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पटना हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन में कई व्यक्तियों के आंख की रौशनी खो जाने के मामले पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जवाब देने के लिए 3 सप्ताह का मोहलत दिया।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में निदेशक प्रमुख,स्वास्थ्य सेवा और सिविल सर्जन, मुजफ्फरपुर द्वारा हलफनामा नहीं दायर करने को गम्भीरता से लिया थ।पूर्व की सुनवाई में मुजफ्फरपुर के एस एस पी को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कोर्ट ने निर्देश दिया था।मुकेश कुमार ने ये जनहित याचिका दायर की है।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वी के सिंह ने कोर्ट को बताया था कि इस मामलें में दर्ज प्राथमिकी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।

कोर्ट ने इससे पहले की सुनवाई में कहा था कि इस मामलें में गठित डॉक्टरों की कमिटी को चार सप्ताह मे अपना रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

इसमें कोर्ट को बताया गया था कि आँखों की रोशनी गवांने वाले पीडितों को बतौर क्षतिपूर्ति एक एक लाख रुपए दिए गए हैं।साथ ही मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल को बंद करके एफ आई आर दर्ज कराया गया था,लेकिन अब तक दर्ज प्राथमिकी पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई ।

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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विजय कुमार सिंह ने आरोप लगाया गया है कि कथित तौर पर आई हॉस्पिटल के प्रबंधन व राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा बरती गई अनियमितता और गैर कानूनी कार्यों की वजह से कई व्यक्तियों को अपनी आँखें की रोशनी खोनी पड़ी।

याचिका में आगे यह भी कहा गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों व अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज करनी चाहिए, क्योंकि इन्हीं की लापरवाही की वजह से सैकड़ों लोगों को अपनी ऑंखें गंवानी पड़ी।

इस मामले पर अगली सुनवाई तीन सप्ताह के फिर सुनवाई की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट में पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामलें राज्य सरकार को स्थिति स्पष्ट करते हुए हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया

जस्टिस संदीप कुमार इस मामलें पर सुनवाई करते हुए जानना चाहा कि बदली राज्य सरकार की इस सम्बन्ध में क्या नीति है।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के नगर विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव को इस सम्बन्ध में हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा।कोर्ट ने कहा कि नई राज्य सरकार यह स्पष्ट करें कि पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में बने अतिक्रमित भवनों को तोड़े जाने की कार्रवाई जारी रहेगी या नहीं।

इससे पहले की सुनवाई में बिहार राज्य आवास बोर्ड की ओर से वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने बहस की थी।उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में जो भी मकान बने है,उनका निर्माण वैध ढंग से नहीं किया गया है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि आवास बोर्ड ने जो भी नियमों के उल्लंघन मकान बने है,उन्हें अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया,लेकिन वे नहीं आवास बोर्ड के समक्ष नहीं आए।

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आज कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी संतोष कुमार सिंह ने कोर्ट के समक्ष बहस किया।उन्होंने कहा कि राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में हटाने की कार्रवाई सही नहीं थी।हटाने के पूर्व संचार माध्यमों में उन्हें नोटिस दे कर जानकारी देना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि नागरिकों को मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकता है।उन्होंने कहा कि या तो उन्हें उचित मुअबजा दिया जाए या उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।

इससे पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने पक्ष प्रस्तुत करते हुए कोर्ट को बताया था कि ये मामला सुनवाई योग्य नहीं हैं।साथ ही उनका कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 30 अगस्त,2022 को होगी।

नाबालिग लड़की के साथ गैंग रेप और हत्या के नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार करने के लिए एक याचिका पटना हाईकोर्ट में दायर

पटना हाई कोर्ट में एक नाबालिग लड़की के साथ गैंग रेप और हत्या के नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार करने के लिए एक याचिका दायर की गई है। मृतिका संध्या कुमारी के परिजनों ने ये याचिका पटना हाईकोर्ट में दायर की है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ओम प्रकाश ने बताया कि मुज़फ़्फ़रपुर थाना कांड संख्या 258/22, धारा- 363, 364, 376, 302, 328 एवं पोक्सो एक्ट की धारा 4, 6 एवं 8 में नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार करने के लिए ये याचिका दायर की गई है।याचिका में कोर्ट से आग्रह किया गया है कि केस में नामजद अभियुक्तों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए एवं इस केस की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाई जाए।

साथ ही इस केस में कार्रवाई नही कर रहे पुलिस पदाधिकारियों के विरुद्ध भी विभागीय कार्यवाही चलाई जाए।

अधिवक्ता ओम प्रकाश ने बताया कि दिनांक 26 अप्रैल, 2022 को याचिकाकर्ता की पुत्री अपने घर से बाहर गयी थी, लेकिन वह वापस नही लौटी ।इसके बाद परिजन वालों ने अपनी पुत्री को बहुत खोजने का प्रयास किया, परन्तु वह नही मिली।

उसी दिन रात 12.47 बजे एक कॉल आया, जिसमे याचिकाकर्ता की पुत्री की आवाज सुनाई दी और वह दर्द से कराह रही थी। जिसके बाद फोन कट गया और पुनः प्रयास करने पर मोबाइल बंद मिला।

सुबह में ग्रामीणों ने बताया कि याचिकाकर्ता की पुत्री की मृत शरीर पोखर में पड़ा मिला।

इसके बाद परिजनों ने घटना स्थल पर जाते समय देखा कि गांव के ही मो0 वसीम खान के द्वारा याचिकाकर्ता की पुत्री को बोलेरो कार से लेकर कहीं ले जाया जा रहा है। वह बोलेरो मोहम्मद वसीम के घर पर जाकर रुकती है और फिर मोहम्मद वसीम के परिवार वाले गाड़ी में बैठते है।

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उसके बाद वैष्णवी हॉस्पिटल, मुज़फ़्फ़रपुर याचिकाकर्ता की पुत्री को लेकर जाते हैं, जहाँ याचिकाकर्ता की पुत्री के परिजन भी पहुँचते हैं ।

अपनी पुत्री से बात करते हैं, तो याचिकाकर्ता की पुत्री द्वारा बताया जाता है कि लगभग 8 लोग द्वारा उसके साथ बलात्कार किया गया और जहर पिलाया गया। इसमें संध्या ने चार लोगों का नाम भी लिया था। जिसमे से एक व्यक्ति मोहम्मद वसीम खान को गिरफ्तार कर लिया गया है

लेकिन अभी भी तीन नामजद अभियुक्त पुलिस के गिरफ्त से बाहर हैं।अधिवक्ता ने अपनी याचिका में मुज़फ़्फ़रपुर पुलिस के कार्यशैली पर भी सवाल उठाया है औऱ ठीक ढंग से कार्य नही कर रहे पुलिस पदाधिकारियों पर विभागीय कार्यवाही करने की भी मांग की है।

पटना हाईकोर्ट ने शादी समेत अन्य समारोहों में राज्य भर में किये जाने वाले हर्ष फायरिंग के मामले पर सुनवाई की

पटना हाई कोर्ट ने शादी समेत अन्य समारोहों में राज्य भर में किये जाने वाले हर्ष फायरिंग के मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को हलफनामा दायर कर यह बताने को कहा है कि कितने केसों में अनुसंधान पूरा किया गया है। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राजीव रंजन सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

याचिकाकर्ता का कहना था कि हर्ष फायरिंग में कई निर्दोष लोगों घायल हो जाते हैं और कितने की तो जान भी चली जाती है।इसलिए इस मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई सख्त ढंग की जानी चाहिए।

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याचिकाकर्ता का कहना है कि इस मामले में एक सख्त गाइडलाइंस जारी की जानी चाहिए। जनहित याचिका में राज्य के चीफ सेक्रेटरी व डी जी पी समेत अन्य को पार्टी बनाया गया है।

इस मामले पर अगली सुनवाई अब आगामी 29 अगस्त, 2022 को की जाएगी।

राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के अंतर्गत कालेजों द्वारा यूजीसी को उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं देने के मामलें पर पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने वेटरन फोरम की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जो धनराशि कालेजों को दी जाती है,इसकी जिम्मेदारी किसी के द्वारा नहीं लेना गंभीर मामला है।

कोर्ट ने सभी विश्वविद्यालयों के वीसी और यूजीसी को हलफनामा दायर कर पूरी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने सभी विश्वविद्यालयों को दो दिनों के भीतर उपयोगिता प्रमाण पत्र यूजीसी के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।यूजीसी उसके बाद एक सप्ताह में कार्रवाई करेगा।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रितिका रानी ने कोर्ट को बताया कि राज्य में अंगीभूत और सम्बद्धता प्राप्त कालेजों की संख्या 325 है।इन कालेजों को काफी पहले यूजीसी ने जो अनुदान दिया था, उसका बहुत सारे मामलों में अबतक उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं प्रस्तुत किया गया है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य के विभिन्न कालेजों द्वारा 124 करोड़ रुपए का उपयोगिता प्रमाण पत्र यूजीसी को प्रस्तुत नहीं किया गया है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कालेजों द्वारा दो दिनों के भीतर उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं जमा किये गए, तो सम्बंधित वीसी का वेतन रोक दिया जाएगा।

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कोर्ट ने ये साफ कर दिया कि कालेजों द्वारा निर्धारित परफॉर्मा पर उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिए गए, तो इसकी जांच कोर्ट कमिश्नर से कराई जा सकती हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 8सितम्बर,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने बिहार के गर्भाशय घोटाले के मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के मुख्य सचिव को इस मामलें में अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा हलफनामा पर अगली सुनवाई में दायर करने का निर्देश दिया

जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह की खंडपीठ ने वेटरन फोरम की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव को ये भी बताने को कहा कि आगे इस मामलें में क्या कार्रवाई करने की योजना है।

आज कोर्ट में उपस्थित एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि इस जनहित याचिका में दिए गए तथ्य वास्तविक नहीं हैं।उन्होंने बताया कि बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष साढ़े चार सौ इस तरह के मामलें आए थे।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के जांच के बाद नौ जिलों में गर्भाशय निकाले जाने के सात सौ दो मामलें आए थे।इन मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई और आगे की कार्रवाई चल रही है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि पीड़ित महिलाओं को क्षतिपूर्ति राज्य सरकार ने पचास पचास हजार रुपये पहले ही दे दिए।इसके बाद बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने आदेश दिया कि यह राशि बढ़ा कर डेढ़ और अढाइ लाख रुपए बतौर क्षतिपूर्ति दिए जाए।

महाधिवक्ता ललित किशोर ने कोर्ट को बताया कि क्षतिपूर्ति की राशि देने के लिए राज्य सरकार ने 5.89 करोड़ रुपए निर्गत किये है।कुछ दिनों में क्षतिपूर्ति की राशि पीडितों के बीच वितरित कर दिया जाएगा।

कोर्ट ने राज्य सरकार से जानना चाहा कि किन किन धाराओं के दोषियों के विरुद्ध मामलें दर्ज किये गए।मानव शरीर से बिना सहमति के अंग निकाला जाना गंभीर अपराध है।इसलिए उनके विरुद्ध नियमों के तहत ही धाराएं लगानी जानी चाहिए।

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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया था कि सबसे पहले ये मामला मानवाधिकार आयोग के समक्ष 2012 में लाया गया था।2017 में पटना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका वेटरन फोरम ने दायर किया गया था।

इसमें ये आरोप लगाया गया था कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का गलत लाभ उठाने के लिए बिहार के विभिन्न अस्पतालों/डॉक्टरों द्वारा बड़ी तादाद में बगैर महिलाओं की सहमति के ऑपरेशन कर गर्भाशय निकाल लिए गए।

अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि पीड़ित महिलाओं की बड़ी संख्या होने की सम्भावना है। बीमा राशि लेने के चक्कर में 82 पुरुषों का भी आपरेशन कर दिया गया।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 6 सितम्बर,2022 को की जाएगी।

लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजप्रताप यादव और पत्नी ऐश्वर्या राय के तलाक के मामले में पटना हाईकोर्ट में सुनाई हुई

लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजप्रताप यादव और तेज की पत्नी ऐश्वर्या राय के तलाक के मामले में पटना हाईकोर्ट में सुनाई हुई।

कोर्ट ने अगली तारीख 1 सितंबर तय की है। 1 सितंबर को केस की अंतिम सुनवाई की जाएगी।

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गुरुवार को ऐश्वर्या के वकील पीएन सिन्हा नहीं आए थे, इसलिए ऐश्वर्या की तरफ से आगे समय मांगा गया है।

पटना हाईकोर्ट ने पटना स्थित जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट,पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के मामले पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राज्य सरकार को राज्य में ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट बनाए जाने के मामलें में स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने का निर्देश दिया है।ये जनहित याचिकाएं गौरव सिंह व अन्य द्वारा की गई है।

इससे पहले की सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र,राज्य सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को राज्य के एयरपोर्ट के सुधार पर बैठक कर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।

एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री व पायलट राजीव प्रताप रूडी ने कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत किया था।उन्होंने राज्य में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाए जाने के मुद्दे को उठाया था।

उन्होंने कहा कि कई राज्यों में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि बिहार में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाया जाना चाहिए।

कोर्ट को उन्होंने बताया था कि बिहार में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाया जाना चाहिए।बिहार में एक भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नहीं है।उन्होंने बताया कि छपरा के पास इसके लिए पर्याप्त और सस्ती भूमि उपलब्ध हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के नोडल अधिकारी को तलब किया था।साथ ही पटना एयरपोर्ट के पूर्व और वर्तमान निर्देशक को भी तलब किया था।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को भी नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार को गया एयरपोर्ट के विकास के सन्दर्भ में बताने को कहा था कि 268 करोड़ रुपए की धनराशि कब तक दिया जाएगा।

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याचिकाकर्ता की अधिवक्ता अर्चना शाही ने बताया कि गया एयरपोर्ट के विकास के लिए एक बड़ी धनराशि आवंटित की गई है।लेकिन अभी तक गया एयरपोर्ट का विकास कार्य प्रारम्भ नहीं हुआ है।

कोर्ट को राज्य के गया,पूर्णियां और अन्य एयरपोर्ट के विस्तार,विकास और भूमि अधिग्रहण से सम्बंधित समस्यायों के बारे में बताया गया था।

राज्य में पटना के जयप्रकाश नारायण अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के अलावा गया, मुजफ्फरपुर,दरभंगा,भागलपुर,फारबिसगंज , मुंगेर और रक्सौल एयरपोर्ट हैं।लेकिन इन एयरपोर्ट पर बहुत सारी आधुनिक सुविधाओं के अभाव एवं सुरक्षा की समस्याएं हैं।
इस मामलें पर अगली सुनवाई 24 अगस्त,2022 , को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट में पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामलें पर सुनवाई अधूरी रही

जस्टिस संदीप कुमार इस मामलें पर सुनवाई कर रहे है।

कोर्ट में बिहार राज्य आवास बोर्ड की ओर से वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने बहस की।उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में जो भी मकान बने है,उनका निर्माण वैध ढंग से नहीं किया गया है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि आवास बोर्ड ने जो भी नियमों के उल्लंघन मकान बने है,उन्हें अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया,लेकिन वे नहीं आवास बोर्ड के समक्ष नहीं आए।

आज कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी संतोष कुमार सिंह ने कोर्ट के समक्ष बहस किया।उन्होंने कहा कि राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में हटाने की कार्रवाई सही नहीं थी।हटाने के पूर्व संचार माध्यमों में उन्हें नोटिस दे कर जानकारी देना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि नागरिकों को मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकता है।उन्होंने कहा कि या तो उन्हें उचित मुअबजा दिया जाए या उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।

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इससे पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने पक्ष प्रस्तुत करते हुए कोर्ट को बताया था कि ये मामला सुनवाई योग्य नहीं हैं।साथ ही उनका कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता है।

पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता का पक्ष प्रस्तुत करते हुए वरीय अधिवक्ता वसंत कुमार चौधरी ने कोर्ट को बताया था कि इस क्षेत्र से इस तरह से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सही नहीं है।उन्होंने कहा कि को-आपरेटिव माफिया के साथ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए,क्योंकि इस समस्या में इनकी भी बड़ी भागीदारी हैं।

इस मामलें पर फिर सुनवाई 23अगस्त,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को प्रगति रिपोर्ट दो सप्ताह में देने का निर्देश दिया गया

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने आकांक्षा मालवीय की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को विस्तृत जानकारी देने को कहा था। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवा में क्या क्या कमियों के सम्बन्ध में ब्यौरा देने को कहा था। साथ ही इसमें सुधारने के उपाय पर सुझाव देने को कहा।

याचिकाकर्ता की अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने बताया कि नेशनल मेन्टल हेल्थ प्रोग्राम ही के अंतर्गत राज्य के 38 जिलों में डिस्ट्रिक्ट मेन्टल हेल्थ प्रोग्राम चल रहा हैं।लेकिन इसमें मात्र 52 स्टाफ ही है, हर जिले में सात सात स्टाफ होने चाहिए।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का दायित्व है कि वह मेन्टल हेल्थ केयर एक्ट के तहत कानून बनाए।साथ ही इसके लिए मूलभूत सुविधाएं और फंड उपलब्ध कराए।

सेन्टर ऑफ एक्सलेंस के तहत हर राज्य में मानसिक रोग के अध्ययन और ईलाज के लिए कॉलेज है।लेकिन बिहार ही एक ऐसा राज्य हैं,जहां मानसिक रोग के अध्ययन और ईलाज के लिए कोई कालेज नहीं है।जबकि राज्य सरकार का ये दायित्व हैं

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पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि केंद्र सरकार की ओर से दिए जाने वाले फंड में कमी आयी है,क्योंकि फंड का राज्य द्वारा पूरा उपयोग नहीं हो रहा था।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े स्कीम और फंड के सम्बन्ध में जानकारी देने को कहा।

पहले की सुनवाई में याचिकाकर्ता की अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने कोर्ट को बताया कि बिहार की आबादी लगभग बारह करोड़ हैं।उसकी तुलना में राज्य में मानसिक स्वास्थ्य के लिए बुनियादी सुविधाएँ नहीं के बराबर है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना, 16 अगस्त 2022। पटना हाईकोर्ट में आज इन मामलों की होगी सुनवाई :

1. पटना हाईकोर्ट में गया के ऐतिहासिक विष्णुपद मंदिर से सटे फाल्गु नदी में खुले तौर पर डाले जा रहे कचडे और गन्दगी डाले जाने के मामले पर सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में बूडको के एमडी को निर्देश दिया था कि वह जल्द वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने हेतु चुने गए कंपनी के साथ एग्रीमेंट कर काम को शुरू करें।

2. पटना हाईकोर्ट में पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामलें पर सुनवाई की जाएगी।जस्टिस संदीप कुमार इस मामलें पर सुनवाई करेंगे। राज्य सरकार और बिहार राज्य आवास बोर्ड ने जवाब दायर कर दिया था।आज याचिकाकर्ता के वकील अपना बहस जारी रखेंगे।

3. पटना हाईकोर्ट में बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ आकांक्षा मालवीय की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को विस्तृत जानकारी एवं सुझाव देने को कहा था।

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पटना हाईकोर्ट ने सजायाफ्ता व विचाराधीन कैदियों को हथकड़ी लगाए जाने के मामले में राज्य सरकार के इंस्पेक्टर जनरल (जेल) को एक सप्ताह में शपथ-पत्र दायर करने का आदेश दिया

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने विधि के छात्र कुमार अभिषेक द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश को पारित किया है।

याचिकाकर्ता का कहना था की सिटीजन्स फोर डेमोक्रेसी बनाम स्टेट ऑफ असम व अन्य के मामले में, वर्ष 1995 में ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कैदियों को एक जेल से दूसरे जेल में लाने व ले जाने तथा जेल से कोर्ट लाने व ले जाने के दौरान हथकड़ी और अन्य बेड़ियों का बलपूर्वक प्रयोग नहीं किया जाए।

फैसले के मुताबिक पुलिस और जेल के अधिकारियों को स्वयं कैदियों को हथकड़ी और बेड़ी लगाने के लिए आदेश देने का अधिकार नहीं होगा।

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याचिकाकर्ता का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गए फैसले के बावजूद बिहार की पुलिस कैदियों को हथकड़ी लगाने का काम कर रही है। इन अधिकारियों द्वारा की जा रही इस कार्रवाई को अमानवीय कार्य कहा जा सकता है।

याचिका में यह कहा गया है कि यदि इसे जारी रखने की अनुमति दी जाती है तो यह न्याय की एक बड़ी विफलता होगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में पुलिस द्वारा सही ढंग और स्तरीय जांच नहीं किये जाने के कारण अपराधियों को सजा से बच जाने को गम्भीरता से लिया

जस्टिस अश्विनि कुमार सिंह की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई करते राज्य सरकार को बताने को कहा कि पुलिस के जांच की स्तर सुधारने के लिए क्या हो रहा हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि पुलिस द्वारा जांच में त्रुटि और कमियों के कारण बड़ी संख्या में अपराधी सजा से बच जाते है।कोर्ट ने इस पर काफी गंभीर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इस तरह के जांच से अपराधियों को सजा नहीं मिल पाना सही नहीं है।

उन्होंने कहा कि जहां पुलिस अधिकारियों को सही ढंग से आपराधिक मामलों की जांच के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराया जाना जरूरी है।सही तरीके से जांच करने पर अपराधियों को कोर्ट द्वारा सजा दी जा सकेगी।

कोर्ट ने सही ढंग से पुलिस द्वारा जांच नहीं करने,ठोस सबूत और गवाहियां प्रस्तुत करने पर अपराधियों के सजा से बच जाने के उदाहरण भी दिया।ऐसा ही मामला गोपालगंज जहरीली शराब पीने से हुए मौत का मामला है,जहां पुलिस जांच में कमियों के कारण कई अभियुक्त सजा से बच गये।

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कोर्ट ने कहा कि जबतक अपराधियों को सख्त सजा नहीं मिलेगी,कोई भी सुरक्षित नहीं रह सकता हैं।इसके लिए आवश्यक है कि पुलिस के जांच आधुनिक,स्तरीय और वैज्ञानिक हो,जिसमें अपराधियों को सजा मिलना सुनिश्चित हो।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 5 सितम्बर,2022 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट में पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामलें पर सुनवाई 16 अगस्त,2022 को फिर सुनवाई की जाएगी

जस्टिस संदीप कुमार इस मामलें पर कर रहे है सुनवाई। आज कोर्ट में बिहार राज्य आवास बोर्ड की ओर से वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने बहस की।उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में जो भी मकान बने है,उनका निर्माण वैध ढंग से नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि नागरिकों के अधिकार के बिना कोर्ट कोई आदेश नहीं दे सकता हैं।उन्होंने कोर्ट को बताया कि आवास बोर्ड ने जो भी नियमों के उल्लंघन मकान बने है,उन्हें अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया,लेकिन वे नहीं आवास बोर्ड के समक्ष नहीं आए।

इससे पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने पक्ष प्रस्तुत करते हुए कोर्ट को बताया था कि ये मामला सुनवाई योग्य नहीं हैं।साथ ही उनका कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता है।

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पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता का पक्ष प्रस्तुत करते हुए वरीय अधिवक्ता वसंत कुमार चौधरी ने कोर्ट को बताया था कि इस क्षेत्र से इस तरह से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सही नहीं है।उन्होंने कहा कि को-आपरेटिव माफिया के साथ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए,क्योंकि इस समस्या में इनकी भी बड़ी भागीदारी हैं।

उन्होंने कोर्ट को बताया था कि लैण्ड सेटलमेंट स्कीम के तहत चार सौ एकड़ भूमि को अबतक घेरा नहीं गया है।

इस मामलें पर फिर सुनवाई 16अगस्त,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट में बिहार के गर्भाशय घोटाले के मामलें पर सुनवाई 18 अगस्त,2022 को होगी

जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह की खंडपीठ वेटरन फोरम की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई को चार सप्ताह में बताने को कहा था कि इस मामलें को जांच के लिए क्यों नहीं सी बी आई सौंपा जाए।

आज महाधिवक्ता ललित किशोर ने स्वयम उपस्थित होकर कोर्ट से कुछ समय माँगा,जिसे कोर्ट ने मान लिया।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में जानना चाहा था कि कि इस तरह की अमानवीय घटना के मामलें में राज्य सरकार ने क्या किया।राज्य सरकार को इस मामलें ज्यादा संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया था कि सबसे पहले ये मामला मानवाधिकार आयोग के समक्ष 2012 में लाया गया था।2017 में पटना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका वेटरन फोरम ने दायर किया गया था।

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इसमें ये आरोप लगाया गया था कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का गलत लाभ उठाने के लिए बिहार के विभिन्न अस्पतालों/डॉक्टरों द्वारा बड़ी तादाद में बगैर महिलाओं की सहमति के ऑपरेशन कर गर्भाशय निकाल लिए गए।

अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि पीड़ित महिलाओं की संख्या लगभग 46 हज़ार होने की सम्भावना है। बीमा राशि लेने के चक्कर में 82 पुरुषों का भी आपरेशन कर दिया गया।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 18अगस्त,2022 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट में पटना स्थित जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट,पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के मामले पर अगली सुनवाई 17 अगस्त,2022 को की जाएगी

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ द्वारा गौरव सिंह व अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की जा रही हैं।

राज्य सरकार को कोर्ट ने पूरी स्थिति स्पष्ट करते हुए अगली सुनवाई में जवाब देने को कहा है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र,राज्य सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को राज्य के एयरपोर्ट के सुधार पर बैठक कर अगली सुनवाई में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने कहा था।

इससे पहले की सुनवाई में पूर्व केंद्रीय मंत्री व पायलट राजीव प्रताप रूडी ने कोर्ट में राज्य में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाए जाने के मामलें को उठाया था।उन्होंने कहा कि कई राज्यों में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि बिहार में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाया जाना चाहिए।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के नोडल अधिकारी को तलब किया गया था।साथ ही पटना एयरपोर्ट के पूर्व और वर्तमान निर्देशक को भी तलब किया था।

इस मामलें पर पुनः 17 अगस्त,2022 को सुनवाई होगी।

पटना हाईकोर्ट ने मैथिली विषय में 43 असिस्टेंट प्रोफ़ेसर की बहाली से संबंधित मामले की सुनवाई की

जस्टिस मोहित कुमार शाह ने श्वेता भारती व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए फ़िलहाल परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी है ।

कोर्ट ने कहा कि इस रिट याचिका के अंतिम परिणाम पर रिज़ल्ट निर्भर करेगा है । याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पुरुषोत्तम कुमार झा ने कोर्ट को बताया कि अभ्यर्थियों की गणना के अनुसार बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा उन्हें अंक नहीं दिए गए ।

बहाली में जेनरल श्रेणी में आने वाले अभ्यर्थियों के लिए 81 मार्क्स का कटऑफ़ निकाला गया था।याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उनके योग्य रहने के बावजूद उन्हें साक्षात्कार के लिए नहीं बुलाया गया,जबकि मानदंड के अनुरूप कुल बहाली के तीन गुना अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया गया ।

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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि आयोग ने दुर्भावनापूर्ण तरीक़े से अभ्यर्थियों के व्यक्तिगत परिणाम नहीं प्रकाशित किए।

साथ ही तथ्यों को तोड़ मोड़ कर कोई गड़बड़ी करने की फ़िराक़ में हैं । इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी ।

पटना हाईकोर्ट में लोकायुक्त व अन्य सदस्यों के रिक्त पड़े पदों को भरने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई टल गयी

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ वेटरन फोरम द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही हैं।

इस जनहित याचिका में यह कहा गया कि भारत में भ्रष्टाचार के बड़े बड़े मामलें में प्रभावशाली लोग लिप्त रहते हैं।इस प्रकार के मामलों को देखने के लिए लोकायुक्त के संस्था की स्थापना की गई है।

बिहार में फरवरी,2022 से लोकायुक्त व अन्य सदस्यों के पद रिक्त पड़े हैं।इसके पहले फरवरी,2017 में पटना हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस श्याम किशोर शर्मा बिहार के लोकायुक्त पद पर आसीन हुए।

फरवरी,2022 में लोकायुक्त श्याम किशोर शर्मा इस पद से सेवानिवृत हुए। उसके बाद से ये पद रिक्त पड़ा हैं।1973 में इसकी स्थापना सरल व त्वरित न्याय दिलाने के लिए की गई है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि इस दौरान लगातार पीड़ित लोगों द्वारा मामलें दायर किये जा रहे हैं, लेकिन इन महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां नहीं होने के कारण बड़े पैमाने पर मामलें बड़ी संख्या में सुनवाई के लिए लंबित पड़े हैं।

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उन्होंने बताया कि इससे वादों का निपटारा नहीं हो पा रहा हैं। इससे जहां लोगों की कठिनाइयां बढ़ी है,वहीं लोगों में असंतोष की भावना लगातार बढ़ रही हैं।

अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि लोकायुक्त कार्यालय में दो जज और एक सदस्य अन्य क्षेत्र से लिए जाते हैं।पटना हाईकोर्ट के पूर्व जज मिहिर कुमार झा और कीर्ति चन्द्र साहा 17मई,2021 को सेवा निवृत हो गए।

सरकार को लोकायुक्त समेत अन्य रिक्त पदों को शीघ्र भरे जाने की जरूरत हैं,ताकि इन मामलों का निपटारा हो सके और लोगों को न्याय मिल सके।

इस संस्था का दुरपयोग नहीं हो इसके लिए काफी सख्त कानून बनाए गए हैं।अगर कोई व्यक्ति किसी को भ्रष्टाचार के झूठे आरोप में फंसाने के लिए मामला दर्ज कराएगा,तो वह स्वयम फंस जाएगा।उसके विरुद्ध तीन वर्ष कैद की सजा और पाँच हज़ार रुपये तक आर्थिक दंड का भी प्रावधान है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 11अगस्त,2022 को की जाएगी।

पटना हाई कोर्ट ने पटना के दानापुर स्थित बी एस कॉलेज में कथित रूप से बुनियादी सुविधाएं मुहैया नहीं कराए जाने के मामले पर सुनवाई करते हुए कॉलेज के कैंपस व शौचालय बनवाने का आदेश दिया

चीफ जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने बिंदेश्वर सिंह कॉलेज के प्रिंसिपल के जरिये दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए चार सप्ताह में धनराशि जारी करने को कहा है।

कोर्ट ने कहा है कि आदेश का पालन नहीं किये जाने की स्थिति में शिक्षा विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी का वेतन रोक दिया जाएगा।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सिद्धार्थ प्रसाद का कहना था कि छात्राओं को ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

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छात्राओं को सेनेटरी नैपकिन मुहैया कराने के लिए कॉलेज परिसर में वेंडिंग मशीन भी लगाया जाना चाहिए। इस मामले पर आगे की सुनवाई चार सप्ताह बाद की जाएगी।

हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता के साथ हाथापाई एवं दुर्व्यवहार किए जाने के मामले पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की

जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ ने इस मामलें को गम्भीरता से लेते हुए शास्त्री नगर थाना के पुलिस कर्मियों को नोटिस जारी किया है।

इसके साथ साथ कोर्ट ने थाने की सीसीटीवी फुटेज को भी सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है ।

हाईकोर्ट के अधिवक्ता साकेत गुप्ता ने आरोप लगाया है कि वह 03 अगस्त की शाम को अपने परिचित अभिषेक कुमार एवं अन्य अधिवक्ताओं के साथ एक केस के सिलसिले में शास्त्री नगर थाना गए थे। उनके परिचित अभिषेक कुमार को शास्त्री नगर थाने में पदस्थापित एसआई स्मृति ने पूछताछ के लिए बुलाया था।

थाने में पूछताछ के दौरान एसआई स्मृति एवं लाल बाबू अभिषेक के साथ बदतमीजी और गाली गलौज करने लगे।

इसी दौरान जब अधिवक्ता साकेत ने उन्हें ऐसा करने से रोका ,तो इन दोनों एसआई ने अधिवक्ता साकेत, अधिवक्ता मयंक शेखर ऐवं अधिवक्ता रजनीकांत सिंह के साथ धक्का मुक्की करने लगे।

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इसका विरोध किए जाने पर एसआई लाल बाबू ने अधिवक्ता को पिस्तौल दिखा कर जान से मारने की धमकी दी और उन पर हाथ उठाया।

इस बात की शिकायत अधिवक्ता ने पटना के सिटी एसपी से भी की । हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए उक्त पुलिस कर्मियों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्यवाही करने हेतु नोटिस जारी किया है ।

सुनवाई में एडवोकेट एसोसिएशन के महासचिव शैलेंद्र कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि पुलिस वालों की मनमानी काफ़ी बढ़ गई है । आए दिन सुनने में आता है कि पुलिस वकीलों एवं जनता के साथ बेहद बदतमीजी और रुखाई से पेश आती है ।इनके ख़िलाफ़ कड़ी से कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए।

इस मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी ।

पटना हाईकोर्ट ने झंझारपुर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशंस जज अविनाश कुमार पर किये गए कथित आक्रमण और मारपीट के मामले की सुनवाई की

जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि डी जी पी, बिहार ने ए डी जे अविनाश कुमार के विरुद्ध दायर प्राथमिकी के कार्रवाई पर रोक लगा दिया हैं।

कोर्ट ने राज्य सरकार को अविनाश कुमार के विरुद्ध दायर एफ आई आर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। कल इस मामलें पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए बिहार पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जाहिर की।

एड्वोकेट जनरल ललित किशोर ने कोर्ट को बताया कि ये गलत ढंग से समझने के कारण ए डी जे अविनाश कुमार के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज किया गया।इसे वापस लेने की प्रक्रिया शीघ्र प्रारम्भ की जाएगी

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार किसी न्यायिक पदाधिकारी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के पहले चीफ जस्टिस की अनुमति जरुरी हैं।इस मामलें में इस प्रक्रिया का पालन गलतफहमी में नहीं किया जा सका।
कोर्ट ने इस मामले मे सुनवाई में मदद करने के लिए वरीय अधिवक्ता मृगांक मौली को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था।

उल्लेखनीय है कि मधुबनी के डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशंस जज द्वारा 18 नवंबर, 2021 को भेजे गए पत्र पर हाई कोर्ट ने 18 नवंबर को ही स्वतः संज्ञान लिया था। साथ ही साथ कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, राज्य के डी जी पी, राज्य के गृह विभाग के प्रधान सचिव और मधुबनी के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया था।

मधुबनी के प्रभारी डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज द्वारा अभूतपूर्व और चौंका देने वाली इस घटना के संबंध में भेजे गए रिपोर्ट के मद्देनजर राजन गुप्ता की खंडपीठ ने 18 नवंबर, 2021 को सुनवाई की थी।

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ज़िला जज ,मधुबनी के द्वारा भेजे गए रिपोर्ट के मुताबिक घटना के दिन तकरीबन 2 बजे दिन में एस एच ओ गोपाल कृष्ण और घोघरडीहा के पुलिस सब इंस्पेक्टर अभिमन्यु कुमार शर्मा ने जज अविनाश के चैम्बर में जबरन घुसकर गाली दिया था।

उनके द्वारा विरोध किये जाने पर दोनों पुलिस अधिकारियों ने दुर्व्यवहार करने और हाथापाई किया था। इतना ही नहीं, दोनों पुलिस अधिकारियों ने उनपर हमला किया और मारपीट किया है।साथ ही अपना सर्विस रिवॉल्वर भी निकाल लिया।

इस मामलें में पुलिसकर्मियो के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज किया गया।पुलिस ने भी जज के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर दिया,लेकिन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

इस मामलें पर अगली सुनवाई सुनवाई ,24 अगस्त,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट में पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामलें पर सुनवाई अधूरी रही

जस्टिस संदीप कुमार इस मामलें पर सुनवाई कर रहे है।

आज याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में पक्ष प्रस्तुत किया गया।इससे पूर्व राज्य सरकार और बिहार राज्य आवास बोर्ड की ओर से भी कोर्ट में बहस किया गया।

राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने पक्ष प्रस्तुत करते हुए कोर्ट को बताया था कि ये मामला सुनवाई योग्य नहीं हैं।साथ ही उनका कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने यथास्थिति बहाल रखने का निर्देश दिया था।राज्य सरकार और बिहार राज्य आवास बोर्ड ने कोर्ट को बताया था कि इस स्थिति का लाभ उठा कर कुछ उस क्षेत्र में नए निर्माण करने लगे हैं।

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याचिकाकर्ता का पक्ष प्रस्तुत करते हुए वरीय अधिवक्ता वसंत कुमार चौधरी ने कोर्ट को बताया था कि इस क्षेत्र से इस तरह से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सही नहीं है।उन्होंने कहा कि को-आपरेटिव माफिया के साथ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए,क्योंकि इस समस्या में इनकी भी बड़ी भागीदारी हैं।

उन्होंने कोर्ट को बताया था कि लैण्ड सेटलमेंट स्कीम के तहत चार सौ एकड़ भूमि को अबतक घेरा नहीं गया है।

इस मामलें पर फिर सुनवाई 11अगस्त,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने चर्चित सृजन घोटाला मामलें की सुनवाई करते हुए सी बी आई के निर्देशक को एस आई टी का गठन कर मामलें की जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया

जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ ने सृजन घोटाला से जुड़े एक मामलें की सुनवाई की।कोर्ट ने तीन सप्ताह में सी बी आई को जांच की प्रगति रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।

ये मामला बैंकों से बसूली का है ।बिहार सरकार ने सृजन घोटाला मामलें में बैंकों से गबन की गई धनराशि के वसूली के लिए नोटिस जारी किया था।
बैंकों की ओर से उपस्थित वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने कहा कि राज्य सरकार को बैंकों से धनराशि वसूलने का कोई अधिकार नहीं हैं।हाईकोर्ट ने इस मामलें में सी बी आई को पहले ही नोटिस जारी किया था।


कोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में ही सी बी आई को प्रगति रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था,लेकिन उसकी ओर से कोर्ट में प्रगति रिपोर्ट नहीं प्रस्तुत किया गया।

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कोर्ट ने इस मामलें में विस्तृत जानकारियां प्राप्त की।इस घोटाला में क्या गड़बड़ी हुई,इसमें किनकी भूमिका क्या थी,बैंक का पैसा सृजन नामक संस्था को कैसे मिली।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 7 सितम्बर,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने झंझारपुर के ए डी जे अविनाश कुमार के साथ पुलिस बदसलुकी मामलें में पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जाहिर की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि कल डी जी पी, बिहार और सम्बंधित एस पी कोर्ट में प्रस्तुत किया जाए।उन्हें सलाखों के पीछे भेजेंगे।

ये मामला झंझारपुर के ए डी जे अविनाश कुमार के साथ पुलिस वालोंं के मारपीट और पिस्टल ताने जाने का हैं।ये घटना 18 नवम्बर,2021 को हुई थी।

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पुलिस वालोंं गवाही पर पुलिस ने ए डी जे अविनाश कुमार के विरुद्ध ही प्राथमिकी दर्ज कर दी हैं।कोर्ट ने पुलिस के करतूत पर सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए डी जी पी और एस पी को कल तलब किया है।इस मामलें पर कल सुनवाई की जाएगी।

पटना हाई कोर्ट ने मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन में कई व्यक्तियों के आंख की रौशनी खो जाने के मामले पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य के निदेशक प्रमुख,स्वास्थ्य सेवा और सिविल सर्जन, मुजफ्फरपुर द्वारा हलफनामा नहीं दायर करने पर सख्त रुख अपनाया।

कोर्ट ने इन अधिकारियों द्वारा हलफनामा दायर नहीं करने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए उन्हें हलफनामा दायर करने के लिए तीन सप्ताह की मोहलत दी।

पिछली सुनवाई में मुजफ्फरपुर के एस एस पी को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कोर्ट ने निर्देश दिया था।मुकेश कुमार ने ये जनहित याचिका दायर की है।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वी के सिंह ने कोर्ट को बताया था कि इस मामलें में दर्ज प्राथमिकी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।

कोर्ट ने इससे पहले की सुनवाई करते हुए कहा था कि इस मामलें में गठित डॉक्टरों की कमिटी को चार सप्ताह मे अपना रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

पहले की सुनवाई में कोर्ट ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि वे इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए पी एम सी एच या एम्स ,पटना के डॉक्टरों की कमिटी गठित करें।इनमें आँख रोग विशेषज्ञ भी शामिल हो।

इसमें कोर्ट को बताया गया था कि आँखों की रोशनी गवांने वाले पीडितों को बतौर क्षतिपूर्ति एक एक लाख रुपए दिए गए हैं।साथ ही मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल को बंद करके एफ आई आर दर्ज कराया गया था,लेकिन अब तक दर्ज प्राथमिकी पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई ।

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इस याचिका में हाई लेवल कमेटी से जांच करवाने को लेकर आदेश देने अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विजय कुमार सिंह ने आरोप लगाया गया है कि कथित तौर पर आई हॉस्पिटल के प्रबंधन व राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा बरती गई अनियमितता और गैर कानूनी कार्यों की वजह से कई व्यक्तियों को अपनी आँखें की रोशनी खोनी पड़ी।

याचिका में आगे यह भी कहा गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों व अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज करनी चाहिए, क्योंकि इन्हीं की लापरवाही की वजह से सैकड़ों लोगों को अपनी ऑंखें गंवानी पड़ी।

याचिका में पीड़ितों को सरकारी अस्पताल में उचित इलाज करवाने को लेकर आदेश देने का भी अनुरोध किया गया था।इस मामले पर अगली सुनवाई तीन सप्ताह के फिर सुनवाई की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए पेड़ों के संरक्षण हेतु सात सदस्यीय कमिटी की विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में दायर करने का निर्देश दिया

चीफ जस्टिस संजय क़रोल एवं जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने गौरव कुमार सिंह की लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया ।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एक कमिटी बना कर पेड़ों के संरक्षण , नए पेड़ों के लगाए जाने ऐवं ग्रीन बेल्ट के निर्माण हेतु सात सदस्यीय कमिटी बनाई थी । इस कमिटी ने कई बैठकों के बाद अपना रिपोर्ट कोर्ट में दायर किया।

इस मामले की अगली सुनवाई 9 सितम्बर को होगी ।

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आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना, 02 अगस्त 2022। पटना हाईकोर्ट में आज इन मामलों की होगी सुनवाई :

1. नगर निगमों की वित्तीय स्वायत्तता के मामलें पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई करेगी।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को तीन सप्ताह में जवाबी हलफनामा दायर करने का आदेश दिया था।

2. पटना हाईकोर्ट में पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामलें पर सुनवाई की जाएगी।जस्टिस संदीप कुमार इस मामलें पर सुनवाई करेंगे। राज्य सरकार और बिहार राज्य आवास बोर्ड ने जवाब दायर कर दिया था।आज याचिकाकर्ता के वकील अपना बहस जारी रखेंगे।

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पटना हाईकोर्ट ने राज्य के नेत्रहीन बच्चों को आवास और शिक्षा प्रदान करने के लिए स्कूलों की स्थापना से संबंधित लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को चार सप्ताह में हलफनामा देने का निर्देश दिया

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राज कुमार रंजन की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

दिसंबर,2021 को राज्य सरकार द्वारा दायर किए गए शपथ पत्र में सरकार ने यह स्पष्ट रूप से माना था कि इन संस्थानो में बड़ी संख्या में की रिक्तियां हैं,जिन्हें भरना अभी बाकी है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव हलफ़नामे द्वारा इन संस्थानो की स्थापना एवं कामकाज की वस्तुस्थिति स्पष्ट करायें । इस मामले पर अगली सुनवाई 29 अगस्त,2022 को होगी ।

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पटना हाई कोर्ट में नेपाली नगर/ राजीवनगर से संबंधित मामले पर सुनवाई अब 2 अगस्त,2022 को की जाएगी

इस मामलें पर आज जस्टिस संदीप कुमार के कोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन एडवोकेट जनरल के चीफ जस्टिस के कोर्ट में व्यस्त रहने के कारण सुनवाई नही हो सकी।

इस मामले पर सुनवाई शुरू होते ही एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को कहा कि यह मामला नेपाली नगर /राजीव नगर के 400 एकड़ जमीन का चल रहा है।600 एकड़ जमीन का मामला यह नही है ,इसके बाद भी इसके अगर कोई व्यक्ति राजीव नगर में अपने बने हुए मकान में कुछ काम करवाता है, तो पुलिस आकर उसे रोक दे रही है ।

इस पर कोर्ट ने कहा कि जो भी बात कहनी है उसे रिट याचिका दायर कर कहा जाय, ताकि कोर्ट उचित निर्देश दे सके। कोर्ट ने हाउसिंग बोर्ड के वकील को कहा कि वह बोर्ड के एमडी से इस संबंध में बात करे और उस इलाके में एक कंट्रोल रूम स्थापित करने को कहें।

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अगर कंट्रोल रूम बन जाता है, तो उसे सेटेलाइट से जोड़ कर वहीं से इस इलाके की जमीन पर किये जा रहे किसी भी निर्माण को देखा जा सकता है।

पटना हाईकोर्ट ने सरकारी अधिवक्ता को केस डायरी और चार्ज शीट की प्रति उपलब्ध नहीं होने को काफी गम्भीरता से लिया

जस्टिस जीतेन्द्र कुमार ने एक जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान यह पाया कि सरकारी अधिवक्ता के पास केस डायरी उपलब्ध नहीं हैं।

कोर्ट ने कहा कि इस सम्बन्ध में आवश्यक कार्रवाई करने की जरूरत हैं।उन्होंने जिलों के एस पी/ एस एस पी को निर्देश दिया कि सरकारी अधिवक्ता को केस डायरी और चार्जशीट की कॉपी उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।अन्यथा न्यायिक कार्य सही ढंग से संपन्न नहीं होगा और ऐसी परिस्थितियों में न्याय सही ढंग से नहीं हो पाने की भी संभावना हो सकती है।

साथ ही कोर्ट ने कहा कि जमानत याचिका के दायर होने के साथ सरकारी अधिवक्ता एजी ऑफिस से इस सम्बन्ध में जानकारी ले कर सम्बंधित एस पी/एस एस पी को केस डायरी और चार्जशीट उपलब्ध कराने की सूचना देंगे।

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कोर्ट ने कहा कि अक्सर देखा जाता हैं कि जिस सरकारी अधिवक्ता को केस सौंपा जाता हैं,या तो कोर्ट में नहीं होते या दूसरे कोर्ट में केस कर रहे होते हैं।ऐसे में ये आवश्यक है कि सभी ऐसे कोर्ट के लिए अलग अलग स्टैंडिंग कोंसिल हो,जो कि केस का संक्षिप्त अध्ययन कर कोर्ट के समक्ष मामलें पर कोर्ट को सहयोग दे सके।

कोर्ट ने इस मामलें में कार्रवाई हेतु राज्य के मुख्य सचिव और डी जी पी को आदेश की प्रति प्रेषित करने का निर्देश दिया। इस मामलें पर अगली सुनवाई 3अगस्त,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट में पटना स्थित जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट,पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के विकास और विस्तार के मामले पर सुनवाई दस दिनों के लिए टल गयी है

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ द्वारा गौरव सिंह व अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की जा रही हैं।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र,राज्य सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को राज्य के एयरपोर्ट के सुधार पर बैठक कर अगली सुनवाई में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।

आज कोर्ट मे उपस्थित पूर्व केंद्रीय मंत्री और पायलट राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि राज्य के हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण, विकास और विस्तार में आपस में तालमेल की जरूरत हैं।इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार को आपसी सहयोग से यह किया जा सकता हैं।

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पिछली सुनवाई में उन्होंने बताया था कि राज्य में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाए जाने की आवश्यकता है।उन्होंने कहा था कि कई राज्यों में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि बिहार में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाया जाना चाहिए।

कोर्ट को उन्होंने बताया कि बिहार में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाया जाना चाहिए।बिहार में एक भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नहीं है।उन्होंने बताया कि छपरा के पास इसके लिए पर्याप्त और सस्ती भूमि उपलब्ध हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के नोडल अधिकारी को तलब किया था।साथ ही पटना एयरपोर्ट के पूर्व और वर्तमान निर्देशक को भी तलब किया था।

राज्य में पटना के जयप्रकाश नारायण अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के अलावा गया, मुजफ्फरपुर,दरभंगा,भागलपुर,फारबिसगंज , मुंगेर और रक्सौल एयरपोर्ट हैं।लेकिन इन एयरपोर्ट पर बहुत सारी आधुनिक सुविधाओं के अभाव व सुरक्षा कीसमस्या हैं।
इस मामले पर अगली सुनवाई दस दिनों बाद की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न विभागों में असिस्टेंट इंजीनियर (सिविल) की बहाली में संविदा पर बहाल हुए इंजीनियर को नियमित में छूट नहीं देने के मामले पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने शशि प्रकाश झा व अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार व बिहार राज्य पब्लिक कमीशन से जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि आयोग परीक्षा संचालित कर सकती है ,लेकिन इसका परिणाम इन याचिकाओं के परिणाम पर निर्भर करेगा।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता का इस मामले में कहना था कि अस्सिस्टेंट इंजीनियर (सिविल) के पद पर नियमित बहाली के लिए बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा जो विज्ञापन निकाला गया है, उसमें संविदा पर कार्यरत अभ्यर्थियों के लिए राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दिये गए सकारात्मक आदेश के बावजूद वैटेज नहीं दिया गया है।

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जबकि संविदा पर कार्यरत अभ्यर्थियों को हर साल के लिए अधिकतम 25 अंक तक छूट देने और कार्य किये गए साल के मुताबिक छूट देने की बात कही गई थी।

इस मामले पर आगे की सुनवाई अब दो सप्ताह बाद कि जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फ़ैसले में बलात्कार के आरोपित की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि बलात्कार पीड़िता के व्यक्तित्व को आजीवन आघात करता है

जस्टिस ए एम बदर की खंडपीठ ने भोजपुर के रहने वाले एक व्यक्ति की अपील याचिका को ख़ारिज करते हुए उक्त टिप्पणी की ।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत में शायद ही कोई लड़की या महिला यौन उत्पीड़न का झूठा आरोप लगाती है अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार, 14 नवंबर, 2007 को उसके और अपीलकर्ता के बीच लगातार झगड़ों के कारण उसकी पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी।

उसकी मौत के तुरंत बाद, आरोपी ने अपनी बड़ी बेटी का यौन उत्पीड़न करना शुरू कर दिया, जो उस समय नाबालिग थी। यौन शोषण लड़की के लिए एक दिनचर्या बन गया और चूंकि अपीलकर्ता उसका पिता था, उसने उसके बारे में किसी से शिकायत नहीं की।

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जब वह व्यक्ति अपनी छोटी बेटी को भी गाली देने लगा, तो बड़ी बेटी ने इसकी जानकारी अपने मामा को दी।
हालांकि, लड़कियों ने 30 जुलाई, 2013 को साहस दिखाया और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत बलात्कार (376) और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पोक्सो) के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।

इस मामले पर निचली अदालत ने आरोपी को उम्रक़ैद की सजा सुनाई थी जिसके विरुद्ध उसने हाईकोर्ट में अपील दायर की,जिस पर हाईकोर्ट ने कोई राहत नहीं दी।

पटना हाईकोर्ट ने बक्सर के एसपी को निर्देश दिया कि हर हाल में वे चार सप्ताह में औद्योगिक थाना के वर्तमान भवन को अन्यत्र दूसरे भवन में स्थानांतरित कर दें

जस्टिस संदीप कुमार ने मेसर्स गजेंद्र ह्यूम पाइप की रिट याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने ये निर्देश दिया कि कार्रवाई की रिपोर्ट शपथ पत्र दायर कर दी जाए।कोर्ट ने इस बात पर भी हैरान जताई कि मकान मालिक को बिना किराया दिए ही किसी के निजी मकान में पुलिस थाना वर्षों से चल रहा है।इसे खाली भी नही किया जा रहा है।

कोर्ट ने बक्सर के एसडीओ को निर्देश देते हुए कहा कि इस बीच वे इस बात की जानकारी प्राप्त कर कोर्ट को अगली सुनवाई में शपथ पत्र पर दें कि जिस मकान में थाना चल रहा है, उस मकान का किराया प्रति माह कितना होना चाहिये। कोर्ट ने बीएसएफसी पर भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जिस मकान को नीलाम कर बेच दिया गया, उस पर खरीदने वाले का दखल कब्जा क्यों नही दिलवाया गया।कोर्ट ने उससे भी जबाब मांगा है।

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कोर्ट को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि बीएसएफसी से नीलाम लेकर वर्ष 2011 में इस मकान को खरीदा था।खरीदने के बाद इस मकान को खाली कराने के लिये बक्सर के एसपी समेत राज्य के डीजीपी औऱ गृह सचिव समेत कई पदाधिकारियों को लिखित अनुरोध किया गया, लेकिन इसे खाली नही किया गया।

इस मामलें पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के पूर्व एवं वर्तमान सांसदों, विधायकों के विरुद्ध लंबित आपराधिक मुकदमों के निष्पादन हेतु गृह विभाग के प्रधान सचिव को तीन सप्ताह में हलफ़नामा देने का निर्देश दिया

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ के समक्ष वर्तमान और पूर्व एमपी व एमएलए के विरुद्ध आपराधिक मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए सुनवाई हो रही है।

हाईकोर्ट ने वर्तमान और पूर्व एमपी व एमएलए के विरुद्ध आपराधिक मामलों से संबंधित पूरी जानकारी सरकार से माँगी है ।

पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट में सुनवाई करते हुए राज्य के डीजीपी को अभियोजन के डायरेक्टर के साथ अविलंब बैठक कर के गवाही के लिए लंबित मुकदमों में जल्द गवाह पेश करने को कहा था।

इससे पहले भी राज्य सरकार द्वारा दायर विस्तृत हलफनामें में इनके विरुद्ध लंबित मुकदमों के संबंध में चार्ज फ्रेमिंग, गवाही व बहस की स्थिति के संबंध में जानकारी दी गई थी।

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राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ललित किशोर ने बताया था कि वर्तमान व पूर्व एम पी और एम एल ए के विरुद्ध कुल 598 आपराधिक मुकदमें लंबित है, जिसमें अधिकतर केस में अनुसंधान पूरा हो गया है। लगभग 78 आपराधिक मुकदमों में अनुसंधान लंबित है।

इस मामले की अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए टली

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने आकांक्षा मालवीय की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को विस्तृत जानकारी देने को कहा था।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवा में क्या क्या कमियों के सम्बन्ध में ब्यौरा देने को कहा था। साथ ही इसमें सुधारने के उपाय पर सुझाव देने को कहा।

कोर्ट को बताया गया था कि केंद्र सरकार की ओर से दिए जाने वाले फंड में कमी आयी है,क्योंकि फंड का राज्य द्वारा पूरा उपयोग नहीं हो रहा था।पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े स्कीम और फंड के सम्बन्ध में जानकारी देने को कहा।

पहले की सुनवाई में याचिकाकर्ता की अधिवक्ता आकांक्षा मावीय ने कोर्ट को बताया कि बिहार की आबादी लगभग बारह करोड़ हैं।उसकी तुलना में राज्य में मानसिक स्वास्थ्य के लिए बुनियादी सुविधाएँ नहीं के बराबर हैं।

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कुछ अस्पताल,मनोचिकित्सक और नर्स पर्याप्त नहीं है।उन्होंने कहा कि आम लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और उसके समाधान के लिए राज्य में कोई व्यवस्था नहीं है।

जो केंद्र सरकार के स्कीम और फंड है,उसका भी राज्य में सही ढंग से उपयोग नहीं हो रहा है। अपर महाधिवक्ता एस डी यादव ने पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया था कि कोइलवर स्थित मानसिक आरोग्यशाला में 272 बेड का अस्पताल बनाया जाना हैं।इसकी लागत 129 करोड़ रुपए होगी और 3 माह में निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।

इस मामलें पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

पटना हाईकोर्ट ने ट्राइबल रिसर्च इंस्टिट्यूट को अबतक स्थापित नहीं किये जाने पर सुनवाई की

इस जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ को राज्य सरकार ने बताया कि ट्राइबल रिसर्च इंस्टिट्यूट लगभग चार महीने में कार्य करने लगेगा।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को ट्राइबल रिसर्च इंस्टिट्यूट को स्थापित करने की समय सीमा बताने को कहा था।ये जनहित याचिका बिहार आदिवासी अधिकार फोरम ने की है।

सरकारी अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने कोर्ट को बताया कि ट्राइबल रिसर्च इंस्टिट्यूट को स्थापित करने की प्रक्रिया लगभग चार माह में पूरी हो जाएगी।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस इंस्टिट्यूट को स्थापित करने के वित्तीय,प्रशासनिक और अधिकारियों व कर्माचारियों को नियुक्त करने की प्रक्रिया शीघ्र प्रारम्भ हो रही हैं।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि ट्राइबल रिसर्च इंस्टिट्यूट के लिए पटना के बेली रोड में एक भवन की व्यवस्था कर ली गई है।जबतक ट्राइबल रिसर्च इंस्टिट्यूट के लिए स्थाई भवन की व्यवस्था नहीं हो जाती,तबतक ट्राइबल रिसर्च इंस्टिट्यूट इस भवन में कार्य करेगा।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सम्बंधित सचिव को इस सम्बन्ध में पूरी जानकारी देते हुए एक सप्ताह में जवाब दायर करने का निर्देश दिया था।

इससे पहले की सुनवाई में सरकारी अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने कोर्ट को बताया था कि 30 जून,2022 को बिहार के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक बैठक हुई।इसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे।याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास पंकज ने कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत किया।

कोर्ट ने इस मामलें को सुनवाई करने के इसे निष्पादित कर दिया।

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना, 26 जुलाई 2022। पटना हाईकोर्ट में आज इन मामलों की होगी सुनवाई :

1.राज्य में निर्माण हो रहे एन एच से सम्बंधित जनहित याचिकाओं पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई की जाएगी। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ विकास कुमार व अन्य की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। आज कोर्ट में एन एच ए आई के चेयरमैन भी उपस्थित रहेंगे।


2.पटना हाईकोर्ट में पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामलें पर सुनवाई की जाएगी । जस्टिस संदीप कुमार इस मामलें पर सुनवाई करेंगे। राज्य सरकार और बिहार राज्य आवास बोर्ड ने जवाब दायर कर दिया था। आज याचिकाकर्ता के वकील अपना बहस जारी रखेंगे।

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3.पटना हाईकोर्ट ने बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ द्वारा आकांक्षा मालवीय की जनहित याचिका पर सुनवाई की जा रही है।

कोर्ट ने इससे पूर्व याचिकाकर्ता को राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवा में क्या क्या कमियों के सम्बन्ध में ब्यौरा देने को कहा था। साथ ही इसमें सुधारने के उपाय पर सुझाव देने को कहा था।

पटना हाईकोर्ट ने खुलेआम जानवरों को मारे जाने और मांस बेचने के मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार व पटना नगर निगम को तीन सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है

चीफ जस्टिस संजय क़रोल एवं जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने संजीव कुमार मिश्रा की लोकहित याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना में खुलेआम जानवरों को मारे जाने और नियमों का उल्लंघन कर मांस और मछ्ली बेचने को गम्भीरता से लिया।

याचिकाकर्ता की अधिवक्ता मानिनी जायसवाल ने बताया कि हाईकोर्ट के कई निर्देशों के बाद भी पटना में खुलेआम मांस की बिक्री हो रही है और जानवरों की हत्या की जा रही है । पटना नगर सीमा के भीतर कई स्थानों जानवरों को खुलेआम काटा जा रहा है, जिससे आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर ग़लत प्रभाव पड़ रहा है ।

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इससे पहले भी इस मुद्दे पर दायर जनहित याचिका पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए कई सख्त आदेश पारित किया था, लेकिन सुधार होने के बजाय स्थिति और भी खराब होती गई।

इस मामले पर अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी ।

पटना हाईकोर्ट में एनएच निर्माण और मरम्मती से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई कल तक के लिए टली

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने विकास कुमार व अन्य की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की।कोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में एन एच ए आई के चेयरमैन को कल 26 जुलाई,2022 को तलब किया।

अधिवक्ता विकास कुमार ने बताया कि बेगूसराय – सिमरिया राष्ट्रीय राजमार्ग पर औटा के पास पुल निर्माण में विलम्ब हो रहा है।इससे स्थानीय लोगों को काफी कठिनाई हो रही है।कोर्ट ने स्थिति को स्पष्ट करने के लिए एन एच ए आई के चेयरमैन को तलब किया हैं।

इस मामलें पर पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि पटना गया डोभी एन एच,83 के निर्माण में कई तरह की कठिनाइयां और समस्याएं आ रही हैं।कोर्ट ने इस निर्माणधीन एन एच के स्थल निरीक्षण करने के लिए तीन अधिवक्ताओं की टीम का गठन किया गया था। अधिवक्ता प्रिय रंजन,आलोक कुमार राही और याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मनीष गुप्ता इसमें शामिल थे।

साथ ही कोर्ट ने पटना और जहानाबाद के डी एम, एस पी भी इस टीम के साथ रहने का निर्देश दिया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान इस कमिटी ने निरीक्षण कर रिपोर्ट दे दिया था।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार और एन एच ए आई को निर्देश दिया था कि एन एच में सभी अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई शीघ्र करें।कोर्ट ने सम्बंधित ज़िला प्रशासन को अतिक्रमण हटाने में सहयोग और पुलिस बल मुहैय्या कराने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में ज़िला प्रशासन को, जिनका भूमि अधिग्रहण किया गया है, उन्हें मुआवजा देने की कार्रवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया था।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 26जुलाई,2022 को होगी।

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना हाईकोर्ट में आज इन मामलों की होगी सुनवाई :

1. राज्य में निर्माण हो रहे एन एच से सम्बंधित जनहित याचिकाओं पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ विकास कुमार व अन्य की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

2. पटना हाईकोर्ट में विभिन्न जिलों में वाटर Bodies ( जलीय क्षेत्रों) में हुए अतिक्रमणों से संबंधित जनहित याचिका सुनवाई की जाएगी।रामपुनीत चौधरी की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ सुनवाई करेगी।

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पटना हाईकोर्ट में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के स्मारकों की दयनीय हालत से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए टल गयी

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ द्वारा इस मामलें पर सुनवाई की जा रही है।

कल एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कोर्ट को बताया कि पटना के बिहार विद्यापीठ का प्रबंधन अपने हाथों में लेने के लिए राज्य केबिनेट ने अध्यादेश पारित कर दिया हैं।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने विकास कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से बिहार विद्यापीठ के प्रबंधन अपने हाथ में लेने हेतु कानून बनाने को कहा।कोर्ट ने कहा था कि अगर विधान सभा यदि सत्र में नहीं हो,तो इसके लिए अध्यादेश लाया जा सकता है, जिसे बाद में कानून का रूप दिया जा सकता है।

बिहार विद्यापीठ द्वारा एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है।सुप्रीम कोर्ट ने इस मामलें की सुनवाई 25 जुलाई,2022 को निर्धारित की है।

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कोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार को पटना स्थित बिहार विद्यापीठ का प्रबंधन अपने हाथ में लेने के लिए विशेष प्रस्ताव राज्य सरकार को पारित करने को कहा था।

इस मामलें पर दो सप्ताह बाद सुनवाई की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने पटना स्थित जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट,पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के मामले पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ द्वारा गौरव सिंह व अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की।

कोर्ट ने केंद्र,राज्य सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को राज्य के एयरपोर्ट के सुधार पर बैठक कर अगली सुनवाई में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।

एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री व पायलट राजीव प्रताप रूडी ने कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत किया।उन्होंने राज्य में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाए जाने के मुद्दे को उठाया।
उन्होंने कहा कि कई राज्यों में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि बिहार में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाया जाना चाहिए।

कोर्ट को उन्होंने बताया कि बिहार में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाया जाना चाहिए।बिहार में एक भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नहीं है।उन्होंने बताया कि छपरा के पास इसके लिए पर्याप्त और सस्ती भूमि उपलब्ध हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के नोडल अधिकारी कोप तलब किया था।साथ ही पटना एयरपोर्ट के पूर्व और वर्तमान निर्देशक को भी तलब किया था।

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साथ ही कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को भी नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार को गया एयरपोर्ट के विकास के सन्दर्भ में बताने को कहा था कि 268 करोड़ रुपए की धनराशि कब तक दिया जाएगा।

इससे पहले की सुनवाई में पटना के जयप्रकाश नारायण एयरपोर्ट के निर्देशक कोर्ट में उपस्थित हो कर पटना एयरपोर्ट की स्थिति बताते हुए कहा था कि हवाई जहाज लैंडिंग की काफी समस्या है।सामान्य रूप से रनवे की लम्बाई नौ हज़ार फीट होती हैं,जबकि पटना में रनवे की लम्बाई 68 सौ फीट हैं।

कोर्ट को राज्य के गया,पूर्णियां और अन्य एयरपोर्ट के विस्तार,विकास और भूमि अधिग्रहण से सम्बंधित समस्यायों के बारे में बताया गया।

राज्य में पटना के जयप्रकाश नारायण अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के अलावा गया, मुजफ्फरपुर,दरभंगा,भागलपुर,फारबिसगंज , मुंगेर और रक्सौल एयरपोर्ट हैं।लेकिन इन एयरपोर्ट पर बहुत सारी आधुनिक सुविधाओं के अभाव व सुरक्षा की समस्या हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 28जुलाई,2022 को की जाएगी।

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना हाईकोर्ट में आज इन मामलों की होगी सुनवाई :-

1. पटना हाईकोर्ट ने बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ द्वारा आकांक्षा मालवीय की जनहित याचिका पर सुनवाई की जा रही है।

कोर्ट ने इससे पूर्व याचिकाकर्ता को राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवा में क्या क्या कमियों के सम्बन्ध में ब्यौरा देने को कहा था। साथ ही इसमें सुधारने के उपाय पर सुझाव देने को कहा था।

2. पटना हाईकोर्ट ने देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के स्मारकों की दयनीय हालत से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने समक्ष विकास कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही हैं।

कोर्ट ने इससे पहले की सुनवाई में राज्य सरकार से बिहार विद्यापीठ के प्रबंधन अपने हाथ में लेने हेतु कानून बनाने को कहा था।

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3. पटना हाई कोर्ट में नारायणपुर – मनहारी- पूर्णिया हाईवे के निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई को रोकने के लिये दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई करेगी।

पिछली सुनवाई में एन एच ए आई को बताने को कहा गया था कि नए वृक्षारोपण के लिए क्या कार्रवाई की जा रही हैं।साथ ही वृक्षारोपण के मामलें मे ग्राम पंचायत की अधिकार और भूमिका के सम्बन्ध में भी जानकारी तलब किया गया।

4. पटना हाईकोर्ट में राज्य के पटना स्थित जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट,पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के मामले पर सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ द्वारा गौरव कुमार सिंह व अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की जा रही हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के नोडल अधिकारी क तलब किया था।साथ ही पटना एयरपोर्ट के पूर्व और् निर्देशक को भी पिछली सुनवाई में तलब किया था।

पटना मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड प्रोजेक्ट के लिए संपत्ति अधिग्रहण के दौरान याचिकाकर्ताओं के घरों को अधिग्रहण से अलग रखने हेतु दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट ने किसी तरह का हस्तक्षेप करने से इनकार किया

जस्टिस संदीप कुमार ने रजनीश कुमार व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए इस आदेश को पारित किया।

याचिकाकर्ताओं ने इस प्रोजेक्ट के निर्माण से अपने घरों को अलग रखने के लिए आदेश देने का आग्रह किया था।

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता का कहना था कि भूमि अधिग्रहण के मामले में अपने भूमि को अधिग्रहण से अलग रखने का भी प्रावधान है। गया स्थित बिहार प्रशासनिक भवन के अधिग्रहण के मामले को अधिसूचना से अलग रखने को अधिसूचना को समाप्त किया गया था ।

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किन्तु याचिकाकर्ता ओं के मामलों में ऐसा नहीं किया जा रहा है। यदि सरकार उचित समझती है, तो इस तरह का निर्णय लेती है। पहाड़ी मौजा के संबंधित वार्ड नम्बर 56 के वार्ड से सम्बंधित है।कोर्ट ने मेट्रो रेल को चार सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करने को कहा।चार सप्ताह बाद इस मामलें पर सुनवाई होगी।

पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामलें में पटना हाईकोर्ट में सुनवाई अधूरी रही

जस्टिस संदीप कुमार ने इस मामलें पर सुनवाई की।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने यथास्थिति बहाल रखने का निर्देश दिया था।

राज्य सरकार और बिहार राज्य आवास बोर्ड ने कोर्ट को बताया कि इस स्थिति का लाभ उठा कर कुछ उस क्षेत्र में नए निर्माण करने लगे हैं।

कोर्ट ने इसे काफी गम्भीरता से लेते हुए स्पष्ट आदेश दिया कि अगर इस तरह का निर्माण हो रहा हैं, तो उसे कड़ाई के साथ रोका जाए।साथ ही इस प्रकार के निर्माण करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। जवाब दायर किया।

पिछली सुनवाई कोर्ट ने जानना चाहा था कि जब हाउसिंग बोर्ड को खुद अतिक्रमण हटाने की शक्ति है, तो ज़िला प्रशासन क्यों अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की।ज़िला प्रशासन को अतिक्रमण हटाने को कब कहा गया।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने वहां रह रहे नागरिकों को बिजली और पानी आपूर्ति बहाल करने का आदेश दिया था, लेकिन कोर्ट को बताया गया कि बिजली विभाग ने विद्युत् आपूर्ति अब तक बहाल नहीं की हैं।आज साउथ बिहार पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के वकील कुमार मनीष ने कोर्ट को बताया कि 23 घरों में अस्थायी रूप से बिजली बहाल कर दी गई है।

आज कोर्ट में याचिकाकर्ता का पक्ष प्रस्तुत करते हुए वरीय अधिवक्ता वसंत कुमार चौधरी ने कोर्ट को बताया कि इस क्षेत्र से इस तरह से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सही नहीं है।उन्होंने कहा कि अनाधिकृत रूप बसे लोगों के भी कानूनी अधिकार है।

ज़िला प्रशासन ने इसकी अनदेखी करते हुए मनमाने ढंग से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की, जो सही नहीं हैं।

अगली सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से बहस जारी होगी।साथ ही राज्य सरकार व आवास बोर्ड की ओर से भी पक्षों को प्रस्तुत किया जाएगा।

इस मामलें पर फिर सुनवाई 21 जुलाई,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने ट्राइबल रिसर्च इंस्टिट्यूट को अबतक तक नहीं स्थापित नहीं किये जाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर किया

इस जनहित याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने करते हुए राज्य सरकार को ट्राइबल रिसर्च इंस्टिट्यूट को स्थापित करने की समय सीमा बताने को कहा।ये जनहित याचिका बिहार आदिवासी अधिकार फोरम ने की है।

सरकारी अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने कोर्ट को बताया कि ट्राइबल रिसर्च इंस्टिट्यूट को स्थापित करने की प्रक्रिया में एक वर्ष का समय लगेगा।उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस इंस्टिट्यूट को स्थापित करने के वित्तीय,प्रशासनिक और अधिकारियों व कर्माचारियों को नियुक्त करने की प्रक्रिया में एक वर्ष का समय लगेगा।

इस पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इतने गंभीर मुद्दे पर राज्य सरकार गंभीर क्यों नहीं है।कोर्ट ने सम्बंधित सचिव को इस सम्बन्ध में पूरी जानकारी देते हुए एक सप्ताह में जवाब दायर करने का निर्देश दिया।

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सरकारी अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने कोर्ट के पिछले आदेश के अनुपालन में जिलों में आदिवासियों की जनसंख्या और स्कूलों की सूची प्रस्तुत किया। कोर्ट ने इस सूची को देख कर कहा कि कई जिलों में आदिवासी जनसंख्या अच्छी खासी हैं। राज्य में बीस आवासीय स्कूल हैं।

इससे पहले की सुनवाई में सरकारी अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने कोर्ट को बताया था कि 30 जून,2022 को बिहार के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक बैठक हुई।इसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे।याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास पंकज ने कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत किया।

इस मामलें पर अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट में राज्य के पूर्व मंत्री सह विधायक तेजप्रताप यादव की पत्नी ऐश्वर्या राय की अपील पर सुनवाई 18 अगस्त,2022 को की जाएगी

जस्टिस आशुतोष कुमार सिंह और जस्टिस जीतेन्द्र कुमार की खंडपीठ ने इस अपील पर सुनवाई की।कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों को सुलह का प्रयास करने को कहा था।

इसके लिए पहले की सुनवाई में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को इनके बीच बैठक कर सुलह के मुद्दे पर संभावना तलाशने को कहा था।

पिछली सुनवाई में तेजप्रताप और ऐश्वर्या न्याय कक्ष में उपस्थित थे।इनके साथ तेजप्रताप की माँ पूर्व सी एम राबडी देवी और ऐश्वर्या के पिता न्याय कक्ष में उपस्थित थे।सारी सुनवाई बंद कक्ष में हुआ था।

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ऐश्वर्या की ओर से वरीय अधिवक्ता पी एन शाही ने कोर्ट के पक्ष रखा।तेज प्रताप के अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने बताया कि घरेलू हिंसा को लेकर ऐश्वर्या राय के विरुद्ध पारित आदेश व भरणपोषण(मेंटेनेन्स) से जुड़े मामले में राशि को बढ़ाने को लेकर हाई कोर्ट में अपील दायर किया गया है।

इस मामलें की सुनवाई अब अगली सुनवाई 18अगस्त, 2022 को की जाएगी।

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना हाईकोर्ट में आज इन मामलों की होगी सुनवाई :-

1. पटना हाई कोर्ट में राज्य के पूर्व मंत्री सह विधायक तेजप्रताप यादव की पत्नी ऐश्वर्या राय की अपील पर सुनवाई की जाएगी। जस्टिस आशुतोष कुमार सिंह और जस्टिस जीतेन्द्र कुमार की खंडपीठ इस अपील पर सुनवाई करेगी।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुलह का प्रयास करने को कहा। इसके लिए दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को इनके बीच बैठक कर सुलह के मुद्दे पर संभावना तलाशने को कहा था।


2. पटना हाईकोर्ट में पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामलें पर सुनवाई की जाएगी।जस्टिस संदीप कुमार इस मामलें पर सुनवाई करेंगे।

पिछली सुनवाई में राज्य सरकार और बिहार राज्य आवास बोर्ड ने जवाब दायर किया था।


3. पटना हाईकोर्ट ने बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ द्वारा आकांक्षा मालवीय की जनहित याचिका पर सुनवाई की जा रही है।

कोर्ट ने इससे पूर्व याचिकाकर्ता को राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवा में क्या क्या कमियों के सम्बन्ध में ब्यौरा देने को कहा था। साथ ही इसमें सुधारने के उपाय पर सुझाव देने को कहा था।

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4. पटना हाई कोर्ट ने पटना -गया -डोभी एनएच 83 फोर लेन के मामले में सुनवाई की जाएगी। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ समक्ष अधिवक्ताओं की कमिटी ने अपनी रिपोर्ट पेश किया था।

कोर्ट ने इस निर्माणधीन एन एच के स्थल निरीक्षण करने के लिए तीन अधिवक्ताओं की टीम का गठन किया गया था। अधिवक्ता प्रिय रंजन,आलोक कुमार राही और याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मनीष गुप्ता इसमें शामिल थे।


5. पटना हाईकोर्ट ने देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के स्मारकों की दयनीय हालत से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई की जाएगी।

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने समक्ष विकास कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही हैं।कोर्ट ने इससे पहले की सुनवाई में राज्य सरकार से बिहार विद्यापीठ के प्रबंधन अपने हाथ में लेने हेतु कानून बनाने को कहा था।


6. पटना हाई कोर्ट में नारायणपुर-मनहारी-पूर्णिया हाईवे के निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई को रोकने के लिये दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की जाएगी। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई करेगी।

पिछली सुनवाई में एन एच ए आई को बताने को कहा गया था कि नए वृक्षारोपण के लिए क्या कार्रवाई की जा रही हैं।साथ ही वृक्षारोपण के मामलें मे ग्राम पंचायत की अधिकार और भूमिका के सम्बन्ध में भी जानकारी तलब किया गया।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी मेडिकल कालेजों में एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन अब तक नहीं लगाए जाने के मामलें पर सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रखा

जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह की खंडपीठ ने नागरिक अधिकार मंच की जनहित याचिका पर सुनवाई की।इस जनहित याचिका पर निर्णय 28 जुलाई,2022 को दिया जाएगा।

आज राज्य सरकार की ओर से सीटी स्कैन और एम आर आई मशीन सभी मेडिकल कालेजों में लगाने के लिए पाँच महीने का समय माँगा जा रहा था।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को बताने को कहा कि ये मशीन कब तक लग कर चालू होगा।

कोर्ट ने राज्य सरकार से जानना चाहा था कि आम जनता को सरकारी अस्पताल में इस तरह की जांच कम पैसे में होती है,जबकि निजी अस्पतालों में काफी पैसा खर्च करना होता हैं, तो अब तक सरकार ने इन्हें क्यों नहीं लगाया।

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ये जनहित याचिका 2015 में दायर की गई थी।इन वर्षो में कोर्ट ने राज्य सरकार को सरकारी मेडिकल कालेजों में इन मशीनों को लगाने व चालू करने के कई आदेश दिया।लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।इसका नतीजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा हैं।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के बार बार आदेश करने के बाद भी सीटी स्कैन और एम आर आई मशीन इन अस्पतालों में अब तक नही लगाया गया है।इससे आमलोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड रहा है।

उन्होंने बताया कि जहाँ सरकारी अस्पताल में इन जांचो में काफी कम खर्च होता हैं,वहीं निजी अस्पतालों में आमलोगों को काफी खर्च करना पडता हैं।इससे उन्हें काफी आर्थिक कठिनाई का सामना करना पड़ता हैं।
इस जनहित याचिका पर 28 जुलाई,2022 को कोर्ट निर्णय सुनाएगा।