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Posts tagged as “#Bihar”

बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए भजपा ने प्रत्याशियों की सूची जारी की है

इस सूचियों में औरंगाबाद से दिलीप कुमार सिंह,
रोहतास-कैमूर से संतोष सिंह,
सारण से धर्मेंद्र कुमार,
सीवान से मनोज कुमार सिंह,
गोपालगंज से राजीव कुमार,
पूर्वी चंपारण से राजेश कुमार उर्फ बबलू गुप्ता,
दरभंगा से सुनील चौधरी,
समस्तीपुर से डॉ. तरुण कुमार,
बेगूसराय-खगरिया से रजनीश कुमार,
सहरसा-मधेपुरा-सुपौल से नूतन सिंह,
पूर्णिया-अररिया-किशनगंज से दिलीप जायसवाल
और कटिहार से अशोक अग्रवाल का नाम है

BJP List
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पटना हाईकोर्ट ने अधिवक्ता दिनेश को सशर्त ज़मानत दी

पटना हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर कथित रूप से जजों समेत अन्य गणमान्य व्यक्तियों के विरुद्ध आपत्तिजनक पोस्ट किये जाने के मामले में जेल में बंद अधिवक्ता दिनेश को सशर्त ज़मानत दी। जस्टिस ए एम बदर ने अधिवक्ता दिनेश की नियमित ज़मानत हेतु दायर याचिका पर वर्चुअल रूप से सुनवाई की।

PatnaHighCourt
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इस मामलें पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए इस शर्त पर ज़मानत दी कि वे भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति नहीं करेंगे। याचिकाकर्ता दिनेश के वरीय अधिवक्ता विंध्याचल सिंह ने बताया कि उक्त मामले में अधिवक्ता की गिरफ़्तारी 16 दिसंबर, 2021 को की गई थी।

इस मामले में 11 फरवरी, 2022 को चार्जशीट दायर किया गया था।

बीजेपी के लिए 2024 का लोकसभा चुनाव आसान नहीं होने वाला है

बात 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव का है औरंगाबाद होते हुए जैसे ही गंगा के इस पार सुपौल पहुंचे तो वहां की महिलाओं से जब वोट को लेकर बात करना शुरु किया तो एक खास तरह का शब्द बार बार सुनने को मिल रहा था इस बार क्विंटलिया बाबा को वोट करेंगे और यह सिलसिला सीतामढ़ी मुजफ्फरपुर तक जारी रहा।

महिला चाहे वो किसी भी जाति की क्यों ना हो यादव महिला भी क्विंटलिया बाबा को वोट देने कि बात कर रही थी ।ये क्विंटलिया बाबा कौन है जिसको लेकर महिला कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है पता चला इन इलाकों में बाढ़ और अगलगी की घटना से लोग काफी प्रभावित होते रहते है ।पहले राज्य सरकार इस तरह के आपदा से प्रभावित परिवार को 50 किलो अनाज देती थी उसमें से किसी तरह 20 से 25 किलों ही पीड़ित परिवार को मिल पाता था, लेकिन नीतीश कुमार जब सीएम बने तो आदेश जारी किया कि सभी पीड़ित परिवार को एक बोरा अनाज मिलेगा ।

इसका इतना व्यापक असर पड़ा कि गरीब परिवार की महिलाएं नीतीश कुमार का नाम ही क्विंटलिया बाबा रख दी क्योंकि एक बोरा अनाज एक क्विंटल होता है इसलिए नीतीश कुमार का नाम ही क्विंटलिया बाबा रख दी ।और इसका असर ये पड़ा कि 2010 का चुनाव परिणाम ऐतिहासिक ही रहा और राजद का जातीय समीकरण ताश की पत्तों की तरह बिखर गया ।

इसी तरह 2019 के लोकसभा चुनाव में जब वोटर के बीच वोटिंग को लेकर बात करने पहुंचे तो औरंगाबाद से लेकर बगहा तक भारत पाकिस्तान का प्रभाव तो था कि महिलाओं के बीच उज्ज्वला योजना के कारण मोदी घर घर में पहुंच गये थे और पहली बार बीजेपी और मोदी वहींं पहुंच गये जहां संघ और बीजेपी के कार्यकर्ता का पहुंच तक नहींं था ।भारत पाकिस्तान का मसला भले ही वोट को गोलबंद किया लेकिन उज्जवला योजना के कारण बीजेपी पहली बार देश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में कामयाब रही और इस योजना से जाति और धर्म पर आधारित राजनीति की हवा निकाल दी मुस्लिम महिला भी मोदी को वोट किया था

कांग्रेस भी इस तरह की योजनाओं के सहारे देश पर इतने दिनों तक राज की है 2009 में किसी ने नहीं सोचा था कि कांग्रेस की फिर से वापसी होगी लेकिन एक योजना मनरेगा ने सारे समीकरण को बदल कर रख दिया और कांग्रेस की फिर से वापसी हुई और नेहरू के बाद मनमोहन सिंह लगातार दूसरी बार पीएम बने ।

यूपी में जो परिणाम सामने आया है उसमें मुफ्त अनाज योजना का बड़ा योगदान है।भारतीय राजनीति पर गौर करेंगे तो महसूस होगा कि इस तरह की योजना जिसका लाभ सीधे जनता तक पहुंच रहा है उसका असर यह होता है कि जातिवादी राजनीति कमजोर पड़ जाता है ।

मोदी का मैजिक यही है मोदी ने जातिवादी राजनीति को धर्म और व्यक्तिगत लाभ से जुड़ी योजनाओं के सहारे तोड़ दिया है जिस वजह से जातीय गोलबंदी की राजनीति फेल कर जा रही है यूपी में भी यही हुआ है इसके अलावे इस बार मोदी का ओवैसी फॉर्मूला भले ही फेल कर गया लेकिन मायावती फर्मूला दो तिहाई बहुमत से जीतने में मदद कर दिया।


1—2024 का लोकसभा चुनाव आसान नहीं होगा मोदी के लिए
2018 में बीजेपी देश के 21 राज्यों में बीजेपी की सरकार थी और 71 प्रतिशत आबादी पर बीजेपी के शासन में रहता था। 2022 में पांच चुनावी राज्यों में से चार पर भाजपा ने फिर से जीत हासिल कर ली है। वहीं, पंजाब की सत्ता कांग्रेस के हाथों से खिसक गई। इन जीत के साथ देश के 18 राज्यों में भाजपा ने अपनी सरकार बरकरार रखने में कामयाबी हासिल कर ली। इन राज्यों में देश की करीब 50% फीसदी आबादी रहती है। यानी, देश की करीब आधी आबादी वाले राज्यों में भाजपा की सरकार हैं।

फिर भी 2024 का चुनाव एक तरफा होगा यह सोचना जल्दबाजी होगा क्यों मुस्लिम वोट के बटवारे के लिए मोदी जिस औबेसी का इस्तमाल करता था वो बिहार चुनाव के परिणाम के साथ ही एक्सपोज हो गया कि औबेसी बीजेपी के लिए काम कर रही है, बंंगाल और यूपी का चुनाव परिणाम यह दिखा दिया कि औबेसी फैक्टर का भारतीय राजनीति में सूर्यास्त हो गया इसी तरह से मायावती का जो दलित वोटर है वो आज भी मायावती के साथ खड़ा रहा लेकिन जो परिणाम आये है उससे यह साफ है कि आने वाले चुनाव में मायावती जिस दलित विरादरी से आती है वो अब साथ छोड़ेगा औबेसी की तरह क्यों कि स्वभाविक रुप से अभी भी दलित बीजेपी के साथ नहीं जुड़ पा रही है वही मुफ्त आनाज योजना को ज्यादा दिनों तक खिचना सभंव नहीं है फिर जिस मध्यवर्ग के आमदनी छिन कर गरीबों के बीच बांटने का जो चलन चल रहा उसका असर बीजेपी के कोर वोटर पर पड़ा है यह बिहार के चुनाव में भी और यूपी के चुनाव में भी देखने को मिला है व्यापारी वर्ग,नौकरी पेशे वाला वर्ग जो बीजेपी का कभी कोर वोटर हुआ करता आज वो बीजेपी को वोट देने मतदान केन्द्रों पर नहीं जा रहा है यह स्थिति अब ज्यादा दिनों तक चलने वाली नहीं है और जिस दिन ये वोटर बीजेपी के खिलाफ वोट डालने मतदान केन्द्रों पर पहुंच जायेंगा मोदी मैजिंग धरा का धरा रह जायेंगा।

इसलिए भले ही महंगाई ,बेरोजगारी,कोराना काल का हाल और किसान से जुड़ा मसला चुनावी मुद्दा नहीं दिख रहा है लेकिन इस मुद्दे का असर आने वाले समय में बीजेपी के लिए परेशानी का सबब बन जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।

रेलवे ने परीक्षार्थियों की सभी मुख्य माँगें मान कर दिया होली गिफ्ट -सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने रेलवे परीक्षार्थियों की सभी प्रमुख मांगें स्वीकार करने के निर्णय के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला छात्रों को रेलवे का होली गिफ्ट है।

सुशील मोदी ने कहा अब NTPC में “एक छात्र – एक रिजल्ट” की नीति लागू होगी तथा ग्रुप डी में दो के बजाय एक परीक्षा ली जाएगी। इसके लिए रेलवे एनटीपीसी के लिए 3.5 लाख और रिजल्ट जल्द प्रकाशित करेगा।

श्री मोदी ने कहा कि रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड के परीक्षार्थियों हेतु मेडिकल स्टैंडर्ड भी अब वही होगा, जो 2019 में परीक्षा का विज्ञापन निकालने के समय तय किया गया था।

उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के जिन परीक्षार्थियों को 2019 के बाद EWS सर्टिफिकेट निर्गत हुए, उन्हें भी स्वीकार किया जाएगा। इन फैसलों से लाखों परीक्षार्थियों को लाभ होगा।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के एयरपोर्ट के विस्तार और भूमि अधिग्रहण मामले पर सुनवाई की

पटना । हाई कोर्ट ने राज्य के पटना स्थित जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट,पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के विस्तार और भूमि अधिग्रहण व अन्य मुद्दों के मामले पर सुनवाई की।

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चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने गौरव सिंह समेत अन्य की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य के विकास आयुक्त को दो सप्ताह में सभी पक्षों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया हैं।

होली मे बिहार आने वाले यात्रियों को होगी परेशानी

होली मे बिहार आने वाले यात्रियों को होगी परेशानी नान इंटरलाकिंग के कारण एक दर्जन से अधिक ट्रेनों का परिचालन हुआ रद्द।

उत्तर-मध्य रेलवे (North Central Railway) के प्रयागराज छिवकी स्टेशन पर चल रहे नान-इंटरलाकिंग कार्य के कारण पूर्व मध्य रेल (ECR) से गुजरने वाली एक दर्जन ट्रेनों का परिचालन रद्द कर दिया गया है।

मुख्‍य जनसंपर्क अधिकारी वीरेंद्र कुमार के अनुसार उत्‍तर मध्‍य रेलवे के नैनी और प्रयागराज छिवकी के मध्‍य तीसरी लाइन की कमीशनिंग के लिए नन इंटरलाकिंग कार्य किया जा रहा है। इस कारण पूर्व मध्‍य रेलवे से गुजरने वाली कई ट्रेनों का रूट बदला गया है तो कई पर रोक भी लगा दी गई है।

लालू प्रसाद यादव की तबीयत फिर बिगड़ी

चारा घोटाला में सजा पाकर जेल की सजा काट रहे राष्‍ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की तबीयत फिर बिगड़ गई है।

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उनकी किडनी 80 प्रतिशत से ज्यादा खराब है। इसमें कोई सुधार नहीं है, बल्कि पहले की तुलना में अधिक खराब हो गई है।

ताजा रिपोर्ट आने के बाद दवा की खुराक या दवा बदलने पर विचार किया जा रहा है। वे दो दिनों से सुस्त दिख रहे हैं। हालात ऐसे हीं रहे तो उनकी डायलिसिस करानी पड़ सकती है।

लालू स्वास्थ्य कारणों से वे फिलहाल रिम्स (अस्‍पताल) के पेइंग वार्ड में भर्ती हैं।

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने जारी की मैट्रिक परीक्षा की आंसर-की

पटना । बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने जारी की मैट्रिक परीक्षा की आंसर-की।

बोर्ड की ऑफिशियल साइट से छात्र चेक कर सकते हैं प्रश्नों के उत्तर
आपत्ति के लिए 11 मार्च तक समय

10वीं के छात्र ऑफिशियल वेबसाइट biharboardonline.bihar.gov.in पर जाकर आंसर-की चेक और डाउनलोड कर सकते हैं।

बिहार के शेखपुरा में बच्ची के साथ हुए गैंगरेप ने खड़े किये कई सवाल

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सुबह से ही महिलाओं के बुलंद हौसला से जुड़ी खबरें लगातार आ रही थी इसी दौरान शाम तीन बजे के करीब जिला शेखपुरा से ब्रेकिंग फॉर्मेट में एक खबर आयी…

दो बच्चियों के साथ गांव के ही छह लड़के ने किया सामूहिक बलात्कार, मोबाइल पर ब्लू फिल्म देख कर घटना को दिया अंजाम, आरोपी का उम्र12 से 13 वर्ष और पीड़ित लड़की का उम्र 9 से 10 वर्ष है ।

खेत में साग तोड़ रही थी दोनों लड़की उसी दौरान इन लड़कों ने घटना को दिया अंंजाम, अपराध छुपाने के लिए लड़कों ने पीड़िता को दिया पांच रुपया, एक लड़की की स्थिति बिगड़ने पर मामला आया प्रकाश में ।।

खबर पढ़ने के बाद मन मेंं कई तरह के सवाल उठने लगे, गांव की पृष्ठ भूमि कैसा है ,लड़का का पृष्ठ भूमि क्या है, जाति क्या .आरोपी का परिवारिक बैकग्राउंड कैसा है ।लगातार इस तरह का सवाल मुझे परेशान किये जा रहा था ।

शेखपुरा रिपोर्टर से बात करना चाह रहे थे लेकिन जिस तरीके से मैं सोच रहा हूं मेरा रिपोर्टर पता नहीं इस खबर को लेकर क्या सोच रहा है, मन ही मन में यह निर्णय लिया कि पहले पूरी खबर आने दिया जाये फिर इस पर अपने रिपोर्टर और शेखपुरा पुलिस से बात किया जायेंगा क्यों कि मुझे पता था कि पुलिस का नजरिया अपराध के बाद अपराधी के गिरफ्तारी से ज्यादा रहता नहीं है।

खैर कल साहस नहीं जुटा पाये कि इस खबर को कैसे लिया जाये आज सुबह से इसको लेकर अपने रिपोर्टर ,शेखपुर जिले के पुलिस पदाधिकारी और कुछ ऐसे लोगों से बात किये जो इस तरह के कृत्य करने वाले के मनोदशा पर प्रकाश डाल सके ।
लड़की और लड़का दोनों का पृष्ठ भूमि मजदूर का परिवार के लोग रोज कमाता है रोज खाता है ,घटना को अंजाम देने वाले लड़कों में एक लड़के का पिता बाहर काम करता है और अपनी पत्नी और परिवार वालों से बात करने के लिए एक एनरोइड मोबाइल पत्नी को दिये हुए है ।

पत्नी अक्सर रात को अपने पति से लाइव चेट करती रहती है उस दौरान दोनों के बीच मोबाइल पर ही सेक्सुअल एक्टिविटी भी चलता रहता है जिसको पास में ही सोया बेटा देखता रहता था। फिर मोबाइल में ही ब्लू फिल्म कैसे चलता है पापा मां को क्या बोलने के लिए कहते हैं जिसके बाद ब्लू फिल्म आ जाता है वह सब पूरी रात मां के पास सोये सोये देखता रहता था।बाद में वो लड़का मोबाइल से अपने साथ खेलने वाले मित्रों को दिखाना शुरु किया और धीरे धीरे छह लड़को की एक टोली बन गयी, इस घटना से पहले भी लड़कों का यह टोली साथ स्कूल जाने और साथ बकरी चराने जाने वाली लड़कियो के साथ अक्सर इस तरह का काम करता रहता है और लड़की विरोध ना करे इसके लिए पांच से दस रुपया दे दिया करता था।

पुलिस दो बच्चों को गिरफ्तार किया है उनसे पुछताछ के दौरान ये सारी बाते सामने आयी है मोबाइल पुलिस ने जप्त कर लिया है मोबाइल के मेमोरी कार्ड में ब्लू फिल्म का कई क्लिप मिला है फिर गुगल पर ब्लू फिल्म का आईकोन मिला है।
पुलिस इस घटना से जुड़ी जो भी साक्ष्य है वो संग्रह कर लिया है लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि यह प्रवृति जो बच्चों में पैदा हो रहा है उसका असर समाज पर क्या पड़ेगा ।

क्यों कि आये दिन बिहार में या देश के अन्य हिस्सों से बलात्कार की जो खबरें आती है उस पर गौर करेंगे तो अधिकांश बलात्कारी का पृष्ठ भूमि प्रवासी मजदूर का ही रहता है, निर्भया कांड को ही देख ले इस घटना को अंजाम देने वालों में अधिकांश ऐसे युवक थे जो अपने परिवार और पत्नी से दूर दिल्ली में नौकरी कर रहा था इतना ही नहीं देश में आये दिन बलात्कार के दौरान जो हिंसक घटना घटती है उसमें कही ना कही एक दो आरोपी नबालिक रहता है और लड़कियों के साथ जानवर की तरह व्यवहार करने में सबसे आगे वही रहता है।

शेखपुरा की घटना रोजगार के लिए पलायन और मां के साथ गांव ने रह रहे बच्चों के मनोदशा पर क्या प्रभाव पड़ रहा है वो समझने के लिए काफी है ।ऐसा नहीं है कि मोबाइल आने से पहले इस तरह की घटनाए नहीं घटती थी तब भी जिस महिला का पति बाहर काम करता था उसके साथ उसके देवर या फिर ससुर द्वारा जबरन रिश्ता बनाने की घटना घटती रही है ।

लेकिन ये भी सही है कि मोबाइल फोन के गांव गांव तक पहुंचने के बाद इस तरह की घटनाओं में काफी तेजी आयी है ,ऐसे में पलायन और उसके कुप्रभाव के साथ साथ मोबाइल क्रांति का समाज पर क्या प्रभाव पड़ रहा है इस पर विमर्श की जरुरत है ।
कोरोना काल के बाद जिस तरीके से आंन लाइन पढ़ाई को लेकर क्रेज बढ़ा है उसका बच्चों पर क्या असर पड़ा है ये भी समझने कि जरुरत है ऐसे इस विषय को लेकर कई लोगोंं से जो हमारी बात हुई है उनका मानना है कि आंन लाइन पढ़ाई की वजह से बच्चों का इस तरह के फिल्म तक पहुंचना आसान हो गया है और अभिभावक भी पढ़ाई के चक्कर मेंं ध्यान नहीं दे पा रहे हैं ।
ऐसे में वक्त आ गया है कि इस ओर गंभीरता से सोचा जाये क्यों कि इस तरह के प्रवृति के बढ़ने से लड़कियों के स्वछंदता पर बूरा प्रभाव पड़ सकता है और एक अलग तरह के अभिसाप के डर से लड़कियों का स्वभाविक विकास रूक सकता है ।

लालू यादव के किडनी फंक्शन में लगातार हो रही गिरावट

रॉची । लालू यादव के किडनी फंक्शन में लगातार हो रही गिरावट

पूर्व में लालू यादव का क्रिएटनीन लेवल था 3.5
आज जांच में लालू का क्रिएटनीन लेवल पाया गया 4.1
बढ़ती जा रही लालू की सेहत संबंधित परेशानियां
ऐसे ही किडनी फंक्शन में आता रहा गिरावट तो

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लालू यादव को डायलिसिस की जल्द पड़ सकती है जरूरत
चारा घोटाला मामले में जेल की सजा काट रहे रिम्स के पेइंग वार्ड में है लालू

नीतीश कैबिनेट की बैठक में 14 एजेंडो पर लगी मोहर

पटना । नीतीश कैबिनेट की बैठक में 14 एजेंडो पर लगी मोहर।

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शराबबंदी कानून को लेकर और सशक्त बनाने को लेकर फैसला हुआ है
यूक्रेन में फंसे स्टूडेंट को लाने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग को नोडल विभाग का पदार्थ बनाया गया है,
मसूर और चना की अधिप्राप्ति बिहार सरकार करेगी,
चना ₹52 30 पैसे मसूर ₹55 प्रति किलो की दर से खरीदारी होगी

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर ट्रेन के परिचालन से संबंधित सभी तरह के कार्यों का जिम्मा महिलाओं के हाथों में

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर समस्तीपुर रेल मंडल ने अपने महिला कर्मियों के हौसले को बढ़ाने के लिए ट्रेन के परिचालन से संबंधित सभी तरह के कार्यों का जिम्मा महिलाओं के हाथों में सौंपा है ।

बिहार विधानसभा में महिलाओ को लेकर संघ प्रमुख के बयान को लेकर हुआ हंगामा

पटना — विधान सभा सदस्या ने कहा संघ महिलाओं को घर मे रखना चाहता है । बिहार विधानसभा में महिलाओ को लेकर संघ प्रमुख के बयान को लेकर हुआ हंगामा।

मोबाइल देखकर दो नाबालिग लड़कियों संग छह बच्‍चों ने किया सामूहिक दुष्‍कर्म

शेखपुरा – नौ वर्ष की दो बच्चियों के साथ छह बच्‍चों ने सामूहिक दुष्‍कर्म किया।
आरोपित लड़कों की उम्र नौ से 12 वर्ष के बीच है।
घटना बरबीघा थाना क्षेत्र की बताई जा रही है।

#Crime

इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस ने दो आरोपितों को पकड़ा है।
पकड़े गए बच्‍चों ने बताया कि मोबाइल में देखकर उनलोगों ने इस तरह का काम किया है।

पटना-बिहार विधान परिषद सीट को लेकर कल दिल्ली मे बीजेपी राष्ट्रीकार्यकारणी की होगी बैठक

बैठक के बाद उम्मीदवारों की होगी घोषणा कुछ सीटों पर अभी भी नामों को लेकर नही बन पायी है सहमित

जातीय राजनीति अभी भी भारतीय राजनीति का सच है

ओपिनियन पोल हो या फिर Exit Poll हो मेरा मानना है कि जिन्हें प्रदेश के जातिगत समीकरण के साथ साथ समाजिक समीकरण और सरकार की योजनाओं की समझ है उन्हें मतदाताओं का नब्ज पकड़ने में कोई खास परेशानी नहीं होती है, सब कुछ स्पस्ट दिखता है ।

यूपी को लेकर जो Exit Poll सामने आ रहे हैं वो दिखता है कि बीजेपी बड़े बहुमत के साथ सरकार में वापसी कर रहा है ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि बेरोजगारी ,मंहगाई ,किसान आन्दोलन,कोरोना के दौरान लोगों की परेशानी सब बेमानी था ऐसा नहीं हुआ होगा उसका भी असर जरुर पड़ा होगा लेकिन इसी आधार पर चुनावी नतीजे सामने आये ये जरुरी नहीं है ।
हालांकि मेरा मानना है कि 4 वर्ष 11 माह सरकार के कामकाज को लेकर वोटर जो सोचता है उसमें एक माह का प्रचार अभियान, पार्टियों द्वारा उम्मीदवारों का चयण और जातिगत समीकरण आज भी मंहगाई ,बेरोजगारी,बेहतर शिक्षा ,बेहतर अस्पताल, विकास और लाभुक योजना जैसे सारे ऐसे मुद्दे जिसको लेकर जनता 4 वर्ष 11 माह सोचती रहती है वो निष्प्रभावी हो जाता है।

याद करिए 1977 में सारा देश कांग्रेस के आपातकाल के खिलाफ था वही दक्षिण भारत पूरी तौर पर कांग्रेस के साथ खड़ा रहा ।1989 का चुनाव परिणाम को ही देख लीजिए पूरे उत्तर भारत से कांग्रेस साफ हो गया और इस बार फिर दक्षिण भारत कांग्रेस के साथ खड़ा रहा ।

2019 के लोकसभा चुनाव को ही देखे हिन्दू मुसलमान और पुलवामा की घटना के बावजूद पश्चिम बंगाल, ओडिशा ,पंजाब सहित दक्षिण के कई राज्यों में बीजेपी का प्रभाव उस तरीके से नहीं रहा जैसे हिन्दी पट्टी में देखने को मिला था इसलिए चुनाव परिणाम के पीछे बहुत सारे कारण होते हैं जिसमें तात्कालिक कारण भी कम महत्वपूर्ण नहीं होता है ।

1–बीजेपी चुनाव लड़ने में हमेशा मजबूत रही है
ऐसा नहीं है कि मोदी और शाह के आने से बीजेपी के चुनाव लड़ने के तरीके में बड़ा बदलाव आ गया है और इस वजह से विपक्ष बीजेपी की रणनीति के सामने टिक नहीं पा रही है।बात 1991 के लोकसभा चुनाव का है रोसड़ा लोकसभा क्षेत्र से रामविलास पासवान जनता दल से और बीजेपी से कामेश्वर चौपाल चुनाव लड़ रहे थे इस चुनाव में बीजेपी का वार रुम मेरे यहां ही था मुझे पैसा से भरा ब्रीफकेस पहली बार देखने को मिला था ।
उस चुनाव में गुजरात ,राजस्थान,दिल्ली ,मध्यप्रदेश,यूपी ,महाराष्ट्र के अलावे हिन्दू धर्म से जुड़े जीतने भी पीठ और मठ हैं उनके महंथ इस चुनाव के दौरान आये हुए थे कोई खाली हाथ नहीं आ रहा था साथ ही हर किसी के साथ पांच से दस कार्यकर्ता आया था जो चुनाव तक गांव गांव में घूमता रहा।

पैसे का आना इस कदर था कि संघ के दर्जनो अधिकारी ब्रीफकेस संभालने और पैसे के वितरण में ही 24 घंटे लगे रहते थे चुनाव आते आते रुम का रुम ब्रीफकेस से भर गया था और उतना ही कार्यकर्ता,रोसड़ा लोकसभा क्षेत्र का कौन सा ऐसा गांव नहीं था जहां बीजेपी के बाहरी कार्यकर्ता प्रचार में नहीं लगे हुए थे उस दौर में बीजेपी सर्वे करवा रही थी।

बीजेपी का कौन ऐसा नेता नहीं था जो प्रचार में नहीं आया वजह यह भी था कि कामेश्वर चौपाल रामजन्मभूमि का शिलान्यास किये थे और सामने रामविलास पासवान चुनाव लड़े रहे थे,चुनाव प्रचार देख कर लग ही नहीं रहा था कि रामविलास पासवान चुनाव जीत भी पायेंगे और जब रिजल्ट आया तो कामेश्वर चौपाल का जमानत जप्त हो गया इसलिए ये कहना कि भाजपा चुनाव मोदी और शाह युग में हाईटेक और पैसे वाला हो गया है ऐसा नहीं है इस मामले में बीजेपी शुरुआती दिनो से ही नम्बर वन रही है ।

प्रबंधन और पैसा से ही चुनाव जीता जाता तो 1991 में कामेश्वर चौपाल का जमानत जप्त नहीं होता फिर 2015 का बिहार विधानसभा चुनाव बीजेपी बूरी तरह से नही हारती या फिर पश्चिम बंगाल का चुनाव वो नहीं हारती बीजेपी अजय नहीं है मोदी और शाह की जोड़ी लगातार कमजोर हो रही है ये भी साफ दिख रहा है और इसकी वजह बेरोजगारी भी है, मंहगाई भी है और किसान आन्दोलन भी है ।

2—महिला वोटर और लाभकारी योजनाओं के सहारे जीत के दावे में कितना है दम

प्रधानमत्री आवास योजना ,अनाज योजना और किसान सम्मान योजना के साथ साथ पेशन योजना जिसका सीधा लाभ वोटर को मिल रहा है इसको लेकर कहां ये जा रहा है कि बीजेपी का यह तुरुप का इक्का है और यूपी में बड़े जीत के पीछे यही वजह रहेगी ।

अगर ऐसा होता तो 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू को करारी हार का सामना नहीं करना पड़ता ,आज पीएम जिस योजना के सहारे जनता के दिल पर राज करने कि बात कर रहे हैं वो सारी योजनाएं पहले से बिहार में चली आ रही है सरकारी योजनाओं का व्यक्तिगत लाभ की बात करे तो नीतीश जैसा देश में कोई दूसरा शासक नहीं होगा ।लेकिन 2020 के चुनाव में वो तीसरे नम्बर पर पहुंच गये वजह एनडीए से लोजपा का अलग होना रहा वही महिला वोटर के आगे आने से नीतीश जीत जाते हैं ये सारे तर्क भी बेमानी साबित हो गया 2020 के चुनाव में ।

चुनाव अभी भी जातीय समीकरण के आस पास ही घूम रहा है जो पार्टी जितने बेहतर तरीके से जातीय राजनीति को साधता है वो चुनाव जीत रहा है यही चुनावी केमिस्ट्री है और इसको गोलबंद करने के लिए जैसे बिहार में अंतिम चरण का चुनाव आते आते जगंल राज का मुद्दा भुनाने में नीतीश और मोदी कामयाब हो गये औऱ बिहार हारते हारते जीत गये क्यों कि यहां ना हिन्दू मुसलमान चला ना भारत पाकिस्तान चला अंत में जगलराज पर दाव लगाये और उसमें वो कामयाब हो गये क्यों कि जगलराज के प्रभावित वोटर मतदान केन्द्र पर जाते जाते सुरक्षा के सामने सभी परेशानी को भुल गये ।यूपी में भी चार फेज के बाद मोदी और योगी इसी लाइन पर आ गये थे यही देखना है कि इसका कितना असर पड़ा है रिजल्ट पर पड़ेगा क्यों कि बीजेपी का सारा दाव फेल कर चुका है अब यही मुद्दा है जिसके सहारे बीजेपी लड़ाई में दिख रहा है ।

3–यूपी का चुनाव परिणाम मोदी शाह के लिए वॉटरलू साबित होगा

वैसे यूपी का चुनाव परिणाम कुछ भी हो मोदी और शाह के लिए यूपी का चुनाव वॉटरलू साबित होगा यह तय है योगी आये तो मोदी और शाह की विदाई तय है योगी नहीं आये फिर भी मोदी और शाह की विदाई तय है क्यों कि यूपी चुनाव में बीजेपी के अंदर जो घमासान मचा था उसका असर यूपी के साथ साथ राजस्थान,बिहार,मध्यप्रदेश ,जैसे हिन्दी पट्टी पर पड़ेगा यह साफ दिख रहा है विरोध का स्वर उठेगा और इन दोनो के एकाधिकार पर पार्टी के अंदर से ही आवाज उठेगी यह भी तय है ।

बिहार प्रशासनिक सेवा के 17 पदाधिकारीयों का तबादला।

सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी की अधिसूचना

  • कुंदन कुमार बनाए गए बाढ़ के एसडीओ।
  • प्रियंका कुमारी बनी एसडीओ दलसिंहसराय।
  • प्रदीप कुमार बने गोपालगंज नए एसडीओ ।
  • अमिताभ कुमार बने किशनगंज के एसडीओ।
  • आदित्य कुमार झा बने हवेली खड़गपुर मुंगेर के नए अनुमंडल पदाधिकारी होंगे।
  • अमित अनुराग बने खगड़िया सदर के एसडीओ ।
  • कुमारी तोशी बनी बाईसी पूर्णिया की एसडीओ।
  • सुमित कुमार बने उप सचिव समाज कल्याण विभाग।
सामान्य प्रशासन विभाग
  • उपेंद्र कुमार पाल बने अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ,राजगीर।
  • अमरेंद्र कुमार बने अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, तेघड़ा बेगूसराय।
  • शहनवाज अहमद बने अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी उदाकिशुनगंज।
  • धर्मेंद्र कुमार बने अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी औरंगाबाद सदर।
  • ज्ञानेंद्र कुमार को बनाया गया उप सचिव भवन निर्माण विभाग ।
  • उपेंद्र प्रसाद सिंह बने शिक्षा विभाग के उप निदेशक ।
  • सुमन प्रसाद सिंह को पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के उप सचिव की मिली कमान ।
  • निरंजन कुमार को बनाया गया निबंधन उत्पादन एवं मद्य निषेध विभाग का उप सचिव।
  • धर्मेंद्र कुमार सिंह बनी जिला पंचायत राज पदाधिकारी शेखपुरा।

बिहार के डीजीपी एसके सिंघल की बढ़ी मुश्किले, नियुक्ति पर खड़ा किया सवाल

दिल्ली — बिहार के डीजीपी एसके सिंघल की मुश्किलें सकती है । सुप्रीम कोर्ट ने उनकी नियुक्ति को लेकर दायर एक याचिका की सुनवाई करते हुए बिहार सरकार को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने बिहार सरकार से ये पूछा है कि आख़िरकार क्यों नहीं डीजीपी की नियुक्ति करने को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना माना जाये।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में बिहार के डीजीपी एसके सिंघल की नियुक्ति को लेकर एक याचिका दायर की गयी है. याचिका में कहा गया है कि बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर बिहार में डीजीपी की नियुक्ति कर दी है. कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई. याचिकाकर्ता की ओर से बहस करते हुए वरीय अधिवक्ता जय साल्वा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कई बार राज्यों के डीजीपी की नियुक्ति में अपने आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा है, लेकिन बिहार में कोर्ट के आदेश को ताक पर रख कर डीजीपी की नियुक्ति कर दी गयी।

मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पूछा कि हाईकोर्ट में इस मामले को क्यों नहीं ले ज़ाया गया. याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि हाईकोर्ट में दो मामले लंबित हैं और उस पर सुनवाई नहीं हो रही है. याचिकाकर्ता के वकील जय साल्वा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस पर सुनवाई करनी चाहिये. ऐसे ही मामले में कोर्ट झारखंड सरकार को अवमानना का नोटिस जारी कर चुकी है. इसके बाद कोर्ट ने बिहार सरकार को नोटिस जारी करने का आदेश दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दे रखा है कि वह किसी भी पुलिस अधिकारी को कार्यवाहक डीजीपी के तौर पर नियुक्त नहीं करे. राज्य सरकार डीजीपी या पुलिस कमिश्नर के पद पर नियुक्ति के लिए जिन पुलिस अधिकारियों के नाम पर विचार कर रही होगी, उनके नाम यूपीएससी को भेजे जाएंगे. यूपीएससी उसे शॉर्टलिस्ट कर तीन सबसे उपयुक्त अधिकारियों की सूची राज्य को भेजेगा. उन्हीं तीन में से किसी एक को राज्य सरकार पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकेगी.

कोर्ट ने ये भी कहा था कि मौजूदा पुलिस प्रमुख के रिटायरमेंट से तीन महीने पहले यह सिफारिश यूपीएससी को भेजी जाये. सरकार को ये कोशिश करनी चाहिए कि कि डीजीपी बनने वाले अधिकारी का पर्याप्त सेवाकाल बचा हो. सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ये कहा गया है कि बिहार सरकार ने कोर्ट के इस आदेश को ताक पर रख कर डीजीपी के पद पर एसके सिंघल की नियुक्ति कर दी है.

बेटी के जन्मदिन पर बिहार की डाँक्टर दंपति ने चांद पर जमीन खरीद कर गिफ्ट दिया

मधुबनी । अब बेटी बोझ नहीं अभिमान है जी हां बिहार के मधुबनी जिले के रहने वाली एक डांक्टर दंपति ने अपनी बेटी के जन्मदिन पर चाँद पर जमीन खरीद कर दिया है । बेटी आस्था भारद्वाज के 10वें जन्मदिन पर यह नायाब तोहफा देते हुए डॉक्टर सुरविन्दु झा और डॉक्टर सुधा झा ने कहा कि चांद पर एक एकड़ जमीन की रजिस्ट्री (Land On Moon) कराई है जो आज बेटी के जन्मदिन पर उपहार स्वरुप दिये हैं ।

झंझारपुर में निजी नर्सिंग होम (Private Nursing Home) चलाने वाले डॉक्टर सुरविन्दु झा का कहना है कि आस्था भारद्वाज उनके खानदान की पहली बेटी है. सुरविन्दु ने कहा कि बेटियां किसी भी खानदान की मान और सम्मान होती हैं, लेकिन उनके खानदान में करीब सात पीढ़ियों से बेटियों की किलकारी और हंसी नहीं गूंजी थी, इसलिए जब उनके घर में आस्था का जन्म हुआ तो परिवार काफी खुश है. इसलिए इस खुशी को खास बनाने के लिए हमने अपनी बेटी को चांद पर जमीन खरीदकर गिफ्ट किया है.डॉक्टर सुरविन्दु झा के मुताबिक बेटी के लिए चांद पर जमीन खरीदने की प्रक्रिया पूरी होने में करीब डेढ़ वर्ष का वक्त लगा. सबसे पहले उन्होंने अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित लूना सोसायटी की वेबसाइट पर आवेदन किया, फिर तमाम तरह की कागजी प्रक्रिया पूरी करने और जमीन की कीमत और रजिस्ट्री शुल्क की राशि पेपाल एप (Paypal) से भुगतान करवाने के बाद 27 जनवरी, 2022 को स्पीड पोस्ट से उन्हें चांद पर जमीन रजिस्टर्ड कराने का पेपर मिला.।

बेटी आस्था  पांचवीं कक्षा में पढ़ रही और ये भी बड़ी होकर डाँक्टर ही बनेगी।

देश के पहले राष्ट्रपति डाँ राजेन्द्र प्रसाद और लोकनायक जय प्रकाश नारायण भू माफिया थे

बिहार सरकार की नजर में देश के प्रथम राष्ट्रपति डाँ राजेन्द्र प्रसाद और लोकनायक जयप्रकाश नारायण भू माफिया थे वे लोगों का जमीन जबरन कब्जा करते थे, बिहार विधापीठ की जमीन पर देश के प्रथम राष्ट्रपति डां राजेन्द्र प्रसाद और लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने जो भी निर्माण का काम कराया था वो सारा का सारा अवैध है।

जी हां हाईकोर्ट में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के स्मारकों की दयनीय स्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की और से हाईकोर्ट में जो शपथ दायर किया गया है उसमें सरकार ने लिखा है कि बिहार विधापीठ को जमीन कैसे पाप्त हुआ इसकी कोई मुझे जानकारी नहीं है और बिहार विधापीठ को सरकार जमीन अधिग्रहण करके नहीं दिया है इतना ही नहीं पाटलिपुत्रा कॉपरेटिव सोसाइटी जैसी कोई संस्था सरकार द्वारा गठित नहीं कि गयी थी यह सब फर्जी है ।

जबकि डाँ राजेन्द्र प्रसाद पाटलिपुत्रा कॉपरेटिव सोसाइटी से 1954-55 में एक लाख 88 हजार रुपया भुगतान करने के बाद सरकार ने बिहार विधापीठ को जमीन दिया था।

पटना हाईकोर्ट में बिहार विधापीठ की और से मुकदमा लड़ रही शमा सिन्हा का कहना है कि पाटलिपुत्रा कॉपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से सरकार सिर्फ बिहार विधापीठ को ही नहीं कुर्जी अस्पताल को भी जमीन दिया है और ये सारी बाते जमीन रजिस्ट्री के कागजात में दर्ज है ऐसी स्थिति में सरकार कैसे कह रही है कि पाटलिपुत्रा कॉपरेटिव सोसाइटी की जानकारी नहीं है ये समझ से पड़े हैं ।

बिहार विधापीठ की ओर से मुकदमा लड़ रही शमा सिन्हा क्या कह रही है जरा आप भी सूनिए

अब जरा मामले के पीछे के खेल को समझ लीजिए बिहार विधापीठ इस वक्त जहां है आज की तारीख में उस जमीन की कीमत हीरा से भी ज्यादा है और यही वजह है कि इस जमीन पर सरकार और सरकार संरक्षित भूमाफिया की नजर है जो बिहार विधापीठ को बेदखल करना चाह रही है।यह बात तब प्रकाश में आयी है जब पटना हाईकोर्ट में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के स्मारकों की दयनीय हालत को लेकर अधिवक्ता विकास कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई चल रही थी।

फिलहाल आज हाईकोर्ट ने चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए सरकार के हलफनामा को खारिज करते हुए आदेश दिया है कि बिहार विद्यापीठ के चारदीवारी के भीतर की भूमि राष्ट्र की धरोहर है, न कि किसी की निजी संपत्ति है।

कोर्ट ने डी एम, पटना को बिहार विद्यापीठ की भूमि का विस्तृत ब्यौरा देने का निर्देश दिया है।साथ ही यह भी बताने को कहा कि बिहार विद्यापीठ की भूमि पर कितना अतिक्रमण है ।

बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना जारी किया

पटना । पूर्व मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण को राज्य सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्त किया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना जारी कर दिया है ।

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सेवानिवृत्त न्यायाधीश फूलचंद चौधरी को राज्य सूचना आयुक्त के पद पर पदस्थापित किया है, इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना जारी कर दिया है ।

कानों की उचित देखभाल के लिए विश्व श्रवण दिवस पर किया जाएगा जागरूक

कानों की उचित देखभाल के लिए विश्व श्रवण दिवस पर किया जाएगा जागरूकः मंगल पांडेय
आज राज्य के 12 जिलों में चलेगा जागरूकता कार्यक्रम

पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि बहरापन को रोकने के लिए खुद को जागरूक रखना बेहद आवश्यक है। कान हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग होता है। इसके प्रति लोगों को सचेत रहने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तीन मार्च को विश्व श्रवण दिवस के अवसर पर जागरुकता कार्यक्रम रखा है, जो राज्य के 12 जिलों में संचालित होगा।

श्री पांडेय ने कहा कि राष्ट्रीय बहरापन नियंत्रण एवं रोकथाम कार्यक्रम (एनपीपीसीडी) के तहत पूर्व की तरह इस साल भी तीन मार्च को विश्व श्रवण दिवस के अवसर पर कई जिलों में बचाव एवं देखभाल के लिए आमजन को जागरूक किया जाएगा।

पोस्टर, बैनर व माइकिंग कर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में आकर ऐसे मरीज से जांच करवाने की अपील की जाएगी। इस संदर्भ में बताया जाएगा कि हमें तेज ध्वनि से कैसे कानों को सुरक्षित रखा जाए। अगर आपके कान में दर्द या संक्रमण के कोई लक्षण है तो जांच करायें। यह भी बताया जाएगा कि जो दवाइयां आप ले रहे हैं, कहीं वह आपके सुनने की क्षमता को प्रभावित तो नहीं कर रहा है। इस संदर्भ में अपने डॉक्टर से सलाह लें। अपने कान की जांच नियमित करायें। सुनने के लिए किन-किन उपकरणों का प्रयोग करें इसकी जानकारी भी दी जायेगी।

श्री पांडेय ने कहा कि श्रवण दिवस पर बहरापन के मुख्य कारणों के प्रति भी जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा, उनमें कान का मैल और निरंतर मवाद का बहाव, कान के अंदुरुनी भाग में सूखा घाव, अनुवांशिक बहरापन, कान के नजदीक अचानक तेज ध्वनि जैसे लक्षण हो सकते हैं। लोगों को जागरूक कर सलाह दी जाएगी कि वो अपने नजदीकी अस्पताल में आकर इस संदर्भ में जानकारी लें।

जिन जिलों में विभिन्न प्रचार माध्यमों से लोगों को जागरूक करने की योजना है, उनमें बांका, बक्सर, गया, गोपालगंज, जमुई, कैमूर, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, पूर्वी चंपारण, रोहतास, पश्चिमी चंपारण एवं वैशाली जिले हैं।

मोतिहारी कोर्ट के पीपी को हटाने के मामले में हाईकोर्ट ने सीएम के प्रधान सचिव को जारी किया नोटिस

पटना हाई कोर्ट ने गैरकानूनी तरीके से हटाए गए मोतिहारी के लोक अभियोजक ( पीपी ) जय प्रकाश मिश्र को अदालत के आदेश के बाद भी अभी तक पद पर बहाल नहीं किये जाने के मामलें मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को नोटिस जारी किया है। जस्टिस पी बी बजन्थरी ने मोतिहारी के लोक अभियोजक जयप्रकाश मिश्रा द्वारा दायर अवमानना के मामलें पर सुनवाई की।

कोर्ट ने कहा कि विधि विभाग के संयुक्त सचिव उमेश कुमार शर्मा को खुद ही पहल कर अदालती आदेश का पालन कराना चाहिए था।

कोर्ट का कहना था कि विधि विभाग के संयुक्त सचिव को नोटिस जारी करते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा था। कोर्ट ने उनसे यह पूछा था कि अदालती आदेश की अवहेलना के मामले में क्यों नहीं उन्हें जिम्मेवार माना जाय।

कोर्ट ने सरकारी वकील को स्पष्ट रूप से कहा था कि अवमानना का यह मामला दोषी पदाधिकारी के विरुद्ध दायर किया गया है, इसलिये इस मामले को लेकर जिम्मेदार व्यक्ति को स्वयं अदालत में अपना जवाब देना होगा कि उसने अदालती आदेश का पालन निर्धारित अवधि में क्यों नही किया।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

पूर्व में कोर्ट को सरकार की ओर से बताया गया कि इस मुकदमे से संबंधित संचिका मुख्य मंत्री के यहां लंबित है, इसलिए इसमें अदालती आदेश का पालन नही हो सका है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए विधि विभाग के संयुक्त सचिव को 21 दिसंबर, 2021 को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता की बर्खास्तगी के आदेश को एक सप्ताह में वापस लेते हुए तत्काल प्रभाव से इनकी नियुक्ति मोतिहारी के पीपी के पद पर करने का पत्र जारी कर दें। अदालती आदेश में दिए गए निर्धारित अवधि के बीत जाने के बाद भी जब याचिकाकर्ता की नियुक्ति नहीं की गई ,तो अदालती आदेश की अवमानना का यह मामला दायर किया गया था।

इस मामले पर आगे की सुनवाई अब दस दिनों में की जाएगी।

सत्ता और सरकार से सवाल करने से देश मजबूत होता है

बात कोई 15 वर्ष पुरानी है मेरा भगिना अमेरिका से आया हुआ था बच्चों का जो टीकाकरण होता है उसका समय हो गया था लेकिन अमेरिका में बच्चों को जो टीका दिया जाता था वो यहां उपलब्ध नहीं था, भगिना मेरा अमेरिकन नागरिक था जहां तक मुझे याद है भारत में अमेरिका का जो दूतावास है वो भगिना के हर गतिविधि की जानकारी रखता था ।            

टीकाकरण की बात हुई तो जानकारी दी गयी कि पटना के एग्जीबिशन रोड में बच्चों के टीकाकरण से जुड़ा कोई डॉक्टर है जिनके यहां वो टीका उपलब्ध है ये सारी जानकारी दूतावास के माध्यम से मिल रहा था डॉक्टर के पास पहुंचे तो उसको पहले से जानकारी था टीकाकरण के बाद बच्चों को कोई परेशानी तो नहीं हुई इस स्तर तक दूतावास खबर रखता था अपने नागरिक का वैसे यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है।                            

वैसे अमेरिका अपने नागरिक के प्रति कितना सजग है ये मीडिया रिपोर्ट से समझा जा सकता है वहीं एक अमेरिकन सेना या नागरिक के मौत होने पर वहां की जनता किस स्तर पर सवाल करती है वो भी कई मौके पर देखने को मिला है लेकिन आज यूक्रेन क्राइसिस के दौरान भारतीय छात्रों के साथ दूतावास का क्या व्यवहार है वो छात्रों के जुबानी समझा जा सकता है ।

भारत सरकार के मंत्री  प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) कहते हैं कि  विदेश में पढ़ने वाले 90% मेडिकल स्टूडेंट नीट एग्जाम पास नहीं कर पाते हैं इस बयान का यूक्रेन में फंसे छात्रों से क्या सम्बन्ध है क्या वो इस देश का नागरिक नहीं है यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने जाना देशद्रोही है क्या । 

लेकिन दूतावास का गैर जिम्मेदाराना रवैया और मंत्री का बेतुका बयान इसलिए आ रहा है कि इस देश की जनता सवाल करना भुल गया है  उलटे जो सवाल कर रहा है  उनसे पूछा जा रहा है कि झारखंड में छात्र पांडेय को मुसलमान मार दिया उस वक्त कहां थे ,कर्नाटक में हिन्दू छात्र को मुसलमान मार दिया उस वक्त चुप क्यों थे ऐसा सवाल करने लोगों  को ट्रोल कर रहे हैं।

इस संकट की घड़ी में भी जहां हजारों बच्चे जिंदगी और मौत से जूझ रहा है  इस समय भी सरकार पर दबाव बनाने के बजाय पूरी ट्रोल सेना  मामले को भटकाने में  लगा है। हालांकि अब पहले जैसी बात नहीं रही घर में विद्रोह शुरू हो गया है ।ऐसे लोग अब अपना प्रोफाइल लॉक करके रखता है फेक आईडी से अब यह खेल हो रहा है  लेकिन सवाल यह है कि यह कब तक चलेगा वैसे  यूक्रेन में जो छात्र फंसे हुए हैं उनमें से 95 प्रतिशत दास(भक्त) परिवार से ही आते हैं और उन्हें मोदी में अपार श्रद्धा है और इन्ही के जानने वाले मोदी का ट्रोल आर्मी भी है ये जानते हुए भी सवाल करने वाले सवाल कर रहे हैं।

आप तटस्थ है सही है मेरा देश शांति के साथ हमेशा खड़ा रहा है लेकिन इस तटस्थता का क्या मतलब है जब हमारे नागरिक की जिंदगी दाव पर है कही कोई खबर तो नहीं आयी है कि रूस से भारत की बात हुई हो कि हमारे नागरिक को सुरक्षित बाहर निकालने का रास्ता दिया जाये ।रुस हमारा मित्र देश हैं संकट के खड़ी में तटस्थ रह कर साथ ही दिये हैं ऐसे में रुस से सहयोग की अपील करनी चाहिए कि नहीं  अभी एक छात्र की मौत हुई है और  ये हाल है कि पीएम को खुद बात करनी पड़ रही है।

वैसे इन बच्चों को लाने  में जो खर्च हो रहा है वो पैसा बच्चा देश छोड़ने से पहले ही सरकार के खाते में जमा कर दिया है उस खाते में अभी भी 400 करोड़ रुपया देश के ऐसे नागरिक का जमा है जिसका इस्तेमाल ऐसे में समय में सरकार कर सकती है ,इसलिए सरकार इन बच्चों को लाकर कोई एहसान नहीं कर रहा है।          

वैसे यूक्रेन में फसे बच्चों के परिजनों से डीएम का मिलना अच्छी पहल है और यही होना चाहिए ऐसी घड़ी में परेशान परिवार को हमेशा यह लगना चाहिए कि पूरा सिस्टम और देश उनके साथ खड़ा है तभी तो देश के प्रति सम्मान का भाव रहेगा क्यों कि इसका असर हर नागरिक  पर पड़ता है ।

तेजस्वी प्रसाद यादव ने आज वरिष्ठ नेता श्री शरद यादव जी से शिष्टाचार मुलाकात की

नेता प्रतिपक्ष, बिहार विधानसभा श्री तेजस्वी प्रसाद यादव जी ने आज दिल्ली में वरिष्ठ समाजवादी नेता श्री शरद यादव जी से उनके दिल्ली स्थित आवास पर शिष्टाचार मुलाकात की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर विचार विमर्श किया।

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तेजस्वी प्रसाद यादव की शरद यादव जी से शिष्टाचार मुलाकात

नवोदित कलाकार अक्षत उत्कर्ष की मौत मामले की जांच में मुंबई पुलिस पहुंची मुजफ्फरपुर

मुंबई पुलिस की टीम अक्षत के सिकंदरपुर स्थित आवास पर पहुंचकर उनके माता-पिता और परिजनों से पूछताछ कर रही है।


27 सितंबर 2020 में मुंबई के अंधेरी वेस्ट में अक्षत की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले के बाद बदल गया है अमेरिका

11 सितंबर 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले के बाद अमेरिका में बहुत कुछ बदल गया है उससे पहले अमेरिकन नागरिक को दुनिया में क्या हो रहा है और दुनिया के साथ अमेरिका क्या कर रहा है उससे अमेरिकन नागरिक को कोई मतलब नहीं रहता था लेकिन इस हमले के बाद अमेरिकन यूथ में अमेरिका की विदेश नीति और अमेरिका की राजनीति के प्रति जिज्ञासा बढ़ी और अब अमेरिकन सरकार पहले जैसे व्यापारी के हित साधने के लिए बहुत कुछ भी नहीं कर सकता है अब देश के अंदर विमर्श शुरू हो जाता है देश के अंदर विरोध के स्वर उठने लगता हैं ।

मेरी बहन और उसका परिवार अमेरिकन नागरिक है मेरा एक भगिना तो अमेरिका का राष्ट्रपति बनने का दावा अभी से ही ठोके हुए हैं रोजाना अमेरिका की नीति पर बहस होता रहता है।

वैसे ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका की राजनीति को लेकर मेरी भी दिलचस्पी बढ़ी और अक्सर मेरा सवाल रहता था कि ट्रंप जैसा व्यक्ति अमेरिका का राष्ट्रपति कैसे बन गया, फिर ट्रंप हटा तो कैसे हटा, क्यों कि ट्रंप मोदी की तरह पूरे अमेरिका को राष्ट्रवाद के नाम पर ऐसा माहौल बना दिया था कि बहुत मुश्किल था उसको हटाना अभी भी वहां के लोग सशंकित रहते हैं कि फिर कही वो लौट ना आय़े ।


वैसे ट्रंप का चुनाव हारना अमेरिका के लिए ऐतिहासिक घटना था क्यों कि ट्रंप जिस तरीके से अमेरिकन के दिल में गैर अमेरिकन के प्रति घृणा पैदा करने में कामयाब रहा है ऐसे में बहुत मुश्किल था ट्रंप को हराना और अभी भी ट्रंप कमजोर नहीं हुआ है उसका विचारधारा अभी भी अमेरिका को अशांत किए हुए हैं।

ऐसी स्थिति में अफगानिस्तान और यूक्रेन मामले में अमेरिकन राष्ट्रपति को पहले जैसे निर्णय लेना बहुत ही मुश्किल है देश के अंदर एक बड़ा वर्ग मौजूद है जो सवाल खड़ा कर सकता है ।

अफगानिस्तान से अमेरिकन फौज के वापस होने पर जो हुआ उससे पूरे विश्व बिरादरी में अमेरिका की जगहंसाई हुई थी इस मामले में जब बात हुई तो अमेरिकन नागरिक की सोच पूरी तौर पर स्पष्ट था दुनिया में लोकतंत्र रहे इसका ठेका अमेरिका का ही थोड़े ही है। अफगान में अमेरिका लोकतंत्र बहाल हो इसके लिए क्या क्या नहीं किया पूरी व्यवस्था खड़ा किया लेकिन आप वही शरियत के चक्कर में रहेंगे तो फिर अमेरिका क्या कर सकता है ।

अफगानिस्तान के पास इतनी बड़ी फौज और साजो सामान छोड़ कर अमेरिका आया और एक मामूली सा लड़ाका के सामने पूरी अफगानिस्तानी सेना आत्मसमर्पण कर दिया अब अमेरिका आपकी लड़ाई लड़ने नहीं जा रही है आपको खुद लड़ना होगा और अमेरिका आपको पीछे से सहयोग करेगा मुझे बादशाहत का तमगा नहीं चाहिए ।ये आज के अमेरिकन यूथ का सोच है ।

यूक्रेन को लेकर भी अमेरिकन का यही सोच है उन्हें अपने देश के लिए खड़ा होना होगा फिर पूरा अमेरिकन उसके साथ खड़ा रहेगा ।अमेरिकन के इस बदले हुए सोच का असर दिख रहा है लाख आलोचना हुई लेकिन अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए यूक्रेन के साथ खड़ा नहीं हुआ आज पूरी दुनिया से यूक्रेन को आम लोग पैसा भेज रहा है यूक्रेन ने अपने देश की रक्षा के लिए जो जज्बा दिखाया है उसी का असर है कि आज रुस परमाणु युद्ध का धमकी दे रहा है।

पूरे दुनिया के लोग यूक्रेन के साथ खड़ा है और उसके राष्ट्रभक्ति को सम्मान कर रहा है । इसलिए कहा जाता है ना दिमाग के साथ दिल जुड़ जाये तो सामने वाला कितना भी बलशाली क्यों ना हो हराना बहुत मुश्किल हो जाता है ।
उम्मीद है यूक्रेन के सहारे ही सही एक विश्व में एक नयी उम्मीद की किरण जगी है जिसका प्रभाव पूरी दुनिया पर दिखेगा और पिछले कुछ वर्षो से जो दुनिया के स्तर पर धुंध छा गया था वो अब हटेगा ये साफ दिखने लगा है ।

पटना हाईकोर्ट में गाय घाट महिला रिमांड होम मामले की सुनवाई हुई

पटना हाईकोर्ट में गाय घाट महिला रिमांड होम मामले की सुनवाई हुई। इसमें पीड़िता की वकील ने पीड़िता का नाम सार्वजनिक करने का विरोध किया। वकील मीनू कुमारी ने बताया कि उन्होंने पीड़िता का नाम सार्वजनिक करने की शिकायत की।

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उन्होंने कहा कि नाम को सार्वजनिक करने से उनकी निजी जिंदगी प्रभावित हो सकती है। बाध्य किया जाए कि कोई उनका नाम न लें। वहीं अब इस मामले की फिजिकल सुनवाई होगी। इसकी अगली सुनवाई 28 फरवरी को होगी।

शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट में आज फिर शराबबंदी कानून को लेकर सुनवाई हुई है इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में शराबबंदी कानून लागू किये जाने के बाद बढ़ते हुए मुकदमों की संख्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया है।

अदालत ने बिहार सरकार से इस मामले में सवाल भी किया और पूछा कि क्या इस कानून को लागू करने के पहले अदालती ढांचा के बारे में विचार किया गया था या नहीं।

न्यायालय में जमानत याचिका की जो स्थिति है उसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की.
आरोपित सुधीर कुमार यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस किशन कौल ने सुनवाई के दौरान अदालत में कहा कि बिहार की निचली अदालतों में शराबबंदी कानून से जुड़े मुकदमे काफी अधिक है अधिकांश जज इसी सुनवाई में लगे हैं वही पटना हाईकोर्ट के 26 में 16 जज शराब से जुड़े मामलों को देखने में ही व्यस्त हैं।

आरोपितों को जमानत नहीं दी गयी तो जेलों में कैदियों की संख्या बढ़ती जाएगी. अदालत ने सवाल किये कि क्या बिहार में मद्य निषेध और उत्पाद कानून लागू करते समय सरकार ने इसपर अध्ययन किया था? क्या यह देखा गया था कि इसके लिए न्यायिक ढांचा तैयार है या नहीं?र एम एम सुंदरेश की बेंच में हुई

बेंच ने कहा कि बिहार से इस तरह के कई मामले लगातार सर्वोच्च न्यायालय आ रहे हैं. इसका एक बड़ा कारण पटना हाईकोर्ट में जजों के ऊपर मुकदमों के बढ़े लोड को समझा गया।

अदालत ने सरकार से यह सवाल किया कि इतना बड़ा फैसला लेते समय अदालती ढांचे का ख्याल रखा गया था या नहीं? इस कानून में बिहार सरकार प्ली बारगेनिंग प्रावधान जोड़ेगी या नहीं, इसके बारे में भी पूछा गया. बता दें कि अगर किसी अपराध का आरोपित केस की सुनवाई के दौरान जज के सामने अपने ऊपर लगे आरोप को स्वीकार कर लेता है तो कोर्ट सजा में कुछ नरमी बरत देती है. अब इस मामले की सुनवाई 8 मार्च को होगी. बिहार सरकार को सभी बिंदुओं पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

रूस यूक्रेन युद्ध के बीच तस्वीर कह रहा है उम्मीद अभी बाकी है

इश्क और जंग में सब जायज़ है यह विचार अहंकार और दंभ को प्रदर्श करता है जबकि मानव मूल्य की परीक्षा इसी दो जंग में होती है ।

इसलिए जब कभी भी इश्क और जंग की चर्चा होती है तो ऐसे नायक की लोग तलाश करते हैं जिसने इश्क और जंग में मूल्य के लिए अपना सब कुछ गवा दिया है । ऐसे सेनापति और राष्ट्रअध्यक्ष को आज भी लोग स्वीकार नहीं करते जिसने युद्ध में युद्ध नीति का पालन नहीं किया है उसी तरह प्यार पाने वालों में भी चर्चा लैला-मजनू, रोमियो-जूलियट और शीरीं-फरहाद की ही होती है जिसने प्यार के लिए कुर्वान हो गयी। आज यूक्रेन में जो कुछ भी हो रहा है भले ही पुतुन यह युद्ध जीत ले लेकिन रुस एक ऐसा युद्ध हारने जा रहा है जिसे कभी मानव सभ्यता माफ नहीं करेगा यूक्रेन में बिहार के बहुत सारे बच्चे मेडिकल की पढ़ाई करते हैं उनमें से कई से हमारी पहले से बातचीत होती रही है और युद्ध शुरु होने के बाद तो लगातार संपर्क में है। इस स्थिति में भी कॉलेज प्रबंधक और कॉलेज के शिक्षक बच्चों को कोई परेशानी ना हो इसके लिए अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया है।

बच्चे सुरक्षित निकले इसके लिए शिक्षक बच्चों को गाड़ी खुद चला कर बॉर्डर वाले इलाके में पहुंचा रहे हैं ।बिहार के बच्चों से जब भी बात होती है तो यह जरुर कहता है कि यूक्रेनवासी जैसा ईमानदार ,जिंदादिल और खुशमिजजा लोग कहीं नहीं मिलेगा

अभी जो यूक्रेन का राष्ट्रपति है जिसके जान के पीछे पुतुन पड़ा है वह व्यक्ति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की पटकथा लेखक और हास्य अभिनेता रहा है ,इनकी लिखी पटकथा हमेशा मानव मूल्य के साथ खड़ा दिखता है हास्य अभिनेता के रूप में इन्होंने जितनी फिल्मों और टीवी शो में काम किया है हंसते हंसते कुछ ना कुछ ऐसा संदेश देने कि कोशिश करते दिखते हैं जो मानव मूल्य को बनाये रखने के लिए समर्पित रहता है ।

अभी थोड़ी देर पहले यूक्रेन के इस 44 वर्षीय राष्ट्रपति का एक संदेश आया है जंग में सबने अकेला छोड़ दिया, जिन्होंने जान गंवाई वे यूक्रेन के हीरो से कम नहीं हैं।’ उन्होंने नागरिक ठिकानों पर रूसी हमलों की निंदा की। यूक्रेन में अब तक 137 सैनिकों व नागरिकों की मौत की खबर है। बमबारी में 316 लोग घायल हुए हैं।

अमेरिका सहित पूरी दुनिया जिस तरीके से यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद खेल खेल रहा है आने वाले समय में जिस दौर से दुनिया गुजर रही है वो दिन दूर नहीं है जब हर बड़ा देश छोटे देश को निगलना शुरु कर देगा। आज जो खामोश है या फिर जो युद्ध से डर रहे हैं या फिर जो तटस्थ है समय उनका भी अपराध लिखेगा।

भारत में यूक्रेन के राजदूत डॉक्टर आइगोर पोलिखा ने कहा कि अपने देश में रूस की सैन्य कार्रवाई को लेकर भारत के रुख़ से मैं ”काफ़ी असंतुष्ट हूं”.उन्होंने कहा है “हम इस मौक़े पर ये अपेक्षा कर रहे हैं कि पीएम मोदी किसी तरह पुतिन पर प्रभाव डालने की कोशिश करें. इसके साथ ही पीएम मोदी अगर यूक्रेन के समर्थन में कोई बयान देते हैं या कारगर ढंग से मदद करते हैं तो यूक्रेन इसके लिए शुक्रगुजार रहेगा।

लेकिन जो बात हुई है उससे ऐसा कुछ भी संदेश नहीं जा रहा है।उन्होंने आगे कहा, ”हम अपने सभी मित्र देशों से मदद मांग रहे हैं ताकि इस युद्ध को रोका जा सके. यूक्रेन एक शांतिप्रिय देश है. वो लड़ने के लिए तैयार है लेकिन शांति सबसे अच्छा समाधान है. हम अपने सभी साझेदारों से कह रहे हैं कि वे किसी तरह हमारी मदद करें।

वैसे रूस की जनता ने जिस तरीके से इस युद्ध के खिलाफ पुतिन के धमकी के बावजूद सड़क पर आकर विरोध किया है बहुत कुछ संदेश दे रहा है ,वही इस युद्ध को लेकर भारत की वामपंथी पार्टियां चुप्पी साधे हुए हैं और रूस के इस प्रवृत्ति को साम्राज्यवाद कहने से कन्नी काट रहा है इनका भी इतिहास लिखेगा ।

यह युद्ध भेल ही रूस और यूक्रेन के बीच हो रहा है लेकिन इसका असर दूसरे विश्व युद्ध से भी बड़ा पड़ेगा क्यों कि यूक्रेन का शासक सद्दाम हुसैन नहीं है बगदादी नहीं है यह हमला मानव सभ्यता पर हमला है और उस पर चुप्पी मानवता के लिए चुनौती ।
ऐसे में इस समय पूरी दुनिया जिस घने अंधेरे के दौर से गुजर रहा है उस अंधेरे को चीर कर कही ना कही से रोशनी जरुर निकलेगी ।
फिलहाल हमारे देश के जो बच्चे यूक्रेन में फंसे हैं उनको कैसे बाहर लाया जाए साथ ही यूक्रेन के शांति प्रेमी जनता इस संकट से कैसे बाहर निकले इस पर कुछ करने कि जरूरत है ।
वैसे युद्ध के दौरान ये दो तस्वीर काफी है कि उम्मीद अभी बाकी है ।
1–पहली तस्वीर रूस की है जहाँ युद्ध के खिलाफ लोग सड़क पर विरोध कर रहे हैं।
2–दूसरी तस्वीर यूक्रेन के मेट्रो स्टेशन का है जहाँ प्रेम युगल एक दूसरे को फिर मिलेगे इसका भरोसा जता रहे हैं ।

जातिवाद ,सामंतवाद और सम्प्रदायवादी राजनीति से देश को नुकसान हो रहा हैं

ये बात 2001 या 2002 की है मैं उस समय रोसड़ा से हिन्दुस्तान अखबार के लिए काम करता था सुबह सुबह दीदी(मां) की तेज आवाज सुनाई दी टुनटुन टुनटुन उठो उठो जैसे ही नींद खुली रोने की आवाज सुनाई दी तेजी से उठते हुए बाहर निकले देखते है पांच छह महिला बैठी रो रही है पता चला रात में मनटुन भिरहा से लौट रहा था उसी दौरान जीप से गिर गया और वही मर गया थाना बात हुई तो पता चला कि पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई है।

मनटुनवा का दादा मेरे यहां उस जमाने में टमटम चलाता था उसके पिता मेरा जीप चलाता था इसलिए रिश्ता खानदानी था लेकिन पूरा परिवार बहुत बड़ा पियक्कड़ था ये छोरा भी खुब पीता था फिर भिरहा ने जिस व्यक्ति का गांड़ा चलाता था वो भी बड़ा पियक्कड़ था पता चला रात में वहीं सब मिलकर पिया और फिर मनटुनवा पी कर रोसड़ा के लिए निकल गया भिरहा रोसड़ा रोड़ पर आया और किसी सवारी गाड़ी पर चढ़ा और आगे आने पर गिर गया और सिर फटने से वहीं मौत हो गयी उसी समय वीडियो और एसडीओ से भी बात हुई प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि पैसा की व्यवस्था कर देते है सब चली गयी ।

कल होगे मनटुनवा के पूरे परिवार के साथ राजद का दो तीन नेता सुबह सुबह फिर पहुंच गया वो नेता मुझको कह रहा है कि सर मामला दुर्घटना का नहीं है मनटुन का पांच छह माह का वेतन भिरहा वाला जमीनदार नहीं दे रहा था वहीं लेने गया था उसी में बहस हुई और फिर मार करके रोड़ पर फेंक दिया है ताकी मामला दुर्घटना को बन जाये कुछ कीजिए दलित के साथ बहुत जुल्म हुआ है। मुझे गुस्सा आ गया मैंने कहा मैं खुद घटना स्थल पर गया था लोगों से बात हुई है चाय वाली बता रही थी कैसे घटना घटी है फिर ये सब बात क्यों कर रहे हैं।

उसमें से दूसरा व्यक्ति कहता है संतोष बाबू आप से कुछ छुप थोड़े सकता है इस तरह से खबर चला दीजिए गरीब को फायदा हो जाएगा इसका पूरा परिवार आपके दादा के समय से ही सेवक रहा है और भिरहा वाला जुल्मी जमींदार है आप जानते ही और आपका परिवार सामाजिक न्याय के लिए हमेशा खड़ा रहता है मैंने साफ मना कर दिया कि इस तरह से खबर नहीं चला सकते हैं वैसे चलिए भिरहा उनसे बात करते हैं मनटुन का काम करता था गरीब है मर गया है छोटा छोटा बच्चा है मदद करिए।तय हुआ कल चलते हैं लेकिन वो लोग फिर नहीं और उसके दो दिन बाद पटना से हिन्दुस्तान अखबार के मुख्य पृष्ठ पर खबर छपी बकाया मांगने गया दलित को पीट पीट कर मारा सामंतों ने फिर क्या था नेताओं का ताता लग गया और फिर मनटुनवा की पत्नी के बयान पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया और भिरहा वाले को जेल जाना पड़ा ।

यह स्टोरी इसलिए याद आ गयी कि पिछले 48 घंटे के दौरान बिहार में इसी तरह की दो स्टोरी को चलाया जा रहा है और मेरे पास इतना साक्ष्य जरुर है कि इसके पीछे सांप्रदायिक मानसिकता वाले लोग खड़े है ताकी देश स्तर पर तनाव खड़े हो सके और यूपी चुनाव प्रभावित हो ।

पहली स्टोरी मेरे गृह जिला समस्तीपुर से जुड़ा है जहां एक जदयू कार्यकर्ता का वीडियो वायरल हुआ है जिसकी हत्या हो चुकी है वीडियो में दिख यह रहा है कि कुछ लोग उस व्यक्ति को पीट रहा है और पुछ रहा है कि गाय का माँस खाया है कि नहीं तुम्हारे यहां गाय कौन कौन मारता है जबकि जिस युवक की हत्या हुई है उस पर आरोप है कि वो नौकरी दिलाने के नाम पर कुछ छात्रों का पैसा ठगी कर लिया उसी आक्रोश में लड़को ने इसे घर से बुलाकर उठा लिया और फिर उसी के मोबाईल से उसकी पत्नी को फोन किया कि इसके खाते में मेरा पैसा डाल दो नहीं तो मार देगे गाय और गौ हत्या से कही दूर दूर तक इसका कोई भी वास्ता नहीं है

लेकिन वीडियो वायरल किया गया फिर जब पुलिस पकड़ कर लायी तो एसपी कह रहा है नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के कारण उसकी हत्या हुई है लेकिन उसी एसपी के चैंबर के बाहर उसका बाईट मीडिया वाले को दिलवाया जाता है जिसमें लड़का कहता है गौ हत्या के कारण इसका हत्या कर दिया है हत्यारा और जिसकी हत्या हुई दोनों आसपास के गांव का ही रहने वाला है दोनों गांव के लोगों को सच्चाई पता है लेकिन ऐजेंडा तय करने वाले यहां भी खेल करके चल दिया ताकी देश स्तर पर माहौल बिगड़ सके। वीडियो देख कर कोई सपने में भी नहीं सोच सकता है कि इसके पीछे इतनी बड़ी साजिश हो सकती है हालांकि इस वीडियो के सहारे माहौल बिगाड़ने की कोशिश अभी भी जारी है।

दूसरी खबर रोहतास से है जहां एक चैनल बड़ी प्रमुखता से खबर चला रहा है कि कैथी गांव के लोग मुसलमानों के डर से गांव छोड़ के जा रहे हैं चैनल का हेडलाइन था कैथी को केरोने बनाने की साजिश कल पूरे दिन इस खबर को लेकर हंगामा खड़ा रहा टीवी डिबेट तक हुए लेकिन शाम ढ़लते ढ़लते इसकी भी हवा निकल गयी क्यों कि इस खबर को भी प्लांट करने के पीछे बड़े स्तर पर साजिश रची गयी लेकिन गांव के ही लोग उस साजिश का साथ नहीं दिया वैसे भी यह गांव जिस पंचायत में पड़ता है उसका मुखिया हिन्दू है उस प्रखंड का प्रमुख हिन्दू है उस गांव में 1100 वोटर है जिसमें 600 सौ मुसलमान और 500 हिन्दू वोटर है उस गांव के चारो और हिन्दू है फिर भी खबर को प्लांट किया गया ताकी माहौल बनाया जा सके ।

यह खेल उसी तरीके से चल रहा है जैसे जातिवादी राजनीति करने वाले लोग मामला कुछ भी हो जाति का रंग देने की कोशिश लगे रहते है उसी तरह वामपंथी आज भी कोई घटना घटती है तो उस घटना को सामंतवाद के चश्मे से ही देखना शुरू करता है ताकि उसकी सियासत का बगीचा हरा भरा रहे।

हालांकि जातिवाद,सामतंवाद और सम्प्रदायवादके सहारे जो राजनीति चल रही है उससे हमेशा देश का नुकसान ही हुआ है ऐसे में मीडिया और समाज को इस खेल को समझने की जरूरत है ।

राष्ट्रपति पद को लेकर नीतीश के नाम की चर्चा समझ से पड़े: शिवानन्द तिवारी

राष्ट्रपति पद के लिए नीतीश कुमार के नाम की चर्चा पता नहीं कहाँ से शुरू हुई. भारतीय जनता पार्टी अगर उनको राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाना चाहती हो तो इसमें विपक्ष को क्या एतराज़ हो सकता है !

जहाँ तक विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में उनको पेश करने की बात होती है तो वह मुझे असंभव दिखाई देता है. क्योंकि उस हालत में तो नीतीश कुमार को भारतीय जनता पार्टी से अलग होना होगा. क्या यह मुमकिन है ? यहां याद करें कि नीतीश कुमार की नरेन्द्र मोदी के प्रति क्या धारणा थी और क्या संकल्प लेकर ये उनसे अलग हुए थे ?

आज उन्हीं नरेंद्र मोदी द्वारा सच्चे समाजवादी होने के प्रमाण पत्र को जो व्यक्ति अपने ऊपर उनकी कृपा मानता हो वह भाजपा से अलग हो सकता है ?कोई इसकी कल्पना भी कैसे कर सकता है! इसके अलावा यह भी देखने की बात है कि राष्ट्रपति सेना के तीनों अंगों का सर्वोच्च कमाण्डर होता है.

यह भी विचारणीय है कि सेना का सर्वोच्च कमांडर क्या ऐसा होना चाहिए जो अपने सार्वजनिक जीवन में हर चुनौती के सामने घुटने टेकता आया है ! जो अपने संकल्पों पर टिकता नहीं हो ! ऐसा व्यक्ति संकट के समय हमारी सेना को अनुप्राणित कैसे कर सकता है ! लेखक–शिवानन्द

नीतीश हारी हुई बाजी को पलटने के माहिर खेलाड़ी रहे हैं

नीतीश हारी हुई बाजी को पलटने के माहिर खेलाड़ी रहे हैं।
बिहार विधानसभा भवन के शताब्दी समारोह के दौरान नीतीश कुमार का बर्डी लेंगुएज (Bird Language)
देख कर हमलोग हैरान थे पहली बार नीतीश कुमार ऐसे बैठे थे मानो इस कार्यक्रम से उनका कोई वास्ता ही ना हो। नीतीश कुमार के चेहरे का वह तेज नहीं दिख रहा था जो उनकी पहचान रही है ।

नीतीश जब भी मंच रहते हैं हमेशा टाइट बैठते हैं लेकिन उस दिन एकदन ढ़ीला ढ़ीला कुर्सी पर पसर कर बैठे हुए थे अमूमन कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार मंच से उतरते नहीं हैं लेकिन उस दिन दो दो बार मंच से उतर कर बाथरुम गये ऐसा लग रहा था जैसे वो कोरम पूरा करने के लिए मंच पर आ गये हैं।

नीतीश कुमार के बर्डी लेंगुएज को लेकर हमलोग हैरान थे मेरे साथ ही बिहार के एक सीनियर पत्रकार बैठे थे वो भी नीतीश के बर्डी लेंगुएज देख कर हैरान थे ,संतोष देख रहे हो नीतीश अब बूढ़ा लगने लगा है, वो तेज खत्म हो गया बात चल ही रही थी कि नीतीश भाषण के लिए डेस पर पहुंच गये पहली बार भाषण में भी वो प्रभाव नहीं दिख रहा था ।

ये बात हो रही थी कि हद तो तब हो गयी जब बिहार विधानसभा से जुड़े पूर्व के कार्यक्रम की चर्चा करते हुए अरुण जेटली का नाम ही वो भूल गये पहले वो अरुण कुमार बोले फिर अरुण पटेल बोले फिर बोले नहीं नहीं हम बात कर रहे हैं अरुण जेटली जी का । हमलोग आपस में बात करने लगे लगता है जार्ज और वाजपेयी जी की तरह ये भी अलजाइमर के शिकार तो नहीं हो रहे हैं।

बात आयी चली गयी लेकिन कल एक खबर दिल्ली से ब्रेक हुई नीतीश कुमार राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के प्रत्याशी हो सकते हैं बीजेपी से उनका रिश्ता लगातार बिगड़ रहा है और वो कभी भी बीजेपी का साथ छोड़ सकते हैं ।

खबर इंडियन एक्सप्रेस के gossip column में छपी थी और वही से इस खबर को एवीपी न्यूज उठाया है, समझ में नहीं आ रहा था कि इस खबर का इस समय क्या महत्व है 10 मार्च तक का इन्तजार किया जा सकता था क्यों कि विपक्ष का राष्ट्रपति तभी बन सकता है जब यूपी ने बीजेपी की सरकार नहीं बनेगी।

वैसे राजनीति में gossip में भी कही गयी बात के पीछे कुछ ना कुछ संदेश जरुर छुपा रहता है इसी संदेश तक पहुंचने के लिए पटना , लखनऊ से दिल्ली तक राजनीति की समझ रखने वाले लोगों से मैं लगातार बात कर रहा हूं ।

दिल्ली में अधिकांश पत्रकारोंं का मानना है कि इंडियन एक्सप्रेस gossip column की writer Coomi Kapoor है जो बीजेपी का प्रवक्ता मानी जाती है यह खबर कहीं ना कहीं बीजेपी के द्वारा ही प्लांट करवाया गया है।

लम्बी बहस हुई इस खबर से बीजेपी को क्या फायदा है चुनाव बिहार में तो है नहीं विचार विर्मश के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि मसला यूपी चुनाव है क्यों कि फेज 4 से लेकर फेज 7 वाले इलाके में जहां अब चुनाव होने वाला है उस इलाके में कुर्मी का वोट अच्छा खासा है और यूपी में पिछड़ी जाति की बात करे तो कुर्मी ही है जो अभी बीजेपी के साथ खड़ी दिख रही है ।फिर सवाल हुआ नीतीश को लेकर यूपी का कुर्मी क्यों प्रभावित होगा मैंने कहना जैसे वीपी सिंह के समय बिहार में पहली बार कांग्रेस राजपूत को मुख्यमंत्री बनाया लेकिन 1989 के लोकसभा चुनाव में राजपूत कांग्रेस को वोट नहीं किया।

राष्ट्रपति पद पर कोई कुर्मी बैठ सकता है यह कुर्मी के स्वाभिमान से जुड़ा है मसला है और यूपी में जिसकी सरकार बनेगी वो राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करेगा यह सर्वविदित है। ऐसे में यह कार्ड एक रणनीति के तहत खेला गया है ऐसा लग रहा है क्यों कि यूपी का चुनाव बीजेपी के लिए आसान नहीं है यह साफ दिखने लगा है ऐसे में कुर्मी भी साथ छोड़ दिया तो बीजेपी का हाल बहुत बूरा हो सकता है ।

बिहार न्यूज़ पोस्ट के खबर का हुआ असर, अय्याश थानेदार पर गिरी गाज

बिहार न्यूज़ के खबर का हुआ बड़ा असर

सहरसा — शराबी थानेदार को एसपी ने किया निलंबित बकौल एसपी की माने तो वीडियो और फोटो जांच में सही पाया गया है फिलहाल थानेदार को निलंबित कर दिया गया है। और डीएसपी को जांच का जिम्मा दिया गया है जांच में अन्य तथ्य भी सही पाये गये तो और कठोर कार्रवाई की जायेगी ।

अय्याश थानेदार पर गिरी गाज

बेगूसराय – दूसरी खबर हिजाब खुलवाने के मामले में कल देर शाम जोनल मैनेजर रमेश दुबे ग्राहक के घर पहुंच कर माफी मांगें हैं और केशियर पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है ।

ग्राहक के घर पहुंच कर मांगें माफी

शराबबंदी कानून को लेकर नीतीश कुमार को थानेदारी ने दी चुनौती

सात समुन्दर पार मैं तेरे पीछे पीछे आ गयी मैं तेरे पीछे पीछे आ गयी , हाथ में जाम और बाहों में हसीना के साथ कोलकत्ता के सोना गांछी में थिरक रहा ये नौजवान किसी नेता का पुत्र नहीं है, किसी बड़े व्यापारी का बेटा भी नहीं है, ये हैं कानून के रखवाले बिहार के सहरसा जिले के सदर थाना का थाना अध्यक्ष जयशंकर प्रसाद का। जिनका यह वीडियो सोमवार की दोपहर में सहरसा से पटना के लिए चला लेकिन इसका रसुख यह है कि पटना में जहां पहुंचा वहां थानेदार का सिक्का पहुंच गया कई जगह खबर लगी भी लेकिन कुछ देर में उतरभी गयी

देर शाम यह वीडियो मेरे पास भी आया भेजने वाले का यही कहना था अब सब कुछ आपके ही हवाले है। कोई चलाने को तैयार नहीं है लगता है थानेदार को बचाने में कोई ना कोई बड़ी ताकत खड़ा है।

हसीनों के बाहो में जाम छलकाता थानेदार

खैर जितनी भी बड़ी ताकत क्यों ना हो लेकिन जिस जिले की यह घटना है वहां की एसपी लेडी सिंघम है और डीआईजी सुपर कॉप शिवदीप लांडे हैं इन दोनों के रहते वीडियो के वायरल होने के 24 घंटे बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है तो मामला गंभीर जरुर है वो भी मामला सीधे सीधे शराब से जुड़ा है ।फिर पड़ताल शुरु हुआ और इस दौरान कोसी और सीमाचंल में क्या हो रहा है इसको लेकर बहुत कुछ समझने को मिला।

थानेदार जयशंकर प्रसाद को लेकर जो खबरें आ रही है वो बेहद चौकाने वाला है 2009 बैच का यह दरोगा है इसके पहले यह पूर्णिया जिला में था जहां भूमाफिया के साथ साठगांठ का गंभीर आरोप लगा था उसके इसी चरित्र की वजह से एसएसपी और डीआईजी ने कार्रवाई भी किया था लेकिन वहां से वह बच निकला।

इस दरोगा के सिर पर किसी ना किसी का हाथ तो जरुर है दागी होने के बावजूद इसको सहरसा में सदर थाना का थाना अध्यक्ष बना दिया गया जबकि यह थाना पुलिस मुख्यालय स्तर पर इंस्पेक्टर रैक के अधिकारी के लिए नोटिफाइड है।फिर भी ये सिर्फ प्रशासनिक मसला है ,बड़ा मसला यह है कि जिस शराबबंदी को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार किसी स्तर पर समझौते को तैयार नहीं है ऐसे में एक थानेदार का यह चरित्र बहुत कुछ कहता है आखिर थाने स्तर पर हो क्या रहा है इस वीडियो के सहारे समझा जा सकता है।

वैसे कोसी और सीमाचंल में तैनात बहुत सारे पदाधिकारियों का यही हाल है मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बावजूद इनका वीकेंड नेपाल या फिर कोलकत्ता में गुजरता है।

साइबर क्राइम को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, एफआईआर दर्ज नहीं करना कोर्ट का अवमानना माना जायेगा

पटना हाई कोर्ट ने साइबर क्राइम से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए साफ किया कि यदि थाना इन चार्ज इन मामलों में एफआईआर नहीं करेंगे,तो उनके विरूद्ध कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई होगी। जस्टिस संदीप कुमार ने याचिकाकर्ता शिव कुमार व अन्य के मामलों पर सुनवाई की।

कोर्ट ने 23 जुलाई, 2021 से 24 अगस्त, 2021 के बीच पंजाब नेशनल बैंक के बेउर स्थित अनीसाबाद ब्रांच से जुड़े मामले में किये गए साइबर क्राइम के संबंध में पुलिस अधीक्षक (पश्चिम) को अनुसंधान के संबंध में प्रगति रिपोर्ट दायर करने का आदेश दिया है। राज्य सरकार के अधिवक्ता अजय को इस संबंध में सूचना पुलिस अधीक्षक देने को कहा गया है।

रूपसपुर थाना अंतर्गत एक अधिवक्ता के एकाउंट से पैसे के कथित रूप से बेईमानी से निकाले जाने के मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं किये जाने के मामले में रूपसपुर थाना के ऑफिसर इंचार्ज को नोटिस जारी किया गया है। रूपसपुर थाना इंचार्ज से पूछा गया है कि पूर्व में ही रिपोर्ट किये जाने के बावजूद आखिर क्यों नहीं प्राथमिकी दर्ज की गई।

कोर्ट ने भारत सरकार के टेलिकॉम विभाग को भी सचिव के जरिये एक पार्टी बनाने का आदेश दिया है। अधिवक्ता राजेश रंजन ने एयर टेल व वोडाफ़ोन का पक्ष रखा।

अधिवक्ता रत्नाकर पांडेय रिलायंस जियो की ओर से उपस्थित हुए। टेलीकॉम कंपनियों के अधिवक्ताओं द्वारा बताया गया की फर्जी कागजात के आधार पर सिम कार्ड लेने वालों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करवाई जा रही है।

टेलीकॉम कंपनियों द्वारा यह भी बताया गया कि कुछ थानों में प्राथमिकी दर्ज करवाने में कठिनाई भी हो रही है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि वैसे ऑफिसर इंचार्ज जो प्राथमिकी दर्ज नहीं करंगे, उनके विरुद्ध कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

कोर्ट ने कहा है कि टेलीकॉम कंपनियों के अधिवक्ता ऐसे पुलिस स्टेशन और उनके ऑफिसर इंचार्ज का ब्योरा देने के लिए स्वतंत्र हैं, जो केस दर्ज नहीं करते हैं।

साथ ही कोर्ट ने जब टेलिकॉम कंपनियों से यह जानना चाहा कि प्राथमिकी दर्ज करने के संबंध में टेलिकम्युनिकेशन विभाग के आदेश का पालन पूरे देश में किया जा रहा है या नहीं। इस मामले में जवाब मिला कि इसको लेकर निर्देश लेना होगा।

पिछली सुनवाई में टेलिकॉम कंपनियों द्वारा बताया गया था कि वे लोग प्री एक्टिवेटेड सिम को बेचना बंद कर दिए। लेकिन कोर्ट को एमिकस क्यूरी ने इलाहाबाद में दर्ज की गई प्राथमिकी का हवाला देते हुए बताया कि इस मामले में तकरीबन 5 सौ प्री एक्टिवेटेड सिम की बरामदगी की गई थी।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 11 मार्च,2022 को की जाएगी।

डोरंडा ट्रैजरी से 139 करोड़ रु. की अवैध निकासी से जुड़े 5 वे केस में लालू को 5 वर्ष की मिली सजा

रांची चारा घोटाले के सबसे बड़े मामले (डोरंडा कोषागार से 139.35 करोड़ रुपए की अवैध निकासी) में बिहार के पूर्व CM और RJD सुप्रीमो लालू यादव को आज 5 साल की सजा सुनाई गई है साथ ही उन्हें 60 लाख का जुर्माना भी भरना होगा।

रांची में CBI के विशेष जज एसके शशि ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सजा का ऐलान किया। फिलहाल लालू रिम्स के पेइंग वार्ड में भर्ती हैं।

लालू समेत 78 लोगों को दोषी ठहराया था जिसमें तीन वर्ष की भी सजा दी गयी थी वही लालू समेत 38 दोषियों को इस केस में कोर्ट ने 15 फरवरी को दोषी करार देने के बाद सजा कि तिथि आज मुकरर किया था ।

लालू प्रसाद को सजा मिलने पर क्या कह रहे हैं उपमुख्यमंत्री तारकेश्वर प्रसाद

अधिवक्ता का कहना है कि सजा की आधी अवधि पूरी हो गई है इसलिए लालू को हाईकोर्ट से जमानत मिलने की उम्मीद है।
कैसे अंजाम दिया गया था डोरंडा ट्रेजरी घोटाला

लालू प्रसाद के सजा मिलने पर नीतीश कुमार ने कहा सजा दिलाने वाले तो आज उनके साथ ही है

डोरंडा ट्रेजरी से 139.35 करोड़ रुपए की अवैध निकासी के इस मामले में पशुओं को फर्जी रूप से स्कूटर पर ढोने की कहानी है। यह उस वक्त का देश का पहला मामला माना गया जब बाइक और स्कूटर पर पशुओं को ढोया गया हो। यह पूरा मामला 1990-92 के बीच का है।

लालू प्रसाद के सजा मिलने पर उपमुख्यमंत्री रेणू देवी बोली जैसी करनी वैसी भरनी

CBI ने जांच में पाया कि अफसरों और नेताओं ने मिलकर फर्जीवाड़े का अनोखा फॉमूर्ला तैयार किया। 400 सांड़ को हरियाणा और दिल्ली से कथित तौर पर स्कूटर और मोटरसाइकिल पर रांची तक ढोया गया, ताकि बिहार में अच्छी नस्ल की गाय और भैंसें पैदा की जा सकें।

लालू प्रसाद के सजा मिलने पर क्या कह रहे हैं लालू प्रसाद के वकील

पशुपालन विभाग ने 1990-92 के दौरान 2,35, 250 रुपए में 50 सांड़, 14, 04,825 रुपए में 163 सांड़ और 65 बछिया खरीदीं।

उत्पाद कोर्ट के सहारे हाईकोर्ट ने सरकार की खिंचाई

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में उत्पाद कोर्ट के आधारभूत संरचना के सम्बन्ध में राज्य सरकार को हलफनामा दायर कर अगली सुनवाई में विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया।जस्टिस राजन गुप्ता और जस्टिस मोहित कुमार शाह की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए कहा कि इन कोर्ट के गठन में विलम्ब क्यों हो रहा हैं।

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कोर्ट को बताया कि सभी 74 उत्पाद कोर्ट के लिए जजों की बहाली हो चुकी हैं।साथ ही 666 सहायक कर्मचारियों की बहाली के लिए स्वीकृति दे दी गई हैं।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार इन उत्पाद कोर्ट के सही ढंग से के लिए आधारभूत ढांचे के विकास के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है।


कोर्ट ने राज्य सरकार से जानना चाहा कि सीबीआई, श्रम न्यायलयों व अन्य कोर्ट के लिए अलग अलग भवन की व्यवस्था है,तो उत्पाद कोर्ट के लिए अलग भवन की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है।


एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कोर्ट के द्वारा उठाए गए इन मुद्दों पर जवाब देने के लिए कुछ समय की माँग की।कोर्ट ने अनुरोध को मानते हुए अगली सुनवाई की तिथि 28 फरवरी,2022 तय की है।

संघ सविधान के अनुसार नहीं मनुस्मृति के अनुसार देश चलाना चाहता है

किसी भी देश के लिए 75 वर्ष का समय शैशवा काल (babyhood) ही कहां जाता है और भारतीय लोकतंत्र फिलहाल इसी दौर से गुजर रहा है क्यों कि इससे पहले के भारत की बात करे तो शासक वर्ग धर्म,संस्कृति और समाजिक मान्यताओं से छेड़छाड़ करने से बचते रहते थे उन्हे लगान और सिंघासन से आगे कोई वास्ता नहीं था,धर्म ,संस्कृति और समाजिक मान्यताओं से बस इतना ही वास्ता था कि उन्हें शासन व्यवस्था चलाने में समस्या ना हो।

लेकिन आजादी के बाद शासन और सत्ता चलाने के लिए जिस संविधान का निर्माण किया गया वो धर्म ,संस्कृति और समाजिक मान्यताओं से जुड़ी उन तमाम बातों को अस्वीकार किया जो बदलाव में बाधक था,और 1950 से लेकर 2022 तक देश उसी संविधान के सहारे आगे बढ़ रहा है ।

लेकिन उस दौर में भी ऐसे लोग थे ऐसी राजनैतिक पार्टिया थी जो धर्म,संस्कृति और समाजिक मान्यताओं में बदलाव के पक्षधर नहीं थे औऱ इनका मानना था कि भारत की जो परम्परा रही है वो महान है उसमें बदलाव की बात सोचना भारत के आत्मा पर हमला है।

इस तरह के विचार रखने वालों में हिन्दू महासभा जो बाद में जनसंघ बना और इस समय भाजपा के नाम से जाना जाता है सन 1947 के संविधान सभा में जिन सवालों को लेकर हिन्दू महासभा राजनीति कर रही थी आज भी बीजेपी उन्ही सवालो के सहारे राजनीति कर रही है।

हिन्दू महासभा संविधानसभा के बैठक के दौरान सम्राट अशोक ,राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा,राष्ट्रगान ,कॉमन सिविल कोड,धारा 370 और हिंदू कोड बिल को लेकर जबरदस्त हंगामा किया था और कहां था कि संविधानसभा हिन्दू के मान्यताओं के खिलाफ निर्णय ले रही है और आज भी भाजपा इन्ही मुद्दों के सहारे राजनीति कर रही है।
ये अलग बात है कि कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों की तुष्टीकरण की राजनीति ने इन्हें सत्ता तक पहुंचा दिया लेकिन जिन बुनियादी सवाल को लेकर संघ संविधान में बदलाव चाहता है वो बदलाव भारत को उस दौर में लौटा सकता है जिससे बड़ी मुश्किल से बाहर निकला था।

1—संघ पुरुषों के बहु विवाह प्रथा और महिलाओं को नीच का दर्जा जारी रहे का पक्षधर था
जिस समय भारत आजाद हुआ उस समय हिंदू समाज में पुरुष और महिलाओं को तलाक का अधिकार नहीं था. पुरूषों को एक से ज्यादा शादी करने की आजादी थी लेकिन विधवाएं दोबारा शादी नहीं कर सकती थी. विधवाओं को संपत्ति से भी वंचित रखा गया था.
आजादी के बाद भारत का संविधान बनाने में जुटी संविधान सभा के सामने 11 अप्रैल 1947 को डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने हिंदू कोड बिल पेश किया था. इस बिल में बिना वसीयत किए मृत्यु को प्राप्त हो जाने वाले हिंदू पुरुषों और महिलाओंं की संपत्ति के बंटवारे के संबंध में कानूनों को संहिताबद्ध किए जाने का प्रस्ताव था.
यह विधेयक मृतक की विधवा, पुत्री और पुत्र को उसकी संपत्ति में बराबर का अधिकार देता था. इसके अतिरिक्त, पुत्रियों को उनके पिता की संपत्ति में अपने भाईयों से आधा हिस्सा प्राप्त होता साथ ही
इस विधेयक में विवाह संबंधी प्रावधानों में बदलाव किया गया था। यह दो प्रकार के विवाहों को मान्यता देता था-सांस्कारिक व सिविल. इसमें हिंदू पुरूषों द्वारा एक से अधिक महिलाओं से शादी करने पर प्रतिबंध और अलगाव संबंधी प्रावधान भी बनाये गये थे और इस बिल के पास होने पर हिंदू महिलाओं को तलाक का अधिकार मिल जाता ।

विवाह विच्छेद के लिए सात आधारों का प्रावधान था. परित्याग, धर्मांतरण, रखैल रखना या रखैल बनना, असाध्य मानसिक रोग, असाध्य व संक्रामक कुष्ठ रोग, संक्रामक यौन रोग व क्रूरता जैसे आधार पर कोई भी व्यक्ति तलाक ले सकता था.
लेकिन इस बिल का संघ और हिन्दूमहासभा और कुछ कांग्रेसी सदस्यों ने सड़क से लेकर संविधानसभा की बैठक तक में जबरदस्त विरोध किया इस वजह से आंबेडकर के तमाम तर्क और नेहरू का समर्थन भी बेअसर साबित हुआ और अंत में. इस बिल को 9 अप्रैल 1948 को सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया गया।

30 नवंबर 1949 को संविधान का अंतिम मसौदा डॉ. आंबेडकर ने संविधान सभा को सौंपा था। उस दिन आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गेनाइजर का संपादकीय संविधान पर ही केंद्रित था। इसमें लिखा गया-
‘भारत के नए संविधान की सबसे ख़राब बात यह है कि इसमें कुछ भी भारतीय नहीं है।… यह प्राचीन भारतीय सांविधानिक क़ानूनों, संस्थाओं शब्दावली और मुहावरों की कोई बात नहीं करता। प्राचीन भारत की अद्वितीय सांविधानिक विकास यात्रा के भी कोई निशान यहाँ नहीं हैं। स्पार्टा के लाइकर्जस या फारस के सोलन से भी काफ़ी पहले मनु का क़ानून लिखा जा चुका था। आज भी मनुस्मृति की दुनिया तारीफ़ करती है। भारतीय हिंदुओं के लिए तो वह सर्वमान्य व सहज स्वीकार्य है, मगर हमारे सांविधानिक पंडितों के लिए इस सब का कोई अर्थ नहीं है।’
वही नेहरु ने संविधान सभा की बैठक में कहा था, ‘इस कानून को हम इतनी अहमियत देते हैं कि हमारी सरकार बिना इसे पास कराए सत्ता में रह ही नहीं सकती।
हालांकि सविधानसभा में शामिल महिला सदस्यों ने इसको लेकर गहरी आपत्ति दर्ज की थी और सदन के बाहर भी संघ और हिन्दूमहासभा के इस आचरण को लेकर प्रगतिशील महिलाएं और पुरुषों ने खुल कर आलोचना किया था।

और फिर जैसे ही लोकसभा चुनाव के बाद नेहरु के नेतृत्व में सरकार बनी सदन के पहले ही सत्र में आंबेडकर ने हिंदू कोड बिल को संसद में पेश किया. इसको लेकर संसद के अंदर और बाहर एक बार फिर विद्रोह मच गया लेकिन उस समय की मीडिया और प्रगतिशील महिलाएं और पुरुष ने संघ और जनसंघ के विरोध का खुल कर प्रतिवाद किया तो जनसंघ इस मुद्दे को लेकर सदन में दूसरा रुख अख्तियार कर लिया

1951 में जनसंध से तीन सांसद चुन कर आये थे संसद में तीन दिनों तक बहस चली.हिंदू कोड बिल का विरोध करने वाले, जनसंघ के सांसदों ने पैतरा बदलते हुए कहा कि सिर्फ हिंदुओं के लिए कानून क्यों लाया जा रहा है, बहुविवाह की परंपरा तो दूसरे धर्मों में भी है. इस कानून को सभी पर लागू किया जाना चाहिए. यानी समान नागरिक आचार संहिता सदन में लाया जाये लेकिन कांग्रेस ने सदन से लेकर सड़क तक जो विरोध चल रहा था उसको खारिज करते हुए हिन्दू कोड बिल को पास करवा लिया ।

सदन में और संविधानसभा में हिन्दू कोड बिल को लेकर हुए बहस थे उस दौरान नागरिक आचार संहिता को लेकर सबसे मुखर विरोध सिख ने किया उनका कहना था कि इसको लागू करना सिख धर्म के मूल आधार पर हमला है ।

लेकिन बाद के दिनों में जनसंघ और फिर बीजेपी ने एक रणनीति के तहत नागरिक आचार संहिता को मुसलिम से जोड़ कर सियासी हवा का रुख बदल दिया लेकिन मूल यही है कि संघ और भाजपा महिला के आजादी को लेकर अभी भी उस मानसिकता से बाहर नहीं निकल पायी है जिसको लेकर इस देश में समाजिक सुधार को लेकर बड़ा आन्दोलन हुआ था वही संघ सिख बौद्ध और जैन धर्म को लेकर भी सहज नहीं है जैसे अभी साई बाबा को लेकर संघ और हिन्दू संगठन सहज नही है।
अब देखना यह है कि बीजेपी सत्ता के सहारे इसको कहाँ तक आगे ले जाता है क्यों कि मुस्लिम विरोध तक चलेगा लेकिन इससे आगे जैसे ही बढ़ेगे बहुत मुश्किल होगा देश को सम्भालना।

आज अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस है

आज ‘अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ है। आधुनिकता और तेज वैश्वीकरण की भागदौड़ में लगातार पिछड़ती और विस्मृत होती जा रही अपनी मातृभाषा को याद करने और उसकी पहचान, उसकी अस्मिता को बनाए रखने का संकल्प लेने का दिन।

मेरी अपनी मातृभाषा भोजपुरी है। दुर्भाग्य से दुनिया की एक बड़ी आबादी द्वारा बोली जानेवाली यह बेहद समृद्ध भाषा आज अश्लीलता की गंभीर चुनौतियों से दो-चार है। बाज़ार के दबाव में फूहड़, बेहूदा, मातृद्रोही सिनेमा से जुड़े लोगों और असंख्य गायक-गायिकाओं ने इसे अश्लीलता का पर्याय बनाने का जैसे अभियान चला रखा हैं।

हालत यह है कि कोई भी सुसंस्कृत व्यक्ति इस भाषा का सिनेमा देखने या गीत सुनने में अब शर्म महसूस करने लगा है। हां, इस निराशाजनक समय में उम्मीद जगाते हैं कुछ ऐसे कलाकार और गायक-गायिकाएं जो अपनी भाषा के सम्मान के लिए सतत संघर्ष कर रहे हैं।

#भोजपुरी
#भोजपुरी

इस आशा के साथ कि भोजपुरी अपसंस्कृति के चंगुल से निकलकर एक बार फिर अपना खोया हुआ गौरव प्राप्त करेगी, सभी भोजपुरी भाषियों को मातृभाषा दिवस की मेरी शुभकामनाएं,मेरी अपनी एक भोजपुरी कविता ‘आस’ के साथ !

केहू ना कहेला बाकि
बिहान होते चिरई हांक लगा जालि
ओस नहाली दूब
उछाह से बहेली नदी
अगरा जाला गाछ-बिरिछ
सुरूज के पहिलका किरिन के संगे
केहू ना देखेला बाकि
चुपे अंखुआ जालि फसल
कोंपल फेंक डेला पौधा
पतईंन में उतर जाला हरियरी
फल में रस
फूल में गंध
अंखियन में नेह
केहू ना जानेला बाकि
बाबू जी के मन में बारी-बारी से
काहे धुंधुआत चल जाला
एक-एक गो नेह-नाता
साच्छात उतरे लागेले जमराज
माई के भोरे के सपना में
कइसनो मौसम में
बचा के राख लेलि भौजी
भिंडी आ करइला के बिया
मेहरारू गुल्लक में पईसा
बचवा सब आंखि में नींद
केहू ना बचावेला बाकि
घोर से घोर दुरदिन में भी
बाचल रहेला जरूर कौनो आस
तबे त हमनी
सहेज के राखेनी ओकर पाती
जेकरा से मिले के
कौनो आस ना बाचल रहेला।


लेखक — ध्रुव गुप्त(पूर्व आईपीएस अधिकारी)

स्वास्तिक हमारी संस्कृति का हिस्सा, विवाद खड़ा करना अनावश्यक: सुशील कुमार मोदी

स्वास्तिक शुभ चिह्न हमारी हजारों वर्ष पुरानी वैदिक सभ्यता और संस्कृति का हिस्सा है, इसलिए इस पर राजनीति करना अनावश्यक और दुर्भाग्यपूर्ण है।

धर्मनिरपेक्षता का अर्थ देश के बड़े वर्ग की आस्था, परम्परा और प्रतीक चिह्न से अनादरपूर्वक दूरी बनाना नहीं होता।

हम जब विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों का शुभारम्भ दीप प्रज्जवलित कर या नारियल फोड़ कर भी करते हैं, तब देश की सांस्कृतिक परम्परा का ही पालन करते हैं, लेकिन फीता काटने की रवायत बंद नहीं की गई है।

बिहार विधानसभा के स्मृति चिह्न में अशोक चक्र के साथ स्वास्तिक चिह्न भी रहे, तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
विधानसभा के आधिकारिक लेटरहेड पर भी स्वास्तिक चिन्ह का प्रयोग होता है।

जिनके पास जनहित के मुद्दे नहीं हैं, वे कभी वंदेमातरम् गायन का विरोध करते हैं तो कभी स्वास्तिक चिन्ह का विरोध करने लगते हैं।

इनलोगों को यह भी नहीं मालूम है कि भारत का स्वास्तिक चिन्ह हिटलर के चिन्ह से बिल्कुल भिन्न है।

सदियों से भारत में शुभ अवसरों पर स्वास्तिक चिह्न बनाये जाते रहे हैं, लेकिन जिनकी समझ अपने मनीषियों के ग्रंथों की उपेक्षा और भारत-विरोधी लेखकों की चंद किताबें पढ़ाने से बनी हो, केवल वे ही स्वास्तिक से दुराग्रह प्रकट कर सकते हैं।

बेहद सादगी से सम्पन्न हुआ सुशील मोदी के पुत्र की शादी

बिहार के पूर्व डिप्टी CM व भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी के छोटे बेटे अक्षय अमृतांशु की शादी नोएडा में संपन्न हो गई है। इस हाईप्रोफाइल शादी समारोह को सादगी के साथ ही संपन्न कराया गया है।

कार्यक्रम स्थल पर CM नीतीश कुमार भी पहुंचे। साथ ही सांसद रविशंकर प्रसाद और बिहार सरकार में मंत्री मंगल पांडेय, शाहनवाज हुसैन, संजय झा भी वर-वधू को आशीर्वाद देने आए। इनके अलावा अधिकतर मेहमान ऑनलाइन शामिल हुए।

नोएडा के सेक्टर 121 में हो रहे इस समारोह में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच फेरे लिए गए। साथ ही शादी की अन्य रस्में भी पूरी हुई हैं। इससे पहले दूल्हा अक्षय और दुल्हन स्वाति ने एकदूसरे को वरमाला पहनाकर जयमाला की रस्म पूरी की। स्वाति के माता-पिता पुष्पा और सुधीर घिल्डियाल हैं। 

संघ सम्राट अशोक को औरंगजेब क्यों मानता है

संघ सम्राट अशोक को लेकर असहज क्यों है इस सवाल का जवाब तलाशने कि कोशिश में मैं पिछले कई दिनों से संघ से जुड़े लोगों से बातचीत कर रहा हूँ, इतना ही नहीं अशोक की तुलना औरंगजेब से करने वाले नौकरशाह दया प्रकाश सिन्हा से भी मेरी बात हुई लेकिन सम्राट अशोक को लेकर संघ की ऐसा सोच क्यों है उसको लेकर स्पष्टता नहीं हो पायी ।

फिर दिल्ली विश्वविधालय और जेएनयू से जुड़े मित्रों से इस सम्बन्ध में लंबी बातचीत हुई और इस दौरान इस विषय से जुड़े कई आलेख को भी पढ़ने का मौका मिला ।

मोटा मोटी तौर पर जो मेरी समझ में आयी है वो बौद्ध धर्म को लेकर संघ की जो सोच रही है सम्राट अशोक के विरोध की वजह यही है ऐसा प्रतीत होता है।

गोलवलकर अपनी पुस्तक ‘हम या हमारी राष्ट्रीयता की परिभाषा’ में बुद्ध और बौद्ध धर्म को लेकर विस्तृत चर्चा किये हैं ।
जिसमें उनका मानना था कि ‘बुद्ध के बाद उनके अनुयायी पतित हो गए. उन्होंने इस देश की युगों प्राचीन परंपराओं का उन्मूलन आरंभ कर दिया. हमारे समाज में पोषित महान सांस्कृतिक सद्गुणों का विनाश किया जाने लगा. अतीत के साथ के संबंध-सूत्रों को भंग कर दिया गया. धर्म की दुर्गति हो गई. संपूर्ण समाज-व्यवस्था छिन्न-विच्छिन्न हो गयी ।

भारत माँ के प्रति श्रद्धा इतने निम्न तल तक पहुंच गई कि धर्मांध बौद्धों ने बौद्ध धर्म का चेहरा लगाए हुए विदेशी आक्रांताओं को आमंत्रित किया तथा उनकी सहायता की उनका आचरण देशद्रोही जैसा हो गया था ।

वही बौद्ध धर्म के अहिंसा का पाठ ने भारतवंशी को कायर बना दिया ।
क्यों कि अशोक धम्म के सहारे बौद्ध धर्म को पूरे विश्व में फैलाये इसलिए माना जा रहा है कि संघ अशोक का इसलिए विरोध कर रहे हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि सम्राट अशोक के बाद भारत गुलामी के दास्ता से बाहर क्यों नहीं निकल पाया ,सम्राट अशोक भारतवंशी को अहिंसा का पाठ पढ़ा कर कायर बना दिया ये संघ का मानना है। अगर ऐसा था तो बाद के दिनों में शंकराचार्य के नेतृत्व में हिन्दू धर्म का पुनरुत्थान हुआ फिर भी भारतवंशी गुलामी की दास्ता से बाहर क्यों नहीं निकल पायी जब कि इस देश पर सबसे ज्यादा हमला शंकराचार्य के हिन्दू धर्म के पुनरुत्थान काल के बाद ही शुरू है ।

इस सवाल पर संघ के विचारक स्पष्टता के साथ कुछ भी नहीं लिखे हैं और ना ही इस विषय पर संघ स्पष्टता के साथ बोलता है ।
इसकी वजह है संघ हमेशा भारत को एक राष्ट्र के रूप में देखता है जबकि भारत अशोक के काल को छोड़ दे तो राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से कभी एक राष्ट्र नहीं रहा है हां सांस्कृतिक रूप से आज जो भारत है वो जरूर आपस में एक दूसरे से जुड़े रहा है, ऐसा नहीं होता तो दक्षिण का एक संत पूरे भारत में चार पीठ स्थापित नहीं कर पाते।

दूसरी बात राष्ट्र आधुनिक विचार है इस विचार के सहारे भारत के इतिहास को ना देखा जा सकता है ना समझा जा सकता है । यू कहे तो 1947 में भारत का उदय एक राष्ट्र के रूप में हुआ जिसके निर्माण में कई ऐसी बुनियादी बाते निहित है जो राष्ट्र के आधुनिक विचार से मेल नहीं खाता है ।

इसलिए हमारे पुरखों ने भारत को यूनियन ऑफ स्टेट कहा जहां तमाम तरह के विवादित मसले का एक हल निकालने कि कोशिश हुई। जिसको लेकर आज संघ और भाजपा ताना मार रही है।

संघ और भाजपा जिस दिशा में भारत को ले जाना चाह रही है संभव है आने वाले समय में भारत एक बार फिर ऐसी समस्याओं में घिरने लगा है जिसके समाधान को लेकर गांधी को अपनी जान तक गंवानी पड़ी थी।

इंदिरा गांधी भी इसी तरह की छेड़छाड़ की कोशिश शुरू की थी देश को क्या नुकसान हुआ समाने हैं सच यही है कि भारत को राष्ट्र के रूप में नहीं संस्कृति के रूप में देखने कि जरूरत है ।

बिहार का लाल क्रिकेट की दुनिया में स्थापित किया नया कीर्तिमान

बिहार के रणजी क्रिकेटर सकिबुल गनी ने इतिहास रच दिया है। सकिबुल गनी फर्स्ट क्लास डेब्यू पर तिहरा शतक बनाने वाले पहले क्रिकेटर बने, मिजोरम के खिलाफ बिहार की शुरुआत कुछ खास नहीं रही थी, लेकिन सकीबुल और बाबुल कुमार ने मिलकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।

साल्ट लेक के जेयू कैंपस मैदान पर खेले जा रहे इस मैच में बिहार ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 71 रनों तक तीन विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद सकीबुल और बाबुल ने कोई विकेट नहीं गिरने दिया और स्कोर को 600 रनों के पार पहुंचा दिया। सकीबुल ने जहां तेज तर्रार ट्रिपल हंड्रेड जड़ा, वहीं बाबुल भी डबल सेंचुरी ठोक चुके हैं। सकीबुल 341 रन बनाकर आउट हुए।

इस पारी के दौरान उन्होंने 405 गेंदों का सामना किया और 84.20 के स्ट्राइक रेट से ये रन बनाए। सकीबुल ने 56 चौके और दो छक्के जड़े। दोनों बल्लेबाजों ने मिलकर चौथे विकेट के लिए 532 रनों की साझेदारी निभाई।

डेब्यू फर्स्ट क्लास में सबसे ज्यादा स्कोर का रिकॉर्ड इससे पहले अजय रोहेरा के नाम दर्ज था। मध्य प्रदेश के रोहेरा ने हैदराबाद के खिलाफ रणजी ट्रॉफी 2018-19 में नॉटआउट 267 रनों की पारी खेली थी।

जिलाधिकारी मोतिहारी शीर्षत कपिल ने सकीबुल को सम्मानित करने की घोषणा की।उन्होंने कहा कि सकीबुल ने पूरे विश्व के रिकॉर्ड को तोड़ा है,आज तक किसी भी खिलाड़ी ने रणजी के डेब्यू मैच में 341 का स्कोर नही किया है।यह जिले के लिए गौरव का क्षण है।

हिन्दुत्व के रास्ते पर बिहार

बीजेपी देश को हिन्दुत्व के एजेंडे पर आगे बढ़ाने में लगी है
बिहार विधानसभा के स्थापना दिवस के अवसर पर विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यों के लिए कल प्रबोधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।प्रथम सत्र के समापन पर मंच से घोषणा किया गया कि सभी लोग खड़े हो जाये राष्ट्रगीत गाया जाएगा और फिर शुरू हुआ

वन्दे मातरम् गीत
बिहार विधानसभा में पहले यह परम्परा कभी नहीं रही है हां इस बार बीजेपी और जदयू की जो सरकार बनी है उसके बाद से बिहार विधानसभा के पहले सत्र के समापन के दौरान पहली बार राष्ट्र गीत के साथ सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया था। बिहार विधानसभा भवन के शताब्दी समारोह के याद में बिहार विधानसभा के मुख्य द्वार के सामने एकस्तम्भ बन रहा है कल उस स्तम्भ का स्वरूप क्या होगा इसका लोकार्पण लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिड़ला ने किया इस स्तम्भ का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी करेंगे ।

आजादी के बाद देश का यह पहला ऐसा स्तम्भ होगा जिसमें अशोक चक्र नहीं है अशोक चक्र की जगह स्वस्तिक चिन्ह को लगाया है संदेश साफ है देश की जो धर्मनिरपेक्षता वाली छवि रही है उस छवि से देश को बाहर निकालने कि कोशिश शुरु हो गयी है ।

इसी तरह दिल्ली पुलिस के लोगों पर अब अशोक स्तम्भ की जगह पर इंडियागेट रहेंगा साथ ही दिल्ली पुलिस लोगो के बीचों बीच लिखा गया संदेश ‘शांति, सेवा न्याय’ को हटा कर ‘फॉर द नेशन कैपिटल’ लिखा गया है ।

इससे पहले दिल्ली में जो नया संसद भवन बना है उस भवन में भी आजादी के साथ जिस परम्परा की शुरुआत की गयी थी कि महत्वपूर्ण पद पर आसीन व्यक्ति के पीछे अशोक स्तम्भ रहेगा उस परंपरा को भी खत्म कर दिया गया है अब नये संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष के पीछे अशोक स्तम्भ की जगह तिरंगा लहरेगा इस तरह के बदलाव का सिलसिला कहां जाकर रुकेगा कहना मुश्किल है क्यों कि संघ भारतीय संस्कृति,शासन व्यवस्था,अर्थनीति और सामाजिक मूल्यों को लेकर क्या सोचती है उसका कोई स्पष्ट रुप रेखा नहीं है।

संघ के अधिकृत विचार की बात करे तो उनकी एक मात्र अधिकृत विचार है एकात्म मानववाद जिसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मार्गदर्शक या दर्शन कहा जाता है। इस दर्शन को भारतीय जनसंघ ने 1965 के विजयवाड़ा अधिवेशन में उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने करतल ध्वनि से इस दर्शन को स्वीकार किया था और वचन लिया था कि जब भी हमारी सरकार बनेगी तो एकात्म मानववाद में जो विचार लिखे गये हैं उसका अनुपालन करेंगे ।

हालांकि इस पुस्तक में ऐसा कुछ भी नहीं है जो आज बीजेपी शासित राज्यों में हो रहा है या फिर जो मोदी कर रहे हैं हां यह जरूर है कि समय समय पर हिन्दूवादी सोच से जुड़े लेखक भारतीय चिंतन और सामाजिक मूल्यों को लेकर समय समय पर जो लिखा गया है संघ बीजेपी के सहारे हिन्दुत्व को थोपने कि कोशिश जरूर कर रही है हाल ही में पूर्व आईएएस अधिकारी दया प्रकाश सिन्हा द्वारा लिखी गयी पुस्तक में सम्राट अशोक की तुलना औरंगजेब से करने के मामले में भले ही बीजेपी पल्ला झाड़ लिया लेकिन सम्राट अशोक को लेकर जो चल रहा है वो दया प्रकाश सिन्हा की सोच के अनुसार ही आगे बढ़ाया जा रहा है

1–लव जिहाद और हिजाब तो बहना है निशाने पर तो बहुसंख्यक हिन्दू लड़की है
संघ और बीजेपी जिस सोच की तरफ बढ़ रहा है उस सोच के पीछे वही हिन्दुत्व का वो तालिबानी चेहरा है जिससे ज्योतिबा फुले ,राजा राम मोहन राय ,विवेकानंद,गांधी और भगत सिंह लड़े थे जी है विरोध लव जेहाद को लेकर नहीं है विरोध प्रेम विवाह से है ,विरोध हिजाब से नहीं है विरोध हिन्दू लड़कियों के जीन्स और टॉप पहने से हैं विरोध लड़कियों के आधुनिक सोच है ,क्यों कि आज भी संघ मानती है कि हिंदुत्व मेरा सर्वश्रेष्ठ है वो दिन दूर नहीं है जब आपको विज्ञान की जगह वेद और उपनिषद पढ़ने पर मजबूर किया जायेगा वो दिन दूर नहीं है जब आपको जेनुउ और भगवा ड्रेस पहनना होगा लड़कियों को साड़ी पहन कर स्कूल जाना होगा ।

2—संघ आजादी की सारी मान्यताओं को बदलना चाहता है जी है संघ भारत के आजादी को लेकर जो मान्यता रही है उसको बदलना चाहता है तिरंगा की जगह राष्ट्र ध्वज भगवा चाहता हैं,संघ देश के वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के बदले पुरानी व्यवस्था चाहता है ,संघ वर्ण व्यवस्था को फिर से लागू करना चाहता है ,संघ जातीय आरक्षण को खत्म करना चाहता है संघ, भारत के संघीय ढांचा के खिलाफ है,संघ महिलाओं को लेकर पुरातन सोच रखता है और ये सब जो देश में चल रहा है इसके पीछे संघ का यही सोच है ।

लोकतंत्र खतरे में है

सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने ‘देश में लोकतंत्र को कैसे काम करना चाहिए’ विषय पर आयोजित बहस पर चर्चा करते हुए कहां कि ‘ज्यादातर देश उच्च आदर्शों और महान मूल्यों के आधार पर स्थापित होते हैं और शुरू होते हैं, लेकिन अक्सर संस्थापक नेताओं और अग्रणी पीढ़ी के बाद दशकों और पीढ़ियों में धीरे-धीरे चीजें बदल जाती हैं।

‘स्वतंत्रता के लिए लड़ने और जीतने वाले नेता अक्सर महान साहस, अपार संस्कृति और उत्कृष्ट क्षमता वाले असाधारण व्यक्ति होते हैं। वे आग में तपकर आए और लोगों और राष्ट्रों के नेताओं के रूप में उभरे। वे डेविड बेन-गुरियन्स हैं, जवाहरलाल नेहरू हैं, और हमारे अपने भी हैं।

‘लेकिन आज नेहरू के भारत की बात करे तो मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लोकसभा में लगभग आधे सांसदों के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या के आरोपों सहित आपराधिक मामले लंबित हैं। हालांकि यह भी कहा जाता है कि इनमें से कई आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।’ लेकिन सवाल तो है ऐसे में लोकतंत्र कैसे बचेगा जब चुन कर आने वाले प्रतिनिधियों का चरित्र दागदार हो भ्रष्ट हो ।

वही दूसरी और आज बिहार विधानसभा के स्थापना दिवस के अवसर पर विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यों के लिए आज प्रबोधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर बिहार सरकार के संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा शराबबंदी कानून को लेकर सवाल खड़े किये जाने पर कहा कि आज हर कोई हमलोग पर अंगुली उठाने के लिए तैयार बैठा रहता है। मौका मिला नहीं कि हम लोगों पर उंगली उठा दी जाती है। आज शराबबंदी पर एक संस्था की तरफ से अंगुली उठाई जा रही है।

बिहार विधानसभा स्थापना दिवस
Bihar Assembly Foundation Day

मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष पूरे देश के विधायिका के कस्टोडियन हैं। आज बिहार की शऱाबबंदी कानून पर सवाल खड़े किये गये और कहा गया कि बिना समझ के कानून बना दिया गया। जबकि भारत का संविधान इसी विधायिका ने बनाया है ऐसे में आप विधायिका को बचाने के लिए आगे आयें। उन्होंने कहा कि गाहे-बगाहे शराबबंदी कानून को उदाहरण के तौर पर बताया गया और कहा गया कि विधायिका ने बिना सोचे-समझे कानून बना दिया। विजय चौधरी ने इस पर गहरी आपत्ति जताई और लोकसभा अध्यक्ष को आगे आने को कहा।

बिहार विधानसभा

मुझे लगता है विजय चौधरी के सवाल का जवाब सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग के भाषण में निहित है और आने वाले समय में खास करके भारत में जिस तरीके के प्रतिनिधि चुनाव जीत कर आ रहे हैं क्या होगा भारतीय लोकतंत्र कर सोच कर मन सिहर जाता है इसके लिए कोई और नहीं राजनीतिक दल ही जिम्मेदार है जो सत्ता में बने रहने के लिए हर क्षण अलोकतांत्रिक निर्णय लेते रहते हैं और ऐसे ऐसे लोगों को सांसद और विधायक का टिकट देते हैं जिन्हें लोकतंत्र से कोई वास्ता नहीं है ना समझदारी है ये सब पहले जाति के नाम पर चला और अब राष्ट्रवाद के आड़ में चल रहा है गौर से सोचिए आजादी के आन्दोलन वाली पीढ़ी के जाने के बाद भारतीय लोकतंत्र राजनीतिक दल किसी दिशा में ले गये हैं कैसे लोगों को वो टिकट दे रहे हैं ।

यह तर्क कि अपराधी को जनता वोट देती है तो पार्टी मजबूरी हो जाती है ऐसे लोगों को टिकट दे सही है लेकिन ऐसे लोगों के सदन में आने से लोकतांत्रिक मूल्य कैसे स्थापित होगा ये कौन सोचेंगा बिहार में विधान परिषद का चुनाव होने वाला है पार्टियां कैसे कैसे लोगों को टिकट दे रही है ऐसे में सवाल उठना लाजमी है खुद सरकार नहीं चाहती है कि सदन चले जनता से जुड़े मुद्दों पर बहस हो ।नारों और व्यक्तिगत लाभ से जुड़ी योजनाओं के सहारे कब तक लोकतंत्र के पहिया को खींच सकते हैं

युक्रेन में फंसे बिहारी छात्रों के परिजन युद्धा की आशंका को लेकर है परेशान

रुस और यूक्रेन के बीच जैसे जैसे युद्ध स्थिति बनती जा रही है यूर्केन में पढ़ाई कर रहे हजारों बिहारी छात्रों के परिजन किसी अनहोनी की आशंका से बैचेन है ।

युक्रेस से जो खबर आ रही है उसके अनुसार बिहार के करीब 800 छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने गए हुए हैं। युक्रेन में रह रहे बिहार के विभिन्न जिलों के रहने वाले छात्र काफी डरे-सहमे हैं। ये बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगा रहे हैं कि उनकी जान की रक्षा की जाए।
एयर टिकट मिलने में हो रही परेशानी

युक्रेन स्थित ओडेसा नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे बिहार के छात्र काफी परेशान हैं। ये छात्र अब भारत लौटना चाह रहे हैं। लेकिन इनके सामने एक परेशानी ये है कि वहां एयर टिकट मिलने में काफी दिक्कत हो रही है, जिसके कारण उनकी चिंता बढ़ती जा रही है। अब ये गुहार लगा रहे हैं कि उनकी जान की रक्षा एयरलिफ्ट कराकर करें, क्योकि यहां टिकट महंगा हो गया है।

UkraineRussiaCrisis

लगातार बढ़ रही चिंता
बिहार के पूर्णिया के रहने वाले राकिब रहमान बताते हैं कि मो. नसीम, शकिब खान, राकेश, सूरज यादव, आलोक यादव सहित कई छात्र यूक्रेन के ओडेसा नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में MBBS कर रहे हैं। ये सभी साथ रहते हैं। छात्रों का कहना है कि ‘वैसे शहर के अंदर किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है। पर हालात नाजुक होते जा रहे हैं। इससे इनकी चिंता बढ़ती जा रही है। बिहार सरकार और भारत सरकार विशेष पहल कर यहां से हमें निकाले। छात्र अपील कर रहे हैं कि सरकार चाहे तो हमें एयरलिफ्ट करा सकती है।’

उधर, रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध का बिगुल कभी भी बज सकता है। रूस ने अपने एक लाख से ज्यादा सैनिक सीमा पर तैनात कर रखा है। सभी देशों ने अपने नागरिकों को यूक्रेन छोड़ने की एडवाइजरी जारी की है।

यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार स्कूल संचालक को बिहार के एक सीनियर आईपीएस अधिकारी के दिलायी थी रुम

बोध गया से यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार स्कूल संचालक के खुलासे से बिहार पुलिस में हड़कम्प मच गया है। जी हां दिल्ली स्थित सीआरपीएफ के जिस गेस्ट हाउस में मनीष रुखरियार ने लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाया था उस गेस्ट हाउस में मनीष रुखरियार के लिए बिहार के एक सीनियर आईपीएस अधिकारी ने रुम बुक करवाया था ।

मालूम हो कि मनीष रूखैयार के खिलाफ दिल्ली के लाजपत नगर थाना में एक युवती ने इसी माह 07 फरवरी 22 को प्राथमिकी दर्ज करायी थी जिसमें युवती ने मनीष रुखरियार पर शादी का झासा देकर यौन शोषण करने का आरोप लगाया है। थाने में दर्ज कांड संख्या 167-22 की जांच के दौरान दिल्ली पुलिस ने युवती द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी को सत्य पाया है।

जिस दिन की घटना का जिक्र युवती अपने प्राथमिकी में की है उस रात मनीष और युवती दोनों का मोबाइल लोकेसन सीआरपीएस गेस्ट हाउस ही दिखा रहा है साथ ही गेस्ट हाउस में दोनों ठहरे हैं इसका साक्ष्य भी दिल्ली पुलिस को मिला है इस कारण से मनीष के खिलाफ 376 व 328 के तहत दर्ज मामले को सत्य मानते हुए डीसीपी ने मनीष को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था।

युवती प्राथमिकी में लिखी है कि मनीष शादी डाट काम पर अपना एक प्रोफाइल डाला था। इसमें कहा था कि 10 साल पहले पत्नी से तलाक हो गया है। इसलिए शादी करना चाहते हैं।शादी डाट काॅम पर लिखा था कि मनीष को बोधगया और गया में सीबीएसई मान्यता प्राप्त स्कूल है, दो पट्रोल टंकी और कई व्यवसाय है।

करीब दो सौ करोड़ का टर्न ओवर है। इस प्रोफाइल के बाद पीड़िता ने मनीष से संपर्क किया फिर दोनों एक दूसरे से बात करने लगे इस दौरान युवती गया भी आयी थी और गया के एक होटल में कई दिनों तक ठहरी भी थी इसी दौरान मनीष उस युवती को लेकर पटना भी आया था जहां राज्य के एक सीनियर आईपीएस अधिकारी से मुलाकात भी कराया था ।


तीन जनवरी को मुकेश दिल्ली पहुंचा और दोनों सीआरपीएफ के गेस्ट हाउस में तीन दिनों तक ठहरा था गेस्ट हाउस बिहार के एक सीनियर आईपीएस अधिकारी ने बुक करवाया था युवती का कहना है कि सीआरपीएफ गेस्ट हाऊस के बाद से मनीष से सम्पर्क करने की बहुत कोशिश कि लेकिन सम्पर्क नहीं हो पा रहा था दो तीन बार बातचीत हुई भी तो मनीष डांटते हुए सभी वादे से मुकर गया ।

इस कारण से पीड़िता द्वारा दिल्ली के लाजपत नगर थाना में मनीष पर प्राथमिकी दर्ज करायी । दिल्ली पुलिस 9 फरवरी को मुकेश को उसके हंसराज स्कूल से गिरफ्तार किया है हालांकि इस दौरान भी मनीष दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार भी किया और देश के कई सीनियर आईपीएस अधिकारी के रिश्तेदार और दोस्त होने का रौब दिखाते हुए दिल्ली पुलिस को डराने की कोशिश किया लेकिन दिल्ली पुलिस गिरफ्तारी पर अड़ गया तो मनीष ने दिल्ली पुलिस के एक जवान पर हाथ चला दिया लेकिन दिल्ली पुलिस इसके धौस से डरा नहीं और गिरफ्तार करके दिल्ली ले गया ।