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Bihar MLC Election 2022: बिहार विधान परिषद चुनाव का मतदान आज

मतदान सुबह 8:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक होगा इसके लिए राज्य में 534 बूथ स्थापित किए गए हैं चुनाव के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है 185 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला है राज्य के कुल 132116 मतदाता 185 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे 7 अप्रैल को मतगणना होगी।

भाजपा ने 12 प्रत्याशी उतारे हैं जबकि जदयू ने 11 प्रत्याशी उतारे हैं एक सीट रालोसपा कर दी गई है राजद ने 23 उम्मीदवार उतारे हैं यह एक ईसीपीआई को दी है कांग्रेस की ओर से 24 विधान परिषद सीटों में 16 निर्वाचन क्षेत्र में प्रत्याशी उतारा गया है।

BIHAR-विधानपरिषद-चुनाव-2022
BIHAR-विधानपरिषद-चुनाव-2022

बिहार एमएलसी चुनाव में मतदाता के रूप में वार्ड मेंबर पंचायत समिति सदस्य मुखिया जिला परिषद सदस्य के सदस्य के साथ अन्य जनप्रतिनिधि मतदान करेंगे पटना में स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत मतदाताओं की संख्या 5275 है जिसमें पुरुष की संख्या 2460 है महिलाओं की संख्या 2815 है।

विधान परिषद चुनाव के लिए पटना स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन के लिए 23 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। यह सभी मतदान केंद्र प्रखंड मुख्यालय में होंगे । सभी मतदान केंद्र प्रखंड परिसर में ही होंगे ।

पटना में कुल मतदाताओं की संख्या 5275 है। नौबतपुर में 305 मनेर में 311 दानापुर में दूसरे बिरहा चाहिए बेटा में 347 विक्रम में 268 दुल्हन बाजार में 208 पालीगंज में 374 मसौढ़ी में जो सविधान बे झंडू बाम a319 पुनपुन में 198 फुलवारी शरीफ में 264 पटना सदर में 14 संपतचक में 53 फतुहा में 245 दनियावां में 106 खुसरूपुर में 126 बख्तियारपुर में 278 अथमलगोला122 बेलछी में 104 पंडारक में 250 और घोश्वरी में 218 मोकामा में 246 है।

आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय मीठापुर में बजरी और मतदान केंद्र बनाया गया है मतगणना 7 अप्रैल को होगी।

मुम्बई से जयनगर(मधुबनी) आ रही लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस डिरेल हुई; रेलवे ने हेल्पलाइन जारी किया

लोकमान्य तिलक से जयनगर जाने वाली लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस के पटरी से उतरने का मामला, रेलवे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि किसी की मौत नहीं हुई है 2 लोग घायल हुए हैं रेलवे यात्रियों को खाने के साथ-साथ सभी सुविधा दी जा रही है उन लोगों को वहां से बस से दूसरे रेलवे स्टेशन में भेजा जा रहा है और अन्य ट्रेनों के माध्यम से उन्हें गंतव्य स्थान के लिए भेजा रेलवे ने पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया है।

कोई भी परिजन फोन करके जरुरी जानकारी ले सकते हैं….रेलवे यात्रियों को पहुचायेगी उनके घर

HJP- 9771425969
Hajipur- 8252912078, 7033591016
Muzaffarpur- 8252912066
SPJ-8102918596
DBG-9264492779
MBI-9262297168
JYG-9262297170

DY SS COML MMR :- 02591-222269/7987315756(MOB NO)

DY SS COML NKRD :- 0253-2465816

DY SS COML KNW :- 0733-2222252

DY SS COML AK :-07242411029

DY SS COM CSN:-02589-222034

DY SS COML JL:-0257-2229664


बिहार विधान परिषद चुनाव का मतदान 4 अप्रैल को होना है, 185 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा

मतदान सुबह 8:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक होगा इसके लिए राज्य में 534 बूथ स्थापित किए गए हैं चुनाव के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है 185 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला है राज्य के कुल 132116 मतदाता 185 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे 7 अप्रैल को मतगणना होगी।

BIHAR-विधानपरिषद-चुनाव-2022
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भाजपा ने 12 प्रत्याशी उतारे हैं जबकि जदयू ने 11 प्रत्याशी उतारे हैं एक सीट रालोसपा कर दी गई है राजद ने 23 उम्मीदवार उतारे हैं यह एक ईसीपीआई को दी है कांग्रेस की ओर से 24 विधान परिषद सीटों में 16 निर्वाचन क्षेत्र में प्रत्याशी उतारा गया है।

बिहार एमएलसी चुनाव में मतदाता के रूप में वार्ड मेंबर पंचायत समिति सदस्य मुखिया जिला परिषद सदस्य के सदस्य के साथ अन्य जनप्रतिनिधि मतदान करेंगे पटना में स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत मतदाताओं की संख्या 5275 है जिसमें पुरुष की संख्या 2460 है महिलाओं की संख्या 2815 है।

Patna High Court : राजीव रंजन सिंह की राष्ट्रीय राजमार्ग से सम्बंधित याचिका पर सुनवाई हुआ

पटना हाईकोर्ट ने राजीव रंजन सिंह की राष्ट्रीय राजमार्ग से सम्बंधित याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इस बात पर नाराजगी जाहिर किया कि हाजीपुर में आर ओ बी का निर्माण एक दशक बाद भी पूरा नहीं हुआ।

कोर्ट ने गंडक नदी पर पुल निर्माण कार्य पूरा करने के लिए पुल निर्माण कंपनी को छह से सात माह का समय दिया।साथ ही कहा कि निर्माण कार्य दोनों ओर हाजीपुर और छपरा से शुरू होना चाहिए।निर्माण कंपनी द्वारा इस पुल के निर्माण के लिए दस महीने की मोहलत मांगी गई,जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया।

याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वैशाली के डी एम से पूछा कि प्रशासन इस मामलें में क्या कर रहा था।कोर्ट ने उनसे जानना चाहा कि जनता की मुश्किलों को दूर करने के लिए उन्होंने क्या कार्रवाई की।

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वैशाली के जिलाधिकारी ने बताया कि हाजीपुर के रामाशीष चौक से बस स्टैंड नेटवर्क से हटा दिया गया है। साथ ही ये भी बताया कि रामाशीष चौक पर जाम का मुख्य कारण अंजानपीर चौक से आर ओ बी का नहीं बनना और दोनों साइड
सड़कों का खस्ताहाल होना।साथ ही जगह जगह मनमाने तरीके से स्पीड ब्रेकर का निर्माण किया जाना।

कंपनी के अधिवक्ता सिद्धार्थ प्रसाद ने बताया कि अजानपीर दोनों ओर की सड़कों को एक माह में मरम्मत और निर्माण कार्य पूरा कर सड़क को ठीक कर दिया जाएगा। साथ ही अजानपीर के आसपास अनावश्यक स्पीड ब्रेकर को भी हटा दिया जाएगा।

साथ ही निर्माण कार्य करने वाली कंपनी की ओर से बताया गया कि हाजीपुर में आर ओ बी बनाने का कार्य चल रहा है और दो माह में यह चालू हो जाएगा।
साथ ही एन एच ए आई की सहमति से हाई वॉल्टेज ट्रांसमीटर टावर स्थानांतरित करने का कार्य दो माह में पूरा हो जाएगा।

कोर्ट को बताया गया कि जहां ओवरब्रिज बनाना है ,लेकिन अब तक यह नहीं बन सका है। इतना ही नहीं, अभी एक ही लेन चालू है। दूसरे लेन का काम 12 वर्षों के बाद भी पूरा नहीं किया जा सका है। इस वजह से गाड़ियां नीचे से होकर जाती है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई अप्रैल,2022 के तीसरे सप्ताह में होगी।

Patna High Court : जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के विस्तार, विकास और भूमि अधिग्रहण मामले पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की

राज्य के पटना स्थित जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट,पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के विस्तार,विकास और भूमि अधिग्रहण व अन्य मुद्दों के मामले पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की। गौरव सिंह समेत अन्य की जनहित याचिकाओं पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

पटना के जयप्रकाश नारायण एयरपोर्ट के निर्देशक कोर्ट में स्वयम आज उपस्थित हो कर पटना और राज्य के अन्य एयरपोर्ट की स्थिति के सम्बन्ध में जानकारी दी।

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उन्होंने पटना एयरपोर्ट की समस्याओं को बताते हुए कहा कि हवाई जहाज लैंडिंग की काफी समस्या है।सामान्य रूप से रनवे की लम्बाई नौ हज़ार फीट होती हैं, जो कि पूर्णिया व दरभंगा में उपलब्ध है,जबकि पटना में रनवे की लम्बाई 68 सौ फीट हैं।

उन्होंने बताया कि एक ओर रेलवे लाइन है और दूसरी ओर सचिवालय हैं।उन्होंने कोर्ट को बताया कि रन वे की लम्बाई बढ़ाने के लिए सर्वे शुरू होगा।कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को यह जानकारी देने को कहा है कि बिहार के सटे राज्य झारखंड,बंगाल,उत्तर प्रदेश,ओडिशा,उत्तर पूर्व के राज्यों में कितने एयरपोर्ट हैं।

कोर्ट को राज्य के गया,पूर्णियां और अन्य एयरपोर्ट के विस्तार,विकास और भूमि अधिग्रहण से सम्बंधित समस्यायों के बारे में बताया गया।कोर्ट ने राज्य के एडवोकेट जनरल से कहा कि गया एयरपोर्ट के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए 268 करोड़ रुपए कोर्ट में जमा करा दे।सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद उसका निबटारा होगा।एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि इसके लिए राज्य सरकार से निर्देश की आवश्यकता होगी।

अधिवक्ता अर्चना शाही ने कोर्ट को बताया कि सम्बंधित केंद्रीय मंत्री ने राज्य सभा में बताया कि पटना एयरपोर्ट के विस्तार और विकास के 1260 करोड़ रुपए की राशि निर्गत किया गया।लेकिन अर्चना शाही ने बताया कि अब तक इस धनराशि का 32% खर्च किया गया है।

राज्य में पटना के जयप्रकाश नारायण अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के अलावा गया, मुजफ्फरपुर,दरभंगा,भागलपुर,फारबिसगंज , मुंगेर और रक्सौल एयरपोर्ट हैं।लेकिन इन एयरपोर्ट पर बहुत सारी आधुनिक सुविधाओं के अभाव व सुरक्षा की भी समस्या हैं।
कोर्ट कल इस मुद्दे पर आदेश पारित करेगा।

बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2022 का परीक्षाफल घोषित

पटना । मैट्रिक परीक्षा 2022 का परीक्षाफल घोषित।
16लाख11हजार99 बच्चे शामिल हुए थे, प्रथम श्रेणी में 424597 छात्र सफल हुए।

बिहार बोर्ड में रामायणी रॉय पटेल हाई स्कूल औरंगाबाद 487 अंक से प्रथम स्थान पर रही।
दूसरे नंबर पर सानिया कुमारी प्रोजेक्ट गर्ल स्कूल रजौली नवादा 486 अंक लाकर दूसरे स्थान पर रही
विवेक कुमार ठाकुर न्यू अपग्रेड हाई स्कूल मधुबनी 486 अंक लेकर दूसरे स्थान पर
तीसरे स्थान पर प्रज्ञा कुमारी उत्कर्मित एमएस बाजार वर्मा गोह औरंगाबाद 485 अंक लेकर तीसरे स्थान पर है

Bihar-Board-BSEB-10-Result-2022
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टॉप फाइव में 8 बच्चों में से 4 लड़कियां और 4 लड़के शामिल है
चौथे स्थान पर निर्जला कुमारी महादेव हाई स्कूल खुसरूपुर पटना ने 484 अंक लेकर चौथे स्थान पर जगह बनाई
पांचवें स्थान पर 3 बच्चों ने 483 अंक लाकर जगह बनाई

अनुराग कुमार सर्वोदय हाई स्कूल भोजपुर
सुशील कुमार उत्कर्मित मिर्जागंज जमुई
निखिल कुमार उच्च माध्यमिक विद्यालय खेड़ाई

बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल बेहाल-CAG

बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट में बिहार के पांच ज़िलों के ज़िला अस्पतालों का अध्ययन किया गया है कि वहाँ 2014-15 से 2019-20 के बीच किस तरह के बदलाव आए हैं। इन अस्पतालों में जाने और ख़राब इलाज के कारण दर दर भटकने वाली जनता को तो पता ही होगा।जब पांच साल में भी कुछ न बदले तब फिर ऐसी सूचना का क्या मतलब रह जाता है।

CAG ने बिहारशरीफ़, जहानाबाद, हाजीपुर, मधेपुरा और पटना के ज़िला अस्पतालों के बारे में लिखा है कि केवल जहानाबाद में आईसीयू है लेकिन वहां उपकरण नहीं है, नर्स, पैरामेडिक्स स्टाफ नहीं है। दवा भी नहीं है। क्या इसे ICU कहा भी जाएगा? पाँचों ज़िला अस्पतालों में कार्डिएक केयर यूनिट नहीं थी। स्ट्रोक और कैंसर के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं थी। मतलब दिल का दौरा पड़ने पर किसी ने ज़िला अस्पातल का रुख़ किया तो मौत निश्चित है। पांच ज़िला अस्पताल में आपात स्थिति में आपरेशन के लिए आपरेशन थियेटर तक नहीं है। यही नहीं जहां ओटी मिली है वहां पर दवा भी नहीं है। अब आप सोचिए, ऐसी जगह पर स्वास्थ्य बीमा का कार्ड लेकर जाएँगे भी तो क्या इलाज होगा? लेकिन मेरी मानिए तो इसे लेकर परेशान न हों, धर्म या जाति का गौरव बढ़ाने में लगे रहिए। उस काम में कम से कम मानसिक शांति की तो गारंटी है ही।

बिहार के कई ज़िला अस्पतालों में दस साल से बेड की संख्या नहीं बढ़ाई गई है। जो स्वीकृत संख्या है, उससे भी काफ़ी कम बेड उपलब्ध हैं। पंजीकरण काउंटर पर मरीज़ों की संख्या में 13 से 208 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। यही नहीं स्वीकृत पदों में से केवल 24 से 32 प्रतिशत बेड ही ज़िला अस्पतालों में मौजूद हैं। 59 प्रतिशत रोगियों ने अपने पैसे से दवा ख़रीदी। ज़ाहिर है नि:शुल्क दवा की योजना काग़ज़ पर ही सभी के लिए है।

पटना के अलावा नौ ज़िला अस्पतालों में ब्लैड बैंक तक नहीं था। चार अस्पतालों के ब्लड बैंक में कहीं भी हेपिटाइटिस ए का परीक्षण नहीं किया गया था। मतलब अगर यहां का ख़ून चढ़ गया और उस रक्त में हेपिटाइटिस ए होगा तो मरीज़ का क्या हाल होगा, आप समझ सकते हैं। हाजीपुर के ज़िला अस्पताल में वेंटिलेटर, ईसीजी मशीन, कार्डिएक मॉनिटर काम नहीं करते हैं। कई ज़िला अस्पतालों में टी टी ई का इंजेक्शन था लेकिन इंजेक्शन होते हुए भी गर्भवती महिलाओं को नहीं दिया गया। लेकिन आप इन सब को नज़रअंदाज़ करते हुए बिहार दिवस के मौक़े पर मैं बिहार हूँ टाइप की कविता लिखते रहिए, ताकि आपकी भावनाएँ गर्व कर सकें। अस्पताल और डॉक्टर को लेकर परेशान ही क्यों होना। जो आपका स्तर है, उसे किसी भी हाल में ऊपर नहीं आने देना है।

CAG की रिपोर्ट के अनुसार अस्पतालों में दवाओं और उपकरणों की सप्लाई के लिए बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर नाम की एक संस्था बनाई गई है। इसके पास 10 हज़ार करोड़ से अधिक का बजट है फिर भी खर्च केवल 3100 करोड़ हुआ है। पांच साल के दौरान BMSI के द्वारा 1000 से अधिक परियोजनाएं शुरू की हैं लेकिन 187 ही पूरी हुई हैं। 387 योजनाएं तो शुरू भी नहीं हो सकी हैं। 2014-20 तक डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिक्स स्टाफ की लगातार कमी रही लेकिन इन पदों को भरने के लिए कुल रिक्तियों को कभी प्रकाशित नहीं किया गया।

बीस साल से नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं। बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था का यह रिकार्ड है। इलाज कराने के नाम पर घर और ज़मीन बेच देने, क़र्ज़ लेने में जो सुख मिलता है उसका कोई जवाब नहीं। कम से कम संतोष होता है कि इलाज के लिए जान लगा दिए। खूब सेवा किए। स्वास्थ्य को राजनीतिक सवाल बना देंगे तो फिर बिहार दिवस पर आप बिहार को लेकर गर्व ठेलते हुए कविता कैसे लिखेंगे। मैं बिहार हूँ फ़लाँ हूँ ढिमकाना हूँ। है कि नहीं।

लेखक –रवीश कुमार

Patna High Court : राज्य में शराब तस्करी करने वाले गिरोह के सदस्यों पर मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत करवाई शुरू नही किये जाने पर नाराजगी व्यक्त की

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में शराब तस्करी करने वाले गिरोह के सदस्यों पर मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत करवाई शुरू नही किये जाने पर नाराजगी व्यक्त की।जस्टिस संदीप कुमार ने इस मामलें की सुनवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय के सयुंक्त निदेशक को 4 अप्रैल,2022 को तलब किया है।

कोर्ट ने गंगाराम की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।कोर्ट ने चार हज़ार लीटर से अधिक शराब की खेप पकड़े जाने के मामले में अभियुक्त गंगाराम ने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की।

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इसके पहले इस मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि सिर्फ शराब पहुंचाने वालों को ही क्यों पकड़ा जाता है ? जखीरा खड़ा करने वाले गिरोह को पुलिस क्यों नही पकड़ रही है।

इसी सिलसिले में कोर्ट ने आयकर विभाग के डायरेक्टर, अनुसन्धान एवं प्रवर्तन निदेशालय को पक्षकार बनाते हुए एक महीने पहले उन्हें आदेश दिया था कि शराब की तस्करी करने वाले गिरोह के सदस्यों की संपत्ति वगैरह की छानबीन करने की कार्यवाही शुरू करें।

इस मामलें पर 4 अप्रैल, 2022 को सुनवाई होगी।

Patna High Court: पटना हाई कोर्ट ने चर्चित कैमूर केअर होम मामले में अग्रिम जमानत दी

जस्टिस सुनील कुमार पंवार ने पुनर्वास प्रशिक्षण अधिकारी संजू श्रीवास्तव औऱ बशिष्ठ मुनि पांडेय को दो अलग अलग अग्रिम जमानत हेतु याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये आदेश पारित किया। सी बी आई द्वारा दर्ज किए गए उक्त केस की निगरानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा किया जा रहा है।

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता दीपक कुमार सिन्हा ने दलील दी थी कि याचिकाकर्ता प्राथमिकी में नामित नहीं किये गए थे और इनका नाम नाबालिग लड़कियों द्वार सीआर पी सी की धारा 164 के तहत दिए गए बयान में आया था। इस कांड के मुख्य अभियुक्त पिंटू पाल के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट व आई पी सी की धारा 354 के तहत कांड दर्ज किया गया था, जिसे पटना हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत दी जा चुकी है।

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इसके अलावा और भी आरोप लगाया गया था कि याचिकाकर्ता ने पुलिस में शिकायत करना सही नहीं समझा। इसके साथ ही पैसों और कागजात के गबन का भी आरोप था।

शुरुआत में बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के महिला विकास निगम के अंतर्गत आने वाले एन जी ओ ग्राम स्वराज सेवा संस्थान, लालापुर, कुदरा केअर होम के विरुद्ध भभुआ स्थित महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसे बाद में मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस में सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार मामले को सी बी आई ने ले लिया था।

दरभंगा में बेखौफ अपराधियों ने दिनदहाड़े गोली मारकर अमेज़न कंपनी की 12 लाख रुपये लूटकर फरार

बेखौफ अपराधियों ने गोली मारकर अमेज़न कंपनी की 12 लाख रुपये की लूट, पुलिस मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुटी

बिहार में अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ गया है कि दिनदहाड़े किसी घटना को अंजाम देते हैं और पुलिस मूकदर्शक बनकर देखते रह जाती है। शायद यही कारण है कि एक के बाद एक क्राइम की घटनाओं को अपराधी अंजाम दे रहे हैं। ताजा मामला दरभंगा जिले के लहेरियासराय थाना क्षेत्र का है। जहां अपराधियों ने दिनदहाड़े फ्रेंड्स कॉलोनी के पास अमेज़न कंपनी से रुपया कलेक्ट कर बैंक जा रहे रेडिएंट कंपनी के कैशियर जटाशंकर को गोली मारकर 12 लाख रुपये की लूटकर मौके से फरार हो गया। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है।

घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि बहादुरपुर थाना क्षेत्र के बलभद्रपुर नवटोलिया निवासी जटाशंकर चौधरी रेडिएंट कंपनी में कार्यरत थे और अमेज़न कंपनी के कार्यालय से कैश कलेक्ट कर बैंक में जमा करने जा रहे थे। उसी क्रम में पहले से घात लगाये अपराधी ने फ्रेंड्स कॉलोनी के पास जटाशंकर चौधरी को रोककर तबातोड़ फारिंग कर घायल कर दिया और रुपये से भरा बैग लेकर समस्तीपुर की ओर फरार हो गया। जिसके बाद पुलिस ने स्थानीय लोगो की मदद घायल जटाशंकर को इलाज के लिए अस्पताल भेजा। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।

वही मौके पर पहुंचे सदर एसडीपीओ कृष्ण नंदन कुमार ने कहा की फ्रेंड्स कॉलोनी के पास जटाशंकर चौधरी नाम के व्यक्ति को अपराधी ने गोली मार दी है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंचकर मामले कि जांच में जुट गई है। वही उन्होंने कहा कि लूट की राशि कितनी है वह अभी कन्फर्म नहीं है। वहीं उन्होंने कहा कि इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरे को भी खंगाला जा रहा है। ताकि अपराधी की गिरफ्तार कर मामले का सफल उद्भेदन किया जा सके।

पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कहा-योगी को बिहार का मुख्यमंत्री बना दीजिए

पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने पटना में लगातार हो रही हत्या पर बताया कि सरकार पूरी तरह फेल कर चुकी है, कानून व्यवस्था की स्थिति बिल्कुल खराब है । सरकार से कानून व्यवस्था नहीं संभल पा रहा है और हालात बिहार के काफी खराब है। कोई सुरक्षित नहीं रहा है और हालात बिहार के काफी खराब है।

राबड़ी देवी ने भारतीय जनता पार्टी के द्वारा राज्य में योगी मॉडल लागू किए जाने पर कहा कि कौन रोक रखा है योगी को बिहार का मुख्यमंत्री बना दीजिए और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दीजिए कौन रोक कर रखा है।

शराब बंदी कानून में संशोधन पर उन्होंने कहा कि सरकार यही कर सकती है सरकार से कुछ नहीं संभल रहा है और लगातार शराब मिल रहा है, सरकार शराब बंदी कानून को पालन करने में लोगों को प्रताड़ित कर रही है। ।

Patna High Court: राज्य स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, आयुष के डायरेक्टर व पटना स्थित सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज के प्रिंसिपल को किया नोटिस जारी

पटना हाई कोर्ट ने राज्य स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, आयुष के डायरेक्टर व पटना स्थित सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज के प्रिंसिपल को नोटिस जारी किया।जस्टिस पी बी बजनथ्री ने सत्येंद्र कुमार तिवारी की अवमानना वाद पर सुनवाई की।

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कोर्ट के आदेश के बावजूद पटना स्थित आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज में प्रोफ़ेसर की नियुक्ति नहीं किए जाने से संबंधित अवमानना याचिका की सुनवाई की। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अशोक कुमार गर्ग ने कोर्ट को बताया कि विगत 20 दिसंबर, 2021 को पटना हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें पटना आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज में प्रोफ़ेसर के पद पर बहाल करने का निर्देश दिया था।

लेकिन कोर्ट के आदेश के बावजूद भी उन्हें अपने पद पर नियुक्त नहीं किया गया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पंचकर्म के प्रोफेसर के पद पर नियुक्त करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने इनकी नियुक्ति तत्काल करने को कहा था।

Patna High Court: पश्चिमी चम्पारण,बेतिया के 53 चतुर्थ श्रेणी के कर्माचारियों नियुक्ति व ज़िला जज,बेतिया द्वारा इन नियुक्तियों को सहमति का विरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट ने पश्चिमी चम्पारण,बेतिया के 53 चतुर्थ श्रेणी के कर्माचारियों नियुक्ति व ज़िला जज,बेतिया द्वारा इन नियुक्तियों को सहमति का विरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई की।जस्टिस पी बी बजनथ्री ने सतीश कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी नियुक्त 53 चतुर्थ श्रेणी के कर्माचारियों को नोटिस जारी किया है।

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याचिककर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि इन 53 चतुर्थ श्रेणी के कर्माचारियों को साक्षात्कार के आधार पर नियुक्त किया गया।उन्होंने कहा कि सुप्रीमकोर्ट ने 14 फरवरी,2014 को रेणु व अन्य बनाम तीस हजारी,दिल्ली में नियम तय किया था।साथ ही पटना हाईकोर्ट ने 13 मई,2018 इस सम्बन्ध में कानून निश्चित कर दिया था।

इन नियुक्तियों में पारदर्शिता और भारतीय संविधान के आर्टिकल 14 को देखते हुए नियुक्ति की जानी चाहिए।कोर्ट ने मामलें की गम्भीरता को देखते हुए सभी नवनियुक्त चतुर्थ श्रेणी के कर्माचारियों को नोटिस जारी कर दिया हैं।इस मामलें में पटना हाईकोर्ट की ओर से अधिवक्ता सत्यवीर भारती ने पक्ष प्रस्तुत किया।इस मामलें पर आगे भी सुनवाई की जाएगी।

भारतीय लोकतंत्र के अपराधिकरण से धनाढ़यकरण तक का सफर

भारतीय लोकतंत्र के अपराधिकरण से धनाढ्यकरण तक

भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था हमारे आपकी जरूरतों और मूल्यों पर कहां तक खड़ी उतर रही है यह सवाल अब उठने लगा है। आज कल हमारी मुलाकात पंचायती राज व्यवस्था में चुनकर आये प्रतिनिधियों से रोजाना हो रहा है और इस दौरान पंचायत चुनाव का मतलब क्या रह गया है इसको बेहतर तरीके से समझने का मौका भी मिल रहा है।

सुकून देने वाली बात यह है कि अब इसको लेकर चर्चा होनी शुरु हो गयी है कि इस तरीके से चुन कर आये जन प्रतिनिधियों से आप बदलाव की बात कहां तक सोच सकते हैं, संयोग से जिस इलाके में मैं घूम रहा हूं उसी इलाके का मुकेश सहनी भी रहने वाला है। मुकेश सहनी भारतीय लोकतंत्र का वो चेहरा है जो अब हर गांव में मौजूद है और ऐसे लोगों का लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्व काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है।

1970के दशक में जब लोकतंत्र लोगों की जरूरतों को पूरा करने में फेल होने लगा था तो राजनीति का अपराधीकरण की शुरुआत हुई थी और बिहार में एक दौर ऐसा आया जब जनप्रतिनिधि अपराधियों के सहयोग से मुखिया से लेकर सांसद तक बनने लगे बाद में वही अपराधी जो नेता के लिए बूथ कैप्चर करता था वो खुद बूथ कब्जा कर मुखिया से लेकर सांसद तक बनने लगा।

दो दशक तक बिहार में राजनीति के अपराधीकरण का दौर काफी तेजी से आगे बढ़ा लेकिन 2005 में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद धीरे धीरे यह दौर समाप्त होने लगा एक तो अपराधी भी जनता की जरूरतों पर खड़ा नहीं उतर पा रहा था वही कानून व्यवस्था बेहतर होने पर जनता को भी अपराधी से न्याय मांगने की जरुरत कम पड़ने लगी ।

लेकिन इसी दौर बिहार में चुनाव के दौरान पैसे का खेल भी शुरु हुआ और आज स्थिति यह है कि कल तक जो नेता को चुनाव लड़ने के लिए पैसा देता था वो आज खुद चुनावी मैदान में उतर गया है।और यह प्रवृति गांव से लेकर राजधानी तक लगातार बढ़ता जा रहा है इस बार के पंचायत चुनाव में हर गांव में मुकेश सहनी जैसा व्यक्ति जो मुंबई दिल्ली में अकूत संपत्ति अर्जित कर लिया है वो गांव आकर चुनाव लड़ा है और आने वाले समय में विधायक और सांसद का चुनाव लड़ना है इसकी फील्डिंग अभी से ही शुरु कर दिया है ।

ऐसे लोग करता क्या है यह जब आप समझ जाएंगे तो फिर आपको समझ में आ जायेगा कि लोकतंत्र का मतलब क्या है हालांकि इस तरह के पैसे वालो का काम करने का तरीका अलग अलग है लेकिन सभी तरीकों के पीछे जनता की जरूरतों को कैसे पूरा किया जाये और फिर उसका इस्तेमाल चुनाव के दौरान कैसे किया जाये यही रहता है ।

कई ऐसे पैसे वाले है जो घोषित कर चुके हैं कि हमारे विधानसभा क्षेत्र का जो वोटर है अगर बीमार पड़ता है तो उसके दवा में जितना खर्च होगा वो मुहैया कराएगा ,महिलाओं से जुड़ी जितना भी पर्व त्यौहार आयेगा उसमें उस पर्व से जुड़ी सामग्री संभावित विधायक प्रत्याशी द्वारा मुहैया कराया जाता है ,बेटी की शादी है तो विधायक के जो संभावित उम्मीदवार है उनकी ओर से टीवी फ्रिज जैसी सामग्री मुहैया करायी जाती है।

कल संयोग से ऐसे ही एक संभावित विधायक प्रत्याशी के घर पर जाने का मौका मिला गांव में पांच करोड़ का घर जरूर होगा और उसके घर पर पांच छह बड़ी गाड़ी वैसे ही खड़ी थी। गये थे एक वार्ड पार्षद से मिलने लेकिन उसके घर ठीक से बैठने का जगह तक नहीं था ,जैसे ही पहुंचे वो सीधे उसी संभावित विधायक उम्मीदवार के दरवाजे पर लेकर आ गया बाहर कुर्सी सजी हुई थी।

बैठे ही थे कि गांव में आरो का पानी लेकर एक लड़का आ गया उसके ठीक पांच मिनट बाद बढ़िया नास्ता फिर शुद्ध दुध का चाय, चाय खत्म हुआ नही तब तक लौंग इलाइची लेकर खड़ा है पता चला राजनाथ सिंह राधा मोहन सिंह जैसे नेता इनके घर पिछले चुनाव में आये हुए थे। हर दूसरे तीसरे गांव में इस तरह के संभावित प्रत्याशी आपको मिल जायेगा जो पैसा के सहारे वोट की खेती शुरु किये हुए हैंं और यही वजह है कि इस बार पंचायत चुनाव में उम्मीदवार को विधायक और सांसद के चुनाव से भी ज्यादा खर्च पड़ा है और इसका असर बिहार के आने वाले चुनाव में भी देखने को मिलेगा ।

वैसे बातचीत में लोग अब कहने लगे हैंं कि सरकार भी मुफ्त राशन,गैस,घर और शौचालय बना कर वोट खरीदता है तो फिर ऐसे लोगों से मदद लेकर वोट करना कहां से गुनाह है भारतीय लोकतंत्र में यह एक नया बदलाव आया है इसके सहारे लोकतंत्र कहां तक खीचता है ये देखने वाली बात होगी ।

67 वीं बिहार लोक सेवा आयोग की संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा की तिथि बदली

67 वीं बिहार लोक सेवा आयोग की संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा जो पूर्व से 7 मई को निर्धारित की सीबीएससी स्कूल के परीक्षा होने के कारण यह परीक्षा 8 मई को आयोजित की जाएगी बिहार लोक सेवा आयोग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है

BPSC notification
BPSC notification

Patna High Court : दो नवनियुक्त जज राजीव राय और हरीश कुमार 29, मार्च 2022 को पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे

पटना हाईकोर्ट के दो नवनियुक्त जज राजीव राय और हरीश कुमार 29,मार्च 2022 को पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। उन्हें नए शताब्दी भवन लॉबी में पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल शपथ दिलाएंगे। यह समारोह सुबह दस बजे होगा।

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इसके साथ ही पटना हाईकोर्ट में जजों की दो जजों की बढोतरी होगी। चीफ जस्टिस संजय करोल समेत कार्यरत जजों की कुल संख्या 25 हैं,जबकि इन दो जजों के योगदान देने के बाद ये संख्या 27 हो जाएगी।

जबकि पटना हाईकोर्ट में जजों के स्वीकृत पद 53 हैं।इस तरह अभी भी पटना हाईकोर्ट में जजों के 26 पद रिक्त रह जाएँगे।

Patna High Court : पटना हाईकोर्ट ने राज्य के उत्पाद कोर्ट के बुनियादी सुविधाओं के विकास के मामले पर सुनवाई की

जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई करते इस मामलें पर की जा रही कारवाइयों का ब्यौरा राज्य सरकार को अगली सुनवाई में देने का निर्देश दिया।

पिछली सुनवाई में भी कोर्ट ने राज्य सरकार को उत्पाद कोर्ट के लिए बुनियादी सुविधाओं के संबंध में विस्तृत हलफनामा दायर देने का निर्देश दिया था । कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए जानना चाहा था कि इन कोर्ट के गठन में विलम्ब क्यों हो रहा हैं।कोर्ट ने राज्य सरकार से जानना चाहा था कि सीबीआई, श्रम न्यायलयों व अन्य कोर्ट के लिए अलग अलग भवन की व्यवस्था है,तो उत्पाद कोर्ट के लिए अलग भवन की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है।

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महाधिकवक्ता ललित किशोर ने राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया था कि सभी 74 उत्पाद कोर्ट के लिए जजों की बहाली हो चुकी हैं।साथ ही 666 सहायक कर्मचारियों की बहाली के लिए स्वीकृति दे दी गई हैं। उन्होंने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया था कि राज्य सरकार इन उत्पाद कोर्ट के सही ढंग से के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है ।उन्होंने सभी मुद्दों पर जवाब देने के लिए कोर्ट से अतिरिक्त समय की माँग की।

इस मामले पर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 सप्ताह बाद की जाएगी।

Bihar Breaking News : नीतीश कुमार पर मानसिक रूप से विक्षिप्त शंकर कुमार वर्मा ने जरा थप्पड़

मुख्यमंत्री के जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान बख्तियारपुर में सुरक्षा घेरा तोड़ मुख्यमंत्री के नजदीक पहुंचने की कोशिश करता युवक को पुलिस ने लिया हिरासत में
युवक से हो रही हैं पूछताछ
युवक के बैकग्राउंड की जानकारी पुलिस ले रही है।

पीएम मोदी से नीतीश की गुलाकात पर तेजस्वी ने साधा निशाना, रीढ़ विहीन है नीतीश

CM योगी के शपथ समारोह की एक तस्वीर वायरल है। मोदी के आगे 145 डिग्री तक झुक आए शख़्स का नाम है नीतीश कुमार। ये वही नीतीश हैं जिन्होंने साल 2013 में मोदी को लेकर NDA(भाजपा) से गठबंधन तोड़ लिया था। अब आगे की कहानी पढ़िए।

जून 2013 में मोदी को BJP की चुनाव समिति का अध्यक्ष बनाया गया तो इन्हीं नीतीश ने भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया। इसके बाद नीतीश ने खुद को धार्मिक तटस्थता के पैरोकार के रूप में पेश किया।

बिहार भाजपा टीम ने महीनों तैयारी कर बिहार में मोदी की पहली रैली करवाई। नाम था- हुंकार रैली। बड़े बड़े पत्रकार दिल्ली से बिहार निर्यात किए गए। पूरे पटना को मोदी के पोस्टरों से आट दिया गया। इस रैली में मोदी ने नीतीश को ‘मौकापरस्त’ और ‘बगुलाभगत’ तक कहा।

अपनी एक किताब में राजदीप सरदेसाई बताते हैं- कुछ साल पहले एक रात्रि भोज पर मैंने नीतीश से पूछा था कि मोदी के बारे में ऐसा क्या था कि वह इतना आहत हो गए। इस पर नीतीश का जवाब था, ‘यह विचारधारा की लड़ाई है…यह देश सेक्यूलर है और सेक्यूलर रहेगा…कुछ लोगों को यह पता होना चाहिए।

हालाँकि नीतीश Secularism का फ़र्ज़ी यूज करते रहे हैं, गुजरात दंगों के बाद पासवान ने अपना इस्तीफ़ा दे दिया था। लेकिन तब रेलवे मंत्री नीतीश ने कुछ नहीं किया। बल्कि उन्होंने गुजरात जाकर एक कार्यक्रम में मंच भी साझा किया। उन्होंने मुसलमानों को सिर्फ़ छला है।

2010 में बिहार चुनाव हुए। कुछ पर्सेंट मुस्लिम वोट राजद से शिफ़्ट होकर नीतीश की तरफ़ चले गए। इससे नीतीश की फ़ुल Majority के साथ सरकार आई। वे समझ गए लंबी राजनीति के लिए सबका वोट चाहिए। इसलिए उन्होंने भाजपा गठबंधन में रहते हुए भी मोदी से दूरी बनाना शुरू कर दिया।

नीतीश BJP में जेटली और सुशील मोदी से काम चलाते रहे। साल 2009 का समय था। भाजपा के PM पद के उम्मीदवार थे आडवाणी। भाजपा ने शक्तिप्रदर्शन के लिए लुधियाना में संयुक्त रैली रखी और नीतीश को बुलाया। नीतीश ने आने में अनिच्छा ज़ाहिर की क्योंकि उन्हें मालूम था वहाँ मोदी आएँगे।

जेटली ने उन्हें कहा कि ये आडवाणी का कार्यक्रम है इसलिए उनका होना ज़रूरी है। नीतीश के आडवाणी से अच्छे सम्बन्ध थे। इसलिए वहां जाने के लिए राज़ी हो गए। लेकिन मोदी बड़े राजनीतिक खिलाड़ी हैं। नीतीश के मंच पर पहुंचते ही वे अभिवादन करने के लिए पहुँच गए और नीतीश का हाथ पकड़ लिया।

ये ऐसा सीन था जिसे TV और अख़बारों की हेडलाइनों ने लपक लिया। नीतीश इसपर लाल-पीले हो गए। उन्होंने मोदी के हाथ पकड़ने की घटना को खुद के साथ विश्वासघात कहा। राजदीप की किताब के अनुसार नीतीश ने बाद में जेटली से कहा, ‘आपने अपना वायदा नहीं निभाया। साल 2010 में पटना में, BJP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक थी। पूरे पटना में मोदी के बड़े-बडे़ पोस्टर लगाए गए। जिसमें कोसी के बाढ़ पीड़ितों के लिए मोदी के योगदान का आभार व्यक्त किया गया था। दरअसल गुजरात सरकार ने बाढ़ पीडितों के लिए 5 करोड़ रुपए दिए थे।

नीतीश ने पटना में आए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को अपने यहां डिनर पर बुलाया हुआ था। नीतीश ने जब समाचार पत्रों में मोदी के दान वाले विज्ञापन देखे तो ग़ुस्सा हो गए। उन्होंने डिनर कार्यक्रम तक रद्द कर दिया। और बाद में दान के पैसे लेने से भी इंकार कर दिया।

इस बात पर मोदी भी गुस्सा हो गए। राजदीप की किताब के अनुसार मोदी ने BJP अध्यक्ष गडकरी से कहा, ‘आप नीतीश को मेरे साथ ऐसा आचरण की अनुमति कैसे दे रहे हैं?’ नीतीश की आत्मकथा लिखने वाले संकर्षण के अनुसार, ‘यह वह दिन था जब नीतीश-मोदी की लड़ाई ने व्यक्तिगत स्तर पर एक भद्दी शक्ल ले ली“।

राजदीप सरदेसाई की किताब के अनुसार- 2010 की घटना पर नीतीश ने अपने एक सहयोगी से कहा ‘हम उनके (मोदी-भाजपा) बगैर भी चल सकते हैं।’

2010 के बाद भाजपा में मोदी का क़द बढ़ने लगा। 2013 तक वे भाजपा के निर्विवादित शीर्ष नेता बन गए। 2013 में नीतीश ने भी BJP गठबंधन से रिश्ता तोड़ लिया।

एक वक्त था, जब सार्वजनिक मंच पर मोदी के गले मिलने पर नीतीश लाल-पीले हो गए और एक वक्त अब है, जब वो ही नीतीश तीर-कमान की तरह मोदी के पैरों में लटक रहे हैं। वे एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं लेकिन आचरण उस राज्यपाल की तरह कर रहे हैं जिसका कार्यकाल PM की दया पर आश्रित होता है।

सांसद राम कृपाल यादव ने लोकसभा में शून्यकाल में पटना-गया रेल खंड के नदवां स्टेशन सहित अन्य जगहों पर रेलवे द्वारा आवागमन के रास्ते को बंद कर देने पर आमलोगों हो रही परेशानियों का मामला उठाया

आज पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री और सांसद राम कृपाल यादव ने लोकसभा में शून्यकाल में पटना गया रेल खंड के नदवां स्टेशन सहित अन्य जगहों पर रेलवे द्वारा आवागमन के रास्ते को बंद कर देने आमलोगों हो रही परेशानियों का मामला उठाया।

महोदय

मैं अपने संसदीय क्षेत्र पाटलीपुत्र की एक महत्वपूर्ण समस्या को सदन के माध्यम से माननीय रेल मंत्री के समक्ष रखना चाहता हूं।

पटना गया रेल खंड पर सरमा रेलवे गुमटी से लेकर सिपारा गुमटी के पश्चिम तरफ सड़क नहीं है। सिर्फ रेलवे लाइन के पूर्वी तरफ हीं सड़क  है। रेलवे लाइन के पश्चिमी तरफ लाखों की आबादी बस गयी है। उनलोगों को आवागमन के लिए रेलवे लाइन क्रॉस कर रेलवे लाइन के पूर्वी तरफ वाली सड़क पर आना पड़ता है।

जट डुमरी रेलवे स्टेशन, सिपारा गुमटी पर ROB बन रहे हैं। लेकिन भलुआं, नदवां, क़ुरथौल जहाँ पर लाखों की घनी आबादी है, उनलोगों के पास अवैध रूप से रेलवे लाइन क्रॉस करने के अलावा दूसरा कोई उपाय नहीं है। यहां तक कि गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों को इलाज के लिए एम्बुलेंस की सुविधा नहीं मिलती है। जिसके कारण इन इलाकों में रेलवे लाइन क्रॉस करने में लगातार हो रही दुर्घटना को देखते हुए रेलवे ने सभी अवैध क्रासिंग को बंद कर दिया है। जिसके कारण लोग परेशान हैं। नदवां स्टेशन पर विगत दिनों हजारों की संख्या में स्थानीय लोगों ने धरना और अनशन किया था। स्थानीय जनप्रतिनिधि होने के नाते उस धरना में मुझे भी जाना पड़ा था। मैंने पहल करके धरनार्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ महाप्रबंधक पूर्व मध्य रेलवे की बैठक भी करवाई थी। लेकिन अभी तक कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला है।

अतः आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से आग्रह है कि इस मामले का संज्ञान लेकर जल्द से जल्द कोई वैकल्पिक रास्ता निकालने की कृपा करें।

Patna High Court: पटना के पाटलिपुत्र कॉलनी की बदहाल सड़कों की मरम्मत और निर्माण करने को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने ऑनलाइन सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को पटना नगर निगम के आयुक्त के समक्ष अभ्यावेदन दायर करने को कहा है। कोर्ट ने इस मामलें में शीघ्र कार्रवाई करने का निर्देश दिया। यह जनहित याचिका संजय कुमार ने दायर किया था।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राजू गिरि ने कोर्ट को बताया कि पिछले कई वर्षों से सड़कों की स्थिति बहुत ही खराब हो गई है। इस कॉलनी को वर्ष 1954 में डॉ राजेन्द्र प्रसाद के गाइडेंस में एक आवासीय कॉलनी के रूप में विकसित किया गया था। उन्होंने बताया कि इस कॉलोनी को पटना नगर निगम की सेवा देने के सरकार से अनुरोध किया गया।

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अधिवक्ता राजू गिरि ने बताया कि 1960 में पटना नगर निगम ने एक अधिसूचना जारी कर इस कालोनी को अपनी सेवा देना स्वीकार किया, लेकिन पाटलिपुत्र को आपरेटिव सोसाईटी ने इसका विरोध किया।

इसके बाद मुकद्दमेबाजी का कई दौर चला,जिसमें फैसला पटना नगर निगम के पक्ष में निर्णय दिया था।इसे देखते हुए पटना हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई कर पटना नगर निगम के आयुक्त के समक्ष अभ्यावेदन देने को कहा।

इससे पूर्व पाटलिपुत्र कॉपरेटिव सोसाइटी द्वारा 1957 में म्यूनिसिपल सेवाओं को देने का आग्रह राज्य सरकार से किया गया था, लेकिन राज्य सरकार द्वारा आर्थिक कारणों का हवाला देते हुए अस्वीकार दिया था।

लेकिन जो फैसले दिए गए,उससे इस कॉलोनी को समस्यायों से निजात और लाभ नहीं मिला।आज भी स्थिति वैसी ही बनी हुई है।

Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन में कई व्यक्तियों के आंख की रौशनी खो जाने के मामले में सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार ने हलफनामा दायर कर कार्रवाई रिपोर्ट दायर किया। मुकेश कुमार ने ये जनहित याचिका दायर की है। इसमें कोर्ट को बताया गया कि आँखों की रोशनी गवांने वाले पीडितों को बतौर क्षतिपूर्ति एक एक लाख रुपए दिए गए हैं। साथ ही मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल को बंद करके एफ आई आर दर्ज कराया गया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विजय कुमार सिंह को कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा दायर हलफनामा का जवाब दायर करने के 31 मार्च,2022 तक का समय दिया है।उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस मामलें प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है,लेकिन अनुसंधान का कार्य नहीं हो रहा हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वी के सिंह को इस अस्पताल को पार्टी बनाने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने मुकेश कुमार की जनहित याचिका पर पिछली सुनवाई में स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को विस्तृत हलफनामा दायर करने का आदेश दिया था।

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इस याचिका में हाई लेवल कमेटी से जांच करवाने को लेकर आदेश देने अनुरोध किया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कथित तौर पर आई हॉस्पिटल के प्रबंधन व राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा बरती गई अनियमितता और गैर कानूनी कार्यों की वजह से कई व्यक्तियों को अपने आँखों को खोना पड़ा।

याचिका में यह कहा गया है कि राज्य सरकार के अधिकारियों को भी एक नियमित अंतराल पर अस्पताल का निरीक्षण करना चाहिए था। याचिका में आगे यह भी कहा गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों व अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज करनी चाहिए, क्योंकि इन्हीं की लापरवाही की वजह से सैकड़ों लोगों को अपनी आंख गंवानी पड़ी।

मुजफ्फरपुर आई अस्पताल प्रबंधन व जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही की वजह से आंख खोए व्यक्तियों को मुआवजा देने का भी आग्रह किया गया है। पीड़ितों को सरकारी अस्पताल में उचित इलाज करवाने को लेकर आदेश देने का भी अनुरोध किया गया है।

इस मामले पर अगली सुनवाई आगामी 31मार्च,2022 को की जाएगी।

बाप के हत्यारा को मिल रहा था सरकारी संरक्षण,आहत होकर बेटा ने किया आत्महत्या

मोतिहारी -चर्चित RTI कार्यकर्ता के पुत्र ने की आत्महत्या, न्याय और एसपी के नही मिलने से क्षुब्ध होकर किरोसिन तेल छिड़क लगाई आग, हाई टेंशन तार पर कूद झुलसा

मोतिहारी में अपने पिता आरटीआई कार्यकर्ता बिपिन अग्रवाल की हत्या से सदमे में चल रहे पुत्र रोहित कुमार (14 वर्ष) ने आत्महत्या कर जीवनलीला समाप्त कर ली। मोतिहारी के ही एक अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी। रोहित पुलिस की कार्रवाई से नाखुश चल थाम। उसके दादा विजय अग्रवाल ने बताया कि गुरुवार की सुबह वह एसपी से मिलकर न्याय की गुहार लगाने गया था। उसने बकायदा फोन कर उनसे अनुमति भी ली थी।

लेकिन उससे एसपी नहीं मिलकर अधीनस्थ कर्मी को भेजे। जबकि वह एसपी से ही मिलने की गुहार लगाता रहा। लेकिन काफी जद्दोजहद के बाद भी संतोषजनक जवाब नही मिला। इस कारण सदमे में आकर रोहित ने घर लौटकर आत्महत्या का प्रयास किया। घर के सामने एक तीन मंजिले निजी नर्सिंग होम के छत पर पहले उसने प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए फिर केरोसिन छिड़ककर शरीर मे आग लगाई। और छत से कूदकर बिजली प्रवाहित हाई टेंशन तार पर गिरकर आत्महत्या का प्रयास किया। इसमें वह बुरी तरह झुलस गया।

घटना के तत्काल बाद परिजनों ने आरटीआई कार्यकर्ता बिपिन अग्रवाल के सबसे बड़े पुत्र रोहित को मोतिहारी नगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां देर रात रोहित की इलाज के दौरान मौत हो गयी। पहले पति को खोने व अब न्याय के लिए पुत्र को खोने के कारण आरटीआई कार्यकर्ता की पत्नी का रो रो कर बुरा हाल है। बता दें कि हरसिद्धि बाजार निवासी आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल की हत्या दबंगों ने इसलिए करवा दी थी कि वे सरकारी जमीन से कब्जा हटाने को लेकर पटना उच्च न्यायालय में आधे दर्जन अतिक्रमणवाद के जनहित मुकदमे लड़ रहे थे।

बीते वर्ष 24 सितंबर को प्रखंड कार्यालय से बाहर निकलने के दौरान विपिन की हत्या गोलियों से भूनकर कर दी गई थी। पुलिस ने घटना में शामिल सुपारी किलर सहित कई को गिरफ्तार कर न्याययिक हिरासत में भेज दिया। वही हत्या में दबंगों व एक राजनेता का नाम सुर्खियों में आया था। जिसपर करवाई नही होने को लेकर दो बार आरटीआई कार्यकर्ता के परिजन सड़क जाम कर व आत्महत्या का प्रयास कर चुके थे। वहीं लोगों में चर्चा है कि जिस सरकारी जमीन पर कब्जा हटाने को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या की गई। उस पर से प्रशासन आजतक अतिक्रमण नहीं हटा सका।

आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल के पिता विजय अग्रवाल ने वीडियो जारी कर बताया कि रोहित गुरुवार को एसपी से मिलने के लिये सुबह में ही एसपी कार्यालय पहुंचा था,जहां एसपी के नही मिलने पर कार्यालय कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया। जिसके बाद एसपी रोहित से मिले,लेकिन एसपी की ओर से रोहित को संतोषजनक जबाब नही मिला।

आरटीआई कार्यकर्ता दिवंगत बिपिन अग्रवाल के पिता और आत्महत्या का प्रयास करने वाले रोहित के दादा विजय अग्रवाल ने बताया कि एसपी ने अरोपियों को गिरफ्तार करने का प्रयास करने का आश्वासन दिया जबकि हत्या के पांच महीने गुजरने पर हत्या की साजिश करने वालो को गिरफ्तार करने की मांग पर रोहित अड़ा रहा।

इसी कारण नाराज और सदमे में चल रहे रोहित ने फोन कर 15 मिनट में पुलिस कार्रवाई करने नही करने या अस्वाशन नही देने पर आत्महत्या की धमकी दिया था,लेकिन पुलिस की कार्रवाई 15 मिनट में पूरा नही होने पर रोहित ने शरीर मे आग लगा कर नर्सिंग होम के तीन मंजिले छत से कूद पड़ा है। छत से कूदने के पहले रोहित ने प्रशासन के खिलाफ नारे भी लगाया। दादा विजय अग्रवाल ने बताया कि हत्यारोपियों की गिरफ्तारी नही होने और एसपी के नही मिलनेसे क्षुब्ध रोहित ने यह आत्मघाती कदम उठाया है।

मालूम हो कि 24 सितंबर 2022 को हरसिद्धि प्रखंड कार्यालय से निकलते समय दिनदहाड़े दिन के करीब 12 बजे मिटरसायकिल पर सवार अपराधियो ने गोलियों से भूनकर आरटीआई कार्यकर्ता बिपिन अग्रवाल की हत्या कर दिया था। बताया जाता है कि हत्या के पीछे हरसिद्धि बाजार के करोड़ो रूपये की व्यवसायी जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है। जिसपर कई बहुमंजिले इमारत और व्यवसायिक प्रतिष्ठान स्थापित है।

सूचना के अधिकार कानून के सहारे इसी कुकृत्य का खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता बिपिन अग्रवाल ने किया था,जिसके बाद से ही वह सफेदपोश,माफिया और व्यवसायियों के आखो का किरकिरी बना था। इन्ही कारणों से बिपिन अग्रवाल की हत्या कर दिया गया। हत्या के बाद परिजन न्याय की मांग को लेकर कई बार हरसिद्धि में अरेराज बेतिया सड़क को जाम कर धरना दिया था। पुलिस ने हत्या में शामिल कई अपराधियो को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।

लेकिन परिजन हत्या के पीछे के सफेदपोश,माफिया और व्यवसायियों के गठजोड़ का खुलासा करने और इनकी गिरफ्तारी की मांग पर अड़े है। इन्ही मांगो को लेकर आज रोहित एसपी से मिलने आया था। लेकिन मांगी को पूरा नही होने से सदमे में रोहित ने आत्मघाती कदम उठाया है। और आज उसकी मौत हो गयी ।

राष्ट्रपति ने पटना हाई कोर्ट के दो अधिवक्ताओं, राजीव राय और हरीश कुमार को पटना हाई कोर्ट का जज नियुक्त

भारत के राष्ट्रपति ने पटना हाई कोर्ट के दो अधिवक्ताओं, राजीव राय और हरीश कुमार को पटना हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया है। इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 217 के क्लॉज़ (1) में दी गई शक्ति का उपयोग करते हुए की गई है। कार्यभार संभालने की तिथि से इनकी वरीयता निर्धारित की जाएगी।

इस आशय की अधिसूचना भारत सरकार के विधि व न्याय मंत्रालय द्वारा 24 मार्च 2022 को जारी की गई है। अधिसूचना की प्रति अधिवक्ता राजीव राय और अधिवक्ता हरीश कुमार को भी पटना हाई कोर्ट के महानिबंधक के जरिये भेजी गई है।

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इसके अलावे अधिसूचना की प्रति बिहार के राज्यपाल के सचिव, राज्य के मुख्यमंत्री के सचिव, पटना हाई कोर्ट चीफ जस्टिस के सचिव, बिहार सरकार के चीफ सेक्रेटरी के सचिव, पटना हाई कोर्ट के महानिबंधक व राज्य के अकाउंटेंट जनरल, प्रेसिडेंटस सेक्रेटेरिएट ( नई दिल्ली), प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव के पी एस, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के कार्यालय के रजिस्ट्रार, सेक्रेटरी (जस्टिस) के एम एल एंड जे/ पी पी एस के पी एस व डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के टेक्निकल डायरेक्टर को भी भेज दी गयी है।

Patna High Court: बिहार उद्योग सेवा संवर्ग संशोधन नियम,2013 के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट ने बिहार उद्योग सेवा संवर्ग संशोधन नियम,2013 के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुमंत कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता की अधिवक्ता वर्धन मंगलम ने कोर्ट को बताया कि बिहार उद्योग सेवा संवर्ग के तहत 60 प्रोजेक्ट मैनेजरों के पद पर बहाली के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया था। इसमें कामर्स को शामिल नहीं किया गया था।

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कोर्ट ने इस पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि उद्योग विभाग में प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर बहाली के लिए कामर्स को क्यों शामिल नहीं किया गया। याचिकाकर्ता की अधिवक्ता वर्धन मंगलम ने कहा कि इस तरह की बहाली गलत,गैर कानूनी और भारतीय संविधान की धारा 14 का उल्लंघन होगा।

कोर्ट ने ये स्पष्ट कर दिया कि इन पदों पर नियुक्ति इस रिट के परिणाम पर निर्भर करेगा। इस मामलें पर अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद होगी।

Patna High Court: पीडीएस डीलर को बिना नोटिस दिए उससे सम्पूर्ण रोजगार योजना के अनाज का पैसा वसूलने के मामलें में राज्य सरकार से जवाबतलब किया है

जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ ने लक्ष्मण रॉय की याचिका पर सुनवाई की। पटना हाईकोर्ट ने पीडीएस डीलर को बिना नोटिस दिए उससे सम्पूर्ण रोजगार योजना के अनाज का पैसा वसूलने के मामलें में राज्य सरकार से जवाबतलब किया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता आनंद कुमार ओझा ने कोर्ट को बताया सम्पूर्ण रोजगार योजना के तहत अनाज का।वितरण नहीं किये जाने को लेकर जांच और कार्रवाई करने के लिए रिटायर्ड जज उदय सिन्हा कमेटी गठित किया गया।

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कमेटी ने पी डी एस डीलरो को व्यक्तिगत और सार्वजनिक नोटिस दिए।उन्हें दोषी मानते हुए बचे अनाज की वसूली का जिम्मेदार बताते हुए पैसे वसूली का आदेश दिया।

उनका मानना था कि आवेदक पी डी एस डीलर के पास 9 quintal अनाज दुकान में बचा था।अनाज उठाने के लिए सरकारी अधिकारियों से प्रार्थना करने के बाद कूपन जारी नहीं किया गया और अनाज खराब हो गया।इस मामलें पर आगे सुनवाई होगी।

Patna High Court: राज्य के पटना स्थित जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के विस्तार और भूमि अधिग्रहण व अन्य मुद्दों के मामले पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने गौरव सिंह समेत अन्य की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई में पटना के जयप्रकाश नारायण एयरपोर्ट के निर्देशक को तलब किया है।

राज्य में पटना के जयप्रकाश नारायण अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के गया, मुजफ्फरपुर,दरभंगा,भागलपुर,फारबिसगंज , मुंगेर और रक्सौल एयरपोर्ट हैं।लेकिन इन एयरपोर्ट पर बहुत सारी आधुनिक सुविधाओं के अभाव व सुरक्षा की भी समस्या हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पूर्णिया एयरपोर्ट से संबंधित सभी जमीन अधिग्रहण के मुकदमों को डी एम को सुनवाई कर इन मामलों को 45 दिनों में निपटाने का निर्देश दिया था।

पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुमीत कुमार ने जानकारी दी थी कि कोर्ट ने दो दिनों के भीतर गया एयरपोर्ट के संबंध में जमीन अधिग्रहण को लेकर लंबित मुकदमों का चार्ट देने को कहा है। साथ ही कोर्ट ने पूर्णिया एयरपोर्ट के संबंध में पटना हाई कोर्ट के समक्ष लंबित मुकदमों को सूची प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

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याचिकाकर्ता की अधिवक्ता अर्चना शाही ने बताया कि राज्य के कई एयरपोर्ट कार्यरत नहीं है,जबकि, पटना एयरपोर्ट के विस्तार के लिए बिहार सरकार से एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया भूमि की मांग कर रहा है ,लेकिन जगह नहीं मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि गया एयरपोर्ट के लिए भी 26 एकड़ जमीन ही दिया गया। बाकी जमीन अबतक नहीं दिया गया। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत बिहार सरकार ने लगभग 260 करोड़ रुपये के लिए अपील दायर कर रखा है।

इस कारण न तो मुआवजा मिला है और न जमीन अधिग्रहण पूरा हुआ है।बिहार में बिहटा का एयरपोर्ट स्टेशन, पूर्णिया एयरपोर्ट और सबेया एयरपोर्ट सिर्फ सेना के इस्तेमाल के लिए होता हैं।

भागलपुर एयरपोर्ट, जोगबनी स्थित फोरबेसगंज एयरपोर्ट, मुंगेर एयरपोर्ट और रक्सौल एयरपोर्ट बंद पड़े हुए हैं।बिहार में सिर्फ दो ही अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट गया और पटना में हैं।

अगली सुनवाई में गया और बोध गया के विकास से सम्बंधित मामलें भी शामिल रहेंगे।साथ ही गया के विष्णुपद मंदिर से भी सम्बंधित मुद्दों पर सुनवाई होगी।

गया एयरपोर्ट राज्य का पहला अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है, जहां से मुख्यतः बौद्ध देशों जैसे श्रीलंका व कंबोडिया आदि के लिए फ्लाइट चलाई जाती है।

इस मामले पर अगली सुनवाई 30 मार्च ,2022 को होगी।

बिहार मंत्रिमंडल में बदलाव के संकेत, बीजेपी कोटे के कई मंत्री का कट सकता है पत्ता

बिहार की राजनीतिक गलियारों में चर्चा सरेआम है कि बिहार विधानसभा सत्र के समापन के साथ ही बिहार की राजनीति में बवंडर आना तय है हाल ही में केन्द्रीयमंत्री नित्यानंद राय और नीतीश कुमार की मुलाकात उसी बवंडर को थोड़े समय तक टालने की कवायत मानी जा रही है। हालांकि यूपी में मिली जीत से बीजेपी काफी उत्साहित है लेकिन बीजेपी इस बात को लेकर चिंतित है कि बिहार सरकार के एक वर्ष पूरे होने के बावजूद बीजेपी का कोई भी मंत्री उस तरह का प्रभाव नहीं छोड़ पाया है जिसके सहारे बिहार की राजनीति को साधा जा सके।

ऐसे में सत्र के बाद बिहार मंत्रीमंडल में बीजेपी कोटे के मंत्री में बड़ा बदलाव हो सकता है जिसमें उप मुख्यमंत्री सहित कई मंत्रियों का हटना तय माना जा रहा है ।वही नीतीश कुमार ने मंत्रीमंडल में बदलाव का प्रस्ताव लेकर आये केन्द्रीयमंत्री नित्यानंद राय को दो टूक कह दिया है कि साथ सरकार चलानी है तो बिहार विधानसभा के अध्यक्ष को भी हटाये ,ऐसी खबरें आ रही है कि अध्यक्ष को मंत्रीमंडल में शामिल करने पर विचार चल रही है।

आज दिल्ली में बिहार बीजेपी के सांसदों से पीएम की मुलाकात इसी की एक कड़ी मानी जा रही है क्यों कि बिहार को लेकर ऐसी खबरे आनी शुरु हो गयी है कि नीतीश कुमार बीजेपी और खास करके अमित शाह के कार्यशैली से नराज चल रहे हैं और वो साथ छोड़ने को लेकर सही समय का इन्तजार कर रहे हैं ऐसे में नीतीश कुमार का विकल्प क्या हो सकता है इस पर भी राय-मशविरा हुआ है वैसे बोचहा विधानसभा उप चुनाव में भाजपा सांसद का चिराग पासवान से मिलना इसी कड़ी का एक हिस्सा माना जा रहा है ।

इस बीच यूपी में मुलायम के परिवार की वापसी नहीं होने पर तेजस्वी नीतीश कुमार को लेकर पहले से मुलायम हुए हैं और शरद पवार और के0 चंद्रशेखर राव द्वारा विपक्षी एकता को लेकर जो कवायत शुरु की गयी है उसमें ममता बनर्जी के शामिल होने की खबर आ रही है।

इसी को देखते हुए राजद राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की सियासी खेल को संभालने के लिए शरद यादव की पार्टी का राजद में विलय करया है ताकि दिल्ली की राजनीति को साधा जा सके और इसके लिए राजद अपने कोटे से शरद यादव को राज्यसभा भेजने का फैसला लिया है।

इस बीच खबर ये भी आ रही है कि विपक्षी एकता अगर शक्ल लेती है तो नीतीश कुमार चाहेंगे की बिहार में मध्यावधि चुनाव हो और वो भी गुजरात के साथ हो। जदयू जिस तरीके से पंचायत स्तर तक पार्टी संगठन को मजबूत करने की कोशिश में लगी है उसको मध्यावधि चुनाव से ही जोड़ कर देखा जा रहा है ।वैसे राष्ट्रपति चुनाव आते आते बहुत कुछ स्पष्ट हो जायेगा ये साफ दिखने लगा है ।

क्यों कि नीतीश कुमार पर जिस तरीके से बीजेपी लगातार दबाव बना रही है ऐसे में बहुत मुश्किल हो रहा है नीतीश कुमार को सरकार चलाना जानकारी यह भी है कि फिल्म कश्मीर फाइल्स को बिहार में टैक्स फ्री होने कि जानकारी उन्हें मीडिया से मिली थी ।

इसी तरह विधानसभा में वंदे मातरम को शामिल करना, फिर जुम्मा की नमाज को लेकर विधानसभा में बेवजह तूल देना ,वही बिहार विधानसभा में बन रहे शताब्दी स्तंभ से अशोक स्तंभ का हटाया जाना जैसे कई मुद्दे हैं जिसको लेकर नीतीश असहज महसूस कर रहे हैं ऐसे में बिहार विधानसभा अध्यक्ष के कार्यशैली को लेकर नीतीश कुमार को सदन में आकर प्रतिकार करना पड़ा उससे नीतीश काफी आहत है ऐसे कई मुद्दे हैं जिसको लेकर नीतीश सहज नहीं है ।

Patna High Court : ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से हटाए गए मोतिहारी के लोक अभियोजक जय प्रकाश मिश्र को अदालती आदेश के बाद भी अपने पद पर बहाल नहीं किये जाने पर सुनवाई की।

जस्टिस पी बी बजन्थरी ने अवमाननावाद पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के विधि विभाग के सचिव व संयुक्त सचिव को तलब किया है।

राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया था कि 21 दिसंबर, 2021 को कही गई बात के लिए संयुक्त सचिव को शो कॉज नोटिस जारी किया गया है। 21 दिसंबर, 2021 को कोर्ट के आदेशानुसार संयुक्त सचिव उमेश कुमार शर्मा कोर्ट में उपस्थित थे।

उन्होंने राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता अजय कुमार रस्तोगी को निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता की बर्खास्तगी के आदेश को एक सप्ताह के भीतर वापस ले लिया जाएगा।

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कोर्ट का कहना था कि यदि यह मान भी लिया जाता है कि पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए 21 दिसंबर के आदेश को वापस ले लिया जाता है ,तो भी नियत समय के संबंध में 21 दिसंबर से हस्तक्षेप की अवधि के संबंध में अवमानना किया जा रहा है।

कोर्ट का यह भी कहना है कि इस संबंध में राज्य सरकार के विधि विभाग के सचिव और संयुक्त सचिव के विरुद्ध चार्ज फ्रेम क्यों नहीं किया जाए क्योंकि 21 मार्च, 2022 तक फ़ाइल विधि विभाग के कार्यालय में लंबित है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता डॉ सतीश चन्द्र मिश्र व राजीव रंजन ने बताया कि कही गई इन बातों के आधार पर कोर्ट ने 21 दिसंबर, 2021 को याचिका को निष्पादित करते हुए राज्य सरकार के विधि विभाग के संयुक्त सचिव को व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित रहने से मना कर दिया था। इस मामले पर अगली सुनवाई अब आगामी 31 मार्च को की जाएगी।

Patna High Court : बिहार में दावा प्राधिकरण से तय हुए वाहन दुर्घटना के मुआवजे राशि का सौ फीसदी और त्वरित भुगतान हेतु आवश्यक नियमावली बनाने के लिए दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई की

जस्टिस राजन गुप्ता की खण्डपीठ ने आईसीआईसीआई लोंबार्ड इंश्योरेंस कम्पनी की लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए एमिकस क्यूरी मृगांक मौली को इस मामलें में सुझाव देने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता कंपनी ने मद्रास व राजस्थान हाई कोर्ट के फैसलों का उदाहरण पेश करते हुए कोर्ट को बताया कि इन दोनों राज्यों में दावा प्राधिकरण से तय हुए मुआवजा राशि का त्वरित भुगतान , इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से करने हेतु आवश्यक दिशा निर्देश जारी किया गया है ।

इसी तरह से बिहार में भी राशि का भुगतान आरटीजीएस व एनईएफटी माध्यम के जरिये भुगतान हेतु आवश्यक दिशा निर्देश जारी किया जा सकता है ।

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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दुर्गेश कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत कानूनी राशि जो कोर्ट में बीमा कम्पनी या भुगतानकर्ता को करनी होती है ,उसे भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भुगतान करने का प्रावधान हो ।

दावा प्राधिकरण से तय हुए अवार्ड की राशि के भुगतान में 3 से 4 साल लग जाते हैं और बिचौलियों के कारण मुआवजे का बड़ा हिस्सा कट जाता है ।

इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भुगतान होने पर बिचौलियों की कोई समस्या अपने आप सुलझ जाएगी और राशि भी पीड़ित परिवार को त्वरित गति से मिल जाएगी । इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार व हाईकोर्ट प्रशासन को अगली सुनवाई में जवाब दायर करने को कहा।इस मामलें पर आगे सुनवाई की जाएगी।

BiharDiwas2022 : बिहार दिवस पर तीन दिनों तक पटना संगीत से सराबोर रहेगा, प्रस्तुत होने वाले कार्यक्रमों की पूरी सूची

गांधी मैदान में आयोजित कार्यक्रम

कैलाश खेर का गायन- 22 मार्च को शाम 7:45 से 10:00 तक
रेखा भारद्वाज का गायन- 23 मार्च को 10:30 से 9:30 बजे तक
पटना विमेंस कॉलेज की छात्राओं द्वारा जल जीवन हरियाली थीम पर नृत्य- 22 मार्च को संध्या 7:30 से 7:45 बजे तक
उर्वशी चौधरी का कार्यक्रम -23 मार्च को संध्या 7:15 से 7:30 बजे तक
सत्येंद्र कुमार संगीत का गायन- 24 मार्च को संध्या 7:15 से 7:30 बजे तक


श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल पटना में प्रस्तुत होने वाले कार्यक्रम

महमूद फारूकी कर्ण कथा सुनाएंगे – 22 मार्च को संध्या 6:30 बजे से 7:00 बजे तक
रंजना झा का लोकगीत – 22 मार्च को रात्रि 10:00 बजे से 7:45 बजे तक
प्राची पल्लवी साहू का कथक नृत्य- 22 मार्च को रात्रि 8:00 बजे से 8:30 बजे तक
नीतू कुमारी नूतन लोक गीत गाएंगे 22 मार्च को रात्रि 8:40 से 9:30 बजे तक
नीलम चौधरी द्वारा निनाद- 23 मार्च संध्या 6:30 से 7:30 बजे तक
अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन द्वारा गजल गायन – 23 मार्च को रात्रि 7:45 से 9:30 बजे तक
लावणी राज द्वारा कथक नृत्य- 24 मार्च को शाम 6:30 बजे से 7:00 बजे तक
सुनंदा शर्मा द्वारा ठुमरी गायन- 24 मार्च को रात्रि 7:10 बजे से 8:00 बजे तक
लव बंदिश ब्लिस द्वारा फ्यूजन- 24 मार्च को रात्रि 8:10 से 9:30 बजे तक।

बिहार आज भी देश के आखिरी पंक्ति में खड़ा है

आज बिहार दिवस है और आज ही के दिन 22 मार्च 1912 को बिहार बंगाल से अलग हुआ था कहने को तो आज का दिन बिहार के लिए हर्ष का दिन है लेकिन सवाल यह भी है कि 1912 में बिहार जहां खड़ा था आज बिहार कहां खड़ा है ।

बिहार जब बंगाल से अलग हुआ तो 1917 ई. में पटना विश्वविद्यालय की स्थापना हुई यह भारतीय उपमहाद्वीप का सातवाँ सबसे पुराना स्वतंत्र विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित किया गया था और स्थापना के 25 वर्ष में यह विश्वविद्यालय ‘ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईस्ट कहलाने लगा था।

पटना में 1925 में पीएमसीएच की स्थापना हुई और स्थापना के साथ ही इसकी पहचान देश और दुनिया के सबसे अच्छे मेडिकल कॉलेज में होने लगा था।

1947 में बिहार जीडीपी में देश में नम्बर वन पर था आजादी के तुरंत बाद बिहार की अभिशाप माने जाने वाली कोसी नदी के बाढ़ को नियंत्रित करने के लिए 1958 में बराज बनाया है वही सिंचाई के लिए भीम नगर में बराज बनाया गया और उससे गंडक नहर निकाला गया उसी तरीके से कोसी से कोसी नहर निकाला गया ।

कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए 1903 में पूसा में कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी थी आजादी के बाद बरौनी का विकास औधोगिक नगरी के रूप से हुआ लेकिन आज बिहार कहां खड़ा है बिहार का दस में दो व्यक्ति देहारी मजदूरी और छोटे छोटे रोजगार के लिए बिहार से बाहर है ।

बिहार का 90 फीसदी छात्र जो बेहतर कर रहा है वो बिहार से बाहर पढ़ रहा है बिहार की स्कूली शिक्षा और कॉलेज का हाल झारखंड से भी बूरा है ।

बिहार बोर्ड के पिछले 10 वर्षो के टांपर का हाल यह है कि कहीं किसी गांव में परचून का दुकान खोल कर रोजी रोटी कमा रहा है ।

आजादी के समय जो गिना चुना शहर था पटना को छोड़ दे तो किसी भी शहर में बेसिक सुविधा भी नहीं है ।शहरीकरण के क्षेत्र में बिहार देश का सबसे पिछड़ा हुआ राज्य है यही स्थिति रोजगार सृजन और शिक्षा ,स्वास्थ्य का है छोटी सी भी बीमारी हुआ तो दिल्ली जाना ही है। पटना में कुछ बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा की व्यवस्था जरुर है लेकिन वो भी राष्ट्रीय स्तर के मानक पर खड़ा नहीं उतर रहा है ।

मतलब 1947 में बिहार जहां खड़ा था वहां भी आज बिहार खड़ा नहीं है पिछले 15 वर्षो में बिहार में बहुत कुछ हुआ है गांव गांव में बिजली और सड़क पहुंच गयी है लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य उतना ही दूर हो गया है ।नवीन पटनायक 2000 में ओडिशा के मुख्यमंत्री बने थे उस समय ओडिशा की स्थिति बिहार से भी बूरी थी नीतीश 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री बने आपदा के मामले में बिहार और ओडिशा लगभग एक जैसा ही राज्य है लेकिन ओडिशा कहां पहुंच गया और बिहार कहां है ।

देश स्तर पर आज भी बिहार वहीं खड़ा है जहां 15 वर्ष पहले खड़ा था, बिहार दिवस के मौके पर हर बिहारी को सोचना चाहिए कि बिहार के आने वाले पीढ़ी के लिए हम लोग क्या छोड़ कर जा रहे हैं वही बिहारी शब्द जिसे गाली के रुप में इस्तेमाल किया जाता है या फिर एक ऐसा बिहार जहां का होना गर्व कहलाये ।

1–बिहार के शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत है
सोचिए आज बिहार और बिहारी कहां खड़ा है हमारे हाथ से एक साजिश के तहत शिक्षा छीनी जा रही है एक आसरा था दिल्ली वो भी हाथ से निकल चुका है जेएनयू जहां बिहार का गांव बसता था जहां से बिहारी बच्चे नई उड़ान,भरते थे उस घोंसला को ही उजाड़ दिया गया।

दिल्ली विश्वविद्यालय में सीट कम हो गया आईआईटी और जेई की परीक्षा का स्तर इतना हाई हो गया है वहां बिहार की शिक्षा व्यवस्था दूर दूर तक खड़े नहीं उतर रहा है ।इसलिए शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव की जरूरत है और बिहार से बाहर जो बिहारी हैं इस विषय पर सोचे ।

हालात यह है कि बिहार के पास अब अच्छे शिक्षक भी नहीं है आज पूरे देश में दरभंगा जैसे छोटे से कस्बे से निकल कर फिजिक्स के छात्रों को ‘धर्मग्रंथ’ देने वाला एचसी वर्मा जैसे विद्वान से बात करने कि जरूरत है कि यह कैसे सम्भव है शिक्षा ही एक ऐसा क्षेत्र हैं जहां आज भी बिहारी का जोड़ नहीं है ये बिहारियों के डीएनए में है इसलिए इसे बेहतर करने पर सोचने कि जरुरत है ।

2–कृषि के क्षेत्र में काम करने की जरूरत है

आज बिहारी अपने दम पर अंडा और मछली के क्षेत्र में बड़े बड़े खिलाड़ी को चुनौती दे रहा है ,पांच वर्ष पहले तक जहां गांव गांव के हाट पर आंध्र की मछली मिलती थी, लेकिन आज स्थिति बदल गयी है बिहार की मछली एक बार फिर बिहार से बाहर जाने लगी है।

इसी तरह अंडा जहां आंध्र और पंजाब का एक छत्र राज्य था आज बिहार उसे चुनौती दे रहा है ।दूध के क्षेत्र में तो देश स्तर पर बिहार अमूल को चुनौती देने लगा है।

इसी तरह का काम सब्जी के क्षेत्र में करने की जरूरत है आज उपज का 90 प्रतिशत हिस्सा औने पौने दाम में बेचने को किसान मजबूर है । मक्का ,आलू और लीची के क्षेत्र में देश के सबसे बड़े उत्पादक राज्यों में बिहार एक है लेकिन पॉपकॉर्न बनाने के लिए बिहार का मक्का मुंबई जाता है जहां 20 रुपये किलों का मक्का किस भाव में लेते हैं आपसे बेहतर कौन जानता है।

ऐसा ही हाल आलू का है जिसके उत्पादक किसान हर दूसरे वर्ष आलू सड़क पर फेंकने को मजबूर होता है । गेहूं और चावल के क्षेत्र में भी एक खास तरह का ब्रांड बिहार पैदा करता है लेकिन उसका लाभ दूसरा राज्य उठाता है ।

कृषि ही एक ऐसा क्षेत्र हां जहां रोजगार और किसान के समृद्धि का एक नया दौर लाया जा सकता है जबसे बिहार का किसान कमजोर हुआ है बिहारी डीएनए जो पहचान रही है वो गांव से बाहर निकल ही नहीं पा रहा है जो निकल रहा है वो कही रेरी लगा रहा है या फिर नाइट गार्ड का काम कर रहा है ।

3—पर्यटन और कला संस्कृति के क्षेत्र में काम करने की जरूरत है
कृषि योग्य भूमि की तरह ऊपर वालों ने बिहार को पर्यटन और कला संस्कृति के क्षेत्र में बहुत कुछ दिया है जिसकी बेहतर मार्केटिंग करके बिहार के जीडीपी को ऊंचाई तक पहुंचाया जा सकता है ।

क्या नहीं है बिहार में सभी धर्म का आस्था का केन्द्र बिहार है कला और संस्कृति की ही बात करे तो बहुत कुछ है जिसको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मार्केटिंग की जा सकती है ।

लेकिन इन सब के लिए हम सभी बिहारियोंं को जाति और धर्म के नाम पर जारी सियासत से बाहर हम सब बिहारी है इस नारे के साथ आगे बढ़ना पड़ेगा ।तभी बदलाव सम्भव है लेकिन बिहारी आगे ना बढ़ जाये इसका खतरा पूरे देश के नेता को है इसलिए हमे उलझा कर रखता है इसे भी समझने की जरूरत है ।

पटना हाईकोर्ट ने सीनियर सेकेंडरी एलिजिबिलिटी टेस्ट में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा गलत उत्तर का विकल्प के रूप में देने के मामलें में सुनवाई की

जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने नितिन कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को दिया।

कोर्ट ने बिहार परीक्षा समिति को स्पष्ट कर दिया कि सीनियर सेकेंडरी शिक्षक की कोई भी अंतरिम नियुक्ति इस मामलें में कोर्ट के निर्णय पर निर्भर करेगा।

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उन्होंने कोर्ट को बताया कि प्रश्न संख्या 4,50,59,85,89 के उत्तरों के विकल्प गलत दिया गया था।ये परीक्षा कंप्यूटर साइंस से सम्बंधित था।

याचिककर्ता की अधिवक्ता रितिका रानी ने बताया कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के समक्ष उम्मीद्वार ने 7 गलत विकल्प प्रस्तुत किया, लेकिन समिति ने इन गलतियों को अनदेखा कर दिया।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस प्रकार की गड़बडियां होने के कारण बहुत उम्मीद्वारों का भविष्य खतरे में पड गया है।कंप्यूटर साइंस में 1673 पदों पर नियुक्ति होनी हैं।इस मामलें पर आगे सुनवाई की जाएगी।

बिहार दिवस आज पूरा बिहार डूबा बिहार दिवस के रंग में

जियो बिहार … बिहार जिंदाबाद @ 110
नए कैलेंडर और शासनिक प्रक्रिया के हिसाब से हमारा, हम सबका बिहार, 110 साल का हो गया।

वह बिहार, जिसका इतिहास कमोबेश मानव सभ्यता-संस्कृति का इतिहास है; जिसने दुनिया को लोकतंत्र की अवधारणा से वाकिफ कराया; जिसने चंद्रगुप्त-सम्राट अशोक-बुद्ध-महावीर- वाल्मिकी-चाणक्य-आर्यभट्ट-गुरू गोविंद सिंह महाराज जैसे महानतम शख्सियतों के आचार-सिद्धांतों से लेकर नालंदा- विक्रमशिला विश्वविद्यालय के जरिए दुनिया को ज्ञान दिया;

जिसने आजादी से पहले सात समंदर पार कई-कई देश गढ़े; जिसने मोहन दास करमचंद गांधी को महात्मा बनाया; जो जेपी की संपूर्ण क्रांति का स्थल है, जो आज की तारीख में महिला सशक्तीकरण व ऐसे कई बड़े बुनियादी मसलों पर देश-दुनिया को रास्ता दिखा रहा है; जो लोकसेवाओं के बड़े पदधारकों की ‘फैक्ट्री’ कहलाता है;

जो दुबई में बुर्ज खलीफा व लद्दाख की सड़क बनाता है, दिल्ली में ऑटो चलाता है, कोलकाता में ठेला खींचता है और दिल्ली के केंद्रीय मंत्रालय में बैठकर देश चलाने की नीतियां भी बनाता है; और जो अपनी इन्हीं चौतरफा मौजूदगी को इकट्ठे भाव में विशेषकर छठ के पावन मौके पर गर्व के भाव में परोसने की हैसियत पाता है कि ‘मैं सूर्य हूं, सूर्य मुझमें हैं।’

(बहरहाल, सबको बिहार दिवस की बहुत बधाई, शुभकामनाएं).।

लेखक–मधुरेश सिंह

भागलपुर में मौत का आकड़ा 17 तक पहुँचा

शमशान घाट में लगता जा रहा लाशों का अंबार, जहरीली शराब ने कितनों की ले ली आंखों की रौशनी तो कितनों की गई जान, कई मोहल्लों में छाया मातम। शासन अलर्ट मोड में, कहां – बॉर्डर पर रहेगी नाकेबंदी, शराब तस्कर पर नकेल कसने के लिए प्रशासन पूर्णरूपेण है तैयार।

भागलपुर,होली के दौरान पिछले 48 घंटे में भागलपुर जिले के अलग-अलग जगहों में 17 लोगों की संदिग्ध हालत में मौत हो जाने से पूरा प्रशासनीक महकमा सवाल के घेरे में आ गई है । सवाल है आखिर बिहार में जहरीली शराब आ कैसे रही है।वही दुसरी ओर बांका में 12 और मधेपुरा में भी 3 लोगों की इसी तरह जान चली गई। सबों के मौत का सिस्टम एक ही, पहले पेट दर्द फिर उल्टी होना उसके बाद सांस लेने में परेशानी और सिर चकराने लगना उसके बाद मौत। कई परिजनों ने शराब पीने की बात भी बताई।

कोविड के दो साल बाद होली का रंग चढ़ा ही था की पूरे सूबे को फिर से किसी की नजर लग गई। उसका दाग भागलपुर के अलावे कई शहरों को दागदार बना दिया। एक साथ कई लोगों की संदिग्घ मौत प्रशासन के सिस्टम पर सीधे सवाल खड़ा कर रही है। पूरे सूबे में सरेआम चर्चा है कि जहरीली शराब के पीने से ही मौत हो रही है। फिलहाल जांच किया जा रहा है। डीएम सुब्रत सेन और एसएसपी बाबू राम पूरी घटना के बाद अलर्ट हैं। लेकिन एक बात है कि शराब पीने वाला शराब ही नहीं पीता, माँ की खुशी, पत्नी का सुकून, बच्चों के सपने और पिता की प्रतिष्ठा भी पी जाता है। भागलपुर के बरारी शमशान घाट पर जलती लाश जो बयां कर रहा है, वह कोविड काल की याद दिला रहा है।

अब सवाल यह उठता है कि जब पूरे बिहार में शराबबंदी है तो फिर बिहार के हर जिले में शराब आता कहां से है? पूरे बिहार में शराबबंदी के बाबजूद है लोग शराब पीते क्यों हैं?

पटना हाईकोर्ट ने बिहार लोक सेवा आयोग(बीपीएससी)के सचिव को 24 मार्च,2022 को तलब किया है

जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने डॉ अखिलेश कुमार द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई की। पटना हाई कोर्ट ने बिहार लोक सेवा आयोग ( बी पी एस सी) के सचिव को 24 मार्च,2022 को तलब किया है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने 21 फरवरी, 2022 को बिहार लोक सेवा आयोग को जवाब/ जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय दिया था। कोर्ट ने इस आदेश के साथ हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था।

कोर्ट ने ये भी कहा था कि यदि जवाब / जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया जाता है ,तो 21 मार्च, 2022 को ऑफिसर इंचार्ज उपस्थित रहेंगे।

21 मार्च,2022 को न तो जवाब / जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया और न ही ऑफिसर इंचार्ज उपस्थित थे। इस पर कोर्ट का कहना था कि इस तरह का रवैया स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इस मामले पर आगे की सुनवाई 24 मार्च, 2022 को की जायेगी।

पटना हाईकोर्ट ने 38 साल तक काम करने वाले संस्कृत शिक्षक को राहत देते हुए उनकी बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया

जस्टिस संजीव कुमार प्रकाश शर्मा ने याचिकाकर्ता संस्कृत शिक्षक चंद्र भूषण प्रसाद की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें सभी सुविधाओं के साथ उन्हें शिक्षक पद पर बहाल करने का आदेश दिया। पटना हाईकोर्ट ने 38 साल तक काम करने वाले संस्कृत शिक्षक को राहत देते उनकी बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया।

कोर्ट को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता संतोष कुमार ने बताया कि वर्ष 1981 में याचिकाकर्ता को सहायक संस्कृत शिक्षक के पद पर नियुक्त किया गया था।बाद में उन्हें प्रोन्नति देकर प्रभारी प्रधानाध्यापक बनाया गया।

लेकिन 38 वर्षों के बाद अचानक 22 फरवरी 2019 को बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के सचिव ने शिक्षक की नौकरी से बर्खास्त करते हुए अबतक भुगतान किए गए राशि की वसूली का आदेश जारी कर दिया।

इसी आदेश की वैधता को चुनौती देते हुए यह रिट याचिका 2019 में दायर की गई थी जिसे मंजूर करते हुए कोर्ट याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला दिया।

बिस्मिल्लाह खान की जंयती आज

बिस्मिल्लाह खान जीवन भर तीन चीज़ों को अपने सीने से चिपटाए रहे – गंगा, बनारस और उनके जनम का स्थान बिहार का डुमरांव क़स्बा. कोई कहता कि खां साब चलिए आपके लिए अमेरिका में म्यूजिक स्कूल खोल देते हैं, कोई कहता दिल्ली-बंबई में चल कर रहा जाय, कुछ माल बनाया जाय. वे बालसुलभ भोलेपन में अगले की आँखों में आँखें डाल कर कहते, “”अमाँ यार! गंगा से अलग रहने को तो न कहो!”

शहनाई उनके होंठो से लगते ही आसपास की हवा को प्रेम और करुणा से सराबोर कर देती थी. वह उनकी आत्मा की पाक ज़ुबान थी जिसका होना आसपास के कंकड़-पत्थरों तक की स्मृतियों में दर्ज हो जाता होगा. उस दैवीय स्वर को गंगा किनारे की उस मस्जिद के किसी कंगूरे की नन्ही ढलान में अब भी ढूँढा जा सकता है जहाँ वे हर रोज गंगास्नान के बाद नमाज पढ़ते थे. उसकी लरज़ को बालाजी मंदिर के फर्श के उन चकले पत्थरों की खुरदरी छुअन में महसूस जा सकता है जिन पर बैठकर उन्होंने पचास से भी ज्यादा सालों तक रियाज़ किया.

दोनों इस कदर आपस में घुल गए थे कि ठीक-ठीक कह सकना मुश्किल होगा कि शहनाई बिस्मिलाह थी या बिस्मिलाह शहनाई थे.

और राग की तपस्या ऐसी कि जो उस जुगलबंदी की गिरफ्त में आया फिर जीवनभर मुक्त न हो सका. पत्रकार जावेद नकवी के हवाले से एक वाकया पता लगता है. सन 1978 में दिल्ली में एक ओपन एयर थियेटर में प्रोग्राम चल रहा था. अचानक लाइट चली गई. बेखबर खान साहब तन्मय होकर बजाते रहे. आयोजकों में से किसी एक ने कहीं से एक लालटेन लाकर उनके सामने धर दी. अगले एक घंटे तक वे उसी की झपझपाती रोशनी में शहनाई बजाते रहे. ऑडिएंस खामोशी से सुनती रही. बजाना ख़त्म हुआ, उस्ताद ने आखें खोलीं. बोले – “लाइट तो जला लिए होते भाई!”

बिस्मिलाह खान का चेहरा भारतीय क्लासिकल संगीत का सबसे मुलायम, सबसे निश्छल चेहरा था. चौड़ी मोहरी वाला सफ़ेद पाजामा, गोल गले वाला सफ़ेद कुरता जिसकी जगह गर्मियों में जेब वाली बंडी ले लिया करती, सफ़ेद नेहरू टोपी और मुंह में बीड़ी. बनारस की गलियों में रिक्शे पर यूं सफ़र करते थे गोया रोल्स रॉयस में घूम रहे हों. उनकी सादगी और साफगोई के बेशुमार किस्से सुनने-पढ़ने को मिलते हैं.

जीते जी वैश्विक धरोहर बन गए इस उस्ताद संगीतकार की मौत के कुछ साल बाद यूं हुआ कि उन्हें भारत सरकार द्वारा दिए गए पद्मश्री प्रमाणपत्र को दीमक खा गयी. इसके कुछ साल बाद उनके घर में चोरी हुई. एक कमरे की दराज़ से पांच शहनाइयां चोरी हुईं जिनमें से तीन चांदी की थीं. एक साल बाद पुलिस ने चांदी वाली शहनाइयों को बनारस के एक सुनार के पास से गली-अधगली हालत में हासिल किया. उस्ताद के एक पोते नज़रे हसन ने कुल सत्रह हज़ार रुपये में उन्हें बेच डाला था. स्पेशल टास्क फ़ोर्स द्वारा गिरफ्तार किये जाने के बाद अपना जुर्म कबूल करते हुए उसने कहा, “मुझे बाजार में उधार चुकाना था.”

आज उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का जन्मदिन पड़ता है. देश-समाज-परम्परा वगैरह बहुत बड़ी बातें हैं. आदमी बनने का थोड़ा-बहुत शऊर सीखना हो तो यूट्यूब वगैरह पर पांच-सात मिनट उनकी बजाई शहनाई सुन लीजिए.

विधानपरिषद चुनाव को लेकर दरभंगा के अहिल्यास्थान में हुई एनडीए की बैठक

BiharLegislativeCouncilElection दरभंगा । विधानपरिषद चुनाव को लेकर दरभंगा के अहिल्यास्थान में हुई एनडीए की बैठक। बैठक में दरभंगा के सांसद गोपालजी ठाकुर और मधुबनी के सांसद अशोक यादव सहित चुनाव के प्रभारी मंत्री जीवेश मिश्रा ।

चुनाव के प्रभारी मंत्री जीवेश मिश्रा का बयान……..हमसभी एनडीए की बैठक कर चुनाव पर चर्चा कर रहे है यही के प्रत्यासी की जीत सुनिश्चित करानी है….सभी सपोर्टर मिलकर वोटर को एकजुट कर वोट कराएंगे…..यह चुनाव नेताओं के नेता का चुनाव कराने है।

वार्ड सदस्य की इस चुनाव में बड़ी भूमिका है………हमसबका काम है कि अपने प्रत्यासी को जिताने का काम करेंगे।

दरभंगा और मधुबनी में एनडीए घटक दल के सबसे ज्यादा जनप्रतिनिधि जीत कर आये है…..एनडीए के सभी कार्यकर्ता अपने पंचायत वार्ड में कोर्डिनेशन बनाकर काम करे।

शरद यादव अपनी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (LJD) का विलय राजद में किया।

Bihar Breaking News : दिल्ली । औपचारिक रूप से राष्ट्रीय जनता दल में लोकतांत्रिक जनता दल का विलय हो गया। शरद यादव अपनी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (LJD) का विलय राजद में किया।

शरद यादव जदयू से अलग होकर 2018 में अपनी पार्टी का गठन किया था।

लेकिन 2019 में लोकसभा चुनाव राजद के साथ महागठबंधन में शरद यादव की पार्टी ने लड़ी थी।

इन दिनों शरद यादव बीमार चल रहे हैं।

आज रजधानी दिल्ली में नेताप्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में शरद यादव अपनी पार्टी का विलय राजद में किया।

दिल्ली में नेताप्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, राजद सांसद एडी सिंह, राजद सांसद मीसा भारती, राजद सांसद मनोज झा, राजद नेता श्याम रजक, राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी, राजद नेता जय प्रकाश नारायण यादव और राजद नेता शिवानन्द तिवारी मौजूद रहे।

अनुपम खैर कब से मौका परस्त हो गये

अक्सर मेरी दादी कहती थी कि जो जितना पढ़ा है वो उतना भ्रष्ट है ।दादी से मैं अक्सर भ्रष्ट का मतलब समझना चाहते थे वैसे उनकी नजर में पढ़ा लिखा लोग(व्यक्ति) में लोक लज्जा नहीं होता है सही को सही और गलत को गलत कहने की ताकत नहीं होती है साथ ही मौका परस्त होता । तो फिर मेरा सवाल होता था कि हम लोगों को क्यों पढ़ा रही हो,दादी पूरे विश्वास के साथ कहती थी तुम लोग भी पढ़ के यही करेगा फिर भी पढ़ा रहे हैं लोक(मनुष्य) तो बन जायेगा ।

आज एक बार फिर मुझे दादी की कही वो बात याद आ गयी द कश्मीर फाइल्स फिल्म के मुख्य किरदार अनुपम खेर ने कश्मीर समस्या को लेकर 2010–2011-2012 और 2013 में ट्वीट किया है उस ट्वीट में क्या लिखा है जरा आप भी पढ़ लीजिए –
1—2010 में कश्मीर के मसले पर अनुपम खेर ने एक ट्वीट किया था, इसमें वो लिखते हैं-
”कश्मीर के लिए मेरा दिल रोता है. राजनीति और आतंकवाद ने वहां के लोगों के लिए इस जन्नत को जहन्नुम बनाकर छोड़ दिया है. हिंदु और मुस्लिम दोनों के लिए.”

2——2011 में अनुपम खेर ने एक इमाद नजीर नाम के एक ट्विटर यूजर को जवाब देते हुए लिखा-
”समस्या कश्मीरी पंडितों और मुस्लिमों के साथ नहीं है. हम सालों तक शांति से एक-दूसरे के साथ रहे हैं. ये सब पॉलिटिशियन का किया धरा है दोस्त.”


3————-2012 में अनुपम खेर का कश्मीर, कश्मीरी पंडितों और मुसलमानों पर किया एक ट्वीट नीचे पढ़िए-
”न भूलिए. न माफ करिए. हमें कश्मीरी मुस्लिमों के साथ पंडित महिलाओं के बारे में नहीं भूलना चाहिए. दोनों कमोबेश एक समान दुख से गुज़रे हैं.”


4———2013 में किया अनुपम खेर का ये ट्वीट ‘द कश्मीर फाइल्स’ की रिलीज के बाद सबसे ज्यादा वायरल हो रहा है. इसके पीछे की वजह आप ये ट्वीट पढ़कर समझ जाएंगे-
”मैं देख रहा हूं कि कुछ लोग विस्थापन को लेकर कश्मीरी पंडितों के हाहाकार को धार्मिक रंग दे रहे हैं. ये धर्म के बारे में नहीं है. मानवीय पीड़ा के बारे में है, जिससे हिंदू और मुस्लिम दोनों गुज़रे.”

5—-द कश्मीर फाइल्स की रिलीज के बाद अनुपम खेर ने लिखा-
”लोगों का प्यार, कश्मीरी हिंदुओं के आंसू, विवेक अग्निहोत्री का धैर्य/साहस, द कश्मीर फाइल्स की पूरी टीम की मेहनत और सबसे ऊपर बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद. सच की जीत कभी ना कभी तो होनी थी. 32 साल बाद ही सही. कश्मीर को लेकर अनुपम खेर या तो पहले झूठ बोल रहे थे या फिर अब झूठ बोल रहे हैं लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अनुपम खेर जैसी शख्सियत को ये करने कि जरूरत क्यों पड़ी जिसके अभिनय ने देश के यूथ को ईमानदारी और राष्ट्र प्रेम के लिए प्रेरित किया लेकिन इस ट्वीट के पढ़ने के बाद तो यही लगता है कि अनुपम खेर कर्मा वाला डॉक्टर डैंग ही हैं बाकी सब ढोंग है ।

रोसड़ा का एक ऐसा गांव जहां होती है अनोखी होली

राेसड़ा के भिरहा गांव की हाेली पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है। यहां वृंदावन की तर्ज पर लाेग हाेली का जश्न मनाते हैं। इस बार न कोरोना है और न ही कोई दूसरी बंदिश। पिछले दो साल यहां की होली पाबंदियों की भेंट चढ़ गई थी। लेकिन इसबार पूरे गांव में होली को लेकर काफी उत्साह देखने को मिला।

स्थानीय लोग बताते है कि 1935 में गांव के कई लोग होली देखने वृंदावन गए थे। वहीं की तर्ज पर यहां भी होली मनाने का निर्णय लिया गया। पहली बार 1936 में वृंदावन की तर्ज पर होली हुई। वर्ष 1941 में यह गांव तीन भागों पुरवारी टोल,पछियारी टोल और उतरवारी टोल में बंटकर होली मनाने लगा।

लोगो ने बताया कि आज भी इन्हीं तीन टोलों के बीच होली के आयोजन में श्रेष्ठता साबित करने की होड़ रहती है। होलिका दहन की संध्या से ही तीनों टोले में अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। गांव में बड़े-बड़े तोरणद्वार बनाए गए है। रंग बिरंगे रोशनी से पूरा भिरहा गांव होली में भी दिखता है तीनों टोलों के तीनों मंदिर परिसर में रात भर नृत्य और संगीत का आयोजन किया गया है। दूर दराज से गायिका और नृत्यांगना को बुलाया गया था।

आज होली के दिन नृत्य का आनंद लेने के बाद सभी लोग फगुआ पोखर पँहुच रंग से घोलू हुए पानी मे कुर्ता फार होली खेला गया बिरहा गांव की होली को देखते आसपास के गांव के साथ-साथ दूरदराज के जिले के लोग भी पहुंचे हुए थे।

मुजफ्फपुर बालिका गृह मामले से जुड़ी फिल्म बन कर तैयार जल्द होगा रिलीज

मई 2019 में मुंबई से पुलकित मुझसे मिलने पटना आये हुए थे ये बिहार से ही हैं और सुभाष चंद्र बोस और साल 2017 में आई फिल्म ‘मरून’ का ये डायरेकटर कर चुके हैं और मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले से जुड़ी फिल्म बनाने के बारे में मुझसे बातचीत करने आये थे।

इन्होंने कहा कि फिल्म पूरी तौर पर आपके चरित्र पर ही आधारित है और आपकी भूमिका में शाहरुख खान होगे मैं हैरान हो गया पत्रकार फिल्म का मुख्य किरदार मुझे समझ में नहीं आ रहा था, फिर इनसे लम्बी बातचीत हुई और कहां कि इस कांड से जुड़े सभी चरित्र का हम लोगों की टीम ने अध्ययन किया है आप ना होते तो यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाता इसलिए यह फिल्म पूरी तौर पर आप पर ही आधारित है ।

हम लोगों की टीम आपके कार्यों से जुड़े सारे तथ्यों का संकलन कर लिया है और अब मैं आपसे बस सहमति लेने आये हैं।तीन दिनों तक मुजफ्फरपुर बालिका गृह से जुड़े मामले में मैंने किस तरीके से स्टोरी चलना शुरू किया फिर इस दौरान किन किन परेशानियों का सामना करना पड़ा इस विषय पर लम्बी बातचीत हुई। झारखंड विधानसभा चुनाव में टाटा थे उसी दौरान मुझे मुंबई से फोन आया संतोष जी आप कितनी जल्दी मुबंई आ सकते हैं फिल्म को लेकर कुछ औपचारिकता है आपका आना जरुरी है।

21 दिसंबर 2019 को मुंबई पहुंचे वहां शाहरुख खान की कंपनी रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट (Red Chillies Entertainment)कंपनी से जुड़े लोगों से मुलाकात हुई और फिर मुजफ्फरपुर बालिका गृह से जुड़े पत्रकारिता को लेकर काफी सवाल जवाब हुआ और उसके बाद फिल्म बनाने को लेकर मुझसे सहमति ली गयी।

लेकिन कोरोना के कारण फिल्म बनना शुरू नहीं हुआ फरवरी 2022 में पुलकित जी का फोन आया संतोष जी फिल्म की शूटिंग शुरू हो गयी है शाहरुख खान जी का मसला पता ही होगा और कोरोना फिर कब वापस आ जाए कहना मुश्किल है इसलिए फिल्म में आपका किरदार भूमि पेडनेकर निभाएंगी फिल्म में संजय मिश्रा जी भी है ।

मैं निराश हो गया कहां शाहरुख खान और अब कोई लड़की पत्रकार बन रही है खैर भूमि पेडनेकर का नाम मैं सूना नहीं था अपनी बेटी से पूछे टिया ये भूमि पेडनेकर कौन हीरोइन है वो बोली आप ही की तो चहेती है टॉइलेट – एक प्रेम कथा वाली इतना सुनते ही मैं उछल पड़ा चलो मजा आयेगा मेरी ही तरह वो भी जिद्दी है।

आज पुलकित जी का फोन आया संतोष जी मुंबई आने के लिए तैयार रहिए फिल्म की शूटिंग पूरी हो गयी है एडिटिंग चल रहा है और इसी वर्ष फिल्म रिलीज होगा ।

पुलकित जी ने मुझसे कहां था कि जब तक फिल्म की शूटिंग नहीं हो जाती है तब तक आप इसको पब्लिक नहीं करेंगे, आज वो दिन आ गया है जब इस खबर को सार्वजनिक करते हुए मुझे गर्व महसूस हो रहा है।

फिल्म का नाम है भक्षक और यह फिल्म पूरी तौर पर मेरी भूमिका पर केन्द्रित है तो फिर इन्तजार करिए एक तरफ द कश्मीर फाइल्स है तो दूसरी तरफ भक्षक हिंदुस्तान का दो चेहरा एक चेहरा जो नफरत पैदा करा है तो दूसरा सिस्टम के उस घिनौने सच को उजागर कर रहा है जिसके पीछे पूरा तंत्र खड़ा है।

भ्रष्ट आचरण को लेकर पटना हाईकोर्ट ने कई जज को सेवा से किया मुक्त

पटना हाई कोर्ट के अनुशंसा के आलोक में 14 न्यायिक पदाधिकारियों को बिहार सेवा संहिता, 1952 के नियम – 74 (बी)(ii) के अंतर्गत अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। इस आशय की अधिसूचना बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 16 मार्च, 2022 को जारी की गई है।

अनिवार्य सेवानिवृत्त किये जाने वालों में शेखपुरा के जिला व सत्र न्यायाधीश जितेंद्र कुमार दूबे, पटना हाई कोर्ट के विशेष कार्य पदाधिकारी कमरूल होदा, मधुबनी के अपर जिला व सत्र न्यायाधीश इशरातुल्लाह, मुजफ्फरपुर (सम्प्रति निलंबित ) के अपर जिला व सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार- III, कटिहार के डी एल एस ए के सचिव विपुल सिन्हा हैं।

भागलपुर (सम्प्रति निलंबित ) के अपर जिला व सत्र न्यायाधीश सुश्री प्रीति वर्मा, बांका के अपर जिला व सत्र न्यायाधीश चंद्र मोहन झा, बाढ़ (पटना) के अपर जिला व सत्र न्यायाधीश शत्रुघ्न सिंह, रोहतास, सासाराम के अपर जिला व सत्र न्यायाधीश परिमल कुमार मोहित भी शामिल है।

भागलपुर के श्रम न्यायालय के पीठासीन पदाधिकारी प्रभु नाथ प्रसाद, मोतिहारी ( सम्प्रति निलंबित ) के सब जज – सह – सी जे एम सुधीर कुमार सिन्हा, मुजफ्फरपुर (पश्चिम) के सब जज – सह – ए सी जे एम, सतीश चंद्र, पटना सिटी (सम्प्रति निलंबित ) के सब जज – सह- ए सी जे एम संजीव कुमार चन्द्रीयावी व मसौढ़ी, पटना (सम्प्रति निलंबित ) के एस डी जे एम हरे राम का नाम शामिल है।

बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा 2022 का परिणाम जारी

बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) ने 12वीं (बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा) का परिणाम जारी किया। शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने परिणाम जारी किया।

1325749 परीक्षार्थियों का रिजल्ट मात्र 19 दिनों में प्रकाशित किया गया।
452171 प्रथम स्थान में रहे
51083 एक द्वितीय स्थान एवं
99 550 तृतीय स्थान पर उतर हुए।

विज्ञान संकाय में सौरभ कुमार कुल 472 अंक 94.40% अंक प्राप्त कर पूरे बिहार में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
वाणिज्य में अंकित कुमार गुप्ता 473 अंक 94.60% प्रथम स्थान प्राप्त किया।
कला संकाय में संगम राज 482 अंक लाकर 96.40% प्राप्त करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया।

इस बार विज्ञान में कुल 79.81%
वाणिज्य में 90.38%
कला संकाय में 79.53% छात्र सफल हुए
लड़कियो ने इस बार बाजी मारते हुए तीनो संकाय में कायदा प्रतिशत रहा।

लड़कियो ने 82.39 लड़को का 78.04%
तीनो टॉपर आर्ट्स में संगम राज गोपालगंज
कॉमर्स में अंकित गुप्ता पटना
विज्ञान में सौरव कुमार नवादा जिला ने बाजी मारी ।

फिल्म द कश्मीर फाइल्स के सहारे क्या संदेश देना चाह रहा है फिल्म निर्देशक

कश्मीर से मेरा पुराना वास्ता रहा है दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान कश्मीरी छात्रों के एक ग्रुप से हमारी अच्छी बनती थी और कश्मीर समस्या को लेकर अक्सर बहस होती रहती थी।

मेरा पहला प्यार भी कश्मीर से ही थी इसलिए कश्मीर से मेरा दिल का भी रिश्ता रहा है और यही वजह कि कश्मीर हमेशा मेरे जेहन में बसता है।

कश्मीर से किसी तरह जान बचा कर कर आये कश्मीरी से भी दिल्ली में अक्सर मिलने जाया करते थे हमारी वो कश्मीरी मुसलमान थी लेकिन हर रविवार को उन हिन्दू कश्मीरी के लिए कुछ ना कुछ बना कर घर से ले जाती थी जो रिफ्यूजी के तौर पर दिल्ली में रह रहे थे।साथ खाना खाती थी और घंटों उन सबों के बीच बैठ कर बात करती रहती थी और एक दूसरे को ढाढ़स बढ़ाती रहती थी की एक दिन आयेगा जब हम सब आपको वापस कश्मीर ले जायेंगे

उस समय भी मुझे ये समझ में नहीं आता था कि कश्मीर का युवा हथियार कैसे उठा सकता है क्यों कि वो बहुत ही व्यवहार कुशल और जिंदा दिल इंसान होता है दिल्ली में कश्मीर से भाग कर आये लोगों से भी मैं पुछता रहता था कि ये लोग आपके साथ ऐसा व्यवहार कैसे कर दिया वो कहते थे ये सही है इन्ही लोगों की वजह से हम लोग जिंदा यहां पहुंच पाये हैं ।पाकिस्तानी आतंकी ये सब कर रहा है कश्मीरी तो अभी भी हम लोगों के लिए जान तक की परवाह नहींं करते हैं ।

दिल्ली से लौटे तो 2002 में ईटीवी ने मुझे दरभंगा में काम करने के लिए भेज दिया संयोग से जिस समय मैं दरभंगा पहुंचा ठीक उसी समय दरभंगा के डेंटल कॉलेज में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्र छात्राएं परीक्षा को लेकर आंदोलन कर रहे थे। उसके साथ विश्वविधालय और डेंटल कॉलेज के प्रबंधक का व्यवहार बेहद आपत्तिजनक था कालेज प्रबंधक और विश्वविद्यालय कश्मीरी छात्र छात्राओं को दुधारु गाय समझ रखा था इनके आन्दोलन को मेरी खबर की वजह से राष्ट्रीय मुद्दा बन गया और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश के बाद इन छात्रों को इस गठजोड़ से मुक्ति मिला पाया। इस दौरान भी कश्मीर के बच्चों और परिवार को एक बार फिर नजदीक से देखने का मौका मिला।

2018 में माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी द्वारा कश्मीर को लेकर देश क्या सोचता है इस विषय पर आयोजित सेमिनार में मुझे वक्ता के रुप में आमंत्रित किया गया था इस दौरान भी कश्मीर के बच्चों के साथ हमारी लम्बी बातचीत हुई ।आज भी कश्मीर से मुझे मुक्ति नहीं मिली है ऐसे में फिल्म द कश्मीर फाइल्स की चर्चा ने मुझे एक बार फिर उत्साहिता कर दिया है फिल्म में जो दिखाया गया है उस संदर्भ में कुछ कहने कि जरूरत नहीं है लेकिन इस हिंसा के पीछे एक सच से दर्शक को दूर रखा गया है।

जिस दौरा पर यह फिल्म आधारित है उसका दूसरा पहलु यह है कि उस हिंसा के डर से कुछ ही लोग कश्मीर छोड़कर बाहर निकले थे, अभी भी जितने कश्मीरी कश्मीर छोड़ कर दिल्ली और जम्मू में शरण लिए हुए हैं उसको हजार गुना ज्यादा हिन्दू अभी भी कश्मीर के अपने गांव मेंं रह रहे है और उनकी सुरक्षा के लिए आज भी कश्मीरी मुसलमान बंदूक उठाते हैंं ।

जिस तरह के हिंसा का शिकार वहां के हिन्दू हुए हैं उससे कम हिंसा का शिकार वहां के मुसलमान लड़कियां नहीं हुई है तालिबान और पाकिस्तानी आतंकी शुरुआती दिनों में भले ही हिन्दू को निशाना बनाया था बाद के दिनों में उससे कहीं अधिक कश्मीरी मुसलमान को निशाना बनाया था।

और आज भारतीय फौज की सफलता का राज भी यही है।लेकिन इस सबसे इतर जो ऐतिहासिक सत्य है भारत में एक मात्र कश्मीर का मुसलमान ही है तो आज भी हिन्दू होने का पहचान बचा कर रखा है जी है जो कश्मीरी पंडित मुसलमान बने वो आज भी अपने नाम के अंत में पंडित लिखता है ,भट्ट लिखता है ,रैना लिखता है ,डोगरा लिखता है इतना ही नहीं कश्मीर का ही मुसलमान है जिसने मुगल शासक को कश्मीर में प्रवेश नहीं करना दिया वहां की अधिकांश आबादी मुसलमान बनने से पहले बौद्ध थे बाद के दिनों में सूफी आंदोलन से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में कश्मीर के लोग इस्लाम धर्म कबूल कर लिया एक भी कश्मीर का मुसलमान जबरन धर्म परिवर्तन वाला नहीं है।

दूसरा ऐतिहासिक तथ्य यह है कि देश का एक मात्र ऐसा कश्मीर का मुसलमान कौम है जो सार्वजनिक रुप से हिन्दू बनने के लिए राजा के पास दरख्वास्त किया था और उस समय के महाराजा हरि सिंह ने मुस्लिम कौम के इस प्रस्ताव को स्वीकार भी कर लिया था। लेकिन कश्मीरी पंडित इसके लिए तैयार नहीं थे फिर भी महाराजा हरि सिंह अडिग रहे और अंत में कश्मीर के पंडित सड़क पर उतर आये और अनुष्ठान करने से मना कर दिया तो तो फिर महाराजा हरि सिंह ने बनारस से पंडित बुलाये और कश्मीर के मुसलमान को हिंदू में शामिल कराने को लेकर अनुष्ठान शुरू किये, लेकिन इस बीच खबर आने लगी है कश्मीरी पंडित इस आयोजन के विरोध में झेलम नदी में कूद कर जान देने की घोषणा कर दिया है, बड़ा हंगामा हुआ और अंत मेंं महाराजा ने इस कार्यक्रम को रद्द कर दिया ।

ऐसे मेंं यह सवाल उठना लाजमी है कि इस फिल्म के सहारे कश्मीर के मुसलमानों की जो छवि बनाने कि कोशिश हो रही है इसका मतलब क्या है 1990 के बाद कश्मीर में जो कुछ भी हुआ उसके लिए कश्मीर को जिम्मेदार क्यों ठहराया जा रहा है ऐसा नहीं है कि कश्मीर में हिंसा का जो दौर शुरु हुई उसमें सिर्फ हिन्दू ही मारे गये सिर्फ हिन्दू लड़कियों के साथ ही रेप हुआ कश्मीरी मुसलमानों के साथ भी ऐसा ही हुआ।

फिलहाल अभी तो कश्मीर शांत है ऐसे समय में इस फिल्म को दिखाने का क्या मतलब है।जबकि नफरत इंसान और इंसानियत को नुकसान ही पहुंचाता है ऐसे मेंं इस फिल्म के सहारे देश के यूथ को क्या संदेश देना चाह रहे हैं क्या देश को कश्मीर बनाना चाह रहे हैं ।

इंटरमीडिएट परीक्षा 2022 के रिजल्ट की घोषणा 16.03.2022 दोपहर 3 बजे की जाएगी।

बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) ने 12वीं (बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा) के नतीजे (Bihar Board BSEB 12th Result 2022) की घोषणा 16.03.2022 को की जाएगी।

परीक्षा परिणाम दोपहर 3 बजे होगा घोषित।

शिक्षा मंत्री करेंगे इसकी घोषणा

बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा 2022
बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा 2022

लोकतंत्र की बुनियाद हिल चुकी है

बिहार विधानसभा में आज जो कुछ भी हुआ वो एक ना एक दिन होना था सत्ता से सवाल का अधिकार किसी को नहीं है?
क्यों कि इन्हें जनता चुन कर भेजी है ।ये बहस का विषय हो सकता लेकिन नीतीश कुमार हमेशा साथ छोड़ने का वाजिब कारण ढूढ़ ही लेते हैं ।


सीएम और विधानसभा अध्यक्ष के बीच आज जो कुछ भी हुआ वो दिखाता है कि लोकतंत्र की बुनियाद हिल चुकी है ।

बीजेपी को कोर वोटर का साथ छुटना बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ा कर सकती है

भारतीय राजनीति को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह से पत्रकारों ने सवाल किया तो वीपी सिंह ने कहा था कि भारत विविधताओं का देश है यहां जाति ,धर्म ,क्षेत्रवाद ,और सामाजिक मान्यताओं को लेकर व्यापक स्तर पर विरोधाभास है ।ऐसे में जो राजनीतिक दल जाति,धर्म,क्षेत्रवाद और सामाजिक मान्यताओं को लेकर व्याप्त विरोधाभास का बेहतर समन्वय करेंगा वही पार्टी भारतीय राजनीति में सफल हो सकता है ।भारतीय राजनीति को समझना है तो इससे बेहतर कोई दूसरा सूत्र नहीं है ।

            यूपी चुनाव के परिणाम को लेकर कल मैंने एक पोस्ट लिखा था कि बीजेपी भेले ही चुनाव जीत रहा है लेकिन बीजेपी का जो आधार वोट रहा है सवर्ण ,बनिया के साथ साथ मीडिल क्लास और पढ़ा लिखा तबका चुनाव दर चुनाव उससे दूर होता जा रहा है और आज भी अति पिछड़ा और दलित लाभकारी योजनाओं के साथ साथ क्षेत्रीय दल की वजह से भले ही बीजेपी को वोट मिल जा रहा है लेकिन इस वर्ग में अभी भी बीजेपी का प्रवेश नहीं हो सका है ।यूपी चुनाव में बीजेपी के जीत को लेकर महिला वोटर और मुफ्त अनाज योजना को लेकर बड़ी बड़ी बातें हो रही है लेकिन चुनाव का परिणाम इसके ठीक उलट में यूपी के जिस इलाके में पुरुष की तुलना में महिला वोटर सबसे अधिक वोट किया वहां बीजेपी का खासा नुकसान हुआ है उसी तरीके से जिस इलाके में मुफ्त अनाज योजना का लाभ सबसे अधिक लोगों ने उठाया उस इलाके में भी बीजेपी को खासा नुकसान उठाना पड़ा।                        

इतना ही नहीं जिस इलाके में बीजेपी का परम्परागत वोट सबसे अधिक प्रभावी था उस इलाके में भी बीजेपी के बड़ा नुकसान हुआ है जी है हम बात कर रहे हैं पांचवां, छठा और सातवां चरण के चुनाव का जहां सबसे अधिक महिला वोट किया ,मुफ्त अनाज योजना को सबसे अधिक लाभ इसी इलाके के लोगों ने उठाया है और परिणाम पर गौर करे तो अंबेडकर नगर, आजमगढ़ और गाजीपुर जिले में भाजपा का खाता तक नहीं खुला।   

इतना ही नहीं जौनपुर जिला के 9 सीटें में (6 सपा गठबंधन & 3 भाजपा गठबंधन)जीत दर्ज किया है।भदोही जिले में  3 सीट है जिसमें  (2 सपा गठबंधन & 1 भाजपा गठबंधन)मऊ जिले में  4 सीटें है जिसमें (3 सपा गठबंधन & 1 भाजपा गठबंधन),बलिया जिला जहां  7 सीट है वहां (4 सपा गठबंधन, 2 भाजपा गठबंधन & 1 बसपा)को जीत मिली है ।बनारस और गोरखपुर के कमीश्नरी में सभी 17 और 28 में 27 सीटों पर जीत नहीं मिलती तो बहुमत को लेकर समस्या खड़ी हो जाती ये वही इलाके से जहाँ राजभर और पल्लवी पटेल ने बीजेपी के अतिपिछड़ा वाले वोट में सेंध लगा दी वही सवर्ण और बनिया के साथ साथ बीजेपी का जो परंपरागत वोटर था वो या तो वोट गिराने मतदान केन्द्रों नहीं पहुंचे या फिर जिस पार्टी से जिस बिरादरी का उम्मीदवार था उसको वोट कर दिया बलिया में राजपूत,गाजीपुर में भूमिहार वोटर बीजेपी के साथ पूरी तौर पर खड़ा नहीं रहा है जबकि एक मुख्यमंत्री के उम्मीदवार है और दूसरा के पास मनोज सिन्हा जैसा नेता है फिर भी अन्य फेज की तरह वोट नहीं किया मतलब सपा जिन इलाकों में जो विरोधाभास था उसका बेहतर समन्वय करने में कामयाब रही वहीं सपा सफल रहा।

                             ऐसे में संदेश साफ है कि बिहार और यूपी जैसे राज्यों में जो क्षेत्रीय दल है उनकी वापसी तभी संभव है जब वो अपने चरित्र में बदलाव लाये मुस्लिम और यादव में जो अपराधी प्रवृत्ति से नेता है उससे दूरी बनानी पड़ेगी क्यों कि बिहार और इस बार यूपी में भी राजद और सपा के हार के पीछे एक बड़ी वजह मुलायम,अखिलेश और लालू राबड़ी राज्य में कानून व्यवस्था का जो हाल था उसको लेकर आज भी वोटर इन दोनों पार्टियों से स्वाभाविक दोस्ती बनाने से परहेज करते हैं और इसी का  लाभ बिहार में नीतीश और यूपी में बीजेपी उठा रहा है।जीती हुई टीम की क्या कमजोरी है इस पर चर्चा होती नहीं है लेकिन इतना तय है कि बीजेपी को अपना का साथ छूट रहा है ये साफ दिख रहा और जो पार्टी बीजेपी के कोर वोटर को साधने में कामयाब होगे आने वाला कल उसका होगा यह बिहार के बाद यूपी का चुनाव परिणाम भी चीख चीख कर कह रहा है ।