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पंचायत प्रतिनिधियों के असहज मौत पर राज्य सरकार देंगी मुआवजा

पंचायत चुनाव से ठीक पहले राज्य सरकार ने पंचायत प्रतिनिधियों को लेकर कई तरह के फैसले लिए हैं जिसमें मुखिया ,सरपंच के क्षेत्राधिकारी के साथ साथ अब कार्यकाल के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों की मौत होने पर सरकार मुआवजा का भी प्रावधान किया है ।

राज्य निर्वाचन आयोग से मिली जानकारी के अनुसार, चुनावी व्यवस्था के तहत जिला परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति प्रमुख, उप प्रमुख, पंचायत समिति के सदस्य, मुखिया, उप मुखिया, ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम कचहरी सरपंच, उप सरपंच और ग्राम कचहरी के पंच चुनाव जीतते हैं और कार्यकाल के दौरान उनकी आपराधिक घटना, प्राकृतिक आपदा या हिंसात्मक घटना और दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है तो उनके स्वजन को सरकार की ओर से पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। मृत्यु की स्थिति में राशि स्वीकृति का अधिकार सरकार ने जिलाधिकारी को दिया है।

चारा घोटाला से जुड़े जांच अधिकारी का हुआ तबादला

बहुचर्चित चारा घोटाला से जुड़े सीबीआई के दो जांच अधिकारी बीके सिंह और दशरथ मुर्मू का रांची से पटना एवं कोलकाता स्थानांतरण किया गया है। एसपी स्तर के दोनों सीबीआई अधिकारी वर्तमान में रांची सिविल कोर्ट में सुनवाई के लिए लंबित चारा घोटाला के दो मामले आरसी 47ए/ 1996 और आरसी 48 ए/1996 के जांच पदाधिकारी रहे हैं । पूर्व में पटना हाईकोर्ट और बाद में झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई के सीनियर अधिकारी चारा घोटाला मामले की सुनवाई में लगातार मॉनिटरिंग कर रहे थे। मामले की सुनवाई बाधित न हो इस वजह से झारखंड हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने इन अधिकारियों के तबादले पर रोक लगा रखी थी। 

मालूम हो कि रांची में चारा घोटाले से जुड़े कुल 53 मामलों को सुनवाई के लिए रांची सिविल कोर्ट भेजा गया था। जबकि  11 मामलों की सुनवाई पटना स्थित सिविल कोर्ट में चली। रांची सिविल कोर्ट के स्पेशल जज ने अभी तक 51 मामलों का निष्पादन कर अपना फैसला सुना दिए हैं। जबकि चारा घोटाला के दो बड़े मामले अभी भी सुनवाई के लिए लंबित है। सीबीआई अधिकारी बीके सिंह लालू प्रसाद से जु़ड़े चारा कांड संख्या आरसी 47 ए /1996 के जांच अधिकारी हैं। जबकि सीबीआई के दूसरे अधिकारी दशरथ मुर्मू आरसी 48 ए/1996 के जांच पदाधिकारी हैं।

राज्य में चल रहे विशेष क्वारन्टाइन जेल बंद अब समान्य जेलों में रहेगा कैदी

कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जेलों में कोरोना की रोकथाम और बचाव के लिए बनाई गई विशेष क्वारन्टाइन जेलों (Special Quarantine Cell) को बंद कर दिया गया। जेल आइजी मिथिलेश मिश्र (Jail IG Mithilesh Mishra) ने कोरोना का कहर समाप्त होते ही विशेष क्वारन्टाइन जेलों की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है।

सूबे के विभिन्न न्यायालयों से न्यायिक हिरासत में भेजे जाने वाले आरोपित अब सीधे स्थानीय जेल भेजे जाएंगे। पूर्व की तरह कोरोना से बचाव को बनाए गए विशेष क्वारन्टाइन जेलों में अब उन्हें 14 दिनों के लिए क्वारन्टाइन के लिए नहीं भेजा जाएगा।

कोरोना लहर को देखते हुए 2020 में कोरोना महामारी की भयावह स्थिति से जेल में बंद बंदियों को बचाने के लिए विशेष क्वारन्टाइन जेल बनाए गए थे। कोरोना का असर समाप्त होने के बाद 2020 में ही कुछ दिनों के लिए यह विशेष व्यवस्था स्थगित की गई थी पर कोरोना की दूसरी लहर आते ही 11 अप्रैल 2021 से पुन: इसे न सिर्फ बहाल किया गया था बल्कि कई सुविधाओं से भी लैस कराते हुए बंदियों के लिए वेक्सिनेशन की भी सुविधाएं मुहैया कराई गई थी।

रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा सेंसेक्स, निफ्टी । भारती एयरटेल 5% से अधिक उछला।

बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 ने सोमवार को रिकॉर्ड स्तर पोस्ट किया, जिसे ब्लू-चिप काउंटरों में व्यापक-आधारित खरीदारी का समर्थन मिला। सेंसेक्स 765 अंक, 1.36 प्रतिशत बढ़कर 56,889.76 पर और निफ्टी 50 1.35 प्रतिशत , 226 अंक की बढ़त के साथ 16,931 पर बंद हुआ।

बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऊर्जा, हेल्थकेयर, यूटिलिटीज, ऑटो, कैपिटल गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल, ऑयल एंड गैस और पावर इंडेक्स भी 1.5-2.5 फीसदी के बीच आगे बढ़े।

मिड- और स्मॉल-कैप शेयरों में भी दिलचस्पी देखी गई क्योंकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में लगभग 2 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.5 फीसदी की तेजी आई।

इंडेक्स हैवीवेट जैसे भारती एयरटेल, एक्सिस बैंक, टाटा स्टील, टाइटन कंपनी, मारुति सुजुकी, बजाज फाइनेंस, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई), एशियन पेंट्स और आरआईएल, अन्य शीर्ष सूचकांक प्राप्त करने वाले थे। दूसरी तरफ, नेस्ले इंडिया, टेक महिंद्रा, इंफोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) सेंसेक्स में पिछड़ गए।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

सरपंच होंगे पंचायत का प्रशासनिक हेड

पंचायत चुनाव से ठीक पहले पंचायती राज विभाग (Bihar Panchayati Raj Vibhag) ने नए सिरे से मुखिया व सरपंच के दायित्वों का निर्धारण किया है। इसके तहत मुखिया को जहां ग्राम सभा और पंचायतों की बैठक बुलाने का अधिकार होगा, वहीं इनके जिम्मे विकास योजनाओं के लिए मिलने वाली पंजी की निगरानी की भी जिम्मेवारी होगी। वहीं सरपंच गांवों में सड़कों के रखरखाव से लेकर सिंचाई की व्यवस्था, पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा देने जैसे कार्य करेंगे।

मुखिया को हर साल करनी होगी कम से कम बैठकें
पंचायती राज विभाग के अनुसार मुखिया को अपने कार्य क्षेत्र में एक वर्ष में कम से कम चार बैठकें आयोजित करनी होगी। बैठक के अलावा इनके पास ग्रामी पंचायतों के विकास की कार्य योजना बनाने के साथ-साथ प्रस्तावों को लागू करने की जवाबदेही भी होगी। इसके अलावा ग्राम पंचायतों के लिए तय किए गए टैक्स, चंदे और अन्य शुल्क की वसूली के इंतजाम करना भी इनके जिम्मे होगा।

सरपंचों को मिले तीन बड़े अधिकार
मुखिया के साथ सरपंचों को पंचायती राज व्यवस्था में तीन बड़े अधिकार दिए गए हैं। ग्राम पंचायत की बैठक बुलाने और उनकी अध्यक्षता करने का अधिकार इन्हें मिला हुआ है। इसके अलावा ग्राम पंचायत की कार्यकारी और वित्तीय शक्तियां भी इन्हीं के पास रहेंगी। इनके जिम्मे जो मुख्य कार्य होंगे उनमें गांव की सड़कों की देखभाल, पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा देना, सिंचाई की व्यवस्था करने के अलावा दाह संस्कार और कब्रिस्तान का रखरखाव करना होगा।

पंचायत सम‍िति के जिम्‍मे होगा ये काम
इनके अलावा पंचायत समिति को जो कार्य सौंपे गए हैं उसके अनुसार इन्हें केंद्र, राज्य और जिला परिषद द्वारा सौंपे कार्यों का निष्पादन करना। पंचायत समिति का वार्षिक बजट बनाना व बजट पेश करना होगा। प्राकृति आपदाओं में पंचायत समिति प्रमुख को 25 हजार रुपये तक खर्च करने का अधिकार होगा ।

नीतीश कुमार पीएम पद के नहीं है उम्मीदवार मोदी हैं सर्वमान्य नेता

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार में भारत के प्रधानमंत्री बनने की तमाम योग्यता रखते हैं, हालांकि वह पीएम पद के दावेदार नहीं हैं। रविवार को जदयू की राष्टीय परिषद की बैठक में यह प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पास किया गया। साढ़े तीन घंटे से अधिक चली इस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केन्द्रीय इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह, संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा, सांसद बशिष्ठ नारायण सिंह समेत जदयू राष्ट्रीय परिषद के करीब ढाई सौ सदस्यों की उपस्थित के बीच पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा। कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं और वही एनडीए में पीएम पद के प्रत्याशी भी हैं। लिहाजा, नीतीश कुमार इस पद के दावेदार नहीं हैं। लेकिन, हमारा मानना है कि पीएम पद के लिए जिन योग्यताओं और जिस आला दर्जे के समर्पण तथा दक्षताओं की जरूरत होती है, वे सभी नीतीश कुमार में हैं। ललन सिंह के इस प्रस्ताव को जदयू राष्ट्रीय परिषद ने सर्वसम्मति से पारित किया।

उत्तर बिहार में बाढ़ की स्थिति बिगड़ी कई तटबंध टूटे राजधानी से कई जिलों का सड़क सम्पर्क हुआ भंग

नेपाल में पिछले 72 घंटे से लगातार हो रही है बारिश के कारण एक बार फिर 40 दिनों बाद उत्तर बिहार में बाढ़ की स्थिति बिगड़ गयी है वही गंडक बराज से आज रात 5 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने को लेकर पूरे इलाको को प्रशासन ने खाली करने का निर्देश दिया है ।

गंडक , बूढ़ी गंडक, बागमती और कमला बलान सहित तमाम छोटी नदियां भी तबाही मचाने लगी है। चम्पारण से लेकर मिथिलांचल तक नये क्षेत्रों में बाढ़ का पानी फैलने लगा है। पूर्वी चम्पारण में अरेराज- हाजीपुर एसएच-74 पर संग्रामपुर के इजरा के पास करीब एक किलोमीटर में दो फीट गंडक का पानी बह रहा है। पानी और बढ़ा तो आवागमन ठप हो जाएगा। बगहा दो प्रखंड की नौरंगिया दरदरी पंचायत के पचफेड़वा में भपसा नदी के टूटे बांध से गांवों में पानी फैल रहा है। बगहा के पिपरासी प्रखंड की सेमरा लबेदहा पंचायत में गंडक की बाढ़ से दर्जनभर घर व दो सड़कें बह गईं हैं। सीतामढ़ी के छह सात प्रखंड की तीन दर्जन से अधिक पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। कुम्मा डायवर्सन पर पानी बढ़ने से एनएच 104 पर आवागमन ठप हो गया है। दरभंगा के घनश्यामपुर प्रखंड क्षेत्र के लोगों को कमला-बलान में उफान से सातवीं बार बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है। मधुबनी के झंझारपुर में 15 दिनों से फ्लड फाइटिंग जारी रहने के बाद भी आरएस के अदलपुर-पिपराघाट के सामने कमला बलान के पूर्वी तटबंध में कटाव पर काबू नहीं पाया जा सका है। बगहा की नौरंगिया दरदरी पंचायत के पचफेरवा में भपसा नदी का बांध टूट गया। इससे दो दर्जन गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। सिकरहना की बाढ़ का पानी लौरिया-नरकटियागंज पथ पर अशोक स्तंभ के पास डायवर्सन पर चढ़ गया है। अशोक स्तंभ परिसर में भी पानी फैलने लगा है। पानी रामनगर-लौरिया पथ की ओर बढ़ रहा है। रामनगर के दोन क्षेत्र के बगही व गुदगुदी पंचायत में मसान के कटाव में सैंकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो गई।

पूर्वी चम्पारण के संग्रामपुर में एसएच 74 पर चढ़ा गंडक का पानी संग्रामपुर प्रखंड में अरेराज- हाजीपुर एसएच 74 पर दो फीट बाढ़ का पानी बह रहा है। अरेराज कीआधा दर्जन पंचायतों में बाढ़ से तबाही मची है। सुगौली, बंजरिया, केसरिया, पताही प्रखंड की कई पंचायतें बाढ़ से प्रभावित है। सुगौली नगर पंचायत के सात वार्ड बाढ़ से घिर गए हैं। पताही में मोतिहारी-शिवहर पथ पर पानी चढ़ने से तीसरे दिन भी आवागमन ठप है। डुमरिया घाट में गंडक नदी लाल निशान से ऊपर बह रही है। लाल बेगिया सिकरहना, लाल बाकेया गुवाबारी व अहिरौलिया में बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि जारी है।

सीतामढ़ी की तीन दर्जन पंचायतों के दर्जनों गांव प्रभावित
सीतामढ़ी जिले के नये इलाके में बाढ़ का पानी प्रवेश कर रहा है। बागमती व अधवरा समूह की नदियां लाल निशान के ऊपर है। जिले के छह प्रखंड की तीन दर्जन से अधिक पंचायतें बाढ़ से प्रभावित है। सुरसंड प्रखंड के नगर पंचायत सहित 15 पंचायत के चार दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। कुम्मा डायवर्सन पर पानी चढ़ने से आवागमन में परेशानी हो रही है। लखनदेई नदी का पानी शहर के निचले इलाके में प्रवेश कर रहा है। बाजपट्टी व चोरौत के दो दर्जन गांव बाढ़ से प्रभावित है। वहीं पुपरी के दो पंचायत के आधा दर्जन गांव प्रभावित है। बेलसंड नगर पंचायत सहित प्रखंड नौ पंचायतों के एक दर्जन गांवों में मनुषमरा नदी का पानी निचले इलाके में फैल गया है। बेलसंड-सीतामढ़ी पथ में कोठी चौक से भोरहा तक व बेलसंड धनकौल पथ में सौली, सुंदरपुर व सौली मठ तक बाढ़ का पानी सड़क तीन फीट बह रहा है।

जिले से होकर गुजरने वाली सभी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। हालांकि कमला-बलान नदी के जलस्तर में 83 सेमी की कमी आने से लोग थोड़ी राहत महसूस कर रहे हैं। कमला-बलान के जलस्तर में उफान से घनश्यामपुर प्रखंड क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गयी है। प्रखंड में सातवीं बार बाढ़ आने से लोग परेशान हैं। सड़कों पर पानी बहने से सिर्फ नाव ही आवागमन का माध्यम है। उधर, हनुमाननगर प्रखंड में भी बागमती का पानी फैल गया है। प्रखंड की सभी 14 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हो गयी हैं। हायाघाट-अशोक पेपर मिल सड़क पर पानी बहने से अब भी आवागमन ठप है।

नीतीश कुमार पीएम मटेरियल जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में हुआ पारित

JDU के राष्ट्रीय परिषद की बैठक में कुल 8 एजेंडों पर चर्चा की गई। इस बैठक में ललन सिंह को आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोनीत किया गया और उन्हें अध्यक्ष पद के सभी अधिकारों को दिया गया। इस बैठक के एजेंडे में संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष के लिए भी JDU के संविधान में संशोधन किया गया है। पहले से राष्ट्रीय अध्यक्ष ही संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष होते थे। लेकिन संशोधन में ये साफ किया गया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष किसी को मनोनीत कर सकते है। अभी, उपेंद्र कुशवाहा JDU संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष है। वही, जातीय जनगणना और जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर भी प्रस्ताव पास किए गए। इसमें JDU ने अपने पुरानी बातों को फिर से दोहराया है।

1 प्रस्ताव – राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित किए जाने पर राष्ट्रीय परिषद ने मुहर लगा दी। वहीं, रामचंद्र प्रसाद सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण योगदान के प्रति आभार व्यक्त और उनके कार्यकाल की प्रशंसा पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी के फैसले का अनुमोदन किया गया।

2 प्रस्ताव – पार्टी संविधान में संशोधन किया गया। राष्ट्रीय परिषद में यह प्रस्ताव किया गया कि संविधान की धारा 28 में आवश्यक संशोधन करते हुए यह प्रावधान किया जाए जिसमें JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष होंगे या किसी को अध्यक्ष मनोनीत करने के साथ सदस्यों का मनोनयन करेंगे।

3 प्रस्ताव- राष्ट्रीय परिषद ने आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में NDA के साथ समुचित हिस्सेदारी के आधार पर चुनाव लड़ने की पहल करने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष को अधिकृत किया गया है।

4 प्रस्ताव -इस प्रस्ताव में जातीय आधार पर जनगणना को रखा गया है। पार्टी के प्रस्ताव में कहा गया कि आवश्यक है कि केंद्र सरकार जाति आधारित जनगणना कराकर सभी जातियों का वास्तविक आंकड़ा सार्वजनिक करें। जिससे सुविधा विहीन और विकास से वंचित जातियों को उनकी आबादी के अनुरूप साधन एवं सुविधा मुहैया हो सके। जनगणना समाज और सरकार सबके हित में होगी और इससे हमारी संसदीय लोकतंत्र मजबूत होगा।

5 प्रस्ताव – राष्ट्रीय परिषद की मांग है कि जस्टिस रोहिणी आयोग की सिफारिशों को सार्वजनिक किया जाए ताकि बिहार की तर्ज पर अत्यंत पिछड़े वर्गों को सामाजिक शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण के प्रयासों को अधिक बल मिल सके।

6 प्रस्ताव – जनसंख्या नियंत्रण के लिए शिक्षित कन्या-सुखी परिवार के बिहार मॉडल को जनसंख्या कम करने का लक्ष्य बनाने का प्रस्ताव रखा गया। JDU किसी कठोर नियंत्रण अथवा किसी नकारात्मक नतीजों वाले प्रयास के बजाय जागरूकता अभियान एवं बालिका शिक्षा के विस्तार के माध्यम से जनसंख्या वृद्धि को कम करने का समर्थन करता है।

7 प्रस्ताव – मेडिकल परीक्षाओं में की गई आरक्षण व्यवस्था का स्वागत किया गया । पार्टी का मानना है कि इसमें पिछड़े वर्गों के छात्रों के लिए 27% और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए 10% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। इससे वंचित समूह को सामाजिक न्याय एवं विशेष अवसर मिलेंगे। इस प्रोत्साहन से चिकित्सा सेवा क्षेत्र में समानता उपलब्ध कराने के प्रयास में सफलता मिलेगी।

8 प्रस्ताव -इस में शोक प्रकाश लाया गया। जिसमें नेताओं के निधन पर शोक व्यक्त किया गया।

इस प्रस्तावों पर भी लगा मोहर

1— यूपी और मणिपुर विधान सभा चुनाव में अपना उम्मीदवार खड़ा करेगी जदयू।

2–नीतीश कुमार पीएम पद के हैं योग्य उम्मीदवार

3– हम बीजेपी के सबसे विश्वसनीय पार्टनर।

नीतीश के सामने है दोहरी चुनौती पार्टी और सरकार दोनों कैसे बचे

आज जदयू के केंद्रीय संगठन में हाल में हुए बदलाव के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) कई महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपनी राय देंगे। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच फैले भ्रम को दूर करेंगेे और उन सवालों के जवाब भी देंगे जो पार्टी संगठन में अक्सर पूछे जा रहे हैं। रविवार को पटना में आयोजित राष्ट्रीय परिषद (JDU National Council) की बैठक में मुख्यमंत्री के भाषण का इंतजार पार्टी के कार्यकर्ता शिद्दत से कर रहे हैं। हाल के दिनों में उनके बीच संशय पैदा करने वाली कई घटनाएं हुईं। इस या उस नेता के बदले पार्टी के प्रति प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं के बीच अधिक दुविधा है।

स्वागत समारोह या शक्ति प्रदर्शन
जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर सांसद राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह (JDU National President Lalan Singh) छह अगस्त को पटना आए। उनके स्वागत में भारी भीड़ जुटी। केंद्र में मंत्री बनने के बाद आरसीपी सिंह (Union Minister of Steel RCP Singh) पहली बार बिहार आए। उसमें भी अच्छी भीड़ जुटी। लेकिन, तैयारी के बैनर से विवाद हो गया। उस बैनर पर नए बने राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह का फोटो नहीं था। वह बैनर हटा। नया बैनर लगा। लेकिन, आरसीपी की पूरी यात्रा में बैनर का फोटो विवाद बन कर झूलता रहा। संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) फोटो चुनिन्दा जवाब में उपेंद्र कुशवाहा की यात्रा के बैनरों से आरसीपी गायब कर दिए गए।

संगठन का काम करते रहेंगे
आरसीपी ने सम्मान समारोह में कहा कि वह केंद्र में मंत्री रहेंगे और संगठन का काम पहले की तरह करते रहेंगे। उन्होंने बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं के घर पर भोजन करने की घोषणा की। कार्यकर्ताओं को यह भरोसा दिया कि इस्पात मंत्रालय और बिहार सरकार में मनोनयन से भरे जाने वाले पदों की वैकेंसी खत्म करेंगे। कार्यकर्ताओं को मनोनीत करेंगे। उन्होंने इशारे में कहा कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष की उनकी भूमिका कायम रहेगी।

कार्यकर्ताओं-नेतृत्व दोनों में असमंजस
आरसीपी की घोषणा के बाद कार्यकर्ताओं और छोटे-मध्यम दर्जे के नेतृत्व में भी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है कि वह किसे संगठन का नेता माने। बेशक नीतीश कुमार सर्वोच्च हैं। लेकिन, संगठन के मामले में वह रोज-रोज अपनी राय नहीं दे सकते हैं। लिहाजा उनके बाद वाले कमांड की जरूरत है। संभव है कि नीतीश कुमार अपने संबोधन में जिक्र करें कि पार्टी संगठन का व्यवहारिक नेतृत्व कौन करेगा। पार्टी के प्रति संगठन और सरकार-दोनों की जिम्मेवारी है। यह तय होगा प्राथमिक जिम्मेवारी किसकी है।

बैक ड्राप पर सिर्फ नीतीश का चेहरा
अध्यक्ष बनने के बाद भी ललन सिंह संगठन के मामले में अधिक सक्रिय नहीं हैं। स्वागत कराने के बाद लोकसभा की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली चले गए। संसद की कमेटी के साथ जम्मू-कश्मीर के दौरे पर गए थे। वहां जदयू कार्यालय में गए। लेकिन, बिहार संगठन में उन्होंने कोई महत्वपूर्ण हस्तक्षेप नहीं किया। शायद इसलिए भी कि वे मुख्यमंत्री के मुंह से अपनी भूमिका के बारे में सुन लेना चाहते हैं। राष्ट्रीय परिषद की बैठक में ललन सिंह के अध्यक्ष बनने के फैसले की भी पुष्टि होगी। इसके बाद ललन सिंह की प्रभावी भूमिका शुरू होगी। फिलहाल, जदयू के प्रदेश कार्यालय के बैनर से राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत से लगाया गया आरसीपी का फोटो हटा दिया गया है। ललन सिंह का फोटो रविवार के बाद लगेगा।

सरकार में शामिल होने का फैसला
अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि आरसीपी सिंह के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने का फैसला किसका था। ललन सिंह कह रहे हैं कि यह राष्ट्रीय अध्यक्ष का फैसला था। उस समय राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी ही थे। मुख्यमंत्री अबतक कुछ स्पष्ट नहीं बोले हैं। दूसरी तरफ आरसीपी कह रहे हैं कि उन्होंने आज तक बिना मुख्यमंत्री की सहमति से कुछ नहीं किया। मुख्यमंत्री राष्ट्रीय परिषद की बैठक में कुछ ऐसा जरूर कहेंगे, जिससे कार्यकर्ता समझ जाएं कि किसी की सहमति या राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत से आरसीपी ने केंद्रीय कैबिनेट में शामिल होने का फैसला किया।

– अरुण अशेष(लेखक दैनिक जागरण के वरिष्ट पत्रकार हैं)

पंचायत चुनाव के दौरान प्रत्याशी चार चक्का गांड़ी का नहीं कर सकते हैं इस्तमाल

राज्य निर्वाचन आयोग ने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव को लेकर कई और गाइड लाइन जारी किये हैं जिसके तहत प्रत्याशियों को चुनाव प्रचार के दौरान कितने वाहन यूज करना है इस पर खास ध्यान रखा गया हैै।

प्रत्येक पद के लिए अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। जिप सदस्य प्रत्याशी को दो हल्के मोटर या दो दोपहिया वाहन से प्रचार करने की अनुमति दी जा सकती है। वहीं, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य एवं सरपंच को चालक सहित एक यांत्रिक दोपहिया वाहन सिर्फ अभ्यर्थी अथवा उनके निर्वाचन अभिकर्ता के लिए मंजूरी दी जाएगी। ग्राम पंचायत सदस्य एवं पंच प्रत्याशी या उनके निर्वाचन अभिकर्ता चुनाव प्रचार में किसी तरह के वाहन का उपयोग नहीं कर सकते हैं। आयोग द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया है कि अभ्यर्थी या निर्वाचन अभिकर्ता में से किसी एक को ही वाहन का परमिट दिया जायेगा। बिना परमिट के वाहन का परिचालन किये जाने पर उसे तुरंत जब्त कर लिया जायेगा।

आयोग द्वारा यह निर्देश जारी किया गया है कि मतदाताओं को दी जाने वाली पहचान पर्चियां सादे कागज पर अंकित होनी चाहिए। उम्मीदवार का नाम या चुनाव चिह्न बिल्कुल भी अंकित नहीं होना चाहिए। 100 मीटर पहले रुक जायेंगे वाहन नाम निर्देशन पत्र दाखिल करने के लिए निर्वाची पदाधिकारी के कार्यालय के 100 मीटर की परिधि में किसी भी वाहन का प्रवेश पूरी तरह वर्जित होगा।

जदयू राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक से बिहार की राजनीति की दिशा तय होगी

जदयू के राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक आज और कल पार्टी के प्रदेश कार्यालय स्थित कर्पूरी सभागार में होनी है। इस बैंठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ,मंत्री आरसीपी सिंह ,संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, प्रधान महासचिव केसी त्यागी, राष्ट्रीय महासचिव संजय झा, आफाक अहमद,रामसेवक सिंह, रामनाथ ठाकुर, गुलाम रसूल बलियावी, कमर आलम, राष्ट्रीय सचिव आरपी मंडल, विद्यासागर निषाद, रवीन्द्र प्रसाद सिंह, संजय वर्मा, राजसिंह मान, कोषाध्यक्ष डॉ. आलोक सुमन समेत कुल 18 नेता शामिल होंगे।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार को बैठक में शामिल होंगे और पार्टी नेता को सम्बोधित करेंगे ।

हलाकि बैठक के एजेंडे की बात करे तो बैठक में मुख्य रूप से उन प्रस्तावों पर मुहर लगनी है, जिन्हें दिल्ली में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में लिया गया था।

1—पहला प्रस्ताव था जातिगत जनगणना
2–दूसरा प्रस्ताव था जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने से सम्भव नहीं है पार्टी इसके लिए लोगों को जागरूक के लिए अभियान चलायेंगी
3–तीसरा प्रस्ताव था जदयू अपने संविधान में संशोधन पर भी मुहर लगाएगा। इसके तहत यह व्यवस्था की गई है कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष को यह अधिकार होगा कि वे पार्टी के राष्ट्रीय संंसदीय बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में किसी को जिम्मेदारी दे सकें।
4—जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह भी तय हुआ था पार्टी उन राज्यों में विधानसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारेगी, जहां चुनाव बहुत जल्द होने वाले है। इस क्रम में उत्तर प्रदेश और मणिपुर का जिक्र आया था। इससे जुड़े प्रस्ताव पर भी राष्ट्रीय परिषद की बैठक में मुहर लगेगी।

हलाकि ये सारे एजेंडे दिखावे के लिए इस बैठक के पीछे मूल रुप से दो एजेंडा प्रमुख है जिसमें एक जातीय जनगणना को लेकर बीजेपी कैसे बैकफुट पर आती है और दूसरा संगठन से आरसीपी सिंह और उनके चाहने वाले लोगों का सफाया कैसे हो।
पहले एजेंडे को प्रभावी बनाने की जिम्मेवारी के0सी त्यागी को दी गयी है और आरसीपी सिंह के ऑपरेशन की जिम्मेवारी ललन सिंह और उपेन्द्र कुशवाहा दो गयी है।

क– नीतीश कुमार जातीय जनगणना को लेकर दूसरे राज्यों के दौरे पर निकलेंगे
रणनीति के तहत राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में एक प्रस्ताव पार्टी की और से लाया जा रहा है जिसमें जातीय जनगणना को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर एक नैरेटिव बने इसके लिए नीतीश कुमार देश स्तर उन्हें कैंपेन की जिम्मेवारी दी जाये ।
इसकी पीछे नीतीश कुमार की मंशा यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दू मुस्लिम और राष्ट्रवाद का जो नैरेटिव चरम पर है उसको कमजोर किया जा सके ।क्यों कि जब तक राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दू मुस्लिम और राष्ट्रवाद का नैरेटिव चलता रहेंगा जातिवादी राजनीति कमजोर होती चली जायेंगी और ऐसे में पार्टी को बचाये रखना मुश्किल हो जायेंगा। इसलिए राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक पूरी तौर पर जातीय जनगणना को लेकर फोकस रहेंगा ।
साथ ही जनसंख्या नियंत्रण को लेकर बीजेपी जो कानून लाना चाह रही है उसका अपने तरीके से विरोध जारी रखने की रणनीति पर भी गम्भीर चर्चा होगी क्यों कि जातीय जनगणना को तोड़ जनसंख्या नियंत्रण कानून ही है ।
जो जातिवादी राजनीति को हाशिए पर पहुंचा सकता है क्यों कि बीजेपी इस कानून को पूरी तौर पर मुस्लिम नैरेटिव को सामने रख कर आगे बढ़ रही है।

ख–आरसीपी सिंह को पर कतरने की भी तैयारी है
राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के अध्यक्ष बनने पर जैसे ही मोहर लगेंगा ललन सिंह को संगठन के विस्तार का अधिकार मिल जायेंगा ।आरसीपी सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटाने के लिए भले ही पार्टी एक व्यक्ति एक पद की बात कह रहा है जबकि आरसीपी सिंह से पहले शरद यादव और नीतीश कुमार राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे हैं और मंत्री और सीएम भी इसलिए एक व्यक्ति एक पद का फॉर्मूला के पीछे आरसीपी को संगठन और पार्टी से दूर करना ही था इसलिए सबकी नजर राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक पर है क्यों कि अभी तक जदयू के नेताओं को बयान है उस गौर करेंगे तो एक बात समान्य है जदयू के हमारे सर्वमान्य नेता नीतीश कुमार हैं और जदयू में एक ही नेता है, वह नीतीश कुमार हैं. जनता दल यूनाइटेड का मतलब आप लोग अच्छे तरीका से जान लीजिए, जनता दल यूनाइटेड है और इसका मतलब भी साफ है. पार्टी पूरी तरह से एकजुट है. कहीं भी पार्टी में किसी भी तरह का मतभेद नहीं है।बयान जरुर इस तरह के आ रहे हैं लेकिन पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक ठाक नहीं है यह दिख रहा है भले ही नीतीश कुमार क्यों ना मतभेद की बात सिरे से खारिज कर दे।
हलाकि आरसीपी विरोधी जो भी नेता है उसके निशाने पर प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा है माना यही जा रहा है कि राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक के बाद उमेश कुशवाहा को प्रदेश अध्यक्ष से हटाया जा सकता है हलाकि यह निर्णय इतना आसाना नहीं है क्यों कि भले ही आरसीपी सिंह नीतीश में पूरी आस्था दिखा रहे हैं लेकिन आज वो इतने कमजोर भी नहीं है कि नीतीश उन्हें सिरे से खारिज कर दे ।

वैसे नीतीश और आरसीपी के बीच के रिश्ते को समझना आज की परिस्थिति में भी बहुत मुश्किल है भले ही 2020 के विधानसभा चुनाव में 10 से 15 ऐसे सीटों पर जहां जदयू चुनाव हारी है, उस हार के लिए आरसीपी जिम्मेवार है ये नीतीश भी स्वीकार करते हैं लेकिन इसके इतर भी बहुत सारी बाते ऐसी है जो आरसीपी को सिरे से खारिज करना नीतीश के लिए मुश्किल होगा ।

ऐसे में दो दिनों के इस राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक से बिहार की राजनीति किस और करवट लेगी इसका निर्घारण होना तय माना जा रहा है ।

पंचायत चुनाव में कौन कहां से चुनाव लड़ सकता है चुनाव आयोग ने जारी किया निर्देश मुखिया पद के प्रखंड का वोटर होना अनिवार्य

बिहार में होने वाले पंचायत आम चुनाव के दौरान कोई भी मतदाता अपने प्रखंड के किसी भी पंचायत से मुखिया पद का प्रत्याशी बन सकेगा।राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों के निर्वाचन क्षेत्रों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किया है। इसके अनुसार किस पद के प्रत्याशी के निर्वाचन क्षेत्र की सीमा कौन-कौन सी होगी, इसकी जानकारी दी गयी है। आयोग के दिशा-निर्देश के अनुसार कोई भी व्यक्ति अगर मुखिया पद का प्रत्याशी बनना चाहता है तो वह अपने प्रखंड के अंदर किसी भी पंचायत से मुखिया का चुनाव लड़ सकता है। इसी प्रकार, आयोग ने अन्य पदों के लिए भी निर्वाचन क्षेत्रों की स्थिति स्पष्ट कर दी है।

आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी प्रत्याशी को चुनाव लड़ने के लिए उस निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम दर्ज होना आवश्यक है। मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के बाद कोई व्यक्ति ग्राम पंचायत सदस्य या ग्राम कचहरी के पंच का चुनाव लड़ना चाहता है तो वह उस ग्राम पंचायत के किसी भी वार्ड से प्रत्याशी हो सकता है।

इसी प्रकार कोई भी व्यक्ति मुखिया, सरपंच या पंचायत समिति सदस्य का प्रत्याशी बनना चाहता है तो वह उस प्रखंड के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव का प्रत्याशी हो सकता है। शर्त यह है कि उसका नाम उस प्रखंड के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल होना चाहिए।

इसी प्रकार, आयोग ने जिला परिषद प्रत्याशी को लेकर भी निर्देश दिया है। जिला परिषद प्रत्याशी अपने जिले के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार हो सकता है। बर्शेते कि उसका नाम उस जिले के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल हो।

सेंसेक्स, निफ्टी हरे निशान में हुआ बंद; मिड और स्मॉलकैप का बेहतर प्रदर्शन

सेंसेक्स 56124 पर, निफ्टी 16700 के ठीक ऊपर बंद हो कर ऑल टाइम हाई पर पहुंचा । दलाल स्ट्रीट पर बुल्स फिर से नियंत्रण में थे क्योंकि घरेलू बेंचमार्क सूचकांकों ने सितंबर एफएंडओ श्रृंखला की शुरुआत लाभ के साथ की थी।

बैंक निफ्टी 35,627 पर सकारात्मक पूर्वाग्रह के साथ सपाट बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 50 1% और निफ्टी मिडकैप 50 0.91% ऊपर। सेंसेक्स के शीर्ष लाभ के रूप में अल्ट्राटेक सीमेंट 3.64% ऊपर था, इसके बाद एलएंडटी, डॉ रेड्डीज, बजाज फिनसर्व और सन फार्मा थे। तालिका के दूसरे छोर पर, इंफोसिस शीर्ष के रूप में 1.07% नीचे था, इसके बाद इंडसइंड बैंक और एमएंडएम थे। सेंसेक्स के 30 में से 22 शेयर्स में तेजी और 8 शेयर्स में गिरावट देखने को मिली।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

पंचायत चुनाव में एक कर्मचारी चार चरणों के चुनाव में ही लेगा भाग।

बिहार में पंचायत चुनाव के दौरान एक कर्मचारी को अधिकतम चार चरणों के चुनाव में तैनात किया जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि कर्मियों की कमी की दशा में एक मतदान अधिकारी, मतगणना कर्मी, पेट्रोलिंग मैजिस्ट्रेट, माइक्रो ऑब्जर्बर को अधिकतम चार चरणों में ही प्रतिनियुक्त किए जाएंगे।


गौरतलब है कि पूर्व में आयोग ने एक कर्मी को तीन चरणों में ही तैनात करने का निर्देश दिया था। इसके बाद जिलों से कर्मियों की कमी के कारण मात्र तीन चरणों में ही प्रतिनियुक्ति किए जाने में कठिनाई की जानकारी आयोग को दी गयी। इसके बाद आयोग ने अपने पूर्व के आदेश को संशोधित करते हुए अधिकतम चार चरणों में कर्मियों की तैनाती का निर्देश दिया है।

आयोग के अनुसार प्रत्येक मतगणना (ईवीएम से) टेबुल पर एक महिला कर्मी को मतगणना सहायक के रुप में तैनात किया जाएगा। वहीं, इवीएम के मतगणना टेबुल पर एक माइक्रो ऑब्जार्बर महिला या पुरुष अवश्य तैनात किया जाए। आयोग के सचिव मुकेश कुमार सिन्हा ने यह आदेश जारी किया और इस संबंध में की गयी कार्रवाई की जानकारी आयोग को देने को भी कहा।

सृजन मामले में सीबीआई और ईडी ने गठित की विशेष टीम

सृजन मामले में सीबीआई बैंक कर्मी और भागलपुर नजारत से जुड़े कर्मियों को जेल भेज कर कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट सौप दिया था उससे ये लगने लगा था कि बिहार के सबसे बड़े घोटाले के रहस्य पर से पर्दा नहीं उठेगा ,लेकिन जिस तरीके से एक बार फिर केन्द्रीय ऐंजसी संक्रिय हुई है उससे ये लगने लगा है कि सृजन मामले बड़ी कारवाई होने वाली है क्यों कि जो काम सीबीआई चार वर्ष में नहीं कर पायी है वो काम सीबीआई एक माह के अंदर कर दिया है ।


सीबीआई इस माह सृजन से जुड़े 30 लोगों को गिरफ्तारी किया है वही गुरुवार को आरोपी सीमा कुमारी पटना सीबीआई कोर्ट में सरेंडर की है वही मनोरमा देवी के बेटे और उसकी पत्नी कि गिरफ्तारी के लिए राँ जैसी केन्द्रीय ऐंजसी का भी सहयोग सीबीआई ले रही है कहां जा रहा है कि दोनों नेपाल के रास्ते आस्ट्रेलिया भाग गया है वही खबर ये भी आ रही है कि सीबीआई ने बिहार के तीन एडीजी और एक एसपी रैंक के अधिकारी को नोटिस जारी किया गया है जिसमें एक के खाते में सृजन के खाते से सीधा पैसा गया है दूसरे एडीजी स्तर के अधिकारी पर आरोप है कि वो सरकार के अनुमति के बगैर थाईलैंड घूमने गया था सरकार ने इसको लेकर उक्त एडीजी से स्पष्टीकरण भी पुंछा है तीसरे पर साक्ष्य को दबाने का आरोप है और चौथे पर पी0के0घोष के कम्पनी में निवेश का आरोप है वही कई आईएस अधिकारी को भी फिर से नोटिस भेजने कि तैयारी चल रही है जिनके हस्ताक्षर युक्त चेक के माध्यम से सरकार के खाते से पैसे सृजन के खाते में ट्रांसफर
हुआ है ।वही सीबीआई की टीम पटना स्थित एक हीरा कारोबारी से फिर पुछताछ शुरु किया है जो बिहार के कई नेता और पदाधिकारी की पत्नी को हीरे की अंगूठी और हीरे की हार डिलेभरी किया था जिसका भुगतान सृजन के द्वारा किया गया था।
वही ईडी सृजन मामले का मास्टमाइड प्रणव कुमार घोष को गिरफ्तार किया है जिससे दिल्ली में सीबीआई के अधिकारी भी पुछताछ किया था इस पुछताछ के दौरान घोष ने सरकार का जो पैसा सृजन के खाते में गया था उस पैसे का कहां कहां निवेश हुआ है इसकी पूरी जानकारी ईडी और सीबीआई को दे दिया है।


जानकार बता रहे हैं कि निवेश मामले में कई पॉलिटिशियन और ब्यूरोक्रेट्स सीधे सीधे शामिल है। ईडी सृजन के धन से बेगलुरु ,रायपुर , गाजियाबाद, पुणे, पटना और भागलपुर,में फ्लैट और अन्य अचल संपत्तियों की खरीद हुई है। ईडी ने सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है और ऐसे 32 फ्लैट, 18 दुकान, 38 जमीन का प्लॉट और 47 बैंक खाते को जप्त किया है जिसमें 18.45 करोड़ रुपए जमा है उसको जप्त कर लिया है वही भागलपुर ,गाजियाबाद और रायपुर शहर में स्थिति कई और बड़े निवेश की जांच कर रही है ।


वही सीबीआई ने जनवरी 2021 में भागलपुर कोतवाली थाने में सृजन से जुड़े मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर बुधवार को एक केस दर्ज किया है जिसमें महालेखाकार के उस पत्र का भी जिक्र है जिसमें महालेखाकार ने बिहार सरकार के वित्त विभाग को आगाह किया था कि सृजन में गलत तरीके से पैसे का ट्रांजेक्शन हो रहा है। महालेखाकार के इस पत्र पर वित्त विभाग ने कोई कारवाई नहीं किया था ।


जानकार बता रहे हैं कि सीबीआई ने महालेखाकार के उस पत्र का हवाला एफआईआर में करके जांच का दायर बढ़ा दिया है ।

अब बिहार आने वाले यात्रियों को भी पास होना होगा कोरोना टेस्ट

शुक्रवार से पटना एयरपोर्ट, पटना जंक्शन, दानापुर जंक्शन और पाटलिपुत्रा स्टेशन पर केरल और महाराष्ट्र से आने वालों का रैपिड एंटीजन टेस्ट होगा। पॉजिटिव मिले लोगों को आइसोलेशन सेंटर भेज दिया जाएगा। पाटलिपुत्र खेल परिसर में किया जाएगा आइसोलेट ।


केरल और महाराष्ट्र के यात्रियों की जांच के लिए एयरपोर्ट और स्टेशन पर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रहेगी, ताकि उन्हें लाइन में लगाकर उनकी कोरोना जांच की जा सके। सिविल सर्जन डॉ. विभा कुमारी सिंह ने बताया कि पटना जंक्शन, दानापुर और पाटलिपुत्रा स्टेशन पर जांच के लिए लैब टेक्नीशियन और एएनएम की टीम तीन पाली में तैनात रहेगी। जिन यात्रियों की रिपोर्ट एंटीजन में पॉजीटिव आएगी, उन्हें पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आइसोलेट करने के लिए भेजा जाएगा।

रामविलास जी के मौत के लिए चिराग जिम्मेवार है

केन्द्रीय मंत्री पशुपति पारस और चिराग पासवान के बीच जुबानी जंग तेज हो गयी है हाजीपुर यात्रा के दौरान जिस तरीके से चिराग के समर्थक लगातार पशुपति पारस पर हमलावर रहे इससे बौखला कर पारस ने आज यहां तक कह दिये कि सूरज इधर से उधर हो सकता है मगर अब चिराग के साथ सुलह नहीं हो सकती।

साथ ही पशुपति पारस ने चिराग पर आरोप लगाते हुए कहा है कि चिराग ने जबरन रामविलास पासवान को लोजपा अध्यक्ष पद से हटा दिया था। वह मेरी भी इज्जत भी नहीं करते थे। उन्होंने कहा कि चिराग मुझे अपने खून से अलग मानते हैं। पशुपति ने कहा कि लोजपा में टूट की वजह मैं नहीं खुद चिराग पासवान हैं। उनके फैसले से पार्टी के लोग नाखुश थे। रामविलास जी भी मुझे ही अपना असली वारिस मानते थे।

चिराग ने पिछले साल संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान नीतीश को जेल भेजने की बात मुझसे कही थी। बिहार सीएम को विकास पुरुष बोलने पर उन्होंने मुझे पार्टी से निकालने की धमकी दी थी। उन्होंने कहा कि यह सब रीना पासवान की मौजूदगी में हुआ था।असली लोजपा मेरे साथ है चंद लफंगा चिराग के पास है जल्द ही बिहार और पूरे देश में एक बार फिर पार्टी को नये सिये से खड़े करेंगे ।

पंचायत चुनाव में भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों के चुनाव लड़ने पर चुनाव आयोग ने लगायी रोक

पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के आरोप में पद से हटाए गए मुखिया इस बार पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते हैं राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 के तहत जिन मुखिया और उप-मुखिया पर निहित शक्तियों के दुरुपयोग या अपने दायित्वों के निर्वहन में दुराचार का आरोप लगा है, प्रमंडलीय आयुक्त अथवा राज्य सरकार द्वारा पद से हटाए गए हों तथा सक्षम प्राधिकार अथवा न्यायालय द्वारा इसे स्थगित या रद नहीं किया गया हो वे पद से हटाए जाने की तिथि से पांच साल तक पंचायत चुनाव में उम्मीदवार नहीं हो सकेंगे।

पुलिस अवर निरीक्षक 2018 बैच के दीक्षांत समारोह में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार

पुलिस अवर निरीक्षक 2018 बैच के दीक्षांत समारोह में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार, स्थान, बिहार पुलिस अकाडमी, राजगीर, दिनांक 26 अगस्त 2021

सेंसेक्स 55,949 पर, निफ्टी 16,637 के साथ सपाट हुआ बंद, रिलायंस गेनर तो भारती एयरटेल बना टॉप लूजर

इक्विटी मार्केट बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 ने अगस्त सीरीज फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस एक्सपायरी सेशन सकारात्मक के साथ बंद हुआ ।

बीएसई सेंसेक्स 55,949 पर बंद हुआ जबकि एनएसई निफ्टी 50 16,637 पर बंद हुआ । बैंक निफ्टी 0.09% बढ़कर 35,617 पर बंद हुआ । सेंसेक्स के 30 में से 14 शेयर्स में खरीदारी हुई और 16 शेयर्स में बिकवाली हुई। कारोबार के दौरान मेटल शेयर्स में गिरावट देखने को मिली। भारत VIX मामूली बढ़त के साथ 13.54 पर बंद हुआ।

आरआईएल 1.29% उछला, इसके बाद एमएंडएम, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, एक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक का स्थान रहा। दूसरे छोर पर, भारती एयरटेल 4.18% की गिरावट के साथ दिन का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला था। इसके बाद मारुति सुजुकी इंडिया, एसबीआई और पावर ग्रिड का स्थान रहा।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

अफरशाही और भ्रष्टाचार बीजेपी और नीतीश दोनों के गले की बनी फांस जनता दरबार से भी नहीं निकल रहा है हल

बिहार के मुख्यसचिव राज्य में जारी अफसरशाही को लेकर एक माह के दौरान दूसरी बार जिलों में तैनात अधिकारियों को चेतावनी दिया है कि माननीय सांसद और विधायक के सम्मान का ख्याल रखे और ऐसा नहीं हुआ तो अब कारवाई होगी ।इस तरह का एक पत्र मुख्यसचिव 27-07-2021 को भी जारी किये थे।

लेकिन इस पत्र के बावजूद जिला में तैनात अधिकारियों के कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं हुआ है और इसको लेकर सरकार काफी चिंतित है।क्यों कि 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को जो बड़ा नुकसान हुआ उसकी एक बड़ी वजह थाना और प्रखंड स्तर पर व्याप्त अफरशाही और भ्रष्टाचार रहा है ।

मुख्यसचिव को एक माह के अंदर दूसरी बार पत्र जारी करने के पीछे वजह यही है अब सरकार अफरशाही और भ्रष्टाचार को बर्दास्त करने के मूड में नहीं है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अफरशाही और भ्रष्टाचार हमेशा उपर से नीचे कि और बढ़ता है कभी भी नीचे से उपर कि और नहीं बढ़ता है।इस सच्चाई के बावजूद नीतीश कुमार और बीजेपी दोनों बीच बीच का राश्ता निकालने में लगा है और इसी कड़ी में नीतीश कुमार जनता से सीधा संवाद पर फिर से काम करना शुरु किये , जनता दरबार शुरु हुआ ,घर से बाहर निकलने लगे ,बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों से मिलना शुरु किये फिर भी सरकार का इकबाल कायम नहीं हो रहा है ।

1–अफरशाही और भ्रष्टाचार को कम करने के लिए प्रदेश कार्यालय में शुरु हुआ दरबार
मुख्यसचिव और सीएम के पहल के बावजूद अफरशाही और भ्रष्टाचार को लेकर बहुत कुछ बदल नहीं पा रहा है और सरकार का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है इसको देखते हुए सीएम जहां हर सोमवार को जनता दरबार में शामिल हो रहे हैं वहीं बीजेपी के मंत्री पार्टी दफ्तर में रोजाना सहयोग कार्यक्रम के तहत बैठ रहे हैं और अब तो जदयू के मंत्री भी पार्टी दफ्तर में बैठने लगे हैं ।

बात इन दफ्तरों में शिकायत के चरित्र कि करे तो यहां भी अधिकांश मामले थाने और प्रखंड में व्याप्त अफसरशाही और भ्रष्टाचार को लेकर ही आ रहा है या फिर बहाली में व्याप्त फर्जीवाड़े से जुड़ा है मतलब समस्या एक ही है समाधान कि कोशिश अलग अलग प्लेटफर्म से शुरु कि गयी है लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो कोशिश शुरु कि गयी है उसके सहारे प्रशासनिक तंत्र की सबसे निचली इकाई में सुधार कैसे सम्भव है जबकि उस तंत्र को भ्रष्ट और लूटेरा बनने पर पटना में बैठे लोग कम मजबूर नहीं कर रहे हैं ।

बिहार के आठ दस जिलों को छोड़ दे तो अधिकांश जिलों में एसपी और डीएम थाना प्रभारी और बीडीओ ,सीओ से सीधे पैसा लेता है ,थाना प्रभारी पद पर नियुक्त करने के लिए एसपी पैसा लेता बीडीओ और सीओ के लिए मंत्री पैसा लेता है।
ऐसे में जब कोई पदाधिकारी पोस्टिंग में पैसा देगा तो फिर आप उन अधिकारियों से सही काम की उम्मीद कैसे कर सकते हैं।

रेप के आरोपी डीएसपी को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत ।

पटना हाई कोर्ट ने एक नाबालिग से रेप के आरोपी गया के तत्कालीन डीएसपी कमलाकांत प्रसाद को फिलहाल राहत दे दी है।जस्टिस आशुतोष कुमार की एकल पीठ ने अग्रिम जमानत के लिए दायर अपील पर सुनवाई के बाद केस डायरी पेश करने का निर्देश दिया है।

साथ ही अपने अंतरिम आदेश में निचली अदालत को निर्देश दिया कि अगर कमलाकांत प्रसाद आत्मसमर्पण करते हैं, तो उन्हें जमानत दे दी जाए।

कमला कांत प्रसाद की ओर से वरीय अधिवक्ता योगेश चन्द्र वर्मा ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल को एक साजिश के तहत फंसाया गया है।गत 27 मई को गया के महिला थाना में पीड़ित लड़की के भाई ने एफआईआर दर्ज कर आरोप लगाया कि वर्ष 2017 में दशहरा पर्व के दौरान उसकी नाबालिग बहन के साथ गया मुख्यालय में तैनात तत्कालीन डीएसपी ने रेप किया था।

पुलिस ने भाई के बयान पर रेप के साथ ही पोक्सो तथा एस सी एस टी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया।वर्मा ने कहा कि कथित घटना के समय लड़की नाबालिग नहीं थी।इसलिए पोक्सो के तहत मामला नहीं बनता है।

मेडिकल जांच में भी डॉक्टर ने रेप की पुष्टि नहीं की है।उन्होंने कोर्ट को बताया कि आवेदक कमलाकांत प्रसाद की पत्नी जो अलग रहती है उसी ने यह झूठा मुकदमा दर्ज कराया है।केस डायरी आने के बाद फिर सुनवाई होगी।

भारत में अमेरिकी मिशन (U.S. Mission) ने 2021 में रिकॉर्ड संख्या में छात्र वीजा को मंजूरी दी

भारत में यूनाइटेड स्टेट्स मिशन को यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि उसके दूतावास और वाणिज्य दूतावासों ने वैश्विक COVID-19 महामारी के बावजूद, 2021 में पहले से कहीं अधिक छात्र वीजा आवेदकों को मंजूरी दी। इन प्रयासों के माध्यम से, ५५,००० से अधिक छात्र और विनिमय आगंतुक संयुक्त राज्य में अध्ययन करने के लिए विमानों में सवार हो रहे हैं, और हर दिन अधिक छात्रों को अनुमोदित किया जा रहा है। यू.एस. मिशन एक और महान छात्र सत्र की प्रतीक्षा कर रहा है क्योंकि यह आने वाले कुछ महीनों में वसंत सेमेस्टर (Spring semester) के छात्रों के लिए अध्ययन की सुविधा प्रदान करता है।

इस उपलब्धि को स्वीकार करते हुए, राजदूत (Ambassador) अतुल केशप (Atul Keshap), नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास में चार्ज डी’अफेयर्स ने कहा: “संयुक्त राज्य में अध्ययन भारतीय छात्रों के लिए एक अनूठा और अक्सर जीवन बदलने वाला अनुभव है, जो ताजा, वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान करता है और अमूल्य कैरियर के अवसरों के लिए अग्रणी होता है। भारतीय छात्र अमेरिकी समाज को भी समृद्ध करते हैं, उच्च स्तर की शैक्षणिक सफलता प्राप्त करते हैं, और हमारे देशों के बीच दोस्ती के बंधन को गहरा करते हैं। भारत में अमेरिकी मिशन की कई मेहनती महिलाएं और पुरुष अपनी यात्रा और अध्ययन को सुविधाजनक बनाने पर गर्व महसूस कर रहे हैं।”

ऑन लॉक 6 में वैक्सीन लेने वाला व्यक्ति ही बिहार में घूम सकता है।

अनलॉक – 6 में क्या खास है

गृह विभाग के अपर प्रमुख सचिव चैतन्य प्रसाद ने दी जानकारी
26 अगस्त से 25 सितंबर तक अनलॉक – 6 लागू रहेगा

पूर्व के प्रतिबंधों में काफी सहूलियत दी गई।
राज्य के सभी दुकान व प्रतिष्ठान सामान्य समय पर खुलेंगे बंद करने के समय पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।
दुकान और प्रतिष्ठान में काम करने वाले सभी मालिक व कर्मचारियों द्वारा टीकाकरण लेना अनिवार्य होगा।

और अपने प्रतिष्ठानों में उसका सर्टिफाइड कॉपी रखना अनिवार्य होगा।

दुकान में प्रतिष्ठानों में मास्क, सैनिटाइजर और सोशल डिस्टेंस का पालन पूर्व की तरह ही करना होगा।

राज्य के सभी शिक्षण संस्थान 100% उपस्थिति के साथ खुलेंगे।

पहली से लेकर 12वीं तक के स्कूलों को भी 100 % उपस्थिति के साथ खुलेंगे।

शिक्षण संस्थानों द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था रखी जाएगी।

राज्य में चलने वाले सभी सरकारी आवासीय स्कूलों को भी खोला जाएगा।

राज्य के सभी बोर्ड व समिति द्वारा परीक्षाएं लेने की इजाजत होगी।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों को टीकाकरण करने की जिम्मेवारी होगी।

सार्वजनिक स्थल पर किसी भी तरह के आयोजन की अनुमति जिला प्रशासन द्वारा लेना अनिवार्य होगा।
आयोजन में कितने लोग शामिल होंगे इसकी सीमा जिला प्रशासन क्या करेगा।

शादी समारोह वर्ष श्राद्ध कार्यक्रम में लोगों की तरह संख्या समाप्त कर दी गई है।
लेकिन शादी समारोह में बारात व डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रहेगा।

सभी पर समान रूप से खुलेंगे।

राज्य के सभी धार्मिक स्थलों को भी समान रूप से खोला जायेगा।
मंदिर – मस्जिद व गुरुद्वारों में कोविड-19 इनका पालन कर श्रद्धालु पूजा कर सकेंगे।

राज्य में सभी सामाजिक राजनीतिक और खेलकूद जैसे कार्यक्रम कराने के लिए प्रशासन से अनुमति लेनी होगी।

राजगीर के कुंड में वे अब स्नान हो सकेगा। हालांकि इसके लिए आरटी पीसीआर का 72 घंटे पूर्व नेगेटिव जांच रिपोर्ट या फिर रैपिड एंटीजन टेस्ट रिपोर्ट होना अनिवार्य रहेगा।

50% क्षमता के साथ सिनेमा हॉल और शॉपिंग मॉल सामान्य समय से खुल सकेंगे।

50% क्षमता के साथ रेस्टोरेंट सामान्य समय से खोला जाएगा।

राजगीर क्लब जिम और स्विमिंग पूल 50% क्षमता के साथ वैक्सीनेशन लिए हुए व्यक्तियों के लिए खोला जाएगा।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट 100 % क्षमता के साथ चलेंगे।

उतार-चढ़ाव के बीच बाजार सपाट बंद, तेल और गैस, बिजली शेयरों में तेजी

फार्मा, रियल्टी, बैंक और ऑटो को छोड़कर अन्य सभी सेक्टोरल इंडेक्स, बिजली और तेल और गैस सूचकांकों में 1 % की तेजी के साथ समाप्त हुए। बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.5% की तेजी आई।

बीएसई सेंसेक्स 56,198 का ​​एक नया सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, लेकिन मामूली नुकसान के साथ 55,944 पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी 50 0.06% की बढ़त के साथ 16,634 पर हरे रंग में बंद हुआ।

सेंसेक्स में सबसे ज्यादा टीसीएस 1.42% की बढ़त के साथ इंफोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचयूएल का स्थान रहा। दूसरी ओर, बजाज फिनसर्व सेंसेक्स में 2.29% नीचे था, इसके बाद टाइटन, मारुति सुजुकी और भारती एयरटेल थे।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

बिहार में लांक डाउन पूरी तरह खत्म सीएम ने की घोषणा

कोविड की स्थिति की समीक्षा की गई। कोरोना संक्रमण की स्थिति में सुधार को देखते हुए सभी दुकानें, प्रतिष्ठान, शापिंग माल, पार्क, उद्यान एवं धार्मिक स्थल सामान्य रूप से खुल सकेगें। जिला प्रशासन की अनुमति से सभी प्रकार के सामाजिक, राजनीतिक, मनोरंजन, खेल-कूद, सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजन अपेक्षित सावधानियों के साथ आयोजित किए जा सकेगें।

सभी विश्वविद्यालय, कॉलेज, तकनीकि शिक्षण संस्थान तथा विद्यालय (पहली से बारहवीं कक्षा तक) के साथ साथ कोंचिग संस्थान भी सामान्य रूप से खुलेगें। राज्य के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, विद्यालयों द्वारा परीक्षा आयोजित की जा सकेंगी। 50% क्षमता के साथ सिनेमा हॉल, क्लब, जिम, स्वीमिंग पूल, रेस्टोरेंट एवं खाने की दुकान (आंगतुको के साथ) खुल सकेगें।

परन्तु तीसरे लहर की संभावना के मद्देनजर हम सभी बिहारवासियों को कोविड अनुकूल व्यवहार के साथ सावधानी बरतना जरूरी है।

प्रतिबंधित दवाओं के बिक्री पर शीध्र लगाये रोक – हाईकोर्ट

पटना हाई कोर्ट ने राज्य में प्रतिबंधित दवाओं के व्यापार में लिप्त लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने शशि रंजन सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्रीप्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि बिहार ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 व रूल्स 122 ई का हवाला देते हुए कहा है कि कानून के प्रावधानों के विरुद्ध प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री की जा रही है।

इस जनहित याचिका में यह भी आरोप लगाया है कि कथित तौर पर पूरे राज्य में केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री वर्तमान समय के प्रभारी ड्रग्स कंट्रोलर की मिलीभगत से की जा रही है। इस मामले में सहायक औषधि नियंत्रक, मुजफ्फरपुर, ने कुल 111 फर्मों के नामों को 12 जून, 2021 को अपने पत्र के जरिये अभियोजन चलाने को लेकर भेजा था।

परंतु ड्रग्स कंट्रोलर ने अभियोजन चलाने की स्वीकृति नहीं दी। श्री श्रीवास्तव ने आगे ड्रग्स कंट्रोलर ऑफ इंडिया के विगत 11 फरवरी, 2021, 22 मार्च, 2021 और 26 अप्रैल, 2021 के पत्रों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि राज्य के ड्रग्स कंट्रोलर की मिलीभगत से पूरे राज्य में प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री जारी है और इनके संरक्षण में ही इन सब कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है। प्रतिबंधित चीजों को दवाओं में मिलाकर दवाओं की बिक्री की जा रही है।

राज्य सरकार का पक्ष राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता एस डी यादव ने रखा। इस मामले पर आगे की सुनवाई आगामी 31 अगस्त को की जाएगी।

कहॉ कब होगा पंचायत चुनाव

बिहार पंचायत चुनाव

कुल 11 चरणों मे होगा चुनाव ।

24 सितंबर को पहला चरण ।
10 जिला , 12 प्रखंड ।

29 सितंबर को दिव्तीय चरण।
34 जिला , 48 प्रखंड

8 अक्टूबर को तीसरा चरण ।
35 जिला ,50 प्रखंड

20 अक्टूबर को चौथा चरण ।
36 जिला,53 प्रखंड

24 अक्टूबर को 5वा चरण ।
38 जिला,58 प्रखंड

3 नवंबर को छठा चरण ।
37 जिला,57 प्रखंड

15 नवंबर सातवा चरण ।
37 जिला,63 प्रखंड

24 नवंबर आठवां चरण।
36 जिला,55 प्रखंड

29 नवंबर नवा चरण।
35 जिला,53 प्रखंड

8 दिसंबर 10 वा चरण
34 जिला ,53 प्रखंड

12 दिसंबर 11वा चरण
20 जिलों , 38 प्रखंड

बाढ़ प्रभावित जिले में अंतिम चरण में होगा चुनाव ।

38 जिले
534 प्रखंड
8072 ग्राम पंचायत
9,28,09,194 ग्रामीण जनसंख्या
1,13,891 कुल मतदान केंद्र
6,38,94,737 कुल ग्रामीण मतदाता
3,35,80,487 पुरुष मतदाता
3,03,11,779 महिला मतदाता
2,471 अन्य मतदाता।

6 पद के कुल 2लाख 55 हजार 22 के लिए होना है पंचायत चुनाव।

ग्राम पंचायत मुखिया – 8072
ग्राम पंचायत सदस्य – 113307
पंचायत समिति सदस्य – 11104
जिला परिषद सदस्य – 1160
ग्राम कचहरी सरपंच – 8072
ग्राम कचहरी पंच – 113307

निफ्टी 16,600 के ऊपर, मेटल, फार्मा, बैंकों की अगुवाई में सेंसेक्स 403 अंक चढ़ा

सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू इक्विटी बाजार बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 बढ़त के साथ बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 403 अंक, 0.73% बढ़कर 55,959 अंक पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 0.78% बढ़कर 16,625 पर बंद हुआ।

बजाज फिनसर्व सेंसेक्स में 7.9% की बढ़त के साथ शीर्ष पर रहा, इसके बाद टाटा स्टील, टेक महिंद्रा और बजाज फाइनेंस का स्थान रहा। नेस्ले इंडिया 1.34% नीचे था, मंगलवार को सेंसेक्स का एकमात्र स्टॉक 1% से अधिक गिर गया।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

पंचायत चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी, पूरे प्रदेश में आर्दश आचार संहिता लागू

राज्य में पंचायतों के छह पदों के लिए चुनाव होगा। इनमें से 4 पदों का चुनाव ईवीएम से और 2 पदों का चुनाव बैलेट पेपर से कराया जाएगा। जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, ग्राम पंचायत मुखिया और ग्राम पंचायत सदस्य का चुनाव ईवीएम से कराए जाएंगे। इसके अलावा सरपंच और पंच के चुनाव बैलेट पेपर से होंगे। पंचायत चुनाव में करीब 6 करोड़ 44 लाख वोटर होंगे और मतदान केन्द्रों की संख्या करीब 1 लाख 14 हजार होगी।

बिहार में पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही जिला निर्वाचन पदाधिकारी(पंचायत), अनुमंडल अधिकारी, जिला पंचायत राज पदाधिकारी, निर्वाची पदाधिकारी, सहायक निर्वाची पदाधिकारी तथा जिला निर्वाचन पदाधिकारी(पंचायत) द्वारा मनोनीत उप निर्वाचन पदाधिकारी(पंचायत) के ट्रांसफर-पोस्टिंग पर रोक लग जाएगी। इसके अलावा चुनाव कार्य से जुड़े अन्य क्षेत्रीय पदाधिकारियों, कर्मचारियों के स्थानांतरण पर भी रोक रहेगी।

अधिवक्ता के पत्र से घमासान

पटना हाई कोर्ट के विख्यात अधिवक्ता दिनेश को पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित एक खुला पत्र में पटना हाई कोर्ट में अनुसूचित जाति- जनजाति वर्ग के अधिवक्ताओं को हाई कोर्ट में जज बनाने की मांग की है। श्री दिनेश ने अपने पत्र में कहा है कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में अनुसूचित जनजाति वर्ग से जज बनाने की मांग की है।

इस खुले पत्र के जरिये पटना हाई कोर्ट में अनुसूचित जाति- जनजाति वर्ग से जज बनाने को लेकर अनुशंसा करने की मांग की गई है। पत्र में आगे कहा गया है कि पटना हाई कोर्ट 105 वर्ष पुराना है।
विगत वर्षों में विभिन्न जातियों के लोगों को पटना हाई कोर्ट का जज बनाया गया, किन्तु पटना हाई कोर्ट के वर्ष 1916 में की गई स्थापना से अभी तक सिर्फ एक अनुसूचित जाति वर्ग से जज नियुक्त हुए।

लेकिन, पिछले 105 वर्ष में एक भी अनुसूचित जनजाति वर्ग के जज नहीं बनाए गए। उन्होंने अपने खुले पत्र के माध्यम से उम्मीद जताया है कि इन वंचित वर्ग के लोगों को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा।

पटना हाईकोर्ट के राज्य में असिस्टेंट prosecution ऑफिसर की नियुक्ति के लिए बी पी एस सी द्वारा ली गई प्रारंभिक के परिणाम को संशोधित करने का निर्देश के मद्देनजर बी पी एस सी ने कल होने वाली असिस्टेंट prosecution ऑफिसर की होने वाली मुख्य परीक्षा स्थगित कर।जस्टिस सी एस सिंह ने सुदीप कुमार दास की याचिका पर सुनवाई करते हुए बी पी एस सी को यह निर्देश दिया था कि प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को संशोधित कर रिजल्ट को प्रकाशित करें।
बी पी एस सी ने 553 पदों पर असिस्टेंट prosecution ऑफिसर की नियुक्ति के लिए 6 फरवरी, 2020 को विज्ञापन निकाल कर आवेदन आमंत्रित किया।याचिकाकर्ताओं ने इसके लिए पिछड़ा और आर्थिक पिछडे वर्ग के उम्मीदवार के रूप में आवेदन किया।
7 फरवरी,2021 को प्रारंभिक परीक्षा बी पी एस सी ने आयोजित किया।27 अप्रैल,2021 को इसका परिणाम प्रकाशित किया गया।
इन उम्मीदवारों ने अपनी श्रेणी मे कट ऑफ मार्क्स से अधिक अंक प्राप्त होने के बाद भी असफल घोषित हुए।बी पी एस सी ने प्रारंभिक परीक्षा में न्यूनतम अंक निर्धारित कर दिया,जब की विज्ञापन में मुख्य परीक्षा में शामिल होने उम्मीदवारों की प्रारंभिक परीक्षा में 1:10 के अनुपात में उम्मीदवार लेना था।
कोर्ट ने विज्ञापन मे दिए गए प्रावधान के अनुसार उम्मीदवारों को सफल घोषित करने के लिए प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम संशोधन करने का निर्देश बी पी एस सी को दिया।
गौरतलब है कि प्रारंभिक परीक्षा में न्यूनतम अंक के आधार पर प्रकाशित परिणाम पर कल से मुख्य परीक्षा लेने का कार्यक्रम था।
कोर्ट ने मामलें को प्रारम्भिक परीक्षा के परिणाम में संशोधित करने के बाद मुख्य परीक्षा का कार्यकम घोषित किया जाएगा।कोर्ट ने इसके साथ ही इस मामलें को निष्पादित कर दिया।

जब पेड़ों और जानवरों की गिनती हो सकती है तो जातियों की क्यों नहीं?

जातिगत जनगणना को लेकर बिहार के 10 राजनीतिक दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में मुलाकात की। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश और राजद लीडर तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। नीतीश ने कहा कि हमने बिहार की जातियों के संबंध में प्रधानमंत्री को जानकारी दी है, उन्होंने हमारी बातों को ध्यान से सुना। प्रधानमंत्री ने जातिगत जनगणना की मांग को नकारा नहीं है। तेजस्वी बोले कि जब पेड़-पौधों की गिनती हो सकती है तो जातियों की क्यों नहीं, ये राष्ट्रहित में है।

पीएम से मुलाकात के बाद क्या बोले सीएम नीतीश
सीएम नीतीश कुमार ने कहा, ‘पीएम मोदी ने बिहार से आए प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों की बातों को सुना है। अब पीएम मोदी को निर्णय लेना है, वह जो भी उचित समझें। जातीय जनगणना पर अभी निर्णय के बारे में कुछ नहीं कह सकता हूं। पीएम ने गंभीरता से सभी को सुना है। इसके लिए उनका आभारी हूं। एक-एक विषय की जानकारी दी गई है। प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों ने जातीय जनगणना के पक्ष में अपनी बातें रखी’। सीएम नीतीश कुमार ने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष की ओर से यह प्रस्ताव मिला था कि जातीय जनगणना के मुद्दे पर पीएम से मिलना चाहिए।
क्या बोले तेजस्वी
वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि पेड़-पौधों की गिनती होती है, जानवरों की गिनती होती है तो इंसानों की क्यों नहीं- ‘सरकार के पास स्पष्ट आंकड़ा नहीं है, किस समाज के कितने लोग हैं, इसकी जानकारी नहीं है।

आंकड़ों के आधार पर ही किसी भी काम को किया जाएगा। पहली बार किसी राज्य के सभी पार्टियों ने मिलकर विधानसभा में पारित किया गया जातीय जनगणना कराने के बाद कोई विवाद नहीं होगा। इससे रिजर्वेशन लागू करने में भी मदद मिलेगी। सीएम नीतीश कुमार और पीएम मोदी को भी धन्यवाद देता हूं। उन्होंने पूरी बातें सुनी है। अब हम लोगों को निर्णय का इंतजार है’।
CM नीतीश कुमार रविवार देर शाम ही पटना से दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे। वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पहले से ही दिल्ली में हैं। उनके अलावा इस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस, HAM, VIP, AIMIM, माले, CPI और CPM के नेता भी मौजूद थे।

इस प्रतिनिधिमंडल में BJP के तरफ से मंत्री जनक राम को भेजा गया था। बैठक में जदयू से शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी, कांग्रेस नेता अजीत शर्मा, CPI (माले) नेता महबूब आलम, AIMIM के अख्तरुल इमान, पूर्व मुख्यमंत्री और हम सुप्रीमो जीतन राम मांझी, VIP प्रमुख मुकेश सहनी, CPI नेता सूर्यकांत पासवान और CPM नेता अजय कुमार शामिल हुए हैं।

कोरोना काल में बेहतर काम करने वाले कबीर संस्थान को मिला सौगात।

बिहार के पहले शव फ्लूनरल संयत्र जो बिजली, गैस से संचालित होता है,का सफल ट्रायल दरभंगा में सम्पन्न हुआ। अमेरिकी संस्था फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोशिएशन और उसकी सहयोगी संस्था बिहार झारखंड एसोशिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (बाजना), मैथिल ऑफ नार्थ अमेरिका (मोना) जयपुर फुट यू एस ए द्वारा प्रदत्त शव फ्लूनरल संयत्र का मुक्तिधाम ,भिगो में अधिष्ठापन हुआ है।

मालूम रहे कि अमेरिकी संस्थानों ने कोरोना शव निस्तारण में कठिनाई देख दरभंगा के कबीर सेवा संस्थान को यह संयत्र जनहित में प्रदत किया। इसके बाद जिलाधिकारी डॉ त्यागराजन एस एम की पहल पर निगम ने मुक्तिधाम, भिगो में इसे स्थापित करने हेतु एन ओ सी दिया तथा सिविल वर्क भी करवाया। प्रसासन ने बिजली कनेक्शन की व्यवस्था की, जबकि इसके संचालन हेतु 27 सिलेंडरों का गैस बैंक, संयत्र का हरियाणा से लाने का व्यय, इसका अधिष्ठापन का खर्च कबीर सेवा संस्थान उठा रहा है।

50 से 60 लाख रु की संयुक्त लागत से अधिष्ठापन होने वाला यह शव फ्लूनरल संयत्र उत्तर बिहार का अकेला शवदाह संयत्र है जो बिजली से संचालित होगा तथा इसका हिट गैस से होगा। एक शव संस्कार में अधिकतम 45 मिनट लगेगा और पर्यावरण की भी रक्षा होगी। इस पर प्रति शव डेढ़ हजार रु का गैस पर खर्च का अनुमान है।

इंडियन ऑयल कारपोरेशन ने भी कंपनी की ओर से एक सौ रु प्रति सिलेंडर छूट दिया है।

अब ट्रायल के बाद यह उदघाटन के लिए तैयार है। हरियाणा से आये संयत्र निर्माता एम डी इंटरप्राइजेज के तकनीकी विशेषज्ञ ने तीसरे राउंड में एक सप्ताह रह कर इसका अधिष्ठापन किया और कर्मी को प्रशिक्षित भी किया। ट्रायल के समय नगर निगम के अभियंता, कर्मी सहित कबीर सेवा संस्थान और मुक्तिधाम समिति के लोगों सहित कई लोग मौजूद थे।

इस संयत्र के अधिष्ठापन से जहां शव संस्कार में समय और पैसे की बचत होगी, जबकि सबसे अहम पर्यावरण की भी रक्षा होगी।

अब जिलाधिकारी, नगर आयुक्त विधिवत इसके निरीक्षण के उपरांत इसके उदघाटन की तिथि तय करेंगे।

इसके अधिष्ठापन में लगातार नदी का बढ़ता पानी और भीषण बारिश के कारण काफी कठिनाई हुई। पूर्ण कार्य में एक कार्य चिमनी का अधिष्ठापन रह गया है, जो नदी का पानी घटने पर क्रेन जाने पर ही संभव है। हालांकि अभी इसके बिना भी शव संस्कार का कार्य हो सकेगा, जिसका धुआं चिमनी के बिना 100 फिट ऊंची की जगह 20 फिट से ही फिलहाल निकलेगा।
संयत्र अधिष्ठापन होते ही नगर आयुक्त मनेश कुमार मीणा ने संयत्र की देखरेख हेतु कर्मचारियों को जिम्मेदारी हेतु आदेश दिया है, वहीं वरीय पुलिस अधीक्षक बाबूराम ने इसकी सुरक्षा हेतु संबंधित थाना, पुलिस को आदेश दिया है। इसके अलावा मुक्तिधाम में सी सी टी वी से भी पुलिस निगरानी रखेगी। इसके अधिष्ठापन का कार्य भी चल रहा है।

बिहार में एक मंदिर ऐसा जहाँ भाई बहन की पूजा होती है ,मुगल सिपाही से बहन की रक्षा करते जान गवा दिया

भारतीय समाज में रक्षाबंधन इतना महत्‍वपूर्ण त्‍योहार है कि इसे हिंदुओं के अलावा कई दूसरे मतों को मानने वाले परिवार भी मनाते हैं। इस पर्व को लेकर तमाम लोक कथाएं हैं किंवदंतियां हैं। यह पर्व भाई और बहन के प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। ऐसे मौके पर आपको बिहार के एक मंदिर की कहानी जानकर हैरानी हो सकती है, जहां भाई और बहन की बकायदा पूजा होती है। यह मंदिर है सिवान जिले के दारौंदा प्रखंड के भीखाबांध गांव में। यहां विशाल मेला लगता रहा है।

भीखाबांध स्थित भैया-बहिनी मंदिर भाई- बहन के अटूट प्रेम एवं विश्वास का प्रतीक है। यह मंदिर प्रखंड मुख्यालय से 12 किलोमीटर उत्तर एवं महाराजगंज अनुमंडल से चार किलोमीटर पूरब सिवान -पैगंबरपुर पथ के किनारे स्थित है।

इस मंदिर के बारे में बताया जाता है कि मुगल शासक काल में एक भाई अपनी बहन को राखी के मौके पर दो दिन पहले ही डोली में बिठाकर भभुआ (कैमूर) से अपने गांव ला रहा था। भीखाबांध गांव के समीप मुगल सिपाहियों ने डोली में बैठी दुल्‍हन को देखा तो उस की सुंदरता देखकर उनके मन में गलत भावना भर गई। सिपाहियों ने डोली को रोक कर बहन के साथ गलत हरकत करने का प्रयास करने लगे। इस पर भाई अपनी बहन की रक्षा के लिए सिपाहियों से उलझ गया। कहा जाता है कि बहन अपने आप को असहाय महसूस करते हुए भगवान को याद की। उसी समय धरती फटी और भाई-बहन दोनों उसी में समा गए। डोली उठा रहे कुम्हारों ने वहां स्थित कुएं में कूद कर जान दे दी।

कहा जाता है कि इस घटना के दिनों बाद यहां एक ही स्थल पर दो वट वृक्ष निकले, जो कई बीघा जमीन पर फैल गए। ये वृक्ष ऐसे दिखाई देते हैं कि मानो लगता है कि एक-दूसरे की सुरक्षा कर रहे हों। यहां पूजा करने वालों की मनोकामनाएं पूरी होती गईं। इसके बाद यहां एक मंदिर का निर्माण हुआ। इसमें भाई-बहन के पेड़ की पूजा होती है। भाई-बहन सोनार जाति के होने के चलते सबसे पहले इन्हीं की जाति के लोगों द्वारा पूजा-अर्चना की जाती है।

हलाकि कोविड संक्रमण की वजह से यह मंदिर बंद है। बिहार में मंदिरों को खोलने की इजाजत अभी सरकार ने नहीं दी है। यहां कम श्रद्धालुओं की पहुंचने की उम्मीद है। ग्रामीणों ने बताया कि यहां अतिक्रमण के चलते वट वृक्ष कुछ कट्ठा में सिमट कर रह गया है। इस मंदिर की जीर्णोद्धार के लिए प्रशासनिक स्तर पर आज तक कुछ भी प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मंदिर एवं वटवृक्ष की ऐतिहासिक धरोहर को बचाने की मांग की है।

पूर्व राज्यपाल एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर मुख्यमंत्री ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की ।

पटना : 21 अगस्त 2021, मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने पूर्व राज्यपाल एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है।

मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा है कि स्वर्गीय कल्याण सिंह एक प्रख्यात राजनेता थे। वे दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने राजस्थान एवं हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के पद को भी सुशोभित किया था। देश की राजनीति में उनका बहुमूल्य योगदान रहा है। स्वर्गीय कल्याण सिंह जी के साथ मेरा आत्मीय संबंध था और उनसे दिल्ली में प्राय: मुलाकात हो जाती थी। उनके निधन से न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है।
मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की चिर शांति तथा उनके परिजनों एवं प्रशंसकों को दुख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

कोरोना से मौत मामले में यूरोपीय देशों से भी आगे निकला बिहार सीआरएस रिपोर्ट में हुआ खुलासा

बिहार में कोरोना से कितनी मौते हुई है इसको लेकर शुरु से ही विवाद रहा है स्वास्थय विभाग और पीआईबी बिहार के साइट पर आज भी कोरोना से मौत की बात करे तो 9649 लोगों का नाम दर्ज है वही राज्य सरकार के आकड़ों की बात करे तो 2020 और 2021के बीच मतलब पहली और दूसरी लहर की बात करे तो बिहार में कोरोना से 5,163 लोगों की मौत हुई है जबकि दूसरी लहर में बिहार का ऐसा कोई भी गांव नहीं था जहां से कोरोना फैलने और कोरोना से मौत की खबर नहीं आयी हो लेकिन नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस) ने बिहार सरकार के दावे की कलई खोल कर रख दिया है ।

सीआरएस के रिपोर्ट की माने तो बिहार में औसतन मौत का जो आकड़ा रहा है उससे (मार्च 2020 से मई 2021) के बीच 2,51,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। यह संख्या इस अवधि के दौरान राज्य में कोरोना वायरस की वजह से हुई आधिकारिक मौतों से 48.6 गुना है।

हलाकि इस दौरान राष्ट्रीय स्तर पर मौत का आकंड़ा 35 प्रतिशत अधिक रहा है महामारी से पहले की अवधि (जनवरी 2015 से फरवरी 2020) के सीआरएस डेटा को एक ऑल कॉज मोरटैलिटी बेसलाइन बनाने के लिए औसत निकाला गया है और उसकी तुलना मार्च 2020 से मई 2021के बीच में दर्ज मौतों से की गई तो 2,51,000 ‘अतिरिक्त मौतों’ की संख्या सामने आई है।

मई के अंत तक राज्य के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कोविड-19 से मरने वालों की संख्या 5,163 थी। इसका मतलब है कि सीआरएस आंकड़ों से पता चलता है कि आधिकारिक कोविड-19 की मौत का आंकड़ा 48.6 गुना कम था। कोविड-19 प्रकोप के दौरान राज्य सरकारों ने ग्राउंड डेटा को इकट्ठा करने के लिए इस सिस्टम को शुरू किया था। यह रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के कार्यालय के तहत सभी जन्म और मृत्यु को रिकॉर्ड करने की राष्ट्रीय प्रणाली है।

सीआरएस के आकड़े सामने आने के बाद मीडिया के सवालों से बचते हुए बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने बस इतना ही कहा कि वे सीआरएस डेटा पर टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन कोविड-19 से संबंधित सभी मौतें डीएम और सिविल सर्जन की तरफ से सत्यापित हैं।

जीविका दीदी ने कर दी कमाल भाई के हाथों में दीदी की बनी राखी से सजेंगी हाथ

कहते हैं रेशम के धागे की राखी का बड़ा महत्व होता है । पूर्णिया की दर्जनों जीविका दीदीयां इन दिनों मलबरी की खेती कर अपने हाथों से बेकार पड़े खराब कोकून से रेशम का धागा निकालकर आकर्षक राखियां बना रही है । इससे जहां उन्हें रोजगार मिल रहा है वहीं ये दीदीयां लोगों को रेशम की शुद्ध राखियां भी मुहैया करा रही है । पिछले साल 23 फरवरी 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी मन की बात में धमदाहा के मलवरी की खेती कर आर्थिक उपार्जन करने वाले आदर्श जीविका समूह की सराहना की थी ।

पूर्णिया के धमदाहा अनुमंडल के अमारी कुकरन में आदर्श जीविका समूह समेत चार अन्य समूह की जीविका दीदीयां इन दिनों रेशम की राखी बना रही है । जीविका दीदी रीना कुमारी ने कहा कि पहले वे लोग खराब हो चुके कोकून को बेकार समझकर फेंक देते थे । लेकिन पिछले साल पटना के सरस मेला में उनलोगों ने देखा कि कुछ लोग किस तरह बेकार पड़े चीजों का इस्तेमाल कर अच्छा हैन्डीक्राफ्ट बना रहे हैं, तो उनलोगों के मन में भी कुछ नया करने की ललक जगी । इसके लिये उनलोगों ने पहले प्रशिक्षण लिया फिर पिछले साल कोरोना के समय अपने परिवार के साथ मिलकर 21 सौ राखियां बनायीं। इस तरह उन्हें कोरोना की मुश्किल घड़ी में तकरीबन 40 हजार रुपये की आमदनी हुई।

इस बार धमदाहा के पांच समूह की 40 जीविका दीदीयों ने बैठक कर राखी बनाने का काम शुरु किया । इस साल उनलोगों का लक्ष्य करीब पचास हजार राखियां बनाने का है और एक राखी की कीमत 15 रु. से 50 रु. तक तय किया गया है। उन्हें भरोसा है कि इससे उन्हें अच्छी आमदनी भी होगी और कुछ सकारात्मक पहल भी।

इस संदर्भ में डीएम राहुल कुमार ने बताया कि पूर्णिया की जीविका दीदीयां अच्छा काम कर रही हैं। धमदाहा की आदर्श मलवरी उत्पादक जीविका समूह की जीविका दीदीयों की प्रशंसा पिछले साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी की थी । उन्होंने कहा कि धमदाहा की कई जीविका दीदीयां जहां रेशम की राखी के अलावे साड़ी समेत कई चीजें बना रही हैं वहीं कुछ जीविका दीदीयां मक्का उत्पादन और मक्का से सामग्री बनाकर आर्थिक उपार्जन कर रही है ।

पूर्णिया जीविका समूह की दीदियां लगातार अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए न सिर्फ प्रयास करती हैं बल्कि लगातार प्रशिक्षण ले कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान भी बना रही है ।

सरकारी मानदेय पाने वाले नहीं लड़ सकते है पंचायत चुनाव ,नेपाल की बेटी को नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ

बिहार में पंचायत चुनाव की उलटी गिनती शुरु हो गयी है 24 अगस्त को चुनाव की अधिसूचना जारी होने वाली है। इससे पहले आयोग ने पंचायत चुनाव लड़ने वालो को लेकर एक अर्हता (योग्यता)जारी किया है जिसमें सरकार ने मानदेय पर काम करने वाले कर्मी चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।

साथ ही वैसी लड़किया जिसकी शादी भारत में हुई है और वो नेपाल की रहने वाली है ऐसी लड़कियों को नेपााल के जाति प्रमाण पत्र के आधार पर आरंक्षण का लाभ नहीं मिलेगा ।राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी पत्र के अनुसार विशेष शिक्षा परियोजना, साक्षरता अभियान, शिक्षा केंद्रों पर मानदेय पर कार्यरत अनुदेशक, पंचायत के अधिन मानदेय व अनुबंध पर कार्यरत शिक्षा मित्र, न्याय मित्र, विकास मित्र, टोला सेवक व दलपति केंद्र व राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकार से वित्तीय सहायता पाने वाले शैक्षणिक-गैर शैक्षणिक संस्थानों में कार्यरत कर्मचारी, रसोइया व मानदेय पर कार्यरत कर्मी, गृहरक्षक एवं सरकारी वकील भी पंचायत चुनाव नहीं लड सकेंगे और ना ही किसी भी पद के लिए किसी व्यक्ति का प्रस्तावक ही बन सकते हैं।इतना ही नहीं आंगनबाडी केंद्र पर तैनात सेविका व सहायिका भी किसी भी पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकेगी और ना ही वे चुनाव मैदान में उतरने वाले अभ्यर्थी की प्रस्तावक ही बन सकेगी।

कौन कौन प्रस्तावक बन सकता है —-

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में किसी पद के प्रस्तावक होने के लिए संबंधित प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र के वोटर लिस्ट में नाम होना जरूरी है। वहीं, 21 वर्ष से कम आयु वर्ग वाले किसी का प्रस्तावक नहीं बन सकेंगे। प्रस्तावक बनने के लिए भारत का नागरीक होना जरूरी है। केंद्र व राज्य सरकार सहित किसी स्थानीय प्राधिकार की सेवा में रहने वाले व्यक्ति भी प्रस्तावक नहीं बनेंगे। सक्ष्म न्यायालय द्वारा विकृतचित घोषित व्यक्ति एवं कोर्ट से राजनीतिक अपराध से अलग किसी भी अपराध के लिए छह महिने के कारावास की सजा पाने वाले व्यक्ति किसी का प्रस्तावक नहीं होंगे। वहीं, एक सक्षम व्यक्ति एक ही अभ्यर्थी का प्रस्तावक बन सकेंगे।

चुनाव में ये उतर सकते हैं —-
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से तय की गई अर्हता के मुताबिक सेवा निवृत सरकारी कर्मी, जनवितरण प्रणाली के लाइसेंसी विक्रेता, कमीशन के आधार पर काम करने वाले अभिकर्ता एवं अकार्यरत गृहरक्षक पंचायत चुनाव के मैदान उतर सकते हैं।

वही मधुवनी के डीएम के पत्र के आलोक में राज्यनिर्वाचन आयोग ने कहा है कि नेपाल की जो भी लड़किया भारत में बिहायी गयी है उसको आरक्षंण का लाभ नहीं मिलेगा

चिराग को बुझाने वाले मेरे पिता जी को भी बुझाना चाहते थे,नीतीश जी राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार और लूट को रोकिए ना जनता खुद सर आँखों पर बिठा लेगा।

चिराग बुझेगा या जलेगा, ये आरसीपी सिंह या फिर नीतीश कुमार के हाथों में नहीं है। उनका वश चलता तो वो मुझे और मेरे पिताजी को कबका बुझा दिए होते ।ये कहना है लोजपा सांसद चिराग पासवान का हाल ही केन्द्रीयमंत्री बनने के बाद आरसीपी सिंह जब जमुई पहुंचे थे तो पत्रकार ने उनके चिराग पासवान को लेकर सवाल किया था तो उस सवाल के जबाव में आरसीपी ने कहा कि जो बुझ चुका है, उसपर क्या बोलना?

हलाकि आरसीपी के बयान पर चिराग इतना पर ही चुप नहीं हुआ आरसीपी और नीतीश कुमार पर चुटकी लेते हुए कहा कि आप मंत्री बन कर आये थे, यह पैसा बाढ़ पीड़ितों पर लगा देते, विकास में लगा देते। जगह-जगह पर होडिंग-पोस्टर लगवाए थे, इतनी ही मेहनत बिहार के विकास में करते तो बेहतर रहता।बिना घूस लिये कोई काम नहीं होता है यही करवाता देते जनता गदगद हो जाती है।

उन्होंने कहा कि सड़क की गुणवत्ता में कमी और कमीशनखोरी जैसी समस्या जमुई ही नहीं पूरे प्रदेश की है। इसलिए इसकी मिसाल हम जमुई से कायम करना चाहते हैं। किसी भी सड़क के निर्माण में कोई समझौता किए बिना गुणवत्तापूर्ण निर्माण हो इसके लिए पदाधिकारियों को भी इमानदारी पूर्वक निष्ठा के साथ कार्य करने के लिए कहा गया है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए फायदा हो।

उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण सड़क का निर्माण नहीं होने की वजह से गुणवत्ता में समझौता करने की वजह से आज जो सड़क बनी उसके पहले का हिस्सा टूटने लगता है। पहली बरसात में ही सड़क की हालत जर्जर हो जाती है। बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट के माध्यम से भी मैंने इस समस्या को बिहार सरकार के संज्ञान में देने का काम किया।बिहार की सबसे बड़ी समस्या है कि बिना घूस दिए कोई कार्य नहीं होता इन तमाम चीजों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनकी राज्य सरकार और जिला प्रशासन क्यों खामोश है ये मेरे समझ से परे है।

नाम का डबल इंजन की सरकार है

बहरहाल अपने समझ से जितना होता है मैं जिला प्रशासन व मुख्यमंत्री के संज्ञान में देने का कार्य करता हूँ। मैंने सभी अधिकारियों से आग्रह किया है कि हमलोग पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य करें। डबल इंजन की सरकार हैं तो आपकी पास पूरी ताकत है न केंद्र का पूरा सहयोग है। कौन सी ऐसी योजना है जिसमें दोनों का सहयोग नहीं है।उसके बाद भी इंफ्रास्ट्रक्चर की ऐसी स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन राज्य सरकार से हमारी यह शिकायत रही है कि केंद्र सरकार की योजनाएं प्रदेश में पूर्णतः धरातल पर नहीं उतर पाई है। डबल इंजन की सरकार होने का मतलब यही है न की दोनों का तालमेल इतना खूबसूरत हो कि राज्य सरकार की कोई योजना केंद्र में लंबित न हो और केंद्र सरकार की कोई योजना राज्य में लंबित न हो। उसके बाद भी कहीं न कहीं अड़चन आती है तो डबल इंजन की सरकार पर प्रश्नचिन्ह जरूर लगता है।

कोविड टीकाकरण में पटना राप्ट्रीय स्तर पर 10 स्थान बरकरार

कोविड-19 टीकाकरण में पटना जिला ने न केवल बिहार प्रदेश में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर नया रिकॉर्ड कायम किया है। जिसका चरणबद्ध विवरण निम्नवत है-

1/ पूरे देश के 754 जिलों में पटना जिला का सर्वाधिक टीकाकरण में दसवां स्थान बरकरार है।
1/ मुंबई 8628757
2/बृहद मंगलूर 8326267
3/पुणे7111246
4/कोलकाता5288244
5/चेन्नई 4501791
6/अहमदाबाद4418468
7/थाणे 4176939
8/24 परगना3619551
9/हैदराबाद3538561
10/पटना3509731

2/ बिहार राज्य में टीकाकरण की सर्वाधिक प्रतिशतता (पहला एवं दूसरा दोनों डोज में) पटना नंबर वन जिला

पहला डोज
पटना 59.7%, भागलपुर 43.7%, पूर्णियां 40.9% शिवहर 40.2% नालंदा 39.5%

दूसरा डोज में भी सर्वाधिक प्रतिशतता
पटना 21%
शिवहर9.1%
नालंदा 8.8%
पूर्णिया 8.5%
भागलपुर 8.5%

टीकाकरण के पहला एवं दूसरा डोज की प्रतिशतता में पटना जिला की प्रतिशतता राज्य की प्रतिशतता से भी आगे।
पहला डोज
राज्य का 37.2%
पटना जिला का 59.7%
दूसरा डोज
राज्य का 7.3%
पटना जिला का 21%

3/ * 45 प्लस के टीकाकरण के पहले एवं दूसरे डोज में पटना जिला का राज्य स्तर पर पहला स्थान*

पहला डोज
पटना 66%
शिवहर 58.1%
नालंदा 53.6%
भागलपुर 17.3%
पूर्णिया 17.3%

45 प्लस के टीकाकरण के दूसरे डोज मे भी पटना जिला का पहला स्थान
पटना 32.2%
शिवहर 20.5%
नालंदा 17.8%
भागलपुर 17.3%
पूर्णिया17.3%

45 प्लस के टीकाकरण के पहला एवं दूसरा डोज मैं पटना जिला की प्रतिशतता राज्य से भी अधिक।
पहला डोज
राज्य का 46%
पटना जिला का 66%
45 प्लस का दूसरा डोज में
राज्य का 14%
पटना जिला का 32.2%

4/ 18 से 45 आयु वर्ग के व्यक्तियों के टीकाकरण के पहला एवं दूसरा दोनों ही डोज में राज्य स्तर पर पटना जिला का पहला स्थान

पहला डोज
पटना 51.2%
भागलपुर 36.73
सारण 32.2
पूर्णियां 31.06
पूर्वी चंपारण 30.88
18 से 45 आयु वर्ग के दूसरे डोज में पटना जिला का पहला स्थान
पटना 11.10%
पूर्वी चंपारण2.87%
पूर्णिया 2.61%
सारण2.57%
भागलपुर2.51%
18 से 45 आयु वर्ग के टीकाकरण के पहले एवं दूसरे डोज में पटना जिला की प्रतिशतता राज्य की प्रतिशतता से भी अधिक
पहला डोज
राज्य का 30.22%
पटना जिला का51.20%
द्वितीय डोज में
राज्य का 2.11%
पटना जिला का11.10%

5/ पटना शहर में शत प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त किया गया है। इसके तहत कूलर 1440613 व्यक्तियों का टीकाकरण किया गया जो लक्ष्य का 100.23% है।

जिला की महत्वपूर्ण एवं उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए जिला अधिकारी डॉ चंद्रशेखर सिंह ने कर्मियों तथा जिला वासियों को बधाई दी है तथा दोगुने उत्साह से कार्य कर जिला को टीकाकरण से शत प्रतिशत आच्छादित करने को कहा है।

उक्त तमाम उपलब्धियों को प्राप्त करने हेतु जिलाधिकारी द्वारा लोगों की जरूरत एवं सुविधा को ध्यान में रखकर दूरदर्शी पहल करते हुए विशेष टीकाकरण केंद्र, 24×7 केंद्र की स्थापना, टीका एक्सप्रेस आदि शुरू किए गए तथा जिला वासियों एवं कर्मियों के समन्वित प्रयास से पटना जिला ने राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अद्वितीय एवं अविस्मरणीय कीर्तिमान स्थापित किया है।

6/ विशेष टीकाकरण केंद्र
केंद्र की संख्या 17
टीकाकृत व्यक्ति 1004049
पहला डोज 729955
दूसरा डोज274094

7/24×7 केंद्र की स्थापना
ऐसे तीन केंद्र की स्थापना 6 जून को किया गया जिसका पटना वासी ने भरपूर फायदा उठाया तथा जिला प्रशासन की सुविधा एवं व्यवस्था की सराहना की।
24×7 के रूप में कार्यरत तीनों केंद्रों पर कुल 446700 व्यक्तियों को टीकाकृत किया गया जिसने फर्स्ट डोज 295 110 तथा सेकंड डोज 151590 है।
पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कंपलेक्स 187233
पाटलिपुत्रा अशोक 154324
पॉलिटेक्निक कॉलेज पाटलिपुत्रा 105143 है।

रेशम नगरी भागलपुर पुराने गौरव को प्राप्त करेगा, बनेगा आत्मनिर्भर…उपमुख्यमंत्री

भागलपुर का अतीत और वर्तमान गौरवशाली रहा है। रेशम नगरी भागलपुर अपने पुराने गौरव को प्राप्त करेगा और आत्मनिर्भर बनेगा। बिहार सरकार अपनी योजनाओं के माध्यम से यहां के लोगों की अपेक्षाओं पर खड़ा उतरेगी। उक्त बातें भागलपुर के लाजपत पार्क में आयोजित “आत्मनिर्भर बिहार- भागलपुर की बात” कार्यक्रम में बिहार के उपमुख्यमंत्री श्री तारकिशोर प्रसाद ने कहे।

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय पार्ट-2 के अंतर्गत बिहार सरकार द्वारा कई महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, जिसके तहत काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना की वैश्विक चुनौती के बीच बिहार ही नहीं समूचे देश में आर्थिक प्रवाह बाधित हुआ है, परंतु इन चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार और बिहार सरकार ने मानव जीवन की रक्षा हेतु यथासंभव बेहतर प्रबंध किए। केंद्र सरकार ने लोगों के लिए नि:शुल्क कोरोना टीकाकरण की व्यवस्था सुनिश्चित की, वहीं बिहार सरकार छ: माह में छ: करोड़ लोगों को टीकाकरण करने लक्ष्य के तहत काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कोराना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए बिहार सरकार तैयार है।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भागलपुर जिले को हवाई अड्डे की सुविधा एवं भोलानाथ पुल के निर्माण हेतु केंद्र सरकार से बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि भागलपुर में स्मार्ट सिटी के विभिन्न अवयवों के क्रियान्वयन की तकनीकी बाधाओं को दूर किया गया है। सैंडिस कंपाउंड में स्मार्ट सिटी के सभी कंपोनेंट पर काम हो रहा है। स्मार्ट रोड नेटवर्किंग के तहत कुल 34 सड़कों का पुनर्विकास एवं पुन:संयोजन किया जा रहा है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 30 किलोमीटर है। सड़क जाम से मुक्ति हेतु घंटाघर चौक से आदमपुर चौक, बड़ी खंजरपुर, मायागंज अस्पताल पथ को बाईपास के लिए चयनित किया गया है। भागलपुर शहर में चार वाहन पार्किंग बनाने की कार्रवाई चल रही है। उन्होंने कहा कि विगत 15 वर्षों में सरकार ने बिहार के चतुर्दिक विकास के लिए बेहतर काम किए हैं, जिसके परिणाम धरातल पर दिख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। गांवों की समृद्धि एवं स्वालंबन के लिए केंद्र सरकार एवं बिहार सरकार ने महत्वपूर्ण योजनाओं को संचालित किया है। उज्जवला योजना, जलापूर्ति योजना, गली-नाली पक्की सड़क योजना सहित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से गांवों की खुशहाली और समृद्धि के लिए सकारात्मक कदम उठाए गए हैं।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रेशम नगरी भागलपुर उद्योग और कृषि उत्पादों के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है। भागलपुर के प्राचीन गौरव को पुर्नस्थापित करते हुए आत्मनिर्भर बिहार के संकल्पों को हम सबके सहयोग से पूरा करेंगे।

बाढ़ पीड़ितों को तत्काल राहत प्रदान करों।

किसानों को बाढ़ में नष्ट फसलों एवं घरों के धराषाई होनें के एवज में आर्थिक मुआवज दो। बाढ़ से निबटने की दीर्घकालीन योजना पर अमल करों। बिहार के बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुँचाने में सरकार पूरी तरह विफल रही है। बेगुसराय, भागलपुर, कटिहार दरभंगा, पुर्वी, पष्चिमी चम्पारण जिलों से जो वीडियों एवं अन्य श्रोतो से सुचनाएँ प्राप्त हो रही हैं, वे मानवीय संवेदनाओं को विचलित करने वाली है।

बिहार सरकार की ओर से बाढ़ से निबटने एवं बाढ़ प्रभावित लोगों को अवासीयी सुविधाओं के साथ – साथ भोजन, शुद्ध पेयजल बीमारों को दबा, बच्चों को दूध उपलब्ध कराने के जो बड़े – बडे़ दावे किये जाते है, वह जमीनी स्तर पर कहीं दिखाई नहीं पड़ता है। बाढ़ पीड़ितों को भाग्य भरोसे छोड़ दिया गया है। खुद भाजपा के पटना से सांसद रामकृपाल यादव राहत सामग्रियों के बंदर बांट की बात कह रहे है।

एक तो राहत बाढ़ पीड़ितों तक पहुँच नही रहा है और जो पहुँच रहा है, वह भी भ्रष्टाचार की भेट चढ़ जाय तो इस तरह का प्रषासन किस काम का।

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मॉ0) की बिहार राज्य कमिटी बिहार के तमाम पार्टी इकाइयों जिला कमिटीयों से बाढ़ पीड़ितों के हक में आवज उठाने एवं अपने स्तर से सम्भव सहायता प्रदान करने का आह्ावान करती है। पार्टी उन तमाम जिला इकाईयों का अभिन्दन करती है जिन्होनें बाढ़ पीड़ितों की दुर्दसा को सरकार के सामने लाया है और अपने स्तर से राहत प्रदान कर रहे है।

ऑनलाइन पोर्टल से आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को ससमय भुगतान करने में बिहार को मिल रही सफलता

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने शुक्रवार को यहां बताया कि अब बिहार भी आशा एवं आशा फैसिलिटेटर की प्रोत्साहन राशि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रदान करने वाले राज्यों में शामिल हो गया है। पहले आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को अपने भुगतान के लिए कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था, जिससे कई बार उन्हें कुछ महीने तक अपने भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ता था। आशा कार्यकर्ताओं की इस समस्या को दूर करने के लिए बिहार सरकार ने दिसम्बर, 2020 से आश्विन पोर्टल की शुरुआत की। इस पोर्टल के माध्यम से अब आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को न सिर्फ ससमय भुगतान हो रहा है, बल्कि वह अपने द्वारा की जा रही गतिविधियों का ब्यौरा भी पोर्टल पर फीड भी कर रही है।

श्री पांडेय ने बताया कि पहले आशा पिछले माह की 26 तारीख से वर्तमान माह की 25 तारीख तक किए गए कार्यों की प्रोत्साहन राशि का ब्यौरा भरती हैं। इसके बाद इसे आशा फैसिलिटेटर हस्ताक्षरित करती है। फिर सम्पूर्ण ब्यौरा माह के अंतिम कार्य दिवस यानी 30 या 31 तारीख तक आशा द्वारा आश्विन पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। आशा दो तरह के कार्य करती हैं। पहला समुदाय आधारित एवं दूसरा संस्थान आधारित. दोनों स्तर पर अधिकतम 63 तरह की गतिविधियां होती हैं, जिसे एक आशा कर सकती है। यदि आशा द्वारा अपलोड की गई गतिविधियां सामुदायिक आधारित होती हैं, तो इसे संबंधित एएनएम 5 तारीख तक सत्यापित करती हैं। यदि गतिविधियां ब्लॉक या अनुमंडलीय फैसिलिटी स्तर की होती हैं तो इसे प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक( बीसीएम) एवं जिला स्तरीय फैसिलिटी स्तर की गतिविधियां होने पर जिला सामुदायिक उत्प्रेरक(डीसीएम) सत्यापित करते हैं। इसके बाद संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी आश्विन पोर्टल पर भरी गयी प्रोत्साहन राशि को सत्यापित कर राज्य स्तर पर भेज देते हैं। इस तरह प्रत्येक महीने के 12 तारीख तक पिछले माह में आशा एवं आशा फैसिलिटेटर द्वारा किए गए कार्यों का भुगतान सुनिश्चित हो जाता है।

श्री पांडेय ने बताया कि दिसम्बर, 2020 से अभी तक अश्विन पोर्टल से आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को विगत माह तक 150 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि की भुगतान की गई है, जो कि कुल देय प्रोत्साहन राशि का लगभग 94 फीसदी हैं। बिहार में फिलहाल 87699 आशा एवं 4261 आशा फैसिलिटेटर हैं। दिसम्बर, 2020 से पहले आशा को भुगतान मैन्युली किया जाता था, लेकिन आशा एवं आशा फैसिलिटेटर की इतनी बड़ी संख्या होने के कारण उनकी गतिविधियों का मैन्युली सत्यापन करने में कठिनाई होती थी, जिसके कारण उनका ससमय भुगतान नहीं हो पाता था, लेकिन आश्विन पोर्टल की शुरुआत होने से आशा एवं आशा फैसिलिटेटर की सभी गतिविधियों का पोर्टल के माध्यम से कम समय में सत्यापन हो रहा है। इससे भुगतान में आसानी हो रही है। आशा कार्यकर्ता उत्साहित हो अपने कार्य को और बेहतर तरीके से कर रही हैं।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न विभागों में असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर नियुक्ति को लेकर बीपीएससी के फैसले को किया रद्द

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न विभागों में असिस्टेंट इंजीनियर (सिविल इंजीनियरिंग) के पद पर नियुक्ति को लेकर बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा अर्हता प्राप्त उम्मीदवारों की उम्मीदवारी को रद्द किये जाने के मामले पर सुनवाई की। अनामिका आशना व अन्य की याचिकाओं पर जस्टिस चक्रधारी एस सिंह ने सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि इनकी उम्मीदवारी इस आधार पर रद्द नहीं की जा सकती है कि ये यूनिवर्सिटी द्वारा जारी सर्टीफिकेट प्रस्तुत नहीं कर सके।

कोर्ट ने कहा है कि जैसा कि साक्षात्कार पत्र कहा गया है कि साक्षात्कार के बाद भी यह निर्णय लेने का अधिकार आयोग के पास सुरक्षित है कि कोई उम्मीदवार अपेक्षित शैक्षणिक योग्यता रखता है या नहीं।ऐसी स्थिति में आयोग यह निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा कि याचिकाकर्ता बी टेक (सिविल इंजीनियरिंग) की योग्यता आवेदन की अंतिम तिथि को रखते हैं या नहीं।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि आयोग द्वारा 2017 मे जारी विज्ञापन में याचिकाकर्ताओं से इस पद पर बहाली के लिए आवेदन आमंत्रित किया था। तीनों उम्मीदवारों ने पी टी और मेंस की लिखित परीक्षा को पास करने के बाद साक्षात्कार में भाग लिया।

लेकिन बाद में आयोग ने यह कहते हुए इनकी उम्मीदवारी को रद्द कर दिया कि बी टेक का प्रोविजनल सर्टिफिकेट बी आई टी सिंदरी द्वारा जारी किया गया है ,न कि विनोबा भावे यूनिवर्सिटी द्वारा।

आयोग ने साक्षात्कार में सफल उम्मीदवारों की भी उम्मीदवारी को रद्द कर दिया।याचिकाकर्ता का कहना था कि यह भी आश्चर्य की बात है कि विनोबा भावे विश्विद्यालय से पास बहुत से अन्य उम्मीदवार जो कि सिर्फ प्रोविजनल सर्टिफिकेट प्रस्तुत किये थे, उन्हें इस विज्ञापन संख्या – 02/ 2017 में सफल घोषित किया गया था।

हालांकि जब याचिकाकर्ता ने इस बात को अपने रिट याचिका में इस बात की जानकारी दी, तो बी पी एस सी ने उन सभी सफल उम्मीदवारों की भी उम्मीदवारी रद्द कर दी थी। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों के दलीले सुनने के बाद ऐसे सभी उम्मीदवारों के संदर्भ में बी पी एस सी द्वारा उम्मीदवारी निरस्त करने के निर्णय को रद्द कर दिया।

तेज प्रताप परिवार में अलग थलग पड़े लालू का सीधा संदेश अनुशासन तोड़े तो होगी कारवाई ।जगतानंद सिंह को मिली खुली छुट अनुशासन से नहीं करना है समझौता चाहे मेरा बेटा ही क्यों ना हो ।

तेज प्रताप अपने ही जाल में इस तरह से उलझते चले जा रहे हैं कि अब उनके सलाहकार भी उस जाल से बाहर कैसे निकले इसको लेकर हाथ खड़े कर दिये हैं ।भाई तेजस्वी से मुलाकात बेनतीजा रहा तेजस्वी ने तेजप्रताप को किसी भी तरह के स्पेस देने से साफ मना कर दिया है। साथ ही चेतावनी भी दे डाला है कि पार्टी में अनुशासन बनाये रखे नहीं तो आप पर भी कारवाई होगी ।

इस बयान के बाद तेज प्रताप आपा खो दिये और फिर अपने अंदाज में संजय यादव और तेजस्वी को देख लेने की धमकी देते हुए तेजस्वी के आवास से बाहर निकल गये ।

हलाकि इस मामले में सुबह में ही बहन रोहिणी आचार्य ने ट्वीट के सहारे तेज प्रताप को परिवार की क्या इक्छा है ये जता दिया था , सफलता की मंजिल पानी है, अनुशासन और संयम को अपनाना है।फिर भी तेज प्रताप अपने व्यवहारा में सुधार लाने को तैयार नहीं है।

वही लालू प्रसाद सहित परिवार के अधिकांश सदस्य तो ये समझ में आ गया है कि इस खेल में मुख्यमंत्री आवास में तैनात के सीनियर अधिकारी शामिल है जो तेज प्रताप के हर पैरवी को एंटरटेन भी करता है और उसके कहने पर तेज प्रताप के साथ रहने वाले लोगों को ठीकेदारी दिलाने में भी मदद कर रहा है।

हलाकि यह खेल 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले से चल रहा है लेकिन लालू प्रसाद परिवार में टूट को लेकर कोई संदेश ना जाये इसका ख्याल रखा और तेज प्रताप के हर जायज नजायज बात को मानता रहा हलाकि अब लालू प्रसाद मन बना चूंके हैं कि तेज प्रताप की जो राजनैतिक शैली है उससे तेजस्वी को खासा नुकसान हो सकता है इसलिए तेज प्रताप को लेकर निर्णय लेने का वक्त आ गया है क्यों कि अभी हाल फिलहाल में कोई चुनाव भी होने वाला नहीं है और फिर अनुसाशन को लेकर लालू यह संदेश भी देना चाहते हैं कि मेरा बेटा ही क्यों ना हो बर्दास्त नहीं करेंगे ।

इस संदेश से आने वाले समय में तेजस्वी को बिहार की राजनीति में अलग पहचान बनाने में मदद मिलेगी क्यों कि परिवार को पता है कि कभी तेज प्रताप जैसी शैली साधू और सुभाष का भी रहा करता था जिसके नुकसान से आज भी राजद बाहर निकल नहीं पाया है ।

नीतीश कुमार के गुगली में बिहार बीजेपी बोल्ड , जनसंख्या नियंत्रण कानून के सहारे नीतीश को घेरने की तैयारी शुरु बीजेपी नेता सीएम और राज्यपाल से मिलने की बनायी रणनीति

जातीय जनगणना मामले में बिहार बीजेपी नीतीश कुमार के गुगली में फंस गया 23 अगस्त को जातीय जगगणना मामले में पीएम से मिलने जा रहे प्रतिनिधि मंडल में अब बीजेपी भी शामिल होगी ।मीडिया से बात करते हुए बिहार प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष संजय जायासवाल ने कहा कि PM नरेंद्र मोदी से 23 अगस्त CM नीतीश कुमार के साथ जा रहे प्रतिनिधिमंडल में भाजपा कोटे के मंत्री भी शामिल होंगे ।

हलाकि जातीय जनगणना को लेकर बिहार बीजेपी के तमाम बड़े नेता विरोध करते रहे हैं लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान के बाद यह तय हो गया कि बिहार बीजेपी बिहार में जातीय राजनीति के जाल में बाहर निकलने में नाकामयाब रहा हलाकि इसको लेकर बीजेपी के अंदर घमासान मच गया है और केन्द्रीय नेतृत्व को हस्तक्षेप करने को कहा है कल आर्शीवाद यात्रा की शुरुआत करने गया पहुंचे केन्द्रीयमंत्री आरके सिंह ने कहा था कि जातिगत राजनीति’ करने वाले ही ‘जातीय जनगणना’ की कर रहे हैं मांग केन्द्रीयगृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय तो पहले ही लोकसभा में जातीय जनगणना के विरोध में बयान दे चुके हैं वैसे इस मामले में सहकारिता मंत्री सुभाष सिंह ने कहा था- ‘इससे सामाजिक तनाव होगा।’ इसी तरह मंत्री नीरज सिंह बबलू ने भी जातीय जनगणना से पहले जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग की थी। हलाकि नीतीश कुमार के इस गुगली पर भेल ही बीजेपी बोल्ड हो गया है लेकिन अब बिहार में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर नीतीश पर दबाव बढ़ाने कि कोशिश बीजेपी आज से शुरु कर दी और जल्द ही बिहार बीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल सीएम और राज्यपाल से मिलने जा रहा है ।

एक गांव ऐसा जहां हिन्दू भी मुहर्रम मनाते हैं

बिहार के बांका जिले में एक गांव ऐसा भी है जहां एक भी घर मुस्लिम नहीं है फिर भी पूरा गांव बुराई पर अच्छाई की जीत , शहादत और कुर्बानी की प्रतीक #मुहर्रम पर्व पूरे धूमधाम से मनाता है हम बात कर रहे हैं बांका जिले के अमरपुर प्रखंड स्थित तारडीह गांव का जहां आज सुबह से ही पूरे गांव का नराजा बदला बदला सा दिख रहा है । पूरे गाँव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहने के बाबजूद वहाँ रह रहे हिन्दू परिवार पिछले कई वर्षों से मुहर्रम धूमधाम से मना रहे हैं l इस पर्व को मानाने की शुरुआत 1990 में अमरपुर विधानसभा से विधायक रहे स्व. माधो मण्डल के पिता ने की थी। तब से उनके बंशज इसे आज तक मनाते आ रहे हैं। माधो मण्डल के पुत्र शंकर मण्डल ने बताया कि उनके दादा जी को कोई संतान नहीं हो रही थी, तब उन्होंने मजार पर जाकर मन्नत मांगी और मन्नत पूरा होने पर इस पर्व की शुरुआत की गयी l इसमें ग्रामीणों का काफ़ी सहयोग मिलता है l इस पर्व में स्थानीय लोग मुस्लिम रीतिरिवाज के लिये गाँव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहने के कारण दूसरे गाँव से मौलवी को बुलाकर परम्परा का निर्वहन करते हैं l

सुबह से ही तारडीह वाले गाँव से पांच किलोमीटर दूर मुस्लिम आबादी बाले गाँव में जाकर पहलाम करते हैं एवं आपस में भाईचारा का संदेश देते हैं l हालांकि इस बार कोविड नियमों की वजह से जुलूस का आदेश नहीं मिलने के कारण शांतिपूर्ण तरीके से गाँव में ही पहलाम करेंगे lहलाकि बिहार के कई इलाकों में मुस्लिम इसी तरीके से गांव के गांव छठ पर्व करते हैं ।

तेज प्रताप के आचरण से लालू नराज, तेजस्वी को बुलाया दिल्ली, तेज प्रताप पर हो सकती है कारवाई ।

राजद से अंदर सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है पिछले 24 घंटों के दौरान जिस तरीके से तेज प्रताप तेजस्वी के निजी सहायक संजय यादव और प्रदेश अध्यक्ष जगतानंद सिंह को निशाने पर ले रहे हैं ऐसे में यह तय हो गया है कि अब पार्टी में तेज प्रताप बहुत कम दिन के मेहमान रह गये हैं ।

क्यों कि तेज प्रताप के आचरण से लगातार पार्टी को नुकसान हो रहा है और इस बात को लालू प्रसाद और तेजस्वी भी पूरी तौर पर समझ रहे हैं तेज प्रताप के कारण है पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में राजद को कई सीटों का नुकसान उठाना पड़ा था ऐसे में तेज प्रताप के कार्यशैली पर रोक नहीं लगाया गया तो पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है ।वही खबर ये आ रही है कि तेज प्रताप मीडिया से बात करते हुए जिस अंदाज में जगतानंद सिंह और संजय यादव को लेकर सार्वजनिक रुप से टिप्पणी किया है उससे लालू प्रसाद खासे नराज है और कल तेजस्वी को दिल्ली बुलाया है ।

इस बीच खबर ये आ रही है कि मनोज झा सहित पार्टी के तमाम बड़े नेता की कल रात एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी जिसमें यह तय हुआ है कि तेज प्रताप को लेकर अब पार्टी नरम रुख अख्तियार नहीं करेंगी क्यों कि तेज प्रताप के व्यवहार से कांग्रेस सहित महागठबंधन के तमाम सहयोगी दल नराज है और परिवार के अंदर भी मीसा भारती को छोड़ दे तो पूरा परिवार तेज प्रताप के व्यवहार से नाखुस है ऐसे में परिवार पूरी तौर पर तेजस्वी के साथ खड़ा है ।

वैसे आज रात या फिर कल सुबह तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच बातचीत हो सकती है हलाकि बातचीत के सहारे बहुत कुछ बदलने वाली है लालू परिवार लगभग तय कर लिया है कि तेज प्रताप को राजनीति से साइड कर दिया जाये वैसे राबड़ी इस फैसले को लेकर सहज नहीं है फिर भी सवाल तेजस्वी के राजनैतिक भविष्य से जुड़ा हुआ है ।

जिस तरीके का आचरण तेज प्रताप का है ऐसे में पार्टी के साथ साथ तेजस्वी का राजनैतिक भविष्य अब दाव पर लग गया है । लालू प्रसाद के पास अब कोई विकल्प नहीं बच गया है पार्टी के तमाम बड़े नेता तेज प्रताप के व्यवहार से नराज है अब तो यहां तक चर्चा होने लगी है कि जगतानंद सिंह पार्टी के लिए जब अपने बेटा के खिलाफ खड़े हो गये थे तो लालू प्रसाद खड़े क्यों नहीं हो रहे हैं ऐसे में तेज प्रताप को लेकर पार्टी कोई कठोर निर्णय ले ले तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।

नागेन्द्र जी की छुट्टी सुशील मोदी युग का अंत माना जा रहा है, 2020 में एनडीए सरकार गठन के बाद नागेन्द्र जी सबसे मजबूत केन्द्र के रुप में उभरे थे।

बिहार प्रदेश बीजेपी के संगठन महामंत्री नागेन्द्र जी का बिहार से छुट्टी बिहार बीजेपी में सुशील मोदी युग के समापन के रुप में देखा जा रहा है । 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद जिस तरीके से बीजेपी के केन्द्रीय नेतृत्व ने नंद किशोर यादव, प्रेम कुमार और सुशील मोदी को मंत्री पद से बाहर का रास्ता दिखाया, उसी दिन से यह कयास लगाये जाने लगा था कि भाजपा अब बिहार में सुशील मोदी के प्रभा-मंडल से बाहर निकलना चाहता है। लेकिन सुशील मोदी की पार्टी ,संगठन और विधायक पर इतनी मजबूत पकड़ है कि चाह करके भी केन्द्रीय नेतृत्व बहुत कुछ नहीं कर पा रहा है।

इस बात को लेकर सुशील मोदी के खिलाफ जो एक गुट तैयार किया जा रहा है, वो नागेन्द्र जी से खासे नराज चल रहे थे क्योंकि नागेन्द्र जी संघ और बीजेपी के बीच सेतू के पद पर थे। इसलिए बिहार बीजेपी के नेता बहुत कुछ कर नहीं पा रहे थे क्योंकि नागेन्द्र जी 2011 से प्रदेश के संगठन महामंत्री हैं और आज बीजेपी की केन्द्रीय नेतृत्व पार्टी के जिस नेता को मोदी के खिलाफ खड़ा करना चाह रही है, वो नागेन्द्र जी के प्रभामंडल के सामने टिक नहीं पा रहे थे ।

ऐसे में केन्द्रीय नेतृत्व नागेन्द्र जी को बिहार से बाहर किये बगैर सुशील मोदी युग को खत्म नहीं कर पा रहा थे, वहीं नागेन्द्र जी की संघ के अंदर ऐसी छवि थी कि सीधे सीधे इनको हटाया भी नहीं जा सकता था। इसलिए इन्हें बिहार और झारखंड का क्षेत्रीय महामंत्री नियुक्त किया गया और इनका मुख्यालय पटना से रांची बना दिया गया। फिर इनके जगह पर जिन्हें लाया गया है, वो नरेन्द्र मोदी के करीबी हैं और गुजरात से हैं। ऐसे में नागेन्द्र जी उंचे ओहदे पर होने के बावजूद बहुत कुछ कर नहीं पायेंगे।

मतलब, बिहार में बीजेपी सभी स्तर पर ऐसे पदाधिकारी और नेता का कद छोटा करने में लगी है, जिनका रिश्ता सुशील मोदी और नीतीश कुमार से है। ऐसी स्थिति में सवाल यह है कि बीजेपी बिहार में चाहती क्या है? नीतीश के साथ सरकार में है और वहीं नीतीश सहजता से सरकार ना चला सकें, ये भी खेल हो रहा है। देखिए, आगे आगे होता है क्या, लेकिन इतना तय है कि अब बीजेपी नीतीश को शासन व्यवस्था चलाने में खुली छुट देने के मूड में नहीं है।

अब घर बैठे जान सकते हैं खून की उपलब्धता, ब्लड बैंकों का हुआ डिजिटलीकरण

पटना, 19 अगस्त। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने गुरुवार को यहां बताया कि राज्यवासी अब घर बैठे खून की उपलब्धता जान सकते हैं। इसके लिए राज्य के 89 ब्लड बैंकों का डिजिटलीकरण किया गया है, ताकि लोगों को ब्लड मिलने में आसानी हो सके। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस दिशा में पहल करते हुये राज्य के कुल 94 ब्लड बैंकों के 89 ब्लड बैंकों को ई-रक्तकोष से जोड़कर इनका डिजिटलीकरण किया गया है। दूसरी ओर राज्य के 10 जिलों में 10 नए ब्लड बैंक भी बनाये जा रहे हैं, ताकि खून की उपलब्धता में कमी न हो।

श्री पांडेय ने कहा कि ब्लड कलेक्शन को बढ़ाने के लिए नए ब्लड कलेक्शन स्टोरेज यूनिट भी स्थापित किए जा रहे हैं। ब्लड स्टोरेज यूनिट के मामले में राज्य सरकार ने काफ़ी प्रगति की है। वर्ष 2016-17 में राज्य में केवल 8 ब्लड स्टोरेज यूनिट थे, जो अब बढ़कर 68 हो गए हैं। वहीं, राज्य में वर्ष 2017-18 में 46, 2018-19 में 54 एवं 2019-20 में 58 ब्लड स्टोरेज यूनिट थे। इस तरह पांच सालों में कुल 60 नए ब्लड स्टोरेज यूनिट की शुरुआत हुई है। आने वाले समय में इसकी संख्या 108 तक बढ़ाने की कार्ययोजना है। अभी राज्य में कुल 94 ब्लड बैंक क्रियाशील है। इसमें जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज सहित कुल 38 सरकारी ब्लड बैंक तथा 5 रेड क्रॉस समर्थित एवं 51 निजी ब्लड बैंक हैं। अब राज्य के 10 जिलों में 10 नए ब्लड बैंक की शुरुआत होगी। इसमें अररिया, अरवल, सुपौल, पूर्वी चंपारण, शिवहर, बांका एवं भागलपुर के जिला अस्पतालों में नए ब्लड बैंक स्थापित किये जाएंगे। पटना के गुरु गोविन्द सिंह अस्पताल, गया के जेपीएन अस्पताल एवं दरभंगा के बेनीपुर अनुमंडलीय अस्पताल में भी नए ब्लड बैंक का निर्माण पूरा किया जाएगा। अररिया, अरवल, बांका एवं भागलपुर जिले में ब्लड बैंक का निर्माण अंतिम चरण में है।

श्री पांडेय ने कहा कि ई-रक्तकोष ब्लड बैंकों के कार्य प्रवाह को जोड़ने, डिजिटलीकरण और सुव्यवस्थित करने की एक पहल है। खून की आकस्मिक जरूरत होने पर ब्लड बैंकों पर लोगों की निर्भरता बढ़ जाती है। ऐसे में ब्लड बैंकों की खून की पर्याप्त उपलब्धता कई मरीजों के लिए जीवनदायनी साबित होती है। ब्लड बैंकों में खून की उपलब्धता अधिक से अधिक रक्तदान करने से सुनिश्चित होती है। इसलिए लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए जरूर आगे आना चाहिए। नियमित रक्तदान करने से ह्ृदय रोगों से भी बचाव होता है। रक्तदान करने से एक व्यक्ति लगभग 3 से 4 मरीजों की जान बचा सकता है।