पटना हाइकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष के पद पर अधिवक्ता शैलेन्द्र कुमार सिंह चुनाव जीत गए है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी राजेंद्र नारायण को हराया।
महासचिव पद पर अधिवक्ता जय शंकर चुनाव जीत गए है। अधिवक्ता पुष्पा सिन्हा कोषाध्यक्ष के पद के लिए चुनाव जीत गई है।लेकिन इनके जीत की औपचरिक घोषणा होना बाकी है।
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उपाध्यक्ष के तीन पदों के लिए मतगणना चल रही है। अन्य पदों के लिए भी मतगणना जारी है।देर रात तक परिणाम प्राप्त होने की संभावना है।
पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता संघों में सबसे बड़े अधिवक्ता संघ एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष,उपाध्यक्ष, महासचिव व कोषाध्यक्ष समेत विभिन्न पदों पर पदाधिकारियों के निर्वाचन के लिए मतदान शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हो गया।
मतदान पूर्वाह्न 10 बजे से अपराह्न 5 बजे तक हुआ। पटना हाई कोर्ट परिसर के ही दक्षिणी पार्किंग स्थल में मतदान केंद्र बनाए गए थे।
अधिवक्ताओं की सुविधा के लिए कई मतदान केंद्र बनाए गए थे। खास बात यह थी कि मतपत्र में उम्मीदवारों के नाम के साथ ही साथ फ़ोटो भी छापे गए थे।
कल मतगणना का कार्य सुबह साढ़े नौ बजे से किया जाएगा। देर रात तक परिणाम प्राप्त होने की संभावना है।
अपने पसंदीदा उम्मीदवार के नाम के सामने क्रॉस का चिन्ह लगाकर मतदाता को अपना मत देने का निर्देश रिटर्निंग अधिकारी द्वारा दिया गया था। मतदान देने के लिए मतदाताओं को एसोसिएशन द्वारा जारी पहचान पत्र के साथ ही साथ अन्य विकल्प के तौर पर लाइब्रेरी कार्ड, बार काउंसिल द्वारा जारी पहचान पत्र, आधार कार्ड/ पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस लाने को कहा गया था।
पटना । बिहार सरकार द्वारा राज्य में जातियों एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर पटना हाइकोर्ट में 18अप्रैल,2023 को सुनवाई की जाएगी। अखिलेश कुमार की याचिका पर चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ सुनवाई करेगी।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने जातियों और आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।उन्होंने कहा कि ये सर्वेक्षण कराने का अधिकार राज्य सरकार को नही है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जातियों के आधार पर व आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि ये राज्य सरकार के क्षेत्रधिकार में नहीं आता है।
उन्होंने कहा कि प्रावधानों के तहत इस तरह का सर्वेक्षण केंद्र सरकार करा सकती है।ये केंद्र सरकार की शक्ति के अंतर्गत आता है।
उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण के लिए राज्य सरकार पाँच सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है।राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल ने इसकी सुनवाई की योग्यता पर बुनियादी आपत्ति की।उन्होंने कहा कि ये याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।कोर्ट ने इस अमान्य करते हुए कहा कि ये प्रावधानों के उल्लंघन और पाँच सौ करोड़ रुपए से सम्बंधित मामला है।
कोर्ट ने इस मामलें पर 18अप्रैल,2023 को सुनवाई की तिथि निर्धारित की है।इस याचिकाकर्ता की ओर से दीनू कुमार व ऋतु राज और राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल पी के शाही ने कोर्ट के समक्ष पक्षों को प्रस्तुत किया।
आज पटना हाइकोर्ट के सबसे बड़े अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष,उपाध्यक्ष,महासचिव व अन्य पदों पर अधिकारियों के चुनाव के लिए मतदान होगा। मतदान आज सुबह दस बजे से शाम पाँच बजे तक होगा।
इस चुनाव के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई।बड़ी तादाद में मतदान केंद्र बनाए गए,ताकि सभी अधिवक्तागण अपना मतदान का सुविधा से कर सके।
ये अधिवक्ता संघ काफी बड़ा है और इसके सदस्य भी लगभग तीन हज़ार है।इस मतदान को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा बल के जवान रहेंगे।
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एक बूथ पर लगभग दो सौ वकीलों के मतदान करने की व्यवस्था की गई है।सभी मतदाताओं को दस दस मतपत्र दिए जाएँगे,जो अलग अलग रंगों के होंगे।
कल 8 अप्रैल ,2023 को मतगणना की जाएगी।मतगणना का कार्य सुबह साढ़े नौ बजे प्रारम्भ होगा।देर रात तक परिणाम प्राप्त होने की संभावना है।
पटना हाइकोर्ट ने भाजपा सांसद के अंगरक्षक,उनके भाई एवं उनकी पत्नी को घर में घुसने नहीं दिये जाने के मामले में सीआरपीएफ के डीजी सहित राज्य के डीजीपी एवं सांसद से जबाब तलब किया है।
कोर्ट ने सभी को एक सप्ताह के भीतर जबाबी हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया है।जस्टिस डॉ अंशुमान ने भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी के भाई सेवानिवृत्त एयर कमांडर रणधीर प्रताप की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई की।
आवेदक की ओर से कोर्ट को बताया गया कि आवेदक भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त है।इनकी बेहतर सेवा पर केंद्र सरकार ने विशिष्ट सेवा मेडल दिया।
लेकिन उनके माँ का देहांत होने के बाद भाईयो में सम्पति को लेकर विवाद होने लगा।आवेदक ने छपरा सिविल कोर्ट में बटवारा केस भी दायर किया है।
उनका कहना था कि सांसद के इशारे पर उनके सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ के जवान उन्हें एवं उनकी पत्नी को पुस्तैनी घर में प्रवेश करने से रोक दिये।यही नहीं जवान उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किये।
इसकी शिकायत सीआरपीएफ के डीजी सहित राज्य के डीजीपी सारण के एसपी से जवाबतलब किया।
लेकिन कही से कोई कार्रवाई नहीं हुई।उनका कहना था कि आपसी विवाद की जानकारी होने के बाद भी सीआरपीएफ के आला अधिकारी कुछ नहीं किये।जबकि घटना की सूचना एवं शिकायत किये जाने के बाद भी कोई कार्रवाई की गई।
उन्होंने अपने पुस्तैनी घर में प्रवेश करने एवं शांतिपूर्ण तरीके से घर में रहने की गुहार कोर्ट से लगाई।कोर्ट ने सभी अधिकारियों सहित सांसद को जबाबी हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया।इस मामलें पर आगे भी सुनवाई की जाएगी।
पहली बार पटना हाई कोर्ट में अधिवक्ता संघ के चुनाव में मतपत्रों पर उम्मीदवारों के नाम के साथ उनका फोटो भी रहेगा। इसकी जानकारी चुनाव के निर्वाची पदाधिकारी वरीय अधिवक्ता अंजनी कुमार ने दी।
उनका कहना था कि एडवोकेट एसोसिएशन के चुनाव में मतदाता को अपने मनपसंद उम्मीदवार के नाम के सामने क्रॉस का निशान लगाना होगा।क्रॉस निशान के बजाये कोई अन्य निशान लगाये जाने पर उस मतपत्र को रद्द कर दिया जायेगा।
उनका बताया कि पद से ज्यादा उम्मीदवारों को वोट दिए के स्थिति में भी मतपत्र को रद्द कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 7 अप्रैल,2023 को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा।मतदान के बाद सभी पदों के उम्मीदवारों के मौजूदगी में मत पेटी को सील कर सुरक्षित स्थान पर रखा जायेगा।
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उन्होंने बताया कि कहना 8 अप्रैल को सुबह साढ़े नौ बजे से मतों की गिनती का काम शुरू किया जायेगा।चुनाव के लिए बीस बूथ बनाये गए है।
सभी बूथों पर चार चार वकील को पीठासीन अधिकारी बनाया गया है ।एक बूथ पर करीब दो सौ वकीलों को वोट देने की व्यवस्था की गई है।
सभी मतदाता को दस दस मतपत्र दिया जायेगा सभी मतपत्रों को अलग अलग रंग में रहेगा। शांतिपूर्ण मतदान के लिए पुलिस बल तैनात करने के लिए पटना डीएम को चिट्ठी भेजी गई है।
पटना हाइकोर्ट ने स्वीकृत नक्शे के बगैर हुए निर्माण को अवैध घोषित करने के बाद अपार्टमेंट के लोगों को जबरन निकालने हेतु उनका बिजली कनेक्शन काटे जाने पर नाराजगी जताई।कोर्ट ने पूर्णिया के डीएम, एसडीओ और नगर आयुक्त सहित वहां के उत्तर बिहार विद्युतआपूर्ति कंपनी के पूर्वी पश्चिमी प्रमंडल के कार्यपालक विद्युत अभियंता को अगली सुनवाई में कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है।
जस्टिस सत्यव्रत वर्मा ने डॉक्टर संजीव कुमार की रिट याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बिहार पावर होल्डिंग कंपनी के सीनियर एडवोकेट विनायक कीर्ति सिंह को कहा कि उनके मुवक्किल यह सुनिश्चित करें कि आज ही एक घंटे के अंदर पूर्णिया के इस अपार्टमेंट की विद्युत आपूर्ति को तुरंत चालू किया जाए ।
कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया,तो सम्बंधित विद्युत कार्यपालक अभियंता हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना के लिए जिम्मेदार होंगे।
याचिकाकर्ता के वकील पुरुषोत्तम झा ने कोर्ट को बताया कि एक निगरानी जांच के मामले में नगर आयुक्त ने उस अपार्टमेंट के चौथे तल्ले का पूरा निर्माण को अवैध करार देते हुए वहां के निवासियों को भवन खाली कर आदेश दिया था । उस आदेश के को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता बिहार भवन निर्माण ट्रिब्यूनल में अपील दायर किया, लेकिन ट्रिब्यूनल में सदस्यों की संख्या पर्याप्त नहीं होने के कारण वहां सुनवाई नहीं हो पा रही है।
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अंततः कोई कानूनी निदान नहीं देखते हुए याचिकाकर्ता ने आनन-फानन में हाईकोर्ट का याचिका दायर की। हाई कोर्ट में रिट याचिका के दायर होने की जानकारी के बावजूद पूर्णिया के नगर आयुक्त ने वहां के अनुमंडल अधिकारी को नगर आयुक्त के कार्यालय से निगरानी वाद में पारित आदेश के अनुपालन करने का निर्देश दिया। अनुमंडल अधिकारी ने आनन-फानन में बिना मकान खाली करने का नोटिस और मौका दिए ही 1 दिन के अंदर ही अपार्टमेंट के चौथा तल्ला को खाली कर सील करने की कार्रवाई कर दी।
यही नहीं,जिला प्रशासन और नगर आयुक्त के इशारे पर ही बगैर किसी कानूनी सकती हो कहीं अनाधिकृत रूप से विद्युत कार्यपालक अभियंता ने पूरे चौथे तल्ले का विद्युत आपूर्ति भी काट दिया।
हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा अधिकारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग खुलेआम करेंगे, तो कानून का राज कैसे स्थापित हो सकेगा?
कोर्ट ने इन चारों अधिकारियों को अगली सुनवाई में उपस्थित होने का निर्देश दिया। इस मामलें पर आगे भी सुनवाई की जाएगी।
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि रामनवमी पर बिहारशरीफ और सासाराम सहित चार शहरों में उपद्रव करना उनकी साजिश थी, जिन्होंने रामभक्तों पर पत्थरों से हमला किया और विस्फोट कराये।
हिम्मत है तो हाल के दंगों की न्यायिक जांच कराये सरकार
सरकारी जांच से पहले जब सीएम बता रहे हैं साजिश किसकी, तब नाटक क्यों ?
जान लें, राम भक्तों की प्रताड़ना नहीं है लाल किला पहुंचने का रास्ता
श्री मोदी ने कहा कि साजिश उनकी थी, जो सासाराम में सम्राट अशोक के शिलालेख पर मजहबी कब्जा हटाने के खिलाफ थे। साजिश उनकी थी, जो सम्राट अशोक की जयंती मनाने से भाजपा को रोकना चाहते थे।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का यह कहना तो सही है कि माहौल खराब कराया गया, लेकिन वे लगे हाथ साजिश का आरोप उन्हीं राम भक्तों पर लगा रहे हैं, जिन पर हमले हुए, जिनके घर जले और जिस समुदाय के एक व्यक्ति की जान गई।
श्री मोदी ने कहा कि जब मुख्यमंत्री पहले ही तय कर रहे हैं कि दंगों की साजिश किन लोगों की, तब राज्य सरकार की जांच का कोई मतलब नहीं।
उन्होंने कहा कि यदि नीतीश कुमार साम्प्रदायिकता से समझौता नहीं करते तो उन्हें पूरे मामले की न्यायिक जांच करानी चाहिए।
श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार ने राम भक्तों को प्रतिड़ित करने और दंगाइयों को बचाने का मन बना लिया है। यही उन्हें लाल किले तक पहुँचने का रास्ता लगता है।
उन्होंने कहा कि संवेदनशील इलाकों में समय पर फ्लैग मार्च क्यों नहीं हुआ? कर्फ्यू लगाने में देर क्यों हुई? केंद्र से अर्धसैनिक बल की पर्याप्त टुकड़ी क्यों नहीं मांगी गई? शोभायात्रा के मार्ग में पड़ने वाले घरों और उनकी छतों की तलाशी पहले क्यों नहीं की गई?
श्री मोदी ने कहा रामनवमी पर चाक-चौबंद सुरक्षा देने में जो सरकार फेल रही और वह खुद ही अपनी जांच करेगी और खुद ही पास घोषित कर देगी।
पटना । बिहार में 15 अप्रैल से जाति गणना के दूसरे चरण की शुरुआत होने वाली है। इसके पहले चरण में मकानों को नंबर देने का काम किया गया था। दूसरे चरण में 215 जातियों और एक अन्य के साथ कुल 216 जातियों की गणना होगी। जातियों की सूची और उसकी श्रेणी भी तैयार कर ली गई है।
बिहार में अब अंकों से अलग-अलग जातियों की पहचान होगी। प्रदेश में 215 जातियों की गणना के लिए अलग-अलग कोड निर्धारित किए गए हैं। बिहार में जातियों के लिए कोड तय कर दिया गया है। किसकी कौन सी जाति, यह अंकों से पता चल जाएगा। Bihar Caste-based Survey के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है। हर जाति का एक अलग कोड अंकों के रूप में होगा।
जाति पूछ कर गणनाकर्मी अंक अंकित करेंगे। 15 अप्रैल से होने वाली दूसरे चरण की गणना में 215 व एक अन्य मिलाकर कुल 216 जातियों की आबादी की गिनती होगी। 11 अप्रैल तक अधिकारियों से लेकर गणनाकर्मियों तक को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
गणना के दौरान जातियों के नाम के साथ उस जाति के लिए निर्धारित कोड को लिखा जाएगा। एक व्यक्ति की गणना एक ही स्थान से होगी। अलग-अलग समुदाय के सामान्य से लेकर अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग की जातियों के लिए कोड होगा। इस कोड या अंक का उपयोग भविष्य की योजनाएं तैयार करने, आवेदन व अन्य रिपोर्ट में किया जा सकेगा। एक उदाहरण बनिया जाति का लें तो कोड संख्या 124 है।
बनिया जाति के लिए 124 कोड संख्या निर्धारित किया गया है, जिसमें सूड़ी, गोदक, मायरा, रोनियार, पंसारी, मोदी, कसेरा, केसरवानी, ठठेरा, कलवार, कमलापुरी वैश्य, माहुरी वैश्य, बंगी वैश्य, वैश्य पोद्दार, बरनवाल, अग्रहरी वैश्य, कसौधन, गंधबनिक, बाथम वैश्य, गोलदार आदि शामिल हैं।
सवर्ण जातियों की बात करें तो कायस्थ का कोड 22, ब्राह्मण के लिए 128, राजपूत के लिए 171 तो भूमिहार के लिए 144 है। कुर्मी जाति का अंक 25 और कुशवाहा कोइरी का 27 है। यादव जाति में ग्वाला, अहीर, गोरा, घासी, मेहर, सदगोप, लक्ष्मीनारायण गोला के लिए कोड संख्या 167 है।
पटना हाईकोर्ट में एडवोकेट एसोसिएशन के 30 पदों के लिए 7 अप्रैल,2023 को होने वाले चुनाव में कुल 144 प्रत्याशियों ने अपनी पूरी शक्ति जीत के लिए लगा दी है। एडवोकेट एसोसिएशन के होने वाले इस चुनाव में अध्यक्ष के 1 पद के लिए 15 उम्मीदवार , उपाध्यक्ष के तीन पद के लिए 28 उम्मीदवार, महासचिव के 1 पद के लिए 13 उम्मीदवार, संयुक्त सचिव के 3 पद के लिए 25 उम्मीदवार है।
सहायक सचिव के 3 पद के लिए 16 उम्मीदवार , कोषाध्यक्ष के 1 पद के लिए 6 उम्मीदवार, ऑडिटर के 2 पद के लिए 2 दो उम्मीदवार, सीनियर एग्जीक्यूटिव के 5 पद के लिए 8 उम्मीदवार, एग्जीक्यूटिव के 7 पद के लिए 21 उम्मीदवार, निगरानी के 3 पद के लिए 7 उम्मीदवार और लाइब्रेरी कमेटी के 1 पद के लिए तीन उम्मीदवार हैं।
इस बार के चुनाव में सभी उम्मीदवार अपने अपने तरीके से मतदाताओं को रिझाने और अपने पक्ष में वोट देने के लिए लुभाने में लगे हैं।
इस बार के चुनाव मे चारों तरफ होर्डिंग, फलैक्स से पूरा हाई कोर्ट परिसर के साथ साथ बार कॉउंसिल भवन भी पट गया है।
अध्यक्ष पद के लिए वरीय अधिवक्ता राजेन्द्र नारायण , राजीव कु० वर्मा,विंध्यकेशरी कुमार, शैलेन्द्र कुमार सिंह,प्रेम कुमार झा, और अरुण कुशवाहा में मुकाबला है। उपाध्यक्ष पद के लिए प्रबल दावेदारों में द्विवेदी सुरेन्द्र,राम जीवन प्रसाद,शंभु शरण शर्मा,मनोज कुमार सिंह के बीच सीधी टक्कर है। इन्हीं में से कोई भी तीन व्यक्ति उपाध्यक्ष बन सकता है। वैसे द्विवेदी सुरेंद्र को सभी अधिवक्ताओं का समर्थन मिल रहा है ।
सेक्रेटरी जेनरल पद के लिए शारदानंद मिश्र,राम संदेश राय,पुनम कुमारी सिंह,पांडेय, और राकेश कुमार सिन्हा के बीच टक्कर है।
सहायक सचिव के लिए राजेश कुमार,चौबे, राकेश रंजन,राजनीश चंद्रा,नलिन कुमार,श्यामेशवर कुमार सिंह, और महिला उम्मीदवार श्वेता सिंह के बीच ही टक्कर है।
पटना हाईकोर्ट के दूसरे बड़े वकील संघ लायर्स एसोसिएशन का चुनाव 19 अप्रैल,2023 को होगा। शांतिपूर्ण चुनाव के लिए सारी तैयारी की जा रही हैं। मतदान के लिए नये मतपेटी बनाई गई हैं।
निर्वाची पदाधिकारी वरीय अधिवक्ता अशोक कुमार सिंह ने बताया कि मतपेटी ऐसा बनाया गया है, कि किसी भी हाल में मतपेटी से मतपत्र निकलना संभव नहीं है।मतदान के लिए सभी मतदाताओं को एसोसिएशन का पहचान पत्र साथ लाना अनिवार्य किया गया है।चुनाव के निर्वाची पदाधिकारी वरीय अधिवक्ता अशोक कुमार सिंह ने बताया कि सभी उम्मीदवारों से शांतिपूर्ण चुनाव सहयोग करने की अपील की है।
उन्होंने बताया कि चुनाव के पूर्व सभी उम्मीदवारों के साथ एक अहम बैठक की जायेगी।आरओ ने वरीय कार्यकरणी सदस्य के पांच पद,कार्यकरणी सदस्य के 7 पद,ऑडिटर के तीन पद, निगरानी सदस्य के तीन पद सहित लाइब्रेरी कमेटी के तीन पद पर उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किये।
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इन सभी पदों पर जितना सीट था, उतने ही उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किये।अब अध्यक्ष पद के एक सीट के लिए चार उम्मीदवार चुनावी मैदान में है।वही उपाध्यक्ष पद के तीन सीट के लिए दस उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं।जबकि महासचिव के एक सीट के लिए पांच उम्मीदवार अपना किस्मत आजमा रहे हैं।
वही संयुक्त सचिव और सहायक सचिव के तीन तीन पद के लिए सात व छह उम्मीदवार तथा कोषध्यक्ष के एक पद के लिए तीन उम्मीदवार के बीच काटे का टक्कर हैं।19 अप्रैल,2023 को होने वाले चुनाव में सभी उम्मीदवारों जोर शौर से चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं।
पटना हाईकोर्ट में पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई दो सप्ताह तक टली। जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई की जा रही है।
पूर्व की सुनवाई में कोर्ट में एस एस पी, पटना और एस आई टी जांच टीम का नेतृत्व करने वाली सचिवालय एएसपी काम्या मिश्रा भी कोर्ट में उपस्थित रही थी।
अधिवक्ता मीनू कुमारी ने बताया था कि कोर्ट अब तक एस आई टी द्वारा किये गए जांच और कार्रवाई के सम्बन्ध में सम्बंधित अधिकारी से जानकारी प्राप्त करना चाहता था।उन्होंने बताया कि आफ्टर केअर होम में रहने वाली महिलाओं की स्थिति काफी खराब है।
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पहले की सुनवाई में कोर्ट ने अनुसंधान को डी एस पी रैंक की महिला पुलिस अधिकारी से कराने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने जांच रिपोर्ट भी तलब किया था।
हाई कोर्ट ने इस याचिका को पटना हाई कोर्ट जुवेनाइल जस्टिस मोनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रजिस्टर्ड किया था। कमेटी में जस्टिस आशुतोष कुमार चेयरमैन थे, जबकि जस्टिस अंजनी कुमार शरण और जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय इसके सदस्य के रूप में थे।
पटना हाईकोर्ट ने बिहार के सहरसा में स्थापित किये जाने वाले एम्स अस्पताल को दरभंगा स्थानांतरित किये जाने के मामलें पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने कोशी विकास संघर्ष मोर्चा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र व राज्य सरकार को जवाब देने के लिए 17अप्रैल,2023 तक मोहलत दी है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया था कि विभिन्न राज्यों में एम्स के स्तर के अस्पताल स्थापित करने की योजना तैयार की गई।बिहार के सहरसा में एम्स के तर्ज पर अस्पताल बनाए जाने का प्रस्ताव था।
कोर्ट को बताया गया था कि इस अस्पताल के निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि सहरसा में उपलब्ध है।2017 में सहरसा के जिलाधिकारी ने इस अस्पताल के लिए आवश्यक 217.74 एकड़ भूमि की उपलब्धता की जानकारी विभाग को दी थी।
कोर्ट को ये बताया था कि इस क्षेत्र में एम्स स्तर का अस्पताल नहीं है।गंभीर बीमारियों के ईलाज के लिए इस क्षेत्र के लोगों को या तो पटना जाना पड़ता है या सिलिगुडी जाना पड़ता है।इसमें न सिर्फ लोगों को आने जाने में कठिनाई होती है,बल्कि आर्थिक बोझ भी पड़ता है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सहरसा में एम्स अस्पताल के निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है,जबकि दरभंगा में एम्स अस्पताल के लिए पर्याप्त भूमि की उपलब्ध नहीं है।
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कोर्ट को एम्स अस्पताल के निर्माण के मानकों पर सहरसा ज्यादा खरा था,लेकिन राज्य सरकार ने 2020 में दरभंगा में एम्स अस्पताल स्थापित किये जाने की अनुशंसा कर दी थी।यह इस क्षेत्र लोगों के साथ अन्याय किया गया।
कोर्ट को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि सहरसा,पूर्णियां,कटिहार, किशनगंज और अररिया जिले इस क्षेत्र में आते है।इस क्षेत्र की जनसंख्या के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एम्स अस्पताल स्थापित की जानी चाहिए।
कोर्ट को बताया गया कि इस क्षेत्र के बहुत सारे लोग कैंसर समेत कई अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।आमलोग को बेहतर ईलाज के लिए इस क्षेत्र में एम्स स्तर के अस्पताल की सख्त आवश्यकता है।
इस मामलें पर अगली सुनवाई 17अप्रैल,2023 के बाद की जाएगी।
पटना हाइकोर्ट ने पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के मामलें पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए एन एच ए आई के क्षेत्रीय अधिकारी को हलफनामा दायर कर प्रगति रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने निर्माण कम्पनियों को बताने को कहा था कि निर्माण कार्य कब तक पूरा हो जाएगा। पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र,राज्य सरकार,एनएचएआई और अन्य सम्बंधित पक्षों को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।
पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य कर रही कम्पनियों ने कोर्ट को बताया था कि 31मार्च,2023 तक फेज एक का अधिकांश कार्य पूरा कर लिया जाएगा।साथ ही इस राजमार्ग के निर्माण कार्य को लगभग 30 जून, 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनीष कुमार ने कोर्ट को बताया था कि जिस गति से काम किया जा रहा है, ऐसे में तय समय सीमा में निर्माण कार्य पूरा होना कठिन है।उन्होंने कहा कि तय समय सीमा में कार्य पूरा करने के लिए संसाधनों और कार्य करने वाले लोगों की संख्या बढ़ाने की जरूरत हैं।
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इससे पूर्व अधिवक्ताओं की टीम ने खंडपीठ के समक्ष पटना गया डोभी एनएच का निरीक्षण कर कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत किया था।पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने वकीलों की टीम को इस राजमार्ग के निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।
पूर्व में भी राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने वाली कंपनी ने इसका निर्माण कार्य 30 जून,2023 तक पूरा करने का अश्वासन कोर्ट को दिया था।साथ ही कोर्ट ने इस फेज के निर्माण में बाधा उत्पन्न होने वाले सभी अवरोधों को तत्काल हटाने का निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को दिया था।
कोर्ट को पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के फेज दो व तीन के निर्माण में लगी निर्माण कंपनी ने बताया था कि पटना गया डोभी एनएच के निर्माण में कई जगह बाधा उत्पन्न किया जा रहा है।
पटना/ नवादा । बिहार में रामनवमी पर भड़की हिंसा के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार में दो दिवसीय दौरे पर हैं। गृह मंत्री अमित शाह के सशस्त्र सीमा बल के पटना फ्रंटियर का निर्धारित दौरा रद्द होने के कुछ घंटे बाद रविवार को नवादा जिले के हिसुआ में एक रैली को संबोधित किया। रैली में उन्होंने शनिवार को सासाराम में होने वाली जनसभा को रद्द करने की बात कही।
रविवार को उन्होंने नवादा में जनसभा को संबोधित करते हुए एक तरफ चुनावी शंखनाद किया, तो वहीं दूसरी ओर नीतीश कुमार और जेडीयू नेता ललन सिंह पर जमकर हमला बोला। साथ ही लालू यादव को भी नसीहत दे डाली।
उन्होंने सासाराम जाने को लेकर कहा कि, “आज मुझे सासाराम जाना था, वहां मुझे महान सम्राट अशोक के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होना था लेकिन सासाराम में तो बवाल मचा हुआ है, हिंसा फैली है। इसलिए मैं नहीं जा पाया, सासाराम के लोगों से यहीं से माफी मांगता हूं और मैं वहां पर जरूर आऊंगा।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सासाराम और नालंदा हिंसा पर कहा कि बिहार की जनता से यह कहना चाहता हूं कि 2024 में बिहार से बीजेपी को 40 सीट दीजिए और 2025 में बीजेपी की सरकार बनाइए। दंगा करने वालो को उलटा लटका कर सीधा करेंगे। हम तुष्टीकरण की राजनीति नहीं करते हैं। सासाराम और नालंदा की घटना से मन दुखी होता है।
वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जेडीयू नेता ललन सिंह पर हमला करते हुए अमित शाह ने कहा, “अगर आप लोग सोचते हैं कि आप लोगों को दोबारा बीजेपी का साथ मिलेगा तो ये भूल जाएं। आप लोगों के लिए बीजेपी के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो गए हैं। अमित शाह ने आगे कहा, कि “मैं बिहार की जनता को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हम लोग अब नीतीश कुमार के साथ गठबंधन नहीं करने वाले।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी कालाबजारी और भ्रष्टाचारियों से बिहार को मुक्त कराएंगे। वहीं, नीतीश कुमार के पीएम उम्मीदवारी पर तंज कसते हुए अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री की कुर्सी अभी खाली नहीं है। उन्होंने कहा कि लालू यादव गलतफहमी में हैं। तेजस्वी यादव सीएम नहीं बनेंगे। नीतीश कुमार तेजस्वी को कभी सीएम नहीं बनायेंगे।
अमित शाह ने कहा कि बिहार के हर एक पंचायत में कोऑपरेटिव डेयरी बनेगी। केंद्र ने बिहार को 1 लाख 9 हजार करोड़ रुपये दिए। पीएम मोदी 8 करोड़ 70 लाख लाभुकों को मुफ्त अनाज बिहार में दे रहे हैं। 85 लाख किसनों को सस्ती बिजली, 1.10 करोड़ महिला को केंद्र ने गैस दिया। नवादा में रेललाइन, एनएच बनाया। मंच के बगल में रेललाइन गुजरी है। नवादा में खेती हो रही है। बिजली सुधरी है, रजौली में परमाणु क्षमता यूनिट की योजना बन चुकी है।
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि एक खास समुदाय के आपराधिक तत्वों के प्रति नरमी के कारण नीतीश सरकार बिहारशरीफ और सासाराम में रामनवमी शोभायात्राओं पर हमले नहीं रोक पायी, बल्कि आगजनी-पथराव की घटनाओं के बाद राम-भक्तों की ही धर-पकड़ हो रही है।
सख्ती से नहीं हुई उपद्रवी तत्वों की एहतियातन गिरफ्तारी
रामनवमी शोभायात्राओं पर हमले नहीं रोक पायी सरकार
खुफिया तंत्र नाकाम, डीएम-एसपी ने स्वयं निगरानी नहीं की
आगजनी-पथराव के बाद पीड़ित राम-भक्तों की ही धर-पकड़
श्री मोदी ने कहा कि अति संवेदनशील सासाराम में तो जानबूझ कर उपद्रवी तत्वों को छूट दी गई, ताकि वहाँ अशांति हो और गृह मंत्री अमित शाह की रैली न हो सके।
उन्होंने कहा कि महागठबंधन सरकार नहीं चाहती थी कि भाजपा सासाराम में सम्राट अशोक की जयंती मनाये।
श्री मोदी ने कहा कि सासाराम में जिन तत्वों ने सम्राट अशोक के शिलालेख जैसे पुरातात्त्विक स्थल पर कब्जा कर उसे एक धर्म-विशेष की पहचान से जोड़ने की कोशिश की थी, वे अतिक्रमण हटाने में केंद्र सरकार की पहल से नाराज थे और बदला लेने के लिए मौके के इंतजार में थे।
उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय प्रशासन का खुफिया तंत्र कारगर होता और उपद्रवी तत्वों की एहतियातन गिरफ्तारी होती, तो रामनवमी शांतिपूर्ण सम्पन्न होती।
श्री मोदी ने कहा कि बिहारशरीफ और सासाराम के ये वही स्थान हैं, जहां पहले भी रामनवमी की शोभायात्राओं पर पत्थरबाजी हुई थी। इसके बावजूद वहाँ के एसपी-डीएम ने स्वयं निगरानी नहीं की और पुलिस बल की तैनाती भी सांकेतिक थी। कहीं-कहीं तो केवल होम गार्ड तैनात कर खानापूरी की गई थी।
उन्होंने कहा कि रामनवमी पर रामभक्तों को सुरक्षा देने में सरकार तो पूरी तरह विफल रही, लेकिन अब लोगों को शांति और संयम से काम लेना चाहिए।
पटना/दिल्ली । रामनवमी समारोह के दौरान बिहारशरीफ कस्बों और सासाराम में साम्प्रदायिक दंगे भड़क उठे। गुरुवार को शुरू हुई झड़प शुक्रवार तक जारी रही। नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ के लहेरी थाना क्षेत्र के गगन दीवान मोहल्ले के समीप रामनवमी के जुलूस के दौरान शुक्रवार को दो गुटों में मारपीट हो गयी थी।
राज्य भाजपा प्रमुख सम्राट चौधरी ने शनिवार को कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार में सासाराम का अपना दौरा रद्द कर दिया है, जहां रामनवमी उत्सव के दौरान सांप्रदायिक तनाव फैल गया था, जहां निषेधाज्ञा लागू है।
नालंदा और सासाराम समेत बिहार के कई जिलों में 48 घंटे के लिए इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी।
हालांकि अमित शाह दो अप्रैल को बिहार दौर पर जाएंगे, बाकी कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। मंत्रालय के अनुसार शाह रविवार सुबह 11:30 बजे पटना में एसएसबी के विभिन्न उद्घाटन एवं शिलान्यास कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इसके बाद दोपहर दो बजे नवादा के हिसुआ में एक जनसभा को संबोधित करेंगे।
इससे पहले, शुक्रवार शाम तक जारी झड़पों में अनुमंडल पुलिस अधिकारी सासाराम के एक गार्ड सहित पुलिसकर्मी भी घायल हो गए।
एक समूह द्वारा कथित तौर पर जुलूस पर पथराव करने के बाद, हिंसा भड़क उठी, यहां तक कि गोलियां भी चलाई गईं और कई वाहनों को आग लगा दी गई। उपद्रवियों ने पथराव किया और करीब आधा दर्जन वाहनों को आग के हवाले कर दिया। मौके पर सैकड़ों की संख्या में पुलिस व प्रशासन का बल तैनात रहा।
बिहारशरीफ और सासाराम में रामनवमी की शोभा यात्रा के दौरान हुए दंगे को लेकर एडीजी मुख्यालय जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया अभी स्थिति सामान्य है।
पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि लालू प्रसाद की संगत, कुर्सी का मोह और आँखों में पीएम बनने के सपने भरे होने से नीतीश कुमार को सबसे तेज विकास करने वाली केंद्र सरकार के काम नहीं दिखते।
क्या बिहार में फोरलेन सड़कें, महासेतु, पटना मेट्रो बिना केंद्र की मदद के सम्भव ?
बिहटा-पूर्णिया एयरपोर्ट विस्तार, दरभंगा एम्स जैसी केंद्रीय योजनाओं में अड़ंगेबाजी क्यों?
नीतीश कुमार को न केंद्र का काम दिखता है, न काम करने देना चाहते हैं
श्री मोदी ने कहा कि क्या करोड़ों देशवासियों ने बिना काम किये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दूसरी बार प्रचंड बहुमत के साथ सेवा का मौका दिया ?
उन्होंने कहा कि बिहार में फोरलेन सड़कों का संजाल और नदियों पर महासेतु का निर्माण क्या केंद्र सरकार के बिना सम्भव था?
श्री मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने 8000 करोड़ की लागत से बरौनी खाद कारखाने का आधुनिकीकरण कर इसे फिर चालू कराया और पटना मेट्रो प्रोजेक्ट को ऋण दिलाने में बड़ी भूमिका निभायी, लेकिन नीतीश कुमार ने ट्वीट करके भी प्रधानमंत्री को धन्यवाद नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि एक तरफ नीतीश कुमार केंद्र पर काम न करने का अनर्गल आरोप लगाते हैं और दूसरी तरफ केंद्रीय योजनाओं में रोड़ा अटकाते हैं , ताकि प्रधानमंत्री को कोई श्रेय न मिल जाए।
श्री मोदी ने कहा कि बिहटा-पूर्णिया में एयरपोर्ट विस्तार, दरभंगा में एम्स और विक्रमशिला में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए केंद्र सरकार बजट का प्रावधान कर चुकी है, लेकिन राज्य सरकार जमीन नहीं दे पा रही है।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को न केंद्र का काम दिखता है, न वे उसे काम करने देना चाहते हैं।
श्री मोदी ने कहा कि केंद्र ही नहीं, देश के 12 से ज्यादा राज्यों में क्या भाजपा सरकारें बिना काम किये दूसरी-तीसरी बार सत्ता में लौटी हैं? हाल में त्रिपुरा, मणिपुर, असम और गुजरात में भाजपा काम के बूते ही सत्ता में लौटी। उधर नीतीश कुमार की कामकाजी पार्टी नगालैंड में साफ हो गई।
पटना । बिहार मैट्रिक वार्षिक परीक्षा, 2023 का परीक्षाफल शुक्रवार दिनांक 31.03.2023 को अपराह्न 1:30 बजे जारी किया गया। शिक्षा मंत्री ने जारी किया मैट्रिक का रिजल्ट, इस बार 81.04 फीसदी छात्र हुए पास।
इस परीक्षा में प्रदेश भर से 1637414 लाख बच्चे शामिल हुए थे। इनमें 806201 छात्र और 831213 छात्राएं शामिल हुईं थीं।
बिहार बोर्ड मैट्रिक की परीक्षा में शेखपुरा के मोहम्मद युम्मान अशरफ ने पूरे राज्य में टॉप किया। बिहार बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने कहा कि इस बार 81.04 प्रतिशत छात्र सफल हुए हैं।
मोहम्मद युम्मान अशरफ ने 489 अंक के साथ टॉप किया है, जो इस्लामिया हाई स्कूल शेखपुरा का छात्र है। दूसरे स्थान पर दो लड़कियां हैं, नम्रता कुमारी (भोजपुर) और ज्ञानी अनुपना (औरंगाबाद) 486 अंक मिले हैं। नालंदा की संजू कुमारी, पश्चिम चंपारण की भावना कुमारी और लखीसराय के जयनंनदन कुमार पंडित तीसरे स्थान पर हैं।
BSEB 10th Result 2023 यहाँ करें चेक
बिहार बोर्ड रिजल्ट का ऐलान होने के बाद इसे ऑफिशियल वेबसाइट पर चेक किया जा सकता है। मैट्रिक रिजल्ट को दो वेबसाइट पर चेक कर सकते हैं।
बिहार विद्यालयी परीक्षा समिति की ओर से घोषणा की गई है कि BSEB 10th Result 2023 वरीयता सूची में शीर्ष पांच स्थान पर काबिज होने वाले मेधावियों को एक लाख रुपये के साथ मिलेंगे ये उपहार; लैपटॉप, नकद पुरस्कार और ई-बुक रीडर उपहार स्वरूप प्रदान किए जाएंगे।
वहीं, तीसरी रैंक पाने वाले होनहारों को भी 50,000 रुपये के साथ एक लैपटॉप और एक किंडल ई-बुक रीडर से नवाजा जाएगा।
जबकि, चौथी और पांचवीं रैंक हासिल करने वाले छात्रों को 15 – 15 हजार रुपये और एक लैपटॉप देकर सम्मानित किया जाएगा।
पटना। बिहार में आज नीतीश कैबिनेट की बैठक से बिजली की बढ़ी दरों पर दी जाने वाली सब्सिडी राशि को मंजूरी दे दी गई। जिसके बाद विधानसभा में ऊर्जा मंत्री की ओर से घोषणा की गई। बढ़ी दरें 1 अप्रैल से लागू होने वाली थीं लेकिन सरकार के इस ऐलान से आम लोगों को बिजली के बिल से राहत मिलेगी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार सरकार बिजली बिल पर अभी 8,895 करोड़ रुपये की सब्सिडी दे रही है, जिसे बढ़ाकर 13,114 करोड़ रुपये कर दिया गया है। राज्य कैबिनेट से इसे मंजूरी दे दी गई है। राज्य सरकार इस भुगतान को आरबीआई के जरिए NTPC को देगी।
CM नीतीश ने विधानसभा में केंद्र सरकार से एक बार फिर समान बिजली दर का फॉर्मूला लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान में 4.46 रुपये और मध्य प्रदेश को 3.49 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। वहीं, बिहार को 5.89 रुपये प्रति यूनिट के रेट पर बिजली मिलती है। बिहार जैसे गरीब राज्य को इतने महंगे दाम पर बिजली मिल रही है, इसका बावजूद राज्य सरकार गरीबों पर इसका बोझ नहीं डाल रही है।
बता दें कि बिहार विद्युत नियामक आयोग ने पिछले दिनों बिजली दरों में 24.1 फीसदी की बढ़ोतरी करने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा फिक्स्ड चार्ज को भी दो गुना कर दिया गया था।
विपक्ष ने सदन से लेकर सड़क तक इस फैसले का जमकर विरोध किया। हालांकि, अब सरकार ने सब्सिडी बढ़ाने का ऐलान किया है, इससे बढ़ी हुई दरों का उपभोक्ताओं पर कोई असर नहीं होगा। उपभोक्ताओं को पुरानी रेट पर बिजली मुहैया होगी।
बिहार विद्यालयी परीक्षा समिति की ओर से घोषणा की गई है कि BSEB 10th Result 2023 वरीयता सूची में शीर्ष पांच स्थान पर काबिज होने वाले मेधावियों को एक लाख रुपये के साथ मिलेंगे ये उपहार; लैपटॉप, नकद पुरस्कार और ई-बुक रीडर उपहार स्वरूप प्रदान किए जाएंगे।
वहीं, तीसरी रैंक पाने वाले होनहारों को भी 50,000 रुपये के साथ एक लैपटॉप और एक किंडल ई-बुक रीडर से नवाजा जाएगा।
जबकि, चौथी और पांचवीं रैंक हासिल करने वाले छात्रों को 15 – 15 हजार रुपये और एक लैपटॉप देकर सम्मानित किया जाएगा।
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पटना हाईकोर्ट के नवनियुक्त चीफ जस्टिस कृष्णन विनोद चंद्रन कल सुबह 9:30 बजे राजभवन में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। बिहार के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर नवनियुक्त चीफ जस्टिस कृष्णन विनोद चन्द्रन को शपथ दिलायेंगे ।
इस अवसर पर पटना हाईकोर्ट के जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह एवं पटना हाई कोर्ट के अन्य जज भी शपथ समारोह में उपस्थित रहेंगे
शपथ समारोह के बाद पटना हाईकोर्ट के मुख्य चीफ जस्टिस कोर्ट में सुबह 11 बजे स्वागत समारोह का आयोजन किया जाएगा। उसके बाद हाईकोर्ट को सामान्य न्यायिक कार्य प्रारंभ हो जाएगा।
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि रमजान के महीने में केवल मुसलिम सरकारी कर्मचारियों एवं शिक्षकों को एक घंटे पहले ड्यूटी पर आने और जाने की छूट के पुराने आदेश की मनमानी व्याख्या कर मुख्यमंत्री के गृह जिला नालंदा में सभी प्रारम्भिक स्कूलों में पढाई की अवधि ही आधी कर दी गई, जबकि इन स्कूलों में 90 फीसद छात्र हिंदू हैं।
• रमजान में छूट के तुगलकी फरमान स्कूलों छात्रों पर भारी पड़े • नीतीश के गृह जिले में सभी प्रारम्भिक विद्यालयों का शिक्षण काल आधा हुआ
श्री मोदी ने कहा कि राजद की साम्प्रदायिक राजनीति के दबाव में नालंदा, किशनगंज सहित कुछ जिलों के शिक्षा पदाधिकारी तुगलकी फरमान जारी कर उसे बहुसंख्यक हिंदू छात्रों पर थोप रहे हैं। ऐसे आदेश को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में राजद शासन के दौरान केवल मुसलिम कर्मचारियों को रमजान के महीने में रियायत देने का विवादास्पद आदेश जारी हुआ था, लेकिन 10 साल में कभी लागू नहीं हुआ। मार्च 2023 में इसे दोबारा जारी कर धर्मनिरपेक्षता की धज्जी उड़ायी जा रही है और अल्पसंख्यकवाद को हवा दी जा रही है।
श्री मोदी ने कहा कि नालंदा जिले में रमजान के पूरे महीने तक प्रारम्भिक विद्यालयों की सुबह की पाली का समय मात्र तीन घंटा ( प्रात: 6.30 -9.30) और दिवा पाली का समय मात्र 4घंटे ( पूर्वाह्न 9- दोपहर 1.30) रहेगा, जबकि स्कूल में पढाई की अवधि सामान्य: 6-7 घंटे होती है।
उन्होंने कहा कि किशनगंज में सभी सरकारी और निजी स्कूल रमजान के दौरान सुबह 8 बजे से अपराह्न 3 बजे तक खोलने का आदेश जारी किया गया और इसे निजी स्कूलों को भी मानना है।
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जब राहुल गाँधी और उनके समर्थक दल मोदी सरनेम मुद्दे पर पिछड़े समाज के करोड़ों लोगों का अपमान कर रहे हैैं, तब भाजपा ने सम्राट चौधरी को बिहार की कमान सौंप कर पिछड़ों के प्रति आदर और विश्वास प्रकट किया।
नये अध्यक्ष को बधाई, पार्टी ने उन पर सौंपा बड़ा दायित्व
लव-कुश वोट पर नीतीश कुमार का एकाधिकार खत्म
श्री मोदी ने सम्राट चौधरी को बधाई दी और कहा कि उनके ऊर्जावान नेतृत्व में भाजपा 2024 के संसदीय चुनाव और 2025 के विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत प्रचंड बहुमत प्राप्त करेगी।
उन्होंने कहा कि पार्टी ने लोकसभा चुनाव से मात्र 10 माह पहले सम्राट चौधरी को बड़ा दायित्व सौंपा है और भरोसा किया है कि वे कार्यकर्ताओं के सहयोग से पार्टी का जनाधार बढ़ाने में सफल होंगे।
श्री मोदी ने कहा कि वर्ष 2022 में गोपालगंज और कुढनी के उपचुनाव में जदयू की हार ने उस लव-कुश वोट के भाजपा की ओर शिफ्ट होने की पुष्टि की, जिस पर नीतीश कुमार अपना एकाधिकार समझते थे।
उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी के अध्यक्ष बनने से भाजपा के पक्ष में पिछड़े समाज के ध्रुव्रीकरण की प्रक्रिया तेज होगी । इससे संगठन में नये उत्साह का संचार अनुभव किया जा रहा है।
पटना हाइकोर्ट ने राज्य में एयरपोर्ट के स्थापित करने,विकास,विस्तार और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के तीन एयरपोर्ट और पूर्णियां एयरपोर्ट के सम्बन्ध में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से ये बताने को कहा कि राज्य में नए एयरपोर्ट बनाए जाने के मामलें क्या कार्रवाई की गई है। दोनों सरकारों को बताने को कहा गया था कि वे बताए कि इनके सम्बन्ध में क्या योजनाएं बना रहे है।
कोर्ट ने उन्हें ये भी बताने को कहा था कि क्या वे नए एयरपोर्ट के निर्माण के लिए उन्हें चिन्हित करने की कार्रवाई की है।कोर्ट ने ये जानना चाहा कि इन नए एयरपोर्ट के निर्माण के लिए उनकी क्या योजना है।
पूर्व की सुनवाई में कार्यरत एयरपोर्ट पटना,गया,बिहटा और दरभंगा के एयरपोर्ट के विकास,विस्तार और सुरक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं के बारे में बताने को कहा था। बहुत सारी सुविधाओं की कमी है।इन्हें बेहतर बनाने के क्या कार्रवाई की जा रही है।
इससे पूर्व में हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए केंद्र और राज्य सरकार को पटना और बिहटा में एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर विचार करने को कहा था। तत्कालीन चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस सम्बन्ध में अभिजीत कुमार पाण्डेय की जनहित याचिका पर फैसला सुनाया था।
ये राज्य में पहला मामला है, जिसमें कोर्ट ने राज्य में एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर विचार करने का निर्देश दिया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा था कि कई अन्य राज्यों में कई ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है, लेकिन बिहार में एक भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नहीं है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राज्य की जनता को विकसित और सुरक्षित हवाई यात्रा की सुविधा दिया जाना मौलिक अधिकारों के अंतर्गत आता है।केंद्र और राज्य सरकार इन्हें विकसित और सुरक्षित हवाई यात्रा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी और निजी लॉ कालेजों के स्थिति के सम्बन्ध दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ कुणाल कौशल की जनहित याचिका पर सुनवाई की।
कोर्ट में राज्य सरकार विश्वविद्यालयों के चान्सलर के हलफनामा दायर किया।इस हलफनामा में बताया गया है कि लॉ कालेजों में नेट/ पीएचडी डिग्रीधारी शिक्षक होने चाहिए।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने चन्सलर कार्यालय को हलफनामा दायर कर ये बताने को कहा कि राज्य में लॉ की पढ़ाई के लिए क्या क्या सुधारात्मक कार्रवाई की गई।साथ ही ये भी बताने को कहा गया कि इन लॉ कालेजों में छात्रों को पढ़ाने के लिए यूजीसी मानक के तहत नेट/पीएचडी डिग्री वाले शिक्षकों की नियुक्ति की जा सकती है या नहीं।
चान्सलर ने राज्य के विश्वविद्यालयों के वाईस चान्सलर की बैठक 3अप्रैल,2023 को तय किया है।इस बैठक में असिस्टेंट प्रोफेसर, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्माचारियों की संख्या, बुनियादी सुविधाएँ, सम्बद्धता दिए जाने के सम्बन्ध विचार विमर्श किया जाएगा। इसके बाद चान्सलर कार्यालय को अगली सुनवाई में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया गया है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि इन लॉ कालेजों में जो प्रिंसिपल और शिक्षक कार्य कर रहे है, वे यूजीसी के मानदंडों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता नहीं रखते है।
उन्होंने बताया कि ये शिक्षक यूजीसी द्वारा नेट की परीक्षा बिना पास किये पद पर बने हुए।इन लॉ कालेजों के प्रिंसिपल भी पीएचडी की डिग्री प्राप्त नहीं किया है।
#PatnaHighCourt
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को यह बताने को कहा था कि राज्य में स्थित लॉ कॉलेजों में नेट की परीक्षा पास किए शिक्षकों को क्यों नियुक्त नहीं किया जा सकता है।
राज्य में स्थित लॉ कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव के मामलें पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की जा रही है।
कोर्ट ने बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया से ये जानना चाहा था कि राज्य के लॉ कॉलेज में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लॉ कालेजों में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति होना आवश्यक है।
कोर्ट को अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि राज्य के सरकारी और निजी लॉ कालेजों की स्थिति बहुत दयनीय है।वहां बुनियादी सुविधाओं का काफी अभाव है।
बीसीआई के निर्देश और जारी किए गए गाइड लाइन के बाद भी बहुत सुधार नहीं हुआ है।बीसीआई के निरीक्षण के बाद भी बहुत सारे कालेज निर्धारित मानकों को नहीं पूरा कर रहे है।
इससे पूर्व कोर्ट ने बीसीआई के अनुमति/ अनापत्ति प्रमाण मिलने के बाद ही सत्र 2021- 22 के लिए राज्य के 17 लॉ कालेजों को अपने यहां दाखिला लेने के लिए अनुमति दी थी।
पूर्व में हाई कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए बिहार के सभी 27 सरकारी व निजी लॉ कॉलेजों में नए दाखिले पर रोक लगा दी थी। बाद मे इस आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए 17 कॉलेजों में सशर्त दाखिले की मंजूरी दे दी गई।
सुनवाई के समय समय याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार एवं रितिका रानी, बीसीआई की ओर से अधिवक्ता विश्वजीत कुमार मिश्रा ने कोर्ट में अपने अपने पक्षों को प्रस्तुत किया।
इस मामलें पर अगली सुनवाई 10अप्रैल,2023 कर बाद फिर की जाएगी।
बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सोमवार को अपने पहले बच्चे के जन्म की घोषणा ट्विटर से किया। उन्होंने नवजात के साथ तस्वीर शेयर करते हुए कहा कि भगवान ने बेटी को तोहफे में भेजा है।
चाचा तेज प्रताप यादव इस मौके पर विधानसभा के बाहर मिठाई भी बांटते नज़र आए। वहीं परिवार के अन्य लोग भी इस मौके पर बहुत खुश हैं।
उन्होंने ट्वीट किया, ईश्वर ने आनंदित होकर पुत्री रत्न के रूप में उपहार भेजा है।
यादव की बहन रोहिणी आचार्य ने भी अपनी खुशी साझा करते हुए कहा कि उनके घर में ‘नन्ही परी’ के रूप में एक नया मेहमान आया है।
बनकर नन्हीं सी परी मेरे घर मेहमान आई है खुशियों की संग सौगात लाई है दादा-दादी बनने की खुशी में मम्मी-पापा के चेहरे पे जो मुस्कान लाई है.. pic.twitter.com/3qlhQhaQ5c
पटना । BPSC 68th Prelims Result 2023: बिहार लोक सेवा आयोग की वेबसाइट पर सोमवार (27 मार्च) की सुबह रिजल्ट का नोटिफिकेशन जारी किया गया है । रिजल्ट को लेकर 68वीं बीपीएससी (68th BPSC) के अभ्यर्थी काफी दिनों से इंतजार कर रहे थे. अब यह खत्म हो गया है ।
12 फरवरी को बिहार के 38 जिलों के 806 केंद्रों पर 68वीं बीपीएससी की पीटी परीक्षा का आयोजन हुआ था।
BPSC
68वीं बीपीएससी का रिजल्ट ऐसे चेक करें रिजल्ट देखने के लिए आधिकारिक वेबसाइट https://www.bpsc.bih.nic.in पर जाएं
आज 27 तारीख की तिथि में रिजल्ट जारी किया गया है. 27 तारीख में आपको 68वीं बीपीएससी पीटी परीक्षा के रिजल्ट का लिंक दिखेगा.
लिंक पर क्लिक करने के बाद एक पीडीएफ सामने आएगा
इसके बाद यहां से रोल नंबर के अनुसार चेक कर सकते हैं
BPSC 68th Prelims 2023 परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थी मेंस की परीक्षा में शामिल होंगे । मुख्य परीक्षा के लिए आयोग की ओर से कैलेंडर जारी हो चुका है ।
एग्जाम कैलेंडर के अनुसार 12 मई को मुख्य परीक्षा होगी । 26 जुलाई को मुख्य परीक्षा का रिजल्ट भी जारी कर दिया जाएगा ।11 अगस्त को इंटरव्यू होगा, इसके बाद नौ अक्टूबर को फाइनल रिजल्ट जारी किया जाएगा ।
पटना । राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सम्प्रति राज्य सभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री ललन सिंह ने कभी फर्जी, कमजोर दस्तावेज नहीं बल्कि मजबूत तथ्यों पर आधारित इतने पुख्ता सबूत जांच एजेंसी को उपलब्ध कराया है कि आज तक कोई बचकर निकल नहीं पाया है। चारा घोटाला हो या आईआरसीटीसी घोटाला हर घोटाले के सबूत के पीछे ललन सिंह का हाथ है। इन्हीं के कागजातों के आधार पर लालू प्रसाद को चारा घोटाला के 4 मामलों में सजा हो चुकी है। श्री ललन सिंह केवल पुख्ता सबूत ही नहीं बल्कि मुकदमे के हर पल-पल की स्वयं मॉनिटरिंग भी करते हैं।
• लालू परिवार मीडिया के सामने दहाड़ते हैं और सीबीआई के सामने भीगी बिल्ली बन जाते हैं • ललन सिंह के कारण भागलपुर दंगे में बरी किए जा चुके कामेश्वर यादव को 15 वर्ष बाद सजा हुई
रेलवे की नौकरी के बदले जमीन घोटाले जिसमें पिछले दिनों तेजस्वी यादव और लालू परिवार से पूछताछ हुई उसके भी सारे कागजात 2008 में श्री ललन सिंह और स्वर्गीय शरद यादव ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दिया था। परंतु केंद्र में राजद के समर्थन से यूपीए की सरकार चल रही थी। अतः प्रधानमंत्री सचिवालय से कागज गायब करा दिए गए।
2014 में एनडीए की सरकार बनने के बाद पुनः कागजात सुपुर्द किए गए। कभी मुकदमा बंद नहीं हुआ था। इस घोटाले की जांच अगस्त में महागठबंधन की सरकार बनने के 1 वर्ष पहले ही प्रारंभ हो गई थी।
श्री ललन सिंह को परिणाम का पूरा अंदेशा है चूँकि कागज उन्हीं के दिए हुए हैं इसलिए डरे हुए हैं। कागज कभी मरते नहीं हैं। संचिका कभी बंद नहीं होती है। भागलपुर दंगे में एक दोषमुक्त किए जा चुके आरोपी कामेश्वर यादव को 15 वर्षों के बाद श्री ललन सिंह के प्रयास से मुकदमा खोलकर नीतीश सरकार में सजा दिलाई गई थी।
लालू परिवार मीडिया के सामने दहाडते हैं और सीबीआई के सामने भीगी बिल्ली बन जाते हैं। झुकने या लड़ने का प्रश्न नहीं है बल्कि पुख्ता सबूत होंगे तो कोई बच नहीं सकता। आखिर लालू प्रसाद झुके या ना झुके चार मामलों में सजायाफ्ता हो चुके हैं।
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि तेजस्वी यादव को बताना होगा कि दिल्ली की फ्रेंड्स कालोनी में डेढ़ सौ करोड़ के चार मंजिला मकान (डी-1088) के मालिक कैसे बन गए? सीबीआई उनसे ऐसे सवालों का जवाब चाहती है।
ललन सिंह सीबीआई तक पहुँचा चुके हैं पुख्ता सबूत
उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में हजारी राय के दो भतीजों ( दिलचंद कुमार, प्रेमचंद कुमार) को जबलपुर और कोलकाता में रेलवे की ग्रुप-डी की नौकरी मिली। हजारी राय से एक जमीन 21 फरवरी 2007 को एके इन्फोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम लिखवा ली गई।
श्री मोदी ने कहा कि दिल्ली की फ्रेंड्स कालोनी वाले मकान का स्वामित्व एके इन्फोसिस्टम्स के पास था। बाद में मामूली धन राशि देकर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव इसी कंपनी के मालिक बन गए।
उन्होंने कहा कि जदयू के स्वर्गीय शरद यादव और ललन सिंह ने इस मामले में यूपीए सरकार के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ज्ञापन देकर सीबीआई जांच की मांग की थी। बाद में ललन सिंह ने नीतीश कुमार के इशारे पर सीबीआई को पुख्ता सबूत उपलब्ध कराये।
उन्होंने कहा कि सीबीआई इस मामले में सच जानना चाहती है, जबकि राजद और जदयू भ्रष्टाचार से जुड़े इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं।
पटना। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बिहार में दिसंबर 2022 में सारण और सीवान जिलों में हुई जहरीली शराब त्रासदी में “मृतकों की संख्या को कम करने” के लिए अधिकारियों को दोषी ठहराया है और कहा है कि इस घटना में सरकार के खिलाफ कम से कम 77 लोग मारे गए थे। राज्य सरकार ने इस घटना में केवल 44 लोगों की मौत की बात स्वीकार की थी।
एनएचआरसी की एक 13-सदस्यीय टीम, जिसने जहरीली शराब त्रासदी की जांच की, ने यह भी देखा कि “2016 में राज्य में शराबबंदी लागू होने के बाद से नकली शराब के सेवन से होने वाली मौतें बिहार की कानून व्यवस्था का हिस्सा बन गई हैं।”
NHRC की रिपोर्ट, जिसे हाल ही में एनएचआरसी की वेबसाइट पर अपलोड किया गया था ने घटना में स्थानीय प्रशासन और आबकारी विभाग की “अक्षमता” को भी उजागर किया है। एनएचआरसी ने अपनी 18 पन्नों की रिपोर्ट में दावा किया कि जिला प्रशासन ने बिना किसी पोस्टमॉर्टम के 33 लोगों के शवों का अंतिम संस्कार कर दिया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौतों के अलावा, सात लोगों ने जहरीली शराब त्रासदी में अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी।
रिपोर्ट में मृतकों के परिवारों को मुआवजा नहीं देने के राज्य सरकार के फैसले को भी ‘अनुचित’ बताया गया है।
NHRC ने घटना का स्वत: संज्ञान लेने के बाद 21 से 23 दिसंबर के बीच जांच करने के लिए एक टीम भेजी थी। टीम ने सदर अस्पताल, विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का दौरा किया था और शोक संतप्त परिवार के सदस्यों से बात की थी।
NHRC की रिपोर्ट का हवाला देते हुए, सारण के सांसद राजीव प्रताप रूडी ने कहा “रिपोर्ट में पटना उच्च न्यायालय की टिप्पणी का भी जिक्र है कि राज्य सरकार शराबबंदी कानून को लागू करने में विफल रही है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि मरने वालों में से अधिकांश गरीब और समाज के कमजोर वर्ग से थे।
बिहार के मुख्य सचिव आमिर सुभानी ने कहा: “बिहार सरकार को अभी तक एनएचआरसी जांच समिति की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।”
पटना हाईकोर्ट ने वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा के अंतर्गत विभिन्न कालेजों में कार्यरत तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों के सामंजन से संबंधित मामले पर सुनवाई की। जस्टिस पी बी बजनथ्री की खंडपीठ ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को सभी रिकॉर्ड के साथ अगली सुनवाई में तलब किया है।
कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए दायर किए गए एलपीए पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
राज्य सरकार और विश्वविद्यालय द्वारा अलग-अलग एलपीए दायर कर हाईकोर्ट के एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी गई है। अपील में एकल पीठ द्वारा वर्ष 1978 से 1982 के बीच कार्यरत तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों को नियमित करने संबंधी आदेश को गैरकानूनी और गलत बताते हुए उसे निरस्त करने का अनुरोध किया गया है।
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तृतीय एवं चतुर्थ पद वर्ग के पद पर नियुक्त हुए कर्मचारियों की ओर से अधिवक्ता अशोक कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति नियमों के अनुसार वर्ष 1978 से 1982 के बीच की अवधि में की गई थी।
जिनका सामंजन वर्ष 2011 से 2013 के बीच की अवधि में किया गया।लगभग पांच वर्षों के बाद वर्ष 2017 में इनसे सेवा नही लेने और उन्हें वेतन का भुगतान नहीं करने का आदेश राज्य सरकार द्वारा दिया गया।
राज्य सरकार और विश्वविद्यालय के इसी आदेश के खिलाफ एक सौ उन्तीस कर्मचारियों ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने इन कर्मचारियों की नियुक्ति और सामंजन को सही मानते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को उन्हें उनके पद पर बहाल करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन कर्मचारियों को उनके पद पर योगदान नहीं कराया और हाई कोर्ट के एकलपीठ के आदेश के खिलाफ अपील दायर कर दिया।
इसी मामले में हाईकोर्ट ने इन दोनों अधिकारियों को अगली सुनवाई पर तलब किया है।इस मामले पर 3 सप्ताह बाद सुनवाई की जाएगी।
पटना हाईकोर्ट ने नेत्र सहायक की नियुक्ति के मामले में स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निर्देशक को 6 अप्रैल,2023 को कोर्ट में तलब किया है।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने रंजीत कुमार द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अशोक कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि बिहार तकनीकी सेवा आयोग ने नेत्र सहायक के पद पर नियुक्ति करने के लिए वर्ष 2021 में एक विज्ञापन निकाला था।
इस विज्ञापन के अनुसार इस पद पर नियुक्ति के लिए भौतिक विज्ञान, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान और अंग्रेजी के साथ उत्तीर्ण और मान्यता प्राप्त संस्थान से नेत्र सहायक के डिप्लोमा कोर्स किए उम्मीदवार को ही योग्य माना था। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया है कि विज्ञापन को हाईकोर्ट में चुनौती दिया गया, जिसके बाद कई रिट याचिकाएं अन्य अभ्यर्थियों के द्वारा भी हाईकोर्ट में दायर किया गया।
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हाईकोर्ट ने कुछ रिट याचिकाकर्ताओं के पक्ष में अपना आदेश सुनाया। कोर्ट को बताया गया कि सरकार द्वारा इस मामले में जो शपथ पत्र दायर किया गया है, वह हाईकोर्ट के खंडपीठ के आदेश के विपरीत है।
इसी मामले पर नाराजगी व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट में स्वास्थ्य विभाग के अपर निर्देशक को अगली सुनवाई पर तलब किया है।
पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि मोदी सरनेम वाले सभी लोगों को चोर बताने वाले राहुल गांधी के अमर्यादित बयान के विरुद्ध मैंने भी पटना के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है और अगर इसमें भी उन्हें सूरत की अदालत की तरह सजा सुनाया गई, तो उनकी संसद सदस्यता छिन जा सकती है।
पटना में मैंने भी किया है मानहानि का मुकदमा, गवाही अगले माह
अमर्यादित टिप्पणी करने वालों को कड़ा संदेश दे सकती है न्यायपालिका
“चौकीदार चोर है” वाले बयान के कारण उन्हें कोर्ट में मांगनी पड़ी थी माफी
सूरत कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए श्री सुशील मोदी ने कहा कि “मोदी” सरनेम वाले लाखों लोगों ने सांसद राहुल गांधी की टिप्पणी से अपमानित अनुभव किया। उनके विरुद्ध पटना सहित कई अन्य जगह भी मुकदमें दायर हुए।
उन्होंने कहा कि मेरे मामले में वे जमानत ले चुके हैं, लेकिन अगले महीने गवाही के लिए उन्हें पटना सीजेएम के कोर्ट में उपस्थित होना पड़ सकता है।
श्री मोदी ने कहा कि इससे पहले राहुल गांधी ने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपमानित करने की मंशा से “चौकीदार चोर है” जैसा घटिया बयान दिया था।
उन्होंने कहा कि राफेल विमान सौदे और “चौकीदार चोर है” वाले मामले में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट में माफी मांगनी पड़ी थी। फिर भी उन्होंने जुबान पर लगाम लगाना नहीं सीखा।
श्री मोदी ने कहा कि यदि सरनेम वाले बयान के कारण राहुल गांधी को विभिन्न अदालतों से कड़ी सजा सुनायी जाती है, तो यह अमर्यादित भाषा बोलने वालों के विरुद्ध कड़ा संदेश होगा।
पटना हाइकोर्ट ने राज्य की प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित मधुबनी पेंटिंग की सरकारी उपेक्षा और कलाकारों की दयनीय अवस्था पर सुनवाई की। आत्मबोध की जनहित याचिका पर एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने राज्य सरकार दिए गए कार्रवाई रिपोर्ट पर गहरा असंतोष जाहिर किया।
कोर्ट ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यदि इस सम्बन्ध में ब्लू प्रिंट एक सप्ताह में नहीं पेश किया गया, तो कोर्ट इस पर गंभीर रुख अपनाएगा।
पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील डा. मौर्य विजय चन्द्र ने कोर्ट को बताया था कि मधुबनी पेंटिंग के विकास,विस्तार और कलाकारों के कल्याण के लिए राज्य सरकार ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कला व संस्कृति सचिव व उद्योग विभाग के निर्देशक को पटना एयरपोर्ट परिसर में बने मधुबनी पेंटिंग का निरीक्षण कर कल कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत का निर्देश दिया था।
उन्होंने जो रिपोर्ट दिया ,उससे स्पष्ट हुआ कि पटना एयरपोर्ट के परिसर में जो मधुबनी पेंटिंग लगी है,वहां न तो कलाकारों को क्रेडिट दिया गया है।साथ ही जी आई टैग भी नहीं लगा है।इससे मधुबनी पेंटिंग व उसके कलाकारों की उपेक्षा स्पष्ट होती है।
कोर्ट ने राज्य सरकार को कहा था कि मधुबनी पेंटिंग के विकास और विस्तार के लिए युद्ध स्तर पर कार्य किया जाना चाहिए।याचिकाकर्ता के वकील डा. मौर्य विजय चन्द्र ने कोर्ट को बताया कि मधुबनी पेंटिंग सरकारी उपेक्षा का शिकार तो है ही, साथ ही मधुबनी पेंटिंग करने वाले कलाकारों का शोषण भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि मधुबनी पेंटिंग की ख्याति देश विदेश में है,लेकिन मधुबनी पेंटिंग के कलाकार गरीबी में जीवन बिता रहे है।उन्होंने बताया कि मधुबनी पेंटिंग के कलाकारों को अपने कानूनी अधिकारों का ज्ञान नहीं है।
इसी का लाभ बिचौलिए उठाते है।उनकी पेंटिंग का बाहर ले जा कर महंगे दामों में बेचते है, जबकि उन कलाकारों को बहुत थोड़ी सी रकम दे देते है।
उन्होंनेे कोर्ट को बताया कि उन्हें 2005 में ही जीआई टैग भारत सरकार से लगाने की अनुमति प्राप्त हुई।ये भौगोलिक क्षेत्र के तहत रजिस्टर होता है ,लेकिन इसका आजतक रेजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है।
इसके सम्बन्ध में इन कलाकारों को जानकारी नहीं है।इसका लाभ बिचौलिए उठाते है। इस मामलें पर अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद की जाएगी।
पटना हाईकोर्ट ने पटना एवं राज्य के अन्य क्षेत्रों में खुले आम नियमों का उल्लंघन कर मांस- मछली बेचने पर पाबन्दी लगाने सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई की। एक्टिंग चीफ जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने मामलें पर सुनवाई करते हुए पटना नगर निगम को विस्तृत जानकारी देने के लिए तीन सप्ताह का मोहलत दिया।
पटना नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि आधुनिक बूचडखाने के निर्माण और विकास के लिए स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है।निविदा की कार्रवाई की जा रही है। पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करने के लिए पटना नगर निगम ने तीन सप्ताह की मोहलत मांगी,जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया।
ये जनहित याचिका अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्र ने दायर की है। अधिवक्ता अंकिता कुमारी ने कोर्ट को बताया कि पटना समेत राज्य विभिन्न क्षेत्रों में अस्वास्थ्यकर और नियमों के विरुद्ध मांस मछली काटे और बेचे जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इससे जहाँ आम आदमी के स्वास्थ्य पर पर बुरा असर पड़ता हैं, वहीं खुले में इस तरह से खुले में जानवरों के काटे जाने से छोटे लड़कों के मन पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
याचिकाकर्ता के वकील अंकिता कुमारी ने कोर्ट से यह भी आग्रह किया था कि खुले और अवैध रूप से चलने वाले बूचडखानों को नगर निगम द्वारा तत्काल बंद कराया जाना चाहिए ।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि पटना के राजा बाज़ार, पाटलिपुत्रा , राजीव नगर, बोरिंग केनाल रोड , कुर्जी, दीघा , गोला रोड , कंकड़बाग आदि क्षेत्रों में नियमों का उल्लंघन कर खुले में मांस मछ्ली की बिक्री होती है।
उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी कि अस्वस्थ और बगैर उचित प्रमाणपत्र के ही जानवरों को मार कर इनका मांस बेचा जाता है ,जो कि जनता के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
उनका कहना था कि शुद्ध और स्वस्थ मांस मछ्ली उपलब्ध कराने के लिए सरकार को आधुनिक सुविधाओं सुविधाओं के साथ बूचड़खाने बनाए जाने चाहिए,ताकि मांस मछली बेचने वालोंं को भी सुविधा मिले।
साथ ही जनता को भी स्वस्थ और प्रदूषणमुक्त मांस मछली मिल सके।इस मामलें पर अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।
पटना। बिहार के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका, बिजली की दर में 24.10% की बढ़ोतरी की घोषणा की गई है। इसके बाद बिजली 2 रुपए तक प्रति यूनिट महंगी हो जाएगी । अब सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी के आधार पर तय होगा प्रति यूनिट बिजली का दर।
बिहार विधानमंडल के मौजूदा सत्र में तमाम गतिरोधों के बीच लाइन लॉस को आधार बनाते हुए बिहार में बिजली की दरें बढ़ा दी गई हैं। बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने गुरुवार को बिजली दर में बढ़ोतरी की घोषणा की है। बिजली कंपनी ने इसे 40% तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। आयोग ने सुनवाई के बाद 24.1 फीसदी की मंजूरी दी है।
बढ़ी दरें इस प्रकार से हैं 100 यूनिट से ज्यादा बिजली का उपयोग करने वाले को 1.67 रुपए प्रति यूनिट ज्यादा देने हाेंगे। इसमें फिक्स्ड चार्ज जोड़ दिया जाए तो बढ़ोतरी प्रति यूनिट 2 रुपए से ज्यादा होगी। अभी तक यह दर 6.95 रुपए प्रति यूनिट थी, जो बढ़कर अब 8.62 रुपए प्रति यूनिट हो जाएगी। अब सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी के आधार पर तय होगा प्रति यूनिट बिजली का दर।
फिक्स्ड चार्ज में भी बढ़ोतरी बिजली दर बढ़ोतरी के साथ ही बिल में फिक्स्ड चार्ज में भी बढ़ोतरी की गई है। अब बिजली दरों के 3 स्लैब की जगह अब दो ही होंगे।
बढ़ी दरों का यह फैसला 1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक लागू रहेगा।
पटना हाई कोर्ट ने मुज़फ़्फ़रपुर के सरैया थाना चर्चित हत्याकांड में मृतक निर्भया कुमारी (काल्पनिक नाम) के परिजन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई तीन सप्ताह के लिए टल गई। राज्य सरकार की ओर से जस्टिस अंशुमान की एकल पीठ को बताया गया कि वीडिओ जांच के लिए चंडीगढ़ स्थित फॉरेंसिक लैब में भेजा गया है, लेकिन अभी रिपोर्ट नहीं आया है।
आज कोर्ट में उपस्थित सरैया के डीएसपी और सम्बंधित अनुसंधानकर्ता ने कोर्ट को ये जानकारी दी।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ओम प्रकाश कुमार ने कोर्ट से आग्रह किया गया है कि केस में नामजद अभियुक्तों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। साथ ही केस को किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाया जाए।
इस केस में काम नही कर रहे पुलिस पदाधिकारियों पर विभागीय कार्यवाही भी चलाया जाए। पिछले सुनवाई के दौरान मुज़फ़्फ़रपुर के एस एस पी ने शपथ पत्र दायर कर बताया कि इस केस में सिर्फ एक व्यक्ति ही संलिप्तता जांच में सामने आई है ।इसलिए बाकी अभियुक्तों को गिरफ्तार नही किया गया।
पूर्व की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि जो शपथ पत्र एसएसपी ने दायर किया है, उसे देखने से प्रतीत होता है कि पुलिस अन्य अभियुक्तों को बचा रही है।
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कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए इस केस के डीएसपी और अनुसंधान कर्ता को अगली सुनवाई में कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया था।अधिवक्ता ओम प्रकाश ने बताया कि दिनांक 26 अप्रैल 2022 को याचिकाकर्ता की पुत्री अपने घर से बाहर गयी थी ,लेकिन वह वापस नही लौटी।
जिसके बाद परिजन वालों ने अपनी पुत्री को जा खोजबीन किया, परन्तु वह नही मिली। उसी दिन रात्रि 12.47 बजे एक कॉल आया, जिसमे याचिकाकर्ता की पुत्री की आवाज सुनाई दी।वह दर्द से कराह रही थी।
इसके बाद फोन कट गया और पुनः प्रयास करने पर मोबाइल बंद मिला।अगले दिन सुबह में ग्रामीण ने बताया कि याचिकाकर्ता की पुत्री की बॉडी पोखर में पड़ी हुई है।
इसके बाद परिजन घटना स्थल पर जाने के क्रम में देखे की गांव के ही मो0 वसीम खान के द्वारा याचिकाकर्ता की पुत्री को बोलेरो कार से लेकर कहीं जा रहा था।वह बोलेरो मोहम्मद वसीम के घर पर जाकर रुकती है।
फिर मोहम्मद वसीम के परिवार वाले गाड़ी में बैठते है। वे लोग वैष्णवी हॉस्पिटल, मुज़फ़्फ़रपुर याचिकाकर्ता की पुत्री को लेकर जाते हैं, जहाँ याचिकाकर्ता की पुत्री के परिजन भी पहुचते हैं ।
अपनी पुत्री से बात करते हैं, तो याचिकाकर्ता की पुत्री द्वारा बताया जाता है कि लगभग 8 लोग द्वारा बलात्कार किया गया और जहर पिलाया गया। इसमें उसने चार लोगों का नाम भी लिया था, जिसमे से एक व्यक्ति मोहम्मद वसीम खान को गिरफ्तार कर लिया गया है ।
लेकिन अभी भी तीन नामजद अभियुक्त पुलिस के गिरफ्त से बाहर है।इस मामलें पर पुनः तीन सप्ताह बाद सुनवाई की जाएगी।
पटना । बिहार BJP में सम्राट चौधरी को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है । विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है ।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने तत्काल प्रभाव से सम्राट चौधरी को बिहार का अध्यक्ष बनाया है। एनडीए की सरकार में सम्राट चौधरी पंचायती राज विभाग के मंत्री थे। सम्राट चौधरी वर्तमान में बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं।
पटना । बुधवार 22 मार्च को बिहार अपना 111वां स्थापना दिवस मना रहा है । 1912 में आज ही के दिन बिहार को बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग किया गया था। बिहार राज्य का गठन आज ही के दिन हुआ था । इसीलिए प्रतिवर्ष 22 मार्च को Bihar Diwas मनाया जाता है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को गांधी मैदान में तीन दिवसीय बिहार दिवस समारोह का उद्घाटन किया । उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव सहित अन्य मंत्री उद्घाटन समारोह में रहे मौजूद ।
Bihar Diwas 2023 अवसर पर बोलते हुए, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “हमने राज्य में 2010 में बिहार दिवस मनाना शुरू किया था। अब बिहार दिवस अन्य राज्यों और विदेशों में भी मनाया जाने लगा है। बिहार का गौरवशाली इतिहास रहा है।
“पटना के गांधी मैदान में आयोजित बिहार दिवस के अवसर पर आए लोगों को संबोधित करते हुए बिहार के सीएम नीतीश ने फिर से विशेष राज्य की मांग को दोहराते हुए कहा कि हमलोग बहुत पीछे है. राज्य के विकास के लिए विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए।
उन्होंने बिहार के साथ बौद्ध धर्म, जैन धर्म, सिख धर्म और सूफीवाद के विशेष संबंध का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने पद्म श्री प्राप्तकर्ता और सुपर 30 कोचिंग संस्थान के संस्थापक आनंद कुमार को सम्मानित किया। उन्होंने शौर्य श्रेणी में पश्चिम चंपारण के धीरज कुमार और दरभंगा की साइकिल गर्ल ज्योति कुमारी को जबकि समाज सेवा श्रेणी में छपरा की पाल साक्षी को सम्मानित किया।
Bihar Diwas समारोह में कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया और प्रसिद्ध गायकों के प्रदर्शन द्वारा चिह्नित किया गया।
उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा, “बिहार लगातार विकास कर रहा है. हम 10 लाख सरकारी नौकरी और 10 लाख रोजगार के अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम जल्द ही अपना वादा पूरा करेंगे।”
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने बिहार दिवस (22 मार्च) पर प्रदेशवासियों को बधाई दी और अपील कि लोग राजनीतिक स्थिरता लाने और दस साल में विकसित राज्य बनाने का संकल्प लें।
श्रीबाबू के दूरदर्शी नेतृत्व में हुआ था राज्य का प्रारम्भिक विकास
29 साल में 23 मुख्यमंत्री आये-गए, अस्थिरता से बाधित हुआ विकास
1990 में ऐसी सरकार आयी, जिसने अपराध और भ्रष्टाचार का राजनीतिकरण किया, विकास नहीं
2005 में आयी एनडीए सरकार, विकास पटरी पर लौटा, बिहार दिवस मनाने की शुरुआत उसी दौर में
निजी महत्वाकांक्षाओं के हावी होने से फिर अस्थिरता मेंं फंसा बिहार
श्री मोदी ने कहा कि आजादी के बाद 14 साल तक राजनीतिक स्थिरता रही और प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह उर्फ श्री बाबू के दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य का प्रारम्भिक विकास हुआ।
उन्होंने कहा कि 1961 में श्री बाबू की मृत्यु के बाद अस्थिरता, भ्रष्टाचार और कुशासन के चलते बिहार लगातार पिछड़ता गया।
उन्होंने कहा कि 1961 से 1990 तक 29 साल में यहाँ 23 मुख्यमंत्री आये-गए और राष्ट्रपति शासन भी लगता रहा। इससे विकास बाधित हुआ।
श्री मोदी ने कहा कि 1990 में ऐसी सरकार आयी, जिसने बीस साल राज करने के इरादे से अपराध और भ्रष्टाचार का खुलकर राजनीतिकरण किया, लेकिन विकास पर कोई ध्यान नहीं दिया। उस दौर में बिहारी कहलाना शर्म की बात हो गई थी।
उन्होंने कहा कि भले ही एक सरकार 20 साल राज नहीं कर सकी, लेकिन 15 साल में ही उसने राज्य को 50 साल पीछे धकेल दिया।
श्री मोदी ने कहा कि 2005 में जब एनडीए सरकार आयी, तब विकास पटरी पर लौटा था। उस दौर में अपराध पर कठोर नियंत्रण, वित्तीय अनुशासन, भ्रष्टाचार पर अंंकुश, ढांचागत विकास में भारी निवेश और उच्च शिक्षा के नये संस्थान खुलने से बिहारी अस्मिता का पुनर्जागरण हुआ। बिहार दिवस मनाने की शुरुआत भी उसी दौर में हुई थी।
उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने विकास और गुड गवर्नेंस दिया, जिससे बिहार सबसे तेज विकास करने वाला राज्य बना।
श्री मोदी ने कहा कि दुर्भाग्यवश, कुछ लोगों की पीएम-सीएम बनने की महत्वाकांक्षाएँ इतनी भारी पड़ीं कि बिहार फिर अस्थिरता के भँवर मेंं फंस गया।
उन्होंने कहा कि बिहार दिवस पर हमें राजनीतिक स्थिरता और विकास का दौर लौटाने का संकल्प लेना चाहिए।
पटना हाइकोर्ट ने फोर लेन रजौली बख्तियारपुर नेशनल हाइवे के प्रथम पैकज के निर्माण में हो रहे बिलम्ब पर एनएचएआई को स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया। विपिन कुमार की जनहित याचिका पर एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की।
कोर्ट को एनएचएआई के अधिवक्ता ने बताया कि ये एन एच 31 के 105 किलोमीटर को तीन पैकेज में बांटा गया है। पैकेज दो और तीन के कार्य चल रहे है।लेकिन पैकेज एक का कार्य नहीं हो पा रहा है।
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उन्होंने बताया कि इस पैकेज के निर्माण के वन व पर्यावरण विभाग के अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलना बाकी है।उन्होंने बताया कि इसके बाद पैकेज एक का काम प्रारम्भ हो सकेगा।
कोर्ट ने एनएचएआई को छह सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।इस मामलें पर अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद की जाएगी।
पटना हाइकोर्ट ने बिहार के तत्कालीन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद रॉय के विरुद्ध अदालती कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाते हुए बड़ी राहत दी। जस्टिस संदीप कुमार ने नित्यानंद द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की।
उनके विरुद्ध अपने भाषण में सामुदायिक विद्वेष फैलाने का आरोप लगाया गया था।अंचलाधिकारी, नरपतगंज,ज़िला अररिया ने एक नरपतगंज थाने मे तत्कालीन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद रॉय के विरुद्ध अपने 9 मार्च,2018 को अपने भाषण में साम्प्रदायिक विद्वेष फैलाने की सूचना दी।
सीजेएम अररिया 13अप्रिल,2022 को पुलिस द्वारा 31अक्तुबर,2021 के दायर चार्जशीट पर सुनवाई करते हुए संज्ञान लिया।कोर्ट ने थाना प्रभारी को इनके विरुद्ध समन जारी करने का निर्देश दिया।
निचली अदालत के इस आदेश के विरुद्ध केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद रॉय ने एक याचिका दायर की।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता नरेश दीक्षित ने कोर्ट को बताया कि जिन प्रावधानों के तहत उनके विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है, वह उन पर लागू ही नहीं होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नित्यानंद रॉय ने किसी प्रकार से अपने भाषण में सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने का काम नहीं किया है।उन्होंने विदेश के एक आतंकवादी के सन्दर्भ में बात कही थी।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि ये मामला 2018 का है,जबकि निचली अदालत ने इस मामले का संज्ञान 2022 में लिया।
इन तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दिया।इस मामलें पर अगली सुनवाई जुलाई,2023 में की जाएगी।
पटना हाईकोर्ट ने वैशाली ज़िला केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड के निदेशक मंडल चुनाव की अंतिम मतदाता सूची से दिघी पूर्वी एवं दिघी पश्चिम नगर पंचायत प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति का नाम हटाने से संबंधित याचिका पर सुनवाई की ।
जस्टिस सत्यव्रत वर्मा ने राकेश कुमार मिश्रा द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले को बिहार सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव के समक्ष भेजने का निर्देश दिया है,ताकि इस मामले का निराकरण किया जा सके ।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता एसबीके मंगलम ने कोर्ट को बताया कि प्रतिवादी सं. 12 और 14 दिघी पूर्व और दिघी पश्चिम पैक्स के सदस्य थे।ये अब हाजीपुर नगर परिषद के क्षेत्र में शामिल है ।इस तरह पैक्स ने नगरपालिका क्षेत्र में शामिल होने के बाद अपनी पहचान खो दी है।
#PatnaHighCourt
जो वैशाली जिला केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड, हाजीपुर द्वारा बनाए गए उपनियमों के संदर्भ में मतदाता और प्रतियोगी होने के लिए एक आवश्यक शर्त है। सुनवाई के दौरान स्टेट इलेक्शन अथॉरिटी के अधिवक्ता मुकेश कुमार ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि नि:संदेह उपरोक्त 2 पैक्स को हाजीपुर की नगरपालिका सीमा के भीतर शामिल किया गया है।लेकिन फिर भी आज तक पैक्स के उपनियमों को दिनांक 24.11.2009 के पत्र संख्या 7477 के मद्देनजर संशोधित नहीं किया गया है।
रजिस्ट्रार, को-ऑपरेटिव सोसाइटी द्वारा, इस तरह, उपरोक्त 2 पैक्स अभी भी पैक्स की पहचान को बनाए रखते हैं । इस पर कोर्ट ने मामले को निष्पादित करते हुए इसे बिहार सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव के समक्ष भेजने का निर्देश दिया।
पटना हाइकोर्ट ने राज्य में बड़ी संख्या में अनुसूचित जनजाति के छात्रों द्वारा स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ दिए जाने के मामले पर सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बिहार लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी (बालसा) से रिपोर्ट तलब किया।
कोर्ट ने बालसा को ये बताने को कहा कि कितने बच्चों ने स्कूलों की पढ़ाई छोड़ दी है और कितने बच्चों ने दोबारा इन स्कूलों में जाना शुरू किया है ? बिहार आदिवासी अधिकार फोरम की लोकहित याचिका दायर की थी।
कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए चिंता जताई कि इन बच्चों की पढ़ाई के लिए राज्य सरकार द्वारा क्या कार्रवाई की गई है।इसके साथ साथ खंडपीठ ने बालसा के एक सदस्य को लिए पश्चिम चम्पारण के हारनाटांड में स्थित स्कूल एवं कस्तूरबा गांधी विद्यालयों के विकास से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि हाईकोर्ट इस मामले में लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है ।
इस मामले में पहले भी हाईकोर्ट ने वकीलों की एक टीम गठित कर निरीक्षण करने का निर्देश दिया था । इस टीम में अधिवक्ता सूर्या नीलांबरी, अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय , अधिवक्ता आयुष अभिषेक एवं अन्य अधिवक्ता शामिल थे ।
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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया था कि बिहार में अनुसूचित जनजाति के बालिकाओं के लिए पश्चिम चम्पारण के हारनाटांड एकमात्र स्कूल है।पहले यहाँ पर कक्षा एक से लेकर कक्षा दस तक की पढ़ाई होती थी।
लेकिन जबसे इस स्कूल का प्रबंधन राज्य सरकार के हाथ में आया तबसे इस स्कूल की स्थिति बदतर होती गई।कक्षा सात और आठ में छात्राओं का एडमिशन बन्द कर दिया गया।
साथ ही कक्षा नौ और दस में छात्राओं का एडमिशन पचास फीसदी ही रह गया।यहाँ पर सौ बिस्तर वाला हॉस्टल छात्राओं के लिए था,जिसे बंद कर दिया गया।
इस स्कूल में पर्याप्त संख्या में शिक्षक भी नहीं है।इस कारण छात्राओं की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। हाईकोर्ट ने अनुसूचित जनजाति के छात्रों द्वारा इतनी बड़ी संख्या में स्कूल बीच में छोड़ने को गंभीर स्थिति का दर्जा दिया ।
पटना हाइकोर्ट ने उचित सुनवाई का मौका दिये बगैर ही एक कम्पनी को पूरे बिहार में सरकारी कार्य ठेके से वंचित किये जाने के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने ग्रामीण कार्य विभाग के एक मुख्य अभियंता पर 10 हज़ार रुपये का हर्जाना लगाया है।जस्टिस पी बी बजनथ्री की खंडपीठ ने परमार कंस्ट्रक्शन की रिट याचिका पर सुनवाई की।
कोर्ट ने मुख्य सचिव को भी आदेश दिया कि वे राज्य सरकार के सभी विभागों को दिशानिर्देश जारी करें, ताकि कोई भी प्रशासनिक तौर पर कोई दंडात्माक आदेश देने से पहले सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिया जाए।साथ ही प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन करने हेतु हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से पारित हुए आदेशों का अनुपालन करे।
कोर्ट ने कहा कि अधिकारीगण पूर्व के न्याय आदेशों को बगैर ध्यान में रखे ही अवैध तरीके से प्रशासनिक आदेश जारी कर देते हैं।
पटना हाइकोर्ट ने नालंदा स्थित शिवपुरी जलाशय के निर्माण हेतु सरकारी ठेके मे सबसे कम लागत लगाने वाली कम्पनी को अवैध तरीके से अयोग्य करार देने के मामले पर सुनवाई की। हाई कोर्ट ने लघु सिंचाई विभाग के वरीय अधिकारी व अभियंता पर दो लाख रुपये का हर्जाना लगाया है।
जस्टिस पी बी बजंत्री की खंडपीठ ने राजीव कुमार की रिट याचिका पर सुनवाई की।कोर्ट ने हरजाने की राशि पटना हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी में दो सप्ताह में जमा करने का आदेश दिया।
याचिकाकर्ता के वकील प्रभात रंजन द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि बिना किसी आरोप के उनके मुवक्किल की कंपनी को नालंदा स्थित शिवपुरी जलाशय के निर्माण कार्य हेतु लगाई गई नीलामी में सबसे कम लागत की लगाने के बावजूद अयोग्य करार दे दिया गया।
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लघु सिंचाई विभाग के तकनीकी मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष व अभियंता प्रमुख ने याचिकाकर्ता को अयोग्य घोषित कर दिया।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रभात ने आरोप लगाया कि पूरे विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने निजी स्वार्थ के लिए अधिक लागत की बोली लगाने वाली कंपनी को काम करने का ठेका दे दिया।जबकि याचिकाकर्ता ने काम के लागत राशि से 15 फ़ीसदी कम की बोली लगाई थी।
वही कमेटी के अधिकारियों ने उतनी ही लागत से 13 फ़ीसदी कम की बोली लगाने वाले को काम का ठेका दिया । इससे सरकारी राजकोष को इस पूरे काम के लागत यानि 460 करोड़ रुपए के 2 फी सदी का नुकसान झेलना पड़ा ।
कोर्ट ने सरकारी अधिकारी व अभियंताओं से इस मामलें में जवाब माँगा, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के बीच जो भी डील हुई हो, लेकिन तेजस्वी प्रसाद यादव को जमीनी हकीकत का एहसास हो गया है कि न वे अभी सीएम बन सकते हैं, न नीतीश कुमार कभी पीएम बन सकते हैं।
जस्वी को कुर्सी सौंपने की डील से पलटे नीतीश कुमार
राजद अब नीतीश पर दबाव बनाने की स्थिति में नहीं
विपक्षी एकता फेल, ममता,अखिलेश ने जदयू को पूछा नहीं
किसी को राष्ट्रीय राजनीति ने किनारे किया, किसी को बिहार के हालात ने
श्री मोदी ने कहा कि सीएम-पीएम के सपने देखने वाले चाचा-भतीजा अपने समर्थकों से नारे लगवा कर या पोस्टर-होर्डिंग्स के जरिये अपनी महत्वाकांक्षा प्रकट करते रहे हैं। अब दोनों सफाई देते फिर रहे हैं कि उन्हें बड़े पद पाने की इच्छा नहीं है।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार 2023 में तेजस्वी यादव को कुर्सी सौंपने की बात से पलट चुके हैं और राजद भी अब कोई दबाव बनाने की स्थिति में नहीं है।
श्री मोदी ने कहा कि जो तेजस्वी यादव कह रहे थे कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने की जल्दी नहीं है, वही अब पद की इच्छा त्याग कर अचानक संत कैसे हो गए?
उन्होंने कहा कि 2024 और 2025 में जब राजद-जदयू अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रहे होंगे, तब सीएम-पीएम तो बहुत दूर की बात होगी। अच्छी बात है कि तेजस्वी यादव ने इस सच को स्वीकार किया।
श्री मोदी ने कहा कि ममता बनर्जी और अखिलेश यादव कांग्रेस को अलग रख कर फ्रंट बनाने का एलान कर चुके हैं। नीतीश कुमार को न ममता पूछ रही हैं, न केसीआर ने भाव दिया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृष्य जहाँ नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षा को चूर कर रहा है, वहीं बिहार के हालात तेजस्वी यादव के सपनों पर ओला बरसा रहे हैं।
पटना । मंगलवार को जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची में बड़ा फेरबदल किया। जदयू की नयी सूची से जदयू महासचिव केसी त्यागी का नाम हटा दिया।
JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने पार्टी के नए राष्ट्रीय पदाधिकारियों के नामों का ऐलान किया । पार्टी द्वारा जारी सूची में मंगनी लाल मंडल को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई है।