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पटना हाईकोर्ट ने राज्य में अवैध रूप से चलने वाले ईंट भट्टे से होने वाले प्रदूषण के मामलें पर सुनवाई की

अनमोल कुमार की याचिका पर चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ ने करते हुए सख्त टिप्पणी की।

कोर्ट ने कहा कि आपने सभी 102 ईट भट्टों को बंद करा दिया,लेकिन आपके होते हुए इतनी बड़ी संख्या में ये ईट भट्टे चल कैसे रहे थे।बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर कोर्ट को बताया गया कि अवैध रूप से चल रहे 102 ईट भट्टे को बंद करा दिया गया।

साथ ही ये भी कोर्ट से ये भी कहा गया कि आगे अगर ऐसे
अवैध रूप से ईट भट्टे चालू पाये गए,तो उन्हें तत्काल बंद करा दिया जाएगा तथा उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एमिकस क्यूरी अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने कोर्ट को बताया कि राज्य में ईट भट्टे चलाने के क्रम में नियमों का खुला उल्लंघन किया गया।उन्होंने कहा कि बारिश के दिनों में तो ईट भट्टे ऐसे भी बंद ही रहते है।

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उन्होंने कहा कि इन ईट भट्टे से होने वाले प्रदूषण के कारण वातावरण पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता हैं।

इस मामलें पर फिर अगली सुनवाई 29 सितम्बर,2022 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में पुलिस द्वारा सही ढंग और स्तरीय जांच नहीं किये जाने के कारण अपराधियों के सजा से बच जाने के मामलें पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया

जस्टिस अश्विनि कुमार सिंह की खंडपीठ ने अधिवक्ता ओम प्रकाश की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने मामलें पर सुनवाई करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में अपराधियों के सजा पाने से बच जाने के कारण लोगों का आपराधिक न्याय व्यवस्था पर विश्वास कम होते जा रहा है।पुलिस अधिकारियों द्वारा किये जा रहे जांच में त्रुटियों और कमी के कारण अपराधियों को सजा से बच जाते है।

बिहार पुलिस एकेडमी के निदेशक ने कोर्ट को बताया कि पुलिस अधिकारियों को जांच और अन्य आपराधिक मामलों को सुलझाने की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाता है।उनका समय समय पर परीक्षा ली जाती हैं और उनके प्रगति का मूल्यांकन होता है।इसमें लगातार सुधार किया जा रहा हैं।

पुलिस आधुनकिकरण के ए डी जी के के सिंह ने कोर्ट को बताया कि पुलिस अधिकारियों के प्रशिक्षण और त्रुटियों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि संसाधनों की कमी के कारण भी समस्याएं हैं।फॉरेंसिक लेबोरेट्री में आवश्यक सुधार और सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत हैं।एक फॉरेंसिक लैब पटना में है।दो क्षेत्रीय फॉरेंसिक लैब मुजफ्फरपुर और भागलपुर में भी है।दरभंगा में फॉरेंसिक लैब की स्थापना होने जा रहा है।

कोर्ट ने कहा कि आपराधिक न्याय व्यवस्था को प्रभावी ढंग से जारी रखने के लिए पुलिसकर्मियों सही ढंग से प्रशिक्षित करने की जरूरत हैं।साथ ही उनकी जांच में जिम्मेदारी तय करना भी आवश्यक है।

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बिहार सरकार के एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कहा कि आपराधिक न्याय व्यवस्था को सफल बनाने के लिए जरूरी है कि अपराधियों को सजा देने का अनुपात बढ़े।पुलिस कि संवेदनशील बनाने के साथ ही उनकी कार्यक्षमता और कुशलता बढ़ाने के समय समय पर वर्कशॉप का आयोजन किया जाए

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को बताने को कहा कि पुलिस के जांच की स्तर सुधारने के लिए क्या हो रहा हैं।कोर्ट ने राज्य पुलिस द्वारा सही ढंग, वैज्ञानिक और स्तरीय जांच नहीं करने के कारण अपराधियों को सजा नहीं मिलने पर गहरी चिंता जाहिर की थी।

उन्होंने कहा था कि जहां पुलिस अधिकारियों को सही ढंग से आपराधिक मामलों की जांच के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराया जाना जरूरी है।सही तरीके से जांच करने,ठोस सबूत और पक्के गवाह उपलब्ध कराने पर ही अपराधियों को कोर्ट द्वारा सजा दी जा सकेगी।

कोर्ट ने कहा था कि जबतक अपराधियों को सख्त सजा नहीं मिलेगी,कोई भी सुरक्षित नहीं रह सकता हैं।इसके लिए आवश्यक है कि पुलिस के जांच आधुनिक,स्तरीय और वैज्ञानिक हो,जिसमें अपराधियों को सजा मिलना सुनिश्चित हो।

पटना हाईकोर्ट ने शराबबन्दी कानून के तहत जब्त गाड़ियों को छुड़ाने हेतु बढ़ रहे रिट याचिकाओं की बढ़ती संख्या पर नाराजगी जाहिर की

चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

कोर्ट ने इस स्थिति पर सख़्त टिप्पणी करते हुए राज्य के उत्पाद आयुक्त को निर्देश दिया कि वो एक हफ्ते मे कोर्ट को विस्तृत आंकड़े दे, जिसमे ये जानकारियां हो कि पिछले तीन माह मे राज्य मे कितने लोगों को शराबबन्दी कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है।

साथ ही कोर्ट को यह भी बताना है की हरेक ज़िलों मे ज़ब्त हुई गाड़ियों के जब्ती हेतु कितने मामले लम्बित पड़े हैं ।कोर्ट ने यूनाइटेड स्पिरिट्स की रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये आदेश पारित किया।

कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि महज देढ़ लीटर शराब पाए जाने पर पूरे गाड़ी को सालों भर जब्त कर रखा जाना न्यायसंगत है क्या। साथ ही उसे छुड़ाने हेतु दायर आवेदन को कलेक्टर एक घिसे पिटे ढंग से रद्द कर देते है।

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कलेक्टर के आदेश को ही अपीलीय और रिविजिनल प्राधिकार बिना विवेक का इस्तमाल किये और घिसे पिटे तरीके से संपुष्ट कर देते हैं।

अपील और रिविजन के आदेश समान ही दिखते है , कलेक्टर के आदेश से ऐसा मेल खाते हैं। जो त्रुटि कलेक्टर के आदेश मे दिखती है, वही गलती अपील व रिविजन प्राधिकार के आदेश में भी नजर आती है।
मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी।

पटना हाईकोर्ट में बिहार के गर्भाशय घोटाले के मामलें पर सुनवाई अब 20 सितम्बर,2022 को होगी

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव को अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा हलफनामा पर दायर करने का निर्देश दिया था।जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह की खंडपीठ ने वेटरन फोरम की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

कोर्ट ने मुख्य सचिव को ये भी बताने को कहा था कि आगे इस मामलें में क्या कार्रवाई करने की योजना है। कोर्ट में उपस्थित एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि इस जनहित याचिका में दिए गए तथ्य वास्तविक नहीं हैं।

उन्होंने बताया था कि बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष साढ़े चार सौ इस तरह के मामलें आए थे। राज्य सरकार के जांच के बाद नौ जिलों में गर्भाशय निकाले जाने के सात सौ दो मामलें आए थे।

इन मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई और आगे की कार्रवाई चल रही है।उन्होंने कोर्ट को बताया था कि पीड़ित महिलाओं को क्षतिपूर्ति राज्य सरकार ने पचास पचास हजार रुपये पहले ही दे दिए।इसके बाद बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने आदेश दिया था कि यह राशि बढ़ा कर डेढ़ और ढाई लाख रुपए बतौर क्षतिपूर्ति दिए जाए।

महाधिवक्ता ललित किशोर ने कोर्ट को बताया था कि क्षतिपूर्ति की राशि देने के लिए राज्य सरकार ने 5.89 करोड़ रुपए निर्गत कर दिए गए है।

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कोर्ट ने राज्य सरकार से जानना चाहा कि किन किन धाराओं के दोषियों के विरुद्ध मामलें दर्ज किये गए।मानव शरीर से बिना सहमति के अंग निकाला जाना गंभीर अपराध है।इसलिए उनके विरुद्ध नियमों के तहत ही धाराएं लगानी जानी चाहिए।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया था कि सबसे पहले ये मामला मानवाधिकार आयोग के समक्ष 2012 में लाया गया था।2017 में पटना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका वेटरन फोरम ने दायर किया गया था।

इसमें ये आरोप लगाया गया था कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का गलत लाभ उठाने के लिए बिहार के विभिन्न अस्पतालों/डॉक्टरों द्वारा बड़ी तादाद में बगैर महिलाओं की सहमति के ऑपरेशन कर गर्भाशय निकाल लिए गए थे।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 20सितम्बर,2022 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने मधुबनी के एक अंचल अधिकारी पर कड़ा रुख अपनाते हुए अविलंब ससपेंड करने का निर्देश दिया

पटना हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में मधुबनी के एक अंचल अधिकारी पर कड़ा रुख अपनाते हुए मधुबनी के जिलाधिकारी को उन्हें अविलंब ससपेंड करने का निर्देश दिया है। जस्टिस मोहित कुमार शाह ने गोविंद नाथ झा की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया ।

यह मामला लखनौर के अंचल अधिकारी द्वारा ग़ैरक़ानूनी रूप अतिक्रमण केस चला कर याचिकाकर्ता पर नोटिस जारी करने से संबंधित है । कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मधुबनी के ज़िलाधिकारी को संबंधित अंचल अधिकारी के खिलाफ जांच करने और उचित विभागीय कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया।

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साथ-साथ उसे तत्काल निलंबित कर इस हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को 2 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, जिसमें विफल रहने पर जिलाधिकारी के वेतन पर रोक लगा दी जाएगी।

बार कॉउंसिल ऑफ इंडिया व बिहार राज्य बार कॉउंसिल द्वारा 24 सितम्बर,2022 को पटना में राष्ट्रीय स्तर पर सेमिनार का आयोजन किया गया है

पटना । बार कॉउंसिल ऑफ इंडिया व बिहार राज्य बार कॉउंसिल द्वारा 24 सितम्बर,2022 को पटना के बापू सभागार में राष्ट्रीय स्तर पर सेमिनार का आयोजन किया गया है ।इसमें भारत के चीफ जस्टिस यू यू ललित,केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू,बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा समेत बड़ी संख्या में गणमान्य अतिथिगण इसमें भाग लेंगे।

22 सितम्बर,2022 को डेढ़ बजे दिन में बार कॉउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा द्वारा प्रेस वार्ता में पूरी जानकारी दी जाएगी।आप सबसे अनुरोध हैं कि अपने प्रतिनिधि व कैमरामैन को भेजने का कष्ट करेंगे।धन्यवाद।

प्रेस कॉन्फ्रेंस स्थल …. बिहार राज्य बार कॉउंसिल भवन

22 सितम्बर,2022 को डेढ़ बजे दिन में बार कॉउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष श्री मनन कुमार मिश्रा सम्बोधित करेंगे।

पटना हाईकोर्ट ने पटना के दानापुर स्थित बीएस कॉलेज में बुनियादी सुविधाएं मुहैया नहीं कराए जाने के मामले पर सुनवाई की

सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी कोर्ट में उपस्थित थे। चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ ने संजय करोल की खंडपीठ ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी से जानना चाहा कि अब तक उक्त कॉलेज की फेंसिंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं में संतोषजनक प्रगति क्यों नहीं हुई ?

इस पर कोर्ट में उपस्थित एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने बताया कि कॉलेज में छात्राओं के शौचालय बनाने का काम चल रहा है और फेंसिंग के लिए राशि निर्धारित करने के लिए स्क्रीनिंग कमिटी विचार कर रही है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जल्द ही इन कार्यों को पूरा कर लिया जाएगा ।

उन्होंने बताया कि राज्य में ऐसे कॉलेजों की संख्या 270 से ज्यादा है, ऐसे में बजट में आवंटित राशि के अनुरूप व्यय का अनुपात काफ़ी ज़्यादा है।

इस पर कोर्ट ने शिक्षा विभाग के चीफ सेक्रेटरी को राज्य के कॉलेजो में बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने हेतु रूपरेखा तैयार कर कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है । कोर्ट ने बीएस कॉलेज में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु काम की प्रगति में तेज़ी लाने का भी निर्देश दिया है ।

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सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी अधिवक्ता स्मृति सिंह ने कोर्ट को जानकारी दी कि कॉलेज की चहारदीवारी बनाने हेतु केवल राशि का आकलन किया गया है, जो कि 1 करोड़ 10 लाख है । याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सिद्धार्थ प्रसाद ने खंडपीठ को बताया कि क़ालेज़ में बुनियादी सुविधाओं उपलब्ध कराये जाने के लिए अभी तक कोई भी राशि आवंटित नहीं कराई गई है।

कालेज में बुनियादी सुविधाएँ नहीं होने से छात्राओं को काफ़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। छात्राओं को सेनेटरी नैपकिन मुहैया कराने के लिए कॉलेज परिसर में वेंडिंग मशीन भी लगाया जाना चाहिए।

इस मामले की अगली सुनवाई 13अक्टूबर,2022 को होगी ।

पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में सरकारी ठेकेदारों को बड़ी राहत देते हुए 6 महीने के भीतर उनके निर्विवाद दावों के करने हेतु दिशानिर्देश जारी किया

चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ ने इस मामलें निर्णय देते हुए इस निर्णय की प्रति को अविलम्ब राज्य के मुख्य सचिव को उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकारी अफ़सर केवल उन गिने चुने ठेकेदारों के ही बकाए बिल का भुगतान करते हैं, जिनमे उनका स्वार्थ निहित है।

कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि किसी भी विभाग के समक्ष सरकारी ठेकेदारों का दावा यदि बनता है, तो उस दावे या अभ्यावेदन का निपटारा उस संबंधित विभाग को छह माह के भीतर करना होगा।कोर्ट ने रघोजी हाउस ऑफ़ डिस्ट्रीब्यूशन की याचिका पर सुनवाई की।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रत्युष प्रताप सिंह ने खंडपीठ को बताया कि याचिकाकर्ता को 2017 में सोनपुर मेले में टेंट इत्यादि लगाने का कार्य राज्य सरकार द्वारा सौंपा गया था। लेकिन पाँच वर्ष बीत जाने के बाद भी याचिकाकर्ता के 21 लाख रुपये बकाए का भुगतान राज्य सरकार नहीं कर रही है।

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इसके लिए याचिकाकर्ता ने कई बार विभाग को अभ्यावेदन दिया ,लेकिन उनके द्वारा न तो कोई जवाब दिया गया और न तो दावे के का निपटारा किया गया ।इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह सुनिश्चित करे कि जिन मामलों निर्विवाद दावे प्रस्तुत किए गए हैं,उसका निपटारा भी शीघ्र किए जाने हेतु संबंधित विभागों को आदेश पारित करना चाहिए।

ऐसा निर्णय लेने के लिए अधिकृत व्यक्ति को उचित अवधि के भीतर आवश्यक कार्य करने के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए।

जो सामान्य रूप से, जब तक कि कानून अन्यथा निर्धारित न करें, ऐसे दावे की प्राप्ति की तारीख से छह महीने से अधिक नहीं होना चाहिए । कोर्ट ने अपने फ़ैसले में बिहार लिटिगेशन पॉलिसी को लागू करने पर भी जोर दिया है।

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना, 15 सितंबर 2022। पटना हाईकोर्ट में आज इन मामलों की होगी सुनवाई :

1.पटना हाई कोर्ट में पटना के दानापुर स्थित बीएस कॉलेज में बुनियादी सुविधाएं मुहैया नहीं कराए जाने के मामले पर सुनवाई की जाएगी।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए शिक्षा विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को तलब किया था। चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ द्वारा बिंदेश्वर सिंह कॉलेज में बुनियादी सुविधाएँ के अभाव के मामले पर सुनवाई की जा रही है।

2. पटना हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस नरेश कुमार सिन्हा को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए 15 सितंबर, 2022 को पटना हाई कोर्ट में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है। सभा का आयोजन पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल के चैम्बर में दोपहर सवा बजे किया जाएगा।

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3. पटना हाईकोर्ट में राज्य के पूर्व एवं वर्तमान सांसदों, विधायकों के विरुद्ध लंबित आपराधिक मुकदमों से सम्बंधित मामलों पर सुनवाई की जाएगी। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ द्वारा इन मामलों पर सुनवाई की जा रही है।

राज्य में सांप्रदायिक दंगे,चुनावी,जातिगत और सामूहिक हिंसा के दौरान हुए संपत्ति नुकसान का राज्य सरकार द्वारा उचित मुआवजा देने के मामलें पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने आफताब आलम की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य के गृह विभाग के प्रधान सचिव को अभ्यावेदन देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने मामलें को निष्पादित कर दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अलका वर्मा ने कोर्ट को बताया कि इस तरह की हिंसा में संपत्ति की नुकसान होने पर राज्य सरकार ने अधिकतम मुआवजा की राशि मात्र ढाई लाख रुपये रखी है।राज्य सरकार ने 10 सितम्बर, 2013 को एक प्रस्ताव पारित कर ये निर्णय लिया।

अधिवक्ता वर्मा ने कोर्ट को बताया कि इस प्रकार की हिंसा में होने वाली संपत्ति की नुकसान की राशि काफी बड़ी होती हैं।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा मुआवजा की अधिकतम राशि ढाई लाख रुपये रखा जाना अपर्याप्त हैं।

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उन्होंने कोर्ट को बताया कि नरीमन कमिटी के अनुशंसा के अनुसार इस तरह की हिंसा में संपत्ति के हुए नुकसान के आकलन के बाद उन्हें पूरी राशि दी जानी चाहिए।सुप्रीम कोर्ट ने इस सम्बन्ध में स्पष्ट निर्देश 2009 में ही दिया जा चुका है।

इस तरह की दंगे,हिंसा और संपत्ति की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी होती हैं। अगर सरकार द्वारा संपत्ति की रक्षा नहीं हो पाती है, तो प्रभावित पक्षों को पूरी राशि मुआवजा के रूप देना चाहिए, न खानापूरी होनी चाहिये।

पटना हाईकोर्ट में राज्य के पूर्व एवं वर्तमान सांसदों, विधायकों के विरुद्ध लंबित आपराधिक मुकदमों से सम्बंधित मामलों पर सुनवाई कल तक टली

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ द्वारा इस मामलें पर सुनवाई की जा रही है।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट को महाधिवक्ता ललित किशोर ने बताया कि वर्तमान और पूर्व एमपी व एमएलए के विरुद्ध 78 आपराधिक मामलों में 12 मामलों पर आरोप पत्र और 4 मामलों पर अंतिम प्रपत्र दायर किया जा चुका है।उन्होंने कोर्ट को बताया था कि 280 मामलों में कुल 481 गवाहों का परिक्षण किया जा चुका है |

पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ललित किशोर ने बताया था कि वर्तमान व पूर्व एमपी और एमएलए के विरुद्ध कुल 598 आपराधिक मुकदमें लंबित है, जिसमें अधिकतर केस में अनुसंधान पूरा हो गया है।

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लगभग 78 आपराधिक मुकदमों में अनुसंधान लंबित है। इस मामले पर अगली सुनवाई 15 सितम्बर,2022 को होगी ।

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना, 14 सितंबर 2022। पटना हाईकोर्ट में आज इन मामलों की होगी सुनवाई :

1.पटना हाईकोर्ट में थर्ड जेंडर के कैदियों को जेल में रखे जाने की व्यवस्था के मामलें से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई की जाएगी।लॉ फाउंडेशन की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ सुनवाई कर रही हैं।

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2.पटना हाईकोर्ट ने राज्य के पूर्व एवं वर्तमान सांसदों, विधायकों के विरुद्ध लंबित आपराधिक मुकदमों से सम्बंधित मामलों पर सुनवाई की जाएगी। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ द्वारा इन मामलों पर सुनवाई की जाएगी।

पिछली सुनवाई में एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कोर्ट को बताया था कि वर्तमान और पूर्व एम पी और एम एल ए के विरुद्ध 78 आपराधिक मामलों में से 12 मामलों पर आरोपपत्र और 4 मामलों में अंतिम प्रपत्र दायर किया जा चुका है।

पटना हाईकोर्ट में पटना के जय प्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा समेत राज्य के अन्य हवाईअड्डों के विस्तार और विकास के मामले पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने केंद्र और राज्य के सभी हवाईअड्डों की समस्यायों,विकास और विस्तार के मामलें पर अगली सुनवाई में जवाब देने का निर्देश दिया है।

पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बिहार के विभिन्न हवाईअड्डों के विकास और विस्तार से जुड़ी समस्यायों को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।इनमेंं भूमि से सम्बंधित काफी मामलें थे।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को राज्य में ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट बनाए जाने के मामलें में स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने का निर्देश दिया था।ये जनहित याचिकाएं गौरव सिंह व अन्य द्वारा की गई है।

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पूर्व की सुनवाई में पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कोर्ट को जानकारी देते हुए कहा था कि कई राज्यों में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि बिहार में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाए जाने की आवश्यकता है।

याचिकाकर्ता की अधिवक्ता अर्चना शाही ने बताया था कि गया एयरपोर्ट के विकास के लिए एक बड़ी धनराशि आवंटित की गई है।लेकिन अभी तक गया एयरपोर्ट का विकास कार्य प्रारम्भ नहीं हुआ है।

कोर्ट को बताया गया था कि राज्य में पटना के जयप्रकाश नारायण अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के अलावा गया, मुजफ्फरपुर,दरभंगा,भागलपुर व अन्य हवाईअड्डे हैं।लेकिन इन एयरपोर्ट पर बहुत सारी आधुनिक सुविधाओं के अभाव एवं सुरक्षा की समस्याएं भी हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 26 सितम्बर,2022, को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने झंझारपुर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशंस जज अविनाश कुमार – I पर किये गए कथित आक्रमण और मारपीट के मामले की सुनवाई की

जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि दर्ज एफआईआर के सम्बंधित क्लोजर रिपोर्ट को सम्बंधित कोर्ट ने स्वीकार कर लिया हैं।

पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि दर्ज एफआईआर का क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत किया जा चुका हैं।हाई कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए 5 सितम्बर,2022 तक सम्बंधित कोर्ट को अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया था।

जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई करने के बाद मामलें को निष्पादित कर दिया।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने
निचली अदालतों में जजों की सुरक्षा पर विचार करने के लिए चीफ जस्टिस से एक कमिटी गठित करने का आग्रह किया गया था।

पिछली सुनवाई कोर्ट को बताया गया था कि डी जी पी, बिहार ने ए डी जे अविनाश कुमार के विरुद्ध दायर प्राथमिकी के कार्रवाई पर रोक लगा दिया था।

पिछली सुनवाई में ही कोर्ट ने राज्य सरकार को अविनाश कुमार के विरुद्ध दायर एफ आई आर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया।

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार किसी न्यायिक पदाधिकारी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के पहले चीफ जस्टिस की अनुमति जरुरी होती हैं।इस मामलें में इस प्रक्रिया का पालन गलतफहमी में नहीं किया जा सका।

मधुबनी के प्रभारी डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज द्वारा अभूतपूर्व और चौंका देने वाली इस घटना के संबंध में भेजे गए रिपोर्ट के मद्देनजर राजन गुप्ता की खंडपीठ ने 18 नवंबर, 2021 को सुनवाई की थी। ज़िला जज ,मधुबनी के द्वारा भेजे गए रिपोर्ट के मुताबिक घटना के दिन तकरीबन 2 बजे दिन में एस एच ओ गोपाल कृष्ण और घोघरडीहा के पुलिस सब इंस्पेक्टर अभिमन्यु कुमार शर्मा ने जज अविनाश के चैम्बर में जबरन घुसकर गाली दिया था।

उनके द्वारा विरोध किये जाने पर दोनों पुलिस अधिकारियों ने दुर्व्यवहार करने और हाथापाई किया था। इतना ही नहीं, दोनों पुलिस अधिकारियों ने उनपर हमला किया और मारपीट किया है।साथ ही अपना सर्विस रिवॉल्वर भी निकाल लिया था।

कोर्ट ने इस मामलें पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के मामलें को समाप्त करते हुए निष्पादित कर दिया।

बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को की गई कार्रवाई का ब्यौरा देने के लिए दो सप्ताह का मोहलत दिया

पटना, 12 सितंबर 2022। पटना हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने आकांक्षा मालवीय की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर राज्य सरकार को की गई कार्रवाई का ब्यौरा देने के लिए दो सप्ताह का मोहलत दिया है।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को पूरी जानकारी देने को कहा था। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवा में क्या क्या कमियों के सम्बन्ध में ब्यौरा देने को कहा था। साथ ही इसमें सुधारने के उपाय पर सलाह देने को कहा।

याचिकाकर्ता की अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने बताया कि नेशनल मेन्टल हेल्थ प्रोग्राम ही के अंतर्गत राज्य के 38 जिलों में डिस्ट्रिक्ट मेन्टल हेल्थ प्रोग्राम चल रहा हैं। लेकिन इसमें स्टाफ की संख्या नाकाफी ही है। हर जिले में सात सात स्टाफ होने चाहिए।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का दायित्व है कि वह मेन्टल हेल्थ केयर एक्ट के तहत कानून बनाए।साथ ही इसके लिए मूलभूत सुविधाएं और फंड उपलब्ध कराए।लेकिन अबतक कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।

कोर्ट को ये भी बताया गया था कि सेन्टर ऑफ एक्सलेंस के तहत हर राज्य में मानसिक रोग के अध्ययन और ईलाज के लिए कॉलेज है।लेकिन बिहार ही एक ऐसा राज्य हैं,जहां मानसिक रोग के अध्ययन और ईलाज के लिए कोई कालेज नहीं है।जबकि प्रावधानों के तहत राज्य सरकार का ये दायित्व हैं।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि केंद्र सरकार की ओर से दिए जाने वाले फंड में कमी आयी है,क्योंकि फंड का राज्य द्वारा पूरा उपयोग नहीं हो रहा था।

पहले की सुनवाई में याचिकाकर्ता की अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने कोर्ट को बताया कि बिहार की आबादी लगभग बारह करोड़ हैं।उसकी तुलना में राज्य में मानसिक स्वास्थ्य के लिए बुनियादी सुविधाएँ नहीं के बराबर है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 27 सितम्बर,2022 को होगी।

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना, 12 सितंबर 2022। पटना हाईकोर्ट में आज इन मामलों की होगी सुनवाई :

1. पटना हाईकोर्ट ने बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई की जाएगी।कोर्ट ने इस मामलें सुनवाई करते हुए पिछली सुनवाई में राज्य सरकार को प्रगति रिपोर्ट दो सप्ताह में देने का निर्देश दिया था।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ आकांक्षा मालवीय की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

2. हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता के साथ हाथापाई एवं दुर्व्यवहार किए जाने के मामले पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की जाएगी।पिछली सुनवाई में जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ ने इस मामलें को गम्भीरता से लेते हुए शास्त्री नगर थाना के पुलिस कर्मियों को नोटिस जारी किया है।

इसके साथ साथ कोर्ट ने थाने की सीसीटीवी फुटेज को भी सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था ।

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3. पटना हाईकोर्ट में झंझारपुर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशंस जज अविनाश कुमार – I पर किये गए कथित आक्रमण और मारपीट के मामले की सुनवाई की जाएगी।पिछली सुनवाई मै जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि डी जी पी, बिहार ने ए डी जे अविनाश कुमार के विरुद्ध दायर प्राथमिकी के कार्रवाई पर रोक लगा दिया हैं।

4. पटना हाईकोर्ट में राज्य के पटना स्थित जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट,पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के मामले सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ द्वारा गौरव कुमार सिंह व अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की जा रही हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के नोडल अधिकारी क तलब किया था।साथ ही पटना एयरपोर्ट के पूर्व और् निर्देशक को भी पिछली सुनवाई में तलब किया था।

पटना हाईकोर्ट ने मोटर व्हीकल इन्स्पेक्टर के नियुक्ति के लिए आयोजित परीक्षा में बरती गई अनियमितता के मामलें पर सुनवाई की

पटना, 09 सितंबर 2022। चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ ने विनोद कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और बिहार लोक सेवा आयोग से जवाबतलब किया है।

याचिकाकर्ता की ओर से बहस करते हुए अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि मोटर व्हीकल इन्स्पेक्टर के 90 पदों पर बहाली के लिए बीपीएससी ने 2020 में विज्ञापन प्रकाशित किया। 5 और 6 मार्च,2022 को इन पदों पर बहाली के लिए परीक्षा आयोजित किया गया।

पटना के शास्त्रीनगर राजकीय बालिका उच्च विद्यालय के परीक्षा केंद्र के एक ही रूम में 28 उमीदवारो को सीट आवंटित किया गया।इन 28 लड़कियों में से 24 परीक्षा में एक सीरियल से सफल घोषित हुई।

अधिवक्ता दीनू कुमार ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि बीपीएससी,सरकारी अधिकारियों और उम्मीदवारों की मिलीभगत से इतने बड़े पैमाने पर धांधली और भ्रष्टाचार हुआ है।

उन्होंने बताया कि जब इस गड़बड़ी और धांधली का समाचार समाचारपत्रों में प्रकाशित हुआ,तो किसी तरह की जांच और कार्रवाई नहीं की गई।सरकार,बीपीएससी, निगरानी और आर्थिक अपराध ईकाई ने कोई कार्रवाई नहीं की।

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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि इस सम्बन्ध में जो अभ्यावेदन 9 अगस्त,2022 को दिया था।लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इस जनहित याचिका में ये माँग की गई कि इस परीक्षा को रद्द कर मोटर व्हीकल इन्स्पेक्टर की बहाली के लिए फिर से पारदर्शी और सही ढंग से परीक्षा आयोजित की जाए।इस परिणाम के आधार इनकी नियुक्ति हो।

उन्होंने बताया कि 67वी बीपीएससी के प्रारंभिक परीक्षा में इसी तरह के अनियमितता के मामलें राज्य सरकार ने परीक्षा रद्द कर नए सिरे से परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया था।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 14 अक्टूबर,2022 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के अंतर्गत कालेजों द्वारा यूजीसी को उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं देने के मामलें पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए यूजीसी को जो भी उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए गए है, उनकी जांच कर कोर्ट में अगली सुनवाई में रिपोर्ट दे।

ये जनहित याचिका वेटरन फोरम ने दायर की हैं।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि जो धनराशि कालेजों को दी जाती है,इसकी जिम्मेदारी किसी के द्वारा नहीं लेना गंभीर मामला है।कोर्ट ने सभी विश्वविद्यालयों के वीसी और यूजीसी को हलफनामा दायर कर पूरी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने सभी विश्वविद्यालयों को दो दिनों के भीतर उपयोगिता प्रमाण पत्र यूजीसी के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।कोर्ट ने कहा था कि यूजीसी उसके बाद एक सप्ताह में कार्रवाई करेगा।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रितिका रानी ने कोर्ट को बताया कि राज्य में अंगीभूत और सम्बद्धता प्राप्त कालेजों की संख्या 325 है।इन कालेजों को काफी पहले यूजीसी ने जो अनुदान दिया था, उसका बहुत सारे मामलों में अबतक उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं प्रस्तुत किया गया है।

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उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य के विभिन्न कालेजों द्वारा 124 करोड़ रुपए का उपयोगिता प्रमाण पत्र यूजीसी को प्रस्तुत नहीं किया गया है।कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यदि कालेजों द्वारा दो दिनों के भीतर उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं जमा किये गए, तो सम्बंधित वीसी का वेतन रोक दिया जाएगा।

कोर्ट ने ये भी स्पष्ट कर दिया था कि कालेजों द्वारा निर्धारित परफॉर्मा पर उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिए गए, तो इसकी जांच कोर्ट कमिश्नर से कराई जा सकती हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

पटना नगर निगम के कर्मचारी संघो की कई दिनों से चल रहे हड़ताल मामलें पर सुनवाई पटना हाईकोर्ट में हुई

पटना हाईकोर्ट में पटना नगर निगम के कर्मचारी संघो ने कई दिनों से चल रहे हड़ताल के मामलें पर सुनवाई की गई।चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ ने इस मामलें की सुनवाई की।

निगमकर्मी कर्मचारी संघों की ओर से वरीय अधिवक्ता योगेश चन्द्र वर्मा ने कोर्ट को जानकारी दी कि कल ही संघ के पदाधिकारियों ने कोर्ट के निर्देश के आलोक में हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया।

सीनियर एडवोकेट विध्यांचल सिंह ने एक याचिका हाईकोर्ट में दायर कर निगमकर्मियों के हड़ताल से उत्पन्न स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित किया।उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस हड़ताल के कारण न सिर्फ पूरे शहर में गन्दगी का अम्बार लगा है, बल्कि आम आदमी के स्वास्थ्य भी खतरे में हैं।

पिछली सुनवाई मे कोर्ट ने निगमकर्मियों को तत्काल हड़ताल समाप्त करने का निर्देश दिया था।साथ ही सम्बंधित अधिकारियों को उनके साथ बैठक कर उनके न्यायसंगत मांगों पर विचार विमर्श करने को कहा।

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संघो के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि उनके मांगों पर कोई विचार विमर्श नहीं किया गया।कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।आज कोर्ट में एडवोकेट जनरल ने कहा कि वे कर्मचारियों और सरकार के बीच सकारात्मक और प्रभावी वार्ता कराने में सहयोग करेंगे।

इस मामलें की सुनवाई अगले माह की जाएगी।

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना, 07 सितंबर 2022। पटना हाईकोर्ट में आज इन मामलों की होगी सुनवाई :

1.पटना हाईकोर्ट में राज्य के पुलिस द्वारा सही ढंग और स्तरीय जांच नहीं किये जाने के कारण अपराधियों को सजा से बच जाने के मामलें पर सुनवाई होगी।जस्टिस अश्विनि कुमार सिंह की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई कर रही है।पूर्व में कोर्ट ने सुनवाई करते राज्य सरकार को बताने को कहा कि पुलिस के जांच की स्तर सुधारने के लिए क्या हो रहा हैं।

2. पटना हाई कोर्ट में पटना नगर निगम में चल रही सफाई कर्मियों की हड़ताल से सम्बंधित याचिका पर आज सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ द्वारा इस मामलें पर सुनवाई की जा रही है।

निगमकर्मियों के संघों की ओर से वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने कल ही जानकारी दी कि निगमकर्मियों के संघ द्वारा हाईकोर्ट के रुख को देखते हुए हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया है।

3. पटना हाईकोर्ट में बिहार के गर्भाशय घोटाले के मामलें पर सुनवाई की जाएगी।इससे पूर्व कोर्ट ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के मुख्य सचिव को इस मामलें में अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा तलब किया था।जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह की खंडपीठ वेटरन फोरम की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

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4. पटना हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता कन्हैया प्रसाद सिंह के निधन पर पटना हाई कोर्ट में आज शोक सभा आयोजित की गई हैं।

पटना हाई कोर्ट के जज,अधिवक्ता व अधिवक्ता संघ के पदाधिकारीगण उपस्थित रहेंगे। चीफ जस्टिस के कोर्ट रूम में साढ़े ग्यारह बजे सुबह शोक सभा का आयोजन किया गया है। उसके बाद हाई कोर्ट के सभी न्यायिक कार्य स्थगित हो जायेंगे।

पटना हाईकोर्ट ने गया के अनुग्रह नारायण लॉ कॉलेज और बक्सर के जननायक कर्पूरी ठाकुर लॉ कॉलेज को सत्र 2023-24 में छात्रों का एडमिशन लेने की अनुमति दे दी

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने कुणाल कौशल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अगर कालेज बीसीआई द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करता है, तभी छात्रों का एडमिशन होगा।

कोर्ट ने इन कालेजों को बीसीआई के समक्ष निरीक्षण हेतु आवेदन करने को कहा।यदि बीसीआई कालेजों की निर्धारित मानकों को पूरा करता है,तभी उसे कालेज चालू करने व छात्रों के एडमिशन की अनुमति प्रदान किया जाएगा।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने गया के अनुग्रह नारायण कालेज और बक्सर के जननायक कर्पूरी ठाकुर लॉ कॉलेज के सम्बन्ध में बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया से जवाब माँगा था।आज बीसीआई ने इस सम्बन्ध में कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत किया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि राज्य के सरकारी और निजी लॉ कालेजों की स्थिति में बहुत सुधार नहीं हुआ है।बीसीआई के निरीक्षण के बाद भी बहुत सारे कालेज निर्धारित मानकों को नहीं पूरा कर रहे है ।

उन्होंने इन कालेजों की जांच स्वतन्त्र एजेंसी से कराने का कोर्ट से अनुरोध किया।कोर्ट ने कहा कि अगर निर्धारित अवधि में इन कालेजों की स्थिति में सुधार नही किया जाता, तो जांच कराई जा सकती हैं।

इससे पूर्व कोर्ट ने बीसीआई के अनुमति/ अनापत्ति प्रमाण 2021- 22 की सत्र के लिए राज्य के 17 लॉ कालेजों को दाखिले के लिए अनुमति दी थी।

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हाई कोर्ट ने पिछले 23 मार्च 2021 के उस आदेश , जिसके अंतर्गत बिहार के सभी 27 सरकारी व निजी लॉ कॉलेजों में नए दाखिले पर रोक लगा दी गयी थी। इस आदेश में आंशिक संशोधन किया गया। इसके तहत इन 17 कॉलेजों में सशर्त दाखिले की मंजूरी दे दी ।

हाई कोर्ट ने साफ किया कि नया दाखिला सिर्फ 2021-22 के लिए ही होगा। अगले साल के सत्र के लिए बार काउंसिल से फिर मंजूरी लेनी होगी । पिछली सुनवाइयों में कोर्ट ने इन कालेजों का निरीक्षण कर बार काउंसिल ऑफ इंडिया को तीन सप्ताह में रिपोर्ट देने का आदेश दिया था।कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि जिन लॉ कालेजों को पढ़ाई जारी करने की अनुमति दी गई थी, वहां की व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं को भी देखा जाए।

इस मामलें पर अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद की जाएगी।

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना, 06 सितंबर 2022। पटना हाईकोर्ट में आज इन मामलों की होगी सुनवाई :

1. पटना हाईकोर्ट ने बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई की जाएगी। कोर्ट ने इस मामलें सुनवाई करते हुए पिछली सुनवाई में राज्य सरकार को प्रगति रिपोर्ट दो सप्ताह में देने का निर्देश दिया था। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ आकांक्षा मालवीय की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

2. पटना हाईकोर्ट में राज्य के सरकारी व निजी लॉ कालेजों से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई की जाएगी।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने गया के अनुग्रह नारायण लॉ कॉलेज और बक्सर के जननायक कर्पूरी ठाकुर लॉ कॉलेज के स्थिति के सम्बन्ध में बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया को जवाब देने का निर्देश दिया था। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ कुणाल कौशल की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

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3. सासाराम के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे बुचडखाने से होने वाले प्रदूषण और आम नागरिकों के स्वास्थ्य के खतरे के मुद्दे पर दायर जनहित याचिका पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ धर्मदेव पासवान की याचिका पर सुनवाई करेगी।

राज्य में पटना नगर निगम समेत स्थानीय निकायों के चुनाव पर रोक लगाने सम्बंधित याचिका पर पटना हाईकोर्ट मे सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनील कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने से फिलहाल इंकार किया।

कोर्ट ने राज्य सरकार को इस मुद्दे पर हलफनामा दायर कर जवाब देने का निर्देश दिया।

राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने पक्ष प्रस्तुत किया।राज्य चुनाव आयोग के पत्र के आलोक में राज्य सरकार के शहरी विकास और आवास विभाग ने बताया कि विधि विभाग के सलाह के अनुसार स्थानीय निकाय चुनाव प्रक्रिया शुरू करने में कोई बाधा नहीं है।ये भी कहा गया कि उक्त सलाह के अनुसार स्थानीय निकायों की चुनाव प्रक्रिया जारी हैं।

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याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बगैर संवैधानिक प्रावधानों व सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन किए स्थानीय निकायों के चुनाव प्रक्रिया कैसे शुरू हो सकती है।इसमें बैकवर्ड व अन्य वर्गों के आरक्षण का मसला शामिल हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 29 सितम्बर,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कोर्ट में उपस्थित नही होने पर कोर्ट ने कटिहार के तत्कालीन एसपी सिद्धार्थ एम जैन के खिलाफ गिरफ्तारी का जमानती वारंट जारी किया

जस्टिस संदीप कुमार ने राज्य सरकार को कहा कि उन्हें हर हाल में 8 सितंबर,2022 को अदालत में पेश किया जाए।

ये मामला किसी भी अभियुक्त को गिरफ्तार करने के पूर्व और बाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा निर्देश को नजरअंदाज किये जाने का है।कोर्ट ने मेघु दास एवं अन्य की और से अदालती आदेश की अवमानना को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट और हाई द्वारा जारी किये गए दिशा निर्देश का उल्लंघन कर अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेजने को काफी गम्भीरता से लिया।

कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कटिहार के तत्कालीन एसपी सिद्धार्थ मोहन जैन समेत डीएसपी और नगर थाना के एसएचओ को 1 सितंबर को कोर्ट में तलब किया था।

अदालती आदेश के बाद कटिहार के तत्कालीन एसपी सिद्धार्थ मोहन जैन को छोड़ कर डीएसपी और नगर थाना कटिहार के एसएचओ कोर्ट में उपस्थित थे।

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कोर्ट को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कटिहार के तत्कालीन एसपी सिद्धार्थ मोहन जैन की प्रतिनियुक्ति केन्द्रीय गृह मंत्रालय में कर दी गई है।उन्हें 30 अगस्त को ही हाई कोर्ट के आदेश की जानकारी दे दी गई है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि पुलिस सुप्रीम कोर्ट के नियमों की अनदेखी हर मामले में कर रही है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना है।

इस मामले पर फिर 8 सितंबर,2022 को सुनवाई की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने एक नाबालिग बच्ची को नौ महीने तक बेगूसराय स्थित बालिका गृह में रखने के मामले पर सुनवाई की

जस्टिस पूर्णेन्दु सिंह ने मामलें को गंभीरता से लेते हुए बेगूसराय के जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि इस संवेदनशील मामले पर किशोर न्याय अधिनियम और पोक्सो अधिनियम के प्रावधान और अभिलेखों के आधार पर उचित कार्रवाई करें ।

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि यह प्रथम दृष्टया मामला बनता है ,तो जिला बाल कल्याण के सदस्यों ,बालिका गृह के पदाधिकारी, बच्ची की जांच करने वाली चिकित्सक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उचित कार्रवाई की जाए।

कोर्ट ने कहा कि अभिलेखों से स्पष्ट होता है कि इस मामले में संस्थान के पदाधिकारी जिम्मेदार थे ।

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कोर्ट ने अधिवक्ता विक्रम देव सिंह को पीड़ित बच्चे के हित में न्यायालय को उचित सहायता प्रदान करने के लिए “एमिकस क्यूरी” के रूप में नियुक्त किया है । इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितम्बर,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के उत्पाद कोर्ट में बुनियादी सुविधाओं के नहीं होने के मामले पर सुनवाई की

जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से पूछा कि किन तथ्यों राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में रखा गया है ।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने उत्पाद कोर्ट समेत अन्य कोर्ट में बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर सख्त रुख अपनाया था।कोर्ट ने कहा था कि राज्य में उत्पाद क़ानून से सम्बंधित मामलें बड़ी संख्या में सुनवाई के लिए लंबित हैं,लेकिन उत्पाद कोर्ट के गठन और सुविधाएं उपलब्ध कराने की रफ्तार धीमी हैं।

राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कोर्ट को बताया था कि उत्पाद कोर्ट के गठन,जज,कर्माचारियों की नियुक्ति और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातर कार्रवाई कर रही है।

कोर्ट ने राज्य सरकार से जानना चाहा था कि सीबीआई, श्रम न्यायलयों व अन्य कोर्ट के लिए अलग अलग भवन की व्यवस्था है,तो उत्पाद कोर्ट के लिए अलग भवन की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है।

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महाधिकवक्ता ललित किशोर ने राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया था कि सभी 74 उत्पाद कोर्ट के लिए जजों की बहाली हो चुकी हैं।साथ ही 666 सहायक कर्मचारियों की बहाली के लिए स्वीकृति दे दी गई हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 7 सितंबर,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामलें पर सुनवाई की

जस्टिस संदीप कुमार ने बिहार राज्य आवास बोर्ड को बताने को कहा है कि अब तक पटना में उसने कितनी कॉलोनियों का निर्माण और विकास किया हैं।

साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को एमिकस क्यूरी संतोष सिंह द्वारा प्रस्तुत दलीलों का अगली सुनवाई में जवाब देने का निर्देश दिया है।

पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने स्पष्ट किया था कि नीति में कोई परिवर्तन नहीं होगा।कोर्ट को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि गलत तरीके से बने मकानों को तोड़े जाने की नीति जारी रहेगी।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को बिहार राज्य आवास बोर्ड के दोषी अधिकारियों और जिम्मेवार पुलिस वाले के विरुद्ध की जाने वाली कार्रवाई की कार्य योजना प्रस्तुत करने को कहा था।कोर्ट ने कहा कि इनके रहते इस क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन कर मकान बना लिए गए।इस सम्बन्ध में हलफनामा दायर कर कार्य योजना पेश करने का निर्देश दिया था।

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इससे पहले की सुनवाई में बिहार राज्य आवास बोर्ड की ओर से वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने बहस की थी।उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में जो भी मकान बने है,उनका निर्माण वैध ढंग से नहीं किया गया है।

कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी संतोष कुमार सिंह ने कोर्ट के समक्ष बहस किया।उन्होंने कहा कि राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में हटाने की कार्रवाई सही नहीं थी।हटाने के पूर्व संचार माध्यमों में उन्हें नोटिस दे कर जानकारी देना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि नागरिकों को मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकता है।उन्होंने कहा कि या तो उन्हें उचित मुआवजा
दिया जाए या उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 15,सितम्बर,2022 को की जाएगी।

गया के ऐतिहासिक विष्णुपद मंदिर से सटे फाल्गु नदी प्रदूषित होने के मामलें पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ के समक्ष वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण करने वाली कंपनी ने बताया कि निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए गया में निर्माण करने वाली कंपनी को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की सीमा के सम्बन्ध में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था। पूर्व की सुनवाई में कोर्ट को जानकारी दी गई थी कि बूडको ने वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने हेतु चुनी हुई कम्पनी से अग्रीमेंट किया जा चुका हैं।

कोर्ट को बताया गया था कि एग्रीमेंट में ये तय हुआ है कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का काम तीन महीने में पूरा हो जाएगा।

ये जनहित याचिका गौरव कुमार सिंह की ओर से दायर की गई थी। पहले की सुनवाई में कोर्ट ने बुडको से यह भी कहा कि यदि वह चुनिंदा कम्पनी के काम करने से संतुष्ट है, तो अग्रीमेंट की प्रक्रिया जल्द पूरा करे ।

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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुमित कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि ऐतिहासिक फाल्गु नदी कचरे से भर रही ऊन्होने बताया कि सारे गया शहर की गन्दगी और कचडा फल्गु नदी में जाता है,जिस कारण नदी का पानी काफी प्रदूषित हो गया।

अगली सुनवाई 20सितम्बर, 2022 को होगी ।

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना हाईकोर्ट में पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामलें पर सुनवाई की जाएगी।जस्टिस संदीप कुमार इस मामलें पर सुनवाई करेंगे। राज्य सरकार और बिहार राज्य आवास बोर्ड ने जवाब दायर कर दिया था।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को बिहार राज्य आवास बोर्ड और पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के सम्बन्ध में जवाब माँगा था, जिनके रहते हुए राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हुए।

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पटना हाईकोर्ट में राज्य के उत्पाद कोर्ट के बुनियादी सुविधाओं के नहीं होने और विकास के मामले पर सुनवाई की जाएगी ।जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई करेगी।

उत्पाद कोर्ट समेत अन्य कोर्ट में बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर कड़ा रुख अपनाया था।

हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता के साथ हाथापाई एवं दुर्व्यवहार किए जाने के मामले पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की

जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ ने दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार करने का निर्देश दिया।साथ ही कोर्ट ने अगली सुनवाई में कार्रवाई रिपोर्ट भी हलफनामा दायर कर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने वकीलों के विरुद्ध सम्बंधित पुलिसकर्मियों दायर प्राथमिकी पर भी रोक रोक दिया है।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस मामलें को गम्भीरता से लेते हुए शास्त्री नगर थाना के पुलिस कर्मियों को नोटिस जारी किया था।

इसके साथ साथ कोर्ट ने थाने की सीसीटीवी फुटेज को भी सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था।हाईकोर्ट के अधिवक्ता साकेत गुप्ता ने आरोप लगाया था कि वह 03, अगस्त,2022 की शाम को अपने परिचित अभिषेक कुमार एवं अन्य अधिवक्ताओं के साथ एक केस के सिलसिले में शास्त्री नगर थाना गए थे।

उनके परिचित अभिषेक कुमार को शास्त्री नगर थाने में पदस्थापित एसआई स्मृति ने पूछताछ के लिए बुलाया था। थाने में पूछताछ के दौरान एसआई स्मृति एवं लाल बाबू अभिषेक के साथ बदतमीजी और गाली गलौज करने लगे।

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इसी दौरान जब अधिवक्ता साकेत ने उन्हें ऐसा करने से रोका ,तो इन दोनों एसआई ने अधिवक्ता साकेत, अधिवक्ता मयंक शेखर ऐवं अधिवक्ता रजनीकांत सिंह के साथ धक्का मुक्की करने लगे।

इसका विरोध किए जाने पर एसआई लाल बाबू ने अधिवक्ता को पिस्तौल दिखा कर जान से मारने की धमकी दी और उन पर हाथ उठाया।

इस बात की शिकायत अधिवक्ता ने पटना के सिटी एसपी से भी की । हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए इन पुलिस कर्मियों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्यवाही करने हेतु नोटिस जारी किया था।

इस मामले की अगली सुनवाई 12 सितम्बर,2022 को की जाएगी।