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Patna High Court News : राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से नगर पंचायत,नौबतपुर के तीन पार्षदों को अयोग्य घोषित करने के फैसले को पटना हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया

राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से नगर पंचायत,नौबतपुर के तीन पार्षदों को अयोग्य घोषित करने के फैसले को पटना हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।साथ ही पटना हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग पर पांच हजार का जुर्माना भी लगाया है।

पिछले दिनों राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से नगर पंचायत, नौबतपुर के अध्यक्ष सरयुग मोची (वार्ड-14) के अलावा वार्ड-2 के पार्षद विजय पासवान तथा वार्ड-6 के वार्ड पार्षद पूनम देवी को वर्ष 2008 के बाद तीन से अधिक संतान होने के अरोप में अयोग्य घोषित कर दिया था।

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आयोग के इस फैसले के विरुद्ध तीनों वार्ड पार्षदों ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए तीनों पार्षदों को योग्य ठहराया तथा नियमों की अनदेखी करने के कारण निर्वाचन आयोग पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

Patna High Court News : रेप और हत्या करने के आरोप में सासाराम की एक अदालत द्वारा दी गई फांसी की सजा को रद्द कर दिया है

कोर्ट ने मामले को निचली अदालत को भेजते हुए नए सिरे से चार्ज फ्रेमिंग के स्टेज से ट्रायल शुरु करने का आदेश दिया है।

जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह तथा जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ ने डेथ रेफरेंस और फांसी की सजा के खिलाफ अभियुक्त बलराम सिंह की ओर से दायर क्रिमिनल अपील पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया।

अभियुक्त बलराम सिंह की ओर से वरीय अधिवक्ता कृष्णा प्रसाद सिंह ने कोर्ट को बताया कि निचली अदालत ने आनन फानन में तीन महीने में ही ट्रायल सम्पन्न कर फांसी की सजा सुना दी और सम्पुष्टि के लिए हाई कोर्ट को भेजा है।

उन्होंने कहा कि ट्रायल में कई प्रकार की त्रुटि है। इसलिए फांसी की सजा को सम्पुष्ट करना न्यायसंगत नहीं होगा।उन्होंने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द कर नए सिरे से ट्रायल कराने का अनुरोध किया जिसे हाई कोर्ट ने मान लिया।
अभियुक्त 39 वर्षीय बलराम सिंह पर एक 10 वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या करने का आरोप है।

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मृत बच्ची की दादी की शिकायत पर डालमिया नगर पुलिस ने रेप, हत्या करने के साथ ही पॉक्सो एक्ट के तहत 15 नवम्बर 2020 को मामला दर्ज किया था और उसी दिन अभियुक्त ने आत्मसमर्पण भी कर दिया।जांच कर पुलिस ने 30 नवम्बर 2020 को चार्जशीट
किया।

8 दिसंबर 20 को चार्ज फ्रेम हुआ।11 जनवरी 2021को गवाही शुरु हुई और 26 मार्च को समाप्त हो गया।13 जुलाई को अंतिम सुनवाई हुई और 30 जुलाई को फैसला सुनाया गया।उसी फैसले की सम्पुष्ट करने के लिए निचली अदालत ने हाई कोर्ट को भेजा था जिसे बतौर डेथ रेफरेंस दर्ज किया गया था।

Patna High Court News : पटना हाईकोर्ट ने मधेपुरा के डीएम को सम्बंधित रिकॉर्ड के साथ 18 मई को हाजिर होने का निर्देश दिया है

जस्टिस पी बी बजनथरी की एकल पीठ ने कंचन कुमारी उर्फ कंचन देवी की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया।

कोर्ट ने डीएम से जानना चाहा है कि किस अधिकारी ने निर्णय दिया कि आवेदिका का सर्टिफिकेट जाली है।क्या सर्टिफिकेट को जाली ठहराने के पूर्व आवेदिका को सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया था?

आंगनवाड़ी सेविका की नियुक्ति के लिए आवेदिका कंचन कुमारी उर्फ कंचन देवी ने आवेदन किया था।लेकिन उसके सर्टिफिकेट को जाली बताकर उसके आवेदन को स्वीकार नहीं किया गया।

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आवेदिका के वकील प्रमोद मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि उसे सुनवाई का अवसर दिए बिना ही मनमाने तरीके से सर्टिफिकेट को जाली बताकर उसकी उम्मीदवारी को अमान्य कर दिया गया जो नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत की अवहेलना है।

इस मामले पर 18 मई को फिर सुनवाई होगी।कोर्ट ने सरकारी वकील प्रशांत प्रताप को आदेश की प्रति डीएम को भेजने का निर्देश दिया है।

Patna High Court News : पटना हाईकोर्ट ने बिहार फार्मेसी कॉउन्सिल के रजिस्ट्रार के पद से सेवानिवृत होने के बाद भी कार्य करते रहने के मामलें पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राज्य सरकार को बिहार फार्मेसी कॉउन्सिल के अध्यक्ष समेत सभी सदस्यों को पद से हटाने का निर्देश दिया है।

साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि 24 घंटों के भीतर पदेन सदस्य कार्यभार संभाल लेंगे।याचिकाकर्ता उमा शंकर शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को चौबीस घंटे के भीतर अस्थायी रजिस्ट्रार की नियुक्त करने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने कोर्ट को बताया कि बिहार फार्मेसी कॉउन्सिल के अध्यक्ष अनियमित ढंग से लाइसेन्स देते थे।उन्होंने कोर्ट को बताया कि वे मनमानी ढंग से नियमों की अनदेखी कर लाइसेन्स फोन पर ही दे दिया करते थे।

कोर्ट ने मामलें को काफी गम्भीरता से लेते हुए राज्य निगरानी विभाग को पूरे मामलें की जांच करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने निगरानी के डीआईजी को चार सप्ताह में जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट को राज्य सरकार ने बताया कि बिहार फार्मेसी कॉउन्सिल के पूर्व रजिस्ट्रार को पद से हटा दिया गया है।कोर्ट ने अगली सुनवाई में बिहार फार्मेसी कॉउन्सिल के अध्यक्ष को कोर्ट में तलब किया था।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को रजिस्ट्रार के पद पर नए अधिकारी को अविलम्ब नियुक्त करने का निर्देश दिया था।

इससे पूर्व में कोर्ट ने सेवानिवृत रजिस्ट्रार द्वारा लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दिया था। कथित तौर पर सेवानिवृत्ति के बाद भी बिहार फार्मेसी कौंसिल के रजिस्ट्रार के पद पर बने रहने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने कोर्ट को बताया कि रजिस्ट्रार की नियुक्ति स्थाई तौर पर पटना हाई कोर्ट द्वारा एक अवमानना मामले में 19 अगस्त, 2011 को दिए गए आदेश को गलत तरीके से बगैर किसी विज्ञापन, साक्षात्कार किया गया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने कोर्ट को बताया था कि बिहार फार्मेसी कॉउन्सिल के रजिस्ट्रार सेवानिवृत हो चुके हैं, इसके बावजूद उन्हें इस पद पर रखकर काम कराया जा रहा है, जोकि गैर कानूनी है।

इस मामले में अगली सुनवाई 23 जून,2022 को की जाएगी।

Patna High Court News : पटना हाईकोर्ट में मानसिक रोग चिकित्सा के सिलसिले में राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकार के गठन के मामलें पर सुनवाई टल गयी

चीफ जस्टिस संजय करोल एवं जस्टिस संजय कुमार की खंडपीठ में आकांक्षा माविया की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही हैं।

पिछली सुनवाई में चीफ सेक्रेटरी ने हलफनामा दायर कर जानकारी दी कि राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकार का गठन कर दिया गया है।कोर्ट को बताया गया कि प्राधिकार के पदेन सदस्यों व अन्य सदस्यों की नामित व बहाल करने की प्रक्रिया जारी हैं।

अपर महाधिवक्ता एस डी यादव ने कोर्ट को बताया गया था कि प्राधिकार के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के रूप में शैलेन्द्र कुमार को नियुक्त किया जा चुका है।

पूर्व की सुनवाई में उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी कि कोइलवर स्थित मानसिक आरोग्यशाला में 272 बेड का अस्पताल बनाया जाना हैं।इसकी लागत 129 करोड़ रुपए होगी और 3 माह में निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।

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सुनवाई के दौरान कोर्ट को अपर महाधिवक्ता एस डी यादव ने बताया था कि राज्य के इकतीस जिलों मे ज़िला मानसिक स्वास्थ्य प्रोग्राम प्रारम्भ हो गया हैं।साथ ही शेष आठ जिलों में इसे स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार की सहमति मिल गई है।

उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी थी कि मानसिक रोगियों के ईलाज के लिए 61 डॉक्टरों व 47 नर्सों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया हैं। मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के मामलें में एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।कोर्ट ने चार दिनों का समय देते हुए इस प्राधिकार को पूरी तरह से शुरू करने के लिए एक समय सीमा देने का निर्देश दिया था ।

अपर महाधिवक्ता एस डी यादव ने बताया कि इस मामलें पर आगे की सुनवाई ग्रीष्मावकाश के बाद होगी।

पटना हाईकोर्ट ने पटना मुख्य नहर के बांध व चार्ट भूमि पर अतिक्रमणकारियों द्वारा किये गए अतिक्रमण के मामले पर सुनवाई करते हुए दानापुर के अंचलाधिकारी व दानापुर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को अगली सुनवाई में तलब किया

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राज किशोर श्रीवास्तव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने इन अधिकारियों को कार्रवाई रिपोर्ट भी दायर करने को कहा है।

अधिवक्ता सुरेन्द्र कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि उक्त नहर बांध व चार्ट भूमि पर अतिक्रमण की स्थिति को दानापुर के अंचलाधिकारी ने अपने जवाबी हलफनामा में स्वीकार किया है।

अंचलाधिकारी ने अपने हलफनामा में यह भी कहा है कि बगैर किसी आवंटन के ही अतिक्रमणकारी अवैध रूप से रह रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से बताया गया है ।अगले चार सप्ताह में कम से कम 70 फीसदी अतिक्रमण को हटा दिया जाएगा।

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सुनवाई के दौरान दानापुर के अंचलाधिकारी कोर्ट में मौजूद थे। सोन नहर प्रमंडल, खगौल, पटना द्वारा अतिक्रमण वाद दायर करने के लिए दानापुर के अंचलाधिकारी को लिखा गया था, लेकिन अभी तक इसे नहीं हटाया गया।

सोन नहर प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता द्वारा दानापुर के अंचलाधिकारी को अतिक्रमणकारियों की सूची भी अंचलाधिकारी को दी गई है।

कार्यपालक अभियंता ने अपने पत्र में विभागीय मुख्य नहर के बांध व चार्ट भूमि पर किये गए अतिक्रमण को अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध अतिक्रमण वाद दायर कर ठोस अग्रेतर कार्रवाई करने हेतु अनुरोध किया है, ताकि विभागीय भूमि अतिक्रमणकारियों से मुक्त हो सके।

इस मामले में आगे की सुनवाई अब आठ सप्ताह बाद की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट में राज्य की अदालतों में अधिवक्ताओं, उनके क्लाइयंट व महिला अधिवक्ताओं के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई 10,मई 2022 तक टली

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ अधिवक्ता रमाकांत शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के मुख्य सचिव से अपने स्तर से मामले पर कार्रवाई करने की उम्मीद जताई। साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस संदर्भ में अपना जवाब कोर्ट में दो सप्ताह के अंदर दायर करने का निर्देश दिया था ।

श्री शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि राज्य की अदालतों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की स्थिति बहुत ही चिंताजनक है।

उन्होंने कोर्ट को बताया था कि राज्य में 1,20,000 से ज़्यादा अधिवक्ता विभिन्न अधिवक्ता संघों में रजिस्टर्ड हैं ,लेकिन उनके लिए बुनियादी सुविधाएँ जैसे टेबल, कुर्सी, पानी पीने की सुविधा जैसी आधारभूत संरचना नहीं है ।

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इस पर खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि अधिवक्ताओं की बुनियादी सुविधाओं को नकारा नहीं जा सकता है। अधिवक्ताओं के लिए आधारभूत संरचना बनाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार की भागीदारी 60:40 के अनुपात में है । इस विषय पर केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय नहीं दिया जा सकता ।

पूर्व की सुनवाई में खंडपीठ ने इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव को हालात का ब्यौरा लेकर कोर्ट में हलफ़नामा दायर करने का निर्देश दिया था।इस मामले पर अगली सुनवाई10मई,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने बिहार फार्मेसी कॉउन्सिल के रजिस्ट्रार के पद से सेवानिवृत होने के बाद भी कार्य करते रहने के मामलें पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने उमा शंकर शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को चौबीस घंटे के भीतर नए रजिस्ट्रार का नाम तय करने का निर्देश दिया।

कोर्ट को राज्य सरकार ने बताया कि बिहार फार्मेसी कॉउन्सिल के पूर्व रजिस्ट्रार को पद से हटा दिया गया है।कोर्ट ने अगली सुनवाई में बिहार फार्मेसी कॉउन्सिल के अध्यक्ष को कोर्ट में तलब किया है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को रजिस्ट्रार के पद पर नए अधिकारी को अविलम्ब नियुक्त करने का निर्देश दिया था।

इससे पूर्व में कोर्ट ने सेवानिवृत रजिस्ट्रार द्वारा लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दिया था। कथित तौर पर सेवानिवृत्ति के बाद भी बिहार फार्मेसी कौंसिल के रजिस्ट्रार के पद पर बने रहने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की।

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याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने कोर्ट को बताया कि रजिस्ट्रार की नियुक्ति स्थाई तौर पर पटना हाई कोर्ट द्वारा एक अवमानना मामले में 19 अगस्त, 2011 को दिए गए आदेश को गलत तरीके से परिभाषित करते हुए बगैर किसी विज्ञापन, साक्षात्कार किया गया।

साथ ही बिहार फार्मेसी एक्ट 1948 के सेक्शन 26 (ए) और बिहार सर्विस कोड के नियम 67 (ख) तथा सी सी ए रूल्स के नियम 16 का उल्लंघन कर के कर दी गई है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने बताया था कि बिहार फार्मेसी कॉउन्सिल के रजिस्ट्रार सेवा निवृत्त हो चुके हैं, इसके बावजूद उन्हें इस पद पर रखकर काम कराया जा रहा है, जोकि गैर कानूनी है। इस मामले में अभी आगे भी सुनवाई होनी है।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में जनजातीय शोध संस्थान बनाने का निर्देश केंद्र व राज्य सरकार को दिया

चीफ जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एस. कुमार की खण्डपीठ ने बिहार आदिवासी अधिकार फोरम की ओर से दायर लोकहित याचिका को सुनते हुए यह निर्देशदिया।

राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने कोर्ट को बताया कि टीआरआई (ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट)की स्थापना के संबंध में बिहार के मुख्य सचिव द्वारा गहन जांच की गई। टीआरआई की स्थापना के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने के लिए सहमति दे दी गई हैं।

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उन्होंने बताया कि जल्द ही बिहार में टीआरआई स्थापित करने का प्रस्ताव भारत सरकार के समक्ष रखा जाएगा, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।

केंद्र सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता के एन सिंह ने कोर्ट को बताया कि यदि राज्य प्रस्ताव भेजेगा, तो केंद्र सरकार उस पर तेजी से कार्रवाई करेगी।जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने बताया कि आदिवासी संस्कृति की विशिष्टता को संरक्षित करने हेतु 19 राज्यों में टीआरआई क्रियाशील है ।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 28 जून, 2022 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट में बिहार नगरपालिका एक्ट, 2007 के चेप्टर 5 व 31 मार्च, 2021 को राज्य सरकार द्वारा किए गए संशोधन की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कल भी जारी रहेगी

पटना हाईकोर्ट में बिहार नगरपालिका एक्ट, 2007 के चेप्टर 5 व 31 मार्च, 2021 को राज्य सरकार द्वारा किए गए संशोधन की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कल भी जारी रहेगी। चीफ जस्टिस संजय करोल की डिवीजन ने डा आशीष कुमार सिन्हा की याचिका पर सुनवाई कर रही हैं।

यह मामला नगरपालिका में संवर्ग की स्वायत्तता से जुड़ा हुआ है।कोर्ट को अधिवक्ता मयूरी ने बताया कि इस संशोधन के तहत नियुक्ति और तबादला को सशक्त स्थाई समिति में निहित अधिकार को ले लिया गया है और यह अधिकार अब राज्य सरकार में निहित हो गया है।

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याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मयूरी ने कोर्ट को बताया था कि अन्य सभी राज्यों में नगर निगम के कर्मियों की नियुक्ति नियमानुसार निगम द्वारा ही की जाती है।

उनका कहना था कि नगर निगम एक स्वायत्त निकाय है, इसलिए इसे दैनिक क्रियाकलापों में स्वयं काम करने देना चाहिए।

कोर्ट को आगे यह भी बताया गया की चेप्टर 5 में दिए गए प्रावधान के मुताबिक निगम में ए और बी केटेगरी में नियुक्ति का अधिकार राज्य सरकार को है, जबकि सी और डी केटेगरी में नियुक्ति के मामले में निगम को बहुत थोड़ा सा नियंत्रण दिया गया है।

31 मार्च को किये गए संशोधन से सी और डी केटेगरी के मामले में भी निगम के ये सीमित अधिकार को भी मनमाने ढंग से ले लिये गए है।

अब इस मामले पर अगली सुनवाई 27अप्रैल 2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने हत्या का प्रयास के मामले में गलत इंजुरी रिपोर्ट कोर्ट को दिखाकर अग्रिम जमानत लेने का प्रयास कर रहे तीन अभियुक्तों की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया

पटना हाईकोर्ट ने हत्या का प्रयास के मामले में गलत इंजुरी रिपोर्ट कोर्ट को दिखाकर अग्रिम जमानत लेने का प्रयास कर रहे तीन अभियुक्तों की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही सभी अभियुक्तों पर पच्चास हजार रुपये का जुर्माना लगाया।

कोर्ट ने तीनो अभियुक्तों को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के अंदर निचली अदालत में सरेण्डर कर दे। कोर्ट ने जहानाबाद के पुलिस अधीक्षक को भी कहा कि अगर ये सभी अभियुक्त दो सप्ताह में निचली अदालत में सरेण्डर नही करते हैं ,तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर हाई कोर्ट को इसकी जानकारी दी जाए।

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ये मामला जहानाबाद जिला के शकुरबाद थाना अंतर्गत रुस्तमचक गांव का है ।हत्या के प्रयास के मामले में शकुरबाद थाना कांड संख्या 95 /2020 इन सभी अभियुक्तों के खिलाफ दर्ज कराया गया था। इसी मामले में इन अभियुक्तों ने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।

हाई कोर्ट की एक एकलपीठ ने धर्मेन्द्र कुमार एवम अन्य के अधिवक्ता और ए पी पी झारखंडी उपाध्याय को सुनने के बाद यह निर्देश दिया। कोर्ट के निर्देश पर जहानाबाद के सिविल सर्जन द्वारा सही इंजुरी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद कोर्ट ने यह आदेश दिया।

चिराग पासवान बाघोपुर गांव पहुंचकर पंजाब के लुधियाना में हुए अगलगी की घटना में मृतक के पड़ोसी एवं परिवार से मिले

रोसड़ा । पंजाब के लुधियाना में हुए अगलगी की घटना में बाघोपुर गांव के रहने बाले एक ही परिवार के 7 लोगों की दर्दनाक मौत की सूचना मिलते ही लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान बाघोपुर गांव पहुंचकर मृतक के पड़ोसी एवं परिवार के सदस्यों से घटना के बारे में पूरी जानकारी लिया ।

जानकारी देते हुए लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने बताया कि परिवार के लोगों से बातचीत दौरान जैसे लोगो ने बताया है उससे तो लगता है कि एक ही परिबार के सात लोगो की मौत कोई हादसा नहीं है बल्कि साजिस के तहत घटना को अंजाम देने का शंका है ।

लोगों ने बताया कि घटना के पास से पेट्रोल की डिब्बे भी बरामद किए गए , पेट्रोल छिड़ककर घटना को अंजाम दिया गया, पास से एक लावारिस बाइक भी बरामद किया गया है। चिराग पासवान ने बताया कि परिबार के लोगो ने बताया कि मृतक सुरेश साहनी को पूर्व में भी धमकी दिया गया था, परिवार के लोगों को अगर लगता है की साजिश के तहत इतनी बड़ी घटना को अंजाम दिया गया है तो निश्चित तौर से इस घटना की जांच होनी चाहिए।

इस घटना को लेकर क्यों नहीं अब तक बिहार सरकार पंजाब की सरकार से वार्ता किया है, चिराग ने कहा कि अब तक बिहार सरकार पंजाब सरकार से इस घटना को लेकर अब तक क्यों नहीं पूछा गया कि अगर घटना घटी है तो कैसे घटी है और इस पर अब तक क्या हुआ है स्थानीय प्रशासन क्यों नहीं आश्रित परिवार को सहयोग कर रही है।

चिराग पासवान ने बताया कि परिवार के लोगों से जानकारी मिलने के बाद वह खुद पंजाब के मुख्यमंत्री एवं लुधियाना के एसपी से बात कर जानकारी लेंगे और आश्रित परिवार को सहायता दिलाने की मांग करेंगे , मौके पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी, लोजपा नेत्री डॉ उर्मिला सिन्हा संतोष कुमार सिंह विद्यासागर सिंह अखिलेश कुमार सिंह वंधार पंचायत पैक्स अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार महतो, सरपंच मिथिलेश कुमार साहनी, वार्ड सदस्य रंजीत साहनी, रामा साहनी, मुखिया चंदन देवी, वीडिओ हरि ओम शरण सहित सैकड़ों ग्रामीण व कार्यकर्ता मौजूद थे।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के राजस्व विभाग के विशेष सचिव द्वारा जारी विज्ञापन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाबी हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है

राज्य सरकार द्वारा 2 जनवरी, 2021 को जारी विज्ञापन को रद्द करने और 9 फरवरी, 2022 को राज्य सरकार के कर्मियों की तरह आरक्षण देते हुए नियुक्त किए जाने को चुनौती दी गई थी।

जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा की ने बलराज किशोर की याचिका पर सुनवाई करते उक्त आदेश को सोमवार को पारित किया। इस मामले में राज्य सरकार द्वारा विज्ञापन 2 जनवरी, 2021 को जारी किया गया था।

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जारी विज्ञापन के अनुसार बिहार लैंड ट्रिब्यूनल (बीएलटी ) के लिए विशेष सरकारी वकील व 25 अपर सरकारी वकील की नियुक्ति समेत अन्य विभागों तथा दो विशेष सरकारी वकीलों और 25 अपर सरकारी वकीलों की नियुक्ति आरक्षण के आधार पर की गई थी।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि कोर्ट ने जवाबी हलफनामा दाखिल कर राज्य सरकार से छह सप्ताह में पूछा है कि किस नियम के तहत आरक्षण का लाभ देते हुए उक्त नियुक्तियों को किया गया है।

उन्होंने बताया कि उक्त नियुक्ति हेतु कोई आरक्षण का नियय नहीं है और न ही कोई सर्च कमेटी और चयन कमेटी है।मामलें पर 6 सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

पटना हाईकोर्ट ने राजीव रंजन सिंह की बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों की खस्ताहाल स्थिति से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई की।

पटना हाईकोर्ट ने राजीव रंजन सिंह की बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों की खस्ताहाल स्थिति से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई की। इस मामलें पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान पुल निर्माण करने वाली कंपनी के प्रबंध निदेशक ने वादा किया है कि समय सीमा के भीतर सारे परियोजनाएं पूरी कर ली जाएँगी।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने गंडक नदी पर पुल समेत अन्य योजनाओं के पूरा में बिलम्ब होने पर नाराजगी जाहिर की थी।
कोर्ट ने वैशाली के डी एम और एन एच ए आई के क्षेत्रीय पदाधिकारी को निर्देश दिया कि कंपनी द्वारा किये जा रहे कार्यों की लगातार समीक्षा कर कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

पुल निर्माण करने वाली कंपनी के प्रबंध निदेशक ने कोर्ट को बताया कि सभी परियोजनाएं समय सीमा में पूरी की जाएँगी।साथ ही गंडक नदी पर पुल का निर्माण तीन माह में पूरा कर लिया जाएगा।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने गंडक नदी पर पुल,हाजीपुर के रामाशीष चौक, अजानपीर ओवर ब्रिज,बी एस एन एल गोलम्बर आदि योजनाओं का मौके पर जायजा लेने के एक टीम गठित की है।

इस टीम में सारण और वैशाली के डी एम, एन एच ए आई के अधिकारी,सड़क व पुल निर्माण करने वाली कंपनी के प्रबन्ध निदेशक और अधिवक्ता सिद्धार्थ प्रसाद शामिल थे।

कोर्ट ने इन्हें इन योजनाओं के अलावे अन्य अधूरे बने सड़कों का जायजा ले कर रिपोर्ट अगले सप्ताह में पेश करने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने इस बात पर सख्त नाराजगी जाहिर की कि कोई भी परियोजना निर्धारित समय में पूरा नहीं हो रहा है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड रहा है। गंडक नदी पर पुल पूरा होने की निर्धारित समय सीमा 2013 ही थी,लेकिन वह अबतक पूरा नहीं हुआ।

निर्माण कंपनी के अधिवक्ता सिद्धार्थ प्रसाद ने कोर्ट को बताय था कि हाई वॉल्टेज ट्रांसमीटर टावर स्थानांतरित करने का कार्य होने बाद सड़क निर्माण का कार्य तत्काल शुरू हो जाएगा।वैशाली की डी एम ने कोर्ट को बताया कि हाजीपुर आरओबी बनाने का काम चल रहा और निर्धारित समय में काम पूरा हो जाएगा।

अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार ने बताया की अजान पीर में जहां ओवरब्रिज बनना था, अभी तक नहीं बना हैं।यही नहीं,अभी एक ही लेन चालू हुआ है,जबकि दूसरे लेन का काम 12 वर्षो से लंबित हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 3 सप्ताह बाद होगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के नेशनल हाई वे और स्टेट हाईवे पर पर्याप्त संख्या में पेट्रोल पंप नहीं होने के मामले पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने मामलें पर सुनवाई करते हुए विकास आयुक्त को निर्देश दिया कि वे राज्य के सभी जिलाधिकारी की बैठक बुलाए।

कोर्ट को बताया गया कि पेट्रोल पम्प लगाने के लिए विभिन्न जिलों में डी एम के पास बड़ी तादाद में आवेदन लंबित हैं, जबकि राज्य के क्षेत्रफल और जनसंख्या के में पेट्रोल पम्प की संख्या बहुत कम है। कोर्ट ने विकास आयुक्त को इन मामलों पर सभी जिलों के डी एम से विचार कर कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने को कहा।

कोर्ट ने राज्य के नेशनल व स्टेट हाईवे पर जनसंख्या और वाहनों की संख्या के तुलना में पेट्रोल पम्प की संख्या पर सख्त रुख अपनाया था।

कोर्ट ने इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए जानना चाहा कि राज्य नेशनल हाइवे पर कितने पेट्रोल पम्प खोलने की अनुमति दी गई है।

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कोर्ट ने इस बात को भी गम्भीरता से लिया था कि 2018 से पेट्रोल पंप स्थापित करने के लिए लगभग एक हज़ार आवेदन कार्रवाई नहीं होने के कारण ज़िला प्रशासन के समक्ष पड़ा हुआ हैं।इन मामलों मे ज़िला के डी एम की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिलने के कारण मामला अधर में पड़ा हुआ हैं।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में जानना चाहा था कि अबतक नेशनल और स्टेट हाईवे में कितने पेट्रोल पम्प चालू हैं।साथ ही राज्य के विस्तार,जनसंख्या और वाहनों की संख्या के मद्देनजर और कितने पेट्रोल पम्प खोले जाने की जरूरत है।इस बारे में हाल में सर्वे किया गया हैं या नहीं।उसके क्या परिणाम रहे।

कोर्ट ने इस बात पर भी टिप्पणी की थी कि राज्य के इन पेट्रोल पंप पर आम लोगों के लिए बुनियादी सुविधाओं की भी भारी कमी हैं।पेय जल,मेडिकल किट,शौचालय आदि बुनियादी सुविधाओं की काफी अभाव हैं।

इन सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर अगली सुनवाई में जानकारी उपलब्ध कराने का कोर्ट ने आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि प्रदेश के राष्ट्रीय राज मार्ग तथा स्टेट हाईवे पर पेट्रोल पंप सहित अन्य नागरिक सुविधाओं की काफी कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए सरकारों ने अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं किया है।

इस मामलें पर फिर 5 मई,2022 को सुनवाई की जाएगी।

पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार द्वारा 16 चक्के वाले ट्रकों के जरिये गिट्टी,बालू आदि के ढुलाई पर लगाए गए प्रतिबन्ध को रद्द कर दिया

बिहार सरकार ने 16 दिसम्बर, 2020 द्वारा जारी अधिसूचना जारी कर इन वाहनों द्वारा गिट्टी, बालू ढुलाई पर रोक लगा दिया था।

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने बिहार ट्रक ऑनर एसोसिएशन व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर 7 अप्रैल, 2022 को सुरक्षित रखा था, जिसे आज सुनाया गया।

बिहार सरकार ने इन भारी वाहनों द्वारा गिट्टी,बालू आदि की ढुलाई पर 16 दिसम्बर, 2020 को एक अधिसूचना जारी कर रोक लगा दिया था।

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बिहार सरकार द्वारा रोक के आदेश के विरुद्ध याचिकाकर्ताओं ने ये मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाया।लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामलें की सुनवाई 3 जनवरी,2022 को की।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामलें को सुनवाई करते हुए इसे वापस पटना हाईकोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए भेज दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट को 8 सप्ताह के भीतर सुनवाई कर मामलें का निपटारा करने को कहा।

इन याचिकाओं में बिहार सरकार द्वारा 16 चक्कों के ट्रक के जरिये गिट्टी व बालू आदि की ढुलाई पर 16 दिसंबर, 2020 को ही एक अधिसूचना जारी कर प्रतिबंध को challenge किया गया है।

इन मामलों पर पटना हाई कोर्ट में फिजिकल कोर्ट शुरू होने के बाद सुनवाई शुरू हुई थी।इससे पहले की सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार समेत अन्य सम्बंधित सभी पक्षों को अपना अपना पक्ष लिखित तौर पर कोर्ट के समक्ष दायर करने का निर्देश दिया था।

पटना हाईकोर्ट के इस निर्णय से उन वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिली,जिनके भारी वाहनों द्वारा गिट्टी,बालू आदि की ढुलाई पर राज्य सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था।

पटना हाईकोर्ट ने मधनिषेध एवं उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव से बिहार में शराबबंदी कानून के अंतर्गत की गई कार्रवाई का ब्यौरा तलब किया

पटना हाईकोर्ट ने मधनिषेध एवं उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव से बिहार में शराबबंदी कानून के अंतर्गत की गई कार्रवाई का ब्यौरा तलब किया है। जस्टिस सत्यव्रत वर्मा ने काजल कुमारी की जमानत याचिका पर ऑन लाईन सुनवाई की।

कोर्ट ने अबतक जेल जा चुकी महिलाओं और 18 से 25 वर्ष के युवाओं का ब्यौरा मांगा है। कोर्ट ने बेगूसराय थाने में दर्ज एक मामले में जेल में बंद काजल कुमारी की जमानत याचिका पर ऑन लाईन सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है।

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याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि महिलायें और युवा शराबंदी के मामलों में बड़े पैमाने पर जेल जा चुके हैं। इनमें से अधिकतम प्रथम अपराध के लिए जेल गए हैं।

इस कानून से समाज में अपेक्षित बदलाव आने की जगह यह आसान पैसे कमाने का एक भंवरजाल बन गया। इसमें महिलाएं व युवा आसानी से फंसते जा रहे हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 18 मई को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने पटना-गया-डोभी (एनएच 83) निर्माण और विकास मामले पर सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट ने पटना -गया – डोभी (एनएच 83) एनएच निर्माण और विकास
मामले पर सुनवाई करते हुए सरकार से पूछा कि अब तक जहानाबाद में किसानों को मुआवज़ा क्यों नहीं दिया गया । चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने प्रतिज्ञा नामक सामाजिक संगठन की जनहित याचिका पर के मामले पर सुनवाई की।

कोर्ट को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मनीष कुमार द्वारा बताया गया कि इस हाईवे के निर्माण के क्रम में उनके अधिग्रहित भूमि का कई किसानों को अब तक मुआवज़ा नहीं दिया गया है। इसलिए नेशनल हाइवे के निर्माण में विलम्ब हो रहा हैं।

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कोर्ट ने अगली सुनवाई में जहानाबाद के डी एम, जहानाबाद के जिला भूमि अधिग्रहण अधिकारी ऐवं एनएचएआई के पदाधिकारियों को कोर्ट में स्वयं उपस्थित होकर जवाब देने के लिए कहा कि किसानों को उनका मुआबजा कब और किस माध्यम से दिया जाएगा।

इस मामले पर अगली सुनवाई 26, अप्रैल,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने गाँधी मैदान थाना में जब्त की गई सम्पत्ति समेत अन्य अवरोधो को हटाने के मामलें पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने जब्त किये गए वाहनों को हटाने के फिर से वहां रखे जाने को गम्भीरता से लिया।कोर्ट ने अधिवक्ता शिल्पी केशरी की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने आज सुबह में इस मामलें पर सुनवाई शुरू की।कोर्ट को बताया गया कि जब्त किये वाहनों को हटाए जाने के बाद उन्हें वहां फिर से लगा दिया गया है।

कोर्ट ने लंच के समय मामलें पर सुनवाई के दौरान पटना के ट्राफिक एस पी तलब किया।कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया कि प्रति सप्ताह गाँधी मैदान में जब्त वाहनों का निरीक्षण करें।

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कोर्ट को अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद गाँधी मैदान से जब्त वाहनों को हटा दिया गया था।लेकिन कुछ समय बाद फिर वहां वाहन लगाया जाने लगा।उन्होंने गाँधी मैदान के पास स्कूल बसों के खड़े होने से ट्राफिक जाम हो जाता हैं।इसका खामियाजा स्कूली छात्रों को भुगतना पड़ता हैं।

उन्होंने बताया कि पटना शहर के अधिकतर थाने में यहीं हालत हैं।कोर्ट ने ट्राफिक एस पी और ज़िला जज को बैठक कर इस मामलें विचार करने का निर्देश दिया।जब्त वाहनों के मामलों की सुनवाई और निबटारे के लिए कार्रवाई करने को कहा।

कोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में गाँधी मैदान थाना में जब्त वाहनों को हटाने के अदालती आदेश का पालन नहीं करने पर सख्त नाराजगी जाहिर की थी।कोर्ट ने डी जी पी,बिहार को 24 घंटों में गाँधी मैदान थाना से सभी अवरोध हटाने का आदेश दिया था।

कोर्ट ने सभी जब्त वाहनों के बारे में पूरी जानकारी मांगते हुए ये भी बताने को कहा था कि अबतक इन वाहन जब्ती मामलों में क्या कार्रवाई की गई है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई आने वाले सप्ताह में होगी।

पटना हाईकोर्ट ने राजीव रंजन सिंह की बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों की खस्ताहाल स्थिति से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने गंडक नदी पर पुल समेत अन्य योजनाओं के पूरा में बिलम्ब होने पर नाराजगी जाहिर की।

कोर्ट ने गंडक नदी पर पुल,हाजीपुर के रामाशीष चौक, अजानपीर ओवर ब्रिज,बी एस एन एल गोलम्बर आदि योजनाओं का मौके पर जायजा लेने के एक टीम गठित की है।इस टीम में सारण और वैशाली के डी एम, एन एच ए आई के अधिकारी,सड़क व पुल निर्माण करने वाली कंपनी के प्रबन्ध निदेशक और अधिवक्ता सिद्धार्थ प्रसाद शामिल है।

कोर्ट ने इन्हें इन योजनाओं के अलावे अन्य अधूरे बने सड़कों का आज ही जायजा ले कर रिपोर्ट अगले सप्ताह में पेश करने का निर्देश दिया है।

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कोर्ट ने इस बात पर सख्त नाराजगी जाहिर की कि कोई भी परियोजना निर्धारित समय में पूरा नहीं हो रहा है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड रहा है। गंडक नदी पर पुल पूरा होने की निर्धारित समय सीमा 2013 ही थी,लेकिन वह अबतक पूरा नहीं हुआ।

निर्माण कंपनी के अधिवक्ता सिद्धार्थ प्रसाद ने कोर्ट को बताया कि हाई वॉल्टेज ट्रांसमीटर टावर स्थानांतरित करने का कार्य होने बाद सड़क निर्माण का कार्य तत्काल शुरू हो जाएगा।वैशाली की डी एम ने कोर्ट को बताया कि हाजीपुर आरओबी बनाने का काम चल रहा और निर्धारित समय में काम पूरा हो जाएगा।

अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार ने बताया की अजान पीर में जहां ओवरब्रिज बनना था, अभी तक नहीं बना हैं।यही नहीं,अभी एक ही लेन चालू हुआ है,जबकि दूसरे लेन का काम 12 वर्षो से लंबित हैं।
इस मामलें पर अगली सुनवाई 25 अप्रैल,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के उत्पाद कोर्ट के बुनियादी सुविधाओं के नहीं होने और विकास के मामले पर सुनवाई की

जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई उत्पाद कोर्ट समेत अन्य कोर्ट में बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर कड़ा रुख अपनाया।

कोर्ट ने कहा कि राज्य में उत्पाद क़ानून से सम्बंधित मामलें बड़ी संख्या में सुनवाई के लिए लंबित हैं।लेकिन उत्पाद कोर्ट के गठन और सुविधाएं उपलब्ध कराने की रफ्तार धीमी हैं।

कोर्ट ने उत्पाद कानून में राज्य सरकार द्वारा किये गए संशोधन की प्रति अगली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष रखने को कहा।

राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ने पक्ष प्रस्तुत हुए कहा कि इस सरकार द्वारा शराब पर लगे प्रतिबन्ध को नहीं हटाया जाएगा।उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने हाल में ही व्यवहारिक कठिनाई को देखते हुए इस क़ानून में संशोधन किया हैं।

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उन्होंने कोर्ट को बताया कि उत्पाद कोर्ट के गठन,जज,कर्माचारियों की नियुक्ति और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातर कार्रवाई कर रही है।

उन्होंने बताया कि सामान्य और उत्पाद कोर्ट के जुडिशियल ऑफिसर को बुनियादी सुविधाएं, पेय जल,शौचालय,बैठने व कार्य करने का स्थान उपलब्ध कराया जा रहा हैं।साथ ही उन्हें लैपटॉप भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

कोर्ट ने राज्य सरकार से जानना चाहा था कि सीबीआई, श्रम न्यायलयों व अन्य कोर्ट के लिए अलग अलग भवन की व्यवस्था है,तो उत्पाद कोर्ट के लिए अलग भवन की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है।

महाधिकवक्ता ललित किशोर ने राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया था कि सभी 74 उत्पाद कोर्ट के लिए जजों की बहाली हो चुकी हैं।साथ ही 666 सहायक कर्मचारियों की बहाली के लिए स्वीकृति दे दी गई हैं।

उन्होंने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया था कि राज्य सरकार इन उत्पाद कोर्ट के एक फ्लोर उपलब्ध कराने की जाने की व्यवस्था की जा रही। सही ढंग से के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयासरत हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 27 अप्रैल,2022 को की जाएगी।

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ सुभाष सरकार बेगूसराय में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की

बेगूसराय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर भारत सरकार के मंत्रियों को जिलों में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा करने के लिए भेजा गया है। इसी कड़ी में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ सुभाष सरकार बेगूसराय पहुंचे‌।

बेगूसराय में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष सरकार ने समाहरणालय स्थित कारगिल भवन में विकासात्मक योजनाओं की समीक्षा बैठक की जिसके बाद सदर प्रखंड के मोहनपुर विद्यालय का भ्रमण किया इसके साथ ही प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र का भी निरीक्षण किया। इसके बाद समाहरणालय स्थित कारगिल भवन में प्रेस वार्ता कर शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष सरकार ने कहा कि बेगूसराय में सभी विकासआत्मक योजना सही से चल रही है और जिससे बेगूसराय का विकास होगा।

बेगूसराय में शिक्षा, कृषि , समेत पांच बिंदुओं पर विचार विमर्श किया गया। बेगूसराय में जल्द ही 600 बेड का मेडिकल कॉलेज का निर्माण होगा उसकी प्रक्रिया चल रही है। शिक्षा के क्षेत्र में प्राइमरी सेकेंडरी और कॉलेजों में इसमें सारे लोग लगे हुए हैं‌ विद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर विद्यांजलि पोर्टल चालू किया गया है जिसमें स्कूलों को जो जरूरत है उसमें वह दर्ज कर सकते हैं। कृषि में ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा मिला है, पशुपालन में विस्तार के लिए सेक्स शॉर्टेज सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री सड़क योजना में काफी काम किया जा रहा है जन धन योजना में खातों को रेगुलर करने से काफी लाभ लोगों को मिल रहा है। वही मोहनपुर स्कूल में भ्रमण के बाद कहा कि स्कूल काफी अच्छा लगा जहां बच्चों और शिक्षकों में काफी तालमेल था और वहां शौचालय में एक पोस्टर चिपकाया जो जिसमें पानी का उपयोग करें दो बार उपयोग से पहले और उपयोग के बाद यह बेहतरीन लगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि बेगूसराय में बेहतरीन कार्य किए जा रहे हैं जिससे बेगूसराय का विकास होगा

पटना हाई कोर्ट ने सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थान से सिविल डिप्लोमाधारियों को 40 फीसदी आरक्षण का लाभ देते हुए निकाले गये रिजल्ट को रद्द कर दिया

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने विनीत कुमार व अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने विज्ञापन संख्या 01/ 2019 के अंतर्गत निकाले गए सभी नियुक्तियों को रद्द कर दिया। खंडपीठ ने माना कि राज्य सरकार द्वारा संचालित पॉलिटेक्निक संस्थान से डिप्लोमा पास किये अभ्यर्थियों को चालीस फीसदी आरक्षण देना सही नहीं था।

खंडपीठ ने फिर से मेरिट लिस्ट तैयार कर रिजल्ट देने का आदेश दिया है। इस विज्ञापन के तहत 6379 कनीय अभियंता (असैनिक/ यांत्रिक/ विद्धुत ) की बहाली होनी थी।

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याचिककर्ता की वरीय अधिवक्ता निवेदिता निर्विकार ने बताया कि इस प्रकार से बनाया गया नियम भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 15 व 16 (4) का उल्लंघन है। साथ ही साथ भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए जीविका के अधिकार को भी प्रभावित करता है।

याचिका में ये कहा गया कि बिहार तकनीकी सेवा आयोग द्वारा 8 मार्च, 2019 को निकाले गए विज्ञापन संख्या 01/2019 के क्लॉज़ 4 (iv)(के) को रद्द किया जाए।

पटना हाईकोर्ट में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के स्मारकों की दयनीय हालत के सम्बन्ध में सुनवाई की

अर्कीलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय निदेशक पटना स्थित राजेंद्र स्मृति 1 और 2 का पटना के डी एम के साथ जायजा ले कर कल कोर्ट को रिपोर्ट करेंगे। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने अधिवक्ता विकास कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि बिहार विद्यापीठ परिसर में सभी गैर कानूनी अतिक्रमण को हटा दिया गया।साथ ही बिहार विद्यापीठ के प्रबंधन का जिम्मा पटना के प्रमंडलीय आयुक्त को सौंपा गया है।

कोर्ट को यह भी बताया गया था कि जमाबंदी रद्द करने की प्रक्रिया चल रही है।कोर्ट ने पिछली सुनवाई में डी एम, पटना को पटना स्थित बिहार विद्यापीठ के भूमि के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि बिहार विद्यापीठ के चारदीवारी के भीतर की भूमि राष्ट्र की धरोहर है, न कि किसी निजी संपत्ति।

कोर्ट ने डी एम, पटना को बिहार विद्यापीठ की भूमि का विस्तृत ब्यौरा देने का निर्देश दिया था।साथ ही यह भी बताने को कहा था कि बिहार विद्यापीठ की भूमि पर कितना अतिक्रमण है और इससे सम्बंधित कितने मामलें अदालतों में सुनवाई के लिए लंबित हैं।

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याचिकाकर्ता अधिवक्ता विकास कुमार ने कोर्ट को बताया कि पटना स्थित बांसघाट के सौंदर्यीकरण के लिए ढाई एकड़ भूमि ज़िला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।

वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने बताया था कि कोर्ट ने ए एस आई के कोलकाता स्थित क्षेत्रीय निर्देश और पटना ए एस आई के अधीक्षक को कोर्ट ने जीरादेई जा कर विकास की संभावना पर विचार कर एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।

जीरादेई स्थित रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण के लिए रेलवे और राज्य सरकार ने सहमति दे दी।कोर्ट ने इस सम्बन्ध में रेलवे को आगे की कार्रवाई के लिए दो सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया था।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 20 अप्रैल,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने भूमि विवाद में प्राथमिकी दर्ज नही करने पर पटना जिला के दानापुर स्थित शाहपुर थाना के थानाप्रभारी को कड़ी फटकार लगाई

कोर्ट ने अदालत में उपस्थित शाहपुर के थाना प्रभारी से पूछा कि भूमि विवाद में उनके द्वारा प्राथमिकी क्यों नहीं दर्ज की गई।

मामला सेवानिवृत्त जिला जज के जमीन पर एक महिला सब इंस्पेक्टर के पति द्वारा कब्जा किये जाने से संबंधित है।इस बात की शिकायत मिलने के बाद भी थानेदार ने कार्रवाई करना तो दूर, प्राथमिकी भी दर्ज नही किया।

कोर्ट ने कहा कि पुलिस अपना काम करने के बजाय असमाजिक तत्वों को प्रश्रय देने का काम कर रही हैं ।कोर्ट ने दानापुर के एएसपी के मौजूदगी में थानेदार से कई सवाल किया।

कोर्ट का कहना था कि एक खास आदमी के लोगों से ही निर्माण सामग्री खरीदने का दबाब थानाप्रभारी द्वारा दिया जाता हैं।निर्माण सामग्री नहीं खरीदने पर निर्माण कार्य बाधित कर दिया जाता हैं।

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पुलिस को शिकायत किये जाने पर पुलिस उल्टे शिकायतकर्ता पर ही कार्रवाई करती हैं।कोर्ट का कहना था कि भले ही कोई कितना भी बड़ा क्यों ना हो कानून के सामने सभी एक समान हैं,सभी को कानून का पालन करना होगा।

कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि आम जनता को तंग करने की बजाय उन्हें सहयोग करें।कोर्ट में उपस्थित वकीलों ने कहा कि पुलिस सबसे ज्यादा वकील को तंग करती हैं, जबकि वकील ही उन्हें कानूनी पेंच से बाहर निकालते हैं।कोर्ट ने पुलिस के अधिकारियों से कहा कि पुलिस भूमि9 विवाद को हल्के में लेना बंद करें और भूमि विवाद की जानकारी मिलने पर तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर करवाई शुरू करे।

कोर्ट ने एएसपी को कहा कि अगली तारीख पर वे इस मामले से संबंधित पूरा रिपोर्ट कोर्ट को दें। इस मामले पर अगली सुनवाई 18 मई को फिर की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने राजीव रंजन सिंह की राष्ट्रीय राजमार्ग से सम्बंधित याचिका पर सुनवाई गंडक नदी पर पुल निर्माण में हो रहे बिलम्ब को गम्भीरता से लिया

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पुल निर्माण करने वाली कंपनी के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक को 20 अप्रैल,2022 को तलब किया है।

कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जाहिर किया कि हाजीपुर में आर ओ बी का निर्माण एक दशक बाद भी पूरा नहीं हुआ।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने गंडक नदी पर पुल निर्माण कार्य पूरा करने के लिए पुल निर्माण कंपनी को छह से सात माह का समय दिया।साथ ही कहा था कि निर्माण कार्य दोनों ओर हाजीपुर और छपरा से शुरू होना चाहिए।

निर्माण कंपनी द्वारा इस पुल के निर्माण के लिए दस महीने की मोहलत मांगी गई,जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया था। आज कोर्ट ने कहा कि कोर्ट अगली सुनवाई में एन एच ए आई के अध्यक्ष को तलब किया जा सकता है।

पिछली सुनवाई में याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वैशाली के डी एम से पूछा कि प्रशासन इस मामलें में क्या कर रहा था।कोर्ट ने उनसे जानना चाहा कि जनता की मुश्किलों को दूर करने के लिए उन्होंने क्या कार्रवाई की।

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वैशाली के जिलाधिकारी ने बताया था कि हाजीपुर के रामाशीष चौक से बस स्टैंड नेटवर्क से हटा दिया गया है। साथ ही ये भी बताया कि रामाशीष चौक पर जाम का मुख्य कारण अंजानपीर चौक से आर ओ बी का नहीं बनना और दोनों साइड
सड़कों का खस्ताहाल होना।साथ ही जगह जगह मनमाने तरीके से स्पीड ब्रेकर का निर्माण किया जाना।

कंपनी के अधिवक्ता सिद्धार्थ प्रसाद ने बताया था कि अजानपीर दोनों ओर की सड़कों को एक माह में मरम्मत और निर्माण कार्य पूरा कर सड़क को ठीक कर दिया जाएगा। साथ ही अजानपीर के आसपास अनावश्यक स्पीड ब्रेकर को भी हटा दिया जाएगा।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 20 अप्रैल,2022 को होगी।

Patna High Court: मगध विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर (वीसी) राजेन्द्र प्रसाद उर्फ डॉ राजेन्द्र प्रसाद की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है

पटना हाईकोर्ट ने मगध विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर (वीसी) राजेन्द्र प्रसाद उर्फ डॉ राजेन्द्र प्रसाद की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा कर राहत दी है। जस्टिस आशुतोष कुमार ने इस अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य निगरानी विभाग से जवाबतलब किया हैं।

इससे पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट को तीन सप्ताह के भीतर सुनवाई करने का आग्रह किया था।साथ उनकी गिरफ्तारी पर तत्काल रोक लगा दिया था।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता डा रणजीत कुमार ने बताया कि साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राजेन्द्र प्रसाद द्वारा पटना हाई कोर्ट में दायर अग्रिम जमानत व कार्यवाही को रद्द करने हेतु दायर अर्जियों पर सुनवाई की थी।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस बीच याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी पर रोक रहेगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को निष्पादित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश को पारित किया था।

राजेन्द्र प्रसाद के विरुद्ध आई पी सी की धारा 120 बी (अपराध करने के लिए रची गई आपराधिक साजिश) / 420(जालसाजी) व भ्रष्टाचार निवारण एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया था।

इसके पूर्व याचिकाकर्ता ने पटना हाई कोर्ट के समक्ष अग्रिम जमानत हेतु याचिका भी दायर किया है। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिए अर्जी भी दायर किया है।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता की दलील थी कि उनकी अर्जियों पर सुनवाई बड़े पैमाने पर मुकदमों के लंबित रहने की वजह से नहीं सुना जा रहा है।

इस मामलें पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई 25 अप्रैल,2022 को होगी।

Patna High Court: दनियावां थाना के पुलिसकर्मी संतोष कुमार व अनूप कुमार द्वारा अधिवक्ता विनोद कुमार के साथ किये गए मारपीट के मामलें पर सुनवाई हुई

पटना हाईकोर्ट ने दनियावां थाना के पुलिसकर्मी संतोष कुमार व अनूप कुमार द्वारा अधिवक्ता विनोद कुमार के साथ किये गए मारपीट के मामलें पर सुनवाई की चीफ जस्टिस संजय करोल की डिवीजन बेंच इस मामलें सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने की गई कार्रवाई का ब्यौरा प्रस्तुत किया।

राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कोर्ट को बताया कि इस मामलें सम्बंधित पुलिस अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है।साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई हैं।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि पीड़ित अधिवक्ता विनोद कुमार की ईलाज की पूरी व्यवस्था की गई।उनका मेडिकल जांच किया गया।साथ ही उन्हें दवा भी दी गई।

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एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश चंद्र वर्मा ने कोर्ट को बताया की इस तरह की घटनाएं अक्सर होते रहती हैं।ऐसी घटनाओं को सख्त तरीके से रोकने की जरूरत हैं।कोर्ट में आज पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक को पटना हाई कोर्ट के समक्ष उपस्थित थे। उन्होंने भी अपनी बात कोर्ट के समक्ष रखा।

कोर्ट के समक्ष पिछली सुनवाई में इस घटना के सम्बन्ध में सीनियर एडवोकेट पी के शाही ने पूरी घटना को रखा था। श्री शाही ने यह भी बताया कि उस रास्ते से राज्य के मुख्यमंत्री को जाना था।

उसके बाद कोर्ट ने इस मामले में दिए गए पत्र को आधार बनाते हुए जनहित याचिका के रूप में रजिस्टर्ड करने का आदेश दिया था।

कोर्ट को राज्य सरकार के महाधिवक्ता ललित किशोर ने पीड़ित अधिवक्ता की समुचित इलाज करवाने के लिए आश्वस्त किया था। सुनवाई के दौरान राज्य

इस घटना के बारे में पत्र में कहा गया है कि जब पीड़ित अधिवक्ता नालंदा जिला अंतर्गत अपने गांव चुलिहारी से पटना आ रहे थे ,तो दनियावां पुलिस द्वारा मारपीट की गई।

इसकी वजह से अधिवक्ता के दोनों कान बुरी तरह से घायल हो गए।पत्र में कहा गया है कि जब अधिवक्ता ने पटना के एसएसपी व दनियावां थाना के एसएचओ के समक्ष शिकायत करना चाहा,तो उन्होंने शिकायत लेने से इंकार कर दिया था।

इस मामलें पर कोर्ट आदेश पारित करेगा।

Patna High Court: राज्य के पटना स्थित जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट,पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के मामले पर सुनवाई हुई

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के पटना स्थित जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट,पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के मामले पर सुनवाई की।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने गौरव कुमार सिंह व अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को विभिन्न एयरपोर्ट के विस्तार,विकास व भूमि अधिग्रहण के सम्बन्ध में की जा रही कार्रवाई का ब्यौरा देने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी राज्य में एयरपोर्ट के लिए किये जा रहे सर्वे का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
इससे पहले की सुनवाई में पटना के जयप्रकाश नारायण एयरपोर्ट के निर्देशक कोर्ट में उपस्थित हो कर पटना और राज्य के अन्य एयरपोर्ट की स्थिति के सम्बन्ध में ब्यौरा पेश किया था।

उन्होंने पटना एयरपोर्ट की समस्याओं को बताते हुए कहा कि हवाई जहाज लैंडिंग की काफी समस्या है।सामान्य रूप से रनवे की लम्बाई नौ हज़ार फीट होती हैं, जो कि पूर्णिया व दरभंगा में उपलब्ध है,जबकि पटना में रनवे की लम्बाई 68 सौ फीट हैं।

उन्होंने बताया कि एक ओर रेलवे लाइन है और दूसरी ओर सचिवालय हैं।उन्होंने कोर्ट को बताया था कि रन वे की लम्बाई बढ़ाने के लिए सर्वे शुरू होगा।कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को यह जानकारी देने को कहा है कि बिहार के सटे राज्य झारखंड,बंगाल,उत्तर प्रदेश,ओडिशा,उत्तर पूर्व के राज्यों में कितने एयरपोर्ट हैं।

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कोर्ट को राज्य के गया,पूर्णियां और अन्य एयरपोर्ट के विस्तार,विकास और भूमि अधिग्रहण से सम्बंधित समस्यायों के बारे में बताया गया

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य के एडवोकेट जनरल से कहा था कि गया एयरपोर्ट के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए 268 करोड़ रुपए कोर्ट में जमा करा दे।सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद उसका निबटारा होगा।

एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि इसके लिए राज्य सरकार से निर्देश की आवश्यकता होगी।अधिवक्ता अर्चना शाही ने कोर्ट को बताया था कि सम्बंधित केंद्रीय मंत्री ने राज्य सभा में बताया कि पटना एयरपोर्ट के विस्तार और विकास के 1260 करोड़ रुपए की राशि निर्गत किया गया।

लेकिन अर्चना शाही ने बताया कि अब तक इस धनराशि का 32% खर्च किया गया है।

राज्य में पटना के जयप्रकाश नारायण अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के अलावा गया, मुजफ्फरपुर,दरभंगा,भागलपुर,फारबिसगंज , मुंगेर और रक्सौल एयरपोर्ट हैं।लेकिन इन एयरपोर्ट पर बहुत सारी आधुनिक सुविधाओं के अभाव व सुरक्षा की भी समस्या हैं।

इस मामलें पर कोर्ट में अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस जे एन भट्ट का आज निधन हो गया हैं, वे 76 वर्ष के थे

जस्टिस भट्ट का जन्म गुजरात के जामनगर में 16 अक्टूबर,1945 को हुआ था। उन्होंने एम.कॉम,एल एल एम और लॉ में पी एच डी की डिग्री ली।

1968 में जस्टिस भट्ट ला की प्रैक्टिस शुरू की। उन्होंने गुजरात की न्यायिक सेवा में सीधे ज़िला जज के रूप में योगदान दिया।

1990 में जस्टिस भट्ट गुजरात हाईकोर्ट के पर्मानेंट जज बने।उसके बाद गुजरात हाईकोर्ट का कार्यवाहक चीफ जस्टिस बने।

Justice Dr. J.N. Bhatt

18 जुलाई,2005 को वे पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने। अक्टूबर,2007 जस्टिस भट्ट पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप सेवानिवृत हुए। उसके बाद गुजरात लॉ कमीशन के अध्यक्ष बने। उसके बाद वे गुजरात मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के पद पर कार्य किया।

Patna High Court: पटना में महिलाओं के लिए पब्लिक टॉयलेट की कमी और पहले से बने टॉयलेटों के रखरखाव की कमी से बेकार हो जाने पर दायर हुई जनहित याचिका पर सुनवाई हुई

पटना हाईकोर्ट ने पटना में महिलाओं के लिए पब्लिक टॉयलेट की कमी और पहले से बने टॉयलेटों के रखरखाव की कमी से बेकार हो जाने पर दायर हुई जनहित याचिका पर सुनवाई की।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने संजीव कुमार मिश्रा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना नगर निगम व जिला प्रशासन से जवाब तलब किया है।

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कोर्ट को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने खुद बहस करते हुए कोर्ट को बताया कि पटना जंक्शन , राजेन्द्र नगर स्टेशन , गोलंबर , मीठापुर- डाक बंगला , गांधी मैदान , कारगिल चौक के जगहों पर पब्लिक टॉयलेट की कमी है। साथ ही पुराने टॉयलेट के रखरखाव नही होने के कारण ठप्प पड़ चुके हैं ।

दो साल पहले 20 करोड़ रुपये सरकारी राशि से बने इन सभी जगहों के पब्लिक यूरिनल व टॉयलेट बेकार हो चुके हैं । महिलाओं को बहुत मुश्किलें होती है ।

इस मामले की अगली सुनवाई 13 मई, 2022 को होगी ।

Patna High Court : पटना के चर्चित जिम ट्रेनर गोलीकांड में अभियुक्त खुशबू सिंह को नियमित जमानत देने से इंकार कर दिया

पटना हाई कोर्ट ने पटना के चर्चित जिम ट्रेनर गोलीकांड में अभियुक्त खुशबू सिंह को नियमित जमानत देने से इंकार कर दिया। जस्टिस ए एम बदर ने इस मामलें पर सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद यह आदेश दिया।

कोर्ट ने खुशबू सिंह की नियमित जमानत याचिका को खारिज करते हुए संबंधित ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह इस मामले का ट्रायल नौ महीने में पूरा कर ले। खुशबू सिंह जिम ट्रेनर विक्रम सिंह गोली कांड में फिलहाल पटना के बेउर जेल में बंद है।

अभियुक्त खुशबू की ओर से उसके अधिवक्ता सुरेन्द्र कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को इस मामले में एक साजिश के तहत फंसाया गया है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि खुशबू के पति डॉ राजीव सिंह को निचली अदालत से ही नियमित जमानत मिल चुकी है।

जिम ट्रेनर गोलीकांड

सरकारी वकील (एपीपी ) मुस्ताक आलम और जे एन ठाकुर और जिम ट्रेनर की ओर से अधिवक्ता द्विवेदी सुरेन्द्र ने जमानत याचिका का विरोध किया।उन्होंने बहस करते हुए कोर्ट को बताया कि यह मामला पटना ही नही, बल्कि बिहार का चर्चित मामला रहा है। पुलिस ने इस मामले में अनुसंधान पूरा कर खुशुब और उसके पति डॉ राजीव समेत छह अभियुक्तों के खिलाफ कोर्ट में आरोपपत्र समर्पित कर दिया है।

अन्य अभियुक्तों के खिलाफ अनुसंधान अभी भी जारी रखा है।कोर्ट को बताया गया कि कांड दैनिकी में जो साक्ष्य आया है, उससे स्पष्ट होता है कि याचिकाकर्ता इस मामले की मुख्य अभियुक्त है।इस घटना में शामिल दो अन्य अपराधियों ने भी पुलिस को दिये अपने बयान में खुशबू सिंह और उसके पति की संलिप्तता की बात कही है।इन लोगों ने जिम ट्रेनर की हत्या के लिए तीन लाख रुपया अपराधियों को दिया भी है।

इस मामले में खुशबू उसके पति डॉ राजीव और खुशबू के पिता ने कॉन्ट्रैक्ट किलर को जिमट्रेनेर की हत्या करने के लिये बैंक से पैसा निकाल कर दिया है।

इसके पहले भी खुशबू के नियमित जमानत पर 31 जनवरी को सुनवाई हुई थी।उस दिन कोर्ट ने इस मामले में संबंधित पुलिस अधिकारी से शपथ पत्र के माध्यम से अभियुक्त के खिलाफ आये साक्ष्यों को देने को कहा था।

कोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले के अनुसंधानकर्ता ने कोर्ट में दो शपथ पत्र दायर कर पूरे घटना और उसके अनुसंधान में आये साक्ष्यों को दिया था।गौरतलब है कि 18 सितंबर 2021 को राजधानी के कदमकुआं इलाके में जिम ट्रेनर विक्रम सिंह को हत्या करने की नियत से गोली मारी गई थी।

हालांकि, इस वारदात में उनकी जान बच गई।इस वारदात में शामिल खुशबू सिंह, उसके पति राजीव कुमार सिंह और दोनों कॉन्ट्रैक्ट किलर समेत कई अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार जेल भेज दिया था। इनमें फिजियोथेरेपिस्ट राजीव कुमार सिंह को जमानत मिल चुकी है।

Patna High Court : दनियावां थाना के पुलिसकर्मी संतोष कुमार व अनूप कुमार द्वारा अधिवक्ता विनोद कुमार के साथ किये गए मारपीट के मामले पर सुनवाई

पटना । हाईकोर्ट में दनियावां थाना के पुलिसकर्मी संतोष कुमार व अनूप कुमार द्वारा अधिवक्ता विनोद कुमार के साथ किये गए मारपीट के मामले पर सुनवाई 18 अप्रैल,2022 को होगी। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई कर रही हैं।

आज कोर्ट में पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक को पटना हाई कोर्ट के समक्ष उपस्थित थे।

पिछली सुनवाई में कोर्ट को इस घटना के सम्बन्ध में वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने पूरी घटना को रखा था। श्री शाही ने यह भी बताया कि उस रास्ते से राज्य के मुख्यमंत्री को जाना था।

उसके बाद कोर्ट ने इस मामले में दिए गए पत्र को आधार बनाते हुए जनहित याचिका के रूप में रजिस्टर्ड करने का आदेश दिया था।

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कोर्ट को राज्य सरकार के महाधिवक्ता ललित किशोर ने पीड़ित अधिवक्ता की समुचित इलाज करवाने के लिए आश्वस्त किया था। सुनवाई के दौरान राज्य एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बराबर घटती है, जो अच्छी बात नहीं है।

इस घटना के बारे में पत्र में कहा गया है कि जब पीड़ित अधिवक्ता नालंदा जिला अंतर्गत अपने गांव चुलिहारी से पटना आ रहे थे ,तो दनियावां पुलिस द्वारा मारपीट की गई।

इसकी वजह से अधिवक्ता के दोनों कान बुरी तरह से घायल हो गए।पत्र में कहा गया है कि जब अधिवक्ता ने पटना के एसएसपी व दनियावां थाना के एसएचओ के समक्ष शिकायत करना चाहा,तो उन्होंने शिकायत लेने से इंकार कर दिया था।

Patna High Court : पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ रीता कुमारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नही करने का निर्देश दिया

पटना हाई कोर्ट ने पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ रीता कुमारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नही करने का निर्देश पटना पुलिस को दिया है।साथ ही कोर्ट ने सेकंडरी एडुकेशन के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को भी नोटिस जारी किया है।

जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने डॉ रीता कुमारी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह निर्देश दिया।
कोर्ट को बताया गया कि वर्ष 2020 के इंटरमीडिएट परीक्षा के मूल्यांकन में भाग नहीं लेने पर याचिकाकर्ता के खिलाफ कदमकुआं थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

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कोर्ट को बताया गया कि यूनिवर्सिटी प्रोफेसर को इंटरमीडिएट परीक्षा के मूल्यांकन में लगाना विश्वविद्यालय कानून के खिलाफ है।कोर्ट ने फिलहाल नोटिस जारी कर प्रोफेसर के खिलाफ किसी प्रकार का दण्डात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है।

Patna High Court: राज्य में अवैध शराब को बरामद कर नष्ट करने से हो रहे प्रदूषण और पर्यावरण पर पड रहे विपरीत प्रभाव के मामलें पर राज्य सरकार से जवाबतलब किया

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में अवैध शराब को बरामद कर नष्ट करने से हो रहे प्रदूषण और पर्यावरण पर पड रहे विपरीत प्रभाव के मामलें पर राज्य सरकार से जवाबतलब किया। जस्टिस पूर्णेंदु सिंह ने अर्जुन कुमार की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने कहा कि ऐसी कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 47 में निहित निर्देशों के जनादेश के खिलाफ है।इस मामलें पर ध्यान नहीं दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि उपरोक्त तथ्य को ध्यान में रखते हुए, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सलाहकार निकाय होने के नाते, बोर्ड के अध्यक्ष से अपेक्षा की जाती है कि वे उन क्षेत्रों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने के लिए सबसे पहले गंभीर कदम उठाएँ ।

राज्य के अधिकारियों द्वारा शराब को नष्ट किया जा रहा है ,उस पर ध्यान देने की जरूरत है। भारत का संविधान राज्य की जनता की सुरक्षा हेतु सभी उपाय करने का आदेश देता है।

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कोर्ट ने अवैध शराब नष्ट किए जाने से पर्यावरण पर इससे पड़ने वाले इसके दुष्प्रभाव , पारिस्थितिक असंतुलन और मानव जीवन के लिए ख़तरनाक होने के संबंध में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष को 12 अप्रैल,2022 तक रिपोर्ट दायर करने के लिए कहा है ।

कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य में शराब की तस्करी प्रतिबंधित है। यह केवल आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि इसकी तस्करी करने वाले आर्थिक अपराध के लिए उत्तरदायी हैं। इस मामले पर अगली सुनवाई 12 अप्रैल,2022 को होगी ।

Patna High Court : दनियावां थाना के पुलिसकर्मी संतोष कुमार व अनूप कुमार द्वारा अधिवक्ता विनोद कुमार के साथ किये गए मारपीट के मामले पर सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट ने दनियावां थाना के पुलिसकर्मी संतोष कुमार व अनूप कुमार द्वारा अधिवक्ता विनोद कुमार के साथ किये गए मारपीट के मामले पर सुनवाई की। इस मामलें 11 अप्रैल,2022 को पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक को पटना हाई कोर्ट के समक्ष उपस्थित होंगे।

इस घटना के सिलसिले में वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ के समक्ष पूरी बात को रखा था। श्री शाही ने यह भी बताया कि उस रास्ते से राज्य के मुख्यमंत्री को जाना था। उसके बाद आज ही खंडपीठ ने इस मामले में दिए गए पत्र को आधार बनाते हुए जनहित याचिका के रूप में रजिस्टर्ड करने का आदेश दिया।

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राज्य सरकार के महाधिवक्ता ललित किशोर ने पीड़ित अधिवक्ता की समुचित इलाज करवाने के लिए आश्वस्त किया है। सुनवाई के दौरान राज्य एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बराबर घटती है, जो अच्छी बात नहीं है।

पत्र में कहा गया है कि जब पीड़ित अधिवक्ता नालंदा जिला अंतर्गत अपने जन्म स्थान चुलिहारी से पटना आ रहे थे ,तो दनियावां पुलिस द्वारा मारपीट की गई, जिसकी वजह से अधिवक्ता के दोनों कान बुरी तरह से घायल हो गए।पत्र में कहा गया है कि जब अधिवक्ता ने पटना के एसएसपी व दनियावां थाना के एसएचओ के समक्ष शिकायत करना चाहा ,तो दोनों ने शिकायत लेने से मना कर दिया।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 11 अप्रैल,2022 को होगी।

Patna High Court : पटना हाईकोर्ट में मानसिक रोग चिकित्सा के सिलसिले में राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकार के गठन के मामलें पर सुनवाई हुई

पटना हाईकोर्ट में मानसिक रोग चिकित्सा के सिलसिले में राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकार के गठन के मामलें पर सुनवाई हुई।चीफ जस्टिस संजय करोल एवं जस्टिस संजय कुमार की खंडपीठ में चीफ सेक्रेटरी ने हलफनामा दायर कर जानकारी दी कि राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकार का गठन कर दिया गया है।

ये जनहित याचिका आकांक्षा माविया ने दायर की हैं।कोर्ट को बताया गया कि प्राधिकार के पदेन सदस्यों व अन्य सदस्यों की नामित व बहाल करने की प्रक्रिया जारी हैं।

अपर महाधिवक्ता एस डी यादव ने कोर्ट को बताया गया कि प्राधिकार के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के रूप में शैलेन्द्र कुमार को नियुक्त किया गया है।

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साथ ही उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी कि कोइलवर स्थित मानसिक आरोग्यशाला में 272 बेड का अस्पताल बनाया जाना हैं।इसकी लागत 129 करोड़ रुपए होगी और 3 माह में निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।

सुनवाई के दौरान कोर्ट को अपर महाधिवक्ता एस डी यादव ने बताया गया कि राज्य के इकतीस जिलों मे ज़िला मानसिक स्वास्थ्य प्रोग्राम प्रारम्भ हो गया हैं।साथ ही शेष आठ जिलों में इसे स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार की सहमति मिल गई है।
मानसिक रोगियों के ईलाज के लिए 61 डॉक्टरों व 47 नर्सों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया हैं। मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के मामलें में एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने चार दिनों का समय देते हुए इस प्राधिकार को पूरी तरह से शुरू करने के लिए एक समय सीमा देने का निर्देश दिया था । इस मामलें पर आगे सुनवाई की जाएगी।

Patna High Court : राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में कोताही बरतने पर नाराज़गी जाहिर किया

पटना हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में कोताही बरतने पर नाराज़गी जाहिर किया। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई की।

हाईकोर्ट ने सड़क निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख तथा भागलपुर के कार्यपालक अभियंता को 7 अप्रैल को तलब किया हैं। प्रणव कुमार झा द्वारा इस मामले को लेकर दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया ।

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खंडपीठ ने आदेश दिया हैं कि दोनों अधिकारी 7 अप्रैल, 2022 को तीन बजे कोर्ट में सुनवाई के समय उपस्थित रहे। कोर्ट राज्य से गुजरने वाली बहुत सारी एन एच ( राष्ट्रीय राजमार्ग) के मामलों पर लगातार सुनवाई और मॉनिटरिंग कर रही हैं।

कोर्ट का मानना हैं कि राज्य की। जनता को यात्रा करने के लिए आरामदायक और अच्छी सड़के उपलब्ध हो।

इस मामले पर फिर 7अप्रैल, 2022 को सुनवाई होगी.

Patna High Court : सहारा इंडिया के विभिन्न स्कीमों में उपभोक्ताओं द्वारा जमा किये गए पैसे का भुगतान को लेकर दायर की गई हस्तक्षेप याचिकाओं पर सुनवाई हुई

पटना हाईकोर्ट ने सहारा इंडिया के विभिन्न स्कीमों में उपभोक्ताओं द्वारा जमा किये गए पैसे का भुगतान को लेकर दायर की गई हस्तक्षेप याचिकाओं पर सुनवाई की। जस्टिस संदीप कुमार ने इन मामलों पर सुनवाई की।

कोर्ट मे सुनवाई के दौरान सेबी के संबंधित अधिकारी कोर्ट में उपस्थित थे ।कोर्ट ने जब उनसे पूछा कि जितनी भी हस्तक्षेप याचिकाये हाईकोर्ट में दायर की गई है, उन्होंने उन याचिकाओं में से कितने याचिकाओं की छानबीन कर कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को भेजा है ।इस पर सेबी की ओर से बताया गया कि उन्होंने अभी तक करीब 430 हस्तक्षेप याचिकाओं की जांच की है ।साथ ही अन्य याचिकाओं की जांच भी की जा रही है।

इस पर कोर्ट ने कहा कि आप जल्द से जल्द जांच कर संबंधित अधिकारी के पास इस मामले को भेज दें ,ताकि लोगों उनका पैसा लौटने की करवाई हो सके।

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कोर्ट ने कहा कि बिहार एक गरीब राज्य है और यहां की जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा, जो सहारा कंपनी द्वारा विभिन्न स्कीमों में अपने यहां जमा करवा कर रखा गया है और जमा कर्ताओं को भुगतान नहीं किया जा रहा है ,यह बहुत ही गलत है।

कोर्ट ने जब सहारा इंडिया के अधिवक्ता से पूछा तो उन्होंने कहा कि अगर सेवी 1000 करोड़ रूपया भी उन्हें दे देती है ,तो वह बिहार के निवेशकों का पूरा पैसा उससे लौटा देंगे।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी सेबी को कहा है कि दो कंपनियों के पैसे को छोड़कर बाकी पैसा सेबी सहारा को लौटा दे, लेकिन सेबी ऐसा नही कर रहा है ।

उन्होंने कोर्ट को बताया की कोर्ट को बताया कि सहारा इंडिया के दो स्कीम सहारा हाउसिंग और सहारा रियल स्टेट में जमा किए गए पैसों को भुगतान करने के लिए अभी तक सुप्रीम कोर्ट का कोई आदेश नही है।

कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में अगली सुनवाई तक आप जानकारी प्राप्त कर बताएं कि इन दो स्कीमों के बाद वाले स्कीमों का पैसा क्यों नहीं लौटाने का निर्देश सहारा के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर को दिया जाय।

कोर्ट को इकोनामिक ऑफेंस यूनिट (ईओयू ) की ओर से बताया गया कि आम जनता का पैसा जमा कराने वाले निधि कंपनियों के खिलाफ 10 प्राथमिकी दर्ज कर जांच की गई है। इसमें जांच के बाद आरोप पत्र भी समर्पित कर दिया गया है।5 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।आगे भी कार्रवाई की जा रही है ।

इस मामले पर अब 20 अप्रैल को फिर सुनवाई होगी।

Patna High Court : पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई हुई

पटना हाई कोर्ट ने पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ को सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने बताया कि इस मामलें की जांच 4 सप्ताह में पूरी कर ली जाएगी।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने अनुसंधान को डी एस पी रैंक की महिला पुलिस अधिकारी से कराने का निर्देश दिया था।राज्य सरकार द्वारा इस मामलें की जांच 4 सप्ताह में पूरी कर कोर्ट के समक्ष जांच रिपोर्ट प्रस्तुत किया जाएगा।

पहले की सुनवाई में कोर्ट का यह भी कहना था कि बिहार स्टेट लीगल सर्विसेज ऑथोरिटी, यदि पीड़िता को जरूरत हो ,तो जो मदद हो सके पीड़िता को उपलब्ध करवाए। कोर्ट ने राज्य के समाज कल्याण विभाग समेत सभी संबंधित विभागों को अपने अपने हलफनामा को रिकॉर्ड पर लाने को भी कहा था, जिसमें पीड़िता द्वारा 4 फरवरी, 2022 का बयान भी शामिल हो।

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राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि दोनों पीडितों की ओर से महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज हो गई है। एक का पी एस केस नंबर – 13/2022 है और दूसरे का पी एस केस नंबर -17/ 2022 दर्ज कर लिया गया है।

पीड़िता की संबंधित अधिकारियों के समक्ष जांच भी की गई। महाधिवक्ता ने पीड़िता द्वारा दिये गए बयान के उद्देश्य पर संदेह भी जताया है। उनका कहना था कि पीड़िता ने केअर होम को वर्ष 2021 के अगस्त महीने में ही छोड़ दिया था, लेकिन वह पहली बार जनवरी, 2022 में आरोप लगा रही है।
हाई कोर्ट इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रहा है।हाई कोर्ट ने इस याचिका को पटना हाई कोर्ट जुवेनाइल जस्टिस मोनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रजिस्टर्ड किया है।

कमेटी में जस्टिस आशुतोष कुमार चेयरमैन हैं, जबकि जस्टिस अंजनी कुमार शरण और जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय इसके सदस्य हैं। कमेटी ने उक्त मामले में 31 जनवरी को अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट को गंभीरता से लिया था।

केअर होम में 260 से भी ज्यादा महिलाएं वास करती हैं।इस मामलें पर चार सप्ताह बाद सुनवाई की जाएगी।

Patna High Court : गाँधी मैदान थाना में जब्त की गई सम्पत्ति समेत अन्य अवरोधो को हटाने के मामलों पर सुनवाई हुई

पटना हाईकोर्ट ने गाँधी मैदान थाना में जब्त की गई सम्पत्ति समेत अन्य अवरोधो को हटाने के मामलों पर सुनवाई की।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने अधिवक्ता शिल्पी केशरी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना के सभी पुलिस स्टेशन में जब्त वाहनों का ब्यौरा तलब किया है।

कोर्ट ने कल गाँधी मैदान थाना में जब्त वाहनों को हटाने के अदालती आदेश का पालन नहीं करने पर सख्त नाराजगी जाहिर की।कोर्ट ने डी जी पी,बिहार को 24 घंटों में गाँधी मैदान थाना से सभी अवरोध हटाने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने सभी जब्त वाहनों के बारे में पूरी जानकारी मांगते हुए ये भी बताने को कहा कि अबतक इन वाहन जब्ती मामलों में क्या कार्रवाई की गई हैं।

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि पटना के गाँधी मैदान के आस पास पार्किंग स्थल को छोड़ कर और कहीं भी गाड़ी पार्क नहीं किया जाएगा।

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अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने कोर्ट को बताया कि आज गाँधी मैदान थाना से जब्ती की वाहनों को भले हटा दिया गया है, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर वहीं हालत हो जाएगी।कोर्ट द्वारा इसके निरंतर मॉनिटरिंग की जरूरत हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को पटना हाईकोर्ट ने गाँधी मैदान थाना में जब्त की गई संपत्ति समेत सभी अवरोधों को दो सप्ताह में हटाना सुनिश्चित करने का आदेश दिया था।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने कल डी जी पी, बिहार के द्वारा दायर हलफनामे पर आपत्ति की।उन्होंने कोर्ट को बताया कि अब तक गाँधी मैदान थाना में जब्त की गई कई गाडियां और अन्य संपत्ति पड़ी हुई है।उन्होंने फोटो के जरिये सबूत भी दिया।उन्होंने बताया कि पटना के अगमकुआं,कंकड़बाग़, पत्रकार नगर समेत अन्य कई थानो की ऐसी ही स्थिति हैं।

कोर्ट ने इस मामलें को काफी गम्भीरता से लेते हुए कल ही डी जी पी, बिहार को चौबीस घंटों के भीतर कार्रवाई कर कोर्ट के समक्ष कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने इस स्थान की खूबसूरती के कारण इसे पटना का गौरव और ज्वेल की संज्ञा दी थी।इस मामलें पर अगली सुनवाई 9 अप्रैल,2022 को होगी।

Patna High Court : मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन में कई व्यक्तियों के आंख की रौशनी खो जाने के मामले पर सुनवाई करते हुए मुजफ्फरपुर के एस एस पी से कार्रवाई रिपोर्ट तलब किया है

पटना हाई कोर्ट ने मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन में कई व्यक्तियों के आंख की रौशनी खो जाने के मामले पर सुनवाई करते हुए मुजफ्फरपुर के एस एस पी से कार्रवाई रिपोर्ट तलब किया है।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वी के सिंह ने बताया कि इस मामलें में दायर प्राथमिकी पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने हलफनामा दायर कर कार्रवाई रिपोर्ट पेश किया था।मुकेश कुमार ने ये जनहित याचिका दायर की है।

कोर्ट ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए पी एम सी एच या एम्स ,पटना के डॉक्टरों की कमिटी गठित करें।इनमें आँख रोग विशेषज्ञ भी शामिल हो। इस कमिटी को दो सप्ताह में गठित करने का निर्देश दिया।

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साथ कोर्ट ने मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल के प्रबंधन को भी जवाब देने का आदेश दिया।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को इस अस्पताल के प्रबंधन को पार्टी बनाने का निर्देश दिया था।

इसमें कोर्ट को बताया गया कि आँखों की रोशनी गवांने वाले पीडितों को बतौर क्षतिपूर्ति एक एक लाख रुपए दिए गए हैं।साथ ही मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल को बंद करके एफ आई आर दर्ज कराया गया है।लेकिन अब तक दर्ज प्राथमिकी पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई ।

इस याचिका में हाई लेवल कमेटी से जांच करवाने को लेकर आदेश देने अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विजय कुमार सिंह ने आरोप लगाया गया है कि कथित तौर पर आई हॉस्पिटल के प्रबंधन व राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा बरती गई अनियमितता और गैर कानूनी कार्यों की वजह से कई व्यक्तियों को अपनी आँखें खोनी पड़ी।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार के अधिकारियों को भी एक नियमित अंतराल पर अस्पताल का निरीक्षण करना चाहिए था। याचिका में आगे यह भी कहा गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों व अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज करनी चाहिए, क्योंकि इन्हीं की लापरवाही की वजह से सैकड़ों लोगों को अपनी ऑंखें गंवानी पड़ी।

मुजफ्फरपुर आई अस्पताल प्रबंधन व जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही की वजह से आंख खोए व्यक्तियों को मुआवजा देने का भी आग्रह किया गया है। पीड़ितों को सरकारी अस्पताल में उचित इलाज करवाने को लेकर आदेश देने का भी अनुरोध किया गया है।

इस मामले पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी।

Patna High Court : बिहार ट्रक ऑनर एसोसिएशन व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई 7 अप्रैल,2022 तक के लिए टली

पटना हाई कोर्ट में बिहार ट्रक ऑनर एसोसिएशन व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई 7 अप्रैल,2022 तक के लिए टली। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ द्वारा इन मामलों पर सुनवाई की जा रही है।

इन याचिकाओं में बिहार सरकार द्वारा 14 चक्कों के ट्रक के जरिये गिट्टी व बालू आदि की ढुलाई पर 16 दिसंबर, 2020 को ही एक अधिसूचना जारी कर प्रतिबंध को challenge किया गया है।

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राज्य सरकार द्वारा रोक के आदेश के विरुद्ध संबंधित पक्ष ने मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी ये मामला उठाया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 3 जनवरी, 2022 को इसे वापस पटना हाई कोर्ट के समक्ष भेज दिया था। साथ ही साथ सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 8 सप्ताह के भीतर निपटारा करने को भी कहा था।

इन मामलों पर हाई कोर्ट में फिजिकल कोर्ट शुरू होने के बाद सुनवाई शुरू हुई थी।

अब इस बीच राज्य सरकार समेत अन्य सम्बंधित सभी पक्षों को अपना अपना पक्ष लिखित तौर पर कोर्ट के समक्ष दायर करने का निर्देश दिया गया था।

अब इन मामलों पर 7 अप्रैल,2022 को कोर्ट में फिर सुनवाई की जाएगी।

Patna High Court : राज्य में नारको टेस्ट की व्यवस्था नहीं रहने पर पटना हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में नारको टेस्ट की व्यवस्था नहीं रहने पर नाराजगी जाहिर की।जस्टिस संजीव कुमार शर्मा ने एक आपराधिक मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य के मुख्य सचिव से जवाबतलब किया है।कोर्ट ने उनसे जानना चाहा है आखिर किस कारण से बिहार जैसे राज्य में यह व्यवस्था नहीं है।

कोर्ट ने इसके पहले एफएसएल को यह निर्देश दिया था कि इस मामले के अपराधी की नारको टेस्ट कर उसका रिपोर्ट कोर्ट को दिया जाए। एफएसएल के डायरेक्टर की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बिहार में नारको टेस्ट करने की कोई व्यवस्था नहीं है।

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उनके द्वारा यह भी बताया गया कि नारको टेस्ट करने के लिए अलग से जो व्यवस्था और पदाधिकारियों की नियुक्ति करनी हैं, उसके लिए राज्य के मुख्य सचिव और गृह विभाग को पहले ही उनके द्वारा लिखा जा चुका है।

लेकिन अभी तक इस मामले में न तो किसी पदाधिकारी की नियुक्ति की गई है और ना ही नारको टेस्ट करने की व्यवस्था ही बिहार में की गई है । इसी मामले पर नाराजगी जाहिर करते हुए पटना हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव से 2 सप्ताह में जवाब तलब किया है.

कोर्ट ने अपर लोक अभियोजक झारखंडी उपाध्याय को कहा कि वह इस आदेश की जानकारी राज्य के मुख्य सचिव को दें, ताकि उनके द्वारा इस मामले में 2 सप्ताह के अंदर कोर्ट में जवाब दाखिल किया जा सके । इस मामले पर 2 सप्ताह के बाद सुनवाई फिर की जाएगी।

Patna High Court : गाँधी मैदान थाना में जब्त की गई सम्पत्ति समेत अन्य अवरोधो को हटाने के अदालती आदेश का पालन नहीं करने पर सख्त नाराजगी जाहिर की

पटना हाईकोर्ट ने गाँधी मैदान थाना में जब्त की गई सम्पत्ति समेत अन्य अवरोधो को हटाने के अदालती आदेश का पालन नहीं करने पर सख्त नाराजगी जाहिर की।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता शिल्पी केशरी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए डी जी पी,बिहार को 24 घंटों में गाँधी मैदान थाना से सभी अवरोध हटाने का आदेश दिया है।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को पटना हाईकोर्ट ने गाँधी मैदान थाना में जब्त की गई संपत्ति समेत सभी अवरोधों को दो सप्ताह में हटाना सुनिश्चित करने का आदेश दिया था।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने डी जी पी, बिहार के द्वारा दायर हलफनामे पर आपत्ति की।उन्होंने कोर्ट को बताया कि अब तक गाँधी मैदान थाना में जब्त की गई गाडियां और अन्य संपत्ति पड़ी हुई है।उन्होंने फोटो के जरिये अपने सबूत दिया।

उन्होंने बताया कि पटना के अगमकुआं,कंकड़बाग़,पत्रकार नगर समेत अन्य कई थानो की ऐसी ही स्थिति हैं।कोर्ट ने इस मामलें को काफी गम्भीरता से लेते हुए डी जी पी, बिहार को चौबीस घंटों के भीतर कार्रवाई कर कोर्ट के समक्ष कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।कोर्ट ने इस स्थान की खूबसूरती के कारण इसे पटना का गौरव और ज्वेल की संज्ञा दी थी।
इस मामलें पर अगली सुनवाई 6 अप्रैल,2022 को होगी।

Patna High Court : देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के स्मारकों की दयनीय हालत के सम्बन्ध में सुनवाई

पटना हाईकोर्ट में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के स्मारकों की दयनीय हालत के सम्बन्ध में सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ को अधिवक्ता विकास कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान बताया गया कि बिहार विद्यापीठ परिसर में सभी गैर कानूनी अतिक्रमण को हटा दिया गया।

कोर्ट को ये भी जानकारी दी गई कि बिहार विद्यापीठ के प्रबंधन का जिम्मा पटना के प्रमंडलीय आयुक्त को सौंपा गया है।कोर्ट को यह भी बताया गया कि जमाबंदी रद्द करने की प्रक्रिया चल रही है।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में डी एम, पटना को पटना स्थित बिहार विद्यापीठ के भूमि के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया था।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि बिहार विद्यापीठ के चारदीवारी के भीतर की भूमि राष्ट्र की धरोहर है, न कि किसी निजी संपत्ति।

कोर्ट ने डी एम, पटना को बिहार विद्यापीठ की भूमि का विस्तृत ब्यौरा देने का निर्देश दिया था।साथ ही यह भी बताने को कहा था कि बिहार विद्यापीठ की भूमि पर कितना अतिक्रमण है और इससे सम्बंधित कितने मामलें अदालतों में सुनवाई के लिए लंबित हैं।

इससे पहले कोर्ट को सीवान के डी एम ने बताया कि डा राजेंद्र प्रसाद के वंशजों ने जीरादेई में स्मारकों के विकास के लिए भूमि दान की है।साथ राज्य सरकार ने भी अपनी ओर से भूमि दान किया था।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता विकास कुमार ने कोर्ट को बताया कि पटना स्थित बांसघाट के सौंदर्यीकरण के लिए ढाई एकड़ भूमि ज़िला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

पिछली सुनवाई में वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने बताया कि कोर्ट ने ए एस आई के कोलकाता स्थित क्षेत्रीय निर्देश और पटना ए एस आई के अधीक्षक को कोर्ट ने जीरादेई जा कर विकास की संभावना पर विचार कर एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने पटना स्थित बिहार विद्यापीठ के प्रबंध समिति के कामकाज पर कोर्ट ने गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए पूछा कि क्यों नहीं इसके प्रबंधन का जिम्मा फिलहाल राज्य सरकार को दे दिया जाए।

साथ ही जीरादेई स्थित रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण के लिए रेलवे और राज्य सरकार ने सहमति दे दी।कोर्ट ने इस सम्बन्ध में रेलवे को आगे की कार्रवाई के लिए दो सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया था।


इस मामलें पर अगली सुनवाई 18 अप्रैल,2022 को होगी।

Patna High Court : बिहार ट्रक ऑनर एसोसिएशन व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई अधूरी रही

पटना हाई कोर्ट में बिहार ट्रक ऑनर एसोसिएशन व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई अधूरी रही। इन मामलों पर चीफ जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ कल भी सुनवाई जारी रखेंगे।

इन याचिकाओं में बिहार सरकार द्वारा 14 चक्कों के ट्रक के जरिये गिट्टी व बालू आदि की ढुलाई पर 16 दिसंबर, 2020 को ही एक अधिसूचना जारी कर प्रतिबंध लगाने के आदेश को challenge किया गया है। दिया गया था।

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राज्य सरकार द्वारा रोक के आदेश के विरुद्ध संबंधित पक्ष ने मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी ये मामला उठाया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 3 जनवरी, 2022 को इसे वापस पटना हाई कोर्ट के समक्ष भेज दिया है। साथ ही साथ सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 8 सप्ताह के भीतर निपटारा करने को भी कहा है।

इन मामलों पर हाई कोर्ट में अब 5 अप्रैल ,2022 को सुनवाई की जाएगी।। इस से पहले कोर्ट ने राज्य सरकार समेत अन्य सम्बंधित सभी पक्षों को अपना अपना पक्ष लिखित तौर पर कोर्ट के समक्ष दायर करने का निर्देश दिया था।

Patna High Court : राजीव रंजन सिंह की राष्ट्रीय राजमार्ग से सम्बंधित याचिका पर सुनवाई हुआ

पटना हाईकोर्ट ने राजीव रंजन सिंह की राष्ट्रीय राजमार्ग से सम्बंधित याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इस बात पर नाराजगी जाहिर किया कि हाजीपुर में आर ओ बी का निर्माण एक दशक बाद भी पूरा नहीं हुआ।

कोर्ट ने गंडक नदी पर पुल निर्माण कार्य पूरा करने के लिए पुल निर्माण कंपनी को छह से सात माह का समय दिया।साथ ही कहा कि निर्माण कार्य दोनों ओर हाजीपुर और छपरा से शुरू होना चाहिए।निर्माण कंपनी द्वारा इस पुल के निर्माण के लिए दस महीने की मोहलत मांगी गई,जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया।

याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वैशाली के डी एम से पूछा कि प्रशासन इस मामलें में क्या कर रहा था।कोर्ट ने उनसे जानना चाहा कि जनता की मुश्किलों को दूर करने के लिए उन्होंने क्या कार्रवाई की।

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वैशाली के जिलाधिकारी ने बताया कि हाजीपुर के रामाशीष चौक से बस स्टैंड नेटवर्क से हटा दिया गया है। साथ ही ये भी बताया कि रामाशीष चौक पर जाम का मुख्य कारण अंजानपीर चौक से आर ओ बी का नहीं बनना और दोनों साइड
सड़कों का खस्ताहाल होना।साथ ही जगह जगह मनमाने तरीके से स्पीड ब्रेकर का निर्माण किया जाना।

कंपनी के अधिवक्ता सिद्धार्थ प्रसाद ने बताया कि अजानपीर दोनों ओर की सड़कों को एक माह में मरम्मत और निर्माण कार्य पूरा कर सड़क को ठीक कर दिया जाएगा। साथ ही अजानपीर के आसपास अनावश्यक स्पीड ब्रेकर को भी हटा दिया जाएगा।

साथ ही निर्माण कार्य करने वाली कंपनी की ओर से बताया गया कि हाजीपुर में आर ओ बी बनाने का कार्य चल रहा है और दो माह में यह चालू हो जाएगा।
साथ ही एन एच ए आई की सहमति से हाई वॉल्टेज ट्रांसमीटर टावर स्थानांतरित करने का कार्य दो माह में पूरा हो जाएगा।

कोर्ट को बताया गया कि जहां ओवरब्रिज बनाना है ,लेकिन अब तक यह नहीं बन सका है। इतना ही नहीं, अभी एक ही लेन चालू है। दूसरे लेन का काम 12 वर्षों के बाद भी पूरा नहीं किया जा सका है। इस वजह से गाड़ियां नीचे से होकर जाती है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई अप्रैल,2022 के तीसरे सप्ताह में होगी।

Patna High Court : जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के विस्तार, विकास और भूमि अधिग्रहण मामले पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की

राज्य के पटना स्थित जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट,पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के विस्तार,विकास और भूमि अधिग्रहण व अन्य मुद्दों के मामले पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की। गौरव सिंह समेत अन्य की जनहित याचिकाओं पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

पटना के जयप्रकाश नारायण एयरपोर्ट के निर्देशक कोर्ट में स्वयम आज उपस्थित हो कर पटना और राज्य के अन्य एयरपोर्ट की स्थिति के सम्बन्ध में जानकारी दी।

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उन्होंने पटना एयरपोर्ट की समस्याओं को बताते हुए कहा कि हवाई जहाज लैंडिंग की काफी समस्या है।सामान्य रूप से रनवे की लम्बाई नौ हज़ार फीट होती हैं, जो कि पूर्णिया व दरभंगा में उपलब्ध है,जबकि पटना में रनवे की लम्बाई 68 सौ फीट हैं।

उन्होंने बताया कि एक ओर रेलवे लाइन है और दूसरी ओर सचिवालय हैं।उन्होंने कोर्ट को बताया कि रन वे की लम्बाई बढ़ाने के लिए सर्वे शुरू होगा।कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को यह जानकारी देने को कहा है कि बिहार के सटे राज्य झारखंड,बंगाल,उत्तर प्रदेश,ओडिशा,उत्तर पूर्व के राज्यों में कितने एयरपोर्ट हैं।

कोर्ट को राज्य के गया,पूर्णियां और अन्य एयरपोर्ट के विस्तार,विकास और भूमि अधिग्रहण से सम्बंधित समस्यायों के बारे में बताया गया।कोर्ट ने राज्य के एडवोकेट जनरल से कहा कि गया एयरपोर्ट के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए 268 करोड़ रुपए कोर्ट में जमा करा दे।सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद उसका निबटारा होगा।एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि इसके लिए राज्य सरकार से निर्देश की आवश्यकता होगी।

अधिवक्ता अर्चना शाही ने कोर्ट को बताया कि सम्बंधित केंद्रीय मंत्री ने राज्य सभा में बताया कि पटना एयरपोर्ट के विस्तार और विकास के 1260 करोड़ रुपए की राशि निर्गत किया गया।लेकिन अर्चना शाही ने बताया कि अब तक इस धनराशि का 32% खर्च किया गया है।

राज्य में पटना के जयप्रकाश नारायण अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के अलावा गया, मुजफ्फरपुर,दरभंगा,भागलपुर,फारबिसगंज , मुंगेर और रक्सौल एयरपोर्ट हैं।लेकिन इन एयरपोर्ट पर बहुत सारी आधुनिक सुविधाओं के अभाव व सुरक्षा की भी समस्या हैं।
कोर्ट कल इस मुद्दे पर आदेश पारित करेगा।

Patna High Court : राज्य में शराब तस्करी करने वाले गिरोह के सदस्यों पर मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत करवाई शुरू नही किये जाने पर नाराजगी व्यक्त की

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में शराब तस्करी करने वाले गिरोह के सदस्यों पर मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत करवाई शुरू नही किये जाने पर नाराजगी व्यक्त की।जस्टिस संदीप कुमार ने इस मामलें की सुनवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय के सयुंक्त निदेशक को 4 अप्रैल,2022 को तलब किया है।

कोर्ट ने गंगाराम की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।कोर्ट ने चार हज़ार लीटर से अधिक शराब की खेप पकड़े जाने के मामले में अभियुक्त गंगाराम ने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की।

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इसके पहले इस मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि सिर्फ शराब पहुंचाने वालों को ही क्यों पकड़ा जाता है ? जखीरा खड़ा करने वाले गिरोह को पुलिस क्यों नही पकड़ रही है।

इसी सिलसिले में कोर्ट ने आयकर विभाग के डायरेक्टर, अनुसन्धान एवं प्रवर्तन निदेशालय को पक्षकार बनाते हुए एक महीने पहले उन्हें आदेश दिया था कि शराब की तस्करी करने वाले गिरोह के सदस्यों की संपत्ति वगैरह की छानबीन करने की कार्यवाही शुरू करें।

इस मामलें पर 4 अप्रैल, 2022 को सुनवाई होगी।