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मुजफ्फरपुर पुलिस के कार्यशैली पर खड़े हुए सवाल भ्रष्ट इंजीनियर को थाने से ही मिला बेल

बिहार में भ्रष्टाचार को लेकर एक कहावत बहुत प्रचलित है खीरा चोर को जेल और हीरा चोर को बेल मुजफ्फरपुर पुलिस कुछ ऐसा ही कर दिखाया है जिस इंजीनियर के पास से 67 लाख रुपया केस बरामद हुआ है उसको थाने पर से ही बेल दे दिया गया है ,जबकि खुद थाना अध्यक्ष लिखित में स्वीकार किया है कि इंजीनियर अनुसंधान में सहयोग नहीं कर रहे हैं कोर्ट में पुलिस आवेदन दिया है कि लैपटांप और मोबाइल खोलने में इंजीनियर सहयोग नहीं कर रहे हैं इस वजह से इसमें क्या साक्ष्य है पता नहीं चल पा रहा है ऐसे में लैपटांप और मोबाइल की जांच के लिए एक्सपर्ट के पास भेजने की अनुमति दी जाये ,इंजीनियर पर अब जो मामला दर्ज हुआ है उसके तहत आईपीसी की धारा 424 और भ्रष्टाचार निवारण की धारा 13 (1बी) लगाया है हलाकि इसमें सात वर्ष के सजा का प्रावधान है ऐसे में आप थाना से जमानत दे सकते हैं लेकिन जो अपराधी आपको अनुसंधान में सहयोग नहीं कर रहा है उसको आप थाने से बेल कैसे दे दिए ये एक बड़ा सवाल मुजफ्फरपुर पुलिस से हैं क्यों कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अधिकांश मामले में पुलिस सात वर्ष से कम सजा वाले मामलों में थाने पर से बेल नहीं देता है फिर इस इंजीनियर से किस बात का मोहब्बत मुजफ्फरपुर पुलिस को सामने आकर कहना चाहिए वही पांच दिन बाद भी इस मामले को लेकर राज्य में भ्रष्टाचार को लेकर गठित कोई भी एजेंसी अभी तक इस मामले को टेक ओभर नहीं किया है ऐसे कई सवाल है जिसको लेकर पुलिस मुख्यालय से लेकर मुजफ्फरपुर पुलिस तक चुप्पी साधे हुए हैं ऐसे में संदेश और सवाल स्वभाविक है कौन है इंजीनियर का रहनुमा जिसके सामने पूरी सरकार मूक दर्शक बनी हुई है और इंजीनियर कह रहा है कि बिहार में वर्क कल्चर ऐसा है कि पैसा लेना पड़ता है इसलिए ज्यादा सवाल मत करिए मुंह खोल दूं तो पटना तक में भूचाल आ जाएगा ।

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