नई दिल्ली/सिंगापुर: भारत और सिंगापुर ने व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया है। सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और भारतीय मंत्रियों से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब दोनों देश अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को व्यापार, डिजिटल तकनीक, उन्नत विनिर्माण, वित्तीय तकनीक और निवेश जैसे क्षेत्रों में नई गति देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
भारत-सिंगापुर व्यापार 36.1 अरब डॉलर तक पहुंचा
भारत और सिंगापुर के बीच व्यापारिक संबंधों में पिछले दो दशकों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते यानी CECA के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2004-05 के 6.7 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 36.1 अरब डॉलर हो गया है। सिंगापुर ASEAN में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है।
यह आंकड़ा बताता है कि दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते अब केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था, निवेश, सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण और वित्तीय सेवाओं जैसे नए क्षेत्रों में भी सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
सिंगापुर भारत में सबसे बड़ा FDI स्रोत
भारत-सिंगापुर आर्थिक संबंधों में निवेश की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। वित्त वर्ष 2025-26 में सिंगापुर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI का सबसे बड़ा स्रोत रहा। इस दौरान सिंगापुर से भारत में करीब 19.8 अरब डॉलर का FDI आया। अप्रैल 2000 से मार्च 2026 तक सिंगापुर से भारत में कुल FDI प्रवाह करीब 194.68 अरब डॉलर रहा, जो भारत में कुल FDI का लगभग एक-चौथाई है।
इस निवेश का बड़ा हिस्सा सेवा क्षेत्र, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर, ट्रेडिंग, दूरसंचार तथा फार्मास्युटिकल्स जैसे क्षेत्रों में गया है। इससे भारत के लिए सिंगापुर की भूमिका केवल व्यापारिक साझेदार के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रमुख निवेशक के तौर पर भी सामने आती है।
चौथी भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय बैठक में अहम चर्चा
भारत और सिंगापुर के बीच चौथी India-Singapore Ministerial Roundtable (ISMR) बैठक भी 20 अगस्त को सिंगापुर में आयोजित हुई। इसमें निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
चर्चा में डिजिटल तकनीक, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस गवर्नेंस और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों को भी प्रमुखता दी गई। दोनों देश इन क्षेत्रों को भविष्य की आर्थिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार मान रहे हैं।
व्यापार से आगे बढ़कर डिजिटल और तकनीकी साझेदारी
भारत और सिंगापुर के बीच सहयोग अब डिजिटल क्षेत्र में भी तेजी से विस्तार कर रहा है। दोनों देशों ने पहले ही डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में सहयोग की नींव रखी है। UPI और सिंगापुर के PayNow के बीच लिंक की शुरुआत भी दोनों देशों के डिजिटल सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
नई बातचीत में डिजिटलाइजेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों पर जोर इस बात का संकेत है कि भारत-सिंगापुर साझेदारी आने वाले वर्षों में तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था की ओर और बढ़ेगी।
सेमीकंडक्टर और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस
भारत अपने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को तेजी से विकसित करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में सिंगापुर के साथ सहयोग भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। दोनों देशों की साझेदारी में Advanced Manufacturing को भी प्रमुख स्तंभ के रूप में शामिल किया गया है।
सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ-साथ कौशल विकास, तकनीकी प्रशिक्षण और निवेश के अवसर बढ़ाने पर भी सहयोग की संभावनाएं हैं। इससे भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में अपनी भूमिका मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
पीयूष गोयल के साथ 70 सदस्यीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में करीब 70 वरिष्ठ भारतीय कारोबारी नेताओं का प्रतिनिधिमंडल भी सिंगापुर पहुंचा है। प्रतिनिधिमंडल में टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर और AI, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय सेवाएं, हेल्थकेयर, कृषि, लॉजिस्टिक्स और पेशेवर सेवाओं से जुड़े कारोबारी शामिल हैं।
इस प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य कारोबारियों के बीच साझेदारी, निवेश, बाजार पहुंच, तकनीकी सहयोग और प्रतिभा विकास के अवसरों को बढ़ाना है। इससे दोनों देशों के निजी क्षेत्र के बीच सीधे कारोबारी संबंधों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात पर भी जोर
भारत-सिंगापुर आर्थिक सहयोग में कृषि और खाद्य क्षेत्र भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल सिंगापुर में भारतीय कृषि और खाद्य उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के लिए भी काम कर रहा है। APEDA और सिंगापुर की FairPrice पहल के जरिए भारतीय कृषि-खाद्य उत्पादों को सिंगापुर के खुदरा बाजार में बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
इससे भारतीय किसानों और खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। खासकर उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पादों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात को इससे फायदा मिलने की संभावना है।
दोनों देशों के रिश्तों में क्यों अहम है यह बैठक?
भारत और सिंगापुर के बीच रणनीतिक साझेदारी पहले से मजबूत है, लेकिन वैश्विक व्यापार व्यवस्था में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच दोनों देश अपने आर्थिक संबंधों को और व्यापक बनाना चाहते हैं। सप्लाई चेन में बदलाव, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार और नई तकनीकों के विकास ने भारत-सिंगापुर सहयोग के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।
ऐसे समय में उच्चस्तरीय राजनीतिक और कारोबारी बातचीत दोनों देशों को निवेश और व्यापार के नए क्षेत्रों की पहचान करने में मदद कर सकती है। यही वजह है कि चौथी ISMR बैठक को केवल नियमित बैठक के बजाय भविष्य की आर्थिक साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।
आगे और बढ़ सकता है द्विपक्षीय व्यापार
भारत और सिंगापुर के बीच व्यापार पहले ही 36.1 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच चुका है। अब दोनों देशों का लक्ष्य पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर तकनीक, डिजिटल सेवाओं, उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, हेल्थकेयर, फिनटेक और हरित अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है।
यदि निवेश और बाजार पहुंच से जुड़े नए अवसरों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश का आंकड़ा और बढ़ सकता है। भारत के लिए सिंगापुर ASEAN क्षेत्र में रणनीतिक आर्थिक साझेदार बना रहेगा।
भारत और सिंगापुर की आर्थिक साझेदारी अब पारंपरिक व्यापार से निकलकर तकनीक, निवेश और रणनीतिक सप्लाई चेन तक पहुंच रही है। 36.1 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार और भारत में करीब 194.68 अरब डॉलर का संचयी सिंगापुर FDI इस रिश्ते की आर्थिक मजबूती दिखाता है। आने वाले समय में सेमीकंडक्टर, AI, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र इस साझेदारी को नई दिशा दे सकते हैं।
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