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बिहार की राजनीति में अभी भी नीतीश फैक्टर प्रभावी है

कल दोपहर टीवी देख रहे थे चैनल पर जगदानंद सिंह के पुत्र के जदयू में शामिल होने कि खबर लाइव चल रही थी और ललन सिंह जगता भाई को नसीहत दे रहे थे ठीक उसी समय टीवी स्क्रीन पर बिग ब्रेकिंग फुल प्लेट खबर ब्रेक होता है नालंदा में नीतीश कुमार के कार्यक्रम में धमाका खबर जैसे ही खत्म हुआ एंगर सीधे बोचहा उप चुनाव में मौजूद अपने रिपोर्टर के पास जाता है, और मतदान का हाल जानना चाहता है रिपोर्टर मुजफ्फरपुर से सटे भूमिहार के सबसे बड़ा गाँव खबरा में मौजूद था रिपोर्टर वोटर से सवाल कर रहे हैं विकास के मुद्दे पर वोट दे रहे हैं या बदलाव के मुद्दे पर वोटर अपना नाम और जाति बोलते हुए कहां कि मैं भूमिहार हूं और राजद को वोट देकर आया हूं बहुत हो गया अपमान अब नहीं चलेगा ।        

ठीक उसी समय दूसरे चैनल पर अखाड़ाघाट से रिपोर्टर लाइव पर था जहां राजपूत मतदाता वोट देकर बाहर निकलता है और कहता है कि मैं राजद को वोट दिया हूं बहुत हो गया हम लोग एनडीए का बंधुवा वोटर नहीं है ।                 

ये सब चल ही रहा था कि मैं मुजफ्फरपुर के बीजेपी के एक बड़े यूथ लीडर को फोन लगा दिया और जैसे ही वो फोन उठाया मेरा सीधा सवाल था क्या देख रहे हैं टीवी पर ,भैया सही देख रहे हैं पता नहीं क्यों यूथ में गजब का गुस्सा है हाल यह है कि तमाम भूमिहार बस्ती में यूथ अभिभावक को घर से निकलने ही नहीं दे रहा है कह रहा है लोकसभा में मोदी को वोट देंगे लेकिन आज आप लोग वोट देने मत जाइए ।

रिजल्ट क्या होगा ,भैया नीतीश के वोटर पर हम लोग लड़ाई में बने हैं बात जीत की तो बहुत मुश्किल है हजार दो हजार से जीत जाये तो बहुत बड़ी बात होगी वैसे हारे तो 15 हजार से ऊपर से हारेंगे ।              

भैया ये लोग मुकेश सहनी को सहनी का नेता बना दिया 75 प्रतिशत सहनी रमई राम के साथ चला गया जो बचा वो राजद और भाजपा में गया है पासवान वोट भी राजद के साथ खड़ा रहा है पचपनिया(अति पिछड़ा) वोटर में भी बिखराव दिख रहा है, बात आगे बढ़ी तो मैंने भी कहां विधान पार्षद के वोट में भी अति पिछड़ा वोटर वर्षो बाद राजद की और जाते हुए मैंने भी देखा।

 तभी ख्याल आया कि अति पिछड़ा वोटर का यह ट्रेड सिर्फ तिरहुत और मिथिलाचंल में ही है या फिर अन्य जगह भी है ,फोन काटा और सीधे औरंगाबाद में उसके पास फोन लगा दिया जो विधान परिषद के चुनाव में छह माह से डटा हुआ था उनसे भी मेरा सवाल यही था कि चुनाव तो जीत गये, पैसा भी बेहिसाब खर्च किये लेकिन जरा ये बताये अति पिछड़ा वोटर का क्या हाल था संतोष भाई पैसा लेने के बाद भी यह वोटर राजद को वोट किया है, मैंने पूछा क्या आपको लगता है कि नीतीश का अति पिछड़ा वोटर भाजपा के साथ सहज नहीं है संतोष भाई सौ फिसड्डी जो भी साथ छोड़ा है वो राजद के साथ गया है और ये साफ दिख रहा कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री तेजस्वी ही बनेगा संतोष भाई भाजपा का कार्यकर्ता इतना करप्ट हो गया है कि आप सोच नहीं सकते हैं साला एक दर्जन संगठन गांव गांव में खड़ा कर दिया है और सबको पैसा चाहिए गजब हाल है इन लोगों का राजद का कार्यकर्ता अभी भी सतुआ खाकर काम करता है लेकिन हमारे यहां पगला गये इन लोगों को सम्भालते सम्भालते।

 बात चल ही रही थी कि देखते हैं मेरे नालंदा रिपोर्टर का लगातार फोन आ रहा है इनसे विदा लेते हुए नालंदा रिपोर्टर का फोन रिसीभ किये कैसे हुआ क्या हुआ कौन है वो सब बात होने के बाद मैं धीरे से पुछा पटाखा छोड़ने वाला कौन जाति का है सर बनिया है हद है बाढ़ में भी बनिया और यहां भी बनिया ये बनिया सब को क्या हो गया है सर उसके परिवार का किसी भी राजनीतिक दल से उस तरह का जुड़ाव नहीं है लेकिन प्रतिबद्धता बीजेपी के साथ जरुर है , उस लड़के से बात हुई है क्या जी सर कह रहा है कि नीतीश शासन सही तरीके से नहीं चला रहा है इसको मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ देना चाहिए वैसे ये भी मानसिक रूप से कमजोर ही लगता है।

वैसे जगतानंद सिंह के बेटे का जदयू में शामिल होना,नीतीश कुमार की सभा में पटाखा छोड़ देना और बोचहा चुनाव में एनडीए के परम्परागत वोटर का गुस्सा होना ये सारी बाते भले ही तात्कालिक लग रहा है लेकिन बिहार की राजनीति फिजा बदल रही है ये भी साफ दिख रहा है ।

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