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पटना हाईकोर्ट ने राज्य से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, निर्माण,मरम्मती और चौड़ीकरण की परियोजनाओं की मॉनिटरिंग करेगी पटना हाई कोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने राज्य से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, निर्माण,मरम्मती और चौड़ीकरण की परियोजनाओं की मॉनिटरिंग कर रही पटना हाई कोर्ट ने सुनवाई की। राजमार्गों से सम्बंधित से सम्बंधित 32 जनहित याचिकाओं पर स्वयम संज्ञान लेते हुए चीफ जस्टिस संजय करोल की डिवीजन बेंच मामलों की सुनवाई की।

कोर्ट ने दानापुर बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण में आ रही तमाम अड़चनों को दूर करने हेतु ठोस उपाय निकालने के लिए राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है ।

कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे एक हफ्ते के अंदर रेलवे , एनएचएआई , पटना ज़िला प्रशासन सहित उन तमाम स्टेक होल्डर्स के साथ बैठक कर इस समस्या का समाधान निकालें। साथ ही जिनके हितों के टकराव से इस एलिवेटेड रोड के निर्माण में बाधा उत्पन्न हो रही है, उनका समाधान करें।

सुनवाई के दौरान एनएचएआई ने कोर्ट को बताया की दानापुर रेलवे टर्मिनस व स्टेशन के विस्तार करने की परियोजना के कारण इस एलिवेटेड कॉरिडोर के बनने में बाधा है । रेलवे ने प्लैटफॉर्म विस्तारित जमीन के चौहद्दी के पांच मीटर दूर तक कोई निर्माण पर रोक लगा रखा हैं।

इन मामलों में कोर्ट की सुनवाई के दौरान सहायता देने के लिए नियुक्त एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट पी के शाही ने कोर्ट को बताया कि पटना के आगे का विकास इसी एलिवेटेड कॉरिडोर पर निर्भर है । पटना से बिहटा हवाई अड्डा तक जाने का यही एलिवेटेड सड़क है, अन्यथा उस एयरपोर्ट का कोई औचित्य नही रह जाएगा ।

उन्होंने बताया कि दूसरी ओर आईआईटी , व अन्य शैक्षणिक संस्थान तक सुगम रास्ता देने वाली इस एलिवेटेड कॉरिडोर के जरिये ही पटना शहर का पूरे पश्चिम पटना से सम्पर्क हो पाता है ।

मामले की सुनवाई के दौरान रेलवे को पार्टी बनाते हुए रेलवे के वकील सिद्धार्थ प्रसाद को सुनवाई में शामिल किया गया। अधिवक्ता सिद्धार्थ ने कोर्ट को बताया कि रेलवे की ओर से हर संभव सहयोग दिया जाएगा।
इस मामले पर अगली सुनवाई 24 जनवरी को की जाएगी।

शराबबंदी को लेकर नीतीश के पक्ष में उतरे सुशील मोदी

जहाँ शराबबंदी नहीं, उन राज्यों में भी हुई जहरीली शराब से मौत

नालंदा में जहरीली शराब से मरने की घटना अत्यंत दुखद है, लेकिन ऐसी त्रासदी से पूर्ण मद्यनिषेध का कोई संबंध नहीं है।
जिन राज्यों में शराबबंदी लागू नहीं है, वहां अक्सर बिहार से ज्यादा बड़ी घटनाएँ हुईं।

पश्चिम बंगाल में 2011 में जहरीली शराब शराब पीने से 167, महाराष्ट्र में 2015 में 102 और 2019 में यूपी-उत्तराखंड में 108 लोगों की जान गई।

इनमें से किसी राज्य में शराबबंदी लागू नहीं है।

वर्ष 2016 में जब जहरीली शराब पीने से गोपालगंज में 19 लोगों की मौत हुई थी, तब राज्य सरकार ने स्पीडी ट्रायल के जरिये पांच साल के भीतर 13 लोगों को दोषी सिद्ध कराया। इनमें से 9 को फांसी और 4 महिलाओं को उम्र कैद की सजा सुनायी गई।
नालंदा और जहरीली शराब से मौत की सभी घटनाओं में स्पीडी ट्रायल का रास्ता अपना कर ही पीड़ितों को न्याय दिलाया जा सकता है।

पुलवामा हमले का बिहार से जुड़ा तार

पुलवामा में सुरक्षा बलों पर हमाला मामले में बिहार के भी दो आतंकी शामिल थै एनआइए ने जम्मू स्थित विशेष कोर्ट में गंगयाल थाना में फरवरी 2021 में हुए आंतकी घटना मामले में चार्जशीट दायर की है।

सोमवार को दायर इस चार्जशीट में पांच लोगों को मुख्य रूप से अभियुक्त बनाया गया है. इसमें दो लोग बिहार के भी हैं. शेष आरोपी जम्मू के ही रहने वाले हैं और जैश एवं एलएम आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं. बिहार के दोनों आरोपी मो. अरमान अली और मो. एहसानुल्लाह सारण जिला के मढ़ौरा थाना क्षेत्र के देवबहुआरा गांव के रहने वाला है. कुछ दिनों पहले एनआइए ने इनकी गिरफ्तारी भी इसी मामले में की थी.

एनआइए की जांच में यह पाया गया कि कश्मीर के पुलवामा में सुरक्षा बलों पर हुए आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए गठित नये आतंकी संगठन लश्कर-ए-मुस्तफा (एलएम) को अवैध हथियार सप्लाइ करने वाले नेटवर्क में मुख्य रूप से जुड़े हुए थे. ये दोनों मुंगेर से देसी हथियारों की खेप को पंजाब, हरियाणा होते हुए जम्मू-कश्मीर तक पहुंचाते थे. हथियारों की तीन-चार खेप को इन्होंने इस आतंकी संगठन तक पहुंचाया था.

जम्मू के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमले में करीब 60 जवान शहीद हो गये थे. इस मामले की तफ्तीश एनआइए ने शुरू की और देश में छिपे एलएम का सहयोग करने वालों की धड़-पकड़ शुरू कर दी. एनआइए की जांच में यह पाया गया कि पुलवामा हमले के लिए जैश-ए-मोहम्मद या जैश प्रमुख मसूद अजहर के भाई मो. रौउफ अजहर उर्फ अब्दुल असगर ने एलएम की स्थापना सिर्फ इस हमले को अंजाम देने के लिए किया था.

इसमें उसने बिहार, यूपी और जम्मू के कई युवाओं को भी बहला-फुसला कर शामिल कराया था. बिहार के ये दोनों युवक हथियारों की तस्करी करते और इसी चक्कर में इस आतंकी संगठन को हथियार सप्लाई करने लगे. फिलहाल इस मामले की जांच अभी जारी है. इसमें कुछ अन्य लोगों के भी शामिल होने की संभावना है. इससे संबंधित दूसरी चार्जशीट भी एनआइए जल्द दायर कर सकती है. इसमें कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं. बिहार में भी इससे जुड़े अन्य लोगों की तफ्तीश चल रही है.

कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने को तैयार है स्वास्थ्यकर्मी -मंगल पांडेय

#Covid19 कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने हेतु स्वास्थ्यकर्मियों को दिया गया विशिष्ट प्रशिक्षणः मंगल पांडेय
सूबे में आईसीयू बेड और वेंटिलेटर की व्यवस्था की गई मजबूत

पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग डॉक्टर्स एवं पारा मेडिकल कर्मियों को हर स्तर से तैयार कर रहा है। इसी क्रम में सूबे के मेडिकल कॉलेज सह अस्पतालों एवं जिला अस्पतालों में 317 डॉक्टर्स एवं पारा मेडिकल कर्मियों को एम्स, पटना द्वारा विशिष्ठ ट्रेनिंग संपन्न हुई। इन्हें वेंटिलेटर के संचालन, रखरखाव एवं ऑक्सीजन थेरापी पर वर्चुअल माध्यम से विशेष प्रशिक्षण 13 जनवरी से चल रहा था।

श्री पांडेय ने कहा कि इन कर्मियों को हाई फ्लो नेजल कैनुला, नान इन्वेसिव वेंटिलेशन, इन्वेसिव वेंटिलेशन, वेंटिलेटरी सपोर्ट संबंधी विषय वस्तुओं पर 17 जनवरी तक प्रशिक्षण दिया गया। पूर्व में भी जिला स्तर पर चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को इससे संबंधित प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावे विभाग द्वारा कोरोना मरीजों के लिए सूबे के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेज सह अस्पतालों में जरूरी दवा और अन्य सामग्री निरंतर मुहैया करायी जा रही है।

श्री पांडेय ने कहा कि कोविड संक्रमित अधिकतर व्यक्ति होम आईसोलेशन या कोविड केयर सेंटर में सामान्य उपचार से स्वस्थ हो जा रहे हैं, लेकिन कुछ गंभीर रोगियों को ऑक्सीजन एवं अन्य सपोर्टिव ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ती है। इसको ध्यान में रखते हुए राज्य में ऑक्सीजनयुक्त बेड, आईसीयू बेड एवं वेंटिलेटर आदि की व्यवस्था को पहले से और भी ज्यादा सुदृढ़ किया जा रहा है।

हाईकोर्ट ने राजेन्द्र प्रसाद स्मारक की दुर्दशा के मामलें पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार ( आर्केलोजिकल् सर्वे ऑफ इंडिया) को 21 जनवरी,2022 तक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया।

पटना हाईकोर्ट में देश के प्रथम राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली जीरादेई और वहां उनके स्मारक की दुर्दशा के मामलें पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार ( आर्केलोजिकल् सर्वे ऑफ इंडिया) को 21 जनवरी,2022 तक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। विकास कुमार की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की।

आज कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से जवाब दायर किया गया।कोर्ट को इसमें जानकारी दी गई कि राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 10 जनवरी,2022 को एक उच्च स्तरीय बैठक हुई।इसमें सम्बंधित विभाग के अपर प्रधान सचिव सहित अन्य वरीय अधिकारी बैठक में उपस्थित थे, जिनमें पटना और सीवान के डी एम भी शामिल थे।

इसमें कई तरह के जीरादेई में विकास कार्य के साथ पटना में स्थित बांसघाट स्थित डा राजेंद्र प्रसाद की समाधि स्थल और सदाकत आश्रम की स्थिति सुधारें जाने पर विचार तथा निर्णय लिया गया।

इस बैठक में जीरादेई गांव से दो किलोमीटर दूर रेलवे क्रासिंग के ऊपर फ्लाईओवर निर्माण पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया। साथ ही राजेंद्र बाबू के पैतृक घर और उसके आस पास के क्षेत्र के विकास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कार्रवाई करने का निर्णय हुआ।

हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में केंद्र और राज्य सरकार को इस सम्बन्ध में निश्चित रूप से हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था। लेकिन आर्किओलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने आज कोर्ट के समक्ष जवाब नहीं प्रस्तुत किया।कोर्ट ने उन्हें जवाब देने के लिए 21 जनवरी,2022 तक की मोहलत दे।

हाईकोर्ट ने इससे पहले अधिवक्ता निर्विकार की अध्यक्षता में वकीलों की तीन सदस्यीय कमिटी गठित की थी।कोर्ट ने इस समिति को इन स्मारकों के हालात का जायजा ले कर कोर्ट को रिपोर्ट करने का आदेश दिया था।

इस वकीलों की कमिटी ने जीरादेई के डा राजेंद्र प्रसाद की पुश्तैनी घर का जर्जर हालत, वहां बुनियादी सुविधाओं की कमी और विकास में पीछे रह जाने की बात अपनी रिपोर्ट में बताई।

साथ ही पटना के बांसघाट स्थित उनके समाधि स्थल पर गन्दगी और रखरखाव की स्थिति भी असंतोषजनक पाया।वहां काफी गन्दगी पायी गई और सफाई व्यवस्था, रोशनी आदि की खासी कमी थी।
साथ ही पटना के सदाकत आश्रम की हालत को भी वकीलों की कमिटी ने गम्भीरता से लिया था।

जनहित याचिका में अधिवक्ता विकास कुमार ने बताया गया कि जीरादेई गांव व वहां डाक्टर राजेंद्र प्रसाद के पुश्तैनी घर और स्मारकों की हालत काफी खराब हो चुकी है। जीरादेई में बुनियादी सुविधाएं नहीं के बराबर है।वहां न तो पहुँचने के लिए सड़क की हालत सही है।साथ ही गांव में स्थित उनके घर और स्मारकों स्थिति और भी खराब हैं,जिसकी लगातार उपेक्षा की जा रही है।

उन्होंने बताया कि वहां सफाई,रोशनी और लगातार देख रेख नहीं होने के कारण ये स्मारक और ऐतिहासिक धरोहर अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है।

इनके स्मृतियों और स्मारकों को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 21 जनवरी,2022 को होगी।

बिरजू महराज का जाना कथक नृत्यु की दुनिया में एक युग का हुआ अंत

बिरजू महाराज मेरे लिए सिर्फ़ कथक गुरु नहीं, मेरी दिलरुबा सहेली अनिता महाराज के पिता भी थे । मेरी पहली मुलाक़ात ही कथक केंद्र में अनिता के साथ हुई थी, तब मैं अमर उजाला अख़बार के लिए उनका लंबा चौड़ा इंटरव्यू करने गई थी । अनिता पहले से मेरी मित्र थी । ये 90 के दशक की बात है । 1993 -94 के आसपास. कटिंग ढूँढ रही हूँ । अमर उजाला में फ़ुल पेज छपा था ।

उस समय मैं नवभारत टाइम्स और अमर उजाला के लिए कलाकारों, चित्रकारों के फ़ुल पेज इंटरव्यू किया करती थी. वो दौर था जब अख़बार कला और कलाकारों को बहुत महत्व देते थे ।

मुझे उनके पास अनिता लेकर गई थी और अनिता की तरह ही मैं भी उन्हें “बाबू “ कहने लगी थी ।
उसके बाद कई बार मिलना हुआ. तीन साल पहले अचानक पंकज नारायण ने बताया कि गुरु जी जोरबाग में रहते हैं, मिलने चलते हैं. जोरबाग में रहने वाली मेरी चित्रकार मित्र अनुराधा ( सोनिया) भी अनिता की अभिन्न मित्र . हम सब पूरा दल बनाकर मिलने धमक गए ।

मुझे एक आमंत्रण भी देना था. हमारे क्लब का सालाना जलसा था और मुझे उसमें बतौर मुख्य अतिथि “बाबू” ( बिरजू महाराज) को बुलाना था ।
जब हम पहुँच गए तो धूम धड़ाम शुरु. हमने उन्हें मना ही लिया. तब सोचे कि नहीं मानेंगे तब अनिता का सहारा लेंगे. लेकिन थोड़ा ना नुकुर के बाद मान गए ।
ये उसी अवसर की तस्वीरें हैं जब हम उन्हें आमंत्रित करने गए थे. मैं तो मुँह लगी उनकी. हमने ख़ूब दिलजोई की. शाश्वती सेन जी का साथ बना रहा ।

आज सुबह अनिता के बात करते हुए रोना आ गया. मैं उसके पास जा भी नहीं सकती – मैं पिछले छह दिन से कोरोंटीन हूँ. दुबारा से तीसरी लहर में ओमीक्रोन ने दबोच लिया. सावधान रहते, बचते बचाते भी बीमारियाँ घर चल कर आ जाती हैं.
अनिता … मैं हमेशा तेरे साथ हूँ… बाबू कहीं नहीं गए. वे अपनी कला में ज़िंदा हैं. वे अमर हैं. हमारी पीढ़ी गर्व से कह सकेगी कि हमने बिरजू महाराज को मंच पर देखा है. बिजली कौंधते देखी है. सारी दिशाओं को अपनी बाँहों में भरने का आवाहन करते देखा है ।

आउटलुक के लिए जब इंटरव्यू करने गई थी तब एक कॉलम था – दूसरा पहलू. आप कथक के देवता हैं… ये न करते तो क्या करते?
जवाब – “मोटर मैकेनिक होता. मुझे गाड़ियाँ बनाने का शौक़ है. ठीक कर लेता हूँ. बहुत रोचक काम है. यह भी कला है.”
हम लोग हैरान थे कि कहाँ नृत्य की दुनिया और उसके बेताज बादशाह और कहाँ गाड़ियों के कल पुर्ज़े ठीक करना पसंद था ।

लेखक —गीता श्री

कोरोना को लेकर आज हाईकोर्ट में फिर हुई सुनवाई सरकार के जबाव से कोर्ट सहमत नहीं

#Covid19 पटना हाईकोर्ट में राज्य में कोरोना महामारी के नए वेरिएंट के बढ़ते प्रभाव के रोक थाम व नियंत्रित किये जाने के मामले पर राज्य सरकार को 24 जनवरी,2022 तक जवाब देने का मोहलत दिया हैं। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने शिवानी कौशिक व अन्य की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की।

पिछली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने इस महामारी के रोक थाम और नियंत्रित करने के लिए की जा रही कारवाइयों का ब्यौरा दिया। कोर्ट ने आज राज्य सरकार को कोरोंना महामारी के नियंत्रण और रोकथाम के लिए की जा रही कार्रवाई का विस्तृत जानकारी अगली सुनवाई में पेश करने को कहा है।

कोर्ट ने राज्य सरकार को ये बताने को कहा था कि करोना महामारी के तीसरे लहर के रोकथाम और स्वास्थ्य सेवा की क्या कदम उठाए जा रहे है। पिछली सुनवाई में एडवोकेट जेनरल ललित किशोर ने कोर्ट को बताया कि इस महामारी पर नियंत्रण के कई तरह के राज्य सरकार ने कदम उठाए हैं।

उन्होंने कोर्ट को बताया था कि करोना महामारी के रोक थाम के दिए गए दिशानिर्देशों का पालन सख्त तरीके किया जा रहा है।सार्वजानिक स्थलों,सिनेमा,मॉल,पार्क आदि को फिलहाल बंद कर दिया गया।साथ ही 10 रात्रि से सुबह पाँच बजे तक curfew भी प्रशासन ने लागू कर दिया है।

सरकारी,निजी दफ्तरों में कर्मचारियों के पचास फी सदी उपस्थिति के साथ ही कार्य होगा।स्कूलों कॉलेजों में भी इसी तरह की व्यवस्था की गई हैं।
उन्होंने कोर्ट को जानकारी देते हुए बताया था कि राज्य में स्वास्थ्य सेवा को इसके महामारी से निबटने कार्रवाई करने को तैयार किया जा रहा।सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में करोना मरीज के ईलाज के पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

कोर्ट को यह भी बताया गया कि अभी दो लाख व्यक्तियों का प्रति दिन टेस्ट किया जा रहा है।ऑक्सीजन की आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त है और अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति के पूरी कार्रवाई हो रही है।

जो व्यक्ति करोना से पीड़ित हैं,उनके लिए ईलाज की व्यवस्था की गई है।उन्हें आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही है।अभी जो ओम्रिकोन नामक नए वेरिएंट के तेजी से बढ़ने के कारण स्थिति में परिवर्तन हो रहा है।दिल्ली,मुंबई जैसे शहरों से ले कर देश के अन्य भागों में ओम्रिकोन फैलने का अंदेशा बना हुआ है। पटना हाईकोर्ट में भी इस महीने के प्रारम्भ से ही ऑनलाइन सुनवाई प्रारम्भ हो चुका है।

इस मामले पर 24 जनवरी, 2022 को फिर सुनवाई होगी।

बिहार में बीजेपी और जदयू में तल्खी बढ़ी गठबंधन लगा दाव पर

बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल ने आज फेसबुक पेज के माध्यम से जो संदेश दिया है उससे साफ लग रहा है कि इस बार बीजेपी किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं है अब गेंद जदयू के पाले में है वो सरकार साथ साथ चलाये या फिर राह जुदा जुदा कर ले ।

हालांकि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम के दिन से ही यह चर्चा आम है कि यूपी चुनाव के बाद बिहार में बदलाव तय है अगर योगी की वापसी हुई तो नीतीश का जाना तय है .अगर योगी की वापसी नहीं हुई तो नीतीश बिहार में बड़े भाई की भूमिका में पूरी मजबूती के साथ बने रहेंगे ।

लेकिन चुनाव शुरू होने से पहले ही जिस तरीके से बीजेपी और जदयू आमने सामने हो गयी है उससे तो साफ लग रहा है कि खेला शुरु हो गया है लेकिन बड़ा सवाल यह भी है कि अभी बिहार की सरकार अस्थिर करके बीजेपी किसको लाभ पहुंचाना चाह रही है यह सवाल भी जायसवाल के तेवर से उठने लगा है इस पर आगे फिर कभी चर्चा होगी क्यों कि कुछ चीजे अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है । वैसे आज जो कुछ भी हो रहा है वो नीतीश समझ चुके थे इसलिए 2020 के चुनाव परिणाम आने के साथ ही पार्टी को मजबूत करने के लिए नीतीश कुमार पहले दिन से ही लग गये, कह सकते हैं कि नीतीश इस एक वर्ष के कार्यकाल के दौरान सरकार कब पार्टी को मजबूत करने में ज्यादा समय दिये नीतीश कुमार के पहल पर जो साथी पार्टी छोड़ कर चले गये थे उनको पार्टी में फिर से वापस लौटे उपेन्द्र कुशवाहा ,पूर्व विधायक मंजीत सिंह ,पूर्व विधान पार्षद विनोद सिंह पूर्व सांसद रंजन यादव सहित कई पुराने साथी इसी अभियान के दौरान पार्टी में वापस आये वही संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया ।

नीतीश कुमार के घर वापसी वाली राजनीति पर गौर करे तो नीतीश कुमार भाजपा विरोधी लोगों को ज्यादा से ज्यादा साथ लाये और पार्टी में जिनकी छवि भाजपा को लेकर सोफ्ट रहा उससे दूरी बनाने लगे मतलब नीतीश कुमार यूपी चुनाव के बाद की स्थिति पर चुनाव परिणाम आने के साथ ही काम शुरु कर दिया था

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि विधानसभा में नीतीश की जो हैसियत है उसके आधार पर वो अपनी राजनीति को कहां तक खीच कर ले जा सकते हैं।

1—यूपी में सीट की दावेदारी का मतलब क्या है
झारखंड में जदयू का विधायक भी रहा है पार्टी का संगठन भी रहा है तब भी बीजेपी 2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी को एक भी सीट नहीं दिया ऐसा स्थिति में यूपी में बीजेपी के साथ गठबंधन करने कि बात इतनी मजबूती के साथ जदयू क्यों कर रही थी ,
यूपी में 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार शराबबंदी के सहारे यूपी में काफी सभा किये और पार्टी संगठन को खड़ा करने कि कोशिश भी किये लेकिन पिछले पांच वर्षो के दौरान यूपी में पार्टी की कोई गतिविधि नहीं रही संगठन भी नहीं के बराबर है ऐसी स्थिति में जदयू यूपी में बीजेपी के साथ गठबंधन को लेकर आश्वस्त क्यों दिख रहा था कुछ दिन पहले जदयू ने तो एलान भी कर दिया था कि यूपी में बीजेपी के साथ गठबंधन हो गया जबकि इस विषय में जदयू को बीजेपी के किसी भी नेता से बात तक नहीं हुई थी जानकार बता रहे हैं कि इसकी दो वजह है एक आरसीपी सिंह जो यूपी में बीजेपी के साथ गठबंधन को लेकर बड़ी बड़ी बातें कर रहे थे गठबंधन नहीं होने से वो जगह पकड़ लिया वही नीतीश कुमार यूपी को लेकर इसलिए तोड़ जोड़ कर रहे थे ताकि यूपी में पांच दस सीट में मिल गया तो फिर उसी के दम पर बिहार में बीजेपी को गठबंधन में बनाये रखने पर मजबूर कर सकते हैं लेकिन बीजेपी नीतीश कुमार के किसी भी प्रस्ताव पर बात करने को तैयार नहीं था ।

2–जदयू सम्राट अशोक के मामले को क्यों तूल दे रहा है दया प्रकाश सिन्हा सम्राट अशोक को लेकर जो कुछ भी लिखा है वो कोई आज नहीं लिखा है बहुत पहले लिखा गया है लेकिन इस विषय को लेकर जदयू अचानक बीजेपी पर हमलावर हो यहां भी वजह यूपी चुनाव ही है जदयू को लगता है कि सम्राट अशोक का मुद्दा उठा कर यूपी का जो मौर्य समाज है उसको उद्वेलित करे जो बीजेपी के साथ है मतलब बिहार के सहारे नीतीश कुमार बीजेपी को यूपी में नुकसान पहुंचाना चाह रहे हैं मतलब यहां भी जदयू की राजनीति यूपी को नजर में रख कर ही बनायी गयी है ।

3–बीजेपी समझौते के मूड में नहीं है इस बार बीजेपी किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं है जातीय जनगणना को लेकर पहले ही बिहार बीजेपी अपनी राय स्पष्ट कर चुका है शराबबंदी को लेकर बीजेपी हमलावर है और सम्राट अशोक मामले में बीजेपी सुनने को तैयार नहीं है ऐसे में यह सरकार कब तक चलेगी कहना मुश्किल है ।

संजय जायसवाल क्या लिखा है अपने फेसबुक पेज पर जरा आप भी पढ़ लीजिए

चलिए माननीय जी को यह समझ आ गया कि एनडीए गठबंधन का निर्णय केंद्र द्वारा है और बिल्कुल मजबूत है इसलिए हम सभी को साथ चलना है।फिर बार-बार महोदय मुझे और केंद्रीय नेतृत्व को टैग कर न जाने क्यों प्रश्न करते हैं। एनडीए गठबंधन को मजबूत रखने के लिए हम सभी को मर्यादाओं का ख्याल रखना चाहिए। यह एकतरफा अब नहीं चलेगा।

इस मर्यादा की पहली शर्त है कि देश के प्रधानमंत्री से ट्विटर ट्विटर ना खेलें ।प्रधानमंत्री जी प्रत्येक भाजपा कार्यकर्ता के गौरव भी हैं और अभिमान भी। उनसे अगर कोई बात कहनी हो तो जैसा माननीय ने लिखा है कि बिल्कुल सीधी बातचीत होनी चाहिए। टि्वटर टि्वटर खेलकर अगर उनपर सवाल करेंगे तो बिहार के 76 लाख भाजपा कार्यकर्ता इसका जवाब देना अच्छे से जानते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि भविष्य में हम सब इसका ध्यान रखेंगे ।

आप सब बड़े नेता है । एक बिहार मे एवं दूसरे केंद्र में मंत्री रह चुके हैं। फिर इस तरह की बात कहना कि राष्ट्रपति जी द्वारा दिए गए पुरस्कार को प्रधानमंत्री वापस लें ,से ज्यादा बकवास हो ही नहीं सकता। दया प्रकाश सिन्हा के हम आप से सौ गुना ज्यादा बड़े विरोधी हैं क्योंकि आपके लिए यह मुद्दा बिहार में शैक्षिक सुधार जैसा मुद्दा है जबकि जनसंघ और भाजपा का जन्म ही सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर हुआ है। हम अपनी संस्कृति और भारतीय राजाओं के स्वर्णिम इतिहास में कोई छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं कर सकते। पर हम यह भी चाहते हैं कि बख्तियार खिलजी से लेकर औरंगजेब तक के अत्याचारों की सही गाथा आने वाली पीढ़ियों को बताई जाए ।

74 वर्ष में एक घटना नहीं हुई जब किसी पद्मश्री पुरस्कार की वापसी हुई हो। पहलवान सुशील कुमार पर हत्या के आरोप सिद्ध हो चुके हैं उसके बावजूद भी राष्ट्रपति ने उनका पदक वापस नहीं लिया क्योंकि पुरस्कार वापसी मसले पर कोई निश्चित मापदंड नहीं है। जबकि चाहे वह हरिद्वार में घटित धर्म संसद हो या सैकड़ों हेट स्पीच ,सरकार न केवल इन पर संज्ञान लेती है बल्कि बड़े से बड़े व्यक्ति को भी जेल में डालने से नहीं हिचकती ।

इसलिए सबसे पहले बिहार सरकार दया प्रकाश सिन्हा जी को मेरे f.i.r. के आलोक में गिरफ्तार करे और फास्ट ट्रैक कोर्ट से तुरंत सजा दिलवाये । उसके बाद बिहार सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति के पास जाकर हम सबों की बात रक्खे कि एक सजायाफ्ता मुजरिम का पद्मश्री पुरस्कार वापस लिया जाए ।

बिहार सरकार अच्छे वातावरण में शांति से चले यह सिर्फ हमारी जिम्मेवारी नहीं बल्कि आप की भी है। अगर कोई समस्या है तो हम सब मिल बैठकर उसका समाधान निकालें। हमारे केंद्रीय नेताओं से कुछ चाहते हैं तो उनसे भी सीधे बात होनी चाहिए।
हम हरगिज नहीं चाहते हैं कि पुनः मुख्यमंत्री आवास 2005 से पहले की तरह हत्या कराने और अपहरण की राशि वसूलने का अड्डा हो जाए। अभी भेड़िया स्वर्ण मृग की भांति नकली हिरण की खाल पहनकर अठखेलियां कर जनता को आकृष्ट कर रहा है। एक पूरी पीढ़ी जो 2005 के बाद मतदाता बनी है वह उन स्थितियों को नहीं जानती और बिना समझे कि यह रावण का षड्यंत्र है स्वर्ण मृग पर आकर्षित हो रही है ।यथार्थ बताना हम सभी का दायित्व भी है और कर्तव्य भी।

शराबबंदी को लेकर बीजेपी और जदयू आमने सामने

शराबबंदी को लेकर बीजेपी और जदयू अब दो दो हाथ करने के मूड में पिख रहा है बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा शराबबंदी कानून पर सवाल खड़े करने पर जदयू ने भी तीखा प्रहार किया है और जदयू के प्रवक्ता अभिषेक झा ने संजय जायसवाल को अज्ञाणी तक कह दिया माननीय Sanjay Jaiswal जी,

इस देश में जघन्य अपराधों के लिए कड़े कानून हैं लेकिन उसके बावजूद वैसे अपराध होते हैं।
बिहार में सुशासन है और सुशासन में जो भी गलत करेगा, अफसर हो या कोई और, दंडित होगा। सुशासन की सरकार की नीति है ना किसी को फसाना और ना किसी को बचाना।

थोड़ा ज्ञान वर्धन कर लीजिए अध्यक्ष जी,

गोपालगंज में जहरीली शराब कांड एक उदाहरण है जहां जहरीली शराब बेचने वाले लोगों को फांसी तक की सजा हुई है।

पुलिस विभाग के 250 से ज्यादा और एक्साइज डिपार्टमेंट के 10 से ज्यादा लोगों को शराबबंदी कानून में गड़बड़ी करने की वजह से बर्खास्त तक किया गया है और बड़ी संख्या में अधिकारियों पर विभागीय कारवाई चल रही है।

शराबबंदी के पहले चरण में देशी शराब को बंद किया गया। विधान परिषद में आपके सम्मानित नेता सुशील कुमार मोदी जी ने विदेशी शराब को बंद करने की मांग की लिहाजा दूसरे चरण में विदेशी शराब को बंद करके पूर्ण शराबबंदी को लागू किया गया।
यदि स्मरण ना हो तो विधान परिषद की प्रोसिडिंग मंगाकर पढ़ लीजिए।

अपने पूर्व के बयानों को भी जरा ध्यान से पढ़िए जहां आप गठबंधन की जड़ में मट्ठा देने की बात कर रहे थे और आज एक बार फिर से अपने ही गठबंधन की सरकार के विरोध में बोल रहे हैं।
हर आदमी को कुछ बोलने से पहले आत्म अवलोकन करना चाहिए।

सामाजिक कर्तव्य राजनीति से जुड़ा मसला होता है। शराबबंदी के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया में आप भी साझीदार रहे हैं। शराबबंदी के लिए जब सदन के अंदर शपथ लिया गया, सभी दल साथ थे। हाल के दिनों में एनडीए विधायक दल की बैठक में सभी सदस्यों ने दोनों हाथ उठाकर शराब बंदी के पक्ष में अपना समर्थन दिया।
आप अपने दल के प्रदेश अध्यक्ष हैं लेकिन अद्भुत विरोधाभास है कि आप अपने अनुभव से विधायकों को लाभान्वित नहीं करवाते हैं।
आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने गांधी मैदान के प्रकाश उत्सव में साफ तौर पर कहा था कि माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के द्वारा लिया गया शराबबंदी का फैसला साहसिक व सराहनीय है। सभी दलों और संगठनों को इसमें सहयोग करना चाहिए।

आदरणीय प्रधानमंत्री जी की भावना का सम्मान करते हुए आपने भी शराबबंदी कानून को बनाने की प्रक्रिया में अपना सहयोग दिया लेकिन जहां तक मेरी स्मरण शक्ति है आपको शराबबंदी की आलोचना करने का अधिकार नहीं दिया गया है फिर भी न जाने कौन से ऐसे अज्ञात कारण है जिसके चलते आपके द्वारा आलोचना के ही सुर निकलते हैं।

आलोचना करिए, आपका अधिकार है लेकिन ज्ञान वर्धन भी कीजिए।

अपने संगठन के प्रदेश अध्यक्ष के रुप में आप दावा करते हैं कि आपका संगठन बूथ आधारित है। हम आपसे अनुरोध करेंगे कि प्रधानमंत्री जी की भावना और आपके विधानमंडल दल के सदस्यों की भावना का सम्मान करते हुए आप संगठन की प्रारंभिक इकाई को शराबबंदी को सफल बनाने का सामाजिक उत्तरदायित्व दें।
माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने हर गांव तक बिजली पहुंचाई है और बिजली के हर खंभे पर शराबबंदी कानून को तोड़ने वाले लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने हेतु टॉल फ्री नंबर जारी किया गया है। अपने प्रारंभिक इकाई के सदस्यों को भी इस टॉल फ्री नंबर का उपयोग करने का निर्देश दें।

आपको हमसे राजनीतिक पीड़ा हो सकती है लेकिन आपसे हाथ जोड़कर अनुरोध है कि जिस तरह आप लोग राजनीतिक कार्यशाला का आयोजन करते हैं उसी तरह शराबबंदी को सफल बनाने हेतु भी कार्यशाला का आयोजन करिए। प्रधानमंत्री जी और अपने दल के विधायकों की भावना का सम्मान करते हुए आप यदि अपनी प्रारंभिक इकाई को भी शराब बंदी के इस अभियान में शामिल होने का निर्देश दीजिएगा तो और अच्छा होगा।

प्रधानमंत्री जी ने सभी संगठन और दलों से शराबबंदी को सफल बनाने के लिए कहा था जिसमें आप लोग भी शामिल थे।
आपको उनकी भावना की कद्र करनी चाहिए, लेकिन आपको आलोचना करने का अधिकार किसने दिया?

शराबंदी कानून को लेकर एक बार फिर बीजेपी हुआ हमलावर कहां जिसके घर शराब पीने से मौत हुई है उसे भेज दो जेल

शराबबंदी कानून को लेकर बीजेपी का रुख कड़ा होता जा रहा है आज फिर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने अपने फेसबुक पोस्ट पर नीतीश कुमार के शराबबंदी कानून पर सवाल खड़े करते हुए सीधे नीतीश पर हमला बोला है ।नालंदा जिले में जहरीली शराब से 11 मौतें हो चुकी हैं।

परसों मुझसे जहरीली शराब पर जदयू प्रवक्ता ने प्रश्न पूछा था। आज मेरा प्रश्न उस दल से है कि क्या इन 11 लोगों के पूरे परिवार को जेल भेजा जाएगा क्योंकि अगर कोई जाकर उनके यहां संतवाना देता तो आपके लिए अपराध है।

अगर शराबबंदी लागू करना है तो सबसे पहले नालंदा प्रशासन द्वारा गलत बयान देने वाले उस बड़े अफसर की गिरफ्तारी होनी चाहिए क्योंकि प्रशासन का काम जिला चलाना होता है ना कि जहरीली शराब से मृत व्यक्तियों को अजीबोगरीब बीमारी से मरने का कारण बताना। यह साफ बताता है कि प्रशासन स्वयं शराब माफिया से मिला हुआ है और उनकी करतूतों को छुपाने का काम कर रहा है।

दूसरे अपराधी वहां के पुलिस वाले हैं जिन्होंने अपने इलाके में शराब की खुलेआम बिक्रि होने दी । 10 वर्ष का कारावास इन पुलिस कर्मियों को होना चाहिए, ना कि इन्हें 2 महीने के लिए सस्पेंड करके नया थाना देना जहां वह यह सब काम चालू रख सकें।

तीसरा सबसे बड़ा अपराधी शराब माफिया है जो शराब की बिक्री विभिन्न स्थानों पर करवाता है। इस को पकड़ना भी बहुत आसान है ।इन्हीं पुलिस कर्मियों से पुलिसिया ढंग से पूछताछ की जाए तो उस माफिया का नाम भी सामने आ जाएगा। शराब बेचने वाले और पीने वाले दोनों को सजा अवश्य होनी चाहिए पर यह उस हाइड्रा की बाहें हैं जिन्हें आप रोज काटेंगे तो रोज उग जाएंगे ।जड़ से खत्म करना है तो प्रशासन ,पुलिस और माफिया की तिकड़ी को समाप्त करना होगा।

बिहार में कोरोना का कहर जारी 5 लोगों की हुई मौत 40 हजार का आकड़ा हुआ पार

#Covid19 कोरोना को लेकर बिहार में सुनामी जारी है शनिवार को पटना में कोरोना के 2254 नए मामले मिले हैं। इसके अलावा 124 फॉलोअप की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनमें 417 बाहर के रहने वाले हैं जिन्होंने पटना में जांच कराई थी। पटना जिले में रहने वालों के 2254 नए मामले दर्ज हुए हैं।

पटना में शनिवार को NMCH में एक 40 साल की महिला की मौत हो गई वही एम्स में एक 12 वर्ष का बच्चा सहित चार लोगों की मौत हुई है इस तरह आज कुल पांच लोगों की मौत हुई। वहीं, IGIMS में 4 डॉक्टर, 4 नर्सिंग स्टाफ व एक अन्य की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इधर, बिहार में अगले महीने से शुरू हो रही मैट्रिक-इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले सभी किशोरों का टीकाकरण 26 जनवरी से पहले पूरा कराने का लक्ष्य स्वास्थ्य विभाग ने रखा है।

शनिवार को पटना में कोरोना के 2254 नए मामले मिले हैं। इसके अलावा 124 फॉलोअप की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनमें 417 बाहर के रहने वाले हैं जिन्होंने पटना में जांच कराई थी। पटना जिले में रहने वालों के 2254 नए मामले दर्ज हुए हैं।
24 घंटे में संक्रमण के टॉप 3 जिले
पटना – 2116
मुंगेर – 298
मुजफ्फरपुर – 427

88 वर्ष पहले आज ही के दिन आया था देश का सबसे बड़ा भूकंप

आज ही दिन 88 वर्ष पहले बिहार में अभी तक का सबसे बड़ा भूकंप हुआ था रिक्टर स्केल पर 8.4तीव्रता आंकी गयी थी ,आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक भूकंप की वजह से दरभंगा में 1839 लोगों की मौत हुई,

तो मुजफ्फरपुर में 1583 लोगों की. मुंगेर में मरने वालों का आंकड़ा 1260 तक पहुंचा. बिहार में कुल मिला कर इस भूकंप की वजह से 7253 लोगों की मौत हुई थी साथ ही करीब 3400 वर्ग किलोमीटर का इलाका ऐसा रहा, जिस पर भूकंप का सबसे गंभीर असर पड़ा.

दरभंगा और मुंगेर शहर का नामोनिशान मिट गया था पटना में गंगा नदी के किनारे के सभी मकान या तो गिर गये या फिर क्षतिग्रस्त हुए. गांधी मैदान के नजदीक भी यही हाल रहा. चीफ जस्टिस से लेकर कमिश्नर और एसपी तक के आधिकारिक आवासों का बुरा हाल हुआ.

पीएमसीएच को भी नुकसान पहुंचा, रोगियों को अस्पताल के वार्डो से निकाल कर खुले मैदान में रखने की नौबत आयी. बिहार सचिवालय की बिल्डिंग को भी नुकसान पहुंचा, खास तौर पर टावर को. टावर का ऊपरी हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ और कुछ दिनों बाद गिर भी गया.

पटना से भी बूरा हाल दरभंगा का था जहां तत्कालीन दरभंगा जिले के राजनगर (अब जिला मधुबनी) शहर के लिए भूकंप अभिशाप रहा है. यह शहर भूकंप के केंद्र में शामिल होने के कारण इस प्राकृतिक आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुआ. वैसे तो राजनगर में भूकंप कई बार आया, लेकिन 15 जनवरी 1934 का भूकंप इस शहर के लिए विनाशकारी रहा था.

दोपहर के समय आये भूकंप ने राजनगर के रमेश्वर विलास पैलेस को चंद मिनटों में मलवे में तब्दील कर दिया वही कृषि विज्ञान के क्षेत्र में तब के सबसे महत्वपूर्ण संस्थान पूसा एग्रीक्लचरल इंस्टीट्यूट का कैंपस पूरी तरह तबाह हो गया.

इसी तरह राजनगर में मौजूद महाराजा दरभंगा का महल भी क्षतिग्रस्त हुआ. जहां तक सामान्य घरों का सवाल था, पूरे उत्तर बिहार में कम ही घर ऐसे बचे, जिसे किसी भी किस्म का नुकसान न हुआ हो.कांग्रेस से जुड़े देश के प्रमुख नेताओं के दौरे भी हुए. जवाहर लाल नेहरू ने करीब दस दिनों तक बिहार के भूकंपग्रस्त इलाकों का दौरा किया.

खुद महात्मा गांधी भी 11 मार्च को पटना पहुंचे. उसके बाद राजेंद्र बाबू के साथ वो लगातार भूकंपग्रस्त इलाकों में घूमते रहे, राहत कार्यो का जायजा लेते रहे. गांधी 20 मई तक बिहार में रहे. खास बात ये रही कि गांधी ने इस भूकंप को छुआछूत के खिलाफ भगवान के कहर के तौर पर गिनाया.

सम्राट अशोक को लेकर सियासी घमासान जारी जदयू ने एक बार फिर बीजेपी पर साधा निशाना

सम्राट अशोक को लेकर जारी सियासी घमासान थमने का नाम नहीं है आज जदयू ने एक बार फिर दया प्रकाश सिन्हा पर हमला करते हुए सरकार से साहित्य अकादमी वापस लेने की मांग की है।
जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि सम्राट अशोक के संदर्भ में उपजे तथाकथित विवाद का राजनैतिक संदर्भ से महत्‍वपूर्ण वैचारिक संदर्भ है ।

विश्वप्रसिद्ध एवं शक्तिशाली भारतीय मौर्य राजवंश के महान चक्रवर्ती सम्राट अशोक राष्‍ट्रीय अस्मिता, राष्‍ट्रीय‍ प्रतीक चिन्‍ह व भारतीयों के आत्‍मसम्‍मान से जुड़ा हुआ मसला है ।

पुस्‍तक के लेखक ने इतिहास को मिथक और मिथक को इतिहास बनाने की जो साजिश की है, उसके बचाव में आना विचारधारा की लड़ाई का अंग हो सकता है लेकिन राजनैतिक गठबंधन का नहीं ।

सम्राट अशोक पर आधारित नाट्य के भूमिका को पृष्‍ठ संख्‍या- 25 में ‘‘कामाशोक, चंडाशोक और धम्‍माशोक एक के बाद एक नहीं आये । वे तीनों, उसके शरीर में एक साथ, लगातार, जीवनपर्यन्‍त जीवित रहे । वह कामाशोक केवल नवायु में ही नहीं था । देवी के बाद उसके अन्‍त:पुर में पांच सौ स्त्रियाँ, फिर उसकी घोषित पत्नियाँ-असंधमित्ता, पद्मावती और कारुवाकी ! फिर वृद्धावस्‍था में तिष्‍यरक्षिता ! वह आजीवन काम से मुक्ति नहीं पा सका’’ (संदर्भ ‘सम्राट अशोक’ )

साथ ही साथ नाट्य के दृश्‍य-10 ‘अशोक-तिष्‍यरक्षित’ संदर्भ में जिसरूप में पेश किया गया है, वह किसी रूप से स्‍वीकार नहीं किया जा सकता है । (संदर्भ ‘सम्राट अशोक’)

ऐसे लिखने वाले को सम्राट अशोक के नाम पर ‘साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार 2021’ दिया जाना ही सम्राट अशोक के प्रति अपमान एवं तिरस्कार का भाव दिखाता है ।

राजनैतिक बयान से महत्‍वूपर्ण यह है कि जिस लेखक ने सम्राट अशोक की गरिमा पर अपने नाट्क के माध्‍यम से अपमान किया है उस व्‍यक्ति से विभिन्‍न अवार्ड वापसी मुहिम में साथ दें ।

हालांकि कल बीजेपी के पूर्व उप मुख्यमंत्री ट्टीट करके सम्राट अशोक को लेकर जारी सियासत को बंद करने का आग्रह किया था और एनडीए के घटक दलों से बयानबाजी बंद करने को कहा था उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक पर आधारित उस पुरस्कृत नाटक में उनकी महानता की चर्चा भरी पड़ी है, औरंगजेब का कहीं जिक्र तक नहीं, लेकिन दुर्भाग्यवश, इस मुद्दे को तूल दिया जा रहा है। 86 वर्षीय लेखक दया प्रकाश सिन्हा 2010 से किसी राजनीतिक दल में नहीं हैं।उनके एक इंटरव्यू को गलत ढंग से प्रचारित कर एनडीए को तोड़ने की कोशिश की गई।

दया प्रकाश सिन्हा ने एक हिंदी दैनिक से ताजा इंटरव्यू मेंं जब सम्राट अशोक के प्रति आदर भाव प्रकट करते हुए सारी स्थिति स्पष्ट कर दी, तब एनडीए के दलों को इस विषय का यहीं पटाक्षेप कर परस्पर बयानबाजी बंद करनी चाहिए।

दया प्रकाश सिन्हा के गंभीर नाट्य लेखन और सम्राट अशोक की महानता को नई दृष्टि से प्रस्तुत करने के लिए उन्हें साहित्य अकादमी जैसी स्वायत्त संस्था ने पुरस्कृत किया। यही अकादमी दिनकर, अज्ञेय तक को पुरस्कृत कर चुकी है। साहित्य अकादमी के निर्णय को किसी सरकार से जोड़ कर देखना उचित नहीं।

सम्राट अशोक का भाजपा सदा सम्मान करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने उनकी स्मृति में डाक टिकट जारी किया था। 2015 में भाजपा ने बिहार में पहली बार सम्राट अशोक की 2320 वीं जयंती बड़े स्तर पर मनायी और हमारी पहल पर बिहार सरकार ने अप्रैल में उनकी जयंती पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की।

हम अहिंसा और बौद्ध धर्म के प्रवर्तक सम्राट अशोक की कोई भी तुलना मंदिरों को तोड़ने और लूटने वाले औरंगजेब से कभी नहीं कर सकते।

अशोक ने स्वयं बौद्ध धर्म स्वीकार किया, लेकिन उनके राज्य में जबरन धर्मान्तरण की एक भी घटना नहीं हुई।
वे दूसरे धर्मों का सम्मान करने वाले उदार सम्राट थे, इसलिए अशोक स्तम्भ आज भी हमारा राष्ट्रीय गौरव प्रतीक है।
सुशील मोदी के सफाई के बावजूद आज जदयू ने बयान जारी कर नया सियासी बवाल खड़ा कर दिया है ।

नालंदा में जहरीली शराब पीने से छह लोगों के मौत की खबर प्रशासन सकते में

सिर मुड़ाते ही ओले पड़े, जी हां, नीतीश कुमार के शराबनीति पर बीजेपी के हमालवर रुख का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि नीतीश कुमार के गृह जिले से ही जहरीली शराब पीने से 4 लोगों की मौत हो गई है वही दो की हालत गंभीर है यह घटना जिले के सोहसराय थाना क्षेत्र के छोटी पहाड़ी और पहाड़ तल्ली मोहल्ला की है। मरने वालों में 55 वर्षीय भागो मिस्त्री, 55 वर्षीय मन्ना मिस्त्री, 50 वर्षीय धर्मेंद्र उर्फ नागेश्वर और 50 वर्षीय कालीचरण शामिल हैं। वहीं, मानपुर थाना क्षेत्र के प्रभु विगहा गांव के रामरूप चौहान और शिवजी चौहान की भी मौत हुई है। दोनों की उम्र 45 साल से ऊपर है।

मौत की सूचना मिलने के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। थानाध्यक्ष सुरेश प्रसाद के बाद सदर DSP डॉ शिब्ली नोमानी ने मौके पर पहुंच कर परिजन से जानकारी ली। नालंदा डीएम ने जहरीली शराब से मौत की पुष्टि कर दिया है ।

मृतक की पत्नी ललिता देवी ने बताया, ‘रात में पति को बेचैनी महसूस हुई। इसके बाद पानी पीने का दिया। अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में उनकी मौत हो गई। उसने गांव में बिक रही शराब पी थी।’ मन्ना मिस्त्री की बेटी प्रीति देवी ने बताया, ‘पिता जी बाहर से शराब पीकर आए थे। उनके सिर में दर्द हुआ। दवा दी, थोड़ी देर बाद उनकी मौत हो गई। वह अक्सर शराब पीकर आते थे। कई बार तो घर में भी पीते थे।’

संकट में सरकार नीतीश हुए मौन

संकट में है सरकार नीतीश हुए मौन
जदयू और भाजपा के बीच पहली बार ऐसा लग रहा है कि सब कुछ ऑल इज वेल नहीं है जिस तरीके से जदयू के एक साधारण से प्रवक्ता के बयान पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल का जिस तल्खी से बयान आया है वो दिखा रहा है कि बीजेपी अब जदयू के दबाव में काम करने को तैयार नहीं है । ऐसी स्थिति में आने वाले समय में नीतीश कुमार को बीजेपी से सरकार के संचालन के स्तर पर भी चुनौती मिलने वाली है ये साफ दिखने लगा है और अब तय नीतीश कुमार को करना है ।

वैसे जानकार कह रहे हैं कि यूपी में सीट बंटवारे के साथ साथ बिहार विधान परिषद के चुनाव में सीट को लेकर जदयू जो चाह रही है उसको ना तो योगी महत्व दे रहे हैं और ना ही बिहार बीजेपी झुकने को तैयार है। रिश्ते कितने कटु हो गये हैं यह संजय जायसवाल के फेसबुक पोस्ट से समझा जा सकता है हालांकि बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले लोगों का मानना है कि सम्राट अशोक वाले मामले में बीजेपी घिरती जा रही थी उससे ध्यान भटकाने के लिए संजय जायसवाल आगे बढ़ कर नीतीश के शराब नीति पर सवाल खड़ा कर हमला बोला है ताकि बिहार में सम्राट अशोक के सहारे जिस डिस्कोर्स चलाने कि कोशिश हो रही थी उसका असर यूपी के चुनाव पर भी पड़ सकता था इसलिए संजय जायसवाल ने इस तरह का बयान दिया है।

लेकिन सवाल यह है कि जिस तरीके से संजय जायसवाल ने शराब नीति पर सवाल खड़ा किया है उस स्थिति में नीतीश के पास अब विकल्प क्या है, क्यों कि शराबबंदी की समीक्षा को लेकर जो बैठक हुई थी उस बैठक में बीजेपी के तमाम मंत्री शराबबंदी कानून की समीक्षा के पक्ष में थे और उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने तो शराबबंदी कानून पर ही सवाल खड़े कर दिये थे लेकिन समीक्षा बैठक में बीजेपी के मंत्री के विरोध के बावजूद नीतीश अपने फैसले पर डटे रहे ।

लेकिन शराबबंदी कानून को लेकर बीजेपी की क्या सोच है यह अब सार्वजनिक हो गयी है वैसे सब की नजर सीएम के कोरोना रिपोर्ट पर टिकी है कहां ये जा रहा है कि कोरोना के बहाने ही सही सीएम हाउस में बड़ी सियासी खिचड़ी पक रही है क्यों कि ऐसा पहली बार हुआ है जब सीएम के कोरोना पॉजिटिव होने कि खबर आने के बाद जदयू नीतीश के शीघ्र स्वस्थ होने को लेकर पूरे प्रदेश में पूजा पाठ और हवन करवा रही है और इसकी शुरुआत भी पार्टी के प्रवक्ताओं के द्वारा किया गया है सब को पता है कि यह प्रवृत्ति नीतीश को पसंद नहीं है तो फिर यह पूजा पाठ और हवन कराने के पीछे सियासी खेल क्या है क्यों कि ऐसा भी नहीं है कि सीएम सख्त बीमार हैं इसलिए पिछले 72 घंटों के दौरान बीजेपी और जदयू के बीच जो जुबानी जंग चल रहा है उसका कोई निहितार्थ नहीं है ऐसा नहीं है।

बीजेपी और जदयू के बीच घमासान शराबबंदी कानून के सहारे बीजेपी का नीतीश पर बड़ा हमला

बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने अपने फेसबुक पेज के सहारे शराबबंदी को लेकर नीतीश कुमार पर सीधे हमला बोला है ।अपने पोस्ट में यहां तक कह दिया है कि शराबबंदी कानून पूरी तौर पर विफल है और इस वजह से आम लोग दशहत में है यह कानून अंग्रेजी हूकूमत की याद ताजी कर दी है।

संजय जायसवाल का यह पोस्ट संकेत है कि बिहार की राजनीति में बड़ा बवंडर आने वाला है क्यों कि जदयू का प्रवक्ता बिना सीनियर नेता के अनुमति के बगैर एक शब्द भी नहीं बोल सकते हैं

जरा आप भी पढ़िए संजय जायसवाल में अपने फेसबुक पेज पर लिखा क्या है —मेरी प्रवृत्ति नहीं है कि मैं अपने ऊपर किए गए व्यक्तिगत आरोपों का जवाब दुँ।

आज मुझे पता चला कि जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा जी मेरे लोकसभा क्षेत्र में जहरीली शराब के कारण हुए मृत्यु मे, मेरे जाने पर मुझसे जवाब मांग रहे हैं । जदयू के प्रवक्ता का मुझसे सवाल करना बताता है कि यह सवाल जदयू के द्वारा है क्योंकि प्रवक्ता दल की बातें रखता है अपनी व्यक्तिगत नहीं ।

मैं माननीय अभिषेक झा जी को बता दूं की मैं जहरीली शराब से हुई मौतों के परिवारजनों के घर गया था और अगर भविष्य में भी कभी मेरे लोकसभा क्षेत्र में इस तरह की दुर्घटना घटेगी तो मैं हर हालत में जाऊंगा और आर्थिक मदद भी करुँगा । अगर कोई व्यक्ति जहरीली शराब से मरता है तो उसने निश्चित तौर पर अपराध किया है पर इससे प्रशासनिक विफलता के दाग को बचाया नहीं जा सकता और जब मैं इस शासन के एक घटक का अध्यक्ष हूं तो यह मेरी भी विफलता है।

मैं उन गरीबों से इंसानियत के नाते मिलने गया था। मैं अच्छे से जानता हूं कि मरने वालों ने अपराध किया है इसलिए सरकार द्वारा उन्हें किसी प्रकार की मदद संभव नहीं थी । उन सभी परिवारों को अंतिम क्रियाकर्म में थोड़ी सी मदद करने का काम मैंने किया है क्योंकि गुनाहगार मरने वाले थे ना कि उनके परिवारजन।

वैसे भी मैं अभिषेक झा जी को याद दिला दुँ कि मैंने संपूर्ण मीडिया के सामने कहा था कि शराबबंदी कानून की पुनः समीक्षा होनी चाहिए। मैं 100% शराबबंदी का समर्थक हूं और मानता हूं कि शराब बहुत बड़ा सामाजिक अपराध है जो पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है ।

फिर भी मैं यह मानता हूं कि जिस श्रेणी का अपराध हो सजा उसी श्रेणी की होनी चाहिए।
दिल्ली से कोई परिवार दार्जिलिंग छुट्टियां मनाने जा रहा है और उसके गाड़ी में बिहार में एक बोतल शराब पकड़ी गई और उस परिवार की गाड़ी नीलाम हो जाती है। ऐसी कम से कम 5 घटनाएं मैं व्यक्तिगत तौर पर जानता हूं ।10 वर्ष के जेल का प्रावधान केवल उन पुलिस अधिकारियों के लिए होना चाहिए जिन्होंने माननीय नीतीश कुमार जी के इतने अच्छे सामाजिक सोच को नुकसान पहुंचाया है।

अगर मेरी बात समझ में नहीं आ रही हो तो मीडिया की दुनिया से बाहर जाकर अपने पंचायत के किसी भी आम व्यक्ति से संपर्क कर लें। आपको शराबबंदी और पुलिस की भूमिका अच्छे से समझ में आ जाएगी।

सम्राट अशोक राष्ट्रीय गौरव, लेखक की सफाई के बाद बंद होनी चाहिए बयानबाजी -सुशील कुमार मोदी

सम्राट अशोक पर आधारित उस पुरस्कृत नाटक में उनकी महानता की चर्चा भरी पड़ी है, औरंगजेब का कहीं जिक्र तक नहीं, लेकिन दुर्भाग्यवश, इस मुद्दे को तूल दिया जा रहा है।

86 वर्षीय लेखक दया प्रकाश सिन्हा 2010 से किसी राजनीतिक दल में नहीं हैं। उनके एक इंटरव्यू को गलत ढंग से प्रचारित कर एनडीए को तोड़ने की कोशिश की गई।

दया प्रकाश सिन्हा ने एक हिंदी दैनिक से ताजा इंटरव्यू मेंं जब सम्राट अशोक के प्रति आदर भाव प्रकट करते हुए सारी स्थिति स्पष्ट कर दी, तब एनडीए के दलों को इस विषय का यहीं पटाक्षेप कर परस्पर बयानबाजी बंद करनी चाहिए।

दया प्रकाश सिन्हा के गंभीर नाट्य लेखन और सम्राट अशोक की महानता को नई दृष्टि से प्रस्तुत करने के लिए उन्हें साहित्य अकादमी जैसी स्वायत्त संस्था ने पुरस्कृत किया। यही अकादमी दिनकर, अज्ञेय तक को पुरस्कृत कर चुकी है।

साहित्य अकादमी के निर्णय को किसी सरकार से जोड़ कर देखना उचित नहीं। सम्राट अशोक का भाजपा सदा सम्मान करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने उनकी स्मृति में डाक टिकट जारी किया था।

2015 में भाजपा ने बिहार में पहली बार सम्राट अशोक की 2320 वीं जयंती बड़े स्तर पर मनायी और हमारी पहल पर बिहार सरकार ने अप्रैल में उनकी जयंती पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की।

.हम अहिंसा और बौद्ध धर्म के प्रवर्तक सम्राट अशोक की कोई भी तुलना मंदिरों को तोड़ने और लूटने वाले औरंगजेब से कभी नहीं कर सकते।

अशोक ने स्वयं बौद्ध धर्म स्वीकार किया, लेकिन उनके राज्य में जबरन धर्मान्तरण की एक भी घटना नहीं हुई।
वे दूसरे धर्मों का सम्मान करने वाले उदार सम्राट थे, इसलिए अशोक स्तम्भ आज भी हमारा राष्ट्रीय गौरव प्रतीक है।

कमाल खान को रवीश की श्रद्धांजलि

जो भी टीवी देखता है, जो भी टीवी का दर्शक है वह जानता है कि कमाल खान कौन हैं. अपनी पत्रकारिता में वे किस तरह की शख्सियत रहे हैं .उन सभी करोड़ों दर्शकों के लिए, उनके सहयोगियों के लिए, परिवार के लिए तो बहुत दुखद खबर है ही . यकीन करना भी मुश्किल हो रहा है कि कमाल हमारे बीच में नहीं हैं. कमाल के बारे में बहुत सारी बातें की जा सकती हैं लेकिन इस वक्‍त ऐसा सदमा लगा है इस खबर से कि न तो कुछ याद आ रहा है, न कुछ समझ में आ रहा है कि उनके बारे में क्‍या कहा जाए. हर किसी के पास एक अलग-अलग कमाल खान हैं उनकी रिपोर्टिंग की अपनी यादें हैं. उन्‍होंने इस पेशे में जो अब बेहद खराब हो गया है और शर्मनाक पेशा हो गया है. आज टेलीविजन इससे बुरा तो कभी दुनिया में नहीं हुआ होगा जितना खराब इस देश में हो गया है. इसमें कुछ लोग हैं जो दिए की तरह टिमटिमा रहे थे, दिखाई दे रहे थे कि हां, यहां से भाषा, शराफत, शऊर को हासिल किया जा सकता है, यहां से ये चीजें बची हई नजर आती हैं।

इस कीचड़ हो चुकी चैनलों की दुनिया में वे कमल की तरह कमाल तरीके से खिले नजर आ रहे थे. जो हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन किसी को मुगालता नहीं होना चाहिए कि केवल माइक पकड़ लेने से, चैनल से जुड़ जाने से कोई कमाल खान बन जाता है. जब हम अपनी रिपोर्टिंग शुरू कर रहे थे तो कमाल के बारे में सुनते थे कि वे सफर में जाया करते थे तब अपनी गाड़ी में बहुत सी किताबें लेकर जाते थे. चार लाइन की स्क्रिप्‍ट लिखने के लिए वे कई बार घंटों लगा दिया करते थे. उन किताबों को पढ़ते थे, अपना रिफरेंस चुनते थे और बड़ी मेहनत के साथ] अपनी स्क्रिप्‍ट लिखते हैं. अब इस तरह की मेहनत की कद्र नहीं है. इस पेशे में ऐसे बहुत से लोग रहे जिन्‍होंने इस पेशे को खड़ा किया, जिन्‍होंने इसे देखने लायक बनाया, उसमें कमाल खान एक मजबूत बुनियाद के तौर पर हैं. इसके लिए उन्‍होंने कड़ी मेहनत की।

अगर आप उनकी स्क्रिप्‍ट देखेंगे तो पता चलेगा कि कमाल खान होने का मतलब क्‍या होता है. यह हवा में कोई नहीं बन जाता है. एक-एक शब्‍द उन तस्‍वीरों के साथ, जिस समाज में वे बात कर रहे हैं जिस दायरे में से वे आ रहे हैं, इन सबके बीच कमाल खान एक खिड़की सी खोल देते थे कि भाषा, शराफत और शऊर की एक ऐसी भी दुनिया हो सकती है, जहां पर बहुत सी तल्‍ख बातें बहुत हल्‍के तरीके से कही जा सकती हैं. इस मकसद से कुछ गलत है तो उसे ठीक किया जाए और सभी की बेहतरी के लिए इसे ठीक किया जाए. कमाल ने अपनी जिंदगी के जो पल गुजारे हैं, उनके बारे में उनकी पत्‍न्‍नी और बच्‍चे ही बेहतर बता सकते है. कई बार लोग नहीं समझते हैं कि टीवी में अच्‍छा पत्रकार होना कितना मुश्किल काम है. कमाल खान होने के लिए आपको बहुत मेहनत करनी पड़ती है. यह भी देखिए कि वे कि लखनऊ से आते, जिसकी तहजीब को लेकर कई किस्‍से हैं, किताबें है, इन सब के बीच कमाल खान भी तहज़ीब की एक अलग किताब की तरह थे.

काफी उम्र भी हो गई थी मगर शरीर को फिट भी रखते थे. उन्‍होंने बेहतरीन काम किया. कल तक ग्रुप में लिख रहे थे. उनका लिखने का अंदाज ऐसा था कि कई बार हंसी छूटती थी. कई बार समझ नहीं आता था कि कमाल साहब मजाक कर रहे हैं या गंभीरता से बात कर रहे हैं. कल मैं छुट्टी पर था तबीयत ठीक नहीं थी. कमाल की तबीयत के बारे में यह अंदाजा नहीं था. मैं सोचता कि उन्‍होंने अपने को फिट रखा है उनसे कुछ सीखना चाहिए लेकिन यह मौका नहीं मिला.

कल हमारे सहयोगी अनुराग द्वारी ने बताया कि उन्‍हें भोपाल में मुख्‍यमंत्री की प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में नहीं बुलाया गया, उन्‍हें बुरा लगा. मैं अनुराग से कह रहा था कि आप धीरज रखिए. अगर सीएम आपको नहीं बुला रहे तो यह उनका हल्‍कापन है. आजकल की सरकारें ऐसी हो गई हैं जो जनता के बीच, जनता के सहयोग से इस मीडिया को खत्‍म करने में लगी हैं. मैंने अनुराग से यही कहा कि कमाल खान साहब को यह सब भुगतना पड़ता है, उनसे बात करके देखते हैं कि अगर वे बोलना चाहें तो आपकी बात को लेकर प्राइम टाइम पर दिखा सकता हूं। और यह सब लोगों को जानना चाहिए कि आप काम के दौरान कितनी बातों को झेलते हैं. क्‍या देश को इन बातों से शर्म आनी बंद हो गई है.

कमाल खान के बारे में मैं रात तक बोल सकता हूं. जितनी शिद्दत से और समझदारी से उन्‍होंने अयोध्‍या की रिपोर्टिंग की है पिछले 20-25 साल में तो सब जाकर देखने लायक है कि वे किस तरह के हिंदुस्‍तान के बारे में आवाज दे रहे थे. जब कमाल अपनी रिपोर्टिंग में लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह का उदाहरण देते थे कि ‘हजरत जाते हैं लंदन, कृपा करो रघुनंदन’…तो कमाल उस हिंदुस्‍तान को आवाज दे रहे थे, कि सभी तो इसी की मिट्टी से निकले हैं। लेकिन नफरत की ऐसी आंधी चली कि उनके जैसा पत्रकार अपने को हाशिये पर महसूस करने लगा था. वे अपने आपको रोकने लगते थे कि ऐसी खबर करूंगा तो लोग यकीन करेंगे या नहीं. फिर लोग कहेंगे कि कमाल खान के अलावा कुछ और है इसलिए उन्‍होंने यह स्‍टोरी की. समाज और सरकार ने कमाल के पास किस तरह का माहौल बनाया था, हमें यह भी देखना पड़ेगा. उस माहौल में कमाल खान किस तरह अपनी रिपोर्टिंग कर रहे हैं, किस तरह से लिख रहे हैं कि बात पहचान पर न आए, मजहब पर न आए और बात पत्रकारिता की हो. इस हालात में इतने बड़े देश में चार, पांच, दस पत्रकार बच गए और वे इतनी मुश्किल से गुज़र रहे हैं, क्या किसी को शर्म नहीं आती है?

ये मुख्‍यमंत्री स्‍तर के लोग अपने आप को क्‍या समझने लगे हैं कि पत्रकारों को प्रेस कान्‍फ्रेंस से बाहर रखें. दिन भर से ये गोदी मीडिया के बीच में बैठे रहते हैं. इन सबके बीच लखनऊ में कमाल स्‍तंभ के रूप में खड़े रहे. हम उनके दिन और रात की तकलीफों को नहीं जानते. लखनऊ जो बदल गया, उसमें कोई कमाल खान कैसे बचा हुआ है? उनकी चिंताएं किस तरह की रहीं, हम नहीं जानते. यह सामान्‍य नुकसान नहीं है. आप समझ नहीं सकते कि कितने लोगों के दिल में, जेहन में कमाल बसे हुए हैं, उनकी रिपोर्टिंग की यादें बसी हुई हैं. आप क्‍या रिपोर्टिंग देखेंगे, आपको बोलने का तरीका बदल जाएगा, इसलिए वे कमाल खान हैं. इस उम्र में भी उन्‍होंने अपने को दुरुस्‍त-तंदुरुस्‍त रखा , यह यकीन के बाहर कि बात है कि उन्‍हें ऐसा हुआ. उन्‍हें कोरोना भी हुआ वे ठीक भी हुए इसके बाद भी काम करते रहे. जो भी अच्‍छी पत्रकारिता को समझने वाले दर्शक देश में बचे हैं जो दो चार सहयोगी पत्रकार जो समझते हैं कि कमाल खान का होना क्‍या है वे जानते हैं कि उनका जाना कितना बड़ा नुकसान हैं. बाकी सबके लिए यह औपचारिकता है।

कोराना का कहर दूसरे लहर से भी बड़ा खतरे का संकेत सरकार ने बुलाई आपात बैठक

#Covid19 बिहार में कोरोना की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और ये स्थिति रही तो दूसरे लहर से भी खतरनाक हो जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।

बिहार में पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना के 6541 नए मरीज मिले है. इनमें राजधानी पटना में सबसे ज्यादा 2116 कोरोना संक्रमित पाए गए है.

पटना में संक्रमण की रफ्तार हर दिन रिकॉर्ड तोड़ रही है। यहां कोरोना की जांच कराने वाला हर चौथा इंसान संक्रमित है। 24 घंटे में हुई 9882 लोगों की जांच में 2275 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

इससे संक्रमण की दर अब तक की सबसे अधिक 23.02 प्रतिशत हो गई है। बिहार में 24 घंटे में 6541 नए मामले आए हैं। इनमें पटना में 2116, मुंगेर में 298, मुजफ्फरपुर में 427 नए मामले आए हैं। जिससे संक्रमण की दर अब 3.51 प्रतिशत हो गई है।

पटना में कुल 2116 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है हालांकि, 24 घंटे में राज्य के 3671 संक्रमितों ने कोरोना को मात दी है। इसके बाद भी एक्टिव मामलों का आंकड़ा कोई बहुत कम नहीं हुआ है, राज्य में अभी भी 31,374 एक्टिव मामले हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भी संक्रमित हो गए हैं।

वह होम आइसोलेट रहेंगे। पटना में कुल 2116 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
वही तीसरी लहर में 30 दिसंबर से अब तक राज्य के 590 से अधिक डॉक्टरों और 5,000 से अधिक हेल्थ वर्करों को संक्रमित कर चुका है।

पटना AIIMS, IGIMS से लेकर PMCH और NMCH में रोज डॉक्टर पॉजिटिव हो रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। IMA का मानना है कि अगर हेल्थ वर्करों के संक्रमित होने की यही रफ्तार रही तो आगे मरीजों को इलाज मिलने में परेशानी हो सकती है।

उड़ान पर मौसम का असर एक दर्जन से अधिक फ्लाइट हुआ कैंसिल

आज पटना का मौसम साफ है इस कारण पटना एयरपोर्ट पर शुरूआत की फ्लाइट्स टाइम पर आईं और वापस भी गईं। लेकिन दिल्ली, मुम्बई और बेंगलुरु की कुछ फ्लाइट्स कैंसिल होने की वजह से इन शहरों को जाने वाली कुछ फ्लाइट्स कैंसिल हुई है ।

अरावइल और डिपार्चर को मिलाकर आज कुल 12 फ्लाइट्स कैंसिल की गई है। इसमें दिल्ली की 8, बेंगलुरु की 2 और मुम्बई की 2 फ्लाइट शामिल है। वहीं, बेंगलुरु से आने वाली 1 फ्लाइट लेट हुई है। जबकि, डिपार्चर में दिल्ली व बेंगलुरु की 1-1 फ्लाइट रिशिड्यूल हुई है।

अराइवल में कैंसिल हुई फ्लाइट
सुबह 10:40 की दिल्ली से आने वाली G8-143
दोपहर 1:10 पर दिल्ली से आने वाली G8-131
दोपहर 1:45 पर मुम्बई से आने वाली G8-351
दोपहर बाद 3:00 बजे दिल्ली से आने वाली SG-2043
दोपहर बाद 3:25 पर बेंगलुरु से आने वाली AI-573
दोपहर बाद 3:35 की दिल्ली से आने वाली G8-231
लेट आने वाली फ्लाइट
बेंगलुरु से आने वाली G8-274 दोपहर 2:10 की जगह 3:10 बजे तक आएगी।
पटना से कैंसिल हुई फ्लाइट
सुबह 11:20 पर दिल्ली जाने वाली G8-144
दोपहर 1:40 पर दिल्ली जाने वाली G8-229
दोपहर 2:20 पर मुम्बई जाने वाली G8-352
शाम 4:05 पर दिल्ली जाने वाली G8-132
शाम 4 :20 बजे बेंगलुरु जाने वाली AI-574
लेट जाने वाली फ्लाइट
दिल्ली जाने वाली दोपहर 12:50 की फ्लाइट G8-2512 आज दोपहर 2:35 पर जाएगी
बेंगलुरु जाने वाली दोपहर 2:45 की G8-273 आज 3:45 पर जाएगी

संघ का कहीं पे निगाहें कहीं पर निशाना

संघ सम्राट अशोक के बहाने भारत की आत्मा पर चोट पहुँचाना चाह रहा है ।
संघ की कही पे निगाहें कही पे निशाना

संघ किस तरीके से काम करती है उसके सौ वर्षो के इतिहास पर गौर करेंगे तो राम जन्मभूमि,धारा 370 ,कॉमन सिविल कोर्ट ,धर्मांतरण,जनसंख्या नियंत्रण उनका राजनीतिक एजेंडा रहा है जिसका नेतृत्व बीजेपी करती है।

लेकिन संघ का एक दर्जन से अधिक ऐसी अनुषांगिक संस्था है जो संघ के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की सोच के तहत भारतीय इतिहास ,संस्कृति और भारतीय सोच को बदलने को लेकर काम कर रही है ।जो इनका स्लीपर सेल है, जिसकी कोई पहचान नहीं है लेकिन अंदर ही अंदर उसके सहारे काम चलता रहता है।

संघ के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में सम्राट अशोक,चाणक्य, बुद्ध, महावीर ,कबीर ,रैदास ,मीरा ,गांधी,विवेकानंद, नेहरू और अम्बेडकर जैसे शासक,राजनीतिक विचारक,समाज सुधारक ,साहित्यकार और कवि फिट नहीं बैठते हैं, उन्हें भारतीय तिरंगा और राष्ट्रगान भी पसंद नहीं है उन्हें राष्ट्र गीत भी पसंद नहीं है लेकिन वह गीत मुसलमान के भावना को ठेस पहुंचता है इसलिए उसको अपने राजनीतिक मंच से उठाता रहते है।

आजादी के बाद गांधी इनके निशाने पर हैं क्यों कि संघ के सांस्कृति राष्ट्रवाद के फैलाव में गांधीवाद बड़ा बाधक है इसी तरह नेहरु का विचार और पीएम के रूप में किया गया काम संघ के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रतिकूल है इसलिए एक रणनीति के तहत गांधी और नेहरू को भारतीय सोच से बाहर निकालने के लिए संघ बड़े स्तर पर काम कर रही है ।
भारत के आजादी के आन्दोलन में जब तक गांधी और नेहरू के योगदान की चर्चा होती रहेगी संघ अपने एजेंडे को आगे नहीं बढ़ पाएगी ।

इस तरह के काम के लिए संघ का अपना एक अलग तरीका है गांधी और नेहरू पर हमला किस तरीके से किया जा रहा है इसे आप महसूस कर रहे होगे।

लेकिन सम्राट अशोक पर हमला भी संघ के एक रणनीति का हिस्सा ही है और संघ जिस तरीके से काम करती है उसका यह पहला चरण है ।

जिस व्यक्ति ने सम्राट अशोक की तुलना औरंगजेब से किया है वो व्यक्ति यूपी कैडर के रिटाइर आईएस अधिकारी है फिलहाल बहुत बिमार है और बड़ी मुश्किल से बात कर पा रहे हैं।

जिस नाटक में सम्राट अशोक को औरंगजेब से तुलना किया गया है उस नाटक को पहले साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया हाल ही में उन्हें साहित्य के क्षेत्र में बेहतर काम करने के लिए पदम श्री दिया गया।

जैसे ही सिन्हा जी का पहचान बना उनके नाटक को लेकर एक खबर प्रकाशित करवाया गया ताकि इसको लेकर क्या प्रतिक्रिया आती है उसको देखा जाए । संघ का काम करने का यह तरीका है पहले किसी गुमनाम व्यक्ति से मुद्दा जनता के बीच परोसता है फिर उसको लेकर क्या प्रतिक्रिया आयी उस पर नजर रखता है ।

और सम्राट अशोक के मामले में जैसे ही तीव्र प्रतिक्रिया आयी संघ और बीजेपी दोनों दया प्रकाश सिन्हा से पल्ला झार लिया और बिहार बीजेपी एक कदम आगे बढ़ाते हुए सिन्हा जी पर मुकदमा भी दर्ज कर दिया। लक्ष्य कुछ ओर है इसलिए यह खेल यही नहीं रुकेंगा देखते रहिए एक सप्ताह के अंदर उड़ीसा के किसी विद्वान के हवाले से इसी तरह की प्रतिक्रिया सम्राट अशोक को लेकर आयेगी इंतजार करिए, संघ के काम करने का यही तरीका है ।


लेकिन आपका यह सवाल स्वाभाविक होगा कि इस समय सम्राट अशोक का औरंगजेब से तुलना करने की वजह क्या है, जी है सवाल आपका लाजमी है और मौजू भी है।


ऐसा है केंद्र की मोदी सरकार द्वारा जो नया संसद भवन बनया जा रहा है उसमें लोकसभा अध्यक्ष के पीछे लगा अशोक स्तम्भ और सत्यमेव जयते को हटा दिया गया है क्यों कि यह प्रतीक संघ के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के अनुकूल नहीं है और संघ के निर्देश पर यह काम किया गया है ,संसद भवन का काम अंतिम चरण में है और 2022 में इस भवन का उद्घाटन होना है ऐसे में उस समय किस स्तर तक हंगामा हो सकता है उसी को देखते हुए दया प्रसाद सिन्हा द्वारा सम्राट अशोक पर लिखा गया नाटक से जुड़ी खबर चलवा कर टेस्ट ले रहा है ।

कोरोना को लेकर राज्य सरकार हुआ सख्त गंगा स्नान तक पर लगायी रोक

#Covid19 भारत में कोरोना वायरस (Coronavirus) के मामले तो तेजी से बढ़ ही रहे हैं, अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है. पहले कोरोना से संक्रमित 10-15 मरीज हर दिन अस्पताल में आते थे, आज 35-40 मरीज अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं. यानी अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या तीन गुणा तक बढ़ गयी है इसको देखते हुए पीएम मोदी ने आज देश के सभी मुख्यमंत्री के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ कर हालात का जायजा लिये ।वही नीतीश कुमार के कोरोना संक्रमित होने कि वजह से स्वास्थ्यमंत्री मंगल पांडेय बैठक में भाग ले रहे हैं ।

वहीकोरोना की तीसरी लहर में पहली बार ऐसा हुआ है जब मौत के आंकड़ों ने डरा दिया है। महज 3 दिनों में 16 लोगों की मौत ने वायरस को हल्के में लेने वालों के लिए बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। संक्रमण के आंकड़ों के साथ बढ़ता मौत का मामला यह संकेत दे रहा है कि कभी भी वायरस खतरनाक हो सकता है।

वही आज मुख्यसचिव ने सूबे के सभी डीएम, एसएसपी और एसपी को आदेश दिया है कि वह स्वयं या अधीनस्थ पदाधिकारियों का दल गठित कर कोरोना को लेकर जारी प्रतिबंधों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करे और इसको लेकर प्रतिदिन जांच किए गए व्यक्तियों की संख्या और उनसे वसूली गई रकम को लेकर रिपोर्ट भी भेजे।यह विशेष अभियान आज से तीन दिनों तक पूरे राज्य में चलेगा वही पटना DM चंद्रशेखर ने आदेश जारी किया है कि इस बार मकर संक्रांति के अवसर पर मेला, गंगा स्नान और पतंबाजी पर रोक रहेगा जो भी इस नियम को नहीं मानेंगे उन पर कड़ी

बिहार सरकार का बाल ह्दय योजना के तहत चयनित 219 बच्चों को हो चुका है सफल सर्जरी

बाल ह्ृदय योजना के तहत और 19 बच्चे सर्जरी के लिए गए अहमदाबादः मंगल पांडेय
कोरोनाकाल में भी सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएं प्राथमिकताओं में हर माह अहमदाबाद भेजे जा रहे बच्चे, अब तक 219 सफल सर्जरी ।

पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि कोरानाकाल में भी राज्य सरकार द्वारा महत्वपूर्ण योजनाआें को प्राथमिकता दी जा रही है। कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा बाल हृदय योजना के तहत इस सप्ताह 8 जनवरी को राज्य के विभिन्न जिलों से चिह्नित 19 दिल में छेद वाले बच्चों को मुफ्त सर्जरी के लिए अहमदाबाद भेजा गया। विभाग की यह योजना बच्चों को न सिर्फ नया जीवन दे रही है, बल्कि उनके परिवार में एक नई उम्मीद जगा रही है। खासकर गरीब एवं मध्यम वर्ग के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है।

श्री पांडेय ने कहा कि इन बच्चों को कोरोना प्रोटोकॉल के तहत सर्जरी के लिए भेजा जा रहा है। भेजने के पूर्व बच्चे और उनके अभिभावक की आरटीपीसीआर जांच करायी जा रही है। रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही इन लोगों को भेजा जाता है। पटना के इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान में स्क्रीनिंग में गंभीर रूप से हृदय रोग से ग्रसित बच्चों की पहचान की गई। जिन्हें सर्जरी की आवश्यकता है, उन्हें अहमदाबाद के सत्य सांई अस्पताल भेजा गया। विभाग द्वारा हर माह दो-तीन बार बच्चों को सामूहिक इलाज के लिए भेजने की प्रक्रिया जारी है। अब तक 286 बच्चे भेजे जा चुके हैं, जिनमें से 219 का सफल आपरेशन हो गया है।

श्री पांडेय ने कहा कि राज्य में हृदय में छेद के साथ जन्मे बच्चों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के लिए बाल हृदय योजना प्रारंभ की गई है। इस योजना के क्रियान्वायन के लिए आईजीआईएमएस एवं इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान पटना को चिन्हित किया गया है। इसमें सत्य सांई हृदय अस्पताल अहमदाबाद के डॉक्टर सहयोग दे रहे हैं। इस योजना के तहत जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के आयु वाले बच्चों व किशोरों को हृदय रोग से बचाया जा सकता है।

मकर संक्रान्ति को लेकर इस बार भी एक मत नहीं हैं विद्वान

मकर संक्रान्ति, 14 जनवरी, 2022 ई :

वर्ष भर में 12 राशियों की संक्रान्तियाँ होतीं हैं। इनमें मकर संक्रान्ति से छह महीने तक सूर्य उत्तरायण रहते हैं तथा कर्क राशि की संक्रान्ति से दक्षिणायन सूर्य आरम्भ होते हैं। उत्तरायण सूर्य में यज्ञ, देवप्रतिष्ठा आदि के लिए शुभ मुहूर्त होते हैं। ऐसी मान्यता है कि जबतक सूर्य उत्तरायण रहते हैं तब तक छह महीनों के लिए देवताओं का दिन रहता है तथा दक्षिणायन सूर्य के महीनों में देवताओं की रात रहती है। अतः मकर संक्रान्ति का यह दिन देवताओं के लिए प्रातःकाल माना जाता है। दिन भर में जो धार्मिक महत्त्व प्रातःकाल का होता है, वैसा ही महत्त्व मकर संक्रान्ति का भी वर्ष भर में होता है।

इस वर्ष दिनांक 14 जनवरी की रात्रि 8.34 मिनट पर संक्रमण हो रहा है। चूँकि संक्रमण काल रात्रि में भी हो सकता है; अतः धर्मशास्त्रियों ने संक्रमण काल के आधार पर पुण्यकाल तथा पुण्याह की व्यवस्था की है।

गणित-ज्योतिष के अनुसार संक्रान्ति के पहले या बाद 8 घंटा तक सूर्य का बिम्ब उस संक्रान्ति-बिन्दु पर रहता है। अतः संक्रमण-काल से 8 घंटा पहले अथवा बाद, जब भी उदित सूर्य मिलें, पुण्यकाल माना जायेगा। इस वर्ष रात्रि 8:34 बजे संक्रमण के पूर्व दिनांक 14 को हमें सूर्य-संक्रान्ति का बिम्ब प्राप्त होगा, अतः संक्रान्ति सम्बन्धी गणित के अनुसार भी 14 को ही मनाया जाना चाहिए।

मिथिला के सभी निबन्धकारों ने एकमत से निर्णय दिया है कि आधी रात से पहले यदि संक्रमण है, तो पुण्यकाल पूर्वदिन मध्याह्न के बाद होगा तथा वह पूरा दिन पुण्याह कहलायेगा। इन सभी प्रमाणों का संकलन कर म.म. मुकुन्द झा बख्शी ने ‘पर्वनिर्णय’ में यही व्यवस्था दी है। अतः मिथिला से प्रकाशित पंचाङ्ग में दिनांक 14 को मकर संक्रान्ति माना गया है।

निर्णयसिन्धु में कमलाकर भट्ट ने मकर-संक्रान्ति के सम्बन्ध में सभी मतों को उद्धृत कर दिया है, जिनमें माधव का मत है कि यदि रात्रि में संक्रमण हो तो दूसरे दिन पुण्यकाल माना जाए। किन्तु अनन्तभट्ट के अनुसार यदि आधी रात से पूर्व संक्रमण हो तो पूर्व दिन माना जाए। इस प्रकार कमलाकर में अपना कोई निर्णय नहीं दिया है। धर्मसिन्धुकार का मत है कि रात्रि के पूर्वभाग, परभाग अथवा निशीथ में संक्रमण हो तो दूसरे दिन पुण्यकाल होगा। इस मत से दिनांक 15 को मकर संक्रान्ति होगी।

इस विषय में कमलाकर भट्ट ने भी क्षेत्रीय परम्पराओं का महत्त्व दिया है, अतः धर्मशास्त्र के अनुसार जिनकी जो परम्परा है उस दिन मनाये

लेखक–आचार्य किशोर कुणात

शराबबंदी कानून को लेकर राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका कहां बेवजह कोर्ट का समय जाया ना करे

शराबबंदी को लेकर राज्य सरकार के जिद्द को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है मंगलवार को राज्य के कड़े शराबबंदी कानून के तहत आरोपियों को अग्रिम और नियमित जमानत देने को चुनौती देने वाली विभिन्न अपील को यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया कि इन मामलों ने अदालतों के काम पर असर डाला है।पटना हाईकोर्ट के 14 से 15 जज केवल इन मामलों की ही सुनवाई कर रहे हैं. सीजेआई एन वी रमण के नेतृत्व वाली पीठ ने बिहार सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि आरोपियों से जब्त की गई शराब की मात्रा को ध्यान में रखते हुए जमानत आदेश पारित करना सुनिश्चित करने के लिए दिशा निर्देश तैयार किए जाएं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘आप जानते हैं कि इस कानून (बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016) ने पटना हाईकोर्ट के कामकाज पर कितना प्रभाव डाला है और वहां एक मामले को सूचीबद्ध करने में एक साल लग रहा है, सभी अदालतें शराब से संबंधित जमानत मामलों से भरी पड़ी हैं.’

राज्य सरकार के अपील को खारिज करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि इन मामलों में 2017 में उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दी गई थी, इसलिए अब इसके लिए याचिकाओं से निपटना उचित नहीं होगा, चीफ जस्टिस ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा कि आपके हिसाब से हमें सिर्फ इसलिए जमानत नहीं देनी चाहिए, क्योंकि आपने कानून बना दिया है।

पीठ ने तब हत्या पर भारतीय दंड संहिता के प्रावधान का हवाला दिया और कहा कि जमानत और कभी-कभी, इन मामलों में अदालतों द्वारा अग्रिम जमानत भी दी जाती है. पीठ ने कहा कि राज्य में इन मामलों की वजह से अदालतों का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है।पीठ ने राज्य सरकार से मुकदमे आगे बढ़ाने को कहा है, क्योंकि उसने जांच पूरी करने के बाद इन मामलों में आरोप पत्र दाखिल किया है।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का बिहार में शराबबंदी कानून पर दूरगामी परिणाम सामने आयेंगा और आने वाले समय में इस मामले में गिरफ्तार अभियुक्त राहत मिल सकती है ।

भाकपा माले यूपी ,उत्तराखंड और पंजाब में उतारेगा अपना उम्मीदवार

भाकपा-माले ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में चुनाव लड़ने का ऐलान किया है । आज पटना (Patna) में भाकपा-माले (CPI-ML) के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य (Dipankar Bhattacharya) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी घोषणा कि और कहा कि यूपी में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के साथ हमारी बातचीत चल रही है । हमें उम्मीद है कि यहां बीजेपी को शिकस्त देने के लिए एक व्यापक गठबंधन बनेगा ।

उन्होंने कहा कि पांच राज्यों में होने वाला चुनाव काफी महत्वपूर्ण है यूपी, उत्तराखंड व पंजाब में हमारी पार्टी चुनाव लड़ेगी । यूपी में बदलाव दिख रहा है, बिहार में आकर जहां मामला फंसा था और हम जीतते-जीतते रह गए थे, उससे यूपी ने बहुत कुछ सीखा है. उन्होंने कहा कि इस बार बीजेपी को कोई मौका नहीं मिलने वाला है । यहां रोजगार बड़ा मुद्दा है. यूपी में जिस प्रकार से दलितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों का दमन किया गया और पुलिस राज कायम किया गया, उसके खिलाफ वहां की जनता लोकतंत्र के पक्ष में अपना फैसला सुनाएगी ।

माले महासचिव ने यह भी कहा कि पंजाब के चुनाव में किसान आंदोलन की आवाज सुनी जाएगी । किसानों के मुद्दों के साथ-साथ दलितों, मजदूरों, भूमिहीन गरीबों के सवाल जबरदस्त तरीके से मुद्दे बने हैं । वहां सरकार की ओर से घोषणाएं हुई हैं, लेकिन जमीन पर काम कम हुआ है।

बिहार में कोरोना का कहरा जारी 48 घंटे में हुई 12 मौत

#Covid19 बिहार में कोरोना का कहर जारी है पिछले 24 घंटे में 6413 कोरोना के मरीज मिले हैं जिसमें पटना में सबसे ज्यादा 2014 मरीज मिले है और इसके साथ ही राज्य में एक्टिव केसों की संख्या बढ़कर 28659 हुई। वही पिछले 48 घंटे में 12 लोगों की मौत हो गयी है ।

कोरोना की तीसरी लहर में पहली बार एक साथ 7 मौत हुई है। पटना AIIMS में 67 साल की संक्रमित महिला की मौत हुई है। वह सारण की रहने वाली थी। 10 जनवरी को उन्हें AIIMS में भर्ती कराया गया था और 11 को मौत हो गई। नालंदा मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को 3 मौतें हुई हैं। इनमें आलमगंज पटना के 70 साल के संक्रमित, जमुई के 70 साल के संक्रमित और पटना के गौर हट्‌टा के 68 साल के संक्रमित शामिल हैं।

1–हलके में ना ले कोरोना को घातक साबित हो सकता है

मौत का यह आकड़ा कोरोना की दूसरी लहर में भी शुरुआती दिनों में ऐसा ही था हालांकि इस बार की चुनौती दोहरी है। क्योंकि कोरोना के एक नहीं 2 वैरिएंट से लड़ाई है। इसमें एक डेल्टा है, जिसने दूसरी लहर में तबाही मचाई। वहीं, दूसरा ओमिक्रॉन, जो संक्रमण की रफ्तार को कम्युनिटी स्प्रेड कर दिया है। ऐसे में अब खतरा बढ़ रहा है। वैक्सीनेशन और कोरोना प्रोटोकाॅल में लापरवाही भारी पड़ सकती है। क्योंकि वायरस का कम्युनिटी स्प्रेड हो चुका है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग भी वायरस को अंडर स्टीमेट करना खतरनाक बता रहा है।

एक्सपर्ट बताते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में डेल्टा ने तबाही मचा दी थी। इस बार भी वह जानलेवा है। मौत का कारण भी बन रहा है। वैक्सीनेशन नहीं कराने वालों पर इसका बड़ा असर दिख रहा है।

कोरोना पर स्टडी करने वाले पटना एम्स के ट्रामा इमरजेंसी के एचओडी डॉ. अनिल कुमार का कहना है कि अगर वैक्सीनेटेड नहीं है और उसके बाद भी कोरोना को हल्के में ले रहे। बिना मास्क के सोशल डिस्टेंस भी नहीं मान रहे तो यह जान से बड़ा खिलवाड़ है। डेल्टा अभी खत्म नहीं हुआ था और वह आज भी एक्टिव है। ऐसे में 48 घंटों के दौरान 12 मौत खतरे की घंटी है।

2–प्रतिबंध के साथ लांक डाउन बिहार में जारी रहेगा

हालांकि आपदा प्रबंधन प्राधिकारी की बैठक में और सख्त प्रतिबंध लगाने और शनिवार और रविवार को पूर्ण कर्फ्यू पर विचार किया गया लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल जो पाबंदी लगी हुई है उसे ही जारी रखने के पक्ष थे फिलहाल बिहार में जारी रहेगी पाबंदी और जो गाइडलाइंस जारी हुआ है उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है एक सप्ताह बाद फिर बैठक होगी उस बैठक में हालात की समीक्षा के बाद आगे का निर्णय लिया जायेगा ।

कोहरा और बारिश की वजह से उड़ान सेवा पर पड़ा असर

पटना -कोहार और बादल छाये रहने के कारण आज भी उड़ान सेवा प्रभावित रहा एयरपोर्ट की और से जारी सूचना के अनुसार बुधवार को सुबह 9 बजे से लेकर शाम 7:25 बजे तक के जारी किए गए टाइम-टेबल के अनुसार आने-जाने में कुल 12 फ्लाइट कैंसिल हुई है। जिसमें 6 अराइवल की तो 6 फ्लाइट डिपार्चर की कैंसिल है। जबकि, आने-जाने में कुल 5 फ्लाइट आज रिशिड्यूल की गई है…

आने में कैंसिल हुई फ्लाइट

सुबह 9 बजे की दिल्ली से आने वाली SG-8721
सुबह 10:40 की दिल्ली से आने वाली G8-143
सुबह 11:55 पर बेंगलुरु से आने वाली G8-873
दोपहर 12:20 पर दिल्ली से आने वाली G8-2511
दोपहर 1:10 पर दिल्ली से आने वाली G8-131
दोपहर बाद 3:35 पर दिल्ली से आने वाली G8-231

इस वजह यात्रियों को खासा परेशानी हो रही है मौसम विभाग का जो पूर्वानुमान है उसके अनुसार फिलहाल तीन दिनों तक स्थिति में सुधार की सम्भावना नहीं है

बिहार में मौसम का मिजाज बदला कई जिलों में हो रही है बारिश

मौसम विभाग की माने तो आने वाले 3 दिनों तक राजधानी सहित पूरे प्रदेश में बारिश होगी चक्रवाती परिसंचरण बिहार और झारखंड पर पड़ रहा है इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी से पश्चिमी विक्षोभ भी बिहार के मौसम को इफेक्ट कर रहा है दिन और रात के तापमान में कोई खास परिवर्तन नहीं होगा कई स्थानों पर कुहासा और कोहरा का असर देखने को मिलेगा ।

राज्य में सारण के मसरख में सबसे ज्यादा बरसात हुई है 22 पॉइंट 6 मिलीमीटर बारिश हुई है राज्य में पश्चिम चंपारण में सबसे कम तापमान 11.6 आंका गया। कि अररिया में सबसे ज्यादा 25.3 आंका गया। मौसम विभाग की मानें तो दरभंगा समस्तीपुर बेगूसराय से सहरसा मधेपुरा भागलपुर जमुई पूर्णिया कटिहार में बारिश नहीं हुई है ।

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कोरोना गाइडलाइन के तहत सूबे में चल रहा मिशन परिवार विकास अभियानः मंगल पांडेय

#Covid19 कोरोना गाइडलाइन के तहत सूबे में चल रहा मिशन परिवार विकास अभियानः मंगल पांडेय

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि कोरोना संक्रमण के काल में भी स्वास्थ्य विभाग परिवार नियोजन पर फोकस करने की योजना पर काम कर रहा है। इसकी जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए राज्यभर में 29 जनवरी तक परिवार विकास अभियान चलेगा। इसके तहत 10 से 16 जनवरी तक दंपत्ति संपर्क पखवाड़ा, तो 17 से 29 जनवरी तक परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा आयोजित की गई है। कोरोना संक्रमण के बीच इस को अभियान आयोजित करने को लेकर विभाग द्वारा गाइडलाइन जारी किया है।

श्री पांडेय ने कहा कि विभाग द्वारा 10 से 16 जनवरी तक दंपती संपर्क अभियान चलाकर योग्य लाभुकों की पहचान कर उसकी सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इसकी जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ता और एएनएम को दी गई है। अभियान के दौरान परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी पर जोर दिया जाएगा। मिशन परिवार विकास अभियान का आयोजन सभी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल एवं सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आयोजित किया जायेगा। अभियान के दौरान इच्छुक तथा योग्य दंपतियों को परिवार नियोजन के अस्थाई एवं स्थाई उपाय अपनाने के लिए प्रेरित भी किया जायेगा।

श्री पांडेय ने कहा कि गर्भनिरोधक सूई अंतरा सेवा की उपलब्धता अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ साथ शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर सहित स्वास्थ्य उपकेंद्र तक के सभी स्वास्थ्य ईकाइयों पर की गई है। आमजन में जागरूकता लाने के लिए प्रचार प्रसार के अंतर्गत सही उम्र में शादी, शादी के कम से कम दो साल के बाद पहला बच्चा, दो बच्चों में कम से कम तीन साल का अंतर, परिवार नियोजन के स्थायी एवं अस्थायी उपाय, परिवार कल्याण ऑपरेशन में पुरुषों की भागीदारी पर जोर देंगे।

हाईकोर्ट में कोरोना महामारी से निपटने को लेकर राज्य सरकार की तैयारी पर सुनवाई टली ।

#Covid19 पटना हाईकोर्ट में राज्य में कोरोना महामारी के नए वेरिएंट के बढ़ते प्रभाव के रोक थाम व नियंत्रित किये जाने के मामले पर सुनवाई कल 13 जनवरी,2022 तक टली। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने शिवानी कौशिक व अन्य की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की।

पिछली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने इस महामारी के रोक थाम और नियंत्रित करने के लिए की जा रही कारवाइयों का ब्यौरा दिया।

इससे पहले की सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को ये बताने को कहा था कि करोना महामारी के तीसरे लहर के रोकथाम और स्वास्थ्य सेवा की क्या कदम उठाए जा रहे है।।एडवोकेट जेनरल ने कोर्ट को बताया कि इस महामारी पर नियंत्रण के कई तरह के राज्य सरकार ने कदम उठाए हैं।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि करोना महामारी के रोक थाम के दिए गए दिशानिर्देशों का पालन सख्त तरीके किया जा रहा है।सार्वजानिक स्थलों,सिनेमा,मॉल,पार्क आदि को फिलहाल बंद कर दिया गया।
साथ ही 10 रात्रि से सुबह पाँच बजे तक curfew भी प्रशासन ने लागू कर दिया है।
सरकारी,निजी दफ्तरों में कर्मचारियों के पचास फी सदी उपस्थिति के साथ ही कार्य होगा।स्कूलों कॉलेजों में भी इसी तरह की व्यवस्था की गई हैं।
उन्होंने कोर्ट को जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में स्वास्थ्य सेवा को इसके महामारी से निबटने कार्रवाई करने को तैयार किया जा रहा।सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में करोना मरीज के ईलाज के पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

कोर्ट को यह भी बताया गया कि अभी दो लाख व्यक्तियों का प्रति दिन टेस्ट किया जा रहा है।ऑक्सीजन की आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त है और अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति के पूरी कार्रवाई हो रही है।

जो व्यक्ति करोना से पीड़ित हैं,उनके लिए ईलाज की व्यवस्था की गई है।उन्हें आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही है।अभी जो ओम्रिकोन नामक नए वेरिएंट के तेजी से बढ़ने के कारण स्थिति में परिवर्तन हो रहा है। दिल्ली,मुंबई जैसे शहरों से ले कर देश के अन्य भागों में ओम्रिकोन बहुत तेजी से फैल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट व अन्य कई हाई कोर्ट में ऑनलाइन सुनवाई शुरू कर दी गई है। इस स्थिति को देखते हुए पटना हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह ऑनलाइन सुनवाई प्रारम्भ हो चुका है।

इस मामले पर 13 जनवरी, 2022को सुनवाई होगी।

लॉ कॉलेजों की संबद्धता मामले में आज हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सभी सरकारी व निजी 27 लॉ कालेजों की संबद्धता के मामले की सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने कुणाल कौशल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया को inspection रिपोर्ट की कॉपी सम्बंधित पक्षों देने का निर्देश दिया।

पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने इन कालेजों का निरीक्षण कर बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया को तीन सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।साथ ही कोर्ट ने कॉउन्सिल को जिन कॉलेजो को पढ़ाई जारी करने की अनुमति दी है, वहां व्यवस्था सम्बन्ध व सुविधाओं के सम्बन्ध में हलफनामा दायर करने को कहा था।

पिछ्ली सुनवाई में कोर्ट ने सभी लॉ कालेजों को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के समक्ष एक सप्ताह में निरीक्षण हेतु आवेदन देने का निर्देश दिया था। साथ ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया इन कालेजों का वर्चुअल या फिजिकल निरीक्षण करने का निर्देश दिया था।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निरीक्षण कमेटी का रिपोर्ट बार काउंसिल ऑफ इंडिया के संबंधित कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाना था। यह कमेटी इनके रिपोर्ट पर निर्णय लेगी।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया यह देखेगी कि विधि शिक्षा, 2008 के नियमों का पालन इन शिक्षण संस्थानों में किया जा रहा है या नहीं। इन लॉ कालेजों को पुनः चालू करने के लिए अस्थाई अनुमति देते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया किसी भी प्रकार का नियमों में ढील नहीं देगी।

इससे पूर्व की सुनवाई में पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सभी सरकारी व निजी लॉ कालेजों में नामांकन पर रोक लगा दिया था। साथ ही चांसलर कार्यालय, राज्य सरकार, संबंधित विश्वविद्यालय व अन्य से जवाब तलब किया गया था।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट पेश किया था, जिसमें यह कहा गया था कि राज्य में जो लॉ कालेज हैं, उनमें समुचित व्यवस्था नहीं है। योग्य शिक्षकों व प्रशासनिक अधिकारियों की भी काफी कमी हैं। इसका असर लॉ की पढ़ाई पर पड़ रहा है। साथ ही साथ बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है।

याचिकाकर्ता के वकील दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि राज्य के किसी भी सरकारी व निजी लॉ कालेजों में रूल्स ऑफ लीगल एजुकेशन, 2008 के प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है।

याचिकाकर्ता के ओर से कोर्ट में पक्ष प्रस्तुत करते हुए अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि राज्य में सरकारी व निजी लॉ कालेज 27 हैं, लेकिन कहीं भी पढ़ाई की पूरी व्यवस्था नहीं होने के कारण लॉ की पढ़ाई का स्तर लगातार गिर ही जा रहा है। इस मामले पर 17 जनवरी,2022 को फिर सुनवाई होगी।

मुजरा और तबला का कहरवा ताल बस यादो में ही शेष रह गयी है

कोई तीन दशक पहले तक राजपूत के बेटे की शादी में बारात निकलने से पहले एक खास तरह की तैयारी होती थी और उस तैयारी पर बरात के सबसे जिम्मेदार व्यक्ति की खास नजर रहती थी।कालीन ,मसलद ,इत्रदान ,गुलाब खास , पनबट्टा ,ट्रे के साथ साथ कई तरह के फल और ड्राई फ्रूट्स की विशेष तौर पर खरीदारी होती है। कालीन,इत्रदान ,गुलाब खास, पनबट्टा और कई तरह का ट्रे सभी चांदी से निर्मित होते थे ये सारी सामग्री इलाके के किस बाबू साहेब के पास बढ़िया है सबको पता रहता था और जैसे ही शादी ठीक होता था। सबको निमंत्रण के साथ सूचित कर दिया जाता था कि बेटे की शादी है आपके सहयोग की जरूरत है। जिनके पास इस तरह का सामान हुआ करता था वो शादी से दो तीन दिन पहले उसका अच्छे से सफाई करा कर शादी के एक दिन पहले मखमली कपड़े में सजा कर लड़के वाले के यहां भिजवा दिया करते थे।

मुजरा नाच की कला भी आधुनिकता की भेट चढ़ गया

ये सारी तैयारी मुजरा की महफिल राजशाही दिखे इसके लिए की जाती है इतना ही नहीं इलाके में एक दो लोग होते थे जिन्हें पता रहता था कि चतुर्भुजस्थान (मुजफ्फरपुर)या सोना गाछी (कोलकाता) की कौन सी तवायफ है जो अच्छा मुजरा गाती है ,उन्हें लड़के वाले विशेष तौर पर आमंत्रित करते थे ।

इन तमाम तैयारी में लड़के वाले के घर की महिलाएं भी शामिल रहती थी और कुछ छूटे नहीं इसका खास ख्याल रखती थी।
शादी की रात तवायफ की नाच में लड़के के परिवार वाले शामिल नहीं होते थे और कहां जाता था कि आज लड़की के गांव वाले के लिए नाच हो रहा है ,लेकिन शादी के कल होकर जिसे मरजाद कहां जाता था उस दिन खास तरह के नाच का आयोजन होता था एक तरफ लड़की वालो के यहाँ बकरा बनता रहता था दूसरा जहां बारात ठहरता था जिसे जनवासा कहां जाता था वहां दोपहर में खास तरह का महफिल सजता था इस महफिल में तवायफ पूरी तौर पर परम्परागत ड्रेस में आती थी और एक से एक मुजरा गाती थी उस महफिल में दूल्हा राजा भी बैठते थे।

इतना ही नही बाबा से लेकर पोता तक दमाद बाबू सब साथ बैठ कर मुजरा देखते थे मुझे आज भी दो शादी का कुछ कुछ याद है तबला ,ढोलक और हारमोनियम यही तीन चार वाद्ययंत्र हुआ करता था ,जुगलबंदी के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होती थी और उस दौरान तवायफ की घुँघरू के साथ तबला ,ढोलक और हारमोनियम बजाने वाले का हाथ चलता था तवायफ की पैर में बंधी घुँघरु भी संगीत के लय के अनुसार थिरकती थी । गीत शुरु होने से पहले आधे घंटे तक यह जुगलबंदी चलता था इसी में पता चल जाता था कि जो तवायफ आयी वो संगीत की साधना में कितना निपुण है जहां तक मुझे याद है मामा की शादी में मुजफ्फरपुर से तवायफ आयी थी कोई चर्चित रही होगी वो एक गाना गायी थी पहली बार सूने थे और वह गीत मुझे इतना भाया कि आज भी जब मौका मिलता है सुन लेते है जी हैं वह गीत था Movie- दाग (1973),Music लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल,Lyrics By: साहिर लुधियानवी और लता मंगेशकर गायी हैं ,
जब भी जी चाहे, नई दुनिया बसा लेते हैं लोगएक चेहरे पे कई चेहरे, लगा लेते हैं लोग ।
क्या गायी थी वो पूरा महफिल शांत होकर उसके उस गीत को सुनता रहा इसी तरह के क्लासिकल संगीत का फरमाइस हुआ करता था ऐसे ही क्लासिकल संगीत से सराबोर रहता था वह महफिल ।

दो तीन वर्ष बाद मेरे दूसरे मामा जी के लड़के के शादी में एक बार फिर वही नर्तकी आयी थी दोपहर का कार्यक्रम चल रहा था गाना शुरू था मेरे जेहन में वो गाना इस कदर बस गया था कि मैं तवायफ को उसी गाने का फरमाइश कर दिया वो थोडा संकोच करने लगी ना ना वो गाना मैं नहीं गाती और मैं कहां रहा था आप ही गायी थी ,
तभी वो अपने टीम की ओर इशारा किया और वो भागा भागा गया और एक खूबसूरत डायरी लेकर आया और फिर वो डायरी पलटी और गाना शुरू की मामा जी का आदेश हुआ भगिना का फरमाइश है ऐगेन रिपीट और वो पूरे कार्यक्रम के दौरान तीन बार गायी , मामा जी से पैसा दिये भगिना दीजिए इनको ।

वो क्या दौर था उसकी आप लाख आलोचना कर ले लेकिन इस तरह के कार्यक्रम से संगीत की गहराई और तवायफ ही सही लेकिन उसको देख कर एक तहजीव की समझ तो पुरुषों में जरुर बनता था।

वर्षो बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट के साथ जो वीडियो लगा है देखने को मिला पिछले तीन दिनों में कितनी बार देखे हैं कह नहीं सकते हर बार मुजरा और तबला का वो कहरवा ताल जो अब बीते दिनों की बात हो गयी।
कहां कही सुनने को मिलता है क्या क्लास है साड़ी और घूँघट में आज जो कहर ढाह सकती है दुनिया में कोई दूसरा ड्रेस नहीं है जो इस तरह कहर ढाह सके।

वेंटिलेटर के संचालन हेतु कर्मियों को मिलेगा और बेहतर प्रशिक्षण -स्वास्थ्यमंत्री

#Covid19 इलाज के लिए जिलों को केंद्र से चिह्न्ति दवाओं की उपलब्धता करायी जा रही सुनिश्चित : मंगल पांडेय

पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग तत्परता से काम कर रहा है। कुशल रणनीति के तहत विभाग कोरोना संक्रमण की रोकथाम और उपचार में लगा है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी जिलों में केंद्र से चिह्नित जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करायी जा रही है। वहीं कोरोना के बेहतर उपचार के लिए राज्य के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर संचालन एवं रख-रखाव के लिए मेडिकल कॉलेजों एवं जिलों में पदस्थापित डॉक्टरां और कर्मियां को प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया जारी है।

श्री पांडेय ने कहा कि कोरोना मरीजों के बेहतर इलाज के लिए सभी सिविल सर्जनों और मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल के अधीक्षकों को आवश्यक निर्देश दिये गये हैं। इसके लिए जिलों को कोरोना इलाज के चिह्नित दवाइयां र्प्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराया गया है। बीएमएसआईसीएल द्वारा इन दवाओं को चिकित्सा महाविद्यालय सह अस्पतालों एवं सभी जिलों को केस के आधार पर दवाइयां लगातार आवंटित की जा रही है। वहीं वेंटिलेटर की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को अत्यधिक विशिष्ट बनाने के लिए उसे सुचारू रूप संचालित करने के लिए चिकित्सक एवं पारामेडिकल स्टाफ के रिफ्रेशर प्रशिक्षण की आवश्यकता महसूस की गई है। ऐसे में चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल से लेकर जिला अस्पताल एवं अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में पदस्थापित चिकित्सकों एवं पारा मेडिकल स्टाफ को वेंटिलेटर के संचालन एवं रख-रखाव के लिए और बेहतर प्रशिक्षण हेतु एम्स, पटना से समन्वय बनाया गया है।

श्री पांडेय ने कहा कि कोविड संक्रमण से उत्पन्न वर्तमान स्थिति में गंभीर रोगियों के उपचार को ध्यान में रखते हुए आक्सीजनयुक्त बेड, आईसीयू बेड एवं वेंटिलेटर समेत अन्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया गया है। इसी क्रम में सरकार द्वारा चिकित्सा महाविद्यालय अस्पतालों यथा सभी जिलों के सदर अस्पतालों में वेंटिलेंटर अधिष्ठापित कर दी गई है। साथ ही उसके संचालन के लिए कई चरणों में डॉक्टरां एवं कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जृा चुका है।

बिहार में कोरोना का सुनामी पटना बना हाॅट स्पोट

#Covid19 बिहार में कोरोना का सुनामी जारी है आज शाम तक जारी आकड़ों के अनुसार आज 5908 लोग पॉजिटिव पाए गए। वहीं, 5 लोगों की मौत भी हुई है। मृतकों में NMCH से 2, साईं हॉस्पिटल से 1, PMCH से 1 और भागलपुर से एक संक्रमित शामिल हैं। अकेले पटना में 2202 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। इधर, सोमवार को कोरोना के 4,737 नए मामले सामने आए, जो रविवार के आंकड़े से 6% कम है लेकिन इस दौरान रविवार की तुलना में जांच भी कम हुआ । रविवार को 5,022 कोरोना केस आए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने CM नीतीश कुमार से फोन पर बात कर उनका हालचाल जाना। नीतीश कोरोना पॉजिटिव होने के बाद से होम आइसोलेशन में हैं।

वही बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा है कि नये वैरियंट की वजह से बढ़ता कोरोना संक्रमण जब विशिष्ट व्यक्तियों, डाक्टरों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है, तब आम नागरिकों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।

उम्र या बीमारी के कारण जिन्हें बूस्टर डोज की जरूरत है, उन्हें इसके लिए बेहिचक आगे आना चाहिए।

  1. कोरोना की तीसरी लहर का सामना करने के लिए वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। केंद्र सरकार ने बिहार सहित सभी राज्यों को 156.05 करोड़ डोज उपलब्ध करायी है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अभी संक्रमितों में केवल 5 से 10 फीसद लोगों को ही अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत है।

लोगों को भयभीत होने के बजाय मास्क, दूरी और होम आइसोलेशन के जरिये स्वयं को सुरक्षित करना चाहिए।

अब दिल्ली में गया के तिलकुट और भागलपुरी कतरनी चूरा का लुत्फ़ उठा सकेंगे बिहारवासी, मकर संक्रांति के मौक़े पर बिहारिका की ख़ास पहल

अब दिल्ली में गया के तिलकुट और भागलपुरी कतरनी चूरा का लुत्फ़ उठा सकेंगे बिहारवासी, मकर संक्रांति के मौक़े पर बिहारिका की ख़ास पहल

• बिहारिका में तिलकुट, चूरा, गुड़, लाई, मखाना उपलब्ध

• बिहार के अलग-अलग ज़िलों से मंगवाए गए पकवान

• बिहार की संस्कृति को सहज तरीक़े से प्रसारित करने का ‘बिहारिका’ एक सुलभ माध्यम बनकर उभरा है।

• “बिहारिका न सिर्फ़ दिल्ली में स्थित बिहार के निवासियों के लिए बिहार से जुड़ने का एक मौक़ा है बल्कि वहाँ के कारीगरों, बुनकरों और किसानों को आर्थिक रूप से सहयोग करने का एक रास्ता भी है,” स्थानिक आयुक्त, बिहार भवन

नई दिल्ली के बिहार निवास, चाणक्यपुरी स्थित ‘बिहारिका’ में आगामी मकर संक्रांति को लेकर तैयारियाँ शुरू हो गईं है। बिहार की कला देहरी, बिहारिका, में बिहार के अलग-अलग ज़िलों के हस्तशिल्प और हथकरघा निर्मित उत्पादों के अलावा खाने-पीने की चीज़ों को भी शामिल किया गया है। इनमें गया का तिलकुट, भागलपुरी कतरनी चूरा, गुड़, मटकी दही, धनरुआ की लाई, मिथिला मखाना और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल हैं। 11 जनवरी मंगलवार से 14 जनवरी तक ये सामान उपलब्ध होंगे।

स्थानिक आयुक्त, पलका साहनी (भाप्रसे) ने बताया, “राजधानी दिल्ली में रहने वाले बिहार के वे लोग जो खास तौर पर वहाँ त्योहारों पर बिहार के पकवान को मिस करते हैं, उनके लिए हमने इस पहल की शुरुआत की है। बाजार में उपलब्ध कतरनी चूरा की गुणवत्ता उत्तम मानी जाती है। यह बेहद नरम और सुगंधित होता है। चावल की इस किस्म की न केवल भागलपुर जिले में बल्कि पूरे देश में भारी मांग है। ऐसा माना जाता है कि कतरनी चावल की सुगंध और स्वाद, इस जिले में प्राकृतिक रूप से बनने वाले पर्यावरण का एक उपहार है। बिहारिका में गया का तिलकुट भी उपलब्ध है। हमने अक्सर ये महसूस किया है कि बिहार के पकवानों की दिल्ली में बहुत मांग है। देश-विदेशों तक तिलकुट, लाई और खाजा को पसंद किया जाता है। हमें विश्वास है कि आने वाले समय में राजधानी दिल्ली और बिहार की दूरी बिहार राज्य के व्यंजन और कला से पाट दी जाएगी।”

ज्ञात हो कि बिहार से 300 किलो उच्च क्वालिटी का कतरनी चूड़ा, 100 किलो चावल, 50 किलो गुड़ और गया का खास्ता तिलकुट बिहार भवन भेजा गया है।

पवित्र पिंड दान और गौतम बुद्ध के अलावा, तिलकुट गया जी की संस्कृति है

माना जाता गया के रमना मोहल्ले में तिलकुट की शुरू हुआ। टेकरी रोड, कोइरीबाड़ी, स्टेशन रोड समेत कई इलाकों में तिलकुट के कारीगर रहते हैं। रमना रोड और टेकरी के कारीगरों द्वारा बनाया गया तिलकुट आज भी बहुत स्वादिष्ट होता है। वे बताते हैं कि कुछ ऐसे परिवार भी गया में हैं, जिनका पारिवारिक पेशा यह हो गया है। खस्ता तिलकुट के लिए मशहूर गया का तिलकुट झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में भेजा जाता है।

भगवान बुद्ध और ‘तिल’ का संबंध

ऐसा माना जाता है कि बुद्ध तिल (तिल) खाने पर जीवित रहे जब उन्होंने बोधगया में वर्तमान महाबोधि मंदिर के पास उरुवेला में कठोर तपस्या का अभ्यास करना शुरू किया। पाली सूत्रों का उल्लेख है कि उन्होंने कम से कम भोजन और पानी लेना शुरू कर दिया, ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने शायद ही कभी खाया। वह केवल उबलते चावल (अकामा) (मांड), या तिल के बीज (पिनाका) से तेल निकाले जाने के बाद बचे हुए ठोस पदार्थों से बचे हुए पर जीवित रहना शुरू कर दिया। वह आगे प्रतिदिन केवल चावल या तिल के एक दाने पर जीवित रहने लगे। वह कमजोर और पतला हो गया और इस अवस्था के बाद ही उसने मध्य मार्ग का अनुसरण करने का फैसला किया और अंत में आत्मज्ञान प्राप्त किया।

श्रीमती साहनी ने आगे बताया, “बिहार में मकर संक्रांति को सकरात या खिचड़ी भी बोला जाता है। देश के किसानों के प्रति आभार प्रकट करते हुए ताजे खेती वाले चावल का उपयोग ‘खिचड़ी’ बनाने के लिए किया जाता है जिसे सकरात की शाम घी, पापड़, दही और अचार के साथ परोसा जाता है। बिहारिका में नये चावल की खेप भी आई है जिसे आम लोग 14 तारीख़ से पहले आसानी से ख़रीद सकते हैं। इसके अलावा मटकी वाली ताजे दूध की दही, गुड़ और बिहार के धनरुआ में निर्मित खोये और रामदाने की लाई भी उपलब्ध है। बिहारिका न सिर्फ़ दिल्ली में स्थित बिहार के निवासियों के लिए बिहार से जुड़ने का एक मौक़ा है बल्कि वहाँ के कारीगरों, बुनकरों और किसानों को दूर रहते हुए भी आर्थिक रूप से सहयोग करने का एक रास्ता भी है। बिहार की संस्कृति को सहज तरीक़े से प्रसारित करने का बिहारिका एक सुलभ माध्यम बनकर उभरा है।“

#MakarSankranti2022 #MakarSankranti

हाजीपुर पासवान चौक के जाम पर हाईकोर्ट में याचिका दायर

हाजीपुर के नेशनल हाईवे – 19 पर स्थित पासवान चौक पर लगातार जाम की समस्या समाप्त करने व फ्लाईओवर का निर्माण किये जाने के मामले पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की। अधिवक्ता राजीव रंजन सिंह की जनहित याचिका सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजय करोल की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता को सम्बंधित अधिकारी को representation देने का निर्देश दिया।


अधिवक्ता राजीव रंजन सिंह ने हाजीपुर एन एच 19 पर स्थित पासवान चौक होने वाले ट्राफिक जाम से होने वाली समस्या पर जनहित याचिका दायर किया।साथ ही उन्होंने सड़क की चौडाइ बढ़ाने व फ्लाईओवर बनाने की माँग इस जनहित में किया।
डिवीजन बेंच ने अधिवक्ता राजीव रंजन सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को आदेश पारित करने की तिथि से चार सप्ताह के भीतर अभ्यावेदन दायर करने को कहा है। संबंधित अधिकारी को चार महीने के भीतर अभ्यावेदन पर विचार करते हुए उचित आदेश पारित करते हुए निष्पादित करने को कहा गया है।


कोविड – 19 महामारी के मद्देनजर कार्यवाही को डिजिटल मोड में करने को कहा गया है, जब तक कि संबंधित पक्ष फिजिकल मोड के लिए सहमत नहीं हो जाते हों। साथ ही याचिकाकर्ता को कोर्ट द्वारा इस बात की भी छूट दी गई है कि जरूरत पड़ने पर इस वजह से या आगे भी किसी वजह से कोर्ट के समक्ष मामले को ला सकता है।

बीजेपी विधायक रश्मि वर्मा का बयान पार्टी हल निकाल देगी

विधायक पद से इस्तीफा की पेशकश करने के बाद आज पहली बार रश्मि वर्मा भाजपा कार्यालय पहुंची जहां प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल के कक्ष में उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल से उनकी मुलाकात हुई । आधे घंटे तक बंद कमरे में हुई मुलाकात के बाद जब वो बाहर निकली तो मीडिया से बात करते हुए कहा- सब ठीक है। लेकिन रश्मि वर्मा जिस अंदाज में मीडिया के सवालों से बच रही थी उससे साफ लग रहा था कि वो अंदर से काफी व्यथित है कई बार आसूं निकलते निकलते रोक ली ।

उप मुख्यमंत्री ने रश्मि वर्मा के त्यागपत्र का किया बचाव

हालांकि उन्होंने ये माना कि वो इस्तीफा देने का मन बना रहीं थी, लेकिन फिर पार्टी ने उनकी परेशानी का खत्म करने का भरोसा दे दिया है, इसलिए अब वो ऐसा नहीं करेंगी। रश्मि वर्मा को मीडिया के सवालों से घिरा देख उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद आगे आए और उन्हें कार्यक्रम में जल्द चलने की बात कही।

विधायक रश्मि वर्मा चेहरे चेहरे से बहुत कुछ कह गयी

वैसे रश्मि वर्मा भले ही मीडिया के सवालों से बचती रही लेकिन उनके चेहरे का भाव जता दिया कि कोई तो बात है ।

बिहार के युवाओं ने इंडिया स्किल्स प्रतियोगिता में लहराया परचम: 4 स्वर्ण, 2 रजत और 5 कांस्य पदक जीता।

इंडिया स्किल्स 2021 की राष्ट्रीय प्रतियोगिता दिल्ली में आयोजित की जा गयी, देश भर से 500 से अधिक प्रतियोगी 54 औद्योगिक क्षेत्रों से अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए प्रतियोगिता में भाग लिया| सभी कौशल प्रतियोगिताओं के विजेताओं को आज दिनांक 10 जनवरी 2022 को सम्मानित किया गया ।

उन्होंने ने कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है और बहुत बड़ा अवसर है कि बिहार के युवाओं ने अपने कौशल का जौहर राष्ट्रीय स्तर पर दिखाया है और विजेता बनें हैं| हम सभी विजयी प्रतिभागियों को अपनी ओर से शुभकामना देते हैं । साथ ही NSDC और बिहार कौशल विकास मिशन के पदाधिकारियों और कर्मियों को भी इस जीत में साथ देने के लिए आभारी हैं, इस कोरोना काल में आपका योगदान अतुलनीय है ।

बिहार से – श्री उत्सव ने ग्राफ़िक डिजाईन, आई टी नेटवर्क सिस्टम एंड एडमिनिस्ट्रेशन में श्री बद्रीनाथ ने, रिन्यूएबल एनर्जी में श्री रौशन कुमार, और सुश्री ताविसी तन्नु ने विजुअल मर्चेडाइजिंग में स्वर्ण जीता, जबकि रेस्टुरेंट सर्विस में सुश्री अदिति और आई टी नेटवर्क सिस्टम एंड एडमिनिस्ट्रेशन में श्री अमित ने रजत जीता, वहीं कांस्य पदक, फैशन टेक्नोलोजी में सुश्री रिनिता निगोई, कैबिनेट मेकिंग में श्री राजेश शर्मा, ब्रेकरी में सुश्री दीपाली राज, सुश्री बागिषा जैन ने ग्राफ़िक डिजाईन में और रिन्यूएबल एनर्जी में श्री अभिषेक ने जीता|

माननीय मंत्री ने कहा कि बिहार हमेशा से शोध और कौशल का धरती रही है। आर्यभट्ट, चाणक्य, वानभट्ट एवं वशिष्ट नारायण जैसे सरीखे नामों और उनके कौशल कला से पूरी दुनिया परिचित है। बात विक्रमशिला की हो या प्रचीनतम नालंदा विश्वविद्यालय की यहां विश्व के अनेक प्रसिद्ध नामचीन व्यक्तित्व ने विद्या और कौशल को सीखा है| जिसकी ऐतिहासिक और सामाजिक पृष्ठभूमि से आज भी हम सब रु-ब-रु होते रहते हैं|

मुझे यकीन है कि श्रम संसाधन विभाग के अंतर्गत संचालित, बिहार कौशल विकास मिशन और एनएसडीसी के आपसी समन्वय और सहयोग से, इस जीत को विश्व युवा कौशल प्रतियोगिता के मंच पर भी प्रदर्शित करेंगे| सभी सफल युवा अपना कौशल का प्रदर्शन चीन के संघाई में 2022 में आयोजित होने वाले विश्व युवा कौशल प्रतियोगिता में अपना अपना परचम लहराएँ, ऐसी हमारी मंगल कामना है|

पटना हाई कोर्ट ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में सरकारी धन के कथित गबन की जांच करवाने के मामले में याचिकाकर्ता पर दस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।

पटना हाई कोर्ट ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में सरकारी धन के कथित गबन की जांच करवाने व जिम्मेदार कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर याचिकाकर्ता पर दस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने विशाल सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई कर ये आदेश दिया।
अरवल जिला के रामपुर बैणा पंचायत की मुखिया पर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में सरकारी धन के गबन का आरोप लगाते हुए विशाल सिंह ने एक जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका के जरिये जांच और कार्रवाई का आदेश देने का अनुरोध कोर्ट से किया था।

इस मामले में अरवल के बी डी ओ द्वारा गठित की गई जांच को पूरा करने और प्राथमिकी दर्ज करने हेतु आदेश देने की भी माँग किया गया था।
इस जनहित याचिका में खास बात यह भी थी कि याचिकाकर्ता ने अपने चाचा सतीश कुमार सिंह और उनकी मुखिया(रामपुर बैणा पंचायत )पत्नी बिमला देवी पर भी बारह – बारह हजार रुपये लेने का आरोप लगाया था। कहा गया था कि पैतृक जमीन पर पूर्वजों द्वारा बनाये गए शौचालय के नाम पर ही पैसा का गबन किया गया।

राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार ने कोर्ट को बताया कि यह कोई जनहित का मामला नहीं प्रतीत होता है, इसलिए याचिकाकर्ता पर अर्थदंड लगाया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस बात पर अपनी सहमति जताते हुए याचिकाकर्ता पर दस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।

महत्वपूर्ण बात यह भी है कि याचिका कर्ता द्वारा इसी मामले को लेकर पूर्व में भी पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसे कोर्ट ने निष्पादित कर दिया था।

बेपरवाह बिहार कोरोना के फर्जी जांच का हुआ खुलासा

#Covid19 बिहार में कोरोना को लेकर स्वास्थ्य विभाग कितना सजग है इसको लेकर आये दिन खबर आती रहती है नया मामला समस्तीपुर से जुड़ा है जहां एक पॉजिटिव व्यक्ति का सीरम एक ही क्षेत्र के 115 लोगों के अलग-अलग नाम से RT-PCR जांच के लिए भेज दिया। इससे सबकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। इससे पहले नालंदा में जहां देश में जिस वैक्सीन का अब तक बच्चों पर ट्रायल ही नहीं हुआ है कोवीशील्ड वो वैक्सीन दो बच्चों को लगा दिया । समस्तीपुर में दो दिन पहले एक स्वास्थ्य कर्मचारी ने एक पॉजिटिव व्यक्ति का सीरम एक ही क्षेत्र के 115 लोगों के अलग-अलग नाम से RT-PCR जांच के लिए भेज दिया। इससे सबकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। मौके पर स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी गई तब पता चला कि जिन लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव है, वे एकदम भले-चंगे हैं।

मामला कल्याणपुर प्रखंड का है। मामले का खुलासा होने के बाद DM योगेंद्र सिंह के आदेश पर सिविल सर्जन डॉ. सत्येंद्र कुमार गुप्ता ने स्वास्थ्य कर्मी दिनेश झा को निलंबित कर दिया। इस मामले में जांच के लिए कल्याणपुर PHC प्रभारी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। दो दिन में जांच रिपोर्ट मांगी गई है।हुआ ऐसा कि कल्याणपुर PHC (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) से 5 जनवरी को 115 लोगों का सैंपल जांच के लिए IGIMS (इंदिरा गांधी आयुर्वेदिक संस्थान) पटना भेजा गया था। 7 जनवरी को सबकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। रविवार को कल्याणपुर टीम भेजी गई। जांच में पता चला कि PHC में एक व्यक्ति की एंटीजन रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। कर्मचारी दिनेश झा ने पॉजिटिव व्यक्ति के सीरम को अलग-अलग रख कर 115 लोगों का सैंपल बना लिया और जांच के लिए पटना भेज दिया था।          

इसके पीछे कि कहानी यह है कि आज कल पूरे बिहार में कोरोना जांच किट स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों द्वारा बाजार में बेचा जा रहा है ,विभागीय लोगों का कहना है कि स्टॉक मिलाने के चक्कर में यह गलती हो गयी और मामला प्रकाश में आ गया फिलहाल उक्त स्वास्थ्य कर्मी पर प्राथमिकी दर्ज करने पर विभाग विचार कर रही है ।

वही मुख्यमंत्री के गृह जिला नालंदा में पिछले सप्ताह देश में जिस वैक्सीन का अब तक बच्चों पर ट्रायल ही नहीं हुआ है,  2 बच्चों को उसी वैक्सीन की डोज लगा दी गई। स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही के शिकार दोनों भाई पीयूष रंजन और आर्यन किरण बिहारशरीफ की प्रोफेसर कॉलोनी के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि हमने रविवार को कोवैक्सिन के लिए स्लॉट बुक कराया था। इसके बाद आज हम 10 बजे के करीब नालंदा स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित टीकाकरण केंद्र IMA हॉल गए।वहां सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद हमने टीका लगवाया। टीकाकरण के बाद पता चला कि हम दोनों को कोवैक्सिन की जगह कोवीशील्ड का टीका लगा दिया गया है।हालांकि इस मामले में सरकार उपाधीक्षक को हटा दिया है और जांच गठित कर दिया है लेकिन सवाल यह है कि पूरी मशीनरी लगने के बावजूद इतनी बड़ी गलती कैसे हो जा रही है इसी तरह 2020 में कोरोना वैक्सीन के दौरान फर्जी मोबाइल नम्बर के इस्तेमाल का मामला सामने आया था और इसको लेकर सरकार की बड़ी किरकरी हुई थी ।

यूरिया को लेकर बिहार में हहाकार कई जिलों में किसान उतरे सड़क पर

बिहार में डीएपी खाद के बाद अब यूरिया को लेकर किसान सड़कों पर है अररिया सुपौल ,मधेपुरा सहित बिहार के कई जिलों में यूरिया खाद को लेकर किसान खासे गुस्से में है कई जगह कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए पुलिस को आगे आना पड़ा है इस समय गेंहू और तेलहन के लिए किसानों को यूरिया खाद की सख्त जरुरत है ।

कृषि विभाग के सचिव डा़ एन सरवण कुमार की अध्यक्षता में 31 दिसंबर तक उर्वरक की हुई आपूर्ति और वितरण की समीक्षा बैठक की रिपोर्ट बताती है कि बिहार को मांग का 26 फीसदी यूरिया कम मिला है़ राज्य के आधा दर्जन के करीब जिलों में तो मांग का आधा यूरिया भी नहीं पहुंचा़ ।

मुजफ्फरपुर, दरभंगा और पश्चिमी चंपारण के किसानों को मांग का मात्र 47 फीसद ही यूरिया मिल सका़ यही वजह है कि पूरे बिहार में यूरिया को लेकर हहाकार मचा हुआ है हालांकि यूरिया के समय पर नहीं मिलने से गंहू और तेलहन के उपज में खासा प्रभाव पड़ सकता है ।

दिसंबर 21 में यूरिया की स्थिति
315000 टन जरूरत
227998.37 टन उपलब्ध
224030.69 टन सेल
3948.82 टन क्लोजिक स्टॉक
जनवरी 22 में यूरिया की स्थिति
220000.00 टन जरूरत
99772.43 टन उपलब्ध
88168.68 टन सेल
11603.75 टन क्लोजिंग स्टॉक

भारत के प्रथम राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली जीरादेई और वहां उनके स्मारक की दुर्दशा के मामलें आज हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

पटना हाईकोर्ट में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली जीरादेई और वहां उनके स्मारक की दुर्दशा के मामलें पर सुनवाई करते हुए केंद्र ( आर्केलोजिकल् सर्वे ऑफ इंडिया) और बिहार सरकार द्वारा हलफनामा नहीं दायर नहीं किये जाने पर मामलें की सुनवाई 13 जनवरी,2022 तक टली।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने विकास कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को इस सम्बन्ध में निश्चित रूप से हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।लेकिन दोनों सरकारों ने आज हलफनामा दायर नहीं किया,जिस कारण इस जनहित याचिका पर सुनवाई टाल दी गई।
इससे पूर्व हाईकोर्ट ने अधिवक्ता निर्विकार की अध्यक्षता में वकीलों की तीन सदस्यीय कमिटी गठित की थी।कोर्ट ने इस समिति को इन स्मारकों के हालात का जायजा ले कर कोर्ट को रिपोर्ट करने का आदेश दिया था।

तीन सदस्यीय वकीलों की कमिटी ने जीरादेई के डा राजेंद्र प्रसाद की पुश्तैनी घर का जर्जर हालत, वहां बुनियादी सुविधाओं की कमी और विकास में पीछे रह जाने की बात कहीं।साथ ही पटना के बांसघाट स्थित उनके समाधि स्थल पर गन्दगी और रखरखाव की स्थिति भी असंतोषजनक पाया।वहाँ

काफी गन्दगी पायी गई और सफाई व्यवस्था की खासी कमी थी।साथ ही पटना के सदाकत आश्रम की दुर्दशा को भी वकीलों की कमिटी ने गम्भीरता से लिया था।

जनहित याचिका में कोर्ट को बताया गया कि जीरादेई गांव व वहां डाक्टर राजेंद्र प्रसाद के पुश्तैनी घर और स्मारकों की हालत काफी खराब हो चुकी है।याचिकाकर्ता अधिवक्ता विकास कुमार ने बताया कि जीरादेई में बुनियादी सुविधाएं नहीं के बराबर है।
न तो वहां पहुँचने के सड़क की हालत सही है।साथ ही गांव में स्थित उनके घर और स्मारकों स्थिति और भी खराब हैं,जिसकी लगातार उपेक्षा की जा रही है।
उन्होंने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार के इसी उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण लगातार हालत खराब होती जा रही है।कोर्ट को बताया गया कि पटना के सदाकत आश्रम और बांसघाट स्थित उनसे सम्बंधित स्मारकों की दुर्दशा भी साफ दिखती हैं।वहां सफाई,रोशनी और लगातार देख रेख नहीं होने के कारण ये स्मारक और ऐतिहासिक धरोहर अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे है।
ऐसे महान नेता स्मृतियों व् स्मारकों की केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किया जाना उचित नहीं हैं।इनके स्मृतियों और स्मारकों को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 13 जनवरी,2022 को होगी।

मीडिया का शाख लगा है दाव पर

आज तक पर यूपी चुनाव को लेकर आयोजित एक  कार्यक्रम के दौरान अंजना ओम कश्यप और अखिलेश यादव के बीच जिस अंदाज में संवाद हुआ उसे आप क्या कहेंगे, याद करिए किसान आन्दोलन के दौरान चित्रा त्रिपाठी के साथ जो कुछ भी हुआ उसे आप क्या कहेंगे ।क्या यह माना जाये कि पत्रकारिता संकट में है या फिर हम पत्रकार जिस तरीके से सत्ता के साथ खड़े दिख रहे हैं या फिर सत्ता से सवाल करना छोड़ दिये हैं उसका प्रतिफल है ।                                  

 बिहार में भी इस तरह का एक दौर आया था जब सीएम की कुर्सी पर लालू प्रसाद काबिज थे लालू प्रसाद सार्वजनिक मंच से मीडिया की आलोचना करते थे किसी विषय पर प्रतिक्रिया लेना रहता था तो घंटो घर के बाहर खड़े कर देते थे और आये दिन सार्वजनिक रूप से अपमानित भी करते रहते थे। फिर भी एक रिश्ता बना रहा ।            

जहां तक मेरा अनुभव रहा है अखबार में संपादक से लेकर प्रखंड के संवाददाता तक और चैनल के चैनल हेड से लेकर जिला रिपोर्टर तक पर सवर्णों का कब्जा होने के बावजूद कभी भी कभी सुबह के मीटिंग में यह एजेंडा तय नहीं होता था कि लालू प्रसाद की सरकार को घेराबंदी करने के लिए खबर को प्लांट करो या फिर उस नजरिए से खबर बनाओं जिससे लालू प्रसाद के शासन काल घेरे में आ सके।            

मुझे लगता है जब तक हम मीडिया वाले इस सोच के साथ काम करते रहे है कि जो खबर है चलेगा एजेंडा नहीं चलेगा तब तक ठीक रहा लेकिन जैसे ही हम लोग ऐजेंडे पर खबर करने लगे लोगों का भरोसा उठने लगा जो पहले नहीं था लोगों का मीडिया पर बहुत भरोसा था। और यही वजह थी कि गांव में रहने वाले लोग हो या फिर शहर में रहने वाले लोग हो उन्हें हमेशा लगता था कि मीडिया हमारे साथ खड़ी है हर दिन आम जनता का फोन आता था पुलिस के जुल्म को लेकर या फिर भ्रष्टाचार को लेकर। लेकिन जैसे जैसे मीडिया से आम लोगों के सरोकार से जुड़ी खबरें चलनी कम होती गयी लोग भी हम लोगों से दूर होते चले गये ।

अब पहले जैसे आम लोगों का कहां फोन काँल आता है बहुत कम अब कांल आता है हिन्दू मुसलमान के बीच विवाद को लेकर कही कोई घटना हो जाये एक घंटे में चालीस से अधिक कांल आ जाता है हर स्तर के लोग फोन करने लगते हैं हाल ही पटना में एक मुसलमान दुकानदार खरीदारी के दौरान हुए विवाद के क्रम किसी लड़की पर हाथ चला दिया इतना फोन कांल आया जैसे लगा नरसंहार हो गया हो और पुलिस नहीं पहुंच रही है और फिर क्या हुआ थोड़ी देर में सारे चैनल का हेड लाइन खबर बन गयी जबकि पहले हम मीडिया धार्मिक ,सम्प्रदायिक और जाति आधारित हिंसा से जुड़ी खबरो को लिखने में और दिखाने में बहुत सावधानी बरतते थे हम मीडिया वालों की पहली जिम्मेवारी यही होती थी कि ऐसा खबर ना चले जिससे समाज में तनाब बढ़ जाये लेकिन आज क्या हो रहा है हम लोग तनाब और घृणा पैदा करने वाली खबर ही नहीं चला रहे हैं बल्कि खबर प्लांट भी कर रहे हैं इससे हुआ क्या आम लोग जो मीडिया और मीडियाकर्मियोंं की ताकत हुआ करती थी वो हम मीडिया वालों से दूर चल गया और जैसे ही इसका आभाव सत्ता और सिस्टम को हुआ पूरी मीडिया को हासिया पर पहुंचा दिया
संकट की वजह यही है ऐसे में मीडिया से जुड़े लोग एक बार फिर से आम लोगों का भरोसा कैसे जीते इस पर सोचने कि जरूरत है क्यों कि जैसे ही आम लोग हम लोगों के साथ जुड़ने लगेगी बहुत सारी चीजें बदल जाएंगी । मेरा तो अनुभव यही रहा है कि सत्ता से सवाल करने वाले पत्रकारों से भले ही सरकार नराज रहे लेकिन जनता हमेशा सर आंखो पर बिठा कर रखती हैं। वक्त आ गया है आत्ममंथन करने का नहीं तो फिर इस संस्था का कोई मतलब नहीं रह जायेगा ।

प्यार तो बस एक एहसास है

इसे कहते है कसक ओर चाहत

ट्रेन चलने को ही थी कि अचानक कोई जाना पहचाना सा चेहरा जर्नल बोगी में आ गया। मैं अकेली सफर पर थी। सब अजनबी चेहरे थे। स्लीपर का टिकिट नही मिला तो जर्नल डिब्बे में ही बैठना पड़ा। मगर यहां ऐसे हालात में उस शख्स से मिलना। जिंदगी के लिए एक संजीवनी के समान था।

जिंदगी भी कमबख्त कभी कभी अजीब से मोड़ पर ले आती है। ऐसे हालातों से सामना करवा देती है जिसकी कल्पना तो क्या कभी ख्याल भी नही कर सकते ।

वो आया और मेरे पास ही खाली जगह पर बैठ गया। ना मेरी तरफ देखा। ना पहचानने की कोशिश की। कुछ इंच की दूरी बना कर चुप चाप पास आकर बैठ गया। बाहर सावन की रिमझिम लगी थी। इस कारण वो कुछ भीग गया था। मैने कनखियों से नजर बचा कर उसे देखा। उम्र के इस मोड़ पर भी कमबख्त वैसा का वैसा ही था। हां कुछ भारी हो गया था। मगर इतना ज्यादा भी नही।
फिर उसने जेब से चश्मा निकाला और मोबाइल में लग गया।

चश्मा देख कर मुझे कुछ आश्चर्य हुआ। उम्र का यही एक निशान उस पर नजर आया था कि आंखों पर चश्मा चढ़ गया था। चेहरे पर और सर पे मैने सफेद बाल खोजने की कोशिश की मग़र मुझे नही दिखे।

मैंने जल्दी से सर पर साड़ी का पल्लू डाल लिया। बालो को डाई किए काफी दिन हो गए थे मुझे। ज्यादा तो नही थे सफेद बाल मेरे सर पे। मगर इतने जरूर थे कि गौर से देखो तो नजर आ जाए।

मैं उठकर बाथरूम गई। हैंड बैग से फेसवाश निकाला चेहरे को ढंग से धोया फिर शीशे में चेहरे को गौर से देखा। पसंद तो नही आया मगर अजीब सा मुँह बना कर मैने शीशा वापस बैग में डाला और वापस अपनी जगह पर आ गई।

मग़र वो साहब तो खिड़की की तरफ से मेरा बैग सरकाकर खुद खिड़की के पास बैठ गए थे।
मुझे पूरी तरह देखा भी नही बस बिना देखे ही कहा, ” सॉरी, भाग कर चढ़ा तो पसीना आ गया था । थोड़ा सुख जाए फिर अपनी जगह बैठ जाऊंगा।” फिर वह अपने मोबाइल में लग गया। मेरी इच्छा जानने की कोशिश भी नही की। उसकी यही बात हमेशा मुझे बुरी लगती थी। फिर भी ना जाने उसमे ऐसा क्या था कि आज तक मैंने उसे नही भुलाया। एक वो था कि दस सालों में ही भूल गया। मैंने सोचा शायद अभी तक गौर नही किया। पहचान लेगा। थोड़ी मोटी हो गई हूँ। शायद इसलिए नही पहचाना। मैं उदास हो गई।

जिस शख्स को जीवन मे कभी भुला ही नही पाई उसको मेरा चेहरा ही याद नही😔

माना कि ये औरतों और लड़कियों को ताड़ने की इसकी आदत नही मग़र पहचाने भी नही😔

शादीशुदा है। मैं भी शादीशुदा हुँ जानती थी इसके साथ रहना मुश्किल है मग़र इसका मतलब यह तो नही कि अपने खयालो को अपने सपनो को जीना छोड़ दूं।
एक तमन्ना थी कि कुछ पल खुल के उसके साथ गुजारूं। माहौल दोस्ताना ही हो मग़र हो तो सही😔

आज वही शख्स पास बैठा था जिसे स्कूल टाइम से मैने दिल मे बसा रखा था। सोसल मीडिया पर उसके सारे एकाउंट चोरी छुपे देखा करती थी। उसकी हर कविता, हर शायरी में खुद को खोजा करती थी। वह तो आज पहचान ही नही रहा😔

माना कि हम लोगों में कभी प्यार की पींगे नही चली। ना कभी इजहार हुआ। हां वो हमेशा मेरी केयर करता था, और मैं उसकी केयर करती थी। कॉलेज छुटा तो मेरी शादी हो गई और वो फ़ौज में चला गया। फिर उसकी शादी हुई। जब भी गांव गई उसकी सारी खबर ले आती थी।

बस ऐसे ही जिंदगी गुजर गई।

आधे घण्टे से ऊपर हो गया। वो आराम से खिड़की के पास बैठा मोबाइल में लगा था। देखना तो दूर चेहरा भी ऊपर नही किया😔

मैं कभी मोबाइल में देखती कभी उसकी तरफ। सोसल मीडिया पर उसके एकाउंट खोल कर देखे। तस्वीर मिलाई। वही था। पक्का वही। कोई शक नही था। वैसे भी हम महिलाएं पहचानने में कभी भी धोखा नही खा सकती। 20 साल बाद भी सिर्फ आंखों से पहचान ले☺️
फिर और कुछ वक्त गुजरा। माहौल वैसा का वैसा था। मैं बस पहलू बदलती रही।

फिर अचानक टीटी आ गया। सबसे टिकिट पूछ रहा था।
मैंने अपना टिकिट दिखा दिया। उससे पूछा तो उसने कहा नही है।

टीटी बोला, “फाइन लगेगा”
वह बोला, “लगा दो”
टीटी, ” कहाँ का टिकिट बनाऊं?”

उसने जल्दी से जवाब नही दिया। मेरी तरफ देखने लगा। मैं कुछ समझी नही।
उसने मेरे हाथ मे थमी टिकिट को गौर से देखा फिर टीटी से बोला, ” कानपुर।”
टीटी ने कानपुर की टिकिट बना कर दी। और पैसे लेकर चला गया।
वह फिर से मोबाइल में तल्लीन हो गया।

आखिर मुझसे रहा नही गया। मैंने पूछ ही लिया,”कानपुर में कहाँ रहते हो?”
वह मोबाइल में नजरें गढ़ाए हुए ही बोला, ” कहीँ नही”
वह चुप हो गया तो मैं फिर बोली, “किसी काम से जा रहे हो”
वह बोला, “हाँ”

अब मै चुप हो गई। वह अजनबी की तरह बात कर रहा था और अजनबी से कैसे पूछ लूँ किस काम से जा रहे हो।
कुछ देर चुप रहने के बाद फिर मैंने पूछ ही लिया, “वहां शायद आप नौकरी करते हो?”
उसने कहा,”नही”

मैंने फिर हिम्मत कर के पूछा “तो किसी से मिलने जा रहे हो?”
वही संक्षिप्त उत्तर ,”नही”
आखरी जवाब सुनकर मेरी हिम्मत नही हुई कि और भी कुछ पूछूँ। अजीब आदमी था । बिना काम सफर कर रहा था।
मैं मुँह फेर कर अपने मोबाइल में लग गई।
कुछ देर बाद खुद ही बोला, ” ये भी पूछ लो क्यों जा रहा हूँ कानपुर?”

मेरे मुंह से जल्दी में निकला,” बताओ, क्यों जा रहे हो?”
फिर अपने ही उतावलेपन पर मुझे शर्म सी आ गई।
उसने थोड़ा सा मुस्कराते हुवे कहा, ” एक पुरानी दोस्त मिल गई। जो आज अकेले सफर पर जा रही थी। फौजी आदमी हूँ। सुरक्षा करना मेरा कर्तव्य है । अकेले कैसे जाने देता। इसलिए उसे कानपुर तक छोड़ने जा रहा हूँ। ” इतना सुनकर मेरा दिल जोर से धड़का। नॉर्मल नही रह सकी मैं।

मग़र मन के भावों को दबाने का असफल प्रयत्न करते हुए मैने हिम्मत कर के फिर पूछा, ” कहाँ है वो दोस्त?”
कमबख्त फिर मुस्कराता हुआ बोला,” यहीं मेरे पास बैठी है ना”

इतना सुनकर मेरे सब कुछ समझ मे आ गया। कि क्यों उसने टिकिट नही लिया। क्योंकि उसे तो पता ही नही था मैं कहाँ जा रही हूं। सिर्फ और सिर्फ मेरे लिए वह दिल्ली से कानपुर का सफर कर रहा था। जान कर इतनी खुशी मिली कि आंखों में आंसू आ गए।

दिल के भीतर एक गोला सा बना और फट गया। परिणाम में आंखे तो भिगनी ही थी।
बोला, “रो क्यों रही हो?”

मै बस इतना ही कह पाई,” तुम मर्द हो नही समझ सकते”
वह बोला, ” क्योंकि थोड़ा बहुत लिख लेता हूँ इसलिए एक कवि और लेखक भी हूँ। सब समझ सकता हूँ।”
मैंने खुद को संभालते हुए कहा “शुक्रिया, मुझे पहचानने के लिए और मेरे लिए इतना टाइम निकालने के लिए”
वह बोला, “प्लेटफार्म पर अकेली घूम रही थी। कोई साथ नही दिखा तो आना पड़ा। कल ही रक्षा बंधन था। इसलिए बहुत भीड़ है। तुमको यूँ अकेले सफर नही करना चाहिए।”

“क्या करती, उनको छुट्टी नही मिल रही थी। और भाई यहां दिल्ली में आकर बस गए। राखी बांधने तो आना ही था।” मैंने मजबूरी बताई।

“ऐसे भाइयों को राखी बांधने आई हो जिनको ये भी फिक्र नही कि बहिन इतना लंबा सफर अकेले कैसे करेगी?”

“भाई शादी के बाद भाई रहे ही नही। भाभियों के हो गए। मम्मी पापा रहे नही।”

कह कर मैं उदास हो गई।
वह फिर बोला, “तो पति को तो समझना चाहिए।”
“उनकी बहुत बिजी लाइफ है मैं ज्यादा डिस्टर्ब नही करती। और आजकल इतना खतरा नही रहा। कर लेती हुँ मैं अकेले सफर। तुम अपनी सुनाओ कैसे हो?”

“अच्छा हूँ, कट रही है जिंदगी”
“मेरी याद आती थी क्या?” मैंने हिम्मत कर के पूछा।
वो चुप हो गया।

कुछ नही बोला तो मैं फिर बोली, “सॉरी, यूँ ही पूछ लिया। अब तो परिपक्व हो गए हैं। कर सकते है ऐसी बात।”
उसने शर्ट की बाजू की बटन खोल कर हाथ मे पहना वो तांबे का कड़ा दिखाया जो मैंने ही फ्रेंडशिप डे पर उसे दिया था। बोला, ” याद तो नही आती पर कमबख्त ये तेरी याद दिला देता था।”

कड़ा देख कर दिल को बहुत शुकुन मिला। मैं बोली “कभी सम्पर्क क्यों नही किया?”

वह बोला,” डिस्टर्ब नही करना चाहता था। तुम्हारी अपनी जिंदगी है और मेरी अपनी जिंदगी है।”
मैंने डरते डरते पूछा,” तुम्हे छू लुँ”

वह बोला, ” पाप नही लगेगा?”
मै बोली,” नही छू ने से नही लगता।”
और फिर मैं कानपुर तक उसका हाथ पकड़ कर बैठी रही।।

बहुत सी बातें हुईं।

जिंदगी का एक ऐसा यादगार दिन था जिसे आखरी सांस तक नही बुला पाऊंगी।
वह मुझे सुरक्षित घर छोड़ कर गया। रुका नही। बाहर से ही चला गया।

जम्मू थी उसकी ड्यूटी । चला गया।

उसके बाद उससे कभी बात नही हुई । क्योंकि हम दोनों ने एक दूसरे के फोन नम्बर नही लिए।

हांलांकि हमारे बीच कभी भी नापाक कुछ भी नही हुआ। एक पवित्र सा रिश्ता था। मगर रिश्तो की गरिमा बनाए रखना जरूरी था।

फिर ठीक एक महीने बाद मैंने अखबार में पढ़ा कि वो देश के लिए शहीद हो गया। क्या गुजरी होगी मुझ पर वर्णन नही कर सकती। उसके परिवार पर क्या गुजरी होगी। पता नही😔

लोक लाज के डर से मैं उसके अंतिम दर्शन भी नही कर सकी।

आज उससे मीले एक साल हो गया है आज भी रखबन्धन का दूसरा दिन है आज भी सफर कर रही हूँ। दिल्ली से कानपुर जा रही हूं। जानबूझकर जर्नल डिब्बे का टिकिट लिया है मैंने।
अकेली हूँ। न जाने दिल क्यों आस पाले बैठा है कि आज फिर आएगा और पसीना सुखाने के लिए उसी खिड़की के पास बैठेगा।
एक सफर वो था जिसमे कोई #हमसफ़र था।
एक सफर आज है जिसमे उसकी यादें हमसफ़र है। बाकी जिंदगी का सफर जारी है देखते है कौन मिलता है कौन साथ छोड़ता है…!!!

आरटीआई कार्यकर्ता में हो रहे हमले को लेकर हाईकोर्ट नराज

पटना हाईकोर्ट ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगे जाने पर सूचना मांगने वाले व्यक्ति से उसके सही आचरण वाले और आपराधिक मामले में संलिप्त नहीं का हलफनामा देने के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई की।विकास केन्द्र ऊर्फ गुड्डू बाबा की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य के मुख्य सचिव और राज्य कैबिनेट सचिवालय के प्रधान सचिव को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब माँगा।

इस जनहित याचिका में विगत 16 जनवरी, 2006 को कैबिनेट सचिवालय विभाग के उप सचिव व राज्य सरकार के कॉर्डिनेशन डिपार्टमेंट द्वारा जारी उक्त आशय के संबंध में जारी किये गए संकल्प को रद्द करने हेतु आदेश देने की माँग की गई है।

याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष प्रस्तुत करते हुए अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि आर टी आई एक्ट के विरुद्ध इस प्रकार का गैर कानूनी व मनमाना शर्त लगाया गया है। याचिका के जरिये उस पत्र को भी रद्द करने हेतु आदेश देने का अनुरोध किया गया है, जिसके जरिये लोक सूचना ऑफिसर द्वारा पत्र जारी कर याचिकाकर्ता से विभाग द्वारा सूचना उपलब्ध कराने के लिए उसके सही आचरण और आपराधिक मामलों में शामिल नहीं होने के सम्बन्ध में शपथ पत्र की मांग की गई है।

इस जनहित याचिका में याचिकाकर्ता ने बगैर बिलंब किये ही सूचना उपलब्ध कराने के लिए लोक सूचना अधिकारी को आदेश देने को लेकर भी आग्रह किया है। आर टी आई एक्ट की धारा 7 के तहत याचिकाकर्ता को अविलंब सूचना उपलब्ध कराने के संबंध में निर्णय लेने का आग्रह भी कोर्ट से किया गया है।
इस मामलें पर चार सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।

राजधानी पटना सहित बिहार में अनियंत्रित रूप से हो रही चोरी को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर

पटना हाई कोर्ट ने पटना समेत राज्य के अन्य हिस्सों में कथित तौर पर अनियंत्रित रूप से हो रही चोरी, लूट- पाट और सेंधमारी की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई करने के लिए दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार सिंह व संजीव कुमार मिश्रा की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

हाईकोर्ट को इन जनहित याचिकाओं में बताया गया कि राजधानी पटना समेत राज्य के अन्य इलाकों में अपराध, चोरी, लूटपाट व् सेंधमारी की घटनाएं बढ़ गई हैं। वहीं पर राज्य सरकार ने शराबबंदी कानून लागू करने के लिए अलग से विशेष टास्क फोर्स का गठन कर दिया है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि बिहार एक्साइज ( संशोधित ) एक्ट , 2018 के प्रावधानों को लागू करने के लिए अलग से पुलिस फोर्स/ विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाना चाहिए, ताकि प्रभावी ढंग से शराबबंदी कानून से जुड़े प्रावधानों को लागू किया जा सके और अपराध में शामिल एजेंसी व व्यक्तियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।

याचिका के जरिये शराबबंदी कानून के प्रावधानों को लागू करने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन अलग हटकर पुलिस टास्क फोर्स के गठन करने हेतु आदेश का आग्रह किया गया है ,ताकि स्थानीय कानून व्यवस्था की समस्याओं को भी बराबर प्राथमिकता देते हुए कार्रवाई की जा सके और संज्ञेय अपराधों के मामले में त्वरित एफ आई आर दर्ज किया जा सके।
नियमित रूप से पुलिस पेट्रोलिंग करने का भी आग्रह किया गया है, खासकर के वैसे क्षेत्रों में जहाँ वृद्ध लोग अकेले रह रहे हों।इस मामलें पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद की जाएगी।

विशेष राज्य का दर्जा को लेकर सड़क पर उतरे पप्पू यादव

जन अधिकार पार्टी द्वारा बिहार को विशेष राज्य का दर्जा, किसानों के लिए एमएसपी, बेरोजगारी एवं वार्ड सचिवों की जायज मांग को लेकर पूरे बिहार में रेल चक्का जाम किया है जाम का नेतृत्व जाप के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव खुद कर रहे थे पटना के सचिवालय हॉल्ट पर रेल चक्का जाम करने के दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलनी चाहिए। नीति आयोग के आकंड़ों के अनुसार बिहार पिछड़ा राज्य है। विकास के सभी सूचकांक में बिहार निचले पायदान पर हैं। बिहार के विकास के लिए , विशेष राज्य के मांग के लिए हमारी पार्टी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ हैं।

पप्पू यादव फिर उतरे सड़क पर

बिहार की जनता ने केंद्र और राज्य सरकार को भर भर के सांसद और विधायक दिए हैं। ऐसे में अब उनकी बारी है कि जनता को उनका हक विशेष राज्य के दर्जे के रूप में दें। यह राजनीति का नहीं, बिहार के भविष्य का सवाल है और हम किसी भी कीमत पर इससे समझौता नहीं करेंगे।

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत पाप्पू यादव अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ करीब 11 बजे रेलवे स्टेशन पहुंचकर ट्रेनों की आवाजाही को रोक दी। जाप कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए पुलिस का घेरा तोड़कर रेलवे स्टेशन की ओर बढ़ गए और रेलवे ट्रैक पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय महासचिव प्रेमचन्द सिंह, पूर्व विधायक भाई दिनेश, राजू दानवीर, डॉक्टर संतोष कुमार को रेल प्रशासन ने गिरफ्तार किया।

मौके पर प्रदेश अध्यक्ष राघवेन्द्र कुशवाहा, राष्ट्रीय महासचिव प्रेमचन्द सिंह, राष्ट्रीय महासचिव राजेश रंजन पप्पू, अरुण सिंह, जावेद अली, पूनम झा, सुप्रिया खेमका, राजू दानवीर, संजय सिंह, गौतम आनन्द, भाई दिनेश, सन्नी , पुरुषोत्तम कुमार,दीपक कुमार रजत, आलोक सिंह,ननि यादव, शशांक कुमार मोनू, बबलू यादव, टिंकू यादव, नीतीश यादव, नीरज सिंह,अमित सिंह, अमरनाथ साह, गौरीशंकर सहित सैकड़ों लोग मैजूद थे।

बिहार में युवा सबसे अधिक कोरोना से हो रहे हैं संक्रमित, ओमीक्रोन के दस्तक से दहशत में सरकार

#Covid19  कोरोना को हलके में ना ले दूसरे लहर से भी खतरनाक हो सकता है तीसरा लहर ऐसा मानना है पटना एम्स के डांक्टर का, हो यह रहा है कि तीसरी लहर को सामान्य सर्दी खांसी वाली लहर समझ कर मरीज घर से बाहर  निकल जा रहे हैं जो खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है। लक्षण होने के बावजूद जांच ना कराना और काम पर निकल जाना बड़ी परेशानी बन सकती है। एम्स में अभी तक जीतने भी मरीज आ रहे हैं उनमें ज्यादातर वही लोग हैं जो कामकाजी लोग हैं। 18 से 25 साल के बीच के लोग जो सक्रिय लोग हैं जो घरों से ज्यादा निकलते हैं कामकाज करते हैं ऐसे मरीजों की संख्या ज्यादा है।  साथ ही आम लोग काफी हद तक खुद से घर में इलाज कर ले रहे हैं। लेकिन, ऐसे में यह समझ लेना कि लक्षण गंभीर नहीं हैं ऐसा नहीं है एम्स में अभी तक 60 मरीज भर्ती हो चुके हैं, अब तक 5 की मौत भी हुई है 11 लोग ICU में हैं।

1—24से 26 जनवरी तक तीसरा लहर पीक पर जा सकता है 

तीसरे लहर में कोरोना को लेकर अभी तक जो बात सामने आयी है उसमें बिहार का R-Value 4.55 यानी एक व्यक्ति 4 से अधिक लोगों को संक्रमित कर रहा है। ऐसे में हम यह मान रहे हैं कि बिहार में तीसरी लहर की पीक 24 से 26 जनवरी के बीच आएगी ऐसे में काफी सतर्क रहने कि जरूरत है और इस बार 40 से 50 के बीच युवा मरीज ज्यादा परेशानी महसूस कर रहे हैं ।

2– तीसरे लहर में कोरोना का लक्षण बदल गया है 

सामान्य तौर पर इस बार लक्षणों में सर्दी खांसी ज्यादा है लेकिन इसके साथ ही कुछ नए लक्षण भी हैं जो सामने आ रहे हैं। बदन में असहनीय दर्द हो रहा है, इतना ज्यादा कि मरीज कई बार दर्द की वजह से डिप्रेशन में चले जा रहे हैं। गले में खराश बहुत ज्यादा परेशान करने वाली है। इसके साथ ही पेट खराब होना , आंखों में लालीपन, लाल चकत्ते शरीर पर होना , सिर दर्द यह सारे लक्षण है जो इस बार सामने आ रहे हैं।

3—कोरोना संक्रमित मरीजों के अस्पताल पहुंचने का सिलसिला तेज हो रहा है

एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले 72 घंटों के दौरान बिहार में कोरोना से संक्रमित मरीजों का अस्पताल में भर्ती होने का सिलसिला तेज होने लगा है चार दिन पहले दो चार ऐसे मरीज आ रहे थे जिनको भर्ती होने कि जरूरत महसूस हो रही थी लेकिन अभी 

एम्स में—48, आईजीएमस–12, एनएमसीएच–47, पीएमसीएच–05

मतलब पूरे बिहार में इस समय सौ के करीब मरीज भर्ती है जिसमें 30 से अधिक मरीज आईसीयू में भर्ती है ।

4–ओमीक्रोन पहुंचा बिहार

एक सप्ताह तक बिहार में ओमीक्रोन से पीड़ित एक मरीज का पता चला था जो दिल्ली अपने ओमीक्रोन पीड़ित भाई से मिलने गया था लेकिन बिहार में कल जिस 32 सैंपल की जांच हुई है उसमें 27 ओमीक्रोन से पीड़ित मिला है इस तरह कुल टेस्ट का 85 प्रतिशत मरीज ओमीक्रोन से पीड़ित मिल रहा है ऐसे में विशेषज्ञों की राय है कि बिहार में जांच में तेजी लायी जाये तो ओमीक्रोन से संक्रमित मरीजों की संख्या काफी हो सकती है ऐसे में बिहार के लोगों को और सतर्क रहने कि जरूरत है ।

5–पटना बना #Corona Hotspot 

जी है अभी तक जो जांच रिपोर्ट सामने आया है उसमें संक्रमण दर की बात करे तो बिहार में सबसे अधिक 21.94 प्रतिशत संक्रमण पटना का है दूसरे स्थान पर गया है वही अभी तक 300 प्रखंड में कोरोना संक्रमित मरीजों की पहचान हो चुकी है पिछले एक सप्ताह के दौरान जांच के बाद संक्रमण दर एक फीसदी से बढ़कर 2.55 प्रतिशत हो गया है ।

बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के काम काज को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर कोर्ट ने लिया संज्ञान

पटना हाईकोर्ट में बिहार क्रिकेट एसोसिएशन में सही तौर से काम- काज किये जाने को लेकर तदर्थ कमेटी बनाने हेतु एक जनहित याचिका पर सुनवाई 17 जनवरी,2022 तक टली। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने अजय नारायण शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई की है।

इस जनहित याचिका में चयनकर्ताओं/ सपोर्ट स्टाफ व बी सी सी आई द्वारा संचालित घरेलू टूर्नामेंट में विभिन्न उम्र के राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाडियों को सही तौर से चयन करने को लेकर आदेश देने का अनुरोध किया गया है।।
इस जनहित यह आरोप लगाया गया है कि प्रबंधन कमेटी में अवैध रूप से कुर्सी पर काबिज लोगों द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा है।

यह भी आरोप लगाया गया है कि कुर्सी पर कथित रूप से अवैध तौर पर बैठे लोग प्रतिभावान क्रिकेट खिलाड़ियों के दावों को हतोत्साहित कर रहे हैं। खिलाड़ियों के मनमाने औऱ अनुचित तौर से चयन कर क्रिकेट को बेचने पर उतारू है।
इस याचिका में यह भी माँग की गई है कि पटना हाईकोर्ट में बिहार क्रिकेट एसोसिएशन से सम्बंधित मामलों की सुनवाई एक साथ एक बेंच द्वारा की जाए।

राज्य में खिलाड़ियों की स्थिति और भी खराब होते जा रही है। साथ ही इस से खिलाड़ी घरेलू टूर्नामेंट में भी कामयाब नहीं हो रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बोर्ड ऑफ कंट्रोल फोर क्रिकेट इन इंडिया एंड अदर्स बनाम क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार व अन्य के मामले में 9 अगस्त, 2018 को दिये गए फैसले दिया गया था।

इसके अनुसार जस्टिस आर एम लोढ़ा कमेटी द्वारा की गई अनुशंसा के आलोक में खिलाड़ियों का सही तौर से चयन करने हेतु क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी के गठन करने को लेकर आदेश देने का अनुरोध किया गया है।

इस मामलें पर अब अगली सुनवाई 17 जनवरी,2022 को होगी।