिया था कि बिहार की गरीब जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा, जो सहारा कंपनी के विभिन्न स्कीमों में निवेशकों द्वारा जमा किया गया है, उसे उन्हें किस तरह से जल्द से जल्द लौटाया जाएगा। सुनवाई के दौरान सहारा का पक्ष वरीय अधिवक्ता उमेश प्रसाद सिंह ने रखा ।

इससे पहले की सुनवाई में कोर्ट ने कहा था यदि 27 अप्रैल तक सहारा कंपनी द्वारा स्पष्ट रूप से कोर्ट को इस बात की जानकारी नही दी जाती है, तो हाईकोर्ट इस मामले में उचित आदेश उस पारित करेगा, ताकि निवेशकों का पैसा उन्हें लौटाया जा सके।

इस मामले पर अगली सुनवाई आगामी 13 मई ,2022 को होगी।

Patna High Court News : देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के स्मारकों की दयनीय हालत से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट ने देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के स्मारकों की दयनीय हालत से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने पटना स्थित बिहार विद्यापीठ का प्रबंधन अपने हाथ में लेने के लिए विशेष प्रस्ताव राज्य सरकार को पारित करने को कहा।ये जनहित याचिका अधिवक्ता विकास कुमार ने दायर किया हैं।

साथ ही कोर्ट ने बिहार विद्यापीठ सोसाईटी व इसके सदस्यों के क्रियाकलापों की जांच करने के लिए राज्य निगरानी को निर्देश दिया है।

पिछली सुनवाई में अर्कीलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय निदेशक ने पटना स्थित राजेंद्र स्मृति 1 और 2 का पटना के डी एम के साथ जायजा ले कर कोर्ट को रिपोर्ट किया था।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

कोर्ट ने अर्कीलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से जानना चाहा था कि डा राजेंद्र प्रसाद से सम्बंधित स्मारकों को देख रेख कर सकता है या नहीं।इस पर अर्कीलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से बताया गया कि जो सौ वर्ष से पुराने स्मारक हैं,ये उनकी ही देख रेख कर सकते हैं।

कोर्ट ने उनसे कहा कि वे विशेष परिस्थिति में क्या वे इसके देख रेख का जिम्मा ले सकते हैं।महाधिवक्ता ललित किशोर ने बताया था कि कोर्ट ने जानना चाहा कि डा राजेंद्र प्रसाद से सदाकत आश्रम, बांसघाट और जीरादेई स्थित स्मारकों को अपने नियंत्रण में ले कर देख भाल कर सकते हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि बिहार विद्यापीठ परिसर में सभी गैर कानूनी अतिक्रमण को हटा दिया गया।साथ ही बिहार विद्यापीठ के प्रबंधन का जिम्मा पटना के प्रमंडलीय आयुक्त को सौंप दिया गया।

कोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में डी एम, पटना को बिहार विद्यापीठ की भूमि का विस्तृत ब्यौरा देने का निर्देश दिया था।साथ ही यह भी बताने को कहा था कि बिहार विद्यापीठ की भूमि पर कितना अतिक्रमण है और इससे सम्बंधित कितने मामलें अदालतों में सुनवाई के लिए लंबित है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 16 मई, 2022 की जाएगी।

Patna High Court News : पटना हाईकोर्ट ने मृत सरकारी कर्मी के विधवा के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है

पटना हाईकोर्ट ने मृत सरकारी कर्मी के विधवा के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। कोर्ट ने विधवा को पेंशन पति के बकाये वेतन तथा पांच लाख रुपये बतौर मुआवजा के साथ 18 प्रतिशत सूद दो माह के भीतर देने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने मामलें पर सुनवाई की।

कोर्ट ने राज्य सरकार को मुआवजा राशि की वसूली दोषी कर्मी से करने की पूरी छूट दी है। वही राज्य सरकार को कर्मियों के शिकायत निवारण के लिए एक वेब पोर्टल बनाने का आदेश दिया ताकि कर्मी अपना शिकायत दर्ज कर सके।

कोर्ट ने राज्य के महाधिवक्ता को बिहार लिटिगेशन पॉलिसी को अच्छी तरह लागू करने के बारे में सभी विभागों के प्रधान सचिव व सचिव के साथ बैठक कर अमल में लाने को कहा है।

कोर्ट ने मृत सरकारी कर्मी के विधवा लीलावती मिश्रा की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई के बाद अपने 38 पन्नों के फैसला में कई अहम निर्देश दिया है।आवेदिका के वकील अनुराग सौरभ ने कोर्ट को बताया कि कर्मी की नियुक्ति 5 दिसम्बर 1961 को छोटानागपुर अधीक्षण अभियंता कार्यालय में अस्थायी अनुमानक के रूप में हुई थी।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

उनका कहना था कि 1966 से लेकर 1995 के बीच कई जगह स्थानांतरण किया गया। 1 फरवरी 1994 को कर्मी को सहायक अभियंता के पद पर प्रोन्नति दे मुंगेर प्रमंडल के सड़क निर्माण विभाग में पदस्थापित किया गया।

लेकिन विभाग ने पदभार ग्रहण नहीं किया और इसी बीच कर्मी 31 दिसम्बर 1996 को सेवानिवृत्त हो गया।

उनका कहना था कि कर्मी को वेतन तक नहीं दिया गया।सेवानिवृत्त के बाद कर्मी ने विभाग सहित हर बड़े अधिकारी के पास पेंशन, भत्ता एवं अन्य के भुगतान की गुहार लगता रहा।लेकिन कहीं से कुछ नहीं मिला।

इसी बीच 7 अप्रैल 2011 को कर्मी की मौत हो गई।कर्मी की मौत के बाद कर्मी के विधवा ने दफ्तरों का चक्कर लगाने शुरू किया।विभाग विधवा से सर्विस बुक सहित अंतिम वेतन भुगतान स्लिप का मांग किया।

जो भी कागजात उसे प्राप्त हुआ विभाग को दे दिया गया।लेकिन विभाग ने उसे पेंशन चालू करने का आदेश नहीं दिया।थक हार कर आवेदिका ने हाई कोर्ट में अर्जी दायर कर पेंशन बकाये वेतन सहित अन्य लाभ का भुगतान करने का गुहार लगाई।

कोर्ट ने राज्य सरकार को इस केस में जबाबी हलफनामा दायर करने का आदेश दिया।कई दिनों तक लम्बी बहस के बाद कोर्ट ने अहम फैसला दिया।

Patna High Court News : राज्य के पूर्व एवं वर्तमान सांसदों, विधायकों के विरुद्ध लंबित आपराधिक मुकदमों से सम्बंधित मामलों पर सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के पूर्व एवं वर्तमान सांसदों, विधायकों के विरुद्ध लंबित आपराधिक मुकदमों से सम्बंधित मामलों पर सुनवाई की।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई की।

कोर्ट को महाधिवक्ता ललित किशोर ने बताया कि वर्तमान और पूर्व एमपी व एमएलए के विरुद्ध 78 आपराधिक मामलों में 12 मामलों पर आरोप पत्र और 4 मामलों पर अंतिम प्रपत्र दायर किया जा चुका है | उन्होंने कोर्ट को बताया कि 280 मामलों में कुल 481 गवाहों का परिक्षण किया जा चुका है |

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

इस पर खंडपीठ ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को न्यायिक पदाधिकारियों को मनोनीत कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है | पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ललित किशोर ने बताया था कि वर्तमान व पूर्व एमपी और एमएलए के विरुद्ध कुल 598 आपराधिक मुकदमें लंबित है, जिसमें अधिकतर केस में अनुसंधान पूरा हो गया है।

लगभग 78 आपराधिक मुकदमों में अनुसंधान लंबित है। इस मामले पर अगली सुनवाई 29 जून,2022 को होगी ।

Patna High Court News : राष्ट्रीय राजमार्ग व स्टेट हाईवे पर साफ सुथरा स्वच्छ शौचालय उपलब्ध कराने का दायित्व ऑयल कंपनी सहित एनएचएआई एवं राज्य सरकार को दिया है

अब राज्य के राष्ट्रीय राजमार्ग व स्टेट हाईवे पर स्थित पेट्रोल पंप समेत ढाबा एवं होटल में इन मार्गो से गुजरने वाले यात्रियो को साफ सुथरा स्वच्छ शौचालय उपलब्ध होगा। पटना हाई कोर्ट ने सुविधा उपलब्ध कराने का दायित्व ऑयल कंपनी सहित एनएचएआई एवं राज्य सरकार को दिया है।

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए प्रदेश के तीन पेट्रोलियम कम्पनियों को अपने- अपने पेट्रोल पंपों पर शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। वही, इन सड़कों पर खुले में पेट्रोल तथा डीजल की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश दिया है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

कोर्ट का कहना था कि प्रदेश के राष्ट्रीय राज मार्ग तथा स्टेट हाईवे पर पेट्रोल पम्पों पर यात्री सुविधाओं की घोर अभाव है। इस कमी को दूर करने के लिए ऑयल कम्पनियों तथा सरकारे अभी तक कोई कार्रवाई नहीं कि है। कमी को दूर करने की दिशा में कुछ नहीं किया गया है।

इस मामलें पर आगे सुनवाई की जाएगी।

Patna High Court News : पटना-गया-डोभी एनएच 83 फोर लेन के मामले में गया तथा जहानाबाद के डीएम को तलब किया है

पटना हाई कोर्ट ने पटना -गया -डोभी एनएच 83 फोर लेन के मामले में गया तथा जहानाबाद के डीएम को तलब किया है। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

साथ ही साथ जहानाबाद के जिला भूमि अधिग्रहण अधिकारी को भी कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है। कोर्ट का कहना था कि जमीन मालिकों को मुआवजा का भुगतान अब तक क्यों नहीं किया गया।

राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार ने कोर्ट को बताया कि इस राष्टीय राजमार्ग का निर्माण तीन चरणों में होना है।पटना से जहानाबाद, जगनाबाद से गया तथा गया से डोभी तक होने वाली निर्माण कार्य धीमी प्रगति से चल रही है। एनएच की ओर से कोर्ट को बताया गया कि निर्माण कार्य चल रहा है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

कोर्ट का कहना था कि भूमि मुआवजा को लेकर कई शिकायतें मिली है। सड़क निर्माण कार्य के लिए किसानों का जमीन अधिग्रहण किया गया, लेकिन उन्हें मुआवजा का भुगतान नहीं किया गया है।

कोर्ट ने डीएम व अन्य अधिकारियों को 12 मई, 2022 को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है।

Patna High Court News : पटना हाईकोर्ट में राज्य की अदालतों में अधिवक्ताओं, उनके क्लाइयंट व महिला अधिवक्ताओं के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई की गई

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए विधि सचिव को छह सप्ताह में सभी ज़िलों में वकीलों के लिए बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने हेतु प्रस्ताव तैयार का निर्देश दिया है।

अधिवक्ता रमाकांत शर्मा की लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया ।इसके साथ साथ खंडपीठ ने विधि सचिव को सभी हितधारकों के साथ बैठक कर पूरे राज्य के वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराने हेतु योजना तैयार करने का निर्देश दिया है ।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव से अपने स्तर से मामले पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था । साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस संदर्भ में स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था ।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

श्री शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि राज्य की अदालतों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि राज्य में 1,20,000 से ज़्यादा अधिवक्ता विभिन्न अधिवक्ता संघों में रजिस्टर्ड हैं ।

लेकिन उनके लिए बुनियादी सुविधाएँ जैसे टेबल, कुर्सी, पानी पीने की सुविधा जैसी आधारभूत संरचना नहीं है । इस पर खंडपीठ ने कहा कि अधिवक्ताओं की बुनियादी सुविधाओं को नकारा नहीं जा सकता है। अधिवक्ताओं के लिए आधारभूत संरचना बनाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार की भागीदारी 60:40 के अनुपात में है ।
इस मामले पर अगली सुनवाई 30 जून को होगी।