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पंचायत चुनाव में सम्पति के ब्योरा पड़ भी आयोग की रहेंगी नजर

राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष सम्पन्न हो इसको लेकर कई तरह के सुधार किये हैं साथ ही उन तमाम कानूनों को लागू करने की छूट चुनाव कार्यों से जुड़े अधिकारियों को दिया है जिससे चुनाव निष्पक्ष सम्पन्न हो सके ।
इसके लिए इस बार आयोग ने चुनाव में नामंकन के दौरान जो भी प्रत्याशी अपने सम्पति का ब्योरा सही नहीं देंगे और वो चुनाव जीत जाते हैं तो उनकी सदस्याता रद्द कर दी जायेंगी साथ ही उन पर अपराधिक मामला भी दर्ज किया जायेंगा ।

सरकार ऐसे लोगों पर लोक प्रहरी के माध्यम से कार्रवाई करेगी।जो भी इस बार चुनाव में नामांकन का पर्चा दाखिल करेंगे, उन्हें संपत्ति की घोषणा करनी होगी। अगर गलत संपत्ति की घोषणा की तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। गलत संपत्ति की घोषणा करने पर सरकार नियम 18 (5) के तहत कार्रवाई करेगी। ऐसे पंचायत प्रतिनिधियों की बर्खास्तगी भी होगी।

12 सितंबर को लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक व पूर्व दिवंगत केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पहली बरसी पटना में मनाई जाएगी और बरसी के बहाने चिराग बड़ी राजनैतिक लकीर खींचने की तैयारी में लगा है आज इसको लेकर बिहार के नेता प्रतिपंक्ष तेजस्वी यादव और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी से मुलाकात कर आने का निमंत्रण दिया है वही इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत शीर्ष राष्ट्रीय नेताओं को भी न्योता भेजा है। हलाकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निमंत्रण को लेकर जब चिराग से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अभी तक मिलने का समय नहीं मिला है ।
वही निमंत्रण कार्ड पर चिराग ने पूरे पासवान परिवार का नाम छपवाया है।कार्ड के एक भाग में शोकाकुल परिवार के तौर पर सबसे पहले केंद्रीय मंत्री और अपने चाचा पशुपति कुमार पारस, चचेरे भाई कृष्ण राज, चचेरे भाई व समस्तीपुर सांसद सह प्रदेश अध्यक्ष (पारस गुट वाली लोजपा) प्रिंस राज और यश राज का नाम लिखा हुआ है। कार्ड के दूसरे भाग में विनीत के तौर पर चिराग पासवान का नाम सांसद सह राष्ट्रीय अध्यक्ष लोजपा लिखा हुआ है।

रामविलास पासवान की पहली बरसी मनायी जायेंगी पटना तैयारी जोड़ो पर

लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) नेता चिराग पासवान अपने पिता व दलित नेता रामविलास पासवान की पहली बरसी पर 12 सितंबर को पटना में बड़े आयोजन करने की तैयारी में हैं। उन्होंने इस आयोजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत शीर्ष राष्ट्रीय नेताओं को न्योता भेजा है।

12 सितंबर को लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक व पूर्व दिवंगत केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पहली बरसी पटना में मनाई जाएगी और बरसी के बहाने चिराग बड़ी राजनैतिक लकीर खींचने की तैयारी में लगा है आज इसको लेकर बिहार के नेता प्रतिपंक्ष तेजस्वी यादव और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी से मुलाकात कर आने का निमंत्रण दिया है वही इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत शीर्ष राष्ट्रीय नेताओं को भी न्योता भेजा है। हलाकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निमंत्रण को लेकर जब चिराग से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अभी तक मिलने का समय नहीं मिला है ।

वही निमंत्रण कार्ड पर चिराग ने पूरे पासवान परिवार का नाम छपवाया है।कार्ड के एक भाग में शोकाकुल परिवार के तौर पर सबसे पहले केंद्रीय मंत्री और अपने चाचा पशुपति कुमार पारस, चचेरे भाई कृष्ण राज, चचेरे भाई व समस्तीपुर सांसद सह प्रदेश अध्यक्ष (पारस गुट वाली लोजपा) प्रिंस राज और यश राज का नाम लिखा हुआ है। कार्ड के दूसरे भाग में विनीत के तौर पर चिराग पासवान का नाम सांसद सह राष्ट्रीय अध्यक्ष लोजपा लिखा हुआ है।

कांग्रेस के कद्दावर नेता सदानंद सिंह नहीं रहे

कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री सदानंद सिंह का आज निधन हो गया है। पटना में खगौल के पास एक निजी अस्पताल क्यूरिस हॉस्पिटल में उन्होंने अंतिम सांसें ली। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। लीवर सिरोसिस की बीमारी से परेशान थे। दिल्ली के प्रसिद्ध डॉक्टर एसके सरीन से लीवर का इलाज कराया था। उसके बाद पटना लौटे, लेकिन तकलीफ बढ़ी तो फिर अस्पताल में एडमिट होना पड़ा। खगौल के पास क्यूरिस हॉस्पिटल में लगभग दो माह से उनका इलाज चल रहा था। लीवर सिरोसिस जब बढ़ने लगा तो किडनी में इंफेक्शन हो गाया। इसके बाद मंगलवार को उनका डायलिसिस किया गया। लेकिन उनके शरीर ने डायलिसिस बर्दाश्त नहीं किया और बुधवार की सुबह नौ बजकर नौ मिनट पर उनका निधन हो गया। उन्हें एक पुत्र और तीन पुत्रियां हैं।

राज्यपाल ,सीएम नीतीश कुमाप और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी ने भी जताया शोक
सीएम नीतीश कुमार ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सदानंद सिंह के निधन पर गहरा शोक जताया है। उन्होंने कहा है कि वे एक अनुभवी राजनेता थे। क्षेत्र के लोगों में भी काफी लोकप्रिय थे। 2000 से 2005 तक विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे थे। उनसे मेरा व्यक्तिगत संबंध था। उनके निधन से मर्माहत हूं। इधर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सदानंद सिंह जी के निधन पर गहरी शोक-संवेदना व्यक्त करता हूं। उनका लंबा सामाजिक-राजनीतिक अनुभव रहा। वो एक कुशल राजनेता थे। ईश्वर से उनकी आत्मा को शांति तथा शोक संतप्त परिजनों को दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं।

पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने भी शोक जताया है। उन्होंने कहा कि सदानंद बाबू की कमी हमेलंबा है राजनीतिक इतिहास, नौ बार रहे थे विधायक
सदानंद सिंह का लंबा राजनीतिक सफर रहा है। वह पहली बार कहलगांव सीट से 1969 में जीत कर विधायक बने थे। विधानसभा अध्यक्ष के अलावा बिहार सरकार में कई विभागों के मंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वह भागलपुर की कहलगांव विधानसभा सीट से नौ बार विधायक भी रहे थे।

लड़कियां अभी भी सुरक्षित नहीं है बिहार में

तमाशबीन हूं मैं बात 2008 की है सुशासन उस वक्त लोगों के जुबान पर था उस वक्त मैं ईटीवी सा जुड़ा हुआ था और आंफिस एग्जीबिशन रोड स्थित शाही भवन में था । यही कोई रात के आठ बज रहे होंगे ।हमलोगों के साथ काम करने वाले एक सहयोगी के शादी का रिसेप्शन था आंफिस लगभग खाली हो गया था और सबसे विलम्भ से मैं ही आंफिस से निकला था ।जैसे ही गांधी मैदान से सामने स्थित रामगुलाम चौक से बाये मौर्या होटल की और मुड़े सामने देखते हैं बीच सड़क पर एक गांड़ी खड़ी है और एक लड़की को जबरन सड़क पर से उठा कर गांड़ी में बिठा रहा है तब तक मैं वहां पहुंच गया लड़की को तो बचा लिये लेकिन मेरे साथ जो हुआ उसकी कई बार चर्चा कर चुके हैं ।

लड़की को उठाने वालों में एक जंगलराज में चर्चित साले का साला था एक उस समय के जदयू के कद्दावर नेता और मंत्री के साढ़ू का बेटा था और तीसरा एक पुलिस अधिकारी का बेटा था इस घटना की चर्चा मेैं इसलिए कर रहा हूं कि लड़कियों के लेकर जंगलराज हो या फिर कानून की राज वाली सरकार हो लड़कियों को लेकर अपराधी प्रवृति वाले लोगों के नजरिया में कोई फर्क नहीं आया जैसे पहले होता था वैसे उस समय भी हो रहा था।

आज भी बिहार में अक्सर खबर आती है कि बेटी को छेड़खानी से रोकने पर बाप को गोली मार दिया भाई को पीट पीट कर अधमरा कर दिया मतलब आज भी राजधानी पटना में बेटी ,बहन और पत्नी को लेकर चलना सुरक्षित नहीं है कब कहां कोई छींटाकशी कर दे, छेड़छाड़ कर दे कहना मुश्किल है यह प्रवृति लड़कियों को लेकर सिर्फ शहर में ही नहीं है ,गांव में भी यही स्थिति है इस तरह की खबरे गांव से भी आती रहती है ।

आज भी किसी की बेटी और बहन घर से बाहर निकलती है तो जब तक वो वापस नहीं लौटती है पूरा परिवार तनाव में रहता है ।इसी तरह की एक घटना राजधानी पटना से सटे मनेर से आ रही है जहां ब्यापुर राजकीय मध्यविधालय में पढ़ने वाली छात्रा और शिक्षिका स्कूल आना बंद कर दी है ।

वजह आये दिन स्कूल जाने के दौरान आसपास के अपराधिक प्रवृति के लड़के स्कूल की छात्रा और शिक्षिका के साथ छेड़छाड़ करता रहता है स्कूल के प्राचार्य राज कुमार ने विभाग और थाने को लिख कर शिकायत किया है फिर भी कारवाई तो दूर अब ये गुंडे प्राचार्य को ही जान से मारने की धमकी दे रहा है जबकि इस स्कूल में 690 छात्राएं और 9शिक्षिकाएं है कार्यरत है फिर भी जब लड़कियां स्कूल के लिए निकलती है आस पास के लड़के सरेआम छेड़खानी करता है और शिक्षिका द्वारा आपत्ति करने पर शिक्षिका के साथ गाली गलौज और छेड़छाड़ करने से भी परहेज नहीं करता है ।

इस मानसिकता को क्या कहा कहेंगे, ये कोई सिर्फ मनेर की ही घटना नहीं है इस तरह की घटनाएं सरेआम बिहार के स्कूलों में होता रहता है ।हमें लगता है वक्त आ गया है समाज और कानून के रखवाले एक साथ मिल बैठ कर इसका समाधान निकाले ।नहीं तो फिर मुश्किले बढ़ेगी क्यों कि लड़किया भी अब फाइट करने लगी है ऐसे में बड़ी घटना घट सकती है ।

संभार –संतोष सिंह के वाल से

हाईकोर्ट से सरकार को फिर लगा झटका सृजन मामले में बैक से वसूली पर लगाया रोक

पटना हाई कोर्ट ने सृजन घोटाला से जुड़े मामले में सर्टिफिकेट केस के जरिये पैसे की वसूली की कार्यवाही पर यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया है। जस्टिस मोहित कुमार शाह ने बैंक ऑफ बरोडा की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया।

सृजन घोटाला में कथित तौर पर संलिप्त भागलपुर शाखा के बैंक ऑफ बड़ौदा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक से राज्य सरकार की 189 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि को सर्टिफिकेट केस चला कर वसूली करने की कार्यवाही शुरू की थी। पर फिलहाल यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश देते हुए जिला प्रशासन को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।

याचिकाकर्ता बैंक के वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने बताया कि सृजन घोटाले में जो पैसा है, जिला प्रशासन ने पैसा बसूली के लिए सर्टिफिकेट केस किया है। इसमें बैंक का कहना है कि ये सर्टिफिकेट केस नहीं हो सकता है, क्योंकि कानून में लोक मांग नहीं है। अभी सृजन घोटाले का मुकदमा चल रहा है, कोई फैसला नहीं हुआ है, इसलिए बैंक से पैसा वसूला नहीं किया जा सकता है।श्री शाही ने सुनवाई के दौरान सर्टिफिकेट ऑफिसर के क्षेत्राधिकार पर भी सवाल उठाया।

राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए सरकारी अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने नीलाम वाद के आदेश के विरुद्ध अपील दायर किये बगैर ही सीधे हाई कोर्ट में मामला दायर करने पर आपत्ति जताई।

वायरल बुखार ने बिहार के बच्चों की बढ़ाई परेशानी 3हजार से अधिक बच्चे भर्ती है अस्पताल में

कोरोना के तीसरी लहर की आशंका के बीच बिहार में वायरल बुखार ने पूरी सरकार की नींद हराम कर दी है अभी तक जो सूचनायें आ रही उसके अनुसार पीएमसीएच ,आईजीएमएस और एम्स पटना में कोरोना के सम्भावित खतरे को देखते हुए बच्चों के लिए जीतने भी बेड लगाये गये थे वो सारे फुल हो चुके हैं यही स्थिति SKMCH मुजफ्फरपुर और डीएमसीएच दरभंगा का है अभी तक सरकारी अस्पतालओं की ही बात करे तो 3000 हजार से अधिक बच्चों का राज्य के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है ।

एनएमसीएच के शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गोपाल शंकर साहनी ने बताया कि वायरल बरोंकोलिस्ट बीमारी में श्वांस नली में सूजन हो जाता है। यह स्थिति जुकाम से शुरू होती है। सांस नली में सूजन होने से सांस फूलना, खांसी और सांस लेने में तकलीफ होती है। यह एक सप्ताह से एक महीने तक रह सकता है। अगर सही से और समय पर इलाज नहीं हुआ तो यह गंभीर रूप ले लेता है अभी तक पांच सौ से अधिक बच्चे भर्ती हो चुके हैं सभी में इसी तरह के लक्षण पाये गये हैं आज सिविल सर्जन डॉ. विनय शर्मा के नेतृत्व ने एक टीम SKMCH में निरीक्षण करने पहुंची। टीम में पटना के भी स्वास्थ्य विभाग के एक वरीय अधिकारी हैं। SKMCH अधीक्षक डॉ. बीएस झा के साथ बैठक हुई। इसके बाद पीकू वार्ड निरीक्षण किया। सिविल सर्जन ने अधीक्षक से पूरी रिपोर्ट मांगी है। कहा है जिस इलाके के बच्चे अधिक प्रभावित होंगे। वहां पर विशेष निगरानी की जाएगी और जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

एम्स के शिशुरोग विशेषज्ञ डां लोकेस तिवारी की माने तो अभी तक अधिकांश बच्चों में वायरल बुखार के ही लक्षण देखने को मिल रहा है फिर भी सतर्क रहने कि जरुरत है क्यों कि कोरोना में भी कुछ ऐसा ही लक्षण मरीजों में देखा जाता है हलाकि अभी तक एम्स में एक बच्चे में कोरोना पाँजिटिभ पाया गया है और दो बच्चों में पोस्ट कोरोना के लक्षण दिखे गये हैं ।

हाईकोर्ट से सरकार को बड़ा झटका ,राज्यपाल कोटे से मनोनयन मामले में कोर्ट कर सकती है सुनवाई

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में राज्यपाल कोटा से मनोनीत किये गए 12 विधान पार्षदों के मनोनयन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि कोर्ट इन मामलों की सुनवाई कर सकता हैं। वरीय अधिवक्ता वसंत चौधरी की याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि मनोनीत किये गए ये विधान पार्षद को राजनीतिज्ञों को समाजसेवी माना जाए या नहीं,इस मामले पर विचार करने की जरूरत नहीं। याचिकाकर्ता अधिवक्ता वसंत चौधरी का कहना था कि इस तरह के मामले में भारत का संविधान के प्रावधानों के तहत साहित्य, कलाकार, वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता व सहकारिता आंदोलन से जुड़े हुए विशिष्ट लोगों के मनोनयन हो सकता है।

जिन बारह लोगों का विधान पार्षद के रूप में मनोनयन किया गया है ,वे बहुमत बढ़ाने और जो लोग विधान सभा में चुन कर नहीं आ सके हैं, उन्हें विधान परिषद में इस तरह से लाया गया है। यह संविधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि इनमें कोई भी न तो सामाजिक कार्यकर्ता है, न ही साहित्य से जुड़ा व्यक्ति या न ही कोई वैज्ञानिक उपलब्धियां हैं। उन्होंने दलील देते हुए कहा था कि एक सामाजिक कार्यकर्ता को काम का अनुभव, व्यवहारिक ज्ञान और विशिष्ट होना चाहिए।लेकिन इन सब बातों पर गौर नहीं किया गया है।

श्री चौधरी ने कोर्ट को बताया कि इनमें कोई पार्टी का अधिकारी है ,तो कोई कहीं का अध्यक्ष। पिछ्ली सुनवाई मे कोर्ट ने राज्य सरकार के महाधिवक्ता से पूछा कि क्या मनोनीत किये गए एम एल सी में राज्य के मंत्री पद पर है क्या।

विधान पार्षद के रूप में अशोक चौधरी, जनक राम, उपेंद्र कुशवाहा, डॉ राम वचन राय, संजय कुमार सिंह, ललन कुमार सर्राफ, डॉ राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, संजय सिंह, देवेश कुमार, प्रमोद कुमार, घनश्याम ठाकुर और निवेदिता सिंह को राज्यपाल के कोटे से मनोनयन किया गया।
अब इस मामले पर अगली सुनवाई 13 सितंबर को की जाएगी।

सृजन घोटाले मामले में हुआ बड़ा खुलासा, कई आईएएस अधिकारियों का हस्ताक्षर पाया गया सही

सृजन घोटाले मामले में हुआ बड़ा खुलासा
कई आईएएस अधिकारियों का हस्ताक्षर पाया गया सही
फोरेंसिक रिपोर्ट ने भागलपुर के तत्तकालीन डीएम के दावे को किया खारिज
फर्जी हस्ताक्षर के दावे को किया खारिज
कई आईएएस अधिकारियों का हस्ताक्षर पाया गया सही
ऐसे आईएएस अधिकारियों पर कारवाई तय

सृजन घोटाले मामले में पहली बार सीबीआई के शिकंजे में बड़ी मछली फंसी है ।जी है कल तक भागलपुर में तैनात आईएएस अधिकारी इस आधार पर बच रहे थे कि सृजन को जो भुगतान हुआ है उस चेक पर मेरा हस्ताक्षर नहीं है ।लेकिन फोरेंसिक जांच में ये बाते सामने आयी है कि भागलपुर में पदस्थापित कई डीएम के हस्ताक्षर और चेक पर दर्ज हस्ताक्षर एक है ।ऐसी स्थिति में सीबीआई कभी भी उक्त आईएएस अधिकारी को गिरफ्तार कर सकती हलाकि सीबीआई फिलहाल उक्त अधिकारी को पुछताछ के लिए बुलाना चाह रही है।

ऐसे अधिकारियों जिनका हस्ताक्षर चेक के हस्ताक्षर से मिल रहा वैसे अधिकारियों ने 28 करोड़ ,56 लाख और 27 लाख रुपये के चेक पर हस्ताक्षर किए हैं। देश की चार बड़ी फोरेंसिक लैबोरेटरीज में उनके हस्ताक्षर के नमूने की जांच कराई गई। जिसमें हस्ताक्षर सही पाया गया।

उतार-चढ़ाव के बीच बाजार लाल निशान में बंद; सेंसेक्स 58279 पर, निफ्टी 17,400 से नीचे। भारती एयरटेल टॉप गेनर

बीएसई सेंसेक्स 17 अंक टूटकर 58,279 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 15.7 अंक की गिरावट के साथ 17,362 पर बंद हुआ। सेक्टरों में आईटी, रियल्टी और तेल एवं गैस सूचकांक 1-2 फीसदी नीचे , जबकि एफएमसीजी नामों में कुछ खरीदारी देखी गयी। बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में मामूली गिरावट, दिन के सपाट अंत के लिए सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 ने समापन घंटे में सभी लाभ छोड़ दिए। बैंक निफ्टी लाल निशान में बंद हुआ।

दिन के दौरान, सेंसेक्स 256 अंक बढ़कर 58,553.07 के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया और निफ्टी 50 इंडेक्स 17,436.50 के रिकॉर्ड उच्च स्तर को छू गया।

सेंसेक्स में शीर्ष पर रहने वाले के रूप में भारती एयरटेल 2.79% ऊपर था, इसके बाद एचडीएफसी, इंडसइंड बैंक और आईटीसी का स्थान रहा। टेक महिंद्रा 1.64% नीचे था। इसके बाद सन फार्मा, एक्सिस बैंक और एचसीएल टेक्नोलॉजीज का स्थान रहा। भारत VIX मंगलवार को 1.39% फिसल गया।

सेंसेक्स के 30 में से 12 शेयर्स तेजी के साथ जबकि 18 शेयर्स कमजोरी के साथ बंद हुए। BSE पर कारोबार के दौरान 201 शेयर्स 52 हफ्ते के ऊपरी स्तर पर और 24 शेयर्स 52 हफ्ते के निचले स्तर पर कारोबार करते दिखे।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

पंचायत चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रलोभन देने वाले प्रत्याशियों पर होगी कड़ी कारवाई

पंचायत आम निर्वाचन 2021 के दौरान मतदाताओं को लुभाने के मामले आयोग इस बार काफी सख्त है चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों द्वारा मतदाताओं को लुभाने के लिए राशि, कपड़ा, शराब जैसी सामग्री वितरण की संभावना को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने हर प्रखंड में उड़नदस्‍ता दल का गठन करने का निर्देश दिया है जिसकी मॉनिटरिंग एसपी और डीएम खुद करेंगे और उड़नदस्ता दल के नोडल अधिकारी के रूप में उपविकास आयुक्त और राज्य कर संयुक्त आयुक्त होगे। इसके साथ ही चरणवार दंडाधिकारी व पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है।

उड़नदस्ता दल का प्रमुख कार्य अपने क्षेत्र के अंतर्गत होने वाले गैर कानूनी गतिविधियों पर पैनी नजर रखना और उसे नियंत्रित करना है। गैरकानूनी गतिविधि यथा शराब वितरण, अवैध नगदी अथवा वस्तु जिससे मतदाता को पर प्रलोभित किया जा सके
उसके संबंध में सूचना प्राप्त होते ही पुलिस अधिकारी के साथ समन्वय स्थापित करते हुए अविलंब छापामारी करेंगे। साथ ही निर्वाचन नियमों के सुसंगत धाराओं के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई करना सुनिश्चित करेंगे।उड़नदस्ता दल सभी शिकायत योग्य निर्वाचन एवं आदर्श आचार संहिता से संबंधित मामलों पर तुरंत कार्रवाई करेंगे तथा पंचनामा दस्तावेज आदि भी तैयार करेंगे। यदि नगदी, उपहार, वस्तु, शराब या मुफ्त में भोजन के वितरण, निर्वाचकों को धमकी देने या डराने के बारे में या हथियारों, गोला बारूद, असामाजिक तत्वों की आवाजाही के बारे में शिकायत प्राप्त हो और उडऩदस्ते का घटनास्थल पर तत्काल पहुंच जाना संभव नहीं हो तो सूचना नजदीक के स्टैटिक या स्थानीय थानाध्यक्ष को देना सुनिश्चित करेंगे। अवैध नगदी का आदान-प्रदान या शराब का वितरण या अन्य वस्तुएं जिसे वोटरों को प्रभावित किया जा सके का पता लगाएंगे एवं विधि सम्मत आवश्यक कार्रवाई ससमय करना सुनिश्चित करेंगे।

राज्यपाल कोटा से मनोनयन को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर

हाल ही में राज्य में राज्यपाल कोटा से मनोनीत किये गए 12 एम एल सी के मनोनयन को चुनौती देने वाली याचिका पर पटना हाई कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। याचिका पटना हाई कोर्ट के वरीय अधिवक्ता बसंत कुमार चौधरी द्वारा दायर की गई है। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

इस मामले में याचिकाकर्ता का कहना था कि इस तरह के मामले में भारत का संविधान साहित्य, कलाकार, वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता व कॉपरेटिव मूवमेंट से जुड़े हुए जैसे खास तरह के लोगों को मनोनीत करने की अनुमति देता हैं।

जिन 12 लोगों को एम एल सी मनोनीत किया गया है, वह बहुमत बढ़ाने और जो लोग एम एल ए नहीं चुन कर नहीं आये हैं, उन्हें एडजस्ट करने के लिए मनोनीत किया गया है ,जो संविधान के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता का आगे कहना था कि इनमें कोई भी न तो सामाजिक कार्यकर्ता है और न ही साहित्य से जुड़ा व्यक्ति या फिर वैज्ञानिक और कलाकार। उनका कहना था कि एक सामाजिक कार्यकर्ता को काम का अनुभव, व्यवहारिक ज्ञान और एक्सपर्टीज होना चाहिए।
इन सब चीजों को नहीं देखा गया है।

खण्डपीठ ने राज्य सरकार के महाधिवक्ता से पूछा कि क्या मनोनीत किये गए एम एल सी में राज्य के मंत्री भी है ? उल्लेखनीय है कि राज्यपाल कोटे से अशोक चौधरी, जनक राम, उपेंद्र कुशवाहा, डॉ राम वचन राय, संजय कुमार सिंह, ललन कुमार सर्राफ, डॉ राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, संजय सिंह, देवेश कुमार, प्रमोद कुमार, घनश्याम ठाकुर और निवेदिता सिंह को एम एल सी मनोनीत किया गया था। इस मामले पर कल भी सुनवाई जारी रहेगी।

लड़के और लड़कियों के बीच रिश्तों को लेकर नये तरीके से सोचने कि जरुरत है

बात कोई तीन माह पूरानी है शाम के समय मैं और रंजू आपस में कुछ बात कर रहे थे उसी दौरान रंजू के मोबाइल पर फोन आया बातचीत से समझ में आ रहा था कि रंजू के कोई भाई साहब का फोन है बात चल ही रही थी कि रंजू कहती हैं लीजिए ना भैया यही सामने हैं मेहमान ।

प्रणाम पाती के बाद बात शुरु हुई तो पता चला पटना में कोई लड़की इनके बेटा पर शादी की नियत से बहला फुसला कर रेप करने का आरोप लगाते हुए केस किया है लड़का भारतीय सेना में है और छह माह पहले बहन के घर शादी में गया था वही उस लड़की से दोस्ती हो गयी फिर दोनों पटना के किसी होटल में दो तीन बार रुका भी है ।बातचीत चल ही रहा था कि उन्होंने कहा कि लीजिए ना रोशन पास ही में है,रोशन वे से मेरा सीधा सवाल था होटल में उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध भी बनाये थे जी फूफा जी लड़की फंसा करके ऐसा करवाई, अच्छा तुम बच्चा थे खैर शादी कर लो और तुम्हारे पास कोई विकल्प नहीं है।

खैर एक माह पहले ससुराल गये तो लड़का और उसके पिता जी मिलने आये और कहां मेहमान सब कुछ ठीक हो गया दोनों की शादी तय कर दिये हैं ।ये कोई एक मामला नहीं है रोजाना इस तरह के मामले हमलोगों के बीच आते रहता है कल सीएम के जनता दरबार में भी इस तरह के एक दर्जन से अधिक मामले आये जिसमें डीएसपी से लेकर दोरागा तक पर लड़कियों ने ये आरोप लगाया कि शादी का भरोसा दिला कर शारीरिक सम्बन्ध बनाया और अब शादी करने से इनकार कर रहा है।

इसी तरह का एक मामला सीएम के सामने आया जिसमें लां की छात्रा ने नीतीश कुमार के सामने आपबीती सुनाते हुए कहा कि वह 5 महीनों से इंसाफ के लिए दर-दर भटक रही है, लेकिन शिकायत सुनने के बावजूद आरोपी DSP अमन कुमार के ऊपर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।जब इसकी शिकायत आपके डीजीपी से किये तो डीजीपी कहते हैं लड़कियां पहले अपनी अदाओं से लड़कों को फंसाती हैं, फिर उनके ऊपर आरोप लगाती हैं।

हलाकि डीजीपी का इस तरह से जबाव देना कोई अचरज की बात नहीं है सवाल मानसिकता का है भले ही लड़कियां सभी फिल्ड में आगे बढ़ रही है लेकिन लड़कियों को लेकर समाज का नजरिया अभी भी नहीं बदला है, फिर जिस तरीके से नौकरी और पढ़ाई के लिए लड़कियां घर से बाहर निकल रही है ऐसे में इस तरह के रिश्ते की गुंजाइश हजार गुना बढ़ गयी है।

क्यों कि आज के तारीख में भी कामकाजी महिला हो या फिर लड़कियां घर से बाहर वो अकेली रह रही है तकनीक का जवाना है हर किसी के हाथ में एंड्रॉयड फोन है जिस वजह से आपस में सम्पर्क करने में कोई अरचन भी नहीं है ।वही परिवेश का तानाबान आज भी ऐसा है कि बाहर रहने वाली लड़कियों को हमेशा एक पुरुष साथी की जरुरत महसूस होती रहती है और यही समस्या की वजह है ।

सरकारी नौकरियों में सरकार ने 50 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण दे रही है लेकिन थाने लेकर डीजीपी के आंफिस तक स्कूल से लेकर शिक्षा विभाग के दफ्तर तक कही भी महिलाओं के लिए सही से एक वासरुम भी उपलब्ध नहीं है।

दरोगा से लेकर सिपाही तक में महिलाओं की संख्या हर थाने में लगभग आधी हो गयी है लेकिन आज भी उसके रहने कि व्यवस्था सही नहीं है ।एक बार मुझे सासाराम पुलिस लाइन जाने का मौका मिला देखते हैं एक बेड पर एक महिला दो बच्चों को लेकर किसी तरह से सोई है पता चला यह महिला महिला पुलिस की सास है रात में सास पुतहू और दोनों बच्चे को लेकर बारी बारी से सोती है ये किसी एक जिले का हाल नहीं है बिहार के अधिकांश जिलों का यही हाल है ऐसे में सहयोगी पुलिसकर्मियों से रिश्ता बनना स्वभाविक है लेकिन इसको लेकर ना तो परिवार ना ही समाज और ना ही सिस्टम तैयार है ।

ऐसे में फिलहाल इस समस्या को कोई हल निकलता दिख नहीं रहा है इस स्थिति में लड़कियों को इस तरह के रिश्ते को लेकर नये तरीके से सोचने कि जरुरत है क्यों कि आये दिन लड़के और लड़कियों के बीच रिश्तों को लेकर जो कानून बन रहे हैं या फिर सुप्रीम कोर्ट का समय समय पर जो जजमेंट आ रहा है उसमें अब लड़कियों को पहले जैसी कानूनी सुरक्षा प्राप्त नहीं है । वही समाज में भी पहले जैसी ताकत नहीं है वो अपने तरीके से इन चीजों को अभी भी देख रहाी है ऐसे में फिलहाल इस तरह की समस्याओं का क्या समाधान हो सकता है इस पर सोचने कि जरुरत है ।

पटना हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट समा सिन्हा का कहना है कि आर्थिक समाजिक और मानसिक से रुप लड़कियों को मजबूत होने कि जरुरत है तभी आप स्वंतत्र निर्णय मजबूती के साथ ले सकते हैं ।वही लड़के और लड़कियों के रिश्तों को लेकर जो नये कानून बने हैं उस वजह से समाजिक सोच और कानूनी प्रावधानों के बीच दूरी बढ़ गयी है, ऐसे में आपको कानूनी प्रावधानों से पहले जैसे संरक्षण नहीं मिल सकता है, इस स्थिति में रिश्ते बनाने को लेकर नजरिया बदलने कि जरुरत है ।

वीर कुंवर सिंह के राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर लक्ष्मी कुमारी का मानना है कि महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार की और से जो पहल किया गया है उसका सकारात्मक असर आने वाले समय दिखेगा।

लेकिन फिलहाल सरकार को वर्किंग वुमन को लेकर सपोर्ट सिस्टम बनाने कि जरुरत है जैसे वर्किंग वुमन होस्टल हर जिला मुख्यालय में होनी चाहिए बच्चों के पढ़ाई के लिए बेहतर विकल्प होना चाहिए (क्रेच)
साथ ही स्वास्थ्य को लेकर बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए।इससे बहुत सारी समस्याओं का समाधान निकल सकता है साथ ही इस तरह के सुधार से सिस्टम और पुरुष मानसिकता के प्रभाव से महिलाएँ बाहर आ सकती है।

20 वर्षो से पब्लिक फिल्ड में लगातार काम कर रही मधुमिता का कहना है कि लड़कियों में शॉर्ट टर्म में कुछ पाने कि जो लालसा बढ़ रही है समस्या की एक बड़ी वजह यही है इससे बाहर निकलने कि जरुरत है साथ ही लड़कियां मानसिक रुप से मजबूत कैसे हो इस पर सोचने कि जरुरत है ।

संभार–संतोष सिंह के वाल से

जनता के दरबार में सीएम पुलिस और भूमि विवाद मामले की हुई सुनवाई

‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम में शामिल हुये मुख्यमंत्री, 195 आवेदकों के मामलों की सुनवाई कर अधिकारियों को दिये आवश्यक दिशा-निर्देश ।

पटना, 06 सितम्बर 2021:- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार आज 4, देशरत्न मार्ग स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय परिसर में आयोजित ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम में शामिल हुए। जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे 195 लोगों की समस्याओं को सुना और संबंधित विभागों के अधिकारियों को समाधान के लिए समुचित कार्रवाई के निर्देश दिए।

आज ‘‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यकम‘‘ में सामान्य प्रशासन विभाग, गृह विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, निगरानी विभाग, खान एवं भूतत्व विभाग के मामलों पर सुनवाई हुयी।

मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने जनता के दरबार में हाजिर होकर लोगों की शिकायतें सुनीं। मुंगेर से आए एक फरियादी ने कहा कि अपराधियों के आतंक से वो परेशान हैं। आगे उन्होंने कहा कि हमने दुकान लूट करने वालों पर मामला दर्ज कराया तो बदमाशों ने दो बार गोली चला दी, मेरे बेटे को पीटा गया। सी0आई0डी0 में मामला चल रहा है। इस संदर्भ में हमने ए0डी0जी0 सी0आई0डी0 से गुहार लगायी तब जाकर जान बची। इस तरह कितना दिन काम चलेगा, हमें न्याय चाहिए। शिकायत सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने आवेदक को पुलिस महानिदेाक के पास भेजा और कहा कि पूरे मामले को देखकर उचित कदम उठाया जाए।

वाल्मीकिनगर से आयी पीड़ित महिला ने जदयू के विधायक श्री रिंकू सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसके पति की हत्या के मामले में स्थानीय विधायक श्री रिंकू सिंह को आरोपित किया गया था लेकिन पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। इस शिकायत के बाद मुख्यमंत्री ने पीड़ित महिला को डी0जी0पी0 के पास भेजकर जांच कराने को कहा।

भगवानपुर, बेगूसराय के श्री अरुण कुमार सिंह ने अपनी शिकायत में कहा कि गैरमजरुआ जमीन पर दबंगों ने अतिक्रमण कर सार्वजनिक कुआं को भर दिया और उस पर कब्जा कर लिया है। वहीं डिहरी, रोहतास के श्री कुमार महेंद्र प्रताप ने उनके निजी जमीन पर असामाजिक तत्वों द्वारा कब्जा करने के संबंध में शिकायत की। ािकायत सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने समुचित कार्रवाई करने का निर्देा दिया।

एक महिला मुखिया ने मुख्यमंत्री से शिकायत करते हुए कहा कि उनके पति की हत्या कर दी गई, शिकायत करने के बाद भी थानेदार आरोपी को बचाने में लगे हुए हैं। अभियुक्त की गिरफ्तारी भी हुई और 17 दिनों में बेल भी मिल गया। अब वह आरोपी लगातार धमकी दे रहा है। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव गृह एवं डी0जी0पी0 को इस मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

सीवान के सिसवां के श्री गौतम यादव ने पुलिस अधीक्षक और थाना प्रभारी के खिलाफ शिकायत करते हुए कहा कि हमारे द्वारा शराब विक्रेताओं के खिलाफ किए गए लिखित गोपनीय सूचना को व्हाट्सअप पर इनलोगों ने सार्वजनिक कर दी। मुख्यमंत्री ने इस पर संज्ञान लेते हुए संबंधित विभाग को शीघ्र कार्रवाई करने का आदेश दिया।

सुपौल से आए एक फरियादी ने मुख्यमंत्री के सामने 51 ऐसे मामलों की सूची सौंपी जो भ्रष्टाचार से जुड़े हुए थे। फरियादी ने आरोप लगाया कि यह मामले उनका व्यक्तिगत नहीं है बल्कि जिले से संबंधित है। सुपौल जिले में जबरदस्त भ्रष्टाचार है। जिले के डी0एम0 भ्रष्टाचारों को बढ़ावा दे रहे हैं। उनके खिलाफ कई तरह की शिकायतें एक साल से वह कर रहे हैं। मुख्य सचिव के सामने भी शिकायत की गई और मुख्यमंत्री कार्यालय में भी लेकिन डी0एम0 साहब के ऊपर कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है। जिले में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति से जुड़ी योजना में घोटाला किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं में भी जिले में जबरदस्त गड़बड़ी का आरोप फरियादी ने लगाया। इतना ही नहीं तालिमी मरकज घोटाले का भी आरोप डी0एम0 के ऊपर लगाया गया है। उस मामले में जांच कमिटी का गठन तो होता है लेकिन समाधान कुछ नहीं होता। मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को इस पर उचित कार्रवाई करने को कहा।

पूर्णिया के डगरुआ के श्री सोहैब आलम ने अपनी फरियाद में कहा कि न्यायालय के आदेश के बावजूद मेरे दखल भूमि को अंचलाधिकारी द्वारा मेरे पड़ोसी द्वारा कब्जा किए जाने में बढ़ावा देते हैं। वहीं वैशाली की सहदेई बुजुर्ग की श्रीमती प्रियंका कुमारी न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बावजूद अब तक आरोपी को थाना द्वारा गिरफ्तार नहीं किए जाने की शिकायत की। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को कार्रवाई करने को कहा।

कैमूर के भभुआ के श्री परमानंद केसरी ने शिकायत करते हुए कहा कि धार्मिक न्यास परिषद, पटना द्वारा भभुआ स्थित स्व0 कनीराम धर्मशाला को संचालित किया जा रहा है। इसमें अनेक अनियमिततायें बरती जा रही है। वहीं टेकारी, गया के श्री अमरजीत दास ने श्रीराम जानकी बेलवन ठाकुरबाड़ी की जमीन पर दबंगों द्वारा अवैध रुप से कब्जा किए जाने एवं जान से मारने की धमकी की शिकायत की। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया।

पूर्वी चंपारण की सुश्री रुचि भारती ने शिकायत करते हुए कहा कि मेरे पिता जी जो कि दैनिक जागरण समाचार पत्र में पत्रकार हैं उनको तंग तबाह किए जाने की नीयत से फंसाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेते हुए संबंधित विभाग को कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री रामसूरत कुमार, खान एवं भूतत्व मंत्री श्री जनक राम, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री श्री सुनील कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, मुख्य सचिव श्री त्रिपुरारी शरण, पुलिस महानिदेशक श्री एस0के0 सिंघल, विकास आयुक्त श्री आमिर सुबहानी, अपर मुख्य सचिव राजस्व एवं भूमि सुधार श्री विवेक कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव गृह श्री चैतन्य प्रसाद, संबंधित विभागों के प्रधान सचिव/सचिव, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह, पटना के जिलाधिकारी श्री चंद्रशेखर सिंह तथा वरीय पुलिस अधीक्षक श्री उपेंद्र शर्मा उपस्थित थे।

‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम के पश्चात् मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत की। जातीय जनगणना को लेकर पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसको लेकर हमलोगों ने एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री से मिलकर अपनी बातों को रख दिया है। इसके संबंध में सभी बातों को पहले ही मीडिया के सामने रख दी गई है। अब निर्णय लेना केंद्र सरकार का काम है। देश में अभी जनगणना की शुरुआत नहीं हुई है। देश के विभिन्न राज्यों से इसकी मांग उठ रही है। अभी कुछ भी सामने नहीं आया है, ऐसे में अभी इस पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि मीडिया की खबरों में यह बात सामने आ रही है कि सभी राज्यों के लोग जातीय जनगणना की मांग कर रहे हैं। ये देश के हित में है। इससे सभी को लाभ मिलेगा। जातीय जनगणना होने से समाज के वैसे वर्ग जिनको आगे बढ़ाने की जरुरत है के संबंध में जानकारी मिलेगी। हमलोग इसको लेकर हमेशा अपनी बातों को रखते रहे हैं। कुछ लोग जातीय जनगणना के खिलाफ में बोलते और लिखते रहते हैं लेकिन ऐसी बात नहीं है, यह समाज को बांटने के लिए नहीं बल्कि एकजुट करने के लिए जरुरी है।

किसान आंदोलन के संबंध में पूछे गये सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोग पहले से इसको लेकर बोल रहे हैं। यह कुछ इलाकों की समस्या है। केंद्र सरकार ने किसानों से कई बार बात की है। बिहार सरकार ने किसानों के लिए काफी काम किया है। यहां प्रोक्योरमेंट काफी हो रहा है, इससे किसानों को फायदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर किसान आंदोलन को कोई चुनाव और राजनीति से जोड़ता है तो यह उनलोगों का काम है, इस बारे में हमंे कुछ भी नहीं कहना है। सभी का राजनीति करने का अपना-अपना तौर तरीका है। हम इसको राजनीतिक ष्टिकोण से नहीं देखते हैं। जनता की भलाई और राज्य के विकास को लेकर हमलोग काम करते हैं। बिहार में उत्पादन और उत्पादकता बढ़ी है। बिहार में पहले काफी कम उत्पादकता थी, अब यहां की उत्पादकता बढ़ी है। इससे किसानों को लाभ हुआ है। हमलोग शुरु से ही षि रोडमैप बनाकर काम कर रहे हैं। हमलोग काम में विश्वास करते हैं, प्रचार-प्रसार में नहीं रहते हैं।

कोरोना काल में बेरोजगारी की समस्या बढ़ने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले डेढ़ साल से ज्यादा समय से पूरी दुनिया कोरोना से प्रभावित हुई है। कोरोना के कारण कई चीजों में रुकावट आने से स्वाभाविक रुप से आर्थिक स्थिति पर इसका प्रभाव पड़ा है। अभी सबसे जरुरी यह है कि कैसे हम जल्द से जल्द कोरोना से मुक्ति पायें। इसको लेकर केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर तेजी से काम किया है। बड़े पैमाने पर टीकाकरण का काम किया जा रहा है। बिहार में लगभग 4 करोड़ लोगों का टीकाकरण हो चुका है। पिछले दिनों बिहार में एक ही दिन में 25 लाख लोगों को टीका लगाया गया है। राज्य में कोरोना की जांच भी काफी तादाद में की जा रही है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी कोरोना की जांच और टीकाकरण तेजी से किया जा रहा है। कोरोना से बचाव को लेकर केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काफी खर्च कर रही है। इस पर राज्य सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किया है। कोरोना से किसी की मृत्यु होने पर 4 लाख रुपये की मदद शुरु से ही दी जा रही है। कोरोना से मुक्ति पाना अभी प्राथमिकता में सबसे ऊपर है। अभी ऐसा नहीं माना जा सकता है कि सब कुछ ठीक हो गया है। कोरोना से मुक्ति मिलते ही देश भर में विकास कार्यों में तेजी आयेगी। हमलोग लोगों की सुविधा के लिए विकास का काम लगातार कर रहे हैं। कोरोना के कारण कई प्रकार की बाधायें सामने आयी है। लोगों की मदद के लिए हमलोग जो कुछ भी कर सकते हैं वो कर रहे हैं। इसको लेकर अधिकारियों को भी निर्देश दिया गया है। जो भी जरूरी चीज है उसके लिये काम किया जा रहा है। आपदा प्रबंधन का काम तेजी से हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में कुछ कठिनाई होती है। सभी को इन सब चीजों को महसूस करना चाहिये।

अधिक वर्षापात और बाढ़ से संबंधित सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोग ये बार-बार कह रहे हैं कि जो छोटी नदियां हैं उसको जोड़ेंगे तो पानी का बचाव होगा, आगे के लिये अच्छा होगा। जल संसाधन विभाग इसके लिये अध्ययन भी कर रहा है। इसको लेकर जो भी संभव है वह करेंगे। सितंबर माह में भी बाढ़ की संभावना बनी रहती है। इसको लेकर सचेत रहना है। आज से एक सप्ताह पहले बाढ़ से प्रभावित लोगों का जो आकलन किया गया था उसके अनुसार लगभग 57 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। सबके लिये राहत का काम हमलोग करवा रहे हैं। कहीं तो बहुत तेजी से पानी बढ़ा और फिर घटा है, लेकिन अभी कैसे कह सकते हैं कि पानी फिर से नहीं बढ़ेगा। सचेत तो रहना ही है।

बाढ़ से हुई क्षति का आकलन करने आई केंद्रीय टीम को लेकर पूछे गये सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कहीं भी फ्लड होता है तो राज्य सरकार की तरफ से केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजी जाती है। हमलोग तो अपनी तरफ से लोगों की मदद के लिए काम कर ही रहे हैं, लेकिन केन्द्र सरकार की टीम आकर देखेगी और देखकर लगेगा कि यहां मदद करनी चाहिये तो मदद करेगी। ये हर साल रिक्वेस्ट किया जाता है कि आकर देख लीजिये कि कितना ज्यादा इलाका प्रभावित हुआ है। सितंबर माह में भी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि साउथ बिहार में भी अनेक जगहों पर नुकसान हुआ है। उन सब जगहों पर जो मदद मिलनी चाहिये उसके लिये निर्देश दिया गया है। अगर कहीं सूखे की स्थिति आयेगी तो उस पर नजर रखी जा रही है। जो सूखे से पीड़ित होंगे उनको भी हमलोग सहायता देंगे इसमें कोई शक नहीं है लेकिन अभी ऐसी कोई सूचना नहीं आई है।

गया पहाड़ी की सुरक्षा को लेकर याचिका दायर

पटना हाईकोर्ट ने विनय कुमार सिंह की जनहित याचिका को सुनते हुए केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई ) से पूछा है कि इस पुरातत्व स्थल के संरक्षण के लिए अब तक क्या कार्र्वाई की गई है।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ विनय कुमार सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने कहा कि लोमस और याज्ञवल्क ऋषि की गुफाएं केवल ऐतिहासिक दृष्टि से ही नही, बल्कि जैव विविधता के मद्देनजर भी बेहद महत्वपूर्ण है । ऐसी जगह को संरक्षित करने की बजाए खत्म किया जा रहा है ।इसकी परवाह न तो केंद्र सरकार को है, न ही राज्य को है। इन पहाड़ के जंगल व आस पास होने वाले खनन कार्य पर हाई कोर्ट ने जो 20 जुलाई को रोक लगा दी थी। यह रोक को अगली सुनवाई तक जारी रखने का कोर्ट ने निर्देश दिया । सुनवाई के दौरान कुछ लोगों ने हस्तक्षेप अर्जी के जरिये खनन कार्य पर से रोक हटाने की गुहार लगाया , जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया ।

याचिकाकर्ता के वकील वृषकेतु पांडेय ने कोर्ट को बताया कि 1906 में छपी तत्कालीन गया जिले के गज़ट में दोनों पहाड़ियों का सिर्फ पुरातात्विक महत्त्व ही नही हैं, बल्कि वहां की जैव विविधता के बारे में भी अंग्रजों ने लिखा है।उन पहाड़ियों के 500 मीटर के दायरे में झरना , बरसाती नदी और एक फैला हुआ वन क्षेत्र है, जिसमे विविध प्रकार के वनस्पति और जीव- जंतु मिलते हैं ।

उस जंगल को अवैध खनन कर बर्बाद किया जा रहा है । लोमस और याज्ञवल्क पहाड़ियों को आर्कियोलॉजिकल एवम हेरिटेज साइट बनाने का कोर्ट से अनुरोध किया गया।

कोर्ट ने दोनों पहाड़ियों के वन क्षेत्र विस्तार और रिहाइशी बस्तियों के बिंदु पर राज्य व केंद्र सरकार से जवाब मांगा था । लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से कोई जवाब नही आया । मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।

आवास के बहाने चिराग ने खेला बड़ा सियासी दाव 12 जनपथ में पिता की लगाई मूर्ति

पूर्व केन्द्रीयमंत्री और दलित नेता रामविलास पासवान के पुत्र लोजपा सांसद चिराग पासवान ने एक बड़ा राजनैतिक दाव खेला है ।खबर आ रही है कि चिराग पासवान ने दिल्ली स्थित 12 जनपथ के बंगला में पिता राम विलास पासवान की मूर्ति लगवाई है. मूर्ति लगाने की खबर के बाद दिल्ली से लेकर पटना तक सियासत गर्मा गयी है।

दरअसल रामविलास पासवान की मृत्यु के बाद केन्द्र सरकार ने पहले रामविलास पासवान के छोटे भाई और केन्द्रीयमंत्री पसुपति पारस को 12 जनपथ आवास का आवंटन किया था लेकिन पारस ने यह आवास लेने से मना कर दिया था।
पिछले दिनों केंद्रीय आईटी एवं रेल मंत्री अश्विणी वैष्णव को यह बंगला आवंटित किया गया है ,चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने 12 जनपथ बंगला के भीतर अपने पिता रामविलास पासवान की मूर्ति लगवाई है. यह बंगला पिछले 30 सालों से राम विलास पासवान के नाम पर आवंटित था. लेकिन उनके निधन के बाद हाल ही में यह केंद्रीय मंत्री अश्विणी वैष्णव के नाम से आवंटित किया गया है।

.खाली करने का मिल चुका है नोटिस-
मोदी कैबिनेट विस्तार के बाद चिराग पासवान को यह बंगला खाली करने का नोटिस मिल चुका है. हालांकि नोटिस मिले हुए करीब 20 से अधिक दिन हो गए हैं, लेकिन अब तक चिराग पासवान ने इसे खाली करने को लेकर कोई जवाब नहीं दिया. वहीं अब मूर्ति लगाए जाने के बाद सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है.

मुजफ्फरपुर से एक और लड़की का हुआ अपहरण एनएचआरसी ने एसएसपी से मांगी रिपोर्ट

बिहार में बच्चियों के लपाता होने की खबर आये दिन आती रहती है लेकिन पुलिस हमेशा की तरह बच्चयों के लपाता होने के मामले में प्रेम प्रसंग या फिर किसी रिश्तेदार के साथ चले जाने कि बात करके मामले की लीपापोती कर देती है ऐसा ही एक मामला मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाने से जुड़ा हुआ है जहां 16 फरवरी 2021 को ब्रह्मपुरा थाना के लक्ष्मी चौक पमरिया टोला निवासी राजन साह की 5 वर्षीय पुत्री खुशी घर से बाहर खेलने के लिए निकली और फिर लौट कर नहीं आयी, खुशी के पिता राजन शाह के बयान पर ब्रह्मपुरा थाने में कांड संख्या 58/21 खुशी के अपहरण का मामला दर्ज किया गया। लेकिन छह माह बाद भी अभी तक खुशी की बरामदगी पुलिस नहीं कर पाई है।इसको लेकर खुशी के पिता राजन साह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया। जहां मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मुजफ्फरपुर एसएसपी से 5 साल की मासूम बच्ची के अपहरण कांड के मामले में जवाब तलब किया है। आयोग ने मुजफ्फरपुर एसएसपी को पत्र भेजकर 4 सप्ताह के अंदर जवाब देने को कहा है। आयोग ने यह भी कहा है कि उस बच्ची की सकुशल बरामदगी के लिए पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की है उसकी विस्तृत रिपोर्ट आयोग को दिया जाए।

सुशांत सिंह राजपूत मामले में सुनवाई का योग्यता है या ना है महा धिकता स्थिति स्पष्ट करे।

पटना हाईकोर्ट ने फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के हत्या की जांच सही ढंग से कराने की याचिका पर सुनवाई करते हुए एडिशनल सोलिटर जेनरल और एडवोकेट जेनरल को सुनवाई की योग्यता पर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया। मुंबई के अंतिम वर्ष के लॉ के छात्र देविंदर देवतादीन दुबे की याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने किसी को नोटिस जारी करने से मना कर दिया था।साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई लंबित होने के दौरान भी विभागीय कार्रवाई पर किसी तरह की रोक नहीं होगी।

इस याचिका में कहा गया कि सीबीआई सुशांत के उनके मुंबई के बांद्रा स्थित फ्लैट में संदेहास्पद मौत की जांच कर रही हैं।यदि पटना हाईकोर्ट के सीबीआई की जांच को संतोषजनक नहीं पाती हैं,तो कोर्ट सीबीआई के निर्देशक और केंद्र सरकार को निर्देश दे।इसमें अनुरोध किया गया है कि कोर्ट जांच कर रही सीबीआई के अधिकारियों को बदल कर वरीय अधिकारियों कीनई सीबीआई की टीम को इस मामले की सुनवाई का जिम्मा सौंपा जाए।

साथ ही इस याचिका में मांग की गई कि हाईकोर्ट इस मामले की स्वयं निगरानी करते हुए सीबीआई को समय समय पर कोर्ट में प्रगति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया जाए,ताकि जांच जल्द पूरा हो और दोषियों को सजा मिल सके।
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा कि सुशांत की संदेहास्पद मौत उनके मुंबई के बांद्रा स्थित फ्लैट में हुई।लेकिन मुंबई पुलिस ने 45दिनों तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की।

बहुत से लोग संदेह के घेरे में थे।लेकिन जांच में बिलंब होने से साक्ष्यों को मिटाने का मौका मिल गया।
सुशांत के पिता कृष्ण किशोर सिंह ने पटना के राजीव नगर थाने में 25 जुलाई,2020 को प्राथमिकी दर्ज कराई,जिसे बाद में सीबीआई को स्थानांतरित किया गया था।

इस मामले पर अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद की जाएगी।

बिहार में अब नालंदा कुर्मी नहीं चलेगा गड़बड़ी किये तो कारवाई के लिए तैयार रहे

“तमाशबीन हूँ मैं “
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के जो नतीजे सामने आये उसमें सबसे ज्यादा नुकसान जदयू को हुआ है जबकि चुनाव नीतीश कुमार के चेहरे पर ही लड़ा गया था ।

चुनाव परिणाम के बाद एक बात जो साफ दिख रही थी कि राज्य की जनता का भरोसा नीतीश कुमार के सुशासन के दावे से उठ चुकी है और इसकी वजह पंचायत स्तर तक व्याप्त अफसरशाही और भ्रष्टाचार था ।

सरकार गठन के बाद नीतीश कुमार अफसरशाही और राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार पर कैसे अंकुश लगाये इस पर काम करना शुरु किये और इसके लिए एक बार फिर जनता के दरबार में सीएम कार्यक्रम की शुरुआत हुई ।
वही सीएम ने कई वर्षो से सुस्त पड़े भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने वाले विभाग निगरानी ,विशेष निगरानी और आर्थिक अपराध इकाई के प्रमुख को भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कठोर कारवाई करने का निर्देश दिया ।

निर्देश के बाद यू कहे तो बिहार में पहली बार भ्रष्टाचार मामले में बड़ी मछलियों पर कारवाई हुई है इस कारवाई से प्रशासनिक अधिकारियों के बीच एक चर्चा जो आम हुआ करता था कि नालंदा और उस आप कुर्मी हैं तो आप कुछ भी कर सकते हैं कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता है या फिर आप एक खास दरबार से जुड़े हैं तोआपका बाल बांका नहीं होने वाला है लेकिन इस बार जो कारवाई हुई है उससे यह मिथ टूटा है ।

बालू माफिया से सांठगांठ मामले में जो कारवाई हुई है उसमें ऐसे अधिकारी भी हैं जो नालंदा और कुर्मी होने के के साथ साथ पूर्व मंत्री के दमाद होने के बावजूद कारवाई हुई है। इतना ही नहीं खास दरबार तक सीधे सूटकेस पहुंचाने वाले अधिकारी भी नपे हैं।

मंत्री के रिश्तेदार भी नपे हैं और साथ ही सत्ता समीकरण के साथ जातीगत राजनीति के सहारे पोस्टिंग कराने वाले अधिकारी भी नपे हैं ।

इस तरह की कारवाई से भले ही अभी ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप मचा है लेकिन पोस्टिंग और तबादले को लेकर जो सरकार की नीति है उस नीति में जब तक बुनियादी बदलाव नहीं किये जायेंगे तब तक भ्रष्टाचार पर इस तरह की कारवाई फोरी ही साबित होगी ।

1–मुजफ्फरपुर डीटीओ पर कारवाई
सरकार गठन के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ पहली बड़ी कारवाई मुजफ्फरपुर के डीटीओ रजनीश लाल पर हुई थी । निगरानी ने उसके आवास से इतने नगदी पैसे बरामद किये थे कि नोट गिनने वाला मशीन लाना पड़ा था ।रजनीश सिर्फ मुजफ्फरपुर के ही डीटीओ नहीं थे वो सारण (छपरा) के भी डीटीओ थे ।समझ सकते हैं कि मुजफ्फरपुर अपने आप में कितना बड़ा जिला है और उसके साथ छपरा जहां बालू कारोबार चरम पर है ऐसे में दो जिलों का प्रभार बिना मंत्री और विभागीय हेड के सहमति के बगैर सम्भव है क्या ,जबकि मुख्यालय अधिकारी भरे पड़े हैं फिर रजनीश लाल में इतनी मेहरबानी क्यों वैसे इनका एक और परिचय है कि ये बिहार सरकार के एक मंत्री के रिश्तेदार हैं ।

2–बालू माफिया से सांठगांठ मामले में दो एसपी चार डीएसपी सहित 41 अधिकारियों पर हुई कारवाई
नयी सरकार के गठन के बाद से ही ये खबर आ रही थी कि बालू माफिया सरकार को अस्थिर करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है इस सूचना के बाद सरकार बालू के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए लगातार अधिकारियों को निर्देश दे रहा था, लेकिन पदाधिकारी और बालू माफिया के बीच इस तरह का गठजोड़ बन गया था कि सरकार के निर्देश के बावजूद भी अवैध कारोबार चरम पर था, सरकार ने तय किया कि अब कठोर कारवाई के बिना लगाम लगने वाला नहीं है और फिर सरकार आर्थिक अपराध इकाई को मिशन बालू माफिया का जिम्मा दिया गया पूरी छूट के साथ ।

आर्थिक अपराध इकाई के एडीजी नैयर हसनैन खान अपने खास पदाधिकारियों के साथ एक माह तक ऑपरेशन बालू माफिया पर काम करते रहे और उसके बाद सरकार से हरी झंडी मिलते ही कारवाई शुरु हो गयी और भोजपुर के एसपी राकेश कुमार दुबे और औरंगाबाद के एसपी सुधीर कुमार पोरिका पालीगंज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी तनवीर अहमद, भोजपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पंकज रावत, डिहरी के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी संजय कुमार और औरंगाबाद सदर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अनूप कुमार सहित एक दर्जन से अधिक पुलिस पदाधिकारियोंं को निलंबित कर दिया गया।
साथ ही एसडीओ ,सीओ ,वीडिओ और डीटीओ स्तर के कई अधिकारियों पर भी कारवाई हुई अब जरा गौर करिए जिन अधिकारियों पर कारवाई हुई है उसका बैकग्राउंड कैसा रहा है ।

3–भोजपुर एसपी राकेश कुमार दूबे –इस अधिकारी को कौन नहीं जानता है लालू राज में इसकी तूती बोलती थी नीतीश कुमार आये तो कुछ दिन फिल्ड से बाहर रहे लेकिन जैसे ही राजद से जुड़े एक कद्दावर नेता नीतीश के करीब आये राकेश दूबे को प्राइम पोस्टिंग

मिलनी शुरु हो गयी भोजपुर एसपी रहते हुए बालू माफिया से इनका कैसा रिश्ता था कहना मुश्किल है लेकिन उस सिडिकेंट से इनका जुड़ाव रहा है ये किसी से छुपी हुई भी नहीं है ।

4–औरंगाबाद के एसपी सुधीर कुमार पोरिका–इस अधिकारी के बारे में खासबात यह है कि ये दरबार के खासम खास थे पटना सिटी एसपी के रुप में ही इन पर मुकदमों में पैसे लेने का आरोप लगने लगा था लेकिन दरबार के करीबी थे इसलिए इनकी बेहतर पोस्टिंग होती रही। हद तो तब हो गयी ये जनाब दरबार के सहारे नालंदा के एसपी बन गये वहां भी इनका प्रैक्टिस वैसे ही चलता रहा जैसा ये दूसरे जिले में चलाते थे ।
हलाकि सीएम तक इसके कारनामे की खबर जब तक पहुंचती ये पूरा नाम कमा चुके थे फिर कुछ दिनों के लिए इन्हें जिले से बाहर कर दिया गया लेकिन जैसी ही दरबार की सक्रियता बढ़ी जनाव औरंगाबाद पहुंच गये जहां थाना प्रभारी की पोस्टिंग में सारे हदे इन्होंने पार कर दिया ।

5–भोजपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पंकज रावत –बालू माफिया से सांठगांठ मामले में चार अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पर भी कारवाई हुई है उसमें एक हैं पालीगंज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी तनवीर अहमद जो 2009 –20010 बैच के अधिकारी हैं ये जनाब समस्तीपुर सदर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी भी रह चुके है विभाग में इनकी पहचान 20-20 खेलने वाले अधिकारी के रुप में है इनकी पोस्टिंग की सूची देख कर ही समझ में आ जायेगा कि जनाव कितने बड़े भीआईपी थे। डिहरी के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी संजय कुमार 2004 बैच के अधिकारी है हलाकि ये दरबारी होने के बावजूद मध्यममार्गी रहे हैं ।औरंगाबाद सदर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अनूप कुमार प्रमोसन के डीएसपी बने हैं पूराने डीजीपी के दरबारी थे इसलिए उन्हें प्राइम पोस्टिंग दी गयी थी ।

और बात अगर भोजपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पंकज रावत की करे तो ये सारी अहर्ता पूरी करते हैं नालंदा के हैं कुर्मी भी हैं कांग्रेस के एक बड़े नेता के दमाद भी हैं टैक्स वाले दरबार के खासम खास भी है 2004 बैच के ये भी अधिकारी है इनकी पोस्टिग की बात करे तो ये हाजीपुर,मोतिहारी ,बेतिया,गया आरा जैसे अनुमंडल के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी रह चुके हैं सीबीआई जांच भी झेल रहे हैं, मोतिहारी में भी इन पर गम्भीर आरोप लगे थे फिर इनकी पोस्टिंग में कभी फिल्ड से बाहर नहीं रही इन पर कारवाई का बड़ा असर है ब्यूरोक्रेसी पर ।

6–कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्तव
2013 बैच के नगर विभाग विभाग के अधिकारी है पहली पोस्टिंग इनकी भभुआ नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी के पद पर हुआ था पहले पोस्टिंग में ही जनाव अपनी योग्यता दिखा दिये करोड़ो के घोटाले का आरोप हंगामा होने पर कैमूर के तत्कालीन जिलाधिकारी ने इस पूरे मामले की जांच की जिसमें ये दोषी पाये गये लेकिन नाम के अनुसार इन्होंने काम किया नगर विभाग विभाग के अधिकारियों से मिल कर कारवाई वाली फाइल दबवा दिये शुक्र कहिए मामला सीएम के जनता दरबार में आ गया और उसके बाद कारवाई शुरु विशेष निगरानी की टीम ने आय से अधिक मामले को लेकर एक प्राथमिकी दर्ज किया है छापेमारी हुई तो करोड़ो को अवैध सम्पत्ति बरामद हुआ हुई है ।

7–मुजफ्फरपुर में ग्रामीण कार्य विभाग दरभंगा में कार्यरत एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अनिल कुमार (Engineer Anil kumar) के ठिकाने से 49 लाख रुपये और बरामद हुए हैं. इससे पूर्व उसके स्कार्पियो से 18 लाख रुपये मिले थे. इस तरह सरकारी अधिकारी की गाड़ी से कुल बरामद राशि 67 लाख रुपया बरामद हुआ।
ये साहब मंत्री के स्वजातीय हैं और करीबी भी हैं इसलिए इन्हें दो जिले की जिम्मेवारी मिली हुई है जब कि मुख्यालय में इंनजीनिर बिना काम के बैठे हुए हैं ।
मतलब कारवाई से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगना सम्भव नहीं है क्यों कि जिस तरीके से पोस्टिंग की प्रक्रिया सरकार चला रही है ऐसे में काम करने वाले ईमानदार अधिकारियों के पोस्टिंग की गुंजाइश
कम है हलाकि इस मामले में बिहार के पूर्व डीजीपी और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ करवाई करने को लेकर चर्चित रहे अभयानंद
का कहना है कि कानून प्रयाप्त है हां पोस्टिंग में अधिकारियों के कार्यशैली को देखा जाना चाहिए साथ ही पोस्टिंग के समय राजनैतिक हस्तक्षेप कैसे कम हो इस सरकार को सोचना चाहिए क्यों कि सब खेल पोस्टिंग से ही शुरु होता है ।

संभार –संतोष सिंह के वाल से

वेतनभोगी बन कर रह गया है आज का शिक्षक

आज, शिक्षक और मैं।

आज शिक्षक दिवस है,
अब तक बहुतों ने शुभकामनाएं दी है,
मैं उन शुभकामनाएं का क्या करूँ,
आदर सहित उनको अस्वीकार करता हूँ,
जिनकी भवनाएं टूटती है टूट जाये,
सिर्फ परम्परा को ढोने के लिए
मैं नही बना हूँ,
शायद मैं स्वार्थी बन गया हूँ,
हाँ मैं स्वार्थी हूँ,
क्योंकि मैं एक शिक्षक हूँ,
ओह नहीं,मैं शायद वेतनभोगी हूँ,
मैंने पिछले आठ सालों में
कुछ नही किया है,सिर्फ
शिक्षक का नाम ढोने के अलावे,
कोशिश बहुत की,परन्तु
कभी सफल नही हो पाता हूँ,
इस धंधे में आने से पहले
मैं अपने गुरुओं को बहुत
ही सम्मान की नजरों से देखता था,
उनकी बातों को आत्मसात करता था,
एक ऐसा रिश्ता था उनसे जो
अटूट था,स्नेह भरा था,
उनकी त्याग तपस्या,
और आशीर्वाद ने,
बहुत कुछ दे दिया मुझे,
परन्तु आज जिस छात्र को
देखता हूँ, स्वार्थी नजर आता है,
या शायद मैं स्वार्थी बन गया हूँ,
पढ़ाना मैरी मजबूरी बन गयी है,
अपनी ड्यूटी पर घंटो छात्रों का
इंतज़ार करता हूँ,
कुछ आते है,जो आज आते है वो
फिर कल नही आते है,
कोई जिम्मेदारी नही,कोई शर्म नही,
बस डिग्री कैसे ले इसी जुगाड़ में,
फ़ोन करते है बात करते है,बस
अपने काम के लिए,अपनी मतलब के लिए,
300 छात्रों में 30 भी नही आते,
बस यूं ही चल रहा है सब,
दुख तो तब और बढ़ जाता है
की स्नातक की डिग्री लेने के बाद भी
वे अपने विषय के शिक्षक को पहचानते भी नही।
जो छात्र एक आवेदन नही लिख पाता
वो बड़े शान से ग्रेजुएट हो गया है,
लानत है ऐसी व्यवस्था पे,
लानत है इस बात पे की मैं
एक शिक्षक हूँ,,
मैं नही चाहता कि आज के दिन
कोई मुझे याद करे,
अगर मैं किसी के बेहतर भविष्य का
सहभागी नहीं तो उसकी शुभकामनाओ
का आचार नही डाल सकता हूँ।


संतोष कुमार, सहायक प्राचार्य,
ये विचार मेरे अपने है

गोपाल के सामने क्यों बेबस हैं नीतीश

JDU विधायक गोपाल मंडल पर तेजस राजधानी एक्सप्रेस में यात्रियों के साथ हंगामा गाली गलौज धमकी दिए मामले में रेल एसपी पटना के निर्देश पर जीआरपी थाना आरा में JDU विधायक गोपाल मंडल सहित 4 लोगों पर आरा GRP में प्राथमिकी दर्ज….आरा GRP कांड संख्या –76/21 धारा:–504/290/379/34 भा०दी०वी एवं 3 (r)(s) अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज की गई है। यह पहला मामला है जब बिहार के किसी विधायक की वजह से जहां पूरे देश में राज्य की आलोचना हो रही है वही सरकार और JDU अपने विधायकों को लेकर पूरी तरह से डिफेंसिव है।

सीएम नीतीश कुमार से जब आज मीडिया ने गोपाल मंडल के हरकत के बारे में सवाल किया तो उन्होंने “जांच चल रही है’ कहते हुए मीडिया से दूरी बना लिए ।गोपाल मंडल को लेकर यह कोई पहला मौका नहीं है जब सरकार को असहज होना पड़ा है।

कुछ दिन पहले राज्य के उप मुख्यमंत्री तारकेश्वर प्रसाद के बारे में बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी किये थे जिसको लेकर बीजेपी को असहज होना पड़ा था।शराबबंदी को लेकर गोपाल मंडल नीतीश कुमार पर सीधे निशाना साधते हुए कहा था कि ‘मुख्यमंत्री का कान बंद है। इसलिए मुख्यमंत्री का कान खोलना चाहते हैं। बिहार में ऐसा कोई पुलिस या पुलिस अधिकारी नहीं है, जो शराब नहीं पीता।

कुछ दिन पहले बांका में 20 एकड़ जमीन पर JDU के विधायक कब्जा जमाने गए थे, लेकिन लोगों ने उन्हें बंधक बना लिया था। लौटने के बाद भागलपुर में उन्होंने एक समुदाय के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी करते हुए कहा- ‘उन लोगों की हिम्मत है..ठोक देंगे इस घटना को लेकर भी सोशल मीडिया में एक वीडियो खुब वायरल हुआ था इतना ही नहीं समय समय पर सीएम नीतीश कुमार के फैसले पर भी सवाल उठाते रहते हैं विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद उन्होंने कहा टिकट वितरण को लेकर सवाल खड़े हुए कहा था कि जदयू की हार के लिए सीएम नीतीश खुद जिम्मेवार हैं । ‘नाथनगर की सीट नीतीश कुमार की गलती की वजह से पार्टी हार गई।

Jdu और नीतीश गोपाल मंडल को लेकर खामोश क्यों है

इस तरह से व्यवहार के बावजूद नीतीश कुमार की चुप्पी रहस्य की बात है कहा यह जा रहा है कि बिहार विधानसभा में एक तो इस बार जदयू के विधायक की संख्या काफी कम है ऐसे में कारवाई करने के बाद विधायक खुल्ला साँड़ हो जायेंगा और उसके बाद सरकार को और परेशानी बढ़ सकती है

गरीबों के बीच राँबीन हुड, की छवि है गोपाल मंडल का
भागलपुर के गोपालपुर से गोपाल मंडल लगातार चौथी बार विधायक बने हैं इसकी वजह है यह है कि वो जिस गंगोता जाति से आते हैं उसकी पहचार उस इलाके में लड़ाकू जाति के रुप में है ,भागलपुर दंगा के दौरान जब शहर के लोग असुरक्षित महसूस करने लगे थे उस समय गंगोता ही पूरे शहर की सुरक्षा अपने कंधों पर लिया था और फिर भागलपुर में जो कुछ भी हुआ उसके पीछे गंगोता ही खड़ा था।

वो छवि आज भी भागलपुर जिले के लोगों के जेहन से बाहर नहीं निकला है इसका लाभ गोपाल मंडल को मिलता है फिर उस इलाके में भूमिहार और गंगोता के बीच वर्चस्व को लेकर ताना तानी चलता रहता है जिसके खिलाफ गोपाल मंडल हमेशा खड़ा रहता है फिर पुलिस और पदाधिकारी के बारे में सार्वजनिक रुप से बोलने की छवि है इस वजह से गरीबों के बीच गोपाल मंडल काफी लोकप्रिय है इतना ही नहीं भागलपुर लोकसभा में गंगोता जाति के वोट सबसे अधिक वोट 9.26 फीसदी हैं। भागलपुर जिले की राजनीति गंगोता जाति के वोटर तय करते हैं और गोपाल मंडल अपने जाति में भी काफी लोकप्रिय है।

भागलपुर से जदयू सांसद अजय कुमार मंडल भी गंगौता जाति से ही आते हैं और चाह करके गोपालमंडल का प्रभाव वो कम नहीं कर पाये लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार को गोपालमंडल को मनाने में पसीना छुट गया था कहां ये जा रहा है कि गोपालमंडल के मामने के बाद ही अजय मंडल सरल जीत हासिल कर पाये ऐसे में भागलपुर जिले में गोपाल मंडल का राजनैतिक पकड़ इतनी मजबूत है कि नीतीश कुमार चाह करके भी कुछ खास नहीं कर पायेंगे ।

वही गोपाल मंडल नीतीश कुमार से इसलिए भी नराज हैं कि चार बार से लगातार विधायक बनने के बावजूद नीतीश कुमार इन्हें मंत्री नहीं बनाये हैं और उसी नराजगी का यह असर है कि गोपाल मंडल नीतीश कुमार कैसे असहज महसूस करे इसके लिए सीमाएं लांघते रहता है ।

बिहार में एक और डीएसपी निकला करोड़पति 10 वर्षो में कमाया अकूत सम्पत्ति

बालू माफिया से सांठगांठ मामले में आर्थिक अपराध इकाई के द्वारा आरा के तत्कालीन डीएसपी पंकज कुमार रावत द्वारा आय से अधिक संपत्ति मामले में 3 सितंबर को EOU ने पटना में आय से अधिक संपत्ति की FIR नंबर 15/2021 दर्ज की। साथ में कोर्ट से सर्च वारंट लिया। इसी आधार पर आज पंकज कुमार रावत के पटना में बोरिंग रोड वाले फ्लैट, दानापुर के नासरीगंज वाले घर और नालंदा के हिलसा में पुश्तैनी घर पर अलग-अलग टीमों ने छापेमारी की।

छापेमारी के दौरान पंकज कुमार रावत के पास करोड़ो के सम्पत्ति का खुलसा हुआ है पटना के दीघा बगीचा इलाके में जमीन, एसके पुरी थाना के तहत बोरिंग रोड में फ्लैट, दानापुर के शताब्दी मॉल में दो दुकान और हरियाणा के फरीदाबाद में एक फ्लैट खरीद रखा है। इसके अलावा LIC, बजाज एलियांज में बड़े इंवेस्टमेंट और खरीदी गई प्रॉपर्टी के डॉक्यूमेंट्स टीम के हाथ लगे हैं। काली कमाई के जरिए खरीदी गई सारी प्रॉपर्टी और दूसरे इंवेस्टमेंट, डीएसपी, उनकी पत्नी व परिवार के दूसरे सदस्यों के नाम पर है।

अब पटना में शंघाई का मजा लीजिए

2025 में जब आप पटना आयेंगे तो अशोक राजपथ पर आपको जाम का सामना नहीं करना पड़ेगा यू कहे तो आप पटना में शंघाई का मजा ले सकते हैं ।कारगिल चौक से साइंस कॉलेज वाया पीएमसीएच बननेवाले डबल डेकर एलिवेटेड रोड के निर्माण का आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिलान्यास किया।

2022 मीटल लम्बा इस डबल डेकर एलिवेटेड रोड के निर्माण में 422 करोड़ रुपये खर्च होंगे इस रोड के बनने से अशोक राजपथ में जाम की समस्या से मुक्ति होगी. पीएमसीएच आना-जाना आसान होगा।

दूसरे तल्ले से जाना व पहले तल्ले से होगा आना

डबल डेकर एलिवेटेड रोड से आने-जाने की सुविधा होगी. इसके लिए पीएमसीएच के मेन गेट के पास मल्टीलेवल पार्किंग से कनेक्टिविटी होगी. निर्माण को लेकर मिट्टी जांच की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. कारगिल चौक से लेकर साइंस कॉलेज वाया पीएमसीएच के बीच जगह-जगह बैरिकेडिंग कर मिट्टी जांच का काम होगा.

डबल डेकर एलिवेटेड रोड में दूसरे तल्ले से जाना व पहले तल्ले से आना होगा. कारगिल चौक से साइंस कॉलेज जाने के लिए लोग दूसरे तल्ले वाले रोड का इस्तेमाल करेंगे. वहीं साइंस कॉलेज से कारगिल चौक आने के लिए पहले तल्ले वाले रोड से आयेंगे. निगम के आधिकारिक सूत्र ने बताया कि कारगिल चौक की तरफ से जानेवाले दूसरे तल्ले से पीएमसीएच चले जायेंगे. अगर उन्हें वापस कारगिल चौक की तरफ आना होगा तो पहले तल्ले से जा सकेंगे

दोनों तरफ सर्विस लेन होगी
पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने बताया कि डबल डेकर एलिवेटेड सड़क के दोनों तरफ सर्विस रोड होगी। इससे लोकल मार्केटिंग करने और नजदीक के कार्यालयों में पहुंचने वाले लोग जाएंगे।

पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने बताया कि गांधी मैदान स्थित करगिल चौक के उत्तर ऑटो स्टैंड से डबल डेकर एलिवेटेड सड़क की शुरुआत होगी। गांधी मैदान से PMCH, पटना विवि, NIT जाने वाले लोग दूसरे तल से जाएंगे। वहीं, NIT मोड़ की तरफ से गांधी मैदान की ओर आने वाले लोग पहले तल से आएंगे। पहले तल वाली सड़क BN कॉलेज के सामने नीचे उतरेगी।
मल्टीलेवल पार्किंग भी बनेगी

PMCH में मल्टीलेवल पार्किंग बनेगी। इस पार्किंग से एलिवेटेड सड़क की कनेक्टिविटी दी जाएगी। पहले तल्ले की पार्किंग में एनआईटी मोड़ से आने वाली गाड़ियां पहुंचेगी। वहीं, दूसरे तल पर गांधी मैदान की ओर से जाने वाली गाड़ियां जाएंगी। गंगा पाथ-वे से कृष्णाघाट होकर सड़क निकाली जा रही है। यह सड़क डबल डेकर एलिवेटेड रोड से जुड़ेगी। यहां से गायघाट की तरफ जाने वाले लोग गंगा पाथवे होकर जा सकेंगे। यानी, पटना सिटी इलाके में जाने के लिए जाम का सामना नहीं करना होगा।

आधी आबादी का सच’ हम जानकर भी हैं क्यों अनजान है

महिलाएं आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं। समाज का इतना महत्वपूर्ण हिस्सा त्रासदी का शिकार रहा है, चाहे वह पहचान के संकट के रूप में हो या हिंसा झेलने की विवशता।वह भी उस समाज में जहां कहा जाता है कि ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता’। यह समाज का दोहरा चरित्र नहीं तो और क्या है! हमारे यहां पुरुष-प्रधान समाज की ऐसी रचना की गई है कि ये सब कई लोगों को सामान्य लगता है। अखबारों में बलात्कार, दहेज-हत्या आदि समाचारों को हम छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं।
बहू के रूप में नौकरानी ढूंढी जाती है। बेटा सेवा करें या ना करें, बहू (कभी) ना करे तो उसे (और उसके पूरे खानदान तक को) ताना दिया जाता है या फिर उसके साथ घरेलू हिंसा तक की जाती है। बाहर काम करने वाली महिलाओं के साथ तो दोहरा शोषण है, घर के अंदर भी काम करने की उम्मीद और बाहर भी। क्या खूब समाज की रचना की गई है कि लड़के वाले को पैसे के साथ-साथ उल्टे में लड़की भी मिलती है और वह उनसे दबी रहने को मजबूर भी है! और लड़की भी कैसी, सुंदरता के मानकों पर खरी उतरने वाली जिसे देखने वक्त वस्तु की तरह टटोला जाता है, कई सवाल किए जाते हैं आदि, आदि। इसके बाद लड़की का पिता अपने जीवन भर की कमाई, यहां तक कि कर्ज लेकर भी शादी के एक रात में उड़ेल देता है, और फिर भी लोग संतुष्ट नहीं होते हैं।

उसके बाद ससुराल आने पर शुरू होता है ताना देने का दौर। उनकी पसंद कौन पूछता है, बस थोप दिया जाता है, चाहे वह कैरियर की बात हो या बच्चा पैदा करने का मामला। यहां भी समाज ने महिला को महिला के विरुद्ध सामने खड़ा कर दिया है। सोचने का तो सवाल ही नहीं है कि वह महिला ऐसा क्यों कर रही है, बस करना है! फिर ससुराल को अपना घर भी मानने नहीं दिया जाता है और मायके में तो लड़की पराई धन थी।

फिर, ससुराल के लोग, रिश्तेदार आदि शादी के दो-तीन साल के अंदर बहू से बच्चे की उम्मीद करने लगते हैं, उसमें भी होने वाली संतान लड़का हो तो और अच्छा। हिंदुस्तान में संतान पैदा करना/न करना अभी भी औरत के लिए ‘choice’ नहीं है, भले ही देश की आबादी कितनी भी बढ़ती जा रही हो। पर नहीं, समाज ने ऐसी व्यूह- रचना कर रखी है कि औरत आमतौर पर unconventional choices का सोचने से भी डरती है।तदोपरांत जिम्मेदारी बढ़ जाने के बाद अगर जरूरत हो नौकरी छोड़ने की तो मान कर चला जाता है कि लड़की ही छोड़ेगी, चाहे लड़की ने करियर बनाने के लिए लड़के जितना ही मेहनत क्यों न की हो।

आगे, औरत की अपनी जिंदगी कहां, वह तो बस बच्चों और परिवार के लिए अपनी ख्वाहिशो का त्याग कर जीने लगती है और हमारा समाज उसे त्याग की मूर्ति का बस तमगा देकर खुश हो जाता है! इन सब के बीच कोई समाज से यह क्यों नहीं पूछता कि भले ही हम चांद पर पहुंच गए हो, लेकिन इस धरती पर दहेज जैसी मामूली चीज के लिए क्यों किसी की जान ले ली जाती है? उस परिवार को सामाजिक से बहिष्कृत होने का भय क्यों नहीं?

तत्पश्चात बच्चे बड़े होकर अपने कैरियर में व्यस्त हो जाते हैं और पुरुष अपनी दुनिया में, पर औरत monopause, फिर mid-life crisis से जूझते हुए जब तन्हाई में पीछे मुड़कर देखती है तो सब कुछ खाली-खाली सा लगता है। और शायद जिंदगी का लेखा जोखा करते उस वक्त लगता हो कि क्या पाया, क्या खोया। शायद थोड़ा अपने लिए भी जिया होता!

समाधान:
• महिलाओं को अपने हक के लिए assertive होना पड़ेगा।
•पढ़ना और अपने पैरों पर खड़ा होने का हुनर महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है।
•संपत्ति का अधिकार लेना होगा (इसके बारे में विस्तृत कभी आगे लिखूंगी)।
•जरूरत पड़ने पर ना कहना सीखना होगा।
• अपने लिए भी सोचना होगा, superwoman बनने का लक्ष्य unrealistic है।
•पितृ-सत्तात्मक समाज का structure समझना होगा और जो चीजें महिला-विरोधी हैं, उसको सही करने के लिए काम करना होगा।

लेखिका — लक्ष्मी कुमारी (शिक्षक राजनीति शास्त्र ,वीर कुंउस सिंह विश्वविधालय)

बिहार में कोरोना के तीसरे लहर की हुई शुरुआत कई बच्चे पाये गये हैं कोरोना पाँजिटिव

पटना एम्स में 24 घंटे के अंदर शहर के गोसांई टोला की रहने वाली कोरोना संक्रमित बच्ची की मौत हो गयी है वही चार साल की कोरोना संक्रमित एक दूसरी बच्ची भर्ती हुई है । सिया कुमारी नाम की यह बच्ची सारण जिले के मिर्जापुर गांव की रहने वाली है।

एम्स में इलाज करे रहे डां कि माने यो सिया तीसरा बच्ची हो कोरोना संक्रमित पायी गयी ,बिहटा के दिलवारापुर के सात वर्षीय कोरोना संक्रमित शिवांशु कुमार का भी इलाज चल रहा है।

एम्स के डॉक्टर बच्चों में मिल रहे कोरोना के मामलों को लेकर गंभीर हैं. बिहटा के शिवांशु को बुखार और दूसरी परेशानियों के बाद एम्स में 31 अगस्त को दाखिल कराया गया था. यहां भर्ती सिया कुमारी का इलाज छपरा के एक निजी अस्पताल में चल रहा था. वहां से उसे रेफर कर दिया गया. जांच में वह कोरोना पॉजिटिव पायी गयी.बच्ची में कोरोना का कौन-सा वेरिएंट है, इसकी जांच के लिए अभी सैंपल लिया गया है. कोरोना की तीसरी लहर के खतरे के बीच अस्पताल प्रशासन इसे संभावित केस मान रहा है. गुरुवार को पटना एम्स में भर्ती गोसांईं टोला पाटलिपुत्र निवासी 11 वर्षीय आरोही कुमारी की कोविड से मौत हो गयी थी.

परिजनों का भी लिया गया सैंपल
डॉक्टरों ने पीड़ित बच्ची का रिपीट सैंपल लेने के साथ ही उसके परिजनों का सैंपल भी आरटी-पीसीआर जांच के लिए भेजा है. वहीं, पटना एम्स के कोविड वार्ड के नोडल पदाधिकारी डॉ संजीव कुमार ने बताया कि बच्ची को तेज बुखार, खांसी-जुकाम के साथ पेट में पानी भरने की परेशानी है. हालांकि, ऑक्सीजन सैचुरेशन नियंत्रण में है.

बच्ची की देखभाल के लिए विशेष टीम लगायी गयी है. वायरस के वेरिएंट का पता लगाने के लिए सैंपल लिया गया है. उम्मीद है कि इसे आइसीएमआर भी भेजा जायेगा. उन्होंने कहा कि अभी दो बच्चे संक्रमित मिले हैं और इस आधार पर इसे तीसरी लहर की आहट कहना जल्दीबाजी होगी. विशेषज्ञ डॉक्टर बच्चों के मामलों को देख रहे हैं और सभी तरह की रिपोर्ट मिलने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचना बेहतर होगा.

पंचायत चुनाव को लेकर आयोग ने उठाये कठोर कदम आचार संहिता के उल्लंधन मामले में जा सकते हैं जेल

निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सम्पन्न कराने को लेकर आयोग नित नये आदेश जारी कर रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों पर कार्रवाई करने का कानूनी प्रावधान तय किया है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में सजा का प्रावधान किया गया है. अगर कोई प्रत्याशी धर्म, नस्ल, जाति, समुदाय या भाषा के आधार पर विभिन्न वर्गों के बीच शत्रुता या घृणा फैलाता है, तो उसको तीन से पांच वर्ष की सजा मिलेगी. यह गैर जमानतीय व संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है.

इसी प्रकार से कोई भी प्रत्याशी किसी अन्य प्रत्याशी किसी के जीवन के ऐसे पहलुओं की आलोचना करता है, जिसकी सत्यता साबित नहीं हो, तो उसको भी आइपीसी की धारा 171(जी) के तहत सजा होगी. यह जमानतीय अपराध है, जिसकी सुनवाई प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के समक्ष होगी.

इसी प्रकार से निर्वाचन प्रचार के लिए मस्जिदों, गिरजाघरों, मंदिरों या अन्य पूजा स्थलों का प्रचार मंच के रूप में करना और जातीय या सांप्रदायिक भावनाओं की दुहाई देना भी गैर जमानतीय अपराध की श्रेणी में शामिल है.
अगर कोई प्रत्याशी भ्रष्ट आचरण करते हुए मतदाताओं को रिश्वत देता है , तो उसके लिए पंचायती राज अधिनियम के साथ आइपीसी की धारा में सजा का प्रावधान हैं. मतदाताओं को भयभीत करना, बूथ के 100 मीटर के भीतर वोट मांगना भी अपराध की श्रेणी में शामिल हैं. कोई प्रत्याशी अगर किसी व्यक्ति के शांतिपूर्ण जीवन में उनके घर के सामने प्रदर्शन आयोजित करता है, तो उसको सजा मिलेगी.

किसी भी व्यक्ति के बिना अनुमति के उसके मकान पर झंडा टांगने, उसकी भूमि का उपयोग करना भी अपराध की श्रेणी में आता है. कोई भी प्रत्याशी या उसके समर्थक अन्य प्रत्याशी के द्वारा आयोजित जुलूस या सभा में बाधा उत्पन्न करता है, तो उसके सजा का प्रावधान किया गया है.

बिना लाइसेंस प्राप्त किये किसी भी प्रत्याशी द्वारा प्रस्तावित सभा व जुलूस में लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं किया जायेगा. ऐसा करने पर उसके लाउडस्पीकर एक्ट के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. वोटिंग के दिन भी शांतिपूर्ण मतदान में बाधा करने पर कार्रवाई का प्रावधान है.

सरकारी गांड़ी पर हाईकोर्ट का चला डंडा बगैर निबंधन के सड़क पर उतरा तो होगा जप्त

पटना हाई कोर्ट ने बगैर निबंधन के ही सड़कों पर घूम रही पटना नगर निगम की गाड़ियों के मामले को निष्पादित कर दिया।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने आदेश जारी किया है कि कोई भी सरकारी या अन्य सरकारी निकाय की गाड़ी बगैर निबंधन के सड़क पर खड़ी नहीं रह सकती।

पटना नगर निगम के मामले में कोर्ट ने इस लापरवाही पर अपनी नाराज़गी जताते हुए नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को चार महीने के भीतर जिम्मेदार अफसरों पर कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने निर्भय प्रशांत की जनहित याचिका को निष्पादित करते हुए ये आदेश दिया।

कोर्ट ने कड़ी टिपण्णी करते हुए कहा कि देश मे कानून से ऊपर कोई नही है।
जब मोटर वाहन कानून में कोई गाड़ी को निबंधन से छूट नही है, तो नगर निगम की गाड़ियां एक दिन भी आखिर बगैर निबंधन के कैसे सड़कों पर खड़ी रहती थी ? खण्डपीठ ने यह स्पष्ट आदेश जारी किया कि बगैर निबंधन के कोई भी सरकारी व निगम की गाड़ी एक दिन भी सड़कों पर खड़ी नही रहेगी।

कोर्ट में दायर हलफनामे को माने, तो पटना नगर निगम ने 925 गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन के लिए तकरीबन 2 करोड़ रुपये जमा किया।

वर्ष 2019 में राजधानी की सड़कों पर नगर निगम की करीब 925 गाड़ियां बगैर निबंधन व् बीमा के ही घूम रही थी।।

अपराधियों की अब खैर नहीं जनामत तभी मिलेगी जब आपके ऊपर अपराधिक मामला नहीं होगा दर्ज

पटना हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में यह तय किया है कि प्रत्येक निचली अदालत को किसी आरोपी की जमानत अर्जी को निष्पादित करने से पूर्व लोक अभियोजक या अनुसंधान पदाधिकारी से यह जानकारी लेनी होगी कि उस आरोपी के विरुद्ध पूर्व में कितने आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि संबंधित अनुसंधानकर्ता या लोक अभियोजक के लिए यह ज़रूरी है कि वह ज़मानत की अर्ज़ीदार के पिछले सभी आपराधिक मामलों का इतिहास अदालत के समक्ष पेश करे।

आरोपी के आपराधिक इतिहास पर पुलिस और अभियोजक से मिली जानकारी को हर निचली अदालत को आदेश में उल्लेख करना होगा, जिससे वो किसी ज़मानत अर्ज़ी को मंज़ूर या खारिज करेंगे। न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद की एकलपीठ ने अनिल बैठा की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश को पारित किया।

अदालतों से पूर्व के आपराधिक मामलों को छुपा कर ज़मानत लेने की गलत तरीको पर रोकथाम लगाने के लिए हाई कोर्ट ने ऐसा आदेश जारी किया है। इस आदेश की प्रति सभी जिला न्यायाधीश को देने का भी निर्देश हाई कोर्ट ने दिया है। विदित हो कि अनिल बैठा के मामले में जमानत अर्ज़ीदर पर 10 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे, लेकिन उसने अपनी किसी भी ज़मानत अर्ज़ी में स्पष्ट तौर पर पूर्व के सभी आपराधिक मामलों के बारे में जानकारी नहीं दी थी। पिछला आपराधिक इतिहास को छुपा कर ज़मानत लेने के इस प्रयास को कोर्ट के साथ धोखाधड़ी करार देते हुए हाई कोर्ट ने इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराने के लिए भी राज्य सरकार को आदेश दिया है और हाई कोर्ट के महानिबंधक कार्यालय को निर्देश दिया है कि हाई कोर्ट के साथ इस तरह की धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज की जाए।

पंचायत चुनाव के दौरान नामांकन में गड़बड़ी पायी गयी तो चुनाव से आप हो सकते हैं बाहर

पंचायत चुनाव के प्रथम चरण के नामंकन का आज दूसरा दिन है अभी तक 900 सौ से अधिक प्रत्याशी नामांकन का पर्चा भर चुका हैं हलाकि आयोग ने इस नामांकन के दौरान कई तरह के गाइड लाइन जारी किया है जिसका अनुपालन नहीं करने पर प्रत्याशी का नामांकन रद्द हो सकता है ।

राज्य चुनाव आयोग के गाइडलाइन के मुताबिक नामांकन के दौरान कई जरूरी काजगात भी जमा करने होंगे।. नामांकन पत्र के साथ जरूरी कागजात नहीं रहने तथा कागजात में किसी तरह की त्रुटि होने पर अभ्यर्थी का नाम नामांकन पत्र रद्द कर दिया जा सकता है ।

आयोग के द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक नामांकन पत्र दाखिल करते समय निर्वाची पदाधिकारी नामांकन पत्र की बारिकी से जांच करेंगे.
अभ्यर्थी व प्रस्तावक के मतदाता क्रमांक में किसी तरह की गड़बड़ी होने पर निर्वाची पदाधिकारी उसे ठीक करायेंगे. लेकिन जरूरी कागजातों में किसी तरह की त्रुटि होने पर तथा कागजात नामांकन पत्र के साथ संलग्न नहीं रहने पर नामांकन पत्र रद्द हो जायेगा़ ।

. आयोग के द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक नाम निर्देशन पत्र प्रपत्र 6, शपत्र पत्र, अनुसूची-1(बिहार पंचायत राज अनिधियम 2006 की धारा 136 के संबंध में), अनुसूची-2(मतदाता सूची में अभ्यर्थी व प्रस्तावक के नाम दर्ज होने से संबंधित घोषणा), अनुसूची-3 (शपथ पत्र व एनेक्शचर को दी जाने वाली सूचनाओं का प्रपत्र), अनुसूची 3 क (अपराध, संपत्ति व शैक्षणिक योग्यता के संबंध में), अनुसूची 3 ख (अभ्यर्थी का बायोडाटा) देना जरूरी है़ इसके साथ नाम निर्देशन शुल्क, चालान या नाजिर रसीद की मूल कॉपी नामांकन पत्र के साथ संलग्न करना जरूरी है.

पीएम से मिलकर स्वास्थ्य मंत्री ने भेंट की नये बन रहे पीएमसीएच की आकृति

पीएम से मिलकर स्वास्थ्य मंत्री ने भेंट की नये बन रहे पीएमसीएच की आकृति

पटना, 3 सितंबर। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने शुक्रवार को माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में मिलकर बिहार में लगातार हो रही बड़ी संख्या में कोरोना जांच और टीकाकरण की विस्तृत जानकारी दी। खास कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में टीका वाली नाव के द्वारा किये जा रहे टीकाकरण के संबंध में बताया गया। साथ ही माननीय प्रधानमंत्री का इमरजेंसी कोविड रिसपोंस पैकेज-2 के तहत केंद्र से मिलने वाले सहयोग के लिए श्री पांडेय ने आभार भी व्यक्त किया। श्री पांडेय ने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री ने बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने एवं कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए राज्य सरकार को हर स्तर पर तैयारी करने की बात कही।

श्री पांडेय ने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री को बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और बेहतर बनाने के उद्देश्य से किये जा रहे राज्य सरकार के प्रयासों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया। इसके अलावे कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर आधारभूत संरचनाओं का विस्तार के अलावे डाॅक्टर्स, नर्स एवं पैरा मेडिकल स्टाफ की हो रही नियुक्ति के संबंध में भी जानकारी दी गई। श्री पांडेय ने बताया कि प्रधानमंत्री जी को दुनिया का दूसरा और देश के सबसे बड़े बन रहे 5 हजार 462 बेड के अस्पताल पीएमसीएच की आकृति भेंट की। माननीय प्रधानमंत्री ने इस कार्य के लिए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार की प्रशंसा भी की। श्री पांडेय ने बताया कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में बनाये जा रहे लगभग 16 सौ नये अस्पताल के भवनों (स्वास्थ्य उपकेंद्र, अतिरिक्त प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) के निर्माण की जानकारी भी माननीय प्रधानमंत्री को दी गई।

मंत्री जी के क्षेत्र भ्रमण पर लगी रोक चुनाव प्रचार करते दिखे तो होगी कारवाई

राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव को देखते हुए मंत्री ,विधायक और सांसद के क्षेत्र भ्रमण पर रोक लगा दिया है इस आदेश का ाअनुपालन नहीं करने वाले मंत्री ,विधायक और सांसद के खिलाफ आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के तहत मामला दर्ज में ।आयोग के निर्देश के अनुसार केन्द्र या राज्य सरकार के मंत्री ही नहीं विधायक, विधान पार्षद और सांसद भी अपने सरकारी यात्रा को चुनावी यात्रा से बिल्कुल अलग रखेंगे। दोनों यात्राओं को एक साथ नहीं किया जाएगा।

मंत्री यदि जिला मुख्यालय या क्षेत्रीय स्तर के कार्यालयों तक सरकारी कार्यों के सिलसिले में जाते हैं और उसके बाद निजी वाहन के माध्यम से चुनावी यात्रा करते हैं तब भी पूरे दौरे को चुनावी दौरा माना जाएगा।

साथ ही वो उम्मीदवार जिनके साथ मंत्री देखे जाएंगे उसके चुनावी खर्चे में मंत्री के पूरे दौरे का खर्च जोड़ दिया जाएगा। सरकारी वाहन से लेकर सरकारी भवन के चुनाव कार्यों के लिए उपयोग पर भारतीय दंड संहिता की धारा 171 (c) के तहत कार्रवाई होगी। इसके तहत दोष सिद्ध होने पर तीन महीने कारावास की सजा या दो सौ रुपए आर्थिक दंड हो सकता है या दोनों ही हो सकता है। यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है। इसकी सुनवाई मजिस्ट्रेट करेंगे।

रिकॉर्ड ऊंचाई पर शेयर बाजार; पहली बार सेंसेक्स 58100 के ऊपर, निफ्टी 17,300 के ऊपर बंद, रिलायंस सबसे आगे

हफ्ते के आखिरी दिन यानी शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 157 अंक या 0.3 फीसदी उछलकर 58140.33 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 87 अंक या 0.5 फीसदी बढ़कर 17321 पर पहुंच गया। मिडकैप इंडेक्स भी शुक्रवार को 104 अंक या 0.36 प्रतिशत की बढ़त के साथ 29,021 के स्तर पर पहुंच गया।

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के शेयर 4 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के साथ शीर्ष सूचकांक योगदानकर्ता थे। टाइटन कंपनी, बजाज-ऑटो, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, डॉ रेड्डीज लैबोरेट्रीज, एशियन पेंट्स शीर्ष सूचकांक प्राप्त करने वालों में से थे। इसके विपरीत, भारती एयरटेल का प्रदर्शन सबसे खराब रहा, जिसमें 1.20 प्रतिशत की गिरावट आई। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल), एचडीएफसी बैंक, हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस लिमिटेड (एचडीएफसी), इंडसइंड बैंक, एक्सिस बैंक सेंसेक्स में गिरावट में शामिल थे।

सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयर्स तेजी के साथ जबकि 11 शेयर्स कमजोरी के साथ बंद हुए। बीएसई पर कारोबार के दौरान 225 शेयर्स 52 हफ्ते के ऊपरी स्तर पर और 16 शेयर्स 52 हफ्ते के निचले स्तर पर कारोबार करते दिखे।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

भारत में भी लोकतंत्र को बचाये रखना एक बड़ी चुनौती है

सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया को लेकर बेहद कठोर टिप्पणी की है और कहा है कि ये कोर्ट के बारे में भी ताकतवर लोगों के इशारे पर लिखता रहता है ऐसे में इस पर कड़े कानून बनाये जाने कि जरुरत है।

सुप्रीम कोर्ट के इस ऑब्जरवेशन की तारीफ होनी चाहिए लेकिन सवाल यह है कि जिस तरीके से कोर्ट काम कर रही है, उसको लेकर कोर्ट खुद खमोश क्यों है कोर्ट में भ्रष्टाचार चरम पर है ,न्याय की खुल्लम खुल्ला बोली लगती है सब जानता है क्या ये बात कोर्ट को पता नहीं है ऐसे में सवाल करने पर भी रोक लगा दी जायेंगी तो फिर इसे क्या कहेंगे ये हिपोक्रेसी नहीं होगा ।
हाल ही पटना हाईकोर्ट ने सरकार से पुछा है कि ऐसे कितने सरकारी अधिकारी हैं जिनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं यही सवाल तो जज से भी होनी चाहिए थी कि कितने जज हैं जिनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। इसलिए सिर्फ सवाल करने और नसीहत देने से कोई भी संस्था ज्यादा दिनों तक चल नहीं सकती है ।

अफगानिस्तान इसका सबसे लेटेस्ट उदाहरण है चंद मिनट में ही चंद बंदूकधारी के सामने कोर्ट, सांसद ,पुलिस ,सेना और ब्यूोरोक्रेसी ताश की पत्तों की तरह बिखर गया क्यों? 20 वर्षो के दौरान लोकतंत्र, न्याय व्यवस्था,सैन्य ताकत ,स्त्री स्वतंत्रता और मानवाधिकार के नाम पर जो संस्थान खड़े हुए उस संस्थान में नियुक्ति की जो प्रक्रिया रही वो जनता को रास नहीं आया।
आज ही भारतीय मीडिया में लीड खबर है जेेईई मेंस की परीक्षा में जबरदस्त खेला हुआ है आज की तारीख में गौर करे तो कोई भी ऐसी परीक्षा है जहां आप भरोसे के साथ कह सकते हैं कि सब कुछ ठीक ठाक चल रहा है वैसे भारत में अभी भी परीक्षा में थोड़ी ईमानदारी बची हुई है इसलिए लोगों को सिस्टम पर भरोसा बचा हुआ है लेकिन यह भरोसा भी धीरे धीरे खत्म होता जा रहा है ।

मीडिया पर से भरोसा उठ ही गया है ,ब्यूरोक्रेसी हाफ ही रहा है ,न्याय व्यवस्था अपनी अंतिम सांस बचाये रखने के लिए संर्घष कर रहा है।

हमारे यहां सांसद और विधायक और मुखिया चुनने को लेकर जो संवैधिनाक प्रक्रिया है उसमें अब अच्छे लोगों के सांसद ,विधायक और मुखिया बनने की सम्भावना लगातार क्षीण होती जा रही है आने वाली राजनीति में लोहिया ,जेपी ,अटल बिहारी ,कर्पूरी ठाकुर, ,लालू ,नीतीश जैसे नेता पैदा होने की सम्भावना अब नहीं बची है।

ऐसे में आपके पास दुनिया का दूसरा तालीबान देश घोषित होने के लिए तैयार रहिए क्यों कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी लोकतंत्र को बने रहने के लिए जिस तरीके से संस्थान को मजबूत होना चाहिए था वो नहीं हो पाया ऐसे में पांच वर्ष में एक वोट के सहारे आप लोकतंत्र को बचाये नहीं रख सकते हैं यह यक्ष सवाल हमारे आपके सामने मुंह बाये खड़ा है ।

पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर सरकार का तेवर तल्ख कहा जेपी और लोहिया से समझौते का सवाल नहीं

जेपी और लोहिया के विचारों को बिहार के विश्वविधालय के पाठ्यक्रम से बाहर करने के मामले में राज्य सरकार राजभवन से दो दो हाथ करने के मूड में दिख रहा है आज राज्य के शिक्षा मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि इस मामले में महामहिम से मिलने का समय मांगा गया था लेकिन वो बिहार से बाहर है फिर उनसे मैंने फोन पर बात किया और एमए के पाठ्यक्रम में जो बदलाव हुआ है उससे सरकार के मंशा से अवगत करा दिया है और उम्मीद है कि राजभवन एमए के पाठ्यक्रम में जो बदलाव हुआ है उसको वापस ले लेगा ।

यह मामला बिहार के सारण स्थित जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय में जेपी और राममनोहर लोहिया के विचारों को पीजी के पाठ्यक्रम से हटाने की खबर के बाद सुर्खियों में था जिसको देखते हुए सरकार ने जेपी विश्वविधालय के कुलपति और रजिष्ट्रार को तलब किया था। कुलपति और रजिष्ट्रार से बातचीत के बाद शिक्षामंत्री विजय चौधरी सामने आए और सरकार का रुख साफ किया। शिक्षामंत्री ने कहा कि जयप्रकाश और लोहिया के विचारों की पढ़ाई जारी रहेगी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार दूसरे विश्वविद्यालयों में भी ऐसे मामलों की जानकारी लेगी।

मीडिया से बात करते हुए विजय चौधरी ने कहा कि सीएम नीतीश ने खुद मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि सीबीसीएस लागू होने से बदलाव की बात कही जा रही है। चांसलर के आफिस ने सभी वाइस चांसलर को इसे भेज दिया था। कहा कि विश्वविद्यालय के स्तर पर भी इन चीजों को देखा जाना चाहिए था, उसके बाद लागू करने की बात होनी चाहिए थी।
शिक्षामंत्री ने कहा कि हम लोगों के समझ में यह बात भी नहीं आ रही कि सीबीसीएस का पाठ्यक्रम में इस तरह के परिवर्तन से क्या लगाव है। कुछ लोगों के राजनीतिक विचार को पाठ्यक्रम से अलग क्यों किया गया, यह समझ से परे है। कहा कि छपरा के कुलपति ने भी अपनी तरफ से कोई आदेश दिया हो ऐसी बात नहीं है। यह जिस रूप में हुआ है, हम लोग इसे उचित नहीं मानते हैं। सरकार के दृष्टिकोण से भी यह बिल्कुल अनुचित और अनियमित है। अभी तक जो परंपरा और नियम रहे हैं, उसके अनुसार भी ठीक नहीं है। नई शिक्षा नीति को लेकर भी यह गलत है।

जेपी-लोहिया के विचार बिना भारतीयता की सोच ही संभव नहीं
उन्होंने कहा कि अगर कोई परिवर्तन हुए और चांसलर आफिस से दिये गए तो बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद को भी उसकी जानकारी होनी चाहिए, जो नहीं हुई है। कुलपति ने भी अपनी पूरी सहमति जताई है कि यह उचित नहीं है, हम लोग इसके निराकरण का उपाय करेंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया की सोच और विचार के बिना भारतीय राजनीति के दर्शन से समाजवाद, साम्यवाद और जेपी लोहिया के विचारों को अलग कर दिया जाएगा तो भारतीयता की सोच ही अलग हो जाएगी। यह लोग तो खालिस भारतीय विचारों के प्रतिबिंब हैं। उनके विचारों को कैसे अलग किया जा सकता है। कहा कि अभी तक इससे जुड़े कागजातों की पड़ताल नहीं हुई है। अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अन्य विश्वविद्यालयों की भी पड़ताल करें। हो सकते हैं वहां भी इसी तरह की दिक्कतें हों।

निफ्टी नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा; 17,200 के ऊपर बंद, सेंसेक्स 500 अंक से अधिक चढ़ा

साप्ताहिक एफएंडओ एक्सपायरी के दिन बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 रिकॉर्ड-उच्च स्तर के करीब कारोबार कर रहे थे। बीएसई सेंसेक्स 458 अंक या 0.80 प्रतिशत बढ़कर 57,788 पर था, जबकि एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स 0.80 प्रतिशत ऊपर 17,200 से ऊपर चल रहा था। कारोबार के दौरान निफ्टी ने 17,245 का नया रिकॉर्ड बनाया।

सेंसेक्स के 30 में से 22 शेयर्स तेजी के साथ जबकि 8 शेयर्स कमजोरी के साथ बंद हुए। टीसीएस 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर । आईटी, एफएमसीजी शेयरों के नेतृत्व में निफ्टी नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा ।

डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज, टाइटन कंपनी, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील, बजाज फिनसर्व, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), एचडीएफसी बीएसई सेंसेक्स में शीर्ष पर रहे। एचसीएल टेक, एशियन पेंट्स, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, इंफोसिस, मारुति सुजुकी शीर्ष सूचकांक में पिछड़ गए।

सेंसेक्स के 30 में से 22 शेयर्स तेजी के साथ जबकि 8 शेयर्स कमजोरी के साथ बंद हुए।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

हाईकोर्ट ने तेज प्रताप से चुनाव के दौरान साक्ष्य छुपाने को लेकर मांगा जबाव

पटना हाईकोर्ट में राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सह विधायक तेज प्रताप यादव के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका पर सुनवाई शुरु कर दिया है। तेज प्रताप यादव के हसनपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचन कोलेकर विजय कुमार यादव ने चुनाव याचिका दायर कर चुनौती दिया है।

कोर्ट में दोनों पक्षों की ओर से विवादित बिंदुओं को दाखिल किया गया। जस्टिस विरेन्द्र कुमार ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए इसे रिकॉर्ड पर रखने का आदेश दिया।
अब इस मामलें पर 30 सितंबर को सेटलमेंट ऑफ इशू और गवाही पर सुनवाई की जाएगी। गवाही में संबंधित पक्षकारों द्वारा उन दस्तावेजों और गवाहों की सूची भी दी जाएगी ,जो इस मुकदमें से जुड़े हुए होंगे।

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री व् विधायक तेज प्रताप यादव के अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने बताया कि याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधि एक्ट, 1951 की धारा 100 का हवाला देते हुए तेज प्रताप यादव के निर्वाचन को अमान्य घोषित करने के लिए यह चुनाव याचिका दायर की गई हैं।

अपनी याचिका में याचिकाकर्ता ने यादव के निर्वाचन को अमान्य करार देकर हारे हुए जद यू के उम्मीदवार राज कुमार राय को घोषित करने करने के लिए चुनाव याचिका दायर की है।
यह मामला वर्ष 2020 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव से जुड़ा हुआ है। याचिका दायर करने का आधार यादव द्वारा जानबूझकर अपनी संपत्ति के संबंध में पूरा ब्यौरा नहीं देने का आरोप लगाया गया है

याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधि क़ानून की धारा 123(2) के अनुसार इसे भ्रष्ट आचरण बताया है।

3 नवंबर, 2020 को विधानसभा चुनाव संपन्न हुआ था। 10 नवंबर, 2020 को चुनाव परिणाम घोषित किया गया था, जिसमें तेज प्रताप यादव हसनपुर विधानसभा चुनाव क्षेत्र से विजयी हुए थे। अब इस मामले में आगे की सुनवाई आगामी 30 सितंबर को की जाएगी।

बालू माफिया से सांठगांठ मामले में डीएसपी के घर छापेमारी

बालू माफिया से सांठगांठ मामले में आर्थिक अपराध इकाई ने कारवाई तेज कर दिया है आज पटना पालीगंज के तत्कालीन एसडीपीओ तनवीर अहमद के ठिकानों पर आर्थिक अपराध शाखा (ईओयू) ने छापेमारी की है। वे बालू के अवैध खनन में संलिप्तता के आरोप में निलंबित हैं। उनके पटना स्थित फ्लैट के अलावा बेतिया जिला के पैतृक घर की भी तलाशी ली जा रही है। इसके अलावा उनके नरकटियागंज अनुमंडल के मैनाताड़ थाना क्षेत्र के पीडारी गाँव में भी छापामारी चल रही है अहमद के पास आय से 60 प्रतिशत अधिक संपति पाई गई है।

डीएसपी का घर भारत-नेपाल सीमा पर है। ईओयू की इस कार्रवाई से पहले उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था। निलंबित किए गए डीएसपी के खिलाफ बालू माफियाओं संग सांठगांठ के सबूत मिले हैं।इससे पहले आर्थिक अपराध इकाई ने बालू माफिया से सांठगांठ मामले में निलंबित डेहरी के तत्कालीन एसडीओ सुनील कुमार सिंह के तीन ठिकानों पर एक साथ छापानारी किया था । ईओयू ने पटना और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर स्थित उनके पैतृक आवास पर भी छापेमारी किय था। वहां कमरे की तलाशी लेने के साथ ही घर पर मौजूद निलंबित एसडीओ से घंटों पूछताछ कि गयी थी ।

चुनाव आयोग ने पंचायत चुनाव के दौरान प्रत्याशियों के खर्च का सीमा किया निर्धारित

बिहार में पंचायत चुनाव का बिगुल बच गया है आज प्रथम चरण के चुनाव को लेकर दस जिलों के 12 प्रखंडों में नामांकन का काम शुरु हो गया है ।

वही इस बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों के अधिकतम खर्च की सीमा निर्घारित कर दिया है ।
आयोग ने सभी पदों के क्षेत्र व जनसंख्या के अनुसार चुनाव में खर्च की सीमा तय कर दी है। मुखिया और सरपंच प्रत्याशी अधिकतम 40 हजार ही खर्च कर पाएंगे वही वार्ड सदस्य और पंच पद के प्रत्याशी अधिकतम 20 हजार रुपए तक चुनाव में खर्च कर सकते हैं।

जिला परिषद प्रत्याशी को एक लाख रुपए तक खर्च करने की छूट दी गई है। वहीं आयोग ने पंचायत समिति सदस्य के पद पर चुनाव लड़ने वालों के लिए अधिकतम 30 हजार रुपया खर्च की सीमा तय कर दी है।

सभी प्रत्याशी को तय सीमा में ही खर्च करनी है साथ ही चुनाव में खर्च की गई राशि का हिसाब भी सभी को देना पड़ेगा। प्रत्याशियों को मतों की गणना का कार्य संपन्न होने के बाद चुनाव खर्च का ब्यौरा उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। अगर इस बार कोई प्रत्याशी खर्च का हिसाब नहीं देते हैं तो अगले चुनाव में वैसे प्रत्याशी चुनाव से वंचित रह सकते हैं।

सभी प्रत्याशियों को मतगणना की समाप्ति के 15 दिन के अंदर अपने खर्च का ब्यौरा निर्वाची पदाधिकारी के पास जमा करना अनिवार्य होगा। जांच में किसी प्रत्याशी के खर्च की राशि अधिक होती है तो ऐसे में उस प्रत्याशी पर चुनाव आयोग के फैसले का उल्लंघन करने के खिलाफ में कार्रवाई की जाएगी।

भ्रष्ट इंजीनियर के खिलाफ विभाग की चुप्पी से मंत्री और विभागीय अधिकारियों के कार्यशैली सवालों के घेरे में ।

दरभंगा ग्रामीण कार्य विभाग के अधीक्षण अभियंता को थाने से ही छोड़ने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है वही अभी तक विभाग द्वारा अभियंता पर कोई कारवाई नहीं किये जाने पर मंत्री सहित विभाग के प्रधान सचिव के मंशा पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं ।

डीजीपी ने पूरे मामले में एसएसपी मुजफ्फरपुर से इंजीनियर मामले में बरामद राशी और एफआईआर के साथ साथ थाने के स्टेशन डायरी तक की कांपी मांगी है। जो खबर आ रही है उसके अनुसार स्टेशन डायरी और एफआईआर दर्ज करने के समय को लेकर कई तरह की त्रृटि है जिसका लाभ अभियुक्त को मिल सकता है हलाकि अब इस पूरे मामले की जांच आईजी मुजफ्फरपुर खुद देख रहे हैं।
इस बीच मुजफ्फरपुर पुलिस के कार्यशैली को लेकर बिहार के पूर्व डीजीपी और बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त अभियान चलाने वाले अभयानंद का कहना है कि जो मीडिया रिपोर्ट है उसके अनुसार मुजफ्फरपुर पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में हैं।

सरकारी सेवक के पास से नगद पैसा बरामद होता है और उस पर आदर्श आचार संहिता का मामला दर्ज होता है जो समझ से पड़े है क्यों कि सरकारी सेवक के मामले में कानून पूरी तौर पर स्पष्ट है अगर किसी भी सरकारी कर्मी के पास से नगद पैसा बरामद होता है और उस पैसे का अगर हिसाब नहीं बता रहा है तो तुंरत उस पर पीसी एक्ट के तहत मामला दर्ज करना है ।
वही मुजफ्फरपुर पुलिस खुद कह रही है कि इंजीनियर के पास से बरामद लैपटांप और मोबाइल के डाटा मालूम करने में इंजीनियर सहयोग नहीं कर रहे हैं ऐसे में थाने से बेल देना समझ से पड़े है।

सीआरपीसी की धारा 41 के तहत नोटिस देने का प्रावधान है लेकिन वैसे स्थिति में ना जब अभियुक्त पुलिस को सहयोग कर रही है दूसरी बात अभियुक्त के बाहर रहने से साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता है लेकिन इंजीनियर मामले में सब कुछ सामने है थाने में रहते हुए छेड़छाड़ कर रहा था ऐसे में मुजफ्फरपुर पुलिस के कार्यशैली पर सवाल उठना लाजमी ही है।
इस बीच मुजफ्फरपुर एसएसपी जयकांत से जब थाने से छोड़ने को लेकर सवाल किया गया तो उनका कहना है कि इस तरह के मामले में थाने से बेल देने का प्रावधान है ,बिहार पुलिस इससे पहले भी इस तरह के मामले में बेल देती रही है ऐसे में इस तरह के सवाल का कोई मतलब नहीं है ।मुजफ्फरपुर पुलिस इस मामले की पूरी गहनता से छानबीन कर रही है और एएसपी स्तर के अधिकारी को इस कांड का अनुसंधानकर्ता बनाया गया है ।

इस बीच इस मामले को लेकर विभागीयमंत्री जयंत राज से जब यह पुंछा गया कि आपके विभाग के एक सीनियर इंजीनियर के पास से 67 लाख रुपया बरामद हुआ है और उस पर मुकदमा भी दर्ज हुआ है फिर भी अभी तक कोई कारवाई नहीं हुई है इस पर मंत्री का कहना है कि इस मामले में विभाग भी अपनी ओर से जांच कर रहा है और शीघ्र ही समुचित कार्रवाई की जाएगी।

बिहार सरकार शिक्षा दिवस के मौके पर राज्य के 20 शिक्षक को करेंगे सम्मानित

बिहार सरकार इस साल शिक्षक दिवस पर राज्य के 20 शिक्षकों को सम्मानित करेगी. इस संबंध में सरकार की ओर से सूची जारी कर दी गई है. शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि इन शिक्षकों को राजकीय सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।
शिक्षा विभाग की ओर से सूची जारी- शिक्षक दिवस के मौके पर जिन शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा, उनका नाम जारी कर दिया गया है.

  • निशि कुमारी (पटना)
  • धनंजय आचार्य (पटना)
  • कुमारी विभा (मधुबनी)
  • जितेंद्र कुमार (औरंगाबाद)
  • कंचन कामिनी (भोजपुर)
  • मनोज निराला (गया)
  • नसीम अख्तर (सारण)
  • राम एकबाल राम (मुजफ्फरपुर)
  • अमित कुमार (समस्तीपुर)
  • शिव नारायण मिश्र (मधुबनी)
  • प्रमोद कुमार (जहानाबाद)
  • राजीव कुमार (चंपारण)
  • शशिभूषण शाही (सारण)
  • नम्रता मिश्रा (भागलपुर)
  • पूनम यादव (सुपौल)
  • सुनीता सिन्हा (नालंदा)
  • भारती रंजन (दरभंगा)
  • श्रुति कुमारी (दरभंगा)
  • मंजू कुमारी (नवादा)
  • विभा रानी (बेगूसराय)

बिहार का एक और अधिकारी आय से अधिक संपत्ति मामले में पकड़ा गया

बिहार में भ्रष्टाचार किस कदर व्याप्त है उसकी बानगी आज राज्य सरकार के स्पेशल विजिलेंस के छापा के दौरान सामने आयी है ।

जी है नगर विकास विभाग के 2013 बैच के पदाधिकारी जो हाजीपुर नगर परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के पद से हाल ही सस्पेंड हुए हैं अनुभूति श्रीवास्तव के फ्लैट पर बुधवार को छापेमारी हुई। एक DSP की अगुवाई में स्पेशल विजिलेंस के 10 लोगों की टीम ने सुबह 7 बजे से ही दबिश दे रही है। पूरा मामला आय से अधिक की संपत्ति का है।

आरोप है कि अनुभूति श्रीवास्तव ने सरकारी पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार से जुड़े कई कांडों को अंजाम दिया है। अब तक वह अवैध रूप से करोड़ों रुपए की चल-अचल संपत्ति के मालिक बन चुके हैं। इनके खिलाफ काफी शिकायतें सरकार को भेजी जा रही थी, जिसके बाद इंटरनल जांच हुई। 18 अगस्त को ही इन्हें हाजीपुर नगर परिषद के मुख्य कार्यपाल पदाधिकारी के पद से सस्पेंड कर दिया गया था। फिर पटना के वीरचंद पटेल पथ स्थित स्पेशल विजिलेंस ने इनके खिलाफ FIR दर्ज की।

इसके बाद आज टीम ने राजधानी के रूकनपुरा इलाके के तिलक नगर में स्थित अर्पणा मेंशन में छापेमारी की।अभी तक जांच के दौरान सात वर्ष के नौकरी में अकूत सम्पर्ति अर्जित करने के प्रमाण मिले हैं जिसमें पटना में दो फ्लैट एक इंदौर में फ्लैट के साथ साथ एक करोड़ से अधिक निवेश और लगभग 75 लाख रुपया विभिन्न बैक खाते में जमा मिला है फिलहाल सारे कागजात और बैक खाते को विशेष निगरानी की टीम ने जप्त कर लिया है और इनके खिलाफ आय़ से अधिक सम्पत्ति मामले में प्राथमिकी दर्ज किया गया है ।

बिहार की शिक्षा व्यवस्था का हुआ भगवाकरण लालू प्रसाद ने सरकार पर लगाया आरोप

जयप्रकाश विश्वविधालय के पीजी कोर्स से जयप्रकाश नारायण,राममोहर लोहिया, दयानंद सरस्वती, राजाराम मोहन राय, बाल गंगाधर तिलक और एमएन राय जैसे महापुरुषों के विचार से जुड़े कोर्स को हटाये जाने को लेकर बिहार की सियासत भूचाल आ गया है । एक और जहां राज्य सरकार सकते में है वही लालू प्रसाद ने ट्टीट करके नीतीश और सुशील मोदी से सीधा सवाल किया और कहां है कि मैंने जयप्रकाश जी के नाम पर अपनी कर्मभूमि छपरा में 30 वर्ष पूर्व जेपी विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। अब उसी यूनिवर्सिटी के सिलेबस से संघी बिहार सरकार तथा संघी मानसिकता के पदाधिकारी महान समाजवादी नेताओं जेपी-लोहिया के विचार हटा रहे है। जेपी-लोहिया हमारी धरोहर है, उनके विचारों को हटाना बर्दाश्त से बाहर है। सरकार अविलंब संज्ञान लेकर आवश्यक कारवाई करें।

वैसे विश्वविधालय का जो नया सिलेबस आया है उसमें पंडित दीनदयाल उपाध्याय, सुभाष चंद्र बोस और ज्योतिबा फुले के विचार को जोड़ा गया है यह बदलाव राजभवन के द्वारा किया है इस बदलाव से जुड़ी खबर के आने के बाद सरकार के सामने मुसिबत यह है कि बीजेपी में भी बहुत सारे नेता ऐसे हैं जो जेपी आंदोलन से जुड़े रहे हैं और बिहार में जेपी आंदोलन को लेकर छवि यह है कि कांग्रेस के खिलाफ वो आंदोलन था और इसका लाभ बीजेपी को भी बिहार में मिलता है ऐसे में जेपी और लोहिया को सिलेबस से हटाना एनडीए की सरकार के लिए मुसिबत खड़ी कर सकती है ।

सेंसेक्स 214 अंक गिरकर 57,338 पर और निफ्टी 56 अंक गिरकर 17,076 पर हुआ बंद

घरेलू इक्विटी बाजार बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 ने सुबह के सभी लाभ मिटा दिए और बुधवार को लाल रंग में बंद हुए।

बीएसई सेंसेक्स 215 अंक या 0.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,338 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी 56 अंक या 0.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,076 पर बंद हुआ।

मेटल और आईटी इंडेक्स में 1-1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि कैपिटल गुड्स, पावर और रियल्टी इंडेक्स में 1-5 फीसदी की तेजी आई। बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए।

निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी आईटी, निफ्टी मेटल और निफ्टी फार्मा इंडेक्स को छोड़कर निफ्टी सेक्टोरल इंडेक्स ज्यादातर हरे रंग में बंद हुए। बैंक निफ्टी 0,4 फीसदी की बढ़त के साथ 36,574.30 पर बंद हुआ

इससे पहले दिन में, बेंचमार्क उच्च स्तर पर खुला, जिसमें सेंसेक्स 366 अंक बढ़कर 57,918.71 के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया और निफ्टी 50 इंडेक्स 17,225.75 के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू गया।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

बिहार का एक बार फिर सपना टूटा इथेनाँल निर्माण के मामले में केन्द्र सरकार ने नहीं दी छूट

बिहार को इथेनॉल का हब बनाने का सपना टूटा गया केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर करते हुए तेल कंपनियों ने बिहार के लिए एक वर्ष में मात्र 14 करोड़ लीटर इथेनॉल क्रय की सीलिंग तय कर दी है। यह मात्रा बमुश्किल चार यूनिट के जरिए ही पूरी हो जाएगी जबकि राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद (एसआइपीबी) ने 28 मई से छह जुलाई के बीच कुल बिहार में इथेनॉल बनाने की फैक्ट्री लगाने को इक्छुक 138 प्रस्तावों को स्टेज-1 क्लियरेंस दिए थे ।

बिहार में गन्ना और मक्का से इथेनॉल निकालने की सम्भावना है शुरुआती दिनों में गन्ना को लेकर यह कहा जा रहा था कि उत्तर बिहार में जिस स्तर पर गन्ना का पैदावार हो रहा है उससे काफी मात्रा में इथेनॉल बनाया जा सकता है अभी भी सुगरकेन से जुड़ी कई फैक्ट्री इथेनॉल बनाने का काम कर रही है लेकिन गन्ना उत्पादन को लेकर जब अध्ययन किया गया तो पता चला कि चीनी मिल के रैवेय के कारण किसान गन्ना उत्पादन में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं इस वजह से गन्ना से इथेनॉल बनाने का सपना टूट गया ।

बिहार के पास दूसरा प्रोडक्ट मक्का है जिससे इथेनाँल निकाला जा सकता है लेकिन देश के अंदर मुर्गी दाना और पॉपकॉर्न के उत्पादन में मक्का का इतना अधिक मांग है कि इथेनाँल बनाने के लिए बिहार को सरप्लस मक्का है ही नहीं वैसे भारत सरकार ने बिहार को मक्का से इथेनाँल बनाने के लिए जो कोटा निर्धारित किया है उसमें अन्य राज्यों से तुलना करे तो बिहार के साथ सौतेला व्यवहार किया गया है

क्यों कि पेट्रोलियम कंपनियों ने मक्का से इथेनाँल बनाए जाने वाले राज्यों का जो कोटा तय किया है उसमें कई राज्य ऐसे हैैं, जहां मक्का का उत्पादन नहीं के बराबर है। बिहार से वहां मक्का जाता है। इसके बावजूद भी उनका कोटा बिहार से ज्यादा तय किया गया है। दिल्ली का कोटा 33 करोड़ लीटर, झारखंड का 18 करोड़ लीटर, बंगाल का 35 करोड़ लीटर, केरल का 55 करोड़ लीटर तय किया गया है। जहां मक्का नहीं होता उन राज्यों के लिए भी मक्का से इथेनाँल का कोटा तय किया गया। असम में दस करोड़ लीटर, मेघालय में चार करोड़, मणिपुर में ढाई करोड़, अरुणाचल प्रदेश में दो करोड़, मिजोरम में एक करोड़ और सिक्किम के लिए एक करोड़ लीटर का कोटा तय किया गया है।सौ फीसद बायबैक का मामला तय नहीं हुआ
इथेनाल बनाने के लिए जिन यूनिटों को एसआइपीबी से स्टेज-1 का क्लियरेंस मिला था, उन्हें बैैंकों ने इस वजह से ऋण देने से मना कर दिया था कि वे अपने उत्पाद के विपणन की गारंटी उपलब्ध कराएं। ऐसे में राज्य के उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से बात कर बिहार से इथेनाल के सौ फीसद बायबैक को लेकर करार करने की मांग की थी। हालांकि, इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ।

वर्तमान में पेट्रोल में दस प्रतिशत तक इथेनाल मिलाए जाने की अनुमति है। बिहार में प्रतिवर्ष 145 करोड़ लीटर पेट्रोल की खपत है। इस लिहाज से राज्य का कोटा तय हुआ। बिहार की वर्तमान क्षमता नौ करोड़ लीटर की है। चार करोड़ लीटर की क्षमता प्रक्रिया में है।

इथेनाल के प्रस्तावों को इस वर्ष मिला स्टेज-1 क्लियरेंस
28 मई को एसआइपीबी की बैठक में 13 यूनिट को
28 जून को एसआइपीबी की बैठक में 55 यूनिट को
06 जुलाई को एसआइपीबी की बैठक में 70 यूनिट को

बिहार के उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन ने कहा कि राज्‍य को कम से कम 60 हजार करोड़ लीटर का कोटा मिलना चाहिए। बंगाल, झारखंड व पूर्वोत्तर राज्यों के अतिरिक्त दिल्ली का कोटा भी हमें तब तक मिल जाए जब तक इन राज्यों में मक्के का उत्पादन नहीं होता है। मैंने इस संबंध में केंद्र में बात की है। कहा गया है कि ग्रुप आफ मिनिस्टर के समक्ष इस मामले को रखा जाएगा।

रोजगार को लेकर तेजस्वी ने नीतीश कुमार पर बोला हमला कहां नौकरी देने का वादा कहां गया

नेता प्रतिपंक्ष तेजस्वी यादव ने एक बार फिर रोजगार को लेकर नीतीश सरकार को घेरा साथियों, एक रिपोर्ट के अनुसार विगत एक वर्ष में बिहार में 15 लाख नौकरियाँ और रोजगार समाप्त हुए है बल्कि एनडीए सरकार का 19 लाख नौकरियाँ और रोजगार देने का वादा था।

युवा विरोधी एनडीए सरकार 16 वर्षों से बेरोजगारी मिटाने और नौकरी देने वाली एक सुदृढ़ नीति भी नहीं बना पाई है। नौकरी देना तो बहुत दूर की बात है अब ये नौकरी छिनने में लगे है।

प्रदेश में नियमित नौकरियों में इतना भ्रष्टाचार और घूसखोरी है कि कोई योग्य अभ्यर्थी इसमें अपनी जगह बना ही नहीं पाता है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार इतनी नाकारा हो चुकी है कि विगत 16 वर्षों में बिहार में कोई उद्योग-धंधे नहीं लगे, कोई पूंजी निवेश नहीं हुआ, संगठित-असंगठित क्षेत्र में रोजगार और नौकरियों के अवसर उत्पन्न हुए ही नहीं क्योंकि सरकार की तरफ़ से कोई सकारात्मक पहल नहीं की जा रही है।

कुटीर और घरेलू उद्योगों के लिए सरकारी अनुदान और प्रोत्साहन राशि पाने में घूसखोरी, अफसरशाही और लाल फीताशाही की इतनी दीवारें हैं कि बिना भाई भतीजावाद और रिश्वत के इसे पाना असंभव है।

मुजफ्फरपुर पुलिस के कार्यशैली पर खड़े हुए सवाल भ्रष्ट इंजीनियर को थाने से ही मिला बेल

बिहार में भ्रष्टाचार को लेकर एक कहावत बहुत प्रचलित है खीरा चोर को जेल और हीरा चोर को बेल मुजफ्फरपुर पुलिस कुछ ऐसा ही कर दिखाया है जिस इंजीनियर के पास से 67 लाख रुपया केस बरामद हुआ है उसको थाने पर से ही बेल दे दिया गया है ,जबकि खुद थाना अध्यक्ष लिखित में स्वीकार किया है कि इंजीनियर अनुसंधान में सहयोग नहीं कर रहे हैं कोर्ट में पुलिस आवेदन दिया है कि लैपटांप और मोबाइल खोलने में इंजीनियर सहयोग नहीं कर रहे हैं इस वजह से इसमें क्या साक्ष्य है पता नहीं चल पा रहा है ऐसे में लैपटांप और मोबाइल की जांच के लिए एक्सपर्ट के पास भेजने की अनुमति दी जाये ,इंजीनियर पर अब जो मामला दर्ज हुआ है उसके तहत आईपीसी की धारा 424 और भ्रष्टाचार निवारण की धारा 13 (1बी) लगाया है हलाकि इसमें सात वर्ष के सजा का प्रावधान है ऐसे में आप थाना से जमानत दे सकते हैं लेकिन जो अपराधी आपको अनुसंधान में सहयोग नहीं कर रहा है उसको आप थाने से बेल कैसे दे दिए ये एक बड़ा सवाल मुजफ्फरपुर पुलिस से हैं क्यों कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अधिकांश मामले में पुलिस सात वर्ष से कम सजा वाले मामलों में थाने पर से बेल नहीं देता है फिर इस इंजीनियर से किस बात का मोहब्बत मुजफ्फरपुर पुलिस को सामने आकर कहना चाहिए वही पांच दिन बाद भी इस मामले को लेकर राज्य में भ्रष्टाचार को लेकर गठित कोई भी एजेंसी अभी तक इस मामले को टेक ओभर नहीं किया है ऐसे कई सवाल है जिसको लेकर पुलिस मुख्यालय से लेकर मुजफ्फरपुर पुलिस तक चुप्पी साधे हुए हैं ऐसे में संदेश और सवाल स्वभाविक है कौन है इंजीनियर का रहनुमा जिसके सामने पूरी सरकार मूक दर्शक बनी हुई है और इंजीनियर कह रहा है कि बिहार में वर्क कल्चर ऐसा है कि पैसा लेना पड़ता है इसलिए ज्यादा सवाल मत करिए मुंह खोल दूं तो पटना तक में भूचाल आ जाएगा ।

पंचायत चुनाव में इस बार जिला मुख्यालय में होगी मतगणना

राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के मतगणना को लेकर बड़ा फैसला लिया है इस बार मतगणना जिला मुख्यालय में होगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने बिहार के सभी डीएम को पत्र जारी करते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा है कि किसी भी परिस्थिति मतगणना प्रखंड या अनुमंडल स्तर पर नहीं होगा ।


आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि मतपेटियों को प्रखंड मुख्यालय की बजाय जिला स्तर पर ही संग्रहण केंद्र बनाएं। वहीं पर ईवीएम और बैलेट बॉक्स को रखने की व्यवस्था करें।


पंचायत चुनाव में पहले प्रखंड स्तर पर ही मतगणना होती थी लेकिन इस बार व्यवस्था बदल दी गई है। मतगणना स्थल पर बनाए जाने वाले संग्रहण केंद्र पर पंचायतवार रीसिविंग काउंटर बनाया जाएगा। दो या तीन पंचायत पर एक काउंटर की व्यवस्था की जाएगी। मुख्य काउंटर के पीछे पदवार ईवीएम एवं मतपेटिका को प्राप्त करने के लिए पांच सब काउंटर भी बनाए जाएंगे। सब काउंटर से पदवार चिन्हित ब्रजगृह में संबंधित पद के लिए ईवीएम एवं आवश्यक प्रपत्र(पीठासीन पदाधिकारी की घोषणा, मतपत्र लेखा एवं पेपरसिल लेखा) को पदवार चिन्हित वज्रगृह में रखा जाएगा।


मतगणना स्थल पर प्रत्येक पंचायत के लिए पांच व्रजगृह बनाए जाएंगे, जिसमें अलग-अलग पद के लिए जैसे ग्राम पंचायत वार्ड सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य तथा जिला परिषद सदस्य के लिए होगा। पंच और सरपंच पद के लिए अलग से एक अतिरिक्त कक्ष बनाया जाएगा।

बाढ़ से बेहाल बिहार रेलवे पुल पर दवाब की वजह से मिथिलाचंल का देश से सम्पर्क टूटा

हायाघाट के पास रेलवे पुल पर पानी के दबाव के कारण जयनगर रेलखंड पर कई ट्रेनों का परिचालन ठप हो गया है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से रेलवे प्रशासन ने जयनगर-भागलपुर एक्सप्रेस वे, जयनगर-समस्तीपुर पैसेंजर सहित कई ट्रेनों को रद कर दिया है।इसके साथ ही गंगासागर एक्सप्रेस सहित कुछ ट्रेनें समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और बरौनी से चलाए जाने की खबर है। पवन और शहीद एक्सप्रेस सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर के रास्ते चलेंगी। ट्रेनों के रद होने और रूट डायवर्जन के लिए रेल यात्रियों को काफी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है।

01 सितंबर को अपने प्रारंभिक स्टेशन से प्रस्थान करने वाली वैसी ट्रेनें जिनका परिचालन रद्द किया गया है-

  • 05549 जयनगर-पटना स्पेशल ट्रेन
  • 05550 पटना-जयनगर स्पेशल ट्रेन
  • 05553 भागलपुर-जयनगर स्पेशल ट्रेन
  • 05554 जयनगर-भागलपुर स्पेशल ट्रेन
  • 05589 समस्तीपुर-दरभंगा स्पेशल ट्रेन
  • 05590 दरभंगा-समस्तीपुर स्पेशल ट्रेन
  • 05593 समस्तीपुर-जयनगर स्पेशल ट्रेन
  • 05594 जयनगर-समस्तीपुर स्पेशल ट्रेन
  • 05283 मनिहारी-जयनगर स्पेशल ट्रेन
  • 05284 जयनगर-मनिहारी स्पेशल ट्रेन 03225 जयनगर-राजेंद्र नगर टर्मिनल स्पेशल ट्रेन
  • 03226 राजेंद्र नगर टर्मिनल-जयनगर स्पेशल ट्रेन
  • 03227 सहरसा-राजेंद्र नगर टर्मिनल स्पेशल ट्रेन
  • 03228 राजेंद्र नगर टर्मिनल-सहरसा स्पेशल ट्रेन
  • 05559 दरभंगा-अहमदाबाद स्पेशल ट्रेन

सोशल मीडिया के सहारे पंचायत चुनाव पर आयोग की रहेगी नजर

बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर आयोग पहली बार सोशल मीडिया पर उम्मीदवारों की मॉनिटरिंग करेगा. चुनाव के दौरान किसी भी गड़बड़ी की शिकायत के लिए चुनाव आयोग के द्वारा हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है.ऐप के माध्यम से मतदाता शिकायत दर्ज करा सकेंगे. आयोग ने शिकायत पर त्वरित कारवाई करने के लिए हेल्पलाइन नंबर18003457243 जारी किया है. राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव की ऑनलाइन निगरानी कि विभिन्न की सुविधाएं इस बार पंचायत चुनाव में देखने को मिलेगी.


जागरूकता के लिए सोशल मीडिया का सहारा- बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग द्वारा मतदाताओं को जागरूक करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा है. राज्य निर्वाचन आयोग (bihar state election commission) ने पंचायत चुनाव पर विशेष गीत भी लांच किया है. ये है बिहार जय जय बिहार गीत को कलर ट्यून के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके अलावा मतदाताओं से मतदाता सूची की तैयारी और मतदान केंद्रों की स्थापना को लेकर संवाद स्थापित किया जा रहा है.


बायोमेट्रिक मशीन का इस्तेमाल- बिहार के पंचायत चुनाव में पहली बार बायोमेट्रिक मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है. राज्य में बोगस वोटिंग रोकने के लिए मतदान केंद्रों पर बायोमेट्रिक का भी इस्तेमाल किया जाएगा. बायोमेट्रिक के लगने से मतदाता दो बार मतदान नहीं कर सकेंगे. ईवीएम का प्रयोग- बिहार पंचायत चुनाव में पहली बार ईवीएम का प्रयोग किया जाएगा. राज्य में मुखिया (Mukhia), जिला परिषद, वार्ड सदस्य और पंचायत समिति पद के लिए मतदाता ईवीएम से वोट कर सकेंगे. वहीं पूरे चुनाव में ईवीएम मशीन और पोलिंग पार्टी को भी ऑनलाइन ट्रैकिंग की जायेगी. ईवीएम (EVM) मतदान केंद्र से कब निकली और मतगणना कक्ष तक कितनी देर में पहुचेगी इसकी जानकारी जीपीएस के माध्यम से मिल सकेगी.पोलिंग पार्टी भी मतगणना केंद्र पर कब पहुचेगी इसकी भी ऑनलाइन ट्रैकिंग की जायेगी

शताब्दी भवन के तोड़ने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग (शताब्दी भवन )के पास मजार से सटे एक बहुमंजिली इमारत के हुए अवैध निर्माण को तोड़ने के पटना हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। जस्टिस यू यू ललित की पीठ ने राज्य सरकार व अन्य की अपील पर सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट के इस मामलें में बहाल amicus curie वरीय अधिवक्ता राजेंद्र नारायण को जारी किया हैं।

इससे पूर्व जस्टिस अश्विनी कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय जजों की बेंच ने इस मामलें पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। जजों की पाँच सदस्यीय बेन्च ने बहुमत के निर्णय से इस भवन निर्माण को अवैध करार देते हुए एक माह के भीतर तोड़ने का आदेश दिया था ।
इस भवन के निर्माण पर कोर्ट ने तत्काल रोक लगाते हुए राज्य सरकार से पूछा था कि क्या इसके निर्माण को लेकर पटना हाईकोर्ट और पटना नगर निगम से भी अनुमति ली गई थी ?

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ललित किशोर ने कोर्ट को बताया था कि नई बिल्डिंग से सटे मजार के करीब वक्फ बोर्ड का चार मंजिला कार्यालय बन रहा है। कार्यालय के सबसे नीचे मुसाफ़िर खाना बन रहा है।
य़ह तिमंजिला भवन है एवं नए इमारत के निर्माण में किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी ।
इस पर जजों ने कहा था कि यह गलत तरीके से बना है।बिल्डिंग बाय लॉ की धारा 21 में स्पष्ट कहा गया है कि विधान सभा , राजभवन और हाईकोर्ट जैसे महत्वपूर्ण और सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील से सटे कोई दूसरी बिल्डिंग नहीं बनाई जा सकती है। साथ ही इसकी उँचाई 10 मीटर से अधिक नहीं हो सकती हैं।इस मामलें पर नोटिस का जवाब मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट पुनः सुनवाई करेगा।

भ्रष्टाचार को लेकर सरकार के जीरो टांलरेंस के दावे की खुली पोल इंजीनियर ने कहा मुंह खोलूंगा तो सरकार हिल जाएगी ।

सरकार भले ही भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की बात करता है लेकिन पिछले 72 घंटे से एक इंजीनियर जिस तरीके से पूरी सरकार को लील डाउन कराये हुए है यह देख कर मेरे जैसा पत्रकार भी हैरान है कि नीतीश कुमार के सीएम रहते हुए सिस्टम इतना लाचार बेवस और कमजोर कैसे हो सकता है ।


जी है मैं बात कर रहा हूं दरभंगा जिले में ग्रामीण कार्य विभाग में पदस्थापित अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार की जिन्हें मुजफ्फरपुर पुलिस ने तीन दिन पहले 18 लाख रुपया केस के साथ पकड़ा है हलाकि उसके पास दो करोड़ से ज्यादा पैसा था ऐसी खबरे हम लोग के पास आ रही थी ।


खैर मैंने जब मुजफ्फरपुर एसएसपी जयकांत से खुद बात किया तो इन्होंने कहा कि संतोष जी 30 लाख रुपया बरामद हुआ है हमलोग भी सून रहे हैं कि दो करोड़ इसके पास था लेकिन गांड़ी में इतना ही है आर्थिक अपराध इकाई और इनकमटैक्स को सूचना दे दिए हैं वो लोग आ रहे हैं जो कारवाई करे वो लोग। एसएसपी मुजफ्फरपुर से हमारी बात दोपहर दो बजे के करीब हुई थी शाम में एएसपी वेस्ट सैयद इमरान मसूद ने कहा कि इंजीनियर के पास से 18 लाख रुपया बरामद हुआ है और इंजीनियर पर पंचायत चुनाव को लेकर राज्य में जारी आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गयी है जिसमें इस समय नगद पैसे लेकर चलने पर रोक है ।


ये समझ से पड़े कि बात है कि एक सरकारी इंजीनियर जिसके विभागीय गांड़ी से 18 लाख रुपया नगद पैसा बरामद होता है और उस पर मुखिया चुनाव वाले धारा के तहत मामला दर्ज होता है ,और इससेे बड़ी बात यह है कि एएसपी वेस्ट को जब मीडिया वाले ने इंजीनियर को मीडिया के सामने लाने को कहां तो इस तरह भड़क गये जैसे मीडिया वाले कोई अपराध कर दिया हो अभी तक इंजीनियर की तस्वीर किसी मीडिया के पास नहीं है।


खैर मुजफ्फरपुर पुलिस उसी दिन शाम में थाना पर से ही इंनजीयिर को जमानत दे दिया हलाकि इस मामले में एएसपी और एसएसपी दोनों से सवाल किया गया तो अधिकारिक तौर पर कोई जबाव नहीं दिया गया फिर दूसरे दिन खबर आती है कि इंजीनियर के दरभंगा और पटना स्थित आवास पर छापा मारा गया तो 49 लाख रुपया नगद उसके आवास से बरामद हुआ।
49 लाख रुपया की बरामदगी के बावजूद अभी तक पुलिस यह तय नहीं कर पा रही है कि इस इंजीनियर के साथ करे क्या ,वैसे खबर आ रही है कि इंजीनियर पुलिस को पुछताछ में सहयोग नहीं कर रही है इसलिए अब इनको बेल दे कर छोड़ दिया जाये अभी वो पुलिस हिरासत में है या फिर पुलिस उसको छोड़ दिया है हलाकि अधिकारिका तौर पर पूरा सिस्टम खामोश है कोई भी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है ।


बिहार में भ्रष्टाचार को लेकर मुख्यमंत्री के अंदर तीन विभाग है विशेष निगरानी ,निगरानी और आर्थिक अपराध इकाई जिसके अधिकारी सीधे सीएम को रिपोर्ट करते हैं एक इंजीनियर के पास से 67 लाख रुपया कैस बरामद हो रहा है लेकिन ये सारी ऐजेंसी ऐसे खामोश है जैसे ये कोई साधारण बात है आर्थिक अपराध इकाई की एक टीम पहुंची हुई है लेकिन चार दिन होने को है लेकिन अभी तक कोई बड़ी कारवाई नहीं हुई है ।


ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि ये इंजीनियर कौन है क्यों कि चैन छिनतई में एक पूर्व विधायक के बेटा की गिरफ्तारी हुई तो पुलिस भी और हम मीडिया वाले भी बड़े बड़े अंक्षर में लिख रहे हैं दिखा रहे हैं लेकिन इस इंजीनियर को लेकर पूरा सिस्टम खामोश है कहां जा रहा है कि इस इंजीनियर का रिश्ता सत्ता में बैठे ऐसे लोगों से हैं जो इन दिनों सरकार के नाक के बाल बने हुए हैं इसलिए कारवाई करने से सब बच रहा है ।सबसे बड़ी बात है ग्रामीण कार्य विभाग के एक सीनियर इंजीनियर चार दिनों से पुलिस के हिरासत में है और विभाग ऐसे खामोश है जैसे कुछ हुआ ही नहीं है ।