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पटना हाइकोर्ट ने राज्य में लोकायुक्त व अन्य सदस्यों के रिक्त पदों को भरने के दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की

पटना हाइकोर्ट ने राज्य में लोकायुक्त व अन्य सदस्यों के रिक्त पदों को भरने के दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।विकास चन्द्र ऊर्फ गुड्डू बाबा की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने सुनवाई की।

राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल पी के शाही ने कोर्ट को बताया कि राज्य में लोकायुक्त व अन्य सदस्यों के रिक्त पदों को भरे जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।उन्होंने कहा कि शीघ्र ही इन पदों पर नियुक्ति कर ली जाएगी।

पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता विकास चंद्र ने कोर्ट को बताया था कि लोकायुक्त व सदस्यों के पद रिक्त होने के कारण लोकायुक्त कार्यालय में सुनवाई नहीं हो रही है।इससे आम आदमी को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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उन्होंने कोर्ट को बताया था कि लोकायुक्त का पद 13 फरवरी,2022और दो सदस्यों का पद 17 मई,2021 से रिक्त पड़े है।

उन्होंने कोर्ट को बताया था कि राज्य सरकार द्वारा इन रिक्त पदों को इतने दिनों तक नहीं भरा जाना उनकी उपेक्षापूर्ण रवैया दिखाता है।प्रावधानों के अनुसार इन पदों को राज्य सरकार द्वारा शीघ्र भरा जाना चाहिए।

कोर्ट ने एडवोकेट जनरल पी के शाही के दिए गए आश्वासन के आलोक में इस जनहित याचिका को निष्पादित कर दिया।

बिहार सरकार की याचिका खारिज: पटना हाइकोर्ट ने बिहार सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 3 जुलाई,2023 के पूर्व ही सुनवाई करने के दायर याचिका को खारिज कर दिया

पटना हाइकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 3 जुलाई,2023 के पूर्व ही कोर्ट द्वारा सुनवाई करने के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने इन मामलों पर सुनवाई की तिथि 3 जुलाई,2023 ही रखा।पूर्व में हाईकोर्ट ने इन मामलों पर सुनवाई की तिथि 3 जुलाई,2023 ही रखा था।

गौरतलब कि पहले 4मई,2023 को कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए जातीय जनगणना पर रोक लगा दी थी।

चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि राज्य सरकार इस दौरान इक्कठी की गई आंकड़ों को शेयर व उपयोग फिलहाल नहीं करेगी।

राज्य सरकार द्वारा दायर याचिका में ये कहा गया है कि क्योंकि पटना हाइकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार के पास जातीय जनगणना कराने का वैधानिक अधिकार नहीं है,इसीलिए इन याचिकाओं पर 3 जुलाई,2023 को सुनवाई करने का कोई कारण नहीं है।

कार्यपालिका के पास जातीय जनगणना कराने का क्षेत्राधिकार नहीं है।इसे कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट कर दिया है।

कोर्ट ने ये भी कहा कि जातीय जनगणना से जनता की निजता का उल्लंघन होता है।इस सम्बन्ध में विधायिका द्वारा कोई कानून भी नहीं बनाया गया है।

कोर्ट ने अपने 4 मई, 2023 के अंतरिम आदेश में जो निर्णय दिया है,उसमें सभी मुद्दों पर अंतिम निर्णय दिया गया।कोर्ट ने इन याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर अंतिम रूप से निर्णय दे दिया है।

राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कहा था कि इन जनहित याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर कोर्ट ने अपना निर्णय अंतिम रूप से दे दिया है।इस कारण इन याचिकाओं की सुनवाई 3 जुलाई,2023 के पूर्व ही करके इनका निष्पादन कर दिया जाए।लेकिन कोर्ट ने राज्य सरकार की इस याचिका को रद्द करते हुए सुनवाई की तिथि 3मई, 2023 ही निश्चित किया है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार, रितिका रानी, अभिनव श्रीवास्तव और राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल पी के शाही ने पक्षों को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया

बिहार में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पटना हाइकोर्ट में 9 मई, 2023 को सुनवाई होगी

पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 3 जुलाई,2023 के पूर्व ही कोर्ट द्वारा सुनवाई करने के लिए याचिका दायर की गई थी। पटना हाईकोर्ट इन मामलों कल 9 मई, 2023 को सुनवाई करेगी। गौरतलब कि पहले कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए जातीय जनगणना पर रोक लगा दी थी।

चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि राज्य सरकार इस दौरान इक्कठी की गई आंकड़ों को शेयर व उपयोग फिलहाल नहीं करेगी।

राज्य सरकार द्वारा दायर याचिका में ये कहा गया है कि क्योंकि पटना हाइकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार के पास जातीय जनगणना कराने का वैधानिक अधिकार नहीं है,इसीलिए इन याचिकाओं पर 3 जुलाई,2023 को सुनवाई करने का कोई कारण नहीं है।

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कार्यपालिका के पास जातीय जनगणना कराने का क्षेत्राधिकार नहीं है।इसे कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट कर दिया है।

कोर्ट ने ये भी कहा कि जातीय जनगणना से जनता की निजता का उल्लंघन होता है।इस सम्बन्ध में विधायिका द्वारा कोई कानून भी नहीं बनाया गया है।

कोर्ट ने अपने 4 मई, 2023 के अंतरिम आदेश में जो निर्णय दिया है,उसमें सभी मुद्दों पर अंतिम निर्णय दिया गया।कोर्ट ने इन याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर अंतिम रूप से निर्णय दे दिया है।

राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि इन जनहित याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर कोर्ट ने अपना निर्णय अंतिम रूप से दे दिया है।इस कारण इन याचिकाओं की सुनवाई 3 जुलाई,2023 के पूर्व ही करके इनका निष्पादन कर दिया जाए।

गुजरातियों को ठग कहने के मामले में तेजस्वी यादव को समन, 20 मई को अहमदाबाद कोर्ट में पेश होने का आदेश

अहमदाबाद/पटना। गुजरातियों को ठग कहने के मामले में बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ अहमदाबाद में दाखिल किए मानहानि के केस पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद 202 के तहत जांच का आदेश दिया। अगली सुनवाई की तारीख 20 मई तय की है।

तेजस्वी यादव के खिलाफ सोमवार को अहमदाबाद की मेट्रो कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने मामले के परिवादी को सबूत पेश करने का आदेश दिया है। मामले में गवाहों को हाजिर करने का आदेश भी कोर्ट में दिया गया है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि इस सुनवाई के दौरान तेजस्वी यादवको सशरीर हाजिर होना होगा।

अहमदाबाद की मेट्रोपॉलिटन कोर्ट में एडीशिनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट डी जे परमार ने सुनवाई की और फिर इंक्वायरी का आदेश जारी किया। पिछले महीने की 26 तारीख को अहमदाबाद में रहने वाले पेशे से व्यापारी हरेश मेहता ने तेजस्वी यादव के खिलाफ मानहानि का केस दाखिल किया था।

इसमें मेहता ने आरोप लगाया है कि तेजस्वी यादव ने मार्च महीने के आखिर में विधानसभा परिसर में एक बयान दिया था। इसमें उन्होंने कहा था देश की वर्तमान परिस्थिति में सिर्फ गुजराती ठग हो सकते हैं और उन्हें माफ भी कर दिया जाएगा। मेहता की मांग है कि इससे गुजरात के लोगों की मानहानि हुई है। इसलिए तेजस्वी यादव पर मानहानि का केस चलाया जाए। कोर्ट ने सोमवार को इसमामले में सुनवाई करते हुए तेजस्वी यादव को धारा 202 के तहत समन जारी किया है।

पूर्व सांसद आनंद मोहन की जेल से रिहाई पर बिहार सरकार और अन्य को SC का नोटिस

आनंद मोहन की जेल से रिहाई के खिलाफ जी. कृष्णैया की पत्नी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस, बिहार सरकार और आनंद मोहन को सर्वोच्च अदालत ने जारी किया नोटिस।

दिवंगत IAS अधिकारी जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया, बिहार के जेल नियमों में संशोधन के बाद आनंद मोहन की समय से पहले रिहाई को चुनौती देते हुए SC का रुख किया था।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल को भी नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह में जवाब तलब किया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने नियमों में बदलाव से संबंधित सभी रिकॉर्ड भी बिहार सरकार से मांगे हैं।

AnandMohan in SC

पूर्व आईएएस अधिकारी जी कृष्णय्या की पत्नी उमा देवी ने कहा- “हमें खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और बिहार सरकार और इसमें शामिल अन्य लोगों को नोटिस जारी किया है। उन्हें 2 सप्ताह के भीतर जवाब देना है। हमें SC में न्याय मिलेगा।”

बिहार सरकार ने आनंद मोहन सिंह की रिहाई के लिए जेल मैन्यूअल में बदलाव किया था और लोकसेवक की हत्या को अपवाद से हटाकर सामान्य कर दिया था जिसके बाद आनंद मोहन सिंह की जेल से रिहाई हुई है। आनंद मोहन सिंह के साथ 26 और कैदियों की रिहाई हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने YouTuber मनीष कश्यप की NSA लगाने के खिलाफ याचिका पर विचार करने से किया इनकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने YouTube मनीष कश्यप की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है, जिसमें दक्षिणी राज्य में बिहार के प्रवासियों पर हमलों पर फर्जी खबरें फैलाने में उनकी भूमिका को लेकर बिहार और तमिलनाडु में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और जे बी पारदीवाला की पीठ ने, हालांकि, कश्यप को एक उपयुक्त न्यायिक मंच पर एनएसए के आह्वान को चुनौती देने की स्वतंत्रता दी। इसने उनके खिलाफ सभी 19 प्राथमिकी और उनके बिहार स्थानांतरित करने की याचिका को भी खारिज कर दिया।

इस समय तमिलनाडु की मदुरै जेल में बंद कश्यप की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह की जोरदार दलीलों को खारिज करते हुए पीठ ने कहा, ”हम याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं।”

गिरफ्तार यूट्यूबर पर कई प्राथमिकी दर्ज हैं और उनमें से तीन बिहार में दर्ज हैं। प्राथमिकी के अलावा, कश्यप पर तमिलनाडु पुलिस द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत भी आरोप लगाए गए थे।

SC on ManishKashyap

सुप्रीम कोर्ट की बेंच के पास कश्यप के लिए कड़े शब्द थे…

“आपके पास एक स्थिर राज्य है, तमिलनाडु राज्य। आप बेचैनी पैदा करने के लिए कुछ भी प्रसारित करते हैं, ”पीठ ने मौखिक रूप से कहा।

बाद में, इसने पूछा, “क्या किया जाना है? आप ये फर्जी वीडियो बनाते हैं… ”

पीठ ने कश्यप को अपनी याचिका के साथ उच्च न्यायालय जाने की अनुमति दी।

कश्यप के वकील सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह ने कहा कि क्योंकि उन्होंने अपने वीडियो दैनिक भास्कर जैसे मुख्यधारा के अखबारों की मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित किए थे, अगर उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया जाना है तो अन्य अखबारों के पत्रकारों को भी इसी तरह हिरासत में लेने की जरूरत है। उन्होंने एनएसए के तहत आरोपित मणिपुर के पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेमचा का उदाहरण भी दिया।

Breaking News of Bihar Live Updates: सुप्रीम कोर्ट ने एनएसए लगाने के खिलाफ जेल में बंद बिहार YouTuber मनीष कश्यप की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया

Latest News of Bihar – बिहार की इस समय की बड़ी खबरें

  • Bihar News: पूर्व सांसद आनंद मोहन की जेल से रिहाई पर बिहार सरकार और अन्य को SC का नोटिस।
  • ‘गुजराती ठग’ मामले में तेजस्वी यादव को समन, 20 मई को अहमदाबाद कोर्ट में पेश होने का आदेश।
  • पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 3 जुलाई, 2023 के पूर्व ही कोर्ट द्वारा सुनवाई करने के लिए याचिका दायर की गई है।
  • तेलंगाना हाईकोर्ट के जस्टिस अन्नीरेड्डी अभिषेक रेड्डी का स्थानांतरण पटना हाईकोर्ट हुआ।
  • Corona in Bihar: बिहार में फिर तेजी से बढ़ा कोरोना, बीते 24 घंटे में 92 नए मामले आये सामने, एक्टिव मरीजों की संख्या बढ़कर 825 हो गई हैं। राजधानी पटना में 378 संक्रमित हैं।
  • पंचायत उपचुनाव 2023: राज्य निर्वाचन आयोग ने बिहार में पंचायत उपचुनाव का किया ऐलान। बिहार में 25 मई को कुल 3,522 पदों के लिए पंचायत उपचुनाव होंगे। 27 मई को नतीजे सामने आ जाएंगे।
  • NGT ने बिहार पर 4,000 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय जुरमाना लगाया । नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रदूषक भुगतान सिद्धांत के अनुसार वैज्ञानिक रूप से ठोस और तरल कचरे का प्रबंधन करने में विफल रहने के लिए बिहार पर 4,000 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया है।
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पटना हाइकोर्ट ने एससी/ एसटी छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपी आईएएस एस . एम. राजू की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रखा

पटना हाइकोर्ट ने एससी/ एसटी छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपी आईएएस एस . एम. राजू की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित कर लिया है। राजेश कुमार वर्मा ने राजू की जमानत याचिका पर सभी पक्षों को सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रखा।

गौरतलब है कि 2017 में निगरानी ब्यूरो द्वारा दर्ज हुए इस घोटाले के मुकदमे में राजू 20 जनवरी 2023 से जेल में बंद है।राजू के वकील आशीष गिरी ने कोर्ट को बताया कि इस मामले के मुख्य आरोपी एवं पूर्व आईएएस परशुराम कड़ा रमैया को जमानत मिल चुकी है। याचिकाकर्ता भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी है और उन्होंने अपने समय में इस छात्रवृत्ति घोटाले का उजागर भी किया।

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वही निगरानी ब्यूरो की तरफ से एडवोकेट अरविंद कुमार ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया कि जब राजू एससी/ एसटी कल्याण विभाग में थे, तो उनके ही समय में कई ऐसे छात्र छात्राओं का विवरण केस डायरी में मिला है ,जो दाखिला तो लिए लेकिन एक भी दिन बिना क्लास किए परीक्षा दी है।
फिर भी उन्हे छात्रवृत्ति की राशि का भुगतान हुआ है।उनके विरुद्ध घोटाले में शामिल होने के ठोस के सबूत है।

पटना हाइकोर्ट ने बिहार कारागार नियमावली में की गई संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 12 मई, 2023 तक जबाब दायर करने का निर्देश दिया है

पटना हाइकोर्ट ने बिहार कारागार नियमावली में की गई संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 12 मई, 2023 तक जबाब दायर करने का निर्देश दिया हैं। अनुपम कुमार सुमन ओर से दायर याचिका पर चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन विनोद चन्द्रन की खंडपीठ ने सुनवाई की।

कोर्ट को बताया गया कि
राज्य सरकार ने गत 10 अप्रैल,2023 को बिहार कारागार नियमावली, 2012 के नियम 481(i)(क) में संशोधन करते हुए “ड्यूटी पर तैनात लोक सेवक की हत्या” शब्द को हटाने के लिए संशोधन कर दिया।इस कारण गोपालगंज डीएम हत्या कांड के दोषी पूर्व सांसद आनंद मोहन सहित 26 सजायाफ्ता बंदियों को जेल से छोड़ दिया गया।

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उन्होंने बिहार कारागार नियमावली के नियम 481(i)(क) में किए गए संशोधन को गैरकानूनी करार देने और संशोधन अधिसूचना को निरस्त करने की मांग कोर्ट से की।कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को जबाब दायर करने का निर्देश दिया।इस मामलें पर अगली सुनवाई 12 मई, 2023 को होगी।

जातीय जनगणना से पिछड़ी जाति का सच आ जाता सामने; रोक से बिहार के राजनीतिक बदलाव पर फिर लगा ब्रेक

पूर्व मंत्री नरेन्द्र बाबू अब इस दुनिया में नहीं रहे लेकिन जब भी मुलाकात होती थी तो मांझी के मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश के खिलाफ मोर्चा खोलने को लेकर बहस हो ही जाती थी ।

मैं कहता था आप लोग सही नहीं किए बिहार की राजनीति का एक चक्र पूरा हो रहा था उसको आप लोगों ने बीच रास्ते में ही ब्रेक लगा दिया। जिस वजह से बिहार की राजनीति फिर उसी चक्र में वापस आ गया जिससे नीतीश कुमार थोड़ा बाहर निकाले थे। मतलब सत्ता की मलाई खाते खाते समाज में जो नये सामंती वर्ग पैदा लिये हैं उसके शोषण और अत्याचार के खिलाफ जैसे जैसे आक्रोश बढ़ा अन्य पिछड़ी जातियों उनके खिलाफ गोलबंद होने लगे इसी का लाभ नीतीश उठा रहे थे वही मांझी मुख्यमंत्री बने रह जाते तो बिहार की राजनीति से हमेशा हमेशा के लिए दबंग पिछड़ी जातियां राजनीति से बाहर हो जाती लेकिन आप लोग इस चक्र को पूरा नहीं होने दिए हालांकि नरेंद्र बाबू का कुछ और तर्क था लेकिन अंत में वो कहते थे संतोष जो बात गयी वो बीत गयी आगे फिर मौका आयेगा मिल बैठ कर बात करेंगे।

शायद आज वो जिंदा होते तो जातीय जनगणना को लेकर मेरे विचार से सहमत होते, बिहार में प्रभावशाली दबंग पिछड़ी जाति और दबंग दलित की कितनी संख्या है और उसका व्यापार ,संसाधन,नौकरी और जमीन पर उसका कितना कब्जा है यह डाटा जिस दिन सामने आ जाता बिहार की राजनीति दस वर्षो में पूरी तरह से बदल जाता। क्यों कि समाज में सवर्णो को लेकर जो घृणा था आक्रोश था वह अब दबंग पिछड़ी और दलित जाति में शिफ्ट कर गया है । वही पंचायत चुनाव इस प्रक्रिया को और तेज कर दिया जिस वजह से गांव का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तौर पर बदल गया है ।

जातीय जनगणना जैसे ही प्रकाशित होता तीन चार पिछड़ी जाति और एक दो दलित जाति जिसका 90 प्रतिशत हिस्सेदारी व्यापार,नौकरी .जमीन और राजनीति में है वो सामने आ जाता । और जैसे ही सामने आता उसके खिलाफ एक अलग तरह का माहौल तैयार होने लगता जैसे किसी दौर में सवर्ण को लेकर था जिसके पास व्यापार नौकरी,जमीन और सत्ता सब कुछ था । उसी को दिखा दिखा कर लोहिया जैसे नेता पिछड़ा पावे सौ में साठ जैसे नारे का ईजाद किये थे ।

आज साठ क्या 90 प्रतिशत हिस्सेदारी जो सवर्ण से ट्रांसफर हुआ है उस पर चार पाच पिछड़ी और एक दो दलित जाति का आज कब्जा है। ये डाटा जैसे ही सामने आता वैसे ही पूरे बिहार का नैरेटिव ही बदल जाता ।सच यही है जातीय जनगणना के पक्ष में ना नीतीश हैं ना लालू हैं ना बीजेपी है। क्यों कि उन्हें पता है जैसे ही जाति जनगणना प्रकाशित होता बिहार की राजनीति से दबंग पिछड़ी जाति की पकड़ उसी दिन से कमजोर होनी शुरु हो जायेंगी । ये लोग सिर्फ नैरेटिव बनाये रखना चाहते हैं जैसे बीजेपी को हिन्दू के उत्थान से कोई लेना देना नहीं है बस हिन्दू मुस्लिम नैरेटिव कैसे बना रहे इसके जुगत में लगा रहता है ।

पटना हाइकोर्ट ने बिहारशरीफ में इस वर्ष रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच कराने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की

पटना हाइकोर्ट ने बिहारशरीफ में इस वर्ष रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच कराने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने अमरेन्द्र कुमार सिन्हा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इस सम्बन्ध में की गई कार्रवाई का ब्यौरा अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत करते हुए वरीय अधिवक्ता एस डी संजय ने कहा कि बिहारशरीफ में रामनवमी शोभायात्रा के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई।उन्होंने कहा कि इससे बड़े पैमाने पर जान माल की हानि और व्यवसाई वर्ग को नुकसान झेलना पड़ा।

उन्होंने कोर्ट के समक्ष पक्षों को रखते हुए कहा कि इस मामलें की जांच हाईकोर्ट के अवकाशप्राप्त जज कराई जाए या सीबीआई या एनआईए से कराई जाए।इस जांच से निष्पक्ष और वास्तविक परिस्थिति सामने आ सकेगी।

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इस जनहित याचिका में ये भी अनुरोध किया गया है कि जिनके जान माल की क्षति और व्यावासायिक हानि हुई हो,उन्हें राज्य सरकार की ओर से क्षतिपूर्ति दिलाई जाए।

सभी सम्बंधित पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह इस मामलें में उठाए गए क़दमों और प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा कोर्ट के समक्ष अगली सुनवाई में प्रस्तुत करें।

याचिकाकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता एस डी संजय और राज्य सरकार की ओर एडवोकेट जनरल पी के शाही ने कोर्ट के समक्ष पक्षों को रखा।इस मामलें पर अगली सुनवाई गर्मी की छुट्टी के बाद की जाएगी।

पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 3 जुलाई,2023 के पूर्व ही कोर्ट द्वारा सुनवाई करने के लिए याचिका दायर की गई है

पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 3 जुलाई,2023 के पूर्व ही कोर्ट द्वारा सुनवाई करने के लिए याचिका दायर की गई है। गौरतलब कि कल कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए जातीय जनगणना पर रोक लगा दी थी।

चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि राज्य सरकार इस दौरान इक्कठी की गई आंकड़ों को शेयर व उपयोग फिलहाल नहीं करेगी।

राज्य सरकार द्वारा दायर याचिका में ये कहा गया है कि क्योंकि पटना हाइकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार के पास जातीय जनगणना कराने का वैधानिक अधिकार नहीं है,इसीलिए इन याचिकाओं पर 3 जुलाई,2023 को सुनवाई करने का कोई कारण नहीं है।

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कार्यपालिका के पास जातीय जनगणना कराने का क्षेत्राधिकार नहीं है।इसे कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट कर दिया है।

कोर्ट ने ये भी कहा कि जातीय जनगणना से जनता की निजता का उल्लंघन होता है।इस सम्बन्ध में विधायिका द्वारा कोई कानून भी नहीं बनाया गया है।

कोर्ट ने अपने 4 मई, 2023 के अंतरिम आदेश में जो निर्णय दिया है,उसमें सभी मुद्दों पर अंतिम निर्णय दिया गया।कोर्ट ने इन याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर अंतिम रूप से निर्णय दे दिया है।

राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि इन जनहित याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर कोर्ट ने अपना निर्णय अंतिम रूप से दे दिया है।इस कारण इन याचिकाओं की सुनवाई 3 जुलाई,2023 के पूर्व ही करके इनका निष्पादन कर दिया जाए।

तेलंगाना हाईकोर्ट के जस्टिस अन्नीरेड्डी अभिषेक रेड्डी का स्थानांतरण पटना हाईकोर्ट हुआ

केंद्र सरकार ने आज एक अधिसूचना जारी कर तेलंगाना हाईकोर्ट के जस्टिस अन्नीरेड्डी अभिषेक रेड्डी का स्थानांतरण पटना हाईकोर्ट कर दिया है । भारत के संविधान के अनुच्छेद 222 में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग कर चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया ने उनका स्थानांतरण किया है ।

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श्री रेड्डी जल्द पटना हाईकोर्ट के जज के रूप में अपना योगदान कर सकते हैं ।

पटना हाइकोर्ट ने बिहार सरकार द्वारा जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतरिम आदेश देते हुए फिलहाल रोक लगा दी

पटना हाइकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतरिम आदेश देते हुए फिलहाल रोक लगा दी। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने कल सुनवाई पूरी निर्णय सुरक्षित रखा था। कोर्ट ने निर्देश दिया किया कि राज्य सरकार इस दौरान इक्कठी की गई आंकड़ों को शेयर व उपयोग नहीं फिलहाल नहीं करेगी।

कल कोर्ट ने ये जानना चाहा था कि जातियों के आधार पर गणना व आर्थिक सर्वेक्षण कराना क्या कानूनी बाध्यता है।कोर्ट ने ये भी पूछा है कि ये अधिकार राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में है या नहीं।साथ ही ये भी जानना कि इससे निजता का उल्लंघन होगा क्या।

पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने जातियों और आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण कराने का ये अधिकार राज्य सरकार के अधिकारक्षेत्र के बाहर है।

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अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया था कि राज्य सरकार जातियों की गणना व आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।उन्होनें ने बताया कि ये संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।

उन्होंने कहा कि प्रावधानों के तहत इस तरह का सर्वेक्षण केंद्र सरकार करा सकती है।ये केंद्र सरकार के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आता है।उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण के लिए राज्य सरकार पाँच सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

दूसरी तरफ राज्य सरकार राज्य सरकार का कहना कि जन कल्याण की योजनाएं बनाने और सामाजिक स्तर सुधारने के लिए ये सर्वेक्षण किया कराया जा रहा है।

इस याचिकाकर्ताओं की ओर से दीनू कुमार व ऋतु राज, अभिनव श्रीवास्तव ने और राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल पी के शाही व केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता नरेश दीक्षित ने कोर्ट के समक्ष पक्षों को प्रस्तुत किया।

नीतीश सरकार जातीय जनगणना पर हाईकोर्ट में पिटी, सही ढंग से पक्ष नहीं रख पायी सरकार: सुशील कुमार मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जातीय जनगणना कराने के विरुद्ध एक भी कानूनी सवाल का जवाब दमदार ढंग से नहीं दे पाने के कारण हाईकोर्ट में फिर नीतीश सरकार की भद पिटी। जनगणना कराने का फैसला उस एनडीए सरकार था, जिसमें भाजपा शामिल थी।

भाजपा के सरकार में रहते हुआ था जातीय जनगणना का फैसला

श्री मोदी ने कहा कि अदालत की अंतरिम रोक के बाद जातीय जनगणना लंबे समय तक टल सकती है और इसके लिए मुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं।

उन्होंने कहा कि जिस मुद्दे पर विरोध पक्ष से मुकुल रहोतगी जैसे बड़े वकील बहस कर चुके थे, उस पर जवाब देने के लिए वैसे ही कद्दावर वकीलों को क्यों नहीं खड़ा किया गया ?

sushil modi vs nitish kumar

श्री मोदी ने कहा कि जनगणना के संबंध में तीन बड़े न्यायिक प्रश्न थे-

  • क्या इससे निजता के अधिकार का हनन होता है?
  • क्या यह कवायद सर्वे की आड़ में जनगणना है?
  • इसके लिए कानून क्यों नहीं बनाया गया?

उन्होंने कहा कि सरकार के वकील इन तीनों सवालों पर अपनी दलील से न्यायालय को संतुष्ट नहीं कर पाये। इससे लगता है कि सरकार यह मुकदमा जीतना ही नहीं चाहती थी ।

श्री मोदी ने कहा कि स्थानीय निकायों में अतिपिछड़ों को आरक्षण देने के लिए विशेष आयोग बनाने के मुद्दे पर भी सरकार को झुकना पड़ा था। आयोग की रिपोर्ट अब तक जारी नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि जनगणना हो या आरक्षण, राजद को अतिपिछड़ा वर्ग पर नहीं, केवल एम-वाइ समीकरण पर भरोसा है। वे केवल दिखावे के लिए पिछड़ों की बात करते हैं।

पटना हाइकोर्ट में बिहार सरकार द्वारा जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी; कल 4 मई को अंतरिम आदेश होगा पारित

पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी। हाइकोर्ट कल 4 मई, 2023 को अंतरिम आदेश पारित करेगा।

अखिलेश कुमार व अन्य की याचिकाओं पर चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।कोर्ट ने ये जानना चाहा कि जातियों के आधार पर गणना व आर्थिक सर्वेक्षण कराना क्या कानूनी बाध्यता है।

कोर्ट ने ये भी पूछा है कि ये अधिकार राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में है या नहीं।साथ ही ये भी जानना कि इससे निजता का उल्लंघन होगा क्या।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने जातियों और आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण कराने का ये अधिकार राज्य सरकार के अधिकारक्षेत्र के बाहर है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार जातियों की गणना व आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है। उन्होनें ने बताया कि ये संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।

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उन्होंने कहा कि प्रावधानों के तहत इस तरह का सर्वेक्षण केंद्र सरकार करा सकती है।ये केंद्र सरकार की शक्ति के अंतर्गत आता है।उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण के लिए राज्य सरकार पाँच सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

दूसरी तरफ राज्य सरकार राज्य सरकार का कहना कि जन कल्याण की योजनाएं बनाने और सामाजिक स्तर सुधारने के लिए ये सर्वेक्षण किया कराया जा रहा है।

कोर्ट इस मामलें पर कल 4 मई,2023 को अंतरिम आदेश पारित करेगा।

इस याचिकाकर्ताओं की ओर से दीनू कुमार व ऋतु राज, अभिनव श्रीवास्तव ने और राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल पी के शाही कोर्ट के समक्ष पक्षों को प्रस्तुत किया।

आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 8 मई को करेगा सुनवाई, मारे गए IAS अधिकारी की पत्नी ने रिहाई के खिलाफ SC में दी थी याचिका

बिहार के बाहुबली नेता आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 8 मई को सुनवाई करेगा। बिहार के दबंग नेता/पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई के बाद, मारे गए आईएएस अधिकारी जी कृष्णैया की पत्नी ने आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दी थी याचिका।

जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णय्या ने बिहार सरकार के नियमों के बदलाव के नोटिफिकेशन को भी रद्द करने की मांग की है। उन्होंने तर्क दिया है कि गैंगस्टर से राजनेता बने आजीवन कारावास की सजा का मतलब उसके पूरे प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास है और इसे केवल 14 साल तक यांत्रिक रूप से व्याख्यायित नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी याचिका में कहा, “आजीवन कारावास, जब मृत्युदंड के विकल्प के रूप में दिया जाता है, तो अदालत द्वारा निर्देशित सख्ती से लागू किया जाना चाहिए और छूट के आवेदन से परे होगा।”

AnandMohan in SC

जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णय्या ने कहा सीएम नितीश कुमार को इस तरह की चीजों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर वह (आनंद मोहन) भविष्य में चुनाव लड़ेंगे तो जनता को उनका बहिष्कार करना चाहिए। मैं उन्हें वापस जेल भेजने की अपील करती हूं।

आनंद मोहन का नाम उन 20 से अधिक कैदियों की सूची में था, जिन्हें इस सप्ताह के शुरू में राज्य के कानून विभाग द्वारा जारी एक अधिसूचना द्वारा मुक्त करने का आदेश दिया गया था, क्योंकि उन्होंने 14 साल से अधिक समय सलाखों के पीछे बिताया था।

बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ज़ी. कृष्णैया की पत्नी

गोपालगंज में मारे गए डीएम जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने आनंद मोहन को फिर से जेल भेजने की मांग की है। बिहार के दबंग नेता/पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई के बाद, मारे गए आईएएस अधिकारी जी कृष्णैया की पत्नी, जिन्हें 1994 में उनके नेतृत्व में एक भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला था, ने Supreme Court में याचिका दायर कर जेल से उनकी समय से पहले रिहाई को चुनौती दी है। बिहार के जेल नियमों में संशोधन के बाद गुरुवार सुबह मोहन को सहरसा जेल से रिहा कर दिया गया।

जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णय्या ने बिहार सरकार के नियमों के बदलाव के नोटिफिकेशन को भी रद्द करने की मांग की है। उन्होंने तर्क दिया है कि गैंगस्टर से राजनेता बने आजीवन कारावास की सजा का मतलब उसके पूरे प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास है और इसे केवल 14 साल तक यांत्रिक रूप से व्याख्यायित नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी याचिका में कहा, “आजीवन कारावास, जब मृत्युदंड के विकल्प के रूप में दिया जाता है, तो अदालत द्वारा निर्देशित सख्ती से लागू किया जाना चाहिए और छूट के आवेदन से परे होगा।”

AnandMohan in SC

जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णय्या ने कहा सीएम नितीश कुमार को इस तरह की चीजों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर वह (आनंद मोहन) भविष्य में चुनाव लड़ेंगे तो जनता को उनका बहिष्कार करना चाहिए। मैं उन्हें वापस जेल भेजने की अपील करती हूं।

आनंद मोहन का नाम उन 20 से अधिक कैदियों की सूची में था, जिन्हें इस सप्ताह के शुरू में राज्य के कानून विभाग द्वारा जारी एक अधिसूचना द्वारा मुक्त करने का आदेश दिया गया था, क्योंकि उन्होंने 14 साल से अधिक समय सलाखों के पीछे बिताया था।

“बिहार में बहुत अधिक जातिवाद है, हर क्षेत्र में; नौकरशाही, राजनीति, सेवा…” SC ने पटना हाईकोर्ट से जाति सर्वेक्षण पर रोक वाली याचिका पर 3 दिन में सुन कर अंतरिम आदेश करने को कहा

दिल्ली/पटना । बिहार में जाति आधारित सर्वेक्षण के खिलाफ याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटना हाईकोर्ट 3 दिन में याचिका को सुन कर अंतरिम आदेश दे।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि जातिवाद बिहार में बड़े पैमाने पर है और नौकरशाही या राजनीति हर क्षेत्र में प्रचलित है।

जस्टिस एमआर शाह और जेबी पर्दीवाला की पीठ राज्य में चल रहे जाति सर्वेक्षण पर रोक लगाने की याचिका पर विचार कर रही थी।

न्यायमूर्ति शाह ने टिप्पणी की, “वहां बहुत अधिक जातिवाद है। हर क्षेत्र में। नौकरशाही, राजनीति, सेवा।”

“बिहार में हर क्षेत्र में इतना जातिवाद”: सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट से जाति सर्वेक्षण पर रोक के लिए याचिका पर फिर से विचार करने को कहा।

Supreme-court-on-Bihar-caste-based-survey
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याचिकाकर्ता ‘यूथ फॉर इक्वलिटी’ का कहना है कि पूरी प्रक्रिया बिना उचित कानूनी आधार के हो रही है. लोगों को जाति बताने के लिए बाध्य करना उनकी निजता का भी हनन है।

बिहार सरकार राज्य में जातियों की संख्या और उनकी आर्थिक स्थिति का पता लगाने के लिए जाति जनगणना करा रही है।सरकार का कहना है कि इससे आरक्षण के लिए प्रावधान करने और विभिन्न योजनाओं के समुचित क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।

पटना उच्च न्यायालय ने शीर्ष अदालत के समक्ष अपील प्रस्तुत करने के लिए सर्वेक्षण पर कोई अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अंतरिम राहत देने या न देने का निर्णय लेने से पहले उच्च न्यायालय को गुण-दोष के आधार पर मामले की सुनवाई करनी चाहिए थी।

भाजपा सांसद व पूर्व मंत्री राजीव प्रताप रूडी को पटना हाइकोर्ट ने भाईयों के बीच विवाद को आपसी सहमति से निपटाने का निर्देश दिया

पटना हाइकोर्ट ने भाईयों के बीच विवाद को आपसी सहमति से निपटाने का निर्देश भाजपा सांसद व पूर्व मंत्री राजीव प्रताप रूडी को दिया। जस्टिस डा. अंशुमान ने सांसद रूडी के भाई सेवानिवृत एयर कमांडर रणधीर प्रताप की ओर से दायर आपराधिक याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि दोनों सम्मानित परिवारों को आपसी सहमति से विवाद सुलझा लेना चाहिए।

इसी बीच सीआरपीएफ की ओर से जबाबी हलफनामा दायर कर कोर्ट को बताया गया कि सांसद के सुरक्षा में तैनात अंगरक्षकों ने उनके भाई एवं उनकी पत्नी को नहीं पहचान सकें। इस कारण उन्हें घर में घुसने से रोक दिया गया।

सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मी सुरक्षा गाइड लाइन का पालन किये है। गाइड लाइन के तहत अप्रत्याशित आगंतुकों को बिना अनुमति के प्रवेश नहीं करने देना है, जबतब कि घर के सदस्यों की ओर से उन्हें आने देने की अनुमति नहीं दे दी जाये।

घटना के समय सांसद घर पर नहीं थे,जिस कारण यह समस्या उत्पन्न हुई।कोर्ट ने सांसद के वकील को दो सप्ताह के भीतर जबाबी हलफनामा दायर करने का आदेश दिया था।इस बीच आपसी सहमति से मामले को निपटाने का निर्देश दिया।

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आवेदक की ओर से कोर्ट को बताया गया कि आवेदक भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त है।इनकी बेहतर सेवा पर केंद्र सरकार ने विशिष्ट सेवा मेडल दिया।लेकिन उनके माँ के देहांत के बाद भाईयो में सम्पति को लेकर विवाद होने लगा।जिसको लेकर छपरा सिविल कोर्ट में बटवारा केस भी दायर किया गया है।

सीआरपीएफ के जवान उन्हें एवं उनकी पत्नी को पुश्तैनी घर में प्रवेश करने से रोक दिया था।यही नहीं, जवान उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किया।इसकी शिकायत सीआरपीएफ के डीजी सहित राज्य के डीजीपी, सारण के एसपी से किया गया।लेकिन कही से कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पटना हाईकोर्ट ने डी एम, पटना को बीसीए के अध्यक्ष,उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष के फर्जी ढंग से निर्वाचित होने के मामलें की जांच 45 दिनों के अंदर पूरा कर विधि सम्मत कार्रवाई करने का आदेश जारी किया

पटना हाईकोर्ट ने डी एम, पटना को बीसीए के अध्यक्ष,उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष के फर्जी ढंग से निर्वाचित होने के मामलें की जांच 45 दिनों के अंदर पूरा कर विधि सम्मत कार्रवाई करने का आदेश जारी किया है।याचिकाकर्ता ओम प्रकाश तिवारी की याचिका पर जस्टिस सत्यव्रत वर्मा ने सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया।

कोर्ट को बताया गया कि बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के प्रावधानों व सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार बीसीए के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव, कोषाध्यक्ष और जिला प्रतिनिधि पद पर चुनाव वही लड़ने का अधिकार रखते हैं, जो जिला संघों (पूर्ण सदस्य) के प्रतिनिधि हो।

लेकिन बीसीए में हुए पिछले चुनाव में सर्वप्रथम असंवैधानिक तरीके से गोवा का एक निर्वाचन चुनाव पदाधिकारी नियुक्त कर चुनावी प्रक्रिया पूरा किया गया।इसमें बीसीए के चुनाव पदाधिकारी द्वारा जारी मतदाता सूची में बीसीए के तीन पूर्व पदाधिकारी राकेश कुमार तिवारी अध्यक्ष, दिलीप सिंह उपाध्यक्ष और आशुतोष नंदन सिंह कोषाध्यक्ष का नाम इस मतदाता सूची में कहीं नहीं है।

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फिर भी फर्जी तरीके से खुद को बीसीए के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष निर्वाचित करा लिए,जो कि पूरी तरह से अवैध है।

कोर्ट ने इस मामलें पर सभी सम्बंधित पक्षों को सुनने के बाद उक्त आदेश दिया।

JDU के पूर्व नेता, प्रवक्ता अजय आलोक BJP में हुए शामिल

पटना ।  जदयू के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉक्टर अजय आलोक ने दिल्ली में बीजेपी में शामिल हो गए। उन्होंने दिल्ली के भाजपा मुख्यालय में सदस्यता ग्रहण किया। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अजय आलोक को बीजेपी की सदस्यता दिलाई गई । मौके पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव भी मौजूद रहे थे।

इस मौके पर अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन क्लियर है, राष्ट्र प्रथम और इसी विजन के साथ वह देश को आगे बढ़ा रहे हैं। आज बीजेपी की नीतियों से प्रभावित होकर आए दिन कई नेता पार्टी में शामिल हो रहे हैं। अजय आलोक BJP में आज शामिल हुए हैं इनके आने से बीजेपी को नई मजबूती प्रदान होगी।

BJP Ajay Alok

BJP की सदस्यता लेने के बाद अजय आलोक ने कहा, भाजपा में आकर मुझे ऐसा लग रहा है कि “मैं अपने परिवार में ही आया हूं जिसके मुखिया मोदी जी हैं। अगर मेरा एक प्रतिशत योगदान भी मोदी विज़न में हो सका तो यह मेरे लिए गर्व की बात होगी।”

अजय आलोक को पिछले साल JDU ने बाहर का रास्ता दिखाया था । लालू प्रसाद यादव और RJD के विरोधी अजय आलोक महागठबंधन बनने के बाद से ही नाराज़ चल रहे थे। उन्होंने कई बार सीएम नीतीश कुमार पर भी हमला किया जिसके बाद पार्टी ने उन्हें आरसीपी सिंह का करीबी बता उनसे इस्तीफा मांग लिया था।

इस मौके पर अजय आलोक ने बिहार के CM नीतीश कुमार को भी आड़े हाथों लिया और कहा, “नीतीश कुमार को बहुत लोग पलटीमार कहते हैं जो बिल्कुल सही है. उन्होंने ही 87 साल बाद जेल मैन्युअल में संशोधन किया था और यह क्लॉज डाला था कि अगर सरकारी सेवक की हत्या होगी तो उसे कभी रिहा नहीं किया जाएग, अब आनंद मोहन और बाकी कैदियों को उन्हें रिहा करना था इसलिए उन्होंने संशोधन किया.”

AJAY ALOK BJP

अजय आलोक के निजी जीवन की बात करें तो वे डॉक्टर हैं। उनके पिता गोपाल सिन्हा भी प्रसिद्ध डॉक्टर हैं। वहीं, वे बसपा से विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। इसके अलावा, वे टीवी डिबेट का चर्चित चेहरा हैं।

देश की ख्याति प्राप्त लोक गायिका शारदा सिन्हा को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद भी पेंशन से वंचित करने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग और ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी से जवाब तलब किया है और आदेश दिया है कि उनकी पेंशन का भुगतान शीघ्र किया जाए

देश की ख्याति प्राप्त लोक गायिका शारदा सिन्हा को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद भी पेंशन से वंचित करने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग और ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि उनकी पेंशन का भुगतान शीघ्र किया जाए।

जस्टिस पूर्णेन्दु सिंह ने पद्मभूषण शारदा सिन्हा की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ता के वकील विकास कुमार ने कोर्ट को बताया की 1979 में शारदा सिन्हा की नियुक्ति इस विश्वविद्यालय में संगीत शिक्षिका के तौर पर हुई थी।वह समस्तीपुर स्थित महिला महाविद्यालय से 2017 रिटायर हुई ।

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उसके बाद अचानक कुछ विश्वविद्यालय शिक्षकों की नियुक्तियों गड़बड़ी पाते हुए एक जांच बैठाया गया। इसमें 7 लोगों की नियुक्तियों में गड़बड़ी पाई गई, उसमें शारदा सिन्हा का भी नाम कहां से आ गया, इसका कोई आधार नहीं बताया गया।

फलस्वरुप सेवानिवृत्ति के बाद शारदा को अपने पेंशन के जाने के कारण आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है ।कोर्ट ने उच्च शिक्षा निदेशक को आदेश दिया की शारदा सिन्हा के पेंशन उन्हें तुरंत भुगतान किया जाए।

इस मामले की अगली सुनवाई 27 जून,2023 को होगी।

पटना हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा का स्थानांतरण पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट किए जाने की अनुशंसा पर केंद्र सरकार ने मुहर लगा दी

पटना हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा का स्थानांतरण पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट किए जाने की अनुशंसा पर केंद्र सरकार ने मुहर लगा दी । जस्टिस शर्मा ने अपने ख़राब स्वास्थ्य एवं पटना में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं की अनुपलब्धता के कारण अपना स्थानांतरण राजस्थान हाईकोर्ट करने का निवेदन किया था ।

उन्होंने अनुरोध किया था कि यदि राजस्थान हाईकोर्ट में उनका प्रत्यावर्तन होना संभव नहीं है, तो उन्हें पंजाब हरियाणा के हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

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जस्टिस शर्मा राजस्थान के रहने वाले हैं । वे 16 नवंबर 2016 को राजस्थान हाईकोर्ट के जज बने थे । 01जनवरी ,2022 को उनका स्थानांतरण पटना हाईकोर्ट हुआ था ।

पटना हाईकोर्ट ने पटना एवं राज्य के अन्य क्षेत्रों में खुले आम नियमों का उल्लंघन कर मांस-मछली बेचने पर पाबन्दी लगाने सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई गर्मी के अवकाश के बाद की जाएगी

पटना हाईकोर्ट ने पटना एवं राज्य के अन्य क्षेत्रों में खुले आम नियमों का उल्लंघन कर मांस- मछली बेचने पर पाबन्दी लगाने सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई गर्मी के अवकाश के बाद की जाएगी। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने मामलें पर सुनवाई करते हुए पटना नगर निगम को विस्तृत हलफनामा दायर करने के लिए पुनः समय दिया।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस बारे में पटना नगर निगम को विस्तृत जानकारी देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया था।पिछली सुनवाई में पटना नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि आधुनिक बूचडखाने के निर्माण और विकास के लिए स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है।

निविदा की कार्रवाई की जा रही है। पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करने के लिए पटना नगर निगम ने तीन सप्ताह की मोहलत मांगी,जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया था।

ये जनहित याचिका अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्र ने दायर की है। अधिवक्ता मानिनी जयसवाल ने कोर्ट को बताया कि पटना समेत राज्य विभिन्न क्षेत्रों में अस्वास्थ्यकर और नियमों के विरुद्ध मांस मछली काटे और बेचे जाते हैं।

उन्होंने कहा कि इससे जहाँ आम आदमी के स्वास्थ्य पर पर बुरा असर पड़ता हैं, वहीं खुले में इस तरह से खुले में जानवरों के काटे जाने से छोटे लड़कों के मन पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

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याचिकाकर्ता के वकील मानिनी जयसवाल ने कोर्ट से यह भी आग्रह किया था कि खुले और अवैध रूप से चलने वाले बूचडखानों को नगर निगम द्वारा तत्काल बंद कराया जाना चाहिए ।

उन्होंने कोर्ट को बताया था कि पटना के राजा बाज़ार, पाटलिपुत्रा , राजीव नगर, बोरिंग केनाल रोड , कुर्जी, दीघा , गोला रोड , कंकड़बाग आदि क्षेत्रों में नियमों का उल्लंघन कर खुले में मांस मछ्ली की बिक्री होती है।

अधिवक्ता मानिनी जयसवाल ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि अस्वस्थ और बगैर उचित प्रमाणपत्र के ही जानवरों को मार कर इनका मांस बेचा जाता है ,जो कि जनता के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

उनका कहना था कि शुद्ध और स्वस्थ मांस मछ्ली उपलब्ध कराने के लिए सरकार को आधुनिक सुविधाओं सुविधाओं के साथ बूचड़खाने बनाए जाने चाहिए,ताकि मांस मछली बेचने वालोंं को भी सुविधा मिले।

साथ ही जनता को भी स्वस्थ और प्रदूषणमुक्त मांस मछली मिल सके।इस मामलें पर अगली सुनवाई गर्मी के अवकाश के बाद होगी।

पटना हाइकोर्ट ने बिहार में राज्य अनुसूचित जाति आयोग व महिला आयोग के क्रियाशील नहीं होने के मामले में राज्य सरकार से जबाव तलब किया है

पटना हाइकोर्ट ने बिहार में राज्य अनुसूचित जाति आयोग व महिला आयोग के क्रियाशील नहीं होने के मामले में राज्य सरकार से जबाव तलब किया है। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने राजीव कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ता राजीव कुमार के वकील विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को बताया कि राज्य अनुसूचित जाति आयोग, जो मई 2016 से कई रिक्त पड़े हैं।राज्य महादलित आयोग, जो 2017 से कई पद रिक्त पड़े है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग है, जो 2018 से सभी पद रिक्त है। वह भी प्रभावी ढंग से कार्य नहीं कर रहा है।इसका खामियाजा आमलोगों को भुगतना पड़ रहा है।

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उन्होंने बताया कि राज्य महिला आयोग की स्थिति भी कोई अलग नहीं है।वहां भी नवम्बर 2020 से सभी पद रिक्त पड़े है।इस कारण महिलाओं की समस्यायों का समाधान नहीं हो पा रहा है।

राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता ने जवाब देने के 3 सप्ताह का वक़्त माँगा।कोर्ट ने इस अनुरोध को मंजूर करते हुए अगली सुनवाई के लिए 23 जून,2023 की तिथि निर्धारित की है।

पटना हाइकोर्ट ने लोहार जाति को जाति आधारित गणना में अलग से जाति कोड जारी करने के मामले में बिहार सरकार से जबाब तलब करते हुए 20 जून,2023 तक जवाब देने की मोहलत दी है

पटना हाइकोर्ट ने लोहार जाति को जाति आधारित गणना में अलग से जाति कोड जारी करने के मामले में राज्य सरकार से जबाब तलब किया है। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने राधेश्याम ठाकुर की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार को 20 जून,2023 तक जवाब देने का मोहलत दी है।

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया कि लोहार जाति को कमार जाति के साथ रखा गया है, जबकि राज्य में कमार जाति नहीं के बराबर है।

उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने भी बिहार में लोहार जाति होने की बात मानी है। उनका कहना था कि बिहार सरकार ने जाति सर्वेक्षण के दूसरे चरण के लिए गत पहली मार्च को अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत जाति सर्वेक्षण का दूसरा चरण का काम 15 अप्रैल से शुरू कर 15 मई तक पूरा करना है।

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लेकिन राज्य सरकार की ओर से जारी जाति कोड में लोहार जाति के लिए कोई कोड निर्धारित नहीं किया गया है। लोहार जाति को कमार जाति के साथ रखा गया है।

उनका कहना था कि 1941 की जनगणना में लोहार जाति को अलग जाति के रूप में मान्यता दी गई थी। लेकिन इस जातिय जनगणना में इस जाति को अपना जाति कोड नहीं दिया गया,जबकि राज्य में लोहार जाति सबसे कमजोर जातियों में से एक है।

इसी कारण राज्य सरकार ने 2016 में लोहार जाति को अनुसूचित जनजाति के रूप में शामिल करने की सिफारिश केंद्र से की थी।लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 342 का हवाला देते हुए लोहार जाति को अनुसूचित जनजाति में रखने के सरकारी अधिसूचना को निरस्त कर दिया था।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 20 जून, 2023 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने HIV मरीजों के लिये “ओआई“(ऑपोर्ट्यूनिस्टिक इन्फेक्शन) मेडिसिन की उपलब्धता के मामले पर सुनवाई करते हुए बिहार सरकार एवं बिहार राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी को 3 सप्ताह में जवाब देने के लिए कहा है

पटना हाई कोर्ट ने एचआईवी मरीजों के लिये “ओआई“(ऑपोर्ट्यूनिस्टिक इन्फेक्शन) मेडिसिन की उपलब्धता के मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार एवं बिहार राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी को तीन सप्ताह में जवाब देने के लिए कहा है । चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने वीरांगना सिंह की लोकहित याचिका पर सुनवाई की ।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को बताया कि एचआईवी मरीजों के लिये राज्य के एआरटी सेंटरों में दवा उपलब्ध नहीं रहती है । इन दवाओं के अभाव में मरीज़ों का उपचार नहीं हो पा रहा है , जबकि इन दवाओं को उपलब्ध कराना राज्य सरकार का कर्तव्य है।

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एचआईवी मरीजों के लिए दवा उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है ।इस पर खंडपीठ ने एआरटी सेंटर पर दवाओं की उपलब्धता, एचआईवी रोगियों के निबंधन एवं उनके इलाज से संबंध में जानकारी माँगी है ।

इस मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी ।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी मेडिकल कालेजों समेत ज़िला अस्पतालों में वेंटीलेटर,एमआरआई मशीन,सिटी स्कैन जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 4 सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी मेडिकल कालेजों समेत ज़िला अस्पतालों में वेंटीलेटर,एमआरआई मशीन,सिटी स्कैन जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई की।चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने रणजीत पंडित की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया राज्य के बहुत सारे प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रो के अपने भवन नहीं है।इसके लिए राज्य सरकार को भूमि उपलब्ध करा कर अपने भवन प्राथमिक चिकित्सा केंद्र हेतु बनाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य के सभी नौ सरकारी मेडिकल कालेजों में जो सिटी स्कैन मशीन लगाए गए हैं, वे पीपीपी मोड पर लगाए गए है।इन्हें मेडिकल कॉउन्सिल ऑफ इंडिया मान्यता नहीं देता है।

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इसी तरह से राज्य के पाँच मेडिकल कालेजों में एमआरआई मशीन लगाया है, जो कि पीपीपी मोड पर लगाया गया कि।उन्होंने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के बार बार आदेश देने बाद भी सिटी स्कैन और एमआरआई मशीन नहीं लगाया गया।

कोर्ट के 3 अगस्त,2022 के आदेश के छह महीने पूरा होने के बाद भी इन्हें अस्पतालों में अबतक नहीं लगाया गया है।इस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता दीनू कुमार और अधिवक्ता रितिका रानी ने याचिकाकर्ता की ओर से और एडवोकेट जनरल ने राज्य सरकार की ओर से पक्षों को प्रस्तुत किया।

इस मामलें पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट में पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई करते हुए बिहार सरकार द्वारा हलफनामा पर गहरा असंतोष जाहिर किया

पटना हाईकोर्ट में पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार द्वारा हलफनामा पर गहरा असंतोष जाहिर किया।जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ द्वारा इस मामलें पर सुनवाई की जा रही है। कोर्ट ने अगली सुनवाई में एडवोकेट जनरल को स्वयम कोर्ट में पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

आज जो राज्य सरकार की ओर से जो हलफनामा दायर किया गया, उस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए जानना चाहा कि अबतक जांच में क्या हुआ।राज्य सरकार के हलफनामा में ये कहा गया कि कोर्ट द्वारा इस सम्बन्ध में पुनः जांच का कोई आदेश नहीं दिया गया है।जैसे ही कुछ नए सबूत या तथ्य प्राप्त होंगे ,तो कार्रवाई की जाएगी।

कोर्ट ने कहा कि ये सही ढंग से कार्रवाई नहीं हो रही है।इसके लिए एडवोकेट जनरल खुद स्थितियों से अगली सुनवाई में कोर्ट को अवगत कराए।

अधिवक्ता अलका वर्मा ने कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि राज्य में आफ्टर केअर होम और उनमें रहने वाली लड़कियों की दयनीय अवस्था है।उनका हर तरह से शोषण किया जाता है।लेकिन राज्य सरकार द्वारा न तो मामलें की ढंग से जांच की जा रही है और न प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।

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उन्होंने कोर्ट को बताया कि मामलें की जांच तो जरूरी है,लेकिन जो इन आफ्टर केअर होम की व्यवस्था भी अपंग हो चुकी।इसमें वहां रहने वाली महिलाओं की सुविधाओं का कोई ख्याल नहीं रखा जाता है।इससे उनकी स्थिति लगातार खराब हो रही है।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट में एस एस पी, पटना और एस आई टी जांच टीम का नेतृत्व करने वाली सचिवालय एएसपी काम्या मिश्रा भी कोर्ट में उपस्थित हो कर तथ्यों की जानकारी दी थी।

इससे पहले अधिवक्ता मीनू कुमारी ने बताया था कि कोर्ट अब तक एस आई टी द्वारा किये गए जांच और कार्रवाई के सम्बन्ध में सम्बंधित अधिकारी से जानकारी प्राप्त करना चाहता था।उन्होंने जानकारी दी थी कि आफ्टर केअर होम में रहने वाली महिलाओं की स्थिति काफी खराब है।

पटना हाई कोर्ट ने इस याचिका को पटना हाई कोर्ट जुवेनाइल जस्टिस मोनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रजिस्टर्ड किया था। कमेटी में जस्टिस आशुतोष कुमार चेयरमैन थे, जबकि जस्टिस अंजनी कुमार शरण और जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय इसके सदस्य के रूप में थे।

इस मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद की जाएगी।