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Patna High Court News: पिछले दो दशकों से राज्य के विभिन्न निचली अदालतों में बड़ी संख्या में लंबित आपराधिक मुकदमों के मामलें पर सुनवाई अधूरी रही

पटना हाइकोर्ट में पिछले दो दशकों से राज्य के विभिन्न निचली अदालतों में बड़ी संख्या में लंबित आपराधिक मुकदमों के मामलें पर सुनवाई अधूरी रही। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ कौशिक रंजन की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

पिछली सुनवाई में Patna High Court ने बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार(बालसा)के सचिव को नेशनल जुडिशल ग्रिड और नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के उपलब्ध आंकड़े को मूल रिकॉर्ड से जांच करने का निर्देश दिया था।

याचिकाकर्ता कौशिक रंजन की अधिवक्ता शमा सिन्हा ने कोर्ट को बताया था कि बड़ी तादाद में आपराधिक मामलें लंबित पड़े है।उन्होंने बताया कि लगभग 67 हज़ार मामलें ऐसे है,जिनमें पार्टियां कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।

Patna High Court ने बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार व विभिन्न ज़िला विधिक सेवा प्राधिकार को ऐसे मामलों को चिन्हित कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।अधिवक्ता शमा सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि वकीलों सहायता के अभाव में लगभग सात लाख आपराधिक मामलें लंबित है।

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Patna High Court ने इस सम्बन्ध में बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार को आंकड़े की जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने कहा कि इन मामलों में वकीलों की सहायता दिए जाने को गम्भीरता से लिया जाना चाहिए था।

अधिवक्ता शमा सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि बहुत सारे मामलें काफी पुराने है,जिनमें अधिकांश सन्दर्भहीन हो चुके है।तीस चालीस साल पुराने मामलों का कोई अर्थ नहीं रह जाता है। याचिकाकर्ता के वकील शमा सिन्हा ने Patna High Court को बताया था कि ये आंकड़े नेशनल जुडिशल ग्रिड और नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो से मिले है।इन्ही आंकड़ों को कोर्ट के सामने पेश किया गया।

Patna High Court को यह भी बताया गया इतने पुराने लंबित मामले में आरोपी और परिवादी दोनों की जीवित रहने पर संदेह है, ऐसी स्थिति में या नहीं तो बेकार और कानूनी तौर पर औचित्य पड़े अपराधिक मामले को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए ।

इस मामलें पर सुनवाई कल भी जारी रहेगी।

बिहार बोर्ड ने इंटरमीडिएट (12th) वार्षिक परीक्षा, 2023 का रिजल्ट किया जारी; 83.70% स्टूडेंट्स हुए पास, यहां देखें रिजल्ट-टॉपर्स लिस्ट

पटना । बिहार इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा, 2023 का परीक्षाफल मंगलवार दिनांक 21.03.2023 को अपराह्न 02:00 बजे जारी किया गया। बिहार के शिक्षा मंत्री प्रो चंद्रशेखर और बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने घोषित किया रिजल्ट। बिहार सरकार ने घोषणा की है कि टॉप 6 स्टूडेंट्स को लैपटॉप, किंडल ई-बुक और 1 लाख नगद इनाम दिया जाएगा।

बिहार बोर्ड ने इंटर का रिजल्ट जारी किया, जिसमें 83.70% स्टूडेंट्स पास हुए हैं। यह पिछली बार से 3.55% ज्यादा है। तीनों स्ट्रीम में लड़कियां टॉपर रही हैं। आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स मिलाकर 13 साल 4 हजार 586 स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी।

आर्ट्स में 82.74%, वाणिज्य में 93.35% और साइंस में 83.93% छात्र सफल। साइंस में आयुषी नंदन बनी टॉपर , आर्ट्स में मोहनिशा और कॉमर्स में सौम्या और रजनीश बने टॉपर।

साइंस स्ट्रीम में आयुषी नंदन 94.8% के साथ, कॉमर्स स्ट्रीम में सौम्या शर्मा और रजनीश 95% के साथ और आर्ट्स स्ट्रीम में पूर्णिया की मोहनिसा 95% के साथ टॉपर घोषित।

छात्र-छात्राएं अपना परिणाम, घोषित होने के बाद आधिकारिक वेबसाइट biharboardonline.bihar.gov.in, secondary.biharboardonline.com और results.biharboardonline.com पर देख सकते हैं।

बिहार बोर्ड ने इंटरमीडिएट (12th) वार्षिक परीक्षा, 2023 का रिजल्ट किया जारी

पटना । बिहार इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा, 2023 का परीक्षाफल मंगलवार दिनांक 21.03.2023 को अपराह्न 02:00 बजे जारी किया गया। बिहार के शिक्षा मंत्री प्रो चंद्रशेखर और बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने घोषित किया रिजल्ट। बिहार सरकार ने घोषणा की है कि टॉप 6 स्टूडेंट्स को लैपटॉप, किंडल ई-बुक और 1 लाख नगद इनाम दिया जाएगा।

बिहार बोर्ड ने इंटर का रिजल्ट जारी किया, जिसमें 83.70% स्टूडेंट्स पास हुए हैं। यह पिछली बार से 3.55% ज्यादा है। तीनों स्ट्रीम में लड़कियां टॉपर रही हैं। आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स मिलाकर 13 साल 4 हजार 586 स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी।

BSEB-12th-Result-2022-Inter-result

छात्र-छात्राएं अपना परिणाम, घोषित होने के बाद आधिकारिक वेबसाइट biharboardonline.bihar.gov.in, secondary.biharboardonline.com और results.biharboardonline.com पर देख सकते हैं।

बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड ने ट्विट कर जानकारी दी।

Patna High Court News: दानापुर-बिहटा एलिवेटेड रोड के निर्माण से संबंधित लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बिहार सरकार, NHAI एवं रेलवे को हलफ़नामा दायर कर जवाब देने का निर्देश दिया

पटना हाई कोर्ट ने दानापुर – बिहटा एलिवेटेड रोड के निर्माण से संबंधित लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, एनएचएआई एवं रेलवे को हलफ़नामा दायर कर जवाब देने का निर्देश दिया है। एसीजे जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की।

ये जनहित याचिका विपिन कुमार ने दायर किया है। याचिकाकर्ता ने इस जनहित याचिका के माध्यम से दानपुर – बिहटा एलिवेटेड रोड के निर्माण में प्रगति लाने के लिए ये जनहित याचिका को दायर किया है।

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कोर्ट ने इस याचिका में पूर्व मध्य रेलवे को भी प्रतिवादी बनाने का भी निर्देश दिया है।

इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल,2023 को होगी ।

पटना हाईकोर्ट में राज्य की निचली अदालतों में वकीलों के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था एवं अन्य बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट में राज्य की निचली अदालतों में वकीलों के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था एवं अन्य बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार की ओर से कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया।

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी के शाही ने कोर्ट को जानकारी देते हुए बताया गया कि तेरह स्थानों के लिए वकीलों के लिए भवन निर्माण और बुनियादी सुविधाओं के लिए टेंडर जारी कर दिया गया। बाकी अन्य जिलों में भी कार्रवाई चल रहा है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने भूमि उपलब्धता से सम्बंधित मामलें पर राज्य के विकास आयुक्त को अधिकारियों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को ये भी बताने को कहा था कि राज्य के 38 जिलों में से कितने जिलों में वकीलों के भवन निर्माण के लिए जिलाधिकारियों ने भूमि चिन्हित कर भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी कर ली है।

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वरीय अधिवक्ता श्री रमाकांत शर्मा ने कोर्ट को बताया था कि भवनों का निर्माण राज्य सरकार के भवन निर्माण भवन निर्माण विभाग करें,तो काम तेजी से हो सकेगा।ठेकेदारी के काम में बिलम्ब होने के अलावे लागत भी ज्यादा आएगा।

याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य के अदालतों की स्थिति अच्छी नहीं है।अधिवक्ता अदालतों में कार्य करते है,लेकिन उनके लिए न तो बैठने की पर्याप्त व्यवस्था है और न कार्य करने की सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।

वकीलों के लिये शुद्ध पेय जल,शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं होती हैं।उन्होंने कोर्ट को बताया कि अदालतों के भवन के लिए जहां भूमि उपलब्ध भी है,वहां भूमि को स्थानांतरित नहीं किया गया है। जहां भूमि उपलब्ध करा दिया गया है, वहां कार्य प्रारम्भ नही तो पाया हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी।

फिरौती के लिए हत्या-अपहरण की घटनाओं से फिर सहमा बिहार: सुशील कुमार मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि कहा कि 40 लाख की फिरौती के लिए बिहटा के स्कूली छात्र की हत्या, छपरा के जमीन कारोबारी का अपहरण और लालू प्रसाद के भतीजे नागेंद्र राय के 2 करोड़ रुपये रंगदारी मांगने की घटनाएँ कानून-व्यवस्था की डरावनी स्थिति बयाँ कर रही हैं।

  • बिहटा के छात्र की हत्या, छपरा में जमीन कारोबारी अगवा, लालू के भतीजे ने मांगी 2 करोड़ की रंगदारी
  • अवैध खनन मामले के आरोपी मंत्री-पुत्र को डिप्टी सीएम के फोन पर छोड़ा गया
  • महागठबंधन सरकार ने 7 माह में चमकाया अपहरण उद्योग

श्री मोदी ने कहा कि एक माह में रंगदारी-फिरौती के लिए अपहरण और हत्या की दर्जन-भर घटनाएँ हुईं।

उन्होंने कहा कि इसी 15 मार्च को लालू प्रसाद के भतीजे नागेंद्र राय ने हथियार के साथ एक भूखंड पर पहुँच कर 2 करोड़ रुपये की रंगदारी माँगी। इस पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

श्री मोदी ने कहा कि इससे पहले 23 फरवरी को सहकारिता मंत्री सुरेंद्र यादव के पुत्र को जेसीबी मशीन लगाकर अवैध खनन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसे जेल भेजने के बजाय डिप्टी सीएम की फोन पैरवी पर छोड़ दिया गया।

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उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने अपराध और भ्रष्टाचार से समझौता कर जनता के जीवन को खतरे में डाल दिया।

श्री मोदी ने कहा कि महागठबंधन सरकार बनने के मात्र 7 महीनों में अपहरण उद्योग में लालू-राबड़ी राज जैसी तेजी लौट आयी। “बिहार में नीतीसे कुमार हैं। अपहरण उद्योग में फिर से बहार है।”

बिहार में निबंधित और योग्य फार्मासिस्ट के पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर होने वाले असर के मामले पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार द्वारा दिए गए जवाब पर असंतोष जाहिर किया

राज्य में निबंधित और योग्य फार्मासिस्ट के पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर होने वाले असर के मामले पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार द्वारा दिए गए जवाब पर असंतोष जाहिर किया।

कोर्ट ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में राज्य सरकार को पुनः जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया।ये जनहित याचिका मुकेश कुमार ने दायर किया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रशान्त सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि डॉक्टरों द्वारा लिखें गए पर्ची पर निबंधित फार्मासिस्टों द्वारा दवा नहीं दी जाती है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि बहुत सारे सरकारी अस्पतालों में अनिबंधित नर्स,एएनएम,क्लर्क ही फार्मासिस्ट का कार्य करते है।वे बिना जानकारी और योग्यता के ही मरीजों को दवा बांटते है।जबकि ये कार्य निबंधित फार्मासिस्टों द्वारा किया जाना है।

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उन्होंने कहा कि इस तरह से अधिकारियों द्वारा अनिबंधित नर्स,एएनएम,क्लर्क से काम लेना न केवल सम्बंधित कानून का उल्लंघन है,बल्कि आम आदमी के स्वास्थ्य के साथ खिलबाड़ है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि फार्मेसी एक्ट,1948 के तहत फार्मेसी से सम्बंधित विभिन्न प्रकार के कार्यों के अलग अलग पदों का सृजन किया जाना चाहिए।लेकिन बिहार सरकार ने इस सम्बन्ध में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।इस आम लोगों का स्वास्थ्य और जीवन पर खतरा उत्पन्न हो रहा है।

उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि फार्मेसी एक्ट,1948 के अंतर्गत बिहार राज्य फार्मेसी कॉउन्सिल के क्रियाकलापों और भूमिका की जांच के लिए एक कमिटी गठित की जाए।ये कमिटी कॉउन्सिल की क्रियाकलापों की जांच करें,क्योंकि ये गलत तरीके से जाली डिग्री देती है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि बिहार राज्य फार्मेसी कॉउन्सिल द्वारा बड़े पैमाने पर फर्जी पंजीकरण किया गया है।राज्य में बड़ी संख्या मे फर्जी फार्मासिस्ट कार्य कर रहे है।इस मामलें पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी।

पटना जंक्शन पर TV स्क्रीन पर चल रहे विज्ञापन की जगह पर अश्लील वीडियो दिखने से मचा हड़कंप

पटना। पटना जंक्शन पर अचानक यात्री भड़क उठे जब प्लेटफॉर्म पर लगे TV स्क्रीन पर चल रहे विज्ञापन की जगह पर अश्लील वीडियो दिखने लगा।

लगभग तीन मिनट तक चला जिसके बाद स्टेशन पर मौजूद यात्री आक्रोशित होकर रेलवे प्रबंधक पर भडकने लगे। पोर्न वीडियो के प्रसारण की सूचना मिलते ही RPF और GRP ने प्रसारण बंद करवाया ।

रेलवे के वाणिज्य विभाग ने विज्ञापन एजेंसी दत्ता कम्युनिकेशन के खिलाफ FIR दर्ज किया और ब्लैकलिस्ट कर दिया।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि एजेंसी के कंट्रोल रूम में छापेमारी की गई तो वहां के एजेंसी कर्मचारियों को अश्लील वीडियो देखते पाया गया। RPF और GRP के द्वारा एजेंसी के कुछ कर्मचारियों को तत्काल हिरासत में लिया गया है।

पटना हाईकोर्ट ने बिहार के सहरसा में स्थापित किये जाने वाले एम्स अस्पताल को दरभंगा स्थानांतरित किये जाने के विरुद्ध दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र व राज्य सरकार से जवाबतलब किया

पटना हाईकोर्ट ने बिहार के सहरसा में स्थापित किये जाने वाले एम्स अस्पताल को दरभंगा स्थानांतरित किये जाने के विरुद्ध दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने कोशी विकास संघर्ष मोर्चा की जनहित याचिका पर करते हुए केंद्र व राज्य सरकार से जवाबतलब किया है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि विभिन्न राज्यों में एम्स के स्तर के अस्पताल स्थापित करने की योजना तैयार की गई।बिहार के सहरसा में एम्स के तर्ज पर अस्पताल बनाए जाने का प्रस्ताव था।

इस अस्पताल के निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि सहरसा में उपलब्ध है।2017 में सहरसा के जिलाधिकारी ने इस अस्पताल के लिए आवश्यक 217.74 एकड़ भूमि की उपलब्धता की जानकारी विभाग को दी थी।

कोर्ट को ये बताया कि इस क्षेत्र में एम्स स्तर का अस्पताल नहीं है।गंभीर बीमारियों के ईलाज के लिए इस क्षेत्र के लोगों को या तो पटना जाना पड़ता है या सिलिगुडी जाना पड़ता है।इसमें न सिर्फ लोगों को आने जाने में कठिनाई होती है,बल्कि आर्थिक बोझ भी पड़ता है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सहरसा में एम्स अस्पताल के निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है,जबकि दरभंगा में एम्स अस्पताल के भूमि की कमी है।

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कोर्ट को एम्स अस्पताल के निर्माण के मानकों पर सहरसा ज्यादा खरा था,लेकिन राज्य सरकार ने 2020 में दरभंगा में एम्स अस्पताल स्थापित किये जाने की अनुशंसा कर दिया।यह इस क्षेत्र लोगों के साथ अन्याय किया गया।

कोर्ट को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि सहरसा,पूर्णियां,कटिहार, किशनगंज और अररिया जिले इस क्षेत्र में आते है।इस क्षेत्र की जनसंख्या के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एम्स अस्पताल स्थापित की जानी चाहिए।

कोर्ट को बताया गया कि इस क्षेत्र के बहुत सारे लोग कैंसर समेत कई अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।आमलोग को बेहतर ईलाज के लिए इस क्षेत्र में एम्स स्तर के अस्पताल की सख्त आवश्यकता है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कंचन कुमार सिंह ने कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत किया। इस मामलें पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी।

मुस्लिम कर्मचारियों को बिहार सरकार का तोहफा: रमज़ान के महीने में निर्धारित समय से एक घंटे पहले ऑफिस आ-जा सकेंगे

पटना । बिहार सरकार ने रमजान के महीने में मुस्लिम कर्मचारियों को निर्धारित समय से एक घंटे पहले कार्यालय आने और निर्धारित समय से एक घंटे पहले कार्यालय छोड़ने की अनुमति दे दी है। 

बिहार सरकार द्वारा शुक्रवार (17 मार्च 2023) को जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि सरकार का यह आदेश हर साल रमजान के महीने में स्थायी तौर पर लागू रहेगा।

इस आदेश को बिहार सरकार के प्रधान सचिव की ओर से सभी विभागों, उनके अध्यक्षों, डीजीपी, जिले के अधिकारियों और अन्य अहम अधिकारियों को भेजा गया है। 

नीतीश सरकार के फैसले का RJD ने स्वागत किया है । सरकार के इस निर्णय को सत्ताधारी पार्टी JDU और RJD ने धर्मनिरपेक्षता को मजबूत करने वाला बताया। इस कदम से देश की गंगा-जमुनी तहजीब और मजबूत होगी। 

वहीं, विपक्षी दल भाजपा ने तंज कसा है। सरकार के इस फैसले पर भाजपा ने कहा कि नीतीश कुमार ने नवरात्रि के दौरान हिंदुओं के लिए ऐसा कोई सुविधा नहीं दी गई।

हाईकोर्ट से रोक के बाद भी निजी भूमि पर सड़क का निर्माण किए जाने पर पटना हाइकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की

पटना हाइकोर्ट ने निजी भूमि पर सड़क बनाने पर हाईकोर्ट से रोक के बाद ईट की सोलिंग कर सड़क का निर्माण किए जाने पर नाराजगी जाहिर की है। जस्टिस सत्यव्रत वर्मा ने नाग नारायण सिंह की याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने उपस्थित छपरा के जिलाधिकारी को हाई कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि वे स्वयं विवादित जमीन पर जाकर लगाए गए ईट की सोलिंग को अपने सामने हटवा दें। अगली सुनवाई में कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इस सम्बन्ध में 20मार्च,2023 को इस बात की जानकारी शपथ पत्र पर जानकारी दी जाए।

सुनवाई के दौरान छपरा के जिलाधिकारी के साथ ही छपरा सदर के अंचलाधिकारी, और सड़क निर्माण कराने वाले इंजीनियर कोर्ट में उपस्थित थे।याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता के निजी जमीन पर सरकार द्वारा कराए जा रहे सड़क निर्माण पर हाईकोर्ट ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया था।

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हाई कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने की जानकारी याचिकाकर्ता ने छपरा के जिलाधिकारी के साथ ही छपरा सदर के अंचलाधिकारी और निर्माण करने वाले इंजीनियर को दे दिया था।

कोर्ट को डॉ आलोक कुमार सिन्हा ने बताया गया कि हाई कोर्ट द्वारा सड़क निर्माण पर लगाए गए रोक के बाद भी, याचिकाकर्ता की जमीन पर सरकार द्वारा ईट का सोलिंग लगाकर सड़क का निर्माण कर दिया गया है।यह अदालती आदेश की अवमानना है।इसी मामले पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कोर्ट ने छपरा के जिलाधिकारी के साथ ही अन्य संबंधित अधिकारियों को हाई कोर्ट में तलब किया था।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 20मार्च, 2023 को की जाएगी।

CBI की पूछताछ से कब तक भागेंगे तेजस्वी, जाँच में सहयोग करें: सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि रेलवे में नौकरी के बदले जमीन घोटाले में तेजस्वी प्रसाद यादव अब पूछताछ , ट्रायल और सजा से बच नहीं पाएँगे।

  • ललन सिंह इतने पुख्ता सबूत सीबीआई तक पहुँचा चुके हैं कि सभी आरोपियों के अपराध प्रमाणित होंगे
  • तेजस्वी बतायें, फ्रेंड्स कालोनी में डेढ़ सौ करोड़ के चार मंजिला मकान के मालिक कैसे बन गए?

श्री मोदी ने कहा कि सीबीआई के समन पर उपस्थित न होना, फिर पत्नी की तबीयत का हवाला देना, समन के खिलाफ कोर्ट जाना और फिर विधानसभा की कार्यवाही में उपस्थिति को पूछताछ से बचने का बहाना कब तक बनाया जा सकता है? बकरे की अम्मा कब तक खैर मनायेगी?

उन्होंने कहा कि जदयू अध्यक्ष ललन सिंह इस मामले में इतने पुख्ता सबूत सीबीआई तक पहुँचा चुके हैं कि लालू प्रसाद , राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव सहित सभी प्रमुख आरोपियों के अपराध प्रमाणित होंगे और उन्हें सजा मिलेगी।

Sushil Modi vs Tejashwi

श्री मोदी ने कहा कि सीबीआई जानना चाहती है कि तेजस्वी यादव दिल्ली की फ्रेंड्स कालोनी में डेढ़ सौ करोड़ के चार मंजिला मकान (डी-1088) के मालिक कैसे बन गए?

उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में हजारी राय के दो भतीजों ( दिलचंद कुमार, प्रेमचंद कुमार) को जबलपुर और कोलकाता में रेलवे की ग्रुप-डी की नौकरी मिली। हजारी राय से एक जमीन 21 फरवरी 2007 को एके इन्फोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम लिखवा ली गई।

श्री मोदी ने कहा कि दिल्ली की फ्रेंड्स कालोनी वाले मकान का स्वामित्व इसी एके इन्फोसिस्टम्स के पास था। बाद में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव इस कंपनी के मालिक बन गए।

उन्होंने कहा कि सीबीआई इस तरह के मामलों में यदि सच जानना चाहती है, तो तेजस्वी यादव की भलाई पूछताछ से भागने में नहीं, बल्कि सहयोग करने में है।

Patna High Court News: बिहार के स्कूलों में छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव, पर्याप्त सुरक्षा का प्रबन्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई

पटना हाइकोर्ट ने राज्य के स्कूलों में छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव, पर्याप्त सुरक्षा का प्रबन्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई की। इस सम्बन्ध में दायर जनहित याचिका पर एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने कहा कि स्कूलों की अवस्था और व्यवस्था पर राज्य के शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव निगरानी रखेंगे।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि पटना समेत राज्य के सभी जिलों के अधिकतर स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा की कमी है। उन्होंने कहा कि राज्य में कई स्कूल ऐसे है,जो जर्जर मकान में चलते है। इनमेंं कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है।

इन स्कूलों में छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं है। शुद्ध पेय जल,शौचालय, जलपान गृह की व्यवस्था नहीं है।बहुत सारे स्कूलों में बिजली नहीं है,जिससे पढ़ाई में बाधा आती है।

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छात्रों की सुरक्षित आने जाने के लिए फुट ओवरब्रिज नहीं है। आग बुझाने के लिए संयंत्र स्कूलों में नहीं लगाए गए है,जिस कारण कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

राज्य सरकार द्वारा विभिन्न हलफनामों के माध्यम से स्कूलों की स्थिति में का ब्यौरा दिया जाता रहा है। कोर्ट को बताया गया कि जो भी स्कूल भवन खराब या जर्जर हालत में है, उनकी मरम्मती और निर्माण किया गया है।

छात्रों को बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए भी काफी कार्रवाई की गई।साथ ही बहुत सारे स्कूलों मे विद्युतीकरण किया गया है। स्कूलों में आग बुझाने के लिए संयंत्र भी स्थापित किये गए है।

कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा की गई कार्रवाई को संतोषप्रद माना, लेकिन स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए लगातार कार्रवाई होने की उम्मीद जताई। इसके साथ ही कोर्ट ने इस जनहित को निष्पादित कर दिया।

बिहार में बड़ी संख्या में फर्जी डिग्रियों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की बहाली मामलें पर सुनवाई पटना हाइकोर्ट में हुई

पटना हाइकोर्ट ने राज्य में बड़ी संख्या में फर्जी डिग्रियों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की बहाली मामलें पर सुनवाई की। रंजीत पंडित की जनहित याचिका पर एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की।

कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह एक समय सीमा निर्धारित करें, जिसके तहत सभी सम्बंधित शिक्षक अपना डिग्री व अन्य कागजात प्रस्तुत करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय के भीतर कागजात व रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं करने वाले शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से कार्रवाई रिपोर्ट तलब किया था। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि बड़ी संख्या में जाली डिग्रियों के आधार पर शिक्षक राज्य में काम कर रहे हैं।साथ ही वे वेतन उठा रहे है।

इससे पूर्व कोर्ट ने 2014 के एक आदेश में कहा था कि जो इस तरह की जाली डिग्री के आधार पर राज्य सरकार के तहत शिक्षक है,उन्हें ये अवसर दिया जाता है कि वे खुद अपना इस्तीफा दे दें, तो उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जाएगी।

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26अगस्त,2019 को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि इस आदेश के बाद भी बड़ी संख्या में इस तरह के शिक्षक कार्यरत है और वेतन ले रहे है।

कोर्ट ने मामलें को निगरानी विभाग को जांच के लिए सौंपा।उन्हें इस तरह के शिक्षकों को ढूंढ निकालने का निर्देश दिया।31जनवरी,2020 के सुनवाई दौरान निगरानी विभाग ने कोर्ट को जानकारी दी कि राज्य सरकार द्वारा इनके सम्बंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है,लेकिन अभी भी एक लाख दस हजार से अधिक शिक्षकों के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

साथ ही ये भी पाया गया कि 1316 शिक्षक बिना वैध डिग्री के नियुक्त किये गए।कोर्ट ने इस मामलें को काफी गम्भीरता से लिया।कोर्ट ने सम्बंधित विभागीय सचिव से हलफनामा दायर कर स्थिति का ब्यौरा देने का निर्देश दिया था।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को अगली सुनवाई में अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा पेश करने का निर्देश दिया था।

इस मामलें पर अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी और निजी लॉ कालेजों के स्थिति के सम्बन्ध दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी और निजी लॉ कालेजों के स्थिति के सम्बन्ध दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ कुणाल कौशल की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने राज्य के विश्वविद्यालयों के चान्सलर कार्यालय को हलफनामा दायर कर ये बताने को कहा कि राज्य में लॉ की पढ़ाई के लिए क्या-क्या सुधारात्मक कार्रवाई की गई। साथ ही ये भी बताने को कहा गया कि इन लॉ कालेजों में छात्रों को पढ़ाने के लिए यूजीसी मानक के तहत नेट/पीएचडी डिग्री वाले शिक्षकों की नियुक्ति की जा सकती है या नहीं।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि इन लॉ कालेजों में जो प्रिंसिपल और शिक्षक कार्य कर रहे है, वे यूजीसी के मानदंडों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता नहीं रखते है। उन्होंने बताया कि ये शिक्षक यूजीसी द्वारा नेट की परीक्षा बिना पास किये पद पर बने हुए। इन लॉ कालेजों के प्रिंसिपल भी पीएचडी की डिग्री प्राप्त नहीं किया है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को यह बताने को कहा था कि राज्य में स्थित लॉ कॉलेजों में नेट की परीक्षा पास किए शिक्षकों को क्यों नियुक्त नहीं किया जा सकता है।

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राज्य में स्थित लॉ कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव के मामलें पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की जा रही है।

कोर्ट ने बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया से ये जानना चाहा था कि राज्य के लॉ कॉलेज में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लॉ कालेजों में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति होना आवश्यक है।

कोर्ट को अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि राज्य के सरकारी और निजी लॉ कालेजों की स्थिति बहुत दयनीय है।वहां बुनियादी सुविधाओं का काफी अभाव है।

बीसीआई के निर्देश और जारी किए गए गाइड लाइन के बाद भी बहुत सुधार नहीं हुआ है।बीसीआई के निरीक्षण के बाद भी बहुत सारे कालेज निर्धारित मानकों को नहीं पूरा कर रहे है।

इससे पूर्व कोर्ट ने बीसीआई के अनुमति/ अनापत्ति प्रमाण मिलने के बाद ही सत्र 2021- 22 के लिए राज्य के 17 लॉ कालेजों को अपने यहां दाखिला लेने के लिए अनुमति दी थी।

पूर्व में हाई कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए बिहार के सभी 27 सरकारी व निजी लॉ कॉलेजों में नए दाखिले पर रोक लगा दी थी। बाद मे इस आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए 17 कॉलेजों में सशर्त दाखिले की मंजूरी दे दी थी।

उस समय हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि दाखिला सिर्फ 2021-22 सत्र के लिए ही होगा।कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि अगले साल के सत्र के लिए बीसीआई से फिर मंजूरी लेनी होगी।

सुनवाई के समय समय याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार एवं रितिका रानी, बीसीआई की ओर से अधिवक्ता विश्वजीत कुमार मिश्रा ने कोर्ट में अपने अपने पक्षों को प्रस्तुत किया।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 2 सप्ताह बाद फिर की जाएगी।

बिहार की प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित मधुबनी पेंटिंग की सरकारी उपेक्षा और कलाकारों की दयनीय अवस्था पर पटना हाइकोर्ट में सुनवाई की

पटना । पटना हाइकोर्ट ने राज्य की प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित मधुबनी पेंटिंग की सरकारी उपेक्षा और कलाकारों की दयनीय अवस्था पर सुनवाई की। आत्मबोध की जनहित याचिका पर एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने कला व संस्कृति सचिव व उद्योग विभाग के निर्देशक को पटना एयरपोर्ट परिसर में बने मधुबनी पेंटिंग का निरीक्षण कर कल कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

याचिकाकर्ता के वकील डा. मौर्य विजय चन्द्र ने कोर्ट को बताया कि मधुबनी पेंटिंग सरकारी उपेक्षा का शिकार तो है ही, साथ ही मधुबनी पेंटिंग करने वाले कलाकारों का शोषण भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मधुबनी पेंटिंग की ख्याति देश विदेश में है,लेकिन मधुबनी पेंटिंग के कलाकार गरीबी में जीवन बिता रहे है।

उन्होंने बताया कि मधुबनी पेंटिंग के कलाकारों को अपने कानूनी अधिकारों का ज्ञान नहीं है।इसी का लाभ बिचौलिए उठाते है।उनकी पेंटिंग का बाहर ले जा कर महंगे दामों में बेचते है, जबकि उन कलाकारों को थोड़ी सी रकम दे देते है।

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उन्होंनेे कोर्ट को बताया कि उन्हें 2005 में ही जीआई टैग भारत सरकार से लगाने की अनुमति प्राप्त हुई। ये भौगोलिक क्षेत्र के तहत रजिस्टर होता है लेकिन इसका आजतक रेजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। इसके सम्बन्ध में इन कलाकारों को जानकारी नहीं है।इसका फायदा बिचौलिए उठा लेते है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई कल की जाएगी।

लालू परिवार के परिसरों पर छापे से बहुत खुश हैं नीतीश कुमार: सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि ” नौकरी के बदले जमीन ” घोटाले में लालू परिवार के परिसरों पर जांच एजेंसियों के छापे पर नीतीश कुमार चाहे जो बयान दें, लेकिन सबसे ज्यादा खुश भी वही हैं।

  • ताजा कार्रवाई से तेजस्वी यादव को सीएम बनाने का दबाव टला
  • जाँच में तेजी और जल्द सजा दिलाना चाहते हैं ललन सिंह
  • राजद नेताओं को सजा हुई तो 2025 तक निष्कंटक राज करेंगे नीतीश

श्री मोदी ने कहा कि जांच-पूछताछ की कार्रवाई के कारण तेजस्वी प्रसाद यादव को जल्द मुख्यमंत्री बनाने का राजद का दबाव टल गया है। यह जदयू के लिए राहत की बात है।

nitish sushil modi

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के कहने पर ललन सिंह ने सीबीआई को सबूत के कागजात उपलब्ध कराये। उन्हें पता है कि लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव सहित सभी 16 अभियुक्तों का जेल जाना तय है।

श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार जाँच की धीमी गति पर सवाल उठा रहे हैं। दरअसल, वे चाहते हैं कि जांच तेज हो, अभियुक्तों को सजा जल्द हो और वे 2025 तक निष्कंटक मुख्यमंत्री बने रहें।

बिहार के नए राज्यपाल ने 7 कुलसचिवों के कार्य पर लगाई रोक; जानें विश्वविद्यालयों के नाम

पटना । शनिवार को राजभवन की ओर से बिहार के नए राज्यपाल ने बिहार के सात विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों के सभी प्रकार को कार्यों और कर्तव्यों के निर्वहन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी हैं।

राज्यपाल सचिवालय द्वारा पत्र में , लिख कर निर्देश दिया गया है और कहा गया है कि नियुक्ति और पदस्थापित कुलसचिव के सभी कार्यों पर अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से रोक लगायी जाती है। इसका अक्षरशः पालन करने का निर्देश दिया गया है।

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ये विश्वविद्यालय है शामिल:

नीचे लिखे 7 कुलपतियों को पत्र जारी कर कुलसचिवों के कार्यों पर रोक लगाई है।

  • कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा
  • वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा
  • मुंगेर विश्वविद्यालय मुंगेर
  • मगध विश्वविद्यालय बोधगया
  • पटना विश्वविद्यालय पटना
  • मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय पटना
  • पाटलिपुत्रा विश्वविद्यालय पटना

सभी विश्वविद्यालयों को इसकी प्रति भी भेज दी गई  है।

“जमीन दो, नौकरी लो” मामले में जांच का सामना कर रहा लालू परिवार सहानुभुति पाने के लिए गर्भवती बहू और बच्चों को टार्चर किये जाने का झूठा प्रचार कर रहा है: सुशील मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि “जमीन दो, नौकरी लो” की नीति से अरबों रुपये की अवैध सम्पत्ति बनाने के मामले में जांच का सामना कर रहा लालू परिवार सहानुभुति पाने के लिए गर्भवती बहू और बच्चों को टार्चर किये जाने का झूठा प्रचार कर रहा है।

• लालू के नाती-नातिन, पुत्रबधू से कोई पूछताछ नहीं, “टार्चर” की कहानी झूठी
• सहानुभूति पाने और जाँच को बदनाम करने के लिए किया जा रहा दुष्प्रचार
• नीतीश घोषणा करें कि गर्भवती महिला, बच्चों के घर में रहते नहीं होगी कोई पूछताछ
• हेमा यादव बतायें, हृदयानंद और ललन चौधरी ने क्यों उन्हें गिफ्ट की थी सम्पत्ति ?
• तेजस्वी यादव फ्रेंड्स कालोनी स्थित 200 करोड़ के मकान के मालिक कैसे बने?
• क्या इस संबंध में पूछताछ करना “टार्चर” करना है?
• नीतीश कुमार और ललन सिंह दे रहे भ्रष्टचार को पोलिटिकल कवर

श्री मोदी ने कहा कि तेजस्वी यादव की गर्भवती पत्नी राजश्री और लालू प्रसाद के नाती-नातिन जब किसी मामले में आरोपी ही नहीं हैं और उनसे कोई पूछताछ भी नहीं हुई, तब टार्चर कहाँ हुुआ? राजद झूठा प्रचार करने पर उतर आया है।

उन्होंने तेजस्वी यादव के जल्द पिता बनने के समाचार के लिए उन्हें बधाई दी और कहा कि जाँच एजेंसियों के छापे की इस उपलब्धि पर तो कोई विवाद नहीं होगा।

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श्री मोदी ने पूछताछ के दौरान टार्चर की फर्जी कहानी को खारिज करते हुए नीतीश कुमार और ललन सिंह को यह घोषणा करने की चुनौती दी कि अपराध चाहे कितना भी गंभीर हो, बिहार में अभियुक्तों के घर में गर्भवती महिला और बच्चों के रहते कोई पूछताछ नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि कल के छापे में लालू प्रसाद के परिवार जनों के घर से डेढ़ किलो सोने के गहने और आधा किलो सोने का बिस्कुट, 1 करोड़ रुपये नकद और 6 सौ करोड़ रूपये से ज्यादा की अवैध सम्पत्ति के कागजात भी बरामद हुए, जबकि ललन सिंह दावा करते हैं कि छापे में कुछ नहीं मिला।

श्री मोदी ने कहा कि जब एमएलए-एमएलसी बनाने या नौकरी दिलाने के बदले में लालू प्रसाद अपनी बेटियों के नाम से करोड़ो रुपये की सम्पत्ति लिखवा रहे थे, तब किसी ने विरोध क्यों नहीं किया?

उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद की पुत्री हेमा यादव को हृदयानंद चौधरी और ललन चौधरी ने कीमती सम्पत्ति क्यों गिफ्ट की थी? बाद में यह सम्पत्ति 350 करोड़ में बेच दी गई।

श्री मोदी ने कहा कि हेमा यादव को इस सम्पत्ति को दान में लेने और बेचने के बारे में सच बताना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इसी तरह तेजस्वी प्रसाद यादव को बताना चाहिए कि वे दिल्ली की फ्रेंड्स कालोनी स्थित 200 करोड़ के चार मंजिला मकान के मालिक कैसे बने? क्या इस संबंध में पूछताछ करना “टार्चर” करना है?

श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार और ललन सिंह सुनियोजित भ्रष्टचार को पोलिटिकल कवर दे रहे हैं।

भ्रष्टाचार से समझौता कर लालू परिवार को बचा रहे नीतीश कुमार: सुशील कुमार मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पीएम बनने के अपने महत्वांकाक्षी सपने के दबाव में भ्रष्टचार से समझौता कर लिया और वे चारा घोटाला से लेकर “जमीन के बदले नौकरी घोटाले” तक में संलिप्त लालू परिवार को बचाने में लगे हैं।

  • 2008 में लालू प्रसाद के विरुद्ध जांच के लिए शरद यादव, ललन सिंह ने पहल की थी
  • जदयू ने सारे दस्तावेज सीबीआई को उपलब्ध कराये थे
  • ललन सिंह ने मनमोहन सिंह को दिया था ज्ञापन, आज कार्रवाई रोकने के लिए चिट्ठी लिख रहे
  • लालू प्रसाद ने एक ही मंत्र अपनाया “-तुम मुझे जमीन दो, मैं तुम्हें नौकरी दूँगा।”
  • किसी और ने नहीं, खुद लालू ने पूरे परिवार को फँसा दिया
  • तेजस्वी यादव 29 साल की उम्र में कैसे बने अरबों रुपये की 52 सम्पत्ति के मालिक ?
  • अबू दोजाना वही हैं, जो पटना में तेजस्वी यादव का 750 करोड़ का मॉल बनवा रहे थे

श्री मोदी ने कहा कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई होने पर बार-बार लालू परिवार को फँसाने का जो झूठा प्रचार किया जाता है, उसमें कोई दम होता तो लालू प्रसाद चारा घोटाला के सभी पांच मामलों में अदालत से दोषी नहीं पाये जाते।

उन्होंने कहा कि 2008 में लालू प्रसाद के विरुद्ध भ्रष्टचार के मामलों की जांच के लिए स्वर्गीय शरद यादव और ललन सिंह ने पहल की थी। जदयू ने सारे दस्तावेज सीबीआई को उपलब्ध कराये और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ज्ञापन भी दिया था। आज यही लोग लालू प्रसाद पर कार्रवाई रोकने के लिए प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख रहे हैं।

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श्री मोदी ने कहा कि लालू प्रसाद ने सत्ता में रहते हुए यही बस एक ही मंत्र अपनाया “-तुम मुझे जमीन दो, मैं तुम्हें नौकरी दूँगा।”

उन्होंने कहा कि हर काम के लिए जमीन लेते हुए गरीब परिवार में जन्मे लालू प्रसाद सबसे बड़े जमींदार बन गए। उनके पास पटना में 1 लाख वर्ग फुट से ज्यादा कीमती जमीन है।

श्री मोदी ने कहा कि तेजस्वी प्रसाद यादव को बताना चाहिए कि वे दिल्ली की न्यू फ्रेंड्स कालोनी में अरबो रुपये के चार मंजिला मकान के मालिक कैसे बन गए?

उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव ने इंटरमीडिएट तक भी पढाई नहीं की, क्रिकेट में विफल रहे , लेकिन बिना कोई उद्योग-व्यापार किये मात्र 29 साल की उम्र में वे 52 सम्पत्तियों के मालिक कैसे बन गए? क्या इसकी जाँच नहीं होनी चाहिए ?

श्री मोदी ने कहा कि लालू प्रसाद ने विधायक, सांसद, मंत्री, एमएलसी बनावाने के बदले कीमती जमीनें परिवार के सदस्यों के नाम से लीं और खुद ही पूरे परिवार को फँसा दिया। उन्हें किसी दूसरे ने नहीं फँसाया।

उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक अबु दोजाना वही हैं, जो पटना में तेजस्वी यादव का 750 करोड़ का मॉल बनवा रहे थे ।

जाने ‘ऑपरेशन तमिलनाडु’ के पीछे का सच; बिहार के 87 यूट्यूबर थे शामिल

मनीष कश्यप आज के बिहार का यूथ आइकन है वजह किसी तरह से 5 से 10 लाख रुपया महीना कमा लेता है ।   लेकिन ये जिस आग से खेल रहा था उसका ये हस्र होना तय था। 

ऑपरेशन तमिलनाडु के पीछे का सच अब पूरी तौर पर सामने आ गया है इस खेल का मास्टमेंड Manish Kashyap ही है इस खेल मेंं बिहार का 87 यूट्यूबर शामिल था ।      

जो खुद मजदूर बना और पेट में, तो कहीं सिर में ,तो कहीं चेहरा पर बैंडेज लगा कर चैनल पर घूम घूम कर बाइट दे रहा था सबसे चौकाने वाली बात यह है कि गोपालगंज का रहने वाला यूट्यूबर राकेश रंजन कुमार पिछले ही महीना ही जक्कनपुर पटना में डेरा लिया था और 6 मार्च को मजदूर वाला वीडियो वायरल करके डेरा खाली कर पटना से निकल गया ।

इस खेल को पूरी सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था सब कुछ स्क्रिप्टेड था किस यूट्यूबर को कहा रहना है किसको मजदूर बनना है किसको वीडियो वायरल करना है किसको नेता का बाईट लेना है ।

वही Manish Kashyap तमिलनाडु में बिहारी मजदूर के नेता के भी संपर्क में था जो वहां तय रणनीति के तहत वीडियो बना कर मनीष कश्यप को भेजता था चूकी टीम मनीष कश्यप का  व्यूअरशिप 8 मिलियन के करीब है जिस वजह से वीडियो दस मिनट में बिहार के गांव गांव में पहुंच गया।

ManishKashyap

हालांकि इस खेल में सूरत लांबी का भी बड़ा हाथ है जो त्रिरपुर के विकास से चिढ़ा हुआ है पिछले वर्ष भारत सरकार अचानक धागा का दाम बढ़ा दिया था जिस वजह से बड़ा बवाल मचा था एक सप्ताह तक पूरा मिल बंद रहा था। सूरत का रेडीमेड रमेंट मिल  को तिरुपुर काफी पीछे छोड़ दिया है इससे सूरत लांबी हमेशा कोशिश में लगा रहता है कि तिरुपुर के माहौल को गाड़ते रहे ।

इस घटना के पीछे इस मानसिकता वाले कॉरपोरेट घराने का भी हाथ बताया जा रहा है जिसके हाथों में मनीष कश्यप जैसे लोग खेलते रहते हैं । पुलिस जांच में यह भी पता चला कि मनीष कश्यप के बैंक खाते में पिछले एक माह के दौरान कई तरह के अनलिगल ट्रांजेक्शन हुआ है। आर्थिक अपराध इकाई इसके खातों को फ्रीज करने की तैयारी शुरु कर दिया है ।

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जो भ्रष्टचार के आरोपी हैं, वे ही खुद को पीड़ित बताने की राजनीति करने लगे; तेजस्वी बतायें, नौकरी के बदले जमीन देने वाले ललन चौधरी कौन ? – सुशील मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि केंद्र में कांग्रेस सरकार के समय ललन सिंह और स्व० शरद यादव ने तत्कालीन रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद पर नौकरी के बदले जमीन घोटाला का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी। आज यही लोग सीबीआई के दुरुपयोग का शोर मचा रहे हैं।

• तेजस्वी बतायें, नौकरी के बदले जमीन देने वाले ललन चौधरी कौन ?
• लालू प्रसाद के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग ललन सिंह, स्व० शरद यादव ने की थी
• जो भ्रष्टचार के आरोपी हैं, वे ही खुद को पीड़ित बताने की राजनीति करने लगे
• राबड़ी से पूछताछ न्याय प्रक्रिया का हिस्सा, केंद्र पर आरोप अनर्गल

श्री मोदी ने कहा कि तेजस्वी यादव और ललन सिंह इधर-उधर की बातें करने के बजाय ग्रुप डी की नौकरी के बदले कीमती जमीन लालू परिवार के नाम करने वाले ललन चौधरी के बारे में क्यों नहीं बताते? ये ललन चौधरी कौन हैं और क्यों इनकी जमीन गिफ्ट में ली गई?

Sushil Modi vs Tejashwi

उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद सत्ता का दुरुपयोग कर सम्पत्ति बनाने के आदती हैं। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने चारा घोटाला किया और रेल मंत्री बनने पर जमीन के बदले रेलवे की नौकरी बाँटने का घोटाला किया।

श्री मोदी ने कहा कि रेलवे की नौकरी के बदले जमीन लेने के मामले की जांच बंद नहीं हुई है। इस मामले में लालू- राबड़ी देवी सहित 15 आरोपियों को समन भेजना और पूछताछ करना न्याय प्रक्रिया का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि जब भी किसी घोटाले की जांच होती है, इसमें आरोपी लालू परिवार खुद को पीड़ित बताकर सहानुभुति पाने की राजनीति करने लगता है।

श्री मोदी ने कहा कि क्या यह सही नहीं कि नीतीश कुमार के कहने पर ललन सिंह ने लालू परिवार के भ्रष्टचार से संबंधित कागजात सीबीआई को पहुँचाये थे ?

उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद से मिल कर महागठबंन सरकार बनाने से पहले जो लोग लालू प्रसाद के विरुद्ध जांच में तेजी लाना चाहते थे, आज वे ही इस मामले में भाजपा और केंद्र सरकार पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं।

लैंड फॉर जॉब स्कैम: पूछताछ के लिए CBI राबड़ी देवी के घर पहुंची

पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के पटना स्थित आवास पर सोमवार को CBI की टीम पहुंची । जमीन के बदले नौकरी देने के मामले में सीबीआई की टीम पहुंची है । CBI के अधिकारी राबड़ी देवी से पूछताछ कर रहे हैं ।

उनके बेटे और नीतीश कुमार कैबिनेट के मंत्री तेज प्रताप यादव भी घर में मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि राबड़ी के घर वकीलों की एक टीम भी पहुंची है।

Lalu-Rabri

जमीन के बदले नौकरी देने के मामले में CBI ने अक्टूबर 2022 में पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी के अलावा 14 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।

सीबीआई का आरोप है कि लालू यादव के रेलमंत्री रहते हुए बड़े पैमाने पर रेलवे में नौकरी देने में गड़बड़ियां की गई थीं। 15 मार्च को कोर्ट में राबड़ी, लालू और मीसा पेश होने के आदेश दिया है।

पटना हाईकोर्ट में होली अवकाश 6 मार्च, 2023 से 10 मार्च, 2023 तक; 13 मार्च, 2023 को खुलेंगे कोर्ट

पटना हाईकोर्ट में 6 मार्च, 2023 से 10 मार्च, 2023 तक होली अवसर पर बंद रहेगा। पटना हाईकोर्ट 13 मार्च, 2023 को होली के अवकाश के बाद खुल जाएगा।

Patnahighcourt

इस बीच किसी प्रकार का न्यायिक कार्य हाईकोर्ट में नहीं किया जाएगा।

बिहार के वैशाली में ‘होली स्पेशल’ लेबल वाली अवैध शराब बरामद

वैशाली। बिहार के वैशाली जिले के हरपुर गांव में एक तालाब के अंदर छिपाकर रखी गई करीब 17 कार्टन शराब बरामद की गई है। आबकारी विभाग की टीम मछली तालाब में छिपाकर रखी गई लाखों रुपये की शराब को बरामद करने में सफल रही है।

महुआ थाना क्षेत्र के हरपुर गांव स्थित एक तालाब में छिपाकर रखी गई शराब जिसको होली के दौरान इसका सेवन किया जा सके, लेकिन आबकारी विभाग की टीम ने वहां छापा मारा तो 17 कार्टन विदेशी शराब मिली। हालांकि इस कार्रवाई में किसी कारोबारी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन आबकारी विभाग ने शराब माफिया के मंसूबों को नाकाम कर दिया है.

पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. थाना प्रभारी वैशाली सुरेश प्रसाद चौधरी ने कहा, ”मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी.”

पुलिस के मुताबिक होली मनाने के लिए हरियाणा से स्पेशल ‘होली स्पेशल’ वाली अवैध शराब लाई गई थी। थाना प्रभारी वैशाली सुरेश चौधरी ने कहा, “होली के मद्देनजर वैशाली जिले में शराब माफिया सक्रिय हो गए हैं और वे पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।”

नीतीश नहीं दिला सके पार्टी को राष्ट्रीय दर्जा, सपना पीएम बनने का : सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने वाले और विपक्षी एकता के बड़बोले दावे करने वाले नीतीश कुमार अपनी पार्टी (जदयू) को राष्ट्रीय दल का दर्जा भी भी नहीं दिला सके।

  • नीतीश नहीं दिला सके पार्टी को राष्ट्रीय दर्जा, सपना पीएम बनने का
  • लोजपा (रामविलास) का प्रदर्शन बेहतर, 8 फीसद वोट के साथ जीतीं दो सीटें
  • टीएमसी, एनसीपी, बसपा और आप राष्ट्रीय दल, जदयू को कौन पूछेगा?

श्री मोदी ने कहा कि पिछले दिनों नीतीश कुमार नगालैंड गए थे और ललन सिंह ने विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत लगा थी, फिर भी जदयू मुश्किल से एक सीट जीत पाया और उसका वोट भी घट कर मात्र 3.25 फीसद रह गया।

sushil modi vs nitish kumar

उन्होंने कहा कि नगालैंड में जदयू से बेहतर प्रदर्शन लोजपा (रामविलास) का रहा। उसने दो सीटें जीतीं, 8.6 फीसद वोट हासिल किये और आठ सीटों पर यह पार्टी दूसरे स्थान पर रही। वहाँ राजद और कांग्रेस का खाता नहीं खुला। लोजपा (रामविलास) को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल जाएगा।

श्री मोदी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त है। ये दोनों नेता अपने बल पर मुख्यमंत्री बनते रहे।

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार न कभी अपने बल पर मुख्यमंत्री बने, न इनकी पार्टी राष्ट्रीय दर्जा पा सकी।

श्री मोदी ने कहा कि बिहार-केंद्रित जदयू को किसी दूसरे हिंदीभाषी प्रदेश में नहीं, बल्कि अरुणाचल और मेघालय जैसे प्रदेश में राज्य पार्टी का दर्जा मिला है। इन उत्तर-पूर्वी राज्यों में बिहार के लोग नाम-मात्र के हैं।

उन्होंने कहा कि जब शरद पवार, ममता बनर्जी, मायावती और केजरीवाल की पार्टी को राष्ट्रीय दर्जा प्राप्त है, तब विपक्षी एकता के लिए नीतीश कुमार और उनकी राज्य-स्तरीय पार्टी को कोई क्यों महत्व देगा?

श्री मोदी ने कहा तीन उत्तर-पूर्वी राज्यों के चुनाव परिणामों ने जहाँ प्रधानमंत्री मोदी का करिश्मा कायम रखा, वहीं जदयू के महत्वाकांक्षी सपने तोड़ दिये।

गया एयरपोर्ट को मिली उड़ाने की धमकी, बढ़ाई गयी सुरक्षा

गया। गया एयरपोर्ट प्रशासन को एक चिट्ठी मिली है, जिसमें लिखा है कि गया एयरपोर्ट को ड्रोन से उड़ा दिया जाएगा।

इसके बाद गया एयरपोर्ट प्रशासन ने एयरपोर्ट के अंदर और बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

यह चिट्ठी किसके द्वारा भेजी गई है यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है, इसकी जांच चल रही है।

त्रिपुरा सहित तीनों राज्यों में भाजपा एवं उसके गठबंधन की सफलता के लिए पीएम मोदी को बधाई: सुशील मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि उत्तर-पूर्व के तीनों राज्यों में सहयोगी दलों के साथ भाजपा का दोबारा सत्ता में लौटना 2024 के लोकसभा चुनाव का पहला ट्रेलर है। इस शानदार सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को बधाई।

  • त्रिपुरा सहित तीनों राज्यों में भाजपा एवं उसके गठबंधन की सफलता के लिए पीएम मोदी को बधाई
  • नगालैंड में ललन सिंह ने झोंकी थी पूरी ताकत, बिहार के मंत्री कैंप कराये थे,फिर भी जीते मात्र एक सीट
  • परस्पर विरोधी कांग्रेस और माकपा मिलकर भी भाजपा को नहीं रोक पाए

श्री मोदी ने कहा कि जदयू पूरी ताकत लगाकर नागालैंड की एक सीट बड़ी मुश्किल से जीत पाया। वहाँ ललन सिंह ने बिहार के आधा दर्जन मंत्रियों को कैंप कराया था।

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उन्होंने कहा कि भाजपा ने त्रिपुरा को 35 साल के कम्युनिस्ट शासन से मुक्ति दिलायी और विकास कार्यों के बल पर दोबारा जनादेश प्राप्त किया।

श्री मोदी ने कहा कि जिस नार्थ-ईस्ट के कई इलाके ईसाई-बहुल हैं और केंद्र की पिछली सरकारों की उपेक्षा के कारण उग्रवादग्रस्त थे, वहाँ मात्र आठ साल में भाजपा बड़ी राजनीतिक ताकत बन गई।

SushilModi

उन्होंने कहा कि केरल में एक-दूसरे के विरुद्ध लड़ने वाली कांग्रेस और माकपा त्रिपुरा में मिल कर विधानसभा चुनाव लड़े। फिर भी विपक्ष भाजपा का रथ रोक नहीं पाया।

श्री मोदी ने कहा कि नगालैंड, त्रिपुरा और मेघालय में कांग्रेस जीरो से पांच सीट तक सिमट गई।

पटना हाइकोर्ट के जज जस्टिस अनिल कुमार उपाध्याय का आज सुबह चेन्नई में निधन हो गया

पटना हाइकोर्ट के जज जस्टिस अनिल कुमार उपाध्याय का आज सुबह चेन्नई में निधन हो गया।जस्टिस उपाध्याय किडनी की समस्या से पीड़ित थे और उनका ईलाज चल रहा था।

जस्टिस उपाध्याय का जन्म 4 दिसम्बर,1962 को हुआ था।उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से एल एल बी और एल एल एम की डिग्री ली।उन्होंने पटना के कामर्स कालेज में अंशकालिक शिक्षक के रूप में शिक्षण कार्य किया।उन्होंने पटना लॉ कॉलेज, पटना में भी अंशकालिक शिक्षक के रूप में कार्य किया।

चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में 2007 से 2017 कार्य किया।राज्य सरकार कर स्टैंडिंग कॉउन्सिल के पद पर 2010 से 2017 तक कार्य किया।

उन्होंने 22 मई, 2017 को पटना हाइकोर्ट के जज के रूप कार्यभार ग्रहण किया।उनकी प्रतिभा,विद्वता और कार्य करने की क्षमता की बहुत थी।इसी बीच उन्हें किडनी की बीमारी का पता चला।उनके किडनी का प्रत्यारोपण हो गया था। लेकिन आज सुबह उनका निधन हो गया।

Bihar ka Budget 2023: नीतीश सरकार ने पेश किया 261885.40 करोड़ का बजट; 10 लाख युवाओं को रोजगार देने की योजना, पढ़ें बजट की मुख्य बातें…

पटना। बिहार के वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बजट विधानसभा में पेश करते हुए दावा किया राज्य की वित्तीय स्थिति बेहतर है। वर्ष 2023-24 के लिए 2,61,885.40 करोड़ रुपये का कुल प्रस्तावित बजट व्यय, पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में “24,194.21 करोड़ रुपये अधिक” है।

बिहार बजट 2023 (Bihar ka Budget 2023) की मुख्य बातें

  • राजस्व बढ़ा, राजकोषीय घाटा नियंत्रण में
  • बिहार में बंपर बहाली की घोषणा, 10 लाख युवाओं को रोजगार देने की योजना सरकार की है
  • बिहार में कुल 9 जिलों में नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे
  • पुलिस विभाग में 75 हजार 543 पदों की मंजूरी मिली है
  • स्कूलों में 40506 प्रधान शिक्षकों की बहाली होगी
  • इंजीनियरिंग कॉलेज में 522शिक्षक बहाल किए जाएंगे
  • शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार पर धनवर्षा, महिलाओं पर फोकस, कोई नया टैक्स नहीं
  • तलाकशुदा अल्पसंख्यक महिलाओं को सहायता राशि बढ़ाकर अब 25 हजार रुपये कर दिया गया है
  • नारी शक्ति योजना के अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग और बिहार लोक सेवा आयोग के प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाली महिला अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार की तैयारी के लिए क्रमशः 1 लाख और 50 हचार की राशि दी जाएगी
  • पूर्णिया व मुजफ्फरपुर में खादी मॉल बनाने की योजना 
  • कजरा-पिपरैती में सौर ऊर्जा प्लाट लगाने का प्रस्ताव
  • सोलर लाइट के लिए 392 करोड़ का प्रावधान
  • राज्य में बढ़ा निवेश, 17 एथेनॉल इकाइयां निर्माणाधीन
  • 10.45 लाख स्वयं सहायता समूहों का गठन
  • पशुधन मछली पालन के लिए 525.38 करोड़ का प्रावधान
  • मई में पूरी होगी जातीय जनगणना

पटना हाईकोर्ट में राज्य के सरकारी और निजी लॉ कालेजों के स्थिति के सम्बन्ध दायर जनहित याचिका पर 2 मार्च,2023 को सुनवाई होगी

पटना हाईकोर्ट में राज्य के सरकारी और निजी लॉ कालेजों के स्थिति के सम्बन्ध दायर जनहित याचिका पर 2 मार्च,2023 को सुनवाई होगी। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ कुणाल कौशल की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि इन लॉ कालेजों में जो प्रिंसिपल और शिक्षक कार्य कर रहे है, वे यूजीसी के मानदंडों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता रखते है।उन्होंने बताया कि ये शिक्षक यूजीसी द्वारा नेट की परीक्षा बिना पास किये पद पर बने हुए।इन लॉ कालेजों के प्रिंसिपल भी पीएचडी की डिग्री प्राप्त नहीं किया है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को यह बताने को कहा था कि राज्य में स्थित लॉ कॉलेजों में नेट की परीक्षा पास किए शिक्षकों को क्यों नियुक्त नहीं किया जा सकता है।

राज्य में स्थित लॉ कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव के मामलें पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की जा रही है।

कोर्ट ने बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया से ये जानना चाहा था कि राज्य के लॉ कॉलेज में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लॉ कालेजों में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति होना आवश्यक है।

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कोर्ट को अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि राज्य के सरकारी और निजी लॉ कालेजों की स्थिति बहुत दयनीय है।वहां बुनियादी सुविधाओं का काफी अभाव है।

बीसीआई के निर्देश और जारी किए गए गाइड लाइन के बाद भी बहुत सुधार नहीं हुआ है।बीसीआई के निरीक्षण के बाद भी बहुत सारे कालेज निर्धारित मानकों को नहीं पूरा कर रहे है।

इससे पूर्व कोर्ट ने बीसीआई के अनुमति/ अनापत्ति प्रमाण मिलने के बाद ही सत्र 2021- 22 के लिए राज्य के 17 लॉ कालेजों को अपने यहां दाखिला लेने के लिए अनुमति दी थी।

पूर्व में हाई कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए बिहार के सभी 27 सरकारी व निजी लॉ कॉलेजों में नए दाखिले पर रोक लगा दी थी। बाद मे इस आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए 17 कॉलेजों में सशर्त दाखिले की मंजूरी दे दी थी।

उस समय हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि दाखिला सिर्फ 2021-22 सत्र के लिए ही होगा।कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि अगले साल के सत्र के लिए बीसीआई से फिर मंजूरी लेनी होगी।

उस समय कोर्ट ने इन कालेजों का निरीक्षण कर बार काउंसिल ऑफ इंडिया को तीन सप्ताह में रिपोर्ट देने का आदेश देते हुए कहा था कि जिन लॉ कालेजों को पढ़ाई जारी करने की अनुमति दी गई है, वहां की व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं को भी देखा जायेगा।

सुनवाई के समय समय याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार एवं रितिका रानी, बीसीआई की ओर से अधिवक्ता विश्वजीत कुमार मिश्रा ने कोर्ट में अपने अपने पक्षों को प्रस्तुत किया।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 2 मार्च, 2023 को फिर की जाएगी।

राज्य के विभिन्न अधिवक्ता संघों में होने जा रहे चुनाव में बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देशों पर पटना हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने कड़ा विरोध जताया है

राज्य के विभिन्न अधिवक्ता संघों में होने जा रहे चुनाव में बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देशों पर पटना हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने कड़ा विरोध जताया है।इन दिशानिर्देशों को बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने बिहार स्टेट बार काउंसिल द्वारा जारी किया गया है ।

श्री वर्मा ने बिहार स्टेट बार काउंसिल द्वारा जारी उन दिशानिर्देशों पर आपत्ति जताई है, जिसमें आगामी अधिवक्ता संघों के चुनाव में केवल उन्हीं अधिवक्ताओं को मतदाता सूची में शामिल करने की बात कही गई है जो अधिवक्ता पिछले पाँच वर्षों में प्रत्येक साल कम से कम पाँच मामलों में अपनी हाजिरी दे चुके हैं ।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने यह दिशानिर्देश फर्जी मतदाताओं को मतदान से रोकने के लिए जारी किया है।बार काउंसिल का यह कथन है कि जो अधिवक्ता लाइसेंस लेकर दूसरे व्यवसाय में लगे हुए हैं ,उन्हें मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाना चाहिए ।

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वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने बार काउंसिल द्वारा जारी इस दिशानिर्देश पर कहा कि यह एडवोकेट्स एक्ट एवं बार काउंसिल नियमों के विरुद्ध है । उन्होंने कहा कि जो भी अधिवक्ता स्टेट बार काउन्सिल में नामांकित हैं,उन्हें वोट देने का अधिकार है । ऐसे दिशानिर्देशों को परिपत्र के माध्यम से अस्तित्व में नहीं लाया जा सकता, जब तक कानून में संशोधन न किया जाए।

उन्होंने इन दिशानिर्देशों को वकीलों के अहित में बताया।
उन्होंने कहा कि अगर ये सर्कुलर लाना था,तो अधिवक्ता संगठनों से व्यापक विचार विमर्श करना चाहिए था। ।

बिहार में गलवान में शहीद हुए बेटे के पिता को गिरफ्तार कर पुलिस ने जमकर पीटा

पटना/वैशाली । बिहार के एक सैनिक के पिता, जो 2020 गलवान घाटी की झड़प में शहीद हुए सेना के जवान जय किशोर सिंह के पिता की पिटाई की गई। परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया है कि बिहार में सरकारी जमीन पर अपने बेटे के लिए एक स्मारक बनाने के लिए जय किशोर सिंह के पिता की पिटाई की गई। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि जय किशोर सिंह के पिता को वैशाली के जंदाहा में सरकारी भूमि पर अपने बेटे के लिए एक स्मारक बनाने के लिए पुलिस ने उनकी पिटाई की है।

गिरफ्तारी ने बिहार के वैशाली में सैनिक के गांव में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। सीसीटीवी फुटेज में पुलिस सिपाही जय किशोर के पिता राज कपूर सिंह को गांव से घसीटते हुए दिख रही है। परिवार का आरोप है कि उसे पुलिस ने पीटा है।

शहीद जय किशोर सिंह के भाई का कहना है कि डीएसपी मैम ने दौरा किया था और हमें 15 दिनों के भीतर मूर्ति हटाने के लिए कहा था। बाद में थाना प्रभारी हमारे घर आए और मेरे पिता को गिरफ्तार कर लिया और मारपीट भी की। मैं भी एक सशस्त्र बल का जवान हूं। पुलिस की इस तरह की बर्बर कार्रवाई से वे आहत हैं।

GalwanMartyr Statue

उन्होंने दावा किया, “वे रात के अंधेरे में आए और उसे इस तरह गिरफ्तार किया जैसे वह कोई आतंकवादी हो।”

हालांकि, पुलिस ने दावा किया कि यह मामला अवैध अतिक्रमण के मुद्दे से जुड़ा है, जो भूस्वामी के अधिकारों का उल्लंघन था।

पुलिस अधिकारी पूनम केसरी ने कहा कि उन्होंने ग्रामीणों की शिकायत पर कार्रवाई की कि सिपाही के स्मारक ने एक पड़ोसी के खेत तक पहुंच को अवरुद्ध कर दिया था।

अधिकारी ने कहा, “उन्होंने एक स्मारक बनाया, फिर रातोंरात इसके चारों ओर दीवारें खड़ी कर दी गईं। सरकारी जमीन पर अतिक्रमण था। उन्हें बार-बार अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया।”

स्थानीय लोगों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया और ‘भारत माता की जय’ के नारे भी लगाए।

पटना हाइकोर्ट ने पटना-गया-डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के मामलें पर सुनवाई करते हुए निर्माण कम्पनियों को बताने को कहा है कि निर्माण कार्य कब तक पूरा हो जाएगा

पटना हाइकोर्ट ने पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के मामलें पर सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्माण कम्पनियों को बताने को कहा है कि निर्माण कार्य कब तक पूरा हो जाएगा।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र,राज्य सरकार,एनएचएआई और अन्य सम्बंधित पक्षों को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।सम्बंधित पक्षों ने कोर्ट के समक्ष हलफनामा दायर किया है।

पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य कर रही कम्पनियों ने कोर्ट को बताया कि 31मार्च,2023 तक फेज एक का अधिकांश कार्य पूरा कर लिया जाएगा।साथ ही इस राजमार्ग के निर्माण कार्य को लगभग 30 जून, 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनीष कुमार ने कोर्ट को बताया कि जिस गति से काम किया जा रहा है, ऐसे में तय समय सीमा में निर्माण कार्य पूरा होना कठिन है।उन्होंने कहा कि तय समय सीमा में कार्य पूरा करने के लिए संसाधनों और कार्य करने वाले लोगों की संख्या बढ़ाने की जरूरत हैं।

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इससे पूर्व अधिवक्ताओं की टीम ने खंडपीठ के समक्ष पटना गया डोभी एनएच का निरीक्षण कर कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत किया था।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने वकीलों की टीम को इस राजमार्ग के निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने फेज 2 के निर्माण में उत्पन्न कर रही बाधाओं और अतिक्रमण को राज्य सरकार शीघ्र हटाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।कोर्ट ने इसके लिए आवश्यक पुलिस बल और व्यवस्था मुहैया कराने का निर्देश सबंधित ज़िला प्रशासन को दिया है।

पूर्व में भी राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने वाली कंपनी ने इसका निर्माण कार्य 30 जून,2023 तक पूरा करने का अश्वासन कोर्ट को दिया था।साथ ही कोर्ट ने इस फेज के निर्माण में बाधा उत्पन्न होने वाले सभी अवरोधों को तत्काल हटाने का निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को दिया था।

कोर्ट को पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के फेज दो व तीन के निर्माण में लगी निर्माण कंपनी ने बताया था कि पटना गया डोभी एनएच के निर्माण में कई जगह बाधा उत्पन्न किया जा रहा है।

इस मामलें पर 3अप्रैल,2023 को फिर सुनवाई की जाएगी।

भाजपा नहीं, लालू प्रसाद के एजेंडा पर ही काम कर रहे सुधाकर सिंह: सुशील कुमार मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि पूर्व मंत्री सुधाकर सिंह भाजपा नहीं, लालू प्रसाद के एजेंडे पर ही पूरी निष्ठा से काम करते हुए नीतीश कुमार पर दबाव बना रहे हैं।

  • तेजस्वी की ताजपोशी की तारीख बताएँ नीतीश,बयानों से दबाव बना रहा राजद
  • सुधाकर पर कार्रवाई के लिए तेजस्वी सक्षम, सिद्दीकी की सेहत बहाना

श्री मोदी ने कहा कि नीतीश-लालू डील का मुख्य एजेंडा इसी साल तेजस्वी प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री बनाना है, जबकि नीतीश कुमार इससे मुकरते हुए राजकुमार की ताजपोशी को 2025 तक टालना चाहते हैं।

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उन्होंने कहा कि सुधाकर सिंह तीन महीने से मुख्यमंत्री की आलोचना कर रहे हैं, फिर भी राजद ने नोटिस जारी करने के अलावा उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?

श्री मोदी ने कहा कि सुधाकर सिंह पर कार्रवाई करने में स्वयं तेजस्वी यादव सक्षम हैं, लेकिन इसे टालने के लिए कभी लालू प्रसाद के सिंगापुर में होने और कभी अब्दुल बारी सिद्दिकी की सेहत का बहाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सुधाकर सिंह राजद विधायकों की भावनाएँ व्यक्त करते हुए तेजस्वी को सीएम बनाने की तिथि घोषित कराना चाहते हैं।

श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार ने तेजस्वी को गद्दी सौंपने की घोषणा तो की, लेकिन तारीख नहीं बतायी, इसीलिए सुधाकर सिंह के जरिये दबाव बनाया जा रहा है।

पटना हाइकोर्ट ने राज्य में एयरपोर्ट के स्थापित करने,विकास, और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को राज्य के एयरपोर्ट और हवाई पट्टियों के आस पास अवैध अतिक्रमणों को हटाने का निर्देश दिया

पटना हाइकोर्ट ने राज्य में एयरपोर्ट के स्थापित करने,विकास, और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सुनवाई की।एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने इन मामलों पर सुनवाई राज्य सरकार को राज्य के एयरपोर्ट और हवाई पट्टियों के आस पास अवैध अतिक्रमणों को हटाने का निर्देश दिया। साथ ही अगली सुनवाई में कार्रवाई रिपोर्ट तलब किया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया इस मामलें में कार्रवाई करने के लिए केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय के सम्बंधित अधिकारी से सहयोग करेंगे।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से ये बताने को कहा कि राज्य में नए एयरपोर्ट बनाए जाने के मामलें क्या कार्रवाई की गई।दोनों सरकारों को बताने को कहा गया कि वे बताए कि इनके सम्बन्ध में क्या प्रस्ताव बना रहे है।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने जानना चाहा था कि कार्यरत एयरपोर्ट पटना,गया,बिहटा और दरभंगा के एयरपोर्ट के विकास,विस्तार और सुरक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की क्या योजना है।बहुत सारी सुविधाओं की कमी है।इन्हें बेहतर बनाने के क्या कार्रवाई की जा रही है।

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इससे पूर्व में हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए केंद्र और राज्य सरकार को पटना और बिहटा में एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर विचार करने को कहा था। तत्कालीन चीफ संजय करोल की खंडपीठ ने इस सम्बन्ध में अभिजीत कुमार पाण्डेय की जनहित याचिका पर फैसला सुनाया था।

कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राज्य की जनता को विकसित और सुरक्षित हवाई यात्रा की सुविधा दिया जाना मौलिक अधिकारों के अंतर्गत आता है।केंद्र और राज्य सरकार इन्हें विकसित और सुरक्षित हवाई यात्रा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद की जाएगी।

पटना हाइकोर्ट ने राज्य में बड़ी संख्या में फर्जी डिग्रियों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की बहाली मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से कार्रवाई रिपोर्ट तलब किया

पटना हाइकोर्ट ने राज्य में बड़ी संख्या में फर्जी डिग्रियों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की बहाली मामलें पर सुनवाई की। रंजीत पंडित की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए एसीजे जस्टिस सी एस सिंह ने राज्य सरकार से कार्रवाई रिपोर्ट तलब किया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि बड़ी संख्या में जाली डिग्रियों के आधार पर शिक्षक राज्य में काम कर रहे हैं।साथ ही वे वेतन उठा रहे है।

इससे पूर्व कोर्ट ने 2014 के एक आदेश में कहा था कि जो इस तरह की जाली डिग्री के आधार पर राज्य सरकार के तहत शिक्षक है,उन्हें ये अवसर दिया जाता है कि वे खुद अपना इस्तीफा दे दें, तो उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जाएगी।

26अगस्त,2019 को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि इस आदेश के बाद भी बड़ी संख्या में इस तरह के शिक्षक कार्यरत है और वेतन ले रहे है।कोर्ट ने मामलें को निगरानी विभाग को जांच के लिए सौंपा।उन्हें इस तरह के शिक्षकों को ढूंढ निकालने का निर्देश दिया।

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31जनवरी,2020 के सुनवाई दौरान निगरानी विभाग ने कोर्ट को जानकारी दी कि राज्य सरकार द्वारा इनके सम्बंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है,लेकिन अभी भी एक लाख दस हजार से अधिक शिक्षकों के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

साथ ही ये भी पाया गया कि 1316 शिक्षक बिना वैध डिग्री के नियुक्त किये गए।कोर्ट ने इस मामलें को काफी गम्भीरता से लिया।कोर्ट ने सम्बंधित विभागीय सचिव से हलफनामा दायर कर स्थिति का ब्यौरा देने का निर्देश दिया था।

आज कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को अगली सुनवाई में अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा तलब किया।इस मामलें पर अगली सुनवाई 13मार्च,2023 को होगी।

गोलवलकर की किताब में कहीं दलित विरोध नहीं, झूठ बोल रहे लालू प्रसाद: सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि गोयबल्स के चेले लालू प्रसाद झूठ बोलने में वर्ल्ड चैम्पियन हैं, इसलिए वे बिना प्रमाण के कुछ भी बोल सकते हैं।

  • कहा, यदि उनके आरोप सही तो राज्यसभा से इस्तीफा दे दूँगा
  • पीएम मोदी के रहते कोई खत्म नहीं कर सकता आरक्षण
  • भाजपा ने दिया अतिपिछड़ा वर्ग का पहला प्रधानमंत्री, बाकी सभी उसके खिलाफ
  • मानस निंदा और मंदिर प्रवेश के जरिये दलित कार्ड खेल रहा राजद

    श्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक और मनीषी विचारक माधव सदाशिव गोलवलकर की पुस्तक “बंच ऑफ थॉट्स” में दलितों और उनके काशी विश्वनाथ मंदिर प्रवेश के विरुद्ध कोई बात नहीं कही गई है। लालू प्रसाद ने विद्वेष फैलाकर हिंदू समाज को बाँटने के लिए झूठी बात कही।

    उन्होंने कहा कि अगर लालू प्रसाद अपना आरोप साबित कर दें, तो मैं राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र सौंप दूँगा।

    श्री मोदी ने कहा कि भाजपा ने पहली बार देश को अतिपिछड़ा समाज का सुयोग्य प्रधानमंत्री दिया, जबकि बाकी सभी दल उन्हें हटाना चाहते हैं।

    उन्होंने कहा कि नरेंद्र भाई मोदी के पीएम रहते कभी आरक्षण व्यवस्था समाप्त नहीं हो सकती। लालू प्रसाद इस मुद्दे पर भी 2015 से लगातार झूठ बोल रहे हैं।

    Lalu and Modi

    उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद ने दलितों-पिछड़ों को आरक्षण दिये बिना बिहार में पंचायत चुनाव कराये। वे आज भी महिला आरक्षण और सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 फीसद आरक्षण देने का विरोध कर रहे हैं।

    श्री मोदी ने कहा कि जनता लालू प्रसाद का आरक्षण-विरोधी चेहरा देख चुकी है, इसलिए 2019 के संसदीय चुनाव में राजद का सूपड़ा साफ हो गया था।

    उन्होंने कहा कि भाजपा को पिछड़ों का अपार समर्थन मिल रहा है और हमारे सबसे ज्यादा सांसद इसी वर्ग से हैं।

    श्री मोदी ने कहा कि आज मंडल और कमंडल , दोनों भाजपा के साथ हैं। इस व्यापक जनाधार से हताश राजद कभी अपने कोटे के मंत्री से श्रीरामचरित मानस की निंदा करा कर और कभी मंदिर प्रवेश का फर्जी मुद्दा उठाकर दलित कार्ड खेलने की कोशिश करता है। पूर्णिया रैली भी हताशा से उबरने की नाकाम कोशिश थी।

    मात्र 200ML शराब पकड़े जाने के आरोप में एक नई गाड़ी को नीलाम व राज्यसात कर देने के मामले पर पटना हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई

    पटना हाइकोर्ट ने मात्र 200 मिलीलीटर शराब पकड़ जाने के आरोप में एक नई मारुति वैगनआर गाड़ी को नीलाम व राज्यसात कर देने के मामले पर पटना हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने बेगूसराय के डीएम को आदेश दिया कि वह गाड़ी के मालिक को 50 हज़ार रुपये मुआवजा के साथ उस गाड़ी के इंश्योरेंस मूल्य के बराबर की रकम भी गाड़ी के मालिक को दें।

    याचिकाकर्ता अंजनी झा की रिट याचिका को मंजूर करते हुए ये फैसला सुनाया।ये मामला बेगूसराय के मुफस्सिल थाना अंतर्गत जून, 2021 में जब्त हुए मारुति वैगनआर को शराबबंदी कानून की आड़ मे आनन-फानन में नीलाम करने का है।

    याचिकाकर्ता जप्त हुए गाड़ी का मालिक था। इस मारुति वैगन आर गाड़ी को पुलिस ने इस आरोप पर पकड़ा था कि उस पर सवार सात व्यक्ति के पास 200 मिलीलीटर विदेशी शराब थी।

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    कोर्ट ने पूरी नीलामी प्रक्रिया को शराबबन्दी कानून के खिलाफ मानते हुए उक्त कारवाही को अवैध ठहराया।हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को यह भी निर्देश दिया है कि वह इस मामले की जांच करें और जिस भी अफसर की गलती पकड़ी जाए ,उसके खिलाफ कार्रवाई करें ।

    PatnaHighCourt News: कोर्ट ने पटना स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट ऑफिस को याचिकाकर्ता के लिए फ्रेस पासपोर्ट जारी करने के आवेदन पर विचार करने का आदेश दिया

    पटना हाईकोर्ट ने पासपोर्ट जारी करने के लिए याचिकाकर्ता के आवेदन पर निर्णय लेने के मामले पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता के आवेदन पर विचार करने का आदेश दिया है। जस्टिस पूर्णेन्दु सिंह की पीठ ने निदा अमीना अहमद द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश को पारित किया।

    कोर्ट ने पटना स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट ऑफिस को याचिकाकर्ता के लिए फ्रेस पासपोर्ट जारी करने के आवेदन पर विचार करने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता की जन्म तिथि को आईसीएसई द्वारा जारी बर्थ सर्टिफिकेट के आधार पर चार सप्ताह में सुधार करने को कहा है।

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    याचिकाकर्ता के वरीय अधिवक्ता अमित श्रीवास्तव ने बताया कि कोर्ट ने म्यूनिसिपल ऑथोरिटी को भी याचिककर्ता के सही जन्म तिथि को रिकॉर्ड करने को कहा है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने ऐसे लंबित आवेदन समेत भविष्य में आने वाले ऐसे आवेदन पर कार्रवाई करने हेतु उम्मीद जताया है।

    सुरेंद्र यादव को मंत्री पद से बर्खास्त करें नीतीश, देशद्रोह का मुकदमा दर्ज हो : सुशील मोदी

    पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सेना और अग्निवीरों पर अमर्यादित बयान देने वाले मंत्री सुरेंद्र यादव को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलाना चाहिए।

    किसी को सेना और अग्निवीरों का अपमान करने की छूट नहीं

    श्री मोदी ने कहा कि आपराधिक प्रवृत्ति के सुरेंद्र यादव पर हत्या-अपहरण जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं। ऐसे व्यक्ति को अग्निवीरों का मनोबल तोड़ने का कोई नैतिक अधिकार नहीं।

    उन्होंने कहा कि अग्निवीर भर्ती योजना के प्रति देशभक्त युवाओं ने देश भर में जो उत्साह दिखाया, उससे विपक्ष की छाती फट रही है।

    SushilModi

    श्री मोदी ने कहा कि जिन लोगों ने सर्जिकल स्ट्राइक पर सबूत मांगे और अग्निवीर योजना पर भ्रम फैलाकर बिहार में रेलवे की करोड़ो की सम्पत्ति नष्ट करायी, वे अब भी बाज नहीं आ रहे।

    उन्होंने कहा कि सुरेंद्र यादव ने कुढनी उपचुनाव में महागठबंधन की हार पर इस्तीफा दे देने की बात कही थी, लेकिन वे अपने बयान से मुकर गए।

    सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाइकोर्ट के सात जजों के GPF अकाउंट बंद होने के मामलें पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा

    पटना हाइकोर्ट के सात जजों के जीपीएफ अकाउंट बंद होने के मामलें पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। इस मामलें पर चीफ जस्टिस डी बाई चन्द्रचूड़ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की।सुप्रीम कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई के लिए आज की तिथि निर्धारित की थी।

    पिछली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष ये मामला जब आया, तो उन्होंने पूछा कि मामला क्या है।जजों के जीपीएफ अकाउंट बंद कर दिया गया है।

    कोर्ट ने जानना चाहा कि ये याचिका किसके द्वारा दायर की गई,तो याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने चीफ जस्टिस चन्द्रचूड को बताया गया था कि पटना हाइकोर्ट के सात जजों ने याचिका दायर की है।

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    पटना हाइकोर्ट के सात जजों ने जीपीएफ अकाउंट बंद होने के मामलें में याचिका दायर की है।इनके नाम जस्टिस शैलेन्द्र सिंह, जस्टिस अरुण कुमार झा, जस्टिस जीतेन्द्र कुमार, जस्टिस आलोक कुमार पाण्डेय, जस्टिस सुनील दत्त मिश्रा,जस्टिस चन्द्रप्रकाश सिंह और जस्टिस चन्द्रशेखर झा है।

    पटना हाइकोर्ट में पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के मामलें पर सुनवाई 27 फरवरी,2023 को की जाएगी

    पटना हाइकोर्ट में पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के मामलें पर सुनवाई 27फरवरी,2023 को की जाएगी। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

    पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र,राज्य सरकार,एनएचएआई और अन्य सम्बंधित पक्षों को हलफनामा दायर करने के लिए 24फरवरी,2023 तक का समय दिया था।

    इससे पूर्व अधिवक्ताओं की टीम ने खंडपीठ के समक्ष पटना गया डोभी एनएच का निरीक्षण कर कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत किया था।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने वकीलों की टीम को इस राजमार्ग के निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।

    वकीलों की टीम राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य के निरीक्षण किया था। कोर्ट ने निर्माण कार्य में लगायी गई मशीन और मानव संसाधन के सम्बन्ध में भी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।

    पिछली सुनवाई में कोर्ट ने फेज 2 के निर्माण में उत्पन्न कर रही बाधाओं और अतिक्रमण को राज्य सरकार शीघ्र हटाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।कोर्ट ने इसके लिए आवश्यक पुलिस बल और व्यवस्था मुहैया कराने का निर्देश सबंधित ज़िला प्रशासन को दिया है।

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    पिछली सुनवाइयों में राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने वाली कंपनी ने इसका निर्माण कार्य 30 जून,2023 तक पूरा करने का अश्वासन कोर्ट को दिया था।साथ ही कोर्ट ने इस फेज के निर्माण में बाधा उत्पन्न होने वाले सभी अवरोधों को तत्काल हटाने का निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को दिया था।

    पिछली सुनवाई कोर्ट ने पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के फेज दो व तीन के निर्माण में लगी निर्माण कंपनी ने कोर्ट को बताया था कि पटना गया डोभी एनएच के निर्माण में कई जगह बाधा उत्पन्न किया जा रहा है।

    इस मामलें पर 27फरवरी,2023 को सुनवाई की जाएगी।

    पटना हाई कोर्ट ने एनएच 80 (मुंगेर से मिर्जापुर चौकी) के निर्माण में हो रहे विलम्ब के मामले पर सुनवाई की

    पटना हाई कोर्ट ने एनएच 80 (मुंगेर से मिर्जापुर चौकी) के निर्माण में हो रहे विलम्ब के मामले पर सुनवाई की । एसीजे जस्टिस सी एस सिंह एवं जस्टिस मधुरेश प्रसाद की खंडपीठ ने प्रणव कुमार झा की लोकहित याचिका पर सुनवाई की।

    कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि संभव हो तो संबंधित पदाधिकारी इस एनएच के री-अलाइनमेंट के लिए में कोई समाधान निकालें ,ताकि पक्के मकानों को टूटने से बचाया जा सके।

    कोर्ट को बताया गया कि इस एनएच के निर्माण में 2.5 किलोमीटर में स्थित करीब 80 पक्का मकानों को ध्वस्त करना पड़ेगा। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि जहां अतिक्रमण है ,वहां एनएचएआई एलिवेटेड रोड बनाने के संबंध में जवाब दे ।

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    याचिका की सुनवाई के दौरान भू- स्वामियों की तरफ से बताया गया कि भू- अधिग्रहण में उन्हें जमीन का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।इस पर हाईकोर्ट ने संबंधित जिलाधिकारी को सुनिश्चित करने के लिए कहा कि मुआवजा राशि का वितरण कैम्प लगा कर दिया जा सके ।

    कोर्ट ने इस एनएच के निर्माण हेतु जमीन का अधिग्रहण नहीं किये जाने पर जिला भूअर्जन पदाधिकारी को जमीन अधिग्रहण का काम जल्द पूरा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने एनएचएआई के अधिकारियों के साथ बैठक कर समस्या का समाधान हल करने का निर्देश दिया।

    गौरतलब है कि अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार ने कोर्ट को बताया था कि मुंगेर जिला में नियमित भूअर्जन पदाधिकारी के नहीं रहने से राष्ट्रीय राज मार्ग के निर्माण में बाधा उत्पन्न हो रही हैं।

    इस मामले की अगली सुनवाई 7अप्रैल,2023 को होगी।

    महागठबन्धन की पूर्णिया रैली मुस्लिम वोटों को एकजुट रखने की कवायद: सुशील मोदी

    पटना। राज्य के पूर्व उप-मुख्य मंत्री एवं राज्य सभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी ने आज एक बयान में कहा कि कांग्रेस के 24-25 फरवरी से रायपुर में हो रहे खुला महाधिवेशन के दौरान ही बिहार में 25 फरवरी को महागठबन्धन ने पूर्णिया में रैली रख दी ताकि कांग्रेस का कोई वरिष्ठ नेता शामिल नहीं हो सके।

    श्री नीतीश कुमार कांग्रेस से बदला ले रहे हैं। श्री नीतीश कुमार को कांग्रेस ने भाव नहीं दिया और सोनियाजी से जब नीतीश -लालू मिलने गए तो उन्हें 5 मिनट में ही निपटा दिया। इससे नाराज जद-यू को कोई नेता ‘भारत जोड़ों यात्रा में शामिल नहीं हुआ। और अब पूर्णिया रैली को रायपुर अधिवेशन के दौरान रख बदला साधा जा रहा है।

    श्री मोदी ने कहा कि महागठ‌बन्धन की पूर्णिया रैली भाजपा नहीं बल्कि ओवैसी को जवाब देने के लिए बुलाई गई है। विधान सभा चुनाव में ओवैसी के कारण दर्जनो सीटों पर राजद को पराजय देखनी पड़ी और ओवैसी के 5 विधायक पूर्वांचल में जीत गए। कटिहार, पूर्णिया में जदयू की जीत भाजपा के कारण हुई।

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    उसमें नीतीश कुमार की कोई भूमिका नहीं है। पूर्वांचल की महागठबन्धन की रैली अपने मुस्लिम वोटों को एकजुट रखने की कवायद है।

    श्री मोदी ने कहा कि सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के बावजूद 7 दल मिलकर पूर्णिया रैली मे भीड़ नहीं जुटा पाएंगे जितनी भीड़ अकेले भाजपा ने जुटाई थी।

    पूर्णिया रैली में लालू प्रसाद डिजिटल शामिल होंगे इसका प्रचार किया जा रहा है। परन्तु लालू जब स्वस्थ थे तब भाजपा को 2014 और 2019 में पराजित नहीं कर पाए तो अब अस्वस्थ लालू भाजपा का क्या बिगाड लेंगे।

    AIIMS,Patna के अधिवक्ता ने पटना हाइकोर्ट को बताया कि नेत्र रोग से पीड़ित लड़की के ईलाज के लिए धनराशि को एम्स,दिल्ली को स्थानांतरित कर दिया गया है

    पटना हाइकोर्ट ने सीतामढी ज़िला के आर्थिक रूप से कमज़ोर और शारीरिक अपंग लड़कियों की जांच और ईलाज के सम्बन्ध में सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ को एम्स,पटना के अधिवक्ता ने बताया कि नेत्र रोग से पीड़ित लड़की के ईलाज के लिए धनराशि को एम्स,दिल्ली को स्थानांतरित कर दिया गया है।

    कल इस मामलें पर सुनवाई करते हुए एम्स,पटना के अधिवक्ता को नेत्रहीन लड़की के ईलाज के लिए एम्स,दिल्ली में राज्य सरकार द्वारा दी गई धनराशि स्थानांतरित करने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया।पूर्व में एम्स,पटना के अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय ने बताया कि तीन लड़कियों में से दो लड़कियों को हड्डी सम्बन्धी रोग है।

    उनका ईलाज पटना के एम्स हॉस्पिटल में शुरू हो गया है। इन दोनों लड़कियों के ईलाज हेतु राज्य सरकार धनराशि दे चुकी है।उन्होंने बताया था कि एक नेत्र सम्बन्धी बीमारी से ग्रस्त है।इसके ईलाज के लिए इसे दिल्ली,एम्स भेजा जाना है।

    इसके प्रारंभिक ईलाज के मद में राज्य सरकार ने बीस हज़ार रुपये एम्स,पटना के खाते में स्थानांतरित कर दिया।ये धनराशि एम्स,दिल्ली के खाते में एम्स,पटना को स्थानांतरित करना है।

    पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इसी सम्बन्ध में कोर्ट ने एम्स,पटना को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।उल्लेखनीय है कि सीतामढी के ज़िला व सत्र न्यायाधीश ने इनके सम्बन्ध में पटना हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखा था।

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    इसमें ये बताया गया कि दो लड़कियों को हड्डी रोग की समस्या है,जबकि एक लड़की नेत्र की समस्या से ग्रस्त है।इनके आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण इनके माता पिता इनका ईलाज नही करवा पा रहे थे।

    इनके ईलाज में अस्पताल और ईलाज का खर्च काफी होता है, जो कि इनके वश में नहीं था।कोर्ट ने इनके ईलाज के क्रम में जांच के लिए पटना के एम्स अस्पताल भेजा था।

    एम्स के अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय ने कोर्ट को बताया था कि एम्स अस्पताल में जांच का कार्य पूरा हो कर ईलाज की कार्रवाई जारी है।

    इस मामलें में कोर्ट के समक्ष एमिकस क्यूरी अधिवक्ता मयूरी,एम्स,पटना की ओर से अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय व राज्य सरकार की ओर से विकास कुमार ने पक्षों को रखा।इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामलें को निष्पादित कर दिया।

    PatnaHighCourt News: पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई 13 मार्च,2023 तक टली

    पटना हाईकोर्ट में पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई 13 मार्च,2023 तक टली। जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई कर रही है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने जांच की प्रगति पर असंतोष जाहिर किया था।

    पहले की सुनवाई में PatnaHighCourt में एस एस पी, पटना और एस आई टी जांच टीम का नेतृत्व करने वाली सचिवालय एएसपी काम्या मिश्रा भी कोर्ट में उपस्थित रही थी।

    PatnaHighCourt ने कहा था कि इस मामलें की समग्रता में जांच नहीं की जा रही हैं।पुलिस अधिकारियों को विस्तार और गहराई से जांच पड़ताल करने की आवश्यकता है।

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    अधिवक्ता मीनू कुमारी ने बताया कि कोर्ट अब तक एस आई टी द्वारा किये गए जांच और कार्रवाई के सम्बन्ध में सम्बंधित अधिकारी से जानकारी प्राप्त करना चाहता था।उन्होंने बताया था कि आफ्टर केअर होम में रहने वाली महिलाओं की स्थिति काफी खराब हैं।

    PatnaHighCourt ने इस याचिका को पटना हाई कोर्ट जुवेनाइल जस्टिस मोनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रजिस्टर्ड किया था। कमेटी में जस्टिस आशुतोष कुमार चेयरमैन थे, जबकि जस्टिस अंजनी कुमार शरण और जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय इसके सदस्य के रूप में थे।

    इस मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च,2023 को की जाएगी।

    पटना हाइकोर्ट के 7 जजों के GPF अकाउंट बंद होने के मामलें को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई 24 फरवरी, 2023 को होगा

    पटना हाइकोर्ट के सात जजों के जीपीएफ अकाउंट बंद होने के मामलें को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष 24 फरवरी,2023 को सुनवाई होना तय हुआ है। इस मामलें को चीफ जस्टिस डी बाई चन्द्रचूड़ के मामला जब आया, तो उन्होंने पूछा कि मामला क्या है। जजों के जीपीएफ अकाउंट बंद कर दिया गया है।

    कोर्ट ने जानना चाहा कि ये याचिका किसके द्वारा दायर की गई, तो याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने चीफ जस्टिस चन्द्रचूड को बताया कि पटना हाइकोर्ट के सात जजों ने याचिका दायर की है।

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    कोर्ट ने आश्चर्य जाहिर करते हुए इस मामलें की सुनवाई की सुनवाई 24फरवरी,2023 को निर्धारित की है।

    हिम्मत है तो नीतीश खुद नेतृत्व संबंधी बयान का खंडन करें: सुशील मोदी

    पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार जब जदयू विधायक दल की बैठक में और तीन अन्य अवसरों पर सार्वजनिक रूप से तेजस्वी यादव को उत्तराधिकारी घोषित कर चुके हैं, तब इस मुद्दे पर ललन सिंह या किसी और के गोलमोल बयान का कोई मतलब नहीं।

    • ललन सिंह का गोलमोल बयान बेमतलब, विद्रोह दबाने की कोशिश
    • नीतीश पलट सकते हैं, लालू अपना एजेंडा लागू करने के लिए जदयू को तोड़ सकते हैं

    श्री मोदी ने कहा कि अगर हिम्मत है तो नीतीश कुमार 2025 में भी स्वयं महागठबंधन का नेतृत्व करते रहने और फिर सीएम बनने की घोषणा करें।

    SushilModi

    उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने एक बार भी तेजस्वी यादव को नेतृत्व सौंपने संबंधी अपने बयान का खंडन नहीं किया , लेकिन जब उपेंद्र कुशवाहा ने नई पार्टी का एलान कर दिया , तब विद्रोह पर पानी डालने वाले बयान दिये जा रहे हैं।

    श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार अपने बयान से पलट सकते हैं, लेकिन लालू प्रसाद उन्हें डील से पीछे नहीं हटने देंगे। वे जदयू को तोड़ कर तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनवाने का सपना पूरा कर सकते हैं।