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नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के कार्यशैली पर उठने लगा है सवाल

अडानी गुजरात पोर्ट से ड्रग्स की जो भारी मात्रा पकड़ी गई उसका क्या हुआ? क्या कोई जांच हो रही है?

उस स्मगलिंग में शामिल लोग कौन हैं? इतना बड़ा काम करने वाले क्या सिर्फ साधारण लोग हैं? क्या कुछ विशिष्ट लोग भी शामिल हैं? क्या उनका संबंध पोर्ट के मालिक से संबंधित लोगों से भी है? क्या उनका संबंध पोर्ट के मालिक और अडानी से भी है? क्या इतनी बड़ी स्मगलिंग का संबंध केंद्र के सत्ताधारियों से भी है? इन सारे प्रश्नों को सिर्फ एक समाचार से दबा दिया गया कि एक मुसलमान खान का मुसलमान बेटा आर्यन, एक क्रूज़ पर जो मुंबई से गोवा जा रहा था ड्रग्स का आनंद लेते पकड़ा गया।

जिनके पास ड्रक्स मिले वे गिरफ्तार कर लिए गए। इस बेटे के पास ड्रग्स की थोड़ी बहुत मात्रा भी नहीं मिली, फिर भी इसकी गिरफ्तारी कर ली गई। गिरफ्तारी के कई दिनों बाद नए आरोप लगाए गए। आर्यन का संबंध अंतरराष्ट्रीय गिरोह के साथ है जो गिरोह, हो सकता है ड्रग्स का व्यापार करता हो। ऐसी काल्पनिक संभावना को आधार बनाकर आर्यन को गिरफ्तारी में रखा जा रहा है।

गुजरात में अडानी पोर्ट पर जो काला व्यापार रंगे हाथों पकड़ा गया उसकी जांच पर कोई चर्चा नहीं हो रही? क्यों? क्या केंद्रीय सत्ता का इसमें कुछ हाथ है? क्या इसलिए इस मामले की जांच को जनता से छुपाया जा रहा है?

लेखक –कुमार शुभमूर्ती ( जेपी आंदोलन के नायक रहे है )

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