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पटना हाई कोर्ट ने नारायणपुर – मनहारी- पूर्णिया हाईवे के निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई पर हुई सुनवाई

पटना हाई कोर्ट ने नारायणपुर – मनहारी- पूर्णिया हाईवे के निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई को रोकने के लिये दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई की।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए एन एच ए आई को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।

इसके पूर्व कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पूरक हलफनामा दायर करने को कहा था, जिसमें याचिकाकर्ता को बताने को कहा गया है कि कार्बन के उत्सर्जन को कैसे कम किया जा सकता है। कोर्ट ने पेड़ो को ट्रांसलोकेट करने की अनुमति पूर्व में ही दे दी थी।

इस बीच एन एच ए आई द्वारा दायर जवाबी हलफनामा में कहा गया था कि पेडों को ट्रांसलोकेट करने की कार्रवाई की जा रही है। यह भी बताया गया था कि पेड़ों को गिराने व ट्रांसलोकेट करने की कार्रवाई 3 फरवरी, 2021 और 23 फरवरी, 2021 को जिला वन अधिकारी द्वारा दिये गए आदेश के आलोक में किया जा रहा है।

कोर्ट को जानकारी दी गई कि 8340 पेड़ों को गिराया गया था और 2045 पेड़ों को ट्रांसलोकेट किया जा रहा है। यह भी कहा गया है कि 90 सेंटीमीटर से अधिक घेरा वाले पेड़ों को गिराया जा रहा है और इससे नीचे के घेरा वाले पेड़ों को ट्रांसलोकेट किया जा रहा है।

याचिकाकर्ता शाश्वत ने पूर्व में ही कोर्ट को बताया था कि विकास व निर्माण के दौरान पेड़ो की कटाई पर रोक को लेकर 26 जुलाई, 19 को राज्य सरकार के पर्यावरण, वन व मौसम विभाग द्वारा भी कार्यालय आदेश भी जारी किया गया है।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका के जरिये संबंधित विभागों से विस्तृत योजना रिपोर्ट , क्लेरेन्स सर्टिफिकेट, योजना पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर रिपोर्ट उपलब्ध करवाने को लेकर भी आग्रह किया है।

साथ ही याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका के जरिये काटे जाने वाले पेड़ों की संख्या, पेड़ों की उम्र, इसका पर्यावरण के लिए महत्व व पेड़ो की कटाई से आसपास के पशु- पक्षियों पर पड़ने वाले प्रभाव के आकलन करने को लेकर विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाने हेतु आदेश देने का आग्रह भी किया है। याचिका में इस प्रकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट व पटना हाई कोर्ट द्वारा पूर्व में दिये गए आदेशो का भी जिक्र किया गया है।

अब इस माामले पर आगेे की सुनवाई 22 फरवरी,2022 को की जाएगी।

देश में रिमांड होम लड़कियों के व्यापार का संस्थागत रुपरुप धारण कर लिया है

रविवार की शाम जदयू से जुड़ी एक नेत्री का फोन आया संतोष भैया गायघाट रिमांड होम को लेकर एक खबर आ रही है जरा देखिए ना एक लिंक भेजे हैं । कोई तीन चार घंटा पहले ही किसी ने इस खबर के बारे में विस्तृत रुप से मुझसे चर्चा किया था इसी दौरान बहुत सारी बाते समझ में आ गयी थी बातचीत चल ही रही थी तो पता चला महिलाओं का एक संगठन एसएसपी से मिला कर इसकी शिकायत भी कर दी है ,साथ ही समाज कल्याण विभाग के सीनियर अधिकारी तक ये बात पहुंचा दी गयी है।
एसएसपी पीड़िता को महिला थाना भेज दिया है और थाना प्रभारी को जांच कर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है ।वही कल इस मामले में समाज कल्याण विभाग और पटना जिला प्रशासन द्वारा भी एक जांच टीम गठित कि गयी है वो टीम लड़की के आरोप में कितना दम इसकी जांच करेगी हालांकि वह जांच कमिटी लड़की के आरोप को खारिज कर दिया है ऐसी जानकारी मुझे मिल रही है।
लड़की के पीछे कौन खड़ी है उसका उदेश्य क्या है उस पर जितना सवाल करना है कर सकते हैं लेकिन जहां तक गायघाट रिमांड होम का सवाल है तो लड़की जो बयान दे रही है उसे सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता है ।
कोई छह सात वर्ष पहले की बात है मुझे यह जानकारी मिली कि गायघाट रिमांड होम में रात के समय बड़ी बड़ी गाड़ियां आती जाती रहती है एक दिन तय हुआ रात में स्टिंग किया जाये इसी कड़ी में मुझे पता चला है कि महिला रिमांड होम में हो क्या रहा है ।
संयोग से उस समाज कल्याण विभाग में एक बेहद संवेदनशील अधिकारी पोस्टेंड थे उनसे हमारी मुलाकात 26 जनवरी के कार्यक्रम के दौरान राजभवन में हो गयी हालांकि तीन चार रात कोशिश करने के बावजूद मेरी स्टोरी एस्टेब्लिश नहीं हो पा रही थी इसलिए खबर नहीं चला पा रहे थे ।
लेकिन जो थोड़ी सी भी जानकारी मेरे पास थी वो मैं उस अधिकारी को बता दिया उन्होंने एक सप्ताह का समय मुझसे मांगा और उसके एक माह के अंदर उक्त अधिकारी ने गायघाट रिमांड होम में बड़ा ऑपरेशन चलाया गया और वहां पोस्टेंड अधिकांश कर्मियों के हटा दिया गया कई पर एक्शन भी लिया।
हुआ ऐसा कि उक्त अधिकारी ने एक ट्रेनी आईएएस अधिकारी के साथ साथ समाज कल्याण विभाग से जुड़ी यंग महिला पदाधिकारी के नेतृत्व में एक जांच कमिटी गठित कर दिया था दो दिनों तक दिन दिन भर जांच चलती रही लेकिन रिमांड होम के कर्मी और रिमांड होम में ही रहने वाले कुछ लड़कियों ऐसा माहौल बना दी थी कि जांच टीम की कोशिश के बावजूद भी लड़कियां जुबान नहीं खोल रही थी जांच टीम निराश होकर लौट गयी जांच टीम को भी लड़कियों से बातचीत के दौरान कुछ लग रहा था लेकिन कोई साक्ष्य नहीं मिला। शाम को उस आईएएस अधिकारी का फोन आया संतोष जी वहां ऐसा कुछ भी नहीं था सब ठीक ठाक चल रहा है ।
मुझे जो सूचना दे रही थी उसको कांल किये तो वो बोली लड़की वैसे मुंह नहीं खोलेगी जांच टीम को कहिए उसका अलमीरा और बक्सा में रखे कपड़ा को चेक करे सब पता चल जाएगा ।मैंने तुरंत उक्त अधिकारी को फोन करके कहा जानकारी पक्की है लड़की का कपड़ा चेक करवाईए सब पता चल जायेगा तीन चार दिन बाद जांच टीम अचानक रिमांड होम पहुंची और लड़कियों का अलमारी और बक्सा चेक करना शुरू कर दी ।
मुझे जो सूचना दे रही है उसने जो जानकारी दी थी वो सही साबित हुई लड़कियों के पास से बहुत ही मंहगी मंहगी ब्रा,अंडर गारमेंट्स और परफ्यूम मिला और फिर जो तथ्य सामने आया आप कल्पना में भी नहीं सोच सकते हैं । वैसे यही से मुझे बिहार के महिला रिमांड होम में क्या क्या होता है यह जानकारी मिल गयी थी साथ ही इसके पीछे कितना बड़ा Nexus काम कर रहा है इसकी भी जानकारी मिल गयी थी ।
ऐसा नहीं है कि मुजफ्फरपुर रिमांड होम मामले में एक्शन होने के बाद यह खेल बंद हो गया है बल्कि अब तो खेल और भी बड़े स्तर पर चल रहा है पहले रिमांड होम में मानसिक रूप से कमजोर ,परिवार द्वारा तिरस्कृत लड़किया रहा करती थी लेकिन हाल के दिनों में प्रेम विवाह मामले में नाबालिग लड़कियां बहुत ज्यादा रिमांड होम में आने लगी है जिसमें लड़का जेल चला जाता है और लड़की अपने माँ बाप के पास नहीं जाना चाहती है उसको कोर्ट महिला रिमांड होम भेज देती है।
इस तरह की लड़कियां जिस तरह के खेल में शामिल है कह नहीं सकते ये लड़कियां किसी तरह से अपने प्रेमी को जेल से बाहर निकलवाना चाहती है, उसके साथ रहना चाहती है ,इसका लाभ रिमांड होम और उससे जुड़ा सिडिकेंड संस्थागत रुर से उठा रहा है ।रिमांड होम से लेकर कोर्ट परिसर तक इस सिडिकेंड का तार जुड़ा हुआ है जिसके सहारे बड़े स्तर पर यह खेल चल रहा है।
बिहार में एक बड़ा बाजार खड़ा हो गया है और इस खेल में बड़े बड़े लोग शामिल है और इस तरह की लड़कियों की बोली भी अच्छी लगती है गायघाट रिमांड होम में ही इस समय पांच सौ से अधिक लड़कियां हैं जिसमें से तीन सौ से अधिक लड़कियाँ प्रेम विवाह से जुड़े मामले में रिमांड होम में रह रही है।
ऐसे में इस तरह के खेल पर ब्रेक लगाना है तो बड़े स्तर पर काम करने कि जरूरत है जिसमें सरकार के साथ साथ महिला और लड़कियों पर काम करने वाली संस्था को जोड़ा जाना चाहिए क्यों कि सरकार और न्यायालय स्तर पर जो हो सकता है उसका प्रावधान जरुर है जैसे इस तरह के होम का अभिभावक कोर्ट है और इसी जिम्मेवारी के तहत जज इस तरह के रिमांड होम का भिजिट भी करते हैं लेकिन यह सब बस एक प्रक्रिया के तहत होता है जिसके सहारे इस तरह के खेल को रोका नहीं जा सकता है ।आप जानकर हैरान रह जायेंगे कि देश में इस तरह की जितनी भी महिला रिमांड होम है उसका आपस में तार जुड़ा हुआ है और अब लड़कियों का भी आदान प्रदान होता है ये तो एक अलग तरह का खेल है ठीक से जांच हो जाये तो पूरी व्यवस्था हिल जायेंगी
वैसे गायघाट रिमांड होम में जिस स्तर पर खेल चल रहा है ऐसे में उक्त लड़की के बयान को खारिज कर देना किसी बड़े सच को छुपाने जैसा ही है इसलिए इसकी समग्रता में जांच होना चाहिए ।

सड़क निर्माण के दौरान पेड़ कटाई पर रोक को लेकर याचिका दायर

पटना हाईकोर्ट में नारायणपुर – मनहारी- पूर्णिया हाईवे के निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई को रोकने के लिये दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कल तक के लिए टल गई है। चीफ जस्टिस संजय करोल की डिवीजन बेंच इस मामले पर सुनवाई कर रही है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को रिजॉइंडर दायर करने का निर्देश दिया है।इसमें कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह बताने को कहा था कि कार्बन के उत्सर्जन को कैसे कम किया जा सकता है।
साथ ही कोर्ट ने पेडों को एक स्थान से हटा कर दूसरे स्थान पर लगाने की अनुमति दे दी थी।इससे पहले की सुनवाई में कोर्ट में एन एच ए आई (नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया) ने हलफनामा दायर कर बताया था कि पेडों को ट्रांसलोकेट करने की कार्रवाई की जा रही है।

कोर्ट को बताया गया कि पेड़ों को गिराने व ट्रांसलोकेट करने की कार्रवाई 3 फरवरी, 2021 और 23 फरवरी, 2021 को जिला वन अधिकारी द्वारा दिये गए आदेश के आलोक में किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी जानकारी दी थी कि अब तक 8340 पेड़ों को गिराया गया था और 2045 पेड़ों को ट्रांसलोकेट किया जा रहा है।याचिकाकर्ता शाश्वत ने पूर्व में कोर्ट को जानकारी दी थी कि विकास व निर्माण के दौरान पेड़ो की कटाई पर रोक को लेकर 26 जुलाई, 19 को राज्य सरकार के पर्यावरण, वन व मौसम विभाग द्वारा भी कार्यालय आदेश भी जारी किया गया था।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में यह भी माँग की थी कि काटे जाने वाले पेड़ों की संख्या, पेड़ों की उम्र, इसका पर्यावरण के लिए महत्व व पेड़ो की कटाई से आसपास के पशु- पक्षियों पर पड़ने वाले प्रभाव के आकलन करने को लेकर विशेषज्ञों की एक कमेटी बनायीं जाए।

इस मामले अगली सुनवाई 1फरवरी,2022 को की जाएगी

सवाल नहीं सलाम कीजिए 21 सदी का भारत

मेरी एक बहुत ही खूबसूरत महिला मित्र है जो गुजरात रहती है खूबसूरत का मतलब चेहरे से नहीं है विचार ,सोच और समझदारी से है ।वो यही कोई 9 वर्ष पूरानी मेरी दोस्ती है ,पहले घंटो बात होती थी लेकिन जब से उसके ऊपर राजनीति का भूत सवार हुआ है उसके अंदर की वो सारी खूबसूरती जिसका मैं कायल रहता था वो अब दिखाई नहीं देती है फिर भी हमेशा उस पर नजर बनी रहती है लेकिन पहले जैसे घंटो बात नहीं होती है।
कल उसका एक पोस्ट आया जिसमें वो लिखी थी—मैं लिखने के लिए राजनीति पर पूरा ग्रंथ लिख दूँ क्योंकि पिछले बीस साल की राजनीति की पंक्ति – पंक्ति मुझे समझ है । मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री नहीं वर्ल्ड बैंक का स्टाफ थें। उनको मैं नेता ही नहीं मानती। देश का सारा महत्वपूर्ण सम्पत्ति बेचकर मैडम की झोली भर दी।लेकिन मुझे बहस नहीं करना क्योंकि जमीन पर कुछ सकारात्मक करने का सपना अभी भी मुझमें मरा नहीं है । सोशल मीडिया पर दिन भर दरी बिछाकर लेट नहीं सकती कि सबको जवाब दे सकूं।
मेरा मानना है कि राजनीति की समझ आज भी सबसे कठिन विषय है इसी संदर्भ को ध्यान में रखते हुए उसके राजनीति से जुड़े इस पोस्ट पर लंबे अंतराल के बाद एक छोटी सी प्रतिक्रिया लिख डाली, मोदी को भी यही भ्रम है ,इस छोटी सी प्रतिक्रिया पर उसकी प्रतिक्रिया आयी ,आप लोग लगे रहिए । जब तक आप लोग लगे रहेंगे मोदी को वोट की कमी नहीं होगी। जिस दिन सज्जन पत्रकार लोग मोदी के लिए नफ़रत फैलाना छोड़कर , लोग तक सही सूचना पहुँचाना शुरू कर देगे तभी बदलाव हो सकेगा।
जहां तक मैं इसे समझता हूं इसके अंदर साहित्य ,संगीत और स्त्री पुरुष के बीच के रिश्ते को लेकर जो समझ है वह विरले मिलता है इस तरह की समझ रखने वाली महिलाएं हिन्दू मुसलमान और भारत पाकिस्तान को लेकर इस तरह जुनूनी हो गयी है कि इसके अंदर का इंसान मर गया है जो इसकी पहचान थी।
खैर अब संदर्भ पर आते हैं ये वही देश है जहां किसी भी राजनीतिक दल या राजनीतिज्ञों की आलोचनाओं को इस तरह से दिल पर नहीं लेते थे । एक दिन की बात है लाल किला पर कवि सम्मेलन आयोजित था उस वक्त नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे और उस कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि नेहरु थे ,नेहरू आये और मंच पर चढ़ने लगे पीछे रामधारी सिंह दिनकर चल रहे थे तभी नेहरू सीढ़ियां चढ़ते हुए उनके पैर लड़खड़ा गए तो दिनकर ने उन्हें संभाला. नेहरू ने उन्हें धन्यवाद कहा तो इस पर दिनकर ने कहा – ‘जब जब सत्ता लड़खड़ाती है तो सदैव साहित्य ही उसे संभालती है।
इतनी बड़ी बात वो कह गये लेकिन नेहरु उनके बात को दिल पर नहीं लिए और उन्हें फिर से राज्यसभा भेज दिया। आज कोई ऐसा सोच भी सकता है नेहा सिंह राठौर हाल ही में यूपी में क्या बा एक गीत गायी बवाल मच गया और लोग उसके चरित्र तक पर सवाल खड़े कर दिये इतनी असहिष्णु हो गये हैं हमलोग आलोचना बर्दाश्त नहीं है ।
मतलब सवाल नहीं करना है सवाल किये तो फिर आपकी खैर नहीं है हमारी महिला मित्र सज्जन पत्रकार कह कर जिन पत्रकारों पर कटाक्ष की है वो कौन है रवीश कुमार. पुण्य प्रसून बाजपेयी ,अजीत अंजुम ,अभिसार शर्मा जैसे दर्जनों पत्रकार जो सरकार से सवाल कर रहे थे इस वजह से उन्हें नौकरी से निकलवा दिया गया।जबकि इस तरह के सवाल सरकार से पहले भी ये पत्रकार करते थे।
लेकिन अब देश बदल गया है ,देश की सोच बदल गयी है,समझदारी बदल गयी है सवाल नहीं सलाम कीजिए ,21 सदी के भारत को इसी दिशा में ले जाने कि कोशिश चल रही है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि देश सवाल करने वालो से ही बनता है और बढ़ता भी है। इसलिए सवाल करना मत छोड़िए।भले ही आज के इस पोस्ट से गुजरात वाली महिला मित्र नराज ही क्यों ना हो जाये जोखिम उठाते रहना हां इतिहास सवाल करने वालों को ही याद रखता है।

बिहार में नहीं थम रहा है सोना लूट

बिहार में नहीं थम रहा है सोना लूट, आज इस बार सीवान और छपरा की बॉर्डर पर बदमाशों ने एक ज्वेलरी शॉप को निशाना बनाया है। बदमाशों ने शनिवार को सोनी ज्वेलर्स पर 5 लाख रुपए से ज्यादा की लूट की वारदात की है। मामला रसूलपुर थाने के चनचौरा डिब्बी बाजार का है। तीन बाइक पर आए 6 बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद फायरिंग करते हुए भाग निकले।

लक्ष्मी ज्वेलर्स दुकान में लूट रहे और .फायरिंग का LIVE शॉट है..

बदमाश अचानक चनचौरा गांव निवासी शिवकुमार साह उर्फ मिठु सोनी की डिब्बी बाजार स्थित सोनी ज्वेलर्स पर पहुंचे। इसके बाद बम ब्लास्ट करने लगे और फायरिंग कर स्थानीय लोगों को दहशत में डाल दिया। स्थानीय लोग जब तक मामले को समझ पाते, बदमाशों ने गोलियों की तड़तड़ाहट और देशी बम के धमाकों के बीच 5 लाख से भी अधिक कीमत की ज्वेलरी लूट ली। पुलिस ने घटनास्थल से बम भी बरामद किया है।

MLC चुनाव को जारी एनडीए में बनी सहमति 12 -11-1 के फार्मूले पर बनी सहमति

MLC चुनाव को लेकर NDA में जारी खींचतान आज खत्म हो गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस कर NDA की ओर से सीटों का ऐलान किया गया। इससे पहले आज सुबह 11 बजे BJP नेता भूपेंद्र यादव और डिप्टी CM तारकिशोर प्रसाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के घर पहुंचे। उन्होंने एक घंटे तक साथ में बैठक की।

हालांकि, बैठक खत्म होने के बाद जब वह बाहर निकले तो उन्होंने पत्रकारों से कोई बात नहीं की। वहीं, डिप्टी CM ने बताया, ‘NDA में BJP-JDU के बीच सब ठीक है। दोनों पार्टियों के बीच सहमति पहले से बनी हुई थी। आज भी विचार-विमर्श किया गया।’

24 सीटों पर होना है चुनाव
विधान परिषद की 24 सीटों पर चुनाव होना है। इसको लेकर दोनों पार्टियों के बीच तनातनी चल रही थी। UP में जब से दोनों पार्टियों के बीच सीट का बंटवारा नहीं हुआ तब से दोनों ओर से बयानबाजी जारी है। इसको लेकर सभी की नजर विधान परिषद चुनाव को लेकर NDA के सीट बंटवारे पर थी।

बीजेपी को 12 सीटें
रोहतास
औरंगाबाद
सारण
सीवान
दरभंगा
पूर्वी चंपारण
किसनगंज
कटिहार
सहरसा
गोपालगंज
बेगूसराय
समस्तीपुर
RLJP
वैशाली
JDU की 11 सीटें
पटना
भोजपुर
गया
नालंदा
मुजफ्फरपुर
पश्चिमी चंपारण
सीतामढ़ी
भागलपुर
मुंगेर
नवादा
मधुबनी

देश को चाणक्य जैसे शिक्षक की जरुरत है

बच्चा जब होश सम्भालता है तो परिवार और समाज से बाहर किसी एक व्यक्ति से उसकी सबसे पहली मुलाकात होती है तो वह है शिक्षक और उस शिक्षक को लेकर बच्चों के मन में सम्मान और आदर का भाव ता उम्र बना रहता है और यही वजह है कि बच्चा जब माँ के आंचल से बाहर निकलता है तो हर अभिभावक की कोशिश होती है कि एक ऐसा शिक्षक मिले जो हमारे बच्चों को बेहतर शिक्षा दे सके ताकी इसका लाभ आने वाले समय में परिवार ,समाज और राष्ट्र को मिल सके।


मतलब किसी भी परिवार ,समाज और राष्ट्र के मजबूती के लिए बेहतर शिक्षा और समझदार शिक्षक का होना बहुत ही जरूरी है लेकिन किसी की भी सरकार हो उसकी प्राथमिकता शिक्षा नहीं रही ,शिक्षक नहीं रहा है और इस वजह से आज किसी भी अभिभावक का सबसे अधिक खर्च कही हो रहा है तो वह है शिक्षा, पूरी कमाई लगा देने के बावजूद भी बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने में देश की 90 प्रतिशत आबादी वंचित रह रहा है।

हमारी पीढ़ी जितना खर्च पूरे पढ़ाई काल में किया होगा आज उस स्तर की शिक्षा अपने बच्चों को भी मिले इसके लिए यूकेजी में नाम लिखाने और किताब खरीदने में ही खर्च हो जा रहा है, इतनी महंगी हो गयी है शिक्षा, बिहार सरकार का शिक्षा विभाग कल एक आदेश जारी किया है जिसमें कहा गया है कि अब शिक्षक शराब माफिया और शराब कारोबारी की खबर सरकार तक पहुचाएंगा इस आदेश को लेकर हंगामा मचा हुआ है कल शाम से देर रात तक कई शिक्षक नेता का फोन आ चुका है संतोष जी क्या हो रहा है इस प्रदेश में कुछ करिए अब शिक्षक बच्चों को पढ़ाना छोड़कर शराब माफिया का पता लगायेगा ।

इस पर एक अच्छा डिवेट करवाईएं बहुत जरुरी है हालांकि मुझे इस आदेश से कोई अचरज नहीं हुआ मास्टर साहब तो पहले से ही इस तरह का काम करते ही रहे हैं कभी मानव का गणना करते हैं ,कभी वोटर का गणना करते हैं,कभी पशु का गणना करते हैं और इस सबसे जब समय बचता है तो बच्चों को भोजन बनाकर खिलाते हैं ।

आज की तारीख में सरकार मास्टर साहब से पढ़ाने का काम कम दूसरा काम ज्यादा करवाने में भरोसा करता है ।किसी भी स्कूल में चले जाये दो तीन शिक्षक स्कूल से बाहर ही रहता है किसी न किसी सरकारी काम को लेकर और यह सब गांव के उस अभिभावक के सामने हो रहा है जिसके बच्चे का भविष्य दांव पर है।

वजह आज भी चुनाव का मुद्दा बेहतर शिक्षा और शिक्षक नहीं है कभी मैंने नहीं सूना है कि गांव के किसी स्कूल में शिक्षक नहीं है या फिर शिक्षक पढ़ाने नहीं आ रहा है तो गांव वाले वोट का बहिष्कार किये हो या फिर गांव वाले सड़क पर उतरे हो कभी नहीं सुना ।

ऐसा भी नहीं है कि यह समझदारी जनता को नहीं है अनपढ़ से अनपढ़ अभिभावक भी शिक्षा के महत्व को समझते हैं लेकिन गांव की शिक्षा व्यवस्था कैसे मजबूत हो इसकी समझ नही बन पा रही है।गांव के अभिभावक का यही सोच है कि सरकारी शिक्षक और शिक्षा व्यवस्था सही नहीं है तो बच्चों को निजी स्कूल में नाम लिखा दो । सरकार भी यही चाहती है किसी तरह शिक्षा के जिम्मेवारी में मुक्त हो जाये और इसी सोच के तहत सरकार काम भी कर रही है ।

बिहार में शिक्षक के नियोजन को लेकर जब गांव गांव में सवाल खड़े होने लगे कि सरकार सिपाही की बहाली प्रतियोगिता परीक्षा लेकर कर रही है और मास्टर की बहाली नम्बर पर कर रहा है ।

सरकार दबाव में आ गयी और फिर सरकार प्रदेश स्तर पर परीक्षा आयोजित कर बहाल करने कि घोषणा कर दी, देखने में सब कुछ वैसा ही लगा भी कि चलिए इस बार अच्छे लड़के लड़कियां शिक्षक बनेंगे लेकिन हुआ क्या पद से कई गुना अधिक रिजल्ट निकाल दिया और नौकरी पर रखने का अधिकार उसी नियोजन इकाई को दे दिया जो पैसा लेकर अंगूठा छाप मास्टर को पूरे प्रदेश में बहाल कर दिया था।

परिणाम क्या हुआ इस समय पूरे बिहार में पंचायत का मुखिया और सचिव वही खेला शुरु किये हुए हैं चार से लाख पांच लाख दीजिए मेरिट लिस्ट में आप कहां है उससे कोई मतलब नहीं है आपकी नौकरी पक्की। मतलब शिक्षक बहाली में फिर से वही खेला चल रहा है जिसको लेकर सरकार की किरकिरी हुई थी। ऐसी स्थिति में शिक्षक को समाज का सहयोग कैसे मिलेगा वही आज के शिक्षकों का जो चेहरा समाज के सामने है वह बहुत विकृत चेहरा है ऐसी चर्चा आम है कि शिक्षक पढ़ाई छोड़कर सारे काम करते हैं ।

हालांकि इस तरह के इमेज बनाने में सरकार की बड़ी भूमिका है फिर भी आज शिक्षक के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ऐसा कुछ करे जिससे समाज का,परिवार का और बच्चों का एक बार फिर से सरकारी स्कूलों पर भरोसा हो तभी तो सम्मान मिल पायेगा ।

वैसे आज तक अपका चाल चरित्र और चेहरा खान सर से अलग नहीं रहा है अपने लिए तो सब लड़ता है चाणक्य
की तरह समाज और देश के लिए निकले तब तो जाने।

रेलवे बहाली को लेकर गैर जिम्मेवार है -अभयानंद पूर्व डीजीपी बिहार

रेलवे के परीक्षा परिणाम को लेकर नराज छात्र के मामले में बिहार पुलिस के पूर्व डीजीपी अभयानंद ने रेलवे बोर्ड को आड़े हाथ लेते हुए पूरी बहाली प्रक्रिया पर ही सवाल खड़ा कर दिया है अपने फेसबुक पेज पर लिखे हैं है कि किसी भी बहाली के साफ़ नीयत और पारदर्शी प्रक्रिया जरुरी है जिसका घोर अभाव देखा जा रहा है।
बिहार पुलिस में सिपाही की नियुक्ति होनी थी। संख्या हज़ारों में थी। लाखों में आवेदन प्राप्त हुए थे। परीक्षा केवल शारीरिक क्षमता की थी यानी लम्बी दौड़, लम्बी कूद, ऊंची कूद, गोला फ़ेंक, इत्यादि।
सरकार ने मुझे इस प्रतियोगिता के संचालन का ज़िम्मा दिया। पूरा कार्यक्रम किसी यज्ञ से कम नहीं था। कार्यक्रम के दौरान माननीय मुख्यमंत्री ने गंभीर आवाज़ में पूछा, “कैसा चल रहा है बहाली?” मैंने उत्तर दिया, “जनता दरबार में असंख्य लोग शिकायत लेकर आते हैं। कोई बहाली की शिकायत के साथ आपसे मिलने आया है?” उन्होंने कहा, “नहीं”। मैंने तुरंत कहा, “तब मान लीजिए कि बहाली ठीक हो रही है।”
पूरी प्रक्रिया के हर पल का वीडियो बनाया गया था।
मुझे दो वाकया स्मरण हैं। एक प्रत्याशी ने दावा किया कि उसने लम्बी कूद पूरी की थी पर उसे निकाल दिया गया था। उसकी वीडियो निकाल कर उसके अंतिम फ्रेम को फ्रीज करके दिखाया गया कि उसका पैर लाइन के पीछे ही रह गया था। यह देखने के बाद वह संतुष्ट होकर चला गया।
दूसरा प्रत्याशी अपने एक मील की दौड़ पर दावा कर रहा था। उसे भी पूरा वीडियो दिखा दिया गया। वह जब संतुष्ट हुआ कि उसके साथ अन्याय नहीं हुआ है तब वह भी चला गया।
मात्र तीन महीनों में बहाली पूरी हुई। किसी कोर्ट का चक्कर नहीं लगा न ही कोई आंदोलन हुआ जैसा आज-कल प्रत्येक सार्वजनिक प्रतियोगिता में हो रहा है।
अंतर केवल एक था “साफ़ नीयत और पारदर्शी प्रक्रिया”।

बिहार कोकिला शारदा सिन्हा की व्यथा ये अंधेरा कब तक

ये अंधेर कब तक ?????
Dr. Isha Sinha , मेरी संगिनी ही नहीं बल्कि जीवन का एक अभिन्न अंग बनकर मेरे साथ मेरे कार्य काल में रहीं । LNMU , दरभंगा में पीजी हेड से रिटायर की थीं । जबसे मैंने कॉलेज का शिक्षण कार्य शुरु किया था तब से मेरे साथ सखी सहेली और न जाने कितने रूप में मेरा साथ देती रहीं।

आज वो हमें अकेला छोड़ गईं । 2 साल अपने शारीरिक कष्ट , व्याधि और मानसिक पीड़ा से लड़ती रहीं , अंतिम समय में उनके दिमाग पर अपने परिवार को अकेला छोड़ जाने की पीड़ा का एक बहुत बड़ा कारण था कि उनकी पेंशन की राशि पिछले 4-5 महीनो से नही मिली थी , उनके पतिदेव श्री सच्चिदानंद जी ने कई पत्र लिखे सरकार के नाम , सरकार को उनकी पत्नी के हालत भी बताया पर सरकार के कान पर जूं तक न रेंगी ।

पटना से समस्तीपुर और समस्तीपुर से पटना इलाज के दौरान दौड़ते रहे, पैसों के इंतजाम में !!!!!!श्री सच्चिदानंद जी !
ताकि उनकी जीवन संगिनी कुछ पल और उनके साथ जीवित रह सकें।
मेरी सखी ईशा जी तो चली गईं , और न जाने कितने बाकी हैं इस परेशानी को झेलने के लिए बस अब यही पता नही !!!!
साथ ही यह बता दूं कि मैं भी पिछले 4 महीनो से बिना पेंशन ही हूं । (इसका फर्क हर सेवा निवृत को गहरा ही पड़ता है)
क्या यही न्याय है बिहार सरकार या विश्वविद्यालय नियमों का ???
क्या मैं इसी राज्य का प्रतिनिधित्व करती हूं ? शर्मसार ही महसूस करती हूं इस तरह की व्यवस्था में ।

ये अंधेर कब तक ?????
Dr. Isha Sinha , मेरी संगिनी ही नहीं बल्कि जीवन का एक अभिन्न अंग बनकर मेरे साथ मेरे कार्य काल में रहीं । LNMU , दरभंगा में पीजी हेड से रिटायर की थीं । जबसे मैंने कॉलेज का शिक्षण कार्य शुरु किया था तब से मेरे साथ सखी सहेली और न जाने कितने रूप में मेरा साथ देती रहीं।
आज वो हमें अकेला छोड़ गईं । 2 साल अपने शारीरिक कष्ट , व्याधि और मानसिक पीड़ा से लड़ती रहीं , अंतिम समय में उनके दिमाग पर अपने परिवार को अकेला छोड़ जाने की पीड़ा का एक बहुत बड़ा कारण था कि उनकी पेंशन की राशि पिछले 4-5 महीनो से नही मिली थी , उनके पतिदेव श्री सच्चिदानंद जी ने कई पत्र लिखे सरकार के नाम , सरकार को उनकी पत्नी के हालत भी बताया पर सरकार के कान पर जूं तक न रेंगी ।
पटना से समस्तीपुर और समस्तीपुर से पटना इलाज के दौरान दौड़ते रहे, पैसों के इंतजाम में !!!!!!श्री सच्चिदानंद जी !
ताकि उनकी जीवन संगिनी कुछ पल और उनके साथ जीवित रह सकें।
मेरी सखी ईशा जी तो चली गईं , और न जाने कितने बाकी हैं इस परेशानी को झेलने के लिए बस अब यही पता नही !!!!
साथ ही यह बता दूं कि मैं भी पिछले 4 महीनो से बिना पेंशन ही हूं । (इसका फर्क हर सेवा निवृत को गहरा ही पड़ता है)
क्या यही न्याय है बिहार सरकार या विश्वविद्यालय नियमों का ???
क्या मैं इसी राज्य का प्रतिनिधित्व करती हूं ? शर्मसार ही महसूस करती हूं इस तरह की व्यवस्था में ।

लेखक–शारदा सिन्हा

छात्र आंदोलन का क्या मतलब है

बिहार से एक बार फिर छात्र आंदोलन की शुरुआत हो गई है’, एक नेता ने उत्साह से घोषणा की. एक नौजवान ने माइक में चीखते हुए कहा, ‘क्रांति की चिंगारी दिल्ली तक पहुंचेगी.’ इन दोनों में ही जो जनतांत्रिक आशा है, उसका तिरस्कार नहीं किया जाना चाहिए लेकिन दोनों बस आशा की ही अभिव्यक्ति हैं और अतिशयोक्ति हैं. इस पर हम आगे बात करेंगे.
बिहार और उत्तर प्रदेश में रेलवे लाइनों पर और सड़कों पर नौजवानों के क्षोभ का विस्फोट हुआ. क्षोभ से भी ज़्यादा इसे हताशा कहा जाना चाहिए. रेलगाड़ियों में आग लगा दी गई, पटरियों को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई.
‘सार्वजनिक संपत्ति’ का नुकसान हुआ, यह कहकर कई लोग नौजवानों को हिंसा से बचकर शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन चलाने को कह रहे हैं. वे किसान आंदोलन का उदाहरण दे रहे हैं. देखिए, उन्होंने कितने अहिंसापूर्ण तरीके से और धीरज से अपना आंदोलन चलाया और सरकार को झुका दिया.
जो यह सुझाव देते हैं वे नहीं बतलाते कि उस आंदोलन को शांतिपूर्ण होने के बाद भी हिंदी जनसंचार माध्यम का समर्थन तो नहीं ही मिला था, उसने यह प्रचार भी किया था कि किसान शांति का ढोंग कर रहे हैं, वे मूलतः हिंसक हैं. उनके भीतर खालिस्तानी, माओवादी और जिहादी छिपकर बैठे हैं और वे हिंसक ही नहीं राष्ट्रद्रोही भी हैं.
उस आंदोलन ने इन सारे आरोपों को झेलते हुए अपना रास्ता तय किया. आंदोलन शांतिपूर्ण हो तो सरकार सुन लेती है, यह बात किसान आंदोलन से गलत साबित हुई और उसके पहले नागरिकता के संशोधित कानून का विरोध कर रहे आंदोलन के प्रति सरकार और जनसंचार माध्यमों के रवैये से भी गलत साबित होती है.
लोगों का कहना है कि किसान आंदोलन की मांगे भी तभी आंशिक रूप से मानी गईं जब भारतीय जनता पार्टी को भय हुआ कि उत्तर प्रदेश और पंजाब में उसे भारी हानि होगी. किसान अगर उसके संभावित मतदाता न होते तो भाजपा को उनके हितों की भी कोई परवाह न होती.
यह बात साबित होती है नागरिकता के कानून के विरोध में हुए आंदोलन के प्रति उसके बेहिस और हिंसक रुख से. भाजपा को मालूम है कि मुसलमान उसके मतदाता नहीं हैं बल्कि वह अपने मतदाता को मुसलमान और ईसाई विरोधी हिंदू ही बनाना चाहती है. इसलिए उसने उस आंदोलन पर कान नहीं दिया.
न सिर्फ यह उसने उस आंदोलन का भारी दमन किया जिसका चरम दिल्ली में फरवरी 2020 में की गई हिंसा थी. ऐसा करके उसने हिंदुओं के एक हिस्से में पैठी मुसलमान विरोधी हिंसा को तुष्ट किया.
आपने ध्यान दिया होगा कि ट्रेनों में आगजनी और तोड़फोड़ के बाद भी सरकार और अखबारों और टीवी चैनलों की तरफ से आंदोलनकारियों पर वैसा हमला नहीं किया गया जैसा नागरिकता कानून या किसानों से जुड़े कानूनों के विरोध में हुए आंदोलनों पर किया गया था.
किसी ने नहीं कहा कि सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान का बदला लिया जाएगा हालांकि ऐसा कहने वाले आज भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हुए हैं. इसके उलट रेलवे मंत्री ने आंदोलनकारियों की मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया.
मंत्री ने आंदोलनकारियों से सार्वजनिक संपत्ति को अपनी संपत्ति समझने का अनुरोध किया और तोड़फोड़ से बचने की अपील की. रेल मंत्रालय ने कहा कि वह आंदोलन की मांग पर विचार करेगी. यह सब कुछ बहुत नया है और इस सरकार के स्वभाव के उलट है.
इलाहाबाद में पुलिस ने जो हिंसा की, उसे जायज ठहराने की जगह उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने हिंसा में लिप्त पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया और आंदोलनकारियों से संयम की अपील की. यह भी उनके और उनकी सरकार के स्वभाव के विपरीत है.
जो उनका तरीका है उसके मुताबिक़ अब तक इन आंदोलनकारी नौजवानों के नाम और तस्वीरों वाले पोस्टर शहर में लग जाने चाहिए थे और इनके घर कुर्की-जब्ती शुरू हो जानी थी.
बिहार और उत्तर प्रदेश में, खासकर इलाहाबाद में जिस तरह आंदोलनकारी नौजवानों को उनके छात्रावास में घुसकर मारा गया, उससे कुछ लोगों को जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पुलिस की भीषण हिंसा की याद आ गई.
पुलिस की इस हिंसा पर कुछ बात करना ज़रूरी है इसके पहले कि हम अभी के नौजवानों के आंदोलन पर बात करें.
आंदोलनों में पुलिस का काम कठिन होता है. आंदोलनकारी जोश में और कई बार इरादतन व्यवस्था भंग करते हैं. पुलिस का काम व्यवस्था बनाए रखने का होता है. इसलिए दोनों के बीच खींचतान होना स्वाभाविक है. पुलिस बल का प्रयोग करेगी, यह भी सब जानते हैं.
पहले के आंदोलनों में यह होता रहा है. लेकिन पिछले सात साल में यह बदल गया है. अब पुलिस बलप्रयोग से स्थिति को नियंत्रित नहीं करती. वह इरादतन हिंसा करती है.
जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पुलिस की कार्रवाई को इरादतन हिंसा के अलावा कुछ नहीं कहा जा सकता. अमूमन पुलिस दुश्मनों की तरह बर्ताव नहीं करती. लेकिन 2019 दिसंबर में नागरिकता के कानून के खिलाफ आंदोलनकारियों के साथ पुलिस का बर्ताव ऐसा था जैसे उसकी इनसे ज़ाती दुश्मनी हो.
यही बात 2 अप्रैल, 2018 को दलित संगठनों की तरफ से किए गए बंद के दौरान पुलिस की हिंसा में दिखलाई दी. उसने कथित ऊंची जाति के गुंडों के साथ मिलकर दलितों पर हिंसा की.
पुलिस और शासक दल के गुंडों के गठजोड़ का प्रमाण इस नारे से बेहतर और कोई नहीं हो सकता, ‘दिल्ली पुलिस लट्ठ चलाओ, हम तुम्हारे साथ हैं.’ पुलिस का सक्रिय हिंसक बल में बदल जाना जनतंत्र और गणतंत्र दोनों के लिए घातक है.
उत्तर प्रदेश और अब असम या अन्य राज्यों में पुलिस को सरकार विरोधियों के साथ हिंसा की जो छूट दी जा रही है, उसका ही परिणाम इलाहाबाद में पुलिस की अवाक् कर देने वाली हिंसा थी. वह छात्रावास में घुसकर जिस तरह बंदूक के कुंदों से दरवाजे तोड़ने की कोशिश कर रही थी, जिस तरह पुलिसवाले बार-बार दरवाज़े तोड़ने में हांफ रहे थे, उससे लग रहा था, यह उनका व्यक्तिगत क्रोध है.
पुलिस के चरित्र में इस परिवर्तन पर हमें सोचने की ज़रूरत है. पुलिस को जनता का मालिक बना देने के नतीजे भयानक हो सकते हैं.
इन बातों से आगे हम इस पर विचार करें कि क्या छात्र आंदोलन की शुरुआत हो गई है? ऐसी कल्पना के पहले यह समझना आवश्यक है कि जो भी अभी सड़क पर थे, वे छात्र नहीं रह गए हैं.
यह भारत की पिछले दो दशकों की बड़ी दुर्घटना है जो चुपचाप हुई और जिससे हम सबने आंखें चुरा रखी हैं. ख़ासकर, उत्तर भारत में छात्र की जगह अब परीक्षार्थी या ‘टेस्टार्थी’ ने ले ली है. यह एक ऐसी प्रजाति विकसित की गई है जो सालोंसाल एक के बाद दूसरे टेस्ट देती रहती है.
जैसा इस रेलवे भर्ती परीक्षा के मामले से ही पता चलता है, इन सारे ‘टेस्टों’ को इतना जटिल बना दिया गया है और इन्हें इतना लंबा खींचा जाता है कि इनमें शामिल होने वालों की सारी युवा ऊर्जा उसी भूलभुलैया में बाहर का रास्ता खोजने को भागते हुए चुक जाती है.
वे एक नौकरी के टेस्ट से दूसरी नौकरी के टेस्ट के फॉर्म भरते रहते हैं, टेस्ट की तैयारी में कोचिंग करते हैं और गाइड में सिर खपाते रहते हैं. उनका खासा वक्त कोचिंग में गुजरता है. अपने समाज और राजनीति के बारे में विचार करने के लिए उनके पास वक्त नहीं होता जिसने उन्हें इस जाल में फंसा रखा है.
धीरे-धीरे वे इतना झुका दिए जाते हैं कि कम से कम पर समझौते को तैयार हो जाते हैं. उनकी आत्म छवि भी छात्र से ज़्यादा ‘प्रिपरेशनकारी’ की होती है. कॉलेज और विश्वविद्यालय के परिसर से ज़्यादा वक्त उनका कोचिंग सेंटर में बीतता है. यहां उन्हें अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखने को कहा जाता है और फालतू की बहस से दूर रहने की शिक्षा दी जाती है.
गांवों और छोटे क़स्बों में एक दूसरी तैयारी या कोचिंग चलती है. सुबह-सुबह आप नौजवानों को दौड़ लगाते देख सकते हैं. वे दौड़ते रहते हैं कि सेना, बीएसएफ या किसी राज्य की पुलिस में उनकी बहाली हो जाए. फिर उसके साथ वे घूस का इंतजाम भी करते हैं.
ये छात्र नहीं रह जाते. इसमें इनका कोई कसूर नहीं. लेकिन यह सच्चाई है कि भारत में, विशेषकर उत्तर भारत में छात्रों की जगह अब टेस्टार्थियों ने ले ली है. उनके पास आंदोलन का समय नहीं.
यह बात मेरी समझ में आई 2016 में संसद भवन थाने में ऐसे ही परीक्षार्थियों के एक झुंड से बात करके. ये सब ऊंचे स्तर के टेस्टार्थी थे. वे संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं की तैयारी करने वाले थे. किसी मसले पर वे आंदोलन कर रहे थे और अपनी मांग लेकर भाजपा के दफ्तर गए थे. वहां उनकी पिटाई हुई और पुलिस पकड़कर उन्हें थाने ले आई.
उनमें से एक ने मुझसे कहा कि पुलिस ने उन पर कितना जुल्म किया है. यह फरवरी 2016 की बात है. अभी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में उमर खालिद, कन्हैया, अनिर्बान आदि की गिरफ्तारी हुई थी. मैंने उनसे कहा कि पुलिस ने जेएनयू में भी छात्रों के साथ जुल्म किया है. इतना सुनना था कि वे छात्र बिदक उठे.
उन्होंने कहा कि हमें उनसे मत मिलाइए. हमारा मामला अलग है. मैं समझ गया कि इन सबने खुद को छात्रों की श्रेणी से अलग कर लिया है. ये प्रिपरेशन करने वाले टेस्टार्थी समुदाय के सदस्य हैं. ये छात्रों से किसी तरह का कोई लगाव महसूस करें, इसका कारण नहीं है.
जैसा पहले लिखा, इसके लिए ये दोषी नहीं हैं. यह जमात हमने पैदा की है. राज्यों के विश्वविद्यालयों को ध्वस्त करके उनकी जगह कोचिंग सेंटर खड़े करने में राज्य सरकारों को शर्म नहीं आती.
नीतीश कुमार के सत्तासीन होने के बाद पटना में बड़ा बैनर देखा था, ‘पटना को कोटा बनाना है.’ पटना की यह महत्त्वाकांक्षा देखकर सिर झुक गया. पटना विश्वविद्यालय ढह चुका है. चारों तरफ छोटे बड़े कोचिंग सेंटर उग आए हैं. छात्र समुदाय की मृत्यु हो चुकी है. उसकी जगह टेस्टार्थियों की भीड़ खड़ी हो गई है. भीड़ का गुस्सा ज़रूर फूट सकता है. वह आंदोलन नहीं कर सकती.

देश के प्रथम राष्ट्रपति के स्मारक की दर्दाशा को लेकर आज भी हुई सुनवाई सरकार को लगी फटकार

पटना हाईकोर्ट ने देश के प्रथम राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली जीरादेई और वहां उनके स्मारक की दुर्दशा के मामलें पर सुनवाई की।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने केंद्र सरकार ( आर्केलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) व राज्य सरकार द्वारा दायर हलफनामे असन्तोषजनक करार दिया।

हाईकोर्ट ने सिवान के डी एम को इस जनहित याचिका में उठाए गए सभी मुद्दों पर हलफनामा दायर कर जवाब देने को निर्देश दिया।साथ ही कोर्ट ने पटना के जिलाधिकारी को पटना स्थित बांस घाट और बिहार विद्यापीठ के सम्बन्ध में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार, आर्किओलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया समेत अन्य सभी पक्षों को निश्चित रूप से जवाब दायर करने का आदेश दिया था।लेकिन आज आर्किओलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया व राज्य सरकार के द्वारा जो हलफनामा दायर कर जवाब दिया गया,उन्हें हाईकोर्ट ने असन्तोषजनक बताया।

इससे पूर्व कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से जवाब दायर किया गया था।कोर्ट को इसमें जानकारी दी गई कि राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 10 जनवरी,2022 को एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी।इसमें सम्बंधित विभाग के अपर प्रधान सचिव सहित अन्य वरीय अधिकारी बैठक में उपस्थित थे, जिनमें पटना और सीवान के डी एम भी सम्मिलित थे।
इसमें कई तरह के जीरादेई में विकास कार्य के साथ पटना में स्थित बांसघाट स्थित डा राजेंद्र प्रसाद की समाधि स्थल और सदाकत आश्रम की स्थिति सुधारें जाने पर विचार तथा निर्णय लिया गया।
इस बैठक में जीरादेई गांव से दो किलोमीटर दूर रेलवे क्रासिंग के ऊपर फ्लाईओवर निर्माण पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया।
साथ ही राजेंद्र बाबू के पैतृक घर और उसके आस पास के क्षेत्र के विकास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कार्रवाई करने का निर्णय हुआ।

हाईकोर्ट ने इससे पहले अधिवक्ता निर्विकार की अध्यक्षता में अधिवक्ताओं की तीन सदस्यीय कमिटी गठित की थी।कोर्ट ने इस समिति को इन स्मारकों के हालात का जायजा ले कर कोर्ट को रिपोर्ट करने का आदेश दिया था।

अधिवक्ताओं की कमिटी ने जीरादेई के डा राजेंद्र प्रसाद की पुश्तैनी घर का जर्जर हालत, वहां बुनियादी सुविधाओं की कमी और विकास में काफी पीछे होने की बात अपनी रिपोर्ट में कहा।

साथ ही पटना के बांसघाट स्थित उनके समाधि स्थल पर गन्दगी और रखरखाव की स्थिति को भी असंतोषजनक बताया।वहां काफी गन्दगी पायी गई और सफाई व्यवस्था, रोशनी आदि की भी बेहद कमी थी।
साथ ही पटना के सदाकत आश्रम की हालत को भी वकीलों की कमिटी ने दुर्दशापूर्ण स्थिति करार दिया।

जनहित याचिका में अधिवक्ता विकास कुमार ने बताया कि जीरादेई गांव व वहां डाक्टर राजेंद्र प्रसाद के पुश्तैनी घर और स्मारकों की हालत काफी खराब हो चुकी है। जीरादेई में बुनियादी सुविधाएं न के बराबर है।वहां न तो पहुँचने के लिए सड़क की हालत सही है।साथ ही गांव में स्थित उनके घर और स्मारकों स्थिति और भी खराब हैं,जिसकी लगातार उपेक्षा की जा रही है।

उन्होंने कहा कि इन स्मृतियों और स्मारकों को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 3 फरवरी,2022 को होगी।

सोशल मीडिया का इस्तेमाल मिनिस्टर ऑफ प्रोपेगेंडा की तरह हो रहा है

हिटलर जनता द्वारा चुनी गयी सरकार का मुखिया था कोई राजा नहीं था राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने एक नये मंत्रालय का गठन किया जिसका नाम रखा मिनिस्टर ऑफ प्रोपेगेंडा यह मंत्रालय ना पहले किसी शासक ने बनाया था ना ही बाद के दिनों में किसी शासक ने यह साहस जुटाया।

हिटलर ने इस मंत्रालय की जिम्मेवारी डॉ जोसेफ गोएबल्स को सौंपा था जिसका मूल मंत्र था “एक झूठ को अगर कई बार दोहराया जाए तो वह सच बन जाता है.”मंत्रालय का काम संभालने के बाद उन्होंने सबसे पहले काम यह किया कि रेडियो निर्माण में लगी कंपनी को सरकार की और से सब्सिडी देना शुरू किया ताकि रेडियो को जन जन तक पहुंचाया जा सके उनका मानना था कि रेडियो सिर्फ 19वीं सदी में ही नहीं बल्कि 20वीं सदी में भी सबसे असरदार माध्यम रहेगा और यह आठवीं महान शक्ति है बाद के दिनों में प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए जर्मन सरकार रेडियों का जबरदस्त इस्तेमाल किया ।
आज अधिकारिक तौर पर सरकार में मिनिस्टर ऑफ प्रोपेगेंडा जैसा कोई विभाग नहीं है लेकिन पूरी सरकार और उसका मंत्र 24 घंटे इसी काम में लगा रहता है हिटलर के दौर में भी सरकार का प्रोपेगेंडा फैलाने में नाजी पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओ का फौज हमेशा सक्रिय रहता था जैसे आज सक्रिय है ।

यह एक छद्म युद्ध है और इसका शिकार पढ़े लिखे लोग भी होते हैं रेलवे बहाली को लेकर जारी आन्दोलन का आग जैसे ही दूसरे दिन यूपी पहुंचा संघ और उससे जुड़ी जो भी संस्थान है या फिर नाजी टाइप जो समर्थक है वो मोर्चा संभाल लिये और सोशल मीडिया पर कई छद्म नाम से पोस्ट होने लगा हिंसा सही नहीं है,यह सब कोचिंग वालों का खेल है सात लाख बच्चों का पीटी हो जायेगा तो कोचिंग संस्थानों को 15 करोड़ की कमाई होगी। और इस तर्क को सही साबित करने के लिए एक से एक पोस्ट गिरने लगा पूरी कोशिश हुई कि सोशल मीडिया पर रेलवे परीक्षा को लेकर जो आंदोलन चल रहा है उस आंदोलन के औचित्य पर इस तरह सवाल खड़े किये जाये कि पूरा आन्दोलन ही संदेह के घेरे में आ जाए जैसे किसान आन्दोलन का लेकर चल रहा था ।

दूसरी और सरकार आन्दोलन को कमजोर करने के लिए खान सहित 6 से अधिक कोचिंग संस्थानों के प्रबंधक सहित एक हजार से अधिक छात्रों पर मुकदमा दर्ज कर दिया और सुबह होते होते गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी गयी।
वही मीडिया शाम होते होते मिस्टर खान को भगौड़ा तक घोषित कर दिया लेकिन विपक्ष की गोलबंदी और बिहार बंद की घोषणा से प्रोपेगेंडा मंत्रालय थोड़ा असहज हुआ तो फिर पोलिटिकल बिंग जो 72 घंटे से चुपचाप इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साधे हुए था वो आगे आकर मोर्चा संभाल लिये ।

सुशील मोदी का एक वीडियो जारी हुआ जिसमें रेल मंत्री से हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि रेल मंत्री सारी बात मान गये हैं पीटी में 3 लाख 50 हजार रिजल्ट और जारी किया जायेगा, वहीं मोदी उस वीडियो में पुलिस से आग्रह करते दिखे हैं कि छात्रों के साथ संयम बरते ।

देर शाम जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह का खान को लेकर एक ट्वीट आया और उस ट्वीट में ललन सिंह खान को गरीबों का मसीहा कहते हुए जमकर तारीफ किये हैं और रेल पुलिस से मुकदमा वापस लेने कि मांग किये हैं।इस ट्टीट के कुछ घंटे बाद खान सोशल मीडिया पर प्रकट हुए और सरकार की तारीफ करते हुए छात्रों से आज के बंदी से अलग रहने का संदेश जारी किये ।

इस पूरे खेल पर गौर करिए तब आपको समझ में आयेगा कि इसके पीछे की रणनीति क्या है वैसे इन्तजार करिए सुशील मोदी और ललन सिंह ने जो भरोसा दिलाया है वो कब अमल में आता है क्यों कि सरकारी नौकरी को लेकर जो खेल चल रहा है उसके पीछे केन्द्र की सरकार है ये साफ दिख रहा है ।

स्टेशन पर झाड़ू-पोछा देने वाले के लिए तीन तीन परीक्षा पास करनी पड़ेगी तब नौकरी मिलेगा, इससे सरकार की नियत क्या है वो साफ समझ में आ रहा है वैकेंसी निकालो लेकिन इस तरह निकालो की नौकरी देनी ही नही पड़े बस छात्रों को उलझा कर रखना है।

रेलवे की जिस परीक्षा को लेकर बवाल हुआ था उस परीक्षा को लेकर रेलवे ने 71 पेज का नोटिफिकेशन जारी किया था जिसमें छात्रों को नौकरी नहीं देनी पड़ी इसकी पूरी व्यवस्था है और उसी का नतीजा था यह हंगामा । जरा आप भी देखिए 2019 की वैकेंसी 2022 में पीटी का रिजल्ट और उसके बाद अभी मुख्य परीक्षा होनी है मतलब 2019 के वैकेंसी को पूरा करने में सरकार पांच वर्ष वर्ष का समय ले रही है ये जो पांच वर्ष एक परीक्षा पास करने के लिए छात्र लगा रहे हैं ये बर्बादी किसकी है यह समझने कि जरूरत नहीं है क्यों कि मिनिस्टर ऑफ प्रोपेगेंडा इस स्तर तक सक्रिय है कि बहुत मुश्किल है सरकार के नियत को समझना ।

सोशल मीडिया कानून से ऊपर नहीं है – हाईकोर्ट

पटना हाई कोर्ट में साइबर क्राइम से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई। गूगल एल एल सी अमेरिका की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित श्रीवास्तव कोर्ट के समक्ष पक्ष रखा।सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता मुकुल रोहतगी फेसबुक की ओर से उपस्थित हुए।

व्हाट्सएप का पक्ष वरीय अधिवक्ता अरविंद दातर ने रखा। इन सभी वरीय अधिवक्ताओं ने कहा कि वे अनुसंधान में पूरी तरह से सहयोग करने को तैयार हैं, कही कोई अड़चन नहीं आएगी।

इसपर कोर्ट ने पूछा कि फिर अभी तक आपत्तिजनक पोस्ट को यूट्यूब से क्यों नहीं हटाया गया है, जोकि गूगल की कंपनी है। इस मामले में उनके वरीय अधिवक्ता का कहना था कि प्रावधान के मुताबिक जबतक कोर्ट का आदेश नहीं होता है, तबतक वे नहीं हटा सकते हैं।

इसपर कोर्ट ने कहा कि कोर्ट आदेश करने को तैयार है। जस्टिस संदीप कुमार शिव कुमार व अन्य के मामले पर सुनवाई की। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने साइबर क्राइम से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए बैंक से जवाब तलब किया था।

साथ ही साथ हाई कोर्ट के आदेश के आलोक में ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में कोर्ट ने फेसबुक, व्हाट्सएप, गूगल व यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के स्थानीय हेड को नोटिस जारी करने का आदेश दिया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को आर्थिक अपराध इकाई द्वारा किये जा रहे अनुसंधान में सहयोग करने को कहा गया है था।

कोर्ट के समक्ष हलफनामा दाखिल कर बताया गया था कि फेसबुक, व्हाट्सएप, गूगल व यूट्यूब जैसे मीडिया प्लेटफॉर्म आर्थिक अपराध इकाई के साथ अनुसंधान में सहयोग नहीं कर रही है।

कोर्ट का कहना था सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस तरह का व्यवहार सहन नहीं किया जाएगा क्योंकि उन्हें पुलिस को अनुसंधान में सहयोग करना होगा।

इसलिए, कोर्ट ने इन सोशल मीडिया प्लेटफार्म के स्थानीय हेड को भी जवाब देने को कहा था। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि ये जवाब नहीं देते हैं, तो कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में आगे की सुनवाई आगामी 1 फरवरी को की जाएगी।

बिहार में प्रशासन न करे कोई दमनात्मक कार्रवाई

रेलवे ग्रुप डी की दो की जगह एक परीक्षा लेगा, एनटीपीसी के परिणाम ‘एक छात्र-यूनिक रिजल्ट’ फार्मूले पर।
रेल मंत्री वैष्णव ने सुशील मोदी को दिलाया भरोसा।

– बिहार में प्रशासन न करे कोई दमनात्मक कार्रवाई

नई दिल्ली। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तथा राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी को आश्वस्त किया कि ग्रुप-डी की दो की बजाय एक परीक्षा होगी और एनटीपीसी की परीक्षा के 3.5 लाख अतिरिक्त परिणाम “एक छात्र-यूनिक रिजल्ट” के आधार पर घोषित किये जाएंगे।

रेलमंत्री ने श्री मोदी को भरोसा दिलाया कि सरकार छात्रों से सहमत है और उनकी मांग के अनुरूप ही निर्णय जल्द किया जाएगा।

श्री सुशील मोदी ने लाखों अभ्यर्थियों की परेशानी और उनकी मांगों से रेल मंत्री वैष्णव को विस्तार से अवगत कराया।
श्री मोदी ने रेल मंत्री से आग्रह किया कि एनटीपीसी के मामले में “वन कैंडीडेट-वन रिजल्ट” के सिद्धांत पर निर्णय किया जाना चाहिए।

सुशील मोदी ने कहॉ रेल मंत्री ने समस्या का क्या समाधान

उन्होंने कहा कि रेलवे बोर्ड ने यदि फैसला अचानक लेने से परहेज किया होता और समय रहते छात्रों के भ्रम दूर किये होते, तो बिहार में ऐसी अप्रिय स्थिति नहीं पैदा होती।

पूर्व उप-मुख्यमंत्री मोदी ने राज्य के पुलिस प्रशासन से अपील की कि छात्रों पर कोई दमनात्मक कार्रवाई न की जाए। छात्र कोई अपराधी नहीं हैं।

उन्होंने छात्रों से संयम बरतने की अपील की ताकि रेलवे बोर्ड मामले के सभी पहलुओं की जांच पूरी कर परीक्षार्थियों के हित में फैसला कर सके।

एनएच के मरम्मती को लेकर हाईकोर्ट सख्त कहां मरम्मती के मामले में विभाग का रवैया सही नहीं

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण, विकास और मरम्मती की मॉनिटरिंग करते विभिन्न राजमार्गो के कार्य प्रगति की सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की डिवीजन बेंच ने इन मामलों पर सुनवाई की।

हाईकोर्ट ने एन एच 2 औरंगाबाद वाराणसी मामलें पर सुनवाई करते हुए एमिकस क्यूरी अधिवक्ता के.मणि और एन एच ए आई के अधिवक्ता को स्थल निरीक्षण कर अगली सुनवाई में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।कोर्ट को बताया गया कि एन एच निर्माण के लिए 2011 में ठेका दिया गया था और राजमार्ग निर्माण का कार्य 2014 में पूरा किया जाना था।
एन एच ए आई की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इस मार्ग कहीं कहीं बाधाएं हैं,जिन्हें हटाए जाना की आवश्यकता हैं। एन एच 2पर मोहनियां के पास टोल प्लाजा का निर्माण होना था।

इस सम्बन्ध में मुख्य सचिव ने दो बार 28 नवंबर,2017 और 15 मई, 2018 सम्बंधित अधिकारियों के साथ बैठकें की।इनमें टोल प्लाजा के निर्माण के लिए भूमि देने का निर्णय लिया गया था।इस मामलें में कोर्ट ने कैमूर के जिलाधिकारी।और वाणिज्य कर विभाग को स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया। इस मामलें पर अगली सुनवाई फरवरी माह के पहले सप्ताह मै की जाएगी।

एक अन्य एन एच 31बख्तियारपुर रजौली राजमार्ग के सम्बन्ध में कोर्ट ने राज्य के विकास आयुक्त को एक बैठक कर स्थिति के सम्बन्ध में रिपोर्ट करने का निर्देश देने का निर्देश दिया था।लेकिन इस सम्बन्ध में हाईकोर्ट को अबतक कोई जानकारी नहीं दी गई।कोर्ट ने विकास आयुक्त को सभी सम्बंधित पक्षों के साथ बैठक कर राजमार्ग के निर्माण पूरा किये जाने के बारे में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया।इस मामले पर अगली सुनवाई 15 फरवरी,2022 को होगी।

राजमार्ग संख्या 131जी शेरपुर दिघवारा section के निर्माण के मामलें पर हाईकोर्ट में सुनवाई की गई।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य के विकास आयुक्त को सभी सम्बंधित पक्षों के साथ बैठक कर इस सम्बन्ध में की गई कारवाइयों का ब्यौरा हलफनामा दायर कर देने का निर्देश दिया।इस मामलें पर अगली सुनवाई 31जनवरी, 2022 को होगी।

मगध विश्वविधालय के कुलपति पर कार्रवाई पर राजभवन और सरकार आमने सामने, राजभवन ने कहा सरकार राजभवन के अधिकारी क्षेत्र पर हमला कर रही है

मगध विश्वविधालय के कुलपति पर कार्रवाई को लेकर कुलाधिपति सह राज्यपाल फागू चौहान भड़क गये हैं और स्पेशल विजिलेंस यूनिट की कार्रवाई को अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण मानते हुए कहा है कि यह कानून का उल्लंघन ही नहीं है यह राज्यपाल के अधिकारी क्षेत्र पर हमला है ।राज्यपाल के प्रधान सचिव आर एल चोंगथु ने इसको लेकर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी को पत्र लिख है.

प्रधान सचिव ने पत्र में साफ लिखा है कि विश्विद्यालयों के मामले में सक्षम प्राधिकार कुलाधिपति हैं. ऐसे में कुलाधिपति की अनुमति के बिना विश्वविद्यालयों में स्पेशल विजिलेंस यूनिट की कार्रवाई पूरी तरह से कानून का उल्लंघन है. ऐसे में इस कार्रवाई को तत्काल रोकें।

राजभवन ने यहां तक कहा है कि इस कार्रवाई से विश्विद्यालयों की स्वायत्तता पर कुठाराघात है. प्रधान सचिव के पत्र में साफ है कि यह पत्र भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के सेक्शन 17A में उल्लिखित प्रावधानों का अक्षरशः पालन करने को लेकर लिखा जा रहा है. राजभवन ने कहा है कि ऐसी कार्रवाई से विश्विद्यालयों में अनावश्यक भय का वातावरण बन रहा। इस कार्रवाई से पदाधिकारियों और कर्मचारियों पर मानसिक दवाब भी पड़ रहा है।

मालूम हो कि मगध विश्वविधालय के कुलपति पर 30 करोड़ से अधिक के राशी के गबन का आरोप है और इस मामले में विशेष निगरानी की टीम ने विश्वविधालय से जुड़े कई अधिकारियों को गिरफ्तार भी किया है और लगातार दबाव के बाद पिछले दिनों ही कुलपति विशेष निगरानी के अधिकारी के सामने उपस्थिति हुए थे ।

वही इस मामले में निगरानी कोर्ट ने कुलपति प्रो राजेंद्र प्रसाद की अग्रिम जमानत रद्द कर चुका है राज्यपाल के इस पत्र से यह साफ हो गया है कि कुलपति मामले में नीतीश कुमार और राज्यपाल के बीच दूरिया बढ़ सकती है ।

क्या आपको पता था कि केंद्रीय सचिवालय में छह साल से प्रमोशन बंद है ?

क्या आपको पता था कि केंद्रीय सचिवालय में छह साल से प्रमोशन बंद है?
मोदी सरकार ने छह साल से केंद्रीय कर्मचारियों को प्रमोशन नहीं दिया है। जिसके कारण प्रमोशन और बिना वेतन वृद्धि के ही कई कर्मचारी रिटायर होते रहे। अब ये कर्मचारी भी ट्विटर पर ट्रेंड करा रहे हैं और अपने लिए प्रमोशन मांग रहे हैं। हिन्दू की रिपोर्ट से पता चलता है कि केंद्रीय सचिवालयों में छह साल से प्रमोशन बंद है।

मैं जानना चाहूंगा कि बिना प्रमोशन के रिटायर हुए ऐसे अफसरों में कितने भक्त हो गए थे और मुस्लिम विरोधी राजनीति में आनंद प्राप्त कर रहे थे और अब जब उनके प्रमोशन का चांस ख़त्म हो गया है उन्हें इस नफरती राष्ट्रवाद से कितनी ऊर्जा मिलती है? ज़ाहिर है कर्मचारी झूठ ही बोलेंगे कि उनका काम देश की सेवा करना है, उन्हें राजनीति से मतलब नहीं। हा हा हा हा हा हा। इस नफरत की आग में आप ही नहीं जले हैं, आपका वो बच्चा भी जला है जो भर्ती नहीं निकलने से बेरोज़गार बैठा है। आपको प्रमोशन मिलता तो नीचे की सीट खाली होती। नीचे की सीट ख़ाली होती तो भर्ती निकलती। do you get my point.
हिन्दू की विजयिता सिंह की रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय सचिवालय सेवा (CSS) फोरम के अनुसार प्रमोशन नहीं होने की वजह से तीस फीसदी पद ख़ाली हैं। इनके अनुसार अवर सचिव, उप सचिव, निदेशक और संयुक्त सचिव के 1839 पद ख़ाली हैं। जब सचिवालयों में संकट होने लगा तो 2020 में अस्थायी तौर पर 2770 पदों पर प्रमोशन दिया गया। इसके बाद भी 1800 पदों पर प्रमोशन होना है। भर्ती ख़ाली है। सोचिए 4400 अफसरों में से 60 फीसदी से अधिक अस्थायी रुप से प्रमोशन लेकर काम कर रहे हैं। यह हाल है खूब काम करने वाली मोदी सरकार का।

2014 से प्रमोशन नहीं हुआ है। छह साल निकल गए। इस दौरान प्रमोशन और अधिक सैलरी के इंतज़ार में कितने ही लोग रिटायर कर गए। प्रमोशन में आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। इसे जल्दी सुनने के लिए सरकार आग्रह कर सकती थी लेकिन लगता है इस मामले की आड़ में सरकार ने लोगों को बिना प्रमोशन दिए ही सेवा से बाहर कर दिया और उन्हें बढ़ा हुआ वेतन तक नहीं दिया। हिन्दू की रिपोर्ट में कर्मचारियों ने कहा है कि कई विभागों में कोर्ट के केस के बाद भी प्रमोशन हुए हैं। बस केंद्रीय सचिवालय की सेवा में प्रमोशन नहीं हुए हैं।

2014 से प्रमोशन न होने के कारण केंद्रीय सचिवालय ने एक और संकट को जन्म दिया होगा। बिना अवर सचिव, उप सचिव के काम कैसे होता होगा। इनकी विश्वसनियता और पारदर्शिता कैसी होती होगी? इसकी सच्चाई तो यही लोग बता सकते हैं। हम तो केवल अनुमान लगा सकते हैं। हमें यह समझ आ रहा है कि इतने सीनियर लेवल पर 30 प्रतिशत पद ख़ाली होने से IAS पर कितना दबाव पड़ता होगा। उसकी जान निकल जाती होगी काम करने में। राज्यों से केंद्र में न आने के एक कारण यह भी हो सकता है। वैसे इसका भी असली कारण IAS ही बताएंगे जिसे बताने की हिम्मत नहीं हैं। उन रहस्यों से अब भय होने लगा होगा कि पता नहीं कब और कौन से पेपर पर साइन करना पड़ जाए। मैं बस जानना चाहता हूं कि क्या ऐसा है? फाइल कहां से बन कर आती है और कहां चली जाती है, क्या उन्हें पता रहता है या केवल साइन करना पड़ता है ताकि जेल जाने के समय ये लोग उपलब्ध रहें। ये मेरी जिज्ञासा है।

तो यह उस सरकार का रिपोर्ट कार्ड है जो केवल काम करने का दंभ भरती है। केंद्रीय सचिवालयों में प्रमोशन के पद को खाली रख कर सरकार ने भारत के युवाओं को बेरोज़गार रखने में काफी मदद की है।अपना भविष्य संवारने के लिए यह एक बेहतर नौकरी थी।SSC के ज़रिए परीक्षा पास कर युवा इस नौकरी में जाते थे और अवर सचिव और उप सचिव के पद तक पहुंचते थे।अच्छा हुआ कि युवा मुस्लिम विरोधी राजनीति की आंधी में नफरत का नशा ले रहे थे। वर्ना ये सब पता चल जाता। ये ऐसा नशा है कि रोज़गार के लिए लाठी खाने पर भी नहीं जाएगा। इस पर मैं शर्त लगा सकता हूं। इसलिए युवाओं से दूर भी रहता हूं। मैंने लिखा भी है कि सांप्रदायिक युवाओं से गाली मिल जाए, गले लगा लूंगा, ताली नहीं चाहिए। ऐसा इस देश में केवल रवीश कुमार बोल सकता है।

तो छह साल के दौरान प्रमोशन के इंतज़ार में रिटायर हो गए केंद्रीय सचिवालय के उन कर्मचारियों के सपने इन दिनों किस तरह के हैं? काश इसके बारे में कोई सच सच बता देता, वैसे मैं जवाब जानता हूं लेकिन फिर भी। और अब जब प्रमोशन नहीं मिल रहा है तो मौजूदा कर्मचारियों को कैसा लग रहा है? आरक्षण से नफरत के नाम पर सबके लिए नौकरी और प्रमोशन दोनों बंद है। सरकार और राजनीति को फायदा है कि आप आरक्षण से नफरत कर अपने दिमाग़ की तर्क शक्ति को भोथरा कर दें ताकि उसकी आड़ में न भर्ती निकले और न प्रमोशन हो। मेरी यह बात अभी समझ नहीं आएगी लेकिन बीस साल बाद समझ आएगी।

अमित शाह को भी पता है कि बेरोज़गारी के बाद भी नौजवान उन्हीं को वोट करेंगे। तभी तो वे बेरोज़गारों से नहीं मिल रहे हैं। जाट नेताओं से मिल रहे हैं। इसकी ख़बर मोटी मोटी छपवाई जा रही है। अमित शाह को पता है कि जाट नाराज़ हैं और वोट नहीं कर सकते हैं। लोग जात के आधार पर नाराज़ होते हैं, जात के आधार पर ख़ुश हो जाते हैं। नौकरी के नाम पर कोई नाराज़ नहीं होता। ऐसा होता तो अमित शाह इलाहाबाद के उस लॉज का दौरा कर रहे थे जिसके कमरों से पुलिस ने खींच कर छात्रों को निकाला और वही सब किया जिसे पीटना कहते हैं। अमित शाह जानते हैं कि जिस नौजवान के खिलाफ पुलिस केस कर रही है वह भी वोट देगा और उसके परिवार के लोग भी वोट देंगे। बाकी आप समझदार तो है हीं।

लेखक–रवीश कुमार

देश 1974 के छात्र आंदोलन की तरफ तो नहीं बढ़ रहा है

हिंसक आन्दोलन का जो हश्र होता है ठीक उसी दिशा में RRB-NTPC परीक्षा धांधली को लेकर जारी आन्दोलन बढ़ चला है और इस आंदोलन को लेकर चर्चा में आये खान कल से ही सफाई दे रहे हैं कि छात्रों के हिंसा में मेरा कोई वास्ता नहीं है और मैं छात्रों से अपील कर रहा हूं कि हिंसा न करे फिर भी छात्र हिंसा कर रहे हैं तो मैं क्या करु।

वैसे कल देर रात पटना के पत्रकार नगर थाने में कोचिंग संचालक खान समेत प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराने वाले छह शिक्षक एसके झा, नवीन, अमरनाथ, गगन प्रताप और गोपाल वर्मा समेत बाजार समिति के कई कोचिंग संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है इन पर छात्रों को भड़काने और हिंसा फैलाने की साजिश रचने का आरोप है, आज NSUI दिल्ली में रेल भवन का घेराव करेंगे। वही छात्र संगठन आइसा व नौजवान संगठन इनौस ने आरआरबी एनटीपीसी की परीक्षा के रिजल्ट में धांधली तथा ग्रुप डी की परीक्षा में एक की जगह दो परीक्षाएं लेने के खिलाफ 28 जनवरी को बिहार बंद का आह्वान किया है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि रोजगार जैसे मुद्दों को सरकार हिन्दू मुसलमान .नेहरू,सुभाष और भारत पाकिस्तान से सहारे कब तक टालती रहेगी क्यों कि आज ना कल भूख और पेट की आग का सवाल उठेगा ही और उस दिन देश जलने से कोई रोक नहीं सकता है ।

2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं का मूड जानने के लिए मैं गांव गांव घूम रहा था इसी दौरान मैं नवादा शहर को कोई 20 किलोमीटर दूर उस लोकसभा क्षेत्र के सबसे बड़े महादलित गांव में मतदाताओं का मूड जानने पहुंचा था उस गांव में पासी जाति के लोग रहते थे नीतीश कुमार के शराबबंदी कानून को लेकर लोग काफी खफा थे बिहार में पासी समाज शराब के धंधे में पीढ़ी दर पीढ़ी से लगे हुए उस गांव के दो दर्जन से अधिक महिला और पुरुष जेल में था बात शुरु हुई नहीं कि महिला और पुरुष नीतीश कुमार पर टूट परा नांन स्टांप गाली देता रहा यह सिलसिला 30 मिनट तक चलता रहा इस दौरान मेरी कोशिश ये रही की वोट किसको दे रहे हैं ये स्पष्ट हो सके सावल दर सवाल चलता रहा लेकिन कोई खुल कर बोलने को तैयार नहीं था तभी एक युवा कैमरे के सामने आया और कहां सर मेरा नाम संदीप चौधरी है ये मेरे पिता जी है और ये प्लंबर मिस्त्री का काम करते हैं और ये मेरी माँ है आंगनवाड़ी सेविका है मैं पांच वर्ष से पटना में रह कर प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहा हूं और ये सही है की मोदी के राज में सरकारी नौकरी की वेकेंसी नहीं आ रही है पहले 1500 रुपया में काम चल जाता था लेकिन महंगाई इतनी बढ़ गयी है कि अब चार हजार रुपया महिना खर्च हो रहा है मतलब मेरे माँ पिता के आमदनी का बड़ा हिस्सा मेरे पढ़ने पर खर्च हो रहा है बहन की शादी करनी है मेरी वजह से पैसा नहीं बच पा रहा है लेकिन सर सवाल देह(शरीर) का नहीं है देश का है।

मोदी की नीति के कारण सरकारी नौकरी जरूर कम हो गयी लेकिन पेट से बड़ा सवाल देश हैं और इस बार देश के लिए वोट करेंगे देश रहेगा तब ना पेट की चिंता करेंगे, इसलिए इस बार मोदी को ही वोट देंगे ।

मतलब भारत पाकिस्तान का मुद्दा इस स्तर पर गांव गांव में पहुंच गया था और इस मुद्दा के आगे दो जून की रोटी का मुद्दा भी गौण पड़ गया था हालांकि रोजगार का मुद्दा बिहार विधानसभा में बड़ा मुद्दा बन गया था और 10 लाख लोगों को रोजगार देने कि घोषणा की वजह से ही रातो रात तेजस्वी बिहार के युवाओं का चहेता बन गया था और बड़ी मुश्किल से नीतीश और मोदी के सरकार की वापसी हो पाई थी ,जबकि बिहार में जाति और सामाजिक समीकरण अभी भी तेजस्वी के अनुकूल नहीं है फिर भी उसकी पार्टी इस तरह से फाइट दिया था मोदी और नीतीश को ।

लेकिन अब भावनात्मक मुद्दे भारत पाकिस्तान ,हिन्दू मुसलमान और नेहरू सुभाष पर बेरोजगारी और रोजगार का सवाल भारी पड़ता जा रहा है और RRB-NTPC परीक्षा धांधली को लेकर छात्रों का जो उग्र प्रदर्शन हो रहा है वो उसी फ्रस्टेशन (हताशा) का प्रकटीकरण है क्यों कि जहां जहां यह हंगामा चल रहा है बिहार का वो जगह पटना ,नालंदा ,गया ,आरा ,बक्सर ,सासाराम,जहानाबाद कोचिंग संस्थानों का हब है जहां वर्षो से हजारों छात्र सरकारी वैकेंसी के इन्तजार में लाखो लाख रुपया कोचिंग और घर से बाहर रहने पर खर्च कर रहा है और अब उनका धैर्य जवाब देने लगा है इसलिए सरकार इस आंदोलन को पुलिस के बल पर रोक ले ऐसा संभव होता नहीं दिख रहा है यू कहे तो बारूद के ढेर सरकार बैठी है और कभी भी बड़ा विस्फोट हो सकता है और 1974 जैसा छात्र आन्दोलन पूरे देश में फैल जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।

मालेगांव कांड के मुख्य आरोपी को जदयू ने दिया टिकट

आपको एक ऐसी खबर से रुबरु करा रहे हैं जिसे पढ़कर आप हैरान रह जायेंगे । जी हां यूपी विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने मालेगांव कांड के मुख्य आरोपी रमेश चंद्र उपाध्याय को बलिया के बैरिया विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया है, 5 साल पहले मुंबई हाईकोर्ट से मिली थी जमानत ।

2008 में हुए मालेगांव बम धमाके के आरोपी मेजर रमेश चंद्र उपाध्याय मुंबई हाई कोर्ट से जमानत पर है। 5 साल पहले उन्हें कोर्ट ने जमानत दी थी। रमेश चंद्र उपाध्याय 2020 में जदयू में शामिल हुए थे। उन्हें उत्तर प्रदेश के पूर्व सैनिकों की सेल का राज्य संयोजक भी बनाया गया था।

मालेगांव मामले में कथित भूमिका के लिए महाराष्ट्र ATS ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित के साथ रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय को गिरफ्तार किया था। उन्हें 2017 में जमानत पर रिहा किया गया था।

इस मामले पर स्पेशल NIA कोर्ट में ट्रायल जारी है। हालांकि मीडिया में खबर चलने के अब नई लिस्ट में बैरिया विधानसभा को फिलहाल छोड़ दिया गया है। इसकी जगह पर औरैया से मीरा दीवाकर को टिकट दिया गया है।

RRB-NTPC के रिजल्ट में धांधली को आज दूसरे दिन भी बिहार के छात्रों ने जमकर किया हंगामा कई ट्रेनों का परिचान हुआ प्रभावित

RRB-NTPC के रिजल्ट में धांधली का आरोप लगाते हुए आज दूसरे दिन भी बिहार के छात्रों ने जमकर हंगामा किया ,मिली जानकारी के अनुसार पटना, नालंदा, नवादा, सीतामढ़ी, बक्सर, आरा और मुजफ्फरपुर में उम्मीदवारों ने रेलवे ट्रैक पर जोरदार प्रदर्शन किया। इसकी वजह से नालंदा में आउटर पर दिल्ली जा रही श्रमजीवी और दिल्ली से आने वाली श्रमजीवी ट्रेन रुकी रही। वहीं, बक्सर में अहमदाबाद-बरौनी एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेन का परिचालन बाधित रहा। इधर, मुजफ्फरपुर जंक्शन पर भी आक्रोशित छात्रों ने ट्रेनें रोक दी। नवादा में भी पुलिस पर रोड़ेबाजी की गई और मेंटेनेंस ट्रेन में आग लगा दी गई। वहीं वैशाली में हावड़ा- काठगोदाम एक्सप्रेस 45 मिनट तक रुकी रही। छात्रों ने सीतामढ़ी में जमकर बवाल काटा। पुलिस समझाने गई तो उनपर पथराव कर दिया। छात्रों पर काबू पाने के लिए पुलिस ने 25 राउंड फायरिंग भी की। आरा में पथराव कर रहे छात्रों पर काबू पाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े।

नवादा में आक्रोशित छात्र रेलवे ट्रैक पर उतरे
वहीं, नवादा में भी अभ्यर्थियों का आंदोलन शुरू हो गया है। 2000 से अधिक हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने नवादा रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर रेल ट्रैक को जाम कर नारेबाजी की। छात्रों ने नवादा रेलवे स्टेशन पर पथराव किया। रेलवे ट्रैक मेंटेनेंस इंजन में आग लगाई दी। रेलवे ट्रैक पर लगे पेंडू क्लिप को कबाड़ दिया। इतना ही नहीं छात्रों ने रेलवे ट्रैक को भी नुकसान पहुंचाया और रेल थाना हमला कर दिया। छात्रों के पथराव में जिला पुलिस बल का जवान रविंद्र सिंह जख्मी हुए हैं। स्टेशन प्रबंधक AK सुमन के मुताबिक, रेल परिचालन शुरू करा पाना मुश्किल है। कामाख्या, जमालपुर पैसेंजर गया स्टेशन पर खड़ी है। एक मालगाड़ी तिलैया स्टेशन पर खड़ी है।

छात्र संघ के जिला अध्यक्ष कुंदन राज ने बताया कि परीक्षा के बाद बोर्ड नियमों में परिवर्तन करके रिजल्ट जारी करता है। इसके कारण मेधावी छात्रों का रिजल्ट नहीं हो पाता है। बोर्ड जो भी नियम बनाए परीक्षा के पहले बनाए। ताकि हम लोग उसी तरह से तैयारी करें। इस बार के रिजल्ट में रुपए का खेल चला है। इसके कारण रिजल्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है। अब रेलवे भर्ती बोर्ड ग्रुप डी के परीक्षा में गड़बड़ी कर रहा है।

मुजफ्फरपुर जंक्शन पर छात्रों ने रोकी ट्रेनें
मुजफ्फरपुर में परीक्षार्थियों ने जमकर बवाल किया। मुजफ्फरपुर जंक्शन पर बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस समेत दो ट्रेनों को रोक दिया। जमकर प्रदर्शन और हंगामा करने लगे। ट्रेन रोके जाने की सूचना पर RPF और GRP के अधिकारी और जवान पहुंचे। परीक्षार्थियों को समझाने का प्रयास कर रेलवे ट्रैक से हटने को कहा गया। ताकि ट्रेनों का परिचालन हो सके, लेकिन परीक्षार्थियों ने किसी की नहीं सुनी। इसे लेकर RPF और GRP जवानों के साथ जमकर नोकझोंक हुई। फिलहाल ट्रैक पर परीक्षार्थियों के कब्जा है। ट्रेनों का परिचालन ठप है।

आरा में मालगाड़ी को छात्रों ने रोका
इधर, आरा भी छात्रों का उग्र रूप देखने को मिला। ग्रुप D के परीक्षा में बदलाव से नाराज परिक्षार्थियों ने आरा रेलवे स्टेशन के पश्चिमी छोर पर मालगाड़ी को रोक दिया। सैकड़ों छात्र रेलवे ट्रैक पर उतर आए और हंगामा किया। इससे रेलवे परिचालन पूरी तरह बाधित हो गई। यहां सोमवार को भी छात्रों ने प्रदर्शन किया था। छात्रों का जमकर पथराव किया। पथराव में मालगाड़ी का इंजन भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हालात को काबू करने के लिए पुलिस ने बचाव में आंसू गैस के गोले भी छोड़े।
पटना के भिखना पहाड़ी पर धरने पर बैठे छात्र

राजधानी पटना के भिखना पहाड़ी पर सुबह से ही छात्र जमा हो गए थे। इस कारण कई घंटों तक भिखना पहाड़ी मार्ग जाम रहा। छात्रों ने ऐलान किया है कि अभी तो यह शुरुआत हुई है आगे और भी उग्र तरीके से आंदोलन होगा अगर सरकार हमारी बात को नहीं सुनती है तो आगे भी आंदोलन होगा। वहीं राजद नेत्री ऋतु जयसवाल ने कहा कि RJD इन अभ्यर्थियों के साथ है। यही नहीं बिहार में जितने भी अभ्यर्थी हैं। इनके ऊपर पुलिस लाठी डंडे बरसा रही है। हम सब उनके साथ हैं और उनके हक दिलाने के लिए पूरी लड़ाई लड़ेंगे। एनडीए के सरकार ने 19 लाख रोजगार देने का वादा किया था उन्हें रोजगार देना पड़ेगा।

मेहसौल रेलवे ओवर ब्रिज के पास छात्रों का हंगामा

रेलवे भर्ती बोर्ड के एनटीपीसी रिजल्ट में धांधली के आरोप को लेकर उम्मीदवारों ने मंगलवार को जिले के मेहसौल रेलवे ओवर ब्रिज के पास सैकड़ों की संख्या में पहुंचे उम्मीदवारों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन करने लगे। सड़क जाम की सूचना पर स्थानीय मेहसौल ओपी पुलिस, नगर थाना पुलिस के साथ सीओ घटना स्थल पर पहुंचे। वहीं छात्रों को समझाने की कोशिश की गई। लेकिन छात्र काफी उग्र दिख रहे थे जिसको लेकर मौके पर मौजूद पुलिस अपने वरीय अधिकारी को सूचना दी। इसके बाद घटनास्थल पर डीएसपी रामाकांत उपाध्याय घटनास्थल पर पहुंचे। इस दौरान छात्रों के द्वारा सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन परिसर को चारों तरफ से घेर लिया गया। वही करीब एक हजार की संख्या में छात्र जमकर रोड़ेबाजी भी की गई। काफी समझाने के बाद जब छात्र नहीं माने तो पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। पुलिस ने करीब 25 राउंड फायरिंग किया। छात्रों की पत्थरबाजी में दर्जनों पुलिसकर्मी वह पत्रकार गंभीर रूप से जख्मी हो गए। जख्मी हालत में सभी पुलिसकर्मी और पत्रकार को सदर अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

फतुहा और बक्सर स्टेशन पर प्रदर्शन के कारण ट्रेन परिचालन में बदलाव
दानापुर मंडल के फतुहा और बक्सर स्टेशन पर हो रहे प्रदर्शन के कारण कुछ ट्रेनों के परिचालन में निम्नानुसार बदलाव किया गया है।

परिवर्तित मार्ग से चलायी जाने वाली ट्रेन:
25.01.2022 को पटना से खुलने वाली 12568 पटना-सहरसा राज्यरानी एक्सप्रेस का परिचालन परिवर्तित मार्ग वाया पाटलिपुत्र-हाजीपुर-बरौनी के रास्ते।
25.01.2022 को पटना से खुलने वाली 15714 पटना-कटिहार इंटरसिटी एक्सप्रेस का परिचालन परिवर्तित मार्ग वाया पाटलिपुत्र-हाजीपुर-बरौनी के रास्ते ।
25.01.2022 को राजगीर से खुल चुकी 12391 राजगीर-नई दिल्ली श्रमजीवी एक्सप्रेस का परिचालन परिवर्तित मार्ग वाया आरा-सासाराम-पंडित दीन दयाल उपाध्याय जं. के रास्ते।
25.01.2022 को पटना से खुल चुकी 13237 पटना-कोटा एक्सप्रेस का परिचालन परिवर्तित मार्ग वाया दानापुर-पाटलिपुत्र-छपरा ग्रामीण-वाराणसी के रास्ते।
25.01.2022 को दानापुर से खुल चुकी 12792 दानापुर-सिकंदराबाद एक्सप्रेस का परिचालन परिवर्तित मार्ग वाया नेउरा-सासाराम-पंडित दीन दयाल उपाध्याय जं. के रास्ते।
25.01.2022 को हावड़ा से खुल चुकी 12303 हावड़ा-नई दिल्ली पूर्वा एक्सप्रेस का परिचालन परिवर्तित मार्ग वाया किऊल-गया-पंडित दीन दयाल उपाध्याय जं. के रास्ते।
25.01.2022 को मधुपुर से खुलने वाली 22459 मधुपुर-आनंद विहार टर्मिनल हमसफर एक्सप्रेस का परिचालन परिवर्तित मार्ग वाया किऊल-गया-पंडित दीन दयाल उपाध्याय जं. के रास्ते।
आंशिक समापन / प्रारंभ कर चलायी जाने वाली ट्रेन:-
24.01.2022 को नई दिल्ली से प्रस्थान कर 25.01.2022 को इसलामपुर पहुंचने वाली 20802 नई दिल्ली-इसलामपुर मगध एक्सप्रेस का समापन पटना जंक्शन पर किया गया।
25.01.2022 को इसलामपुर से प्रस्थान करने वाली 18623 इसलामपुर-हटिया एक्सप्रेस इसलामपुर के बदले पटना जंक्शन से हटिया के लिए प्रस्थान करेगी।
परिचालन रद्द की गई ट्रेन
दिनांक 26.01.2022 को दुर्ग से खुलने वाली 13287 दुर्ग-राजेंद्र नगर टर्मिनल साउथ बिहार एक्सप्रेस का परिचालन रेक की अनुपलब्धता के कारण रद्द रहेगा।

गणतंत्र दिवस के मौके पर बिहार के 16 पुलिसकर्मियों होगे सम्मानित

इस बार गणतंत्र दिवस के मौके पर बिहार पुलिस के 16 पुलिसकर्मियों को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जायेंगा । केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची में बिहार के एडीजी ऑपरेशन सुशील मानसिंह खोपरे और एडीजी स्पेशल सुनील कुमार को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक और 14 अन्य पुलिस अधिकारियों व कर्मियों को सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक दिया जाएगा ।

दो एडीजी के साथ इस लिस्ट में एसआई लक्ष्मण कुमार सिन्हा,एसआई दिनेश कुमार मिश्रा,पटना पुलिस,एसआई शुभकान्त चौधरी, डेहरी में तैनात बिहार सशस्त्र पुलिस बल के हवलदार उदय प्रताप सिंह और हवलदार मोहम्मद नसीम,पटना बिहार सशस्त्र पुलिस बल के हवलदार मदन तिवारी,बांका के कांस्टेबल भरत प्रसाद यादव,बोधगया स्थित बिहार सशस्त्र पुलिस बल के रमेश प्रसाद और सीआईडी पटना के ड्राइवर विजय कुमार समेत कई अन्य नाम हैं।

इन सभी पुलिसकर्मी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद गणतंत्र दिवस के अवसर पर पुलिस पदक से सम्मानित करेंगे ।

युवाओं के भविष्य के साथ क्यों खिलवाड़ कर रही है सरकार

इस कड़ाके के ठंड में कल पटना और आरा में छात्र रेलवे ट्रैक को दस घंटों तक जमा रखा था जिस दौरान रेलवे को राजधानी सहित 5 ट्रेनों को रद्द करना पड़ा और 30 ट्रेनें घंटे जहां तहां फंसी रही है ।
आज सुबह से ही नालंदा सहित बिहार के कई जिलों से छात्रों द्वारा आज दूसरे दिन भी रेलवे ट्रैक को जाम करने कि खबर आ रही है, वजह लोकसभा चुनाव से ठीक पहले रेल मंत्रालय द्वारा 2019 में जो बहाली निकाली गई थी उस वेकेंसी में हेराफेरा का है ।
1–हंगामा की वजह क्या है
2019 में रेल मंत्रालय ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले रेलवे के 21 बोर्ड के लिए ग्रेजुएट (स्नातक) स्तर पर बड़ी वेकेंसी जारी किया गया था जिसमें स्टेशन मास्टर ,गार्ड,टीसी,सहित सात पदों के लिए 35,277 लोगों को बहाल करना था ,वेकेंसी के एक वर्ष बाद 28-12–2020 को पहला परीक्षा हुआ और उसके बाद कोरोना की वजह से यह परीक्षा टल गया और 31 -07 -2012 तक चला , रेलवे बोर्ड 14 जनवरी 2022 को पीटी का रिजल्ट दिया है।
परीक्षा का जो मानक पहले से निर्धारित रहा है उसमें पीटी में कुल पद का 20 गुना रिजल्ट जारी किया जाता था लेकिन इस बार बोर्ड ने वेकेंसी के अनुसार पीटी में 7 लाख की जगह मात्र 2 लाख 76 हजार के करीब रिजल्ट जारी किया है और इस रिजल्ट में ही छात्रों का कैडर निर्धारित कर दिया है ऐसा कभी किसी परीक्षा में नहीं हुआ है मतलब पीटी में ही आपको कैडर गार्ड निर्धारित है तो आप को गार्ड की ही नौकरी मिलेगी चाहे फाइनल परीक्षा का आप टाँपर ही क्यों ना हो अगर रेलवे स्टेशन मास्टर का कैडर मिला तो आपको रेलवे स्टेशन के लिए जो वेकेंसी है उसी आधार पर आपको नौकरी मिलेगी ।
रेलवे का तर्क है कि जो वैकेंसी निकाली गयी है उसके अनुसार हम लोग पीटी में 20 गुना रिजल्ट जारी किये हैं रेलवे बोर्ड सही कह रहा है लेकिन इसके पीछे का खेल क्या है जरा आप भी समझ लीजिए।रेलवे बोर्ड जिन सात पदों पर बहाली कर रहा है हर पद के अनुसार 20 गुना रिजल्ट जारी कर दिया है उसमें चार लाख से अधिक ऐसे छात्र है जिसका रिजल्ट किसी का दो पद पर तो किसी का सातों पदों पर है इस वजह से मात्र 2 लाख 76 हजार छात्र पीटी पास किये हैं जबकि पीटी का रिजल्ट कम से कम सात लाख होना चाहिए खेला यही है क्यों कि बोर्ड कही ना कही जितनी वेकेंसी निकाला था उतना बहाल नहीं करना है इस खेल को छात्र समझ गये हैं और इसलिए आक्रोशित है ।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इस तरह का खेल देश के युवा के साथ सरकार क्यों खेल रही है रेलवे को निजी हाथों में सौपना है तो एक बार सरकार निर्णय सुना दे गुप्त एजेंडा की जरुरत क्या है वैसे भी मोदी के सात वर्षो के कार्यकाल को देखे तो सरकारी नौकरी आधे से भी कम हो गया है जिसका हुआ भी है तो उसकी नियुक्ति प्रक्रिया वर्षो से बाधित है यूपीएससी तक में सीट की संख्या आधी कर दी गयी है और बाहर से भरा जा रहा है।

एनटीपीसी परीक्षा में धाधली को लेकर छात्रों का हंगामा

राजेंद्र नगर टर्मिनल स्टेशन पर प्रदर्शन के कारण ट्रेन परिचालन में बदलाव

आज दिनांक 24.01.2022 को दानापुर मंडल के राजेंद्र नगर टर्मिनल स्टेशन पर हो रहे प्रदर्शन के कारण कुछ ट्रेनों के परिचालन में निम्नानुसार बदलाव किया गया है:

🔸 24.01.2022 को राजेंद्रनगर टर्मिनल/पटना से प्रस्थान करने वाली ट्रेन जिनका परिचालन रद्द किया गया है:

  1. 12309 राजेंद्र नगर टर्मिनल-नई दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस।
  2. 12393 राजेंद्र नगर टर्मिनल-नई दिल्ली संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस ।
  3. 13288 राजेंद्र नगर टर्मिनल-दुर्ग साउथ बिहार एक्सप्रेस ।
  4. 12352 राजेंद्र नगर टर्मिनल-हावड़ा एक्सप्रेस ।
  5. 13201 पटना-लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस ।

🔸 परिवर्तित मार्ग से चलायी जाने वाली ट्रेन:-

NTPC परीक्षा में धांधली को लेकर हंगामा
  1. 24.01.2022 को भागलपुर से प्रस्थान करने वाली 12367 भागलपुर-आनंद विहार टर्मिनस विक्रमशिला एक्सप्रेस का परिचालन परिवर्तित मार्ग वाया किउल-गया-पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन के रास्ते ।
  2. 24.01.2022 को दानापुर से प्रस्थान करने वाली 13402 दानापुर-भागलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस का परिचालन परिवर्तित मार्ग वाया पटना-पाटलिपुत्र-शाहपुर पटोरी-बरौनी-मुंगेर के रास्ते ।
  3. 24.01.2022 को हटिया से प्रस्थान करने वाली 18626 हटिया-पूर्णिया कोर्ट एक्सप्रेस का परिचालन परिवर्तित मार्ग वाया पटना-पाटलिपुत्र-शाहपुर पटोरी-बरौनी-मानसी के रास्ते ।

🔸 आंशिक समापन/प्रारंभ कर चलायी जाने वाली ट्रेन:-

  1. 23.01.2022 को नई दिल्ली से प्रस्थान कर 24.01.2022 को इसलामपुर पहुंचने वाली 20802 नई दिल्ली-इसलामपुर मगध एक्सप्रेस का आंशिक समापन पटना जंक्श्न में किया गया ।
  2. 24.01.2022 को इसलामपुर से प्रस्थान करने वाली 18623 इसलामपुर-हटिया एक्सप्रेस इसलामपुर के बदले पटना जंक्श्न से रांची के लिए प्रस्थान करेगी ।

मंडल और कमंडल के पाटन में फसा है देश

बात कोई 1991- 92 की है उस समय बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद हुआ करते थे ठीक उसी समय मेरा दाखिला एलएस कॉलेज(मुजफ्फरपुर)में हुआ था जहां तक मुझे याद है लालू प्रसाद एमडीडीएम कॉलेज के पास जुब्बा सहनी पार्क का उद्घाटन करने आये हुए थे ।वह पार्क एक से दो माह में बन कर तैयार हो गया था और इस दौरान उस पार्क के अंदर बड़ा बड़ा पेड़ भी लगा दिया गया था मेरे लिए कौतूहल का विषय यही था कि इतना हरा भरा पेड़ कैसे पार्क में रातो रात लगा दिया गया ।

खैर उस तरह का पार्क पहली बार देखने को मिला था बहुत अच्छा लगा बाद में जितेन्द्र सर के यहां छोटी कल्याणी पढ़ने जाते थे तो जब मौका मिलता था घूम लेते थे ।उद्घाटन के दूसरे दिन अखबार के मुख्य पृष्ठ पर लालू प्रसाद का भाषण छपा था उसमें लिखा था देश की आजादी हम पिछड़ों ने दिलाई लेकिन इतिहास लिखने वाला सारे सवर्ण थे बड़े लोग थे इसलिए आजादी के आन्दोलन में गरीब पिछड़ा और दलित के योगदान की चर्चा तक नहीं है जुब्बा सहनी शहीद हुए थे थाने पर चढ़कर थानेदार को मार दिया था और उस वजह से उन्हें फांसी दी गयी लेकिन कही इसकी चर्चा तक भी है यह पार्क आजादी के आन्दोलन में पिछड़ों का प्रतीक है।

कुछ दिनों के बाद अचानक कॉलेज में ही थे तो पता चला कि सरकार बिहार विश्वविद्यालय का नाम बदल कर बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर विश्वविद्यालय कर दिया है ,बड़ी हंगामा हुआ कई दिनों कर कॉलेज बंद रहा , उस समय भी सरकार का यही तर्क था कि बिहार के सारे शैक्षणिक संस्थान अगड़ी जाति के नाम पर है ऐसे में दलित नेता को सम्मान दिया गया तो अगड़ी जाति को नागवार गुजर रहा है बाद के दिनों में इस तरह के तर्क के सहारे बिहार में बहुत सारे काम हुए ,यहां तक की नरसंहार को भी सही साबित करने की कोशिश हुई ।

सामाजिक न्याय के नाम पर लालू 15 वर्षों तक बिहार के सत्ता पर काबिज रहे और पांच वर्षों तक केंद्र में रहे लेकिन सामाजिक न्याय से जुड़ी जो बुनियादी सवाल थे रोटी सरोजी और रोजगार वहां बिहार पिछड़ता चला गया शुरुआती दिनों में सामाजिक न्याय के नाम पर अगड़े को जरुर निशाना बनाया गया है लेकिन धीरे धीरे यह गांव के उस वर्ग तक पहुंच गया जो सामाजिक न्याय के हकदार थे जिनके सहारे लालू की सरकार चल रही थी ।बाद में यह वर्ग अपने को ठगा ठगा सा महसूस करने लगा और समाज में सामाजिक न्याय के नाम पर जो गुंडागर्दी शुरू हुई थी उसका शिकार कुछ दिनों के बाद छोटी पिछड़ी जाति होने लगी ,और उसी का परिणाम है कि लालू परिवार 20 वर्षो से सत्ता से बाहर है ।

वही आज नीतीश कमजोर हुए हैं उसकी भी वही वजह है अति पिछड़ा और महादलित की राजनीति के सहारे 15 वर्षो से अधिक समय से बिहार के मुख्यमंत्री जरुर बने हुए हैं लेकिन सामाजिक न्याय का जो बुनियादी सवाल है जिससे हर बिहारी हर दिन आज भी सामना कर रहा है रोजी ,रोटी और रोजगार के सवाल पर नीतीश भी पूरी तरह फेल हैं।

गोलगप्पा बेचने के लिए बिहारी काश्मीर जा रहा है समझ सकते हैं बिहार अभी भी कहां खड़ा है।यही हाल पिछले आठ वर्षो से मोदी सरकार की है इनके कार्यकाल को गौर से देखिए बिहार जैसे तीस वर्षो से जाति जाति का खेल चल रहा है ठीक उसी तरीके से मोदी हिन्दू मुस्लिम, भारत पाकिस्तान ,नेहरू ,सुभाष और पटेल जैसे भावनात्मक मुद्दों को लेकर खेल रहे हैं ,इस खेल के सहारे मोदी और बीजेपी आज पूरे देश पर राज कर रहा है और ये कब तक चलेगा कहना मुश्किल है लेकिन देश की जो बुनियादी सवाल है रोजी ,रोटी और रोजगार को लेकर मोदी भी पूरी तरह से फेल है।

देश की अर्थ व्यवस्था का हाल दिन प्रतिदिन खराब होता जा रहा है सरकार चलाने के लिए सरकारी उपक्रमों को बेचा जा रहा है कब तक ये चलेगा वही इस तरह के भावनात्मक मुद्दों के सहारे कब तक चुनाव जीतते रहेंगे कल सुभाष चन्द्र बोस के प्रतिमा के अनावरण के दौरान मोदी जो बोल रहे थे आजादी के बाद अनेक महान लोगों के योगदान को मिटाने की कोशिश हुई लेकिन आज देश उन गलतियों को ठीक रहा है ।

मोदी जिस अंदाज में बोल रहे थे वो अंदाज लालू प्रसाद द्वारा गांधी मैदान में बुलाये गये गरीब रैला की याद को ताजा कर दिया लालू भी अगड़े और पिछड़े के नाम पर कुछ इसी अंदाज में भाषण दे रहे थे।

ऐसा नहीं है कि सामाजिक न्याय की सरकार में सब कुछ गड़बड़ ही नहीं हुआ इस सरकार की देन है कि आज बिहार के समाज में उच्च नीच और अगड़े पिछड़े की सोच में बड़ा बदलाव आया है ।

इसी तरह से मोदी जिस नारे के सहारे राज कर रहे हैं उससे भी देश को लाभ हुआ है अब देश में तुष्टीकरण की राजनीति नहीं चलेगी जो भारत के सर्वधर्म समभाव के नारे को कही ना कही प्रभावित कर रहा था। इसलिए हमारे आपके लिए 30 वर्ष बहुत मायने रखता है लेकिन किसी देश के निर्माण के लिए ये 30 वर्ष कोई मायने नहीं रखता है बदलाव होगा और जरूर होगा झूठे नारे और भावनात्मक मुद्दे ज्यादा दिनों तक नहीं चलता है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिस तरीके से जनता लालू और नीतीश से सवाल कर रहे हैं मोदी से सवाल नहीं कर पा रहे हैं समस्या यही है नहीं तो जिस तरीके सरकारी उपक्रम को मोदी बेच रहे हैं रोजगार के अवसर धीरे धीरे खत्म हो रहे हैं लेकिन कहीं से भी सवाल खड़े नहीं हो रहे हैं खड़े भी हो रहे हैं तो वोट में नही बदल रहा है।

इस प्रवति के कारण भले ही देश को ऐसा नुकसान हो रहा है जिसकी भरपाई करना मुश्किल है फिर भी सोच में बदलाव दिख रहा है दास और भक्त जितनी गाली देते थे और मोदी को लेकर जितनी भक्ति दिखाया करते थे इतना तो शर्म अब दिख रहा है कि ऐसे लोग अपना सोशल मीडिया के पेज को लाँक कर लिया है या फिर पेज फर्जी है मतलब अब घर परिवार में भी भक्ति को लेकर सवाल खड़े होने लगे है और महंगाई,बेरोजगारी और रोजगार के मसले पर दास(भक्त) घर में भी घिरने लगा है इसलिए निराश होने कि जरुरत नहीं है देश करवट ले रहा है वो साफ दिख रहा है ।

नीतीश की खामोशी उनकी बेचारगी है -शिवानंद

बिहार में सरकार डवांडोल हैं । गठबंधन के नेता आपस में मुँह लड़ा रहे हैं । नीतीश जी ने मौन साध लिया है. गठबंधन पर उनकी पकड़ पहले जैसी नहीं रही । सरकार पाँच वर्ष की अवधि पुरा कर पाएगी, इस पर लोग संदेह करने लगे हैं ।

सरकार की डवांडोल स्थिति की वजह से प्रशासन भी उहापोह की स्थिति में है. अपराधियों का मनोबल बढ़ गया है. बाकरगंज जैसे भीड़भाड़ वाले बाज़ार में कल अपराधियों जिस तरह का तांडव मचाया वह इसके पहले राजधानी में कभी नहीं हुआ था ।

आए दिन व्यापारियों को धमका कर उनसे रंगदारी माँगी जा रही है. जो नहीं दबते हैं उनपर गोली चलती है. पटना सरकार की नहीं बल्कि अपराध की राजधानी के रूप में तब्दील होता जा रहा है. नीतीश जी पर शराबबंदी का नशा सवार है. इसके अलावा बाक़ी सबकुछ उपेक्षित है ।

बिहार में भयंकर गैर बराबरी बढ़ी है.उसी अनुपात में ग़रीबी और बेरोज़गारी भी बढ़ी है. लाखों लोग अवैध और अपराध जनित कर्मों से अपना परिवार चला रहे हैं । हर ओर, चाहे जैसे हो, लखपति-करोड़पति बनने की होड़ मची हुई है. दिल्ली और पटना की सरकारों की नीतियों का यह नतीजा है । नीतीश जी की सरकार की विकास नीति ग़रीबी और बेरोज़गारी को दूर करने के बदले बढ़ा रही है. यह विकास नीति ही अपराध को भी बढ़ा रही है. इसीलिए अपराध के ख़िलाफ़ सरकार की सारी कार्रवाइयाँ पानी में लाठी पीटने के समान साबित हो रही हैं ।

लेखक – शिवानंद तिवारी

रिया इस तरह सुशांत सिंह राजपूत को याद किया

Sushant Singh Rajput Birth Anniversary: बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) का कल जन्मदिन था इस खास मौके पर फैन्स से लेकर सेलेब्स तक याद कर रहा था ।

सुशांत सिंह राजपूत और रिया को यादगार वीडियो

कल सुशांत सुबह से ही ट्विटर पर ट्रेंड हो रहे थे और इस बीच सुशांत के साथ रिलेशनशिप में रहीं बॉलीवुड एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती ने भी एक वीडियो शेयर किया है। रिया ने सुशांत का एक अनदेखा वीडियो शेयर किया है। जिसे फैन्स काफी पसंद कर रहे हैं और अभी तक लाखों लोग देख चूके हैं ।

बिहार में सैनिटरी नैपकिन का इस्तमाल स्कूली छात्र भी करता है

बिहार में आप एक से एक घोटाले की चर्चा सुने होंगे लेकिन आज हम आपको ऐसे घोटाले के बारे जानकारी दे रहे हैं जो पढ़कर आप हैरान हो जायेंगे। राज्य सरकार बिहार के सरकारी स्कूल में माहवारी के लिए लड़कियों को सैनिटरी नैपकिन देती है छपरा के एक स्कूल से खबर आ रही है कि स्कूल के प्रिंसिपल साहब लड़कों को भी माहवारी नैपकिन बांट दिये हैं ऐसा स्कूल के उस रजिष्ट्रर से ज्ञात हो रहा है जिसमें सैनिटरी नैपकिन बांटने की जानकारी दर्ज है । 

मामला सारण के मांझी प्रखंड के हलखोरी साह उच्च विद्यालय में लड़कियों के लिए चलाई जा रही सैनिटरी नैपकिन (Sanitary Napkin)  का लाभ स्कूल के लड़कों को भी मिला है। यह घोटाला तब उजागर हुआ, जब विद्यालय के प्रधानाध्यापक के सेवानिवृत्त होने के बाद दूसरे प्रधानाध्यापक लड़कों को दिया सैनिटरी नैपकिन योजना का लाभसारण जिले के एक सरकारी विद्यालय में लड़कियों के लिए चलाई जा रही सैनिटरी नैपकिन और पोशाक योजना का लाभ दर्जनों लड़कों को दे दिया गया।

मामला विद्यालय में नए प्रधानाध्यापक के पदस्थापन के बाद सामने आया। नए प्रधानाध्यापक से जब शिक्षा विभाग ने पुरानी योजनाओं के उपयोगिता प्रमाण पत्र मांगे, तब पाया गया कि करीब एक करोड़ रुपये की योजनाओं के उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं किए गए हैं।

इसके बाद जब जांच शुरू की गई, तब बैंक स्टेटमेंट खंगालने के दौरान ज्ञात हुआ कि लड़कियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की राशि लड़कों के खातों में भी ट्रांसफर की जाती रही है। इस क्रम में यह भी पाया गया कि लड़कियों को दी जाने वाली सैनिटरीयह पूरा मामला बीते तीन वित्तीय वर्ष का है। तब इस विद्यालय में अशोक कुमार राय प्रधानाध्यापक थे।

उन्होंने सेवानिवृत्त होने के बाद अब तक अपना प्रभार नव पदस्थापित प्रधानाध्यापक को नहीं सौंपा है। इस बीच घोटाला की जानकारी मिलने पर नए प्रधानाध्यापक रईस उल एहरार खान ने डीएम को पत्र लिखा, जिसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने जांच टीम का गठन कर दिया है।

शिक्षा विभाग ने जांच शुरू कर दी है। डीपीओ (DPO) राजन गिरी ने बताया कि जांच के बाद दोषियों पर कानून सम्मत कार्रवाई की जाएगी। जानकारों का मानना है कि इस तरह का घोटाला बिहार के अधिकांश स्कूलों में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मिलीभगत से चल रहा है क्यों कि हर जिले से इस तरह की शिकायतें अक्सर आती रहती है ।

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यूपी में बीजेपी के साथ नहीं हो सका गठबंधन जदयू अकेले लड़ने का किया एलान

यूपी चुनाव को लेकर JDU और BJP में गठबंधन को लेकर आरसीपी के पहल के बावजूद बीजेपी से बात नहीं बन पायी और आज JDU ने अपने उम्मीदवारों के नाम का एलान कर दिया हालांकि आज आरसीपी प्रेस वार्ता में मौजूद नहीं थे पिछले दिनों प्रेस वार्ता के दौरान ही कहां था कि गठबंधन को लेकर साकारत्मक बातचीत चल रही है और गठबंधन होगा यह तय मानिए ।

JDU के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि चरणवार उम्मीदवारों की सूची जारी होगी। सूची में जिन इलाकों पहले फेज और दूसरे फेज में पार्टी चुनाव लड़ाना चाहती है वहां के उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गई है।

सीट बटवारे को लेकर ललन सिंह ने आरसीपी सिंह को लिया आड़े हाथ

51 प्रत्याशियों की सूची तैयार
JDU के यूपी प्रभारी केसी त्यागी ने कहा कि केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह, BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और धर्मेंद्र प्रधान से बात की, लेकिन बात नहीं बनी। नतीजा ये रहा कि JDU को अब अकेले ही चुनावी मैदान में उतरने का फैसला लिया है । पार्टी ने 51 प्रत्याशियों की सूची भी तैयार कर ली है। आज 26 सीटों की पहली सूची जारी हुई है।

इंदिरा गांधी से प्रभावित नोबेल विजेता गेब्रियल गार्सिया मार्केज ने अपनी बेटी का नाम इंदिरा रखा था

इंदिरा गांधी से प्रभावित नोबेल विजेता गेब्रियल गार्सिया मार्केज ने अपनी बेटी का नाम इंदिरा रखा था

यूके स्थित समाचार पत्र ‘द टाइम्स’ ने बुधवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया है कि कोलंबिया में जन्मे नोबेल पुरस्कार विजेता गेब्रियल गार्सिया मार्केज के 1990 के दशक में मैक्सिकन लेखक सुज़ाना काटो के साथ विवाहेतर संबंध थे और उनकी एक बेटी भी थी, जिसका नाम उन्होंने भारत के पूर्व भारतीय प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के नाम पर ‘इंदिरा’ रखा था.
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्केज़, जो ‘वन हंड्रेड इयर्स ऑफ सॉलिट्यूड’ और ‘लव इन द टाइम ऑफ कॉलरा’ जैसे सबसे ज्यादा बिकने वाले उपन्यासों के लिए जाने जाते हैं, इंदिरा गांधी के बड़े प्रशंसक थे और जब उन्हें 1982 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था तो प्रधानमंत्री गांधी उन्हें बधाई देने वाली पहली शख्स थीं.
उन्होंने सुज़ाना काटो, जो उनसे 33 साल छोटी थीं, के साथ दो फिल्मों की पटकथा (स्क्रिप्ट) पर काम किया था. उनकी बेटी इंदिरा काटो, जो अब 30 वर्ष की हो चुकी है, अपनी मां के उपनाम के साथ अपना जीवन जी रही है और वह मेक्सिको सिटी में एक वृत्तचित्र (डाक्यूमेंट्री) निर्माता है. उसने 2014 में मैक्सिको से गुजरने वाले प्रवासियों पर बनाई गई अपनी एक वृत्तचित्र के लिए कई पुरस्कार जीते हैं.
‘इंदिरा काटो’ का नाम रखे जाने के पीछे के आशय से जुडी ‘द टाइम्स’ की यह खबर इस दिवंगत लेखक के लंबे समय से गुप्त रहे व्यक्तिगत संबंध का खुलासा होने के दो दिन बाद आई है. कोलंबियाई समाचार पत्र ‘एल यूनिवर्सल’ रविवार को इस खबर को प्रकाशित करने वाला पहला समाचार पत्र था. इसके बाद अमेरिकी संवाद एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने मार्केज़ के दो रिश्तेदारों से बात कर इसकी पुष्टि की.
ये रहस्योदघाटन उनके निधन के तक़रीबन आठ साल बाद हुआ है.
‘द टाइम्स’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘इंदिरा काटो’ के जन्म के समय गेब्रियल गार्सिया मार्केज़ अपनी पत्नी मर्सिडीज बरचा के साथ एक ‘खुशहाल’ शादी में रह रहे थे और पांच दशक से अधिक समय तक चले उनके विवाह से उन्हें दो बच्चे भी थे.
एपी की रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘एल यूनिवर्सल’ द्वारा उद्धृत मार्केज़ के परिवार के सदस्यों ने का कहना है कि इस लेखक के गुप्त संबंधों के बारे में पहले उन्होंने बरचा – जिनकी अगस्त 2020 में मृत्यु हो गई थी – के ‘सम्मान’ की वजह से कोई बात नहीं की थी.
एपी वाली रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस कोलंबियाई लेखक के भतीजों में से एक, गेब्रियल एलिगियो टोरेस गार्सिया, जो सोशल मीडिया के माध्यम से इंदिरा काटो के संपर्क में बने रहते हैं, ने कहा कि सुज़ाना भी अपनी बेटी की वंशावली (विरासत) के बारे में चुप रहती थी, ताकि उसे गैरजरूरी सुर्खियों से दूर रखा जा सके.

लोकतंत्र में सवाल पुछना देशद्रोह नहीं हो सकता

राम राज्य पर जब सवाल उठ सकता है फिर जनता द्वारा चुनी गयी सरकार के कामकाज पर सवाल ना करे यह कौन सा तर्क है और सवाल करने वाला देशद्रोही है ये कैसे हो सकता है,इतिहासकार जब मुहम्‍मद बिन तुगलक से राजधानी दिल्ली से दौलताबाद ले जाने पर सवाल कर सकता है तो मोदी से सवाल क्यों नहीं ।   आज जो मोदी कर रहे हैं बिहार पिछले 15 वर्षो से देख रहा है जो तर्क आज मोदी दे रहे हैं वही तर्क नीतीश भी देते थे , हर सवाल करने वाले को इसी तरह हंसी में उड़ा देते थे। 

 देश कांग्रेस के कार्यकाल को भी देखा है ,समाजवादियों के कार्यकाल को भी देखा है और इन लोगों को भी देख रहा है। संसद भवन किसने बनवाया किसी को याद भी है ,इंडिया गेट कौन बनाया किसी को याद भी है लेकिन मायावती हाथी का पार्क बनाई है जब तक वो पार्क रहेगा लोगों को याद आता रहेगा कि लोकतंत्र में एक कोई  शासक हुआ था जिसे देख कर तुगलक भी शरमा जाये ।                   

नीतीश कुमार जब बिहार के मुख्यमंत्री बने तो जो काम आज मोदी कर रहे हैं ठीक उसी तरह से नीतीश कुमार ने भी बिहार में निर्माण का काम शुरु किये थे , पटना जंक्शन के सामने बुद्धा स्मृति पार्क बनाने का निर्णय लिया, उस समय बड़ी आलोचना हुई थी इतना बड़ा व्यावसायिक जगह पर पार्क बनाने का क्या औचित्य है वो भी बुद्धा से जुड़ा हुआ । किसी दिन मौका मिले तो दिन भर बुद्धा स्मृति पार्क के पास बैठिए देखिए वहां कौन कौन से लोग आते जाते हैं हाल यह है कि पार्क के रखरखाव में जो खर्च हो रहा है वो भी नहीं निकल पा रहा है ।               

इसी तरह पटना हाईकोर्ट के बाजू में जो पटना संग्रहालय बना है क्या कहेंगे आप ,दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय के सामने इसकी क्या औकात है कुछ भी नहीं है अब कह रहे हैं पुराने संग्रहालय से नये वाले संग्रहालय में आने के लिए अंदर अंदर रास्ता बनेगा ताकी संग्रहालय देखने वालो को कोई परेशानी ना हो कितना करोड़ खर्च होगा अंडरग्राउंड रास्ता बनाने में सोच लीजिए और इस संग्रहालय में है क्या जो देखने के लिए लोग आयेंगे।              

इससे बात आगे बढ़ी तो  विधानसभा बनवाये तर्क कुछ नहीं दिल्ली की संसद भवन के साथ साथ सारा कार्यालय रहेंगा। विधानसभा भवन में हो क्या रहा है चार वर्ष से मैं यही देख रहा हूं कि सत्र की शुरुआत इस नये वाले विधानसभा भवन से होता है शेष सभी कार्य पुराने वाले विधानसभा भवन में ही चल रहा है ।                             

 इस दौर के नेता का एक और पागलपन है मेरे ही कार्यकाल में काम पूरा हो जाये इस जिंद की वजह से इस तरह के हेरिटेज वाली भवन बनाने को लेकर जो तैयारी होनी चाहिए वो नहीं हो पा रहा है ,एक इंडिया गेट बनाने में दस वर्ष लगा था लेकिन बिहार विधानसभा का नया भवन छह वर्ष में बन कर तैयार हो गया नतीजा क्या हुआ भवन के ग्राउंड फ्लोर पर हमेशा जमीन के अंदर से पानी निकलता रहता है जब यह समस्या सामने आयी तो रुड़की की टीम इसके समाधान के लिए बुलाया गया तो पता चला जहां यह भवन बना है वहां कभी सोन नदी बहती थी इसका कोई समाधान नहीं निकल पाया, निर्माण इतना घटिया है कि आप बाथरूम नहीं जा सकते हैं हर जगह पानी का सिपेज आपको मिल जायेगा ।                                   

यही हाल बेली रोड में जो पुलिस मुख्यालय बना है 309 करोड़ खर्च आया है 2018 में उद्घाटन हुआ मौका मिले तो जा कर देख लीजिए तीन वर्ष में ही भवन का हाल बिगड़ने लगा है कही बाथरूम का पानी रिस रहा है तो कहीं बारिश का पानी टपक रहा है पचास से अधिक सफाई कर्मी रोजाना साफ सफाई में लगा रहता है ।कहा यह गया था कि पुलिस मुख्यालय भवन ऐसा बनाया जा रहा है कि भूकंप में पटना का रहा भवन भी गिर क्यों ना जाये पुलिस मुख्यालय को कुछ नहीं होगा और वही से राहत और बचाव कार्य का संचालन होगा क्यों कि पटना भूकंप के मामले में बहुत ही संवेदनशील इलाका है । इसके लिए पुलिस मुख्यालय के छत पर हेलीपैड बनाया गया है किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए लेकिन आज तक उसकी टेस्टिंग नहीं हुई है पक्का मानिए जिस दिन हेलीकॉप्टर लैंड किया क्या होगा आप सोच नहीं सकते हैं ।             

गांधी मैदान के सामने जो बापू सभागार बना है सरकारी कार्यक्रम के अलावे बहुत कम बुकिंग होता है हाल यह है कि उसके  मेंटेनेंस  का पैसा भी नहीं निकल पा रहा है ।इसी तरह सत्ता संभालते ही विधायक और विधान पार्षद के लिए नये आवास के निर्माण का फैसला लिया गया बाद में मोदी भी दिल्ली में सांसद के लिए नया भवन बनाने का निर्णय लिये ।मतलब आज जो शासक वर्ग है वो इस तरह निर्माण में काफी रुचि ले रहे हैं ऐसे में सवाल उठना लाजमी है राष्ट्रपति भवन से लेकर संसद भवन और इंडिया गेट के बीच जिस तरीके से मोदी निर्माण का काम करवा रहे हैं इसकी जरूरत क्या है पीएम के लिए नया आवास बन रहा है ,वार मेमोरियल जा कर देख लीजिए जो खूबसूरती इंडिया गेट और राजपथ के बीच है उसके सामने इस मेमोरियल का कोई वजूद समझ में नहीं आ रहा है नया संसद भवन का क्या औचित्य है ऐसे कई सवाल है जिसका जवाब मोदी,बीजेपी और संघ को देना ही पड़ेगा क्योंकि इस देश में जब गांधी की मूर्ति तोड़ी जा सकती है तो बाकी क्या बिसात है ।

जहरीली शराब पीने से छपरा में 14 लोगों की हुई मौत जॉच में जुटी पुलिस

सारण जिला में संदिग्ध परिस्थितियों में 14 लोगो की मौत की खबर मीडिया में आने के बाद छपरा परिसदन में बिहार के गृह सचिव के सेंथिल कुमार और एडीजी लॉ एंड ऑर्डर संजय सिंह के नेतृत्व में एक हाई लेबल मीटिंग हुई जिसमें सारण प्रक्षेत्र के कमिश्नर पूनम और डीआईजी सारण रविन्द्र कुमार के साथ एसपी सारण संतोष कुमार सहित जिला का सभी आलाधिकारी शामिल थे।

छपरा में जहरीली शराब से मौत मामले में जाँच शुरु

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर संजय सिंह ने बताया कि शराब से हुई संभावित मौत को लेकर यह बैठक थी जिसमें यह बात सामने आई है कि कुछ लोगो ने शराब का सेवन किया था लेकिन शवो का दाह संस्कार हो जाने के कारण सिर्फ चार लोगों का पोस्टमॉर्टम हो पाया है जिसकी रिपोर्ट का इंतज़ार किया जा रहा है।

सारण एसपी का बयान जॉच चल रही है दोषी बक्से नहीं जायेगें

वहीं एसपी सारण संतोष कुमार ने बताया कि 14 में से पाँच लोगो के शराब पीने से मौत की संभावना की बात सामने आई है वही अन्य लोगो की मौत बुढ़ापे बीमारी और बीमारी से होने की बात परिजनों ने बताया है। एसपी सारण ने कहा कि जागरूकता भी जरूरी है ताकि किसी के पास वैसा शराब हो तो उसे नष्ट कर दें या फेंक दें उसका सेवन ना करें।

बिहार विधनापरिषद के 24 सीटों को लेकर बीजेपी की दिल्ली में हुई बैठक बेनतीजा रहा

बिहार विधानपरिषद के 24 सीटों को लेकर आज दिल्ली में अमित शाह के घर बैठक हुए जहाँ एनडीए घटक दल के बीच सीट बटवारे को लेकर चर्चा हुई।

बिहार विधानपरिषद चुनाव में सीट बटवारे को लेकर एनडीए में नहीं बनी है सहमति

इस समय बिहार विधान पार्षद में बीजेपी का 13 और जदयू का 11 सदस्य है हालांकि बीजेपी 13 सीटों पर चुनाव लड़ना चाह रही वैसे गठबंधन के साथी हम ,लोजपा और भीआईपी भी विधान पार्षद का सीट चाह रहा है ऐसी स्थति में बीजेपी अपने कोटे से दो सीट गठबंधन के साथी लिए छोड़ सकती है

लोजपा सांसद चिराग पासवान का बड़ा बयान बिहार मध्यावधि चुनाव की तरफ बढ़ रहा है

पटना — जमुई सांसद चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने शुक्रवार को बड़ा बयान दिया. दिल्ली से पटना पहुंचने के बाद एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि बिहार में नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की मौजूदा सरकार कभी भी गिर सकती है. राज्य में मध्यावधि चुनाव होने के पूरे आसार हैं. खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी समाज सुधार यात्रा के बहाने चुनाव की तैयारी कर रहे हैं. बिहार एनडीए में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है।

बिहार मध्यावधि चुनाव की तरफ बढ़ रहा है

चिराग पासवान ने कहा, ” मुझे लगता है राज्य में एनडीए सरकार का जल्द ही पतन होने वाला है. बिहार में मध्यावधि होंगे ही. मेरा ऐसा मानना है. तथाकथित समाज सुधार यात्रा पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार निकले थे. इसकी कोई जरूरत नहीं थी. सभी जानते हैं कि मुख्यमंत्री ऐसी यात्रा पर तभी निकलते हैं, जब वो खुद चुनाव की तैयारियों में लगते हैं. हमने देखा है कि बड़ी-बड़ी घटना हो जाने पर भी मुख्यमंत्री बाहर नहीं जाते या किसी पीड़ित परिवार से मिलते हैं. तो उनकी इस यात्रा से स्पष्ट है कि वो चुनाव की तैयारी में लगे हुए हैं।

हालांकि इससे पहले नालंदा में जहरीली शराब पीने से मौत मामले में पीड़ित परिवारों से मिलने के बाद राज्यपाल से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कि थी ।

बिहार सरकार शराबबंदी कानून में संशोधन का लिया फैसला जल्द ही प्रारुप को दिया जायेंगा अंंतिम रुप

बिहार सरकार ने शराबबंदी कानून में संशोधन को तैयार हो गयी है इसके लिए महाधिवक्ता की अध्यक्षता में कानूनविदों की एक टीम को खास तौर पर जिम्मेवारी दी गयी है हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश की टिप्पणी के बाद आये दिन हाईकोर्ट द्वारा शराबबंदी कानून को लेकर प्रतिकुल टिप्पणी के साथ साथ सरकार के सहयोगी दल बीजेपी और विपंक्ष के हमले को देखते हुए सरकार ने शराबबंदी कानून 2018 में संशोधन का फैसला लिया है ।

1—2016 शराबबंदी कानून
2016 में जो शराबबंदी को सफल बनाने को लेकर कानून बनाया गया था उसमें शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने पर दस वर्ष से आजीवन कारावास तक की सजा व एक लाख से दस लाख तक जुर्माना। शराब के नशे में पाए जाने पर सात साल तक की सजा और एक से 10 लाख तक का जुर्माना। शराब के नशे में अपराध, उपद्रव या हिंसा की तो कम से कम दस वर्ष से लेकर आजीवन कारावास की सजा और एक लाख से दस लाख तक का जुर्माना।किसी परिसर या मकान में मादक द्रव्य या शराब बनाने, बरामद, उपभोग, बनाया, बिक्री या वितरण पर 18 वर्ष से अधिक उम्र वाले परिवार के सभी सदस्य जिम्मेवार माने जाएंगे जब तक वे अपने आप को निर्दोष होने का प्रमाणत न दे दें।

जहरीली शराब से मौत होने पर शराब बनाने वाले को मृत्यु दंड या आजीवन कारावास और दस लाख तक का जुर्माना। विकलांग होने पर ऐसे शराब बनाने वाले को दस वर्ष से आजीवन कारावास तक की सजा और दो से 10 लाख तक जुर्माना।आंशिक चोट आने पर आठ वर्षों से आजीवन कारावास तक की सजा और एक से दस लाख तक का जुर्माना।कोई हानि नहीं होने पर भी बनाने वाले को आठ से दस वर्ष तक की सजा और एक से पांच लाख तक का जुर्माना।कपट व छद्म तरीके से शराब का कारोबार करने पर दस वर्ष से आजीवन कारावास तक की सजा और एक से दस लाख तक का जुर्माना।अवैध तरीके से शराब का भंडारण करने पर आठ से दस वर्ष तक की सजा और दस लाख तक का जुर्माना। अवैध शराब व्यापार में महिला या नाबालिग को लगाया तो दस वर्ष से आजीवन कारावास तक की सजा और एक लाख से दस लाख तक का जुर्माना। कोई व्यक्ति, वाहन या परिवहन के अन्य साधनों के माध्यम से इस कानून का उल्लंघन किया तो बिना वारंट के दिन-रात कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है। लेकिन गिरफ्तारी की सूचना डीएम को देनी होगी। इस अधिनियम के अधीन सभी अपराध संज्ञेय और गैर जमानती होंगे।

2–2018 शराबबंदी कानून
2018 में नीतीश सरकार 2016 के शराबबंदी कानून में संशोधन करते हुए शराब पीते हुए गिरफ्तार होने पर जेल भेजने कि छूट दे दी थी संशोधित कानून के अनुसार शराब पीते पहली बार पकड़े जाने पर 50,000 रुपये जुर्माना देना होगा या तीन महीने की जेल होगी। दूसरी बार पकड़े जाने पर एक लाख का जुर्माना अथवा छह महीने की सजा होगी। दो से अधिक बार पकड़े जाने पर जुर्माना और सजा की अवधि दोगुनी होती जाएगी।

वही मकान-वाहन की जब्ती के कानून में भी संशोधन कर दिया था उसके अनुसार जिस कमरे से शराब बरामद होगा अब उसी कमरे को सील किया जायेंगा है, पूरे परिसर को सील नहीं करना है ।लेकिन जब बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय बने तो शराबबंदी को लेकर जिले जिले में जागरुकता अभियान चलाना शुरु किये थे उसी दौरान उन्होंने पुलिस मुख्यालय की और से एक मौखिक आदेश जारी किया जिसमें 2018 में शराबबंदी कानून में जो संशोधन किया गया था जिसमें धारा 37 बी के तहत पहली बार पकड़े जाने पर 50,000 रुपये जुर्माना देना होगा या तीन महीने की जेल होगी। दूसरी बार पकड़े जाने पर एक लाख का जुर्माना अथवा छह महीने की सजा होगी। दो से अधिक बार पकड़े जाने पर जुर्माना और सजा की अवधि दोगुनी होती जाएगी।

डीजीपी ने इस धारा के तहत गिरफ्तारी करने पर रोक लगा दिया और सभी एसपी को कहां कि जो भी थानेदार ये धारा लगायेगा उसको संस्पेड करना है और इस निर्देश के बाद बिहार में फिर जितनी भी गिरफ्तारी हुई उसमें धारा 37 सी लगाया जाने लगा जिसमें शराब पीकर उपद्रव फैलाने का आरोप पुलिस द्वारा निर्धारित किया जाना है हालांकि इस धारा के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को भी कोर्ट दो से तीन दिन में जमानत दे देता है।

ये हैं संशोधन के प्रमुख प्रस्ताव:
शराब पीते अब कोई भी गिरफ्तार होगा तो सभी को धारा 37 के तहत समरी ट्रायल का प्रावधान होगा जिसके तहत गिरफ्तार व्यक्ति को दंडाधिकारी सरकार द्वारा निर्धारित जुर्माना के तहत जुर्माना करेगे और गिरफ्तार व्यक्ति जुर्माना देकर छुट जायेंगा जैसे परीक्षा के दौरान छात्र और अभिभावक के गिरफ्तारी पर दंडाधिकारी जुर्माना निर्धारित करते हैं और छात्र और अभिभावक जुर्माना जमा कर छुट जाता है ।इस प्रक्रिया में ट्रायल का कोई भी प्रावाधान नहीं होता है इसी तरह शराब पीते गिरफ्तार होने पर पहली बार कितना जर्माना लगेगा और कितने बार पकड़े जाने पर जमानता का प्रावधान नहीं रहेगा इस पर मंथन चल रहा है इसी समय शराब पीते गिरफ्तार होने पर 50 हजार रुपया जुर्माना है इसे कम करके पहली बार गिरफ्तार होने पर हजार रुपया करने पर विचार चल रहा है ।

धारा 55 को हटाया जाएगा। इसे हटाने पर सरकार कोर्ट में चल रहे लाखों मामलों को वापस ले सकती है अदालतों के अंदर या बाहर दो पक्षों के बीच समझौता हो सकता है।साथ ही धारा 57 को शामिल किया जाएगा ताकि शराब ले जाने के लिए जब्त किए गए वाहनों को जुर्माने के भुगतान पर छोड़ने की अनुमति दी जा सके।

प्रथम राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली जीरादेई और वहां उनके स्मारक की दुर्दशा के मामलें पर सुनवाई कल तक टली

पटना हाईकोर्ट में देश के प्रथम राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली जीरादेई और वहां उनके स्मारक की दुर्दशा के मामलें पर सुनवाई कल तक टली।चीफ जस्टिस संजय करोल की डिवीजन बेंच विकास कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

पिछली सुनवाई में डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार ( आर्केलोजिकल् सर्वे ऑफ इंडिया) को 21 जनवरी,2022 तक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।

पिछली सुनवाई में कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से जवाब दायर किया गया था।कोर्ट को इसमें जानकारी दी गई कि राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 10 जनवरी,2022 को एक उच्च स्तरीय बैठक हुई।इसमें सम्बंधित विभाग के अपर प्रधान सचिव सहित अन्य वरीय अधिकारी बैठक में उपस्थित थे, जिनमें पटना और सीवान के डी एम भी शामिल थे।

इसमें कई तरह के जीरादेई में विकास कार्य के साथ पटना में स्थित बांसघाट स्थित डा राजेंद्र प्रसाद की समाधि स्थल और सदाकत आश्रम की स्थिति सुधारें जाने पर विचार तथा निर्णय लिया गया।

इस बैठक में जीरादेई गांव से दो किलोमीटर दूर रेलवे क्रासिंग के ऊपर फ्लाईओवर निर्माण पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया।
साथ ही राजेंद्र बाबू के पैतृक घर और उसके आस पास के क्षेत्र के विकास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध
के लिए कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया।

हाईकोर्ट ने इससे पहले अधिवक्ता निर्विकार की अध्यक्षता में वकीलों की तीन सदस्यीय कमिटी गठित की थी।कोर्ट ने इस समिति को इन स्मारकों के हालात का जायजा ले कर कोर्ट को रिपोर्ट करने का आदेश दिया था।

इस वकीलों की कमिटी ने जीरादेई के डा राजेंद्र प्रसाद की पुश्तैनी घर का जर्जर हालत, वहां बुनियादी सुविधाओं की कमी और विकास में पीछे रह जाने की बात अपनी रिपोर्ट में बताई।साथ ही पटना के बांसघाट स्थित उनके समाधि स्थल पर गन्दगी और रखरखाव की स्थिति भी असंतोषजनक पाया।वहां काफी गन्दगी पायी गई और सफाई व्यवस्था, रोशनी आदि की खासी कमी थी।

इस मामलें पर अब अगली सुनवाई 22 जनवरी,2022 को होगी।

मैं बिहार पुलिस हूं मुझे आपको अपमानित करने का अधिकार है

ये बिहार है भाई यहां सब कुछ हो सकता है आप क्या है, आपकी पहचान क्या ,आपका देश और समाज में योगदान क्या है । उससे कोई मतलब नहीं रखता है मैं बिहार पुलिस हू मुझे आपको अपमानित करने का लाइसेन्स मिला हुआ है । जी हां इस बार यह मौका मुजफ्फरपुर पुलिस पुलिस को मिला है जहां टाउन थाना पर पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के फैन सुधीर कुमार की एक पुलिसकर्मी ने पिटाई कर दी। सुधीर ने जिस टाउन थाना का उद्घाटन चीफ गेस्ट बनकर किया था, उसकी थाने के एक मुंशी ने उन्हें गाली दी और फिर मारने के लिए हाथ उठाया। यह था पूरा मामला क्या है ।

मुजफ्फरपुर टाउन थाना की पुलिस ने उनके चचेरे भाई किशन कुमार को हिरासत में लिया था। जब शाम को सुधीर दामोदरपुर अपने आवास पर पहुंचे तो उन्हें घरवालों ने इसकी जानकारी दी। बताया कि पुलिस ने किशन को उठा लिया है, लेकिन, क्या मामला है इस बारे में नहीं बता रहे हैं।

भाई को हवालात में कर रखा था बन्द
सुधीर भागते हुए टाउन थाना पहुंचे। देखा कि उनका भाई हवालात में बंद है। वे उससे पूछने लगे कि किस मामले में उठाया है। उसने बताया कि उसके एक दोस्त में जमीन खरीदा था। जमीन खरीदने में उसका नाम गवाह के रूप में दिया हुआ था। शायद उस जमीन को लेकर कुछ लफड़ा हुआ था। उसी में एक पक्ष ने FIR दर्ज कराया था। जबकि इसके बारे में उसे कुछ जानकारी भी नहीं है। फिर भी पुलिस उसे पकड़ कर ले आयी है।

…और मुंशी ने गाली देना शुरू कर दिया
सुधीर अपने भाई से बात कर रहे थे। तभी एक मुंशी गुस्से में सरिस्ता से बाहर निकले और विवाद करने लगे, फिर उन्होंने गाली देना शुरू कर दिया। जब सुधीर ने इसका विरोध किया तो उनके साथ थाना पर मारपीट की। इसके बाद सुधीर वहां से चुपचाप बाहर निकल गए। फिर DSP से शिकायत की।

सेलिब्रिटी बनकर किया था उद्घाटन
सुधीर ने कहा कि यह मेरा दुर्भाग्य है कि आज से कुछ साल पहले जब यह थाना भवन नया बना था। उस समय उन्हें सेलिब्रिटी के तौर पर उद्घाटन करने के लिए बुलाया गया था। उन्होंने फीता काटकर इसका उद्घाटन भी किया था। लेकिन, आज उसी थाना पर उनके साथ मारपीट की गई है। जब मेरे साथ इस तरह की घटना हो सकती है, तो आम जनता के साथ पुलिस कैसे पेश आती होगी। ये समझा जा सकता है।

बिहार विधान परिषद के बने रहने का औचित्य क्या है

बिहार विधान परिषद के बने रहने का औचित्य क्या है
सवाल लोकतंत्र का है ,सवाल जनता के मेहनत के पैसे का है ,ऐसे में सवाल तो बनता है कि बिहार में बिहार विधान परिषद के गठन का मतलब क्या है, जी है बिहार विधान परिषद में कुल सदस्यों की संख्या 75 है जिसमें 27 सदस्यों को बिहार विधान सभा के सदस्य चुनते हैं। 24 सदस्य स्थानीय निकायों(पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा चूने जाते हैं,शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से 6 और स्नातक क्षेत्र से 6 चुनाव जीत करके आते हैं और राज्यपाल कोटा से 12 लोगों का मनोनयन होता है।

काम क्या है विधानसभा में जो बिल पास होगा उस पर चर्चा करना और उस पर मोहर लगाना,विधानसभा में जिसका बहुमत होगा स्वाभाविक है विधानसभा सदस्यों द्वारा चुने गये 27 सदस्यों में से अधिक संख्या उन्हीं का होगा फिर राज्यपाल द्वारा जिन 12 विशिष्ठ व्यक्तियों का मनोनयन होता है वह भी सरकार जिसका नाम राज्यपाल को भेजता है उसी पर राज्यपाल को मोहर लगाना है ।मतलब सरकार का हमेशा बहुमत बना रहता है ।

संविधान कहता है कि राज्य के साहित्य, कला, सहकारिता, विज्ञान और समाज सेवा का विशेष ज्ञान अथवा व्यावहारिक अनुभव रखते हैं उनको विधान परिषद में भेजना है, हो क्या रहा है इस बार राज्यपाल जिन 12 लोगों को मनोनीत क्या है उसमें कौन से ऐसे लोग हैं जिसकी योग्यता संविधान द्वारा निर्धारित मानदंडों पर खड़े उतर रहा है। इस बार बिहार में राज्यपाल कोटे से जिन्हें मनोनीत किया है उनमें दो राज्य सरकार के कैबिनेट में मंत्री हैं. बीजेपी ने जिन छह चेहरों को विधान परिषद सदस्य बनाया है उनमें प्रमोद कुमार, घनश्याम ठाकुर, जनक राम, राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, देवेश कुमार और निवेदिता सिंह बीजेपी पार्टी से सक्रिय तोड़ पर जुड़ी हुई हैं।

वहीं जेडीयू ने उपेंद्र कुशवाहा, संजय गांधी, ललन सर्राफ, रामबचन राय, अशोक चौधरी और संजय सिंह को विधान परिषद सदस्य बनाया है ये सारे के सारे चुनावी राजनीति में सक्रिय रहे हैं मतलब संविधान में राज्यपाल कोटा से मनोनयन का लेकर जो विचार रखा गया उस विचार पर कहीं से कोई खड़ा नहीं उतर रहा है।

बात स्थानीय निकायों(पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा),चुने गये 24 सदस्यों का कर लेते हैं इनका क्या काम है ये पंचायत चुनाव जीत कर आये प्रतिनिधियों का विधान परिषद में प्रतिनिधित्व करते हैं इन महाशय के कार्यकाल पर गौर करेंगे तो ब-मुश्किल पूरे कार्यकाल के दौरान एक दो सवाल पंचायत सरकार से जुड़ा हुआ है और फिर कैसे लोग चुन कर आ रहे हैं देख ही रहे हैं किस तरह से पैसे का खेल चलता है ,ऐसे में इन 24 सदस्यों के चुने जाने के मतलब क्या है जबकि पंचायत अपने आप में स्वतंत्र इकाई है ।

बिहार में स्नातक पास वोटर द्वारा चुने गये 6 प्रतिनिधियों की बात कर तो ये किसके प्रति जिम्मेवार है कभी तो नहीं देखा की बेरोजगारी ,नौकरी और पढ़ाई व्यवस्था पर ये लोग अलग से अपनी बात सदन में रखते हो इसके लिए सरकार पर दबाव बनाते हो ।

इसी तरह 6 प्रतिनिधि शिक्षक द्वारा चुन कर आते हैं इनका क्या काम है पिछले 30 वर्षो का सदन का इतिहास देख लीजिए ये जो प्रतिनिधि हैं अपने वोटर के साथ कभी खड़े दिखे हैं इनकी हैसियत यही है कि सरकार के साथ हां में हां मिलाये नहीं तो कोई पुछने वाला नहीं है जब सब कुछ सरकार के अनुसार ही चलनी है तो फिर विधान परिषद और विधान परिषद के कमिटी का मतलब क्या है ।

हर वर्ष विधानपरिषद सदस्यों के वेतन ,भत्ता ,इलाज ,यात्रा और अन्य सुख सुविधा के अलावे इस्टेब्लिश्मन्ट और विधान पार्षद विकास निधि की बात करे तो हर वर्ष तीन करौड़ के करीब खर्च होता है, इस खर्च का मतलब क्या है ।

वही विधान परिषद सदस्य बनने को लेकर जो खेल चलता है ऐसे में आप अपर हाउस से क्या उम्मीद कर सकते हैं अपर हाउस का गठन लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गये प्रतिनिधियों के मनमानी को रोकने के लिए किया गया था वहां पढ़े लिखे लोग चुन कर जायेंगे तो विधानसभा के कामकाज का समीक्षा करेंगे लेकिन हो क्या रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि इस संस्थान के रहने का मतलब क्या है जनता के पैसे पर मौज मस्ती और जनप्रतिनिधि के रुप जो विशेषाधिकार मिला हुआ है उसका दुरउपयोग करना ।

विधुत उपभोगता को लूट रही है कंपनी -होईकोर्ट

पटना हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में बिहार सरकार की ऊर्जा विभाग और उत्तर व दक्षिण बिहार विद्युत वितरण कम्पनियों को निर्देश दिया है कि तीन हफ्ते के अंदर पूरे राज्य में विद्युत उपभोक्ताओं के शिकायतों के निवारण के लिए फोरम की स्थापना करें।

चीफ जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एस कुमार की खण्डपीठ ने राज्य में इलेक्ट्रोनिक बिजली मीटर की जांच कराने हेतु दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया है।

खण्डपीठ ने यह आदेश बिहार विद्युत (संशोधन ) नियमावली 2020 के अंतर्गत विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम को अनिवार्यतः स्थापित करने के प्रावधान के अंतर्गत दिया है।साथ ही कोर्ट ने तीन हफ्ते बाद इस मामले में प्रगति रिपोर्ट भी तलब किया है ।

इस मामले पर अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी ।

सुप्रीमकोर्ट ने निकाय चुनाव के लिए विशेष आयोग के शीघ्र गठन का दिया निर्देश

निकाय चुनाव के लिए विशेष आयोग शीघ्र गठित करे बिहार सरकार

ट्रिपल टेस्ट के बाद ही पिछड़ा आरक्षण – सुशील कुमार मोदी

  1. नगर निकाय चुनाव में आरक्षण देने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले को देखते हुए बिहार सरकार को तुरंत एक विशेष आयोग का गठन करना चाहिए।
    यदि इसमें देर हुई तो अप्रैल-मई में सम्भावित निकाय चुनाव नहीं कराये जा सकेंगे।

  1. सुप्रीम ने कहा है कि राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष आयोग ट्रिपल टेस्ट के आधार पर यह तय करेगा कि किस नगर निकाय में किस जाति को कितना आरक्षण दिया जाना है।
    कोर्ट के इस आदेश का पालन नहीं होने के कारण मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव में पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने पर रोक लग चुकी है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने बिहार सरकार के नगर विकास विभाग को पत्र लिखकर अविलंब कदम उठाने का सुझाव दिया है।

मेरा गांव ही मेरी पहचाान है -पूर्व मुख्यसचिव अंजनी सिंह

बिहार के पूर्व मुख्यसचिव अंजनी सिंह की जुबानी गांव से जेएनयू तक का सफर

वैसे तो मेरा जन्म 1958 में सीवान जिला के रघुनाथपुर के पुलिस क्वार्टर में हुआ लेकिन पूरा बचपन पैतृक गॉंव चमथा में बीता। पिताजी स्व. रामराज सिंह पुलिस अफसर थे और मेरे जन्म के समय रघुनाथ पुर में पोस्टेड थे। माँ शिवदुलारी देवी गृहिणी महिला थीं। मैं चार भाई और एक बहन में दूसरे नंबर पर था। बड़े भाई अश्विनी कुमार सिंह गाँव में खेती करते थे, जो अब नहीं रहे। हमलोगों का संयुक्त परिवार था। पिताजी तीन भाई थे। दो भाई गाँव में रहते थे। हमारे घर में आज के हिसाब से एक अजीब नियम था। बच्चे अपने चाचा के साथ रहते और पढ़ते थे, माता-पिता के साथ नहीं। इस कारण परिवार में बहुत प्रेम था, इसी नियम के कारण मेरे माता-पिता के शहरों में रहने के बावजूद हम अपने गाँव में चाचाओं के साथ रहते थे। अपने बच्चों के लिए अधिक प्यार दिखाना या प्यार करना सही नहीं माना जाता था।

सबसे बड़े चाचा, जिन्हें सबलोग बाबूजी कहते थे, घर के मालिक थे। पैसे का हिसाब-किताब दूसरे वाले चाचा, जिन्हें सब लोग दादा कहते थे, रखते थे। दूसरे वाले चाचा के लड़के मेरे पिता जी, जिन्हें सब लोग लाला कहते थे, के यहाँ रहते और पढ़ते थे। संयुक्त परिवार होने के कारण बच्चों की अच्छी संख्या थी।

हमलोगों के घर में अस्त्र-शस्त्र चलाने की और सही उम्र में सीखने की परंपरा थी। उस समय प्राय: चिड़ियों का शिकार होता था और उसी से हमलोग निशानेबाजी सीखते। बड़े लोगों की पहचान जमीन की मात्रा और अस्त्र-शस्त्र की संख्या से होती थी। हमलोग का परिवार गाँव के दस बड़े और धनी परिवारों में से एक था। मेरे दो चचेरे भाई मुझसे पहले नौकरी में आये। उनमें से एक ने मेरे पिता की मृत्यु के बाद मेरे कॉलेज के दिनों में मेरी आर्थिक सहायता भी की।

हमारे स्कूल के अधिकांश बच्चों ने बड़े शहर नहीं देखे थे और न ही ट्रेन आदि की यात्रा की थी। पिताजी पुलिस महकमे में थे और उनकी पोस्टिंग शहरों में हुआ करती थी। मैं छुट्टियों में अपने पिता के यहाँ चला जाता, इसलिए हम रेलगाड़ी, कार आदि से घूम चुके थे। छुट्टी में जब पिताजी के पास जाता तो माँ बड़े मन से हमारे लिए खस्सी बनाती। शहर जाने पर बहुत सारे फिल्में देखता। छुट्टी के बाद लौटकर उन फिल्मों की कहानियाँ और गीत सहपाठियों को बहुत इतराते हुए सुनाता।

पिताजी से जुड़ी कई यादें हैं। हमलोग अपने पिताजी से सीधे बात नहीं करते थे, या यों कहें, आँख मिलाकर बातें नहीं करते थे। जो भी कहना होता था, माँ के माध्यम से होता था या किसी दोस्त के मार्फत। जबतक वे बुलाते नहीं थे, हम उनके पास नहीं जाते थे। वे खाने के बाद सिगरेट पीते, लेकिन मुझे सिगरेट की गंध बिल्कुल पसंद नहीं थी। अभी भी नहीं है। वे शाकाहारी हो गये थे, लेकिन कोई भी उनके साथ मेज पर मांस खा सकता था। वे वॉलीबॉल के अच्छे खिलाड़ी थे। डीलडौल भी लंबा चौड़ा। मुझे उनके साथ भी खेलने का मौका मिलता था। एक बार की बात है। हमलोग वॉलीबॉल खेल रहे थे। अभी दस-पंद्रह मिनट का खेल बाकी था। थाने पर एसपी साहब आ गये। पिताजी खेलते रहे। गेम पूरा होने के बाद ही वे एसपी साहब से रू-ब-रू हुए।
जब पिताजी रेलवे में इंस्पेक्टर थे, तब पहली बार मुझे दानापुर-हावड़ा ट्रेन में एसी फर्स्ट क्लास में यात्रा का अवसर मिला। वे शंकर भगवान के भक्त थे। जहाँ भी गये, मंदिर बनवाया। बाँका और कहलगाँव में भी मंदिर बनवाया। मुजफ्फरपुर में पोस्टेड थे, तब गरीब स्थान जाते थे। वहाँ पास में मजार पर भी जाते थे। वे धार्मिक तो थे लेकिन कर्मकांडी नहीं थे। प्राय: शाम में मंदिर जाकर ध्यान किया करते थे।

एक बार की बात है। मेरे बड़े भाई साहब कक्षा में फेल हो गये। उन्हें पढ़ने में मन नहीं लगता था। कोई और अभिभावक होते तो उस दिन उनकी कुटाई-पिटाई हो सकती थी। लेकिन पिताजी ने हौसला बढ़ाने के लिए एक मशहूर शेर कहा—
‘गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में. वो तिफ्ल क्या गिरेगा जो घुटने के बल चले।’

पिताजी बहुत उदार स्वभाव के थे। गरीबों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते थे। मुझे याद है, हमारे आवास पर एक लड़का रहता था। वह पढ़ने में अच्छा था, लेकिन अत्यंत गरीब परिवार से था। उसके पिता दूध बेचकर किसी तरह गुजर-बसर करते थे। मेरे पिताजी ने उसकी पढ़ाई पूरी करने में मदद की। बाद में वह लड़का ऑडिट ऑफिसर बना।
यादें पटना कॉलेज की और जेपी मूवमेंट की

गाँव से मैट्रिक करने के बाद पटना कॉलेज में दाखिले के लिए आवेदन किया। पटना कॉलेज में इंटरमीडियट कोर्स में नामांकन लिया। मुझे वह दिन याद है, जब मैं पहले दिन कॉलेज में प्रवेश किया। एडमिशन लिस्ट और क्लास रूटिन एक साथ टंगे थे। पहले दिन ही पाँच-छह दोस्त बन गये, जो आखिर तक बने रहे। पटना कॉलेज कला संकाय का एक प्रतिष्ठित कॉलेज था। बिहार के बेस्ट स्टूडेंट यहाँ दाखिला पाते थे। दीवारों पर लिखा था, ”बिहार में जो भी श्रेष्ठ है, वह पटना कॉलेज का है।” हम इसे पढ़ते और गर्व से भर जाते। हम उस पटना विश्वविद्यालय में थे, जो कभी ईस्ट का ऑक्सफोर्ड कहा जाता था। मेरे लिए जैक्सन हॉस्टल में कमरा एलॉट हुआ।

जैक्सन छात्रावास में अभियान को गति देने के लिए बैठकें होतीं और समाज के अन्य वर्ग से संपर्क कर उन्हें इस अभियान का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया जाता। एक दिन तय हुआ कि छात्रावास के सभी लोग अपने-अपने गाँव जायेंगे और गाँव के आसपास के क्षेत्रों के लोगों को संपूर्ण क्रांति से जोड़ेंगे। आगे की पढ़ाई जारी रही और 1980 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में चयन हुआ और बिहार कैडर भी मिला। नौकरी के दौरान गाँव आना-जाना तो कम ही हुआ, लेकिन गाँव हमेशा जेहन में बना रहा है। जहाँ भी रहा वहाँ गाँव के साथ अपने रिश्तों को जीता रहा और गाँव की तरक्की में अपने हिस्से की जवाबदारी निभाने की कोशिश रही।

ये कैसा लोकतंत्र जहां वोटर की खुल्लम खुल्ला लग रही है बोली

बिहार विधान परिषद के 24 सीटों के मतदान की तिथि इस माह के अंत तक घोषित हो जायेगी मतदाता सूची को  अंतिम रूप दिया जा रहा है और इस बार चुनाव आयोग मतदान के दौरान बाहुबल और धनबल को रोकने के लिए मतदाता सूची  बनाने के दौरान ही वोटर साक्षर है या निरक्षर है यह अंकित करने का आदेश जिला निर्वाचन पदाधिकारी को दिया है।            

पिछले चुनाव तक हो यह रहा था कि वोटर जिस उम्मीदवार से पैसा लेता था उसके आदमी के साथ वोट गिराने जाता था यह कह कर के की मैं साक्षर नहीं हूं और मुझे वोटिंग करने के लिए एक सहयोगी की जरूरत है इस आड़ में बड़ा खेल होता था जो प्रत्याशी जिस वोटर का वोट खरीदता था उसके साथ अपने एक सहयोगी को लगा देता था और वो सहयोगी वोट पर  वरीयता  के अनुसार चिन्ह लगाकर  डाल देता था लेकिन इस बार आयोग पहले ही सतर्क है। 

1—बिहार विधान परिषद के स्थानीय निकाय प्राधिकार निर्वाचन चुनाव में कौन कौन होते हैं वोटर हालांकि इस बार स्थानीय निकाय प्राधिकार निर्वाचन चुनाव के वोटर के रूप में पंच और सरपंच को भी जोड़ने की वकालत राजनीतिक दलों द्वारा किया गया लेकिन अब लगता नहीं है कि उनका नाम शामिल किया जाएगा क्योंकि आयोग मतदाता सूची को अंतिम रूप देने जा रही है।इस तरह इस बार भी मुखिया, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य सदस्य ही स्थानीय निकाय प्राधिकरण के उम्मीदवार को वोट करेंगे राज्य में मुखिया 8387, वार्ड सदस्य के 1,14,667और पंचायत समिति सदस्य 11,491 और जिला परिषद सदस्य के 1161 है सदस्य है जो 24 स्थानीय निकाय प्राधिकरण के द्वारा विधान परिषद सदस्य का चुनाव करेंगे।

2—दस हजार दे एक वोट ले
इस बार के चुनाव में जो भी पंचायत प्रतिनिधि चुनाव जीत कर आये हैं उनमें से अधिकांश लाखों में खर्च किये हैं पिछले चुनाव तक वार्ड सदस्य के पद पर चुनाव लड़ने वाला दूर दूर तक दिखायी नहीं दे रहे थे, मुखिया ढूंढ ढूंढ कर प्रत्याशी लाते थे फिर भी वार्ड सदस्यों का हजारों पद रिक्त रह जाता था ।

लेकिन हर घर जल योजना को वार्ड सदस्य के साथ जोड़ने के कारण इस बार मुखिया से ज्यादा वार्ड सदस्य के लिए मारामारी रहा है  एक एक वार्ड सदस्य चुनाव जीतने के लिए लाखों में खर्च किये हैं और यही वजह है कि विधान परिषद  चुनाव की घोषणा से पहले ही वार्ड सदस्य अपनी कीमत घोषित कर दिया है दूसरी वजह यह है कि इस बार हर जिले में शराब माफिया ,जमीन का अवैध कारोबारी और ठेकेदार जैसे मिडिल ऑर्डर के उम्मीदवार पहले से मैदान में मौजूद हैं जो शुरुआत में ही एक वोट की कीमत पांच हजार से सात हजार रुपया तक  तय कर दिया है उत्तर बिहार के एक जिले में तो एक वोट की कीमत पचास हजार रुपया तक चला गया है वही समस्तीपुर में एक उम्मीदवार ऐसा है  पत्नी मुखिया है बहन प्रखंड प्रमुख भाभी जिला परिषद अध्यक्ष और खुद विधान परिषद का चुनाव लड़ने जा रहा है ये स्थिति है ।                            

 पंचायत चुनाव लिमिटेड कंपनी की तरह काम कर रहा है कितना निवेश करना है और कितना आ सकता है इसको लेकर जिला की योजनाओं पर काम करने वाला ठेकेदार सलाहकार बना हुआ है ।             

 बिहार के राजनीतिक दल भी इस चुनाव को एक तरह का लॉटरी ही मान रहा है और वो भी तय नहीं कर पा रहा है कि एक टिकट के बदले उम्मीदवारों से कितना पैसा लिया जाये अभी तक तीन करोड़ रुपया अधिकतम बोली सूबे के एक बाहुबली द्वारा लगाया गया है हालांकि पहली बार ऐसा देखा जा रहा है कि बाहुबली और धनबली के मैदान में आने से राजनीतिक दल पेशोपेश में है वही कई पूर्व विधान पार्षद चुनाव लड़ने से हाथ खड़ा कर दिया है  2015 के चुनाव में औरंगाबाद स्थानीय प्राधिकार से विधान परिषद के लिए चुने गए राजन कुमार सिंह इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे बातचीत में स्वीकार किया कि जिस तरीके से वोटिंग ट्रेंड दिख रहा है ऐसे में चुनाव लड़ना मुश्किल है,वही बातचीत में कई पूर्व विधान पार्षद भी चुनाव लड़ने के मूड में नहीं दिख रहा है ।

बिहार में शराब, शराब माफिया और पुलिस की मिलीभगत से बिक रहा है -हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में शराबबंदी के बाद भी हर दिन बड़ी मात्रा में विभिन्न श्रोतों से लगातार शराब की बरामदगी पर कड़ी टिप्पणी की। जस्टिस संदीप कुमार ने गंगाराम की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी किया कि ये स्थिति क्यों नहीं पुलिस और शराब कारोबारियों के बीच मिलीभगत माना जाए।

कोर्ट ने सरकार की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुते कहा कि कोर्ट यह क्यों नही माने को शराब के अवैध व्यापार का नेटवर्क चलाने वाले माफिया का पुलिस के साथ साठगांठ है ?

कोर्ट ने उत्पाद आयुक्त सह आई जी,उत्पाद अधिकारियों और पुलिस के अधिकारियों से जवाब तलब किया हैं।कोर्ट ने ये भी बताने को कहा कि अब तक राज्य में शराबबंदी में कितने आपूर्तिकर्ता या माफिया को पकड़ा गया और क्या कार्रवाई की गई है ।

हाई कोर्ट ने कहा कि करीब एक साल पुराने मामले में आरोपी अग्रिम जमानत मांग रहा है। पुलिस इसे नही पकड़ पाई है ,तो उन माफियाओं न जाने कितने साल से नही पकड़ पा रही होगी ,जिनके व्यापारिक नेटवर्क के जरिये शराब का अवैध व्यापार होता है।

इस अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए एपीपी झारखंडी उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि पुलिस सेशल टास्क फोर्स गठित कर शराबबंदी को तोड़ने वालों पर लगाम लगा रही है ।

मामले की अगली सुनवाई एक हफ्ते बाद होगी ।

हाईकोर्ट से लॉ कॉलेज के छात्रों को मिलीं राहत

पटना हाईकोर्ट ने बीसीआई के अनुमति /अनापत्ति प्रमाण पत्र के आलोक में सिर्फ 2021-22 की सत्र के लिए 17 लॉ कॉलेजों में दाखिले के लिए मंजूरी दी है। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने कुणाल कौशल की जनहित याचिका पर सुनवाई की।इन कालेजों में पटना स्थित चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी , पटना लॉ कॉलेज , कॉलेज ऑफ कॉमर्स , सहित
आरपीएस लॉ कॉलेज , के के लॉ कॉलेज बिहारशरीफ नालन्दा , जुबली लॉ कॉलेज और रघुनाथ पांडे लॉ कॉलेज मुजफ्फरफुर सहित अन्य लॉ कॉलेज हैं, जिनका नाम 17 कॉलेजों / विश्वविद्यालय के इस सूची में शामिल है ।

हाई कोर्ट ने , 23 मार्च 2021 के उस आदेश , जिसके अंतर्गत बिहार के सभी 27 सरकारी व निजी लॉ कॉलेजों में नए दाखिले पर रोक लगा दी गयी थी। इस आदेश में कोर्ट ने आंशिक संशोधन करते हुए इन 17 कॉलेजों में सशर्त दाखिले की मंजूरी दे दी । हाई कोर्ट ने साफ किया कि नया दाखिला सिर्फ 2021-22 के लिए ही होगा। अगले साल के सत्र के लिए बार काउंसिल से फिर मंजूरी लेनी होगी ।

पिछली सुनवाइयों में कोर्ट ने इन कालेजों का निरीक्षण कर बार काउंसिल ऑफ इंडिया को तीन सप्ताह में रिपोर्ट देने का आदेश दिया था।कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि जिन लॉ कालेजों को पढ़ाई जारी करने की अनुमति दी गई थी, वहां की व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं को भी देखा जाए।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया को यह भी देखना था कि विधि शिक्षा,2008 के नियमों का इन शिक्षण संस्थानों में पालन किया जा रहा है या नहीं।साथ ही इन लॉ कालेजों में पुनः पढ़ाई जारी करने की अनुमति देते हुए नियमों में बार काउंसिल ऑफ इंडिया किसी तरह की ढील नहीं देगी।

कोर्ट के आज के इस आदेश से लॉ कॉलेज में नामांकन के लिए इंतजार कर रहे छात्रों को काफी राहत मिलेगी।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार, राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से अधिवक्ता विश्वजीत कुमार मिश्रा ने सुनवाई के दौरान पक्षों को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया।

पटना मुजफ्फरपुर फोरलेन अतिक्रमण मुक्त करे प्रशासन

पटना हाई कोर्ट ने राज्य के विभिन्न नेशनल हाईवे के निर्माण व रखरखाव के मामले पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ के समक्ष इन मामलों पर सुनवाई के दौरान हाजीपुर – मुजफ्फरपुर एन एच – 77 के मामले में डी एम, वैशाली ने हलफनामा दायर किया।

कोर्ट को इसमें बताया गया है कि रामाशीष चौक से अतिक्रमण पूरी तरह से हटा दिया गया है। साथ ही बस स्टैंड को शिफ्ट करने के लिए नगर परिषद को लिखा गया था, किन्तु दो बार टेंडर निकालने के बावजूद भी कोई उपस्थित नहीं हुआ। इसलिए राज्य सरकार के नगर विकास विभाग को जमीन अधिग्रहण करने हेतु लिखा गया है।

यह भी बताया गया कि है पहले भी अतिक्रमण हटा दिया गया था, लेकिन एन एच ए आई द्वारा निर्माण नहीं किये जाने की वजह से दोबारा अतिक्रमण हो गया था।

पुलिस अधीक्षक ने यह भी आदेश देकर पुलिस बल को तैनात कर दिया है कि रामाशीष चौक से बी एस एन एल गोलंबर तक किसी तरह की पार्किंग नहीं की जाएगी। इस मामले पर एक सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।

साथ ही मुंगेर से मिर्जा चौकी एन एच मामले पर भी सुनवाई हुई। यह दो जिलों मुंगेर और भागलपुर से होकर गुजरता है।लेकिन गंगा के किनारे स्थित होने की वजह से हर साल बाढ़ के पानी में बह जाता है।

इसलिए, बिहार सरकार के आग्रह पर भारत सरकार के सड़क व परिवहन मंत्रालय ने कंक्रीट रोड के निर्माण के लिए टेंडर निकाला है, जो कि महीने के अंत तक फाइनल हो जाएगा।

तब तक राज्य सरकार के सड़क निर्माण विभाग को इसे चलने लायक बनाने के लिए 10 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है।वहीं एन एच – 80 मुंगेर से मिर्जा चौकी तक वर्तमान सड़क के समानांतर ही ग्रीन फील्ड कॉरिडोर बनाया जाना है।

इसको लेकर एन एच ए आई द्वारा पैसा जमा करने, जमीन अधिग्रहण की स्थिति, क्षतिपूर्ति की राशि के बटवारे व कब्जा सौपने के संबंध में हलफनामा दायर करने को कहा गया है।
राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार ने बताया कि इसके अलावा महेश खुट- सहरसा- पूर्णिया सेक्शन पॉकेट – 1, एन एच – 107 जल्द से जल्द पूरा करने में आने वाले अड़चनों को हटाने का आदेश जिला प्रशासन को दिया गया है।

इस मामलें आगे भी सुनवाई होगी।

पटना हाईकोर्ट ने फर्जी बीएड कॉलेज को बंद कराने का दिया आदेश

पटना हाईकोर्ट ने पूर्वी चंपारण के ढाका अंतर्गत तेलहारा खुर्द गांव के एक मिडिल स्कूल भवन में एक फर्जी बीएड संस्थान चलाने के मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 48 घण्टे में कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। विद्या देवी की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बी आर अम्बेडकर विश्वविद्यालय से जवाबतलब करते हुए बताने को कहा कि ऐसे मामले में इस बीएड कॉलेज को कैसे मान्यता दे दी गयी।

इस मामले की पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने एडवोकेट इति सुमन को अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त करते हुए स्थल का निरीक्षण कर कोर्ट को वस्तुस्थिति की जानकारी देने का अनुरोध किया था ।

आज एडवोकेट इति सुमन ने कोर्ट को रिपोर्ट पेश करते हुए बतलाया कि उक्त गांव में कोई इंजीनियर उपेंद्र शर्मा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज का कोई भवन नही है । स्थानीय ग्रामीणों ने इस नाम के किसी संस्था होने के बारे में अनभिज्ञता जताई । इस गांव में केवल एक मिडिल स्कूल ही चलता है ।

कोर्ट को याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि ऐसे कागज़ी संस्थान को बी आर अम्बेडकर यूनिवर्सिटी के कुलसचिव ने , 8 अप्रैल 2021 को कार्यालय आदेश के जरिये मांउट तक दे डाला है । इस फर्जी संस्थान खोलने के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है ।

कोर्ट ने सरकार से इस प्राथमिकी के आलोक में कार्यवाही रिपोर्ट अगली सुनवाई 20 जनवरी तक कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया ।इस मामलें पर अगली सुनवाई 20 जनवरी,2022 को होगी।

कोरोना की लड़ाई में सहायक साबित हो रहा प्रचार माध्यमः मंगल पांडेय

#Covid19 कोरोना की लड़ाई में सहायक साबित हो रहा प्रचार माध्यमः मंगल पांडेय
हैंडबुक, होर्डिंग व 104 हेल्पलाइन के जरिये लोगों को किया जा रहा जागरूक
पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य में कोरोना संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए विभाग द्वारा निरंतर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। इस क्रम में स्वास्थ्य महकमा विभिन्न स्तरों पर लोगों को जागरूक कर इस महामारी से लड़ने की सीख दे रहा है। कोरोना से बचाव में जागरुकता सबसे बड़ा हथियार है। लोग जागरूक होंगे, तो महामारी के असर को कम किया जा सकता है। इसलिए विभाग विभिन्न प्रचार माध्यमों के जरिये कोरोना से बचाव को लेकर जागरूक कर रहा है।

श्री पांडेय ने कहा कि राजधानी में विभिन्न अखबारों के हॉकरां के जरिये कोरोना की जानकारी व बचाव संबंधी 8 पन्ने का एक हैंडबुक बांटा गया है। इस हैंडबुक में कोरोना के नए वेरिएंट की तमाम जानकारियां व उसके माइल्ड लक्षण से लड़ने की पूरी जानकारी दी गयी है। वहीं विभिन्न अखबारों के जरिये प्रदेशभर में अखबार में दिए जा रहे विज्ञापनों के जरिये लोगों को कोरोना संबंधी अहम जानकारियां मुहैया करवायी जा रही है। अखबारों में मास्क पहनने से लेकर कोविड टीकाकरण लेने तक के लिए अपील की गयी है। साथ ही प्रदेश कि विभिन्न जिलों के लिए हेल्पलाइन नंबर के भी विज्ञापन जारी किए गये हैं, ताकि लोगों को जानकारियां हासिल करने में सहुलियत हो। अखबारों के माध्यम से 15 से 18 वर्ष के किशोर, किशोरी को कोविड लगवाने की अपील की गयी है। विज्ञापनों के जरिये अस्पतालों की सुविधाएं व निजी अस्पतालों में तय दर की जानकारियां भी दी गयी।

श्री पांडेय ने कहा कि राज्य सरकार ने राजधानी समेत अन्य जिलों में होर्डिंग के माध्यमों से लोगों को जागरूक और सतर्क किया जा रहा है। कोरोना से बचाव और उपचार से संबंधित राज्यस्तरीय हेल्पलाइन नंबर 104 भी कोरोना की लड़ाई में कारगर साबित हो रहा है। होर्डिंग के जरिये सराकरी हेल्पलाइन 104 की जानकारी भी दी गयी, जिसमें प्रतिदिन लोग फोन कर कोरोना संबंधी सलाह ले रहे हैं। इस नंबर पर कोविड के गाईडलाइन की जानकारी दी जा रही है।

साथ ही कोविड के नए वेरिएंट के बारे में भी बताया जा रहा है। एक सप्ताह के आंकड़ों पर गौर करें तो 6 जनवरी को 1240, 7 जनवरी को 1290, 8 को 1367, 9 को 1455, 10 को 1570, 11 को 1684, 12 को 1710, 13 को 1216, 14 को 1150, 15 को 1265, 16 को 1354 और 17 जनवरी को 1270 काल आए हैं। हेल्पलाइन नंबर के जरिये कोविड के लिए मेडिकल किट बांटने की प्रक्रिया में भी मदद मिल रही है। हेल्थ एडवाइजर अफसर लोगों की समस्या सुनते हैं। यदि किसी को चिकित्सीय परामर्श चाहिए तो उन्हें चिकित्सक से भी कॉल के जरिये बात करवाया जा रहा है।

हर घर नल का जल योजना में हुई गडबड़ी की जांच कर कार्रवाई करने को लेकर पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

राज्य में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा प्रारम्भ किये गए हर घर नल का जल योजना में हुई गडबड़ी और बरती गई अनियमितताओं की जांच कर कार्रवाई करने के लिए पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर किया गया है।ये जनहित याचिका पूर्णियां के संजय मेहता ने दायर किया हैं।इस जनहित याचिका को अधिवक्ता अलका वर्मा और मीरा कुमारी ने संजय मेहता की ओर कोर्ट में दायर किया हैं।

इस जनहित में राज्य के मुख्य सचिव समेत अन्य सम्बंधित अधिकारियों को पार्टी बनाया गया हैं।इस जनहित याचिका में ये कहा गया है कि इस योजना में अनियमितताएं बरतने वाले के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
साथ ही इस हर घर नल का जल योजना का कार्यान्वयन सही ढंग से किया जाए।यह आम जनता के हितों के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की काफी महत्वपूर्ण योजना हैं।

शुद्ध पेय जल आम लोगों की बुनियादी आवश्यकता हैं।इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं और अनियमितताएं बरती गई हैं।
पूर्णियां,सहरसा,अररिया,सुपौल,किशनगंज,मधेपुरा व राज्य के अन्य जिलों में शुद्ध पेय जल, विशेषकर गर्मी के दिनों में, आम जनता को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता हैं।

इस महत्वपूर्ण जनहित योजना में भ्रष्ट्राचार और अनियमितता बरता जाना गंभीर अपराध हैं।इसकी पूरी जांच स्वतन्त्र एजेंसी से करा कर दोषियों को दंड देने की कार्रवाई की जाए।

सात निश्चय योजना के अंतर्गत हर घर नल का जल योजना में सिकटी विधानसभा क्षेत्र में काफी गड़बड़ियां हुई।विधायक विजय कुमार मंडल ने डी एम, अररिया को आवेदन दे कर बताया गया कि जलापूर्ति के लिए घटिया पाइप लगाया गया।
साथ ही सही गहराई में पाइप नहीं लगाया गया।इस कारण जहां आए दिन पाइप फटता रहता है, वहीं सड़क भी क्षतिग्रस्त होता रहा हैं।

इस सम्बन्ध में सम्बंधित मंत्री और अधिकारियों को भी पत्र के जरिये सूचना दी गई थी।

बीजेपी और जदयू में रार जारी सम्राट अशोक के बहाने जदयू ने फिर बीजेपी को लिया निशाने पर

बीजेपी और जदयू में रार थमने का नाम नहीं ले रहा है कल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने फेसबुक पोस्ट कर जदयू नेता उपेन्द्र कुशवाहा पर सीधा हमला बोला था आज उसका जबाव देते हुए उपेन्द्र कुशवाहा ने प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल को पत्र लिखा है

डॉ. जायसवाल ने सोमवार को अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए कहा कि चलिए, माननीय जी को समझ आया कि राजग गठबंधन का निर्णय केंद्र द्वारा है और बिल्कुल मजबूत है इसलिए हम सभी को साथ चलना है। फिर मुझे और केंद्रीय नेतृत्व को टैग कर प्रश्न क्यों किया जाता है। मर्यादा की पहली शर्त है कि देश के प्रधानमंत्री से ट्विटर-ट्विटर ना खेलें। मुझे पूरा विश्वास है कि भविष्य में हम सब इसका ध्यान रखेंगे। उन्होंने जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह व संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा को इंगित करते हुए कहा कि आप सब बड़े नेता हैं। एक बिहार में एवं दूसरे केंद्र में मंत्री रह चुके हैं। फिर इस तरह की बात कहना कि राष्ट्रपति जी द्वारा दिए गए पुरस्कार को प्रधानमंत्री वापस लें, से ज्यादा बकवास हो ही नहीं सकता।
उपेन्‍द्र कुशवाहा ने लिखा खुला पत्र

जदयू संसदीय दल के अध्यक्ष सह विधान पार्षद उपेन्द्र कुशवाहा ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल को खुला पत्र लिखकर जवाब दिया है। कहा कि गठबंधन के सन्दर्भ में और सम्राट अशोक वाले मुद्दे पर आपका बयान देखा। गठबंधन के सन्दर्भ में दिए गए आपके वक्तव्य से मैं पूरी तरह सहमत हूं।

कहा कि गठबंधन ठीक तरह से चले, यह राज्यहित में आवश्यक है और इसे जारी रखना हमारा- आपका कर्तव्य है। लेकिन, सम्राट अशोक वाले मुद्दे पर हम आपकी राय से सहमत नहीं हो सकते, क्योंकि इस सन्दर्भ में आपका वक्तव्य पूर्णत: गोल-मटोल और भटकाव पैदा करने वाला है।

जदयू नेता ने कहा कि आपने लिखा है कि आपकी पार्टी भारतीय राजाओं के स्वर्णिम इतिहास में कोई छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं कर सकती। मेरा सवाल है कि आप दया प्रसाद सिन्हा द्वारा घोर व अमर्यादित भाषा में सम्राट अशोक की औरंगजेब से की गई तुलना को इतिहास में छेड़छाड़ मानते हैं या नहीं। राष्ट्रपति द्वारा दिए गए पुरस्कार की वापसी की मांग प्रधानमंत्री से करना बकवास है।

नीतीश प्लान बी पर बढ़े आगे

नीतीश प्लान बी पर आगे बढ़े

बिहार में भाजपा और जदयू का रिश्ता बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है कभी कभी भी तलाक की घोषणा हो सकती है तैयारी दोनों ओर से चल रही है कहां ये जा रहा है कि लालू प्रसाद नीतीश कुमार से गठबंधन को तैयार है लेकिन तेजस्वी तैयार नहीं है ।तेलंगाना सीएम के॰ चंद्रशेखर राव से तेजस्वी की मुलाकात लालू के पहल पर हुई है क्यों कि 2005 में जब चंद्रशेखर राव दिल्ली में मंत्री थे उस वक्त लालू प्रसाद और चन्द्रशेखर का बंगला अगल बगल था और दोनों के बीच परिवारिक रिश्ता था उसी रिश्ते के सहारे लालू प्रसाद चंद्रशेखर राव से तेजस्वी से बात करने का आग्रह किया था । चंद्रशेखर राव की तेजस्वी से मुलाकात उसी की एक कड़ी है कहा ये जा रहा है कि राष्ट्रीय राजनीति के परिप्रेक्ष्य में नीतीश से गठबंधन क्यों जरुर है इस पर लम्बी बातचीत हुई है हालांकि बात अभी बनी नहीं है लेकिन चर्चा बड़ी गम्भीरता से चल रही है ।

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान चिराग का जदयू के खिलाफ चुनाव लड़ना फिर मंत्रिमंडल में सुशील मोदी का शामिल नहीं होना और बाद में बिहार बीजेपी के संगठन महामंत्री नागेन्द्र जी को दरकिनार करना यह समझने के लिए काफी था कि नीतीश कुमार को इस बार बीजेपी फ्री हैंड देने को तैयार नहीं है इसी को ध्यान में रखते हुए नीतीश कुमार भी सरकार के गठन के दिन से ही पार्टी को मजबूत करने के साथ साथ नये गठबंधन की तलाश शुरु कर दिये थे उसी कड़ी में जातीय जनगणना को लेकर बीजेपी की घेराबंदी शुरु किये हैं। वैसे लालू प्रसाद से उपेन्द्र कुशवाहा और हाल के दिनों में ललन सिंह की भी मुलाकात हुई है अंदर खाने में बातचीत चल रही है लेकिन जदयू को उम्मीद थी कि यूपी चुनाव के परिणाम आने तक सब कुछ शांत रहेगा लेकिन चुनाव से पहले ही जिस अंदाज में बीजेपी हमलावर हुआ है उससे जदयू थोड़ा असहज जरूर महसूस कर रहा है क्यों कि जदयू वामपंथी और कांग्रेस को इस गठबंधन में मजबूती के साथ साथ रखना चाह रही है और अभी ये सम्भव नहीं दिख रहा है इसलिए नीतीश जल्दबाजी करना नहीं चाह रहे हैं।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि एक और जहां यूपी में बीजेपी पर पिछड़ा विरोधी होने का आरोप लग रहा है ऐसे में नीतीश की सरकार को अस्थिर करना राजनीति की समझ रखने वाले भी हैरान है क्यों कि अगर नीतीश अस्थिर होते हैं तो उसका असर यूपी के चुनाव पड़ भी पड़ेगा यह तय है ऐसे में एक जनवरी को पीएम मोदी बीजेपी नेता राजेंद्र सिंह के ट्विटर को फॉलो करना शुरू करते हैं और 10 दिनों बाद ही जदयू के एक साधारण प्रवक्ता के बयान पर जिस तरीके से बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बिफरे वो भी हैरान करने वाली बात है , इसका मतलब है कि मोदी और शाह भी बिहार को लेकर शीघ्र निर्णय लेने के मूड में है। वैसे विवाद का तात्कालिक कारण डीएम और एसपी की पोस्टिंग में संघ और पार्टी की सूची को नजरअंदाज करना है जहां तक मुझे जानकारी मिली है विजय निकेतन,संजय जायसवाल और नित्यानंद राय की और से अधिकारियों की एक सूची चंचल कुमार को दिया गया था लेकिन उनमें से अधिकांश अधिकारियों की पोस्टिंग नहीं हुई इतना ही नहीं नित्यानंद राय और संजय जायसवाल ने समस्तीपुर,मोतिहारी और बेतिया में जिन अधिकारियों की पोस्टिंग करने कि इच्छा व्यक्त कि थी उसको भी सीएम हाउस ने नजरअंदाज कर दिया ।

संजय जायसवाल के गुस्सा की एक वजह ये भी मानी जा रही है वैसे संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक संघ कार्यालय में 19 से 21 जनवरी के बीच होनी है जिसमें इन मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो सकती है क्यों कि संघ इस बात को लेकर नाराज है कि सरकार में रहने के बावजूद पार्टी का कार्यकर्ता उपेक्षित है सही काम भी नहीं हो रहा है इस वजह से बीजेपी का कोर वोटर बीजेपी से दूर होता जा रहा है । पिछली बैठक में नीतीश के शासन काल में कितने व्यवसायी की हत्या हुई है इसकी सूची संघ ने उप मुख्यमंत्री तारकिशोर और संजय जायसवाल को सौंपा था और कहां था कि ये क्या हो रहा है जब आपके राज्य में भी व्यापारी सुरक्षित नहीं है तो फिर सरकार का क्या मतलब है। देखिए आगे आगे होता है क्या लेकिन गठबंधन में गांठ पड़ गयी है यह तो साफ दिखने लगा है ।