Press "Enter" to skip to content

Posts tagged as “#Bihar”

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजगीर जू सफारी राज्य को किया समर्पित

राजगीर की पहाड़‍ियों पर जंगल में दिखेंगे बंगाल के बाघ और गुजरात के शेर, बंद जीप से पास जाकर कर सकेंगे दीदार जी है आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजगीर सफारी जू का उदघाटन किया इस मौके पर विभागीय मंत्री के साथ साथ कई विधायक और सांसद मौजूद थे बिहार का यह पहला इस तरह का सफारी है जहां जू को जंगल का रुप दिया गया है इसके लिए पार्क की साढ़े चार किमी लंबी है चहारदीवारी

बनायी गयी हो जो सोनागिरी की तराई, जरासंध अखाड़ा से जेठियन मार्ग तक साढे चार किलोमीटर है। वहीं मांसाहारी जू सफारी के जीव-जंतु में शामिल शेर, बाघ, भालू व तेंदूआ के लिए इन्क्लोजर यानि बड़े-बड़े घेरान में रहेगा।

23 फुट ऊंची घेरान में लोहे की जाली व फेंसिंग लगाया गया है गई, इस इंक्‍लोजर में नाइट शेल्टर यानी जानवरों के लिए विश्राम स्थल बनाए गए हैं। इसमें पेयजल, बीमार पशुओं के इलाज, टहलने, प्रजनन, साफ- सफाई तथा भोजन की व्यवस्था है। इधर, हर्वीवारस यानी शाकाहारी जू सफारी में हिरण, चीतल, काला हिरण, सांभर रखे जाने हैं। इनके लिए भी नाइट शेल्टर बनाया गया है। जू सफारी में जानवरों को डबल प्रोटेक्शन में रखा जाएगा।

बिहार में जमीन को लेकर गांव गांव में मचा है महाभारत, डांक्टर शकुनी मामा की भूमिका में

दरभंगा में जमीन विवाद को लेकर भूमाफिया ने भाई बहन को जिंदा जलाकर मारा।मोतिहारी में जमीन रजिस्ट्री कराने आये एक युवक की रजिस्ट्री ऑफिस में घूस कर गोली से छलनी कर दिया।मोतिहारी में ही कांग्रेस नेता शाश्वत गौतम के जमीन पर कब्जा करने को लेकर उनकी हत्या की साजिश रची गयी।

मोतिहारी में ही जमीन माफिया ने आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल की सीओ के दफ्तर के सामने गोली से छलनी कर मार दिया ।आये दिन बिहार के अलग अलग हिस्सों से इस तरह की घटनाएं घटती रहती है।

बिहार में आज जिनके पास जमीन है वो सबसे ज्यादा असुरक्षित है गांव गांव में जमीन पर कब्जा को लेकर पुलिस और अंचल ऑफिस के मिली भगत से सिडिकेंट चल रहा है और बिहार में हो रही हत्या के आंकड़ों पर गौर करेंगे तो 80 फीसदी हत्या और मारपीट की घटना जमीन के विवाद की वजह से हो रही है ।

1—बिहार में 15 वर्षो में जमीन के दाम में 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है

2005 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में जब बिहार में सरकार बनी तो अपराध मुक्त समाज का माहौल बना ।वही बिहार के विकास को लेकर बड़ी बड़ी परियोजनाओं पर काम शुरू हुआ गांव गांव में सड़क का जाल बिछने लगा और इसका प्रभाव यह हुआ कि गांव के छोटे छोटे चौक चौराहे से लेकर फोरलेन और स्टेट हाईवे और ग्रामीण सड़कों के किनारे व्यावसायिक कार्यों में काफी तेजी।

और इस वजह से रातो रात जमीन का दाम आसमान छूने लगा स्थिति यह हो गया है कि अब गांव में भी सड़क के किनारे जो जमीन है उसकी कीमत दो लाख से पांच लाख रुपया कट्ठा हो गया है। इसका असर यह हुआ कि वर्षों पहले बिहार छोड़ चुके ऐसे बिहारी जो अपने हिस्से का जमीन भाई भतीजा को खेती करने के लिए छोड़ दिये थे ऐसे लोग रातो रात जमीन देख अपने हिस्से का जमीन बेचने के जुगत में लग गये हैं ।

वही जमीन के मालिकाना हक की बात करे तो कागजात पीढ़ी दर पीढ़ी से दादा परदादा के नाम से मौखिक बटवारे में चला आ रहा है इस वजह से जमीन बेचने में परेशानी हो रही है ऐसे भी गांव गांव भू माफिया खड़ा हो गया है जो इस तरह के जमीन बेचने वाले को निशाने पर लेता है इस वजह से गांव गांव में खून खराबा बढ़ गया है।

BiharNewsPost

2–जमीन विवाद को खत्म करने का सरकारी प्रयास विफल है
जमीन को लेकर विवाद को देखते हुए नीतीश कुमार ने जमीन के खरीद बिक्री से लेकर मोटेशन (दाखिल खारिज) तक में बड़ा बदलाव किया गया है।

ऐसे जमीन मालिक जिसका जमीन पीढ़ी दर पीढ़ी से एक ही नाम से चला आ रहा है उसके लिए राज्य सरकार ने एक रुपया में रजिस्ट्री का नियमावली बनाया लेकिन ब्यूरोक्रेसी ने सरकार के फैसले को जमीन पर लागू नहीं होने दिया जिस वजह से मामला पेचीदा होता जा रहा है वही कोर्ट का हाल तो और भी बूरा है जिसका जमीन है अगर धोखे से किसी ने लिखा कर कब्जा कर लिया तो फिर उस जमीन को हासिल करने में कितना जमीन बेचना पड़ेगा कह नहीं सकते ।

3–बिहार में जमीन के खेल में डॉक्टर शामिल है
जी है बिहार में जमीन बिक्री को लेकर जो खेल चल रहा है उस खेल के तह में जायेंगे तो पता चलेगा कि अधिकांश मामले में डॉक्टर शामिल है दरभंगा में भी जमीन के लिए जिस तरीके से भाई बहन को जिंदा जला दिया गया है उस मामले में भी हकीकत यही है कि जो जमीन खरीदा है उसके पीछे डॉक्टर खड़ा है डॉक्टर ने ही पैसा लगाया है सामने वाले का सिर्फ नाम है पूरे बिहार में आप अपने आस पास जमीन खरीद बिक्री को लेकर जो खेल चल रहा है उप गौर करिए बड़े खरीदारों में 80 फीसदी डॉक्टर है ।

पटना से लेकर बिहार के अनुमंडल स्तर के शहर में आप चले जाये बड़ा मकान, बड़ा मार्केट कम्पलेक्स जमीन का बड़ा प्लोट ,बड़ा स्कूल ,बड़ा होटल पता कीजिए किसका है तो पता चलेगा डॉक्टर का है इस समय बिहार में काले धन का सबसे बड़ा निवेशक डॉक्टर है। दरभंगा से समस्तीपुर और दरभंगा से मुजफ्फरपुर चले जाये सड़क किनारे बीस बीस एकड़ में आपको बोन्ड्री देखने को मिलेगा सारे के सारे जमीन का मालिक डाँक्टर है ।
जमीन को लेकर जहां कही भी विवाद हो रहा है फसके पीछे कही ना कही आपको डाँक्टर मिलेगा।
यू कहे तो आज बिहार का सबसे बड़ा भूमाफिया कोई है तो डॉक्टर है।

4—जमीन विवाद के समाधान पर नये सिरे से काम करने की जरुरत है
बिहार में इन दिनों सर्वे का काम चल रहा है ,रजिस्टर टू को डिजिटल बनाया गया है थोड़ी सावधानी बरते तो आने वाले पीढ़ी को बिहार में जमीन को लेकर जारी खेल से राहत पहुंचा सकते हैं ।

थोड़ा समय देने कि जरूरत है और पीढ़ी दर पीढ़ी से जो जमीन दादा परदादा के नाम से चला आ रहा है उस पर आपस में बैठकर सुलझाने की कोशिश करिए ।ऐसे कानून बने है जो जमीन के शांतिपूर्ण बंटवारे और बिना खर्च के आपको मदद पहुंचा सकता है वक्त जो लगे मिल बैठ कर समाधान निकालने कि कोशिश करिए नहीं तो बिहार में आने वाले समय में घर घर में महाभारत होना तय है ।

आरोग्य दिवस सत्रों पर लोगों को मिलेगी टेलीमेडिसीन से चिकित्सकीय सुविधाः मंगल पांडेय

पटना। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य के ग्रामीण एवं दूर-दराज क्षेत्रों के व्यक्तियों को चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस हेतु राज्य में ई.संजीवनी के माध्यम से टेलीमेडिसीन से चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया जा रहा है। अब 18 फरवरी से ई-संजीवनी के माध्यम से सभी आरोग्य सत्र दिवसों (विलेज हेल्थ सेनिटेशन एंड न्यूट्रीशन डे) पर पूर्व से दिए जाने वाले सेवाओं के अतिरिक्त चिकित्सकीय परामर्श की सुविधा उपलब्ध होगी।

श्री पांडेय ने कहा कि इसके लिए सभी आरोग्य दिवस सत्रों को चिन्हित कर जिला स्तरीय हब के साथ संबद्ध किया जा रहा है। स्पोक के रूप में यह सेवा प्रत्येक आरोग्य दिवस के सत्रों अर्थात बुधवार और शुक्रवार को दिए जाएगें, जो जिलास्तरीय हब से संबद्ध होंगे। आरोग्य दिवस सत्रों पर चिकित्सकीय परामर्श सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक लिया जा सकेगा। इस कार्यक्रम के संचालन के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें प्रखंड स्तर पर टेलीमेडिसीन हेतु चिह्नित चिकित्सा पदाधिकारी, एएनएम, जीएनएम, सीएचओ, बीएम एंड ई, बीएचएम, बीसीएम और हेल्थ एडुकेटर्स को प्रशिक्षित प्रशिक्षकों द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

श्री पांडेय ने बताया कि टेलीमेडिसीन के माध्यम से उपचारित मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श के अनुरूप निशुल्क दवा उपलब्ध करायी जाएगी। ई-संजीवनी के तहत 37 तरह की जरूरत की दवा उपलब्ध है। यह दवा आरोग्य सत्र दिवसों पर नियमित टीकाकरण के अंतर्गत कार्यरत अल्टरनेट वैक्सीन डिलीवरी के द्वारा भेजा जाएगा। वहीं इस सेवा के शुभारंभ के लिए व्यापक रूप से प्रचार .प्रसार भी होगा। दूसरी ओर आरोग्य दिवस सत्रों पर टेलीकाउंसलिंग के दौरान उच्च जोखिम वाले केसेस जैसे गर्भवती महिलाएं एवं अतिकुपोषित बच्चों इत्यादि के लिए उपर्युक्त रेफरल व्यवस्था कराया जाना है। आवश्यकतानुसार पैथेलॉजिकल सुविधाएं तथा एम्बुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध करायी जाएगी।

सीबीआई की विशेष न्यायलय ने चारा घोटाले के सबसे बड़े मामले में लालू प्रसाद सहित 75 आरोपी को दोषी ठहराया

रांची. राजद सुप्रीमो लालू यादव को सीबीआई की विशेष अदालत ने आज चारा घोटाले के सबसे बड़े मामले डोरंडा कोषागार से 139.5 करोड़ रुपए की अवैध निकासी के मामले में लालू को दोषी करार दिया गया है।मंगलवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने इस मामले में लालू प्रसाद सहित 99 आरोपी में 75 आरोपी को दोषी करार दिया गया और 24 को कोर्ट ने बरी कर दिया है ।सजा पर बिन्दूवार 18 फरवरी को फैसला आयेंगा।

चारा घोटाले से जुड़ा यह पांचवा मामला है. चारा घोटाले में लालू यादव वर्ष 1997 से ही जेल का चक्कर लगा रहे हैं. 30 जुलाई 1997 को पहली बार लालू प्रसाद 135 दिन जेल में रहे. 28 अक्टूबर, 1998 को दूसरी बार 73 दिन जेल में रहे. 5 अप्रैल 2000 तीसरी बार 11 दिन जेल रहे. 28 नवंबर 2000 को आय से अधिक संपत्ति मामले में एक दिन जेल में रहे. 3 अक्टूबर 2013 चारा घोटाले के दूसरे मामले दोषी करार दिए जाने पर 70 दिन जेल में कटा. 23 दिसंबर 2017 को चारा घोटाले से तीसरे मामले में सजा हुई. 24मार्च 2018 को दुमका कोषागार से जुड़े चौथे मामले में सजा हुई, जिसके बाद करीब तीन साल बाद पिछले साल अप्रैल में जेल से बाहर आए.

लोहियावाद जातिवादी राजनीति के कारण संकट में है

हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी यूपी चुनाव के सहारे ही सही परिवारवाद पर बड़ा हमला बोला है और कहा कि राजनीति में परिवारवाद एक बड़ा खतरा है और यह लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुश्मन है। इससे राजनीति में आने वाली प्रतिभा को गंभीर रूप से समझौता करना पड़ता है।

पीएम मोदी राम मनहोर लोहिया और जार्ज फर्नांडीस के नाम की चर्चा करते हुए कहा था कि क्या उन्होंने कभी अपने परिवारों पर कभी जोर नहीं दिया और इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को समाजवादी नेता कहा ।

कल नीतीश कुमार जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। इसी दौरान पत्रकारों ने समाजवाद को लेकर पीएम मोदी की टिप्पणी पर सवाल किया इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी तो कृपा है कि उन्होंने यह बात बोल दी।

हम सब लोग लोहिया जी के ही शिष्य हैं। समाजवाद का निर्माण उन्होंने ही किया और उसे चलाया। हमलोग छात्र जीवन से समाजवाद में हैं। समाजवाद से उसी समय से प्रभावित हैं। राजनीति में परिवारवाद से समाजवाद को खतरा उत्पन्न हो गया है आगे सीएम ने कहा कि कुछ लोगों को समाजवाद से मतलब नहीं है, परिवारवाद से मतलब है और इसका असर समाजवादी विचारधारा पर पड़ रहा है ।

बात बिहार की करे तो लोहियावाद के सहारे लालू और नीतीश कुमार 30 वर्षो से बिहार में शासन कर रहे हैं ।बात लालू के 15 वर्षो के शासन काल की करे तो साधु और सुभाष के कारण सरकार की छवि को जितना नुकसान नहीं पहुंचा उससे कही अधिक नुकसान यादववाद और मुस्लिम तुष्टीकरण से हुआ और इसका असर राज्य के विकास और कानून व्यवस्था पर पड़ा और उसका खामियाजा आज भी लालू परिवार को उठाना पड़ रहा है।2021 के विधानसभा चुनाव में सत्ता के करीब आते आते लालू परिवार इसलिए फिसल गया कि अंतिम चरण में जंगल राज को इस तरह से याद दिलाया गया कि नीतीश कुमार के कुशासन को लोग भूल गये।

यूपी में भी अखिलेश के सत्ता में वापसी को लेकर जो संशय दिख रहा है उसकी वजह भी मुलायम और अखिलेश के शासनकाल का यादववाद और मुस्लिम तुष्टीकरण है जिसके कारण राज्य का कानून व्यवस्था बेपटरी हुआ और इसी को साधने के लिए मोदी कानून व्यवस्था और परिवारवाद के सहारे अखिलेश पर हमला बोल रहे हैं ।

वही बात नीतीश के शासनकाल की करे तो भले ही नीतीश के परिवार के लोग शासन व्यवस्था में प्रत्यक्ष रूप से नहीं दिख रहा है, लेकिन याद करिए 2005 से हाल के दिनों तक पटना का डीएम कुर्मी ही होता था, देश स्तर पर अलग अलग राज्यों में जितने भी कुर्मी अधिकारी थे वो बिहार बुलाया गया और उन्हें अच्छी पोस्टिंग दी गयी ।

इसी तरह नीतीश के शासनकाल में जीतनी भी बहाली हुई आकड़ा बताता है कि नालंदा का प्रतिनिधुत्व हर बहाली में राज्य के अन्य जिलों की तुलना में ज्यादा रहा है इसी तरह नीतीश कुमार के 15 वर्षो के शासन काल में राज्य सरकार में जितने भी महत्वपूर्ण पद हैं वहां कुर्मी का प्रमुखता दी गयी है ।इतना ही नहीं हर सवर्ग में कुर्मी अधिकारियों को प्राइम पोस्टिंग मिली है किसी भी जिले में चले जाये अगर कुर्मी दरोगा या इंस्पेक्टर है देख लीजिए उसकी पोस्टिंग कहां है।

ये अलग बात है कि कुर्मी अधिकारी यादव अधिकारी की तरह बदमिजाज नहीं है बल्कि मिजाज से सरल और सहज हैं इसलिए नीतीश कुमार के जाति आधारित पोस्टिंग को लेकर ज्यादा उबाल नहीं है लेकिन इसका असर गवर्नेंस पर जरुर पड़ा है और नीतीश कुमार के सुशासन के दावे अब हस्यास्पद लगने लगा है।

याद करिए 28 अगस्त 2021 की सुबह मुजफ्फरपुर-पटना मार्ग एनएच-77 पर कुढऩी थाना के फकुली ओपी के निकट वाहन जांच के दौरान ग्रामीण कार्य विभाग, दरभंगा के तत्कालीन प्रभारी अधीक्षण अभियंता (कार्यपालक अभियंता) अनिल कुमार के पास के 67 लाख रुपया बरामद हुआ था सत्ता की हनक देखिए थाने से ही उन्हें जमानत दे दी गयी।

पिछले विधानसभा सत्र के दौरान सत्ता पक्ष के विधायक ही सरकार के भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस के वादे पर सवाल खड़े करते हुए जमकर हंगामा किया था फिर भी सरकारी तंत्र उसे बचाने में लगी रही लेकिन कल देर शाम मुजफ्फरपुर पुलिस अनिल कुमार को गिरफ्तार कर लिया। कहा ये जा रहा है कि 25 फरवरी से जो विधानसभा सत्र शुरु हो रहा है उसमें एक बार फिर यह मुद्दा उठने वाला था क्यों कि विधानसभा द्वारा जो जांच कमिटी बनायी गयी थी उसको विभाग सहयोग नहीं कर रही थी और इसको लेकर कमिटी के सदस्य काफी आक्रोशित थे ।

ये उदाहरण है वैसे भ्रष्टाचार को लेकर नीतीश कुमार के जीरो टाँलरेंस के वादे की पड़ताल करेंगे तो 2005 से 2022 तक भ्रष्टाचार को लेकर निगरानी,आर्थिक अपराध इकाई और विशेष निगरानी विभाग के अधिकारियों पर जो कार्रवाई हुई है उसकी सूची पर गौर करेंगे तो उसमें सबसे कम कुर्मी जाति से आते हैं।

आसीपी सिंह क्या है नीतीश की पार्टी में नम्बर दो की हैसियत रखते हैं और आज डीएम एसपी से लेकर डीएसपी और एसडीओ की पोसिंटग में पैसे उगाही का जो आरोप लगता है निशाने में आरसीपी सिंह है और इससे नीतीश की छवि धुमिल हुई ।चर्या सरेआम है गया के पूर्व डीएम अभिषेक सिंह पर आरसीपी का हाथ था और जब एक्शन की बात आयी तो रातो रात उसे त्रिपुरा विरमित करवा दिया ।

इसलिए लोहिया का समाजवाद परिवाद के कारण संकट में नहीं है जातिवाद के कारण संकट में है ।
लोहिया सर्वण थे कोई पिछड़ी जाति से नहीं आते थे मात्र 23 साल की उम्र में जर्मनी से पीएचडी करने के बाद वे आज़ादी की जंग में कूद गये थे। 60 के दशक में लोहिया ने कांग्रेस और ‘हिंदुस्तानी वामपंथ’ के ब्राह्मणवादी चरित्र पर सवाल करते हुए पहली दफा पिछड़ों के आरक्षण की मांग करते हुए नारा दिया था ‘संसोपा ने बांधी गांठ, पिछड़े पावें सौ में साठ’ वो तो मिल गया लेकिन इसके पीछे जो लोहिया का विचार था वो विचार शासन में आते ही धीरे धीरे खत्म हो गया आज लोहिवाद पूरी तरह से जातिवाद में बदल गया है ऐसा नहीं है कि कांग्रेस के शासनकाल में जातिवाद नहीं था कांग्रेस भी सत्ता और शासन में बने रहने के लिए जमकर जातिवाद किया।

बीजेपी में परिवारवाद नहीं है राजनाथ सिंह से लेकर बीजेपी के जिला स्तर तक पहुंच जाये ढ़ेर सारे ऐसे नेता मिल जायेंगे जो परिवारवाद की वजह से पार्टी में बने हुए हैं वजह परिवार नहीं है वजह जातिगत पहचान है जो परिवारवाद से ज्यादा मजबूत है और इससे राजनीति में आने वाली प्रतिभा को गंभीर रूप से समझौता करना पड़ रहा है।

घर बैठे अपने जमीन का हाल देख सकते हैं

एनआरआई बिहारी इन जमिनी बातें

अपनी जमीन और अपनी माटी से लगाव क्या होता है यह उन लोगों से बेहतर कोई नहीं समझ सकता है जो अपनी धरती से हजारों किमी दूर परदेष में रह रहे हैं। रोजी-रोटी और नाम कमाने के लिए बाहर निकले और विदेषों में अपने दम पर कामयाबी की नित नई दास्तान लिख रहे बिहारी अप्रवासी किस तरह अपने पुरखों की धरोहर को बचाकर रखने के लिए चिंतित है यह जमीनी बातें सीरीज- 5 में देखने को मिली।

जमीनी बातें सीरीज- 5 का आयोजन एन0आर0आई0 बिहारियों की सुविधा के लिए बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका के बिहार फाउंडेषन के साथ मिलकर किया गया। इसमें अमेरिका के विभिन्न प्रांतों में रह रहे बिहार और झारखंड के लोगों के एक दर्जन से अधिक संगठनों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। बिहार फाउंडेषन के अलावा, बजाना, बजाव, बुजु और उत्तरी अमेरिका के मैथिली मंच ने इसमें सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।

2 घंटे तक चले इस कार्यक्रम में 125 से अधिक एन0आर0आई0 बिहारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में भाग लेने को लेकर अप्रवासियों में इस कदर उत्साह था कि क्षमता से अधिक प्रतिभागी होने की वजह से सिर्फ 75 लोग ही एक्टिव रूप से जुड़ पाए जबकि 50 से अधिक अप्रवासियों को पैसिव रूप से जोड़ना पड़ा। इस कार्यक्रम में अमेरिका के विभिन्न शहरों से अप्रवासियों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम को वर्चुअली आयोजित करने की जिम्मेदारी एन0आई0सी को दी गई थी। राज्य सूचना विज्ञान पदाधिकारी श्री राजेष कुमार सिंह के नेतृत्व में एन0आई0सी0 की टीम ने स्वदेषी एप भारत वी0सी0 के जरिए शास्त्रीनगर स्थित सर्वे प्रषिक्षण संस्थान में बैठे अधिकारियों को अमेरिकी अतिथियों को जोड़ा। अपर मुख्य सचिव श्री विवेक कुमार सिंह मसूरी से और सर्वे निदेषक श्री जय सिंह चंडीगढ़ से इस कार्यक्रम में जुड़े हुए थे।

कार्यक्रम का आयोजन रात 10 बजे शुरू हुआ जो रात 12 बजे तक चला। कार्यक्रम की शुरूआत बिहार फाउंडेषन के ईस्ट कोस्ट चैप्टर के चेयरमैन और दरभंगा के मूल निवासी श्री आलोक कुमार के स्वागत भाषण से हुआ। श्री आलोक कुमार ने राजस्व विभाग द्वारा हाल के वर्षों में शुरू की गई ऑनलाइन सेवाओं की तारीफ की और इसके लिए राज्य सरकार और विभाग को धन्यवाद दिया।

बिहार में भूमि राजस्व प्रषासन के ऐतिहासिक पहलुओं खासकर स्थायी बंदोबस्त के संदर्भ पर अपर मुख्य सचिव श्री विवेक कुमार सिंह ने जानकारी दी। बिहार में चल रहे विषेष सर्वेक्षण के मुख्य-मुख्य बातों की जानकारी निदेषक, श्री जय सिंह द्वारा दी गई। ऑनलाइन सेवाओं के बारे में आई0टी0 मैनेजर श्री आनंद शंकर ने संक्षेप में बताया। आखिर में ऑनलाइन सेवाओं और सर्वे पर बनी शॉर्ट डॉक्यूमेंटरी को दिखाया गया।

इंटरएक्षन सेषन में अप्रवासियों द्वारा मुख्य रूप से म्युटेषन, लगान भुगतान, परिमार्जन, सीलिंग, लगान निर्धारण से संबंधित सवाल पूछे गए। कईयों को अपनी जमीन का अता-पता लेना था। सभी का सवाल लेना संभव नहीं था इसलिए आयोजकों द्वारा सीमित अप्रवासियों को ही अपनी बात रखने का मौका दिया गया। कार्यक्रम में 12 अप्रवासियों ने खुलकर अपनी समस्या और सुझाव रखे।

पटना के पोस्टल पार्क इलाके से जाकर अमेरिका के न्यू जर्सी में अपनी आई0टी0 कंपनी चलाने वाले श्री राजेष कुमार का सुझाव था कि ऑनलाइन भुगतान के लिए दिए गए निदेषों में हर जगह हिंदी और इंग्लिष का विकल्प नहीं दिया गया है, खासकर ड्रॉप डाउन में। कहीं हिंदी है तो कहीं अंग्रजी। जिससे उनलोगों को जिन्हेें हिंदी नहीं आती है, लगान भुगतान में दिक्कत होती है।

गोपालगंज के कुचायकोट के रहनेवाले और ऑस्टन शहर निवासी श्री विनय दुबे ने बताया कि म्युटेषन के लिए ऑनलाईन अप्लाई किया था लेकिन अंचल अधिकारी ने रिजेक्ट कर दिया है। गया के अतरी अंचल के रहनेवाले संजीव सिंह की समस्या थी कि दादा ने 1930 में 48 बीघा जमीन खरीदी थी जिसपर लोगों ने कब्जा कर लिया है।

जहानाबाद के काको थाना के श्री अनिल कुमार शर्मा की षिकायत थी कि पुष्तैनी बेलगानी जमीन है जो लगान निर्धारण के लिए भूमि सुधार उपसमाहर्ता के लिए पिछले 2 साल से लंबित है। सीवान निवासी सुनीत कुमार की षिकायत है कि चचेरे दादाजी के नाम से संयुक्त संपत्ति है, अपने नाम पर कैसे चढ़वाया जाए। मधेपुरा के निवासी हर्ष सिंह को आलमनगर के अंचल अधिकारी से षिकायत थी जो उनकी जमीन से स्थानीय लोगों के कब्जे का खाली नहीं करा रहे हैं।

अररिया की मूल निवासी अपराजिता झा को फारबिसगंज अंचल से षिकायत थी कि जमीन खरीदने के समय सब ठीक था, दाखिल-खारिज भी हो गया, अब रसीद नहीं कट रहा है, बताया जा रहा है कि जमीन लालकार्ड का है। विक्रम मिश्रा की समस्या यह थी कि जमाबंदी को ऑनलाइन कराने के लिए पिछले साल ही परिमार्जन में आवेदन लिए थे जो आजतक नहीं हुई है।
बैठक में डेनबर्ग से डॉ अजय झा, प्रख्यात कॉर्डियोलाजिस्ट डॉ अविनाष गुप्ता, न्यू हैंपषायर से मनीष कुमार, नार्थ कैरोलीना से संजय राय, टेक्सॉस से साकेत कुमार, बिहार फाउंडेषन के वेस्ट कोस्ट चैप्टर के अध्यक्ष श्री रंजीत कुमार समेत बड़ी संख्या में अप्रवासियों ने हिस्सा लिया।

जिन लोगों को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल पाया उन्हें सलाह दी गई कि विभाग के ई-मेल पर अपनी समस्या को विस्तार से लिखकर भेजें ताकि विभाग उनको संबंधित अधिकारियों को भेजकर उनका निष्पादन करा सके।

इससे पहले कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अतिथियों का निबंधन कराया गया था। 4 सौ से अधिक अप्रवासियों ने निबंधन कराया था। कुछ लोगों ने अपनी समस्या भी भेजी जिसे सुलझा दिया गया। मुजफ्फरपुर के मुषहरी अंचल के मूल निवासी रूस्तम अली ने दाखिल-खारिज के लिए सितंबर, 21 को आवेदन दिया था जो कर्मचारी के स्तर पर लंबित था। अंचल अधिकारी ने पूछने पर बताया कि कर्मचारी रिपोर्ट मिल गया है, नोटिस पीरियड में है, 25 फरवरी को समय पूरा होते ही वाद का निष्पादन कर दिया जाएगा।

कार्यक्रम के आखिर में अपर मुख्य सचिव ने कहा कि भूमि विवाद में दो पक्ष होते हैं। एक पक्ष आप हैं, लेकिन दूसरे का पक्ष सुने बगैर निर्णय नहीं लिया जा सकता है। अपनी जमीन और अपनी संपत्ति के संरक्षण की प्राथमिक जिम्मेदारी आपकी है। तकनीक की मदद से इस काम में सहूलियत हो रही है। इसका फायदा उठाएं।

बिहार फाउंडेषन ने गुजारिष की इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किए जाएं। ताकि और लोगों की समस्या भी रखी जा सके। सहमति बनी कि अप्रवासियों की भूमि संबंधी समस्या को लेकर जमीनी बातें की श्रृंखला आगे भी आयोजित की जाएगी। आनेवाले अप्रैल/मई में अगली श्रृंखला का आयोजन किया जा सकता है।

बिहार फाउंडेषन अमेरिका में कार्यरत बिहारियों की ऐसा संगठन है जो सरकार के माध्यम से वहां के लोगों की समस्या का समाधान करता है। अध्यक्ष, आलोक कुमार ने बताया कि बिहार के किसी विभाग से बात कर अपने लोगों की समस्या का समाधान निकालने का पहला प्रयास है। जल्द ही फाउंडेषन और विभागों से बात करके अमेरिकी बिहारियों की समस्या का समाधान निकालने का प्रयास करेगा।

अमेरिका में रह रहे बिहारी अप्रवासियों ने षनिवार की देर रात राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों से संवाद किया। इसमें अमेरिका में रह रहे बिहार और झारखंड के वैसे लोगों ने हिस्सा लिया जिनकी यहां जमीन है और जिनको अपनी जमीन के बारे में जानकारी हासिल करनी है। कुछ लोगों ने अपने बिहार दौरे में जमीन से संबंधित समस्या के समाधान के लिए आवेदन दिया था, उन्हें अपनी समस्या का समाधान जानना था।

बैठक में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री विवेक कुमार सिंह, सर्वे निदेषक श्री जय सिंह, भू अर्जन निदेषक श्री सुषील कुमार, चकबंदी के संयुक्त निदेषक श्री नवल किषोर, संयुक्त सचिव कंचन कपूर और श्री चंद्रषेखर प्रसाद विद्यार्थी समेत विभाग के सभी अधिकारी और तकनीकी शाखा के कर्मी उपस्थित थे। इस वर्चुअल बैठक में कोई परेषानी नहीं हो इसके लिए एन0आई0सी0 की पूरी टीम बैठक में उपस्थित थी।

प्रेम एक सुखद अहसास है

प्रेम
एक सुखद अहसास, पर
जिस तक पहुँचने के लिए
पीड़ा एवं वेदना की घाटियों से पड़ता है गुजरना;
फिर भी मुमकिन है
कि यात्रा अधूरी रह जाए,
जिसके अधूरेपन में ही है
उसकी पराकाष्ठा,
उसका उत्कर्ष।

प्रेम नहीं है परीक्षा;
प्रेम है
सम्पूर्ण आनत समर्पण,
सन्देह से परे।

प्रेम नहीं है
पाने का नाम,
प्रेम है
सब कुछ की तथता,
और सब कुछ की तथता का
सम्पूर्ण समर्पण,
उसे दे देने का नाम।

प्रेम है
वेदना की अनुभूति,
उस अनुभूति को भी बार-बार जीने की चाह,
और उन अनुभूतियों को बार-बार जीते हुए
सुख एवं संतुष्टि का अहसास।

प्रेम नहीं है शरीर की चाह,
प्रेम नहीं है उन्नत उरोजों का आकर्षण, और
प्रेम नहीं है
योनि की गहराइयों को मापने वाली कामजन्य वासना!

प्रेम है मस्तक पर चुम्बन,
हाँ, निर्द्वन्द्व, वरद, दीर्घ चुम्बन
जो हमें आश्वस्त करता है!

प्रेम है उरोजों की थाप,
जो बहा ले जाती है हमें
माँ की थपकियों की तरह,
वर्तमान के उस विषम ताप से कहीं दूर
उस दुनिया की ओर,
जिसमें हम विचरण करना चाहते हैं,
जिसमें हम खोना चाहते हैं,
जिसमें हम समा जाना चाहते हैं।

प्रेम है
अपनी सुध-बुध को खोना,
प्रेम है
मुश्किल से मिलने वाला खिलौना।

प्रेम है
खुद को परखना,
प्रेम है
खुद को सिरजना।

प्रेम है
म्यान की तलवार,
प्रेम है
अवलम्ब की पुकार।

प्रेम है
आश्रय की तलाश, और
प्रेम है
आश्रय बन जाने की चाह!

प्रेम है
आँखों के रास्ते दिल में उतर जाना,
प्रेम है
खुरदरे हाथों को सहलाना।

प्रेम है
नि:शब्द होंठों का कम्पन,
प्रेम है
अस्तित्व का विसर्जन।

प्रेम है
असीम में विलीन होने की चाह,
प्रेम है
सामने वाले की परवाह!

जब आँखें बोलने लगतीं,
तो प्रेम है;
जब नज़रें झुकने लगतीं,
तो प्रेम है।

प्रेम है
शून्य में खो जाना,
प्रेम है
आहों में रो जाना।

प्रेम है
आकर्षण में खिंचता चला जाना,
प्रेम है
बँधता चला जाना।

जो बाँध ले
वो प्रेम है,
जो मुक्त कर दे,
वो प्रेम है।

प्रेम है
अनन्त में लीन हो जाना,
प्रेम है
भावों, अनुभूतियों और शब्दों में लीयमान हो जाना;
प्रेम है
नि:शब्द समर्पण,
प्रेम है
नि:शर्त समर्पण!

निःशब्द हो जाना ही
प्रेम है,
निर्वाक हो जाना ही
प्रेम है।

प्रेम है
‘प्रेम’ का मान,
प्रेम है
प्रेमिका का सम्मान!

अगर ऐसा नहीं, तो
प्रेम अधूरा है।

प्रेम #Prem

पुलवामा अटैक का मुख्य आरोपी अभी पकड़ से बाहर है

आज 14 फरवरी है प्यार को पाने का दिन वो प्यार जिसमें घृणा की कोई जगह नहीं है और इंसान अपने प्यार को पाने के लिए सब कुछ दाव पर लगा देता है । वही दूसरी और आज पुलवामा अटैक की तीसरी पुण्यतिथि भी है जो जताता है कि इंसान किस हद तक पागल हो गया है धर्म के नाम पर ,कौम के नाम ,और छद्म राष्ट्रवाद के नाम पर।

कल से सोशल मीडिया पर  एक मीम चल रहा है  सेना की वर्दी में खड़ा एक नौजवान वैलेंटाइन डे के मौके पर गिफ्ट खरीद रही लड़कियों से पूछ रहा है आज क्या है लड़की कह रही है वैलेंटाइन डे, सैनिक उदास हो जाता है बहना याद करो आज क्या हुआ था ,इस मीम के सहारे क्या याद दिलाना चाह रहे हैं यही ना कि आज हमारे  40 सपूत शहीद हो गये लेकिन अच्छा होता कि आप यह मीम बनाते कि पुलवामा अटैक  के पीछे कौन है , किसने रची थी ये साजिश, कहां से आया था आरडीएक्स अगर मास्टरमाइंड मौलाना मसूद अजहर  ही था तो पुलवामा अटैक के तीन वर्ष हो गये मौलाना मसूद अजहर को इसकी सजा मिले इसके लिए तीन वर्ष के दौरान क्या कार्रवाई हुई है जो कौम सवाल करना करना छोड़ देता है उस कौम के होने का कोई मतलब नहीं है ।

 आज भेल ही सुबह से हमारे उन 40 शहीद जवानों के मंजार पर आसू बहाने लोग पहुंच रहे हैं लेकिन सच्चाई यही है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पुलवामा आतंकी अटैक केस में जो 13,500 पन्नों का जो चार्जशीट दायर किया गया है वो सिर्फ कोरी कहानी है ,उस पन्ने में अटैक से जुड़ी कई सवालों का जवाब नहीं है मसलन इतनी बड़ी साजिश के पीछे देश में कौन बैठा हुआ था जम्मू से जब हमारे जवान का काफिला श्रीनगर के लिए चला तो पल पल की जानकारी आतंकी को कौन मुहैया करा रहा था ,छोटे मोटे दुकान चलाने वाले ,कार मिस्त्री देहारी का काम करने वाला इतनी बड़ी साजिश को अंजाम कैसे दे सकता है ।

आरडीएक्स कहां से आया, गाड़ियों के काफिला को सुरक्षित ले जाने को लेकर जो रणनीति बनायी गयी उस रणनीति में कहां चूक हुई और फिर इतनी बड़ी साजिश बिना विभीषण  के सम्भव है क्या। 

ऐसे कई सवाल है इस मामले एनआईए ने 19 आरोपी को बनाया है इनमें से 6 आतंकियों की मौत हो चुकी है इस आतंकी हमले को आदिल अहमद डार नाम के आत्मघाती आतंकी ने अंजाम दिया था. जो मारा गया था. आदिल के साथ मिलकर हमले के लिए आईईडी बनाने वाला उमर फारूक भी मारा गया है

1—-सात  पाकिस्तानी को भी आरोपी बनाया गया है

जैश-ए मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर को एनआईए ने अपनी चार्जशीट में सबसे पहला आरोपी बनाया है. मसूद के अलावा  उसके भाई अब्दुल राउफ और मौलाना अम्मार को भी आरोपी बनाया गया है. मौलाना अम्मार बालाकोट में जैश के आतंकियों को ट्रेनिंग देता है,इनके अलावा इस्माइल, उमर फारूक, कामरान अली और कारी यासिर के नाम भी चार्जशीट में हैं. ये चारों भी पाकिस्तानी हैं. इनमें से उमर, यासिर और कामरान  मारे जा चुके हैं।

12 कश्मीरी हैं. कश्मीरी आतंकियों में आदिल डार, सज्जाद अहमद भट्ट और मुदस्सिर अहमद खान मारे जा चुके हैं.

 शाकिर ने हमले के लिए कार उपलब्ध कराई थी, साथ ही विस्फोटक, आईईडी भी उपलब्ध कराया था. अब्बास राथर ने ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए हमले में मदद की थी बस इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने वालो की यही सूची है घटना के पीछे जो भी वजह हो सकती है वह सब पाकिस्तान में बैठे मसूद अजहर पर थोप दिया गया है मसलन आरडीएक्स मसूद ने उपलब्ध कराया ,ट्रेनिंग मसूद ने ही करवाया ।

गायघाट आफ्टर केअर होम मामले की हुई सुनवाई डीएसपी स्तर के अधिकारी करे मामले की जांच-हाईकोर्ट

पटना हाई कोर्ट ने पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई करते हुए अनुसंधान को डी एस पी रैंक की महिला पुलिस अधिकारी से कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई में जांच रिपोर्ट भी तलब किया है।

कोर्ट का यह भी कहना था कि बिहार स्टेट लीगल सर्विसेज ऑथोरिटी, यदि पीड़िता को जरूरत हो ,तो जो मदद हो सके पीड़िता को उपलब्ध करवाए।

कोर्ट ने राज्य के समाज कल्याण विभाग समेत सभी संबंधित विभागों को अपने अपने हलफनामा को रिकॉर्ड पर लाने को भी कहा है, जिसमें पीड़िता द्वारा 4 फरवरी, 2022 का बयान भी शामिल हो।

राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि दोनों पीडितों की ओर से महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज हो गई है। एक का पी एस केस नंबर – 13/2022 है और दूसरे का पी एस केस नंबर -17/ 2022 दर्ज कर लिया गया है।

पीड़िता की संबंधित अधिकारियों के समक्ष जांच भी की गई। महाधिवक्ता ने पीड़िता द्वारा दिये गए बयान के उद्देश्य पर संदेह भी जताया है। उनका कहना था कि पीड़िता ने केअर होम को वर्ष 2021 के अगस्त महीने में ही छोड़ दिया था, लेकिन वह पहली बार जनवरी, 2022 में आरोप लगा रही है।

पीड़िता की अधिवक्ता मीनू कुमारी ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट ने महिला विकास मंच द्वारा दायर हस्तक्षेप याचिका को भी सुनवाई हेतु स्वीकार कर लिया है। हाई कोर्ट इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रहा है।
हाई कोर्ट ने इस याचिका को पटना हाई कोर्ट जुवेनाइल जस्टिस मोनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रजिस्टर्ड किया है। कमेटी में जस्टिस आशुतोष कुमार चेयरमैन हैं, जबकि जस्टिस अंजनी कुमार शरण और जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय इसके सदस्य हैं। कमेटी ने उक्त मामले में 31 जनवरी को अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है।

चाय स्टांल का स्टार्टअप सफल हुआ तो देश भर में 300 स्टाल खोलेगे आईअईटी के छात्र

बिहार के आरा के रमना मैदान में रोजाना लगने वाली एक चाय दुकान इन दिनों काफी चर्चा में है उस चाय दुकान का नाम है आईआईटियन चाय वाला । नाम के अनुरूप ही यह टी स्टाल आईआईटी और विभिन्न संस्थानों में पढ़ाई के रहे टेक्नोलॉजी के छात्रों का आइडिया है।मद्रास आईआईटी में डेटा साइंस में बीएससी प्रथम वर्ष के छात्र और टी-स्टाल खोलने वाले रणधीर कुमार बताते हैं, यह उनका स्टार्टअप है। उनके साथ देश के अलग-अलग संस्थानों में पढ़ रहे चार दोस्तों ने रोजगार सृजन के लिए यह स्टार्टअप शुरू किया। इसमें खड़गपुर आईआईटी में प्रथम वर्ष के छात्र जगदीशपुर के अंकित कुमार, बीएचयू में पढ़ रहे इमाद शमीम और एनआईटी सूरतकल में पढ़ रहे सुजान कुमार का आइडिया लगा है।

कोचिंग में पढ़ाई के दौरान हुई दोस्‍ती
रणधीर बताते हैं कि वे लोग पहले एक ही कोचिंग संस्थान में पढ़ते थे और वहीं उनकी दोस्ती हुई। उन लोगों ने भविष्य में कुछ ऐसा करने का निर्णय लिया था, जिससे कुछ लोगों को रोजगार देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना सकें। एक टी-स्टाल में दो से तीन लोगों को रोजगार मिला है। अभी आरा में एक स्टाल है और इसी महीने यहां बमपाली और बाजार समिति में स्टाल खुलने वाला है। एक टी-स्टाल जल्द वे लोग पटना में बोरिंग रोड में खोल रहे हैं।

साल के अंत तक देश में 300 स्‍टाल खोलने की योजना
उनकी योजना साल के अंत तक देशभर में 300 स्टाल खोलने की है। स्टार्टअप को आगे बढ़ाने के लिए वे वित्तीय संस्थानों से मदद लेंगे। रणधीर बताते हैं कि इस स्टार्टअप से उनकी पढ़ाई बिल्कुल प्रभावित नहीं हो रही है, यह तो बस एक आइडिया है तो उन लोगों ने धरातल पर उतार दिया, बाकी काम वहां स्टाफ को करना है। पिता मनोज पांडेय गोपालगंज में बिहार पुलिस में एएसआई हैं और बीच-बीच मे आकर मॉनिटरिंग करते रहते हैं।

पर्यावरण संरक्षण से जोड़ेंगे स्टार्टअप को
रणधीर बताते हैं कि भविष्य में वे अपने स्टार्टअप को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ेंगे। अभी वे लोग स्टाल पर किसी तरह का प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करते हैं और केवल कुल्हड़ में चाय देते हैं। भविष्य में वे लोग उपयोग में लाये गए कुल्हड़ को हाई प्रेसर पानी से धोने के बाद उसमें पौधा का बीजारोपण कराएंगे और उसे भी स्टाल के जरिये काफी कम कीमत पर ग्राहकों को देंगे।

10 फ्लेवर में मिलती है चाय
आईआईटियन चाय दुकान में एक-दो नहीं, बल्कि 10 फ्लेवर में चाय मिलती है। इनमें, निम्बू, आम, सन्तरा, पुदीना, ब्लूबेरी आदि फ्लेवर की चाय लोग पसंद करते हैं। चाय बना रहे कर्मचारी ने बताया कि 10 रुपये में यहां कुल्हड़ में चाय मिलती है। चाय देने से पहले वे लोग कुल्हड़ को चूल्हे की आग में गर्म करते हैं, जिससे इसमें अनोखा स्वाद आ जाता है। स्टाल पर चाय की चुस्की ले रहे जिला जदयू मीडिया सेल के अध्यक्ष भीम सिंह बबुआन ने कहा कि युवाओं में सोच बदल रही है, यह स्टाल उसी सकारात्मक सोच का नतीजा है।

स्टाल की डिजाइन है खास
टी-स्टाल की सबसे बड़ी खासियत दुकान की डिजाइनिंग है। केवल 16 वर्ग फीट में पहिये पर स्टाल इस तरह से डिजाइन की गई है कि चाय बनाने से लेकर जरूरत का सारा सामान इसमे समा जाए। केवल कुल्हड़ को गर्म करने के लिए चूल्हा को स्टाल से अलग रखना पड़ता है।

कन्हैया को लेकर राजद सहज नहीं राजद कांग्रेस गठबंधन दाव पर

कन्हैया को लेकर राजद सहज नहीं
इस बार राजद कार्यकारणी की बैठक में नीतीश और मोदी से कही ज्यादा कांग्रेस छाया रहा। तेजस्वी कांग्रेस के साथ रिश्ते को लेकर खुल कर अपनी बात रखी उन्होंंने कहा कि कांग्रेस के बिना देश मे विपक्ष की मजबूती सम्भव नही है,पर क्षेत्रीय दलों को राज्यों में ड्राइविंग सीट पर रखना होगा,बिहार में सबसे बड़ी पार्टी राजद है,बिहार में राजद को ही कमजोर किया जा रहा है,ऐसा नही चलने वाला।

बिहार विधानसभा में हमने कांग्रेस को 70 सीटें दी ,हर लोग कहते है यह बहुत ज्यादा था और महागठबंधन की सरकार नहीं बनी इसमें कांग्रेस का परफॉर्मेंस आड़े आया ।,राष्ट्रीय मुद्दों पर मेरी पार्टी कांग्रेस के साथ है,बिहार में भी कांग्रेस को साथ देना चाहिए,राजद ने हमेशा त्याग किया है,बीजेपी को रोकने के लिए राजद को समर्थन करना चाहिए।हर क्षेत्रीय पार्टी ने एनडीए के साथ कभी न कभी समझौता किया,राजद ने कभी भी एनडीए के साथ समझौता नहीं किया ।राजद के इस चरित्र का सम्मान होना चाहिए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा ने तेजस्वी के बयान पर कहा है कि बिहार में धर्मनिरपेक्ष ताकतों के साथ कांग्रेस हमेशा खड़ी रही है और 1991 और 2000 में कांग्रेस के कारण ही उनकी सरकार बनी और इस वजह से बिहार में कांग्रेस को अपना आधार वोट भी दाव पर लगाना पड़ा फिर भी कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता की रक्षा के लिए हमेशा खड़ी रही ।

कांग्रेस विधायक शकील अहमद खा का कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान राजद की भूमिका ऐसा लग रहा था जैसे राजद बीजेपी को मदद कर रही है जो गठबंधन विधानसभा चुनाव के दौरान हुआ वह गठबंधन लोकसभा चुनाव के दौरान हुआ रहता तो परिणाम कुछ और ही हुआ होता है ।

रही बात विधानसभा चुनाव में 70 सीट देने का तो देख लीजिए कैसा कैसा सीट कांग्रेस को दिया गया वो भी नामांकन शुरु होने के बाद कहा जा रहा था कि इस सीट पर आप चुनाव लड़िए ।

कांग्रेस के परफॉर्मेंस की बात हो रही है राजद को जवाब देना चाहिए ना अब्दुल बारी सिद्दीकी सहित 7 मुस्लिम उम्मीदवार क्यों चुनाव हार गये । बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी ऐसे में बेहतर है कि मिल बैठकर बात करे कांग्रेस हमेशा धर्मनिरपेक्षता को बचाये रखने के लिए कुर्बानी देती रही है क्षेत्रीय दलों को भी उसका सम्मान करना चाहिए ।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अचानक ऐसा क्या हुआ जो राजद को इस तरह का बयान देना पड़ा,बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले राजनीतिक टीकाकार का मानना है कि समस्या कांग्रेस नहीं है समस्या कन्हैया है लोकसभा चुनाव में भी गठबंधन को लेकर जो समस्या खड़ी हुई थी उसके पीछे भी वजह कन्हैया ही था राहुल गांधी चाहते थे कि राजद कन्हैया का समर्थन करे लेकिन राजद इसके लिए तैयार नहीं हुआ।

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस जिस तरह का गठबंधन चाह रही थी उसके लिए राजद तैयार हो जाता तो फिर लोकसभा का जो चुनाव परिणाम सामने आया वो स्थिति नहीं रहती है। इसकी वजह यह है कि राजद के जो थिंक टैंक हैं वो शुरु से ही कन्हैया को लेकर कुछ ज्यादा ही सजग है उनका मानना है कि कन्हैया की बिहार की राजनीति में सक्रियता बढ़ी तो तेजस्वी को नुकसान हो सकता है।

और इसी सोच के तहत राजद काम कर रही है दूसरी और कन्हैया का मुस्लिम वोटर पर अच्छा पकड़ है समस्या यह भी है इसलिए राजद चाहती है कि कन्हैया को लेकर कांग्रेस अपने रुख में बदलाव करे और विधानसभा उप चुनाव में और विधान परिषद के चुनाव में जो समझौता नहीं हुआ उसकी वजह यही है ।

पुरानी सड़क के मैटीरियल से चकाचक हो सकती है राज्य और देश की सड़कें

पुरानी सड़क के मैटीरियल से चकाचक हो सकती है राज्य और देश की सड़कें बिहार के इंजीनियर के शोध में आया सामने जी है सड़क बनाने में रिक्लेम एसफोर्टिंग पेवमेंट एक ऐसी तकनीक है, जिससे सड़क की लागत आधी हो जाएगी।

पुरानी और खस्ताहाल सड़कों को उखाड़कर उसी मैटीरियल से उन्हें चकाचक कर दिया जाएगा। इस तकनीक के जरिए आरएपी मशीन में पुराने मैटीरियल को डालकर उसे सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने लायक बनाया जाता है।

पूरानी सड़क के मैटीरियल से बन सकती है अच्छी सड़के

उन्होने बताया कि इसके व्यापक इस्तेमाल के लिए शासन स्तर पर भी नीति बनाई जाने की जरूरत है। बता दें कि वर्तमान में विभाग को सिंगल लेन सड़क की लागत 80 से 82 लाख रुपये प्रति किमी पड़ती है। मगर सड़कों को खोद कर उनके मैटीरियल से सड़क बनाए जाने से ये लागत घटकर 28 से 30 लाख रुपये हो जाएगी।

कई राज्यों में इस तकनीक से सड़कों का निर्माण हो रहा है। डा चौधरी ने आगे बताया कि पुरानी सड़क को उखाड़कर उसी सामग्री से सड़क बनाने से सिर्फ लागत ही कम नहीं होगी। दरअसल, इससे सड़कों के दोनों किनारों पर स्थित प्रतिष्ठानों और आवासों को भी लाभ मिलेगा।

बार-बार डामरीकरण से सड़कों का तल किनारों के तल से ऊपर उठ जाता है जिससे बरसात के दिनों मे आसपास के घरों और प्रतिष्ठानों में पानी भर जाता है। सड़कों को खोदकर उन्हीं के मैटीरियल से जब दोबारा बनाया जाएगा तो उनका तल समान रहेगा। व्यापक इस्तेमाल से पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा।

राज्य के शिशु रोग विशेषज्ञ उच्च जोखिम वाले नवजातों की उचित देखभाल के लिए होंगे प्रशिक्षितः मंगल पांडेय

पटना। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य में समय पूर्व जन्म लेने वाले, कम वजन वाले एवं बीमार नवजातों के उचित उपचार के लिए शिशु रोग विशेषज्ञों एवं स्टाफ नर्स को प्रशिक्षित करने पर विशेष जोर है। जिलों में प्रशिक्षित करने के लिए 20 शिशु रोग विशेषज्ञों, जो एम्स एवं आईजीआईएमएस, पटना समेत विभिन्न मेडिकल कॉलेजों से चयनित किये गए हैं, को 14 से 16 फरवरी तक तीन दिवसीय ट्रेनिंग एम्स, पटना में दिया जाएगा।

पांडेय ने कहा कि प्रशिक्षण में राज्य स्तरीय प्रशिक्षकों को विभिन्न प्रकार के तकनीकी उपकरणों को संचालित करने के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले मेडिकल सुविधाओं की जानकारी दी जायेगी। ट्रेनिंग राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके वरीय चिकित्सक देंगे। यहां से प्रशिक्षित होने वाले ट्रेनर अलग-अलग जिलों में जाकर 41 नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाई (एनबीएसयू) में कार्यरत चिकित्सक एवं स्टाफ नर्स को प्रशिक्षण देंगे।

पांडेय ने कहा कि ऐसा कर राज्य में नवजातों को उच्च जोखिम की स्थिति से निकाला जा सकता है। अरवल एवं शिवहर को छोड़कर शेष 36 जिलों में चयनित प्रथम रेफरल इकाई में एनबीएसयू की स्थापना की गई है, जहां बीमार नवजातों का उपचार एवं स्थिरीकरण की जरूरत पड़ने पर उन्हें विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयां व नवजात गहन चिकित्सा इकाई रेफर किया जाता है।

बिहार सरकार द्वारा 14 चक्कों के ट्रक के जरिये गिट्टी व बालू ढुलाई मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई शुरु

पटना हाई कोर्ट में बिहार ट्रक ऑनर एसोसिएशन व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने इन मामलों पर सुनवाई की।

इस याचिका पर बिहार सरकार द्वारा 14 चक्कों के ट्रक के जरिये गिट्टी व बालू आदि की ढुलाई पर 16 दिसंबर, 2020 को ही एक अधिसूचना जारी कर प्रतिबंध लगा दिया गया था।इसी मामलें को याचिकाएं दायर कर राज्य सरकार के निर्णय challenge किया गया।

राज्य सरकार द्वारा रोक के आदेश के विरुद्ध संबंधित पक्ष ने मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी ये मामला उठाया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 3 जनवरी, 2022 को इसे वापस पटना हाई कोर्ट के समक्ष भेज दिया है। साथ ही साथ सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 8 सप्ताह के भीतर निपटारा करने को भी कहा है।

इस मामले पर हाई कोर्ट में अब 22 फरवरी,2022 को फिजिकल रूप से सुनवाई की जाएगी।। इस बीच राज्य सरकार समेत अन्य सम्बंधित सभी पक्षों को अपना अपना पक्ष लिखित तौर पर कोर्ट के समक्ष दायर करने का निर्देश दिया है।

बीजेपी जदयू में शह मात का खेल जारी बिहार विधान परिषद का चुनाव टला

यूपी में जारी सियासी घमासान का असर अभी से ही बिहार की राजनीति पर दिखने लगा है खबर ये आ रही है कि बिहार विधान परिषद चुनाव को मार्च तक के लिए टाल दिया गया है।जबकि पहले से जो तैयारी चल रही थी उसके अनुसार 10 मार्च को यूपी सहित जिन पांच राज्यों की वोटों की गिनती होनी थी उसी दिन बिहार के 24 विधान परिषद सीटों की गिनती होना तय हुआ था लेकिन अब इसकी संभावना खत्म हो गयी है।

चुनाव आयोग से जो खबर क्षण कर आ रही है वो खबर यह है कि बिहार विधान परिषद के मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले आयोग की राज्य के सभी डीएम से जो संवाद होना था उसकी तिथि निर्धारित नहीं हो पायी है जबकि सभी जिले में मतदाता सूची बन कर तैयार है लेकिन जब तक चुनाव आयोग मतदाता सूची को प्रकाशित करने का आदेश निर्गत नहीं करती है तब तक चुनाव की घोषणा नहीं हो सकती है।

वही 25 फरवरी से बिहार विधानसभा का बजट सत्र शुरु हो रहा है जो 31 मार्च तक चलेगा ऐसे में इस अवधि में चुनाव हो इसके लिए सरकार तैयार नहीं है उनका मानना है सत्र चलने की वजह से विधायक प्रचार अभियान में कैसे शामिल होगा।
वही दूसरी और बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय चुनाव की तैयारी शुरु कर दी है और 11 फरवरी तक नगर निकाय के सीमांकन का कार्य पूरा करके आदेश है। जिस स्तर पर राज्य निर्वाचन आयोग तैयारी में जुटा है उससे यह लग रहा है अप्रैल मई में बिहार में नगर निकाय का चुनाव हो जायेगा।

बिहार विधान परिषद के चुनाव में नगर निकाय के सदस्य भी वोटर होते हैं ऐसे में ये भी खबरें आ रही है कि बीजेपी चाहती है कि नगर निकाय चुनाव के बाद बिहार विधान परिषद का चुनाव हो वैसे भी एक माह के लिए किसी भी वोटर को उसके वोटिंग राइट से वंचित करना गैर संवैधानिक माना जायेगा क्यों कि इस समय बिहार के अधिकांश नगर निकाय भंग है ।

वही हाईकोर्ट से भी एक खबर आ रही है कि पंच और सरपंच की और से एक याचिका दायर किया गया है जिसमें बिहार विधान परिषद के चुनाव में उन्हें वोटिंग राइट नहीं होना गैर संवैधानिक बताया है। हाईकोर्ट शीघ्र ही इस मामले की सुनवाई करने जा रही है वैसे खबर ये आ रही है कि इस याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार पंच और सरपंच को वोटिंग राइट मिले इस पर सहमति जाता सकता है अगर यह स्थिति बनी तो बिहार विधान परिषद का चुनाव जून तक के लिए टल जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।

राजनीतिक गलियारों से जो खबरें आ रही है कि बिहार विधान परिषद के 24 सीटों पर चुनाव होना है जो बिहार विधान परिषद में बहुमत के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है ऐसे में नीतीश कुमार की कोशिश है कि इस चुनाव को जितना दिन हो सके टाला जाये।

बीजेपी नीतीश कुमार की इस रणनीति को समझ रही है इसलिए चुनाव की घोषणा से पहले सीटों का बंटवारा कर लिया और नगर निकाय चुनाव तक विधान परिषद का चुनाव टल जाये इसकी पूरी कोशिश में बीजेपी लगी हुई है क्यों कि बीजेपी का मानना है कि नगर निकाय में जो जीत कर आएगा उनमें बीजेपी समर्थकों की संख्या ज्यादा होगी और इसी के काट के लिए जदयू की ओर से ही पंच और सरपंच को वोटिंग राइट मिले इसके लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करवाया गया है ताकि संतुलन बना रहे वैसे इस बार के पंचायत चुनाव की बात करे तो राजद की पकड़ काफी मजबूत है और इसका एहसास जदयू और भाजपा दोनों को है वही यूपी चुनाव के बाद क्या स्थिति बनती है इस पर भी जदयू की विशेष नजर है क्यों कि जिस तरीके से भाजपा जदयू पर हमलावर रुख अख्तियार किये हुए हैं उससे नीतीश खासे नाराज है और नीतीश कुमार यूपी चुनाव के बाद बड़े फैसले ले सकते हैं और इसके लिए कांग्रेस से बातचीत भी चल रही है।

बिहार का पहला धूप घड़ी पर चोरों ने किया हाथ साफ 1871 में लगी थी घड़ी

बिहार के रोहतास जिले के डेहरी शहर में 1871 में स्थापित बिहार का पहला ऐतिहासिक धूप घड़ी को मंगलवार रात चोर उखाड़ कर ले गए। बुधवार सुबह जब लोग मॉर्निंग वॉक के लिए निकले तो कुछ लोगों की नजर धूप घड़ी पर पड़ी, तो देखा कि धूप घड़ी की धातु की प्लेट वहां से गायब है।

लोगों ने इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी। पुलिस मौके पर पहुंच इसकी जांच कर रही है। डेहरी ऑन सोन के एनीकट रोड में आज भी लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुरानी धूप घड़ी का उपयोग उस रास्ते से आने-जाने वाले लोग समय देखने के लिए करते थे। जिस तरह कोणार्क मंदिर के पहिए सूर्य की रोशनी से सही समय बताते हैं। ठीक उसी प्रकार यह धूप घड़ी भी काम करती थी।
1871 में स्थापित की गई थी धूप घड़ी

1871 में स्थापित राज्य की यह ऐसी घड़ी है जिससे सूर्य के प्रकाश से समय का पता चलता है। तब अंग्रेजों ने सिंचाई विभाग में कार्यरत कामगारों को समय का ज्ञात कराने के लिए इस घड़ी का निर्माण कराया गया और एक चबूतरे पर स्थापित किया गया था। इसी वजह से इसका नाम धूप घड़ी रखा गया। इस घड़ी में रोमन और हिन्दी के अंक अंकित है, उस समय नहाने से लेकर पूरा कामकाज समय के आधार पर होता था।

श्रमिकों के लिए घड़ी स्थापित की गई थी
घड़ी के बीच में धातु की त्रिकोणीय प्लेट लगी है। कोण के माध्यम से उस पर नंबर अंकित है। शोध अन्वेषक के अनुसार यह ऐसा यंत्र है, जिससे दिन में समय की गणना की जाती है। इसे नोमोन कहा जाता है। यंत्र इस सिद्धांत पर काम करता है कि दिन में जैसे-जैसे सूर्य पूर्व से पश्चिम की तरफ जाता है। उसी तरह किसी वस्तु की छाया पश्चिम से पूर्व की तरफ चलती है। सूर्य लाइनों वाली सतह पर छाया डालता है, जिससे दिन के समय घंटों का पता चलता है।

बिहार में सात मार्च से शुरु होगा विशेष टिकाकरण अभियान

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि नियमित टीकाकरण की गतिविधियों को और भी सुदृढ़ करने के लिए स्वास्थ्य विभाग कृतसंकल्पित है। इस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु विभाग ने ‘सघन मिशन इंद्रधनुष’ अभियान के तहत शत-प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य रखा है।

राज्य में इस अभियान की शुरुआत इस वर्ष सात मार्च से की जाएगी। अभियान तीन चक्रों में संपन्न कराया जाएगा। इस अभियान के माध्यम से, जो बच्चे एवं महिलाएं कोरोनाकाल में नियमित टीकाकरण से छूट गए हैं, उनलोगों को टीकाकृत किया जायेगा।

श्री पांडेय ने कहा कि इस अभियान के तहत बच्चों व गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकृत किया जाएगा। पूर्व में यह अभियान सात फरवरी से चलाया जाना था, मगर कोराना की वजह से इसमें बदलाव किया गया है। आगामी सात मार्च (प्रथम चक्र) से सघन मिशन इंद्रधनुष अभियान शुरू किया जाएगा।

वहीं दूसरा चक्र चार अप्रैल और तीसरा चक्र दो मई को शुरू होगा। तीनों चक्रों में यह अभियान लगातार सात दिनों तक अवकाश वाले दिन भी चलेगा। शत-प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति को लेकर इस अभियान में वैक्सीन रोकथाम योग्य बीमारियों के खिलाफ बच्चों व महिलाओं को टीका लगाया जाएगा।

श्री पांडेय ने कहा कि जिले में विभाग का लक्ष्य है कि एक भी बच्चा टीकाकरण कार्यक्रम से वंचित नहीं रहे। जिन इलाकों में टीकाकरण कम हुआ है, उन इलाकों को चिह्नित कर टीकाकरण का कार्यक्रम तैयार करना है। यह अभियान केंद्र सरकार की ओर से संचालित है।

इसमें यह लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि देश के 90 प्रतिशत बच्चों को पूर्ण टीकाकरण की सुविधा दी जाए, जिससे उन्हें विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाया जा सके।

नगर निगमों की वित्तीय स्वायत्तता पर हाईकोर्ट सख्त सरकार को कहा जबावी हलफनामा दायर करे

पटना हाईकोर्ट ने नगर निगमों की वित्तीय स्वायत्तता के मामलें पर राज्य सरकार को तीन सप्ताह में जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।चीफ जस्टिस संजय करोल की डिवीजन बेंच ने आशीष कुमार सिन्हा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि इस अवधि में हलफनामा दायर नहीं किया गया,तो नगर विकास व आवास विभाग के प्रधान सचिव को पाँच हज़ार रुपया दंड के रूप में भरना होगा।

याचिकाकर्ता की ओर से बहस करते हुए अधिवक्ता मयूरी ने कोर्ट को बताया कि निगमों के फंड पर राज्य का नियंत्रण हैं,जहां नगर विकास व आवास विभाग ये तय करता है कि इस निगम के धनराशि का उपयोग कैसे किया जाए।साथ ही इस धनराशि को किस मद में रखा जाए।

जबकि अन्य राज्यों में नगर निगम को आवंटित धनराशि का उपयोग करने का अधिकार नगर निगम को ही हैं।साथ किस मद में पैसा कैसे खर्च करना हैं,इसका निर्णय भी नगर निगम ही लेता है।

नगर निगमों को जो भी फंड मुहैया कराया जाता हैं,जो कि एक विशेष कार्य के लिए होता है।उन्हें कोई अधिकार नहीं होता कि वे यह तय कर सके कि आवंटित धनराशि को कैसे खर्च किया जाए।

अधिवक्ता मयूरी ने कोर्ट को बांटी कि बिहार निगम क़ानून के सेक्सन 127 के अंतर्गत नगर निगम को विशेष सेवा देने के बदले टैक्स लगाने का अधिकार दिया गया है।लेकिन नगर विकास व आवास विभाग ने धीरे धीरे इन सारी वित्तीय शक्तियां ले लिया।
उदाहरण के लिए नगर निगम को सन्चार टावर और उससे सम्बंधित निर्माण पर पहले टैक्स लगाने का अधिकार था,लेकिन अब ये अधिकार नगर विकास व आवास विभाग को मिल गया है।

साथ ही नगर निगम ने 1993 से ही संपत्ति व अन्य करों के पुनर्विचार करने के लिए लिख रहा है, लेकिन इस सम्बन्ध में कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की गई, जिससे नगर निगम के राजस्व की स्थिति सुधर सके।

इन कारणों से नगर निगम की वित्तीय स्वायत्तता बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।नगर निगमों को छोटे छोटे काम के लिए सरकार का मुंह देखना पड़ता है।

इस मामलें पर अब अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।

हिजाब के बहाने सियासत साधने कि हो रही है कोशिश

हिजाब के बहाने /

कर्नाटक के शिक्षा संस्थानों में लड़कियों के हिजाब के विरोध में जो मुहिम चलाई जा रही है, वह बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है। कुछ कॉलेजों के यूनिफार्म ड्रेस कोड के विरोध के तहत कुछ मुस्लिम लड़कियों ने हिजाब पहनने का अपना अधिकार नहीं छोड़ा तो कुछ हिन्दू लड़के भगवा ओढ़कर कॉलेज पहुंचने लगे।

कॉलेजों में ‘जय श्रीराम’ के नारे भी लगे और कहीं-कहीं ‘अल्लाहु अकबर’ का उद्घोष भी हुआ। वहां धार्मिक विभाजन तेजी से बढ़ा है और शिक्षा संस्थान जंग के मैदान में तब्दील होते जा रहे हैं। घटनाक्रम को देखकर साफ लग रहा है कि यह सब धार्मिक आधार पर लोगों के ध्रुवीकरण की सोची-समझी राजनीति के तहत सुनियोजित रूप से किया जा रहा है।

मैं स्वयं बुर्का या पर्दा प्रथा का समर्थक नहीं हूं लेकिन कोई अगर धर्म के नाम पर या व्यक्तिगत इच्छा से परदे में रहना चाहता है तो उसकी आस्था और इच्छा का सम्मान किया जाना चाहिए। वैसे ज्यादातर मुस्लिम औरतें हिजाब नहीं पहनतीं। जो पहनना चाहती हैं उन्हें इसे उतारने के लिए मजबूर करना उनकी आस्था का अपमान भी है और उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन भी।

विविधताओं से भरे हमारे देश में हज़ारों तरह के पहनावे हैं। कहीं-कहीं तो औरतों के सामने गज-गज भर के घूंघट में रहने की भी मजबूरी है। समस्या बस मुस्लिम औरतों के हिजाब से है। यह हिजाब गलत है तो उसके खिलाफ आवाज़ मुस्लिम औरतों के बीच से ही उठनी चाहिए। उठती भी रही है। एक लोकतांत्रिक देश में कोई भगवाधारी डरा-धमकाकर उन्हें हिजाब उतारने का आदेश नहीं दे सकता।

संस्कृतियों, आस्थाओं, वेशभूषा और भाषाओं की असंख्य दृश्य विविधताओं के बीच एकात्मकता का अदृश्य धागा सदा से हमारे देश की खूबसूरती रही है। सत्ता के लिए जिस तरह से इस धागे को तोड़ने की निरंतर कोशिशें हो रही है उससे हम सचेत नहीं हुए तो वह दिन दूर नहीं जब देश की बुनियाद ही बिखर जाएगी।

लेखक==ध्रुव गुप्ता ,पूर्व आईपीएस अधिकारी

जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध ।

जब से यूपी सहित पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा हुई है उसके बाद से देश में क्या चल रहा है उस पर जरा गौर करिए बहुत कुछ समझ में आ जायेगा ।कर्नाटक में जो कुछ भी हो रहा है ऐसा तो नहीं है कि नये सत्र का शुभारंभ हुआ है और कॉलेज में नये छात्र-छात्राएं आयी है इसलिए ड्रेस को लेकर विवाद शुरू हो गया । या फिर मुस्लिम लड़कियाँ अचानक हिजाब पहनकर कॉलेज जाना शुरु कर दी है जिसे देख छात्र भड़क गये ।

ऐसा कुछ भी नहीं है तो फिर यह मुद्दा अचानक उठा क्यों यह समझने की जरूरत है ,यूपी के कैराना में दूसरे चरण में चुनाव है लेकिन अमित शाह प्रचार अभियान की शुरुआत कैराना से करते हैं ।लेकिन कैराना के बाद जो माहौल बनना चाहिए था वो नहीं बन पाया, फिर ओवैसी पर हमला होता है इससे भी जो बात बननी चाहिए थी वो नहीं बन पाई ,फिर शाहरुख खान का मामला उछाला गया लता दी पर थूक फेका बहुत कोशिश हुई रंग देने कि लेकिन इसकी हवा तो चंद घंटों में ही निकल गयी ।

हिजाब पर विवाद उसी की अगली कड़ी है कर्नाटक के एक कांलेज में इस तरह घटना घटी और मीडिया इसको ऐसे हवा दिया कि यह मामला पूरे कर्नाटक में फेल गया , इसके पीछे का खेल यही है कि इसकी आग यूपी में कैसे फैले।

यह सियासत है और इस सियासत को समझने कि जरूरत है 2014– 2015 में लव जिहाद और गौ रक्षा के नाम पर पूरे देश में खूब खेला हुआ और फिर एक दिन अचानक चर्चा से गायब हो गया, क्या यह सब अब देश में नहीं हो रहा है, ऐसा नहीं है ना यही सियासत है लेकिन इस तरह के सियासत का क्या नुकसान हो रहा है शायद आज आपको समझ में नहीं आ रहा है ।

हिजाब का विरोध करने वाले कौन है जो कल तक वेलेंटाइन डे का विरोध कर रहे थे ,जिन्हें लड़कियों के जींस पहने पर आपत्ति है,जिनको लड़कियों के उच्च शिक्षा ग्रहण करने पर आपत्ति है, जो महिलाओं को घर की चारदीवारी में देखना चाहते हैं।

इसलिए हिजाब का मसला सिर्फ मुस्लिम लड़कियों से जुड़ा हुआ नहीं है यह मुद्दा उस सोच से जुड़ा हुआ है जो संघ का नजरिया है लड़कियों को लेकर, आज भले ही सियासी जरुरतों के अनुसार मुस्लिम लड़कियां इसकी शिकार हो रही है कल आप भी इसके शिकार होंगी यह तय मानिए।

क्यों कि सरकार किसी की भी रहे अब लोक लज्जा भी नहीं रह गया वोट के लिए ये किसी का भी सौदा कर सकता है मासूम लड़कियों के बलात्कार के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे राम रहीम को 21 दिन छुट्टी दिया है ये स्थिति है इसलिए जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध ।

21 फरवरी से हाईकोर्ट मे शुरु होगा फिजिकल सुनवाई

आगामी 21 फरवरी से पटना हाई कोर्ट में फिजिकल सुनवाई पुनः शुरू होगी। कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले 4 जनवरी, 2022 से हाई कोर्ट में सुनवाई पूर्ण रूप से वर्चुअल चल रही थी।

इस बार पूर्व की भांति सप्ताह में चार दिन पूर्ण रूप से फिजिकल सुनवाई की जाएगी और सप्ताह में एक दिन वर्चुअल सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये की जाएगी।

कोविड को लेकर जारी गाइडलाइंस का पूरी तरह से पालन किया जाएगा। इस मामले में चीफ जस्टिस समेत पटना हाई कोर्ट के अन्य जजों के साथ एक बैठक आहूत की गई थी।

इस बैठक में पटना हाई कोर्ट के तीनों अधिवक्ता संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में पटना हाई कोर्ट के एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा, लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय कुमार ठाकुर व राजीव कुमार सिंह समेत अन्य लोगों ने भाग लिया।

फिलहाल ई- पास धारियों को ही कोर्ट परिसर में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। इसके साथ ही कोविड को लेकर समय- समय पर जारी प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।

कैंसर पीड़ित इंग्लैंड के रग्बी खिलाड़ी लुक ग्रेनफुल्ल शॉ 27 देशों की यात्रा पर भारत पहुंचा

जब हौसला बुलंद हो तो मंजिल पाना आसान होता है इसी कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं इंग्लैंड के रग्बी खिलाड़ी लुक ग्रेनफुल्ल शॉ, जो कैंसर पीड़ित होते हुए भी लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से साइकिल द्वारा पूरे विश्व की यात्रा पर निकले हैं।

लुक ग्रेनफुल्ल शॉ ने अपने शहर ब्रिस्टाल के नाम से यात्रा का नाम ब्रिस्टाल टू बीजिंग रखा है। इस माह तक वे 27 देशों की यात्रा कर पाकिस्तान के बाद भारत पहुंचे हैं। मंगलवार को लुक ग्रेनफुल्ल बिहार के नालंदा जिले पहुंचे।

उन्होंने नालंदा के प्राचीन भग्नावशेष का अवलोकन किया। इसके बाद वे चीन जायेंगे, जहां इनकी यात्रा संपन्न होगी। इनके हौसले को देखते हुए कोलकाता के तीन युवक इनका साथ दे रहे हैं।

लुक ग्रेनफुल्ल ने बताया कि 24 साल के उम्र में उन्हें पता चला था कि उन्हें कैंसर हो गया है, इसके बाद उन्होंने अपने जीवन से निराश नहीं होते हुए साइकिलिंग कर पूरे देश की यात्रा करने का मन बनाया । धीरे-धीरे कैंसर चौथा स्टेज में पहुंच गया है। बाबजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारा है।

उन्होंने बताया कि इस यात्रा से जो भी राशि इकट्ठा होगी, उसे कैंसर अस्पताल में दान देंगे। उनके साथ चल रहे कोलकाता के युवक ने बताया कि कैंसर जैसे रोग से पीड़ित होने के बावजूद इन्होंने बहुत बड़ा फैसला लिया है, जो दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत है। अब तक यह तुर्की ,उज़्बेकिस्तान, पाकिस्तान की यात्रा साइकिल से ही कर चुके हैं। इन्हें जब पता चला कि कैंसर हो गया है तो इन्होंने घर में बैठने के बजाए यात्रा करने को सोचा।

गायघाट, पटना शेल्टर होम की घटना के खिलाफ महिला संगठनों का प्रतिवाद मार्च

गायघाट: पटना शेल्टर होम की घटना के खिलाफ महिला संगठनों का प्रतिवाद मार्च

पटना के गायघाट शेल्टर होम में लड़कियों के साथ यौन हिंसा, बलात्कार, मार-पीट एवं अमानवीय व्यवहार के खिलाफ महिला संगठनों की ओर आज 8 फरवरी 2022 को बुद्ध स्मृति पार्क से महिलाओं का आक्रोषपूर्ण प्रतिवाद मार्च निकाला गया।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि गायघाट बालिका सुधार गृह में 200 से अधिक निसहाय बच्चियाँ रहती है। उनके देख-रेख, भोजन, दवा तथा अन्य सुविधा के ऊपर सरकार के पैसे खर्च होते है, जिसका पूरा दुरूपयोग समाज-कल्याण विभाग सेे मिलीभगत करके शेल्टर होम की प्रबंधन के द्वारा किया जा रहा है।

एक सप्ताह पहले गायघाट शेल्टर होम से किसी तरह एक लड़की निकल कर अपने साथ और अन्य लड़कियों के साथ वहाँ की प्रबंधक वंदना गुप्ता के द्वारा किस तरह मार-पीट, दुव्र्यवहार और यौन शोषण करवाया जाता है। मीडिया तथा पटना के डी.एम. एवं एस.पी. को सुनाई।

इस घटना ने फिर से एक बार बिहार का सिर शर्म से झुका दिया है। 2018 में टीस द्वारा उजागर मुजफ्फरपुर बालिका सुधार गृह काण्ड के खिलाफ महिला संगठनों के आंदोलन के बदौलत दोषियों को सजा दिलाई गई।

लेकिन मुख्यमंत्री नीतीष कुमार ने तो उस घटना पर भी पर्दा डालने की पूरी कोषिष की इस तरह गायघाट शेल्टर होम की घटना के इतने दिन बित जाने के वाबजूद भी मुख्य दोषी वंदना गुप्ता अभी तक गिरफ्तार नहीं हुई है, बल्कि समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बिना पीड़िता से मिले फर्जी जांच रिपोर्ट के आधार पर पीड़िता को ही बदचलन कहकर मामले को दबाने की कोषिष की जा रही है।

इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है अपने स्तर से जाँच करने की बात कही है। ये स्वागत योग्य कदम है।
बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओं, महिला सषक्तिकरण का झूठा प्रचार करनेवाले मुख्यमंत्री को शर्म करनी चाहिये। इस सरकार मे ंमहिलाएँ असुरक्षित है। दबंगों, सामंतों और भ्रष्टाचारियों का बोलवाला है। इसके खिलाफ समाज के सभी वर्गों को आगे आना होगा।

महिला संगठनों की सरकार से माँग है कि-

  1. समाज कल्याण विभाग की तरफ से महिला के चरित्र का मूल्यांकन और परिचय उजागर करने वाला बयान अखबारों में आया है यह गलत है और इस पर कार्रवाई की जाए
  2. गायघाट रिमांड होम मामले में संपूर्ण मामले की जांच पटना हाईकोर्ट के सिटिंग जज की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाकर की जाए.
  3. रिमांड होम में लड़कियों को जेल की तरह बंद रखने के बजाए सुधार गृह के रूप में लाने के लिए कदम उठाना जरूरी है. मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड ने इसे सिद्ध किया है.इसके लिए गृह के भीतर स्कूल, मानसिक रूप से बीमार के लिए डॉक्टर का इंतजाम किया जाए. आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार की ट्रेनिंग की बात तो होती है लेकिन यह कहीं मुकम्मल नहीं है. इसकी व्यवस्था की जाए.
  4. सुधार गृह में जांच-पड़ताल और संवासिनो से समय≤ पर बातचीत करने के लिए महिला संगठनों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की टीम नियमित समय अंतराल में भेजी जाए.
  5. महिला संगठनों ,मानवाधिकार संगठनों को अधिकार हो कि वे जब चाहें,सुधार गृह में जा सकें. इसकी अनुमति देने की प्रक्रिया सरल बनाई जाए।

बिहार में बीजेपी ने जदयू के खिलाफ शुरु किया छद्ग युद्ध

बीजेपी बिहार विधान परिषद चुनाव में भी छद्म युद्ध के सहारे जदयू को हराने में जुटा

कल देर शाम मधुबनी से एक फोन आया बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर बीजेपी और जदयू में गठबंधन तो हो गया ना ,सीट की भी घोषणा हो गयी और मधुबनी सीट जदयू के खाते में गया है, लेकिन यहां तो बीजेपी के विधान पार्षद घूम रहे हैं और कह रहे हैं बीजेपी यहां से चुनाव लड़ेगी अभी थोड़ी देर पहले बात हुई तो महासेठ बोले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष से कल भी हमारी बात हुई है वो बोले हैं कि चुनाव लड़ना है।

इस तरह की खबर सिर्फ मधुबनी से ही नहीं आ रही है इस तरह की खबर वैसे अधिकांश सीटों से आ रही है जहां जदयू चुनावी मैदान में है, ठीक उसी तरीके से जैसे 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान चिराग की पार्टी से बीजेपी के नेता चुनाव लड़े थे ।

बीजेपी पर खास नजर रखने वाले पत्रकारों का भी मानना है कि बीजेपी बिहार विधान सभा चुनाव की तरह ही बिहार विधान परिषद के चुनाव में भी छद्म युद्ध के सहारे इस चुनाव में भी जदयू को हराना चाह रही है।

और इसी रणनीति के तहत बिहार विधान परिषद चुनाव से ठीक पहले वैसे तमाम बीजेपी के नेता को पार्टी में शामिल करवाया गया जो एलजेपी के टिकट पर जदयू को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाये थे ।

संदेश साफ है जदयू बीजेपी में पहले वाली बात नहीं रही आप जदयू का विरोध भी करते हैं तो कोई बात नहीं है आपकी वापसी तय है।

जानकार बता रहे हैं कि पिछले दो माह से जाति जनगणना और विशेष राज्य के दर्जा को लेकर बीजेपी जिस तरीके से जदयू पर हमलावर है इसके पीछे बीजेपी की रणनीति यह है कि पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच ये संदेश जाता रहे कि जदयू से रिश्ता पहले जैसा नहीं है ऐसे में आप निर्णय लेने को स्वतंत्र है।

सोमवार को बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल जिस अंदाज में विशेष राज्य की मांग पर सवाल खड़े करते हुए जिन बिन्दू पर फोकस किये हैं उससे कही ना कही यह संदेश देने कि कोशिश है कि मंत्रिमंडल में भी जो बीजेपी के मंत्री है उन्हें काम करने नहीं दिया जा रहा है उन्होंने लिखा है कि शाहनवाज हुसैन अच्छा प्रयास कर रहे हैं पर पूरे मंत्रिमंडल का सहयोग आवश्यक है।

इसी तरह जनसंख्या नीति पर सवाल खड़े करते हुए नीतीश पर सीधा हमला बोला है संजय जायसवाल ने लिखा है कि आज भी हम जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए कोई अभियान नहीं चला रहे हैं जबकि इसमें भी बिहार पूरे देश में सबसे ज्यादा फिसड्डी है।
इन सबके पीछे भी बीजेपी की रणनीति यही है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच संदेश साफ जाये कि जदयू से 2005 वाला रिश्ता नहीं रहा है ऐसे में गठबंधन धर्म उतना मायेने नहीं रखता है ।
इसलिए विधान परिषद चुनाव तक यह खेल बीजेपी की ओर से जारी रहेगा ।

गायघाट रिमांड होम मामले में सुनवाई टली

पटना हाईकोर्ट में पटना के गाय घाट स्थित उत्तर रक्षा गृह ( आफ्टर केअर होम ) की घटनाओं पर सुनवाई 11फरवरी, 2022 को होगी। हाई कोर्ट ने इस याचिका को पटना हाई कोर्ट जुवेनाइल जस्टिस मोनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रजिस्टर्ड किया है।


इस मामलें की सुनवाई चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ कर रही है।आज पीड़िता की ओर से एक हस्तक्षेप याचिका दायर किया गया।लेकिन इसकी प्रति राज्य सरकार को प्राप्त नहीं होने के कारण सुनवाई 11 फरवरी, 2022 तक टाल दी गई।

इस कमेटी में जस्टिस आशुतोष कुमार अध्यक्ष हैं, जबकि जस्टिस अंजनी कुमार शरण और जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय इसके सदस्य हैं। कमेटी ने उक्त मामले में 31 जनवरी को अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है।

इस केअर होम में 260 से भी ज्यादा महिलाएं रहती हैं। कमेटी की एक आपात बैठक बुलाई गई थी। बेसहारा महिलाओं को लेकर अखबार में छपी खबर पर बैठक में चर्चा की गई।

समाचारों के अनुसार पीड़िता व केअर होम में रहने वाली उसके जैसी और अन्य को दवा देकर जबरन अनैतिक कार्यों के लिए मजबूर किया जाता है।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि केअर होम में रहने वाली पीड़िताओं को भोजन और बिस्तर की सुविधाएं भी नहीं मुहैया कराई जाती है।

बहुत महिलाओं को गृह को छोड़ने की अनुमति भी नहीं दी जाती है। कमेटी द्वारा अन्य बातों के अलावा ऐसा देखा गया कि पीड़िता द्वारा आश्चर्यजनक देने वाला खुलासा यह भी किया गया है कि अजनबियों को रिश्तेदार के रूप में बहाना बनाकर आने दी जाती है।ये आकर बेसहारा महिला को उठाते हैं।
ये इनके जीवन और मर्यादा को और जोखिम में डाल देता है। यह भी आश्चर्य जनक है कि पीड़िता द्वारा किये गए खुलासे के बाद भी कोई एफ आई आर दर्ज नहीं किया गया है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने अनुपालन के संबंध में हलफनामा दायर करने को भी कहा था। इस मामले पर अब 11 फरवरी, 2022 को सुनवाई की जाएगी।

विशेष राज्य के दर्जा को लेकर जदयू बीजेपी आमने सामने

बिहार को विशेष राज्य दर्जा को लेकर जारी जदयू द्वारा जारी बयानबाजी के बीच बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने अपने फेसबुक पेज के सहारे जदयू पर हमला बोला है और कहां है कि

नीचे दिया गया डाटा यह बताने में सक्षम है कि केंद्र सरकार बिहार का कितना ध्यान रखती है ।
महाराष्ट्र की आबादी बिहार से एक करोड़ ज्यादा है फिर भी बिहार को महाराष्ट्र के मुकाबले 31हजार करोड़ रुपए ज्यादा मिलते हैं ।बंगाल भी बिहार की भांति पिछड़ा राज्य है पर उसके मुकाबले भी बिहार को 21हजार करोड़ रुपए ज्यादा मिलता है ।

आकड़ा बता रही है कि बिहार को विशेष राज्य से ज्यादा मदद मिल रही है


दक्षिण भारत के राज्यों की हमेशा शिकायत रहती है कि केंद्र सरकार हमें कम पैसे देती है क्योंकि हमने आबादी को 70 के दशक में ही केंद्र की नीतियों के कारण रोक लिया था । अब केंद्र सरकार इसको अपराध मानती हैं।
जीएसटी से सबसे ज्यादा फायदा बिहार जैसे राज्य को हुआ है । पहले जिस राज्य में उद्योग स्थापित होते थे उनको अलग से कमाई होती थी ।अब इस कमाई का बडा़ हिस्सा उपभोक्ता राज्य में बंटता है जिसके कारण बिहार को 20हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त फायदा हुआ है ।
बिहार को अगर आगे बढ़ाना है तो सरकार को ये लक्ष्य रखने ही होंगे ।

बिहार को केन्द्र से पूरी मदद मिल रही है

1) बिहार सरकार को हर हालत में उद्योगों को बढ़ावा देना होगा। जब तक हम औद्योगिक नीतियां लाकर नए उद्योगों को बढ़ावा नहीं देंगे तब तक ना हम रोजगार देने में सफल हो पाएंगे और ना हीं बिहार की आय बढ़ेगी। शाहनवाज हुसैन अच्छा प्रयास कर रहे हैं पर पूरे मंत्रिमंडल का सहयोग आवश्यक है।

2) जहां भी संभव हो वहां प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप होनी चाहिए। उद्योग लगाने वालों को विलेन समझने की मानसिकता बिहार को कहीं का नहीं छोड़ेगी । बड़ौदा बस स्टैंड विश्व स्तर का है पर ऊपर की मंजिलों में दुकानें खोलकर सारी राशि की भरपाई कर ली गई और गुजरात सरकार का एक पैसा भी नहीं लगा ।वैसे ही गांधीनगर के पूरे साबरमती फ्रंट का डेवलपमेंट उसीमें एक निश्चित भूमि प्राइवेट हाथों में देकर अनेक पार्क सहित पूरे फ्रंट को विकसित करने का कीमत निकाल लिया गया ।

3) हम 6 वर्षों में भी प्रधानमंत्री जी के दिए हुए पैकेज का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाए हैं।अभी भी दस हजार करोड रुपए से ज्यादा बकाया है ।एक छोटा उदाहरण मेरे लोकसभा का रक्सौल हवाई अड्डा है जिसके लिए प्रधानमंत्री पैकेज में ढाई सौ करोड़ रुपए मिल चुके हैं पर बिहार सरकार द्वारा अतिरिक्त जमीन नहीं देने के कारण आज भी यह योजना रुकी हुई है।
प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना में भी बिहार को हजारों करोड़ रुपए मिलने हैं । अगर हमने भूमि उपलब्ध नहीं कराया तो ये किस्से कहानियों की बातें हो जाएंगी।

4) केंद्र सरकार की योजनाओं का समुचित उपयोग करना होगा ।जैसे बिहार सरकार के जल नल योजना में केंद्र की 50% राशि लगी है जिसका इस्तेमाल हम पंचायती राज की अन्य योजनाओं में कर सकते थे और जल नल योजना की राशि सीधे जल संसाधन विभाग से ले सकते थे। पिछले वित्तीय वर्ष में 6 हजार करोड़ की राशि बिहार सरकार को आवंटित की गई थी पर जल नल योजना के मद में हमने यह पैसे नहीं लिए।इस तरह की राशियों का सही उपयोग हमें करना होगा।

5) जनसंख्या नियंत्रण के लिए हमें स्वयं काम करना होगा ।केवल यह सोच कि समाज स्वयं शिक्षा के साथ जनसंख्या को नियंत्रित कर लेगा, के चक्कर मे बहुत ही देर हो जाएगी। आज भी हम जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए कोई अभियान नहीं चला रहे हैं जबकि इसमें भी बिहार पूरे देश में सबसे ज्यादा फिसड्डी है।


6) अगर केरल के अस्पताल 100 बेड जोड़ते हैं तो प्रति हजार व्यक्ति में इसका इजाफा दिखता है। हम 200 बेड भी जोड़ते हैं तो 300 बच्चे पैदा करने के कारण वह नीति आयोग के आंकड़े में कहीं नहीं दिखता और हम अपनी कमी दूर करने के बजाय नीति आयोग की शिकायत करते हैं ।


7) जब हमने एक अच्छे लक्ष्य के लिए गुजरात की भांति 15 हजार करोड़ रुपए की तिलांजलि दी है तो सरकारी राशि का उपयोग होटल और बस स्टैंड जैसी योजनाओं में सैकड़ों करोड़ खर्च करके भवन निर्माण विभाग को खुश करने के बजाय गरीबों के कल्याणकारी योजनाओं में होना चाहिए। पीपीपी मोड में इन सब चीजों को बनाने से सरकार का एक पैसा भी नहीं लगेगा उल्टे उसकी आमदनी बढ़ेगी। वैसे भी फाइव स्टार होटल बनाना सरकार का काम नहीं है।


2020 में एनडीए सरकार का गठन आत्मनिर्भर बिहार के 7 निश्चय के आधार पर हुआ था । हमें इस मूल मुद्दे से कभी भटकना नहीं चाहिए

भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद की स्मारकों की दुर्दशा मामलें में आज भी हुई सुनवाई

पटना हाईकोर्ट भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद की स्मारकों की दुर्दशा के मामलें में दायर जनहित पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की। विकास कुमार की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की डिविजन बेंच ने सुनवाई करते हुए बिहार विद्यापीठ के सम्बन्ध में दायर हलफनामा पर असंतोष जाहिर किया।

कोर्ट ने पटना के डी एम को निर्देश दिया कि बिहार विद्यापीठ में हुए अतिक्रमण का विस्तृत ब्यौरा पेश करें।इसमें अतिक्रमणकारियों के नाम,इस सम्बन्ध में विभिन्न अदालतों में सुनवाई के लिए लंबित मामलों और उनके नाम,जो इन भूमि पर अपना दावा करते हैं।

साथ ही हाई कोर्ट ने
बिहार विद्यापीठ से जुड़े विवादित भूमि की खरीद बिक्री पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया है । कोर्ट ने बिहार विद्यापीठ के तमाम ज़मीन के स्वत्व सम्बन्धित कागज़ात पटना डीएम कार्यालय को हस्तगत करने का निर्देश विद्यापीठ की प्रबन्ध समिति को दिया है ।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पटना के बांस घाट स्थित डा राजेंद्र प्रसाद की समाधि स्थल और बिहार विद्यापीठ के हालात का जायजा लेने के लिए याचिकाकर्ता अधिवक्ता विकास कुमार को पटना के जिलाधिकारी के साथ भेजा था।

उन्होंने कोर्ट को वहां की वस्तुस्थिति से अवगत कराया।कोर्ट ने पटना के जिलाधिकारी को डा राजेंद्र प्रसाद के बांस घाट स्थित समाधि स्थल के सौंदर्यीकरण व विकास के लिए योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने बिहार विद्यापीठ के प्रबंधन समिति की कार्यशैली पर नाराजगी जताई।जीरादेई स्थित डॉ राजेन्द्र प्रसाद के म्यूज़ियम संग्रहालय हेतु उनके निजी भूमि को राज्य सरकार को हस्तगत किये जाने के मामले में डीएम सिवान को चार दिनों के भीतर हलफनामा दायर करने का भी निर्देश है ।

जीरादेई सड़क से स्मारक स्थल तक जाने के लिए रेलवे लाइन के नीचे से भूमिगत रास्ता बनाने हेतु डीआरएम वाराणसी को पार्टी बनाते हुए रेलवे को जीरादेई में स्थल निरीक्षण कर एक्शन प्लान बनाने निर्देश दिया है ।

रेलवे के अधिवक्ता सिद्धार्थ प्रसाद ने कोर्ट को बताया कि इस सिलसिले में वाराणसी रेल डिवीजन के अफसरों की अगुवाई में एक समिति गठित हो गयी है, जो स्थल निरीक्षण कर सिवान ज़िला प्रशासन के साथ बैठक करेगी ।

इस बैठक के बारे में जानकारी मामले की अगली सुनवाई 11 फरवरी को दी जाएगी ।इस मामले पर अब अगली सुनवाई 11 फरवरी,2022 को की जाएगी।

कैसा भारत चाहिए आपको

रविवार का दिन खेती,मित्र और परिवार के बीच इस तरह उलझ कर रहा है कि लता दी के सम्मान में क्या हो रहा उससे पूरी तरह से अनभिज्ञ रह गये ,लेकिन 150 किलोमीटर के सफर के दौरान लता दी के गीत के सहारे उनसे जरुर जुड़े रहे फिर भी मन बैचेन था क्या हो रहा है लता दी के सम्मान में।


देर शाम पटना पहुंचे तो लता दी से जुड़ी खबरें पढ़ना शुरू किया बात टीवी की करे तो टीवी पर समाचार देखना कब बंद कर दिये मुझे भी ठीक से याद नहीं है।
इसलिए अखबार की एक एक रिपोर्ट पढ़ना शुरु किये वैसे लता दी का जाना मुझे तो बहुत भाया सत्य तो यही है कि जो आया है उसको जाना है हर किसी को ऐसे ही जाना चाहिए। कुछ ऐसा छोड़ कर जो आपको पीढ़ी दर पीढ़ी याद रखे मन में यह सब चल ही रहा था की इसी दौरान एक खबर पर मेरी नजर पड़ गयी ।

शाहरुख खान लता दी से शव पर थूक फेका है और इस खबर को लेकर हंगामा खड़े करने कि कोशिश चल रही है शुरुआत में एक दो पोस्ट दिखा लेकिन रात होते होते इस तरह का पोस्ट ट्रेंड
होना शुरु हो गया । कुछ देर बाद वजह भी समझ में आने लगा था एक तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा था जिसमें लता दी के पार्थिव शरीर के सामने शाहरुख खान दुआ कर रहा है और उसका पीए हाथ जोड़ कर प्रार्थना कर रही है ।इस तस्वीर के सहारे यह संदेश दिया जा रहा था कि यही भारत है स्वभाविक है आज जिस मिजाज की राजनीति चल रही है उसमें इस तरह की तस्वीर उनके उद्देश्य को नुकसान पहुंचा सकता है ।

वैसे पिछले कुछ वर्षो से देश में हिन्दू मुसलमान को लेकर जो चल रहा है पहली बार मन अंदर से बहुत व्यथित हो गया लता दी के विदाई पर भी ये लोग हिन्दू मुसलमान के बीच घृणा पैदा करने का मौका निकाल ही लिया। कोई लिखता है ये तो हमारे सनातन धर्म पर हमला है, कोई लिखता है इस्लाम संगीत को सही नहीं मानता है इसलिए शाहरुख लता दी के शव पर थूक कर चला गया।


अभी भी कोशिश जारी है कैसे इस मुद्दे को लेकर देश में आग लग जाये, पता नहीं ये लोग देश को कहां ले जाना चाहते हैं घृणा ऐसी आग है जो एक बार मनुष्य को लग गयी तो फिर हिन्दू मुसलमान तक ही सीमित रहेंगा ऐसा होता नहीं है ।इस आग के लपेटे में धीरे धीरे उसका खुद का समाज और परिवार आयेगा ही इतिहास इसका गवाह है ।

हमारी आपकी मुसलमानों से कहां भेट होती है सामान्य तौर पर चप्पल के दुकान पर ,मीट मुर्गा की दुकान पर ,गाड़ी बनाने वाले गैरेज पर ,कपड़े सिलने वाले दुकान पर ,गाड़ी के ड्राइवर के रूप में मुलाकात होती है, इन सब जगहों के अलावे मेरी मुलाकात मुस्लिम अधिकारी, नेता और पत्रकार से भी होता है।

धर्म को लेकर उसकी अपनी सोच है और धर्म के मामले में आप उसे कट्टर भी कह सकते हैं लेकिन ये भी सही है कि धर्म ने उन्हें दान और ईमानदारी का जो पाठ पढ़ता है उस पर आज भी बहुसंख्यक मुसलमान अमल कर रहा है ।एक दो नहीं एक दर्जन से अधिक ऐसे अधिकारी को मैं जानता हूं जो घूस लेना हराम समझते हैं ईद के मौके पर जिस तरीके वो अपने समाज के गरीब लोगों को दान देता है कभी सपने में भी हिन्दू समाज सोच भी सकता है,कट्टरता की वजह से उसको जो नुकसान हो रहा है उसे पूरी दुनिया देख रहा है आप अपने अंदर झाकिए ना आप कहां थे कहां पहुंच गये हैं ।

याद करिए हर गांव में एक ठाकुरबाड़ी हुआ करता था जहां साधु संत आकर ठहरते थे सत्संग होता था
धर्म पर चर्चा होती थी एक से एक संत आते थे हर ठाकुरबारी में धर्म और शास्त्र से जुड़ी पुस्तकालय हुआ करता था।
कभी हरिद्वार से तो ,कभी बनारस से .तो कभी देवघर से धर्म के जानकार ठाकुरबाड़ी पर आते थे ठहरते थे और प्रवचन होता था आज अधिकांश ठाकुरबाड़ी का हाल यह है कि तीनों समय भगवान को भोग नहीं लग पा रहा है जिसके पूर्वज ठाकुरबाड़ी को जमीन दान में दिये थे उनके परिवार वाले जमीन वापस ले लिये हैं ।

मुसलमान क्या कर रहा है कहां जा रहा है जाने दीजिए जैसा करेगा वैसा भरेगा आ हम आप कहां जा रहे हैं उस पर जरा गौर करिए ना महिला है तो हिन्दू धर्म बची हुई है, घर और मंदिर में आरती और घूप भी जल जा रहा है ।

लेकिन21 सदी की लड़कियों से ये भी उम्मीद छोड़ दीजिए हाल तो यह हो गया है कि अब गांव में भी छठ करने वाली नहीं मिल रही है एक एक महिला आठ से दस घर वालों का पूजा कर रही है।

ऐसी बहुत सारी बाते हैं जिस पर सोचने कि जरुरत है ।हिन्दू धर्म में अब बचा क्या है कर्मकांड, कहां है नैतिक मूल्य ,कहां है सत्य। सनातन धर्म को इन मुसलमानों से खतरे में नहीं है हमारे आपकी वजह से खतरे में है ये तो मुसलमान आ गया जो मंदिर मंदिर की बात भी हो रही है नहीं तो ये मंदिर कब तोड़ कर हमलोग होटल बना देते कह नहीं सकते।

खुल गया बिहार फिर भी सावधान रहने की जरूरत है

#Covid19 कोरोना की स्थिति की समीक्षा की गई। कोरोना संक्रमण की स्थिति में सुधार को देखते हुए 8वीं कक्षा तक के सभी विद्यालय 50 प्रतिशत क्षमता के साथ तथा 9वीं एवं ऊपर की कक्षाओं से संबंधित सभी विद्यालय एवं महाविद्यालय तथा कोचिंग संस्थान शत-प्रतिशत उपस्थिति के साथ खुल सकेंगे।

सभी सरकारी कार्यालय प्रतिदिन सामान्य रूप से खुलेंगे। केवल टीका प्राप्त आगंतुकों को ही कार्यालय में प्रवेश अनुमान्य होगा।

सभी दुकानें, प्रतिष्ठान, शॉपिंग मॉल एवं धार्मिक स्थल सामान्य रूप से खुल सकेंगे। सभी पार्क एवं उद्यान प्रातः 6 बजे से अपराह्न 2 बजे तक खुलेंगे। सिनेमा हॉल, क्लब, जिम, स्टेडियम, स्वीमिंग पूल, रेस्टोरेंट एवं खाने की दुकानें (आगंतुकों के साथ) 50 प्रतिशत क्षमता के साथ खुल सकेंगी।

जिला प्रशासन की पूर्वानुमति से सभी प्रकार के सामाजिक, राजनीतिक, मनोरंजन, सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजन अपेक्षित सावधानियों के साथ आयोजित किए जा सकेंगे। विवाह समारोह, अंतिम संस्कार/श्राद्ध कार्यक्रम अधिकतम 200 व्यक्तियों की उपस्थिति के साथ आयोजित किये जा सकेंगे।

हम सभी बिहारवासियों को कोविड के कारण अभी भी सावधानी बरतने की जरूरत है। मास्क के उपयोग के साथ ही सामाजिक दूरी का पालन करना नितांत आवश्यक है।

फिल्म स्पेशल 26 की तरह आईटी अधिकारी बन ठीकेदार को लाखों का लगाया चूना

फिल्म स्पेशल 26 की कहानी याद है आपको अक्षय कुमार और अनुपम खेर नकली सीबीआई ऑफिसर बनकर राजनीतिज्ञों तथा व्यवसायियों के काले धन को लूटने के लिए छापा मारता है।ठीक उसी तरीके से बिहार के लखीसराय जिले के कबैया गांव के रहने वाले बालू कारोबारी के घर आयकर अधिकारी बन कर आता है और लाखों रुपये लेकर चंपत हो जाता है। क्या है पूरा मामला जरा आप भी समझ लीजिए

लखीसराय में फर्जी आयकर अधिकारी (आईटी अफसर) बनकर बालू ठेकेदार के घर लूट को अंजाम देने के मामले में लखीसराय पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है और पुलिस ने सभी आरोपी को लूट के पैसे के साथ गिरफ्तार कर लिया है।
लखीसराय एसपी की माने तो इस गैग का सरगना चंदन कुमार है जो पेशे मेकेनिकल इंजीनियर है और इस तरह से कई अपराधों का अंजाम दे चुका है ।

आईटी अधिकारी बन ठीकेदार को लाखों का लगाया चूना

घटना 31 जनवरी की दोपहर की है जब कबैया थाना क्षेत्र में रहने वाले बालू कारोबारी संजय सिंह के घर स्कार्पियो पर सवार होकर 5 पुरूष और दो महिलाएं इनकमटैक्स अधिकारी बनकर आए और पूरे घर की तलाशी लिया इस दौरान घर में रखे रूपये और जेवरात को जप्त कर चलते बने थोड़ी देर बाद घर वाले को एहसास हुआ कि उसके साथ कुछ गड़बड़ हुआ है और तुंरत इसी सूचना थाने को दिया।

पुलिस जब छानबीन शुरु किया तो यह बात सामने आया कि इनकम टैक्स का कोई रेड नहीं था इसके साथ ठगी हुई ,इसकी सूचना मिलते ही एसपी लखीसराय ने एसआईटी का गठन किया और छानबीन शुरु किया इस दौरान जिस गांड़ी का इस्तमाल किया था उसका नम्बर भी फर्जी निकला लेकिन गांड़ी का लोकेसन सीसीटीवी में जहां जहां दर्ज हुआ था उसको देखते हुए पुलिस आगे बढ़ रही थी और इसी दौरान पटना में इसका लोकेसन मिल गया और पहली गिरफ्तारी हुई और उसी के निशानदेही पर सारे अपराधी पकड़े गये ।

इस घटना में ठिकेदार का पड़ोसी भी शामिल था जो इस गैंग को पूरा सूचना दिया था

चर्चित मामले को पुलिस ने पर्दाफाश कर लिया है। पुलिस ने फर्जी इनकमटैक्स रेड में शामिल छहः फर्जी इनकमटैक्स अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। सभी की गिरफ्तारी पटना और शेखपुरा जिले से हुई है। वहीं लूट के 5 लाख 70 हजार रूपये के साथ फर्जी आइ कार्ड, मोबाइल, कोट, पैन्ट एवं घटना में प्रयोग किए गए बैग को बरामद कर लिया गया है।

जिन छह अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है उसमें चंदन कुमार और सुमित कुमार पटना जिले के रहनेवाले हैं। वहीं मंजित कुमार और सोनू कुमार नालंदा जिले के रहने वाले हैं। जबकि कुश कुमार शेखपुरा और गु़जन चौके पश्चिम चंपारण के रहनेवाले हैं।

बिहार में एक ऐसा गांव है जहां लड़किया जनेऊ पहनती है

बिहार में एक गांव ऐसा भी है जहां लड़किया जनेऊ पहनती है । यह सूनने में थोड़ा अटपटा लगा रहा होगा लेकिन यह सच्चाई है । बक्सर जिले के डुमरांव अनुमंडल के नावानगर प्रखंड में एक गांव है मणियां जहां प्रति वर्ष बसंत पंचमी के दिन लड़कियों का यज्ञोपवीत संस्कार कराया जाता है।

यह अनोखी परंपरा मणियां गांव स्थित दयानंद आर्य हाईस्कूल में प्रति वर्ष आयोजित होती है। इस स्कूल में पढ़ने वाली छात्राएं स्वेच्छा से जनेऊ धारण करती हैं। यहां जनेऊ धारण करने वाली छात्राएं रुढ़िवादी परंपरा को खत्म करने के साथ चरित्र निर्माण की शपथ लेती हैं। अभिभावकों का कहना कि इससे नारी शक्ति को बढ़ावा मिल रहा है।

परिवार व समाज का मिल रहा सहयोग
यज्ञोपवीत पहनने की मुहिम में लड़कियों को परिवार व समाज से भी भरपूर सहयोग मिल रहा है। पिछले साल आचार्य श्रीहरिनारायण आर्य और सिद्धेश्वर शर्मा के नेतृत्व में शिल्पी कुमारी, बसंती कुमारी, अनु कुमारी, नीतु कुमारी, खुशबू कुमारी एवं नीतु कुमारी सहित अन्य कई छात्राओं का उपनयन संस्कार किया गया था। इस बार भी बसंत पंचमी के दिन लड़कियों को जनेऊ पहनाने की तैयारी चल रही है। इस आयोजन को लेकर गांव में उत्‍सवी माहौल बना हुआ है।

विद्यालय के संस्थापक ने चलाई थी यह परंपरा
मणियां उच्च विद्यालय के संस्थापक और इसी क्षेत्र के छपरा गांव निवासी स्व. विश्वनाथ सिंह ने 1972 ई. में इस परंपरा की शुरुआत की थी। उन्होंने सर्वप्रथम अपनी पुत्रियों को जनेऊ धारण कराया था। उसके बाद फिर यह परंपरा चल पड़ी। तब से हर वर्ष यहां लड़‍कियों का यज्ञोपवीत संस्‍कार किया जाता है। स्व. सिंह आर्यसमाजी थे। मणियां के ग्रामीणों का कहना है कि गुरुजी का इसके पीछे मुख्य उद्देश्य था कि नारी शक्ति को श्रेष्ठ कराने से समाज का कल्याण हो सकता है।

मूर्तिपूजा का नहीं है प्रचलन
आचार्य सिद्धेश्वर शर्मा का कहना है, बसंत पंचमी के दिन विद्यालय की छात्र-छात्राएं हवनकुंड के समक्ष बैठकर आचार्य से श्रेष्ठ आचरण, आदर्श जीवन व सद्चरित्र का संस्कार ग्रहण करती हैं।

सरकार को हाईकोर्ट से बड़ी राहत हर घर जल नल योजना की नहीं होगी सीबीआई जांच

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा प्रारम्भ किये गए हर घर नल का जल योजना में हुई गडबड़ी और बरती गई अनियमितताओं की जांच कर कार्रवाई करने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।

संजय मेहता की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजय करोल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार के सम्बंधित अधिकारियों को अभ्यावेदन देने का निर्देश दिया।

इस जनहित याचिका को अधिवक्ता अलका वर्मा और मीरा कुमारी ने संजय मेहता की ओर कोर्ट में दायर किया हैं।इस जनहित में राज्य के मुख्य सचिव समेत अन्य सम्बंधित अधिकारियों को पार्टी बनाया गया था।इस जनहित याचिका में ये कहा गया है कि इस योजना में अनियमितताएं बरतने वाले के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।

साथ ही इस हर घर नल का जल योजना का कार्यान्वयन सही ढंग से किया जाए।यह आम जनता के हितों के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की काफी महत्वपूर्ण योजना हैं।

शुद्ध पेय जल आम लोगों की बुनियादी आवश्यकता हैं।इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं और अनियमितताएं बरती गई हैं।

पूर्णियां,सहरसा,अररिया,सुपौल,किशनगंज,मधेपुरा व राज्य के अन्य जिलों में शुद्ध पेय जल, विशेषकर गर्मी के दिनों में, आम जनता को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता हैं।

इस महत्वपूर्ण जनहित योजना में भ्रष्ट्राचार और अनियमितता बरता जाना गंभीर अपराध हैं।इसकी पूरी जांच स्वतन्त्र एजेंसी से करा कर दोषियों को दंड देने की कार्रवाई की जाए।

सात निश्चय योजना के अंतर्गत हर घर नल का जल योजना में सिकटी विधानसभा क्षेत्र में काफी गड़बड़ियां हुई।विधायक विजय कुमार मंडल ने डी एम, अररिया को आवेदन दे कर बताया गया कि जलापूर्ति के लिए घटिया पाइप लगाया गया।
साथ ही सही गहराई में पाइप नहीं लगाया गया।

इस कारण जहां आए दिन पाइप फटता रहता है, वहीं सड़क भी क्षतिग्रस्त होता रहा हैं।इस सम्बन्ध में सम्बंधित मंत्री और अधिकारियों को भी पत्र के जरिये सूचना दी गई थी।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राज्य सरकार के सम्बंधित अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन देने के निर्देश के साथ ही इस जनहित याचिका को निष्पादित कर दिया।

बालिकागृह जैसे मामलों में समग्रता से सोचने कि जरुरत है तभी बेहतर हो सकता है

कल दोपहर को एक फोन आया मैं पटना हाईकोर्ट में एडवोकेट हूं आपके फेसबुक से काफी दिनों से जुड़ा हुआ हूं और पढ़ता रहता हूं ।बालिकागृह मामले में आपसे कुछ बात करनी है , हाईकोर्ट ने जो स्वत संज्ञान लिया है उसमें गुड्डू बाबा के माध्यम से मैं भी अपना पक्ष रखना चाहता हूं आपके पास इसको लेकर जो भी जानकारी है वो मुझे चाहिए।

समय तय हुआ शाम में मिलना है उन्होंने बताया कि कृष्णापुरी पार्क के सामने मेरा आवास है आपका इन्तजार करेंगे। मैं नियत समय पर उनके आवास पर पहुंच गया बाहर से कॉल किया सर किधर आना है,मेरा पहले से कोई परिचय नहीं था, घर के बाहरी आवरण से लगा जनाब पटना हाईकोर्ट के बड़े वकील है,भव्य मकान फिर कैंपस में बागवानी का सलीका ,ड्राइंग रूम की भव्यता और फिर उनका ऑफिस मन ही मन में हो रहा था जनाब का रहन सहन ऐसा है तो वो खुद कैसे होगे ।

जैसे ही उनके ऑफिस में पहुंचा एक साधारण सा नाटा कद का व्यक्ति कुर्सी पर बैठा है और उनके सामने तीन चार लोग बैठे हुए है। चंद मिनट में ही पूर्व से बैठे लोगों का विदा कर दिया इस दौरान वो अपने क्लाइंट से जिस अंदाज में बात कर रहे थे मुझे भरोसा ही नहीं हो रहा था कि ये व्यक्ति अपनी कमाई से इस तरह का घर द्वारा बना सकता है ।

मुझे लगा बाप दादा का सम्पत्ति पर हाक रहा है मैं चुपचाप सुनता रहा , बाबू मैं बोरा छाप स्कूल से पढ़ कर यहां पहुंचा हूं तुम जब तक मुकदमे के बारे में मुझे संतुष्ट नहीं कर दोगे मैं जज साहब को कैसे संतुष्ट कर पाऊँगा । क्यों कि मेरी समझदारी थोड़ी गांव वाली है इसलिए समझने में थोड़ा वक्त लगता है लेकिन समझ गये तो फिर आपका केस बड़ी मजबूती से लड़ेंगे ।

खैर इन लोगों के जाने के बाद बातचीत शुरू हुई संतोष जी पहले आपको आज ही मेरे गांव से मिठाई आया है वो खिलाते हैं फिर भागलपुर के चूरा का भूजा खाना पसंद करेंगे वो खिलाते हैं।

पहले मिठाई आया काला काला गोला गोला मुझे लगा काला जाबुन होगा संतोष जी यह आरा में ठंड के समय खास तोड़ पर बनता है मैं समझ गया हाल ही में मेरी सासू माँ भी लेकर आयी थी।

कैसे चावल को पीसा जाता है और इसमें क्या क्या मिलाया जाता है एक स्वर में सब बता दिए संतोष जी इस मिठाई को सोईठ कहते हैं ठंड में बहुत फायदा करता है।

बातचीत चल ही रही थी तभी उनकी पत्नी आयी परिचय हुआ वो भी पटना हाईकोर्ट में वकील है,कहने लगी करिए करिए कुछ होने वाला नहीं है ।गायघाट बालिका गृह के अधीक्षक की क्या हैसियत होगी वो तो पटना में पोस्टिंग बनी रहे इसलिए अधिकारियों की गुलामी कर रही होगी ताकी किसी तरह बाल बच्चा को पढ़ा ले या फिर पति पटना में ही रहता होगा, या मायिका पटना होगा ,सास ससुर बिमार रहते होंगे इसलिए किसी तरह पटना में बनी रहना चाह रही होगी इससे ज्यादा वो सोच नहीं रही होगी संतोष जी यही सच्चाई है देख लीजिएगा मंत्री के घर लड़की पहुंचाना ये सब फालतु बात है कोई माँ ये काम नहीं कर सकती है कुछ ऐसी रहती है लेकिन सरकारी अधिकारी काहे को यह सब करेंगे जो होता है वह सब उपर लेबल पर होता है ये चुपचाप देखती रहती होगी इससे ज्यादा इसकी हैसियत नहीं होगी।

मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में क्या हुआ बस आईवास कुछ बदलने वाला नहीं है आप लोगों के पेट की आग बुझी हुई है इसलिए ये सब कर रहे हैं कुछ होने वाला नहीं है।

वकील साहब चुपचाप मैंडम की बात सून रहे थे और फिर अंत में इतना ही कहा संतोष जी इस देश का आम आदमी इसी तरीके से सोचता है क्यों कि चारो तरफ घोर निराशा छाया हुआ है सारे सिस्टम ध्वस्त हो चुके हैं ।

याद करिए पहले किसी सरकारी दफ्तर में जाते होंगे और किसी कर्मचारी के बारे पता करते होंगे तो साथ काम करने वाला अधिकारी कहता था उसको खोज रहे हैं बिना पैसा लिये काम नहीं करेंगा बाहर चाय की दुकान पर बैठा होगा ।

और आज अड़े वो पगला है ना पैसा लेगा ना काम करेगा मतलब ईमानदारी पागलपन है फिर भी फाइट करते रहना है संतोष जी ।
आपसे जो जानकारी मिली है इसका यह मतलब है की बालिका और बालक के संरक्षण लिए कानूनी प्रावधान काफी सख्त है लेकिन कार्यान्वयन में समस्या है मैं इसी बिन्दु को हाईकोर्ट के सामने लाते हैं क्यों कि जो व्यवस्था बनायी गयी है इस तरह के गृह को चलाने का वो सही तरह से चल सके ।

बात खत्म हुई एक दूसरे से विदा लिये लेकिन उनकी और उनकी पत्नी की एक एक बात अभी भी मेरे जेहन में चल रहा है महिलाएं अक्सर प्रैक्टिकल होती है उनकी सोच प्रैक्टिकल होती है और हम लोग चीजों को ऊपर ऊपर सोचते हैं गायघाट की अधीक्षिका की सोच इतना ही होगी किसी तरह पटना में पोस्टिंग बनी रहे ताकि बच्चों को पढ़ा सके यही हाल अधिकांश सरकार कर्मी और अधिकारियों का है बस छोटी ही चाहत के लिए कितनीबड़ी से बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है सोचिए
इसलिए ऐसे मामलों में समग्रता में सोचने कि जरूरत है तभी कुछ सार्थक बदलाव सामने आ सकता है ।

नेपाल भागते हुए पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक स्कैम के आरोपी गिरफ्तार

पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (PMC) के 4,355 करोड़ रुपए के स्कैम के मुख्य आरोपियों में से एक बैंक के डायरेक्टर दलजीत सिंह बल को रक्सौल बॉर्डर से गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे देश छोड़कर भागने के दौरान इमिग्रेशन विभाग ने गिरफ्तार किया गया है।

2019 में उजागर हुए इस घोटाले की जांच महाराष्ट्र की EOW टीम कर रही है। दलजीत सिंह बल अब तक जांच एजेंसी को चकमा देकर फरार था।

पूछताछ में दलजीत ने बताया है कि देश छोड़कर नेपाल के रास्ते कनाडा भगाने के फिराक में थे। महाराष्ट्र से रक्सौल बॉर्डर तक आसानी से पहुंच गया था। नेपाल में इंटर करने से 200 मीटर पहले ही इमिग्रेशन विभाग ने हिरासत में ले लिया।
2019 में सामने आया था घोटाला

2019 में लोन की धोखाधड़ी और घोटाला सामने आया था। इसके बाद RBI ने PMC बैंक के बोर्ड को भंग कर दिया था। साथ ही RBI ने बैंक से पैसे निकालने पर रोक लगा दी थी। इस धोखाधड़ी और घोटाले में बैंक के कई सीनियर अधिकारी शामिल पाए गए थे। बैंक द्वारा रियल एस्टेट कंपनी HDIL को दिए गए लोन की RBI को सही जानकारी नहीं दी थी। इस लोन में भी घोटाले के आरोप हैं।

HDIL को दिया था कर्ज
PMC बैंक ने अवैध तरीके से HDIL ग्रुप को 6500 करोड़ रुपए लोन दिया था, जो सितंबर 2019 में बैंक के टोटल लोन बुक साइज 8880 करोड़ रुपए का 73% था। मार्च, 2019 में बैंक की डिपॉजिट 11,617 करोड़ रुपए थी। PMC Bank के पूर्व एमडी जॉय थॉमस और पूर्व चेयरमैन वरयाम सिंह को पिछले साल अक्टूबर में मुंबई की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने गिरफ्तार कर लिया था।

PMC की 7 राज्यों में 137 शाखाएं
PMC अरबन को-ऑपरेटिव बैंक है। महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक, गोवा, गुजरात, आंध्रप्रदेश और मध्यप्रदेश में इसका कामकाज है। इसकी 137 शाखाएं हैं।

रिमांड होम से लड़कियों की सप्लाई बिहार सरकार के कई मंत्रियों तक की जाती है

गायघाट रिमांड होम मामले में सरकार की मश्किले लगातार बढ़ती जी रही है राज्य के पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ कुमार दास ने सरकार पर बड़ा ही गभीर आरोप लगाया है. राज्यपाल को लिखे पत्र में अमिताभ कुमार दास ने गायघाट रिमांड होम (Patna Remand Home Case) मामले कहा है कि रिमांड होम से लड़कियों की सप्लाई बिहार सरकार के कई मंत्रियों तक की जाती है, इसलिए सरकार इस मामले पर लीपापोती कर रही है. राज्य सरकार इस मामले में सही तरीके से जांच नहीं करवा रही है. आनन-फानन में सरकार के समाज कल्याण विभाग ने खुद से जांच की और रिपोर्ट जारी कर दिया.

अमिताभ कुमार दास ने अपने लेटर में सीधे तौर सरकार और उनके कई मंत्रियों पर आरोप लगाते हुए राज्यपाल से सीबीआई जांच के आदेश दिए जाने की मांग कर दी है. उन्होंने अपने लेटर में मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड का हवाला भी दिया है और बताया है कि कैसे मुजफ्फपुर वाले कांड में उस वक्त की समाज कल्याण विभाग की मंत्री मंजू सिन्हा को इस्तीफा तक देना पड़ा था.

वही दूसरी और आज महिला संगठनों की संयुक्त बैठक हुई. बैठक में गायघाट रिमांड होम से मुक्त हुई महिला के बयान के संदर्भ में विचार विमर्श किया गया.कल शाम को महिला संगठनों की प्रतिनिधियों को उक्त महिला ने विस्तार से अपनी बातें बताई. कल ही एक अन्य लड़की के भी बयान की जानकारी मिली है.

पटना हाई कोर्ट ने इस मामले का स्वतःसंज्ञान लिया है. महिला संगठनों की ओर से हम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हैं और सरकार से मांग करते हैं कि

  1. समाज कल्याण विभाग की तरफ से महिला के चरित्र का मूल्यांकन और परिचय उजागर करने वाला बयान अखबारों में आया है यह गलत है और इस पर कार्रवाई की जाए
  2. गायघाट रिमांड होम मामले में संपूर्ण मामले की जांच पटना हाई कोर्ट के सिटिंग जज की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाकर की जाए.
  3. रिमांड होम में लड़कियों को जेल की तरह बंद रखने के बजाए सुधार गृह के रूप में लाने के लिए कदम उठाना जरूरी है. मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड ने इसे सिद्ध किया है.इसके लिए गृह के भीतर स्कूल, मानसिक रूप से बीमार के लिए डॉक्टर का इंतजाम किया जाए.
    आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार की ट्रेनिंग की बात तो होती है लेकिन यह कहीं मुक्कमल नहीं है. इसकी व्यवस्था की जाए.
  4. सुधार गृह में जांच-पड़ताल और संवासिनो से समय-समय पर बातचीत करने के लिए महिला संगठनों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की टीम नियमित समय अंतराल में भेजी जाए.
    5.महिला संगठनों ,मानवाधिकार संगठनों को अधिकार हो कि वे जब चाहें,सुधार गृह में जा सकें.इसकी अनुमति देने की प्रक्रिया सरल बनाई जाए.
    बैठक में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन(ऐपवा) की और मीना तिवारी, शशि यादव, अफ्शां जबीं, बिहार महिला समाज की निवेदिता, रिंकू, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की रामपरी, रश्मि श्रीवास्तव, ए डब्ल्यू एस एफ की आसमां खान, ए आइ एम एस एस की अनामिका, कोरस की समता राय आदि शामिल हुईं.
    महिला संगठनों की तरफ से हम सरकार से उम्मीद करते हैं कि वह तत्काल कदम उठाए.ऐसा नहीं होने पर 9 फरवरी को प्रतिवाद कार्यक्रम किया जाएगा.

गया के आईजी ,एसएसपी और पूर्व डीएम पर कार्रवाई के पीछे का इनसाइड स्टोरी

गया के आईजी ,एसएसपी और पूर्व डीएम पर कार्रवाई के पीछे क्या है इनसाइड स्टोरी

बिहार में इन दिनों राजधानी पटना से लेकर एक छोटे से गांव तक शराब और जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर बड़ा सिडिकेंट काम कर रहा है और इस सिडिकेंट में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ साथ उस इलाके के अपराधी भी शामिल है।गया के डीएम ,एसएसपी और आईजी पर कार्रवाई उसी की एक कड़ी है जहां इन अधिकारियों ने गया में जंगल राज कायम कर रखा था।

सरकार शराबबंदी को लेकर बैचेन है वही गया में पुलिस के संरक्षण में शराब का कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा था ,पहाड़ का अवैध खनन दिन में चलता था, भूमाफिया का मनोबल इतना बढ़ गया था कि जमीन आपकी कब्जा किसी ओर को करवा कर पुलिस की मौजदूगी में घर बनवा देता था जिसे कहते हैं प्रशासन का नंगा नाच वह नाच गया में चल रहा था

पिछले वर्ष 2021 के अक्टूबर माह में परिवार के साथ बौद्ध गया घूमने गया था इसी दौरान उस इलाके के कुछ किसान मुझसे मिलने बौद्ध गया आये हुए थे उन्होंने बताया कि संतोष जी गया का डीएम ,एसएसपी और सिटी लूट मचाये हुए हैं।डीएम पहाड़ का अवैध खनन करवा रहा है ,एसएसपी और सिटी एसपी थानेदार से मिल कर जमीन पर कब्जा करवा रहा है और शराब माफिया से मिल कर पूरे जिले में अवैध शराब का खेल चल रहा है कुछ कीजिए ।

मैने पुछा अमित लोढ़ा आईजी की छवि तो बढ़िया रही है वो गया एसएसपी भी रहे हैं उनसे मिलिए संतोष जी वो भी मिले हुए हैं गया में अधिकारियों के संरक्षण में जंगल राज चल रहा है ,बातचीत के दौरान ही गया के हमारे जो पुराने पत्रकार मित्र है उनसे भी बात हुई हलात सच में बेहद खराब था लूट मची हुई थी ठीक उसी दिन मैंने गया से ही इस खबर को ब्रेक किया देखिए क्या चल रहा गया में खबर ब्रेक करने के बाद और भी जानकारी मिलनी शुरु हो गयी ।

इसी दौरान मुझे जानकारी मिली की मगध मेडिकल कॉलेज के आसपास की जमीन पर कब्जा को लेकर एसएसपी के इशारे पर उस इलाके के एक किसान राकेश रंजन के भतीजे को पुलिस आर्म्स एक्ट लगा कर जेल भेज दिया ।

मामला पुलिस मुख्यालय पहुंचा और इस मामले की जांच सीआईडी कर रही है जांच के दौरान सीआईडी ने पाया कि मगध मेडिकल कॉलेज के इलाके में जमीन कब्जा करने को लेकर एक बड़ा सिडिकेंट चल रहा है और उसी सिडिकेट के इशारे पर किसान राकेश रंजन के भतीजे को पुलिस ने आर्म्स एक्ट के झूठे मुकदमे में जेल भेज दिया है ।

सीआईडी ने आईजी मगध को राकेश रंजन के भतीजे के गिरफ्तारी में शामिल पुलिस टीम पर कार्रवाई करने का आदेश दिया शुरुआत में आईजी तीन सिपाही पर कार्रवाई कर शांत बैठ गये लेकिन सीआईडी द्वारा फिर से पत्राचार करने पर इस रेड में शामिल दरोगा को आईजी ने निलंबित कर दिया वह दरोगा एसएसपी का चहेता था और यही से एसएसपी और आईजी के बीच विवाद शुरू हो गया हालांकि कहा ये जाता है कि इससे पहले सब कुछ आपसी सहमति से ही चल रहा था ।

लेकिन एसएसपी भूमाफिया से मिले हुए थे कि सीआईडी के जांच में आर्म्स एक्ट का मामला झूठा पाये जाने के बावजूद भी मामले में गिरफ्तार व्यक्ति के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दिया बवाल हो लेकिन खबर ये आई कि एसएसपी गया पर किसी खास की मेहरबानी है इसलिए सीआईडी के आदेश के बावजूद भी एसएसपी इस कदर दुस्साहस कर रहे हैं

चुकी इससे पहले आईजी ने जब एसएसपी के चहते दरोगा पर कार्रवाई (जिन पर झूठे आर्म्स एक्ट का मुकदमा करने का आरोप था) किया था तब एसएसपी ने डीजीपी से मिल कर आईजी के रीडर रणधीर सिंह को मधेपुर का तबादला करवा दिया ऐसी गया में चर्चा आम है ।

हालांकि इस तबादले के बाद एसएसपी और आईजी पूरी तौर पर आमने सामने आ गये और इसी दौरान आईजी ने एसएसपी पर शराब माफिया से सांठगांठ का आरोप लगाते हुए फतेहपुर थाना अध्यक्ष द्वारा शराब बरामदगी मामले में एफआईआर न दर्ज कर सनहा दर्ज कर छोड़ने का मामला उठाते हुए सरकार को पत्र लिख दिया ।

आईजी मधनिषेध ने जांच शुरू किया और जांच में मामले को सही पाया आईजी मधनिषेध ने गया एसएसपी को पत्र लिख कर इस मामले में जवाब मांगा और फतेहपुर थाना अध्यक्ष जिनका तबादला औरंगाबाद हो गया था उस पर कार्रवाई करने को कहा आईजी मधनिषेध ने इसकी पूरी जानकारी सरकार को दिया सरकार के संज्ञान में आते हैं जांच शुरू हुई तो यह खेल सामने आ गया अब देखना यह है कि सरकार इन अधिकारियों का तबादला करके छोड़ देती है या फिर बड़ी कार्रवाई करती है ।

रामसर साइट में शामिल कावर झील के विकास का मुद्दा एक बार फिर राज्यसभा में उठा

अंतरराष्ट्रीय महत्व के बेगूसराय के रामसर साइट में शामिल कावर झील के विकास का मुद्दा एक बार फिर राज्यसभा में भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने सवाल उठाया है।

कावर झील के विकास को लेकर राज्यसभा में उठा मामला

एशिया का सबसे बड़ा झील कहा जाने वाला कावर झील के विकास के लिए राज्य सभा सांसद राकेश सिन्हा ने राज्यसभा में सवाल उठाते हुए विकास करने की मांग की है। कावर झील की महत्व को देखते हुए उसका विकास करने की मांग की है। राज्य सभा में सांसद ने कहा कि रामसर साइट में शामिल कावर झील 24 सौ एकड़ में फैला हुआ है उसके पास में भगवान बुध का ऐतिहासिक स्तुप स्थल भी है लेकिन आज तक इसका विकास नहीं हुआ है।

कावर झील में 59 प्रकार के विदेशी और 107 प्रकार के देसी पक्षी रहते और हर वर्ष आते हैं लेकिन कावर झील का आज तक विकास नहीं हो पाया है। खासकर जमीन को सही से चिहिंत तक नहीं किया जा सका है जिससे किसान यहां ना तो सही से खेती कर पाते हैं ना ही अपनी जमीन को बेच पाते हैं ऐसे में सरकार इस कावर झील को विकसित करने के लिए कारगर कदम उठाए ताकि पर्यावरण और सांस्कृतिक स्तर पर यह विकसित हो सके।
क्या महत्व है कावर झील है

कावर झील एशिया का सबसे बड़ी शुद्ध जल की झील है और यह पक्षी अभयारण्य (बर्ड संचुरी) भी है। इस बर्ड संचुरी मे ५९ तरह के विदेशी पक्षी और १०७ तरह के देसी पक्षी ठंडे के मौसम मे देखे जा सकते है। यह बिहार राज्य के बेगूसराय में है। पुरातत्वीय महत्व का बौद्धकालीन हरसाइन स्तूप इसी क्षेत्र में स्थित है।काबर झील अथवा कावर झील जिसे स्थानीय रूप से काबर ताल, कनवार ताल या कावर ताल भी कहते हैं यह बिहार के बेगूसराय जिले में मीठे पानी[3] की एक उथली झील है। यह झील जिला मुख्यालय बेगूसराय से तकरीबन 22 किलोमीटर उत्तर में और बिहार के राजधानी नगर पटना से 100 किलोमीटर पूरब में स्थित है। इस झील और आसपास की नमभूमि (वेटलैंड) को पक्षी विहार का दर्जा प्राप्त है।

बिहार सरकार के वन विभाग के आँकड़ों के मुताबिक़ इसे पक्षी विहार का दर्जा 1989 में दिया गया और यह कुल 63.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है ।यहाँ जाड़ों में काफी प्रवासी पक्षी आते हैं जिनमें विदेशी पक्षी भी शामिल हैं, हालाँकि, हाल के समय में यह झील पानी की कमी से जूझ रही है और सरकारी योजनाओं के पारित होने के बावज़ूद उपेक्षा के चलते संकटपूर्ण स्थिति में है। झील पर निर्भर स्थानीय मछुआरे (मल्लाह) भी इसके कारण संकट झेल रहे हैं।

झील के नजदीक ही जय मंगल गढ़ के नाम से एक प्रसिद्ध एक मंदिर भी है जिसे पाल वंश के काल में स्थापित माना जाता है और यह भी अनुमान है कि यह एक किले के रूप में था ।

मुजफ्फरपुर रिमांड होम से सरकार सीख लेती तो आज गायघाट मामले में नजर झुकाना नहीं पड़ता

मुजफ्फरपुर बालिकागृह से सरकार ने नहीं ली सीख
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चिहिंत दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की गयी होती तो आज गायघाट मामले में कोर्ट को संज्ञान नहीं लेना पड़ता है ।

गायघाट रिमांड होम मामले में हाईकोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के बाद सरकार की साख एक बार फिर दांव पर है हाईकोर्ट ने समाज कल्याण विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को प्रतिवादी बनाते हुए फौरन अपने स्तर से जांच करने का आदेश दिया है। और यह सब पटना हाई कोर्ट के जुवेनाइल जस्टिस मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर किया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि बालिका गृह में यह सब चल रहा था इसकी जानकारी बालिका गृह पर नजर रखने वाली संस्था को नहीं हुई ,क्यों कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट से जिला कोर्ट तक और राजधानी से लेकर पंचायत स्तर तक बच्चे और बच्चियों के राइट के लिए कमिटी गठित है जिन्हें बच्चों और बच्चियों के अधिकार को संरक्षित करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है फिर भी यह धंधा रुक क्यों नहीं रहा है यह एक बड़ा सवाल है ।

सुप्रीम कोर्ट मानती है कि इस तरह के जो भी लड़के लड़कियां है उसके अभिभावक कोर्ट है और इसके लिए विधिवत कमेटी गठित है।हाईकोर्ट में जुवेनाइल जस्टिस मॉनिटरिंग सेल है जिसका खुद का एक अलग से दफ्तर है कर्मचारियों की बड़ी फौज है,जस्टिस आशुतोष कुमार चेयरमैन हैं,जस्टिस अंजनी कुमार शरण और जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय इसके सदस्य हैं।

इसी तरह की कमेटी जिला स्तर पर न्यायालय में भी है इसके अलावे डीएम की अध्यक्षता में हर जिले में बाल संरक्षण समिति,जे0जे0 बोर्ड गठिक है जिसके अधीन बाल गृह और बालिका गृह काम करता है इतना ही नहीं जिले के सीनियर पदाधिकारी इस सारे कमिटी के नोडल पदाधिकारी होते है जिन्हें चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर कहा जाता है।जिनकी जिम्मेवारी है रिमांड होम में रहे रही बच्ची और बच्चों को किसी भी तरह का शारीरिक और मानसिक कष्ठ ना हो इस पर चौकसी बरतना। इतना ही नहीं जिला जज साहब का माह में एक दो बार इस तरह के होम में जाकर बच्चे और बच्चियों का हाल जानना है।
इसके अलावा भारत सरकार की और से एक हेल्पलाइन नम्बर जारी है 1098 किसी भी बच्चे या बच्चों के साथ शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना होता है तो वो तुरंत इस नम्बर पर काॅल कर सकता है और इस कॉल पर त्वरित कार्रवाई हो इसके लिए देश के हर जिले में दो से तीन चाइल्ड लाइन काम कर रहा है।

जिसके पास उस बच्चे के कांल के सम्बन्ध में जानकारी दी जाती है और उस पर त्वरित कार्रवाई में कोई परेशानी ना हो इसके लिए जिले का पुलिस कप्तान जबावदेह होता है।इतना ही नहीं बच्चे और बच्चियों के संरक्षण के लिए पंचायत के वार्ड में वार्ड आयुक्त बाल संरक्षण कमिटी का अध्यक्ष होता है ,पंचायत में मुखिया अध्यक्ष होते हैं प्रखंड में प्रमुख अध्यक्ष होते हैं सीडीपीओ और आंगनबाड़ी सेविका नोडल पदाधिकारी होती है इस स्तर तक कमिटी गठित है ।

लोकतंत्र के सभी स्तम्भ विधियका,कार्यपालिका और न्यायपालिका सभी सीधे तौर जिम्मेवार है फिर भी लड़कियों और लड़कों का ट्रैफिकिंग जारी है ।

इसकी वजह है सरकार इसको लेकर आज भी गंभीर नहीं है यू कहे तो सरकार के प्राथमिकता में यह विषय है ही नहीं या फिर इस तरह के खेल में सरकार खुद शामिल है इसलिए यह खेल चल रहा है।

याद करिए मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश बावजूद अभी तक उन आईएएस अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई है जिन पर बालिका गृह में हो रहे कृत्य को नजरअंदाज करने और ब्रजेश ठाकुर को संरक्षण देने का आरोप था ।इस स्थिति में बालिकागृह में रहने वाली लड़कियां कैसे सुरक्षित रह पायेंगी क्यों कि अधिकारियों को पता है सरकार मेरे साथ खड़ी है या फिर सरकार इस मामले में इतनी लाचार है कि कुछ नहीं कर पायेंगी ऐसे में यह धंधा संस्थागत रुप लेगा ही इसलिए ना गायघाट रिमांड होम मामले में 24 घंटे के अंदर समाज कल्याण विभाग और पटना जिला प्रशासन क्लीनचीट दे दिया ।

बिहार न्यूज पोस्ट के खबर का असर, गाय घाट स्थित उत्तर रक्षा गृह मामले में हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

पटना हाई कोर्ट ने पटना के गाय घाट स्थित उत्तर रक्षा गृह ( आफ्टर केअर होम ) की घटना पर स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इस याचिका को पटना हाई कोर्ट जुवेनाइल जस्टिस मोनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रजिस्टर्ड किया है।

कमेटी में जस्टिस आशुतोष कुमार चेयरमैन हैं, जबकि जस्टिस अंजनी कुमार शरण और जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय इसके सदस्य हैं। कमेटी ने उक्त मामले में 31 जनवरी को अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है।

इस केअर होम में 260 से भी ज्यादा महिलाएं वास करती हैं। कमेटी की एक आपात बैठक बुलाई गई थी। बेसहारा महिलाओं को लेकर अखबार में छपी खबर पर बैठक में चर्चा की गई। खबर के मुताबिक पीड़िता व केअर होम में रहने वाली उसके जैसी और अन्य को दवा देकर जबरन अनैतिक कार्यों के लिए मजबूर किया जाता है।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि केअर होम में रहने वाली पीड़िताओं को भोजन और बिस्तर की सुविधाएं भी नहीं मुहैया कराई जाती है। यहां तक कि बहुतों को गृह को छोड़ने की अनुमति भी नहीं दी जाती है।

कमेटी द्वारा अन्य बातों के अलावा ऐसा देखा गया कि पीड़िता द्वारा आश्चर्यजनक देने वाला खुलासा यह भी किया गया है कि अजनबियों को रिश्तेदार के रूप में बहाना बनाकर आने दी जाती है, जो आकर बेसहारा महिला को उठाते हैं।जो कि इनके जीवन और मर्यादा को और जोखिम में डाल देता है।

यह भी आश्चर्य जनक है कि पीड़िता द्वारा किये गए खुलासे के बाद भी कोई एफ आई आर दर्ज नहीं किये गए हैं।

इससे ज्यादा आश्चर्य जनक यह है कि समाज कल्याण विभाग के डायरेक्टर ने उक्त मामले में एक जांच किया है और सिर्फ केअर होम में लगाए गए सी सी टी वी के फुटेज के आधार पर वे इस निष्कर्ष पर तथाकथित पीड़िता द्वारा लगाया गया आरोप को बेबुनियाद और गलत बताया।

कोर्ट ने फिलहाल राज्य सरकार के समाज कल्याण विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को प्रतिवादी बनाते हुए फौरन अपने स्तर से जांच करने का आदेश दिया है।

साथ ही साथ कोर्ट ने की गई कार्रवाई के संबंध में रिपोर्ट देने को कहा है। कोर्ट ने कमेटी द्वारा की गई अनुशंसा को भी तत्काल लागू करने का आदेश दिया है। संस्थान के सुधार को लेकर और सी सी टी वी कैमरा लगाने, कमसे कम दो और प्रशिक्षित सलाहकार की नियुक्ति करने, संख्या को देखते हुए अन्य केअर होम की जरूरत, प्रशिक्षित स्टाफ, स्टाफ और अधीक्षक में चाइल्ड से संबंधित कानून और मुद्दों की जागरूकता समेत अन्य अनुशंसा किये गए हैं।

कोर्ट ने अगली तिथि के पूर्व अनुपालन के संबंध में हलफनामा दायर करने को भी कहा है। इस मामले पर आगे की सुनवाई 7 फरवरी, 2022 को की जाएगी।

रेलवे भर्ती बोर्ड के मनमानी का मुद्दा उठा राज्यसभा में

• रेलवे भर्ती बोर्ड के परीक्षार्थी छात्रों का मुद्दा राज्यसभा में उठाया
• ग्रुप डी की 2 के बजाय एक परीक्षा तथा एनटीपीसी का 3.5 लाख और छात्रों का परिणाम घोषित करें

भाजपा सांसद और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी ने आज राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान रेलवे भर्ती बोर्ड की ग्रुप डी एवं एनटीपीसी की 1 करोड़ 35 लाख से ज्यादा परीक्षार्थियों के हाल में हुए आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से उनकी मांग को पूरा करने का आग्रह किया।

श्री मोदी ने कहा कि ग्रुप डी कि पहले एक परीक्षा लेने का 2019 में प्रावधान किया गया था परंतु 24 जनवरी को अचानक दो परीक्षा लेने की घोषणा की गई। उसी प्रकार एनटीपीसी का परीक्षा परिणाम 20 गुना के बजाय 11 गुना रिजल्ट ही प्रकाशित किया गया। एक-एक छात्र का नाम तीन-तीन जगह शामिल है।

श्री मोदी ने मांग किया कि ग्रुप डी की दो के बजाय एक परीक्षा ली जाए तथा एनटीपीसी परीक्षा में शामिल और 3.5 लाख छात्रों का रिजल्ट घोषित किया जाए ताकि सरकार की घोषणा के अनुसार 20 गुना परिणाम घोषित किया जा सके ।

हाई कोर्ट ने लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति प्रक्रिया को एक सप्ताह में पूरा करने का आदेश

पटना हाई कोर्ट ने लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति प्रक्रिया को एक सप्ताह में पूरा करने का आदेश राज्य सरकार को दिया है। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई कर यह आदेश पारित किया।

21 जून, 2015 को प्रकाशित किये गए विज्ञापन के मामले में यह आदेश को कोर्ट ने पारित किया है। विज्ञापन बिहार स्टाफ सेलेक्शन कमीशन द्वारा निकाला गया था।

कुल 1772 रिक्तियां थी, किन्तु अब तक बहाली नहीं की गई थी। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह में रिजल्ट प्रकाशित करने को भी कहा है। साथ ही साथ कोर्ट ने वर्ष 2019 में किये गए संशोधन के अनुसार अर्हता रखने वाले याचिकाकर्ताओं के मामलों पर भी विचार करने को कहा है।

याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए वरीय अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने इनके मामलों पर भी विचार करने का आग्रह कोर्ट से किया था। अब इस मामले पर आगे की सुनवाई 2 सप्ताह बाद कि जाएगी।

विश्व कैंसर दिवस पर राज्यभर में आयोजित होंगे निःशुल्क कैंसर रोग परामर्श शिविरः मंगल पांडेय

विश्व कैंसर दिवस पर राज्यभर में आयोजित होंगे
निःशुल्क कैंसर रोग परामर्श शिविरः मंगल पांडेय
चार से 10 फरवरी तक सरकारी अस्पतालों में लगेंगे कैंप

पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा चार फरवरी से राज्यभर में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जायेगा। इसका मुख्य उद्देश्य जनमानस के बीच कैंसर के प्रति जागरूकता लाना तथा कैंसर के शुरुआती चरणों में ही इसका पता लगाकर निदान करना है।

चार से 10 फरवरी तक राज्य के जिला एवं अनुमंडलीय स्तरीय अस्पताल, रेफरल अस्पताल, प्राथमिक तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर निःशुल्क कैंसर रोग परामर्श शिविर आयोजित होगा।

श्री पांडेय ने कहा कि विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर राज्य के 14 जिलों औरंगाबाद, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, दरभंगा, गया, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, नालंदा, पटना, समस्तीपुर, सीवान, सुपौल एवं वैशाली के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में कैंसर की स्क्रीनिंग कार्य में होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, मुजफ्फरपुर से समन्वय स्थापित कर आवश्यक सहयोग ली जाएगी।

इन शिविरों के संबंध में लोगों तक जानकारी पहुंचाने के लिए दो दिन पहले से माइकिंग के द्वारा लोगों के बीच प्रसारित किया जाएगा। साथ ही स्वास्थ्य संस्थानों और शहर के प्रमुख स्थानों पर फ्लैक्स और होर्डिंग्स लगाई जाएगी।

श्री पांडेय ने कहा कि इन शिविरों में आने वाले मरीजों का चिकित्सक द्वारा कैंसर की स्क्रीनिंग के साथ कॉमन कैंसर जैसे- मुंह का कैंसर, स्तन कैंसर आदि के संभावित लक्षणों एवं उससे बचाव के प्रति जागरूक किया जाएगा।

शिविरों में सामान्य कैंसर रोग से संबंधित संदिग्ध व्यक्तियों को आइजीआइएमएस, एम्स, पटना, पीएमसीएच एवं महावीर कैंसर अस्पताल, पटना में उपचार के लिए रेफर किया जाएगा। इसके साथ ही इन अस्पतालो में निःशुल्क कैंसर रोग परामर्श शिविर का आयोजन किया जाएगा।

15 फरवरी तक धान अधिप्राप्ति की बढ़ाई गयी समय सीमा

मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से धान
अधिप्राप्ति की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की
मुख्य बिन्दुः-
• इस वर्ष 15 फरवरी तक धान अधिप्राप्ति की समय सीमा
निर्धारित की गई है। इच्छुक किसान समय सीमा में इसका
लाभ उठाएं।
• यह संतोष की बात है कि अब तक 4 लाख 50 हजार
किसानों से 32 लाख 61 हजार मीट्रिक टन की रिकॉर्ड धान
अधिप्राप्ति हो चुकी है।
लक्ष्य के अनुरुप धान अधिप्राप्ति को लेकर तेजी से काम
.
करें।
धान अधिप्राप्ति का भुगतान किसानों को ससमय करते रहें
ताकि उन्हें इसका लाभ मिले।
• उसना चावल मिलों की संख्या और बढायें। अरवा चावल
मिलर्स को उसना चावल मिल में कन्वर्ट करने के लिए प्रेरित
करें।
आज मुख्यमंत्री श्नीतीश कुमार ने 1 अणे मार्ग स्थित संकल्प में
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से धान अधिप्राप्ति की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की।
बैठक में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव विनय कुमार ने प्रस्तुतीकरण
के माध्यम से धान अधिप्राप्ति के संबंध में विस्तृत जानकारी |

उन्होंने खरीफ विपणन वर्ष
2021-22 के अंतर्गत धान अधिप्राप्ति की अद्यतन स्थिति, लक्ष्य तथा चावल मिलों की अद्यतन
स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चरणबद्ध तरीके से धान अधिप्राप्ति की प्रक्रिया
शुरु की गई है। किसानों को ससमय भुगतान किया जा रहा है, इससे उन्हें काफी फायदा हो
रहा है।

बैठक में सहकारिता विभाग की सचिव बंदना प्रेयसी ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम
से धान अधिप्राप्ति कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लक्ष्य के अनुरुप सभी जिलों से
धान का क्रय किया जा रहा है।

अब तक 4 लाख 50 हजार किसानों के माध्यम से 32 लाख
61 हजार मीट्रिक टन की रिकॉर्ड धान अधिप्राप्ति की गई है। प्रोक्योरमेंट पोर्टेबिलिटी सिस्टम
लागू की गई है, इसके माध्यम से 35 हजार किसानों द्वारा अब तक 2 लाख 63 हजार मीट्रिक
टन धान अधिप्राप्ति की गई है। उन्होंने बताया कि धान अधिप्राप्ति के लिए 15 फरवरी 2022
तक की समय सीमा निर्धारित की गई है।

माध्यम
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों ने अपने यहां सबसे पहले पैक्स के
धान अधिप्राप्ति की शुरुआत करायी, इससे किसानों को काफी लाभ हो रहा है। यह
संतोष की बात है कि अब तक 4 लाख 50 हजार किसानों से 32 लाख 61 हजार मीट्रिक टन
की रिकॉर्ड धान अधिप्राप्ति हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 15 फरवरी तक धान
अधिप्राप्ति की समय सीमा निर्धारित की गई है, इच्छुक किसान समय सीमा में इसका लाभ
उठाएं।

मुख्यमंत्री ने निर्देश देते हुये कहा कि किसानों को धान अधिप्राप्ति में किसी प्रकार की
समस्या न हो इसके लिए निरंतर निगरानी एवं अनुश्रवण करते रहें। लक्ष्य के अनुरुप धान
अधिप्राप्ति को लेकर तेजी से काम करें। धान अधिप्राप्ति का भुगतान किसानों को ससमय
करते रहें ताकि उन्हें इसका लाभ मिले। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की हरसंभव
सहायता के लिये पूरी तरह तत्पर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में उसना चावल की खपत अधिक है। इसको लेकर
उसना चावल के मिलों की संख्या और बढायें। अरवा चावल मिलर्स को उसना मिल में कन्वर्ट
करने के लिए प्रेरित करें।

बिहार में वर्षो से लंबित राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण का रास्ता हुआ साफ

बिहार में वर्षो से लंबित राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण का रास्ता साफ होता दिख रहा है हाईकोर्ट पटना के तल्ख टिप्पणी के साथ साथ इस बार के आम बजट में जिस तरीके से सड़क निर्माण के क्षेत्र में राशि का निर्धारण किया गया है। इससे बिहार के पटना बक्सर ,पटना गया ,पटना मुजफ्फरपुर,खगड़िया पूर्णिया जैसे एक दर्जन से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग के अधूरे काम के शीघ्र पूरा होने की उम्मीद जगी है ।

हाईकोर्ट की फटकार के बाद एनएचएआई की अध्यक्ष अलका उपाध्याय पटना पहुंच कर निर्माण कार्य में हो रही देरी को लेकर बैठक की है और हाईकोर्ट में अपनी और से एक हलफनामा भी दायर किया है जिसमें उन्होंने कोर्ट को सूचित किया है कि बक्सर से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को जोड़ने पर काम चल रहा है।

पटना-आरा-बक्सर एनएच की दूरी पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से 18 किलोमीटर हैं, जो गाजीपुर जिले में स्थित हैं। इससे राज्य के लोगों को दिल्ली जाने में सुविधा होगी।

सुनवाई में राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार ने जानकारी दी कि एनएचएआइ की अध्यक्ष अलका उपाध्याय स्वयं राष्ट्रीय राजमार्गों निर्माण कार्य की समीक्षा की है और उन्होंने कहा है कि बिहार के विकास आयुक्त ने राज्य के सभी डीएम, एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और रीजनल आँफिसर के साथ 31 जनवरी को बैठक कर किसी तरह की समस्या के समाधान के लिए संबंधित डीएम से मिल कर दूरे करेंगे और पूरे प्रगति पर 10 फरवरी को विकास आयुक्त बैठक करेंगे ।

वही आम बजट के बाद मीडिया से बात करते हुए पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन (Road Construction Minister Nitin Navin) ने कहा कि बिहार में भारतमाला फेज-2 के तहत जो सड़कें ली जानी हैं, उनके निर्माण में इस योजना से गति आएगी। बिहार ने आधा दर्जन से अधिक सड़कों के निर्माण का प्रस्ताव भारतमाला फेज-2 के तहत दिया हुआ है। इन सड़कों के निर्माण से बिहार के आधे से अधिक जिलों को सीधा फायदा होगा। एक-दूसरे से जुड़ते नेशनल हाइवे के जरिए पूरे बिहार में इसका असर दिखेगा।

भारतमाला फेज-2 के तहत इन सड़कों के हैं प्रस्तावभारतमाला फेज-2 के तहत पटना-कोलकाता एक्सप्रेस वे, भारत-नेपाल बार्डर सड़क, बक्सर-अरवल-जहानाबाद-बिहारशरीफ फोरलेन, दलसिंहसराय-सिमरी बख्तियारपुर, दिघवारा-मशरख-मोतिहारी-रक्सौल फोरलेन, सुल्तानगंज-देवघर ग्रीन फील्ड, मशरख-मुजफ्फरपुर, बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस वे, नवादा-बरौनी-झंझारपुर-लदनिया, मांझी-बरौली-बेतिया-कुशीनगर तथा कहलगांव-कुरसेला-फारबिसगंज फोरलेन।

गाड़ी के हेड लाइट में परीक्षा देने पर मजबूर हुए इंटरमीडिएट का छात्र

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से आयोजित इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा के पहले ही दिन बड़ी चूक सामने आई है। मोतिहारी के महाराजा हरेंद्र किशोर इंटर कॉलेज में दूसरी पाली में हिंदी की परीक्षा प्रश्नपत्र देरी से बंटने की वजह 1:45 बजे की जगह 4 बजे से शुरू हुई। अंधेरा होने पर स्कूल में लाइट की व्यवस्था की गई, पर कई छात्रों तक रोशनी ना पहुंचने पर वहां मौजूद पुलिस गाड़ी की हेडलाइट जला परीक्षा पूरी करवाई गई।

#Biharintermediateexam

इधर, एग्जाम शुरू होने में देरी पर सेंटर के अंदर छात्रों व बाहर अभिभावकों ने हंगामा किया। अभिभावकों की मानें तो सवाल के इंतजार में परीक्षा शुरू होने में देरी हुई। वहीं, डीईओ संजय कुमार ने बताया कि लड़कियों को अरेंज करने में परेशानी हुई। इसी कारण प्रश्नपत्र समय से नहीं बंट सका। 1:45 से शुरू होने वाली परीक्षा 4 बजे से शुरू हुई।

लापरवाही बरतने वाले अधिकारी व कर्मियों पर होगी कार्रवाई: डीएम
महाराजा हरेंद्र किशोर इंटर कॉलेज में देर से परीक्षा शुरू होने की सूचना मिली है। हंगामे की सूचना पर एसी, सदर एसडीओ व डीईओ को केंद्र पर भेजा गया। लापरवाही बरतने वाले अधिकारी व कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी।

गुगुल में गलती ढूंढने वाले छात्र को गुगल करेंगा सम्मानित

बिहार के बेगूसराय के एक छात्र ने सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल में गलती ढूंढ निकाली है। उसने गूगल को इसकी जानकारी भेजी तो गूगल ने भी माना कि उसकी साइट में बड़ी चूक है। इसका फायदा कोई भी ब्लैक हैट हैकर उठा सकता है।
गूगल ने छात्र का नाम अपने रिसर्चर की सूची में डालते हुए उसे गूगल हाल आफ फेम अवार्ड से नवाजा है। यह कारनामा बेगूसराय के रहने वाले आइआइटी मणिपुर में बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र ऋतुराज चौधरी ने किया है।

गुगल में गलती ढूढ़ने वाला छात्र होगा सम्मानित

वे साइबर सिक्योरिटी विषय पर अलग से शोध कर रहे हैं। ऋतुराज शहर के मुंगेरीगज निवासी व्यवसाई राकेश कुमार चौधरी के पुत्र हैं। उसकी बग हंटिंग फिलहाल पी-2 के फेज में है। जैसे ही वह पी-0 पर पहुंचेगा तो उसे गुगल इनाम भी देगी। गूगल की साइट में गलती खोजने वाले छात्र ऋतुराज चौधरी पढ़ाई के अलावा साइबर सिक्योरिटी विषय पर अलग से शोध भी कर रहे हैं।

ऋतुराज ने बताया कि गूगल सबसे बड़ा सर्च इंजन है, परंतु उसके साइट पर ब्लैक हैट हैकर्स एक रास्ते से हमला कर सकते थे. उसे उन्होंने ढ़ूंढ कर गूगल को इसकी रिपोर्ट की थी। इसके बाद कंपनी उसमें सुधार कर रही है। ऋतुराज को बचपन से ही साइबर सिक्योरिटी में खास दिलचस्पी थी। ऋतुराज के इस उपलब्धि से परिजन भी काफी खुश हैं ऋतुराज के पिता ने बताया कि हैकर दो तरह के होते हैं एक ब्लैक और एक वाइट। उनका पुत्र वाइट हैकर है जो गूगल की गलती खोज कर उसको बताया जबकि ब्लैक हैकर हैक कर साइट का गलत इस्तेमाल करते हैं।

क्या बिहार की बालिकागृह वैश्यावृति का अड्डा बन गया है ?

बालिकागृह वैश्यावृति का अड्डा तो नहीं बन गया है ?

नीतीश कुमार के समाज सुधार अभियान के दौरान समस्तीपुर में सभा को संबोधित करते हुए राज्य के DGP एसके सिंघल ने कहा था ‘कई सारी हमारी बेटियां शादी करने के लिए घर से बिना मां-पिता की मर्जी के चली जाती हैं। इसके इतने दुखद परिणाम निकलते हैं कि कइयों की हत्या हो जाती है। कई सारी हमारी बेटियां वेश्यावृति तक में पहुंच जाती हैं। उनका कोई ठिकाना नहीं रहता है, जिंदगी में वो क्या कर पाएंगी, वो कुछ भी सही प्रकार से नहीं रह पाता है। उसका बहुत सारा दुख परिवार के सदस्यों और मां-पिताजी को उठाना होता है।’
डीजीपी के इस बयान के बाद बड़ा बवाल हुआ था और महिला संगठन डीजीपी के विचार को पुरुषवादी मानसिकता और प्यार का दुश्मन करार देते हुए जमकर खरी खोटी सुनायी थी ।

किन आंकड़ों और बिहार के थाने में दर्ज हो रहे मामले पर गौर करेंगे तो बिहार में लड़कियों की ट्रैफिकिंग का एक बड़ जरिया इस तरह का प्रेम विवाह है बच्चे परिवार के मर्जी के खिलाफ घर से तो बाहर निकल जाते हैं लेकिन जब रहने खाने की व्यवस्था का सवाल आता है तो अधिकांश मामले में लड़का कमजोर पड़ जाता है । और ऐसी स्थिति में हो यह रहा है कि लड़के लड़कियां गांव लौटती है वहां परिवार वाले रखने को तैयार नहीं होता है तो कोर्ट उसे बालिका गृह में भेज देती है जहां मानसिक रूप से बीमार और आपराधिक घटनाओं में बंद लड़कियों के साथ उसे रहना पड़ता है, जिस वजह से आये दिन एक अलग तरह की यातनाओं से उन्हें गुजरना पड़ता है कई तो जिंदगी के जद्दोजहद में देह व्यापार में शामिल होने को मजबूर हो जाती है। वही ऐसी खबरें भी आती रहती है कि इस तरह के लड़के लड़कियां जब घर से बाहर निकलती है तो स्टेशन ,बस स्टेंड में देह व्यापार कराने से जुड़े गैंग के सदस्य जो इस तरह के लड़के लड़कियों पर खास नजर रखता है उसका शिकार लड़कियां हो जाती है और वो कोटे पर पहुंच जाती है।

एक घटना आज भी मुझे याद है दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी की बेटी इसी तरह प्रेम के चक्कर में अपने मित्र के साथ घर से निकल गयी और इसी दौरान हरिद्वार में देह व्यपार का धंधा कराने वाले गैग की चक्कर में फस गयी ,उस गैग वाले ने पहले लड़के की हत्या कर दी और बाद में लड़की को बिहार के पूर्णिया के मुजरा पट्टी लाकर बेच दिया। संयोग से उसके पास जो ग्राहक आया उसके फोन से वो अपने घर वाले को फोन कर पूरा लोकेशन बता दी उस समय पूर्णिया की एसपी किम शर्मा थी उसने रातो रात पूरे पूर्णिया जिले के पुलिस बल के साथ मुजरा पट्टी की घेराबंदी कर सर्च अभियान शुरु की और पहले उस लड़की को बाहर निकाला गया और उसके बाद तब तक एक्शन चलता रहा जब तक मंडी पूरी तरह ध्वस्त नहीं हो गया। एसपी किम 80 से ज्यादा लड़की और इस तरह के धंधे में शामिल लड़के को जेल भेज दी इस दौरान जो लड़किया यहां से बरामद हुई थी उसमें कई ऐसी लड़की थी जो इसी तरह प्रेम के जाल में फस कर कोठे पर पहुंच गयी थी ।

सी तरह मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में भी जिन 45 लड़कियों को रेस्क्यू किया गया था उसमें अधिकांश मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर थी लेकिन चार पांच ऐसी लड़कियां थी जो इसी तरह प्रेम जाल में फस कर रिमांड होम में पहुंची और उसके बाद दिल्ली,यूपी,बंगाल होते हुए मुजफ्फरपुर पहुंची थी। ये दिल्ली .यूपी,बंगाल होते कैसे मुजफ्फरपुर पहुंची इसकी भी बड़ी कहानी है यह सब नेटवर्क के सहारे चलता है जहां जैसा ग्राहक वैसी लड़कियां भेजी जाती है इन्ही लड़कियों की गवाही मुजफ्फरपुर रिमांड होम मामले में ब्रजेश ठाकुर को महंगा पड़ गया था । आज बिहार में जितनी भी बालिका गृह है लड़कियां रह रही है उसमें 70 से 80 प्रतिशत लड़कियाँ इसी तरह भाग कर शादी करने से जुड़ी हुई है जिसका हाल आप कल्पना में भी नहीं सोच सकते हैं गायघाट रिमांड होम मामले में जो लड़की बयान दे रही है वो भी इसी तरह प्रेम जाल में फस कर यहां पहुंची थी ।

आज समाज और पुलिस,कोर्ट और सरकार के सामने ये एक बड़ी समस्या बन कर सामने आ रही है इस पर गंभीरता से सोचने कि जरूरत है क्योंकि व्यवस्था नहीं होने के कारण इस तरह की संस्था वेश्यावृत्ति का संस्थागत रुप धारण करता जा रहा है हालांकि बिहार सरकरा पिछले माह ही इस तरह के लड़कियों के लिए विशेष व्यवस्था करने का निर्णय लिया है जिसके तहत घर से भागी और मानव तस्करी से मुक्त कराई गई लड़कियों के लिए रक्षा गृह खुलेगा। महिला एवं बाल विकास निगम सभी जिलों में रक्षा गृह खोलेगा। इन रक्षा गृह में 50 लड़कियों को रखने की व्यवस्था होगी और इसमें रहने वाली लड़कियों के पढ़ने लिखने की व्यवस्था के साथ साथ लड़कियां आत्मनिर्भर बने इस पर फोकस होगा इस निर्णय के अमल में आने में कितना वक्त लगेगा कहना मुश्किल है लेकिन इस तरह के प्रेम प्रसंग मामले में सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था को नये सिरे से सोचने कि जरूरत है सिर्फ अधिकार के सहारे इसका समाधान नहीं निकल सकता है।

समावेशी विकास मोदी सरकार की प्राथमिकता . – गृह राज्य मंत्री- नित्यानंद राय

समावेशी विकास मोदी सरकार की प्राथमिकता . – गृह राज्य मंत्री- नित्यानंद राय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी द्वारा सर्वस्पर्शी, सर्वसमावेशी बजट प्रस्तुत किया गया है । जो गाँव, गरीब, किसान, युवा ,महिला , वंचित, पिछड़ा और दलितों के आर्थिक उत्थान को सुनिश्चित करने वाला है। आत्मनिर्भर भारत का जो संकल्प प्रधानमंत्री जी ने लिया है, उस संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में यह बजट एक महत्वपूर्ण दृष्टिपत्र है। रक्षा क्षेत्र में भी भारत आत्मनिर्भर बनेगा और सैन्य शक्ति सबल होगी .

1 फरवरी 2022 को आम बजट पेश होने के बाद माननीय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इसकी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि ये बजट युवाओं, किसानों और आम जन के हित में है। इससे देश में नई नौकरियों का सृजन होगा साथ ही निवेश के अवसर बढेंगे। कोरोना काल के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।

जो आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने इस बजट को आत्मनिर्भर भारत का बजट बताया। जिसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे और अगले दशक में भारत एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभरेगा।

गरीब लोगों के लिए प्रधानमंत्री गरीब आवास योजना के तहत 80 लाख आवास के निर्माण को एक बड़ा कदम बताया। साथ ही नए रोजगार के अवसर को गरीब लोगों के जीवन में सुधार लाने वाला कदम बताया। उन्होंने उम्मीद जताया कि इससे देश के उन वर्गों को खासा फायदा होगा जो अभी तक गरीबी की मार झेल रहे हैं और उनके पास रहने के लिए अपना घर नहीं है।

इन लोगों को रोजगार उपलब्ध होने के बाद इनके जीवन में नई उर्जा का संचार होगा। उन्होंने बताया किसानों के आमदनी बढ़े तथा उनके जीवन के जरूरतों की पूर्ति हो सके, किसान भी सक्षम हो इसके बजट में कई प्रावधान किये गये हैं . रबी 2021-22 में 163 लाख किसानों से 1208 मीट्रिक टन गेहूं और धान खरीदा जाएगा .

जीरो बजट खेती और प्राकृतिक खेती, आधुनिक कृषि, मूल्य संवर्धन और प्रबंधन पर जोर दिया जाएगा। किसानों के खाते में MSP के जरिए 2.37 करोड़ रुपये सरकार ने भेजे हैं और आर्गेनिक खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहन दिया जाएगा. सरकार की ओर से रसायन और कीटनाशक मुक्त खेती का प्रसार बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.

गंगा कॉरिडोर के आसपास नेचुरल फॉर्मिंग को बढ़ावा दिया जाएगा. किसानों के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए, राज्य सरकारों और एमएसएमई की भागीदारी के लिए व्यापक पैकेज पेश किया जाएगा। स्किलिंग प्रोग्राम को नया रूप दिया जाएगा।

युवा शक्ति को स्किल इंडिया मिशन के जरिए और स्किल्ड वर्कर बनाने पर सरकारी योजनाओं के तहत काम किया जाएगा. लोगों के लिए आजीविका के साधन बढ़ाए जा सकें इसके लिए सरकारी प्रोजेक्ट्स की संख्या बढ़ाई जाएगी. जल से नल योजना के लिए 60 हजार करोड़ रुपये के आवंटन से लोगों को शुद्ध पीने को जल मिलेगी.

25 हजार किलोमीटर के नेशनल हाईवे का विकास होगा, 5 बड़ी नदियों को जोड़ा जायेगा. महिलाओं व बच्चों के कल्याण के लिए मिशन शक्ति, मिशन वात्सल्य व सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 जैसी योजनाओं शुरू की जायेगी.

प्रधानमंत्री जी के एक श्रेष्ठ भारत के निर्माण के जिस संकल्प को 130 करोड़ देशवासियों का विश्वास हासिल है, भारत उसी दिशा में सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। आज का बजट देश के सभी वर्गों, सभी क्षेत्रों व सम्पूर्ण समाज की आकांक्षाओं की पूर्ति करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस ऐतिहासिक बजट के लिए माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी तथा माननीय वित्त मंत्री जी का आभार।

बजट 2022-23 नौजवानों और किसानों के लिए अत्यंत लाभदायकः मंगल पांडेय

बजट 2022-23 नौजवानों और किसानों के लिए अत्यंत लाभदायकः मंगल पांडेय
केंद्र सरकार की दूरदर्शी पहल देश के विकास में मील का पत्थर साबित होगा

पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने आम बजट को दूरदर्शी बताते हुए समाज के हर तबके, खासकर नौजवानों और किसानों के लिए अत्यंत लाभदायक बताया है। इसके लिए प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी, माननीय गृह मंत्री अमित शाह और माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बधाई देते हुए कहा कि एनडीए सरकार ने सभी क्षेत्रों का खयाल रखा है। बजट में कृषि, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की केंद्र सरकार की यह पहल देश के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।
श्री पांडेय ने कहा कि ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा मिलेगा और किसानों के खातों में 2.37 लाख करोड़ रुपये की एमएसपी सीधे ट्रांसफर की जाएगी। कृषि विश्वविद्यालय को बढ़ावा दिया जायेगा और ड्रोन के जरिये कृषि क्षेत्र को बढ़ाने पर जोर दिया जायेगा। कृषि से जुड़े उपकरण सस्ते होने पर किसानों को खेती करने के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। नाबार्ड के जरिए कृषि से जुड़े स्टार्टअप्स को वित्तीय सुविधा प्रदान करने की योजना किसानों की आर्थिक दशा सुधारेगी।
श्री पांडेय ने कहा कि युवाओं के लिए 60 लाख नौकरी देने का लक्ष्य और 80 लाख बेघरों को पक्का मकान देने की केंद्र सरकार की घोषणा से लोगों में नई उम्मीद जगी है। देश में ई-शिक्षा को बढ़ावा और गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं को जन-जन तक पहुंचाने के साथ-साथ हर घर नल का जल मुहैया कराने की केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी सोच देश और राज्य को आत्मनिर्भर बनाने में मजबूती प्रदान करेगा।

केन्द्रीय बजट है सकारात्मक एवं स्वागत योग्य : मुख्यमंत्री

पटना: 01/02/2022
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केन्द्रीय बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि पिछले दो वर्षों से देश का विकास कोरोना के कारण प्रभावित रहा है। इन विषम परिस्थितियों से निकलने के लिये केन्द्र सरकार द्वारा अपने बजट के माध्यम से देश के विकास की गति को बढ़ाने के लिये कई कदम उठाये गये हैं, जो सराहनीय हैं।

संतुलित बजट पेश करने के लिये मैं केन्द्र सरकार को बधाई देता हॅू। केन्द्र सरकार के द्वारा देश में बड़े पैमाने पर आधारभूत संरचना के निर्माण का निर्णय भी स्वागत योग्य है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के द्वारा अपने संसाधनों से गंगा के दोनों किनारों के 13 जिलों में जैविक कोरिडोर विकसित किया जा रहा है। इस वर्ष केन्द्रीय बजट में गंगा के किनारे 5 किलो मीटर के स्ट्रेच में प्राकृतिक खेती का कोरिडोर विकसित करने का निर्णय लिया गया है। केन्द्र सरकार का यह कदम सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि इस बजट में धान एवं गेंहूँ की अधिप्राप्ति को बढ़ाने का निर्णय लिया । इससे किसानों को काफी लाभ मिलेगा।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत 80 लाख नये आवास बनाने की घोषणा हुयी है। यह स्वागत योग्य है ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकारों को केन्द्रीय करों की हिस्सेदारी के रूप में इस वर्ष एवं अगले वर्ष अधिक राशि प्राप्त होगी। इससे राज्य सरकारों की वित्तीय कठिनाइयां कम होंगी और राज्यों को राहत मिलेगी।