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पटना हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस जे एन भट्ट का आज निधन हो गया हैं, वे 76 वर्ष के थे

जस्टिस भट्ट का जन्म गुजरात के जामनगर में 16 अक्टूबर,1945 को हुआ था। उन्होंने एम.कॉम,एल एल एम और लॉ में पी एच डी की डिग्री ली।

1968 में जस्टिस भट्ट ला की प्रैक्टिस शुरू की। उन्होंने गुजरात की न्यायिक सेवा में सीधे ज़िला जज के रूप में योगदान दिया।

1990 में जस्टिस भट्ट गुजरात हाईकोर्ट के पर्मानेंट जज बने।उसके बाद गुजरात हाईकोर्ट का कार्यवाहक चीफ जस्टिस बने।

Justice Dr. J.N. Bhatt

18 जुलाई,2005 को वे पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने। अक्टूबर,2007 जस्टिस भट्ट पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप सेवानिवृत हुए। उसके बाद गुजरात लॉ कमीशन के अध्यक्ष बने। उसके बाद वे गुजरात मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के पद पर कार्य किया।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा महाबोधि मंदिर के परिसर में 250 व्यक्तियों के क्षमता वाले पुलिस बैरक का हुआ उद्घाटन

गया, बोधगया 16 अप्रैल 2022, महाबोधि मंदिर के परिसर में 250 सुरक्षाकर्मियों के रहने के लिए पुलिस बैरक का निर्माण भवन निर्माण विभाग द्वारा 611 लाख रुपए की लागत से दो वर्ष में निर्माण किया गया है। जिसका उद्घाटन आज माननीय मुख्यमंत्री बिहार द्वारा किया गया। पुलिस बैरक निर्माण होने से महाबोधि मंदिर की सुरक्षा में और मुस्तैदी से कार्य किया जाएगा।

इसके उपरांत महाबोधि मंदिर परिसर में पश्चिमी चहारदीवारी पर लगाए गए जातक कथा पैनल का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकापर्ण किया। जातक कथा का 38 पैनल में भगवान बुद्ध के उपदेशों को अंकित किया गया है। इसे रेड स्टोन से 98 लाख रुपये की लागत से 6 माह में पूर्ण किया गया है। जातक भगवान बुद्ध के पूर्व जन्मों की कहानी है, जब वे बोधिसत्व थे। 500 से अधिक जातक कहानी है। मंदिर के बाहरी परिसर में भी दीवारों पर 23 जातक पैनल पहले से लगे हैं।

इसके उपरांत लगभग 13 करोड़ रुपए की लागत से डेढ़ वर्ष में पूर्ण होने वाले बीटीएमसी के नए भवन का शिलान्यास एवं कार्यों का जायजा लिया। बीटीएमसी के नए निर्माणाधीन भवन बुद्धिस्ट कल्चर को दर्शाता है।

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने महाबोधि मंदिर में प्रवेश के लिए लाल बलुआ पत्थर से निर्मित चार प्रवेश द्वारों का भी उद्घाटन किया।

इसके उपरांत माननीय मुख्यमंत्री द्वारा बीटीएमसी कार्यालय के समीप जीविका द्वारा लगाए गए नीरा काउंटर का फीता काटकर उद्घाटन किया माननीय मुख्यमंत्री ने खुशी जाहिर करते हुए नीरा के उत्पादन एवं बिक्री पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ताजपुर बख्तियारपुर महासेतु के पुनर्निर्माण कार्यक्रम में शामिल होकर आधारशिला रखी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज समस्तीपुर पहुंचे जहां रामापुर महेशपट्टी में ताजपुर बख्तियारपुर महासेतु के पुनर्निर्माण कार्यक्रम में शामिल होकर आधारशिला रखी और फोरलेन निर्माण में गति लाने को लेकर संबंधित विभिन्न विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर फीडबैक लिया ।

2011 में नीतीश कुमार ने बख्तियारपुर ताजपुर महासेतु फोरलेन का शिलान्यास किया था । उस समय निर्माण एजेंसी के द्वारा 5 वर्षों में कार्य पूरा करने की बात कही गई थी । लेकिन शिलान्यास के एक दशक बाद भी फोरलेन निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका । बख्तियारपुर ताजपुर महासेतु योजना का लगभग 90 फ़ीसदी से अधिक भूभाग मोरवा ,मोहनपुर एवं शाहपुर पटोरी प्रखंड में पड़ता है ।

भीषण गर्मी से निपटने के लिए स्वास्थ्य महकमा अलर्ट मोड परः मंगल पांडेय

पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य में बढ़ते भीषण गर्मी को देखते पूरे राज्य में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। इस गर्मी से आमजनों को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसे देखते हुए राज्य के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकीय इलाज के लिए अस्पतालों में डेडिकेटेड वार्ड की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही झुलसाती गर्मी व लू से होने वाली बीमारियों जैसे डायरिया एवं अतिसार से संबंधित ओआरएस पाउडर समेत सभी प्रकार की आवश्यक दवाओं की उपलब्धता अस्पतालों में सुनिश्चित की जा रही है।

श्री पांडेय ने कहा कि राज्य के सभी सदर अस्पताल के अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, रेफरल अस्पताल और अनुमंडलीय अस्पताल में मौजूद एंबुलेंसों में लगे एसी, आक्सीजन एवं अन्य उपकरण दुरुस्त स्थिति में है, ताकि संबंधित मरीजों का अविलंब उपचार हो सके। सभी सिविल सर्जनों को सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल तथा जिला के प्रभावित क्षेत्रों के निकटतम सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में रोस्टर संधारित कर अतिरिक्त चिकित्सकों एवं पारा चिकित्साकर्मियों की 24 घंटे तैनाती तथा आवश्यक चिकित्सा उपकरण एवं मेडिकल डिवाइस उपलब्धता सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है।

श्री पांडेय ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों एवं चिकित्सा महाविद्यालयों में अतिरिक्त विशेषज्ञ चिकित्सक आनकाल ड्यूटी पर 24 घंटे मौजूद रहेंगे, ताकि आपातकालीन स्थिति में सूचित किए जाने पर वे शीघ्र संबंधित अस्पताल में उपस्थित हो सकें। भीषण गर्मी के मद्देनजर सभी सरकारी अस्पतालों के सामान्य वार्ड में एसी, कूलर और पंखा समेत अन्य जरूरी सुविधाओं को भी दुरूस्त करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही गर्म हवा और लू से बचाव की जानकारी आम जनमानस को उपलब्ध कराने हेतु जिलास्तरीय आपदा प्रबंधन शाखा से समन्वय बना प्रचार-प्रसार कराने पर विशेष जोर देने को कहा गया है।

बोचहा उपचुनाव में मिला जनादेश स्वीकार, हार की समीक्षा होगी – डॉ संजय जायसवाल

पटना, 16 अप्रैल, 2022 । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने कहा कि बोचहा में मिला जनादेश स्वीकार है। उन्होंने बोचहा से विजयी प्रत्याशी अमर पासवान को बधाई और शुभकामना भी दी।

डॉ जायसवाल ने कहा पार्टी किसी भी जनादेश को सहर्ष स्वीकार करती है। बोचहा में मिला लोगों का आदेश स्वीकार है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने एनडीए के प्रत्याशी को समर्थन दिया उनका आभार।

उन्होंने कहा कि इस परिणाम से पार्टी परेशान नहीं है, बोचहा परिणाम की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद फिर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

भाजपा अध्यक्ष ने माना कि हम अपनी बातों को बोचहा के मतदाताओं को सही ढंग से समझा नहीं पाए, इस कारण यह परिणाम आया।

डॉ संजय जायसवाल
डॉ संजय जायसवाल

उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार संघर्ष के बाद यहां पहुंची है, इसलिए संघर्ष से हम पीछे नहीं हटते। उन्होंने कहा कि इस परिणाम से सरकार पर कोई असर नही पड़ने वाला है। बहरहाल चुनाव समाप्त हो चुका है और अब जरूरत उसके आगे देखने की है।

वक्त अब जनता से किए वादे को पूरा करने का है। समय अब राजनीतिक प्रतिद्वंदिता से ऊपर उठ कर बोचहां को विकास पथ पर आगे बढ़ाने का है। विजयी प्रत्याशी अमर पासवान जी को भारतीय जनता पार्टी परिवार की तरफ से हार्दिक शुभकामनायें हैं और हमें पूरी उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में केंद्र व राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे ऐतिहासिक कार्य बोचहां में सफलतापूर्वक जमीन पर उतरेंगे।

बोचहां विधानसभा उपचुनाव, राजद उम्मीदवार अमर पासवान भारी मतो से जीते

बोचहां विधानसभा उपचुनाव मतगणना समाप्त । राजद उम्मीदवार अमर पासवान बड़े अंतर से बीजेपी की बेबी देवी को हराया।

राजद उम्मीदवार अमर पासवान 36653 वोट से जीते ।
राजद के अमर पासवान को 82562 वोट।
बीजेपी की बेबी कुमारी को 45909 वोट।
वीआईपी की गीता कुमारी को 29279 वोट ।

बोचहां विधानसभा उपचुनाव मतगणना खत्म राजद भारी मतो से चुनाव जीता

तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर बोचहा की जनता को हार्दिक धन्यवाद दिया है

राजद प्रत्याशी के जीत पर राजद प्रत्याशी अमर पासवान की पत्नी ने क्या बोली जरा आप भी सुनिए

बीजेपी की करारी हार पर मुकेश सहनी हुए खुश, मिठाई खिलाकर एक दूसरे को दे रहे है बधाई
कार्यकर्ताओ द्वारा राजद की जीत पर जश्न के माहौल
वीआईपी प्रमुख मुकेश साहनी लडू खिलाकर कर रहे है ख़ुशी व्यक्त

बिहार के सुपौल में बर्ड फ्लू की दस्तक

बिहार में बर्ड फ्लू ने दस्तक दे दी है। सुपौल में इसके मामले पाये गये हैं। सदर थाने के छपकाही गांव के कुछ वार्डों से लिये गये सैंपलों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। जिसके बाद गांव में पशुपालन विभाग की टीम तैनात कर दी गयी है। इस टीम ने अब एक किलोमीटर की परिधि के मुर्गे-मुर्गियों को मारने का काम शुरू कर दिया गया है।

बिहार में बर्ड फ्लू ने दस्तक दी

Patna High Court: पटना में महिलाओं के लिए पब्लिक टॉयलेट की कमी और पहले से बने टॉयलेटों के रखरखाव की कमी से बेकार हो जाने पर दायर हुई जनहित याचिका पर सुनवाई हुई

पटना हाईकोर्ट ने पटना में महिलाओं के लिए पब्लिक टॉयलेट की कमी और पहले से बने टॉयलेटों के रखरखाव की कमी से बेकार हो जाने पर दायर हुई जनहित याचिका पर सुनवाई की।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने संजीव कुमार मिश्रा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना नगर निगम व जिला प्रशासन से जवाब तलब किया है।

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कोर्ट को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने खुद बहस करते हुए कोर्ट को बताया कि पटना जंक्शन , राजेन्द्र नगर स्टेशन , गोलंबर , मीठापुर- डाक बंगला , गांधी मैदान , कारगिल चौक के जगहों पर पब्लिक टॉयलेट की कमी है। साथ ही पुराने टॉयलेट के रखरखाव नही होने के कारण ठप्प पड़ चुके हैं ।

दो साल पहले 20 करोड़ रुपये सरकारी राशि से बने इन सभी जगहों के पब्लिक यूरिनल व टॉयलेट बेकार हो चुके हैं । महिलाओं को बहुत मुश्किलें होती है ।

इस मामले की अगली सुनवाई 13 मई, 2022 को होगी ।

2,500 साल पुरानी सायक्लोपियन वाॅल को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल करने की कवायद

पटना । सरकार ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को राजगीर में 2,500 साल से अधिक पुरानी साइक्लोपियन दीवार को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में सूचीबद्ध करने के लिए एक नया प्रस्ताव भेजा है। नीतीश सरकार ने भेजा प्रस्ताव।

राजगीर की साइक्लोपियन दीवार पत्थर की 40 किमी लंबी दीवार है, जिसे तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से पहले बनाया गया था। बाहरी दुश्मनों और आक्रमणकारियों से बचाने के लिए इस दीवार को बनाया गया था।

बिहार के दांडी गढ़पूरा के ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह की 92 वर्षगांठ

बिहार के दांडी’ गढ़पूरा के ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह की 92 वर्षगांठ पर इस वर्ष भी मुंगेर से वाया श्रीकृष्ण सेतु- बलिया-बेगूसराय- मंझौल होते हुए ऐतिहासिक व गौरवशाली नमक सत्याग्रह स्थल तक एक भव्य पदयात्रा आयोजित की जायेगी। वर्ष 2012 से प्रतिवर्ष आयोजित इस पदयात्रा के 12वें वर्ष पर आज पंचवीर में एक तैयारी बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता पंचवीर पंचायत की पूर्व सरपंच व कांग्रेस नेत्री रेणु देवी ने किया। कार्यक्रम का संचालन गढ़पुरा नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा समिति के सक्रिय सदस्य व भगत सिंह यूथ फाउंडेशन के पदाधिकारी राम प्रवेश चौरसिया ने किया।

अपने संबोधन में रेणु देवी ने कहा की बापू ने एक चुटकी भर नमक से कभी नहीं अस्त होने वाली ब्रिटिश सत्ता को सदा के लिए सूर्यास्त का रास्ता दिखा दिया था. देश के प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर “आजादी का अमृत उत्सव” पर्व मनाने की शुरुआत की, यह प्रशंसनीय है. आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष के अवसर पर आयोजित इस वर्ष की पदयात्रा ऐतिहासिक होगी। उन्होने कहा की गढपुरा का ऐतिहासिक व गौरवशाली नमक सत्याग्रह स्थल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक अनमोल विरासत है और “बिहार केसरी” श्रीबाबू की कर्मभूमि है। वर्तमान व आनेवाली पीढियों के हित में ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह व स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों की स्मृतियों को संजोने व संवारने की सख्त जरूरत है। उन्होंने साहबपूर कमाल विधानसभा क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ बेगूसराय जिला व राज्य के लोगों से इस पदयात्रा में शामिल होने का आग्रह किया।

समाजसेवी राम आशीष पाठक ने कहा कि इस बार की पदयात्रा में लोग बढ़-चढकर भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। श्री पाठक ने बताया कि इस वर्ष की पदयात्रा कोविड नियमों के अनुपालन करते हुये भव्यता के साथ आयोजित की जायेगी।

संचालक कर रहे राम प्रवेश चौरसिया ने कहा कि समाज के सभी वर्ग के लोगों को अपने नौनिहालों व आनेवाली पीढियों के हित में अपनी विरासतों का संरक्षण व संवर्द्धन करना चाहिए। नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम की अनमोल विरासत को वर्तमान व आनेवाली पीढियों के हित में सुरक्षित, संरक्षित व संवर्द्धित करना है,जिससे की वह एक बेहतर नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें. उन्होंने बताया की नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा रुट पर जनसंपर्क और बैठक आयोजित कर समाज के सभी वर्ग के लोगों के बीच जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इस ऐतिहासिक व गौरवशाली कार्यक्रम का हिस्सा बन सकें।

अपने संबोधन में ग्रामीण व प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष संजीव झा ने कहा की वह खुद तो निश्चित तौर पर पदयात्रा में शामिल होंगे ही, साथ ही साथ जिलेवासियों से भी यह आग्रह करते हैं की वह इस ऐतिहासिक व गौरवशाली पदयात्रा में अवश्य शामिल हों।

जेडीयू प्रखंड अध्यक्ष शंभू कर्मशील ने साहेबपुर कमाल वासियों से पदयात्रा को सफल बनाने में सहयोग का निवेदन किया । तथा जिलेवासियों को देश की इस ऐतिहासिक, गौरवशाली,अनूठी व अपने-आप में ईकलौती पदयात्रा में शामिल होने का आग्रह किया।

इस बैठक में विद्यानंद सिंह शिक्षक नेता, अनिल पाठक, विनोबा पाठक, सुधाकर सिंह, रंजीत झा, निपुण झा, अमन झा, धर्मेंद्र पाठक, हीरा सिंह, सुनील जसवाल, भूषण पाठक भूषण पाठक, नारायण झा, सुबोध पाठक इत्यादि उपस्थित थे ।

Patna High Court: राज्य के नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे पर पर्याप्त संख्या में पेट्रोल पंप नहीं होने के मामले में सुनवाई हुई

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के नेशनल हाई वे और स्टेट हाईवे पर पर्याप्त संख्या में पेट्रोल पंप नहीं होने के मामले सुनवाई की।चीफ जस्टिस संजय करोल की डिवीजन बेंच इस मामलें पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को इस मामलें में विस्तृत जानकारी अगली सुनवाई में देने का निर्देश दिया।

राज्य के नेशनल व स्टेट हाईवे पर जनसंख्या और।वाहनों की संख्या के अनुपात में पेट्रोल पम्प की संख्या काफी कम हैं।

कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए पूछा कि राज्य नेशनल हाइवे पर कितने पेट्रोल पम्प खोलने की अनुमति दी गई है।

कोर्ट ने इस बात को गम्भीरता से लिया कि 2018 से पेट्रोल पंप स्थापित करने के लिए लगभग एक हज़ार आवेदन के कार्रवाई हेतु लंबित पड़ा हुआ हैं। इन मामलों में ज़िला के डी एम की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिलने के कारण मामला अटका हुआ हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने जानना चाहा था कि अबतक नेशनल और स्टेट हाईवे में कितने पेट्रोल पम्प चालू अवस्था में हैं।साथ ही राज्य के विस्तार,जनसंख्या और वाहनों की संख्या के मद्देनजर और कितने पेट्रोल पम्प खोलने की आवश्यकता है।इस बारे में हाल में सर्वे किये गए हैं या नहीं।

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कोर्ट ने इस बात पर भी टिप्पणी की कि राज्य के इन पेट्रोल पंप पर आम लोगों के लिए बुनियादी सुविधाओं की भी काफी कमी हैं।पेय जल,मेडिकल किट,शौचालय आदि बुनियादी सुविधाओं की काफी कमी हैं।

इन सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर जानकारी उपलब्ध कराने का कोर्ट ने आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि प्रदेश के राष्ट्रीय राज मार्ग तथा स्टेट हाईवे पर पेट्रोल पंप सहित अन्य नागरिक सुविधाओं की काफी कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए सरकारों ने अब तक कोई विचार क्यों नहीं किया है।

कोर्ट ने कहा कि इन मार्गो से गुजरने वाले लोगों को होने वाली परेशानियों से सरकारे चिंतित नहीं है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन भारत पेट्रोलियम सहित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को पार्टी बनाते पूरी जानकारी उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।

इस मामलें पर पुनः 18 अप्रैल,2022 को सुनवाई की जाएगी।

भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था का सच आईएस अधिकारी की जुवानी

बिहारी को बिहार के बाहर गाली क्यों पड़ता है? कभी सोचा है, सोचिए हम बिहारी बिहार से बाहर जाते हैं तो करते क्या है, सवाल का जबाव उसी में छुपा है । जो काम बिहारी बिहार से बाहर करता है आज कल भारतीय भी भारत से बाहर ऐसा ही कुछ करने लगा है, परिणाम क्या हो रहा है जो हाल बिहार से बाहर बिहारी का है वही हाल आज कल भारतीय का भारत से बाहर होता जा रहा है ।

अमेरिका की पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी की एक प्राध्यापिका ने हाल ही में एक टीवी इंटरव्यू में भारत के बारे में कुछ टिप्पणियाँ की हैं जिसे लेकर हंगामा मचा है–

प्रोफेसर एमी वैक्स ने कहा है कि भारतीय डांक्टर अमेरिका के स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल खड़ा किया है बताईए उन्हें यहां बेहतरीन शिक्षा और शानदार अवसर मिलता है लेकिन इसके बदले में वे अमेरिका की आलोचना करते हैं।प्रोफेसर एमी वैक्स ने कहा, “ये अजीब सी बात है कि एशियाई, दक्षिण एशियाई और भारतीय डॉक्टर पेन्सिल्वेनिया की चिकित्सा सेवा में काम करते हैं और उसी की आलोचना करते हैं. मैं वहां लोगों को जानती हूं और मुझे पता है कि वहां क्या हो रहा है. वे नस्लवाद के ख़िलाफ़ जारी मुहिम को लेकर मोर्चा संभाले हुए हैं. वे अमेरिका को दोष देते रहते हैं जैसे कि अमेरिका एक दुष्ट नस्लवादी जगह है.”।

मतलब जिस जगह ने मुझे आगे बढ़ने का मौका दिया अब वहां बैठ कर प्रवचन दे रहे हैं जैसे हम बिहारी बिहार से बाहर देते हैं गुस्सा स्वाभिवक है क्यों कि हमारे यहां कोई व्यवस्था नहीं है और चलते हैं दूसरे को आईना दिखाने ।

बिहार के एक सीनियर ब्यूरोक्रेट ने पारस अस्पताल के बारे में जो लिखा है वह अमेरिका में सम्भव है क्या, स्वास्थ्य के मामले मेंं कहां खड़ा है भारत है अस्पताल और डांक्टर किस तरह से लोगो को लूट रहा है इस पर कभी किसी डाँक्टर को चर्चा करते हुए सूना है नहीं ना तो फिर दूसरे देश को आईना दिखाना कहा तक सही है, ऐसे में दुनिया अगर यह बैनर टांगना शुरु कर दिया है कि हेट इंडियन ,नो बेलकम इंडियन तो इसमें गुनाह क्या है ।

आईएस अधिकारी विजय प्रकाश को मैं व्यक्तिगत रुप से जानता हूं इन्होंने अपने फेसबुक वाल पर जो लिखा है वह भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था का सच है गांव से लेकर शहर के बड़े अस्पतालों में यही चल रहा है विजय प्रकाश जी का पोस्ट आये दो दिन हो गया है लेकिन अभी तक किसी डाँक्टर की कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है ।

विजय प्रकाश जी का पोस्ट लम्बा है लेकिन पढ़िए और विचार करिए हालांकि इसमें राम कही नहींं है मंदिर भी कही नही है।हिन्दू भी कही नहीं है मुसलमान भी कहीं नहीं है पाकिस्तान भी कही नहींं है हो सकता है इस वजह से आपको उपयोगी नहीं लगे लेकिन दिन चर्या यही है जिससे आज ना कल हम सब को इस लूट से गुजरना है कभी इसके लिए जुलुस हो जाये मजा आ जायेगा ।

आपके साथ भी ऐसा हो सकता है
आज मैं पारस एचएमआरआई अस्पताल, पटना में इलाज कराने का एक भयानक अनुभव साझा करने जा रहा हूं ताकि हम इलाज करते समय सावधान हो जाएँ क्योंकि इस प्रकार की घटना किसी के साथ भी हो सकती है।

मैं मार्च’22 के प्रथम सप्ताह में तीव्र दस्त और ज्वर के रोग से काफी पीड़ित हो गया था। तीन दिनों तक परेशानी बनी रही। घर पर रहकर ही इलाज करा रहा था।

चौथे दिन 11.3.’22 को बुखार तो ख़त्म हो गया पर दस्त कम नहीं हो रहा था। सुबह अचानक मुझे चक्कर भी आ गया। चूंकि कुछ वर्षों से मैं एट्रियल फिब्रिलिएशन (ए एफ) का रोगी रहा हूँ अतः सदा एक कार्डिया मोबाइल 6L साथ रखता हूँ। अपने कार्डिया मोबाइल 6L पर जांच किया तो पता चला कि पल्स रेट काफी बढ़ा हुआ था और इ0 के0 जी0 रिपोर्ट एट्रियल फिब्रिलिएशन (ए0 एफ0) का संकेत दे रहा था। अतः तुरत अस्पताल चलने का निर्णय हुआ। पारस एच एम आर आई अस्पताल घर के करीब ही है। अतः सीधे हम उसके इमरजेंसी में ही चले गये। इमरजेंसी में डॉक्टर चन्दन के नेतृत्व में व्यवस्था अच्छी थी। तुरत इ0 सी0 जी0 लिया गया। उसमें भी ए0 एफ0 का ही रिपोर्ट आया। पर करीब आधे घंटे के बाद पुनः इ0 सी0 जी0 लिया गया। उसमें इ0 सी0 जी0 सामान्य हो गया था। साइनस रिदम बहाल हो गया था।

आपात स्थिति में प्रारंभिक देखभाल के बाद, मुझे डॉ. फहद अंसारी डीसीएमआर 3817 की देखरेख में एमआईसीयू में स्थानांतरित कर दिया गया। जब मुझे एमआईसीयू में ले जाया गया, तो मुझ पर दवाओं और परीक्षणों की बमबारी शुरू हो गई। कई तरह के टेस्ट प्रारम्भ हो गये और कई प्रकार की दवाइयाँ लिखी गईं ।

12 मार्च 2022 को सुबह दस्त नियंत्रण में आ गया था। पर मुझे बताया गया कि हीमोग्लोबिन का स्तर नीचे हो गया है और प्लेटलेट की संख्या भी काफी कम हो गई है। अतः डॉक्टर रोग के निदान के संबंध में स्पष्ट नहीं थे। उन्हें लग रहा था कि कोई गंभीर इन्फेक्शन है। मैंने बताया भी कि मैं थाइलेसेमिया माइनर की प्रकृति का हूँ अतः मेरा हीमोग्लोबिन का स्तर नीचे ही रहता है और प्लेटलेट की संख्या भी कम ही रहती है। खून जांच में अन्य आंकड़े भी सामान्य से भिन्न रहते हैं । इसे ध्यान में रखकर ही निर्णय लेना बेहतर होगा। डॉक्टर ने खून चढ़ाने का निर्णय लिया और दोपहर में खून की एक बोतल चढ़ा दी गई।

दोपहर में ही मेरे अटेंडेंट को कॉम्बीथेर और डोक्सी नमक दवा को बाजार से लाने के लिए कहा गया क्योंकि वे अस्पताल की दुकान में उपलब्ध नहीं थे। जब मुझे दवा खाने के लिए कहा गया तो मैंने दवा के बारे में पूछा। उपस्थित नर्स ने कॉम्बिथेर नाम का उल्लेख किया। इंटरनेट के माध्यम से मुझे यह पता चला कि यह एक मलेरिया रोधी दवा है। अस्पताल आने के बाद से ही मुझे बुखार नहीं था। मेरा दस्त भी नियंत्रण में था। फिर मलेरिया-रोधी दवा क्यों? क्या मलेरिया परजीवी मेरे रक्त में पाये गये हैं? इस सम्बन्ध में मैंने नर्स से पूछताछ की। उनका कहना था कि चूँकि डॉक्टर ने यह दवा लिखा है इसलिए वे यह दवा खिला रही हैं। यदि मैं दवा नहीं खाऊंगा तो वे लिख देंगी कि मरीज ने दवा लेने से मना किया। इसपर मैंने कहा कि एक तरफ मुझे खून चढ़ाया जा रहा है क्योंकि हीमोग्लोबिन और प्लेटलेट कम बताये जा रहे हैं और मुझे ए0 एफ0 भी है दूसरी ओर अनावश्यक दवा दिया जा रहा है जबकि मेरा बुखार और दस्त दोनों नियंत्रण में है, जिसका काफी अधिक ख़राब असर मेरे स्वास्थ्य पर हो सकता है जिससे बचा जाना चाहिए । अतः मैंने डॉक्टर से पुनः पूछकर ही दवा खाने की बात कहीं। मेरे बार-बार अनुरोध करने पर नर्स ने आई0 सी0 यू0 के प्रभारी डॉक्टर प्रशांत को बुलाया। मैंने उनसे भी यही अनुरोध किया कि रक्त परीक्षण में मलेरिया परजीवी की स्थिति देखने पर ही ये दवा दी जाय। इस सम्बन्ध में वे प्रभारी डॉक्टर से संतुष्ट हो लें। डॉक्टर प्रशांत ने सम्बंधित डॉक्टर से बाते की और इस दवा को बंद करा दिया क्योंकि मलेरिया परजीवी हेतु रक्त परीक्षण में परिणाम नकारात्मक था। इस प्रकार मैं एक अनावश्यक दवा के कुप्रभाव से बच गया।

यहाँ मैं यह उल्लेख करना आवश्यक समझता हूँ कि हॉस्पिटल में दवाएं नर्स हीं देती हैं इसके पैकेट को भी मरीज को देखने नहीं दिया जाता और डॉक्टर का पूर्जा भी मरीज को नहीं दिखाया जाता है। सामान्यतया दवा देते समय मरीज को यह बताया भी नहीं जाता कि कौन सी दवा दी जा रही है। अतः दवा देने की पूरी जिम्मेदारी डॉक्टर और नर्स पर ही रहती है।
यह संयोग ही था कि कॉम्बिथेर को बाजार से मंगवाया गया था। इसलिए मुझे इस दवा के बारे में जानकारी मिली और मैं इस दवा को लेने से पहले रक्त परीक्षण का रिपोर्ट देख लेने का अनुरोध कर पाया।

13 मार्च 2022 को मेरी स्थिति में काफी सुधार था। सभी लक्षण सामान्य हो गये थे। दोपहर में मुझे सिंगल रूम नं. 265 में भेज दिया गया। आई सी यू से निकलने का ही मरीज के मनः स्थिति पर बहुत सकारात्मक असर पड़ता है। मैं बिल्कुल सामान्य सा महसूस करने लगा। रात में मैंने सामान्य रुप से भोजन किया। नींद भी अच्छी आयी।

14 मार्च 2022 की सुबह मैं बिल्कुल सामान्य महसूस कर रहा था। मैंने सामान्य रुप से शौच किया। अपने दाँत ब्रश किए। अपनी दाढ़ी बनाई और ड्यूटी बॉय की मदद से स्पंज स्नान किया। सब कुछ सामान्य था। फल का रस भी पिया।
सुबह करीब 6.45 बजे मैं अपने लड़के से मोबाइल पर बात कर रहा था। उस समय ड्यूटी पर तैनात नर्स दवा खिलाने आई। उसने मुझे थायरोक्सिन की गोलियों की एक बोतल दिया और मुझे इसे खोलकर एक टैबलेट लेने को कहा। चूंकि मेरे दाहिने हाथ में कैनुला लगा था, मैंने उससे ही इसे खोलने का अनुरोध किया। पर उसने कहा कि उसे इस तरह के बोतल को खोलने में दिक्कत होती है। कोई विकल्प न होने के कारण और हाथ मे कैनुला लगे होने के बावजूद, मैंने खुद ढक्कन खोल दिया और उसे देकर मुझे एक टैबलेट देने के लिए कहा। उसने एक गोली निकालकर दिया और मैंने दवा ले ली। उसने मुझे दो और दवाएं दी, उसे भी मैंने खा लिया ।

इसी बीच उसने दराज से एक शीशी निकाली। मैंने इस दवा के बारे में पूछताछ की क्योंकि यह मेरे अस्पताल में रहने के दौरान पहले कभी नहीं दी गई थी। उसने कहा कि यह एक एंटीबायोटिक है। मैंने एंटीबायोटिक के नाम के बारे में पूछताछ की क्योंकि यह एक नई दवा थी जो मुझे दी जा रही थी और मुझे यह एहसास था कि मैं ठीक हो रहा हूँ। मेरे प्रश्न का उत्तर दिए बिना, उसने आई0 वी0 कैनुला के माध्यम से दवा देना शुरू कर दिया। पूरी बातचीत के दौरान मैं अपने बिस्तर पर बैठा रहा और मोबाइल पर अपने लड़के से बात करता रहा।

जैसे ही यह नई दवा मेरे शरीर में आई, मेरी रीढ़ में जलन शुरू हो गया। मेरा शरीर गर्म होता जा रहा था। मेरा शरीर कांप रहा था। मुझे चक्कर जैसी अनुभूति भी होने लगी। मैंने फिर नर्स से पूछा कि उसने कौन सी दवा दी है। पर वह चुप रही। मैंने पुनः उस दवा की जानकारी मांगी जो उसने मुझे दी थी। वह चुप रही और दराज में लगी रही। मेरी ऊर्जा कम होती जा रही थी। मैंने फिर पूछा, ‘मैं बिल्कुल भी अच्छा महसूस नहीं कर रहा हूँ। कौन सी दवा दी हो।’ इस नई दवा की प्रतिक्रिया बढ़ती जा रही थी। मुझे मस्तिष्क में अजीब सा स्पंदन हो रहा था। लग रहा था गिर जाऊंगा। मुझे लग रहा था कि ब्रेन हेमरेज तो नहीं हो रहा है। मेरे बार-बार बोलने पर भी वह नर्स लगातार मौन बनी रही। फिर मैं सारी ऊर्जा इकठ्ठा कर जोर से चिल्लाया, ‘तबीयत बहुत ख़राब हो रही है। दवा बंद करो’। फिर भी उसके हाव-भाव में कोई तेजी नहीं दिखी और वह बहुत धीरे-धीरे दवा बंद करने आई। खैर, दवा बंद हो गयी।

मैंने तुरंत एक डॉक्टर बुलाने का अनुरोध किया। पर कोई नहीं आया। नर्स ने आकर मेरा बीपी लिया। कुछ देर बाद ड्यूटी पर डॉक्टर होने का दावा करने वाला एक व्यक्ति आया। उसे भी मैंने सारी बातें बताई। वह भी मेरी हालत के बारे में कम चिंतित लग रहा था। उसने दराज खोली और कोई दवा ली और बाहर चला गया। मैंने उसे तुरंत ई0 सी0 जी0 करने के लिए कहा ताकि मैं अपने दिल की स्थिति के बारे में सुनिश्चित हो सकूं। जिस फ्लोर पर वार्ड था उस फ्लोर पर कोई ई0 सी0 जी0 मशीन नहीं था । वे एमआईसीयू विंग से एक मशीन लाए लेकिन वह ठीक से काम नहीं कर रहा था। फिर वे एक अन्य ई0 सी0 जी0 मशीन लाए। मुझे बड़ी राहत मिली जब मैंने पाया कि ई0 सी0 जी0 में कोई अनियमितता नहीं थी और ह्रदय की धड़कन साइनस रिद्म में होना बता रहा था। इस प्रक्रिया में करीब एक घंटा व्यतीत हो गया पर मेरी बेचैनी जारी रही। यद्यपि शरीर में हो रहे बदलाव में धीरे-धीरे सुधार हो रहा था पर रीढ़ में असामान्य स्पंदन जारी रहा। यह कई दिनों तक चलता रहा।

मेरी पत्नी डॉ मृदुला प्रकाश, जो मेरे साथ मेरे वार्ड में थीं, मेरी स्थिति ख़राब होते देख चिंतित हो गयी । उन्होंने नर्स से दवा का नाम पूछा। नर्स ने इंजेक्शन की एक दूसरी शीशी जो ड्रावर में रखा था उसे दिखाया और कहा कि यही सुई दी गयी है। उन्होंने इसका एक फोटो ले लिया। यह एपिनेफ था। उसी समय मेरी लड़की नूपुर निशीथ का फोन आ गया। उसे जब मेरी स्थिति बताई गई तो उसने पूछा कि पापा को कौन सी दवा दी गई है। दवा का नाम एपिनेफ बताने पर उसने कहा कि यह तो अंटी आजमटिक रोग की दवा है जो इमेर्जेंसी में दिया जाता है और इसका हृदय पर काफी साइड इफेक्ट होता है। इसे क्यों दिया जा रहा है?

तब घबड़ाकर डॉ प्रकाश नर्सों की डेस्क पर गईं और मेडिसिन लिस्ट मांगा तथा डॉक्टर का प्रेसक्रिप्शन भी मांगा। उन्हें न तो दवा का लिस्ट दिया गया और न डॉक्टर का प्रेसक्रिप्शन ही दिखाया गया। सभी नर्स वहाँ से हटकर दूसरी ओर चली गई ताकि उनसे ये सूचना नहीं ली जा सके ।

वह इस्तेमाल की हुई शीशी भी चाहती थी जिसे उन्हें दिखाया तो गया। पर जब उन्होंने इसे मांगा, तो उन्हें यह नहीं दिया गया क्योंकि उन्हें कहा गया कि इसका इस्तेमाल स्थानीय जांच में किया जाएगा। जब उन्होंने पूछा कि दवा क्यों दी गई है तो उन्हें बताया गया कि एपिनेफ को एसओएस के रूप में लिखा गया है । प्रभारी नर्स ने कहा कि उपस्थित नर्स ने शारीरिक परीक्षण के माध्यम से नाड़ी की दर 63 पाये जाने के कारण उक्त दवा दिया था । इसपर उन्होंने कहा कि नर्स ने दवा देने से पहले कभी नब्ज को छुआ तक नहीं था। नाड़ी की दर, रक्त चाप और तापमान तो दवा देने के बाद जब स्थिति खरब हो गई थी तब ली गई थी तो किस प्रकार नाड़ी के दर को आधार बनाकर यह दवा दिये जाने की बात कही जा रही है । उसके बाद नर्स निरुत्तर हो गयीं और कोई जवाब नहीं दिया।

वार्ड में मरीज के चिकित्सा से सम्बंधित फ़ाइल नहीं रखी गयी थी। अतः किसी चीज के बारे में कोई जानकारी मरीज या उसके अटेंडेंट को उपलब्ध नहीं था। चूँकि सारी जानकारी नहीं दी जा रही थी और गलत सूचना दी जा रही थी, अतः मामला काफी संदेहास्पद बनता जा रहा था। सूचनाओं मे अपारदर्शिता मामले को काफी गंभीर बना रहा था ।

घटना के लगभग 4.45 घंटे बाद उपस्थित चिकित्सक डॉ. फहद अंसारी ने लगभग 11.30 बजे वार्ड का दौरा किया। पहले तो उन्होंने अपने प्रोफाइल के बारे में बात की और कहा कि यह उनके लिए काला दिन है। उन्होंने घटना पर खेद जताया। उसने मेरी छाती की जांच की, मेरे मल के बारे में पूछा और कहा कि वे मुझे तुरंत छुट्टी दे देंगे । कुछ जांच रिपोर्ट लंबित हैं, जो कुछ दिनों में आ जाएंगी। उन रिपोर्ट के बारे में वह ओपीडी पर अपनी राय देंगे।

वह यह नहीं बता सके कि एपीनेफ सुई क्यों लिखी गई थी या क्यों दी गयी । यह आश्चर्यजनक है कि एपिनेफ्रीन जैसी दवा जिसे इंट्रामस्क्यूलर या सब क्यूटेनस दिया जाता है, उसे किन परिस्थितियों में नसों के माध्यम से दिया गया। यह भी स्पष्ट नहीं है कि ऐसी दवा जो हमेशा एक विशेषज्ञ डॉक्टर की उपस्थिति में या आईसीयू में दी जाती है, उसे अर्ध या गैर-प्रशिक्षित वार्ड नर्स द्वारा देने के लिए कैसे छोड़ दिया गया। यहाँ तक कि प्रभारी नर्स भी उपस्थित नहीं थी। मुझे यह भी आश्चर्य होता है कि जब स्पष्ट रूप से एसओएस का कोई मामला नहीं था तो एसओएस दवा का प्रबंध ही क्यों किया गया। अगर मैंने समय पर विरोध नहीं किया होता और दवा बंद न करा दिया होता, तो शायद मैं कहानी सुनाने के लिए यहां नहीं होता। मैं इस बात से भी हैरान हूं कि इस तरह के ड्रग रिएक्शन केस के बाद भी मेरी सेहत की पूरी जांच किए बिना मुझे कैसे छुट्टी दे दी गई।

जब लगभग 2.30 बजे अपराह्न में मुझे छुट्टी दी गई, तो मुझे डिस्चार्ज सारांश सौंपा गया। मैंने पाया कि इसमे मेरे लिए लिखे गये पूर्जे और दी गयी दवाओं के विवरण पूरी तरह से गायब थे। चिकित्सा विवरण देने के बजाय, डिस्चार्ज सारांश में गोलमटोल वाक्य लिखे थे ।

यहां तक ​​कि इसमें खून चढ़ाने की जानकारी भी गायब थी। मैंने यह भी पाया कि भर्ती के समय मेरे दिल की स्थिति का विवरण भी रिपोर्ट में लिखा नहीं था। मेरे एमआईसीयू में रहने का भी कोई जिक्र नहीं था। एपिनेफ दिये जाने और इसका मेरे ऊपर हुए रियक्सन का भी कोई वर्णन नहीं था। ऐसा प्रतीत होता है कि जानबूझकर महत्वपूर्ण तथ्यों और विवरणों को रिपोर्ट से छिपाया गया है।

मैंने जब अस्पताल प्रशासन को इस सम्बन्ध में पूर्ण जानकारी देने के लिए एवं विस्तृत जांच कराने के लिए पत्र लिखा तो मुझे डिस्चार्ज समरी को पुनरीक्षित कर भेजा गया पर उसमें भी एपीनेफ के न तो डॉक्टर द्वारा लिखने का जिक्र था और न उसे मुझे सुई के रूप में देने का। अस्पताल प्रशासन ने इस सम्बन्ध में आतंरिक जांच कराकर उसका प्रतिवेदन साझा करने की बात कही।

अस्पताल के डॉक्टर ने इस प्रकरण पर मौखिक रुप से क्षमा जरूर मांगी पर अभी तक अस्पताल प्रशासन ने आंतरिक जांच का कोई प्रतिवेदन मेरे साथ साझा नहीं किया तथा मुझे यह भी नहीं बताया कि व्यवस्था में क्या सुधार की गई है जिससे यह पता चले कि भविष्य में किसी मरीज के साथ इस प्रकार की घटना नहीं होगी ।

मैं अभी तक सदमे में हूँ कि यदि एपीनेफ को चिल्लाकर समय से बंद न कराया होता तो क्या हुआ होता। हम अस्पताल में डॉक्टर या नर्स को भगवान का प्रतिरूप मानकर उसकी सभी आज्ञा का पालन करते हैं। यदि कभी शरीर में उसकी प्रतिक्रिया भी हो तो उसे एक अलग घटना माना जाता है दवा देने या दवा देने के तरीके के कारण हुई प्रतिक्रिया नहीं मानी जाती।जब एपीनेफ के बाद शरीर में प्रतिक्रिया हुई तो मैंने भी शुरू में इसे दवा के कारण हुआ नहीं माना था । मुझे लगा कि शायद शरीर में कोई नयी समस्या हो गयी है – ब्रेन हेमरेज या ह्रदयघात हो गया है इसलिए मैंने सोचा पहले इस नयी समस्या से निबट लें तब दवा ले लेंगे। यही सोचकर मैंने दवा बंद कराया था। मेरा चिकित्सा व्यवस्था पर हमारे मन में एक विश्वास या यूँ कहूँ कि एक अंधविश्वास जाम गया है वह मानने के लिए तैयार नहीं था कि कोई डॉक्टर या नर्स कभी ऐसी दवा देंगे जो मेरे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा।

जब घटना हो भी गयी तो अस्पताल प्रशासन मेरे स्वास्थ्य की चिंता न कर इस बात में व्यस्त रहे कि कैसे यह बात रिकॉर्ड में न आये। मुझे स्वयं अपने इलाज के लिए ब्लड प्रेशर लेना या इ0 सी0 जी0 लेने का आदेश देना पड़ा। अस्पताल के अधिकारी अस्पताल के दस्तावेजों के प्रबंधन में ही लगे रहे ताकि सच्चाई सामने न आए। नर्स को हटा दिया गया। मेरी फाइल में दवा की विवरणी दर्ज नहीं की गयी । दवा वाली शीशी को दराज से निकाल कर छिपा लिया गया।

वास्तव में, वे इस बारे में अधिक चिंतित थे कि रोगी को प्रबंधित करने के बजाय दस्तावेज़ में घटना की रिपोर्टिंग को कैसे प्रबंधित किया जाए। मेरे बार-बार अस्पताल से सच्चाई को रिपोर्ट में अंकित करने का अनुरोध करने के बावजूद, इसे कभी रिकॉर्ड में नहीं किया गया।

मैं अस्पताल का नाम या डॉक्टर का नाम नहीं देना चाहता था, पर उनका व्यवहार जिस प्रकार रहा उससे मुझे अतिशय पीड़ा हुई है। उन्होंने गलत दवा देने के प्रकरण को रिकॉर्ड करने की परवाह तक नहीं की जो मेरे लिए प्राणघातक हो सकती थी। उन्होंने यह जानते हुए कि मैं एट्रियल फीब्रिलेशन का रोगी हूं और एपिनेफ्रीन जैसी आपातकालीन दवा के अंतःशिरा इंजेक्शन से पल्स रेट अप्रत्याशित रुप से बढ़ सकती थी जिससे शरीर को अपूरणीय क्षति हो सकती थी, दवा की प्रतिक्रिया की दूरगामी प्रभाव की जाँच के लिए भी कोई कदम नहीं उठाया। ऐसी आपात स्थिति से निपटने में अस्पताल की व्यवस्था में गंभीरता का भाव नहीं था। प्रभारी चिकित्सक चार घंटे से अधिक समय के बाद मुझे देखने आए। मैं इससे काफी आहत हूँ।

मेरा मन अभी भी इस बात को मानने को तैयार नहीं है कि अस्पताल में कोई दवा खिलाई जाएगी या इंजेक्शन दिया जाएगा और मेडिसिन लिस्ट में उसे शामिल तक नहीं किया जाएगा। क्या यह जहर था कि इसे लिखने से बचा जा रहा है? या किसी साजिश के तहत इसे दिया गया था तथा इसका जिक्र सभी जगह से हटा दिया जाय। अस्पताल के सिस्टम का पूरी तरह फेल हो जाने का इससे बड़ा और क्या प्रमाण हो सकता है ।

प्रश्न यह भी है कि जो दवा लिखी ही नहीं है, वह दवा वार्ड के दराज में कैसे आ गई? डॉक्टर ने कहा कि घटना इसलिए हुई क्योंकि यह दवा अन्य इंजेक्शन के समान है जो मुझे लिखा गया था। पर डॉक्टर के द्वारा जो प्रेसक्रिप्शन मुझे दिया गया उसमें यह कहीं नहीं लिखा था। यह बात इसलिए भी गंभीर है क्योंकि दवाएं अस्पताल के दूकान से ही आती हैं और कई नर्स उसे चेक करते हैं। मैं एम0 आई0 सी0 यू0 से आया था वहाँ सभी दवाओं को कई नर्स चेक करते थे।

यह प्रश्न भी विचारणीय है कि कैसे ओवर मेडिकेशन से बचा जाय। एक साथ कई एंटीबायोटिक शरीर में दे दिए जाने की अवस्था में मरीज के शरीर पर क्या दुष्प्रभाव पड़ेगा, यह गंभीरता से विचार करने की जरूरत है । दूसरे कई देशों में मैंने देखा है कि बिना डॉक्टर के पूर्जा के कोई एंटिबायोटिक खरीद नहीं सकता । डॉक्टर भी अनावश्यक रूप से एंटिबायोटिक नहीं लिखते हैं । देश के स्वास्थ्य के दूरगामी प्रसंग में यह आवश्यक है कि एंटिबायोटिक का व्यवहार उचित ढंग से किया जाय।

मैंने पाया है कि बड़े कॉर्पोरेट अस्पतालों में सभी मरीज का अधिक- से-अधिक शल्य चिकित्सा करने, अधिक-से-अधिक टेस्ट करने, अधिक-से-अधिक दवा लिखने का प्रयास रहता है ताकि अधिक राशि का बिल बन सके और अधिक मुनाफा हो। इसमें मरीज के स्वास्थ्य से ज्यादा महत्वपूर्ण लाभ में वृद्धि करना रहता है। इस पूरी प्रक्रिया में शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव की कोई चिंता नहीं रहती। यदि कोई दुष्प्रभाव हो तो वह भी मुनाफे का एक नया अवसर बन जाता है।

ये प्रश्न एक अस्पताल या एक डॉक्टर का नहीं वरन पूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था के हैं । आइये हम सब मिलकर सोचें कि इन समस्याओं से कैसे निजात पाया जाय ताकि किसी अन्य व्यक्ति को इस तरह की समस्या का सामना न करना पड़े।
विजय प्रकाश
भा0 प्र0 से0 (से0 नि0)
पटना

आंध्र प्रदेश के केमिकल फैक्ट्री में लगी आग, नालंदा के चार मजदूरों की हुई मौत

आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के मुसनुरू गांव के केमिकल फैक्ट्री में अचानक आग लग जाने के कारण 6 मजदूर की मौत हो गई । मृतक में चार नालंदा जिला का रहने बाला है, मरने बालो में कारू रविदास , मनोज कुमार रामसन और सुभाष रविदास नरसंडा गॉव का रहने बाला है और हवदास रविदास बसनिमा गांव के रहने वाला है ।

मौत की खबर मिलते ही गांव में मातम छा गया है परिवार वाला का रो रो कर बुरा हाल है परिवार के सदस्यों ने बताया ये लोग पिछले 15 वर्षों से आंध्र प्रदेश के केमिकल फैक्ट्री में काम कर रहे थे जिससे पूरा परिवार का भरण पोषण हो रहा था ।देर रात सूचना आई कि फैक्ट्री में आग लग गई है जिसमे इन लोगों की मौत हो गई है मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया है और परिवार के लोगों को रो रो कर बुरा हाल है ।

उजड़ता बिहार : बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था अंतिम सांसे ले रही है

काफी लम्बे अंतराल के बाद हाल में ही 20 दिनों से अधिक समय तक गांव और गांव के लोगों के बीच रहने का मौका मिला वैसे गांव में अब पहले वाली बात नहीं रही युवा तो दिखता ही नहीं है कुछ बच्चे दिखते हैं उन्हें भी खेलकुद से ज्यादा वास्ता नहीं है। फिर भी गांव मुझे बहुत आकर्षित करता है वजह गांव के लोगों में एक अलग तरह का विश्वास और समझदारी आज भी देखने को मिलता है ।

दरभंगा बाजार समिति से कोई दस किलोमीटर पर एक गांव है गांव के मुखिया जी रिश्तेदारी में आते हैं उनसे मिलने उसके घर गये थे ,पूरानी हवेली कब गिर जाए कहना मुश्किल है ,दरवाजे पर दो दो ट्रैक्टर देखने से लगता था कि वर्षो से बंद पड़ा है,दरवाजे के ठीक सामने लम्बा सा घर जिसमें सौ से अधिक मवेशी को बांधने वाला खूंटा औरमवेशी के खाना खाने वाला नाद बना है लेकिन बहुत दूर एक गाय बंधी हुई दिखायी दी ।ठीक उसके सामने बहुत बड़ा खलिहान था जिसके बीचो बीच अभी भी एक बांस गड़ा हुआ दिख रहा था जहां कभी दर्जनों बैल धान का दौनी करता होगा ऐसा एहसास आज भी हो रहा था।

खलिहान के ठीक बाजू में अनाज रखने के लिए बड़ा बड़ा घर बना हुआ था मिथिलांचल में इसे बखाड़ी कहते हैं बखाड़ी का हाल यह था कि ऊपर का छज्जा कब उड़ गया अनुमान लगाना मुश्किल है एक आकृति बची हुई है जो एहसास दिलाती है कि किसी जमाने में हजार क्विंटल अनाज रहता होगा।दरवाजे पर जो कुर्सी लगी हुई थी ऐसा लग रहा था वर्षो से उसका रंग रोगन नहीं हुआ है शीशम और सखुआ जैसे लकड़ी का बना हुआ है इसलिए अभी टूटा नहीं है ।यह सब मैं देख ही रहा था कि भूंजा आ गया लगा चलो बहुत दिनों बाद गाँव के कनसार(जहाँ भुजा बनाता था) का भूंजा खाने का मौका मिला लेकिन देख कर बड़ी निराशा हुई वही शहर वाला भूंजा चूड़ा और चना अलग से नमक ,प्याज और मिर्च।

भूंजा खत्म होते होते चाय आ गया वैसे मैं चाय पीता नहीं हूं फिर भी दो घुट ले लिए चाय के स्वाद से लग गया कि इस घर का हाल क्या है मुखिया बनते आ रहे हैं क्यों कि इसके दादा जी भी मुखिया थे और गांव के लोगों में आज भी धारणा है कि मालिक का परिवार है इनके बच्चों में वो ईमान धर्म बचा हुआ है और परिवार वाले उसी ईमान धर्म को बनाये रखने में इस बार भी मुखिया बनने में दो बीघा जमीन बेचना पड़ा है। यह हाल किसी एक गांव के किसानों का नहीं है यह हाल बिहार के हर गांव का है जिनके पास जमीन है वो आज सबसे अधिक गरीब है उनके पास जरूरतें पूरी करने लाइक भी पैसे घर में नहीं है शादी हो या फिर कोई बीमार पड़ गया तो जमीन बेचने के अलावे उसके पास कोई चारा नहीं रह गया है यही हाल छोटे किसान और खेतिहर मजदूर का है यू कहे तो पूरी कृषि व्यवस्था अंतिम सांसे ले रही है मुफ्त में अनाज योजना का कितना बड़ा असर कृषि पर पड़ा है जरा गांव में जाकर देखिए ।

इतना ही नहीं पहले हर गांव में आपको सौ दो सौ भैंस गाय मिल जाता था आज गरीब के घर भी एक दो मवेशी मिल जाये तो बड़ी बात है हालांकि अभी भी गांव का यह कृषक समाज हार नहीं माना है संघर्ष कर रहा है अभी मुर्गी पालन और मछली पालन के सहारे किसानी को किसी तरह खींच रहा है ,लेकिन अब यह साफ दिखने लगा है कि गांव का कृषि व्यवस्था अंतिम सांसे ले रही है ।इस हालात को समझने के लिए मैं छोटे और बड़े किसानों से जहां गया जिस गांव में गया काफी बातचीत किया जो स्थिति बनती जा रही है उसमें यह कह सकते हैं कि भारत भी श्रीलंका की और बढ़ चला है ।

किसानों से खेती ना करने कि वजह जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि खेती में पांच वर्ष पहले जहां पांच हजार रुपया बीघा खर्च होता था आज वो खर्च 25 हजार रुपया बीघा हो गया है लागत मूल्य पांच गुना बढ़ गया है लेकिन अनाज का दाम में मामूली वृद्धि हुई है, पांच वर्ष पहले खेत के जोत में नौ फाड़ा ,कल्टी और रोटावेटर का रेट था 25–35–50 रुपये प्रति कट्टा था वो आज बढ़कर नौ फाड़ा 50 रुपया ,कल्टी 70 रुपया और रोटावेटर 100 रुपया कट्टा हो गया है ।

लेकिन अभी हाल यह है कि दूध का उत्पादन घट कर रोजाना दो लाख से ढाई लाख प्रति लीटर हो गया है ,दूध का पाउडर बनाने वाली मशीन महीनों से बंद है,दूध उत्पादन में कमी को लेकर जब किसान से बात किये तो पता चला कि जर्सी और फ्रीजियन गाय के पालने में उसके खाना और दवा में इतना खर्च बढ़ गया कि अब किसान को गाय पालना घाटे का सौदा हो गया है। समस्तीपुर के किसी भी गांव में चले जाये जहां कभी हर किसान के दरवाजे पर दस से बीस गाय रहता था आज घटकर दो चार बच गया है छोटे किसान भी गाय पालना लगभग छोड़ दिया है ।

यह उजड़ा बिहार की वो तस्वीर है जिसके सहारे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि पुचका बेचने बिहारी कश्मीर क्यों जा रहा है , पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था बर्बाद हो चुका है एक और बदलाव आया है पहले बिहारी जो बिहार से बाहर काम करता था गांव में जमीन और घर बनाने में निवेश करता था लेकिन यह प्रवृति भी काफी तेजी से घट रहा है इसका असर भी ग्रामीण अर्थ व्यवस्था पर बहुत ही गहरा पड़ा है ।

इतना ही नहीं बहेरी ,बिरौल और कुशेश्वर स्थान जैसे छोटे छोटे बाजार में भी माँल खुल गया है इसका असर यह देखने को मिल रहा है कि छोटे छोटे दुकान के सहारे वर्षो से रोजगार करने वाले दुकानदारों का दुकान बंद होने के कगार परआ गया है यू कहे तो पूरी ग्रामीण अर्थ व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है फिर भी लोग खामोश है । ऐसे तमाम उजड़े हुए चमन के घर पर आपको मोदी और भगवा झंडा जरुर मिल जायेंगा जिसके पास अपनी बदहाली पर बात करने कि फुर्सत तक नहीं है।

अब देखना यह है कि हिन्दू मुसलमान ,जय श्री राम और पांच किलो अनाज के सहारे कितने दिनों तक सरकार इस बवंडर को रोक पाती है वैसे अंदर अंदर आग तो सुलगनी शुरु हो गयी है बस एक माचिस की जरूरत है।

बिहार विधान परिषद में राबड़ी देवी नेता प्रतिपक्ष होगी

बिहार विधान परिषद में राबड़ी देवी नेता प्रतिपक्ष होगी, इस संबंध में बिहार विधान परिषद सचिवालय ने आदेश जारी कर दिया है ।

राष्ट्रीय जनता दल ने बिहार विधान परिषद के चुनाव के बाद नेता प्रतिपक्ष के तौर पर राबड़ी देवी का नाम विधान परिषद के कार्यकारी सभापति को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता देने के लिए भेजा था जिसे स्वीकार कर लिया गया है और विधान परिषद सचिवालय ने आदेश जारी कर दिया है।

Patna High Court : पटना के चर्चित जिम ट्रेनर गोलीकांड में अभियुक्त खुशबू सिंह को नियमित जमानत देने से इंकार कर दिया

पटना हाई कोर्ट ने पटना के चर्चित जिम ट्रेनर गोलीकांड में अभियुक्त खुशबू सिंह को नियमित जमानत देने से इंकार कर दिया। जस्टिस ए एम बदर ने इस मामलें पर सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद यह आदेश दिया।

कोर्ट ने खुशबू सिंह की नियमित जमानत याचिका को खारिज करते हुए संबंधित ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह इस मामले का ट्रायल नौ महीने में पूरा कर ले। खुशबू सिंह जिम ट्रेनर विक्रम सिंह गोली कांड में फिलहाल पटना के बेउर जेल में बंद है।

अभियुक्त खुशबू की ओर से उसके अधिवक्ता सुरेन्द्र कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को इस मामले में एक साजिश के तहत फंसाया गया है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि खुशबू के पति डॉ राजीव सिंह को निचली अदालत से ही नियमित जमानत मिल चुकी है।

जिम ट्रेनर गोलीकांड

सरकारी वकील (एपीपी ) मुस्ताक आलम और जे एन ठाकुर और जिम ट्रेनर की ओर से अधिवक्ता द्विवेदी सुरेन्द्र ने जमानत याचिका का विरोध किया।उन्होंने बहस करते हुए कोर्ट को बताया कि यह मामला पटना ही नही, बल्कि बिहार का चर्चित मामला रहा है। पुलिस ने इस मामले में अनुसंधान पूरा कर खुशुब और उसके पति डॉ राजीव समेत छह अभियुक्तों के खिलाफ कोर्ट में आरोपपत्र समर्पित कर दिया है।

अन्य अभियुक्तों के खिलाफ अनुसंधान अभी भी जारी रखा है।कोर्ट को बताया गया कि कांड दैनिकी में जो साक्ष्य आया है, उससे स्पष्ट होता है कि याचिकाकर्ता इस मामले की मुख्य अभियुक्त है।इस घटना में शामिल दो अन्य अपराधियों ने भी पुलिस को दिये अपने बयान में खुशबू सिंह और उसके पति की संलिप्तता की बात कही है।इन लोगों ने जिम ट्रेनर की हत्या के लिए तीन लाख रुपया अपराधियों को दिया भी है।

इस मामले में खुशबू उसके पति डॉ राजीव और खुशबू के पिता ने कॉन्ट्रैक्ट किलर को जिमट्रेनेर की हत्या करने के लिये बैंक से पैसा निकाल कर दिया है।

इसके पहले भी खुशबू के नियमित जमानत पर 31 जनवरी को सुनवाई हुई थी।उस दिन कोर्ट ने इस मामले में संबंधित पुलिस अधिकारी से शपथ पत्र के माध्यम से अभियुक्त के खिलाफ आये साक्ष्यों को देने को कहा था।

कोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले के अनुसंधानकर्ता ने कोर्ट में दो शपथ पत्र दायर कर पूरे घटना और उसके अनुसंधान में आये साक्ष्यों को दिया था।गौरतलब है कि 18 सितंबर 2021 को राजधानी के कदमकुआं इलाके में जिम ट्रेनर विक्रम सिंह को हत्या करने की नियत से गोली मारी गई थी।

हालांकि, इस वारदात में उनकी जान बच गई।इस वारदात में शामिल खुशबू सिंह, उसके पति राजीव कुमार सिंह और दोनों कॉन्ट्रैक्ट किलर समेत कई अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार जेल भेज दिया था। इनमें फिजियोथेरेपिस्ट राजीव कुमार सिंह को जमानत मिल चुकी है।

Patna High Court : दनियावां थाना के पुलिसकर्मी संतोष कुमार व अनूप कुमार द्वारा अधिवक्ता विनोद कुमार के साथ किये गए मारपीट के मामले पर सुनवाई

पटना । हाईकोर्ट में दनियावां थाना के पुलिसकर्मी संतोष कुमार व अनूप कुमार द्वारा अधिवक्ता विनोद कुमार के साथ किये गए मारपीट के मामले पर सुनवाई 18 अप्रैल,2022 को होगी। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई कर रही हैं।

आज कोर्ट में पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक को पटना हाई कोर्ट के समक्ष उपस्थित थे।

पिछली सुनवाई में कोर्ट को इस घटना के सम्बन्ध में वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने पूरी घटना को रखा था। श्री शाही ने यह भी बताया कि उस रास्ते से राज्य के मुख्यमंत्री को जाना था।

उसके बाद कोर्ट ने इस मामले में दिए गए पत्र को आधार बनाते हुए जनहित याचिका के रूप में रजिस्टर्ड करने का आदेश दिया था।

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कोर्ट को राज्य सरकार के महाधिवक्ता ललित किशोर ने पीड़ित अधिवक्ता की समुचित इलाज करवाने के लिए आश्वस्त किया था। सुनवाई के दौरान राज्य एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बराबर घटती है, जो अच्छी बात नहीं है।

इस घटना के बारे में पत्र में कहा गया है कि जब पीड़ित अधिवक्ता नालंदा जिला अंतर्गत अपने गांव चुलिहारी से पटना आ रहे थे ,तो दनियावां पुलिस द्वारा मारपीट की गई।

इसकी वजह से अधिवक्ता के दोनों कान बुरी तरह से घायल हो गए।पत्र में कहा गया है कि जब अधिवक्ता ने पटना के एसएसपी व दनियावां थाना के एसएचओ के समक्ष शिकायत करना चाहा,तो उन्होंने शिकायत लेने से इंकार कर दिया था।

बीजेपी जदयू के गठबंधन तोड़ने का वक्त आ गया है – पूर्व विधान पार्षद रजनीश कुमार

पटना । बेगूसराय खगड़िया विधान परिषद चुनाव में हार का सामना करने वाले एनडीए के भाजपा उम्मीदवार रजनीश कुमार ने भाजपा जदयू के गठबंधन पर सवाल खड़ा करते हुए भाजपा को जदयू से अलग होने का आग्रह किया है।

रजनीश कुमार ने कहा कि गठबंधन का समय चला गया है, भाजपा के शीर्ष नेताओं से आग्रह करते हुए कहा कि जिस तरह से भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी में आत्मनिर्भर बना है उसी तरह बिहार में भी भाजपा आत्मनिर्भर बनने के लिए अकेले चलने का काम करें। रजनीश कुमार ने कहा कि बिहार में गठबंधन की सरकार है लेकिन निचले स्तर पर गठबंधन का कोई औचित्य नहीं रह गया है।

बेगूसराय विधान परिषद चुनाव में जदयू की इकाई और विधायक ने खुलेआम एनडीए उम्मीदवार के विरोध में प्रचार किया। भाजपा और जदयू नेतृत्व को सूचना देने के बावजूद जदयू ने साथ नहीं दिया और धोखा देने का काम किया। बिहार में उपचुनाव में भाजपा हमेशा जदयू के साथ रही है लेकिन जदयू हमेशा चुनाव में गठबंधन धर्म का पालन नहीं करती है।

अब समय आ गया है कि गठबंधन को साथ नहीं चल सकते हैं ऐसे में भाजपा नेतृत्व से आग्रह है कि भाजपा को बिहार में मजबूत बनाने के लिए अकेले चलने का समय आ गया है।

बिहार की राजनीति में अभी भी नीतीश फैक्टर प्रभावी है

कल दोपहर टीवी देख रहे थे चैनल पर जगदानंद सिंह के पुत्र के जदयू में शामिल होने कि खबर लाइव चल रही थी और ललन सिंह जगता भाई को नसीहत दे रहे थे ठीक उसी समय टीवी स्क्रीन पर बिग ब्रेकिंग फुल प्लेट खबर ब्रेक होता है नालंदा में नीतीश कुमार के कार्यक्रम में धमाका खबर जैसे ही खत्म हुआ एंगर सीधे बोचहा उप चुनाव में मौजूद अपने रिपोर्टर के पास जाता है, और मतदान का हाल जानना चाहता है रिपोर्टर मुजफ्फरपुर से सटे भूमिहार के सबसे बड़ा गाँव खबरा में मौजूद था रिपोर्टर वोटर से सवाल कर रहे हैं विकास के मुद्दे पर वोट दे रहे हैं या बदलाव के मुद्दे पर वोटर अपना नाम और जाति बोलते हुए कहां कि मैं भूमिहार हूं और राजद को वोट देकर आया हूं बहुत हो गया अपमान अब नहीं चलेगा ।        

ठीक उसी समय दूसरे चैनल पर अखाड़ाघाट से रिपोर्टर लाइव पर था जहां राजपूत मतदाता वोट देकर बाहर निकलता है और कहता है कि मैं राजद को वोट दिया हूं बहुत हो गया हम लोग एनडीए का बंधुवा वोटर नहीं है ।                 

ये सब चल ही रहा था कि मैं मुजफ्फरपुर के बीजेपी के एक बड़े यूथ लीडर को फोन लगा दिया और जैसे ही वो फोन उठाया मेरा सीधा सवाल था क्या देख रहे हैं टीवी पर ,भैया सही देख रहे हैं पता नहीं क्यों यूथ में गजब का गुस्सा है हाल यह है कि तमाम भूमिहार बस्ती में यूथ अभिभावक को घर से निकलने ही नहीं दे रहा है कह रहा है लोकसभा में मोदी को वोट देंगे लेकिन आज आप लोग वोट देने मत जाइए ।

रिजल्ट क्या होगा ,भैया नीतीश के वोटर पर हम लोग लड़ाई में बने हैं बात जीत की तो बहुत मुश्किल है हजार दो हजार से जीत जाये तो बहुत बड़ी बात होगी वैसे हारे तो 15 हजार से ऊपर से हारेंगे ।              

भैया ये लोग मुकेश सहनी को सहनी का नेता बना दिया 75 प्रतिशत सहनी रमई राम के साथ चला गया जो बचा वो राजद और भाजपा में गया है पासवान वोट भी राजद के साथ खड़ा रहा है पचपनिया(अति पिछड़ा) वोटर में भी बिखराव दिख रहा है, बात आगे बढ़ी तो मैंने भी कहां विधान पार्षद के वोट में भी अति पिछड़ा वोटर वर्षो बाद राजद की और जाते हुए मैंने भी देखा।

 तभी ख्याल आया कि अति पिछड़ा वोटर का यह ट्रेड सिर्फ तिरहुत और मिथिलाचंल में ही है या फिर अन्य जगह भी है ,फोन काटा और सीधे औरंगाबाद में उसके पास फोन लगा दिया जो विधान परिषद के चुनाव में छह माह से डटा हुआ था उनसे भी मेरा सवाल यही था कि चुनाव तो जीत गये, पैसा भी बेहिसाब खर्च किये लेकिन जरा ये बताये अति पिछड़ा वोटर का क्या हाल था संतोष भाई पैसा लेने के बाद भी यह वोटर राजद को वोट किया है, मैंने पूछा क्या आपको लगता है कि नीतीश का अति पिछड़ा वोटर भाजपा के साथ सहज नहीं है संतोष भाई सौ फिसड्डी जो भी साथ छोड़ा है वो राजद के साथ गया है और ये साफ दिख रहा कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री तेजस्वी ही बनेगा संतोष भाई भाजपा का कार्यकर्ता इतना करप्ट हो गया है कि आप सोच नहीं सकते हैं साला एक दर्जन संगठन गांव गांव में खड़ा कर दिया है और सबको पैसा चाहिए गजब हाल है इन लोगों का राजद का कार्यकर्ता अभी भी सतुआ खाकर काम करता है लेकिन हमारे यहां पगला गये इन लोगों को सम्भालते सम्भालते।

 बात चल ही रही थी कि देखते हैं मेरे नालंदा रिपोर्टर का लगातार फोन आ रहा है इनसे विदा लेते हुए नालंदा रिपोर्टर का फोन रिसीभ किये कैसे हुआ क्या हुआ कौन है वो सब बात होने के बाद मैं धीरे से पुछा पटाखा छोड़ने वाला कौन जाति का है सर बनिया है हद है बाढ़ में भी बनिया और यहां भी बनिया ये बनिया सब को क्या हो गया है सर उसके परिवार का किसी भी राजनीतिक दल से उस तरह का जुड़ाव नहीं है लेकिन प्रतिबद्धता बीजेपी के साथ जरुर है , उस लड़के से बात हुई है क्या जी सर कह रहा है कि नीतीश शासन सही तरीके से नहीं चला रहा है इसको मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ देना चाहिए वैसे ये भी मानसिक रूप से कमजोर ही लगता है।

वैसे जगतानंद सिंह के बेटे का जदयू में शामिल होना,नीतीश कुमार की सभा में पटाखा छोड़ देना और बोचहा चुनाव में एनडीए के परम्परागत वोटर का गुस्सा होना ये सारी बाते भले ही तात्कालिक लग रहा है लेकिन बिहार की राजनीति फिजा बदल रही है ये भी साफ दिख रहा है ।

Patna High Court : पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ रीता कुमारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नही करने का निर्देश दिया

पटना हाई कोर्ट ने पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ रीता कुमारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नही करने का निर्देश पटना पुलिस को दिया है।साथ ही कोर्ट ने सेकंडरी एडुकेशन के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को भी नोटिस जारी किया है।

जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने डॉ रीता कुमारी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह निर्देश दिया।
कोर्ट को बताया गया कि वर्ष 2020 के इंटरमीडिएट परीक्षा के मूल्यांकन में भाग नहीं लेने पर याचिकाकर्ता के खिलाफ कदमकुआं थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

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कोर्ट को बताया गया कि यूनिवर्सिटी प्रोफेसर को इंटरमीडिएट परीक्षा के मूल्यांकन में लगाना विश्वविद्यालय कानून के खिलाफ है।कोर्ट ने फिलहाल नोटिस जारी कर प्रोफेसर के खिलाफ किसी प्रकार का दण्डात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है।

करोड़ो का सम्पत्ति धारक निकला जेल अधिकारी रूपक कुमार, सहायक कारा महानिरीक्षक

जेल के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति मामले में छापेमारी मामले में विशेष निगरानी में बड़ा खुलासा किया है रूपक कुमार ने बैंगलोर में हवाई अड्डा के पास आवासीय फ्लैट लिया है और बैंगलोर में इन्होंने जमीन और प्लॉट खरीदने का एग्रीमेंट किया है

झारखंड के देवघर में एक बड़ा आवासीय भूमि का प्लॉट है जिसकी कीमत करोड़ों में है

जमशेदपुर के प्रसिद्ध जगह पर 3 बीएचके का फ्लैट है जिसकी कीमत करोड़ों में है

जमशेदपुर में आवासीय भूमि का प्लॉट भी मिला है

रांची में भी फ़्लैट और जमीन के कागजात मिले हैं

नोएडा में ब्यबसायिक दुकान ली है जिसकी कीमत करोड़ों में है नोएडा में भी आवासीय फ्लैट मिला है

पश्चिम बंगाल में भी करोड़ों के प्लेट और आवासीय जमीन के कागजात मिले हैं

पटना के बिहटा में भी जमीन के कागजात मिले हैं

पटना के लोदीपुर मेरी फ्लैट मिला है जो किराए पर लगा है

रूपक कुमार के आवाज से 62 लाख रुपए से ज्यादा का आभूषण मिला है

निगरानी ने यह भी खुलासा किया है कि रूपक कुमार के घर की तलाशी के दौरान कैदियों के उपयोग के लिए खरीदी गई समान और वस्तुओं का अपने घर में यह प्रयोग करते थे

अभी तक 10 करोड़ से अधिक के चल और अचल संपत्ति के बारे में पता चला है जिसकी जांच की जा रही है यह और भी ज्यादा बढ़ने की संभावना है

विपिन अग्रवाल की हत्या मामले की जांच को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता हुए गोलबंद

नई दिल्ली: आरटीआई का समर्थन करने वाली एक राष्ट्रीय संस्था ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर मांग की है कि आरटीआई कार्यकर्ता बिपिन अग्रवाल की हत्या और उसके बाद उनके 14 वर्षीय बेटे की आत्महत्या के मामले में जांच के आदेश दिए जाएं.

‘नेशनल कैंपेन फॉर पीपुल्स राइट टू इंफोर्मेशन’ (एनसीपीआरआई) ने 8 अप्रैल को भेजे पत्र में कहा है कि बिपिन अग्रवाल की सितंबर 2021 में दिन-दहाड़े हत्या की गई थी और हत्यारा अभी भी पुलिस के पकड़ से बाहर है ।

मोतीहारी के हरसिद्धि इलाके के 47 वर्षीय आरटीआई कार्यकर्ता बिपिन अग्रवाल की 2012 में 24 सितंबर को अज्ञात मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने सीओ के दफ्तर के सामवे गोली मारकर हत्या कर दी थी. अग्रवाल के परिवार ने हत्या के लिए बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष सहित स्थानीय भू-माफिया को जिम्मेदार ठहराते हुए हमलावरों का पता लगाने के लिए निष्पक्ष जांच की मांग की थी.

एनसीपीआरआई ने लिखा, उनकी हत्या के बाद परिवार न्याय के लिए संघर्ष कर रहा था और उनका बड़ा बेटा पुलिस हत्या में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करवाने के लिए प्रयासरत था.

पत्र में आगे लिखा गया है, पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी न किए जाने से क्षुब्ध होकर बिहार के पूर्वी चंपारण के मोतीहारी में बेटे ने आत्महत्या करके जान दे दी.

हालांकि, पत्र में बेटे का नाम लिखा है लेकिन द वायर नाम का उल्लेख नहीं कर रहा है क्योंकि वह नाबालिग था.
एनसीपीआरआई ने लिखा, ’24 मार्च 2022 को, (लड़के का नाम) के दादा द्वारा जारी वीडियो के अनुसार, (वह) मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक ज्ञापन सौंपने पुलिस स्टेशन गया था और उसने कथित तौर पर वहां कई घंटों तक वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने की कोशिश में इंतजार किया.’

इसमें आगे कहा गया है कि लड़के के दादा के अनुसार पुलिस परिवार पर यह कहने के लिए दबाव बना रही थी कि उसने निजी कारणों के चलते आत्महत्या की है.

‘बिपिन की हत्या और उनके बेटे की मौत… व्हिसलब्लोअर और उनके परिवारों की रक्षा करने में राज्य मशीनरी की घोर विफलता की ओर इशारा करते हैं. पुलिस और प्रशासन की भूमिका की जांच करने की जरूरत है और सबसे पहले बिपिन अग्रवाल को बचाने और उनकी मृत्यु के बाद मुख्य आरोपी की समयबद्ध तरीके से जांच और मुकदमा चलाने में विफलता के लिए जवाबदेही तय करने की जरूरत है.

संस्था ने यह भी आरोप लगाया है कि राज्य (सरकार) ने न्याय की तलाश में भटकते परिवार की सहायता नहीं की.
संस्था ने पत्र में कहा है, ‘राज्य की उदासीनता का परिणाम (लड़के की) मौत के रूप में निकला. आरटीआई उपोगकर्ताओं पर हमले और उनकी हत्याओं की घटनाएं बिहार में बिना किसी भय के निरंतर जारी हैं.’

पत्र पर प्रमुख आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज, निखिल डे, वेंकटेश नायक, पंक्ति जोग, डॉ. शेख, प्रदीप प्रधान, राकेश दुब्बुडू, आशीष रंजन, शैलेश गांधी, अमृता जौहरी, कात्यायनी चामराज, विपुल मुद्गल, भास्कर प्रभु, अजय जांगिड़, करुणा एम., चक्रधर, अभय जॉर्ज, रोली शिवहरे और अशोक कुमार के हस्ताक्षर हैं.

हस्ताक्षरकर्ताओं ने नीतीश कुमार से एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराने का आह्वान किया है.
उन्होंने कहा है कि पुलिस और अधिकारियों की भूमिका की ठीक से जांच की जानी चाहिए और परिवार को तुरंत उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए.

एनसीपीआरआई ने बिहार सरकार से राज्य स्तरीय व्हिसलब्लोअर्स सुरक्षा क़ानून अपनाकर व्हिसलब्लोअर को सुरक्षा प्रदान करने की भी मांग की है.

उसने कहा कि क्योंकि केंद्र सरकार 2014 में संसद द्वारा पारित व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करने में विफल रही है और अब तक क़ानून के तहत नियमों का ऐलान नहीं किया है, इसलिए जरूरी है कि राज्य सरकार पहल करे।

पुल चोरी मामले का हुआ खुलासा विभाग के इंजीनियर ही था शामिल

बिहार के रोहतास में 60 फुट लंबे लोहे के पुल की चोरी मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है।जिसमें सिंचाई विभाग के एक कर्मचारी अरविंद और गाड़ी के मालिक चंदन को भी गिरफ्तार किया है। वहीं पुल चोरी में इस्तेमाल किए गए गैस कटर और जेसीबी को भी बरामद कर लिया गया है।

नासरीगंज प्रखंड के आदर्श ग्राम अमियावर का है। आधे दर्जन गांवों को जोड़ने के लिए आरा कैनाल पर ये पुल बना था। रोहतास में 60 फुट लंबा ये ऐतिहासिक पुल करीब 50 साल पुराना था।

पुल की चोरी मामले में पुलिस की माने तो इस चोरी में सासाराम सिंचाई विभाग का एसडीओ राधेश्याम सिंह ही इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड था। चौंकानेवाली बात तो ये रही कि राधेश्याम सिंह ने ही पुल चोरी की घटना की एफआईआर तक दर्ज कराई थी। पूरा मामला नासरीगंज प्रखंड के आदर्श ग्राम अमियावर का है। आधे दर्जन गांवों को जोड़ने के लिए आरा कैनाल पर ये पुल बना था। रोहतास में 60 फुट लंबा ये ऐतिहासिक पुल करीब 50 साल पुराना था।

पुल चोरी मामले का हुआ खुलासा

पूरी साजिश सासाराम में तैनात सोन नहर अवर प्रमंडल, नासरीगंज के SDO राधेश्याम सिंह ने रची थी। राधेश्याम ने इसके लिए पूरी प्लानिंग की थी और एक स्थानीय RJD नेता को भी अपने साथ मिला लिया था, जिससे कोई बवाल न खड़ा हो पाए। ये आरजेडी नेता अमियावर गांव का ही रहनेवाला है और उसका नाम शिव कल्याण भारद्वाज है।

पुलिस ने इस दौरान पुल चोरी कांड में इस्तेमाल किए गए सामान, जिसमें बुलडोजर, पिकअप वैन, 247 किलो लोहा, दो गैस सिलेंडर और दो गैस कटर को भी बरामद किया। पुलिस के मुताबिक RJD नेता शिव कल्याण भारद्वाज ने अपराधियों को संरक्षण देने के बदले SDO से 10 हजार रुपये लिए थे।

इस साजिश के लिए राधेश्याम सिंह ने विभाग के कुछ कर्मचारियों को भी तैयार किया। इसके बाद तय समय पर जेसीबी, कटर वगैरह लेकर ये सब लोग मौके पर पहुंच गए। चुंकि वहां पर मौजूद सभी चोरों ने अपना परिचय सरकारी कर्मचारी और मजदूर के तौर पर दिया इसलिए उन्हें इस पुल को गायब करने में विरोध का सामना नहीं करना पड़ा। इसके बाद सारा माल लोड कर मौके से सभी आरोपी उड़न छू हो गए।

SSB ने भारत नेपाल सीमा पर दो नेपाली युवक को 15 ग्राम ब्राउन सुगर के साथ गिरफ्तार किया

मधुबनी । जयनगर बॉर्डर पर तैनात एसएसबी 18 वीं वाहिनी के जवानों के द्वारा बाईक सवार दो नेपाली नागरिक को ब्राऊन सुगर नशीला पदार्थ के साथ गिरफ्तार किया गया।

एसएसबी के द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक सशस्त्र सीमा बल एसएसबी 18 वीं वाहिनी के जवानों के द्वारा भारत नेपाल बॉर्डर क्षेत्र में सीमा स्तम्भ संख्या 268/02 के समीप भारतीय क्षेत्र में विशेष गस्ती दल के द्वारा पेट्रोलोनिंग के दौरान एक बाईक पर सवार दो व्यक्ति को भारत से नेपाल जाने के क्रम गस्ती पार्टी के द्वारा उस बाईक सवार से पूछताछ की गई और तलाशी लेते हुए जाँच की गई।

भारत नेपाल सीमा पर दो नेपाली युवक गिरफ्तार
भारत नेपाल सीमा पर दो नेपाली युवक गिरफ्तार

तलाशी के दौरान उस व्यक्ति के पास से पोटली बरामद हुआ। पोटली को खोल कर देखा और उसकी जाँच पहचान की गई तो ब्राउन सुगर बताया गया। पूछताछ के बाद हिरासत में लिए गए व्यक्तियों बरामद सुगर होने की बात कही गई।

बाईक सवार व्यक्ति से 15 ग्राम ब्राउन सुगर बरामद होने की जानकारी दी गई। ब्राउन सुगर समेत बाईक को जब्त कर दोनों व्यक्ति को एसएसबी कैम्प लाया गया पूछताछ की गई। दोनों आरोपी नेपाल सिरहा जिला मिर्चया निवासी नथु कामत का 24 वर्षीय पुत्र श्याम कुमार कामत और दूसरा आरोपी घौना मण्डल का 28 वर्षीय पुत्र उमेश मण्डल बताया जाता हैं।

एसएसबी के जब्त ब्राऊ अध्यक्ष ने बताया कि मामला दर्ज कर दोंनो आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया हैं।

बिहार के सासाराम में पुल चोरी का अनोखा मामला आया सामने

सासाराम । रोहतास जिले के बिक्रमगंज अनुमंडल क्षेत्र से एक अजीबोगरीब खबर सामने आई है। जहां चोरों ने लगभग 60 फीट लंबी एक लोहे के पुल को ही चुरा लिया।

बताया जाता है कि जर्जर और परित्यक्त हो चुके नहर पर बने पुल को सिंचाई विभाग के अधिकारी बन कर कुछ लोग आए तथा जेसीबी, गैस कटर से पूरे पुल को काट तथा उखाड़ कर वाहनों पर लाद कर लेते चले गए। जिला के नासरीगंज थाना क्षेत्र के अमियावर में आरा कैनाल नहर पर सन 1972 के आसपास बनाए गए लोहे के पुल को चोरों ने दिनदहाड़े चुरा लिया।

बताया जाता है कि विभागीय अधिकारी बन कर कुछ लोग जेसीबी, पिकअप वान, गैस कटर तथा गाड़ियां लेकर पहुंचे और 3 दिनों में काट काट कर पूरा ब्रीज़ ही गायब कर दिया। सबसे मजे की बात है कि सिंचाई विभाग के अधिकारी होने का झांसा देकर चोरों ने स्थानीय विभागीय कर्मियों की मदद भी ली और उनकी मौजूदगी में पूरा पुल ही चुरा लिया। आप तस्वीरों में देख सकते हैं किस प्रकार मजदूर लोहे के पुल के मलबे को ले जाकर पिकअप वैन पर लाद रहे हैं।

चोरी की घटना पर क्या कहना है ग्रामीणों का

बता दे की पिछले कई दशक से जर्जर हो जाने के कारण इस लोहे के पुल का लोग उपयोग लोग नहीं कर रहे थे। ऐसे में ग्रामीण स्कूल को हटाने के लिए आवेदन भी दे चुके थे। विभाग ने पुल के बगल में एक कंक्रीट की समानांतर पुल बना दिया था। वैसे भी पुल के लोहे की धीरे-धीरे चोरी हो रही थी। लेकिन पिछले तीन दिनों से धीरे धीरे काट काट कर इस पूरे पुल की चोरी कर ली गई और विभाग तथा ग्रामीण देखते रह गए।

पुल चोरी की जॉच करने एसपी पहुँचा घटना स्थल

लगभग 60 फीट लंबा और 12 फीट ऊंची यह पुल जब पूरी तरह चोरी हो गई, तब जाकर ग्रामीण तथा विभाग को समझ में आया कि वे लोग झांसे में पड़ गए हैं। जिसके बाद विभागीय अधिकारियों ने जाकर थाने में पुल चोरों के खिलाफ केस दर्ज कराया। लेकिन जिस तरह से दिनदहाड़े अपराधियों ने नहर पर बने लोहे का पूरा पुल चुरा लिया। यह कई सवाल खड़े करती है।

चोरी की घटना पर विभाग के अधिकारी और सासाराम के एसपी का क्या कहना है जरा आप भी सूने

चुकी ऐसी कहानी फिल्मों में मिलती है। लेकिन जिस तरह से नटवरलाल बन कर रोहतास के अमियावर में चोरों ने पूरा पुल को ही चुरा लिया। ये मामला कहीं ना कहीं पूरे सिस्टम को शर्मिंदा करती हैं।

पटना के सड़कों पर मंत्री नितिन नवीन ने लगाया झाड़ू

रामनवमी को लेकर स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
महावीर मंदिर के आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता को लेकर लगाया झाड़ू

वार्ड 28 के पार्षद विनय कुमार पप्पू समेत सैकड़ों लोग इस अभियान में शामिल
पटना को साफ रखने का संदेश दिया जा रहा है
लोग अपने घरों के साथ आसपास के क्षेत्र के बीच सप्ताह का ध्यान रखें

Patna High Court: राज्य में अवैध शराब को बरामद कर नष्ट करने से हो रहे प्रदूषण और पर्यावरण पर पड रहे विपरीत प्रभाव के मामलें पर राज्य सरकार से जवाबतलब किया

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में अवैध शराब को बरामद कर नष्ट करने से हो रहे प्रदूषण और पर्यावरण पर पड रहे विपरीत प्रभाव के मामलें पर राज्य सरकार से जवाबतलब किया। जस्टिस पूर्णेंदु सिंह ने अर्जुन कुमार की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने कहा कि ऐसी कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 47 में निहित निर्देशों के जनादेश के खिलाफ है।इस मामलें पर ध्यान नहीं दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि उपरोक्त तथ्य को ध्यान में रखते हुए, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सलाहकार निकाय होने के नाते, बोर्ड के अध्यक्ष से अपेक्षा की जाती है कि वे उन क्षेत्रों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने के लिए सबसे पहले गंभीर कदम उठाएँ ।

राज्य के अधिकारियों द्वारा शराब को नष्ट किया जा रहा है ,उस पर ध्यान देने की जरूरत है। भारत का संविधान राज्य की जनता की सुरक्षा हेतु सभी उपाय करने का आदेश देता है।

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कोर्ट ने अवैध शराब नष्ट किए जाने से पर्यावरण पर इससे पड़ने वाले इसके दुष्प्रभाव , पारिस्थितिक असंतुलन और मानव जीवन के लिए ख़तरनाक होने के संबंध में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष को 12 अप्रैल,2022 तक रिपोर्ट दायर करने के लिए कहा है ।

कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य में शराब की तस्करी प्रतिबंधित है। यह केवल आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि इसकी तस्करी करने वाले आर्थिक अपराध के लिए उत्तरदायी हैं। इस मामले पर अगली सुनवाई 12 अप्रैल,2022 को होगी ।

उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करके हुआ आस्था के महापर्व चैती’छठ’ का समापन

छठ अकेली ऐसी पूजा है, जिसमें उगते हुए और अस्त होते हुए सूर्य की पूजा की जाती है। अस्त होता सूरज जहां आपको कालचक्र के बारे में बताता है तो वहीं उगता सूरज नई सोच और ऊर्जा का प्रतीक है और जीवन में आगे बढ़ने के लिए इन दोनों चीजों का होना बहुत ज्यादा जरूरी है। आपको बता दें कि आम से लेकर खास तक सभी ने पूरी श्रद्धा के साथ छठ पूजा की और अपने परिवार की खुशहाली के लिए सूर्य भगवान और छठ मैया से प्रार्थना की।

बगहा
आस्था के महापर्व चैती’छठ’ आज सुबह बगहा औऱ रामनगर छठ वर्ती महिलाओं ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। श्रद्धालुओं ने सुबह-सुबह ही घाट पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। जिसके बाद उपवास रखने वाले व्रतियों ने छठ मैया का प्रसाद ग्रहण कर व्रत तोड़ा। आपको बता दें छठ पूजा करने का उद्देश्य जीवन में सूर्यदेव की कृपा और छठ मैया का प्रेम-आशीष पाना है। सूर्य की कृपा से आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है तो वहीं छठ मैया के आशीष से इंसान को सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

बेगूसराय
बेगूसराय में उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ ही चार दिवसीय चैती छठ पर्व समाप्त हो गया। इस मौके पर बेगूसराय जिले के भी झमटिया गंगा घाटों पर छठ व्रतियों ने सूप के साथ  भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर पूजा का समापन किया।  चैती छठ व्रत को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है एवं छठ व्रतियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में लोग गंगा घाटों पर मौजूद हैं। जिले के कई पोखरों के साथ-साथ घरों पर भी लोगों ने लोक आस्था का पर्व चैती छठ को पूरे धूमधाम से मनाया। 4 दिनों तक चलने वाले इस छठ पर्व के अंतिम दिन उगते सूर्य की उपासना कर छठ पर्व का समापन हो गया। छठ व्रतियों ने घर परिवार समाज और देश की समृद्धि की कामना की है।

गया जिला के विभिन्न घाटों पर चैती छठ पूजा सम्पन हो गया, उगते हुए सूर्य का पूजा जल, दूध, धूप फल समर्पित कर किया गया।

Patna High Court : दनियावां थाना के पुलिसकर्मी संतोष कुमार व अनूप कुमार द्वारा अधिवक्ता विनोद कुमार के साथ किये गए मारपीट के मामले पर सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट ने दनियावां थाना के पुलिसकर्मी संतोष कुमार व अनूप कुमार द्वारा अधिवक्ता विनोद कुमार के साथ किये गए मारपीट के मामले पर सुनवाई की। इस मामलें 11 अप्रैल,2022 को पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक को पटना हाई कोर्ट के समक्ष उपस्थित होंगे।

इस घटना के सिलसिले में वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ के समक्ष पूरी बात को रखा था। श्री शाही ने यह भी बताया कि उस रास्ते से राज्य के मुख्यमंत्री को जाना था। उसके बाद आज ही खंडपीठ ने इस मामले में दिए गए पत्र को आधार बनाते हुए जनहित याचिका के रूप में रजिस्टर्ड करने का आदेश दिया।

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राज्य सरकार के महाधिवक्ता ललित किशोर ने पीड़ित अधिवक्ता की समुचित इलाज करवाने के लिए आश्वस्त किया है। सुनवाई के दौरान राज्य एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बराबर घटती है, जो अच्छी बात नहीं है।

पत्र में कहा गया है कि जब पीड़ित अधिवक्ता नालंदा जिला अंतर्गत अपने जन्म स्थान चुलिहारी से पटना आ रहे थे ,तो दनियावां पुलिस द्वारा मारपीट की गई, जिसकी वजह से अधिवक्ता के दोनों कान बुरी तरह से घायल हो गए।पत्र में कहा गया है कि जब अधिवक्ता ने पटना के एसएसपी व दनियावां थाना के एसएचओ के समक्ष शिकायत करना चाहा ,तो दोनों ने शिकायत लेने से मना कर दिया।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 11 अप्रैल,2022 को होगी।

Patna High Court : पटना हाईकोर्ट में मानसिक रोग चिकित्सा के सिलसिले में राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकार के गठन के मामलें पर सुनवाई हुई

पटना हाईकोर्ट में मानसिक रोग चिकित्सा के सिलसिले में राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकार के गठन के मामलें पर सुनवाई हुई।चीफ जस्टिस संजय करोल एवं जस्टिस संजय कुमार की खंडपीठ में चीफ सेक्रेटरी ने हलफनामा दायर कर जानकारी दी कि राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकार का गठन कर दिया गया है।

ये जनहित याचिका आकांक्षा माविया ने दायर की हैं।कोर्ट को बताया गया कि प्राधिकार के पदेन सदस्यों व अन्य सदस्यों की नामित व बहाल करने की प्रक्रिया जारी हैं।

अपर महाधिवक्ता एस डी यादव ने कोर्ट को बताया गया कि प्राधिकार के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के रूप में शैलेन्द्र कुमार को नियुक्त किया गया है।

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साथ ही उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी कि कोइलवर स्थित मानसिक आरोग्यशाला में 272 बेड का अस्पताल बनाया जाना हैं।इसकी लागत 129 करोड़ रुपए होगी और 3 माह में निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।

सुनवाई के दौरान कोर्ट को अपर महाधिवक्ता एस डी यादव ने बताया गया कि राज्य के इकतीस जिलों मे ज़िला मानसिक स्वास्थ्य प्रोग्राम प्रारम्भ हो गया हैं।साथ ही शेष आठ जिलों में इसे स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार की सहमति मिल गई है।
मानसिक रोगियों के ईलाज के लिए 61 डॉक्टरों व 47 नर्सों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया हैं। मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के मामलें में एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने चार दिनों का समय देते हुए इस प्राधिकार को पूरी तरह से शुरू करने के लिए एक समय सीमा देने का निर्देश दिया था । इस मामलें पर आगे सुनवाई की जाएगी।

बिहार विधान परिषद के 24 सीटों का मतगणना आज दोपहर बाद परिणाम आने की है उम्मीद है

बिहार विधान परिषद के लिए पंचायती राज व्यवस्था से होने वाले चुनाव गिनती बिहार विधान सभा और लोकसभा के चुनाव की गिनती से बिल्कुल अलग होती है इस चुनाव में एक कल संक्रमणीय अनुपातिक मतदान के आधार पर विजेता का फैसला होता है एक मतदाता अपनी पसंद के एक से अधिक प्रत्याशी को वरीयता दे सकता है विधान परिषद के चुनाव में वोटरों के पास एक से ज्यादा प्रत्याशियों को वोट देने पहली दूसरी तीसरी पसंद जैसे विकल्प होते हैं वोटर को अधिकार होता है कि वह यह तय करता है कि किस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा पसंद करते हैं और किसे कम।

BIHAR विधानपरिषद चुनाव
BIHAR विधानपरिषद चुनाव

उम्मीदवारों को जीत के लिए मिले कुल वैध मतों के 50% के अलावा कम से कम एक अधिक वोट लाना होता है प्रथम वरीयता के वोट किसी उम्मीदवार को यदि 50 फ़ीसदी से एक ज्यादा मिल गए तो उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है लेकिन इतने वोट किसी को नहीं मिले तो दूसरी वरीयता की गिनती शुरू होती है इसमें सबसे पहले प्रथम वरीयता के सबसे कम वोट पाने हमारे प्रत्याशी को प्रतिस्पर्धा से बाहर कर दिया जाता है और उनके बैलेट पेपर में मिले दूसरी वरीयता के वोटों को संबंधित प्रत्याशियों के वोट में जोड़ दिया जाता है

वोट गिरने के दौरान पहली वरीयता के वोटों में पिछड़ कर दी किसी कैंडिडेट के जीतने की संभावना खत्म नहीं होती है वह मुकाबले में बना रहता है दूसरी वरीयता के वोटों के सहारे उसे जीत मिल सकती है इस प्रक्रिया में सामान्य मतगणना तीन गुना अधिक समय लगता है।

Supreme Court : मगध विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर राजेन्द्र प्रसाद की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा कर राहत दी है

सुप्रीम कोर्ट ने मगध विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर (वीसी) राजेन्द्र प्रसाद उर्फ डॉ राजेन्द्र प्रसाद की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा कर राहत दी है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता डा रणजीत कुमार ने बताया कि साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राजेन्द्र प्रसाद द्वारा पटना हाई कोर्ट में दायर अग्रिम जमानत व कार्यवाही को रद्द करने हेतु दायर अर्जियों पर आदेश की सूचना की तिथि से तीन सप्ताह के भीतर सुनवाई करने का आग्रह किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस बीच याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी पर रोक रहेगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को निष्पादित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश को पारित किया है।

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राजेन्द्र प्रसाद के विरुद्ध आई पी सी की धारा 120 बी (अपराध करने के लिए रची गई आपराधिक साजिश) / 420(जालसाजी) व भ्रष्टाचार निवारण एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया था। इसके पूर्व याचिकाकर्ता ने पटना हाई कोर्ट के समक्ष अग्रिम जमानत हेतु याचिका भी दायर किया है। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिए अर्जी भी दायर किया है।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता की दलील थी कि उनकी अर्जियों पर सुनवाई बड़े पैमाने पर मुकदमों के लंबित रहने की वजह से नहीं सुना जा रहा है।

Patna High Court : राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में कोताही बरतने पर नाराज़गी जाहिर किया

पटना हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में कोताही बरतने पर नाराज़गी जाहिर किया। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई की।

हाईकोर्ट ने सड़क निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख तथा भागलपुर के कार्यपालक अभियंता को 7 अप्रैल को तलब किया हैं। प्रणव कुमार झा द्वारा इस मामले को लेकर दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया ।

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खंडपीठ ने आदेश दिया हैं कि दोनों अधिकारी 7 अप्रैल, 2022 को तीन बजे कोर्ट में सुनवाई के समय उपस्थित रहे। कोर्ट राज्य से गुजरने वाली बहुत सारी एन एच ( राष्ट्रीय राजमार्ग) के मामलों पर लगातार सुनवाई और मॉनिटरिंग कर रही हैं।

कोर्ट का मानना हैं कि राज्य की। जनता को यात्रा करने के लिए आरामदायक और अच्छी सड़के उपलब्ध हो।

इस मामले पर फिर 7अप्रैल, 2022 को सुनवाई होगी.

Patna High Court : सहारा इंडिया के विभिन्न स्कीमों में उपभोक्ताओं द्वारा जमा किये गए पैसे का भुगतान को लेकर दायर की गई हस्तक्षेप याचिकाओं पर सुनवाई हुई

पटना हाईकोर्ट ने सहारा इंडिया के विभिन्न स्कीमों में उपभोक्ताओं द्वारा जमा किये गए पैसे का भुगतान को लेकर दायर की गई हस्तक्षेप याचिकाओं पर सुनवाई की। जस्टिस संदीप कुमार ने इन मामलों पर सुनवाई की।

कोर्ट मे सुनवाई के दौरान सेबी के संबंधित अधिकारी कोर्ट में उपस्थित थे ।कोर्ट ने जब उनसे पूछा कि जितनी भी हस्तक्षेप याचिकाये हाईकोर्ट में दायर की गई है, उन्होंने उन याचिकाओं में से कितने याचिकाओं की छानबीन कर कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को भेजा है ।इस पर सेबी की ओर से बताया गया कि उन्होंने अभी तक करीब 430 हस्तक्षेप याचिकाओं की जांच की है ।साथ ही अन्य याचिकाओं की जांच भी की जा रही है।

इस पर कोर्ट ने कहा कि आप जल्द से जल्द जांच कर संबंधित अधिकारी के पास इस मामले को भेज दें ,ताकि लोगों उनका पैसा लौटने की करवाई हो सके।

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कोर्ट ने कहा कि बिहार एक गरीब राज्य है और यहां की जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा, जो सहारा कंपनी द्वारा विभिन्न स्कीमों में अपने यहां जमा करवा कर रखा गया है और जमा कर्ताओं को भुगतान नहीं किया जा रहा है ,यह बहुत ही गलत है।

कोर्ट ने जब सहारा इंडिया के अधिवक्ता से पूछा तो उन्होंने कहा कि अगर सेवी 1000 करोड़ रूपया भी उन्हें दे देती है ,तो वह बिहार के निवेशकों का पूरा पैसा उससे लौटा देंगे।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी सेबी को कहा है कि दो कंपनियों के पैसे को छोड़कर बाकी पैसा सेबी सहारा को लौटा दे, लेकिन सेबी ऐसा नही कर रहा है ।

उन्होंने कोर्ट को बताया की कोर्ट को बताया कि सहारा इंडिया के दो स्कीम सहारा हाउसिंग और सहारा रियल स्टेट में जमा किए गए पैसों को भुगतान करने के लिए अभी तक सुप्रीम कोर्ट का कोई आदेश नही है।

कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में अगली सुनवाई तक आप जानकारी प्राप्त कर बताएं कि इन दो स्कीमों के बाद वाले स्कीमों का पैसा क्यों नहीं लौटाने का निर्देश सहारा के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर को दिया जाय।

कोर्ट को इकोनामिक ऑफेंस यूनिट (ईओयू ) की ओर से बताया गया कि आम जनता का पैसा जमा कराने वाले निधि कंपनियों के खिलाफ 10 प्राथमिकी दर्ज कर जांच की गई है। इसमें जांच के बाद आरोप पत्र भी समर्पित कर दिया गया है।5 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।आगे भी कार्रवाई की जा रही है ।

इस मामले पर अब 20 अप्रैल को फिर सुनवाई होगी।

बिहार के रिमांड होम में चलता है देह व्यापार -थानेदार

पश्चिमी चंपारण के बैरिया थाने के SHO का एक ऑडियो वायरल हो रहा है. इसमें वह बालिका सुधार गृह की सच्‍चाई को बताने का दावा कर रहे हैं. मामले की जांच में ऑडियो सही पाए जाने पर अब बैरिया थानाध्‍यक्ष को निलंबित कर दिय गया है. बताया जाता है कि पीड़ित ने थानाध्‍यक्ष की बात को टेप कर उसे वायरल कर दिया.बेतिया (पश्चिम चंपारण). बिहार के पश्चिम चंपारण से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है.

बेतिया में बैरिया थानाध्‍यक्ष का एक ऑडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह कथित तौर पर बालिका सुधार गृह की सच्‍चाई बता रहे हैं. ऑडियो के वायरल होने के बाद मामले की जांच करवाई गई. जांच में ऑडियो सही पाए जाने पर SHO को निलंबित कर दिया गया है.

इस ऑडियो में लड़की को घर ले जाने से इनकार करने वाले परिजनों को आरोपी थानाध्‍यक्ष बालिका सुधार गृह की हकीकत बता रहे हैं. इसमें बैरिया थानाध्‍यक्ष बता रहे हैं कि बाल‍िका सुधार गृह या रिमांड होम में बड़ी-बड़ी गाड़ियों से लोग आते हैं और लड़कियों को ले जाते हैं. उनका यह ऑडियो वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया.।

आरोपी बैरिया एसएचओ की पहचान दुष्‍यंत कुमार के तौर पर हुई है. वायरल ऑडियो में थानाध्‍यक्ष लड़की के परिजनों को नसीहत देते हुए बता रहे हैं कि रिमांड होम में लड़कियों के साथ अनैतिक काम होते हैं. इस ऑडियो के सोशल नेटवर्किंग साइट पर तेजी से वायरल होने के बाद पुलिस अधीक्षक को कार्रवाई करनी पड़ी है. दरअसल, बैरिया थाना क्षेत्र के एक गांव से 25 मार्च को एक नाबालिग लड़की का अपहरण हो गया था.

अपहरण का आरोप बैरिया थाना के चौकीदार शम्भू साह के पुत्र सुधीर पर लगा था. परिजनों ने आवेदन दिया तो पुलिस ने आनाकानी करते हुए केस दर्ज नहीं किया. इसके बाद पीड़ित परिवार SP से मिला] तब जाकर मामले में केस दर्ज हुआ. इसके बाद पुलिस ने लड़की को बरामद कर लिया और न्यायालय में उसका बयान भी करवा लिया.।

परिजनों का लड़की को घर ले जाने से इनकार अब लड़की के घरवाले लड़की को अपने साथ नहीं ले जाना चाहते हैं. दूसरी तरफ पुलिस द्वारा जबरन लड़की को उसके घर भेजने के लिए दवाब बनाया जाने लगा. थानाध्यक्ष दुष्यंत कुमार ने पीड़ितों से कहा कि चौकीदार के पुत्र पर आरोप है तो वह चौकीदार का ही पक्ष लेंगे.

इस दौरान थानाध्यक्ष ने रिमांड होम की हकीकत बताकर लड़की के घरवावों को डराने का भी प्रयास किया, लेकिन लड़की के परिजन उसे अपने साथ नहीं ले जाना चाहते थे. बताया जाता है कि लड़की के परिजनों ने ही थानाध्यक्ष का ऑडियो रिकॉर्ड कर उसे सोशल मीडिया में वायरल कर दिया.ऑडियो वायरल होते ही एसपी ने मामले की जांच एसडीपीओ सदर मुकुल परिमल पांडेय से करवाई.

जांच में यह मामला सही पाया गया. इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने कार्रवाई करते हुए थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया है. दरअसल, जो जानकारी सामने आ रही है उसके अनुसार लड़का-लड़की आपस में प्रेम करते थे और दोनों घर से भाग गए थे. पुलिस ने लड़की को बरामद कर लिया, लेकिन परिजन उन्‍हें घर नहीं ले जाना चाहते हैं. इस बीच, आरोपी लड़के को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

बीजेपी की स्थापना दिवस आज

बचपन संघ के साथ ,कॉलेज ABVP के साथ और पत्रकारिता का एक बड़ा हिस्सा भाजपा के नेता और कार्यकर्ता के बीच गुजरा है ।

स्वभाविक है मेरा परिवार बिहार में संघ के स्थापक सदस्यो में एक थे ,काँलेज में ABVP की तरह व्यवस्थित दूसरा कोई छत्र संगठन नहीं था ,पत्रकार बने तो उस समय बीजेपी विपंक्ष में थी,सत्ता और सरकार के खिलाफ कार्यक्रम और आंदोलन करने के मामले में इनका जोड़ा नहीं है ।आंदोलन में लोग जुटे या ना जुटे मीडिया में बेहतर कभर कैसे हो इसके गुर में ये माहिर होते थे ।

इस वजह से बीजेपी का गाँव का कार्यकर्ता हो या फिर राष्ट्रीय नेता हो आप इसके आलोचक ही क्यों ना हो व्यक्तिगत रिश्ता हमेशा बना कर रखते थे ।

हालांकि बीजेपी जब से सत्ता में आयी इनकी मीडिया से पहले जैसी जरुरत नहीं रही फिर मोदी के बाद तो मीडिया से तो ये दुश्मनी साधने लगे ।

लेकिन 40 से उपर वाले इनके नेता और कार्यकर्ता में अभी भी वो भाव बची हुई है ,इन सबों में विपंक्ष में होने का एहसास अभी भी मिटा नहीं है वैसे सोशल मीडिया वाली आक्रमकता फिल्ड में देखने को नहीं मिलता है आंख में पानी है लेकिन पहले जैसा घार अब कार्यकताओं में नहीं है ,चाल चरित्र और चेहरा की बात अब बस कहने के लिए रह गया ।

Patna High Court : पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई हुई

पटना हाई कोर्ट ने पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ को सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने बताया कि इस मामलें की जांच 4 सप्ताह में पूरी कर ली जाएगी।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने अनुसंधान को डी एस पी रैंक की महिला पुलिस अधिकारी से कराने का निर्देश दिया था।राज्य सरकार द्वारा इस मामलें की जांच 4 सप्ताह में पूरी कर कोर्ट के समक्ष जांच रिपोर्ट प्रस्तुत किया जाएगा।

पहले की सुनवाई में कोर्ट का यह भी कहना था कि बिहार स्टेट लीगल सर्विसेज ऑथोरिटी, यदि पीड़िता को जरूरत हो ,तो जो मदद हो सके पीड़िता को उपलब्ध करवाए। कोर्ट ने राज्य के समाज कल्याण विभाग समेत सभी संबंधित विभागों को अपने अपने हलफनामा को रिकॉर्ड पर लाने को भी कहा था, जिसमें पीड़िता द्वारा 4 फरवरी, 2022 का बयान भी शामिल हो।

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राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि दोनों पीडितों की ओर से महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज हो गई है। एक का पी एस केस नंबर – 13/2022 है और दूसरे का पी एस केस नंबर -17/ 2022 दर्ज कर लिया गया है।

पीड़िता की संबंधित अधिकारियों के समक्ष जांच भी की गई। महाधिवक्ता ने पीड़िता द्वारा दिये गए बयान के उद्देश्य पर संदेह भी जताया है। उनका कहना था कि पीड़िता ने केअर होम को वर्ष 2021 के अगस्त महीने में ही छोड़ दिया था, लेकिन वह पहली बार जनवरी, 2022 में आरोप लगा रही है।
हाई कोर्ट इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रहा है।हाई कोर्ट ने इस याचिका को पटना हाई कोर्ट जुवेनाइल जस्टिस मोनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रजिस्टर्ड किया है।

कमेटी में जस्टिस आशुतोष कुमार चेयरमैन हैं, जबकि जस्टिस अंजनी कुमार शरण और जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय इसके सदस्य हैं। कमेटी ने उक्त मामले में 31 जनवरी को अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट को गंभीरता से लिया था।

केअर होम में 260 से भी ज्यादा महिलाएं वास करती हैं।इस मामलें पर चार सप्ताह बाद सुनवाई की जाएगी।

Patna High Court : गाँधी मैदान थाना में जब्त की गई सम्पत्ति समेत अन्य अवरोधो को हटाने के मामलों पर सुनवाई हुई

पटना हाईकोर्ट ने गाँधी मैदान थाना में जब्त की गई सम्पत्ति समेत अन्य अवरोधो को हटाने के मामलों पर सुनवाई की।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने अधिवक्ता शिल्पी केशरी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना के सभी पुलिस स्टेशन में जब्त वाहनों का ब्यौरा तलब किया है।

कोर्ट ने कल गाँधी मैदान थाना में जब्त वाहनों को हटाने के अदालती आदेश का पालन नहीं करने पर सख्त नाराजगी जाहिर की।कोर्ट ने डी जी पी,बिहार को 24 घंटों में गाँधी मैदान थाना से सभी अवरोध हटाने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने सभी जब्त वाहनों के बारे में पूरी जानकारी मांगते हुए ये भी बताने को कहा कि अबतक इन वाहन जब्ती मामलों में क्या कार्रवाई की गई हैं।

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि पटना के गाँधी मैदान के आस पास पार्किंग स्थल को छोड़ कर और कहीं भी गाड़ी पार्क नहीं किया जाएगा।

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अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने कोर्ट को बताया कि आज गाँधी मैदान थाना से जब्ती की वाहनों को भले हटा दिया गया है, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर वहीं हालत हो जाएगी।कोर्ट द्वारा इसके निरंतर मॉनिटरिंग की जरूरत हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को पटना हाईकोर्ट ने गाँधी मैदान थाना में जब्त की गई संपत्ति समेत सभी अवरोधों को दो सप्ताह में हटाना सुनिश्चित करने का आदेश दिया था।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने कल डी जी पी, बिहार के द्वारा दायर हलफनामे पर आपत्ति की।उन्होंने कोर्ट को बताया कि अब तक गाँधी मैदान थाना में जब्त की गई कई गाडियां और अन्य संपत्ति पड़ी हुई है।उन्होंने फोटो के जरिये सबूत भी दिया।उन्होंने बताया कि पटना के अगमकुआं,कंकड़बाग़, पत्रकार नगर समेत अन्य कई थानो की ऐसी ही स्थिति हैं।

कोर्ट ने इस मामलें को काफी गम्भीरता से लेते हुए कल ही डी जी पी, बिहार को चौबीस घंटों के भीतर कार्रवाई कर कोर्ट के समक्ष कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने इस स्थान की खूबसूरती के कारण इसे पटना का गौरव और ज्वेल की संज्ञा दी थी।इस मामलें पर अगली सुनवाई 9 अप्रैल,2022 को होगी।

डेनमार्क की कंपनी ब्लू टॉउन के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर ने उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद से की मुलाकात

पटना । डेनमार्क की प्रतिष्ठित कंपनी ब्लू टॉउन के मुख्य ऑपरेटिंग अधिकारी क्रास्टर ब्राउन ने उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद से मुख्य सचिवालय स्थित कार्यालय कक्ष में मुलाकात की।

मुलाकात के क्रम में कास्टर ब्राउन ने बताया कि ब्लू टाउन कंपनी द्वारा भारत के उत्तरप्रदेश सहित कई राज्यों में पब्लिक वाई-फाई, फ्री वाई-फाई, ग्रामीण क्षेत्रों, शहरी निकायों, स्कूलों के लिए आई.टी. सॉल्यूशन के स्टार्टअप कंपनी के रूप में काम कर रही है। बिहार में स्टार्ट-अप कंपनियों को बेहतर सहयोग मिल रहा है। उनके द्वारा बताया गया कि कंपनी की ओर से सन ऑफ सॉयल की अवधारणा के तहत स्थानीय प्रतिभाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्रदान करने की व्यवस्था की जाती रही है।

उप मुख्यमंत्री ने बिहार सरकार के स्तर से हरसंभव सहयोग करने का भरोसा दिया। मुलाकात के दौरान ब्लू टॉउन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के कंट्री हेड श्री हितेंद्र कुमार, स्टेट हेड श्री ऋत परमार उपस्थित थे।

पहली बार शराब मामले में कोर्ट ने सुनाई सजा, 6 साल जेल के साथ 2 लाख जुर्माना

मुज़फ्फरपुर। एक्साइज स्पेशल जज 2 ने शराब बेचने के आरोप में दो आरोपियों को 6 साल कि सजा सुनाई है। पहली बार शराब मामले में कोर्ट ने सुनाई सजा, 6 साल जेल के साथ 2 लाख जुर्माना।

22 अगस्त 2020 को उत्पाद विभाग ने दो आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किया था। जिसमे विकास चौधरी और पिंटू चौधरी शामिल है।

Bihar Liquor Ban
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छापेमारी के दौरान उत्पाद विभाग कि टीम ने विकाश चौधरी को 99.04 लीटर शराब के साथ मौके से गिरफ्तार किया था।
31 मार्च को दोनो को दोषी करार किया गया था।आज दोनो आरोपियों को 6 साल कि सजा सुनाई गई है।।
स्पेशल पी पी डॉ सुनील श्रीवास्तव ने दी मामले की जानकारी।।

Patna High Court : बिहार में जनजाति शोध संस्थान को स्थापित करने के मामले में राज्य के मुख्य सचिव को दो हफ्ते के अंदर ठोस निर्णय लेने का निर्देश दिया

पटना हाईकोर्ट ने बिहार में जनजाति शोध संस्थान को स्थापित करने के मामले में राज्य के मुख्य सचिव को दो हफ्ते के अंदर ठोस निर्णय लेने का निर्देश दिया है ।

चीफ जस्टिस संजय करोल संजय करोल की खण्डपीठ ने आदिवासी अधिकार मंच (फोरम) की तरफ से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने मुख्य सचिव को अपना निर्णय हलफनामे पर दायर करने का निर्देश भी दिया ।

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सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने पिछले अदालती आदेश के आलोक में कोर्ट को बताया कि वर्तमान में राज्य में जनजातीय शोध संस्थान स्थापित नही है ।

संस्थान को स्थापित करने का पूरा खर्च केंद्र सरकार को करना है ,जबकि संस्थान के सारे स्टाफ का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

याचिकाकर्ता के वकील विकास पंकज ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार के जनजाति कल्याण मंत्रालय से जारी दिशानिर्देश के अनुसार जनजाति के कल्याण , एवम उनके संरक्षण हेतु एक शोध संस्थान (टीईआरआई ) बनाने का भी प्रावधान हैं।
इस मामलें पर आगे भी सुनवाई होगी।

मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने नालंदा के बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के द्वारा निर्माणाधीन ग्रिड सब स्टेशन का निरीक्षण किया

मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने नालंदा जिला के अस्थावां प्रखंड स्थित बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के द्वारा निर्माणाधीन ग्रिड सब स्टेशन अस्थावां 220/132/33 के0वी0 का निरीक्षण किया। निरीक्षण के क्रम में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से ग्रिड सब स्टेशन के कार्य प्रगति के विषय में पूरी जानकारी ली।

 निरीक्षण के पश्चात अधिकारियों को निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पावर ग्रिड सब स्टेशन को रिचार्ज कर यथाशीघ्र चालू करें। शेष कार्य समय एवं आवश्यकतानुसार चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि अस्थावां पावर ग्रिड सब स्टेशन जल्द से जल्द शुरू हो जाने से आस-पास के इलाके में रहनेवाले लोगों को इसका लाभ मिलने लगेगा।

इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री श्री संजय झा, ग्रामीण विकास मंत्री श्री श्रवण कुमार, सांसद श्री कौशलेंद्र कुमार, विधायक डॉ0 जितेंद्र कुमार, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त परामर्शी श्री मनीष कुमार वर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, आयुक्त पटना प्रमंडल श्री कुमार रवि, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

गाँव को आपकी जरूरत है

बिहार का सुधा राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांड कैसे बन गया यह सवाल बार बार मुझे परेशान करता है, पटना आने के बाद इस रहस्य को समझने के लिए कई बार सुधा से जुड़े लोगों से मैं मिला भी लेकिन इस ऊंचाई पर पहुंचने राज वो बता नहीं पाये ।

दरभंगा प्रवास के दौरान दरभंगा बहेड़ी मुख्य मार्ग पर जोरजा एक गांव हैं वहां चैती दुर्गा पूजा पूरे धूमधाम से मनाया जाता है इस गांव से मेरा पुराना रिश्ता रहा है पूजा कमेटी के लोगों ने मुझे पूजा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया दरभंगा जिला घूम ही रहे थे इसी क्रम में जोरजा पहुंच गये पूजा में शामिल होने के बाद वैसे ही बात हो रही थी तो मेरी नजर दुर्गा स्थान के पीछे स्थित बगीचा पर पड़ा गया पता चला बहुत बड़े कृषि वैज्ञानिक हैं। रिटायर होने के बाद पिछले 15 वर्षो से गांव में ही रह रहे हैं इनको दो बेटा है दोनों आईआईटीएन है और अमेरिका में रहता है ये यहां अकेले रहते हैं गांव में पर्यावरण पर काम करते रहते हैं।

चले गये उनसे मिलने एक घंटा का साथ मिला बात चलते चलते पता चला कि 1990 के दशक में डेयरी के क्षेत्र में काम करने वाले कई बड़े बिहार के रहने वाले वैज्ञानिक जो अमूल,राजस्थान और पंजाब हरियाणा डेयरी में काम करते थे उन्हें बिहार सरकार ने बिहार में काम करने के लिए आमंत्रित किया इसी कड़ी में राजस्थान डेयरी से डाँ धीरेन्द्र कुमार सिन्हा बिहार आये और ये फिर अलग अलग राज्यों में डेयरी के फील्ड में काम करने वाले बिहारी का बिहार आने का न्यौता दिया और फिर एक ऐसा टीम तैयार हुआ जिसके बुनियाद पर आज सूधा अमूल को चुनौती दे रहा है इन्होंने दूध का बायप्रोडक्ट पर काफी काम किये साथ ही जिस समय बिहार में दूध काफी होता है उस दूध को पाउडर के रूप में परिणत कैसे किया जाये इस तकनीक को भी बिहार में लाये।

इनके एमडी के कार्यकाल को आज भी सुधा से जुड़े लोग याद करते हैं इन्होंने एक ऐसा चैन खड़ा कर दिया कि आज सुधा की पहचान देश स्तर पर पहुंच गया है ।80 वर्ष इनका उम्र है, बीस और जीना चाहते हैं ताकी अपने गांव को एक ऐसा आदर्श गांव बना सके जिसकी पहचान देश स्तर पर औषधीय और ऑर्गेनिक खेती के रूप में हो सके। ये अपने बगान में बहुत सारे ऐसे फल सब्जी और अनाज पैदा कर रहे हैं जो हमारे फूड चैन से खत्म होते जा रहा है । पोस्ट के साथ कुछ तस्वीर लगा है पहचानिए इसमें से एक बथुआ का साग है जो हमारे आपके खेत में वैसे ही उगता रहता है इनका मानना है कि इससे पोस्टिंग साग दूसरा कोई भी नहीं है इस साग को कोई लगाता नहीं है लेकिन हर किसी के खेत में देखने को मिल जायेगा इस साग के खाने से बहुत सारे बीमारी से बचा जा सकता है ।

ऐसे कई फल , फूल और साग सब्जी इनके बगान में आपको मिल जायेगा जिसे देख आप हैरान रह जायेंगे मुझे लगता है कि ऐसे बिहारी जो पटना ,दिल्ली ,मुंबई में अपार्टमेंट की जिंदगी जी रहे हैं उन्हें गांव लौटना चाहिए क्यों आज भी जितने बिहारी ऊंचाई पर है उनकी पढ़ाई लिखाई और परवरिश कही ना कही किसी ना किसी बिहार के गांव से ही हुआ है गांव को आज आप जैसे लोगों की जरूरत है बिहार में बदलाव की अभी भी अपार सम्भावना है ।

Patna High Court : मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन में कई व्यक्तियों के आंख की रौशनी खो जाने के मामले पर सुनवाई करते हुए मुजफ्फरपुर के एस एस पी से कार्रवाई रिपोर्ट तलब किया है

पटना हाई कोर्ट ने मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन में कई व्यक्तियों के आंख की रौशनी खो जाने के मामले पर सुनवाई करते हुए मुजफ्फरपुर के एस एस पी से कार्रवाई रिपोर्ट तलब किया है।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वी के सिंह ने बताया कि इस मामलें में दायर प्राथमिकी पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने हलफनामा दायर कर कार्रवाई रिपोर्ट पेश किया था।मुकेश कुमार ने ये जनहित याचिका दायर की है।

कोर्ट ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए पी एम सी एच या एम्स ,पटना के डॉक्टरों की कमिटी गठित करें।इनमें आँख रोग विशेषज्ञ भी शामिल हो। इस कमिटी को दो सप्ताह में गठित करने का निर्देश दिया।

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साथ कोर्ट ने मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल के प्रबंधन को भी जवाब देने का आदेश दिया।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को इस अस्पताल के प्रबंधन को पार्टी बनाने का निर्देश दिया था।

इसमें कोर्ट को बताया गया कि आँखों की रोशनी गवांने वाले पीडितों को बतौर क्षतिपूर्ति एक एक लाख रुपए दिए गए हैं।साथ ही मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल को बंद करके एफ आई आर दर्ज कराया गया है।लेकिन अब तक दर्ज प्राथमिकी पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई ।

इस याचिका में हाई लेवल कमेटी से जांच करवाने को लेकर आदेश देने अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विजय कुमार सिंह ने आरोप लगाया गया है कि कथित तौर पर आई हॉस्पिटल के प्रबंधन व राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा बरती गई अनियमितता और गैर कानूनी कार्यों की वजह से कई व्यक्तियों को अपनी आँखें खोनी पड़ी।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार के अधिकारियों को भी एक नियमित अंतराल पर अस्पताल का निरीक्षण करना चाहिए था। याचिका में आगे यह भी कहा गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों व अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज करनी चाहिए, क्योंकि इन्हीं की लापरवाही की वजह से सैकड़ों लोगों को अपनी ऑंखें गंवानी पड़ी।

मुजफ्फरपुर आई अस्पताल प्रबंधन व जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही की वजह से आंख खोए व्यक्तियों को मुआवजा देने का भी आग्रह किया गया है। पीड़ितों को सरकारी अस्पताल में उचित इलाज करवाने को लेकर आदेश देने का भी अनुरोध किया गया है।

इस मामले पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी।

Patna High Court : बिहार ट्रक ऑनर एसोसिएशन व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई 7 अप्रैल,2022 तक के लिए टली

पटना हाई कोर्ट में बिहार ट्रक ऑनर एसोसिएशन व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई 7 अप्रैल,2022 तक के लिए टली। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ द्वारा इन मामलों पर सुनवाई की जा रही है।

इन याचिकाओं में बिहार सरकार द्वारा 14 चक्कों के ट्रक के जरिये गिट्टी व बालू आदि की ढुलाई पर 16 दिसंबर, 2020 को ही एक अधिसूचना जारी कर प्रतिबंध को challenge किया गया है।

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राज्य सरकार द्वारा रोक के आदेश के विरुद्ध संबंधित पक्ष ने मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी ये मामला उठाया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 3 जनवरी, 2022 को इसे वापस पटना हाई कोर्ट के समक्ष भेज दिया था। साथ ही साथ सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 8 सप्ताह के भीतर निपटारा करने को भी कहा था।

इन मामलों पर हाई कोर्ट में फिजिकल कोर्ट शुरू होने के बाद सुनवाई शुरू हुई थी।

अब इस बीच राज्य सरकार समेत अन्य सम्बंधित सभी पक्षों को अपना अपना पक्ष लिखित तौर पर कोर्ट के समक्ष दायर करने का निर्देश दिया गया था।

अब इन मामलों पर 7 अप्रैल,2022 को कोर्ट में फिर सुनवाई की जाएगी।

Patna High Court : राज्य में नारको टेस्ट की व्यवस्था नहीं रहने पर पटना हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में नारको टेस्ट की व्यवस्था नहीं रहने पर नाराजगी जाहिर की।जस्टिस संजीव कुमार शर्मा ने एक आपराधिक मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य के मुख्य सचिव से जवाबतलब किया है।कोर्ट ने उनसे जानना चाहा है आखिर किस कारण से बिहार जैसे राज्य में यह व्यवस्था नहीं है।

कोर्ट ने इसके पहले एफएसएल को यह निर्देश दिया था कि इस मामले के अपराधी की नारको टेस्ट कर उसका रिपोर्ट कोर्ट को दिया जाए। एफएसएल के डायरेक्टर की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बिहार में नारको टेस्ट करने की कोई व्यवस्था नहीं है।

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उनके द्वारा यह भी बताया गया कि नारको टेस्ट करने के लिए अलग से जो व्यवस्था और पदाधिकारियों की नियुक्ति करनी हैं, उसके लिए राज्य के मुख्य सचिव और गृह विभाग को पहले ही उनके द्वारा लिखा जा चुका है।

लेकिन अभी तक इस मामले में न तो किसी पदाधिकारी की नियुक्ति की गई है और ना ही नारको टेस्ट करने की व्यवस्था ही बिहार में की गई है । इसी मामले पर नाराजगी जाहिर करते हुए पटना हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव से 2 सप्ताह में जवाब तलब किया है.

कोर्ट ने अपर लोक अभियोजक झारखंडी उपाध्याय को कहा कि वह इस आदेश की जानकारी राज्य के मुख्य सचिव को दें, ताकि उनके द्वारा इस मामले में 2 सप्ताह के अंदर कोर्ट में जवाब दाखिल किया जा सके । इस मामले पर 2 सप्ताह के बाद सुनवाई फिर की जाएगी।

बिहार विधान परिषद चुनाव 24 सीटों पर वोटिंग समाप्त, 97.84% हुआ मतदान

बिहार विधान परिषद 24 सीटों पर वोटिंग समाप्त, 97.84%  हुआ मतदान। 185 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला है, 7 अप्रैल को मतगणना होगी।

BIHAR-विधानपरिषद-चुनाव-2022
BIHAR-विधानपरिषद-चुनाव-2022
  1. पटना -98.02 %
  2. नालंदा – 99.33%3.गया -जहानाबाद – अरवल – 99.57%
  3. औरंगाबाद – 99.80%
  4. नवादा – 99.54%
  5. भोजपुर -बक्सर –  99%
  6. रोहतास – कैमूर – 99.49 %
  7. सारण –  94%
  8. सिवान -99.46 %
  9. गोपालगंज -98.98 %
  10. पश्चिम चंपारण – 98.93%
  11. पूर्वी चंपारण – 91%
  12. मुजफ्फरपुर -99.49 %
  13. वैशाली – 99.67%
  14. सीतामढ़ी – शिवहर – 99%
  15. दरभंगा –  99.40%
  16. समस्तीपुर –  97.99%
  17. मुंगेर- जमुई -लखीसराय – शेखपुरा -99.34 % 
  18. बेगूसराय – खगड़िया -97.86 %
  19. सहरसा- मधेपुरा- सुपौल – 98.38 %
  20. भागलपुर- बांका – 99.30 %
  21. मधुबनी -95.76  %
  22. पूर्णिया -अररिया -किशनगंज – 98.38 %
  23. कटिहार – 99%

Patna High Court : गाँधी मैदान थाना में जब्त की गई सम्पत्ति समेत अन्य अवरोधो को हटाने के अदालती आदेश का पालन नहीं करने पर सख्त नाराजगी जाहिर की

पटना हाईकोर्ट ने गाँधी मैदान थाना में जब्त की गई सम्पत्ति समेत अन्य अवरोधो को हटाने के अदालती आदेश का पालन नहीं करने पर सख्त नाराजगी जाहिर की।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता शिल्पी केशरी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए डी जी पी,बिहार को 24 घंटों में गाँधी मैदान थाना से सभी अवरोध हटाने का आदेश दिया है।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को पटना हाईकोर्ट ने गाँधी मैदान थाना में जब्त की गई संपत्ति समेत सभी अवरोधों को दो सप्ताह में हटाना सुनिश्चित करने का आदेश दिया था।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने डी जी पी, बिहार के द्वारा दायर हलफनामे पर आपत्ति की।उन्होंने कोर्ट को बताया कि अब तक गाँधी मैदान थाना में जब्त की गई गाडियां और अन्य संपत्ति पड़ी हुई है।उन्होंने फोटो के जरिये अपने सबूत दिया।

उन्होंने बताया कि पटना के अगमकुआं,कंकड़बाग़,पत्रकार नगर समेत अन्य कई थानो की ऐसी ही स्थिति हैं।कोर्ट ने इस मामलें को काफी गम्भीरता से लेते हुए डी जी पी, बिहार को चौबीस घंटों के भीतर कार्रवाई कर कोर्ट के समक्ष कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।कोर्ट ने इस स्थान की खूबसूरती के कारण इसे पटना का गौरव और ज्वेल की संज्ञा दी थी।
इस मामलें पर अगली सुनवाई 6 अप्रैल,2022 को होगी।

Patna High Court : देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के स्मारकों की दयनीय हालत के सम्बन्ध में सुनवाई

पटना हाईकोर्ट में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के स्मारकों की दयनीय हालत के सम्बन्ध में सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ को अधिवक्ता विकास कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान बताया गया कि बिहार विद्यापीठ परिसर में सभी गैर कानूनी अतिक्रमण को हटा दिया गया।

कोर्ट को ये भी जानकारी दी गई कि बिहार विद्यापीठ के प्रबंधन का जिम्मा पटना के प्रमंडलीय आयुक्त को सौंपा गया है।कोर्ट को यह भी बताया गया कि जमाबंदी रद्द करने की प्रक्रिया चल रही है।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में डी एम, पटना को पटना स्थित बिहार विद्यापीठ के भूमि के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया था।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि बिहार विद्यापीठ के चारदीवारी के भीतर की भूमि राष्ट्र की धरोहर है, न कि किसी निजी संपत्ति।

कोर्ट ने डी एम, पटना को बिहार विद्यापीठ की भूमि का विस्तृत ब्यौरा देने का निर्देश दिया था।साथ ही यह भी बताने को कहा था कि बिहार विद्यापीठ की भूमि पर कितना अतिक्रमण है और इससे सम्बंधित कितने मामलें अदालतों में सुनवाई के लिए लंबित हैं।

इससे पहले कोर्ट को सीवान के डी एम ने बताया कि डा राजेंद्र प्रसाद के वंशजों ने जीरादेई में स्मारकों के विकास के लिए भूमि दान की है।साथ राज्य सरकार ने भी अपनी ओर से भूमि दान किया था।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता विकास कुमार ने कोर्ट को बताया कि पटना स्थित बांसघाट के सौंदर्यीकरण के लिए ढाई एकड़ भूमि ज़िला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

पिछली सुनवाई में वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने बताया कि कोर्ट ने ए एस आई के कोलकाता स्थित क्षेत्रीय निर्देश और पटना ए एस आई के अधीक्षक को कोर्ट ने जीरादेई जा कर विकास की संभावना पर विचार कर एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने पटना स्थित बिहार विद्यापीठ के प्रबंध समिति के कामकाज पर कोर्ट ने गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए पूछा कि क्यों नहीं इसके प्रबंधन का जिम्मा फिलहाल राज्य सरकार को दे दिया जाए।

साथ ही जीरादेई स्थित रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण के लिए रेलवे और राज्य सरकार ने सहमति दे दी।कोर्ट ने इस सम्बन्ध में रेलवे को आगे की कार्रवाई के लिए दो सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया था।


इस मामलें पर अगली सुनवाई 18 अप्रैल,2022 को होगी।

Patna High Court : बिहार ट्रक ऑनर एसोसिएशन व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई अधूरी रही

पटना हाई कोर्ट में बिहार ट्रक ऑनर एसोसिएशन व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई अधूरी रही। इन मामलों पर चीफ जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ कल भी सुनवाई जारी रखेंगे।

इन याचिकाओं में बिहार सरकार द्वारा 14 चक्कों के ट्रक के जरिये गिट्टी व बालू आदि की ढुलाई पर 16 दिसंबर, 2020 को ही एक अधिसूचना जारी कर प्रतिबंध लगाने के आदेश को challenge किया गया है। दिया गया था।

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राज्य सरकार द्वारा रोक के आदेश के विरुद्ध संबंधित पक्ष ने मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी ये मामला उठाया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 3 जनवरी, 2022 को इसे वापस पटना हाई कोर्ट के समक्ष भेज दिया है। साथ ही साथ सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 8 सप्ताह के भीतर निपटारा करने को भी कहा है।

इन मामलों पर हाई कोर्ट में अब 5 अप्रैल ,2022 को सुनवाई की जाएगी।। इस से पहले कोर्ट ने राज्य सरकार समेत अन्य सम्बंधित सभी पक्षों को अपना अपना पक्ष लिखित तौर पर कोर्ट के समक्ष दायर करने का निर्देश दिया था।