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Nepal Elections 2026 LIVE: Gen-Z आंदोलन के बाद सत्ता की जंग, युवा बनाम पुरानी राजनीति की ऐतिहासिक लड़ाई

नेपाल में 2026 का आम चुनाव सिर्फ एक नियमित लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह देश के राजनीतिक भविष्य का निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। पिछले साल हुए व्यापक Gen-Z आंदोलन के बाद पहली बार जनता वोट डाल रही है। इस आंदोलन ने न केवल तत्कालीन सरकार को गिरा दिया बल्कि पूरे राजनीतिक ढांचे को हिला दिया था। अब लगभग 1.9 करोड़ मतदाता नई सरकार चुनने के लिए मतदान कर रहे हैं।

यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक है—एक तरफ अनुभवी नेता और पुरानी राजनीतिक पार्टियां हैं, तो दूसरी ओर युवाओं की नई राजनीति का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता मैदान में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव का परिणाम नेपाल के राजनीतिक ढांचे, आर्थिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर गहरा प्रभाव डालेगा।

मतदान प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था

नेपाल में आम चुनाव के लिए मतदान सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक हो रहा है। पूरे देश में मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। चुनाव आयोग और सरकार ने इस चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है।

करीब 3 लाख से अधिक सुरक्षाकर्मियों को देशभर में तैनात किया गया है ताकि मतदान के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा या अव्यवस्था को रोका जा सके।

नेपाल के सभी 165 निर्वाचन क्षेत्रों और कुल 275 संसदीय सीटों के लिए मतदान हो रहा है। कई जगहों पर मतदान केंद्रों के बाहर सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए, जिससे स्पष्ट है कि जनता इस चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है।

चुनाव आयोग के अनुसार शुरुआती घंटों में ही मतदान का प्रतिशत तेजी से बढ़ रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बार मतदान पिछले चुनावों से ज्यादा होगा।

Gen-Z आंदोलन की पृष्ठभूमि

नेपाल के 2026 चुनाव को समझने के लिए 2025 के Gen-Z आंदोलन को समझना जरूरी है।

सितंबर 2025 में हजारों छात्रों और युवाओं ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू किए। आंदोलन धीरे-धीरे हिंसक हो गया और देशभर में सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचाया गया।

इन प्रदर्शनों में कम से कम 76 लोगों की मौत और 2000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। भारी दबाव के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा।

इसके बाद संसद भंग कर दी गई और एक अंतरिम सरकार बनाई गई, जिसकी अगुवाई पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुषिला कार्की ने की। इस अंतरिम सरकार का मुख्य उद्देश्य देश को स्थिर करना और नए चुनाव कराना था।

इस आंदोलन ने नेपाल की राजनीति में पीढ़ियों के बीच संघर्ष को उजागर कर दिया—युवा बदलाव चाहते हैं जबकि पुरानी पार्टियां अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती हैं।

चुनाव में प्रमुख मुद्दे

नेपाल के चुनाव में कई महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा में हैं।

1. भ्रष्टाचार

युवाओं का आरोप है कि वर्षों से सत्ता में रही पार्टियों ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है।

2. बेरोजगारी

नेपाल में बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में विदेश जाते हैं। युवाओं का कहना है कि देश में रोजगार के अवसर बढ़ाए जाने चाहिए।

3. राजनीतिक अस्थिरता

पिछले एक दशक में नेपाल में कई सरकारें बदली हैं। गठबंधन राजनीति के कारण स्थिर शासन नहीं बन पाया।

4. आर्थिक सुधार

कोविड के बाद नेपाल की अर्थव्यवस्था दबाव में है। पर्यटन और निवेश बढ़ाने की मांग हो रही है।

5. पारदर्शी शासन

Gen-Z आंदोलन का मुख्य नारा था—पारदर्शी और जवाबदेह सरकार।

चुनाव में प्रमुख उम्मीदवार

2026 के चुनाव में प्रधानमंत्री पद की दौड़ मुख्य रूप से तीन नेताओं के बीच मानी जा रही है।

1. केपी शर्मा ओली

नेपाल के अनुभवी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली एक बार फिर सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं।

74 वर्षीय ओली लंबे समय से नेपाल की राजनीति के प्रमुख चेहरे रहे हैं और उनकी पार्टी सीपीएन-यूएमएल देश की बड़ी राजनीतिक पार्टियों में से एक है।

हालांकि 2025 के आंदोलन के दौरान उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी थी, लेकिन वे अब भी मजबूत राजनीतिक समर्थन का दावा करते हैं।

ओली का कहना है कि यह चुनाव “राष्ट्र निर्माण करने वालों और राष्ट्र को नुकसान पहुंचाने वालों के बीच फैसला” है।

2. बालेन शाह (बालेंद्र शाह)

इस चुनाव का सबसे चर्चित चेहरा बालेन शाह हैं।

35 वर्षीय शाह पहले एक रैपर थे और बाद में राजनीति में आए। वे काठमांडू के मेयर भी रह चुके हैं और युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।

Gen-Z आंदोलन के बाद उनका प्रभाव तेजी से बढ़ा और अब उन्हें प्रधानमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

उनका मुख्य एजेंडा है—

  • भ्रष्टाचार खत्म करना
  • प्रशासनिक सुधार
  • युवाओं को राजनीति में ज्यादा भागीदारी देना

3. गगन थापा

गगन थापा नेपाल की सबसे पुरानी पार्टी नेपाली कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में से हैं।

49 वर्षीय थापा खुद को “नई सोच वाला अनुभवी नेता” बताते हैं।

उनका कहना है कि नेपाल को “बुजुर्ग नेताओं के क्लब” से बाहर निकालकर आधुनिक प्रशासन की जरूरत है।

वे स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक सुधारों पर जोर दे रहे हैं।

युवा वोटर बन सकते हैं गेम-चेंजर

इस चुनाव में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार लगभग 8 लाख नए युवा मतदाता पहली बार वोट डाल रहे हैं।

इनमें से अधिकांश वही युवा हैं जिन्होंने 2025 के आंदोलन में हिस्सा लिया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर युवा बड़ी संख्या में मतदान करते हैं तो चुनाव का परिणाम पूरी तरह बदल सकता है।

चुनाव में कितनी पार्टियां

नेपाल के इस चुनाव में लगभग 65 राजनीतिक पार्टियां और 3400 से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं।

हालांकि असली मुकाबला कुछ बड़ी पार्टियों के बीच ही माना जा रहा है।

चुनाव परिणाम कब आएंगे

चुनाव आयोग के अनुसार:

  • शुरुआती रुझान अगले दिन से आने शुरू हो सकते हैं
  • लेकिन पूरी तरह से अंतिम परिणाम आने में कई दिन लग सकते हैं

नेपाल में प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन सिस्टम होने के कारण वोटों की गिनती जटिल होती है।

अंतरराष्ट्रीय नजरें नेपाल चुनाव पर

नेपाल का चुनाव सिर्फ घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है।

भारत, चीन और अमेरिका सहित कई देश इस चुनाव को करीब से देख रहे हैं क्योंकि नेपाल दक्षिण एशिया की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नई सरकार की विदेश नीति से क्षेत्रीय समीकरणों पर असर पड़ सकता है।

भारत-नेपाल संबंधों पर प्रभाव

भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध हैं।

नई सरकार बनने के बाद दोनों देशों के बीच—

  • व्यापार
  • सीमा प्रबंधन
  • ऊर्जा परियोजनाएं
  • पर्यटन

जैसे मुद्दों पर नई पहल हो सकती है।

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