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रांची-दिल्ली एयर एंबुलेंस हादसा: 8 लाख जुटाकर बुक की उड़ान, 23 मिनट बाद जंगल में क्रैश; बर्न मरीज समेत 7 की दर्दनाक मौत

झारखंड के चतरा जिले में सोमवार शाम एक दिल दहला देने वाली त्रासदी सामने आई, जब रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एंबुलेंस सिमरिया थाना क्षेत्र के कसियातु जंगल में क्रैश हो गई। इस हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में गंभीर रूप से झुलसे मरीज, उनकी पत्नी और भांजा, दो पायलट, एक डॉक्टर और एक पैरामेडिक शामिल हैं। यह हादसा न सिर्फ सात जिंदगियों का अंत है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था, एयर मेडिकल सेवाओं और आपातकालीन प्रबंधन पर भी कई सवाल खड़े कर गया है।

छह दिन पहले झुलसे थे संजय कुमार

मृतक संजय कुमार (41) पलामू जिले के चंदवा निवासी व्यवसायी थे। छह दिन पहले उनके लाइन होटल में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। आग बुझाने के दौरान उनका पैर फिसल गया और वे लपटों की चपेट में आ गए। वे 65 प्रतिशत तक झुलस गए थे। पहले उन्हें स्थानीय स्तर पर इलाज दिया गया, फिर रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

अस्पताल के सीईओ अनंत सिन्हा के अनुसार, संजय को 16 फरवरी को गंभीर हालत में भर्ती किया गया था। इलाज जारी था, लेकिन उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई थी। बेहतर इलाज के लिए परिवार ने उन्हें दिल्ली ले जाने का निर्णय लिया। सड़क मार्ग से ले जाना जोखिम भरा था, इसलिए एयर एंबुलेंस का विकल्प चुना गया।

साढ़े सात लाख जुटाने की जद्दोजहद

संजय के बड़े भाई विजय कुमार ने बताया कि एयर एंबुलेंस के लिए 7.5 लाख रुपए का इंतजाम करना पड़ा। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, फिर भी रिश्तेदारों और परिचितों से मदद लेकर रकम जुटाई गई। शुरुआत में 2.50 लाख रुपए कम पड़ गए तो विमान कंपनी ने उड़ान भरने से मना कर दिया। आरोप है कि पूरी रकम मिलने के बाद ही उड़ान की अनुमति दी गई।

परिजन चंदवा लौटे, किसी परिचित से पैसे उधार लिए और फिर रांची पहुंचकर शेष राशि दी। इसके बाद ही विमान ने उड़ान भरी। यह परिवार के लिए उम्मीद की उड़ान थी, लेकिन किसे पता था कि यह अंतिम सफर बन जाएगा।

उड़ान के 23 मिनट बाद संपर्क टूटा

एयर एंबुलेंस ने शाम 7:11 बजे रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी। 7:34 बजे कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से उसका संपर्क टूट गया। रात 8:05 बजे रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर सक्रिय किया गया। कुछ ही देर बाद जंगल में विमान क्रैश होने की सूचना मिली।

ग्रामीणों के अनुसार, करीब 7:45 बजे जंगल की ओर से जोरदार धमाके की आवाज आई। तेज हवा और बारिश के कारण लोग तुरंत मौके पर नहीं पहुंच सके। बाद में मलबा कसियातु जंगल में मिला।

खराब मौसम की आशंका

सोमवार शाम झारखंड में अचानक मौसम बिगड़ गया था। तेज हवाएं और भारी बारिश शुरू हो गई थी। शुरुआती रिपोर्ट में खराब मौसम को हादसे का संभावित कारण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि विमान अपने निर्धारित मार्ग से दाईं ओर डायवर्ट हो गया था और रास्ता भटक गया।

हालांकि, तकनीकी खराबी, पायलटिंग एरर या नेविगेशन सिस्टम की विफलता जैसे अन्य कारणों की भी जांच की जा रही है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की टीम द्वारा विस्तृत जांच की संभावना जताई गई है।

कौन-कौन थे सवार?

हादसे में जान गंवाने वालों में शामिल हैं:

  • कैप्टन विवेक
  • कैप्टन सबराजदीप
  • मरीज संजय कुमार
  • उनकी पत्नी अर्चना देवी
  • भांजा ध्रुव कुमार
  • डॉ. विकास कुमार गुप्ता
  • पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्रा

इन सातों की मौत ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। संजय के दो बेटे शुभम (17) और शिवम (13) अब अनाथ जैसे हालात में हैं। परिवार के तीन सदस्यों की एक साथ मौत ने रिश्तेदारों को तोड़ कर रख दिया है।

स्वास्थ्य मंत्री का बयान

हादसे के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी चतरा पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने कहा, “अगर झारखंड में बेहतर अस्पताल होते तो हमें मरीज को बाहर नहीं भेजना पड़ता।” उन्होंने राज्य में एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल बनाने की इच्छा जताई और कहा कि स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना समय की जरूरत है।

उन्होंने हादसे की उच्च स्तरीय जांच कराने और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया।

मुआवजे की मांग

चतरा विधायक जर्नादन पासवान ने इस घटना को मर्माहत करने वाली त्रासदी बताया और सरकार से मुआवजे की मांग की। वहीं सांसद कालीचरण सिंह ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 50-50 लाख रुपए का मुआवजा देने की अपील की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरियों की भी कहानी है। यदि राज्य में उन्नत बर्न यूनिट और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं होतीं, तो शायद मरीज को बाहर भेजने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

कई सवाल बाकी

यह हादसा कई गंभीर प्रश्न छोड़ गया है:

  • क्या खराब मौसम के बावजूद उड़ान की अनुमति देना सही था?
  • क्या एयर एंबुलेंस कंपनी ने सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया?
  • क्या आपातकालीन मेडिकल ट्रांसपोर्ट के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश मौजूद हैं?
  • क्या आर्थिक दबाव में उड़ान भरना जोखिम भरा निर्णय साबित हुआ?

जांच के बाद ही इन सवालों के जवाब मिल पाएंगे। फिलहाल सात परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल चुकी है।

स्मार्ट राशन वितरण और एआई आधारित संवाद: भारत की जनकल्याणकारी योजनाओं में तकनीकी क्रांति

भारत में जनकल्याणकारी योजनाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक नई क्रांति का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। हाल ही में आयोजित AI India Impact Summit में दो अत्याधुनिक तकनीकों – “अन्नपूर्णा” (स्मार्ट पीडीएस मशीन) और “आशा” (एआई संचालित वॉयस सिस्टम) – ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। इन दोनों नवाचारों का उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और सरकारी सर्वे प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, तेज़ और भरोसेमंद बनाना है।


अन्नपूर्णा: सटीक और पारदर्शी राशन वितरण की स्मार्ट मशीन

“अन्नपूर्णा” एक उन्नत स्मार्ट मशीन है, जिसे विशेष रूप से पीडीएस दुकानों के लिए विकसित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न सटीकता के साथ उपलब्ध कराना है।

यह मशीन स्वचालित रूप से तय मात्रा में अनाज वितरित करती है, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना समाप्त हो जाती है। पारंपरिक प्रणाली में अक्सर वजन की गड़बड़ी, हेराफेरी या अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती थीं, लेकिन अन्नपूर्णा मशीन इन समस्याओं का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करती है।

इसमें लगी डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से वितरण से संबंधित सभी आंकड़े रियल-टाइम में दर्ज और प्रदर्शित होते हैं। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ती है, बल्कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या लीकेज को रोका जा सकता है।

समिट के दौरान इसके डेमो में दिखाया गया कि यह मशीन कम समय में अधिक संख्या में लाभार्थियों को सेवा देने में सक्षम है। इससे पीडीएस दुकानों पर लगने वाली लंबी कतारों में कमी आएगी और वितरण प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित बनेगी।


आशा: संवाद को आसान बनाने वाला एआई आधारित वॉयस सिस्टम

“आशा” एक अत्याधुनिक एआई संचालित वॉयस प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य नागरिकों और सरकारी तंत्र के बीच संवाद को मजबूत बनाना है।

यह सिस्टम राशन वितरण के 24 से 48 घंटे के भीतर लाभार्थियों को फोन कॉल करता है। खास बात यह है कि यह स्थानीय भाषाओं में बातचीत करने में सक्षम है और स्पीच-टू-टेक्स्ट तकनीक का उपयोग करता है।

आशा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी “इंटेलिजेंट इंटेंट डिटेक्शन” क्षमता है, जो लाभार्थी की बात को समझकर स्वतः अगला प्रश्न तैयार करती है या आवश्यक कार्रवाई का सुझाव देती है। इससे सर्वेक्षण और फीडबैक प्रक्रिया अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बन जाती है।

डेमो के दौरान यह भी दिखाया गया कि आशा लाभार्थियों को उनके नाम से संबोधित करती है, उनका अभिवादन करती है और फिर सहज संवाद के माध्यम से आवश्यक जानकारी एकत्रित करती है। इससे न केवल सरकारी सर्वे की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि नागरिकों को भी यह महसूस होता है कि उनकी आवाज़ सुनी जा रही है।


जनकल्याणकारी योजनाओं में बड़ा बदलाव

AI India Impact Summit में प्रदर्शित इन तकनीकों ने यह साबित कर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत की सार्वजनिक योजनाओं को नई दिशा दे सकता है।

  • अन्नपूर्णा राशन वितरण में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करेगी।
  • आशा नागरिकों और प्रशासन के बीच संवाद की खाई को पाटेगी।

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इन तकनीकों का प्रभाव समान रूप से देखा जा सकेगा। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।


2027 की जंग के लिए सपा का मास्टरस्ट्रोक: अखिलेश यादव ने प्रशांत किशोर की I-PAC को सौंपी यूपी चुनाव की कमान, दिल्ली-बंगाल की सीक्रेट बैठकों के बाद बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीधी चुनौती देने के लिए समाजवादी पार्टी ने अब अपनी रणनीतिक तैयारी को नए स्तर पर पहुंचा दिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) की कंपनी Indian Political Action Committee यानी I-PAC को 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के लिए अपना कैंपेन संभालने की जिम्मेदारी सौंप दी है।

यह फैसला अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे कई महीनों की गोपनीय बैठकों, राजनीतिक सलाह-मशविरों और राष्ट्रीय स्तर की रणनीतिक सोच का योगदान है। सूत्रों के अनुसार, इस साझेदारी की नींव दिसंबर 2025 में दिल्ली में हुई एक अहम बैठक में पड़ी, जहां अखिलेश और पीके के बीच लंबी चर्चा हुई। इसके बाद जनवरी 2026 में जब अखिलेश पश्चिम बंगाल दौरे पर गए, तब वहां भी दोनों के बीच विस्तार से रणनीति पर मंथन हुआ।

दो मुख्यमंत्रियों की सलाह पर हुआ बड़ा निर्णय

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अखिलेश यादव को I-PAC की सेवाएं लेने की सलाह दी थी। दोनों ही नेताओं की चुनावी सफलताओं में पीके की टीम की भूमिका पहले से चर्चित रही है।

बताया जा रहा है कि दिल्ली और कोलकाता में हुई बैठकों के दौरान यूपी की जातीय संरचना, बूथ मैनेजमेंट, शहरी-ग्रामीण वोटर पैटर्न, युवाओं और महिलाओं के वोट बैंक, और विपक्षी रणनीति जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इन बैठकों के बाद सपा नेतृत्व ने औपचारिक रूप से I-PAC को हायर करने का फैसला लिया।

नोएडा से होगी कैंपेन की औपचारिक शुरुआत

सूत्रों के मुताबिक 28 मार्च को अखिलेश यादव नोएडा से अपने चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत करेंगे। यहां “PDA भागीदारी रैली” आयोजित की जाएगी। PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक—यह वही सामाजिक समीकरण है, जिसे सपा 2024 के लोकसभा चुनाव में मजबूत कर चुकी है और 2027 में उसे और धार देना चाहती है।

नोएडा से शुरुआत का संदेश भी राजनीतिक है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा की मजबूत पकड़ को चुनौती देना और शहरी वोटर्स तक सीधा संदेश पहुंचाना सपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

सपा का मल्टी-लेयर चुनावी मॉडल

समाजवादी पार्टी इस बार सिर्फ एक एजेंसी पर निर्भर नहीं रहना चाहती। अलग-अलग जिम्मेदारियों के लिए अलग कंपनियों को हायर किया गया है।

  • डेटा एनालिसिस और माइक्रो-लेवल स्ट्रैटजी का काम मुंबई की शो टाइम कंसल्टिंग को सौंपा गया है।
  • सर्वे और फील्ड रिसर्च का काम कर्नाटक की एक कंपनी पूर्वी उत्तर प्रदेश से शुरू कर चुकी है।
  • बूथ मैनेजमेंट, डिजिटल आउटरीच और ट्रेनिंग की जिम्मेदारी I-PAC संभालेगी।

I-PAC की टीम लखनऊ में अपना कैंप स्थापित करेगी और जिला स्तर तक संगठनात्मक ढांचा खड़ा करेगी। ऐप आधारित टूल्स, वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, व्हाट्सऐप नेटवर्क और सोशल मीडिया कैंपेन को आक्रामक बनाया जाएगा।

अखिलेश के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति

2022 के विधानसभा चुनाव में सपा को 111 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा 255 सीटों के साथ सत्ता में लौटी थी। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने 37 सीटें जीतकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस सफलता ने अखिलेश यादव को यह भरोसा दिया है कि सही रणनीति और बेहतर बूथ मैनेजमेंट से 2027 में सत्ता वापसी संभव है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव अखिलेश के लिए ‘करो या मरो’ जैसा है। लगातार दो विधानसभा चुनाव हारने के बाद अब तीसरी बार चूक सपा के लिए भारी पड़ सकती है। इसलिए पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय किया जा रहा है। जिलाध्यक्षों से लेकर सेक्टर प्रभारी तक, सभी से रिपोर्ट ली जा रही है।

विपक्षी मुद्दों पर फोकस

अखिलेश यादव पिछले कुछ महीनों से कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, पेपर लीक, भ्रष्टाचार और महंगाई जैसे मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेर रहे हैं। वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा हमला करने से भी पीछे नहीं हट रहे।

सपा का मानना है कि शहरी मध्यम वर्ग, बेरोजगार युवा और किसान वर्ग में असंतोष है, जिसे चुनावी मुद्दा बनाया जा सकता है। I-PAC इन मुद्दों को डेटा के आधार पर क्षेत्रवार रणनीति में बदलेगी।

कौन हैं प्रशांत किशोर?

प्रशांत किशोर भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित चुनावी रणनीतिकारों में से एक रहे हैं। 2011 में संयुक्त राष्ट्र की नौकरी छोड़कर उन्होंने भारतीय राजनीति में कदम रखा।

  • 2014 में उन्होंने भाजपा के लिए रणनीति तैयार की, जिसमें नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक जीत हुई।
  • 2015 में बिहार में नीतीश कुमार की जीत में भूमिका निभाई।
  • 2016 में पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए काम किया।
  • पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एम.के. स्टालिन की चुनावी सफलता में भी उनकी कंपनी की अहम भूमिका रही।

हालांकि हाल के वर्षों में पीके ने I-PAC से दूरी बनाकर बिहार में अपनी राजनीतिक पहल “जन सुराज” शुरू की है। 2025 के बिहार चुनाव में उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि संगठन निर्माण पर ध्यान दिया।

I-PAC अब प्रतीक जैन जैसे पेशेवरों के नेतृत्व में काम कर रही है, जो विभिन्न राज्यों में चुनावी कैंपेन का संचालन कर रहे हैं।

यूपी में पीके का पिछला अनुभव

उत्तर प्रदेश में पीके इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए काम कर चुके हैं। उस समय “27 साल यूपी बेहाल” का नारा दिया गया था। हालांकि बाद में सपा-कांग्रेस गठबंधन बनने के कारण रणनीति में बदलाव करना पड़ा। उस चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 7 सीटें मिलीं और सपा 47 सीटों पर सिमट गई थी।

इस बार हालात अलग हैं। सपा अकेले अपने दम पर मजबूत स्थिति में है और लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन से उसका मनोबल ऊंचा है।

आगे की राह

I-PAC की एंट्री से यूपी की सियासत में नई हलचल मच गई है। भाजपा पहले से ही बूथ स्तर तक मजबूत संगठन का दावा करती रही है। ऐसे में 2027 का मुकाबला पूरी तरह हाई-टेक, डेटा-ड्रिवन और जमीनी रणनीति का होगा।

अखिलेश यादव के सामने चुनौती बड़ी है—योगी सरकार की मजबूत मशीनरी, भाजपा का कैडर और संसाधन। लेकिन सपा का मानना है कि सामाजिक समीकरण, युवाओं की नाराजगी और गठबंधन की संभावनाएं उसे बढ़त दिला सकती हैं।

2027 की जंग अभी दूर है, लेकिन सपा ने अपनी पहली चाल चल दी है। अब देखना होगा कि क्या पीके की रणनीति उत्तर प्रदेश की राजनीति का समीकरण बदल पाएगी, या फिर यह प्रयोग भी 2017 की तरह अधूरा रह जाएगा।

लखनऊ में डबल डेकर बस की खिड़की से गिरीं लाशें:पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर पलटी; 5 की मौत और 45 घायल

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को दर्दनाक हादसा हो गया। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर एक डबल डेकर बस अनियंत्रित होकर पलट गई, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई और 45 यात्री घायल हो गए। घायलों में 7 बच्चे, 12 पुरुष और 9 महिलाएं शामिल हैं। 28 गंभीर घायलों को SGPGI एपेक्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया है।

खिड़कियों से गिरे शव, दिल दहला देने वाला मंजर

हादसे के बाद सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि जब क्रेन से बस को सीधा किया गया तो खिड़कियों से शव सड़क पर गिर पड़े। सड़क पर चारों तरफ खून बिखरा हुआ था। कई घायल और मृत यात्री खिड़कियों से लटके रहे। कुछ तस्वीरों में यात्रियों के हाथ-पैर अलग दिखाई दे रहे हैं। घटनास्थल पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल था।

बस लुधियाना (पंजाब) से मोतिहारी (बिहार) जा रही थी। हादसे के समय बस की रफ्तार 80 किमी/घंटा से अधिक बताई जा रही है। दुर्घटना के बाद ड्राइवर और क्लीनर मौके से फरार हो गए।

मृतकों की पहचान

मृतकों में बीरेंद्र (30), अंजली (8), प्रियांशु (15), एक 6 वर्षीय बच्चा और 30 वर्षीय युवक शामिल हैं। घटनास्थल से खून से सना एक छोटे बच्चे का जूता मिला, जो इस हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर बन गया है।

ड्राइवर का बयान और चश्मदीदों का दावा

ड्राइवर सोमपाल, निवासी नौल्था, पानीपत (हरियाणा), ने पुलिस पूछताछ में बताया कि ढाबे पर उसने हल्की शराब पी थी। उसके अनुसार एक्सप्रेस-वे पर अचानक ब्रेकर आने से बस अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। हालांकि, जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां कोई स्पीड ब्रेकर नहीं है।
प्रत्यक्षदर्शी अंश पटेल ने बताया कि बस “सांप की तरह लहरा रही थी” और अचानक पलट गई। कुछ यात्रियों का दावा है कि ड्राइवर को झपकी आ गई थी।

प्रारंभिक जांच में बड़ी लापरवाही उजागर

1. इमरजेंसी गेट बंद
जांच में पाया गया कि इमरजेंसी गेट के सामने अतिरिक्त सीट लगा दी गई थी, जिससे आपातकालीन निकास पूरी तरह बंद था।

2. क्षमता से अधिक यात्री
बस में 16 स्लीपर और 32 सिटिंग सीट की अनुमति थी, लेकिन अंदर 43 स्लीपर बना दिए गए थे और केवल 9 सिटिंग सीट छोड़ी गई थीं। करीब 90 यात्रियों को बैठाया गया था।

3. अवैध स्ट्रक्चर और बदलाव
बस की छत पर अतिरिक्त लोहे के ढांचे लगाए गए थे और लंबाई-चौड़ाई में भी बदलाव किया गया था।

4. एक ड्राइवर से 1360 किमी का सफर
नियमों के अनुसार लंबी दूरी की बस में दो ड्राइवर होना अनिवार्य है, लेकिन यह बस करीब 1360 किमी का सफर एक ही ड्राइवर के भरोसे कर रही थी। ड्राइविंग और विश्राम के नियमों का पालन नहीं हुआ।

5. 67 चालान के बावजूद कार्रवाई नहीं
बस पर 67 चालान लंबित थे, फिर भी वह 50 से अधिक आरटीओ क्षेत्रों से होकर गुजरती रही। न पुलिस ने रोका, न परिवहन विभाग ने सख्त कार्रवाई की।

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: ममता बनर्जी ने बुलाई आपातकालीन कैबिनेट बैठक, अहम फैसलों पर होगी चर्चा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले एक आपातकालीन कैबिनेट बैठक बुलाई है। यह बैठक राज्य सचिवालय नबान्ना सचिवालय में आयोजित की जाएगी। पिछले 10 दिनों में यह दूसरी कैबिनेट बैठक होगी। इससे पहले 17 फरवरी को मंत्रिमंडल की बैठक हुई थी।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले यह आखिरी कैबिनेट बैठक हो सकती है। ऐसे में सरकार कई महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है।

बैठक में नियुक्तियों और निवेश प्रस्तावों पर चर्चा होने की उम्मीद है। साथ ही विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने और नए पद सृजित करने जैसे मुद्दों पर भी विचार किया जा सकता है। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले सरकार प्रशासनिक और विकास से जुड़े कई फैसलों को अंतिम रूप दे सकती है।

2026 के विधानसभा चुनाव पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की यह कैबिनेट बैठक राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

चुनाव नजदीक आने के साथ ही राज्य सरकार सक्रिय हो गई है और विभिन्न मोर्चों पर तैयारी तेज कर दी गई है। कैबिनेट बैठक के फैसलों पर राजनीतिक विश्लेषकों और आम जनता की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि इनका सीधा असर राज्य की सियासत और जनता के हितों पर पड़ सकता है।

24 फरवरी 2026 की बिहार की टॉप 10 बड़ी खबरें: पटना CBI जांच से लेकर विधानसभा हंगामा तक, पढ़ें इस वक्त की 10 बड़ी खबरें

आज बिहार के अलग-अलग जिलों में राजनीति, उद्योग, शिक्षा, परिवहन और प्रशासन से जुड़ी कई अहम गतिविधियां देखने को मिलीं। यहां पढ़िए जिला और स्थान के अनुसार राज्य की 10 बड़ी खबरें:

1. पटना में नीट छात्रा मौत मामले में CBI जांच तेज

पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में सीबीआई ने जांच तेज कर दी है। एजेंसी ने SIT के अधिकारियों से पूछताछ की है और कई दस्तावेज जब्त किए हैं। परिवार ने पहले ही स्थानीय जांच पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद केस सीबीआई को सौंपा गया। छात्र संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। सीबीआई अब कॉल डिटेल, हॉस्टल रिकॉर्ड और कोचिंग संस्थान से जुड़े लोगों से भी पूछताछ कर रही है। आने वाले दिनों में कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


2. 27 फरवरी से इंटर कॉपियों का मूल्यांकन शुरू

Bihar School Examination Board ने 27 फरवरी से इंटरमीडिएट परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन की तिथि घोषित कर दी है। राज्यभर में बनाए गए केंद्रों पर शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है। बोर्ड ने निर्देश दिया है कि मूल्यांकन कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। परीक्षार्थियों को मार्च अंत तक परिणाम जारी होने की उम्मीद है। बोर्ड इस बार डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग कर रहा है ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी और त्रुटिरहित रहे। शिक्षकों को समय पर केंद्रों पर पहुंचने और दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।


3. बिहार पुलिस भर्ती कैलेंडर 2026 जारी

Central Selection Board of Constable ने बिहार पुलिस भर्ती 2026 का कैलेंडर जारी कर दिया है। इसमें सिपाही और अन्य पदों पर बहाली की तिथियां शामिल हैं। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और परीक्षा तिथियां भी घोषित कर दी गई हैं। लाखों अभ्यर्थियों को इस भर्ती का इंतजार था। बोर्ड ने साफ किया है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी होगी और शारीरिक दक्षता परीक्षा सख्ती से आयोजित की जाएगी। अभ्यर्थियों को आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित अपडेट देखने की सलाह दी गई है।


4. सीमांचल दौरे पर केंद्रीय गृह मंत्री

Amit Shah तीन दिवसीय सीमांचल दौरे पर बिहार पहुंच सकते हैं। इस दौरान वे सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। अवैध घुसपैठ और जनसंख्या असंतुलन जैसे मुद्दों पर बैठकें प्रस्तावित हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ भी उनका संवाद कार्यक्रम तय है। राजनीतिक हलकों में इस दौरे को आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और स्थानीय स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।


5. विधानसभा में हंगामा, पोस्टरबाजी

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्षी विधायकों ने कानून-व्यवस्था और बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरा। हंगामे के बीच मार्शल को हस्तक्षेप करना पड़ा और पोस्टर जब्त किए गए। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर अनावश्यक बाधा डालने का आरोप लगाया। सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनाव को देखते हुए आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है।


6. दरभंगा रेल मार्ग पर बड़ी साजिश नाकाम

दरभंगा रेल रूट पर ट्रेन दुर्घटना की साजिश को समय रहते विफल कर दिया गया। रेलवे ट्रैक पर संदिग्ध सामग्री मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने तुरंत कार्रवाई की। बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंचा और जांच शुरू की। इस घटना के बाद रेल सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान की जा रही है और जल्द गिरफ्तारी होगी। यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे प्रशासन सतर्क है।


7. स्कूलों के पास मांस-मछली बिक्री पर रोक की तैयारी

राज्य सरकार स्कूलों और धार्मिक स्थलों के पास मांस व मछली की दुकानों पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार निर्धारित दूरी के भीतर बिक्री की अनुमति नहीं होगी। सरकार का कहना है कि यह कदम स्वच्छता और सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है। व्यापारी संगठनों ने इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार की मांग की है। जल्द ही इस संबंध में अधिसूचना जारी हो सकती है।


8. घूस लेते दो सरकारी कर्मचारी गिरफ्तार

राज्य निगरानी ब्यूरो ने रिश्वत लेते हुए दो सरकारी कर्मचारियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने काम कराने के एवज में पैसे की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद जाल बिछाकर कार्रवाई की गई। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया है। सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही है और विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।


9. राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी

बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न दल अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम पर मंथन कर रहे हैं। सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव का असर आगामी विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है। सभी दल अपने समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं।


10. 24 मिनट में चार विधेयक पारित

बिहार विधानसभा में महज 24 मिनट के भीतर चार विधेयक पारित कर दिए गए। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया, जबकि सरकार ने इसे समय की बचत और प्रभावी कार्यशैली बताया। विधेयकों में प्रशासनिक सुधार और वित्तीय प्रावधान शामिल हैं। इस तेज प्रक्रिया पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है और विपक्ष ने विस्तृत चर्चा की मांग की है।

राष्ट्रपति भवन में ऐतिहासिक बदलाव: राजाजी की प्रतिमा का अनावरण, एडविन लुटियंस की मूर्ति हटाए जाने पर परपोते मैट रिडले ने जताया दुख

भारत की राजधानी नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन परिसर में एक प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अशोक मंडप के समीप महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने स्वतंत्रता सेनानी और देश के प्रथम भारतीय गवर्नर-जनरल सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) की प्रतिमा का अनावरण किया। यह प्रतिमा उस स्थान पर स्थापित की गई है, जहां पहले ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा लगी हुई थी।

इस परिवर्तन को औपनिवेशिक विरासत से जुड़े प्रतीकों की समीक्षा और भारतीय इतिहास के नायकों को प्रमुखता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


राष्ट्रपति भवन परिसर में बदला प्रतीक

राष्ट्रपति भवन, जो ब्रिटिश काल में वायसराय हाउस के रूप में निर्मित हुआ था, लंबे समय से भारत की प्रशासनिक और संवैधानिक व्यवस्था का सर्वोच्च प्रतीक रहा है। अशोक मंडप के पास स्थापित नई प्रतिमा न केवल एक स्थापत्य परिवर्तन है, बल्कि यह स्वतंत्र भारत की वैचारिक दिशा को भी दर्शाती है।

राजाजी की प्रतिमा का अनावरण महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने किया गया, जो दोनों नेताओं के ऐतिहासिक संबंधों और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान की याद दिलाता है।


कौन थे सी. राजगोपालाचारी?

सी. राजगोपालाचारी, जिन्हें स्नेहपूर्वक “राजाजी” कहा जाता है, स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक थे। वे स्वतंत्र भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल और पहले भारतीय गवर्नर-जनरल रहे। वे महात्मा गांधी के करीबी सहयोगी और विश्वासपात्र माने जाते थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर भेजे गए अपने संदेश में कहा कि राजाजी और महात्मा गांधी के बीच गहरा विश्वास और मित्रता का संबंध था। उन्होंने इसे औपनिवेशिक स्मृतियों से मुक्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।


एडविन लुटियंस और नई दिल्ली का निर्माण

ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस को 1911 में भारत की नई राजधानी दिल्ली के निर्माण का दायित्व सौंपा गया था। उनके डिजाइन किए गए कई भवन आज भी नई दिल्ली की पहचान हैं, जिनमें राष्ट्रपति भवन और अन्य केंद्रीय इमारतें शामिल हैं। दिल्ली का केंद्रीय प्रशासनिक क्षेत्र आज भी “लुटियंस दिल्ली” के नाम से जाना जाता है।

हालांकि, स्वतंत्रता के बाद से ही औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाने और भारतीय पहचान को प्रमुखता देने की मांग समय-समय पर उठती रही है।


परपोते मैट रिडले ने जताया दुख

एडविन लुटियंस के परपोते मैट रिडले ने इस बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि उन्हें आश्चर्य और निराशा हुई कि उनके पूर्वज की प्रतिमा को हटाया जा रहा है।

हालांकि, भारत सरकार की ओर से इस निर्णय को देश की ऐतिहासिक प्राथमिकताओं के अनुरूप बताया गया है।


औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति की दिशा में कदम

राजाजी की प्रतिमा की स्थापना को कई लोग औपनिवेशिक अवशेषों से मुक्ति और भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को उचित सम्मान देने की प्रक्रिया का हिस्सा मान रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई स्थानों के नाम बदलने और ऐतिहासिक स्थलों को भारतीय संदर्भ में पुनर्परिभाषित करने के प्रयास हुए हैं।

राष्ट्रपति भवन परिसर में यह परिवर्तन प्रतीकात्मक रूप से यह दर्शाता है कि भारत अब अपने इतिहास को भारतीय दृष्टिकोण से पुनर्स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Bihar News Live 23 February 2026: 10 बड़ी खबरें, चोरी, हत्या, राजनीति और मौसम अपडेट

पटना | 23 फरवरी 2026

पटना: विधानसभा सत्र में विपक्ष का हंगामा, कई मुद्दों पर सरकार घिरी

राजधानी पटना में सोमवार को विधानसभा सत्र के दौरान जमकर हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों ने कानून-व्यवस्था, शिक्षक भर्ती और महंगाई के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए सदन की कार्यवाही बाधित की। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्ष के विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद अध्यक्ष को कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। सरकार की ओर से मंत्रियों ने जवाब देते हुए कहा कि राज्य में विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं और कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है।

शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा तेज रही। विपक्ष ने भर्ती में पारदर्शिता पर सवाल उठाए, जबकि शिक्षा मंत्री ने दावा किया कि मेरिट के आधार पर नियुक्तियां की जा रही हैं। सदन में बजट सत्र को लेकर भी रणनीति बनी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए विपक्ष सरकार को हर मोर्चे पर घेरने की कोशिश कर रहा है।


पूर्णिया: शराबबंदी के बावजूद छापेमारी में भारी मात्रा में शराब जब्त

पूर्णिया जिले में उत्पाद विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने देर रात छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद की। गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में गांव के एक गोदाम से सैकड़ों लीटर देसी और विदेशी शराब जब्त की गई। पुलिस ने मौके से दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि कुछ आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद तस्करी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों से शराब की सप्लाई होती है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है, जिससे बड़े गिरोह का खुलासा हो सकता है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


मुजफ्फरपुर: सड़क हादसे में दो की मौत, परिवारों में मातम

मुजफ्फरपुर जिले में सोमवार सुबह हुए एक भीषण सड़क हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार के परखच्चे उड़ गए।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने दो लोगों को मृत घोषित कर दिया। घायलों की हालत नाजुक बताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे का कारण माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सड़क सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


गया: ठंड और बदलते मौसम से बढ़ी बीमारियां, अस्पतालों में भीड़

गया जिले में बदलते मौसम और ठंड के कारण वायरल बुखार, सर्दी-खांसी और सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। सरकारी अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और ठंड से बचाव के उपाय अपनाने की अपील की है। डॉक्टरों के अनुसार मौसम में अचानक बदलाव के कारण बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन ने अतिरिक्त दवाइयों और डॉक्टरों की व्यवस्था की है।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग गर्म कपड़े पहनें, संतुलित आहार लें और किसी भी लक्षण पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।


भागलपुर: गंगा का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में सतर्कता

भागलपुर में गंगा नदी के जलस्तर में हल्की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों में चिंता बढ़ गई है। हालांकि अभी खतरे का स्तर पार नहीं हुआ है, लेकिन प्रशासन ने एहतियातन निगरानी बढ़ा दी है।

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ऊपरी इलाकों में बारिश के कारण जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। नाविकों और मछुआरों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

प्रशासन ने कहा है कि यदि जलस्तर और बढ़ता है तो राहत शिविरों की व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

पूर्णिया में शराब छापेमारी के दौरान पुलिस टीम पर हमला, वाहन तोड़ा गया; 33 नामजद आरोपियों पर केस दर्ज

पूर्णिया (बिहार): बिहार के पूर्णिया जिले में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद अवैध शराब कारोबार के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में शनिवार को सतकोदरिया गांव में छापेमारी करने पहुंची पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। हमले में पुलिस वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया गया, जबकि टीम को किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से निकलना पड़ा। इस मामले में पुलिस ने 33 लोगों को नामजद करते हुए प्राथमिकी दर्ज की है।

जानकारी के अनुसार, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सतकोदरिया गांव में अवैध रूप से शराब की बिक्री और भंडारण किया जा रहा है। सूचना के आधार पर स्थानीय थाना पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और छापेमारी शुरू की। जैसे ही पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ी, कुछ लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ ने पुलिस वाहन को भी निशाना बनाया और उसे क्षतिग्रस्त कर दिया। हालात बिगड़ते देख पुलिसकर्मियों को पीछे हटना पड़ा। हालांकि, पुलिस ने संयम बरतते हुए स्थिति को नियंत्रित किया और बाद में अतिरिक्त बल की मदद से गांव में सर्च अभियान चलाया।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस घटना को गंभीरता से लिया गया है। सरकारी कार्य में बाधा डालने, हमला करने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 33 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। अन्य अज्ञात लोगों की पहचान भी की जा रही है। पुलिस ने साफ किया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

उल्लेखनीय है कि बिहार में शराबबंदी कानून के तहत अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और सेवन पर सख्त प्रतिबंध है। इसके बावजूद कई इलाकों में अवैध कारोबार की शिकायतें मिलती रहती हैं। प्रशासन का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि कानून का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

फिलहाल गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें और किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

📌 बिहार में शराबबंदी की पृष्ठभूमि

बिहार सरकार ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर रखी है। इसका उद्देश्य सामाजिक सुधार, अपराध में कमी, घरेलू हिंसा पर काबू पाना और स्वास्थ्य जोखिम घटाना है। हालांकि, अवैध शराब का कारोबार बिहार के कई ग्रामीण इलाकों में जारी है। ऐसे इलाकों में शराब माफियाओं और पुलिस के बीच अक्सर संघर्ष और टकराव की घटनाएँ सामने आती हैं।

📌 अवैध शराब पर राज्यस्तरीय छापेमारी का चलन

देश के कई राज्यों में जैसे-जैसे अवैध शराब तस्करी बढ़ी है, वैसे-वैसे पुलिस की छापेमारी तेज हो गई है। उदाहरण के तौर पर:

  • झारखंड के सिराइकेला-खरसावाँ क्षेत्र में पुलिस ने अवैध शराब की छापेमारी कर 80 लीटर शराब और 1200 किलो महुआ नष्ट किया।
  • पंजाब के जलालाबाद क्षेत्र में पुलिस ने अवैध शराब की 6000 लीटर लाहन जब्त की थी, जिसमें तस्कर ने पुलिस पर लोहे की रॉड से हमला किया

ये उदाहरण दर्शाते हैं कि शराबबंदी लागू राज्यों में अवैध शराब के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान के दौरान पुलिस और अपराधियों के बीच टकराव की घटना सामान्य होती जा रही है।

⚖️ यह घटना क्यों गंभीर है?

इस घटना की गंभीरता इसलिए भी अधिक है क्योंकि:

  1. सरकारी काम में बाधा — पुलिस की वैध कार्रवाई में बाधा उत्पन्न हुई।
  2. पुलिसकर्मी घायल — कानून प्रवर्तक को चोट लगी, जो देश के किसी भी नागरिक, कानूनी या वैधानिक काम का हिस्सा था।
  3. सरकारी संपत्ति को नुकसान — सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त हुआ।
  4. संभावित असामाजिक तत्वों की भूमिका — लगता है कि स्थानीय लोग भी अवैध शराब की बिक्री से जुड़े हैं।
  5. स्थानीय प्रशासन पर दबाव — ऐसे मामलों से स्थानीय प्रशासन पर जनता और आपराधिक तत्त्वों से दबाव बनता है।

Bihar Breaking News 22 February 2026: अमित शाह 25 फरवरी का आएंगे बिहार, युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को CM नीतीश कुमार आज करेंगे सम्मानित और पटना की ताजा घटनाएं

BREAKING & MAJOR LOCAL UPDATES

बिहार में इस वक्त कई बड़ी खबरें सुर्खियों में हैं। पटना हाईकोर्ट की सख्ती, बड़े पैमाने पर सरकारी भर्ती की तैयारी, राजधानी में प्रशासनिक कार्रवाई और अपराध की घटनाओं ने राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है। यहां पढ़िए 22 फरवरी 2026 की इस घंटे की बड़ी अपडेट।

  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का दौरा: अमित शाह 25 फ़रवरी को बिहार दौरे पर रहेंगे, जहाँ सीमा सुरक्षा और प्रशासनिक मुद्दों पर उच्चस्तरीय बैठकें होंगी।
  • राज्यपाल का बयान: बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने 2002 के गुजरात घटनाओं के बारे में अपनी राय साझा की और कहा कि लोगों से बातचीत के बाद उनकी सोच बदल गई।
  • उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मुंगेर पहुंचे और कांग्रेस पर निशाना साधा।
  • उपेंद्र कुशवाहा ने राज्यसभा चुनावों में NDA की संभावित जीत की बात कही।

पटना हाईकोर्ट का 28 विधायकों को नोटिस, सियासी हलचल तेज

पटना हाईकोर्ट ने बिहार की राजनीति में बड़ा हस्तक्षेप करते हुए 28 विधायकों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल हलफनामों और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों को लेकर जारी किया गया है। अदालत ने संबंधित विधायकों से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि उनके खिलाफ दायर याचिकाओं में लगाए गए आरोपों पर उनका पक्ष क्या है।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कुछ विधायकों ने नामांकन के दौरान अपनी संपत्ति, आपराधिक मामलों या अन्य विवरणों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया। यदि आरोप साबित होते हैं तो यह मामला न केवल व्यक्तिगत राजनीतिक करियर पर असर डालेगा, बल्कि कई सीटों पर उपचुनाव की नौबत भी आ सकती है।

राजनीतिक दलों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष ने इसे “पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम” बताया है, जबकि सत्ताधारी दल के नेताओं का कहना है कि यह राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हाईकोर्ट की यह कार्रवाई चुनावी शुचिता को लेकर एक बड़ा संदेश है।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी है और सभी पक्षों को दस्तावेज़ों के साथ उपस्थित रहने को कहा है। आने वाले दिनों में यह मामला बिहार की राजनीति में और उबाल ला सकता है।


बिहार में 60 हजार सरकारी नौकरियों की तैयारी, युवाओं में उत्साह

बिहार सरकार ने राज्य में लगभग 60 हजार सरकारी पदों पर बहाली की प्रक्रिया शुरू करने का संकेत दिया है। इसमें पुलिस विभाग में बड़ी संख्या में भर्ती प्रस्तावित है, साथ ही होमगार्ड और अन्य सुरक्षा इकाइयों में भी पद सृजित किए जाएंगे।

सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, पुलिस विभाग में लगभग 30 हजार से अधिक पदों पर नियुक्ति की संभावना है।

इस घोषणा के बाद राज्य भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं में उत्साह की लहर है। कोचिंग संस्थानों में भी हलचल बढ़ गई है। हालांकि, कुछ छात्र संगठनों ने मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया समयबद्ध और निष्पक्ष हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह भर्ती समय पर पूरी हो जाती है तो इससे न केवल बेरोजगारी दर में कमी आएगी, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था भी सुदृढ़ होगी। सरकार जल्द ही विस्तृत अधिसूचना जारी कर सकती है।


बाढ़ (बरह) में युवक का शव मिलने से सनसनी

पटना जिले के बरह क्षेत्र में एक युवक का शव संदिग्ध परिस्थिति में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने खेत के पास शव देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके से शराब की खाली बोतलें और कुछ अन्य सामान बरामद हुए हैं।

पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक आशंका हत्या या नशे की अधिकता से मौत की जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में असामाजिक तत्वों की गतिविधियां बढ़ रही हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

यह घटना एक बार फिर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर रही है।


राजीव नगर में अवैध निर्माण पर रोक

पटना के राजीव नगर इलाके में बिहार राज्य आवास बोर्ड की जमीन पर हो रहे नए निर्माण कार्यों पर प्रशासन ने रोक लगा दी है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध अनुमति के किसी भी प्रकार का निर्माण गैरकानूनी माना जाएगा।

प्रशासनिक टीम और पुलिस बल की मौजूदगी में इलाके का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने कहा कि पहले से बने मकानों की स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी।

स्थानीय निवासियों में इस कार्रवाई को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया है। कुछ लोग इसे कानून का पालन सुनिश्चित करने वाला कदम बता रहे हैं, जबकि अन्य लोग इसे देर से उठाया गया कदम मान रहे हैं।

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


सोनपुर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को मंजूरी

बिहार सरकार ने सारण जिले में प्रस्तावित सोनपुर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना राज्य की हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

सोनपुर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण से उत्तर बिहार के कई जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। अनुमान है कि परियोजना पर हजारों करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।

सरकार का दावा है कि एयरपोर्ट बनने से पर्यटन, व्यापार और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। खासकर सोनपुर मेले और आसपास के धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि परियोजना समय पर पूरी होती है तो यह बिहार के विकास मानचित्र पर एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।

Stock Market News 19 February 2026 : सेंसेक्स 1,236 अंक लुढ़का, निफ्टी 25,500 के नीचे बंद — निवेशकों में बढ़ी चिंता

मुंबई, 19 फरवरी 2026। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को तेज गिरावट देखने को मिली। सप्ताह की लगातार तीन दिनों की तेजी के बाद आज बाजार में मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों के दबाव के चलते बड़ी बिकवाली दर्ज की गई।

घरेलू शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक — BSE Sensex और Nifty 50 — भारी गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार में चौतरफा बिकवाली के कारण निवेशकों की संपत्ति में हजारों करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।

📊 बाजार बंद होने के आंकड़े

  • सेंसेक्स: 1,236 अंकों की गिरावट के साथ लगभग 82,498 के स्तर पर बंद
  • निफ्टी 50: करीब 365 अंक टूटकर 25,500 के नीचे बंद
  • मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर: बड़े पैमाने पर दबाव में

आज के कारोबारी सत्र में शुरुआती बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई और दोपहर बाद बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई।

📌 गिरावट की बड़ी वजहें

1️⃣ वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत

अमेरिकी और एशियाई बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव बढ़ा।

2️⃣ कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका बढ़ी, जिससे निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।

3️⃣ मुनाफावसूली

पिछले तीन सत्रों की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा बुक किया, जिससे बाजार में गिरावट तेज हो गई।

4️⃣ बढ़ती अस्थिरता (Volatility)

बाजार में अस्थिरता सूचकांक (India VIX) में बढ़ोतरी देखी गई, जो निवेशकों की चिंता को दर्शाता है।

🏦 सेक्टरवार प्रदर्शन

आज लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए:

  • बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयर में सबसे ज्यादा गिरावट
  • ऑटो सेक्टर दबाव में
  • रियल्टी और FMCG शेयर भी कमजोर
  • आईटी सेक्टर में सीमित गिरावट

बाजार की चौड़ाई (Market Breadth) नकारात्मक रही, यानी गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से अधिक रही।

🚀 टॉप गेनर (Nifty 50)

  1. Infosys – +1.85%
  2. Tata Consultancy Services – +1.42%
  3. HCL Technologies – +1.10%
  4. Sun Pharmaceutical Industries – +0.95%
  5. Dr. Reddy’s Laboratories – +0.82%

📉 टॉप लूजर (Nifty 50)

  1. HDFC Bank – -3.10%
  2. Reliance Industries – -2.75%
  3. ICICI Bank – -2.40%
  4. State Bank of India – -2.15%
  5. Larsen & Toubro – -1.98%

पटना हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन: विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार समेत 42 विधायकों को नोटिस, चुनावी हलफनामे में गड़बड़ी के आरोप से मचा सियासी भूचाल

Patna High Court Notice to 42 MLAs: बिहार की राजनीति में उस समय भारी हलचल मच गई जब पटना उच्च न्यायालय ने एक साथ 42 विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। इन विधायकों में कोई साधारण नाम नहीं, बल्कि बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार, वरिष्ठ मंत्री विजेंद्र यादव, विधायक चेतन आनंद, पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा और राजद विधायक अमरेंद्र प्रसाद जैसे प्रभावशाली चेहरे शामिल हैं।

इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए अपने नामांकन पत्र यानी चुनावी हलफनामे (Affidavit) में संपत्ति, आपराधिक मामलों और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों को या तो छुपाया या गलत तरीके से प्रस्तुत किया। अदालत की इस सख्त कार्रवाई ने सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों खेमों में एक साथ हलचल पैदा कर दी है।

क्या है पूरा मामला? चुनावी हलफनामे से शुरू हुआ विवाद

यह पूरा मामला बिहार विधानसभा चुनाव के बाद दायर की गई चुनाव याचिकाओं से जुड़ा है। जिन सीटों पर हारने वाले प्रत्याशियों को पराजय का सामना करना पड़ा, उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि विजयी उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे में गलत या अधूरी जानकारी दी।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि—

  • कुछ विधायकों ने अपनी चल-अचल संपत्ति का पूरा विवरण नहीं दिया।
  • आपराधिक मामलों से संबंधित सूचनाएं स्पष्ट नहीं की गईं।
  • कुछ मामलों में शपथपत्र में तथ्यात्मक त्रुटियां या भ्रामक विवरण प्रस्तुत किए गए।
  • मतदान प्रक्रिया के दौरान भी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए।

प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इन आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए संबंधित सभी 42 विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है।

किन-किन दिग्गजों को मिला नोटिस?

नोटिस पाने वाले नेताओं में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायक शामिल हैं। यह तथ्य इस मामले को और व्यापक बना देता है। प्रमुख नाम इस प्रकार हैं—

  • प्रेम कुमार – बिहार विधानसभा अध्यक्ष
  • विजेंद्र यादव – वरिष्ठ मंत्री
  • जीवेश मिश्रा – भाजपा विधायक
  • चेतन आनंद – विधायक
  • अमरेंद्र प्रसाद – राजद विधायक

सूत्रों के अनुसार अन्य कई विधायकों को भी नोटिस जारी हुआ है, जिनके मामलों की सुनवाई अलग-अलग याचिकाओं के आधार पर की जाएगी।

अदालत की टिप्पणी ने बढ़ाई गंभीरता

सुनवाई के दौरान अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि चुनावी हलफनामा केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह मतदाताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना स्रोत है।

अदालत ने स्पष्ट किया—

“मतदाता को यह जानने का अधिकार है कि उसका प्रतिनिधि बनने जा रहा व्यक्ति किस प्रकार की पृष्ठभूमि रखता है, उसकी संपत्ति कितनी है और उस पर आपराधिक मामले लंबित हैं या नहीं।”

यदि कोई उम्मीदवार जानबूझकर जानकारी छुपाता है या गलत जानकारी देता है, तो यह न केवल चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध भी है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: सभी ने कहा—कानून का करेंगे पालन

इस मामले पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि चुनाव परिणाम को अदालत में चुनौती देना लोकतांत्रिक अधिकार है। उनका कहना है कि यदि किसी प्रत्याशी को लगता है कि चुनाव में गड़बड़ी हुई है, तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। उन्होंने कहा कि अब यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी।

भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने कहा कि अदालत के सवालों का जवाब अदालत में ही दिया जाएगा। उन्होंने इसे सामान्य कानूनी प्रक्रिया बताया।

कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने भी कहा कि यदि किसी को लगता है कि गलत हुआ है तो न्यायालय जाना उसका अधिकार है। जो भी कानूनी प्रक्रिया होगी, उसका पालन किया जाएगा।

राजनीतिक रूप से देखा जाए तो इस मामले में किसी एक दल को निशाना नहीं बनाया गया है, बल्कि विभिन्न दलों के विधायक इसमें शामिल हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि मामला विशुद्ध रूप से कानूनी और प्रक्रियात्मक है।

चुनावी हलफनामा क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

भारत में चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार को नामांकन के साथ एक शपथपत्र देना अनिवार्य होता है। इसमें निम्नलिखित जानकारियां देना जरूरी है—

  • कुल चल और अचल संपत्ति का विवरण
  • जीवनसाथी और आश्रितों की संपत्ति
  • लंबित आपराधिक मामले
  • शैक्षणिक योग्यता
  • देनदारियां

इस शपथपत्र का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता पूरी जानकारी के आधार पर अपना प्रतिनिधि चुन सके। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में भी यह स्पष्ट किया गया है कि पारदर्शिता लोकतंत्र की आत्मा है।

संभावित कानूनी परिणाम क्या हो सकते हैं?

यदि अदालत पाती है कि किसी विधायक ने जानबूझकर गलत जानकारी दी है, तो संभावित परिणाम हो सकते हैं—

  1. चुनाव निरस्त किया जा सकता है।
  2. संबंधित विधायक की सदस्यता रद्द हो सकती है।
  3. दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया जा सकता है।
  4. दंडात्मक कार्रवाई भी संभव है।

हालांकि यह सब अदालत के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।

बिहार की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?

बिहार की राजनीति पहले ही कई मुद्दों को लेकर गरम है। ऐसे में 42 विधायकों को एक साथ नोटिस मिलना बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। यदि अदालत का फैसला कठोर आता है तो—

  • विधानसभा की संरचना प्रभावित हो सकती है।
  • सत्ताधारी गठबंधन की संख्या पर असर पड़ सकता है।
  • विपक्ष को राजनीतिक मुद्दा मिल सकता है।
  • चुनावी सुधार पर नई बहस शुरू हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि नैतिक जवाबदेही से भी जुड़ा है।

Bihar Breaking News Live 19 February 2026: हाईकोर्ट का 42 विधायकों को नोटिस, नीट छात्रा केस में जांच तेज, कई जिलों में बड़ी घटनाएं

पटना, 19 फरवरी 2026। संक्षिप्त सारांश: होली को लेकर स्पेशल ट्रेनों की घोषणा और राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। पटना हाईकोर्ट ने विधानसभा से जुड़े मामले में 42 विधायकों को नोटिस जारी कर सियासी हलचल बढ़ा दी है। नीट छात्रा मौत मामले में जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और पूछताछ का दायरा बढ़ाया गया है। वैशाली, मुजफ्फरपुर और सहरसा में हत्या, मारपीट और सड़क हादसे जैसी घटनाओं से कानून-व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। सरकार ने 537 ब्लॉक कार्यालयों में सीसीटीवी लगाने की योजना की घोषणा की है।

वैशाली में रहस्यमयी मौत:
हाजीपुर के कौनहारा घाट पर एक व्यक्ति का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। परिजन जमीन विवाद का हत्या का आरोप लगा रहे हैं। पुलिस पोस्टमार्टम कर रही है।

🔹 पटना हाईकोर्ट ने 42 विधायकों को नोटिस भेजा:
राजनीति में सियासी हलचल तेज़; उच्च न्यायालय ने स्पीकर प्रेम कुमार समेत 42 विधायकों को जवाबतलब किया है।

🔹 नक्सली सुरेश कोड़ा ने आत्मसमर्पण किया:
तीन लाख का इनामी नक्सली AK-47 और इंसास राइफल पुलिस को सौंपते हुए आत्मसमर्पण कर दिया।

🔹 नीट छात्रा केस में बड़ा अपडेट:
जहानाबाद केस में अब तक कई साक्ष्यों की पड़ताल जारी है; जांच एजेंसियाँ पूरी कोशिश कर रही हैं।

🔹 सड़क हादसा:
सहरसा के पास एक स्कॉर्पियो दुर्घटनाग्रस्त; पाँच लोग घायल।

🔹 मुजफ्फरपुर में मारपीट:
कार साइड की बात पर विवाद, बीयर की बोतल से हमला; तीन घायल।

🔹 इनामी अपराधियों की लिस्ट:
वैशाली एसपी ने 12 कुख्यात अपराधियों की सूची जारी कर दी।


🏛️ राजनीति और सरकारी फैसले

📌 बिहार विधानसभा का बजट सत्र

बजट सत्र चल रहा है, विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच कई मुद्दों पर बहस जारी है — विशेषकर कचरे के मुद्दे पर भी विवाद हुआ।

📌 537 ब्लॉक कार्यालयों में CCTV योजना

बिहार सरकार ने घोषणा कि राज्य के 537 ब्लॉक कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे — यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता व भ्रष्टाचार रोकने के लिए।

📌 अमित शाह की बिहार यात्रा (25 फरवरी)

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार के सीमावर्ती इलाकों का दौरा करेंगे — खासकर नेपाल और बांग्लादेश सीमा क्षेत्रों में पर्यावरण, सुरक्षा और डेमोग्राफी से जुड़े मुद्दों को देखने।


👮 क्राइम और सुरक्षा समाचार

🔹 पटना नीट छात्रा केस में CBI पूछताछ:
सीबीआई टीम सस्पेंडेड पुलिस अधिकारियों से पूछताछ कर रही है।

🔹 बांका में सॉल्वर गैंग पकड़ा गया:
मैट्रिक परीक्षा में पेपर सॉल्विंग के लिए 10,000 रुपये चार्ज करने वाला गिरोह पकड़ा गया।

🔹 मोबाइल ऐप से साइबर ठगी:
पूर्वी चंपारण के मोतिहारी से फर्जी ऐप के ज़रिये करोड़ों की ठगी करने वाला आरोपी हरियाणा से गिरफ्तार।


✳️ होली स्पेशल ट्रेनें 2026:


होली के त्यौहार के लिए रेलवे द्वारा बिहार समेत दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, पुणे और अहमदाबाद से स्पेशल ट्रेनें संचालित होंगी — यात्रियों को सुविधा मिल सके।


🔴 विधानसभा में तीखा टकराव, सरकार पर विपक्ष का हमला

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। विपक्षी दलों ने विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था और बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरा। मुख्यमंत्री Nitish Kumar की नीतियों पर सवाल उठाते हुए विपक्ष ने राज्य में बढ़ती चुनौतियों का मुद्दा उठाया।

वहीं सत्ता पक्ष ने जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार विकास, बुनियादी ढांचे और सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी से काम कर रही है। सदन में कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति भी बनी रही।


🍷 शराबबंदी नीति पर पुनर्विचार की मांग

राज्य में लागू शराबबंदी कानून एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन National Democratic Alliance (एनडीए) के कुछ सहयोगी दलों ने शराबबंदी की समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि नीति का उद्देश्य सही है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में खामियां हैं, जिससे आर्थिक नुकसान और प्रशासनिक दबाव बढ़ रहा है।

सरकार ने फिलहाल नीति में बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन इस मुद्दे पर राजनीतिक तापमान बढ़ता दिख रहा है।


🚨 फिरोजाबाद में बिहार के लिए भेजी जा रही शराब की बड़ी खेप जब्त

उत्तर प्रदेश के Firozabad में पुलिस ने लगभग एक करोड़ रुपये की अवैध शराब की खेप पकड़ी, जिसे बिहार भेजा जाना था। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। शराबबंदी लागू होने के बावजूद तस्करी की कोशिशें जारी हैं, जिससे प्रशासन की चुनौतियां बढ़ रही हैं।


🌾 राजगीर के पास अवैध अफीम की खेती का भंडाफोड़

Rajgir के समीप एक गांव में पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त टीम ने अवैध अफीम की खेती का खुलासा किया। अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में अफीम की फसल नष्ट कर दी है। मामले में आगे की जांच जारी है और संलिप्त लोगों की पहचान की जा रही है।


🏥 खगड़िया में प्रसाद खाने से करीब 100 लोग बीमार

Khagaria जिले में महाशिवरात्रि के अवसर पर वितरित प्रसाद खाने के बाद लगभग 100 लोग बीमार पड़ गए। इनमें बच्चे भी शामिल हैं। सभी को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं और खाद्य नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।


💥 राजस्थान फैक्ट्री विस्फोट में बिहार के 7 मजदूरों की मौत

Rajasthan में हाल ही में हुए एक फैक्ट्री विस्फोट में बिहार के सात प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई। ये सभी पूर्वी चंपारण जिले के निवासी थे। जिला प्रशासन ने मृतकों की पहचान कर ली है और परिजनों को सरकारी सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पूर्वी चंपारण East Champaran के जिलाधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार की प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना के तहत पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाएगी।


🏛️ नालंदा विश्वविद्यालय में ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन

अल्पसंख्यक समुदायों के विकास और कल्याण योजनाओं की समीक्षा के लिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय Ministry of Minority Affairs द्वारा Nalanda University में दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में नीति निर्माण, शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण जैसे विषयों पर चर्चा की गई।


🏠 पटना में जमीन रजिस्ट्री महंगी होगी, सर्किल रेट में भारी बढ़ोतरी

राजधानी Patna में 1 अप्रैल से जमीन रजिस्ट्री की नई दरें लागू होंगी। कई इलाकों में सर्किल रेट तीन गुना तक बढ़ाए जाने की तैयारी है। इससे रियल एस्टेट बाजार में हलचल मच सकती है और संपत्ति खरीदने वालों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

रजिस्ट्रेशन विभाग का कहना है कि बाजार दर और सरकारी दर के बीच के अंतर को कम करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

मेरठ में मोहन भागवत का तीन दिवसीय दौरा: प्रांत के प्रबुद्धजनों, खिलाड़ियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से करेंगे सीधा संवाद

मेरठ : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत आज मेरठ पहुंच रहे हैं। उनका यह दौरा न केवल संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि सामाजिक और खेल जगत के लिए भी खास महत्व रखता है। 20 और 21 फरवरी को आयोजित दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम में वे मेरठ और ब्रज प्रांत के प्रबुद्धजनों, खिलाड़ियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे। यह पहली बार है जब संघ खिलाड़ियों के साथ औपचारिक संवाद कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।

माधव कुंज में भव्य तैयारियां, तीन दिन का प्रवास

मेरठ के शताब्दी नगर स्थित माधव कुंज परिसर में कार्यक्रम को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। विशाल पंडाल सजाया गया है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। यहीं पर दो दिनों तक संवाद कार्यक्रम आयोजित होगा और मोहन भागवत का रात्रि विश्राम भी इसी परिसर में होगा।

संघ सूत्रों के अनुसार, यह संवाद कार्यक्रम संगठन के सामाजिक विस्तार और विभिन्न क्षेत्रों के प्रभावशाली व्यक्तियों से जुड़ाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मेरठ को कार्यक्रम के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यह शहर खेल प्रतिभाओं और खेल उत्पादों के लिए देश-विदेश में पहचान रखता है। क्रिकेट बैट, हॉकी स्टिक और अन्य खेल सामग्री के निर्माण में मेरठ का योगदान लंबे समय से रहा है।

खिलाड़ियों से संवाद: सामाजिक अनुभवों पर चर्चा

इस संवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ियों को आमंत्रित किया गया है। इनमें पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना, तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार, अर्जुन अवार्ड से सम्मानित पहलवान अलका तोमर सहित कई अन्य प्रमुख खिलाड़ी शामिल होंगे।

संवाद के दौरान खिलाड़ियों से उनके सामाजिक अनुभवों, खेल जीवन की चुनौतियों और समाज में खेल की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। बताया जा रहा है कि मोहन भागवत स्वयं खिलाड़ियों के प्रश्नों का उत्तर देंगे और उनसे सामाजिक समरसता तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर विचार साझा करेंगे।

संघ का मानना है कि खिलाड़ी समाज के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं। ऐसे में उनके अनुभवों को व्यापक समाज तक पहुंचाना और उन्हें सामाजिक अभियानों से जोड़ना एक सकारात्मक पहल हो सकती है।

खेल विश्वविद्यालय की भूमिका और अध्यक्षता

उत्तर प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार तेजी से प्रयास कर रही है। मेरठ के सलावा में प्रदेश का पहला राज्य खेल विश्वविद्यालय बन रहा है। इस विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति रिटायर्ड मेजर जनरल दीप अहलावत हैं।

खिलाड़ियों के साथ आयोजित सत्र की अध्यक्षता दीप अहलावत करेंगे। विश्वविद्यालय में इस वर्ष से पढ़ाई और प्रशिक्षण शुरू करने की तैयारी है। ऐसे में संघ प्रमुख की उपस्थिति को खेल शिक्षा और सामाजिक नेतृत्व के समन्वय के रूप में भी देखा जा रहा है।

एक दिन पहले CM योगी से मुलाकात

मेरठ पहुंचने से एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में मोहन भागवत से मुलाकात की। मुख्यमंत्री स्वयं निरालानगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर पहुंचे और सरस्वती कुंज में करीब 40 मिनट तक दोनों के बीच बातचीत हुई।

मोहन भागवत इन दिनों उत्तर प्रदेश के दौरे पर हैं। गोरखपुर के बाद वे लखनऊ पहुंचे और वहां दो दिनों तक संगठन विस्तार तथा सामाजिक समरसता पर विशेष फोकस किया।

लखनऊ में दिए अहम बयान

लखनऊ प्रवास के दौरान मोहन भागवत ने लखनऊ यूनिवर्सिटी और इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रमों को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले मुस्लिम भी इसी भूमि के हैं और उन्हें किसी बाहरी दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने सामाजिक समरसता और पारस्परिक सम्मान पर बल दिया।

साथ ही उन्होंने ‘घर वापसी’ पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि जो लोग हिंदू धर्म में लौटना चाहते हैं, उनके प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर, कुएं और श्मशान जैसे सार्वजनिक स्थान सभी हिंदुओं के लिए खुले होने चाहिए और उनमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

जनसंख्या दर पर बयान

मोहन भागवत ने हिंदू समाज की घटती जनसंख्या दर पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जनसंख्या दर 2.1 है, जबकि समाज के दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए यह कम से कम 3 होनी चाहिए। उन्होंने नवविवाहित दंपतियों से कम से कम तीन बच्चे पैदा करने की अपील की।

उनका तर्क था कि जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह समाज भविष्य में कमजोर पड़ सकता है। हालांकि, उनके इस बयान पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

RSS और भाजपा संबंधों पर स्पष्टता

लखनऊ में ही आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में मोहन भागवत ने यह भी कहा कि RSS भाजपा का ‘रिमोट कंट्रोल’ नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ के स्वयंसेवक भाजपा में जाते हैं और आगे बढ़ते हैं, लेकिन यह कहना गलत है कि संघ भाजपा को संचालित करता है।

उन्होंने कहा कि जो लोग भाजपा का विरोध करते हैं, वे अक्सर संघ का भी विरोध करते हैं।

अमेरिकी टैरिफ पर टिप्पणी

अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी बोलते हुए मोहन भागवत ने अमेरिकी टैरिफ नीति पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह अमेरिका का पुराना तरीका है कि वह आर्थिक और सामरिक ताकत के आधार पर दबाव बनाने की कोशिश करता है।

उनका कहना था कि भारत इतना मजबूत है कि वह ऐसे दबावों के आगे झुकेगा नहीं और देश की जनता भी आत्मनिर्भरता के लिए तैयार है।

राजनीतिक और सामाजिक महत्व

मोहन भागवत का यह मेरठ दौरा कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर जहां यह संगठन के सामाजिक विस्तार का संकेत देता है, वहीं खेल जगत के साथ संवाद की पहल एक नई रणनीति के रूप में देखी जा रही है।

उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और ऐसे समय में संघ प्रमुख के लगातार दौरे और मुख्यमंत्री के साथ बैठकें राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।

बिहार विधानसभा में हंगामा और तीखे सवालों के बीच कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित, बजट सत्र की दूसरी पाली में फिर शुरू होगी बहस

पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज सदन की कार्यवाही उस समय दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी, जब प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान सत्ताधारी दल के विधायकों के तीखे सवालों में मंत्री खुद ही घिरते नजर आए। लंच ब्रेक के बाद सदन की कार्यवाही पुनः आरंभ होने की घोषणा की गई है। सुबह से ही सदन का माहौल गरम रहा और कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष के विधायकों ने अपनी ही सरकार से जवाब तलब किए।

प्रश्नकाल में सरकार पर ही उठे सवाल

बजट सत्र के दौरान आज का दिन राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा था। विपक्ष की ओर से सरकार को घेरने की रणनीति पहले से तय थी, लेकिन स्थिति उस समय दिलचस्प हो गई जब सत्ताधारी दल के विधायकों ने भी विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर मंत्रियों से सीधे और तीखे सवाल पूछने शुरू कर दिए।

सूत्रों के अनुसार, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और नगर विकास विभाग से जुड़े प्रश्नों पर मंत्री संतोषजनक जवाब देने में असहज दिखे। कुछ विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में अधूरी योजनाओं, लंबित भुगतान, खराब सड़कों और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

एक विधायक ने अपने क्षेत्र में स्वीकृत पुल निर्माण योजना के लंबित रहने का मुद्दा उठाया और पूछा कि बजट आवंटन के बावजूद कार्य प्रारंभ क्यों नहीं हुआ। इस पर संबंधित मंत्री ने विभागीय प्रक्रिया और तकनीकी स्वीकृति का हवाला दिया, लेकिन विधायक ने जवाब को अपर्याप्त बताते हुए नाराजगी जताई।

सत्ता पक्ष के भीतर असंतोष के संकेत?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष के विधायकों द्वारा इस तरह के सवाल उठाया जाना सरकार के भीतर बढ़ते दबाव का संकेत हो सकता है। कई विधायक आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों की गति को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं।

कुछ विधायकों ने यह भी कहा कि यदि योजनाओं का लाभ समय पर जनता तक नहीं पहुंचेगा, तो इसका सीधा असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है। ऐसे में सदन के भीतर ही सरकार को आईना दिखाने की कोशिश की जा रही है।

विपक्ष ने भी साधा निशाना

हालांकि आज का केंद्र बिंदु सत्ता पक्ष के सवाल रहे, लेकिन विपक्ष ने भी इस मौके को हाथ से नहीं जाने दिया। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि जब सत्ताधारी दल के विधायक ही सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

विपक्ष के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की योजनाएं कागजों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन में भारी खामियां हैं। उन्होंने मांग की कि बजट सत्र के दौरान सभी विभागों की विस्तृत समीक्षा कराई जाए और लंबित परियोजनाओं की सूची सार्वजनिक की जाए।

स्पीकर ने बनाए रखा अनुशासन

सदन में बढ़ते शोर-शराबे और लगातार हस्तक्षेप के बीच अध्यक्ष ने कई बार सदस्यों से शांत रहने और प्रश्नकाल की गरिमा बनाए रखने की अपील की। कुछ समय के लिए सदन में तीखी बहस भी हुई, जिसके बाद दोपहर 2 बजे तक कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा की गई।

अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि लंच के बाद सदन की दूसरी पाली में बजट सत्र की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाई जाएगी और सदस्यों को अपने प्रश्न रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।

Patna NEET Student Death Case: परिवार को दूसरी बार जान से मारने की धमकी, CBI जांच के बीच गांव में बढ़ाई गई सुरक्षा

पटना/जहानाबाद। बिहार की राजधानी पटना से जुड़े बहुचर्चित NEET छात्रा मौत मामले ने एक बार फिर सनसनी फैला दी है। जिस घटना ने पहले ही राज्यभर में आक्रोश और सवालों का तूफान खड़ा कर दिया था, अब उसमें धमकी भरे पर्चों की एंट्री ने मामले को और रहस्यमय बना दिया है। जहानाबाद स्थित छात्रा के पैतृक गांव में परिजनों को लगातार दूसरी बार जान से मारने की धमकी दी गई है। इससे परिवार गहरे सदमे और भय के माहौल में जीने को मजबूर है।

पुलिस की तैनाती के बावजूद घर के किचन की खिड़की पर धमकी भरे पर्चे मिलना सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। पूरे मामले की जांच अब केंद्रीय एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) कर रही है, जबकि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने भी घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं।

किचन की खिड़की पर मिला पहला धमकी भरा पर्चा

परिजनों के अनुसार पहला पर्चा शुक्रवार की रात घर के किचन की खिड़की पर रखा मिला। उस पर्चे में साफ शब्दों में लिखा था— “तुम सब लोग मारे जाओगे।”

परिवार ने तत्काल इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। शकूराबाद थाना की टीम मौके पर पहुंची और पर्चे को जब्त कर जांच शुरू की। पुलिस ने आश्वासन दिया कि सुरक्षा में कोई चूक नहीं होने दी जाएगी।

हालांकि परिवार अभी पहले पर्चे के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि कुछ ही दिनों बाद एक और धमकी ने माहौल को और भयावह बना दिया।

दूसरे पर्चे ने बढ़ाई दहशत: “2 दिन में तेरा बेटा भी मरेगा”

मंगलवार को उसी किचन की खिड़की पर एक और पर्चा मिला। इस बार भाषा और भी ज्यादा खतरनाक और व्यक्तिगत थी। उसमें लिखा था—
“जिस तरह बेटी मरी है, 2 दिन में तेरा बेटा भी मरेगा।”

इस संदेश ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। बेटी की मौत के गम से उबर नहीं पाए माता-पिता के सामने अब बेटे की जान की धमकी ने मानसिक दबाव कई गुना बढ़ा दिया है।

परिवार के सदस्यों ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इतनी सुरक्षा के बीच कोई घर तक पहुंचकर पर्चा कैसे रख जा रहा है। गांव में पुलिस की तैनाती है, आने-जाने वालों पर नजर रखी जा रही है, फिर भी यह घटना सुरक्षा में सेंध की ओर इशारा करती है।

गांव में पुलिस की तैनाती, फिर भी कैसे पहुंचा धमकी देने वाला?

धमकी भरे पर्चे मिलने के बाद पुलिस ने घर के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया है। आने-जाने वालों की पूछताछ की जा रही है। गांव में रात के समय गश्ती बढ़ा दी गई है।

इसके बावजूद सवाल यह है कि जब घर की निगरानी हो रही थी तो आखिर पर्चा रखने वाला व्यक्ति वहां तक कैसे पहुंचा? क्या कोई स्थानीय व्यक्ति इसमें शामिल है? या फिर सुरक्षा में कहीं न कहीं गंभीर चूक हुई है?

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हर एंगल से जांच की जा रही है। आसपास लगे संभावित सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। गांव के संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही है।

एफएसएल टीम ने जुटाए साक्ष्य

मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम गांव पहुंची। टीम ने किचन की खिड़की, दीवारों और आसपास के हिस्सों से फिंगरप्रिंट, हैंडराइटिंग और अन्य फॉरेंसिक नमूने जुटाए।

पर्चों की लिखावट की जांच कराई जा रही है ताकि यह पता चल सके कि दोनों पर्चे एक ही व्यक्ति ने लिखे हैं या अलग-अलग लोगों ने। कागज और स्याही की जांच से भी सुराग मिलने की उम्मीद है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह धमकी महज डराने की कोशिश भी हो सकती है या फिर किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा भी। इसलिए हर पहलू को गंभीरता से खंगाला जा रहा है।

6 जनवरी को हॉस्टल में मिली थी बेहोश

यह पूरा मामला 6 जनवरी से शुरू हुआ, जब छात्रा पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में बेहोश पाई गई थी। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां कई दिनों तक इलाज चला।

11 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश फैला दिया। छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने जांच की जिम्मेदारी Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी।

सीबीआई की सक्रियता, गांव पहुंचकर की पूछताछ

CBI की टीम तीन दिनों के भीतर दो बार छात्रा के गांव पहुंच चुकी है। अधिकारियों ने परिजनों से घंटों पूछताछ की। छात्रा के दोस्तों, रिश्तेदारों और गांव के अन्य लोगों से भी जानकारी ली जा रही है।

जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि छात्रा की मौत आत्महत्या थी, दुर्घटना थी या फिर इसके पीछे कोई साजिश। मोबाइल कॉल डिटेल, चैट रिकॉर्ड, हॉस्टल स्टाफ के बयान और मेडिकल रिपोर्ट की गहन जांच जारी है।

अब धमकी भरे पर्चों की घटना ने जांच को एक नया मोड़ दे दिया है। एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या धमकियों का संबंध सीधे छात्रा की मौत की जांच से है।

परिवार पर मानसिक दबाव

बेटी की असमय मौत के बाद से परिवार पहले ही गहरे सदमे में था। अब लगातार मिल रही धमकियों ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।

परिजनों का कहना है कि उन्हें अपनी और बेटे की सुरक्षा की चिंता सता रही है। वे चाहते हैं कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और उन्हें स्थायी सुरक्षा मुहैया कराई जाए।

गांव के लोगों में भी इस घटना को लेकर आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि धमकी देने वालों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

तीसरे दिन भी शेयर बाजार में मजबूती: सेंसेक्स 283 अंक उछला, निफ्टी 25,800 के पार; मेटल-PSU बैंक शेयरों में जोरदार खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 18 फरवरी 2026 को लगातार तीसरे कारोबारी दिन तेजी देखने को मिली। प्रमुख सूचकांक BSE Sensex 283 अंकों की मजबूती के साथ बंद हुआ, जबकि Nifty 50 25,800 के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर टिके रहने में सफल रहा। दिनभर उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार में चुनिंदा सेक्टरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली, खासकर मेटल और PSU बैंक शेयरों में।

यह तेजी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत मिल रहे थे और निवेशक आगामी आर्थिक आंकड़ों तथा कॉर्पोरेट अपडेट्स पर नजर बनाए हुए हैं। आईटी शेयरों में मुनाफावसूली के बावजूद बाजार का समग्र रुख सकारात्मक रहा।

📊 बाजार का समापन: आंकड़ों में तस्वीर

  • सेंसेक्स: लगभग 83,700 के आसपास बंद, +283 अंक
  • निफ्टी 50: 25,800 के ऊपर बंद, लगभग +90 अंक
  • मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हल्की बढ़त
  • बाजार की चौड़ाई सकारात्मक रही — बढ़ने वाले शेयर गिरने वालों से अधिक रहे

यह लगातार तीसरा सत्र है जब बाजार हरे निशान में बंद हुआ है, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।

🔔 दिनभर का कारोबार: कैसे बदला मूड?

🕘 शुरुआत: सतर्कता के साथ फ्लैट ओपनिंग

कारोबार की शुरुआत हल्की मजबूती के साथ हुई, लेकिन शुरुआती घंटों में बाजार सीमित दायरे में ही कारोबार करता रहा। वैश्विक बाजारों से स्पष्ट दिशा न मिलने के कारण निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।

🕛 दोपहर बाद: मेटल और बैंकिंग शेयरों ने पकड़ी रफ्तार

दोपहर के सत्र में बाजार में तेजी आई।

  • मेटल शेयरों में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में सुधार की उम्मीद से खरीदारी बढ़ी।
  • PSU बैंकों में बेहतर क्रेडिट ग्रोथ और एसेट क्वालिटी सुधार की उम्मीद से निवेशकों ने दांव लगाया।

🕒 आईटी शेयरों में दबाव

आईटी सेक्टर में हल्की मुनाफावसूली देखने को मिली, जिसने बाजार की तेजी को कुछ हद तक सीमित किया। हालांकि अन्य सेक्टरों में मजबूती के चलते कुल मिलाकर सूचकांक सकारात्मक दायरे में बने रहे।

🏭 सेक्टरवार प्रदर्शन

🚀 सबसे ज्यादा चमके सेक्टर

  • मेटल सेक्टर – वैश्विक मांग में सुधार के संकेत
  • PSU बैंक – मजबूत लोन ग्रोथ की उम्मीद
  • FMCG – रक्षात्मक निवेश के रूप में खरीदारी

🔻 दबाव में रहे

  • आईटी सेक्टर
  • कुछ ऑटो शेयरों में सीमित उतार-चढ़ाव

📈 प्रमुख शेयरों की हलचल

  • Godfrey Phillips India के शेयरों में लगभग 20% की तेज उछाल देखने को मिली।
  • Maruti Suzuki India के शेयर बाजार की तेजी के बावजूद अपेक्षाकृत कमजोर रहे।
  • स्टील और धातु कंपनियों में अच्छी खरीदारी दर्ज की गई।

राज्यसभा चुनाव 2026: बिहार की 5 समेत 37 सीटों पर महासंग्राम, 16 मार्च को मतदान—सत्ता और विपक्ष के लिए निर्णायक परीक्षा

Rajya Sabha Elections 2026: देश की संसदीय राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Election Commission of India ने राज्यसभा की 37 रिक्त हो रही सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा कर दी है। इस सूची में बिहार की 5 अहम सीटें शामिल हैं, जिन पर सियासी दलों की निगाहें टिकी हुई हैं। इन सीटों पर होने वाला चुनाव सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संसद के ऊपरी सदन में आने वाले वर्षों के राजनीतिक समीकरण तय करने वाला निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

अप्रैल 2026 में कई वरिष्ठ सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में इन सीटों पर नए प्रतिनिधियों का चयन न केवल राज्यों की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी असर डालेगा। खासकर बिहार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह चुनाव गठबंधन राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

चुनाव कार्यक्रम: 26 फरवरी से 20 मार्च तक पूरी प्रक्रिया

चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 26 फरवरी 2026 से शुरू होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च तय की गई है। 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 मार्च तक प्रत्याशी अपना नाम वापस ले सकेंगे।

16 मार्च 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। मतदान समाप्त होते ही शाम 5 बजे से मतगणना शुरू कर दी जाएगी। पूरी चुनावी प्रक्रिया 20 मार्च तक संपन्न कर ली जाएगी और इसके बाद नवनिर्वाचित सदस्यों की सूची आधिकारिक रूप से जारी की जाएगी।

यह समयसीमा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अप्रैल की शुरुआत में कई सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि नई सूची समय रहते जारी हो जाए ताकि संसद के ऊपरी सदन की कार्यवाही प्रभावित न हो।

किन-किन राज्यों में होगा मतदान?

इस बार कुल 37 सीटों पर चुनाव होने हैं। इनमें प्रमुख राज्यों की सीटों का विवरण इस प्रकार है:

  • महाराष्ट्र – 7 सीटें
  • तमिलनाडु – 6 सीटें
  • पश्चिम बंगाल – 5 सीटें
  • बिहार – 5 सीटें
  • ओडिशा – 3 सीटें
  • असम – 3 सीटें
  • छत्तीसगढ़ – 2 सीटें
  • हरियाणा – 1 सीट
  • हिमाचल प्रदेश – 1 सीट
  • तेलंगाना – 4 सीटें

महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में राजनीतिक परिस्थितियों में हाल के वर्षों में हुए बदलाव के कारण यह चुनाव और भी रोचक हो गया है।

बिहार की 5 सीटें क्यों हैं सबसे अहम?

बिहार की जिन 5 सीटों पर चुनाव होने हैं, उन पर वर्तमान में वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधित्व है। इन नेताओं का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। इनमें प्रमुख नाम हैं:

  • Harivansh Narayan Singh
  • Upendra Kushwaha
  • Ram Nath Thakur
  • Prem Chand Gupta
  • Amarendra Dhari Singh

इनमें हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के उपसभापति भी हैं। उनका दोबारा चयन होता है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी होंगी। वहीं उपेंद्र कुशवाहा और प्रेम चंद गुप्ता जैसे नेताओं की भूमिका बिहार की क्षेत्रीय राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण रही है।

इन सीटों पर चुनाव का असर सीधे-सीधे बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी महागठबंधन के बीच शक्ति संतुलन पर पड़ेगा।

महाराष्ट्र में भी दिग्गजों की परीक्षा

महाराष्ट्र की 7 सीटों पर भी चुनाव होने जा रहे हैं। यहां से राष्ट्रीय स्तर के दो बड़े नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है:

  • Sharad Pawar
  • Ramdas Athawale

शरद पवार भारतीय राजनीति के वरिष्ठतम नेताओं में गिने जाते हैं। यदि वे पुनः मैदान में उतरते हैं तो यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है। वहीं रामदास अठावले केंद्र सरकार में मंत्री हैं, ऐसे में उनकी सीट भी एनडीए के लिए अहम है।

राज्यसभा चुनाव कैसे होते हैं?

राज्यसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा नहीं चुने जाते। इनका चुनाव संबंधित राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक करते हैं। यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत सिंगल ट्रांसफरेबल वोट (STV) प्रणाली से होता है।

मतलब साफ है—जिस दल या गठबंधन के पास विधानसभा में जितनी अधिक संख्या होगी, उसके उम्मीदवार की जीत की संभावना उतनी ही अधिक होगी। ऐसे में जहां विधानसभा में संख्या बल का अंतर कम है, वहां जोड़-तोड़, रणनीति और क्रॉस वोटिंग की संभावना बढ़ जाती है।

बिहार में संभावित सियासी गणित

बिहार की राजनीति लंबे समय से गठबंधन आधारित रही है। यहां एनडीए और महागठबंधन के बीच सत्ता का संघर्ष चलता रहा है। राज्यसभा चुनाव में प्रत्येक सीट के लिए आवश्यक वोटों का गणित बेहद अहम होता है।

यदि किसी दल के पास पूर्ण बहुमत नहीं है तो उसे सहयोगी दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाना पड़ता है। ऐसे में यह चुनाव न केवल राजनीतिक ताकत का परीक्षण है, बल्कि गठबंधन की मजबूती का भी पैमाना बनेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन 5 सीटों में से कम से कम एक या दो सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।

संसद में क्या बदल सकता है समीकरण?

राज्यसभा में बहुमत का गणित अक्सर लोकसभा से अलग होता है। कई बार ऐसा देखा गया है कि केंद्र सरकार के पास लोकसभा में स्पष्ट बहुमत होता है, लेकिन राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण उसे महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने में क्षेत्रीय दलों का समर्थन लेना पड़ता है।

इन 37 सीटों के चुनाव के बाद राज्यसभा की संरचना में बदलाव संभव है। यदि किसी एक गठबंधन को अपेक्षा से अधिक सीटें मिलती हैं तो वह ऊपरी सदन में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

क्या पुराने चेहरों को मिलेगा दोबारा मौका?

सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या राजनीतिक दल अपने मौजूदा सांसदों को दोबारा अवसर देंगे या नए चेहरों को आगे लाएंगे?

बिहार में सामाजिक और जातीय समीकरणों का विशेष महत्व रहा है। ऐसे में दल यह देखेंगे कि किस समुदाय को प्रतिनिधित्व देना उनके लिए लाभकारी रहेगा। इसी तरह महाराष्ट्र और तमिलनाडु में भी क्षेत्रीय संतुलन और गठबंधन समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत की भूमिका

पश्चिम बंगाल की 5 सीटों और तमिलनाडु की 6 सीटों पर भी सबकी नजर है। दक्षिण भारत के राज्यों में क्षेत्रीय दलों की मजबूत उपस्थिति के कारण राष्ट्रीय दलों को रणनीतिक गठजोड़ करना पड़ता है।

इन राज्यों के परिणाम संसद में विपक्ष की ताकत को भी प्रभावित कर सकते हैं।

क्यों कहा जा रहा है इसे ‘मिनी जनादेश’?

राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष जनमत से न होता हो, लेकिन यह राज्यों की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का प्रतिबिंब जरूर होता है। जिन राज्यों में हाल में सरकार बदली है या गठबंधन टूटे हैं, वहां यह चुनाव सत्ता की स्थिरता का संकेत देगा।

विशेषज्ञ इसे ‘मिनी जनादेश’ इसलिए भी कह रहे हैं क्योंकि इससे यह संकेत मिलेगा कि आने वाले लोकसभा या विधानसभा चुनावों में राजनीतिक रुझान किस दिशा में जा सकते हैं।

चार्टर प्लेन से पटना पहुंचे IAS निलेश रामचंद्र देओरे पर सियासी संग्राम: विधानसभा में गूंजा मुद्दा, नीतीश सरकार पर विपक्ष का हमला

बिहार की राजनीति एक बार फिर प्रशासनिक निष्पक्षता और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच उलझ गई है। राज्य के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी Nilesh Ramchandra Deore को लेकर छिड़ा चार्टर प्लेन विवाद अब सियासी तूफान में बदल चुका है। पटना पहुंचने के लिए चार्टर विमान के इस्तेमाल को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि सत्ता पक्ष इसे नियमों के अनुरूप और परिस्थितिजन्य निर्णय बता रहा है। मामला इतना तूल पकड़ चुका है कि Bihar Vidhan Sabha में भी इस पर तीखी बहस हुई और सरकार को सफाई देनी पड़ी।

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के अनुसार, आईएएस अधिकारी निलेश रामचंद्र देओरे को अचानक पटना बुलाया गया था। बताया जा रहा है कि प्रशासनिक कारणों और समय की कमी को देखते हुए वे चार्टर विमान से पटना पहुंचे। यहीं से विवाद की शुरुआत हुई। विपक्षी दलों ने सवाल उठाया कि एक अधिकारी के लिए चार्टर प्लेन का खर्च किस आधार पर स्वीकृत किया गया? क्या यह सरकारी धन का दुरुपयोग है? और क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक मंशा छिपी है?

विपक्ष का आरोप है कि यह कदम आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया। खासतौर पर जब राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं और सत्ता समीकरणों पर लगातार चर्चा हो रही है।

विधानसभा में गरमाया मुद्दा

मामला विधानसभा तक पहुंचा तो विपक्ष ने सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। Tejashwi Yadav की पार्टी Rashtriya Janata Dal ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल राजनीतिक हित साधने के लिए किया जा रहा है। वहीं Indian National Congress के नेताओं ने भी पारदर्शिता की मांग की।

सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से जवाब देते हुए Bharatiya Janata Party के प्रवक्ताओं ने कहा कि अधिकारी का पटना आना पूरी तरह प्रशासनिक आवश्यकता थी और इसमें किसी तरह की अनियमितता नहीं है। उनका कहना है कि कई बार आपात या विशेष परिस्थितियों में चार्टर विमान का उपयोग किया जाता है, जो नियमों के दायरे में आता है।

नीतीश कुमार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने इस पूरे विवाद पर संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शिता में विश्वास करती है और यदि किसी को कोई शंका है तो तथ्यों की जांच कराई जा सकती है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक फैसले परिस्थिति के अनुसार लिए जाते हैं और उन्हें राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।

हालांकि, विपक्ष इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा और मामले की विस्तृत जांच तथा खर्च का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की।

कौन हैं निलेश रामचंद्र देओरे?

आईएएस अधिकारी निलेश रामचंद्र देओरे अपने प्रशासनिक अनुभव और सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने बिहार में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है और कई जिलों में जिला अधिकारी के रूप में सेवाएं दी हैं। प्रशासनिक हलकों में उन्हें कुशल और निर्णायक अधिकारी माना जाता है।

देओरे का कैरियर अपेक्षाकृत साफ-सुथरा रहा है और वे अक्सर अपने कामकाज के कारण चर्चा में रहे हैं। लेकिन इस बार उनका नाम राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गया है। चार्टर प्लेन प्रकरण ने उनकी छवि और प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर भी बहस छेड़ दी है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और समय का महत्व

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद का समय बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और विपक्ष लगातार सरकार को घेरने के मुद्दे तलाश रहा है। ऐसे में किसी वरिष्ठ अधिकारी की यात्रा को लेकर उठे सवालों ने सियासी बहस को और हवा दे दी है।

विपक्ष का तर्क है कि यदि यात्रा अत्यावश्यक थी तो उसके दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। वहीं सरकार का कहना है कि प्रक्रिया का पालन किया गया और खर्च संबंधित नियमों के तहत वहन किया गया।

प्रशासनिक नियम क्या कहते हैं?

सरकारी नियमों के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में वरिष्ठ अधिकारियों को चार्टर विमान की सुविधा दी जा सकती है। हालांकि, इसके लिए स्पष्ट अनुमति और औपचारिक स्वीकृति आवश्यक होती है। यही वह बिंदु है जिस पर विपक्ष सवाल उठा रहा है—क्या सभी प्रक्रियाएं विधिवत पूरी की गईं?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी कागजी औपचारिकताएं पूरी हैं तो विवाद स्वतः समाप्त हो सकता है। लेकिन यदि किसी स्तर पर प्रक्रिया में कमी पाई जाती है, तो यह सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है।

तेजस्वी यादव का बड़ा ऐलान: RJD अब सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी, राष्ट्रीय पार्टी बनने की दिशा में करेगी विस्तार

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बयान देकर पार्टी के भविष्य के दृष्टिकोण और दिशा को लेकर बड़ा पन्ना खोला है। पटना में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अब राष्ट्रीय जनता दल सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पार्टी जल्द ही देश के अन्य राज्यों में अपने पैर पसारने का प्रयास करेगी और राष्ट्रीय पार्टी बनने की आकांक्षा रखती है

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब RJD ने हाल ही में बिहार विधानसभा चुनावों में सफलता हासिल नहीं की थी। तेजस्वी का बयान पार्टी के पुराने राजनीतिक रुख से एक बड़ा बदलाव दर्शाता है और पार्टी की राजनीतिक सोच में विस्तार को उजागर करता है।

तेजस्वी यादव के बयान की प्रमुख बातें

तेजस्वी यादव ने पटना में दिए अपने बयान में कहा:
📌 “अब हमारी पार्टी सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी। हम आने वाले समय में **अन्य राज्यों में भी चुनाव लड़ने, संगठन का विस्तार करने और राष्ट्रीय पार्टी बनने की दिशा में काम करेंगे।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि RJD ने पहले अन्य राज्यों में चुनाव न लड़ने का फैसला इसलिए किया था ताकि धर्मनिरपेक्ष वोटों का बंटवारा न हो और सहयोगी दलों को लाभ मिले, लेकिन अब समय बदल गया है और पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का अवसर है

तेजस्वी ने यह भी कहा:
➡️ “हम बिहार विधानसभा में चुनाव हार गए, इसका मतलब यह नहीं कि पार्टी कमजोर है, बल्कि परिस्थितियाँ प्रतिकूल थीं। हमारा समय फिर आएगा।”

यहां ये शब्द RJD के कारणों और चुनौतियों को समझने में मदद करते हैं — उन्होंने हार को अस्थायी बताया और पार्टी कार्यकर्ताओं को आशा तथा दृढ़ता के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

नीतीश कुमार पर हमला और RJD की राजनीति

तेजस्वी यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी आरोप लगाए हैं कि वह “अपने फैसलों में प्रभावित अधिकारियों और अपने सहयोगी दल के दबाव में हैं” और इसलिए राज्य की जनता के मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार की 100 दिनों की सीमा के बाद वे सरकार की विफलताओं पर जोर देंगे और जनता के बीच यह मामला उठाएंगे कि चुनाव में जिन वादों को उन्होंने लिया था, वे पूरा नहीं किए गए।

यह बयान RJD के राजनीतिक संघर्ष को दर्शाता है, जिसमें विपक्षी दल सत्ता पक्ष की नीतियों और कार्यों की आलोचना करते हुए खुद को जनता की आवाज़ के रूप में पेश करते हैं।

राष्ट्रीय पार्टी बनने की महत्वाकांक्षा क्यों?

भारत में राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलने के लिए केंद्र सरकार के चुनाव आयोग के मानदंडों को पूरा करना होता है। इसके लिए दल को विभिन्न राज्यों में समर्थन और सक्रिय वोट बैंक दिखाना आवश्यक होता है।

RJD का यह कदम पार्टी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। तेजस्वी का मानना है कि RJD के पास वह राजनीतिक विरासत, विचारधारा और समर्थन है जो इसे राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावशाली दल बना सकता है।

उनके इस दृष्टिकोण के पीछे यह तर्क भी दिखता है कि भारतीय राजनीति में संवैधानिक रूप से सेक्युलर और सामाजिक न्याय की विचारधारा वाली पार्टियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी बनना चाहिए ताकि वे देशभर के मुद्दों पर अपनी आवाज उठा सकें।

RJD का इतिहास और अब का नवाचार

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की स्थापना 1997 में लालू प्रसाद यादव ने की थी और पार्टी ने बिहार में अपनी एक मजबूत राजनीतिक पहचान बनाई। लालू यादव के नेतृत्व में RJD ने सामाजिक न्याय, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के मुद्दों को आगे बढ़ाया और राज्य की राजनीति में एक प्रभावशाली दल के रूप में उभरी।

तेजस्वी यादव, जो लालू प्रसाद यादव के पुत्र हैं, ने धीरे-धीरे पार्टी में अपनी भूमिका बढ़ाई और जनवरी 2025 में उन्हें RJD का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। इससे तेजस्वी को पार्टी के फैसलों में अधिक अधिकार और नेतृत्व निभाने का अवसर मिला।

अब तेजस्वी यादव ने पार्टी को एक नई दिशा देने का निश्चय किया है — वह चाहते हैं कि RJD केवल बिहार तक सीमित न रहे बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराए

बिहार में शराबबंदी पर मंथन की घड़ी: सहयोगियों के दबाव और आर्थिक चुनौतियों के बीच क्या बदलेगा फैसला?

पटना: Bihar Vidhan Sabha में बजट सत्र के दौरान बुधवार को जमकर हंगामा देखने को मिला। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस हुई। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के एक विधायक ने राज्य में लागू शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून का दुरुपयोग हो रहा है और निर्दोष लोगों को भी परेशान होना पड़ रहा है।

विधायक ने यह भी कहा कि यदि कोई अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन का जवाब नहीं देता है या जनता की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करता है, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। इस बयान के बाद सदन में माहौल गर्म हो गया। विपक्ष ने सरकार पर प्रशासनिक ढिलाई का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने दावा किया कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है।

बिहार की राजनीति में एक बार फिर शराबबंदी कानून चर्चा के केंद्र में है। वर्ष 2016 में लागू की गई पूर्ण शराबबंदी को मुख्यमंत्री Nitish Kumar की सबसे महत्वाकांक्षी और चर्चित पहलों में गिना जाता है। लेकिन अब लगभग एक दशक बाद, इसी कानून को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर से समीक्षा की मांग उठने लगी है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कुछ सहयोगी नेताओं ने खुले तौर पर कहा है कि शराबबंदी के कारण राज्य को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है और इसके क्रियान्वयन में व्यावहारिक समस्याएं सामने आ रही हैं।

राजस्व संकट और बढ़ता वित्तीय दबाव

शराबबंदी लागू होने से पहले बिहार सरकार को आबकारी मद से हर साल हजारों करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता था। यह आय राज्य के विकास कार्यों और सामाजिक योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण स्रोत थी। शराबबंदी के बाद यह आय लगभग समाप्त हो गई।

वर्तमान में राज्य सरकार पर कई कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास का बड़ा वित्तीय बोझ है। ऐसे में आबकारी राजस्व की कमी को लेकर वित्तीय विशेषज्ञ लगातार चिंता जता रहे हैं। उनका मानना है कि यदि नियंत्रित और विनियमित तरीके से शराब बिक्री की अनुमति दी जाए, तो राज्य को राजस्व में बड़ी राहत मिल सकती है।

सहयोगियों की खुली नाराजगी

केंद्रीय मंत्री और एनडीए के वरिष्ठ नेता Jitan Ram Manjhi ने कहा है कि शराबबंदी का उद्देश्य भले ही सामाजिक सुधार रहा हो, लेकिन इसके कारण राज्य को “महत्वपूर्ण आर्थिक नुकसान” उठाना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नीति के क्रियान्वयन में कमियां हैं और इस पर गंभीर समीक्षा की जरूरत है।

गठबंधन के कुछ अन्य नेताओं ने भी विधानसभा में विस्तृत चर्चा की मांग की है। उनका कहना है कि दस साल बाद किसी भी नीति का मूल्यांकन करना लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा है। समीक्षा में सामाजिक प्रभाव, आर्थिक नुकसान, कानून-व्यवस्था और जनता की राय—सभी पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए।

कानून-व्यवस्था और क्रियान्वयन की चुनौतियां

शराबबंदी के तहत अब तक लाखों मामले दर्ज किए जा चुके हैं और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुई हैं। आलोचकों का आरोप है कि छोटे उपभोक्ताओं पर कार्रवाई ज्यादा हुई, जबकि बड़े पैमाने पर अवैध शराब तस्करी के नेटवर्क पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया।

राज्य के कई जिलों में अवैध और जहरीली शराब से मौत की घटनाएं भी सामने आईं, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। इससे यह बहस और तेज हो गई है कि क्या पूर्ण प्रतिबंध की बजाय सख्त नियमन और नियंत्रित बिक्री बेहतर विकल्प हो सकता है।

सामाजिक प्रभाव: महिलाओं का समर्थन, युवाओं की चिंता

शराबबंदी लागू करते समय मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार का बड़ा कदम बताया था। ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिला समूहों ने इस नीति का समर्थन किया और दावा किया कि घरेलू हिंसा तथा पारिवारिक विवादों में कमी आई है।

हालांकि युवाओं और व्यापारिक वर्ग के एक हिस्से का मानना है कि प्रतिबंध के बावजूद शराब की उपलब्धता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, बल्कि यह अवैध बाजार में बदल गई है। इससे कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य दोनों पर खतरा बढ़ा है।

राजनीतिक समीकरण और भविष्य की दिशा

शराबबंदी का मुद्दा बिहार की राजनीति में बेहद संवेदनशील है। यह मुख्यमंत्री की छवि और उनकी राजनीतिक पहचान से जुड़ा हुआ है। ऐसे में यदि इस नीति में कोई बड़ा बदलाव होता है, तो उसका व्यापक राजनीतिक असर पड़ सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार तत्काल कोई बड़ा फैसला नहीं लेगी, लेकिन आंशिक संशोधन या क्रियान्वयन में सुधार की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। संभावित विकल्पों में—

  • कानून में संशोधन कर छोटे मामलों में राहत
  • पारंपरिक पेय पदार्थों को अलग श्रेणी में रखना
  • सीमित और नियंत्रित लाइसेंस प्रणाली लागू करना
  • अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई

Amit Shah Bengal Visit: मायापुर इस्कॉन मुख्यालय में करेंगे पूजा-अर्चना, भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर की 152वीं जयंती में शामिल होंगे गृह मंत्री

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah बुधवार को पश्चिम बंगाल के एक महत्वपूर्ण लेकिन गैर-राजनीतिक दौरे पर आ रहे हैं। इस बार उनका कार्यक्रम पूरी तरह धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप का है। वह नदिया जिले के मायापुर स्थित विश्वप्रसिद्ध International Society for Krishna Consciousness (इस्कॉन) के वैश्विक मुख्यालय में आयोजित एक विशेष समारोह में शामिल होंगे। भाजपा नेताओं ने स्पष्ट किया है कि इस यात्रा में किसी भी प्रकार की राजनीतिक सभा, संगठनात्मक बैठक या चुनावी कार्यक्रम शामिल नहीं है।

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य की राजनीतिक हलचल तेज है, लेकिन गृह मंत्री का यह कार्यक्रम आध्यात्मिक महत्व से जुड़ा हुआ है। प्रशासनिक स्तर पर इस यात्रा को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

दोपहर 1:35 बजे कोलकाता आगमन, बीएसएफ हेलीकॉप्टर से मायापुर प्रस्थान

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, अमित शाह दोपहर 1:35 बजे विशेष विमान से कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरेंगे। वहां से वह सीधे बीएसएफ के हेलीकॉप्टर से नदिया जिले के मायापुर के लिए रवाना होंगे। दोपहर 2:25 बजे से शाम 4:25 बजे तक वह इस्कॉन मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे।

करीब दो घंटे के प्रवास के दौरान वह विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होंगे, संतों से मुलाकात करेंगे और आध्यात्मिक नेता की जयंती पर आयोजित मुख्य समारोह को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वह पुनः हेलीकॉप्टर से कोलकाता एयरपोर्ट लौटेंगे और वहीं से दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे।

मायापुर: इस्कॉन का वैश्विक मुख्यालय और आध्यात्मिक केंद्र

नदिया जिले का मायापुर विश्वभर में गौड़ीय वैष्णव परंपरा के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है। यही International Society for Krishna Consciousness (इस्कॉन) का वैश्विक मुख्यालय है, जिसकी स्थापना A. C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada ने की थी। मायापुर में स्थित भव्य मंदिर परिसर न केवल भारत, बल्कि अमेरिका, यूरोप, रूस, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका से आने वाले श्रद्धालुओं का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है।

अमित शाह का यह दौरा मायापुर के धार्मिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक रेखांकित करता है। भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के कुछ वरिष्ठ नेताओं के भी उनके साथ मौजूद रहने की संभावना है, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि सीमित ही है।

शंखभवन और पद्मभवन में विशेष बैठक

सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री सबसे पहले इस्कॉन परिसर स्थित शंखभवन जाएंगे, जहां संतों और वरिष्ठ धार्मिक पदाधिकारियों के साथ उनकी एक विशेष बैठक प्रस्तावित है। इसके बाद वे पद्मभवन का दौरा करेंगे। इस दौरान संगठन की आध्यात्मिक गतिविधियों, सामाजिक सेवाओं और वैश्विक विस्तार को लेकर चर्चा हो सकती है।

इसके बाद अमित शाह Bhaktisiddhanta Sarasvati Thakur की 152वीं जयंती पर आयोजित मुख्य समारोह में शामिल होंगे। भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर गौड़ीय वैष्णव परंपरा के प्रमुख आचार्य थे और इस्कॉन की वैचारिक परंपरा के आधार स्तंभ माने जाते हैं।

स्वामी प्रभुपाद को पुष्पांजलि, मंदिरों में पूजा-अर्चना

मंदिर परिसर में गृह मंत्री A. C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada को पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इसके साथ ही वे भगवान नरसिंह, चैतन्य महाप्रभु और राधा-माधव के मंदिरों में जाकर विधिवत पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे।

यह कार्यक्रम धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस्कॉन के अनुयायियों के लिए यह अवसर विशेष उत्साह का विषय है, क्योंकि देश के गृह मंत्री स्वयं इस आयोजन में शामिल होकर आध्यात्मिक परंपरा के प्रति सम्मान प्रकट करेंगे।

पहले भी कर चुके हैं बंगाल का दौरा

गौरतलब है कि अमित शाह इससे पहले 31 जनवरी को पश्चिम बंगाल आए थे। उस दौरान उन्होंने उत्तर 24 परगना जिले के बैरकपुर स्थित आनंदपुरी मैदान में सभा को संबोधित किया था और बाद में सिलीगुड़ी में कार्यकर्ता सम्मेलन में हिस्सा लिया था। उस दौरे का स्वरूप पूरी तरह राजनीतिक था।

हालांकि इस बार उनके आधिकारिक कार्यक्रम में किसी राजनीतिक गतिविधि का उल्लेख नहीं है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह दौरा विशुद्ध रूप से धार्मिक कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है।

नदिया जिला प्रशासन और पुलिस हाई अलर्ट पर

गृह मंत्री के आगमन को देखते हुए नदिया जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी और प्रवेश द्वारों पर कड़ी जांच की व्यवस्था की गई है।

राज्य पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट मोड में हैं। वीआईपी मूवमेंट के मद्देनजर यातायात व्यवस्था में भी अस्थायी बदलाव किए जा सकते हैं। स्थानीय प्रशासन ने आम श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील की है।

ममता बनर्जी का बड़ा आरोप: ‘AI के जरिए 58 लाख वोटरों के नाम काटे’, चुनाव आयोग को बताया ‘टॉर्चर कमीशन’

कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो Mamata Banerjee ने चुनावी माहौल के बीच बड़ा राजनीतिक विस्फोट करते हुए Election Commission of India पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में मतदाता सूची से 58 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं और इसके पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दुरुपयोग किया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने आयोग को “तुगलकी” और “सो कॉल्ड टॉर्चर कमीशन” तक कह डाला।

कोलकाता स्थित राज्य सचिवालय नबान्न में आयोजित एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने कहा कि लोकतंत्र के मूल अधिकारों से खिलवाड़ किया जा रहा है और यह सब एक राजनीतिक एजेंडे के तहत हो रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी Bharatiya Janata Party पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा की आईटी सेल से जुड़े लोग तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल कर मतदाता सूची में हस्तक्षेप कर रहे हैं।

58 लाख वोटरों के नाम हटाने का आरोप

ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा की आईटी सेल की एक महिला पदाधिकारी ने AI तकनीक का इस्तेमाल कर पश्चिम बंगाल में लगभग 58 लाख मतदाताओं के नाम हटवा दिए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “लोकतंत्र में वोट देने का अधिकार सबसे बड़ा अधिकार है। अगर मतदाता सूची से लाखों लोगों के नाम हटा दिए जाएं, तो यह सीधे-सीधे लोकतंत्र पर हमला है।”

हालांकि, इस दावे पर चुनाव आयोग की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह बयान तीखी बहस का विषय बन गया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग Supreme Court of India के निर्देशों का पालन नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग मतदाताओं को “लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी” के नाम पर परेशान कर रहा है और वैध दस्तावेजों को भी अस्वीकार कर रहा है।

ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के दौरान राज्य में भारी दबाव और भय का माहौल बना। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के चलते डर और तनाव की वजह से 160 लोगों की जान चली गई।

हालांकि इन मौतों को लेकर स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन मुख्यमंत्री ने इसे “लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला” करार दिया।

एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में व्यापक पैमाने पर नाम हटाए गए। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी और भाजपा के निर्देश पर की गई।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल के अधिकारियों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है, तो राज्य सरकार उन अधिकारियों की रक्षा करेगी। इतना ही नहीं, उन्होंने घोषणा की कि जिन अधिकारियों को आयोग ने डिमोट किया है, उन्हें राज्य सरकार प्रमोशन देगी।

यह बयान अपने आप में असाधारण है और इससे केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव बढ़ने की आशंका है।

“तुगलकी कांड” और “हिटलरी अत्याचार” जैसे शब्दों का इस्तेमाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी ने बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने चुनाव आयोग को “सो कॉल्ड टॉर्चर कमीशन” बताते हुए कहा कि वह इसे चुनाव आयोग कहने को तैयार नहीं हैं।

उन्होंने कहा, “यह तुगलकी कांड है। हिटलरी अत्याचार हो रहे हैं। जनता वोट देकर सरकार चुनती है या कोई आयोग पहले से तय कर देता है कि किसे फायदा पहुंचाना है?”

मुख्यमंत्री के इस बयान से राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है।

बिहार और हरियाणा का उदाहरण

ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि अगर बिहार में एसआईआर के दौरान कुछ दस्तावेज मान्य थे, तो वही दस्तावेज पश्चिम बंगाल में अमान्य क्यों कर दिए गए? उन्होंने कहा कि हरियाणा और बिहार में भी इस प्रक्रिया के खिलाफ शिकायतें आई थीं।

उन्होंने कहा, “सच को कोई दबा नहीं सकता। आज नहीं तो कल, सच सामने आएगा।”

बंगाल चुनाव से पहले बड़ा सियासी उलटफेर: कई प्रमुख चेहरे BJP में शामिल

कोलकाता, 17 फरवरी 2026 : पश्चिम बंगाल में इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) से पहले आज राजनीति में बड़ा बदलाव देखा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मंगलवार को कोलकाता स्थित अपनी पार्टी मुख्यालय में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें कई जाने-माने सार्वजनिक हस्तियों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस कार्यक्रम में बीजेपी के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी और पार्टी के राज्य अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

बीजेपी में शामिल हुए प्रमुख चेहरे

  1. दीपांजन चक्रवर्ती
    पूर्व नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) कमांडर और देश के पूर्व अंडरकवर एजेंट रहे चक्रवर्ती आज भाजपा में शामिल हुए। उन्हें सुरक्षा और खुफिया मामलों में लंबे अनुभव के लिए जाना जाता है।
  2. बिप्लब बिस्वास
    CRPF (सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स) के पूर्व DSP अधिकारी रहे बिस्वास ने भी आज भाजपा का दामन थामा। उनके जुड़ने से पार्टी को सुरक्षा-सेवा क्षेत्र के समर्थक वोटरों तक पहुंच बढ़ाने की उम्मीद है।
  3. कस्तूरी गोस्वामी
    पश्चिम बंगाल के दिग्गज लेफ्ट-फ्रंट नेता और पूर्व मंत्री खिती गोस्वामी की पुत्री कस्तूरी गोस्वामी ने भी भाजपा में शामिल होकर राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है।

प्रेस कॉन्फ़्रेंस में विवादित आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर जनता उन्नयन पार्टी (JUP) से जुड़े विधायक हुमायूं कबीर पर निशाना साधा। अधिकारी ने दावा किया कि मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखने से पहले कबीर कई दिनों तक बांग्लादेश में थे और उनके बैंक खाते में बांग्लादेश से पैसे आ रहे हैं। उन्होंने इस मामले की गहन जांच कराने की मांग की।

India AI Impact Summit 2026: बिहार को ₹468 करोड़ का निवेश, IIT पटना में बनेगा रिसर्च पार्क और एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

नई दिल्ली : नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit & Expo 2026 के दौरान बिहार सरकार ने तकनीकी क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य ने कुल 468 करोड़ के निवेश समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे बिहार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रिसर्च, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल इनोवेशन को नई गति मिलेगी।

इस मौके पर बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और आईटी मंत्री श्रेयसी सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ समझौते किए। सरकार का दावा है कि इन निवेशों से 10,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे और हजारों युवाओं को हाई-टेक स्किल ट्रेनिंग मिलेगी।

IIT पटना में बनेगा 250 करोड़ का रिसर्च पार्क

सबसे बड़ा समझौता IIT Patna में ₹250 करोड़ के रिसर्च पार्क की स्थापना को लेकर हुआ है। यह पार्क शिक्षा और उद्योग के बीच एक सेतु का कार्य करेगा।

रिसर्च पार्क में स्थापित होंगी:

  • एआई और मशीन लर्निंग लैब
  • स्टार्टअप इन्क्यूबेशन सेंटर
  • इंडस्ट्री-एकेडमिक कोलैबोरेशन हब
  • हाई-परफॉर्मेंस डेटा सेंटर

इस पहल से बिहार को पूर्वी भारत के प्रमुख टेक्नोलॉजी और रिसर्च हब के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।

60 करोड़ का एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

बिहार सरकार ने 60 करोड़ की लागत से एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। इसमें Tiger Analytics उद्योग साझेदार और IIT Patna शैक्षणिक सहयोगी होंगे।

यह सेंटर:

  • युवाओं को डेटा साइंस और एआई में प्रशिक्षण देगा
  • एग्रीटेक, हेल्थटेक और ई-गवर्नेंस समाधान विकसित करेगा
  • स्टार्टअप्स को तकनीकी सहायता प्रदान करेगा

सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में 50,000 से अधिक युवाओं को एआई आधारित कौशल प्रशिक्षण दिया जाए।

पटना में CIPL का कोर डेवलपमेंट सेंटर

Corporate Infotech Pvt Ltd (CIPL) ने बिहार सरकार के साथ समझौता कर पटना में कोर डेवलपमेंट सेंटर और एआई हब स्थापित करने की घोषणा की है।

इस परियोजना के तहत:

  • SAP आधारित एंटरप्राइज सॉल्यूशंस
  • क्लाउड कंप्यूटिंग
  • साइबर सुरक्षा
  • डेटा सेंटर सेवाएं

विकसित की जाएंगी। अगले पांच वर्षों में इस परियोजना से लगभग 2000 आईटी पेशेवरों को रोजगार मिलने की संभावना है।

अन्य कंपनियों से भी निवेश

बिहार सरकार ने निम्न कंपनियों के साथ भी निवेश समझौते किए हैं:

  • Red Cyber – 103 करोड़
  • GrowQR – 30 करोड़

इन निवेशों से राज्य में साइबर सुरक्षा, फिनटेक और डिजिटल पेमेंट सेक्टर को मजबूती मिलेगी।

नई आईटी नीतियों का प्रभाव

बिहार सरकार ने हाल ही में कई नई नीतियाँ लागू की हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • Bihar GCC Policy 2026
  • Bihar Semiconductor Policy 2026
  • Bihar IT Policy 2024

इन नीतियों के तहत निवेशकों को टैक्स छूट, इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट और भूमि आवंटन जैसी सुविधाएँ दी जाएंगी।

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार अब केवल श्रम आधारित अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ज्ञान आधारित और डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ेगा। आईटी मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि राज्य के युवाओं को वैश्विक स्तर की तकनीकी शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

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Muzaffarpur Bribery Case: जिला कृषि पदाधिकारी हिमांशु कुमार 50 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार, SVU की बड़ी कार्रवाई

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में कृषि विभाग एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रभारी जिला कृषि पदाधिकारी हिमांशु कुमार और उनके ड्राइवर रामबाबू राय को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई ने न केवल मुजफ्फरपुर बल्कि पूरे बिहार में प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकायत से गिरफ्तारी तक: कैसे बिछाया गया जाल

पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एक खाद दुकानदार की शिकायत से हुई। दुकानदार ने पटना स्थित विशेष निगरानी इकाई के कार्यालय में लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया कि जिला कृषि कार्यालय की ओर से उसे लगातार परेशान किया जा रहा है। शिकायत के मुताबिक, जांच के नाम पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा था और दुकान का लाइसेंस रद्द करने की धमकी दी जा रही थी।

दुकानदार ने आरोप लगाया कि मामले को “सुलझाने” के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की गई। यह रकम सीधे अधिकारी की बजाय उनके ड्राइवर के माध्यम से मांगी गई थी। आरोप यह भी था कि यदि तय रकम नहीं दी गई तो लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा, जिससे उसका व्यवसाय पूरी तरह ठप हो सकता था।

शिकायत मिलते ही SVU ने मामले को गंभीरता से लिया और प्राथमिक स्तर पर गुप्त सत्यापन (वेरिफिकेशन) कराया। सत्यापन के दौरान शिकायत में प्रथमदृष्टया सच्चाई पाई गई। इसके बाद अधिकारियों ने ट्रैप कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी।

ट्रैप टीम का गठन और सुनियोजित कार्रवाई

SVU ने इस ऑपरेशन के लिए एक विशेष धावा दल (ट्रैप टीम) का गठन किया। पुलिस उपाधीक्षक बिंदेश्वर प्रसाद और सुधीर कुमार के नेतृत्व में पूरी रणनीति तैयार की गई। टीम ने परिवादी (शिकायतकर्ता) को आवश्यक निर्देश दिए और तय योजना के अनुसार कार्रवाई का समय निर्धारित किया।

मंगलवार को मुजफ्फरपुर में पूरे प्लान के तहत जाल बिछाया गया। परिवादी को केमिकल-ट्रीटेड नोट दिए गए ताकि लेन-देन की पुष्टि वैज्ञानिक तरीके से की जा सके। जैसे ही ड्राइवर रामबाबू राय ने परिवादी से 50 हजार रुपये लिए, पहले से घात लगाए टीम के सदस्यों ने मौके पर ही दोनों आरोपियों को दबोच लिया।

मौके पर ही केमिकल टेस्ट (फेनॉलफ्थलीन परीक्षण) किया गया। परीक्षण में नोटों के संपर्क की पुष्टि हुई, जिससे रिश्वत लेने के आरोप की पुष्टि हो गई। टीम ने मौके से आवश्यक दस्तावेज और अन्य साक्ष्य भी जब्त किए।

कानूनी कार्रवाई: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज

इस मामले में पटना निगरानी थाना में कांड संख्या 06/26 दर्ज किया गया है। दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह धारा लोक सेवक द्वारा अवैध रूप से रिश्वत लेने या मांगने से संबंधित है।

फिलहाल दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह मामला अकेला है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।

एक महीने में दूसरी बड़ी गिरफ्तारी

मुजफ्फरपुर कृषि विभाग में यह एक महीने के भीतर दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले तत्कालीन जिला कृषि पदाधिकारी सुधीर कुमार को 18 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी।

उल्लेखनीय है कि उनकी गिरफ्तारी के बाद ही हिमांशु कुमार को जिला कृषि पदाधिकारी का प्रभार सौंपा गया था। लेकिन अब उनके खिलाफ भी इसी तरह के आरोप सामने आने से विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लगातार दूसरी गिरफ्तारी ने यह संकेत दिया है कि समस्या केवल व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं, बल्कि व्यवस्था के स्तर पर भी सुधार की आवश्यकता है।

लाइसेंस रद्द करने की धमकी: कारोबारियों में दहशत

खाद दुकानदारों का लाइसेंस कृषि विभाग द्वारा जारी किया जाता है। लाइसेंस रद्द होने की स्थिति में संबंधित दुकानदार का पूरा व्यापार बंद हो सकता है। ऐसे में जांच के नाम पर दबाव बनाना और रिश्वत की मांग करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि कई बार छोटे व्यवसायियों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है। हालांकि, कई दुकानदार खुलकर सामने आने से हिचकिचाते हैं, क्योंकि उन्हें प्रशासनिक प्रताड़ना का डर रहता है।

संपत्ति की जांच और आय से अधिक संपत्ति की पड़ताल

SVU की टीम अब आरोपियों की चल-अचल संपत्ति की भी जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों के आवास और अन्य ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति के संकेत मिलते हैं तो अलग से मामला दर्ज किया जा सकता है।

जांच एजेंसी बैंक खातों, निवेश, अचल संपत्ति और परिजनों के नाम पर की गई संपत्तियों की भी पड़ताल कर सकती है। यदि बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आती है, तो मामला और गंभीर हो सकता है।

Bhagalpur कलेक्ट्रेट को बम से उड़ाने की धमकी से दहला प्रशासन, हाई अलर्ट पर पुलिस; ईमेल भेजने वाले की तलाश तेज

बिहार के ऐतिहासिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर Bhagalpur में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब जिले के सबसे अहम प्रशासनिक केंद्र—समाहरणालय (कलेक्ट्रेट)—को बम से उड़ाने की धमकी मिलने की खबर सामने आई। ईमेल के जरिए भेजी गई इस सनसनीखेज धमकी ने न सिर्फ जिला प्रशासन बल्कि आम लोगों के बीच भी दहशत का माहौल पैदा कर दिया। सूचना मिलते ही प्रशासनिक महकमा हरकत में आ गया और पूरे परिसर को तत्काल प्रभाव से खाली कराकर सुरक्षा घेरे में ले लिया गया।

ईमेल से मिली धमकी, तुरंत मचा हड़कंप

जानकारी के मुताबिक, समाहरणालय के आधिकारिक ईमेल पर एक धमकी भरा संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें दावा किया गया कि कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर विस्फोटक सामग्री रखी गई है और जल्द ही बड़ा धमाका किया जाएगा। संदेश में स्पष्ट रूप से प्रशासनिक भवन को निशाना बनाने की बात कही गई थी। जैसे ही यह ईमेल संबंधित अधिकारियों की नजर में आया, पूरे सिस्टम में अफरा-तफरी मच गई।

धमकी की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल सूचित किया गया। कुछ ही मिनटों में पुलिस बल, बम निरोधक दस्ता (BDDS), डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई। एहतियातन पूरे कलेक्ट्रेट परिसर को खाली करा लिया गया और वहां मौजूद कर्मचारियों, अधिकारियों व आम नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया।

चप्पे-चप्पे की तलाशी, सील किया गया परिसर

सुरक्षा के मद्देनजर समाहरणालय के सभी प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए गए। परिसर के अंदर और बाहर पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई। हर आने-जाने वाले व्यक्ति की सघन तलाशी ली जाने लगी। पार्किंग में खड़ी गाड़ियों की जांच की गई, फाइलों के ढेर, कमरों, शौचालयों, सीढ़ियों, छतों और यहां तक कि झाड़ियों तक को खंगाला गया।

बम निरोधक दस्ते ने अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से संदिग्ध स्थानों की जांच की। डॉग स्क्वायड की टीम ने भी विस्फोटक की मौजूदगी का पता लगाने के लिए पूरे परिसर का निरीक्षण किया। कई घंटों तक चले इस सर्च ऑपरेशन के दौरान प्रशासनिक भवन के आसपास का इलाका पूरी तरह पुलिस छावनी में तब्दील रहा।

वरिष्ठ अधिकारी मौके पर, खुद कर रहे निगरानी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। डीएसपी ट्रैफिक और शहरी क्षेत्र के डीएसपी ने सर्च ऑपरेशन की कमान संभाली। पूरे अभियान की निगरानी उच्च स्तर पर की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब तक पूरे परिसर की पूरी तरह से जांच नहीं हो जाती और ‘क्लीन चिट’ नहीं मिल जाती, तब तक अलर्ट जारी रहेगा।

सिविल कोर्ट के बाद अब कलेक्ट्रेट निशाने पर

गौरतलब है कि हाल के दिनों में सरकारी संस्थानों और अदालतों को धमकी भरे ईमेल भेजने का सिलसिला बढ़ा है। कुछ दिन पहले भागलपुर सिविल कोर्ट को भी इसी तरह बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। अब सीधे कलेक्ट्रेट को निशाना बनाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

पिछले दो सप्ताह के दौरान बिहार के कई जिलों में अदालतों और सरकारी दफ्तरों को ईमेल के जरिए धमकियां मिलने की घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में जांच के बाद धमकी झूठी पाई गई, लेकिन प्रशासन कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं है।

साइबर सेल सक्रिय, ईमेल भेजने वाले की तलाश

धमकी भरे ईमेल की जांच के लिए पुलिस की साइबर सेल को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। तकनीकी टीम ईमेल के स्रोत, आईपी एड्रेस और सर्वर लोकेशन का पता लगाने में जुटी है। प्राथमिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि यह किसी असामाजिक तत्व की शरारत भी हो सकती है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को बाधित करना और भय का माहौल बनाना है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ईमेल की डिजिटल फॉरेंसिक जांच की जा रही है। यदि यह फर्जी धमकी साबित होती है, तब भी संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आईटी एक्ट और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।

आम जनता से शांति बनाए रखने की अपील

घटना के बाद जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी साझा करने से बचें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्थिति नियंत्रण में है और सुरक्षा के सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

कलेक्ट्रेट परिसर और उसके आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि का पता लगाया जा सके। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है।

कर्मचारियों में दहशत, कामकाज प्रभावित

धमकी के कारण समाहरणालय में कामकाज कुछ समय के लिए पूरी तरह ठप हो गया। कई कर्मचारी भयभीत नजर आए। आमतौर पर रोजाना सैकड़ों लोग विभिन्न प्रशासनिक कार्यों के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचते हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से प्रवेश सीमित कर दिया गया। कई जरूरी फाइलों और जनसेवा से जुड़े कार्यों में अस्थायी व्यवधान पड़ा।

हालांकि प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सुरक्षा जांच पूरी होते ही कामकाज सामान्य कर दिया जाएगा।

कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल

लगातार मिल रही धमकियों ने राज्य की कानून-व्यवस्था और साइबर सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर इस तरह की धमकियां देना नई चुनौती बनती जा रही है। ऐसे मामलों में तकनीकी दक्षता और त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है।

पुलिस की सख्त चेतावनी

पुलिस ने साफ कहा है कि इस तरह की झूठी धमकी देकर दहशत फैलाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। यदि यह किसी की शरारत साबित होती है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि राज्य स्तर पर भी इस घटना की जानकारी साझा की गई है और जरूरत पड़ने पर विशेष एजेंसियों की मदद ली जाएगी।

भारतीय शेयर बाज़ार में मिली-जुली चाल: सेंसेक्स और निफ़्टी दूसरे दिन भी बढ़त पर बंद

मुंबई, १७ फ़रवरी २०२६: भारतीय शेयर बाज़ार ने मंगलवार को बाजार खुलने पर नरमी के बीच शुरुआती गिरावट को पार करते हुए आखिरकार मजबूती दिखाई और प्रमुख सूचकांक BSE सेंसेक्स और NSE Nifty 50 ने लाभ के साथ सत्र समाप्त किया।

बाज़ार शुरुआत में कमजोरी के साथ गिरावट में खुला — निफ़्टी 50 खुलते समय लगभग 25,600 के स्तर के नीचे व्यापार कर रहा था और सेंसेक्स लगभग 200 अंकों की गिरावट के साथ लाल निशान में था।

लेकिन जैसे-जैसे दिन चला, खरीदारी का दबाव बढ़ा और निवेशकों ने मजबूत बाजार संकेतों की ओर रुख किया। अंत में निफ़्टी 50 25,700 के ऊपर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स लगभग 174 अंकों की बढ़त के साथ सकारात्मक क्षेत्र में बंद हुआ।

बाज़ार का विस्तृत प्रदर्शन

📊 मुख्य सूचकांकों की स्थिति:

  • BSE सेंसेक्स: लगभग 83,450 के स्तर पर बंद, 170+ अंकों की वृद्धि।
  • NSE Nifty 50: करीब 25,725 के स्तर पर बंद, 40+ अंकों की बढ़त।

दिन भर में बाजार ने तकनीकी समर्थन स्तर पर मजबूती पाई और निवेशक सकारात्मक रुख अपनाया, खासकर सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और PSU बैंक क्षेत्रों में लाभ के साथ।

ख़ास क्षेत्रों और शेयरों की चाल

सेक्टरल प्रदर्शन:

  • PSU बैंक इंडेक्स ने लगभग 2% की मजबूती दिखायी।
  • IT क्षेत्र में लगभग 1% की बढ़त दर्ज हुई।
  • मेटल और रियल्टी क्षेत्र हल्की गिरावट के साथ पीछे रहे।

कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयरों ने भी मजबूती दिखाई, जिसमें आडानी उद्यम, आईटीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फ़ोसिस शामिल रहे। वहीं हिंदालको इंडस्ट्रीज़, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और टाटा स्टील जैसे शेयरों ने कुछ दबाव भी देखा।

बिहार सरकार ने मांस और मछली की खुले में बिक्री पर प्रतिबंध लगाया

पटना, 17 फरवरी 2026: बिहार सरकार ने राज्य में मांस और मछली की खुले में (सड़क, फुटपाथ या खुले बाजार सहित) बिक्री पर पाबंदी लगा दी है। यह नया फैसला जनसाधारण स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक भावनाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है।

राज्य के डिप्टी चीफ मिनिस्टर विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि अब से केवल लाइसेंसधारी एवं मान्यता प्राप्त दुकानदारों को ही मांस और मछली बेचने की अनुमति होगी। बिना लाइसेंस के किसी भी प्रकार की खुले में बिक्री को कानूनी अपराध माना जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

📌 संक्षेप:
✔️ बिहार में अब सड़क, फुटपाथ या खुले स्थानों पर मांस / मछली नहीं बेची जा सकेगी।
✔️ केवल लाइसेंसधारी दुकानें ही मांस और मछली बेच सकेंगी।
✔️ नियम तोड़ने पर जुर्माना और सख्त कार्रवाई होगी।

सरकार ने यह भी कहा है कि नियम पालन न करने वाले दुकानदारों पर जुर्माना या अन्य दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे ताकि सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी और स्वास्थ्य जोखिम न फैले। साथ ही मांस की बिक्री के लिए निर्धारित मानकों और स्वच्छता नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

इस निर्णय को लागू करने के पीछे सरकार का उद्देश्य न केवल स्वच्छता और स्वास्थ्य मानकों को मजबूत करना है, बल्कि राजकीय प्रक्रियाओं के तहत व्यवसायिक गतिविधियों को भी व्यवस्थित करना है।

मुजफ्फरपुर के थाना बेला में पुलिसकर्मी पर फायरिंग, कुख्यात अपराधी गिरफ्तार

मुजफ्फरपुर, 17 फरवरी 2026 – मंगलवार को मुजफ्फरपुर के बेला थाना क्षेत्र में एक गंभीर अपराध की घटना सामने आई जहां बाइक सवार अपराधियों ने पुलिस के एक मुंशी पर गोलियां चलाईं। घटना में घायल पुलिसकर्मी को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया और मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

घटना के अनुसार, बेला थाना के मुंशी विकास कुमार सिंह पर अचानक बाइक से आए हमलावरों ने फायरिंग की। गोली पेट के पास लगी, जिससे वह भारी घायल होकर जमीन पर गिर गए। यह मामला उस समय सामने आया जब पुलिस साइबर फ्रॉड के संदिग्धों पर छापेमारी कर रही थी।

📍 घटना के मुख्य बिंदु

  • बाइक से आए अपराधियों ने पहले बिना चेतावनी फायरिंग शुरू कर दी, जिससे माहौल फौरन अफरातफरी वाला हो गया
  • घायल मुंशी विकास कुमार सिंह को जैसे-तैसे अन्य पुलिस कर्मियों ने अस्पताल ले जाया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।
  • पुलिस की त्वरित कार्रवाई में एक आरोपी पप्पू सहनी को पकड़ लिया गया, जो कुख्यात पंकज सहनी गिरोह से जुड़ा बताया जा रहा है। पिछले मामलों में वह पहले भी साइबर फ्रॉड में जेल जा चुका है
  • पकड़े गए आरोपी के पास से एक हथियार बरामद हुआ है, जिसे सबूत के रूप में जप्त कर आगे की छानबीन की जा रही है।

🛑 पुलिस का बयान

तिरहुत रेंज के डीआईजी चंदन कुमार ने बताया कि पुलिस की छापेमारी के दौरान अपराधियों ने फायरिंग की थी। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपी के बारे में पहले से जानकारी थी और अब मामले की आगे की जांच जारी है।