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लखीसराय के आयुष्मान आरोग्य मंदिर में जलजमाव से स्वास्थ्य सेवाएँ बाधित, निकासी के लिए आपात कार्रवाई का आदेश।

लखीसराय के अलीनगर पंचायत में स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वास्थ्य उपकेंद्र में जलजमाव की समस्या ने स्वास्थ्य सेवाओं को गंभीर संकट में डाल दिया है। बारिश के बाद दो फीट तक जल जमा होने से पुराने भवन में मरीजों को इलाज करने की स्थिति अस्थायी रूप से असम्भव हो गई है।

इस बीच, अर्धनिर्मित नए भवन में भी चारों ओर जलजमाव का घेराव बना हुआ है, जिससे रोगियों को दुर्गंध और गंदे पानी के बीच इलाज करना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल रोगियों के स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण है, बल्कि स्वास्थ्य कर्मियों के कार्यस्थल को भी असुरक्षित बना रही है।

अलीनगर स्वास्थ्य उपकेंद्र का निर्माण 2018 में शुरू हुआ था, लेकिन पूर्णता तक पहुँचने में कई वर्ष लग गए। प्रारम्भिक योजना में केवल प्राथमिक उपचार सुविधाएँ प्रदान करने का लक्ष्य था, परन्तु वर्षभर की अनियमित बारिश और निकासी प्रणाली की कमी ने जलभारी स्थिति को जन्म दिया। स्थानीय प्रशासन ने

कई बार जल निकासी के लिए पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव दिया, परन्तु बजट प्रतिबंध और तकनीकी अड़चनें इस कार्य को रोकती रही हैं। पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र में औसत वार्षिक वर्षा 1,200 मिलिमीटर रही है, जिससे जलस्तर में निरंतर वृद्धि देखी गई।

वर्षा ऋतु के दौरान, उपकेंद्र के

आसपास की नालीें भी बंद हो जाती हैं, जिससे जल का बहाव रोका जाता है और पानी का स्तर बढ़ता है। इस कारण पुराने भवन के नीचे के कंक्रीट फर्श में दरारें पैदा हो गई हैं, जिससे पानी सीधे इमारत के भीतर प्रवेश करता है। जलजमाव के कारण भवन में नमी

और फफूंद की वृद्धि हुई है, जो रोगियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। साथ ही, जलस्तर की वृद्धि से इलेक्ट्रिकल उपकरणों की सुरक्षा भी जोखिम में पड़ गई है, जिससे बिजली कटौती और उपकरणों की खराबी की घटनाएँ बढ़ी हैं।

स्थानीय मीडिया ने इस मुद्दे को उजागर करने

के बाद, स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित उपायों की घोषणा की। उन्होंने उपकेंद्र के पुराने भवन में जल निकासी के लिए अतिरिक्त पम्प स्थापित करने और अस्थायी ढांचे को मजबूत करने का आदेश दिया। इसके अलावा, नई निर्माणाधीन इमारत में जलरोधी सामग्री का उपयोग करने का निर्देश जारी किया गया। इस प्रक्रिया

के तहत, एक विशेषज्ञ टीम को नियुक्त किया गया है जो जलनिकासी के तकनीकी विवरण और आवश्यक पूंजी खर्च का मूल्यांकन करेगी।

स्वास्थ्य केंद्र के प्रमुख डॉक्टर, डॉ. सविता सिंह ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में रोगियों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में इलाज देना लगभग असंभव हो रहा है।

उन्होंने बताया कि कई रोगियों ने जलजमाव के कारण उत्पन्न बायोफिल्टर को लेकर शिकायत की है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। इस कारण, अस्पताल में रोगियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है, क्योंकि लोग अधिक सुरक्षित विकल्पों की तलाश में अन्य अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं।

डॉक्टर ने यह भी उल्लेख किया कि जलजमाव के कारण दवाओं की भंडारण शर्तें बिगड़ रही हैं, जिससे दवाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधि, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जलजमाव की समस्या का समाधान केवल स्वास्थ्य विभाग

के दायरे में नहीं है, बल्कि यह एक समग्र शहरी नियोजन और बुनियादी ढांचे की समस्या है। उन्होंने बताया कि अगले दो हफ्तों में एक विशेष समिति गठित की जाएगी, जो जल निकासी के लिए आवश्यक तकनीकी उपायों की समीक्षा करेगी और तत्काल कार्यवाही का प्रस्ताव प्रस्तुत करेगी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने

कहा कि राज्य सरकार को इस दिशा में त्वरित सहायता प्रदान करनी होगी, क्योंकि स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा असर अनदेखा नहीं किया जा सकता।

आधारभूत समस्याओं के समाधान में स्थानीय समुदाय की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। अलीनगर के पिंडस्थ लोगों ने अपने गांव में जल निकासी की व्यवस्था सुधारने

के लिए स्वयंसेवकों के समूह का गठन किया है। उन्होंने निकासी नालों की सफाई, कचरे की उचित निपटान और जलरोधी उपायों के लिए सामाजिक जागरूकता अभियान चलाया है। इस पहल को स्थानीय एनजीओ ने समर्थन दिया है और उन्होंने अतिरिक्त संसाधन प्रदान करने का वचन दिया है। समुदाय की सक्रिय भागीदारी

से कुछ हद तक जलजमाव की समस्या में कमी देखी जा रही है, परन्तु पूर्ण समाधान के लिए अधिक व्यापक कदमों की आवश्यकता है।

राजनीतिक पक्ष ने भी इस समस्या को प्राथमिकता दी है। क्षेत्र के विधायक, श्री अमित कुमार ने संसद में इस मुद्दे को उठ

Updated: September 3, 2026


Heavy rains have flooded both the old and under‑construction blocks of the Ayushman Arogya Mandir health sub‑centre in Alinagar, crippling patient care and endangering staff, while drainage failures have caused structural damage and mold growth. Authorities have ordered emergency pumps and waterproofing measures and are forming a committee to devise a permanent fix, as locals and NGOs rally to improve drainage and sanitation.

Insight: The chronic flooding at Ayushman Arogya Mandir exposes how piecemeal health funding collapses when basic urban infrastructure—drainage, sanitation and resilient construction—is ignored, turning a clinic into a disaster zone.

Unless the state treats health‑care sites as integral nodes of city planning rather